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  • कंगाल पाकिस्तान पर IMF की शिकंजा, सरकारी एयरलाइन PIA की लाइव नीलामी 23 दिसंबर को

    कंगाल पाकिस्तान पर IMF की शिकंजा, सरकारी एयरलाइन PIA की लाइव नीलामी 23 दिसंबर को


    नई दिल्‍ली ।
    पाकिस्तान की आर्थिक हालत अब इतनी बिगड़ चुकी है कि उसे अपनी सरकारी एयरलाइन Pakistan International Airlines (PIA) तक बेचनी पड़ रही है. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ़ ने घोषणा की है कि 23 दिसंबर 2025 को इस एयरलाइन की नीलामी लाइव दिखायी जाएगी. यह फैसला IMF के कड़े दबाव और बेलआउट पैकेज की कठिन शर्तों को देखते हुए लिया गया है.

    PIA को खरीदने की दौड़ में चार बड़े नाम शामिल हैं. इन चारों में सबसे ज़्यादा चर्चा फौजी फर्टिलाइज़र कंपनी की है, जो सीधे पाकिस्तानी सेना के प्रभाव में चलने वाली फौजी फाउंडेशन से जुड़ी है. पाकिस्तान की राजनीति और अर्थव्यवस्था में सेना की गहरी पकड़ को देखते हुए माना जा रहा है कि अंततः यह एयरलाइन उसी समूह के हाथों जा सकती है. बाकी दावेदारों में लकी सीमेंट समूह, आरिफ हबीब कॉर्प और एयर ब्लू लिमिटेड भी शामिल हैं. यह पहली बार है जब पाकिस्तान किसी सरकारी एयरलाइन की बोली को सार्वजनिक तौर पर लाइव दिखाएगा.

    IMF की शर्तों पर ही बची अर्थव्यवस्था
    पाकिस्तान पिछले कई वर्षों से कर्ज पर कर्ज लेकर चल रहा है. 2023 में देश लगभग दिवालिया होने के कगार पर था. रक्षा खर्च लगातार बढ़ता गया और राजस्व घटता रहा. IMF से लिए गए कर्ज़ों की संख्या 20 से भी अधिक हो चुकी है, जबकि देश की अपनी आर्थिक क्षमता बहुत कम है. IMF ने 7 अरब डॉलर के बेलआउट पैकेज को मंजूरी तो दी, लेकिन शर्त रखी कि पाकिस्तान सरकारी कंपनियों में सुधार करे, घाटा कम करे और PIA जैसी डूबती कंपनियों का निजीकरण करे.

    PIA की तबाही कैसे हुई?
    कभी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित मानी जाने वाली PIA अपनी ही गलतियों के कारण बर्बादी की गहराई में चली गई. 2020 में सामने आया कि लगभग एक-तिहाई पाकिस्तानी पायलटों के लाइसेंस फर्जी या संदिग्ध थे. इस खुलासे के बाद यूरोप, ब्रिटेन और अमेरिका ने PIA की उड़ानों पर रोक लगा दी. इसके साथ भ्रष्टाचार, राजनीतिक दखल, रिश्तेदारी आधारित भर्तियां और गैर-जरूरी कर्मचारियों की भीड़ ने एयरलाइन को पूरी तरह खोखला कर दिया. हर साल अरबों का घाटा लिखने वाली यह कंपनी पाकिस्तान की सबसे बड़ी आर्थिक बीमारी बन गई.

    कर्ज में डूबे देश
    पाकिस्तान अब वहां पहुंच चुका है, जहां पुराने कर्ज़ चुकाने के लिए भी नया कर्ज़ लेना पड़ रहा है. ऐसे में PIA का निजीकरण उसके लिए मजबूरी बन गया है. IMF की शर्तें पूरी करने के अलावा पाकिस्तान के पास कोई और रास्ता दिखाई नहीं दे रहा. आने वाले वर्षों में यह देखा जाएगा कि क्या PIA को बेचने के बाद देश अपने आर्थिक गिरावट के सिलसिले को रोक पाता है या नहीं.

  • भारत दौरे से पहले पुतिन ने अमेरिकी टैरिफ पर दिया बयान, बोले- PM मोदी दबाव में आने वाले नेता नहीं

    भारत दौरे से पहले पुतिन ने अमेरिकी टैरिफ पर दिया बयान, बोले- PM मोदी दबाव में आने वाले नेता नहीं


    नई दिल्‍ली । रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत के दौरे पर आ रहे हैं. अपने भारत दौरे के दौरान वो कई बड़े समझौते साइन कर सकते हैं. इसी बीच भारत पर अमेरिका की तरफ से लगाए टैरिफ को लेकर उन्होंने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दबाव में आने वाले नेता नहीं हैं. यह बयान उन्होंने उस सवाल के जवाब में दिया जिसमें पूछा गया था कि क्या अमेरिका भारत पर टैरिफ के जरिए दबाव डाल रहा है.

    पुतिन ने PM मोदी की नेतृत्व क्षमता की सराहना की
    पुतिन से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता और भारत-रूस संबंधों के भविष्य के बारे में भी पूछा गया. इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए कहा कि दुनिया ने भारत की अडिग नीति देखी है और देश को अपने नेतृत्व पर गर्व होना चाहिए. पुतिन ने यह भी बताया कि भारत और रूस के बीच 90 प्रतिशत से अधिक द्विपक्षीय लेन देन सफलतापूर्वक पूरे हो चुके हैं.

    मोदी से मित्रता और आगामी भारत दौरा
    पुतिन ने कहा कि उन्हें अपने मित्र, प्रधानमंत्री मोदी से मिलने के लिए यात्रा करने में बहुत खुशी हो रही है. उन्होंने यह भी बताया कि दोनों नेताओं ने अगली बैठक भारत में आयोजित करने पर सहमति जताई है.

    भारत-रूस सहयोग और ऐतिहासिक संबंध
    पुतिन ने कहा कि बहुत सारी बातें चर्चा के लिए हैं, क्योंकि भारत और रूस के बीच सहयोग का दायरा बहुत व्यापक है. उन्होंने दोनों देशों के बीच के विशिष्ट ऐतिहासिक संबंधों को भी रेखांकित किया. उन्होंने भारत की आजादी के बाद की प्रगति की सराहना करते हुए कहा कि सिर्फ 77 साल के अल्प समय में, देश ने अद्भुत विकास हासिल किया है.

    बता दें कि पुतिन अब तक भारत के नौ दौरे कर चुके हैं, जिनमें से तीन मोदी के कार्यकाल में (2016, 2018 और 2021) हुए. दिसंबर में यह उनका दसवां दौरा होगा. वहीं प्रधानमंत्री मोदी सात बार रूस जा चुके हैं.

  • मप्र विधानसभा में द्वितीय अनुपूरक बजट पेश, 13476.94 करोड़ रुपये का प्रावधान

    मप्र विधानसभा में द्वितीय अनुपूरक बजट पेश, 13476.94 करोड़ रुपये का प्रावधान


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को राज्य सरकार द्वारा सदन में वित्त वर्ष 2025–26 के लिए द्वितीय अनुपूरक अनुमान पेश किया है। इस पर गुरुवार, चार दिसंबर को 3:30 घंटे चर्चा होगी। वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा द्वारा पेश किए गए दूसरे अनुपूरक बजट में कुल 13476 करोड़ 94 लाख रुपये का प्रावधान रखा गया है। इसमें राजस्व मद में 8,448.57 करोड़ और पूंजीगत मद में 5,028.37 करोड़ शामिल हैं। सरकार ने इस अनुपूरक बजट में ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण, बुनियादी ढांचा, जल संसाधन और औद्योगिक निवेश जैसे अहम क्षेत्रों पर विशेष जोर दिया है।

    दूसरे अनुपूरक बजट में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ग्रामीण विकास विभाग को 4,000 करोड़ रुपये का प्रावधान दिया गया है। पंचायत विभाग को पंद्रहवें वित्त आयोग की अनुशंसाओं के अनुसार 1,633 करोड़ रुपये के अनुदान का प्रावधान किया गया है। महिला एवं बाल विकास विभाग की मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना 2023 के लिए राजस्व मद में 1,794 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

    खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के अंतर्गत उत्पादन संस्थाओं को ऋण सहायता हेतु 2,000 करोड़ रुपये की पूंजीगत राशि का प्रावधान किया गया। इसी तरह, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग को भूमि अधिग्रहण, सर्वे, डिमार्केशन और सेवा शुल्क हेतु 650 करोड़ रुपये दिए गए हैं।

    नर्मदा घाटी एवं जल संसाधन परियोजनाओं में बड़ा निवेश
    नर्मदा घाटी विकास विभाग के लिए सरदार सरोवर डूब प्रभावित क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण और अन्य कार्यों के लिए 600 करोड़ रुपये, बरगी नहर विस्तार योजना के लिए 200 करोड़ रुपये, इंदिरा सागर परियोजना (एमसीएडी) के लिए 94 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। जल संसाधन विभाग को भी बांध व संबंधित कार्यों के लिए 300 करोड़ रुपये तथा बहुती फिल्टर संयंत्र-2 फेज-2 के लिए 63 रुपये करोड़ आवंटित हुए हैं। किसान कल्याण और कृषि विकास विभाग के अंतर्गत भावांतर/लेट रेट योजना पर 500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

    शहरी विकास एवं अमृत मिशन में अमृत 2.0 मिशन के तहत अटल मिशन फॉर रीजुवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन के लिए 150 करोड़, मिलियन प्लस शहरों के लिए 115 करोड़, एक लाख से कम आबादी वाले शहरों के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। लोक निर्माण विभाग को भूमि अधिग्रहण मुआवजे के लिए 300 करोड़ रुपये दिए गए हैं। इसके अलावा शिक्षा विभाग में पीएम जनमन (समग्र शिक्षा) हेतु 122 करोड़, जबकि धरती आबा जनजातीय ग्राम उन्नयन अभियान के लिए 108 करोड़ रुपये का प्रावधान शामिल है।

  • मध्य प्रदेश में दो वर्ष में 7.31 लाख हैक्टेयर सिंचाई क्षेत्र का हुआ विस्तार

    मध्य प्रदेश में दो वर्ष में 7.31 लाख हैक्टेयर सिंचाई क्षेत्र का हुआ विस्तार


    – मुख्यमंत्री ने की जल संसाधन विभाग की समीक्षा, कहा- प्रदेश की सिंचाई क्षमता 100 लाख हैक्टयर तक बढ़ाएंगे

    भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में गत दो वर्ष में 7.31 लाख हैक्टयर क्षेत्र में नई सिंचाई क्षमता विकसित हुई है। प्रदेश की सिंचाई क्षमता में वर्ष 2026 तक 8.44 लाख हैक्टयर की वृद्धि होगी। प्रदेश में सिंचाई क्षेत्र 100 लाख हैक्टेयर तक ले जाने का लक्ष्य लेकर कार्य किया जा रहा है। प्रदेश की सिंचाई परियोजनाओं की समीक्षा प्रधानमंत्री गतिशक्ति पोर्टल का प्रयोग कर की जाएगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को विधानसभा समिति कक्ष में जल संसाधन विभाग और नर्मदा घाटी विकास विभाग की गतिविधियों की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने पार्वती-काली-सिंध और चम्बल अंतर्राज्यीय लिंक परियोजना, केन-बेतवा अंतर्राज्यीय लिंक परियोजना की स्वीकृति और केंद्र सरकार के सहयोग को राज्य की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए राज्य में भी विभिन्न नदियों को जोड़ने के लिए नदी जोड़ो परियोजना के क्रियान्वयन के निर्देश दिए।

    बैठक में जल संसाधन विभाग द्वारा जानकारी दी गई कि इस दिशा में राज्य में अध्ययन और सर्वेक्षण का कार्य किया गया है। राज्य में नदी जोड़ो परियोजना अंतर्गत उज्जैन जिले में कान्ह-गंभीर, मंदसौर, नीमच और उज्जैन में कालीसिंध-चंबल, सतना जिले में केन और मंदाकिनी, सिवनी एवं छिंदवाड़ा जिले में शक्कर पेंच और दूधी तामिया, रायसेन जिले में जामनेर नेवन और नेवन-बीना नदियों का सर्वेक्षण किया गया है। इस सभी के क्रियान्वयन से कुल 5 लाख 97 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की जा सकेगी। इनकी अनुमानित लागत 9870 करोड़ रुपए होगी। सात जिलों के हजारों किसान इन योजनाओं से लाभान्वित होंगे।

    राज्य की नदियों में बाढ़, जल प्रबंधन, जल के समुचित उपयोग नदी कछारों में पर्याप्त जल की उपलब्धता सुनिश्चित किए जाने के उद्देश्य से राज्य की नदियों को आपस में जोड़ने के लिए तकनीकी दल का गठन 13 नवम्बर 2024 को किया गया था।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भोपाल की झील की प्राचीन तकनीक का अध्ययन कर इस तर्ज पर कम लागत में सुरक्षित जलाशय एवं बांध निर्माण की अवधारणा पर कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने भोपाल के इस मॉडल का प्रदर्शन करने के निर्देश भी विभाग को दिए। मुख्यमंत्री को जानकारी दी गई कि राज्य में जल संसाधन और नर्मदा घाटी विकास विभाग द्वारा सिंचाई सुविधाओं के विस्तार का कार्य निरंतर किया जा रहा है।

    बैठक में बताया गया कि सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना उज्जैन जिसकी लागत 614.53 करोड़ रुपए है। इसकी भौतिक प्रगति 48 प्रतिशत है। इसी तरह कान्ह डायवर्सन क्लोज डक्ट परियोजना उज्जैन की लागत 919.94 करोड़ है। इस परियोजना की भौतिक प्रगति 42 प्रतिशत है। सिंहस्थ: 2028 में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए घाट निर्माण एवं संबद्ध कार्य किए जा रहे हैं, जिनकी लागत 778.91 करोड़ है। बैठक में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, मुख्य सचिव अनुराग जैन और संबंधित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

    प्रमुख बिन्दु

    – प्रदेश में गत दो वर्ष में 7.31 लाख हैक्टयर क्षेत्र में नई सिंचाई क्षमता विकसित।
    – प्रदेश की सिंचाई क्षमता में वर्ष 2026 तक 8.44 लाख हैक्टयर की वृद्धि होगी।
    – प्रदेश में सिंचाई क्षेत्र 100 लाख हैक्टेयर तक ले जाने का लक्ष्य।
    – प्रदेश की सिंचाई परियोजनाओं की समीक्षा प्रधानमंत्री गतिशक्ति पोर्टल का प्रयोग कर की जाएगी।
    – राज्य में भी विभिन्न नदियों को जोड़ने के लिए नदी जोड़ो परियोजना के क्रियान्वयन के निर्देश।
    – राज्य में नदी जोड़ो परियोजना अंतर्गत उज्जैन जिले में कान्ह-गंभीर, मंदसौर, नीमच और उज्जैन में कालीसिंध-चंबल, सतना जिले में केन और मंदाकिनी, सिवनी एवं छिंदवाड़ा जिले में शक्कर पेंच और दूधी तामिया, रायसेन जिले में जामनेर नेवन और नेवन-बीना नदियों का सर्वेक्षण किया गया।
    – सभी के क्रियान्वयन से कुल 5 लाख 97 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की जा सकेगी।
    – इनकी अनुमानित लागत 9870 करोड़ रुपये होगी।
    – सात जिलों के हजारों किसान इन योजनाओं से लाभान्वित होंगे।
    – सिंहस्थ: 2028 में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए घाट निर्माण एवं संबद्ध कार्य किए जा रहे हैं, जिनकी लागत 778.91 करोड़ है।

  • मप्र के दमोह में अरंडी के बीज खाने से 30 बच्चे बीमार, जिला अस्पताल में भर्ती

    मप्र के दमोह में अरंडी के बीज खाने से 30 बच्चे बीमार, जिला अस्पताल में भर्ती


    दमोह।
    मध्य प्रदेश के दमोह जिले के पथरिया ब्लॉक के किशनगंज गांव में मंगलवार शाम स्कूल में खेलते समय कुछ बच्चों ने अरंडी के बीज खा लिए। इसके बाद घर लौटते ही बच्चों को उल्टियां शुरू हो गईं। एक के बाद एक 30 बच्चे बीमार हो गए, जिससे गांव में अफरा-तफरी मच गई। परिजनों ने तुरंत सभी बच्चों को इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया।

    एक बच्चे की मां जानकी पटेल ने बताया कि बच्चे मूंगफली जैसी दिखने वाली बीज खाने के बाद बीमार हुए। सभी बच्चों को ऑटो और एंबुलेंस से जिला अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उनका उपचार जारी है। अस्पताल के चिकित्सक डॉ सुनील जैन ने बताया कि फिलहाल बच्चों की हालत स्थिर है।

    कलेक्टर के निर्देश पर छह से अधिक डॉक्टरों की टीम ने बच्चों का इलाज शुरू किया। जिला अस्पताल में डॉक्टर विक्रांत चौहान, डॉक्टर सोनू शर्मा और सिविल सर्जन डॉक्टर प्रहलाद पटेल की मौजूदगी में सभी बच्चों का उपचार किया गया। इलाज के बाद बच्चों की स्थिति में सुधार बताया जा रहा है।

    घटना की जानकारी लगते ही एसपी श्रुत कीर्ति सोमवंशी और पथरिया एसडीएम निखत चौरसिया जिला अस्पताल पहुंचे। उन्होंने बच्चों और उनके परिजनों से स्थिति के बारे में जानकारी ली। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की टीम को किशनगंज गांव भेजकर स्थिति का जायजा लेने के निर्देश दिए गए। एसपी श्रुत कीर्ति सोमवंशी ने निर्देश पर पुलिस गांव में मुनादी कर बीमार बच्चों को अस्पताल भेजने की अपील कर रही है।

    एसपी श्रुतकीर्ति सोमवंशी ने बताया कि चंपत पिपरिया गांव में अरंडी के बीज खाने से 30 से अधिक बच्चे बीमार हुए हैं। जिनको जिला अस्पताल लाया गया है। वह अस्पताल पहुंचे हैं और परिजनों से जानकारी ली है। साथ ही स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की एक टीम भी गांव भेजी गई है। वहीं, एसडीएम निखत चौरसिया ने बताया कि बच्चों की सेहत में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। कल स्वास्थ्य विभाग की टीम स्कूल और उसके आसपास का निरीक्षण करेगी। यदि स्कूल परिसर में अरंडी के पौधे पाए गए, तो उन्हें नष्ट कर दिया जाएगा। साथ ही परिजनों को विषैले पौधों और उनके फलों के खतरों के बारे में जानकारी दी जाएगी।

  • मप्र विधानसभाः हंगामेदार रहा शीतकालीन सत्र का दूसरा दिन, वीआईटी हिंसा पर विपक्ष का हंगामा

    मप्र विधानसभाः हंगामेदार रहा शीतकालीन सत्र का दूसरा दिन, वीआईटी हिंसा पर विपक्ष का हंगामा


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र का दूसरा दिन मंगलवार को हंगामेदार रहा। सत्र के दौरान अतिवृष्टि और वीआईटी विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों द्वारा अनियमितताओं को लेकर की गई तोड़-फोड़ के मामले में विपक्षी विधायकों ने जमकर हंगामा किया। इससे पहले कांग्रेस विधायक खेतों में फसलों की स्थिति को दर्शाती तख्तियां लेकर विधानसभा पहुंचे। शून्यकाल की सूचनाएं पढ़ी जाने के बाद विधानसभा की कार्यवाही गुरुवार तक स्थगित कर दी गई।

    दरअसल, लंच के बाद विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही सीहोर जिले के वीआईटी विश्वविद्यालय में हुई मारपीट और आगजनी की घटना को लेकर विधायक दिनेश जैन ‘बोस’ ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पेश किया। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने बताया कि विश्वविद्यालय को कारण बताओ नोटिस देकर जवाब मांगा गया है, इसके बाद आगे की कार्रवाई होगी। विधायक जैन ने मजिस्ट्रेट जांच कराने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की, साथ ही छात्रों पर दर्ज प्रकरण वापस लेने की भी बात कही। मंत्री परमार ने कहा कि 4 हजार छात्रों का सड़क पर आना गंभीर मामला है, सरकार इसे गंभीरता से ले रही है और आगे सख्त कदम उठाए जाएंगे।

    कांग्रेस विधायक महेश परमार ने हनुमान चालीसा का पाठ करने पर सजा देने के मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए विश्वविद्यालय में प्रशासक नियुक्त कर उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से विधायकों की एक कमेटी गठित करने का भी आग्रह किया। इस पर उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि विश्वविद्यालय को जो कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, उसका उद्देश्य ही यह है कि सरकार आवश्यक होने पर विश्वविद्यालय को अपने नियंत्रण में लेकर कठोर कार्रवाई करे। मंत्री परमार ने स्पष्ट किया कि अब तक किसी विश्वविद्यालय के खिलाफ इतनी सख्त कार्रवाई नहीं हुई होगी, जैसी इस मामले में की जाएगी।

    उप नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे ने आरोप लगाया कि वीआईटी विश्वविद्यालय में हनुमान जी का नाम लेने पर छात्रों से 5 हजार रुपये का जुर्माना वसूला जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसी कार्रवाई उन्होंने पहले कभी नहीं देखी। कटारे ने सवाल उठाया कि जब सीएमएचओ को विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश नहीं करने दिया गया, तो शासकीय कार्य में बाधा का मामला अब तक दर्ज क्यों नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि अगर कलेक्टर और सीएमएचओ चाहें तो धार्मिक भावनाएं भड़काने और शासकीय कार्य में बाधा समेत अन्य धाराओं में विश्वविद्यालय प्रबंधन पर केस दर्ज कराया जा सकता है। उन्होंने वीआईटी कॉलेज में हिंसा को छोटा जेन-जेड आंदोलन बताया।

    इससे पहले मंगलवार को शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन सदन में मध्य प्रदेश नगर पालिका संशोधन अध्यादेश- 2025 सर्वसम्मति से पारित हो गया। नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि यह संशोधन राजीव गांधी के सपनों को पूरा करने की दिशा में एक कदम है। उन्होंने कहा कि पहले राइट टू रिकॉल ढाई साल में लागू होता था, जिसे अब 3 साल कर दिया गया है ताकि लोकतंत्र और मजबूत हो। वहीं, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि इस बिल से जनता को कोई सीधा फायदा नहीं होगा। यह केवल टिकट बेचने का माध्यम बनेगा और 3 साल बाद फिर खुलेआम हॉर्स ट्रेडिंग होगी।

    मध्य प्रदेश दुकान एवं स्थापना संशोधन विधेयक 2025 पारित

    इसके साथ ही विधानसभा में मंगलवार को मध्य प्रदेश दुकान एवं स्थापना संशोधन विधेयक 2025 भी पारित हो गया। श्रम मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि 20 से कम दुकानों या स्थानों में लेबर इंस्पेक्टर केवल कमिश्नर की अनुमति से ही जाएगा। महिलाओं को समान वेतन और 24 घंटे खुली दुकानों में सुरक्षा देने की जिम्मेदारी सरकार की होगी। उन्होंने बताया कि दुकान रजिस्ट्रेशन शुल्क 250 रुपये से अधिकतम 2500 रुपये तय किया गया है, जिसका अर्थ यह नहीं कि सभी दुकानों पर 2500 रुपये लगेगा। यह राशि भविष्य में संभावित बढ़ोतरी के लिए निर्धारित की गई है।

    दूसरा अनुपूरक बजट सदन में पेश

    वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने दूसरा अनुपूरक बजट सदन में पेश किया। इस पर 4 दिसंबर को 3:30 घंटे चर्चा होगी। दूसरा अनुपूरक बजट 13476 करोड़ 94 लाख रुपये का है।

  • मप्र कैबिनेट का फैसलाः नगरीय विकास योजनाओं के लिए 500 करोड़ का अतिरिक्त बजट मंजूर

    मप्र कैबिनेट का फैसलाः नगरीय विकास योजनाओं के लिए 500 करोड़ का अतिरिक्त बजट मंजूर


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को विधानसभा के समिति कक्ष में मंत्रि-परिषद की बैठक हुई। बैठक में नगरीय क्षेत्र के विकास से जुड़ी महत्वपूर्ण योजनाओं पर निर्णय लिए गए। सरकार ने मुख्यमंत्री नगरीय क्षेत्र अधोसंरचना निर्माण योजना को वर्ष 2026-27 तक जारी रखने का फैसला किया है। इसके लिए अतिरिक्त 500 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इस बैठक में युवाओं से जुड़े मुद्दों पर भी अहम फैसले लिए गए, जिससे सरकार के विकास एजेंडे का स्पष्ट संकेत मिलता है।

    बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार, मुख्यमंत्री नगरीय क्षेत्र अधोसंरचना निर्माण योजना के अंतर्गत अब तक 1,070 करोड़ रुपये की 1,062 परियोजनाएं स्वीकृत की जा चुकी हैं। इनमें 325 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, 407 कार्य प्रगतिरत हैं और 330 परियोजनाएं डीपीआर स्वीकृति या निविदा प्रक्रिया में हैं। इस योजना के तहत पेयजल, सफाई व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट, सड़क और नाली निर्माण, श्मशान घाट, सामुदायिक भवन, रैन बसेरा और खेल मैदान जैसे विकास कार्य किए जाते हैं।

    बैठक में मध्य प्रदेश ग्रामीण संपर्कता बाह्य वित पोषित योजना के अधूरे कार्यों को पूरा करने के लिए भी मंजूरी दी गई। पहले से स्वीकृत 12 करोड़ 32 लाख रुपये के अलावा अब 9 करोड़ 45 लाख रुपये अतिरिक्त खर्च करने की अनुमति प्रदान की गई है। इसके अलावा राज्य सेवा परीक्षा 2022 में परिवहन उप निरीक्षक पद के लिए चयनित 29 में से 25 उम्मीदवारों को नई शर्तों के साथ नियुक्ति देने का निर्णय लिया गया है। इन उम्मीदवारों को दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि में एक वर्षीय कंप्यूटर डिप्लोमा और ड्राइविंग लाइसेंस के दस्तावेज उपलब्ध कराने होंगे। यदि कोई उम्मीदवार परिवीक्षा अवधि में यह दस्तावेज प्रस्तुत करने में असफल रहता है, तो उसकी सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी जाएंगी।

  • इंदौरः मुख्यमंत्री ने किया आश्रय स्थल का औचक निरीक्षण, वितरित किए कंबल

    इंदौरः मुख्यमंत्री ने किया आश्रय स्थल का औचक निरीक्षण, वितरित किए कंबल


    इंदौर।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर प्रवास के दौरान सोमवार देर रात 10:30 बजे दयालबाग स्थित आश्रय स्थल का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने वहां अस्थायी रूप रह रहे लोगों से बातचीत की और आश्रय स्थल पर उपलब्ध सुविधाओं एवं व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी आश्रयग्राहियों को कंबल वितरित किए, जिससे ठंड के मौसम में उन्हें राहत मिल सके।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने झाबुआ व दाहोद से परीक्षा देने आए विद्यार्थी कमल, दाहोद के संकेत एवं संजय तथा इंदौर में पानी टंकी की चौकीदारी कर रहे चुन्नी लाल सहित अन्य श्रमिकों से उनके यहां आने के कारण, कार्य-स्थिति और आश्रय स्थल पर मिल रही सुविधाओं के बारे में चर्चा की। उन्होंने आश्रय स्थल में ठहरे लोगों की दिनचर्या, समस्याओं और उनकी जरूरतों के बारे में भी जानकारी प्राप्त की। इस दौरान परिक्रमावासी अनिल से भी मुख्यमंत्री ने संवाद किया, जिन्होंने बताया कि वे धार्मिक परिक्रमा पूरी कर वापस लौटे हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उनसे चर्चा करते हुए कहा कि आपकी सेवा व दर्शन कर हम भी धन्य हो गए है। इस दौरान विधायक गोलू शुक्ला, सुमित मिश्रा, गौरव रणदीवे सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं इंदौर सम्भागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, कलेक्टर शिवम वर्मा, नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव व अन्य अधिकारीगण मौजूद थे।


    मुख्यमंत्री ने काल भैरव धाम में किए दर्शन

    आश्रय स्थल निरीक्षण के बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव पास ही स्थित श्री काल भैरव धाम पहुंचे, जहाँ उन्होंने मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेश की खुशहाली और जनकल्याण की कामना की।

  • इंदौर को मिली बड़ी सौगात, अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त मप्र के पहले गीता भवन हुआ लोकार्पण

    इंदौर को मिली बड़ी सौगात, अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त मप्र के पहले गीता भवन हुआ लोकार्पण


    इंदौर।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव और गीता जयंती के पावन अवसर पर सोमवार शाम को इंदौर को एक बड़ी सौगात देते हुए प्रदेश में शासकीय क्षेत्र के पहले अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त नये गीता भवन का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि इस तरह के गीता भवन प्रदेश के सभी नगर निगम, नगर पालिकाओं और नगर पंचायत स्तर पर भी बनाये जाएंगे।

    उन्होंने कहा कि इंदौर का लोकार्पित यह नया गीता भवन परंपरा एवं आधुनिकता का अनूठा संगम है। राज्य शासन द्वारा धार्मिक एवं सांस्कृतिक अध्ययन एवं इससे जुड़े विभिन्न आयामों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से गीता भवन परियोजना के अंतर्गत ऐतिहासिक गोपाल मंदिर परिसर को आधुनिक गीता भवन के रूप में विकसित कर प्रदेश को समर्पित किया गया है। इस योजना के तहत स्मार्ट सिटी द्वारा इस नये गीता भवन में विकसित विविध आधुनिक सुविधाएँ नागरिकों के लिए उपलब्ध कराई गई हैं।

    कार्यक्रम में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, विधायक गोलु शुक्ला, सुमित मिश्रा, श्रवण सिंह चावड़ा, अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम के अध्यक्ष सावन सोनकर, गौरव रणदिवे, संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह, कलेक्टर शिवम वर्मा, नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव, भारत न्यास के सचिव श्रीराम तिवारी, स्मार्ट सिटी के सीईओ अर्थ जैन विशेष रूप से मौजूद थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि मालवा की गौरवशाली विरासत, कृष्ण भक्ति और गीता का संदेश मध्य प्रदेश की दिशा तय करते हैं। मालवा क्षेत्र कृष्ण लीलाओं से अछूता नहीं है। कृष्ण भगवान ने मालवा के उज्जैन में शिक्षा ग्रहण की। मालवा की अहिल्या बाई होलकर ने देश में अनेक धर्म स्थलों का जीर्णोद्धार कराया और सांस्कृतिक धरोहरों की रक्षा की।

    गीता का प्रत्येक अध्याय ज्ञान, विज्ञान, दर्शन, योग और कर्तव्य की भावना से परिपूर्ण
    उन्होंने कहा कि गीता संघर्ष में आत्मबल और जीवन में मार्गदर्शन देती है। गीता का प्रत्येक अध्याय ज्ञान, विज्ञान, दर्शन, योग और कर्तव्य की भावना से परिपूर्ण है। भगवान श्रीकृष्ण ने अपने विराट स्वरूप के माध्यम से मानव को भय से मुक्त कर कर्तव्य के प्रति जागरूक किया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में गीता जयंती के अवसर पर अनेक रिकार्ड कायम किये गये।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गीता जयंती के अवसर पर आयोजित प्रतियोगिता के विजेताओं की घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि विजेताओं का नगद के साथ ही ई-रिक्शा, ई-बाईक, लैपटॉप आदि प्रदान किये जा रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से संघठन, साहस, धर्म की रक्षा और अन्याय के प्रतिकार का संदेश मिलता है। गीता जीवन के हर चरण में मार्गदर्शक है। गीता से भक्ति मार्ग, ज्ञान मार्ग और कर्म मार्ग से मोक्ष प्राप्ति का रास्ता भी दिखायी देता है। गीता संकट में बल देती है, संघर्ष में आत्मबल, उलझन में सारथी और अंधकार में अटल साथी बनती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा ‍कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्मार्ट सिटी परियोजना प्रारंभ की है। इस परियोजना से विरासत का संरक्षण करते हुए हम विकास की ओर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य शासन के संस्कृति विभाग के अंतर्गत वीर भारत न्यास द्वारा प्रकाशित तथा रामेश्‍वर लखनलाल पाटीदार द्वारा ‍लिखित श्रीकृष्ण चरित मानस और राघवदास पंडितदास द्वारा लिखित अमृतस्य अवंतिका का विमोचन भी किया। उन्होंने श्रीकृष्ण चरित मानस के लेखक रामेश्वर लखनलाल पाटीदार को पाँच लाख रुपये ‍दिये जाने की घोषणा भी की। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के बाद श्री संजीव मालवीय द्वारा निर्देशित कृष्ण लीलाओं पर आधारित नृत्य नाटिका को भी देखा।

    महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि इंदौर के लिये आज गौरव का दिन है। उन्होंने कहा कि गीता ने ‍सिखाया है कि अगर हम सभी अपने-अपने धर्म एवं कर्तव्यों का पालन करेंगे तो अधिकारों का संरक्षण स्वत: होगा। पिछले दो वर्षों में मध्य प्रदेश में नया सांस्कृतिक प्रवाह देखने को मिल रहा है। राज्य सरकार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नेतृत्व में विरासत से ‍विकास की ओर तेजी से बढ़ रही है।

    मुख्यमंत्री ने गोपाल मंदिर में किया पूजन-अर्चन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम के पूर्व ऐतिहासिक गोपाल मंदिर में पूजन-अर्चन किया। उन्होंने प्रदेश की खुशहाली और समृद्धि के लिए कामना की। उन्होंने गोपाल मंदिर में हुए विकास कार्यों विशेषकर अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त लाइब्रेरी और प्रदर्शनी विथिका का अवलोकन भी किया।

    अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त गीता भवन
    इंदौर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के अंतर्गत राजवाड़ा स्थित गोपाल मंदिर में नया गीता भवन बनाया गया है। इस गीता भवन की विशेषता यह है कि यहां सांस्कृतिक कार्यक्रमों, प्रवचनों और शैक्षणिक आयोजनों हेतु अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त 550 सीट का एक खूबसूरत सभागृह भी बनाया गया है।

    सकारात्मक एवं आध्यात्मिक वातावरण से युक्त 50-सीटर रीडिंग हॉल तथा आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित डिजिटल लाइब्रेरी की स्थापना की गई है। लाइब्रेरी में अध्यात्म, दर्शन, योग, ध्यान, भारतीय संस्कृति, माइंडफुलनेस तथा जीवन-प्रबंधन से संबंधित लगभग 1200 पुस्तकों का समृद्ध संग्रह उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त, डिजिटल आर्काइव के माध्यम से अनेक ई-बुक्स, ऑडियो-वीडियो व्याख्यान, ऑनलाइन कोर्स तथा अन्य डिजिटल संसाधनों तक सरलतापूर्वक पहुँच सुनिश्चित की गई है। लाइब्रेरी की आंतरिक सज्जा को प्राकृतिक रंगों, आध्यात्मिक कलाकृतियों, इनडोर पौधों तथा सौम्य प्रकाश व्यवस्था के माध्यम से इस प्रकार डिज़ाइन किया गया है कि उपयोगकर्ताओं को शांत, प्रेरणादायी तथा एकाग्रता-उन्मुख वातावरण प्राप्त हो सके।

    मंदिर परिसर के पुनर्विकसित भागों में प्रदर्शनी कक्ष विकसित किए गए हैं, जिससे यह स्थल धार्मिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ कला एवं संस्कृति को एक साथ बढ़ावा देते हुए जनता के लिए एक समावेशी सांस्कृतिक अवसंरचना भी प्रदान करेगा।

  • सहकारिता विभाग मध्य प्रदेश मिशन कर्मयोगी में निभा रहा देश में अग्रणी भूमिका

    सहकारिता विभाग मध्य प्रदेश मिशन कर्मयोगी में निभा रहा देश में अग्रणी भूमिका


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने सोमवार को मंत्रालय में मिशन कर्मयोगी कार्यक्रम के एचआर विशेषज्ञ डॉ. आर. बाला सुब्रमण्यम (बालू) तथा सहकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में विभाग में मिशन कर्मयोगी के प्रभावी क्रियान्वयन और भविष्य की रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा की गई। मंत्री सारंग ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में भारत सरकार की महत्वाकांक्षी पहल मिशन कर्मयोगी के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में मध्य प्रदेश का सहकारिता विभाग अग्रणी भूमिका निभा रहा है। मिशन कर्मयोगी से विभागीय कार्यप्रणाली में दक्षता, पारदर्शिता और नागरिक-केंद्रित प्रशासन को नई गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि सहकारिता आंदोलन को मजबूत करने में भारत सरकार की यह महत्वाकांक्षी पहल मील का पत्थर साबित होगी।

    विभाग को प्रभावी क्रियान्वयन पर मिली सराहना

    मिशन कर्मयोगी कार्यक्रम के एचआर विशेषज्ञ डॉ. आर. बाला सुब्रमण्यम (बालू) ने मध्य प्रदेश सहकारिता विभाग के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि राष्ट्रीय मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत सबसे अधिक और प्रभावी कार्य मध्य प्रदेश द्वारा किया गया है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के सफल मॉड्यूल को अन्य राज्यों में भी लागू करेंगे।

    मिशन कर्मयोगी कार्यक्रम में विभागीय उपलब्धियाँ

    सहकारिता विभाग ने अपने सभी 1122 अधिकारियों और कर्मचारियों को iGOT कर्मयोगी पोर्टल पर सफलतापूर्वक ऑनबोर्ड कर लिया है। विभागीय कर्मचारियों ने 11337 से अधिक ऑनलाइन प्रशिक्षण कोर्स सफलतापूर्वक पूर्ण किए हैं, जो सीखने की संस्कृति और सतत कौशल विकास के प्रति विभाग की प्रतिबद्धता दर्शाता है। इन प्रशिक्षणों से विभागीय कार्यक्षमता, सेवा वितरण और प्रशासनिक गुणवत्ता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

    भारत सरकार की महत्वाकांक्षी पहल मिशन कर्मयोगी
    मिशन कर्मयोगी राष्ट्रीय सिविल सेवा क्षमता विकास कार्यक्रम भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है। इसका उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों को आधुनिक, तकनीक-सक्षम और भविष्य उन्मुख प्रशासनिक क्षमताओं से लैस करना, शासन प्रणाली को कुशल, पारदर्शी और जन-केन्द्रित बनाना, प्रशिक्षण के माध्यम से निरंतर सीखने की संस्कृति विकसित करना है। कर्मयोगी पोर्टल इसी उद्देश्य की पूर्ति का प्रमुख माध्यम है, जिसके द्वारा कर्मचारी अपने कार्यक्षेत्र से संबंधित आवश्यक कौशल और ज्ञान को निरंतर अपडेट कर सकते हैं।