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  • तेजी से अमीर बनाते हैं ये 3 मूलांक! जानिए अंकशास्त्र के फास्ट अर्निंग नंबर…

    तेजी से अमीर बनाते हैं ये 3 मूलांक! जानिए अंकशास्त्र के फास्ट अर्निंग नंबर…


    नई दिल्ली ।अंकशास्त्र में हर मूलांक का स्वभाव, सोच और काम करने का तरीका अलग होता है। लेकिन कुछ मूलांक ऐसे माने जाते हैं जिनके लोगों में तेजी से पैसा कमाने की क्षमता स्वाभाविक रूप से अधिक होती है। विशेषज्ञों के अनुसार इन मूलांक वालों की ताकत किस्मत नहीं, बल्कि उनका दृष्टिकोण जोखिम उठाने का साहस और सही मौकों को पकड़ने की क्षमता होती है। आइए जानते हैं कौन-से मूलांक वाले लोग आर्थिक तरक्की की दौड़ में सबसे आगे रहते हैं।

    मूलांक 1 जन्म तिथि: 1, 10, 19, 28
    अंक 1 के जातक जन्मजात नेता माने जाते हैं। इनमें आत्मविश्वास भरपूर होता है और ये काम को शुरू करके दिखाने में यकीन रखते हैं। इनकी प्रमुख खूबियां: ,खुद पर मजबूत भरोसा,  तुरंत निर्णय लेने की क्षमता, पद, शक्ति और जिम्मेदारी पाने में तेज मूलांक 1 के लोग बिजनेस, मैनेजमेंट, मीडिया से लेकर राजनीति तक-हर जगह तेजी से नाम और पैसा कमाते हैं। इनकी तरक्की का आधार मेहनत और नेतृत्व कौशल होता है।

    मूलांक 3 जन्म तिथि: 3, 12, 21, 30

    मूलांक 3 वालों की सबसे बड़ी ताकत होती है-नेटवर्किंग और टाइमिंग। ये सही लोगों से सही समय पर जुड़ने की कला जानते हैं।  खासियत:  प्रभावी संपर्क   बनाना सही मौके  पर तुरंत कदम   उठाना प्लानिंग और रणनीति   में माहिर इनकी कमाई अक्सर अचानक बढ़ती है क्योंकि ये अवसरों को पहचानकर तुरंत फायदा उठाते हैं। शिक्षा, प्रशासन, मैनेजमेंट और सरकारी क्षेत्रों में इनकी पकड़ मजबूत होती है।

    अंकशास्त्र में मूलांक 5 को सबसे फास्ट मनी नंबर कहा जाता है। बुध ग्रह का प्रभाव इन्हें तेज सोच स्मार्ट वर्क और कम्युनिकेशन की ताकत देता है  इनकी तीन शक्तियां: जोखिम लेने में बिल्कुल नहीं डरते बाजार और ट्रेंड की तेज समझ  बदलावों के साथ तुरंत खुद को ढाल लेना  फाइनेंस, ट्रेडिंग, मार्केटिंग, सेल्स और बिजनेस-इन सभी क्षेत्रों में मूलांक 5 के लोग पैसा तेजी से कमाने के लिए जाने जाते हैं। लोगों से मजबूत रिश्ते बनाना इनकी आर्थिक सफलता का आधार होता है।

    मूलांक 6 जन्म तिथि: 6, 15, 24
    मूलांक 6 वाले लोगों में आकर्षण, रचनात्मकता और लोगों को प्रभावित करने की क्षमता बेहतरीन होती है। मुख्य खूबियां: आय के नए और रचनात्मक स्रोत खोजना  पार्टनरशिप में लाभ लोगों पर अच्छा प्रभाव यह मूलांक रियल एस्टेट, कला, फैशन, डिजाइनिंग, मीडिया और लाइफस्टाइल इंडस्ट्री में शानदार पैसा दिलाता है। इनके पास धन अक्सर सहजता से आता है।

    मूलांक 8 जन्म तिथि: 8, 17, 26
    मूलांक 8 की कमाई की शुरुआत धीमी रहती है, लेकिन एक बार लक्ष्य तय करने के बाद ये लोग गजब की स्थिर और भारी आर्थिक प्रगति करते हैं। इनकी खासियत: अनुशासन और कठोर मेहनत  लक्ष्य पर निरंतर फोकस 28 से 35 वर्ष के बाद आय में तेज वृद्धि लंबी अवधि में मूलांक 8 वाले बड़े धन का निर्माण करते हैं। प्रशासन, कानून, उद्योग और मैनेजमेंट से जुड़े क्षेत्रों में इनकी चमक ज्यादा दिखती है। अंकशास्त्र के अनुसार मूलांक 1, 3, 5, 6 और 8 वाले लोग सबसे तेज आर्थिक विकास करते हैं। हर मूलांक की सफलता की अपनी वजह है-

    मूलांक 1: नेतृत्व, मूलांक 3: नेटवर्किंग, मूलांक 5: जोखिम और स्मार्टनेस, मूलांक 6: प्रभाव और क्रिएटिविटी, मूलांक 8: मेहनत और स्थिर सफलता।  अंकशास्त्र मानता है कि इन मूलांक वालों में पैसा कमाने की क्षमता स्वभाव से ही अधिक होती है, और सही दिशा में प्रयास करें तो ये जीवन में तेजी से आर्थिक ऊंचाइयां छू लेते हैं।

  • वायर खींचना: छोटे बच्चों का खेलते समय ढीले या खुले तारों को खींचना, जिससे उन्हें ज़ोरदार झटका लगता है।

    वायर खींचना: छोटे बच्चों का खेलते समय ढीले या खुले तारों को खींचना, जिससे उन्हें ज़ोरदार झटका लगता है।


    नई दिल्ली सर्दियों के मौसम में नहाने, कपड़े धोने या घरेलू कामों में हल्के गर्म पानी की जरूरत हर घर में होती है। इसी कारण कई लोग गीजर की जगह इमर्शन रॉड का उपयोग करते हैं क्योंकि यह किफायती होने के साथ-साथ आसानी से इस्तेमाल भी हो जाता है। लेकिन इसकी कीमत कम जरूर है पर ज़रा-सी लापरवाही जान तक ले सकती है।

    हाल ही में यूपी के हाथरस जिले के नगला चौबे गांव में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जहां 3 साल की एक बच्ची खेलते-खेलते इमर्शन रॉड के तारों के संपर्क में आ गई और उसे जोरदार करंट लगा। अस्पताल पहुंचाने से पहले ही बच्ची की जान चली गई। इससे पहले देवरिया में भी एक महिला पानी गर्म करते समय करंट की चपेट में आकर मौत का शिकार हो गई थी। ऐसे कई हादसे हर साल होते हैं, जिनकी वजह सिर्फ इमर्शन रॉड के गलत या असावधान इस्तेमाल होती है। इसलिए आज जरूरत की खबर में हम समझेंगे-इमर्शन रॉड कितना खतरनाक हो सकता है इसे सुरक्षित तरीके से कैसे इस्तेमाल करें, और खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

    इमर्शन रॉड क्या होता है और कैसे काम करता है?
    इमर्शन रॉड एक पोर्टेबल इलेक्ट्रिक हीटिंग डिवाइस है, जो स्टेनलेस स्टील या कॉपर की कॉइल से बना होता है। इसका एक सिरा पानी में डाला जाता है और दूसरा प्लग के जरिए बिजली से जुड़ता है। जैसे ही बिजली प्रवाहित होती है, कॉइल गर्म होकर पानी को गर्म करना शुरू कर देती है। 1000–1500 वॉट की रॉड आमतौर पर 5–10 मिनट में पानी को गर्म कर देती है। लेकिन हमेशा ध्यान रखें-रॉड हवा में चालू न हो, वरना यह ओवरहीट होकर जल सकती है। इमर्शन रॉड से होने वाले खतरे ।


    इमर्शन रॉड का सबसे बड़ा जोखिम है इलेक्ट्रिक शॉक।

    यदि रॉड में कट जंग या वायरिंग में खराबी हो तो करंट सीधे पानी में फैल सकता है। मेटल बाल्टी में रॉड का इस्तेमाल करंट लगने की संभावना को कई गुना बढ़ा देता है। रॉड को पानी में डाले बिना चालू करने पर कॉइल जल सकती है और फटने तक की नौबत आ सकती है।  ओवरहीटिंग के कारण प्लास्टिक बाल्टी पिघल सकती है, जिससे गंभीर चोट या जलने की घटना हो सकती है।

    इमर्शन रॉड का उपयोग करते समय जरूरी सावधानियां ।


    कुछ सरल नियम आपकी और आपके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं। हमेशा रॉड को पानी में डूबोकर ही स्विच ऑन करें। रॉड चालू रहते समय पानी या बाल्टी को हाथ न लगाएं।
    बच्चों को इसके पास बिल्कुल न जाने दें। मेटल बाल्टी का उपयोग बिल्कुल न करें, प्लास्टिक बाल्टी ही इस्तेमाल करें। रॉड चालू होने पर हाथ गीले न हों और न ही गीली सतह पर खड़े हों।  पानी गर्म होने के बाद पहले प्लग निकालें, फिर ही रॉड को बाहर निकालें।

    अगर करंट लग जाए तो क्या करें?

    सबसे पहले घर का मेन स्विच ऑफ करें। प्रभावित व्यक्ति को हाथ से छूकर न बचाएं। लकड़ी या प्लास्टिक की किसी वस्तु से अलग करें। व्यक्ति बेहोश हो तो तुरंत CPR दें और एम्बुलेंस बुलाएं।
    करंट का झटका दिल की धड़कन रोक सकता है, इसलिए मेडिकल सहायता तत्काल जरूरी है।

    इमर्शन रॉड खरीदते समय किन चीजों पर ध्यान दें? 

    ISI या BIS सर्टिफिकेशन जरूर देखें। यह सुरक्षा मानकों की पुष्टि करता है। वायर की गुणवत्ता मजबूत होनी चाहिए। पतला या ढीला वायर दुर्घटना की वजह बनता है। पावर रेटिंग 1000–1500 वॉट घरेलू उपयोग के लिए पर्याप्त है। मटेरियल स्टेनलेस स्टील या कॉपर की रॉड ज्यादा सुरक्षित और टिकाऊ होती है। थ्री-पिन प्लग और वाटरप्रूफ हैंडल होना चाहिए। इंडिकेटर लाइट से पता चलता है कि रॉड चालू है या नहीं। भरोसेमंद ब्रांड और कम-से-कम एक साल की वारंटी देखें। ऑनलाइन यूजर रिव्यू पढ़कर प्रोडक्ट की विश्वसनीयता जरूर जांचें।

    इमर्शन रॉड की सफाई और देखभाल ।


    हर 10–15 दिनों में कॉइल पर जमी सफेद परत को साफ करें। इसके लिए रॉड को नींबू के रस या सिरके में 20–30 मिनट भिगो दें और फिर ब्रश से हल्के हाथ से साफ करें। रॉड को हमेशा सूखा करके ही स्टोर करें और समय-समय पर प्लग तथा वायर की जांच करते रहें। कुछ आम सवाल-संक्षिप्त जवाब रॉड को चालू छोड़कर कहीं न जाएं-यह बेहद खतरनाक है। रॉड बिना पानी के चालू करना बिल्कुल गलत है। स्विच ऑफ करने के बाद 10 सेकंड रॉड को पानी में रहने दें। मेटल बाल्टी में रॉड कभी न इस्तेमाल करें। प्लास्टिक बाल्टी सुरक्षित है लेकिन ओवरहीटिंग से बचें।पुरानी रॉड को हर सीज़न शुरू होने से पहले टेक्नीशियन से चेक कराएं।थोड़ी सतर्कता और सही तरीके से उपयोग आपकी सुरक्षा सुनिश्चित करता है। इमर्शन रॉड सुरक्षित है बस सावधानी अनिवार्य है।
  • सावधान! बंद कमरे में साइलेंट किलर बन सकता है रूम हीटर:12 ज़रूरी सेफ्टी टिप्स जो आपकी जान बचा सकते हैं, बता रहे हैं विशेषज्ञ।

    सावधान! बंद कमरे में साइलेंट किलर बन सकता है रूम हीटर:12 ज़रूरी सेफ्टी टिप्स जो आपकी जान बचा सकते हैं, बता रहे हैं विशेषज्ञ।


    नई दिल्ली/ सर्दियों में ठंड से बचने के लिए लोग कमरे गर्म रखने के कई तरीके अपनाते हैं। हीटर, ब्लोअर या गैस स्टोव-ये सभी तुरंत गर्माहट तो देते हैं, लेकिन कई बार यही आराम जानलेवा भी बन जाता है। पिछले साल नोएडा में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई थी क्योंकि वे गैस हीटर चालू छोड़कर सो गए थे। कमरे में वेंटिलेशन न होने से कार्बन मोनोऑक्साइड जमा हुई और देखते ही देखते स्थिति भयावह हो गई। जम्मू–कश्मीर में भी ऐसा ही एक हादसा हुआ, जहां हीटर से निकली जहरीली गैस ने पूरे परिवार की जान ले ली।

    अक्सर लोग मान लेते हैं कि हीटर नुकसान नहीं करते, लेकिन सच यह है कि अगर इनका इस्तेमाल सही तरीके से न किया जाए तो ये धीरे-धीरे सेहत के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं। डॉक्टर बताते हैं कि हीटर से निकलने वाली सूखी हवा और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी गैसें शरीर के रेस्पिरेटरी सिस्टम पर गहरा असर डालती हैं। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की एक रिपोर्ट के अनुसार, जिन नवजात शिशुओं को हीटर वाले कमरे में रखा गया उनमें से 88% बच्चों में सांस लेने में दिक्कत, तेज खांसी और स्किन की समस्या पाई गई।

    हीटर शरीर को सबसे ज्यादा कैसे नुकसान पहुंचाते हैं?

    विशेषज्ञों का कहना है कि सबसे पहला नुकसान कमरे की नमी खत्म होने से होता है। लगातार चलने वाले हीटर हवा को तेजी से सुखा देते हैं। इसका सीधा असर नाक, गले और त्वचा पर पड़ता है। सूखी हवा रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट को चुभने लगती है, जिससे खांसी, छींक, साइनस, एलर्जी और अस्थमा के लक्षण उभर सकते हैं। आंखें भी सूखने लगती हैं और जलन या कंजक्टिवाइटिस जैसी परेशानी हो सकती है। लंबे समय तक हीटर के संपर्क में रहने पर कुछ मामलों में ब्लड प्रेशर अस्थिर हो सकता है और स्ट्रोक जैसी गंभीर स्थिति का खतरा बढ़ जाता है।

    कार्बन मोनोऑक्साइड क्यों इतना बड़ा खतरा है?

    गैस हीटर या कोयले जैसे ईंधन से चलने वाले उपकरण कार्बन मोनोऑक्साइड CO नामक जहरीली, रंगहीन और गंधहीन गैस छोड़ते हैं। यही इसकी सबसे बड़ी खासियत और खतरनाक पहलू है-आपको पता ही नहीं चलेगा कि हवा में जहर बढ़ रहा है। बंद या सील कमरे में यह गैस जमा होकर शरीर में ऑक्सीजन की कमी कर देती है। नतीजे में सिरदर्द, उलझन, कमजोरी, मतली, चक्कर जैसे लक्षण दिखने लगते हैं। अगर समय रहते वेंटिलेशन न मिले तो व्यक्ति बेहोश भी हो सकता है और जान जाने का खतरा सबसे ज्यादा होता है।

    क्या छोटे बच्चों या नवजातों के कमरे में हीटर सुरक्षित है?

    विशेषज्ञ इसका सीधा जवाब नहीं देते हैं। नवजातों की त्वचा बेहद नाजुक होती है और सूखी हवा उनकी स्किन को तुरंत ड्राई करके लाल चकत्ते और जलन पैदा करती है। उनकी नाक भी जल्दी सूख जाती है जिससे उन्हें सांस लेने में तकलीफ होने लगती है। लम्बे समय तक हीटर वाले कमरे में रहने पर बच्चों में रेस्पिरेटरी इंफेक्शन की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

    सर्दी में आदर्श कमरे का तापमान कितना होना चाहिए?

    ठंड से बचना जरूरी है, लेकिन कमरे को बहुत गर्म रखना भी सेहत के लिए हानिकारक है। डॉक्टरों का सुझाव है कि बेडरूम का तापमान लगभग 18°C और लिविंग रूम का तापमान 21°C रखना सबसे सुरक्षित माना जाता है। इससे शरीर को आराम मिलता है, ब्लड सर्कुलेशन ठीक रहता है और नींद की गुणवत्ता पर भी कोई बुरा असर नहीं पड़ता।

    हीटर का इस्तेमाल करते समय किन बातों का खास ध्यान रखें?

    सबसे महत्वपूर्ण बात-कमरा कभी पूरी तरह बंद न रखें। थोड़ा बहुत हवा का रास्ता खुला छोड़ें ताकि ताजी हवा आती रहे और ऑक्सीजन का स्तर संतुलित बना रहे। हीटर से हवा जल्दी सूखती है, इसलिए कमरे में पानी से भरा एक बर्तन रख देना नमी बनाए रखने का एक आसान और सुरक्षित तरीका है। ध्यान रखें यह बर्तन हीटर के ऊपर न रखें।

    कुछ आम सवालों के आसान और ज़रूरी जवाब

    – क्या सेंट्रल हीटिंग साइनस बढ़ा सकती है?
    हाँ। लगातार गर्म और सूखी हवा नाक के अंदरूनी हिस्से को सुखा देती है, जिससे साइनस ब्लॉकेज और इंफेक्शन की संभावना बढ़ जाती है।

    – क्या रेडिएटर से सांस की समस्या हो सकती है?
    रेडिएटर कमरे की हवा गर्म करते समय धूल के कणों को उपर उठा देते हैं। ये कण सांस के जरिए अंदर जाते हैं जिससे अस्थमा या एलर्जी वाले लोगों की तकलीफ बढ़ सकती है।

    – क्या बहुत ठंडे कमरे में रहना भी हानिकारक है?
    बिल्कुल। अधिक ठंडे कमरे में शरीर का तापमान कम होने लगता है जिससे हाइपोथर्मिया, शivering और ब्लड प्रेशर में भारी उतार-चढ़ाव का खतरा होता है।

    – हीटर इस्तेमाल करते समय सबसे सामान्य गलती क्या है?
    पूरी रात या लंबे समय तक हीटर को बंद कमरे में चलने देना। यह सबसे बड़ी भूल है क्योंकि इससेऑक्सीजन की कमी होती है और कार्बन मोनोऑक्साइड का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ सकता  है सर्दियों की ठिठुरन से बचना जरूरी है लेकिन गर्मी पाने की जल्दबाज़ी में स्वास्थ्य से खिलवाड़  बिल्कुल नहीं करना चाहिए। थोड़ी सी सावधानी, सही वेंटिलेशन और तापमान का ध्यान रखकर आप सर्दियों को आरामदायक, सुरक्षित और सेहतमंद बना सकते हैं।

  • फिटनेस में सफलता पाने के लिए 'मतलबी' बनना है जरूरी जानिए क्यों

    फिटनेस में सफलता पाने के लिए 'मतलबी' बनना है जरूरी जानिए क्यों

    नई दिल्ली । आजकल की तेज़-तर्रार ज़िंदगी में हम अक्सर अपनी सेहत को नज़रअंदाज कर देते हैं लेकिन अगर आप फिट रहना चाहते हैं, तो कुछ आदतें हैं जिन्हें अपनाना जरूरी है। इन्हीं आदतों के बारे में हम बात करेंगे, जो न सिर्फ आपकी शारीरिक स्वास्थ्य को बल्कि मानसिक संतुलन को भी बेहतर बनाए रखने में मदद करती हैं

    खाने की टेबल पर ना कहना सीखें

    हम भारतीय अपनी मेहमाननवाजी के लिए प्रसिद्ध हैं और अक्सर खाना खाने के दौरान हमारे आसपास के लोग हमें कुछ अतिरिक्त खाने के लिए दबाव डालते हैं। अगर आप डाइट पर हैं या आपका पेट भर चुका है तो भी आपको हमेशा ‘ना’ कहना सीखना होगा। इससे लोग भले ही थोड़े नाराज़ हो जाएं, लेकिन जब वे आपकी फिटनेस देखेंगे तो यही वही लोग होंगे जो आपकी तारीफ करेंगे। आपके खाने की प्लेट पर क्या जाएगा, यह पूरी तरह से आपके नियंत्रण में होना चाहिए, न कि किसी और के। अगर आपको सचमुच कुछ नहीं चाहिए तो मुस्कुराते हुए और विनम्रता से मना कर दें। यह छोटी सी आदत आपकी फिटनेस को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद करेगी।

    अपने मी टाइम से कोई समझौता न करें

    फिटनेस की दुनिया में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आप अपने वर्कआउट को सबसे पहले अपनी प्राथमिकता बनाएं। अक्सर हम किसी इमरजेंसी या सामाजिक कारणों की वजह से अपने फिटनेस रूटीन को छोड़ देते हैं लेकिन यह आदत धीरे-धीरे हमारी सेहत पर असर डालने लगती है। आपको यह समझना होगा कि जब आप अपने वर्कआउट का समय निकालते हैं, तो वह सिर्फ आपका है। उस समय को दुनिया की किसी भी चीज़ से समझौता न करें। अगर आप दिन में सिर्फ 45 मिनट या 1 घंटा अपने लिए निकालते हैं तो यह समय सिर्फ आपके शरीर और मानसिक स्थिति के लिए है। इस दौरान फोन को साइलेंट पर रखें, दूसरों से दूर रहें और अपने शरीर और मन को फिटनेस में समर्पित करें।

    अपनी ऊर्जा को बचाना सीखें

    फिटनेस का मतलब सिर्फ शारीरिक सेहत नहीं होता, बल्कि मानसिक सेहत भी बहुत मायने रखती है। अगर आप हर समय दूसरों की समस्याओ गॉसिप या नेगेटिव बातों में उलझे रहते हैं तो इसका असर आपके मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ेगा। ज्यादा मानसिक तनाव का असर सीधे तौर पर आपके शरीर पर भी पड़ता है और यही तनाव पेट की चर्बी बढ़ाने का कारण बनता है। इसलिए यह जरूरी है कि आप अपनी ऊर्जा को सिर्फ अपने वर्कआउट और खुश रहने में लगाएं न कि दूसरों की समस्याओं या गॉसिप में। यह एक स्वस्थ मानसिकता अपनाने की आदत बनानी चाहिए। अपनी ऊर्जा को उन चीज़ों पर लगाएं जो आपको अच्छा महसूस कराती हैं न कि उन बातों पर जो आपकी सेहत पर नकारात्मक असर डालती हैं।

    थकान होने पर प्लान कैंसिल करें

    हमारे समाज में अक्सर यह होता है कि हम अपनी सेहत से ज्यादा दूसरों की भावनाओं को प्राथमिकता देते हैं। अगर आपका शरीर थका हुआ है और आपको आराम की जरूरत है तो बिना किसी झिझक के अपने सोशल प्लान्स को कैंसिल कर दें। यह ज़रूरी नहीं कि हर बार दोस्तों को खुश करने के लिए आप बाहर जाएं। कभी-कभी एक दिन घर पर रहकर रेस्ट करना आपके शरीर के लिए ज्यादा फायदेमंद हो सकता है। आराम से ही आप सही तरीके से रिकवर हो सकते हैं और फिर अगले दिन बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। अपने शरीर की सुनें क्योंकि जब आप उसे आराम देंगे तो वह आपको वह परिणाम देगा जो आप चाहते हैं।

    फिटनेस एक संजीदा और निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। यह न सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य बल्कि मानसिक संतुलन भी बनाए रखने में मदद करती है। अपने खाने की आदतों, समय प्रबंधन और मानसिक ऊर्जा को सही दिशा में लगाने से आप अपनी फिटनेस को बेहतर बना सकते हैं। अगर आप इन चार महत्वपूर्ण आदतों को अपनी दिनचर्या में शामिल करते हैं तो आप न सिर्फ अपने शरीर को फिट रखेंगे बल्कि मानसिक रूप से भी स्वस्थ रहेंगे। अपनी सेहत का ध्यान रखें क्योंकि यह आपका सबसे बड़ा संपत्ति है।

  • अब नहीं चलेगी थानों की मनमानी: पुलिस सेवाएँ होंगी ऑनलाइन, रियल-टाइम ट्रैकिंग की सुविधा

    अब नहीं चलेगी थानों की मनमानी: पुलिस सेवाएँ होंगी ऑनलाइन, रियल-टाइम ट्रैकिंग की सुविधा


    नई दिल्ली । बिहार में नई सरकार के गठन के बाद कानून-व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य के उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने शनिवार (6 दिसंबर) को पुलिस मुख्यालय में बहुप्रतीक्षित ‘सिटीजन सर्विस पोर्टल’ का शुभारंभ किया। सरकार का दावा है कि यह पोर्टल पुलिस प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ-साथ आम जनता को थानों की अनावश्यक भागदौड़ से मुक्त करेगा।

    नागरिकों को डिजिटल सुविधा, थानों के चक्कर से मुक्ति

    लॉन्चिंग के दौरान डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि हर आवश्यक पुलिस सेवा घर बैठे उपलब्ध हो। कई बार छोटी-छोटी जरूरतों के लिए लोगों को थानों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जहाँ देरी, मनमर्जी और परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि नया पोर्टल इस मनमानी पर रोक लगाएगा और हर प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाएगा।

    सम्राट चौधरी ने कहा,
    “अब नागरिकों को साधारण सत्यापन से लेकर शिकायत दर्ज कराने तक किसी भी काम के लिए थाने पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी और जवाबदेही तय रहेगी।”

    पोर्टल की मुख्य ऑनलाइन सेवाएँ

    सिटीजन सर्विस पोर्टल को इस तरह डिजाइन किया गया है कि आम लोग कुछ ही क्लिक में अपने महत्वपूर्ण कार्य पूरा कर सकें। इसकी प्रमुख सेवाएँ इस प्रकार हैं—

    पुलिस सत्यापन (Verification)
    नौकरी, किरायेदार, पासपोर्ट या अन्य आवश्यक कार्यों के लिए अब पुलिस वेरिफिकेशन का ऑनलाइन आवेदन किया जा सकेगा।

    ई-शिकायत (Online Complaint)
    किसी भी प्रकार की शिकायत दर्ज कराने के लिए थाने जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। नागरिक घर बैठे शिकायत फॉर्म भरकर सबमिट कर सकते हैं।

    खोया-पाया रिपोर्ट
    यदि कोई महत्वपूर्ण दस्तावेज या सामान खो जाए, तो उसकी रिपोर्ट वेबसाइट पर सीधे दर्ज की जा सकेगी।

    FIR की डिजिटल प्रक्रिया
    दर्ज की गई ऑनलाइन शिकायत संबंधित थाना को भेजी जाएगी। प्रारंभिक जांच के बाद मामला सही पाए जाने पर FIR भी ऑनलाइन दर्ज की जाएगी, जिससे प्रक्रिया तेज और पारदर्शी बनेगी।

    पोर्टल की सबसे बड़ी विशेषता: रियल-टाइम ट्रैकिंग

    पोर्टल का सबसे आकर्षक और उपयोगी फीचर है रियल-टाइम स्टेटस ट्रैकिंग। यानी नागरिक अपना आवेदन, शिकायत या सत्यापन किस चरण में है, यह तुरंत देख सकेंगे।
    इससे न केवल लोगों का समय बचेगा, बल्कि अफसरों पर भी कार्रवाई की पारदर्शिता बनाए रखने की जिम्मेदारी तय होगी।

    समय और पैसे दोनों की बचत

    पोर्टल के माध्यम से मिलने वाली डिजिटल सुविधाएँ तीन मुख्य लाभ सुनिश्चित करती हैं—

    समय की बचत: कार्यालय या थानों के शारीरिक चक्कर समाप्त।

    ऊर्जा की बचत: तनाव और परेशानी कम होगी।

    खर्च में कमी: बिना किसी एजेंट या मध्यस्थ के सीधी सेवा मिलेगी।

    सरकार का मानना है कि इन सुविधाओं से पुलिस की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही व्यापक रूप से बढ़ेगी।

    सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक और मजबूत बनाने की दिशा में कदम

    सिटीजन सर्विस पोर्टल के शुभारंभ के मौके पर डीजीपी विनय कुमार, एडीजी कुंदन कृष्णन सहित पुलिस मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। अधिकारियों ने कहा कि यह पहल बिहार में डिजिटल पुलिसिंग की दिशा में ऐतिहासिक कदम साबित होगी।

    गृह मंत्री सम्राट चौधरी लगातार यह स्पष्ट कर रहे हैं कि राज्य में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत और तकनीक आधारित बनाना सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इस पोर्टल में और भी कई सेवाएँ जोड़ी जाएँगी, जिनमें—

    महिला सुरक्षा से जुड़ी सेवाएँ

    साइबर अपराध से संबंधित ऑनलाइन सुविधा

    ट्रैफिक उल्लंघन और चालान की डिजिटल जानकारी
    जैसी महत्वपूर्ण सुविधाएँ शामिल हो सकती हैं।

    बिहार में नई उम्मीदें

    सिटीजन सर्विस पोर्टल का शुभारंभ बिहार की कानून-व्यवस्था प्रणाली में एक सकारात्मक बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
    जहाँ पहले थानों में मनमाने व्यवहार और देरी की शिकायतें आम थीं, वहीं अब डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रक्रिया तेज, सरल और पारदर्शी होगी।

    सरकार का विश्वास है कि इस पहल से न केवल पुलिस प्रशासन पर लोगों का भरोसा बढ़ेगा, बल्कि बिहार में आधुनिक और जवाबदेह शासन व्यवस्था की एक नई नींव भी रखी जाएगी।

  • शो जीतने के लिए मास्टरस्ट्रोक! तान्या मित्तल ने 75 मेट्रो स्टेशन्स को बनाया अपना प्रमोशन अड्डा

    शो जीतने के लिए मास्टरस्ट्रोक! तान्या मित्तल ने 75 मेट्रो स्टेशन्स को बनाया अपना प्रमोशन अड्डा


    नई दिल्ली। बिग बॉस 19 की ट्रॉफी पर गौरव खन्ना, प्रणित मोरे, अमल मलिक, फरहाना भट्ट और तान्या मित्तल की नजर टिकी हुई है। हर कंटेस्टेंट्स के चाहने वाले उन्हें जिताने के लिए पूरी मेहनत कर रहे हैं। तरह-तरह के हथकंडे अपनाकर वोट अपील भी कर रहे हैं। जहां प्रणित के फैंस और मराठी जनता शहर में बैनर-पोस्टर्स लगाकर उन्हें सपोर्ट में उतरी है। वहीं तान्या के फैन क्लब और फैमिली की तरफ से मेट्रो स्टेशन्स पर कब्जा जमा लिया गया है।

    सलमान खान के रियलिटी शो का 7 दिसंबर को ग्रैंड फिनाले है। और उसमें अब कुछ घंटे ही बाकी हैं। ऐसे में हर कोई जीतने-जिताने के लिए भाग रहा है। तान्या मित्तल ने दिल्ली की 75 मेट्रो स्टेशन्स पर वोट अपील करनी शुरू कर दी है। सामने आए वीडियो-फोटोज में देखने को मिल रहा है कि स्टेशन पर लगे डिस्प्ले पर तान्या ही तान्या छाई हुई हैं। उनके तमाम कटआउट्स का कोलाज है और लिखा है- वोट नाऊ।

    तान्या मित्तल का 75 मेट्रो स्टेशन्स पर कब्जा

    तान्या मित्तल के वोट अपील के वीडियोज सोशल मीडिया पर यूजर्स शेयर करके मजाक भी उड़ा रहे हैं और इसे बढ़िया मार्केटिंग स्ट्रेटजी बता रहे हैं। वहीं, कुछ ने लिखा है, ‘दिल्ली मेट्रो अब तान्या मेट्रो बन गई है।’ बता दें कि दिल्ली मेट्रो स्टेशन्स पर हद से ज्यादा भीड़ होती है और ऐसे में उस एरिया को चुनना, वाकई फायदेमंद साबित हो सकता है।

    तान्या मित्तल बनेंगी ‘बिग बॉस 19’ की विनर?
    लेटेस्ट वोटिंग ट्रेंड की बात करें तो तान्या मित्तल चौथे नंबर पर बनी हुई हैं। उनसे आगे फरहाना भट्ट, गौरव खन्ना और प्रणित मोरे हैं। ऐसे में उनका शो जीतना थोड़ा मुश्किल है। फिलहाल सबकी नजर प्रणित और गौरव पर है, जो कि क्रमश: पहले और दूसरे नंबर पर लीड कर रहे हैं। लेकिन नतीजा कुछ भी हो सकता है, इसलिए अभी से पुष्टि करना गलत होगा।

  • IndiGo का बड़ा ऐलान: फ्लाइट कैंसिल होने पर मिलेगा ऑटोमेटिक रिफंड, रीशेड्यूलिंग होगी फ्री

    IndiGo का बड़ा ऐलान: फ्लाइट कैंसिल होने पर मिलेगा ऑटोमेटिक रिफंड, रीशेड्यूलिंग होगी फ्री



    नई दिल्ली ।
    देशभर में इंडिगो की उड़ानों में भारी अव्यवस्था के बीच एयरलाइन ने यात्रियों के लिए राहत का बड़ा ऐलान किया है। इंडिगो ने 5 से 15 दिसंबर तक की सभी बुकिंग्स के लिए कैंसिलेशन और रीशेड्यूलिंग को पूरी तरह मुफ्त करने की घोषणा की है। साथ ही कैंसिल हुई सभी उड़ानों का रिफंड भी ऑटोमेटिक रूप से यात्रियों को वापस किया जाएगा जिससे उन्हें अतिरिक्त प्रक्रिया की जरूरत नहीं पड़ेगी।

    इंडिगो का संकट और राहत के कदम

    इंडिगो इस समय अपनी सबसे गंभीर परिचालन संकट का सामना कर रही है। कई उड़ानें कैंसिल हुईं, घंटों की देरी हुई और हजारों यात्री एयरपोर्ट पर फंसे रहे। सामान न मिलने की शिकायतें और लंबी कतारें भी आम हो गईं। इस हालात के मद्देनजर, एयरलाइन ने सार्वजनिक बयान जारी किया और यात्रियों से माफी मांगी। इंडिगो ने स्वीकार किया कि पिछले कुछ दिन दोनों  कंपनी और यात्रियों के लिए कठिन थे और इस संकट का हल एक दिन में नहीं हो सकता। कंपनी ने यह भी बताया कि 5 दिसंबर को सिस्टम और उड़ान शेड्यूल को रीसेट किया गया था, ताकि अगले दिन से सुधार शुरू किया जा सके।

    इंडिगो ने प्रभावित यात्रियों के लिए कई राहत उपायों का ऐलान किया। इसके तहत:

    ऑटोमेटिक रिफंड सभी कैंसिल की गई उड़ानों का रिफंड स्वतः उसी भुगतान माध्यम में वापस किया जाएगा जिससे टिकट बुक किया गया था। यात्रियों को इसके लिए किसी आवेदन की आवश्यकता नहीं होगी। फ्री रीशेड्यूलिंग 5 से 15 दिसंबर के बीच की सभी बुकिंग पर फ्री कैंसिलेशन और फ्री रीशेड्यूलिंग की सुविधा होगी। और स्नैक्स की व्यवस्था सीनियर सिटिजन के लिए लाउंज एक्सेस और महानगरों में होटल रूम और परिवहन की व्यवस्था शामिल है।

    यात्रियों से अपील

    इंडिगो ने यात्रियों से अपील की है कि वे एयरपोर्ट जाने से पहले अपनी फ्लाइट का स्टेटस वेबसाइट या मोबाइल नोटिफिकेशन से चेक करें। अगर फ्लाइट कैंसिल हो, तो एयरपोर्ट न पहुंचें। एयरलाइन ने कॉल वॉल्यूम को संभालने के लिए कस्टमर केयर की क्षमता बढ़ाई है और यात्रियों को 6 एस्काई नामक AI असिस्टेंट के जरिए रिफंड स्टेटस और रीबुकिंग की जानकारी भी उपलब्ध करवाई जा रही है।

    विकट हालात और प्रभावित यात्री

    पिछले कुछ दिनों में देशभर के एयरपोर्ट्स पर हालात बेहद चुनौतीपूर्ण रहे जिससे हजारों यात्रियों की उड़ानें प्रभावित हुईं। इस अव्यवस्था के कारण कई यात्रियों की जरूरी मेडिकल अपॉइंटमेंट्स छूट गईं छात्रों की परीक्षाएं प्रभावित हुईं और बिजनेस ट्रैवलर्स को अपनी मीटिंग्स में भारी नुकसान हुआ। इसके अलावा परिवारों को छोटे बच्चों के साथ घंटों एयरपोर्ट पर इंतजार करना पड़ा जिससे यात्री और अधिक परेशान हुए।

    इंडिगो का भविष्य और सुधार की दिशा

    इंडिगो ने स्पष्ट किया कि यह संकट तुरंत खत्म नहीं होगा लेकिन वे ऑपरेशन को सामान्य बनाने के लिए युद्धस्तर पर काम कर रहे हैं। एयरलाइन ने दावा किया कि आने वाले दिनों में उड़ानों की स्थिति धीरे-धीरे पटरी पर लौटेगी और यात्री जल्द ही सामान्य सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे। इंडिगो के इस बड़े ऐलान से लाखों यात्रियों को राहत मिली है। अब इंडिगो की पूरी कोशिश है कि वह पूरी तरह से सामान्य संचालन की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए और यात्रियों का विश्वास वापस प्राप्त करे।

    इंडिगो के इस राहत पैकेज से यात्रियों को निश्चित रूप से राहत मिली है, खासकर ऑटोमेटिक रिफंड और फ्री रीशेड्यूलिंग की सुविधा से। हालांकि इंडिगो ने स्वीकार किया है कि यह संकट एक दिन में हल नहीं हो सकता और उन्हें अपनी सेवाओं को सुधारने में कुछ समय लगेगा। यात्रियों को अभी भी फ्लाइट स्टेटस चेक करते रहना होगा, लेकिन उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में स्थिति सामान्य हो जाएगी।

  • धर्मेंद्र: 'वीरू' की मस्ती और 'सत्यकाम' का आदर्श, हर रोल में दर्शकों के दिल पर राज..

    धर्मेंद्र: 'वीरू' की मस्ती और 'सत्यकाम' का आदर्श, हर रोल में दर्शकों के दिल पर राज..


    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा के हीमैन और दर्शकों के प्रिय अभिनेता धर्मेंद्र ने आज 89 वर्ष की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कह दिया। छह दशकों से अधिक लंबे फिल्मी करियर में उन्होंने हर तरह के किरदार निभाए- रोमांटिक हीरो, जांबाज एक्शन स्टार, कॉमेडियन और सामाजिक संदेश देने वाले पात्र। उनके अभिनय में एक अलग ही जादू था जिसने हर किरदार को जीवन्त बना दिया।
    धर्मेंद्र की मौजूदगी स्क्रीन पर इतनी प्रभावशाली थी कि वह किसी भी भूमिका में सहजता और दमदार अंदाज से खुद को ढाल लेते थे। उनके फिल्मी सफर ने भारतीय सिनेमा को कई यादगार पल दिए और दर्शकों के दिलों-दिमाग में वह हमेशा जीवित रहेंगे। उनका अभिनय उनका स्टाइल और उनका करिश्मा उन्हें सिनेमा के इतिहास में अमर बना देता है। आइए जानते हैं उनके कुछ सबसे चर्चित और दमदार किरदारों के बारे में जिन्होंने दर्शकों के दिलों में गहरी छाप छोड़ी।

    शोले

    धर्मेंद्र की फिल्मी करियर की सबसे चर्चित भूमिका शोले में वीरू की रही। अमिताभ बच्चन के साथ उनकी जोड़ी ने दोस्ती और मित्रता की मिसाल पेश की। वीरू का जिंदादिल और नटखट किरदार दर्शकों के दिलों में हमेशा बसा रहेगा। फिल्म में धर्मेंद्र की ऊर्जा, ह्यूमर और एक्शन का बेहतरीन मिश्रण था, जिसने इस किरदार को भारतीय सिनेमा की सबसे यादगार भूमिकाओं में शामिल कर दिया।

    सत्यकाम
    1978 में आई फिल्म ‘सत्यकाम’ में धर्मेंद्र ने सत्यप्रिय आचार्य का किरदार निभाया। यह भूमिका सिद्धांतों और आदर्शों पर अडिग व्यक्ति की थी। धर्मेंद्र ने इस किरदार में गहन भावनात्मक और नैतिक जटिलताओं को बेहतरीन ढंग से पेश किया। उनके अभिनय ने पात्र को इतना प्रभावशाली बना दिया कि इसे भारतीय सिनेमा के क्लासिक किरदारों में गिना जाता है।

    चुपके-चुपके

    ऋषिकेश मुखर्जी के निर्देशन में बनी 1975 की फिल्म ‘चुपके-चुपके’ में धर्मेंद्र ने प्रोफेसर परिमल त्रिपाठी और प्यारे मोहन इलाहाबादी का किरदार निभाया। इस फिल्म में उनकी कॉमिक टाइमिंग सहजता और चेहरे के भाव दर्शकों को खूब प्रभावित करने वाले थे। धर्मेंद्र की यह भूमिका हिंदी सिनेमा की बेहतरीन कॉमेडी भूमिकाओं में गिनी जाती है, जिसने फिल्म को क्लासिक बनाने में अहम योगदान दिया।

    अनुपमा
    ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्म अनुपमा में धर्मेंद्र ने अशोक का किरदार निभाया। कहानी एक जिद्दी युवक और उमा के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसमें अशोक का किरदार भावनात्मक और संवेदनशील था। धर्मेंद्र ने अपने अभिनय से इसे जीवंत और प्रभावशाली बनाया। उनकी सहजता और किरदार में उतरने की क्षमता ने दर्शकों को पूरी तरह मंत्रमुग्ध कर दिया।

    फूल और पत्थर
    फूल और पत्थर में धर्मेंद्र ने युवा अपराधी शक्ति सिंह शाका की भूमिका निभाई। शाका एक विधवा महिला के लिए अपने बुरे कर्म छोड़ देता है और सुधर जाता है। इस फिल्म ने सामाजिक मान्यताओं और बदलाव की जरूरत को भी दर्शाया। धर्मेंद्र ने अपने किरदार में गहराई और संवेदनशीलता का बेहतरीन मिश्रण पेश किया।
    जॉनी गद्दार
    निर्देशक श्रीराम राघवन की फिल्म जॉनी गद्दार में धर्मेंद्र ने गैंग लीडर शेषाद्रि सेशु की भूमिका निभाई। इस फिल्म में उनका किरदार तीव्र रहस्यमय और प्रभावशाली था। धर्मेंद्र की मौजूदगी ने फिल्म में रोमांच और गहराई दोनों ही बढ़ा दिए। उनके संवाद और अभिनय का प्रभाव दर्शकों पर लंबे समय तक बना रहा।

    सीता और गीता
    फिल्म सीता और गीता में धर्मेंद्र राका के रोल में थे। इस फिल्म में उनके किरदार को खूब सराहा गया। हेमा मालिनी के डबल रोल ने कहानी में और रोचकता जोड़ दी। धर्मेंद्र की दमदार अभिनय शैली ने किरदार को दर्शकों के दिल में अमिट जगह दिलाई।

    यादों की बारात

    1973 में रिलीज हुई ‘यादों की बारात’ में धर्मेंद्र ने शंकर का किरदार निभाया। यह पहली मसाला फिल्म थी, जिसमें एक्शन, रोमांस, संगीत, अपराध और थ्रिलर सभी शैलियों का बेहतरीन मिश्रण था। धर्मेंद्र ने अपने अभिनय और स्क्रीन प्रेजेंस से इस फिल्म को भी दर्शकों के लिए यादगार बना दिया।

    धरम वीर
    मनमोहन देसाई के निर्देशन में बनी 1977 की फिल्म ‘धरम वीर’ में धर्मेंद्र ने धरम का किरदार निभाया। उनकी और जितेन्द्र की जोड़ी दर्शकों को बेहद पसंद आई। फिल्म में धर्मेंद्र ने अपने अभिनय, दमदार संवाद और स्टाइल से किरदार में जान डाल दी।

    लोफर
    फिल्म ‘लोफर’ में धर्मेंद्र ने रंजीत का किरदार निभाया। यह रोल स्टाइलिश, करिश्माई और अपराध की दुनिया में उलझा हुआ था, लेकिन दिल से नेक था। धर्मेंद्र की इस भूमिका की आलोचकों और दर्शकों दोनों ने खूब सराहना की। धर्मेंद्र ने अपने फिल्मी करियर में हर किरदार को पूरी जान और आत्मा के साथ निभाया। उनका अभिनय, उनका करिश्मा और उनकी स्क्रीन पर मौजूदगी हमेशा दर्शकों के दिलों में जीवित रहेगी। उनके जाने से हिंदी सिनेमा ने एक युग खो दिया, लेकिन उनकी यादें और फिल्मों का असर हमेशा अमिट रहेगा।

  • ध्वनि प्रदूषण और नागरिक अधिकारों के चलते याचिका खारिज

    ध्वनि प्रदूषण और नागरिक अधिकारों के चलते याचिका खारिज


    नई दिल्ली। महाराष्ट्र के गोंदिया जिले की मस्जिद गौसिया ने नमाज के दौरान लाउडस्पीकर लगाने की अनुमति की मांग की थी, लेकिन बॉम्बे उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ ने इस याचिका को खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति अनिल पंसारे और न्यायमूर्ति राज वकोड़े की पीठ ने कहा कि कोई भी धर्म लाउडस्पीकर का उपयोग करके पूजा या प्रार्थना करने को अनिवार्य नहीं मानता, इसलिए इसे मौलिक अधिकार के रूप में नहीं मांगा जा सकता।

    कोर्ट ने सुप्रीम न्यायालय के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि धर्म के पालन के लिए आवाज बढ़ाने वाले उपकरणों का उपयोग अनिवार्य नहीं है। पीठ ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता यह साबित करने में असमर्थ रहा कि लाउडस्पीकर धार्मिक अभ्यास के लिए आवश्यक है। इसलिए याचिका खारिज की जाती है।

    मामला महाराष्ट्र के गोंदिया जिले में मस्जिद गौसिया द्वारा दायर याचिका से संबंधित है। मस्जिद ने नमाज के लिए लाउडस्पीकर लगाने की अनुमति देने का अनुरोध किया था, जिसे कोर्ट ने 1 दिसंबर को खारिज कर दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि किसी भी धर्म में यह नहीं कहा गया है कि प्रार्थना दूसरों की शांति भंग करके की जाए या केवल आवाज बढ़ाने वाले उपकरणों से ही की जा सकती है।

    सुप्रीम न्यायालय के फैसलों का हवाला देते हुए पीठ ने यह भी कहा कि अन्य नागरिकों को शांत वातावरण में रहने का अधिकार है। विशेष रूप से छोटे बच्चे, बुजुर्ग, बीमार और मानसिक तनाव से ग्रस्त लोगों को इस अधिकार की रक्षा की जानी चाहिए। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि धर्म के पालन और नागरिकों के अधिकार के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।

    कोर्ट ने ध्वनि प्रदूषण के गंभीर खतरे पर भी ध्यान दिलाया। लाउडस्पीकर और अन्य तेज आवाज वाले उपकरण लगातार फाइट और फ्लाइट जैसी स्थिति पैदा कर सकते हैं, जिससे शरीर में तनाव हार्मोन जैसे कार्टिसोल और अन्य हानिकारक रसायन बढ़ सकते हैं। इससे हृदय रोग, चिड़चिड़ापन, थकान, सिरदर्द और उच्च रक्तचाप जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

    पीठ ने कहा कि केवल धार्मिक अभ्यास के नाम पर इस तरह के उपकरणों का उपयोग समाज और स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा कर सकता है। कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से कहा कि इस मुद्दे पर संवेदनशीलता दिखाई जाए और प्रभावी उपाय किए जाएँ ताकि ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सके और नागरिकों के स्वास्थ्य और शांति का संरक्षण हो।

    अदालत ने यह स्पष्ट किया कि धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार सीमित है और इसे अन्य लोगों के अधिकारों के हनन के लिए प्रयोग नहीं किया जा सकता। याचिकाकर्ता ने यह साबित नहीं किया कि लाउडस्पीकर के माध्यम से प्रार्थना करना अनिवार्य है, इसलिए न्यायालय ने याचिका को खारिज किया।

    कोर्ट का यह निर्णय धार्मिक स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों के बीच संतुलन की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने यह रेखांकित किया कि धार्मिक अभ्यास का अर्थ यह नहीं है कि अन्य लोगों की शांति और स्वास्थ्य की अनदेखी की जाए। सभी नागरिकों का शांत वातावरण में रहने का अधिकार सर्वोच्च है और इसे सुरक्षित रखना समाज और कानून की जिम्मेदारी है।

    इस तरह, बॉम्बे उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ ने मस्जिद गौसिया की याचिका खारिज करते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि धार्मिक अभ्यास के नाम पर लाउडस्पीकर का प्रयोग अनिवार्य नहीं है और न ही इसे नागरिकों के अधिकारों के विपरीत किया जा सकता है। अदालत ने राज्य सरकार से कहा कि इस तरह के मामलों में संतुलन बनाए रखना और ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करना आवश्यक है।

  • IndiGo Flight Cancellation: 6 दिसंबर को उड़ानें बहाल लेकिन पूर्ण सामान्यता में वक्त लगेगा

    IndiGo Flight Cancellation: 6 दिसंबर को उड़ानें बहाल लेकिन पूर्ण सामान्यता में वक्त लगेगा


    नई दिल्ली । 6 दिसंबर को देशभर में हवाई यात्रियों के लिए राहत की खबर आई जब IndiGo ने अपनी उड़ान सेवाएं कुछ हद तक बहाल कर दीं। हालांकि, विमानन कंपनी के ऑपरेशन अभी पूरी तरह से सामान्य नहीं हुए हैं। तकनीकी संकट के कारण कई घंटों तक उथल-पुथल रही और कई उड़ानें रद्द हो गईं। इंडिगो के अनुसार उनके ऑपरेशन को पूरी तरह से सामान्य होने में कुछ और दिन लग सकते हैं और अनुमान है कि 10 से 15 दिसंबर तक शेड्यूल स्थिर हो सकेगा।

    यात्रियों को अभी भी मुश्किलों का सामना

    उड़ानें शुरू होने के बाद भी यात्रियों की समस्याएं खत्म नहीं हुईं। कई यात्री अभी भी रिफंड की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जबकि रीबुकिंग में दिक्कतें आ रही हैं। ऐप और वेबसाइट धीमे चलने के कारण लोग अपनी टिकट अपडेट नहीं कर पा रहे हैं और उड़ानों के समय में भी लगातार बदलाव हो रहे हैं। इस वजह से यात्रियों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है और एयरपोर्ट्स और स्टेशनों पर भारी भीड़ देखी जा रही है।

    दूसरी एयरलाइनों का सहयोग

    IndiGo की परेशानियों को देखते हुए अन्य एयरलाइनों ने यात्रियों को राहत देने के लिए कदम उठाए। स्पाइसजेट ने कुछ नए रूट्स पर अतिरिक्त उड़ानें शुरू कीं जबकि एयर इंडिया ने भी भीड़ भाड़ वाले मार्गों पर अपनी फ्लाइट्स की संख्या बढ़ा दी। इसके चलते कई फंसे हुए यात्रियों को वैकल्पिक उड़ान मिल सकी जिससे उनकी परेशानी कुछ हद तक कम हुई।

    रेलवे की राहत और सरकार का नियंत्रण

    हवाई सेवाओं में गड़बड़ी का सीधा असर रेलवे पर पड़ा क्योंकि लोग ट्रेन से यात्रा करने की ओर रुख कर रहे थे। इस स्थिति को संभालने के लिए भारतीय रेलवे ने कई रूट्स पर अतिरिक्त कोच और विशेष ट्रेनें चलाईं जिससे लंबी दूरी के यात्रियों को राहत मिली। यह कदम काफी प्रभावी साबित हुआ और बड़ी संख्या में यात्री अपनी यात्रा को सुगमता से पूरा कर पाए।

    सरकार ने भी हालात की गंभीरता को समझते हुए 24 घंटे काम करने वाला कंट्रोल रूम सक्रिय कर दिया है। नागर विमानन मंत्रालय और DGCA नागरिक उड्डयन महानिदेशालय लगातार एयरलाइनों से अपडेट ले रहे हैं और यात्रियों के हित में सख्त निगरानी रखी जा रही है। मंत्रालय का मुख्य उद्देश्य किरायों में बढ़ोतरी को रोकना और उड़ानों की नियमितता को जल्दी से बहाल करना है ताकि यात्रियों को कोई नुकसान न हो।

    इंडिगो की फ्लाइट्स पर असर

    इंडिगो की उड़ानों पर गड़बड़ी के कारण तिरुवनंतपुरम चेन्नई और चंडीगढ़ जैसे प्रमुख एयरपोर्ट्स पर भी प्रभाव पड़ा। तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट पर 22 घरेलू और 4 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें तय थीं, जिनमें से छह घरेलू उड़ानें रद्द कर दी गईं। चेन्नई एयरपोर्ट पर 48 इंडिगो उड़ानें रद्द हुईं जिसमें 28 प्रस्थान और 20 आगमन शामिल थे। चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर भी 10 उड़ानें रद्द हो गईं जिससे स्थानीय यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

    आगे क्या होगा

    यात्रियों के लिए अगले कुछ दिन अहम होंगे, क्योंकि उड़ानों के समय में बदलाव संभव है और कई उड़ानें सीमित संख्या में चलाई जाएँगी। रिफंड और रीबुकिंग की प्रक्रिया में भी कुछ और समय लग सकता है, क्योंकि सिस्टम धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है। हालांकि एयरलाइन और सरकारी अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में स्थिति में सुधार होगा और यात्रियों को राहत मिलेगी।

    6 दिसंबर को इंडिगो के ऑपरेशन में आंशिक सुधार हुआ लेकिन अभी पूरी स्थिति सामान्य होने में समय लगेगा। सरकार और अन्य एयरलाइनों द्वारा उठाए गए कदमों से यात्रियों को कुछ राहत मिली है लेकिन पूरी प्रक्रिया के सामान्य होने में कुछ दिन और लग सकते हैं। ऐसे में यात्रियों को समय रहते उड़ान का शेड्यूल चेक करते रहना चाहिए और किसी भी बदलाव के लिए तैयार रहना चाहिए।