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  • BSP सुप्रीमो का सरकार पर हमला: 'अच्छे दिन' केवल कागजों पर, बहुजनों को SIR के लिए एकजुट होने को कहा

    BSP सुप्रीमो का सरकार पर हमला: 'अच्छे दिन' केवल कागजों पर, बहुजनों को SIR के लिए एकजुट होने को कहा


    नई दिल्ली/लखनऊ। बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की पुण्यतिथि महापरिनिर्वाण दिवस के अवसर पर बसपा सुप्रीमो मायावती ने बहुजन समाज की स्थिति, सामाजिक न्याय और राजनीतिक अधिकारों को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाया। उन्होंने कहा कि आज भी देश के करोड़ों बहुजन नागरिकों को वह सम्मान, समानता और अधिकार नहीं प्राप्त हुए हैं जिनकी कल्पना बाबा साहेब ने भारत का संविधान तैयार करते समय की थी।मायावती ने तीखे शब्दों में पूछा-जब बाकी क्षेत्रों में बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं तो बहुजनों के आत्मसम्मान और जीवन-सुधार से जुड़े ‘अच्छे दिन’ अब तक क्यों नहीं आए?

    दिल्ली में श्रद्धांजलि, संदेश में गंभीरता
    मायावती ने नई दिल्ली स्थित अपने आवास पर बाबा साहेब को पुष्प अर्पित किए और दो मिनट का मौन रखकर उन्हें याद किया। उन्होंने कहा कि हर साल इस दिन राष्ट्र को यह सोचना चाहिए कि क्या हम अंबेडकर के सपनों का भारत बना पाए हैं? उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस, तथा अंबेडकर जयंती जैसे अवसरों पर यह प्रश्न हमेशा उठेगा कि क्या सामाजिक न्याय पर आधारित वास्तविक समग्र और मानवीय अच्छे दिन कभी आएंगे? मायावती ने यह भी याद दिलाया कि उत्तर प्रदेश में बसपा सरकार के कार्यकाल में बहुजनों के सम्मान और सामाजिक उन्नति के लिए कई ऐसे फैसले लिए गए जो इतिहास में दर्ज हैं। उनके अनुसार जब सरकार की नीयत साफ हो और नीति स्पष्ट हो तब समाज में वास्तविक परिवर्तन संभव होता है।

    मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया SIR में सक्रिय भागीदारी का आग्रह


    महापरिनिर्वाण दिवस पर दिए गए अपने संदेश में मायावती ने बहुजन समाज से आग्रह किया कि वे SIR-मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया में सक्रियता दिखाएं। उन्होंने कहा कि बहुजन समाज की राजनीतिक शक्ति तभी प्रभावी हो सकती है जब हर योग्य व्यक्ति मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराए।उन्होंने चेताया कि कई बार नाम छूटने या गलत विवरण के कारण बहुजन समाज के लोगों को अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का पूर्ण उपयोग करने से वंचित होना पड़ता है। इसलिए SIR प्रक्रिया में भागीदारी केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि बहुजनों की राजनीतिक सशक्तिकरण का आवश्यक हिस्सा है।

    रुपये के अवमूल्यन पर चिंता

    अपने बयान में मायावती ने देश की आर्थिक स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की। खासकर रुपये के लगातार गिरते मूल्य को लेकर उन्होंने कहा कि सरकार को केवल विशेषज्ञों की सलाह पर निर्भर न रहकर स्वयं हस्तक्षेप कर स्थिति को स्थिर करने के निर्णायक कदम उठाने चाहिए। उन्होंने कहा कि आर्थिक अस्थिरता का सबसे अधिक बोझ गरीबों, मजदूरों और वंचित वर्गों पर पड़ता है-और इन्हीं वर्गों की रक्षा करने का दावा सरकारें सबसे अधिक करती हैं।

    देशभर में श्रद्धांजलि समारोह
    महापरिनिर्वाण दिवस के कार्यक्रम पूरे देश में बड़े पैमाने पर आयोजित किए गए। लखनऊ के अंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल पर सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग जुटने लगे। वहीं नोएडा के दलित प्रेरणा स्थल पर बसपा कार्यकर्ताओं अनुयायियों और आम नागरिकों का विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ा।कार्यक्रमों में बाबा साहेब के विचारों को दोहराया गया और संविधान में दिए गए सामाजिक न्याय, समान अधिकारों और अवसरों की संवैधानिक व्यवस्था को मजबूत करने के संकल्प लिए गए।नोएडा में बसपा के राष्ट्रीय समन्वयक आकाश आनंद ने भी बाबा साहेब की प्रतिमा पर फूल चढ़ाकर उन्हें याद किया और कहा कि समाज को आगे बढ़ाने के लिए संगठन की जिम्मेदारी बढ़ जाती है।

    जातिवादी राजनीति पर निशाना

    मायावती ने अपने बयान में यह भी कहा कि देश की मुख्यधारा की कई राजनीतिक पार्टियों की जातिवादी मानसिकता बहुजनों के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा है। उनके अनुसार, राजनीतिक सत्ता की मास्टर चाबी बहुजनों के हाथ में न आए इसके लिए तरह-तरह के हथकंडों का इस्तेमाल किया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब के मिशन की सच्ची पूर्ति तभी होगी जब बहुजन समाज अपनी सामूहिक शक्ति को पहचानकर लोकतांत्रिक ढंग से संगठित होगा।

    एक स्पष्ट और मजबूत संदेश

    महापरिनिर्वाण दिवस पर मायावती का यह वक्तव्य केवल श्रद्धांजलि भर नहीं बल्कि बहुजन समाज को राजनीतिक रूप से जागरूक और संगठित होने का आह्वान भी है। उनका संदेश यह स्पष्ट करता है कि आने वाले समय में सामाजिक न्याय, बहुजन अधिकार, और राजनीतिक सक्रियता पर बसपा और अधिक जोर देने वाली है।

  • एलन मस्क के AI चैटबॉट Grok में प्राइवेसी संकट: आम नागरिकों की पर्सनल डिटेल्स लीक

    एलन मस्क के AI चैटबॉट Grok में प्राइवेसी संकट: आम नागरिकों की पर्सनल डिटेल्स लीक


    नई दिल्ली । एलन मस्क की AI कंपनी AI का चैटबॉट ग्रोक हाल ही में गंभीर प्राइवेसी विवादों में फंस गया है जब यह एक गंभीर सुरक्षा खामी का शिकार हुआ। रिपोर्टों के अनुसार ग्रोक नामक AI चैटबॉट आम नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारी, जैसे कि घर के पते फोन नंबर और पारिवारिक डिटेल्स बेहद आसानी से लीक कर रहा है। यह मुद्दा खासकर तब सामने आया जब यह AI बॉट बेहद सामान्य पूछताछ पर भी यह व्यक्तिगत जानकारी साझा कर रहा था जिससे यूज़र्स की प्राइवेसी पर बड़ा खतरा मंडराया।

    ग्रोक द्वारा लीक हुई निजी जानकारी

    भविष्यवाद की एक जांच में यह पाया गया कि जो पूर्व ट्विटर प्लेटफॉर्म पर इंटीग्रेटेड है बेहद खतरनाक तरीके से निजी जानकारी का खुलासा कर रहा था। उदाहरण के तौर पर अगर कोई यूज़र किसी नाम का पता पूछता है, तो न केवल वह व्यक्ति का मौजूदा पता बता देता बल्कि कई बार पुराने पते और ऑफिस के पते भी दे देता था। इसके अलावा, कुछ मामलों में यह बॉट नाम फोन नंबर और घर के पते का विकल्प तक सीधे यूज़र को प्रदान कर रहा था। यह संकेत देता है कि इंटरनेट पर मौजूद सार्वजनिक डेटा सोशल मीडिया लिंक और डेटा-ब्रोकर प्लेटफॉर्म्स से जानकारी इकट्ठा कर रहा था और उसे बिना किसी सुरक्षा के साझा कर रहा था।

    प्राइवेसी फिल्टर की विफलता

    AI का दावा था कि में प्राइवेसी को बनाए रखने के लिए फिल्टर्स मौजूद हैं जो हानिकारक या खतरनाक जानकारी के प्रवाह को रोकने में सक्षम हैं। हालांकि रिपोर्टों के अनुसार यह फिल्टर्स पूरी तरह से विफल रहे। के इस व्यवहार की तुलना में चैटजीपीटी गूगल जेमिनी और क्लाउड जैसे अन्य प्रमुख AI मॉडल्स निजी जानकारी देने से मना कर देते हैं क्योंकि वे प्राइवेसी नियमों का पालन करते हैं। इसके विपरीत बिना किसी रोक-टोक के व्यक्तिगत जानकारी लीक कर रहा था जिससे यह साफ जाहिर होता है कि इसकी प्राइवेसी सुरक्षा प्रणाली में गंभीर कमी है।

    सामाजिक प्रभाव और खतरों का आकलन

    ग्रोक द्वारा लीक की गई जानकारी न केवल व्यक्तिगत प्राइवेसी के लिए खतरा है, बल्कि इससे बड़े स्तर पर समाज पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। यदि कोई AI सिस्टम बिना उचित सुरक्षा उपायों के निजी जानकारी लीक करता है तो यह डॉक्सिंग और स्टॉकिंग जैसी आपराधिक गतिविधियों को बढ़ावा दे सकता है। साथ ही यह उन यूज़र्स को भी जोखिम में डालता है जिनकी जानकारी बिना उनकी अनुमति के सार्वजनिक रूप से सामने आ जाती है। ऐसे मामलों में यह जरूरी है कि AI मॉडल्स की सुरक्षा और प्राइवेसी प्रणालियों को और मजबूत किया जाए ताकि इन खामियों को रोका जा सके।

    ग्रोक के द्वारा डेटा का उपयोग

    यह संभावना है कि ग्रोक इंटरनेट पर उपलब्ध सार्वजनिक डेटा का इस्तेमाल कर रहा है, जिसे सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म्स से इकट्ठा किया जाता है। यह डेटा ब्रोकर सेवाओं से भी लिया जा सकता है लेकिन ग्रोक इसे चुटकियों में जोड़कर और बिना किसी सुरक्षा उपाय के पेश कर देता है जिससे प्राइवेसी को खतरा होता है। यही नहीं इसका इस्तेमाल गलत हाथों में जाकर बड़े पैमाने पर दुरुपयोग भी हो सकता है।

    ग्रोक के प्राइवेसी कांड ने यह सवाल उठाया है कि AI चैटबॉट्स का निजी डेटा के उपयोग और सुरक्षा के मानकों पर कितना भरोसा किया जा सकता है। इसका खुलासा करने से यह स्पष्ट हुआ है कि AI कंपनियों को प्राइवेसी के लिए और भी कड़े उपायों को अपनाने की आवश्यकता है। साथ ही इन कंपनियों को अपने फिल्टर सिस्टम्स की प्रभावशीलता पर पुनः विचार करना चाहिए, ताकि इस प्रकार की घटनाओं से बचा जा सके और यूज़र्स की निजी जानकारी सुरक्षित रह सके।

  • पुस्तक में सिगरेट दिखाने को नहीं माना तंबाकू उत्पाद का प्रचार

    पुस्तक में सिगरेट दिखाने को नहीं माना तंबाकू उत्पाद का प्रचार


    नई दिल्ली। सुप्रीम न्यायालय ने शुक्रवार को अरुंधति रॉय की पुस्तक ‘मदर मैरी कम्स टू मी’ के संबंध में दायर याचिका खारिज कर दी। याचिका में पुस्तक की बिक्री, वितरण और प्रदर्शन पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया था। याचिकाकर्ता का तर्क था कि पुस्तक के आवरण पर रॉय को सिगरेट पीते हुए दिखाया गया है, जो कानून का उल्लंघन है।

    केरल के उच्च न्यायालय द्वारा जनहित याचिका खारिज होने के बाद याचिकाकर्ता राजसिम्हन ने उच्चतम न्यायालय में अपील की थी। इस मामले की सुनवाई प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने की। पीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि पुस्तक में किसी प्रकार का सिगरेट या तंबाकू उत्पाद का प्रचार नहीं किया गया है और न ही लेखक ने ऐसा करने की कोशिश की है।

    प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि रॉय एक प्रसिद्ध लेखिका हैं और उन्होंने पुस्तक में कोई ऐसा संदेश नहीं दिया है जो तंबाकू उत्पादों के प्रचार के रूप में देखा जा सके। उन्होंने कहा कि पुस्तक में चेतावनी भी दी गई है और इसे केवल पाठकों के लिए प्रकाशित किया गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शहर में किसी प्रकार की किताब की होर्डिंग नहीं लगाई गई है और यह मामला केवल पुस्तक के पाठक वर्ग तक सीमित है।

    पीठ ने यह भी कहा कि लेखक और प्रकाशक ने तंबाकू उत्पाद अधिनियम, 2003 की धारा पांच का उल्लंघन नहीं किया है। इस धारा के तहत सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों के विज्ञापन, प्रचार और प्रायोजन पर प्रतिबंध है। प्रधान न्यायाधीश ने कहा, “हमें उच्च न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं दिखता।”

    याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि पुस्तक में सिगरेट के रूप में दिखाए गए चित्र के साथ पर्याप्त चेतावनी नहीं है और डिस्क्लेमर भी बहुत छोटा है। उन्होंने कहा कि स्पष्ट नहीं है कि यह सामान्य बीड़ी है या किसी अन्य प्रकार का तंबाकू उत्पाद।

    प्रधान न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता के तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि पुस्तक, लेखक या प्रकाशक का किसी भी प्रकार के तंबाकू उत्पादों के प्रचार से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि पाठक लेखक के विचारों से असहमत हो सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इस आधार पर मुकदमा दायर किया जाए।

    अदालत ने यह स्पष्ट किया कि पुस्तक केवल लेखक के अनुभव और संस्मरण पर आधारित है और इसमें किसी प्रकार का विज्ञापन या प्रचार शामिल नहीं है। पुस्तक में दिखाई गई तस्वीरें लेखक के निजी अनुभव को दर्शाती हैं, न कि किसी उत्पाद के प्रचार के लिए बनाई गई हैं।

    इस मामले में उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट दोनों ने यह मान्यता दी कि लेखक और प्रकाशक ने किसी भी कानून का उल्लंघन नहीं किया है। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि पुस्तक पाठकों तक अपनी कहानियों और विचारों के माध्यम से पहुँचना चाहती है, न कि किसी तंबाकू उत्पाद के प्रचार के लिए।

    अदालत का यह निर्णय लेखक की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कला की स्वतंत्रता के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी को लेखक के विचार पसंद नहीं आते, तो उसके खिलाफ कानून द्वारा सीधे कार्रवाई नहीं की जा सकती।

    इस प्रकार, सुप्रीम न्यायालय ने अरुंधति रॉय की पुस्तक पर किसी भी प्रकार के प्रतिबंध को नकारते हुए याचिका खारिज कर दी। अदालत ने यह संदेश भी दिया कि पुस्तक, लेखक और प्रकाशक की जिम्मेदारी केवल पाठकों तक साहित्यिक सामग्री पहुँचाने तक सीमित है, और इसमें किसी तंबाकू उत्पाद के प्रचार का कोई तत्व नहीं है।

  • करीब एक महीने की फरारी के बाद JCP प्रमुख अमित बघेल गिरफ्तार; अग्रवाल और सिंधी समाज के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी का है गंभीर आरोप

    करीब एक महीने की फरारी के बाद JCP प्रमुख अमित बघेल गिरफ्तार; अग्रवाल और सिंधी समाज के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी का है गंभीर आरोप

     रायपुर /छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में बीते दिनों उभरे विवाद ने एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक हलचल पैदा कर दी है। जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी JCP के अध्यक्ष अमित बघेल को पुलिस ने धार्मिक और सामाजिक भावनाओं को आहत करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। उनके खिलाफ आरोप है कि उन्होंने अग्रवाल समाज के पूजनीय महाराजा अग्रसेन और सिंधी समाज के आराध्य भगवान झूलेलाल के संबंध में आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं, जिससे दोनों समुदायों में नाराज़गी और वातावरण में तनाव बढ़ गया।

    गिरफ्तारी की कार्रवाई
    देवेंद्र नगर थाना अधिकारियों के अनुसार, अमित बघेल लंबे समय से पुलिस से बचने की कोशिश कर रहे थे और कई दिनों से फरार बताए जा रहे थे। शनिवार सुबह पुलिस ने उन्हें देवेंद्र नगर थाना क्षेत्र के पारस नगर चौक से गिरफ्तार किया। थाना प्रभारी जितेंद्र असैया ने बताया कि गिरफ्तारी के बाद उन्हें स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां अदालत ने बघेल को तीन दिन की पुलिस रिमांड पर भेजने का आदेश दिया।

    मानवीय दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए अदालत ने बघेल को विशेष अनुमति दी कि वे पथरी गांव में अपनी मां के अंतिम संस्कार में शामिल हो सकें। शुक्रवार सुबह उनकी मां का निधन होने से परिवार में शोक का माहौल था और अदालत ने इस आधार पर उन्हें सुरक्षा निगरानी में अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति प्रदान की।

    मामले की पृष्ठभूमि और दर्ज प्राथमिकी
    अमित बघेल के खिलाफ विवाद नया नहीं है। इस वर्ष अक्टूबर में रायपुर के तेलीबांधा, देवेंद्र नगर और कोतवाली थानों में तीन अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की गई थीं। 26 अक्टूबर को तेलीबांधा क्षेत्र में घटी एक घटना ने इस विवाद को जन्म दिया। उस दिन छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा खंडित मिलने के बाद इलाके में तनाव फैल गया था।

    प्रतिमा के क्षतिग्रस्त होने के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान बघेल ने कथित तौर पर महाराजा अग्रसेन और भगवान झूलेलाल सहित अग्रवाल और सिंधी समाज की आस्था के प्रतीकों पर आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। पुलिस का कहना है कि इन टिप्पणियों ने दोनों समुदायों की धार्मिक और सामाजिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई जिसके बाद उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई।

    प्रतिमा खंडित होने की घटना और प्रतिक्रिया
    तेलीबांधा थाना क्षेत्र के VIP चौक स्थित राम मंदिर के पास लगी छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा में हरे रंग की साड़ी धान की बाली और आशीर्वाद की मुद्रा वाला स्वरूप था। इसके टूटने की खबर फैलते ही वहां बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और संगठन पहुंच गए। छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना तथा JCP के कार्यकर्ताओं ने इस घटना को छत्तीसगढ़ की अस्मिता और सांस्कृतिक पहचान पर हमला करार दिया।

    इसी विवाद के दौरान अमित बघेल मीडिया से बातचीत में भड़काऊ बयानों में यह सवाल उठा बैठे कि राज्य में कुछ विशेष राष्ट्रीय नेताओं की प्रतिमाओं का अपमान क्यों नहीं होता। इसी क्रम में उन्होंने महाराजा अग्रसेन और भगवान झूलेलाल के संबंध में विवादित शब्दों का प्रयोग किया, जिसने बवाल खड़ा कर दिया। बाद में पुलिस ने प्रतिमा तोड़ने के आरोप में एक मानसिक रूप से अस्थिर व्यक्ति को गिरफ्तार किया, परन्तु बघेल की टिप्पणी का असर समाज में बना रहा।

    सरकार की प्रतिक्रिया

    छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बघेल की गिरफ्तारी को कानूनन जरूरी कदम बताया। उन्होंने कहा अमित बघेल ने कई धर्म और समुदायों के बारे में अनुचित टिप्पणी की थी। उनके खिलाफ पूर्व से ही प्राथमिकी दर्ज थी और आज उन्हें गिरफ्तार किया गया है। सरकार का कहना है कि ऐसी टिप्पणियां समाज में नफरत फैलाती हैं और कानून सभी के लिए समान है।

  • दिल्ली कोर्ट में अर्जी दायर, 1978 के वोटर केस पर सोनिया गांधी पर कार्रवाई की मांग

    दिल्ली कोर्ट में अर्जी दायर, 1978 के वोटर केस पर सोनिया गांधी पर कार्रवाई की मांग


    नई दिल्‍ली । कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद सोनिया गांधी के खिलाफ वोट चोरी का मुकदमा दर्ज कराने के लिए एक शख्स ने दिल्ली के राउज़ एवेन्यू कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अपनी अर्जी में उस शख्स ने मजिस्ट्रेट कोर्टके उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें सोनिया गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश देने से साफ तौर पर मना कर दिया गया था। अर्जी में आरोप लगाया गया है कि भारतीय नागरिकता लेने से तीन साल पहले ही सोनिया गांधी का नाम मतदाता सूची में जोड़ दिया गया था।

    यह केस शुक्रवार को राउज़ एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज (PC Act) विशाल गोगने के सामने आया। जज ने इसे 9 दिसंबर को विचार के लिए लिस्ट करने का आदेश दिया है। यह क्रिमिनल रिवीजन अर्जी विकास त्रिपाठी नाम के एक व्यक्ति ने फाइल की है। त्रिपाठी ने अपनी अर्जी में एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (ACMM) वैभव चौरसिया के 11 सितंबर के आदेश को चुनौती दी है।

    1983 में भारत की नागरिक बनी थीं सोनिया
    त्रिपाठी ने आरोप लगाया है कि सोनिया गांधी का नाम 1980 में नई दिल्ली चुनाव क्षेत्र की मतदाता सूची में शामिल किया गया था, जबकि वह अप्रैल 1983 में भारत की नागरिक बनी थीं। अर्जी में त्रिपाठी ने अन्य विवरण देते हुए आरोप लगाया है कि सोनिया गांधी का नाम सबसे पहले 1980 में मतदाता सूची में शामिल किया गया था, फिर 1982 में उसे हटा लिया गया था। इसके बाद 1983 में फिर से उनका नाम मतदाता सूची में शामिल किया गया, जब वह आधिकारिक तौर पर भारत की नागरिक बन गईं।

    कुछ जाली कागजात जमा किए होंगे?
    त्रिपाठी के वकीलों ने आरोप लगाया है कि 1980 में मतदाता सूची में उनका नाम शामिल होने का मतलब है कि तब उन्होंने कुछ जाली कागजात जमा किए थे। वकीलों के मुताबिक यह एक ऐसा केस है जो दिखाता है कि एक संज्ञेय अपराध किया गया है। इससे पहले सितंबर में जज चौरसिया ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी थी कि कोर्ट ऐसी जांच नहीं कर सकता क्योंकि इससे संवैधानिक अधिकारियों को सौंपे गए क्षेत्रों में गलत तरीके से उल्लंघन होगा और यह भारत के संविधान के आर्टिकल 329 का उल्लंघन होगा।

  • सरकार का 2030 लक्ष्य: सड़क दुर्घटनाओं में मौतें और चोटें 50% तक घटाना

    सरकार का 2030 लक्ष्य: सड़क दुर्घटनाओं में मौतें और चोटें 50% तक घटाना

    नई दिल्ली। भारत में सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वालों की संख्या 2024 में 2.3 प्रतिशत बढ़कर 1.77 लाख से अधिक हो गई है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि देश में प्रतिदिन औसतन 485 लोग सड़क हादसों में अपनी जान गंवा रहे हैं। यह जानकारी केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने शुक्रवार को लोकसभा में लिखित उत्तर में दी।

    गडकरी ने कहा कि फरवरी 2020 में सड़क सुरक्षा पर आयोजित तीसरे वैश्विक मंत्री स्तरीय सम्मेलन में ‘स्टॉकहोम घोषणापत्र’ अपनाया गया था। इसके तहत 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों और चोटों को 50 प्रतिशत तक कम करने का वैश्विक लक्ष्य तय किया गया है।

    मंत्री ने बताया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, 2024 में देश में सभी प्रकार की सड़कों पर दुर्घटनाओं में मरने वालों की कुल संख्या 1,77,177 थी। इसमें ईडीएआर पोर्टल से प्राप्त पश्चिम बंगाल का डेटा भी शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि 2023 में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की पुलिस द्वारा कुल 4,80,583 सड़क हादसों की रिपोर्ट दर्ज की गई थी, जिसमें 1,72,890 लोगों की मौत हुई और 4,62,825 लोग घायल हुए।

    सड़क दुर्घटनाओं में भारत की स्थिति वैश्विक स्तर पर चिंताजनक बनी हुई है। ‘वर्ल्ड रोड स्टेटिस्टिक्स 2024’ के अनुसार, चीन में प्रति लाख आबादी सड़क दुर्घटनाओं में मौत की दर 4.3 है, अमेरिका में यह 12.76 है, जबकि भारत में यह आंकड़ा 11.89 है। यानी भारत का दर अमेरिका के बराबर करीब है और चीन से कई गुना अधिक।

    सड़क सुरक्षा सुधार के लिए सरकार ने 4-‘ई’ रणनीति अपनाई है। इसका आधार चार स्तंभ हैं: एजुकेशन (शिक्षा), इंजीनियरिंग (सड़क और वाहन दोनों की गुणवत्ता), एनफोर्समेंट (कानून का प्रवर्तन) और इमरजेंसी केयर (आपातकालीन उपचार)। इस बहुआयामी रणनीति के तहत सड़क सुरक्षा के लिए कई पहलें की गई हैं।

    शिक्षा के क्षेत्र में सरकार ने awareness कार्यक्रम और सड़क सुरक्षा पर जागरूकता अभियान चलाए हैं, ताकि लोग यातायात नियमों का पालन करें और सुरक्षित ड्राइविंग अपनाएं। इंजीनियरिंग के तहत सड़कों और वाहनों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए नए मानक तय किए गए हैं। एनफोर्समेंट के क्षेत्र में ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है, और इमरजेंसी केयर के तहत दुर्घटना के तुरंत बाद प्राथमिक उपचार और अस्पताल तक पहुँचाने की व्यवस्था को मजबूत किया गया है।

    मंत्री ने बताया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की पुलिस विभागों के सहयोग से सड़क सुरक्षा को लेकर निगरानी और आंकड़ों का विश्लेषण किया जा रहा है। इससे यह पहचानने में मदद मिलती है कि किन सड़कों और क्षेत्रों में सबसे अधिक हादसे हो रहे हैं और उन्हें सुधारने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।

    सड़क सुरक्षा को लेकर सरकार की यह पहल समय की मांग है, क्योंकि बढ़ती आबादी और वाहन संख्या के कारण सड़क हादसों में लगातार वृद्धि हो रही है। 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं में मौतों और चोटों को आधा करने का लक्ष्य एक महत्वाकांक्षी कदम है। इसके सफल होने के लिए जनता, सरकार और सड़क उपयोगकर्ताओं को मिलकर काम करना होगा।

    गडकरी ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल कानून या प्रशासन का विषय नहीं है, बल्कि यह समाज की जिम्मेदारी भी है। सुरक्षित सड़कें, सुरक्षित वाहन और सुरक्षित ड्राइविंग की संस्कृति ही सड़क दुर्घटनाओं की दर को घटा सकती है। सरकार ने इसके लिए व्यापक कार्यक्रम और योजनाएं शुरू की हैं, जिनमें स्मार्ट रोड प्रोजेक्ट, हाईवे पर CCTV निगरानी, ट्रैफिक नियमों के कड़े प्रवर्तन और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं का विस्तार शामिल है।

    सरकारी आंकड़े और वैश्विक तुलना यह दर्शाते हैं कि भारत को सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में और भी कदम उठाने की आवश्यकता है। जनता की भागीदारी और सरकारी प्रयासों के समन्वय से ही सड़क हादसों में मौत और चोटों को कम किया जा सकता है।

  • सफला एकादशी 2025: सफलता के लिए विशेष योग, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त

    सफला एकादशी 2025: सफलता के लिए विशेष योग, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त


    नई दिल्ली / सफला एकादशी 2025 15 दिसंबर को पड़ रही है; व्रत और पूजा करने से सुख-समृद्धि, सफलता और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है, अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:56 से 12:27 बजे तक है।सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। सालभर में कुल 24 एकादशी आती हैं जिनमें से कुछ शुक्ल पक्ष में और कुछ कृष्ण पक्ष में पड़ती हैं। इनमें से सफला एकादशी हर साल पौष महीने के कृष्ण पक्ष में मनाई जाती है। इस वर्ष, सफला एकादशी 15 दिसंबर 2025 को पड़ रही है।

    सफला एकादशी का महत्व
    सफला एकादशी के दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति के सभी कार्य सफल होते हैं और उसे जीवन में सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इस दिन की पूजा से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और धन-समृद्धि की प्राप्ति के योग बनते हैं। इस अवसर पर मनोकामनाओं की पूर्णता की भी मान्यता है।

    सफला एकादशी 2025 तिथि
    वैदिक पंचांग के अनुसार, पौष कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 14 दिसंबर 2025 की रात 08:47 बजे शुरू होकर 15 दिसंबर 2025 की रात 10:08 बजे समाप्त होगी। इसलिए पंचांग के अनुसार 15 दिसंबर को ही सफला एकादशी का व्रत रखा जाएगा।

    सफला एकादशी 2025 शुभ मुहूर्त
    सफला एकादशी के दिन अभिजीत मुहूर्त भी बन रहा है। यह मुहूर्त दोपहर 11:56 बजे से शुरू होकर 12:27 बजे तक रहेगा। इस समय में व्रत रखने और पूजा-अर्चना करने का विशेष लाभ माना जाता है।

    सफला एकादशी पर जाप करने योग्य मंत्र-
    व्रत और पूजा के दौरान निम्नलिखित मंत्रों का जाप करने से विशेष पुण्य और सफलता प्राप्त होती है-

    ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
    ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीवासुदेवाय नमः
    ॐ नमो नारायणाय

    लक्ष्मी-विनायक मंत्र –
    दन्ताभये चक्र दरो दधानं,
    कराग्रगस्वर्णघटं त्रिनेत्रम्।
    धृताब्जया लिंगितमब्धिपुत्रया
    लक्ष्मी गणेशं कनकाभमीडे।।

    पूजा विधि और लाभ-
    सफला एकादशी पर व्रत रखने से भगवान विष्णु की कृपा हमेशा बनी रहती है। इस दिन की पूजा से हर क्षेत्र में सफलता, धनलाभ और सम्मान की प्राप्ति होती है। जिनकी कोई विशेष मनोकामना होती है, उसे बोलकर या मन ही मन कहकर पूरी होने की मान्यता है।

    विशेष जानकारी-

    इस साल अभिजीत मुहूर्त में पूजा-अर्चना करना और उपवास रखना विशेष शुभ माना गया है। सोलह वर्षों तक व्रत का महत्व बढ़ता है और यह दिन हर भक्त के लिए आध्यात्मिक एवं आर्थिक उन्नति का अवसर लेकर आता है।

  • बीएलओ की अचानक मौत के 72 घंटे में पत्नी को मिली नौकरी, शिक्षा विभाग ने दिखाई संवेदनशीलता

    बीएलओ की अचानक मौत के 72 घंटे में पत्नी को मिली नौकरी, शिक्षा विभाग ने दिखाई संवेदनशीलता


    हाथरस ।
    उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के सिकंदराराऊ क्षेत्र में एक अनूठी और संवेदनशील पहल देखी गई जब एक बीएलओ बूथ लेवल अधिकारी की अचानक हुई मौत के बाद प्रशासन ने सिर्फ 72 घंटे में उनकी पत्नी को नौकरी दे दी। यह कदम प्रशासन की तत्परता और संवेदनशीलता को दर्शाता है जिसने न केवल विधवा के परिवार की सहायता की बल्कि सरकारी सेवा में उनके जीवन को स्थिरता भी प्रदान की।

    क्या हुआ था

    सिकंदराराऊ के मोहल्ला ब्राह्मणपुरी मटकोटा निवासी कमलकांत शर्मा नावली लालपुर स्थित संविलियन विद्यालय में सहायक अध्यापक थे। इसके साथ ही उन्हें एसआईआर सामाजिक आर्थिक और जातिगत जनगणना कार्य के तहत बीएलओ बूथ लेवल अधिकारी के रूप में भी तैनात किया गया था। 2 दिसंबर को जब वे अपनी ड्यूटी पर जाने के लिए घर से निकलने की तैयारी कर रहे थे, तो अचानक उन्हें चक्कर आ गया और वे गिर पड़े। उन्हें तुरंत अलीगढ़ के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां इलाज के दौरान उनकी दुखद मौत हो गई।

    प्रशासन की तत्परता

    कमलकांत शर्मा की असामयिक मृत्यु के बाद उनके परिवार के सामने आर्थिक संकट आ गया। प्रशासन ने इस दुखद स्थिति को समझा और तुरंत कदम उठाए। सिर्फ 72 घंटे के भीतर, बेसिक शिक्षा विभाग ने उनकी पत्नी को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में उच्च प्राथमिक विद्यालय सिकंदराराऊ में नौकरी प्रदान की। यह नियुक्ति उनकी पत्नी को सहायक शिक्षक के तौर पर दी गई जिससे उन्हें परिवार का पालन-पोषण करने में मदद मिल सके। इस फैसले ने न केवल एक परिवार को सहारा दिया, बल्कि यह भी सिद्ध कर दिया कि प्रशासनिक प्रणाली जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से निभाती है विशेषकर ऐसी स्थितियों में जब किसी कर्मचारी के परिवार को अचानक संकट का सामना करना पड़े।

    शिक्षा विभाग का योगदान

    बेसिक शिक्षा विभाग ने इस संवेदनशील मामले में त्वरित कार्रवाई की। उन्होंने कमलकांत शर्मा की पत्नी को सरकारी सेवा में नियुक्त किया, जिससे उन्हें सरकारी नौकरी का लाभ मिला और परिवार को एक स्थिर आय का स्रोत प्राप्त हुआ। यह कदम निश्चित रूप से अन्य अधिकारियों के लिए एक आदर्श बन सकता है, जो अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए इस तरह के संवेदनशील मामलों में तत्परता से काम करने की प्रेरणा देता है।

    भविष्य में और क्या किया जा सकता है

    इस मामले से यह भी स्पष्ट होता है कि सरकारी विभागों को ऐसे मामलों में और अधिक संवेदनशीलता के साथ काम करना चाहिए। जहां एक तरफ परिवार को सरकारी नौकरी देने का कदम सराहनीय है वहीं दूसरी तरफ अन्य प्रशासनिक सहायता, जैसे वित्तीय मदद और शिक्षा की व्यवस्था, भी उन्हें दी जा सकती है ताकि परिवार को पूरी तरह से सशक्त किया जा सके। यह कदम एक मिसाल पेश करता है कि किस तरह से सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के बाद उनके परिवार को समर्थन देने के लिए प्रशासन को जल्दी और संवेदनशीलता से कदम उठाना चाहिए।

    सिकंदराराऊ में बीएलओ कमलकांत शर्मा की असामयिक मौत के बाद प्रशासन द्वारा उनकी पत्नी को 72 घंटे के भीतर नौकरी देने का कदम निश्चित ही सराहनीय है। यह प्रशासन की संवेदनशीलता और तत्परता का परिचायक है। सरकारी विभागों द्वारा इस तरह की त्वरित और प्रभावी कार्रवाई से यह संदेश जाता है कि मुश्किल समय में प्रशासन अपने कर्मचारियों के परिवारों के साथ खड़ा होता है।

  • 40,000 पैकेट बिरयानी की तैयारी, मस्जिद कार्यक्रम को लेकर इलाक़े में उत्साह

    40,000 पैकेट बिरयानी की तैयारी, मस्जिद कार्यक्रम को लेकर इलाक़े में उत्साह


    बहरामपुर । TMC के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर (Humayun Kabir) ने पश्चिम बंगाल (West Bengal) के मुर्शिदाबाद जिले में ‘बाबरी जैसी मस्जिद’ (Babri Mosque) बनाने का ऐलान कर बड़ा बखेड़ा खड़ा कर दिया है। शुक्रवार को कलकत्ता हाईकोर्ट (Calcutta High Court) ने भी मस्जिद के निर्माण में हस्तक्षेप करने के इनकार कर दिया है। इसके बाद अब शिलान्यास समारोह को भव्य बनाने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। समारोह स्थल को एक विशाल कार्यस्थल में बदल दिया गया है जहां शनिवार को बाबरी जैसी मस्जिद का शिलान्यास होगा। जानकारी के मुताबिक समारोह में सऊदी अरब के मौलवियों के आने की संभावना है। वहीं यहां हजारों लोगों के लिए भोजन तैयार किया जा रहा है। अधिकारियों ने समारोह से पहले सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।

    इससे पहले TMC ने हुमायूं कबीर को पार्टी से निकाल दिया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बिना नाम लिए इस तरह के आयोजनों के खिलाफ चेतावनी भी जारी की है। हालांकि कबीर राजनीतिक घटनाक्रम और प्रशासनिक दबाव से बेपरवाह दिखे। कबीर ने पत्रकारों से कहा है कि शनिवार को मोरादघी के पास 25 बीघा जमीन पर लगभग तीन लाख लोग इकट्ठा होंगे। उन्होंने यह भी बताया कि कई राज्यों के धार्मिक नेताओं ने अपनी उपस्थिति की पुष्टि की है। कबीर ने बटुआ, “सऊदी अरब से दो काजी सुबह कोलकाता हवाई अड्डे से एक विशेष काफिले में पहुंचेंगे।”

    60-70 लाख रुपए खानपान में खर्च
    राज्य के एकमात्र उत्तर-दक्षिण मुख्य राजमार्ग एनएच-12 के किनारे स्थित विशाल आयोजन स्थल पर जोर-शोर से तैयारियां चल रही हैं। भीड़ के लिए शाही बिरयानी बनाने के लिए मुर्शिदाबाद की सात खानपान एजेंसियों को अनुबंध दिया गया है। विधायक के एक करीबी सहयोगी ने बताया कि मेहमानों के लिए लगभग 40,000 पैकेट और स्थानीय लोगों के लिए 20,000 पैकेट बनाए जा रहे हैं, जिससे सिर्फ भोजन का खर्च 30 लाख रुपए से अधिक हो जाएगा। उन्होंने कहा, “आयोजन स्थल का बजट लगभग 60-70 लाख रुपए होगा।”

    मंच पर 400 मेहमानों के बैठने की व्यवस्था
    धान के खेतों के ऊपर बना मुख्य मंच इस विशाल आयोजन का सबसे स्पष्ट प्रतीक बन गया है। करीबी सहयोगी ने बताया कि 150 फुट लंबा और 80 फुट चौड़ा यह मंच लगभग 400 मेहमानों के बैठने की क्षमता के साथ 10 लाख रुपए की अनुमानित लागत से बनाया जा रहा है। आयोजकों ने बताया कि लगभग 3,000 स्वयंसेवक भीड़ को नियंत्रित करने, मार्गों को नियंत्रित करने और NH-12 पर अवरोधों को रोकने के लिए तैनात किए गए हैं। इनमें से 2,000 ने शुक्रवार सुबह से ही काम शुरू कर दिया था।

    कुरान की आयतों के साथ शुरू होगा समारोह
    कबीर ने कहा कि समारोह पूर्वाह्न 10 बजे कुरान की आयतों के साथ शुरू होगा, जिसके बाद दोपहर में आधारशिला समारोह होगा। उन्होंने कहा, “औपचारिकताएं दो घंटे पहले शुरू हो जाएंगी। पुलिस के निर्देशानुसार शाम चार बजे तक मैदान खाली कर दिया जाएगा।”

    3000 पुलिसकर्मी तैनात
    इस बीच शुक्रवार को कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देश के बाद जिला पुलिस ने सार्वजनिक व्यवस्था और NH-12 पर निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए हुमायूं कबीर की टीम के साथ कई दौर की चर्चा की। जिला पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बेलडांगा और रानीनगर थाना क्षेत्र में लगभग 3,000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया जाएगा।

  • आलोचना के बीच प्रशंसा: “ट्रंप नोबेल पुरस्कार के हकदार” – पूर्व अधिकारी का बयान

    आलोचना के बीच प्रशंसा: “ट्रंप नोबेल पुरस्कार के हकदार” – पूर्व अधिकारी का बयान


    नई दिल्‍ली । भारत-रूस कूटनीति को लेकर अमेरिका के पूर्व पेंटागन अधिकारी(Pentagon officials) ने अपने ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप(Donald Trump) पर कटाक्ष किया है। उन्होंने कहा है कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन(Vladimir Putin) को नई दिल्ली में जो गर्मजोशी और सम्मान मिला, उसका श्रेय रूस नहीं बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को जाता है। माइकल रुबिन (Michael Rubin)के अनुसार ट्रंप ने ही भारत और रूस को एक-दूसरे के और करीब धकेला, और इसके लिए वे नोबेल पुरस्कार के हकदार हैं।

    ट्रंप को दिया ‘नोबेल’ का सुझाव
    मीडिया से बातचीत में रुबिन ने कहा कि पुतिन की भारत यात्रा मॉस्को के नजरिए से बेहद सकारात्मक रही और भारत द्वारा दिया गया सम्मान दुनिया में कहीं और देखने को नहीं मिला। उन्होंने कहा- मैं यह तर्क दूंगा कि भारत और रूस को जिस तरह डोनाल्ड ट्रंप ने एक-दूसरे के करीब लाया है, उसके लिए वे नोबेल पुरस्कार के हकदार हैं।

    रुबिन ने यह भी सवाल उठाया कि पुतिन की यात्रा के दौरान हुए समझौतों में से कितने वास्तविक सहयोग में तब्दील होंगे और कितने ऐसे हैं जो भारत की उस नाराजगी से उपजे हैं जो हाल के समय में ट्रंप के रवैये के कारण बनी है- चाहे वह पीएम मोदी के प्रति उनका व्यवहार हो या भारत के व्यापक हितों के प्रति उदासीनता।

    अमेरिका में दो धाराएं- ट्रंप का दावा’ बनाम ‘ट्रंप की अक्षमता
    रुबिन ने बताया कि अमेरिका में इस घटनाक्रम को लेकर दो बिल्कुल अलग नजरिए हैं। उन्होंने कहा, यदि आप डोनाल्ड ट्रंप के समर्थक हैं, तो आप इसे ‘मैंने कहा था न’ वाले चश्मे से देखते हैं। लेकिन यदि आप उन 65 प्रतिशत अमेरिकियों में से हैं जो ट्रंप को पसंद नहीं करते, तो यह सब डोनाल्ड ट्रंप की भारी कूटनीतिक अक्षमता का नतीजा दिखता है। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रंप ने भारत-अमेरिका संबंधों को पीछे धकेल दिया और कई फैसले ऐसे लिए जिन पर पाकिस्तान, तुर्किये और कतर जैसी देशों की चापलूसी या कथित प्रलोभनों का असर दिखा।

    ट्रंप के दौर की तीखी आलोचना: ‘रणनीतिक नुकसान’
    रुबिन के अनुसार वॉशिंगटन के कई विशेषज्ञ इस बात से हैरान हैं कि ट्रंप ने कैसे अमेरिका–भारत की बढ़ती रणनीतिक एकजुटता को कमजोर कर दिया। उन्होंने कहा कि ट्रंप इसे कभी स्वीकार नहीं करेंगे, बल्कि भारत–रूस निकटता को अपनी विदेश नीति की दूरदर्शिता साबित करने में इस्तेमाल करेंगे।

    ‘भारत को नसीहत देना बंद करे अमेरिका’
    पुतिन द्वारा भारत को निरंतर ऊर्जा आपूर्ति देने के वादे पर टिप्पणी करते हुए रुबिन ने कहा कि अमेरिका भारत की ऊर्जा जरूरतों और रणनीतिक अनिवार्यताओं को समझने में लगातार विफल रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीयों ने नरेंद्र मोदी को इसलिए चुना है कि वे भारतीय हितों का प्रतिनिधित्व करें। भारत दुनिया की सबसे आबादी वाला देश है, जल्द ही तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा, और उसे ऊर्जा चाहिए। अमेरिका को भारत को लेक्चर देना बंद कर देना चाहिए।

    उन्होंने अमेरिका की आलोचना करते हुए कहा कि स्वयं अमेरिका भी तब रूस से ऊर्जा खरीदता है जब विकल्प सीमित हों। रुबिन ने सवाल उठाया कि यदि अमेरिका नहीं चाहता कि भारत रूसी ईंधन खरीदे, तो वह भारत को सस्ते दाम पर और पर्याप्त मात्रा में ईंधन उपलब्ध कराने के लिए क्या कर रहा है? उन्होंने तीखे अंदाज में कहा- यदि हमारे पास कोई विकल्प नहीं है, तो सबसे अच्छा यह होगा कि हम चुप रहें, क्योंकि भारत को अपनी सुरक्षा और जरूरतों को पहले रखना ही पड़ेगा।