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  • सुल्तानपुर में बोलेरो-ट्रॉला टक्कर में 3 श्रद्धालुओं की मौत8 घायल ड्राइवर की नींद बनी हादसे का कारण

    सुल्तानपुर में बोलेरो-ट्रॉला टक्कर में 3 श्रद्धालुओं की मौत8 घायल ड्राइवर की नींद बनी हादसे का कारण


    रीवा । मध्य प्रदेश से अयोध्या रामलला के दर्शन के लिए जा रहे श्रद्धालुओं की यात्रा शुक्रवार तड़के एक दर्दनाक हादसे में तब्दील हो गई। यह हादसा उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में हुआजब श्रद्धालुओं से भरी बोलेरो वाहन की ट्रॉले से टक्कर हो गई। हादसे में तीन लोगों की मौत हो गईजबकि आठ अन्य घायल हो गए। घायलों को उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल भेजा गया हैऔर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना का संज्ञान लिया हैघायलों को बेहतर इलाज और त्वरित सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए हैं।

    हादसा कैसे हुआ

    घटना शुक्रवार सुबह करीब पांच बजे पूराकलंदर थाना क्षेत्र के कल्याण भदरसा के पास हुई। मध्य प्रदेश के श्रद्धालु अयोध्या जा रहे थेऔर जैसे ही उनकी बोलेरो वाहन कल्याण भदरसा के समीप पहुंचीड्राइवर को नींद आ गई। ड्राइवर ने सोचा था कि चाय पिलाकर थोड़ा आराम किया जा सकता हैलेकिन उसने सलाह को नजरअंदाज कर दिया। ड्राइवर की नींद के कारण उसने वाहन को विपरीत दिशा में चला दिया और सामने से आ रहे ट्रॉले में जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बोलेरो का अगला हिस्सा पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गयाजिससे तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और बाकी आठ लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

    मृतकों की पहचान और घायल श्रद्धालु

    मृतकों की पहचान मध्य प्रदेश के रीवा जिले के बेलाही रामपुर हाउस झरिया थाना सिविल लाइन क्षेत्र के रहने वाले तीन श्रद्धालुओं के रूप में हुई है। घायल श्रद्धालुओं का इलाज अस्पताल में चल रहा हैजहां उन्हें चिकित्सकों की निगरानी में रखा गया है। घायलों में से कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही हैऔर उन्हें बेहतर इलाज के लिए भर्ती किया गया है। पुलिस और चिकित्सा टीमों ने मौके पर पहुंचकर राहत कार्य शुरू किया और घायलों को अस्पताल पहुंचाया।

    मुख्यमंत्री योगी का संज्ञान

    इस दर्दनाक घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना का संज्ञान लिया और घायलों को बेहतर उपचार प्रदान करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि घायलों को किसी भी तरह की चिकित्सा सुविधा में कमी नहीं आनी चाहिए और उनके उपचार में पूरी तत्परता से काम किया जाए। साथ हीउन्होंने दुर्घटना के कारणों की जांच के आदेश भी दिए और इस तरह के हादसों को रोकने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने की बात की।

    दुर्घटना के कारण और प्रतिक्रिया

    यह हादसा ड्राइवर की लापरवाही और नींद के कारण हुआजो एक बहुत ही सामान्य लेकिन खतरनाक कारण बन सकता है। सड़क दुर्घटनाओं का एक प्रमुख कारण ड्राइवर की थकान या नींद होती हैजिसे अक्सर हल्के में लिया जाता है। यह हादसा एक बार फिर से यह दर्शाता है कि सड़क सुरक्षा के उपायों के अलावायात्रियों और चालक दोनों को सड़क पर सतर्कता और जिम्मेदारी के साथ चलना चाहिए।

    चाय पिलाकर आराम करने की सलाह भी एक अहम पहलू हैजो इस हादसे से पहले दिए गए थेलेकिन ड्राइवर ने इसे नजरअंदाज किया। अगर उस समय ड्राइवर ने थोड़ी देर के लिए आराम किया होता तो शायद यह दुर्घटना न होती।

    सुल्तानपुर में सड़क सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता

    सुल्तानपुर जैसे प्रमुख मार्गों पर जहां यात्री वाहन और भारी वाहन दोनों का आवागमन होता हैसड़क सुरक्षा और यात्री जागरूकता को बढ़ावा देने की जरूरत है। यात्री वाहनों में ड्राइवरों को सही समय पर आराम करने और जागरूक रहने के लिए ट्रेनिंग दी जानी चाहिए। साथ हीयात्री वाहन में यात्रा करने वाले सभी लोगों को सुरक्षित यात्रा की अहमियत समझानी चाहिएताकि इस प्रकार के हादसों को रोका जा सके।

    यह हादसा सड़क सुरक्षा के प्रति हमारी सतर्कता और जिम्मेदारी की अहमियत को उजागर करता है। ड्राइवर की नींद और लापरवाही के कारण तीन अनमोल जीवन चले गए और आठ लोग घायल हो गए। यह घटना हमें यह याद दिलाती है कि लंबी यात्रा पर जाने से पहले ड्राइवरों को अपनी थकान को गंभीरता से लेना चाहिए और समय-समय पर आराम करना चाहिए।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा त्वरित सहायता के निर्देश और घायलों के उपचार की दिशा में उठाए गए कदम सराहनीय हैंलेकिन हमें इस प्रकार के हादसों को रोकने के लिए और अधिक जागरूकता और कठोर कदम उठाने की आवश्यकता है।

  • बालाघाट से माओवादी आतंक का सफाया आखिरी बचे दीपक और रोहित ने किया आत्मसमर्पण

    बालाघाट से माओवादी आतंक का सफाया आखिरी बचे दीपक और रोहित ने किया आत्मसमर्पण


    बालाघाट । 90 के दशक से माओवादी आतंक का शिकार रहे बालाघाट जिले से अब माओवादी गतिविधियों का पूर्ण रूप से सफाया हो गया है। गुरुवार कोमाओवादी संगठन के आखिरी सक्रिय सदस्य दीपक और रोहित ने अपने साथियों की तरह हथियार डालकर आत्मसमर्पण कर दिया। हालांकिपुलिस की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई हैलेकिन विश्वस्त सूत्रों के अनुसारदोनों माओवादी ने कोरका स्थित सीआरपीएफ कैंप में आत्मसमर्पण किया है। पुलिस अब समर्पण से जुड़ी आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है और जल्द ही इस बारे में आधिकारिक जानकारी देने के लिए एक प्रेस कांफ्रेंस आयोजित कर सकती है।

    माओवादी समस्या और बालाघाट का इतिहास

    बालाघाट जिला मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की सीमा पर स्थित है और यहां 90 के दशक से माओवादियों की उपस्थिति काफी सक्रिय रही थी। इस क्षेत्र में माओवादी संगठन द्वारा हिंसक गतिविधियों को अंजाम दिया गयाजिससे इलाके में लाल आतंक का माहौल बन गया था। ग्रामीण क्षेत्रों में माओवादियों द्वारा भय फैलाया गयाऔर स्थानीय प्रशासन और पुलिस की ताकत को चुनौती दी गई। इसके कारण न केवल प्रशासन को कठिनाइयों का सामना करना पड़ाबल्कि नागरिकों की जिंदगी भी प्रभावित हुई थी।

    माओवादी संगठन द्वारा इलाके में कई बार हमले किए गएजिसमें पुलिसकर्मियों और नागरिकों की जानें गईं। इन घटनाओं ने क्षेत्रीय प्रशासन को माओवादी गतिविधियों को समाप्त करने के लिए गंभीर कदम उठाने पर मजबूर किया। समय-समय पर सुरक्षा बलों और माओवादी समूहों के बीच मुठभेड़ें होती रहींलेकिन अंततः यह प्रक्रिया धीरे-धीरे कमजोर पड़ती गई।

    समर्पण और माओवादी संगठन का कमजोर होना

    दीपक और रोहित का आत्मसमर्पण इस बात का प्रतीक है कि माओवादी संगठन अब बालाघाट में पूरी तरह से खत्म हो चुका है। कुछ समय पहले छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ इलाके में भी माओवादियों के एक बड़े समूह ने आत्मसमर्पण किया थाजिनमें एक करोड़ के इनामी माओवादी रामधेर भी शामिल था। इसके बाददीपक और रोहित के समर्पण की खबरें इंटरनेट मीडिया पर तेजी से फैली थींऔर यह माना जा रहा था कि बालाघाट से माओवादी गतिविधियों का अंत निकट है।

    दीपक और रोहित के समर्पण से यह साफ हो गया है कि माओवादी संगठन के अधिकांश सदस्य अब मुख्यधारा में लौट आए हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिकइन दोनों के समर्पण से माओवादी संगठन के स्थानीय नेटवर्क पर काफी असर पड़ा है। बालाघाट और आसपास के क्षेत्रों में अब माओवादी गतिविधियों का कोई विशेष खतरा नहीं रहा।

    पुलिस की रणनीति और समर्पण कार्यक्रम

    पुलिस ने माओवादियों को मुख्यधारा में लौटने का अवसर देने के लिए समर्पण योजना की शुरुआत की थीजिसके तहत माओवादी संगठनों के सदस्य आत्मसमर्पण करने पर न केवल सुरक्षा प्रदान की जाती हैबल्कि उन्हें समाज में पुनः एकीकृत करने के प्रयास भी किए जाते हैं। इस योजना के तहत कई माओवादी अब आत्मसमर्पण कर चुके हैंऔर सरकार उन्हें पुनर्वासरोजगार और शिक्षा की सुविधाएं मुहैया करा रही है।

    दीपक और रोहित का आत्मसमर्पण इस योजना का ही एक हिस्सा माना जा रहा है। पुलिस का कहना है कि यह समर्पण केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि माओवादी संगठन के लिए भी एक बड़ा संदेश है। यह दिखाता है कि समय के साथ माओवादी हिंसा का रास्ता छोड़कर शांति और सामाजिक विकास की ओर बढ़ने का समय आ गया है।

    आगे का रास्ता

    दीपक और रोहित के समर्पण के बादपुलिस प्रशासन ने सुरक्षा बलों को उच्चतम स्तर पर अलर्ट कर दिया है ताकि किसी भी प्रकार के विरोधी गतिविधियों को रोका जा सके। साथ हीपुलिस इस समर्पण को लेकर अब जल्द ही एक प्रेस कांफ्रेंस आयोजित कर रही हैजिसमें इस घटना की पूरी जानकारी दी जाएगी और आगे के कदमों पर भी चर्चा की जाएगी।

    यह कदम बालाघाट जिले के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ हैजहां माओवादी गतिविधियों का अंत हुआ है। इस समर्पण के बादप्रशासन और सुरक्षा बलों को उम्मीद है कि इस इलाके में शांति और विकास की राह खुली है। साथ हीयह अन्य माओवादी क्षेत्रों के लिए भी एक संदेश है कि अगर वे हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटते हैंतो उन्हें पुनर्वास और समर्थन मिलेगा।

  • उज्जैन में महाकाल मंदिर में फूलों की बड़ी माला पर 1 जनवरी से रोकभक्तों से की गई अपील

    उज्जैन में महाकाल मंदिर में फूलों की बड़ी माला पर 1 जनवरी से रोकभक्तों से की गई अपील


    उज्जैन ।उज्जैन के प्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में भगवान महाकाल को फूलों की बड़ी और भारी माला पहनाने पर 1 जनवरी से रोक लगा दी गई है। इस फैसले के बाद भक्तों को मंदिर प्रशासन की ओर से यह निर्देश जारी किए गए हैं कि वे अब महाकाल के लिए अजगर माला जैसी भारी माला न खरीदें। यह कदम मंदिर के संरक्षण और उसके दीर्घकालिक रखरखाव को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।

    महाकालेश्वर मंदिर प्रशासन ने भक्तों को सूचित करने के लिए मंदिर के उद्घोषणा कक्ष से लगातार उद्घोषण करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मंदिर समिति ने भक्तों से अपील की है कि वे अब केवल फूलों की छोटी माला और सीमित मात्रा में फूल अर्पित करें। यह निर्णय मंदिर के संरक्षात्मक प्रयासों का हिस्सा हैजो मंदिर परिसर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को सुरक्षित रखने के लिए लिए गए हैं।

    नए नियमों का उद्देश्य और कारण

    यह कदम मंदिर के संरक्षकों और विशेषज्ञों की सलाह पर उठाया गया है। महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के क्षरण को रोकने के लिए कुछ वर्षों पहले ही सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई थीजिसमें मंदिर की संरक्षा और उसे सुरक्षित रखने के उपायों की मांग की गई थी। इस याचिका के बादसुप्रीम कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआइ) के विशेषज्ञों की एक टीम गठित की थीजिन्होंने मंदिर के संरक्षण पर गहन अध्ययन किया और कई सुझाव दिए।

    विशेषज्ञों ने वर्ष 2019 से महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के संरक्षात्मक पहलुओं की जांच शुरू कीजिसमें यह पाया गया कि भारी फूलों की माला पहनाने से मंदिर की संरचना और विशेष रूप से ज्योतिर्लिंग का क्षरण हो सकता है। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि केवल छोटी माला और सीमित मात्रा में फूल अर्पित किए जाएंताकि मंदिर का संरचनात्मक नुकसान रोका जा सके और उसका ऐतिहासिक महत्व बरकरार रहे।

    महाकालेश्वर मंदिर का ऐतिहासिक महत्व

    महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का भारत के धार्मिक मानचित्र पर अत्यधिक महत्व है। यह मंदिर हिंदू धर्म के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसे विशेष रूप से शिव पूजा के लिए अत्यधिक पवित्र स्थान माना जाता है। यहाँ हर दिन लाखों श्रद्धालु पूजा-अर्चना करने आते हैंऔर भगवान महाकाल की उपासना में लीन रहते हैं। इस मंदिर का महत्व न केवल धार्मिक दृष्टि से हैबल्कि यह ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर भी है।

    मंदिर प्रशासन का यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि धार्मिक स्थलों के संरक्षण के लिए इस तरह के उपायों की आवश्यकता समय-समय पर महसूस की जाती रही है। खासकर जब बड़े पैमाने पर श्रद्धालु आते हैंतो छोटे-छोटे उपाय भी मंदिर की संरचना और मूर्तियों के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

    भविष्य में और क्या बदलाव हो सकते हैं

    महाकालेश्वर मंदिर प्रशासन द्वारा यह कदम केवल फूलों की माला पर रोक लगाने तक सीमित नहीं रहेगा। इसके अलावामंदिर प्रशासन द्वारा अन्य संरक्षात्मक उपायों पर भी विचार किया जा रहा है। मंदिर में होने वाली पूजा-पाठ की विधियोंश्रद्धालुओं के आने-जाने के तरीकोंऔर अन्य वस्तुओं के अर्पण की प्रक्रिया पर भी सुधार किए जा सकते हैंताकि मंदिर का संरचनात्मक क्षरण और धार्मिक महत्व दोनों की सुरक्षा की जा सके।

    मंदिर समिति का कहना है कि भविष्य में अन्य उपायों पर भी काम किया जाएगाताकि महाकालेश्वर मंदिर की भव्यता और शुद्धता बनी रहे। इस निर्णय के माध्यम से न केवल धार्मिक स्थलों के संरक्षण के लिए जागरूकता बढ़ेगीबल्कि यह समाज में पर्यावरण और संरक्षा के प्रति एक सकारात्मक संदेश भी देगा। अंतत यह कदम महाकालेश्वर मंदिर के संरक्षण और सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास हैजो धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों को बचाने के लिए आवश्यक है।

  • जबलपुर में बाबरी मस्जिद के खिलाफ प्रदर्शन: शौचालय के बाहर बाबर के नाम के लगाए गए पोस्टर

    जबलपुर में बाबरी मस्जिद के खिलाफ प्रदर्शन: शौचालय के बाहर बाबर के नाम के लगाए गए पोस्टर


    जबलपुर । जबलपुर में हिंदूवादी संगठन के कार्यकर्ताओं ने बुधवार को भंवरताल कल्चलर स्ट्रीट पर एक प्रदर्शन आयोजित किया। इस प्रदर्शन में संगठन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने बाबरी मस्जिद के पुनर्निर्माण के विरोध में नारेबाजी की और कुछ विवादास्पद पोस्टर भी लगाए। ये पोस्टर सुलभ शौचालय के बाहर लगाए गए थेजिनमें बाबर के नाम की तस्वीरें और आपत्तिजनक संदेश लिखे गए थे।

    सूचना मिलते ही ओमती थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभालने की कोशिश की। पुलिस अधिकारियों के अनुसारइस तरह के प्रदर्शन और पोस्टर का उद्देश्य धार्मिक भावनाओं को भड़काना और सामाजिक सौहार्द्र को बिगाड़ना हो सकता है। हालांकिपुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है और संबंधित कार्यकर्ताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की बात भी कही है।

    हिंदूवादी संगठन के पदाधिकारी विकास खरे ने इस प्रदर्शन को बाबरी मस्जिद के पुनर्निर्माण के खिलाफ एक विरोध के रूप में प्रस्तुत किया। खरे ने कहा कि “पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद का निर्माण किया जा रहा हैजो निंदनीय है। यह हमारे देश की सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर के खिलाफ हैऔर हम इसका विरोध करते हैं।” उनके मुताबिकइस प्रदर्शन के माध्यम से उन्होंने देशभर में बाबरी मस्जिद के पुनर्निर्माण के खिलाफ लोगों को जागरूक करने की कोशिश की है।

    इसके अलावाप्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोग जानबूझकर बाबरी मस्जिद के निर्माण को लेकर गलत संदेश फैला रहे हैं और इससे देश के हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत किया जा रहा है। उनका कहना था कि बाबरी मस्जिद का निर्माण भारत की धार्मिक एकता को कमजोर करेगाऔर इस पर बडे़ पैमाने पर विरोध होना चाहिए।

    वहींइस प्रदर्शन के बाद कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने इसका विरोध किया है। उनका मानना है कि इस प्रकार के विरोध प्रदर्शन समाज में तनाव पैदा करते हैं और धार्मिक घृणा को बढ़ावा देते हैं। कुछ लोगों ने इसे संवेदनशील मुद्दा बताया और कहा कि इस तरह के प्रदर्शन से केवल सामाजिक सौहार्द्र को नुकसान पहुंचता है।

    किसी भी प्रकार के धार्मिक या सांप्रदायिक विवाद को बढ़ावा देने वाली गतिविधियां भारत के संवेदनशील समाज के लिए खतरे का संकेत हो सकती हैं। भारत में धार्मिक और सांप्रदायिक एकता को बनाए रखने के लिए सभी समुदायों को एक दूसरे के विश्वास और भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।

    पुलिस प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और ऐसे प्रदर्शनों को रोकने के लिए सक्रिय कदम उठाए हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के विवादास्पद प्रदर्शन और पोस्टर लगाने से किसी भी समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत किया जा सकता हैजो कि कानूनन गलत है।

    अंततःयह घटनाएं यह दर्शाती हैं कि आज भी हमारे समाज में सांप्रदायिक मुद्दे अत्यधिक संवेदनशील हैंऔर इन्हें समझदारी और संयम से हल किया जाना चाहिए। हमें यह समझना होगा कि हमारी एकता और अखंडता ही हमें मजबूत बनाती हैऔर हर किसी को अपने विश्वास और विचारों का सम्मान करते हुए एक साथ जीने की कोशिश करनी चाहिए।

  • यशस्वी जायसवाल का बड़ा खुलासा: कोहली नहीं, शुभमन गिल को बताया टीम का सबसे मेहनती खिलाड़ी

    यशस्वी जायसवाल का बड़ा खुलासा: कोहली नहीं, शुभमन गिल को बताया टीम का सबसे मेहनती खिलाड़ी


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के युवा बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल ने विराट कोहली की तारीफ के बावजूद टीम का सबसे मेहनती खिलाड़ी कोई और बताया। यशस्वी ने इंटरव्यू में कहा कि शुभमन गिल अपनी फिटनेस, डाइट और स्किल्स पर लगातार मेहनत करते हैं और उनकी कंसिस्टेंसी और अनुशासन कमाल का है।

    जायसवाल ने लिया गिल का नाम

    यशस्वी ने बताया, “शुभमन गिल को मैंने बहुत करीब से देखा है। हर ट्रेनिंग सेशन और मैच में वे पूरी मेहनत लगाते हैं। उनका अनुशासन और टीम के लिए समर्पण प्रेरणादायक है। इंग्लैंड टेस्ट सीरीज में उनका बल्लेबाजी प्रदर्शन शानदार और जिम्मेदाराना था। हमें पूरा भरोसा था कि वे हर परिस्थिति में रन बनाएंगे।”

    टी20 से बाहर, लेकिन वनडे में चमके यशस्वी

    हालांकि यशस्वी फिलहाल टी20 टीम से बाहर हैं, उन्होंने साउथ अफ्रीका के खिलाफ निर्णायक वनडे में नाबाद 116 रन बनाकर भारत को 9 विकेट की आसान जीत दिलाई। पहले दो मैचों में उनके 18 और 22 रन के स्कोर के बाद यह शतक उनके लिए बड़ा आत्मविश्वास साबित हुआ।

    गिल की मेहनत, टीम के लिए प्रेरणा

    विराट कोहली की मेहनत भारतीय क्रिकेट के लिए बेंचमार्क रही है, लेकिन यशस्वी के अनुसार मौजूदा समय में शुभमन गिल की तैयारी और समर्पण उन्हें टीम का सबसे हार्डवर्किंग खिलाड़ी बनाता है।

    टीम इंडिया के युवा खिलाड़ियों में मेहनत और अनुशासन की नई मिसाल कायम करते हुए गिल और जायसवाल ने अपने प्रदर्शन से दिखा दिया कि भारतीय क्रिकेट का भविष्य उज्जवल है।

  • तिजोरी खोल लो! चांदी ने लगाया रिकॉर्ड ‘आग’, सोना भी महंगा – जानें आज के भाव

    तिजोरी खोल लो! चांदी ने लगाया रिकॉर्ड ‘आग’, सोना भी महंगा – जानें आज के भाव


    नई दिल्ली। घरेलू और वैश्विक बाजारों में सोना और चांदी ने निवेशकों को खुश कर दिया। खासकर चांदी ने नया ऑल-टाइम हाई 1,93,452 प्रति किलो छूकर इतिहास रच दिया। सोने की कीमत भी बढ़कर 1,30,320 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई।

    MCX पर जोरदार उछाल

    फरवरी कॉन्ट्रैक्ट वाला सोना 0.40% बढ़कर 1,30,320 रुपये प्रति 10 ग्राम हुआ।

    मार्च कॉन्ट्रैक्ट वाली चांदी 1.81% की छलांग लगाकर 1,92,148 रुपये प्रति किलो पर पहुंची।

    दिन के कारोबार में चांदी ने 1,93,452 रुपये प्रति किलो का नया ऑल-टाइम हाई भी बनाया।

    वैश्विक बाजार की चमक

    अमेरिकी सोने का फरवरी कॉन्ट्रैक्ट 1% से अधिक बढ़कर 4,271.30 डॉलर प्रति औंस पर पहुंचा। चांदी भी लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है। यह तेजी फेडरल रिजर्व द्वारा तीसरी बार ब्याज दर में कटौती के बाद देखने को मिली।

    देश के प्रमुख शहरों में सोने का भाव

    दिल्ली: 1,30,350 प्रति 10 ग्राम

    मुंबई, कोलकाता: 1,30,200

    चेन्नई: 1,31,460

    अहमदाबाद, वडोदरा: 1,30,250

    बेंगलुरु, हैदराबाद, केरल, पुणे: 1,30,200

    निवेशकों के लिए संभावनाएं

    विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितता और फेड की दर कटौती के चलते सोना और चांदी में तेजी और जारी रह सकती है। निवेशकों के लिए यह समय कीमती धातुओं में निवेश करने के लिहाज से बेहद लाभकारी माना जा रहा है।

    निष्कर्ष: चांदी ने इतिहास रचकर निवेशकों को आकर्षित किया और सोने ने भी मजबूती दिखाई। फेड की ब्याज दर में कटौती ने बाजार को नई ऊर्जा दी है, जिससे घरेलू और वैश्विक स्तर पर तेजी की संभावना बरकरार है।

  • पीएम मोदी और राष्ट्रपति मुर्मु ने प्रणब मुखर्जी को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की

    पीएम मोदी और राष्ट्रपति मुर्मु ने प्रणब मुखर्जी को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की


    नई दिल्‍ली ।
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने प्रणब मुखर्जी को आज उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने मुखर्जी को एक महान राजनेता और असाधारण विद्वत्तापूर्ण व्यक्तित्व बताते हुए कहा कि उन्होंने दशकों के सार्वजनिक जीवन में अटूट समर्पण के साथ देश की सेवा की।

    पीएम मोदी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा “प्रणब मुखर्जी को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि। वह एक महान राजनेता और असाधारण विद्वत्तापूर्ण व्यक्तित्व के धनी थे और उन्होंने दशकों के सार्वजनिक जीवन में अटूट समर्पण के साथ भारत की सेवा की। प्रणब बाबू की बुद्धिमत्ता और स्पष्ट विचार ने हर कदम पर हमारे लोकतंत्र को समृद्ध किया। यह मेरा सौभाग्य है कि इतने वर्षों तक उनके साथ संवाद करने के दौरान मुझे उनसे बहुत कुछ सीखने का अवसर मिला।”

    https://twitter.com/narendramodi/status/1998967658382024940?s=20

    राष्ट्रपति ने प्रणब मुखर्जी की जयंती पर पुष्पांजलि अर्पित की
    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज राष्ट्रपति भवन में भारत के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की जयंती पर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की।

  • दिल्ली में ईवी क्रांति! सरकार ने तैयार की EV पॉलिसी 2.0, चार्जिंग और बैटरी रीसाइक्लिंग में बड़े बदलाव

    दिल्ली में ईवी क्रांति! सरकार ने तैयार की EV पॉलिसी 2.0, चार्जिंग और बैटरी रीसाइक्लिंग में बड़े बदलाव


    नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली सरकार ने EV पॉलिसी 2.0 का मसौदा तैयार कर लिया है। नई पॉलिसी का फोकस चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, बैटरी रीसाइक्लिंग, और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने पर होगा।

    बैटरी रीसाइक्लिंग: पहली बार पूरी व्यवस्था

    नई पॉलिसी के तहत ईवी बैटरी की रीसाइक्लिंग पर खास जोर दिया गया है। ईवी बैटरी आमतौर पर 8 साल तक चलती है और उसके बाद सुरक्षित निपटान चुनौती बन जाता है। दिल्ली सरकार ने राजधानी में पहली बार बैटरी जमा करने और रीसाइक्लिंग की पूरी व्यवस्था बनाने की योजना बनाई है।

    चार्जिंग स्टेशन: हर कोने में सुविधा

    सरकार ने 2030 तक 5,000 सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन लगाने का लक्ष्य रखा है। हर स्टेशन पर 4-5 चार्जिंग पॉइंट होंगे। स्टेशन शॉपिंग मार्केट, मल्टी लेवल पार्किंग, RWAs, सरकारी ऑफिस और मुख्य मार्गों के किनारे लगाए जाएंगे। इसका उद्देश्य दिल्ली के हर कोने में भरोसेमंद और आसान चार्जिंग नेटवर्क तैयार करना है।

    नई छोटी ईवी वैन: लास्ट-माइल कनेक्टिविटी के लिए

    संकरी गलियों और भीड़-भाड़ वाले इलाकों में चलाने के लिए नई छोटी ईवी वैन की योजना है, जो 7 यात्रियों और 1 ड्राइवर के साथ चलेगी। इसके साथ ही ई-रिक्शा संचालन के लिए तय रूट बनाए जाएंगे।

    पॉलिसी लागू होने के बाद बदलाव

    राजधानी में प्रदूषण में कमी

    सार्वजनिक परिवहन की सुविधा में सुधार

    ईवी सेक्टर में निवेश और रोजगार में वृद्धि

    चार्जिंग और बैटरी रीसाइक्लिंग नेटवर्क का विस्तार

    नई ईवी वैन से रोजमर्रा की यात्रा आसान और साफ-सुथरी

    नई पॉलिसी 31 दिसंबर के बाद लागू की जाएगी। पहली ईवी पॉलिसी 2020 में लागू हुई थी, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने के कारण अब इसे अधिक व्यापक और प्रभावशाली बनाया गया है।

  • हुमायूं कबीर का ‘धमाका’: CM ममता पर सीधा हमला, बंगाल की राजनीति में भूचाल

    हुमायूं कबीर का ‘धमाका’: CM ममता पर सीधा हमला, बंगाल की राजनीति में भूचाल


    कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ खुला मोर्चा खोलते हुए घोषणा की कि वह 2026 विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी के सामने सीधी चुनौती पेश करेंगे।

    कबीर ने दावा किया कि न तो टीएमसी और न ही बीजेपी बहुमत पा पाएंगी। उन्होंने कहा कि उनकी नई पार्टी 135 सीटों पर चुनाव लड़कर किंगमेकर बनेगी और सत्ता की चाबी उनके हाथ में होगी। “अगला मुख्यमंत्री हमारी पार्टी के समर्थन के बिना शपथ नहीं ले पाएगा,” कबीर ने कहा।

    22 दिसंबर को नई पार्टी की घोषणा

    कबीर ने बताया कि 22 दिसंबर को वह अपनी नई राजनीतिक पार्टी लॉन्च करेंगे। उनका लक्ष्य चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाना और बंगाल की सियासत में नई शक्ति के रूप में उभरना है।

    टीएमसी का पलटवार

    टीएमसी ने कबीर के दावों को निराधार बताया। प्रदेश महासचिव अरूप चक्रवर्ती ने कहा कि कबीर की बातें केवल राजनीतिक हताशा का संकेत हैं और उनके पास कोई वास्तविक जनाधार नहीं है। टीएमसी का कहना है कि जनता अपने निर्णय में समर्थ है और किसी भी दावे को सत्ता में बदलने की संभावना कम है।

    राजनीति में नया ताप

    हुमायूं कबीर के दावे और नई पार्टी की घोषणा ने बंगाल की राजनीति में नया ताप ला दिया है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कबीर क्या वास्तव में बंगाल की राजनीति में नई शक्ति के रूप में उभर पाएंगे या टीएमसी का अनुमान सही साबित होगा।

  • रणवीर की ‘धुरंधर’ बॉक्स ऑफिस हिट, ऋतिक रोशन ने राजनीतिक पहलुओं पर उठाए सवाल

    रणवीर की ‘धुरंधर’ बॉक्स ऑफिस हिट, ऋतिक रोशन ने राजनीतिक पहलुओं पर उठाए सवाल


    नई दिल्ली। रणवीर सिंह स्टारर फिल्म ‘धुरंधर’ ने बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा दिया है। फिल्म की कहानी और सिनेमैटिक प्रस्तुति की सुपरस्टार ऋतिक रोशन ने खुले दिल से तारीफ़ की, लेकिन इसके राजनीतिक संदेश पर उन्होंने असहमति जताई।

    ऋतिक ने इंस्टाग्राम स्टोरी में लिखा कि उन्हें फिल्म की कहानी और स्क्रीन प्रेजेंटेशन शानदार लगी, लेकिन राजनीति से जुड़े पहलुओं पर वे सहमत नहीं हैं। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया।

    फिल्म को पहले ही अक्षय कुमार और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने भी सराहा। अक्षय ने इसे “बेहतरीन कहानी और शानदार प्रस्तुति” बताया, जबकि स्मृति ने इसे देश की सुरक्षा में लगे लोगों की भावनाओं को दिखाने वाली फिल्म करार दिया।

    ‘धुरंधर’ की कहानी पाकिस्तान में आतंकवाद के खिलाफ भारतीय ऑपरेशनों पर आधारित है। रणवीर सिंह ने भारतीय अंडरकवर एजेंट की भूमिका निभाई है, जबकि आर. माधवन, अर्जुन रामपाल, संजय दत्त, अक्षय खन्ना और अन्य दिग्गज कलाकार फिल्म को और प्रभावी बनाते हैं।

    फिल्म की सफलता को देखते हुए मेकर्स ने ‘धुरंधर 2’ की तैयारी भी शुरू कर दी है, जो अगले साल 19 मार्च को रिलीज़ होगी।

    हालांकि, फिल्म केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रही। इसके राजनीतिक पहलुओं को लेकर सोशल मीडिया और फिल्म जगत में बहस तेज है। ऋतिक रोशन की संतुलित प्रतिक्रिया ने इस बहस में नया आयाम जोड़ दिया है।