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  • आरबीआई आज करेगा Monetary Policy का ऐलान, जानिए EMI कम होगी या नहीं!

    आरबीआई आज करेगा Monetary Policy का ऐलान, जानिए EMI कम होगी या नहीं!


    मुम्बई।
    भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) (Reserve Bank of India -RBI) शुक्रवार को द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा (Bi-Monthly Monetary Policy Review) में लिए गए निर्णयों की घोषणा करेगा। विशेषज्ञों ने रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत कटौती किए जाने की उम्मीद जताई है। हालांकि, कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि तीसरी बार रेपो रेट को स्थिर रखा जा सकता है।

    गवर्नर संजय मल्होत्रा (Governor Sanjay Malhotra)​शुक्रवार सुबह मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन-दिवसीय बैठक में लिए गए फैसलों की घोषणा करेंगे। अगली द्विमासिक मौद्रिक नीति पर एमपीसी की बैठक बुधवार को शुरू हुई थी। यह बैठक घटती मुद्रास्फीति, सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की तेज वृद्धि, डॉलर के मुकाबले रुपये के 90 के पार जाने और मौजूदा भू-राजनीतिक तनावों की पृष्ठभूमि में हो रही है।

    खुदरा मुद्रास्फीति में गिरावट के बीच आरबीआई ने फरवरी से रेपो रेट में तीन किस्तों में कुल एक प्रतिशत की कटौती की है। हालांकि, पिछली दो बार से रेपो रेट को 5.5 प्रतिशत पर स्थिर रखा गया है।

    कई विशेषज्ञों का कहना है कि वृद्धि दर मजबूत बनी हुई है, लेकिन खुदरा मुद्रास्फीति में उल्लेखनीय गिरावट ने प्रमुख अल्पकालिक ऋण दर में कटौती की अतिरिक्त गुंजाइश पैदा कर दी है। आरबीआई गवर्नर ने भी पिछले महीने कहा था कि नीतिगत ब्याज दरों में और कटौती की गुंजाइश है।


    कोई बदलाव नहीं होने की संभावना

    हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना ​​है कि आरबीआई ब्याज दर में यथास्थिति कायम रख सकता है क्योंकि आर्थिक वृद्धि में तेजी आई है जो राजकोषीय समेकन, लक्षित सार्वजनिक निवेश और माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की दर में कटौती जैसे विभिन्न सुधारों से बनी हुई है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुख्य मुद्रास्फीति सरकार द्वारा निर्धारित दो प्रतिशत के निचले स्तर से नीचे बनी हुई है। इसके अलावा भारतीय अर्थव्यवस्था ने दूसरी तिमाही में अपेक्षा से बेहतर 8.2 प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि दर्ज की है।


    आरबीआई पर जिम्मेदारी

    सरकार ने आरबीआई को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि खुदरा मुद्रास्फीति दो प्रतिशत घट-बढ़ के साथ चार प्रतिशत पर बनी रहे। आरबीआई के पहली छमाही के अपेक्षा से बेहतर आंकड़ों को देखते हुए अपने जीडीपी वृद्धि अनुमान को संशोधित करके बढ़ाने की भी उम्मीद है। भारतीय रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए जीडीपी अनुमान को अक्टूबर में 6.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.8 प्रतिशत कर दिया था।

  • देशभर में अगले साल तक पूरी तरह बंद हो जाएंगे टोल बूथ, नए व्यवस्था होगी शुरू

    देशभर में अगले साल तक पूरी तरह बंद हो जाएंगे टोल बूथ, नए व्यवस्था होगी शुरू


    नई दिल्ली।
    देशभर में टोल टैक्स सिस्टम (Country Toll Tax System ) को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने गुरुवार को कहा कि एक वर्ष में वर्तमान टोल टैक्स कलेक्शन सिस्टम (बैरियर) (Toll Tax Collection System (Barrier)) को पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। टोल टैक्स को इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली से चुकाया जाएगा।

    लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान गडकरी ने बताया कि करीब दस स्थानों पर इस नई व्यवस्था को लागू किया जा चुका है। अगले एक वर्ष के अंदर इसे पूरे देश के नेशनल हाईवे नेटवर्क पर लागू कर दिया जाएगा। इससे टोल बूथ पर रुकने की जरूरत नहीं होगी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश में करीब 10 लाख करोड़ की 4500 राजमार्ग परियोजनाएं चल रही है। बड़ी मात्रा में हाईवे निर्माण के साथ डिजिटल टोल सिस्टम लागू होने से देश में सड़क यातायात और परिवहन की रफ्तार और तेज हो जाएगी।

    टोल सिस्टम पूरी तरह से डिजिटल होगा : सरकार
    भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम ने राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह (एनईटीसी) तकनीक विकसित की है। इसका मकसद टोल सिस्टम को पूरी तरह डिजिटल बनाना है। इसमें आरईआईडी यानी की रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन डिवाइस वाहन की विंडस्क्रीन पर लगाया जाता है। यह हाईवे टोल प्लाजा पर वाहन गुजरने के दौरान बिना रुके चालक से जुड़े बैंक खाते से टोल राशि अपने आप काट देता है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार को लोकसभा में दिल्ली में वायु प्रदूषण को लेकर कहा सरकार वैकल्पिक ईंधन को प्राथमिकता दे रही है। गडकरी ने हाईड्रोजन को भविष्य का ईंधन भी करार दिया।

    सरकार ने गुरुवार को बताया कि सड़क दुर्घटना के पीड़ितों के कैशलेस उपचार की योजना के तहत किए गए कुल 6,833 अनुरोधों में से अब तक सिर्फ 5,480 पीड़ित ही पात्र पाए गए हैं। गडकरी ने कहा, सड़क दुर्घटना के पीड़ितों के कैशलेस उपचार की योजना, 2025 के तहत हर दुर्घटना के मामले में पीड़ित का 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार किया जाएगा।

  • भारत किसी के आगे झुकने वाला नहीं… इसे 77 साल पहले का भारत समझने की कोई न करे भूल: पुतिन

    भारत किसी के आगे झुकने वाला नहीं… इसे 77 साल पहले का भारत समझने की कोई न करे भूल: पुतिन


    नई दिल्ली।
    रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Russian President Vladimir Putin) ने भारत-अमेरिका (India-America) के बीच रिश्तों में चल रहे तनाव के बीच दो टूक कहा कि दुनिया का कोई भी देश भारत को आज से 77 साल पहले का हिन्दुस्तान समझने की भूल नहीं करे। उन्होंने कहा कि 150 करोड़ आबादी वाले इस देश ने अतीत से सीख लेकर हर क्षेत्र में बड़ी प्रगति की है और मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) पर कोई भी देश दबाव बनाकर अपनी बात नहीं मनवा सकता। राष्ट्रपति पुतिन ने अमेरिका का नाम लिए बिना कहा कि भारत किसी भी देश के आगे झुकने वाला नहीं है और वह अपनी शर्तों पर किसी भी देश के साथ व्यापारिक संबंध बनाता है।

    एक इंटरव्यू में पुतिन ने कहा कि हाल के वर्षों में भारत ने हर क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है और दुनिया के सामने एक बड़ी आर्थिक महाशक्ति बनकर उभरा है। रूस से सस्ते दाम पर कच्चा तेल खरीदने के मुद्दे और उस पर अमेरिका की ओर से उठाई जा रही आपत्तियों से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि मैं कभी अपने सहयोगियों का चरित्र-चित्रण नहीं करता। उनका भी नहीं, जिन्होंने मेरे साथ काम किया और खासतौर पर राष्ट्राध्यक्षों का तो बिलकुल नहीं।


    अमेरिका अब भी हमसे यूरेनियम खरीद रहा

    उन्होंने कहा कि मेरे विचार में ये आकलन उस देश के नागरिकों को करना चाहिए, जिन्होंने उन्हें वोट देकर सत्ता सौंपी है।लेकिन जहां तक भारत की ओर से रूस से ऊर्जा संसाधनों की खरीद की बात है तो मैं साफ कर दूं कि अमेरिका अब भी अपने न्यूक्लियर पावर प्लांट्स के लिए हमसे परमाणु ऊर्जा की खरीद करता है। इनमें अमेरिका में चल रहे न्यूक्लियर पावर प्लांट्स के लिए यूरेनियम भी शामिल है। पुतिन ने कहा कि अगर अमेरिका खुद अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए रूस से यूरेनियम खरीद सकता है तो फिर भारत की खरीद को लेकर किसी को भी आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस विषय पर गहन अध्ययन की जरूरत है। पुतिन ने यह भी कहा कि वह इस मुद्दे पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से चर्चा के लिए तैयार हैं।


    भारत यात्रा पर पहुंचे हैं पुतिन

    बता दें कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन रणनीतिक और वाणिज्यिक समझौतों के लिए भारत यात्रा पर पहुंचे हैं, लेकिन उनकी इस यात्रा को लेकर भारत का दृष्टिकोण इन समझौतों से कहीं अलग और स्पष्ट है, जो मात्र औपचारिक कुटनीति से कहीं अधिक तेजी से खंडित होती वैश्विक व्यवस्था को बचाने से जुड़ा है। भारत के लिए रूस तीन मोर्चों पर महत्वपूर्ण बना हुआ है। यह वैश्विक स्तर पर टैरिफ की अस्थिरता से सुरक्षा प्रदान करने में मदद करता है, कच्चे तेल का एक विश्वसनीय स्रोत है, और सबसे महत्वपूर्ण यह कि भारत के पड़ोसी चीन को साधने में भूराजनैतिक कवच का काम करता है।

    भारत की ऊर्जा रणनीति में बड़ा परिवर्तन
    पुतिन की यात्रा ऐसे समय हो रही है जब ट्रंप प्रशासन रूस और यूक्रेन के साथ अपनी बातचीत कर रहा है और यूरोप एक भयावह युद्ध से बाहर निकालने की कोशिश कर रहा है। यदि ये वार्ताएं सफल होती हैं और यूक्रेन को थका देने वाला यह असमान युद्ध समाप्त हो जाता है, तो संभव है कि अमेरिका और रूस के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों का एक नया दौर दुनिया के सामने आए। यहां यह भी ध्यान देने वाली बात है कि यूक्रेन पर रूस के हमले से पहले भारत अपनी जरूरतों का केवल 2.5 प्रतिशत कच्चा तेल रूस से आयात करता था लेकिन, प्रतिबंधों और यूरोपीय बाजारों द्वारा रूस के बहिष्कार के बाद भारत अपनी जरूरतों का लगभग 35 प्रतिशत कच्चा तेल रूस से आयात करने लगा है। इस प्रकार भारत की ऊर्जा रणनीति में भी व्यापक परिवर्तन हुआ है।

  • पुतिन ने उठाए अमेरिका नीतियों पर सवाल… बोले- वह खुद हमसे फ्यूल खरीदता है, तो भारत क्यों नहीं…

    पुतिन ने उठाए अमेरिका नीतियों पर सवाल… बोले- वह खुद हमसे फ्यूल खरीदता है, तो भारत क्यों नहीं…


    नई दिल्ली।
    भारत दौरे (India Visit) पर आए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Russian President Vladimir Putin) ने अमेरिका (America) की नीतियों पर सवाल उठा दिए। उन्होंने कहा है कि अगर रूसी ईंधन (Russian fuel) अमेरिका (America) खरीद सकता है, तो भारत क्यों नहीं। उनका यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब अमेरिका की तरफ से भारत को रूसी तेल की खरीद को लेकर निशाना बनाया जा रहा है। इसके चलते भारत पर भारी टैरिफ भी लगाया गया है।

    पुतिन ने कहा, ‘अमेरिका अपने न्यूक्लियर पावर प्लांट्स के लिए हमसे न्यूक्लियर फ्यूल खरीदना जारी रखता है। वह भी तो ईंधन है। एनर्जी है। यह न्यूक्लियर पावर प्लांट्स के लिए यूरेनियम है, जो अमेरिका में काम कर रहे हैं।’ उन्होंने कहा, ‘अगर अमेरिका के पास हमसे फ्यूल खरीदने का अधिकार है, तो भारत को इस अधिकार से वंचित क्यों रखा जाना चाहिए। यह बहुत ही बारीकी से अध्ययन करने वाला मुद्दा है। हम राष्ट्रपति ट्रंप के साथ इस मुद्दे पर चर्चा करने और बहस करने के लिए तैयार हैं।’

    रूसी राष्ट्रपति ने रूस पर पश्चिमी प्रतिबंधों के मद्देनजर भारत द्वारा रूसी कच्चे तेल की खरीद कम करने के बारे में पूछे गए प्रश्न के जवाब में कहा, ‘इस वर्ष के पहले नौ महीनों के दौरान कुल व्यापार कारोबार में कुछ गिरावट आई है। यह बस एक मामूली समायोजन है। कुल मिलाकर, हमारा व्यापार कारोबार लगभग पहले के स्तर पर ही बना हुआ है।’


    भारत की प्रगति से डरे देश
    पुतिन ने कहा कि कुछ वैश्विक ताकतें दुनिया के बाजारों में भारत की बढ़ती ताकत से परेशान हैं। उन्होंने कहा कि रूसी तेल की खरीद को लेकर पश्चिम की चिंताएं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का टैरिफ फैसला भारत के बढ़ते आर्थित प्रभाव के बारे में चिंता दिखाता है। उन्होंने कहा कि दो देशों के बीच ऊर्जा साझेदारी की बुनियाद लंबी है। उन्होंने कहा, ‘भारत के साथ हमारे ऊर्जा सहयोग पर मौजूदा हालात, राजनीति या यूक्रेन में हो रही घटनाओं का कोई असर नहीं पड़ा है।’ रूसी राष्ट्रपति ने अमेरिका के आक्रामक रुख पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा, ‘कुछ बाहरी दबावों के बावजूद, न तो मैंने और न ही प्रधानमंत्री मोदी ने कभी भी, किसी के खिलाफ काम करने के लिए हमारी साझेदारी का इस्तेमाल नहीं किया।’


    ट्रंप पर क्या बोले
    उन्होंने कहा, ‘अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का अपना एजेंडा है, अपने लक्ष्य हैं, जबकि हमारा ध्यान अपने ऊपर है – किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि हमारा लक्ष्य अपने-अपने हितों, भारत और रूस के हितों की रक्षा करना है।’ रूसी राष्ट्रपति की भारत यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत-अमेरिका संबंध पिछले दो दशकों में शायद सबसे खराब दौर से गुजर रहे हैं और अमेरिका ने भारतीय सामान पर भारी 50 प्रतिशत शुल्क लगाया है, जिसमें रूस से कच्चे तेल की खरीद पर 25 प्रतिशत कर भी शामिल है।

  • MP: सिवनी के सरकारी स्कूल में छात्रों से लगवाए गए 'अल्लाह हू अकबर' के नारे

    MP: सिवनी के सरकारी स्कूल में छात्रों से लगवाए गए 'अल्लाह हू अकबर' के नारे


    सिवनी।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के सिवनी जिले (Seoni district) के एक सरकारी स्कूल (Government school) में बच्चों से जबरन ‘अल्लाह हू अकबर’ के नारे लगवाने के बाद बवाल मच गया. मामला अरी थाना क्षेत्र के सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूल का है। बच्चों ने आरोप लगाया कि 1 दिसंबर को गीता पाठ के बाद उनसे 16 बार ‘अल्लाह हू अकबर’ के नारे लगवाए गए और स्कूल की प्रभारी प्रिंसिपल प्रतीक्षा मानगढ़े ने सभी बच्चों को नारा लगाने के लिए दबाव डाला।

    घर आकर बच्चों ने ये बात परिजनों को बताई तो बवाल मच गया. 3 दिसंबर को बच्चों और अभिभावकों के साथ हिंदूवादी संगठन के लोग भी स्कूल पहुंचे और प्रिंसिपल का विरोध करते हुए उनको स्कूल से हटाने और सस्पेंड किए जाने की मांग करने लगे।

    हंगामा बढ़ता देख पुलिस ने मौके पर पहुंचकर लोगों को शांत कराया. थोड़ी ही देर में जिला शिक्षा अधिकारी एसएस कुमरे भी स्कूल पहुंचे तो लोगों ने उनके ख़िलाफ़ भी नारेबाजी की, इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने प्रभारी प्रिंसिपल प्रतीक्षा मानगढ़े से बात की और उन्हें स्कूल से हटाकर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में अटैच कर दिया।

    गांव के लोग इस पर भी नहीं माने और प्रिंसिपल के निलंबन की मांग करने लगे तो जिला शिक्षा अधिकारी ने मौके पर ही एक जांच टीम का गठन कर दिया, जिसकी रिपोर्ट मिलने के बाद प्रिंसिपल पर कार्रवाई का आश्वासन दिया तब जाकर मामला शांत हुआ।

    जिला शिक्षा अधिकारी एसएस कुमरे ने बताया, ”शिकायत के बाद मैं खुद जांच करने स्कूल गया था, जहां प्रिंसिपल ने अपनी गलती मानते हुए कहा कि उनका इरादा किसी की भावनाओं को आहत करना नहीं, बल्कि सर्वधर्म सद्भाव का था, उन्होंने सबसे माफी भी मांगी. प्रिंसिपल को स्कूल से हटा दिया गया है और पूरे मामले की जांच के लिए एक टीम बनाई गई है. रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी।

  • भारत–रूस रिश्तों पर दुनिया की नज़र: प्रतिबंधों की गर्मी में पुतिन की अहम यात्रा

    भारत–रूस रिश्तों पर दुनिया की नज़र: प्रतिबंधों की गर्मी में पुतिन की अहम यात्रा


    नई दिल्ली /रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन गुरुवार को चार साल बाद भारत पहुंचे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद एयरपोर्ट जाकर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। दोनों नेता गले मिले और एक ही कार में बैठकर PM निवास पहुंचे, जहां पुतिन के सम्मान में प्राइवेट डिनर आयोजित किया गया। यह दृश्य सिर्फ कूटनीति नहीं था बल्कि दुनिया को भारत-रूस की रणनीतिक गहराई का मजबूत संदेश भी था। इस दौरे को अमेरिका, यूरोप, यूक्रेन और ग्लोबल मीडिया ने बेहद करीब से कवर किया क्योंकि यह ऐसे वक्त हो रहा है जब अंतरराष्ट्रीय राजनीति की धुरी बदल रही है-ट्रम्प के दोबारा सत्ता में आने रूस-यूक्रेन युद्ध और अमेरिका-भारत व्यापार तनाव के बीच।

    ब्रिटेन: रूस अलग-थलग नहीं, भारत उसका अहम साथी
    मिडिया के अनुसार पुतिन की भारत यात्रा इस बात का संकेत है कि रूस वैश्विक मंच पर अकेला नहीं है। भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, विशाल मार्केट है और रूस के लिए ऊर्जा, रक्षा और कौशल-आधारित कामगारों का प्रमुख स्रोत भी। रूस को उम्मीद है कि भारत सस्ती तेल खरीद और रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाएगा।रूस भारत को Su-57 फाइटर जेट और नए एयर डिफेंस सिस्टम की पेशकश कर सकता है।

    कीव इंडिपेंडेंट यूक्रेन: भारत की कूटनीति की कठिन परीक्षा

    यूक्रेनी मीडिया ने इसे भारत की बड़ी कूटनीतिक परीक्षा बताया। भारत को रूस और यूक्रेन दोनों से रिश्ते संभालने हैं। रूस चाहता है कि भारत उसके साथ खड़ा दिखे, जबकि अमेरिका-यूरोप उम्मीद करते हैं कि मोदी पुतिन पर दबाव डालें ताकि युद्ध कमजोर पड़े।
    यूक्रेन को यह चिंता भी है कि क्या मोदी उस वादे पर टिके रहेंगे जिसमें उन्होंने राष्ट्रपति जेलेंस्की से युद्ध खत्म कराने में मदद का आश्वासन दिया था। साथ ही, भारत का तटस्थ रुख ध्यान खींचता है-UN में रूस के खिलाफ कई प्रस्तावों पर भारत ने वोटिंग से दूरी बनाई है।

    द डॉन पाकिस्तान: रक्षा से ज्यादा व्यापार पर फोकस
    पाकिस्तानी अखबार द डॉन ने लिखा कि पुतिन का यह दौरा रक्षा सहयोग और खासकर आर्थिक रिश्तों को मजबूती देने पर केंद्रित है। अमेरिका भारत पर रूसी तेल खरीद कम करने का दबाव बना रहा है, वहीं ट्रम्प प्रशासन ने अगस्त में भारत के कई उत्पादों पर 50% टैरिफ भी लगा दिया था। रूस भारत को अधिक S-400 सिस्टम और Su-57 जेट के संयुक्त उत्पादन का प्रस्ताव दे सकता है।भारत को डर है कि रूस से किसी बड़ी डील का असर अमेरिका के साथ उसके आर्थिक रिश्तों पर पड़ सकता है।

    अल जजीरा कतर: मोदी-पुतिन का व्यक्तिगत रिश्ता जगजाहिर
    अल जजीरा ने जोर दिया कि मोदी द्वारा एयरपोर्ट पर जाकर गले लगाना व्यक्तिगत संबंधों की मजबूती का संकेत है। पुतिन ने भी स्पष्ट संदेश दिया कि भारत को रूसी तेल खरीदने का पूरा हक है और यह साझेदारी यूक्रेन युद्ध से प्रभावित नहीं होगी। भारत के लिए यह ऊर्जा सुरक्षा का सवाल है2022 से पहले रूस से सिर्फ 2.5% तेल आता था, अब यह बढ़कर करीब 36% हो गया है, जिससे भारत रूस का दूसरा सबसे बड़ा तेल खरीदार बन गया है।

    द गार्डियन (ब्रिटेन): रूस-भारत अमेरिकी दबाव से नहीं डरते

    द गार्डियन के अनुसार पुतिन की भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है जब अमेरिका-भारत संबंध ट्रम्प की टैरिफ नीति के कारण तनावपूर्ण हैं। इस पृष्ठभूमि में पुतिन का दिल्ली पहुंचना यह संकेत है कि भारत-रूस अपने रणनीतिक हितों को किसी तीसरे देश के दबाव पर आधारित नहीं करते। रूस के लिए यह यात्रा अंतरराष्ट्रीय अलगाव की धारणा तोड़ने का मंच है जबकि भारत के लिए यह संतुलन साधने का कठिन लेकिन महत्वपूर्ण प्रयास।

    भारत-रूस रिश्तों की नई परिभाषा

    पुतिन की यह यात्रा प्रतीकात्मक भी है और रणनीतिक भी।
    यह दिखाती है कि- भारत रूस को ऊर्जा और रक्षा सुरक्षा का अनिवार्य स्तंभ मानता है
    रूस भारत को एशिया में अपना सबसे विश्वसनीय साझेदार और अमेरिका को यह संदेश है कि भारत स्वतंत्र विदेश नीति अपनाता है। दोनों नेताओं के गले मिलने की तस्वीरें सिर्फ कूटनीतिक औपचारिकता नहीं थीं, बल्कि उस रिश्ते की झलक थीं जो वैश्विक ध्रुवीयता के बदलते दौर में भी मजबूती से खड़ा है
  • दिल्ली उच्च न्यायालय में वरिष्ठ वकील के टेप लगाकर आने पर न्यायाधीश नाराज़, अगली सुनवाई जनवरी 2026 तक टली

    दिल्ली उच्च न्यायालय में वरिष्ठ वकील के टेप लगाकर आने पर न्यायाधीश नाराज़, अगली सुनवाई जनवरी 2026 तक टली


    दिल्ली। उच्च न्यायालय में एक अनोखी घटना सामने आई, जब एक वरिष्ठ वकील सुनवाई के दौरान अपने मुँह पर लाल रंग की टेप लगाकर अदालत कक्ष में पहुँचे। इस असामान्य घटना को देखकर न्यायाधीशों ने कड़ी नाराज़गी जताई और मामले की अगली सुनवाई को जनवरी 2026 तक के लिए टाल दिया। वकील का कहना था कि वह अपने साथ हुई पिछली सुनवाई की घटना के विरोध में ऐसा कर रहे थे, जहाँ उन्हें बीच में ही बोलने से रोक दिया गया था।

    यह घटना 1 दिसंबर की है। अदालत उस समय अवमानना से जुड़े एक मामले और उससे संबंधित एक याचिका की सुनवाई कर रही थी, जिसे नंद किशोर नामक व्यक्ति ने दायर किया था। लगभग 25 वर्ष से अधिक समय तक कानूनी सेवा में रहे अधिवक्ता आर. के. सैनी टेप लगाकर अदालत में उपस्थित हुए। उन्हें इस रूप में देखकर न्यायाधीशों को पहले तो यह लगा कि शायद उन्हें किसी प्रकार की चोट लगी है, जिसके कारण उन्होंने यह कदम उठाया है।

    सुनवाई कर रही पीठ में न्यायमूर्ति नितिन वासुदेव सांब्रे और न्यायमूर्ति अनीश दयाल शामिल थे। दोनों न्यायाधीशों ने सैनी से टेप लगाने का कारण पूछा। इस पर सैनी ने कहा कि यह उनका प्रतीकात्मक विरोध है। उन्होंने बताया कि पिछली सुनवाई के दौरान उन्हें अपनी दलीलें पूरी करने का अवसर नहीं दिया गया था और उन्हें बीच में ही रोक दिया गया था। इसी कारण वह अपने विरोध को दर्ज कराने के लिए इस तरह उपस्थित हुए हैं।

    वकील का यह जवाब सुनकर अदालत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट लिखा कि सैनी का यह आचरण अत्यंत अनुचित है और एक अनुभवी वकील से ऐसी उम्मीद नहीं की जा सकती। अदालत ने यह भी कहा कि पिछली सुनवाई में उन्हें इसलिए रोका गया था क्योंकि उनकी दलीलें बहुत लंबी और दोहराव वाली थीं, और न्यायालय को दूसरे पक्ष की बात भी सुननी थी। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि अदालत का उद्देश्य किसी भी पक्ष को चुप कराना नहीं था, बल्कि सुनवाई को संतुलित और न्यायसंगत बनाए रखना था।

    न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी कहा कि इस तरह का व्यवहार अदालत की गरिमा को ठेस पहुँचाता है। न्यायालय ने टिप्पणी की कि एक वरिष्ठ वकील, जिनके पास 25 वर्ष से अधिक का अनुभव है, उनसे अधिक संयम और जिम्मेदारी की अपेक्षा की जाती है। न्यायालय ने यह भी चेतावनी दी कि यदि वह चाहती तो सैनी के खिलाफ कड़े आदेश जारी कर सकती थी, परंतु उसने ऐसा न करने का निर्णय लिया है। अदालत ने इस घटना को अदालत की कार्यवाही के रिकॉर्ड में दर्ज करने का निर्देश दिया, ताकि भविष्य में इस प्रकार के व्यवहार पर अंकुश लगाया जा सके।

    घटना के बाद अदालत ने मुख्य मामले को आगे बढ़ाने के बजाय अगली सुनवाई की तारीख 21 जनवरी 2026 निर्धारित कर दी। न्यायालय का मानना था कि इस प्रकार के हस्तक्षेप से सुनवाई के वातावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और मुख्य मुद्दों से ध्यान भटक जाता है।

    इस पूरे प्रकरण ने न्यायालय कक्ष में बैठे अन्य लोगों को भी आश्चर्य में डाल दिया। वकील द्वारा अपनाई गई इस शैली को कुछ लोगों ने अनुचित बताया, जबकि कुछ ने इसे अभिव्यक्ति का तरीका कहा। हालांकि, न्यायालय ने अपने स्पष्ट रुख से यह संदेश दिया कि अदालत अनुशासनहीनता को किसी भी रूप में स्वीकार नहीं करेगी।

    यह घटना न्यायालय की गरिमा, वकीलों के आचरण और न्यायिक प्रक्रिया में मर्यादा के महत्व को एक बार फिर उजागर करती है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी प्रकार का असंवेदनशील या अनुचित प्रदर्शन अदालत की पवित्रता को प्रभावित करता है और इसे किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जा सकता।

  • मप्रः मुख्यमंत्री डॉ. यादव खजुराहो में वैवाहिक कार्यक्रमों में हुए शामिल

    मप्रः मुख्यमंत्री डॉ. यादव खजुराहो में वैवाहिक कार्यक्रमों में हुए शामिल


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को खजुराहो में दो वैवाहिक कार्यक्रम में सम्मिलित होकर वर एवं वधू को आशीर्वाद देकर सुखमय वैवाहिक जीवन की शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव खजुराहो के एक निजी होटल में उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस विवेक कुमार की पुत्री तथा राजनगर में पूर्व विधायक रेखा यादव के पुत्र के शादी समारोह में शामिल हुए। शुभकामना दी।

    इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल, लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार सहित सांसद विष्णुदत्त शर्मा, विधायक अरविन्द पटेरिया, जिला पंचायत अध्यक्ष विद्या अग्निहोत्री भी उपस्थित रहीं।


    मुख्यमंत्री ग्वालियर में ऊर्जा मंत्री तोमर के भतीजे के वैवाहिक कार्यक्रम में हुए शामिल

    इससे पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरुवार को ग्वालियर में ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के पारिवारिक वैवाहिक कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने ग्वालियर में रेसकोर्स रोड स्थित ऊर्जा मंत्री के निवास पर पहुंचकर उनके भतीजे सूर्य प्रताप सिंह तोमर (हितांशु) को सुखद दाम्पत्य जीवन के लिये आशीर्वाद एवं शुभकामनाएँ दीं। इस अवसर पर उन्होंने ऊर्जा मंत्री तोमर की माताश्री सुधा तोमर सहित अन्य परिजन से भी भेंट की। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल एवं लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने भी ऊर्जा मंत्री तोमर के निवास पर पहुँचकर सूर्य प्रताप सिंह तोमर को सुखद दाम्पत्य जीवन के लिये शुभकामनाएँ प्रदान की।


    मुख्यमंत्री डॉ. यादव से मिले फिल्म निर्देशक गोवारीकर

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से फिल्म निर्माता एवं निर्देशक आशुतोष गोवारीकर ने गुरुवार को ग्वालियर विमानतल पर सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गोवारीकर का आत्मीय स्वागत किया और प्रदेश में फिल्म निर्माण की संभावनाओं पर उनसे चर्चा की। आशुतोष गोवारीकर ने भी मध्य प्रदेश में मिल रहे सहयोग की सराहना की तथा ग्वालियर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता की प्रशंसा की। मुलाकात के दौरान फिल्म और पर्यटन क्षेत्र में संभावित सहयोग पर बातचीत हुई।

  • मप्र विधानसभाः अनुपूरक बजट पर तीखी बहस, कांग्रेस ने जनविरोधी और भाजपा ने बताया विकासोन्मुखी

    मप्र विधानसभाः अनुपूरक बजट पर तीखी बहस, कांग्रेस ने जनविरोधी और भाजपा ने बताया विकासोन्मुखी


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन गुरुवार को उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा द्वारा प्रस्तुत दूसरे अनुपूरक बजट की मांगें प्रस्तुत किए जाने के बाद सदन में सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। विधानसभा अध्यक्ष ने चर्चा शुरू कराई, जिसमें भाजपा और कांग्रेस दोनों पक्षों के विधायकों ने अपनी-अपनी बात मजबूती से रखी। कांग्रेस ने जहां अनुपूरक बजट को जनविरोधी करार दिया, तो वहीं भाजपा ने इसे विकासोन्मुखी बताया। शाम साढ़े सात बजे कार्यवाही स्थगित कर इसे शुक्रवार सुबह 11 बजे तक के लिए टाल दिया गया।

    गुरुवार को सदन में दूसरे अनुपूरक बजट की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक बाला बच्चन ने कहा कि अनुपूरक बजट में पूंजीगत व्यय कम है जिससे रोजगार में कमी आएगी और टैक्स कलेक्शन कम होगा, इससे पता चलता है कि यह प्रदेश के हित में नहीं है। दूसरा अनुपूरक बजट 13155 करोड़ का है। सदन में पिछली बैठक में कहा गया था कि कांग्रेस विधायकों के क्षेत्र में 5 करोड़ रुपए विकास कार्य के लिए दिए जाएंगे लेकिन आज तक नहीं दिया गया। सरकार भेदभाव कर रही है। इसके पहले कभी ऐसा नहीं हुआ। विधायकों के ई-ऑफिस के लिए 5-5 लाख रुपये देने की बात कही गई थी। कांग्रेस के कई विधायकों को यह सुविधा नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि किसानों का ध्यान नहीं रखा जा रहा है इसलिए किसान आंदोलन करने को मजबूर हैं। खल घाट में हुए आंदोलन में 700 किसानों पर अज्ञात के नाम पर केस दर्ज कर दिया गया।

    अनुपूरक बजट पर बोलते हुए कांग्रेस विधायक भंवर सिंह शेखावत ने कहा कि सरकार पहले यह तो बताए कि जब से यह सरकार बनी है, तब से अब तक कितना कर्जा लिया। इसका क्या उपयोग हो रहा है। मध्य प्रदेश पर 4.50 लाख करोड़ से अधिक कर्ज है। हर साल जो कर्ज लिया गया है, उस पर ब्याज कितना दे रहे हैं। यह जनता को बताएं। मतदाता की जेब में पैसे डालो, वोट लेकर 5 साल राज करो… इस फार्मूले पर सरकार काम कर रही है।

    शेखावत ने कहा कि मैं बहनों के पैसे मिलने खिलाफ नहीं हूं। उनके विकास के खिलाफ भी नहीं हूं, लेकिन सबसे अहम सवाल है कि यह जो कर्ज लिया जा रहा है… चुकेगा कैसे? जनता पर जो बोझ बढ़ा रहा, वह कैसे खत्म होगा? इंदौर में 800 करोड़ रुपए बिना किसी काम के निकल गया और दिखावे के तौर पर एक इंजीनियर पर कार्रवाई हो गई। शेखावत ने इंदौर की खान नदी की शुद्धीकरण पर भी सवाल उठाए, जिसमें लगातार पैसा खर्च हो रहा, लेकिन नदी साफ नहीं हो रही। उन्होंने कहा कि किसान को खाद नहीं मिल रही है। वह लाइन में लग रहा, डंडे खा रहा है।

    कांग्रेस विधायक राजेंद्र कुमार सिंह ने प्रदेश में खाद संकट का मामला उठाते हुए कहा कि किसानों को खाद नहीं मिलता। 24 घंटे लाइन लगने के बाद टोकन मिलता है, उसके बाद फिर खाद मिलने की तारीख दी जाती है। सरकार किसानों को खाद नहीं दे पा रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में विकास कार्यों के नाम पर भेदभाव हो रहा है। बीजेपी के विधायकों से 15 करोड़ रुपये के विकास कार्य के प्रस्ताव लिए जा रहे हैं, जबकि कांग्रेस के विधायकों को अनदेखा किया जा रहा है।

    इस पर विधायक सीता शरण शर्मा ने कहा कि ऐसी कोई बात नहीं है। प्रस्ताव दिए जाते हैं, उसके परीक्षण होते हैं, उसके आधार पर राशि जारी होती है। इस पर राजेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि कांग्रेस के विधायकों के साथ भी ऐसा क्यों नहीं होता है कि उनसे भी प्रस्ताव लेकर विकास कार्य करने का मौका दिया जाए। विधायक राजेंद्र कुमार सिंह ने विधायकों के वेतन बढ़ाने का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार ने 1 लाख 60 हजार रुपये वेतन बढ़ाने की तैयारी की थी, लेकिन इससे भी रोक दिया गया है। अभी 1 लाख 10 हजार रुपये मिल रहा है। वेतन नहीं भी बढ़ेगा तो भी कांग्रेस विधायक काम करते रहेंगे।

    राजेंद्र कुमार सिंह ने अमरपाटन की 6 पंचायतों को रीवा जिले में शामिल करने का विरोध किया और कहा कि मैहर में बन रहे कलेक्ट्रेट भवन को मैहर से दूर कटनी रोड पर बनाया जा रहा है, जबकि इसे मैहर और अमरपाटन के बीच बनाया जाना चाहिए। विधायक राजेंद्र कुमार सिंह ने मार्कंडेय घाट पर एक ब्रिज बनाने की मांग की।

    कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने अनुपूरक बजट पर कहा कि वैसे तो अल्पसंख्यकों के लिए अल्पसंख्यक विभाग में बजट का प्रावधान नहीं है, लेकिन अब हमें भी इसकी आदत हो गई है। जो भी व्यवस्था रहेगी, उसके हिसाब से चलते रहेंगे, लेकिन सरकर को इस ओर ध्यान देना चाहिए, ताकि विकास कार्य कराए जा सकें। उन्होंने कहा कि भोपाल शहर में विकास के काम में तेजी लाना चाहिए।

    कांग्रेस विधायक फुंदेलाल मार्को ने छात्रावास में बच्चों को महुआ खिलाए जाने का विरोध करते हुए कहा– यह बच्चे अपने घर पर भी महुआ खा रहे थे और जब यहां छात्रावास में पहुंचे हैं तो वहां भी चने के साथ महुआ खिलाया जा रहा है। धीरे-धीरे महुआ पीने की आदत डाल दी जाएगी। वे सरकार से मांग करते हैं कि बच्चों के मन में यह भावना खत्म करें कि आदिवासी हैं और उन्हें महुआ पीना पड़ेगा, महुआ ही खाना पड़ेगा। उन्होंने संभागों के लिए नियुक्त किए गए अपर मुख्य सचिवों के साथ विधायकों के संवाद पर भी जोर दिया।

    मार्को ने देश भर में 3000 से अधिक रजिस्टर्ड बूचड़खाने बंद करने की मांग करते हुए कहा कि अगर आप इसे बंद नहीं कर सकते हैं तो दिखावा मत कीजिए। मार्को ने कहा कि जहां गोमाता का वध किया जाता है। ऐसे बूचड़खाने को बंद करने का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजना चाहिए। यह तय है कि इसका सारे देश में विरोध होगा। सरकार अगर गंभीर है तो दिखावा न करें।

    नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि बजट में किसानों, युवाओं और एमएसएमई सेक्टर के लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं है। धान और मक्का के लिए एसएसपी और समर्थन मूल्य का उल्लेख नहीं होना गंभीर लापरवाही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता की जेब की चोरी कर रही है और किसानों की समस्याओं से मुंह मोड़ रही है।

    अनुपूरक बजट का बचाव करते हुए भाजपा विधायक ओमप्रकाश सखलेचा ने कहा कि सरकार का फोकस लाड़ली बहना, आवास, किसान, सिंचाई और उद्योगों पर है। उन्होंने बताया कि रोजगार के लिए 2 लाख 27 करोड़ से अधिक का प्रावधान किया गया है तथा भावांतर के लिए 500 करोड़ रखे गए हैं।

    होशंगाबाद से भाजपा विधायक डॉ. सीताशरण शर्मा ने कहा कि भाजपा सरकार ने जो वादे किए, वे पूरे किए हैं। कर्जा कोई नया मुद्दा नहीं है, लेकिन हमारी सरकार ने कर्ज लेकर विकास भी किया है। सदन में दोनों पक्षों की तीखी बहस के बीच अनुपूरक बजट पर चर्चा शुक्रवार को भी जारी रहेगी। सरकार ने वर्ष 2025-26 के लिए द्वितीय अनुपूरक बजट 13,476 करोड़ रुपये का पेश किया है।

  • मप्र की समृद्ध वन संपदा में चीता मुकुटमणि और कोहिनूर के समान : मोहन यादव

    मप्र की समृद्ध वन संपदा में चीता मुकुटमणि और कोहिनूर के समान : मोहन यादव


    – मुख्यमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय चीता दिवस पर कूनो के जंगल में छोड़े 3 चीते

    भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संकल्पों के अनुरूप श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क में चीतों के पुनर्स्थापन को नई दिशा मिली है। आज अंतरराष्ट्रीय चीता दिवस के अवसर पर मादा चीता ‘वीरा’ के साथ उसके दो शावक खुले वन में विचरण के लिए छोड़े गए हैं।

    राज्य में चीतों की संख्या अब 32 हो गई है। इसमें गांधीसागर अभयारण्य के तीन चीते भी शामिल हैं। कूनो नेशनल पार्क चीतों के पुनर्वास से अब अंतरराष्ट्रीय स्तर का केंद्र बन चुका है। कूनो में हमारी धरती पर ही जन्मे तीसरे पीढ़ी के चीते विचरण कर रहे हैं। कूनो में जन्मी मादा चीता ‘मुखी’ के पांच शावक स्वस्थ हैं, यह सुखद समाचार है। कूनो के चीते अब श्योपुर से मुरैना और राजस्थान की धरती तक दौड़ लगा रहे हैं। राज्य की समृद्ध वन संपदा में चीता मुकुटमणि और कोहिनूर के समान है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को श्योपुर जिले के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय चीता दिवस पर तीन चीतों को स्वछंद विचरण के लिए बाड़े से अभयारण्य (खुले जंगल) में छोड़ा। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश की भूमि पर सभी जीव सुरक्षित होंगे, राज्य सरकार इसके लिये प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि उन्नत रेडियो ट्रेकिंग प्रणाली और समर्पित टीमों के माध्यम से सतत् निगरानी की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने चीता दिवस के अवसर पर कूनो राष्ट्रीय उद्यान के वर्ष-2026 के कैलेण्डर और ‘फील्ड मैन्युअल फॉर क्लिनिकल मैनेजमेंट ऑफ फ्री-रेंजिंग चीताज़ इन कूनो नेशनल पार्क’ बुक का विमोचन किया। साथ ही कूनो राष्ट्रीय उद्यान में ‘नव-निर्मित सोवेनियर शॉप’ का लोकार्पण भी किया। मुख्यमंत्री ने कूनो राष्ट्रीय उद्यान के पारोंद में आयोजित कार्यक्रम में चीता दिवस पर सभी प्रदेशवासियों को बधाई दी। चीता प्रोजेक्ट की सफलता के लिए उन्होंने वन विभाग के अमले को धन्यवाद भी दिया।

    चीतों का तेजी से परिवार बढ़ रहा है

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश टाइगर, लेपर्ड और चीता स्टेट है। हमारे जंगल बहुत से वन्यजीवों के आश्रय स्थल हैं। ऐसे में विश्व में पहली बार चीतों का पुनर्स्थापन मध्य प्रदेश में हुआ, इसके लिए वन विभाग के मंत्री और अधिकारी बधाई के पात्र हैं। श्योपुर, कूनो में चीतों के पुनर्स्थापन से पर्यटन में पांच गुना वृद्धि हो चुकी है। चीतों का परिवार जिस तेज गति से बढ़ रहा है, उसी हिसाब से भविष्य में कूनो नेशनल पार्क से विस्थापित लोगों को रोजगार के अवसर भी मिल रहे हैं।

    मनुष्य और चीते का संबंध वसुधैब कुटुम्बकम का सबसे सुंदर उदाहरण

    मुख्यमंत्री ने कहा कि यह प्रसन्नता का विषय है कि चंबल अंचल के स्वच्छ वातावरण में हमारे नागरिक भी चीतों के साथ जीना सीख गए हैं और चीतों से प्रेम भी कर रहे हैं। प्रदेशवासियों में वन्यजीवों एवं प्रकृति के साथ भाईचारे से जुड़ने का स्वभाव है। यह वसुधैब कुटुम्बकम का सबसे सुंदर उदाहरण है। उन्होंने मध्य प्रदेश की धरती पर चीता परियोजना के क्रियान्वयन के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि चीता पर्यटन से कूनो राष्ट्रीय उद्यान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है। मुख्यमंत्री ने ग्राम अहेरा में ग्रामीण महिलायों से संवाद भी किया। उन्होंने कहा कि हम अपनी बहनों का पूरा ध्यान रखेंगे। मुख्यमंत्री का स्नेह पाकर बहनों ने उन्हें आशीर्वाद दिया।

    अंतरराष्ट्रीय चीता दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में श्योपुर जिले प्रभारी और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला, वन राज्यमंत्री दिलीप सिंह अहिरवार, पूर्व वन मंत्री रामनिवास रावत, सहरिया विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष तुरसनपाल बरिया, उपाध्यक्ष सीताराम आदिवासी, मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, चंबल कमिश्नर सुरेश कुमार, श्योपुर कलेक्टर अर्पित वर्मा, शिवपुरी कलेक्टर रवीन्द्र चौधरी, जनप्रतिनिधि सहित वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।