60–120 किमी प्रति घंटा की स्पीड से हो रहा ट्रायल रन
AFC सिस्टम क्यों जरूरी था?
किराए पर अंतिम मंथन-मिनिमम 20 और मैक्सिमम 80 रुपए
परियोजना के फेज-6 किलोमीटर अभी, 16 किलोमीटर बाद में
भोपाल बन रहा है मेट्रो सिटी

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परियोजना के फेज-6 किलोमीटर अभी, 16 किलोमीटर बाद में

एक और चौंकाने वाला मामला तब सामने आया जब एक फेल हुए पटवारी को बाद में परीक्षा में पास दिखा दिया गया। इस घोटाले में पटवारियों को अनुचित तरीके से राजस्व निरीक्षक के पद पर पदोन्नति दिलवाने का मामला सामने आया है जिससे यह साफ हो गया कि परीक्षा में नियमों का उल्लंघन कर परिणामों में हेराफेरी की गई थी।
आरोपितों की गिरफ्तारी और आगे की कार्रवाई
इस घोटाले के आरोप में 10 अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। इनमें से दो आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है और उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। बाकी आठ आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस जल्द ही कदम उठाने वाली है। ईओडब्ल्यू ने इस घोटाले में संलिप्त 18 से ज्यादा लोगों की पहचान की है और माना जा रहा है कि जांच के दौरान और भी बड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
घोटाले में पति-पत्नी की संलिप्तता
एक मामले में पति-पत्नी ने साथ बैठकर परीक्षा दी जिससे नकल करने में सुविधा हो। इस तरह की अनियमितताओं ने यह स्पष्ट कर दिया कि परीक्षा और उसके परिणामों को प्रभावित करने के लिए बड़ी साजिश रची गई थी। इस मामले में आरोपितों ने प्रमोशन परीक्षा के पूरे प्रक्रिया को धोखाधड़ी से प्रभावित किया और निर्दोष उम्मीदवारों को नुकसान पहुंचाया।
बडी कार्रवाई की संभावना
आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ईओडब्ल्यू की जांच अभी जारी है और इस मामले में कई और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। इसके अलावा, ईओडब्ल्यू द्वारा पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ के बाद और भी जानकारी मिल सकती है जिससे घोटाले के पीछे की सच्चाई और सामने आ सकती है। छत्तीसगढ़ में इस बड़े घोटाले ने राज्य सरकार के सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं और अब जनता और प्रशासन दोनों को यह देखने का इंतजार है कि इस मामले में जिम्मेदार लोगों को सजा दी जाती है या नहीं।
राजस्व निरीक्षक प्रमोशन परीक्षा घोटाले ने यह साबित कर दिया है कि कुछ लोग सरकारी पदों पर पहुंचने के लिए गलत रास्ते अपनाने से नहीं चूकते। अब यह देखना होगा कि ईओडब्ल्यू इस मामले में कितनी बड़ी कार्रवाई करती है और घोटाले में शामिल सभी लोगों को सजा मिलती है। ऐसे घोटाले न केवल प्रशासन की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं बल्कि जनता के विश्वास को भी हिला देते हैं।

चोरी की घटना और पुलिस जांच
भंवरकुआं थाना क्षेत्र के टीआई के मुताबिक माणिकबाग रोड निवासी आरती सांघी ने घर में हुई चोरी की रिपोर्ट पुलिस में दर्ज कराई। आरती की गीता भवन नाम से गिफ्ट की दुकान है और घर में चोरी किए गए ब्रेसलेट को उसकी सास ने उन्हें उपहार के तौर पर दिया था। इस ब्रेसलेट की कीमत करीब पांच लाख रुपये थी और यह हीरे से जड़ा हुआ था। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की और क्राइम ब्रांच को मामले की जांच सौंप दी।
गुरुवार को आरती द्वारा रिपोर्ट दर्ज कराए जाने के बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता से जांच शुरू की। सबसे पहले पुलिस ने शक के आधार पर घर के घरेलू नौकर गणपत पुत्र जोगड़ा कामता को गिरफ्तार किया। गणपत ने पूछताछ के दौरान बताया कि उसने चोरी किया हुआ ब्रेसलेट राहुल वाघले नाम के एक व्यक्ति को बेचा था जो उसे धानगली इलाके में स्थित सुनार दिलीप इंदरलाल रघुवंशी के पास ले गया था। इसके बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए राहुल व दिलीप को भी गिरफ्तार कर लिया और ब्रेसलेट बरामद कर लिया।
तीन गिरफ्तार ब्रेसलेट बरामद
पुलिस ने अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है गणपत कामता जो घरेलू नौकर था राहुल वाघले दलाल और दिलीप इंदरलाल रघुवंशी सुनार । इन तीनों के खिलाफ चोरी धोखाधड़ी और अन्य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने बताया कि ब्रेसलेट चोरी करने के बाद गणपत ने राहुल की मदद से उसे सुनार दिलीप को बेच दिया था जिससे उन्हें ब्रेसलेट आसानी से बिक गया। आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने ब्रेसलेट को भी जब्त कर लिया है, जिसे अब आरती सांघी को सौंप दिया जाएगा। पुलिस ने यह भी कहा कि यह एक संगठित चोरी का मामला था जिसमें घरेलू नौकर के साथ-साथ अन्य लोग भी शामिल थे।
वृद्धा से चेन लूटने वाले तीन बदमाश गिरफ्तार
इसके अलावा पुलिस ने एक और बड़ी सफलता हासिल की है। राजेंद्रनगर पुलिस ने तीन बदमाशों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने एक वृद्धा से दो तोला वजनी सोने की चेन लूटी थी। यह घटना स्कीम-108 क्षेत्र में हुई थी जब कंचन पाटीदार नाम की वृद्धा से चेन छीन ली गई थी। पुलिस ने आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों में प्रेम शिंदे आकाश परिहार और रियान रशीद शाह शामिल हैं। इन तीनों पर आरोप है कि उन्होंने वृद्धा को घेर कर उसका आभूषण लूटा था।
पुलिस की कार्रवाई और सुरक्षा को लेकर चिंताएं
इन दोनों घटनाओं ने इंदौर में बढ़ती आपराधिक गतिविधियों की चिंता को और बढ़ा दिया है। हालांकि पुलिस ने सख्त कार्रवाई की है, लेकिन शहर में चोरी और लूट जैसी वारदातों में वृद्धि देखी जा रही है। स्थानीय लोग और व्यापारी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं और प्रशासन से बेहतर सुरक्षा इंतजामों की मांग कर रहे हैं। इंदौर पुलिस का कहना है कि वह लगातार आपराधिक गतिविधियों पर नज़र बनाए हुए हैं और शहर में अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। साथ ही, पुलिस ने नागरिकों से भी अपील की है कि वे अपनी सुरक्षा को लेकर सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।
इंदौर में घरेलू नौकर द्वारा की गई चोरी और बाद में अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी ने यह साबित कर दिया कि चोरी की घटनाएं कभी भी किसी से भी हो सकती हैं। पुलिस ने अपनी तेज़ी से कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया और चोरी किए गए ब्रेसलेट को बरामद किया। वहीं दूसरी ओर वृद्धा से चेन लूटने वाले तीन बदमाशों की गिरफ्तारी भी एक महत्वपूर्ण सफलता मानी जा रही है। अब, यह देखना होगा कि पुलिस आगे इन वारदातों पर किस तरह नियंत्रण पाती है और शहरवासियों को सुरक्षित रखने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

इस घटना के बारे में जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने की प्रक्रिया शुरू कर दी है ताकि चोरों की पहचान की जा सके। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि एटीएम में कितने पैसे थे। घटना के बाद से स्थानीय लोग और व्यवसायी भी हैरान हैं और इलाके में सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
पुलिस की लापरवाही और गश्त व्यवस्था पर सवाल
कटनी जिले में इस तरह की वारदात को लेकर पुलिस की गश्त व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। पुलिस द्वारा रात्रि गश्त को लेकर कई बार सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों की बात की जाती रही है, लेकिन इस घटना ने उन दावों को धराशायी कर दिया है। घटना स्थल की सुरक्षा में किसी भी तरह के गार्ड की तैनाती नहीं की गई थी जिससे यह स्पष्ट हो रहा है कि एटीएम की सुरक्षा को लेकर कोई ठोस व्यवस्था नहीं थी। इसके साथ ही एटीएम के आसपास की लाइटिंग भी कमजोर थी, जिससे रात के समय में अंधेरे का फायदा चोरों ने उठाया।
एटीएम की सुरक्षा में चूक
इस वारदात के दौरान यह बात भी सामने आई कि एटीएम की सुरक्षा को लेकर बैंक की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया गया था। एटीएम में पैसे भरने या उसकी निगरानी के लिए कोई गार्ड तैनात नहीं था और ना ही एटीएम की सुरक्षा के लिए कोई अन्य ठोस कदम उठाए गए थे। सुरक्षा गार्ड की गैरमौजूदगी ने चोरों को एटीएम उखाड़ने का मौका दिया। इस घटना के बाद बैंक अधिकारियों की ओर से यह आश्वासन दिया गया कि वह मामले की गंभीरता से जांच करेंगे और भविष्य में सुरक्षा के और बेहतर इंतजाम किए जाएंगे।
पुलिस की प्रतिक्रिया और जांच
कटनी पुलिस अब इस मामले की जांच में जुटी हुई है। पुलिस ने इलाके के आसपास के सभी सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके अलावा, पुलिस चोरों के खिलाफ सुराग जुटाने के लिए इलाके में पूछताछ भी कर रही है। हालांकि अब तक कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा है। पुलिस के आला अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में जल्द ही कार्रवाई की जाएगी और दोषियों को पकड़ा जाएगा।
स्थानीय लोगों की चिंता
इस घटना के बाद से कटनी जिले के स्थानीय लोग भी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने पुलिस और प्रशासन से मांग की है कि एटीएम और अन्य सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा को लेकर ठोस कदम उठाए जाएं। स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि अगर इस तरह की वारदात थाने के पास हो सकती है तो अन्य जगहों पर क्या स्थिति होगी? इससे इलाके में डर और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।
कटनी में माधव नगर थाने के पास स्थित बैंक ऑफ महाराष्ट्र का एटीएम उखाड़कर ले जाने की घटना ने न केवल पुलिस की गश्त व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं बल्कि यह भी दिखाया है कि इस तरह की घटनाओं के लिए पर्याप्त सुरक्षा इंतजामों की आवश्यकता है। इस घटना से यह भी साफ हो गया है कि एटीएम और अन्य सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा में अधिक सतर्कता की आवश्यकता है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके। पुलिस को अब इस मामले को गंभीरता से लेकर चोरों को पकड़ने के लिए हर संभव प्रयास करना होगा ताकि इलाके में लोगों का विश्वास फिर से बहाल किया जा सके।

उत्कृष्ट सेवाओं के लिए सम्मान
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर अदम्य साहसिक कार्य सम्मान पुरस्कार देने की घोषणा की और बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों और जवानों को सम्मानित भी किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा-हर परिस्थिति, हर चुनौती में सबसे आगे रहने वाला अनुशासित समूह-होम गार्ड है। राज्य को गर्व है कियह बल हर जिम्मेदारी को निष्ठा से निभाता है।
10 रेस्क्यू टीमों को 51 हजार का पुरस्कार
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने बताया कि 2014 में NDRF के गठन के बाद से यह बल लगातार बेहतरीन काम कर रहा है। इंदौर में NDRF और SDRF के जवानों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिसका उपयोग आने वाले उज्जैन सिंहस्थ में किया जाएगा। सीएम ने घोषणा की कि 10 रेस्क्यू टीमों को 51-51 हजार रुपए का पुरस्कार दिया जाएगा।
होम गार्ड्स के लिए स्थायी आवास के आदेश
जवानों की आवासीय जरूरतों को देखते हुए मुख्यमंत्री ने होम गार्ड कर्मियों के लिए स्थायी आवास निर्माण के निर्देश भी जारी किए। उन्होंने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि हर होम गार्ड को सुरक्षित और स्थायी आवास उपलब्ध कराया जाए।

फीफा ने क्यों दिया यह पुरस्कार
डोनाल्ड ट्रंप का नोबेल शांति पुरस्कार के लिए प्रेम किसी से छिपा नहीं है। ऐसा माना जा रहा है कि फीफा द्वारा इस साल से शुरू किया जा रहा है शांति पुरस्कार ट्रंप को ही मिलेगा। वैसे बी फीफा के वर्तमान अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो को ट्रंप का करीबी माना जाता है। वह कई बार खुले तौर पर इस बात को कह चुके हैं कि गाजा संघर्ष में युद्धविराम करवाने के लिए ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार मिलना ही चाहिए।
फीफा के अगले विश्वकप के लिए आयोजित किए जा रहे एक कार्यक्रम में जियानी ने अमेरिकी राष्ट्रपति का स्वागत करते हुए ट्रंप को यह पुरस्कार देने का ऐलान किया। उन्होंने कहा, “यह आपके लिए एक सुंदर मेडल है, जिसे आप जहां चाहें, वहां पहन सकते हैं।” इसके बाद ट्रंप ने तुरंत ही इसे अपने गले में डाल लिया। इसके साथ ही ट्रंप को एक सर्टिफिकेट भी दिया गया, जिसमें ट्रंप को ‘दुनिया में शांति और एकता बढ़ाने में योगदान’ देने वाला बताया गया।
इसके अलावा जियानी ने ट्रंप को एक सोने की ट्राफी भी भेंट की। इस पर आगे ट्रंप का नाम लिखा हुआ था। उन्होंने कहा, “आप इस शांति पुरस्कार के योग्य हैं, अपनी कोशिशों और उपलब्धियों के लिए।
फीफा शांति पुरस्कार मिलने के बाद ट्रंप उत्साहित नजर आए। उन्होंने कहा, “यह मेरे जीवन के सबसे बड़े सम्मानों में से एक है।” इसके बाद उन्होंने अपने परिवार, खासतौर पर अपनी पत्नी मेलानिया का धन्यवाद दिया और मेजबान देशों कनाडा और मेक्सिको के नेताओं की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह तीनों देशों के लिए बेहतर रहेगा।

193 सदस्यीय महासभा में ‘यूक्रेनी बच्चों की वापसी’ शीर्षक वाले प्रस्ताव को 91 देशों ने समर्थन दिया, 12 देशों ने इसका विरोध किया और 57 देशों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। भारत के साथ-साथ बहरीन, बांग्लादेश, ब्राजील, चीन, मिस्र, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका ने भी वोटिंग से परहेज किया। बता दें कि यह प्रस्ताव रूसी राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा से ठीक पहले पेश किया गया था। भारत ने फिलहाल वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया।
प्रस्ताव में क्या कहा गया?
प्रस्ताव में युद्ध के बच्चों पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर गहरी चिंता जताई गई, विशेषकर उन यूक्रेनी बच्चों की स्थिति पर जिन्हें 2014 के बाद अपने परिवारों से अलग कर रूस-नियंत्रित इलाकों में ले जाया गया या रूस भेजा गया।
महासभा ने रूस से मांग की कि वह-
– जबरन ले जाए गए सभी यूक्रेनी बच्चों को तुरंत, सुरक्षित और बिना शर्त वापस भेजे।
– बच्चों के जबरन निर्वासन, परिवारों से अलगाव, नागरिकता बदलने, दत्तक ग्रहण या फॉस्टर केयर में रखने जैसी सभी कार्रवाइयों को तुरंत रोके।
– इस तरह के मामलों में जिम्मेदार लोगों की जांच और जवाबदेही सुनिश्चित करे।
प्रस्ताव ने रूस द्वारा 2022 के बाद किए गए उन कानूनी बदलावों पर भी आपत्ति जताई, जिनसे यूक्रेनी अनाथ बच्चों या अभिभावक-विहीन बच्चों को रूसी नागरिकता प्राप्त करने की प्रक्रिया आसान हुई है।
यूक्रेन का दावा: 20000 से अधिक बच्चों के मामले की जांच
यूक्रेन की उप विदेश मंत्री मारियाना बेट्सा ने महासभा में मसौदा प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि अक्टूबर 2025 तक 6395 बच्चों की जबरन ट्रांसफर/डेपोर्टेशन की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 20,000 से अधिक मामलों की जांच जारी है।
रूस का जवाब: झूठे आरोपों से भरा प्रस्ताव
रूस की उप स्थायी प्रतिनिधि मारिया जाबोलोत्स्काया ने मसौदा प्रस्ताव को झूठे आरोपों से भरा बताया। उन्होंने कहा कि कई बच्चे युद्ध क्षेत्रों से सुरक्षित निकाले गए हैं या अपने परिवारों से बिछड़ गए थे, जिसे उल्लंघन नहीं माना जा सकता। यूक्रेनी शरणार्थियों के लिए रूसी नागरिकता प्राप्त करने की प्रक्रिया को आसान बनाना स्वेच्छिक और बिना किसी दबाव के है। उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव के पक्ष में हर वोट झूठ, युद्ध और टकराव के समर्थन में है, जबकि विरोध में दिया गया हर वोट शांति के पक्ष में है।
यूएन महासभा अध्यक्ष की टिप्पणी
यूएन महासभा की अध्यक्ष अन्नालेना बैरबॉक ने कहा कि फरवरी 2022 में रूस के यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर हमले के बाद से महासभा ने लगातार अपनी आठ अलग-अलग प्रस्तावों में रूस से तत्काल और बिना शर्त वापसी की मांग की है। उन्होंने कहा- यूक्रेनी बच्चों का मामला खाली संदर्भ में नहीं देखा जा सकता। यह पूरी स्थिति रूस के आक्रमण का परिणाम है। उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध से न सिर्फ यूक्रेन बल्कि अन्य क्षेत्रों और वैश्विक स्थिरता पर भी गंभीर प्रभाव पड़ा है।

अंतर्देशीय उड़ानों का सबसे बड़ा नेटवर्क चलाने वाली इंडिगो एयरलाइन के इस संकट के पीछे कोई एक कारण नहीं है। इसके पीछे एक के बाद एक आए कई बदलाव शामिल हैं। तो आइए जानते हैं कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि हजारों की संख्या में लोग एयरपोर्ट पर ही फंसते नजर आए।
कैसे बढ़ा संकट?
इंडिगो एयरलाइन शुरुआत से ही फ्लाइट्स के लेट होने की समस्या का सामना कर रही थी। शुरुआत ने एयरलाइन ने इसके पीछे छोटी तकनीकी खराबियां, सर्दियों के लिए फ्लाइट की नई टाइमिंग, एयरपोर्ट पर भीड़ और मौसम को जिम्मेदार बताया था। हालांकि, इसको एयरलाइन को असली झटका तब लगा जब सरकार की तरफ से फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन नामक नए नियम लागू कर दिए गए, जिनका मकसद पायलटों को थकान से बचाना था।
सरकार ने जारी किए नए नियम
पहले से ही स्टाफ की कमी के साथ ज्यादा उड़ानों का संचालन कर रही इंडिगो के लिए यह नियम एक बड़ी परेशानी बनकर आए। हालांकि, सरकार ने यह कदम पायलट और एयरलाइन की भलाई के लिए ही उठाया था। लेकिन पहले से ही फंसी हुई इंडिगो के लिए यह नियम झेल पाना आसान नहीं था। इन नियमों की वजह से बड़ी संख्या में पायलट अनिवार्य आराम पर चले गए, जिससे स्टाफ की भारी कमी हो गई। इसकी वजह से कई फ्लाइट्स कैंसिल करनी पड़ी।
एयरबस 320 की चेतावनी
फ्लाइट्स की छोटी तकनीकी खराबियों, सरकार के नए नियमों से परेशानी का सामना कर रही इंडिगो एयरलाइन के लिए असली खतरा तब सामने आया जब एयरबस 320 की चेतावनी के बाद देर रात उड़ाने प्रभावित होना शुरू हुईं। रात के 12 बजे के बाद नए नियम लागू हो गए, इसकी वजह से बहुत सारी फ्लाइट्स कैंसिल करने का सिलसिला शुरू हो गया।
इंडिगो का बड़ा आकार
भारत में सबसे ज्यादा उड़ानों का परिचालन करने वाली इंडिगो के लिए उसका बड़ा आकार ही संकट का कारण बन गया है। हालांकि, एयरपोर्ट पर यात्रियों की भीड़ और लगातार रद्द होती उड़ानों के बीच सरकार ने नए नियमों में कुछ राहत दी है। डीजीसीए ने शुक्रवार को नया आदेश जारी करके एक महत्वपूर्ण नियम वापस ले लिया। इसके मुताबिक अब पायलट्स की सप्ताहिक आराम को छुट्टी में नहीं बदला जा सकता है। सरकार द्वारा हटाए गए इस नियम से एयरलाइन को पायलट रोटेट करने में आसानी होगी, जिससे कुछ दबाव कम होने की उम्मीद है।
इंडिगो भले ही इस नियम के हटने के बाद स्थिरता की उम्मीद कर रही हो, लेकिन पायलट संघ इससे नाराज नजर आता है। पायलट संघों का आरोप है कि इंडिगो के मैनेजमेंट ने समय रहते इन नियमों और परेशानियों के लिए तैयारी नहीं की। संघ के मुताबिक इंडिगो के मैनेजमेंट को इस बात की जानकारी थी कि सरकार ऐसे नियम लागू करने वाली है। इसके लिए नई भर्ती की जानी चाहिए थी, लेकिन एयरलाइ्ंस ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने पहले से ही कम स्टाफ को और कम कर दिया, जिससे समस्या बिगड़ गई।
कई विशेषज्ञों का कहना है कि इंडिगो ने इस संकट को बढ़ावा देकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की है। इससे सरकार द्वारा लागू किए गए नियमों में ढिलाई ली जा सके। हालांकि, पायलट संघ ने इसे पायलट और हवाई यात्रियों की सुरक्षा के संकट से जोड़ा है।
कारण चाहे कुछ भी हो, लेकिन परेशानी आम आदमी को ही हो रही है। देश भर के एयरपोर्ट्स पर इस समय भारी भीड़ मची हुई है। हर दिन एयरलाइन की तरफ से सैकड़ों फ्लाइट्स को कैंसिल किया जा रहा है, जिसकी वजह से एयरपोर्ट पर स्टेशन जैसे हालात बने हुए हैं। सरकार का मानना है कि 10 फरवरी 2026 तक पूरी तरह से स्थिरता लाई जा सकती है।

विशाखापट्टनम में आज यानी शनिवार 6 दिसंबर को खेले जाने वाले सीरीज डिसाइडर मैच में भी ओस एक अहम कारक होगा। यहां टॉस महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि दूसरी पारी में ओस गिरने की संभावना है। इसका फायदा बल्लेबाजी टीम को मिलता है, लेकिन भारत के असिस्टेंट कोच ने बताया है कि ड्यू फैक्टर से कैसे निपटा जा सकता है? तीसरे ODI मैच से पहले रयान टेन डोएशे ने बताया, “सबसे बड़ी चुनौती, फिर से, पहले बैटिंग करने और दूसरी बैटिंग करने वाली टीम के बीच का अंतर होने वाला है। मुझे लगता है कि यह वनडे क्रिकेट में ज्यादा साफ तौर पर दिख रहा है और यही असली चुनौती है।”
रायपुर में टीम इंडिया ने 359 रनों का टारगेट साउथ अफ्रीका के सामने रखा, जिसे भारतीय गेंदबाज डिफेंड नहीं कर सके। इस पर डोएशे ने कहा, “ओस का फैक्टर बहुत बड़ा है, हां, यह साफ तौर पर हमारी गलती नहीं है, लेकिन इससे निपटने का तरीका ढूंढना हमारी जिम्मेदारी है।” इसका सॉल्यूशन उनसे पूछा गया तो उन्होंने कहा, “यह सच है कि दूसरी पारी शुरू होते ही ओस गिरने लगती है। इसका मतलब है कि ओस पूरे समय रहती है, इसलिए मैच का समय बदलने से इसका असर थोड़ा कम हो सकता है। अगर आप दो घंटे पहले मैच शुरू करते हैं, तो यह एक समाधान हो सकता है।” उन्होंने माना है कि ऐसा करने के लिए सभी स्टेकहोल्डर्स को साथ आना होगा।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी सेन की खंडपीठ ने इस संबंध में दायर एक जनहित याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि राज्य सरकार को अपने रुख के अनुसार कार्य करना होगा… मुर्शिदाबाद में कानून-व्यवस्था कड़ाई से कायम रखी जानी चाहिए और नागरिकों के जीवन व संपत्ति की रक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
8 महीने पहले भड़के थे दंगे
हुमायूं कबीर का यह मस्जिद शिलान्यास कार्यक्रम ऐसे समय में प्रस्तावित है जब मुर्शिदाबाद आठ महीने पहले वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के विरोध में भड़की सांप्रदायिक हिंसा से उबरा है। इस पृष्ठभूमि में प्रशासन ने सुरक्षा को लेकर पूरी सतर्कता बरतने का दावा किया है।
राज्य के महाधिवक्ता किशोर दत्ता ने अदालत को बताया कि किसी भी तरह की गड़बड़ी रोकने के लिए पर्याप्त पुलिसबल तैनात कर दिया गया है। उधर, उप सॉलिसिटर-जनरल राजदीप मजूमदार ने कहा कि सीआईएसएफ की 19 कंपनियां पहले से इलाके में मौजूद हैं।
अधिकारियों के मुताबिक, 3500 की संयुक्त सुरक्षा टुकड़ी, जिसमें आरएएफ की यूनिटें शामिल हैं, वे शुक्रवार शाम से रेजीनगर और आसपास के इलाकों में मोर्चा संभाल चुकी है। बीएसएफ की दो कंपनियां एनएच-12 की सुरक्षा के लिए तैयार रखी गई हैं। इसी बीच, निलंबन के एक दिन बाद विधायक कबीर को रेजीनगर थाने तलब किया गया, जहां उनसे कई घंटे पूछताछ हुई।
कबीर का दावा- कुरान पढ़ी जाएगी, कोई राजनीति नहीं होगी
पूरे विवाद के बीच हुमायूं कबीर दिनभर कार्यक्रम की तैयारियों की निगरानी करते रहे। उन्होंने अपनी टीम से 30000 बिरयानी पैकेट मेहमानों के लिए तैयार रखने के निर्देश दिए। साथ ही वे जमीअत उलेमा-ए-हिंद के कुछ अलग हुए गुटों और ऑल बंगाल इमाम मुअज्जिन एसोसिएशन के प्रतिनिधियों से भी मिले।
उन्होंने पत्रकारों से कहा- मुख्य कार्यक्रम दोपहर 12 बजे शुरू होगा। दो घंटे तक कुरान पढ़ी जाएगी। कोई भाषण नहीं होगा, कोई राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं होगा, न पार्टी के झंडे, न कोई राजनीतिक बयानबाजी। मैं 2,000 स्वयंसेवकों के साथ उपस्थित रहूंगा। सब जानते हैं… यह कोई नई बात नहीं है।
टीएमसी का आरोप- विपक्ष की साजिश
टीएमसी प्रवक्ता कुनाल घोष ने इस पूरे घटनाक्रम को साजिश करार दिया। उनका आरोप है कि राज्य चुनावी वर्ष में प्रवेश कर रहा है और प्रतिद्वंदी दल टीएमसी को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद राज्य सरकार और केंद्रीय एजेंसियाँ दोनों ही सतर्क मोड पर आ गई हैं। चौतरफ़ा सुरक्षा व्यवस्था के बीच शनिवार को होने वाले इस कार्यक्रम पर पूरे प्रदेश की नज़र रहेगी।
राज्यपाल ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की
राज्यपाल सी वी आनंद बोस ने बंगाल के लोगों से शांति बनाए रखने और भड़काऊ बयानों व अफवाहों से प्रभावित न होने का आग्रह किया। उन्होंने यह आग्रह तृणमूल कांग्रेस के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर द्वारा मुर्शिदाबाद जिले में बाबरी मस्जिद की तर्ज पर बनाई गई मस्जिद की आधारशिला रखने से पहले किया है।
लोक भवन द्वारा सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर किए गए एक पोस्ट के अनुसार, बोस ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि वह यह सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कार्रवाई करे कि कहीं भी कोई अशांति न हो और कानून व्यवस्था बनी रहे। उन्होंने लोकभवन में तत्काल प्रभाव से 24×7 कार्यरत रहने वाला एक ‘एक्सेस प्वाइंट सेल’ बनाने का भी निर्देश दिया है। इसके अध्यक्ष सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एस के पटनायक होंगे।
पोस्ट में कहा गया है, “लोग फोन या ईमेल के माध्यम से लोक भवन ‘एक्सेस प्वाइंट सेल’ से संपर्क करने और किसी भी अप्रिय घटना, धमकी या किसी के द्वारा दिए जा रहे भड़काऊ बयान की सूचना देने के लिए स्वतंत्र हैं।” पोस्ट में कहा गया है कि राज्यपाल समूची स्थिति पर निगरानी रखेंगे। राज्यपाल को विश्वास है कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कार्रवाई करेगी कि कानून और व्यवस्था को कोई खतरा न हो।