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  • अमेरिका में हेल्थकेयर घोटाले का खुलासा, 50 मिलियन डॉलर की धोखाधड़ी; 8 गिरफ्तार

    अमेरिका में हेल्थकेयर घोटाले का खुलासा, 50 मिलियन डॉलर की धोखाधड़ी; 8 गिरफ्तार

    जांच एजेंसियों के मुताबिक आरोपियों में नर्स, डॉक्टर, साइकोलॉजिस्ट और कायरोप्रैक्टर शामिल हैं। इन लोगों ने कथित तौर पर ऐसे मरीजों को होस्पिस केयर में दाखिल दिखाकर बिल बनाया, जिन्हें वास्तविक रूप से कोई गंभीर या अंतिम चरण की बीमारी नहीं थी। इससे स्वास्थ्य प्रणाली और टैक्सदाताओं को भारी नुकसान पहुंचा।
    यह कार्रवाई जेडी वेंस के नेतृत्व वाले टास्क फोर्स टू एलीमिनेट फ्रॉड के सहयोग से की गई। एफबीआई और अभियोजन पक्ष के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में तीन नर्सें, एक डॉक्टर, एक साइकोलॉजिस्ट और एक कायरोप्रैक्टर शामिल हैं।

    जांच में सामने आया कि आमतौर पर होस्पिस में जीवन के अंतिम चरण में मरीजों को रखा जाता है, लेकिन इन केंद्रों में मरीजों की जीवित रहने की दर राष्ट्रीय औसत 17 प्रतिशत से लगभग पांच गुना अधिक पाई गई। इससे संदेह हुआ कि मरीजों को गलत तरीके से दाखिल कर फर्जी बिलिंग की जा रही थी।

    अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच जारी है और धोखाधड़ी के नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान भी की जा रही है।

  • म्यांमार में नया सत्ता समीकरण: सेना प्रमुख मिन आंग ह्लाइंग बने राष्ट्रपति, सैन्य पकड़ और मजबूत

    म्यांमार में नया सत्ता समीकरण: सेना प्रमुख मिन आंग ह्लाइंग बने राष्ट्रपति, सैन्य पकड़ और मजबूत

    म्यांमार। म्यांमार की राजनीति में बड़ा बदलाव सामने आया है, जहां सेना के शीर्ष नेता Min Aung Hlaing ने राष्ट्रपति पद संभाल लिया है। संसद में हुए मतदान में उन्हें 584 में से 429 वोट मिले, जिससे उनकी सत्ता पर पकड़ अब औपचारिक रूप से और मजबूत हो गई है।

    यह घटनाक्रम 2021 में हुए सैन्य तख्तापलट के पांच साल बाद सामने आया है, जब मिन आंग ह्लाइंग ने निर्वाचित सरकार को हटाकर सत्ता अपने हाथ में ले ली थी। उस दौरान Aung San Suu Kyi की सरकार को बर्खास्त कर उन्हें नजरबंद कर दिया गया था, जिसके बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन और सशस्त्र संघर्ष शुरू हो गया।

    हालिया चुनावों में सेना समर्थित यूनियन सॉलिडेरिटी एंड डेवलपमेंट पार्टी ने 80 प्रतिशत से अधिक सीटों पर जीत दर्ज की। इसके अलावा, संसद की लगभग एक-चौथाई सीटों पर सेना के सदस्य बिना चुनाव के ही काबिज हैं, जिससे सैन्य प्रभाव और अधिक स्पष्ट हो जाता है।

    विश्लेषकों के अनुसार, मिन आंग ह्लाइंग का राष्ट्रपति बनना एक रणनीतिक कदम है। इसका उद्देश्य सैन्य शासन को नागरिक सरकार के रूप में प्रस्तुत कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैधता हासिल करना और सत्ता पर पकड़ बनाए रखना है।

    संविधान के प्रावधानों के चलते उन्होंने पहले ही सेना प्रमुख का पद छोड़ दिया था। इस पद की जिम्मेदारी उनके करीबी सहयोगी और पूर्व खुफिया प्रमुख को सौंप दी गई है, जिन्हें सेना में उनका विश्वस्त माना जाता है।

    म्यांमार में जारी राजनीतिक अस्थिरता और संघर्ष के बीच यह बदलाव देश के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिस पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भी नजरें टिकी हुई हैं।

  • शिवराज सिंह के बेटे के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे राहुल गांधी, अब कोर्ट में आमने-सामने होंगे राहुल-कार्तिकेय

    शिवराज सिंह के बेटे के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे राहुल गांधी, अब कोर्ट में आमने-सामने होंगे राहुल-कार्तिकेय


    जबलपुर । मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में मानहानि मामले को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय चौहान के बीच कानूनी टकराव तेज हो गया है। राहुल गांधी ने भोपाल स्थित एमपी-एमएलए कोर्ट द्वारा जारी समन को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। इस मामले में जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकल पीठ अगले सप्ताह सुनवाई करेगी।

    2018 के बयान से शुरू हुआ विवाद
    पूरा मामला 29 अक्टूबर 2018 का है, जब झाबुआ में एक चुनावी सभा के दौरान राहुल गांधी ने पनामा पेपर्स लीक का जिक्र करते हुए कार्तिकेय चौहान का नाम लिया था। हालांकि बाद में उन्होंने इसे भ्रम बताया, लेकिन यह बयान विवाद का कारण बन गया।

    कार्तिकेय ने दर्ज कराया मानहानि केस
    इस बयान को अपनी छवि खराब करने की साजिश बताते हुए कार्तिकेय चौहान ने भोपाल की एमपी-एमएलए कोर्ट में आपराधिक मानहानि का मामला दर्ज कराया। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने जानबूझकर उनके और उनके परिवार के खिलाफ गलत बयान दिया। इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 499 और 500 के तहत केस दर्ज किया गया।

    समन के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे राहुल
    भोपाल एमपी-एमएलए कोर्ट की विशेष मजिस्ट्रेट द्वारा जारी समन को चुनौती देते हुए राहुल गांधी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। प्रारंभिक सुनवाई के बाद कोर्ट ने मामले को एक सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया है। अब इस केस में हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं, जहां दोनों पक्ष आमने-सामने होंगे।

  • मध्यप्रदेश शासन और पीएम मोदी के प्रयास से स्व. गुरकीरत सिंह मनोचा का पार्थिव शरीर भारत लाया गया, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुष्प अर्पित किए

    मध्यप्रदेश शासन और पीएम मोदी के प्रयास से स्व. गुरकीरत सिंह मनोचा का पार्थिव शरीर भारत लाया गया, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुष्प अर्पित किए


    भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन प्रवास के दौरान स्व. श्री गुरकीरत सिंह मनोचा के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। गुरकीरत सिंह मनोचा की कनाडा में हुए दुखद दुर्घटना में मृत्यु ने पूरे प्रदेश और उनके परिवार को शोक में डुबो दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शासन प्रदेशवासियों के सुख-दुख में हमेशा उनके साथ है और इस कठिन समय में मनोचा परिवार के साथ संवेदनाएँ साझा करता है।

    प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की सरकार और मध्यप्रदेश शासन के संयुक्त प्रयासों से स्व. श्री गुरकीरत सिंह मनोचा का पार्थिव शरीर कनाडा से भारत लाया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस दौरान बाबा श्री महाकाल से प्रार्थना की कि परिवार को यह दुख सहने की शक्ति प्रदान करें। उन्होंने कहा कि यह समय परिवार और समाज के लिए बहुत कठिन है, लेकिन राज्य सरकार हर संभव मदद प्रदान करने के लिए तत्पर है।

    श्रद्धांजलि अर्पित करने के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव के साथ प्रभारी मंत्री श्री गौतम टेटवाल, सांसद श्री अनिल फिरोजिया और विधायक श्री अनिल जैन कालूहेड़ा भी उपस्थित थे। सभी ने स्व. श्री मनोचा को पुष्प अर्पित कर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी और उनके परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएँ व्यक्त कीं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश और केंद्र सरकार के प्रयासों से इस दुखद समय में परिवार को उचित सहायता दी जाएगी और उनके अंतिम संस्कार की सभी व्यवस्थाएँ सुव्यवस्थित रूप से की जाएँगी। उन्होंने आगे कहा कि इस प्रकार के दुखद हादसे समाज और सरकार को यह याद दिलाते हैं कि जीवन अनिश्चित है और हमें आपसी सहयोग और संवेदनशीलता के साथ ऐसे समय में खड़ा होना चाहिए।

    स्व. श्री गुरकीरत सिंह मनोचा के निधन ने उनके परिवार, मित्र और प्रदेशवासियों को गहरे शोक में डाल दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उनके योगदान और यादों को सम्मानित करते हुए कहा कि उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा और उनके परिवार के साथ शासन हर संभव मदद करेगा।

    इस श्रद्धांजलि कार्यक्रम में अधिकारियों और स्थानीय लोगों ने भी हिस्सा लिया और भावपूर्ण तरीके से अपने श्रद्धा और संवेदनाएँ व्यक्त कीं। यह कार्यक्रम उज्जैन में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक पल के रूप में याद रखा जाएगा।

  • पाकिस्तान में तेल संकट, पेट्रोल 458 और डीजल 520 रुपये प्रति लीटर, अमेरिका-ईरान युद्ध की मार

    पाकिस्तान में तेल संकट, पेट्रोल 458 और डीजल 520 रुपये प्रति लीटर, अमेरिका-ईरान युद्ध की मार


    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध के प्रभाव से पाकिस्तान के आम उपभोक्ताओं की मुश्किलें बढ़ गई हैं। देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने हाल ही में प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि अमेरिका और ईरान युद्ध के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रण से बाहर हो गई हैं। इसके कारण पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल की दरों में बेतहाशा इजाफा करना पड़ा।

    पाकिस्तान सरकार ने गुरुवार को डीजल की कीमत बढ़ाकर 520.35 रुपये प्रति लीटर और पेट्रोल की कीमत 458.40 रुपये प्रति लीटर कर दी। डीजल की कीमत में 54.9 प्रतिशत और पेट्रोल की दर में 42.7 प्रतिशत का इजाफा हुआ। पिछले महीने भी पाकिस्तान ने तेल उत्पादों की कीमतों में करीब 20 प्रतिशत की वृद्धि की थी। मंत्री ने साफ किया कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण उठाना पड़ा।

    उद्योग और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से एक जहाज कराची पोर्ट पर बुधवार को पहुंचा। इसके अलावा एक दूसरा जहाज भी दूसरे मार्ग से पोर्ट पर आया। ट्रस्ट के प्रवक्ता शारिक फारूकी ने कहा कि इस महीने खाड़ी देशों से जरूरी तेल की आपूर्ति के लिए और भी पाकिस्तानी जहाज आने की उम्मीद है। इससे पाकिस्तान अपने ऊर्जा संकट को कम करने की कोशिश कर रहा है।

    पिछले दिनों पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने यह भी कहा था कि ईरान होर्मुज से 20 अतिरिक्त पाकिस्तानी जहाजों को गुजरने की अनुमति देने पर सहमत हो गया है। इसका उद्देश्य तेल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना और बढ़ती कीमतों पर काबू पाना है।

    पश्चिम एशिया संघर्ष के समाधान के लिए पाकिस्तान और चीन ने मिलकर पांच सूत्रीय प्रस्ताव रखा है। इन प्रस्तावों में शत्रुता तुरंत समाप्त करना शांति वार्ता शुरू करना गैर-सैन्य लक्ष्यों की सुरक्षा सुनिश्चित करना नौवहन की सुरक्षा और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के पालन जैसे कदम शामिल हैं।

    युद्ध की वजह से अमेरिका में भी औसत उपभोक्ता के लिए गैस की कीमतों में 35 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। होर्मुज के बंद होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो रही है क्योंकि इस मार्ग से दुनिया के तेल का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। विशेषज्ञों के अनुसार पाकिस्तान में तेल संकट जल्द ही खत्म होने की संभावना नहीं है और कीमतें ऊपर बनी रहेंगी।

    इस पूरी स्थिति ने यह साफ कर दिया है कि पाकिस्तान का मध्यस्थ बनने का प्रयास अब उसके आम नागरिकों पर भारी पड़ रहा है। बढ़ती तेल कीमतों के चलते देश में महंगाई और आर्थिक दबाव और अधिक बढ़ गया है।

  • पीएम मोदी को ईरान पर हमले की पहले से कोई जानकारी नहीं थी, इजरायल दौरे के दौरान सरकार ने दी सफाई

    पीएम मोदी को ईरान पर हमले की पहले से कोई जानकारी नहीं थी, इजरायल दौरे के दौरान सरकार ने दी सफाई


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फरवरी में हुए इजरायल दौरे को लेकर संसद में बुधवार को अहम सवाल उठाए गए। सांसद अब्दुल वहाब ने विदेश मंत्रालय से पूछा कि क्या प्रधानमंत्री मोदी को उनके इजरायल दौरे के तुरंत बाद ईरान पर होने वाले अमेरिकी और इजरायली हमले की पहले से जानकारी थी। सवाल में यह भी पूछा गया कि भारत और इजरायल के बीच उस दौरे के दौरान हुए समझौते, समझौता ज्ञापन और अन्य संधियों की जानकारी क्या थी।

    सरकार ने इस सवाल के जवाब में स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री मोदी की 25-26 फरवरी की इजरायल यात्रा के दौरान ईरान पर हुए सैन्य हमले की कोई चर्चा नहीं हुई। विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने लिखित जवाब में कहा, प्रधानमंत्री मोदी ने इजरायल के प्रधानमंत्री के निमंत्रण पर यह राजकीय दौरा किया। इस दौरान दोनों प्रधानमंत्रियों ने भारत-इजरायल साझेदारी के सभी पहलुओं और क्षेत्रीय तथा वैश्विक मुद्दों पर व्यापक चर्चा की।

    उन्होंने आगे बताया कि इस दौरे के दौरान कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा, कृषि, मत्स्य पालन, जलीय कृषि, शिक्षा, वित्तीय सेवाएं, डिजिटल भुगतान और श्रमिकों की आवाजाही सहित कई क्षेत्रों में समझौते, समझौता ज्ञापन और आशय पत्रों पर हस्ताक्षर किए गए। लेकिन ईरान पर हुए सैन्य हमले से संबंधित कोई चर्चा इस दौरान नहीं हुई।

    प्रधानमंत्री मोदी के दौरे के एक दिन बाद यानी 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने ईरान पर बड़ा हमला किया, जिसके बाद पश्चिम एशिया में संघर्ष तेज हो गया। हमले में ईरान के शीर्ष नेतृत्व के कई नेताओं को निशाना बनाया गया। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और खाड़ी देशों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए।

    इजरायल ने भी अटकलों को खारिज किया है। इजरायली विदेश मंत्री गिदोन सार ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी को उनकी यात्रा के दौरान इन हमलों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई थी क्योंकि यह निर्णय यात्रा के बाद लिया गया। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री मोदी और भारत के साथ हमारे संबंध बहुत अच्छे हैं और हमने इस यात्रा के दौरान 2026 के लिए व्यापक एजेंडा तय किया। अमेरिका और ईरान के बीच हुई वार्ता के विफल होने के बाद ही यह कार्रवाई की गई।

    इस तरह यह साफ हो गया कि प्रधानमंत्री मोदी के इजरायल दौरे और ईरान पर हमले के बीच कोई पूर्व जानकारी या संबंध नहीं था। भारत ने अपनी विदेश नीति में पारदर्शिता बनाए रखी और दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया।

  • उज्जैन में ‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’ पर वैश्विक मंथन शुरू, विज्ञान और सनातन का अनोखा संगम

    उज्जैन में ‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’ पर वैश्विक मंथन शुरू, विज्ञान और सनातन का अनोखा संगम


    भोपाल। मध्य प्रदेश के आध्यात्मिक शहर उज्जैन में ‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’ विषय पर आधारित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन और प्रदर्शनी का शुक्रवार को भव्य शुभारंभ हुआ। इस आयोजन ने उज्जैन को एक बार फिर वैश्विक बौद्धिक विमर्श के केंद्र में स्थापित कर दिया है, जहां ‘समय’ की अवधारणा पर विज्ञान और सनातन दृष्टिकोण के समन्वय पर चर्चा हो रही है।

    कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ
    वसंत विहार स्थित अत्याधुनिक तारामंडल परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत और वरिष्ठ विचारक सुरेश सोनी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। यह आयोजन शासन, विज्ञान और संस्कृति के संगम का प्रतीक बनकर उभरा। इस अवसर पर नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी.के. सारस्वत, सांसद अनिल फिरोजिया सहित देश-विदेश के वैज्ञानिक, खगोलविद और शिक्षाविद भी उपस्थित रहे।

    साइंस सेंटर से उज्जैन को नई पहचान
    करीब 15.20 करोड़ रुपये की लागत से बने इस आधुनिक साइंस सेंटर ने उज्जैन को विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में नई पहचान दी है। केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से तैयार यह केंद्र विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराएगा।

    विज्ञान और सनातन के बीच सेतु
    सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक अंतरिक्ष विज्ञान के बीच सेतु निर्माण करना है। ‘महाकाल’ यानी समय की अवधारणा को वैज्ञानिक नजरिए से समझने का प्रयास किया जा रहा है। इसरो के वैज्ञानिकों के साथ जापान सहित कई देशों के विशेषज्ञ इसमें भाग ले रहे हैं।

    युवाओं के लिए खास आकर्षण
    इस आयोजन में युवाओं और विद्यार्थियों के लिए कई गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। सैटेलाइट मेकिंग वर्कशॉप, यूएवी और आरसी प्लेन ट्रेनिंग, टेलीस्कोप से आकाश अवलोकन और सनस्पॉट स्टडी जैसी गतिविधियां उन्हें विज्ञान से जोड़ रही हैं। डोंगला में डीप स्काई ऑब्जर्वेशन भी विशेष आकर्षण का केंद्र है।

    विकास परियोजनाओं की भी शुरुआत
    सम्मेलन के साथ ही विकास कार्यों का भी शुभारंभ हुआ। सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए 701 करोड़ रुपये की लागत से 19 किलोमीटर लंबे फोर-लेन बायपास का भूमिपूजन किया गया। इसके अलावा 22 करोड़ रुपये की लागत से विक्रमादित्य हेरिटेज होटल के विस्तार की घोषणा की गई।

    आस्था और विज्ञान का अनोखा संगम
    वक्ताओं ने कहा कि उज्जैन में महाकाल की नगरी में ‘समय’ पर हो रहा यह मंथन आस्था और आधुनिक विज्ञान के संगम का प्रतीक है। यह आयोजन न केवल नई सोच को जन्म देगा, बल्कि युवाओं को वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नवाचार की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगा।

  • अभिषेक शर्मा IPL कोड ऑफ कंडक्ट उल्लंघन के कारण फंसे, जुर्माना और डिमेरिट पॉइंट से मुसीबत में

    अभिषेक शर्मा IPL कोड ऑफ कंडक्ट उल्लंघन के कारण फंसे, जुर्माना और डिमेरिट पॉइंट से मुसीबत में


    नई दिल्ली । IPL 2026 के अपने पहले मैच में सनराइजर्स हैदराबाद के विस्फोटक सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा ने कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन मैच खत्म होने के बाद उन्हें नई मुसीबत का सामना करना पड़ा। 21 गेंदों में 4 चौकों और 4 गगनचुंबी छक्कों की मदद से 48 रन बनाने के बावजूद वह अर्धशतक से चूक गए। उनकी यह पारी काफी धुआंधार थी, लेकिन ब्लेसिंग मुजरबानी की गेंद पर बड़ा शॉट खेलने के प्रयास में डीप मिड विकेट पर खड़े वरुण चक्रवर्ती के कैच में फंस गए। कैच क्लियर नहीं था, लेकिन थर्ड अंपायर ने कई एंगल से जाँच करने के बाद उन्हें आउट करार दिया।

    मैच खत्म होने के बाद अभिषेक शर्मा पर IPL कोड ऑफ कंडक्ट का उल्लंघन करने का आरोप लगा। इसके तहत उन्हें मैच फीस का 25 प्रतिशत जुर्माना और एक डिमेरिट पॉइंट दिया गया। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि उन्होंने गलती किस कारण से की, लेकिन इसे वरुण चक्रवर्ती के कैच से जोड़कर देखा जा रहा है। अभिषेक ने आर्टिकल 2.3 के तहत लेवल 1 का उल्लंघन मानते हुए मैच रेफरी द्वारा लगाई गई सजा को स्वीकार कर लिया। IPL नियमों के अनुसार, लेवल 1 का उल्लंघन अंतिम माना जाता है और खिलाड़ी को मानना पड़ता है।

    KKR vs SRH मैच में सनराइजर्स हैदराबाद ने टॉस हारने के बावजूद दमखम दिखाया। पहले बल्लेबाजी करते हुए उन्होंने 20 ओवर में 8 विकेट के नुकसान पर 226 रन बनाए। ट्रैविस हेड ने 21 गेंदों में 46 रन बनाए और अभिषेक शर्मा ने 21 गेंदों में 48 रन। दोनों ने पहले विकेट के लिए 5.4 ओवर में 82 रन जोड़कर तूफानी शुरुआत की। हालांकि दोनों बल्लेबाज अर्धशतक से चूक गए। इसके बाद हेनरिक क्लासेन ने नंबर-4 पर आकर 52 रनों की शानदार पारी खेली। उनका साथ नीतिश कुमार रेड्डी ने 39 रन बनाकर दिया। दोनों के बीच 5वें विकेट के लिए 82 रन की साझेदारी हुई।

    केकेआर की टीम को लक्ष्य का पीछा करते हुए पूरी तरह दबाव में देखा गया। उन्होंने पूरे 20 ओवर भी नहीं टिकते हुए 161 रन पर अपनी पारी समाप्त की। जयदेव उनादकट ने 3 और नीतिश कुमार रेड्डी ने 2 विकेट चटकाए। नीतिश कुमार रेड्डी को उनके ऑलराउंड प्रदर्शन के लिए प्लेयर ऑफ द मैच का अवॉर्ड भी मिला। इस तरह, मैच के नतीजे में सनराइजर्स हैदराबाद की जीत हुई, लेकिन अभिषेक शर्मा के लिए यह दिन केवल प्रदर्शन का नहीं बल्कि आईपीएल कोड ऑफ कंडक्ट उल्लंघन के कारण विवादों का भी दिन बन गया।

  • राजेश खन्ना की शादी का अनसुना किस्सा, एक्स गर्लफ्रेंड के घर से गुजर गई बारात

    राजेश खन्ना की शादी का अनसुना किस्सा, एक्स गर्लफ्रेंड के घर से गुजर गई बारात


    नई दिल्ली । बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार और लाखों दिलों पर राज करने वाले राजेश खन्ना की जिंदगी से जुड़े कई किस्से मशहूर हैं लेकिन उनकी शादी का यह किस्सा सच में काफी दिलचस्प है। 27 मार्च 1973 को डिंपल कपाड़िया से शादी करने वाले राजेश खन्ना ने अपनी बारात का रास्ता अचानक बदल दिया था और अपनी एक्स गर्लफ्रेंड अंजू महेंद्रू के घर के सामने से बारात को निकाला।

    राजेश खन्ना की जिंदगी पर लिखी किताब कुछ तो लोग कहेंगे में इस अनोखे किस्से का जिक्र मिलता है। किताब के मुताबिक शादी वाले दिन राजेश खन्ना के घर से डिंपल कपाड़िया के घर तक का रास्ता बिल्कुल सीधा तय था। बारात उसी सीधे मार्ग से गुजरने वाली थी लेकिन सुपरस्टार ने अचानक अपनी बारात का रास्ता बदल दिया।

    उनका मकसद था कि वह अपनी एक्स-गर्लफ्रेंड अंजू महेंद्रू के घर के सामने से अपनी बारात गुजारे। इस फैसले से बारात में मौजूद कुछ लोग हैरान रह गए लेकिन जो लोग राजेश खन्ना को अच्छे से जानते थे वे इस कदम से चौंके नहीं। किताब में यह भी बताया गया है कि अंजू महेंद्रू और राजेश खन्ना का रिश्ता शादी से कुछ दिन पहले ही खत्म हो चुका था।

    राजेश खन्ना की फीमेल फैन फॉलोइंग उस समय बेहद जबरदस्त थी। किताब में वर्णन है कि जिस दिन उनकी शादी थी मुंबई के सी-फेस इलाके में पूरे दिन पुलिस का कड़ा बंदोबस्त था। डर यह था कि उनकी दीवानी फैंस शादी की खबर सुनकर खुद को नुकसान पहुंचा सकती थीं। यह बात राजेश खन्ना के स्टारडम और फैन फॉलोइंग को बखूबी दर्शाती है।

    सात साल लंबा रिलेशनशिप अंजू महेंद्रू और राजेश खन्ना के बीच था और उस रिश्ते का अचानक टूटना उनकी शादी के दिन और भी ड्रामेटिक बन गया। राजेश खन्ना ने अपनी बारात को जानबूझकर इस घर के सामने से निकालकर यह संदेश दिया कि उनका अतीत उनके वर्तमान और भविष्य को प्रभावित नहीं कर सकता।

    यह घटना न केवल उनके निजी जीवन की जटिलताओं को उजागर करती है बल्कि यह भी दिखाती है कि कैसे एक सुपरस्टार अपनी जिंदगी के बड़े फैसलों में भी अपनी अनोखी शैली और व्यक्तित्व को बनाए रखता है। आज भी इस किस्से को बॉलीवुड की अनकही कहानियों में से एक माना जाता है।

    राजेश खन्ना की शादी उनकी एक्स-लव अंजू महेंद्रू और बारात का यह अनोखा मोड़ उनके फैन फॉलोइंग और स्टारडम की मिसाल है। यह कहानी सिर्फ बॉलीवुड रोमांस की नहीं बल्कि उस समय की सामाजिक परिस्थितियों और सुपरस्टार के प्रभाव की भी झलक देती है।

  • रामानंद सागर की सीता भी हुईं फैन रणबीर कपूर की रामायण का टीजर देख बदला मन

    रामानंद सागर की सीता भी हुईं फैन रणबीर कपूर की रामायण का टीजर देख बदला मन


    नई दिल्ली । रणबीर कपूर की बहुप्रतीक्षित फिल्म रामायण को लेकर लंबे समय से दर्शकों के बीच जबरदस्त उत्साह बना हुआ है और जैसे ही इसका टीजर सामने आया वैसे ही इसकी तुलना रामायण से शुरू हो गई जिसने भारतीय टेलीविजन के इतिहास में एक अमिट छाप छोड़ी थी। इसी बीच उस कालजयी सीरियल में सीता का किरदार निभाने वाली दीपिका चिखलिया का रिएक्शन सामने आया है जिसने इस बहस को एक नया मोड़ दे दिया है।

    दिलचस्प बात यह है कि दीपिका चिखलिया शुरुआत में इस फिल्म को लेकर खास उत्साहित नहीं थीं बल्कि उन्होंने पहले कई बार यह कहा था कि रामायण जैसे पवित्र और भावनात्मक ग्रंथ को बार बार नए रूप में पेश करना सही नहीं है क्योंकि हर बार उसमें कुछ नया जोड़ने की कोशिश मूल भाव को प्रभावित कर सकती है। उनके अनुसार बार बार रीमेक बनाने से कहानी की आत्मा कमजोर होने का खतरा रहता है और यही कारण था कि वह नई रामायण फिल्मों को लेकर थोड़ी निराश भी थीं।

    लेकिन अब जब नितेश तिवारी के निर्देशन में बनी इस फिल्म का टीजर रिलीज हुआ तो उनका नजरिया पूरी तरह बदल गया। एक इंटरव्यू में उन्होंने साफ तौर पर कहा कि टीजर बेहद भव्य और समृद्ध नजर आता है और इसे बहुत खूबसूरती से बनाया गया है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अब वह इस फिल्म का इंतजार कर रही हैं और उन्हें यकीन है कि यह दर्शकों के लिए एक शानदार अनुभव साबित हो सकती है।

    दीपिका चिखलिया का यह बदलाव इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि उन्होंने रामानंद सागर की रामायण में सीता का किरदार निभाकर घर घर में अपनी अलग पहचान बनाई थी। उस समय यह सीरियल दूरदर्शन पर प्रसारित होता था और इसकी लोकप्रियता इतनी ज्यादा थी कि लोग इसे सिर्फ एक शो नहीं बल्कि आस्था से जुड़ा अनुभव मानते थे। इस शो में अरुण गोविल ने भगवान राम का किरदार निभाया था और उनकी जोड़ी दीपिका के साथ दर्शकों के दिलों में बस गई थी।

    अब वही अरुण गोविल इस नई फिल्म में एक अलग भूमिका में नजर आएंगे जहां वह दशरथ का किरदार निभा रहे हैं जबकि रणबीर कपूर भगवान राम के रूप में दिखाई देंगे। फिल्म में सीता का किरदार साई पल्लवी निभा रही हैं और रावण के रूप में यश नजर आएंगे। इसके अलावा सनी देओल, लारा दत्ता, रवि दुबे, राघव जुयाल, कुणाल कपूर और फैसल मलिक जैसे कलाकार भी अहम भूमिकाओं में दिखाई देंगे।

    यह फिल्म दो भागों में रिलीज की जाएगी जिसमें पहला पार्ट दिवाली के मौके पर दर्शकों के सामने आएगा जबकि दूसरा भाग अगले साल रिलीज होगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस फिल्म का बजट बेहद बड़ा है और इसे भारतीय सिनेमा की सबसे महंगी फिल्मों में गिना जा रहा है जिससे इसकी भव्यता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

    कुल मिलाकर कहा जाए तो जहां पहले इस फिल्म को लेकर संदेह और तुलना का माहौल था वहीं अब टीजर के बाद धीरे धीरे सकारात्मक प्रतिक्रिया सामने आ रही है और दीपिका चिखलिया जैसे प्रतिष्ठित चेहरे का समर्थन मिलना इस फिल्म के लिए एक बड़ा संकेत माना जा रहा है कि यह सिर्फ एक रीमेक नहीं बल्कि एक नए स्तर का सिनेमाई अनुभव देने की तैयारी में है।