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  • सुप्रीम कोर्ट में सरकार के जवाब से पहले विजय शाह का भावुक संदेश कहा सेना और समाज के प्रति कोई दुर्भावना नहीं

    सुप्रीम कोर्ट में सरकार के जवाब से पहले विजय शाह का भावुक संदेश कहा सेना और समाज के प्रति कोई दुर्भावना नहीं

    मध्यप्रदेश / कर्नल सोफिया को लेकर दिए विवादित बयान पर सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई से ठीक पहले मध्यप्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह ने एक बार फिर माफी मांगी है। सोशल मीडिया पर जारी वीडियो में उन्होंने कहा कि उनके शब्द किसी महिला अधिकारी भारतीय सेना या किसी समाज के अपमान के उद्देश्य से नहीं थे बल्कि वे देशभक्ति के उत्साह और आवेश में निकल गए थे।

    विजय शाह ने कहा कि उन्होंने पहले भी कई बार क्षमा याचना की है और आज एक बार फिर अंतकरण से माफी मांग रहे हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि सार्वजनिक जीवन में शब्दों की मर्यादा और संवेदनशीलता अत्यंत आवश्यक होती है और इस घटना से उन्होंने आत्ममंथन किया है। मंत्री ने भरोसा दिलाया कि भविष्य में वाणी पर पूर्ण नियंत्रण रहेगा और ऐसी गलती दोबारा नहीं होगी।

    उन्होंने कहा कि यह उनके लिए अत्यंत पीड़ादायक है कि एक छोटी सी त्रुटि से इतना बड़ा विवाद खड़ा हो गया। उन्होंने भारतीय सेना के प्रति अपने सम्मान को दोहराते हुए कहा कि सेना के लिए उनके मन में हमेशा सम्मान रहा है और रहेगा।

    यह विवाद पिछले साल 11 मई को इंदौर के महू क्षेत्र के रायकुंडा गांव में दिए गए भाषण से शुरू हुआ था। एक कार्यक्रम के दौरान ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए मंत्री विजय शाह ने ऐसा बयान दिया जिसे लेकर देशभर में तीखी प्रतिक्रिया हुई। विपक्षी दलों के साथ साथ पूर्व सैन्य अधिकारियों और सामाजिक संगठनों ने बयान को आपत्तिजनक बताया।

    मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा जहां मंत्री के खिलाफ अभियोजन की अनुमति को लेकर मध्यप्रदेश सरकार को जवाब दाखिल करना है। कोर्ट ने पहले ही राज्य सरकार को 15 दिन के भीतर निर्णय लेने के निर्देश दिए थे। अब 9 फरवरी को इस मामले में अहम सुनवाई प्रस्तावित है।सरकारी और राजनीतिक सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट से और समय मांग सकती है। तर्क दिया जा सकता है कि मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है और विस्तृत परीक्षण जरूरी है। यही रुख इस मामले की जांच कर रही तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम का भी रहा है।

    विजय शाह मामले की जांच एसआईटी कर रही है जिसमें प्रमोद वर्मा कल्याण चक्रवर्ती और वाहिनी सिंह शामिल हैं। एसआईटी पहले भी अतिरिक्त समय की मांग कर चुकी है। इसी बीच मध्यप्रदेश सरकार ने अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश करने के लिए दिल्ली भेज दी है। गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी इस संबंध में दिल्ली पहुंचे हैं।सूत्र बताते हैं कि सरकार ने इस मामले में पार्टी नेतृत्व के साथ साथ अटॉर्नी जनरल और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल से भी कानूनी सलाह ली है। संभावना है कि 9 फरवरी को अभियोजन से जुड़े बिंदुओं पर सुनवाई होगी जबकि 11 फरवरी को अन्य पहलुओं पर विचार किया जा सकता है।

  • इंदौर में टीचर्स के मीम्स बनाने वाले छात्र को स्कूल से निकाले जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता: ICSE बोर्ड और MP सरकार से 13 फरवरी तक मांगा जवाब

    इंदौर में टीचर्स के मीम्स बनाने वाले छात्र को स्कूल से निकाले जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता: ICSE बोर्ड और MP सरकार से 13 फरवरी तक मांगा जवाब


    इंदौर /का 14 वर्षीय छात्र जो इंस्टाग्राम पर टीचर्स के कुछ मीम्स शेयर करने के आरोप में लिटिल वंडर्स कॉन्वेंट स्कूल से निष्कासित किया गया था अब सुप्रीम कोर्ट की निगाहों में है। जस्टिस बी.वी. नागरथना और जस्टिस उज्जल भुयान की बेंच ने इस मामले में मध्य प्रदेश सरकार, ICSE बोर्ड और स्कूल प्रबंधन सहित सभी पक्षों को नोटिस जारी किया है और 13 फरवरी 2026 तक जवाब मांगा है।

    सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि यह मामला केवल अनुशासन का नहीं है बल्कि एक बच्चे के शैक्षणिक भविष्य से जुड़ा है। अदालत ने कहा कि छात्र को बोर्ड परीक्षा में शामिल कराने के लिए व्यावहारिक समाधान निकालना सभी संबंधित संस्थाओं की जिम्मेदारी है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि जवाब में स्पष्ट किया जाए कि छात्र की पढ़ाई जारी रखने के लिए किस संस्था की क्या भूमिका होगी।

    मामला लिटिल वंडर्स कॉन्वेंट स्कूल का है। आरोप है कि छात्र ने दो दोस्तों के साथ मिलकर एक प्राइवेट इंस्टाग्राम अकाउंट बनाया और वहां शिक्षकों से जुड़े मीम्स पोस्ट किए। स्कूल ने इसे अनुशासनहीनता माना और छात्र को निष्कासित कर दिया। परिवार ने इंदौर हाईकोर्ट में राहत मांगी, लेकिन हाईकोर्ट ने उसे अस्वीकार कर दिया।

    याचिकाकर्ता के वकील निपुण सक्सेना ने कोर्ट में दलील दी कि 13-14 साल के बच्चे की डिजिटल गतिविधियों को अपराध के तौर पर नहीं देखा जा सकता। स्कूल की कार्रवाई अत्यधिक कठोर थी। उन्होंने कहा कि अगर निष्कासन को सही माना गया, तो स्कूलों को बच्चों की निजी डिजिटल लाइफ पर असीमित निगरानी का अधिकार मिल जाएगा, जो उनके निजता के अधिकार का उल्लंघन है।

    इंदौर हाईकोर्ट ने पहले छात्र को राहत देने से इनकार करते हुए कहा था कि समाज में सख्त संदेश जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट अब शिक्षा के अधिकार और अनुशासन के बीच संतुलन बनाने की पहल कर रहा है। अदालत का मुख्य फोकस यह है कि छात्र का शैक्षणिक सत्र बाधित न हो।अगली सुनवाई 13 फरवरी को होगी। इस दिन कोर्ट यह तय कर सकता है कि छात्र उसी स्कूल से परीक्षा देगा या बोर्ड उसे किसी अन्य सेंटर से परीक्षा देने की विशेष अनुमति देगा। पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि बच्चे की शिक्षा किसी भी कीमत पर बाधित नहीं होनी चाहिए।

  • प्रबंध संचालक द्वारा इंदौर मेट्रो परियोजना निरीक्षण एवं प्रगति की समीक्षा

    प्रबंध संचालक द्वारा इंदौर मेट्रो परियोजना निरीक्षण एवं प्रगति की समीक्षा

    इंदौ। मध्य प्रदेश के इंदौर मेट्रो परियोजना के अंतर्गत एमपी मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड के प्रबंध संचालक एस. कृष्ण चैतन्य ने शुक्रवार को परियोजना कार्यों का स्थलीय निरीक्षण कर विस्तृत प्रगति की समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान उन्होंने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, समयबद्ध प्रगति तथा प्रस्तावित परिचालन से जुड़े विभिन्न तकनीकी एवं प्रबंधकीय पहलुओं का अवलोकन किया।

    प्रबंध संचालक एस. कृष्ण चैतन्य ने निर्देश दिए कि सभी निर्माण कार्य निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप एवं तय समयसीमा में पूर्ण किए जाएँ, ताकि यात्रियों को सुरक्षित, विश्वसनीय एवं आधुनिक मेट्रो सेवा उपलब्ध कराई जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि इंदौर मेट्रो के आगामी सेक्शनों को शीघ्र ही परिचालन हेतु तैयार किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने सभी ठेकेदारों एवं अधिकारियों को कार्यस्थलों पर उपस्थिति बढ़ाने तथा उपलब्ध मैनपावर का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    प्रबंध संचालक ने मालवीय नगर से स्टेशन SC-02 तक के खंड का निरीक्षण किया। इस दौरान स्टेशन परिसर, अप्रोच मार्ग, यात्री सुविधाओं एवं फिनिशिंग कार्यों की गुणवत्ता का जायजा लिया गया तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए गए। समीक्षा बैठक में अधिकारियों द्वारा निर्माण कार्यों की वर्तमान स्थिति एवं आगामी कार्य योजना की जानकारी प्रस्तुत की गई। विशेष रूप से पैकेज IN-02, IN-03, IN-04, IN-05 तथा IN-07 की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई। प्रबंध संचालक ने भूमिगत एवं एलिवेटेड खंडों के मध्य बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए कार्यों को गति प्रदान करने पर विशेष जोर दिया। निरीक्षण एवं समीक्षा के दौरान परियोजना से जुड़े अधिकारी एवं कर्मचारी भी उपस्थित रहे।

  • खेतों में ड्रोन तकनीक उपयोग, 2500 एकड़ में स्प्रे कर फसलों का किया उपचार

    खेतों में ड्रोन तकनीक उपयोग, 2500 एकड़ में स्प्रे कर फसलों का किया उपचार

    राजगढ़। कलेक्टर डॉ. गिरीशकुमार मिश्रा के निर्देशन में परंपरागत खेती के तौर-तरीकों को पीछे छोड़ते हुए राजगढ़ जिले के किसानों ने आधुनिक कृषि की दिशा में एक बड़ी छलांग लगाई है। अंकुरण फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी मऊ ने जिले में पहली बार ड्रोन तकनीक का उपयोग कर 2500 एकड़ भूमि पर फसलों का उपचार (स्प्रे) कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।

    कंपनी के संचालक श्याम राजपूत ने बताया कि कृषि ड्रोन का उपयोग केवल एक नवाचार नही, बल्कि किसानों की बड़ी समस्याओं का समाधान है। इससे समय की बचत के साथ पूरी फसल में एक समान दवा का छिड़काव होता है, जिससे बर्बादी रुकती है। घने क्षेत्रों में भी स्प्रे संभव है,जहां हस्तचालित पंप के साथ जाना मुश्किल था। छिड़काव के दौरान किसानों को जहरीले जीवों और कीटनाशकों के सीधे शारीरिक संपर्क से होने वाले खतरों से सुरक्षा मिली है।

    कंपनी के तकनीकी ऑपरेटर नीरज राजपूत ने बताया कि रबी सीजन में टीम ने 3 अत्याधुनिक ड्रोन्स की मदद से सरसों, चना और मसूर जैसी फसलों को कवर किया है, जिसमें 2500 एकड़ का यह सफर तो महज एक शुरुआत है, हमारा लक्ष्य अगले साल दस हजार एकड़ तक पहुंचना है।वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी सारंगपुर राजेश राजपूत ने बताया कि कृषि ड्रोन तकनीक का जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन उत्साहजनक है। खेतों में ड्रोन से फसलों पर छिड़काव के काफी सकारात्मक और प्रभावी परिणाम देखने को मिल रहे है। इससे न केवल कीटनाशकों का सटीक उपयोग सुनिश्चित हो रहा है, बल्कि फसल की गुणवत्ता में भी सुधार आ रहा है।

    उपसंचालक कृषि सचिन जैन का कहना है कि राजगढ़ जिले में ड्रोन तकनीक के माध्यम से किया जा रहा यह नवाचार कृषि क्षेत्र में एक नई क्रांति ला रहा है। तकनीक के इस समावेश से निश्चित ही हमारे जिले के किसान अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपना रहे है।शासन की मंशा के अनुरूप यह कदम किसानों की आय बढ़ाने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने में सहायक सिद्ध होगा।

  • इटारसी में कार नहर में गिरी, 3 की मौत: युवक फंसे रहे कार में, विंडो तोड़ते रहे, देखते ही देखते डूब गए

    इटारसी में कार नहर में गिरी, 3 की मौत: युवक फंसे रहे कार में, विंडो तोड़ते रहे, देखते ही देखते डूब गए


    इटारसी/पथरोटा मार्ग शुक्रवार देर रात एक तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर पथरोटा की बड़ी नहर की रेलिंग तोड़ते हुए गहरे पानी में गिर गई कार में सवार तीन युवक मौके पर ही मृत पाए गए। मृतकों की पहचान रैसलपुर निवासी 30 वर्षीय लकी पटेल पिता भवानी शंकर पटेल जो कार चला रहा था, 26 वर्षीय शिवम तिवारी पिता महेश तिवारी निवासी खीर पानी और 19 वर्षीय अभय उर्फ अभि चौहान पिता राकेश चौहान, जय प्रकाश नगर, पुरानी इटारसी के रूप में हुई।

    प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि इटारसी की ओर से आ रही ग्रे रंग की कार अचानक पुल की रेलिंग तोड़ती हुई सीधे नहर में समा गई। एसडीआरएफ प्लाटून कमांडर अमृता दीक्षित ने बताया कि कार सवार युवक विंडो खोलने और कांच तोड़कर बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे, साथ ही चिल्ला भी रहे थे, लेकिन कार के लॉक होने की वजह से वे गहरे पानी में डूब गए।

    हादसा देख स्थानीय लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी। एक स्थानीय युवक ने नहर में कूदकर जान की परवाह किए बिना बचाने की कोशिश की, लेकिन तेज बहाव और गहराई के कारण सफल नहीं हो सका। पुलिस और एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची और करीब ढाई घंटे के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद कार को नहर से बाहर निकाला गया। कार के दरवाजे खोलते ही तीनों युवक मृत पाए गए।

    एसडीआरएफ ने बताया कि कार में युवक संघर्ष करते रहे, कांच तोड़ने के निशान मिले, लेकिन वे बाहर नहीं निकल सके। परिजनों के अनुसार तीनों सिवनी मालवा गए थे और लौटते समय यह हादसा हुआ। मृतक शिवम तिवारी के पिता महेश ने बताया कि सुबह करीब छह बजे हादसे की सूचना मिली थी। अभय चौहान के पिता राकेश ने बताया कि रात में बेटे से फोन पर बात हुई थी, अभय ने कहा था कि कार से लौट रहा है और मां से खाने को लेकर बात की थी। अभय परिवार का इकलौता बेटा था।

    लकी पटेल की मां वैष्णो देवी यात्रा पर हैं। लकी के पिता पहले ही देहांत हो चुके हैं और बड़े भाई की कुछ साल पहले नर्मदा में डूबने से मौत हो गई थी। लकी के घर में दो बहनें हैं, एक शादीशुदा और दूसरी अविवाहित शुभांगी।हादसे ने इटारसी और आसपास के इलाकों में मातम मचा दिया है। ग्रामीणों और परिवारवालों में गहरी शोक की लहर है। पुलिस हादसे के कारणों की जांच में लगी है और सुरक्षा उपायों की समीक्षा कर रही है। का हिस्सा बन गए हैं

  • पीएम मोदी ने बजट चर्चा में दिग्विजय सिंह के भाषण पर साधा चुटकी भरा तंज कहा– क्या यही दिन देखना बाकी रह गए थे?

    पीएम मोदी ने बजट चर्चा में दिग्विजय सिंह के भाषण पर साधा चुटकी भरा तंज कहा– क्या यही दिन देखना बाकी रह गए थे?


    भोपाल :संसद में बजट पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिग्विजय सिंह के भाषण पर चुटकी ली और मुस्कुराते हुए कहा कि क्या यही दिन देखना बाकी रह गए थे प्रधानमंत्री ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि मैं कल एक माननीय सदस्य को सुन रहा था जो अपने आप को राजा कहलाने में गर्व महसूस करते हैं लेकिन वही आर्थिक असमानता की चर्चा कर रहे थे मोदी ने सवालिया अंदाज में कहा बताइए जो खुद को राजा माने और आर्थिक असमानता की बात करे क्या यही दिन देखना बाकी रह गए थे दिग्विजय सिंह ने अपने भाषण में सामाजिक सौहार्द और समरसता बिगड़ने के साथ आर्थिक असमानता बढ़ने की चिंता जताई थी

    संसद में विपक्ष के लगभग हर सांसद ने सरकार को घेरने की कोशिश की लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के जवाब ने ‘राजा साहब’ को सीधे तंज की जद में ला दिया

    इसी बीच लाड़ली बहनों पर विवादित बयान देने वाले मंत्री करण सिंह वर्मा ने सफाई दी और कहा कि उन्होंने ऐसा कुछ नहीं कहा उन्होंने केवल लाड़ली बहनों को भोजन पर आमंत्रित किया था उन्होंने अपने बयान पर खेद भी जताया विपक्ष ने इसकी कड़ी निंदा की वहीं इस तरह के बयान भाजपा सरकार के लिए किरकिरी का सबब बन सकते हैं इससे पहले भी मंत्री विजय शाह को लाड़ली बहनों के बयान को लेकर विवाद का सामना करना पड़ा था

    सियासी हलचल श्योपुर में तब और तेज हुई जब भाजपा पूर्व विधायक दुर्गालाल विजय के घर चोरी की घटना सामने आई चोरों ने एसी का पंखा ही चोरी कर लिया कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल ने इस घटना को लेकर खुशी जाहिर की और कहा ऐसे चोर को पुरस्कार मिलना चाहिए उन्होंने तंज कसा कि जब सत्ताधारी दल के नेता के घर में सुरक्षा नहीं है तो आम आदमी की सुरक्षा का अंदाजा लगाया जा सकता है

    भोपाल में मीडिया के सवालों से बचते हुए मंत्री विजय शाह सीधे कार में बैठे और शीशा चढ़ाकर रवाना हो गए उनका कर्नल सोफिया पर दिया गया विवादित बयान 9 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए तय है मंत्री की चुप्पी सियासी गलियारों में चर्चाओं को और बढ़ा रही है लोग कह रहे हैं इसे ही कहते हैं दूध का जला छाछ को भी फूंक फूंक कर पीता है वहीं कुछ का कहना है कहीं पार्टी ने मंत्री की जुबान पर ताला तो नहीं लगा दिया

    इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि संसद की बहस और सियासी बयानबाज़ियों ने एक बार फिर सियासी गर्मी बढ़ा दी है पीएम के तंज से लेकर मंत्री के बयान और मीडिया से बचने की कवायद तक ये सब राजनीतिक हलचल

  • 9 फरवरी को बंधक श्रम उन्मूलन दिवस के अवसर पर नयी श्रमिक संहिताओं पर कार्यशाला

    9 फरवरी को बंधक श्रम उन्मूलन दिवस के अवसर पर नयी श्रमिक संहिताओं पर कार्यशाला


    भोपाल! श्रम विभाग ने 9 फरवरी को ‘बंधक श्रम उन्मूलन दिवस’ पर कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेन्शन सेंटर (मिंटो हॉल) में कार्यशाला का आयोजन किया है। उद्घाटन सुबह 10 बजे श्रम मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल करेंगे। कार्यशाला में राज्य स्तरीय एक्शन प्लान का विमोचन भी होगा।

    पूरे मध्य प्रदेश में महीनेभर चलेगा अभियान

    बंधक श्रम (बंधुआ मजदूरी) कराने वालों के विरुद्ध मध्यप्रदेश का श्रम विभाग 9 फरवरी ‘बंधक श्रम उन्मूलन दिवस’ से विशेष अभियान भी शुरू करने जा रहा है। उल्लेखनीय है कि श्रम मंत्री की पहल पर विभाग ने बाल एवं बंधक श्रम को रोकने और जागरुकता लाने एक विशेष ‘वेदा पहल’ की शुरुआत की है।

    कार्यशाला के प्रमुख चार बिंदु

    पहला: बाल एवं कुमार श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत राज्य एक्शन प्लान के प्रभावी क्रियान्वयन पर चर्चा होगी। इसमें अधिनियम के अंतर्गत निरीक्षण, पहचान, बचाव एवं पुनर्वास की प्रक्रिया पर चर्चा की जाएगी।

    दूसरा: बंधुआ श्रम (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 के क्रियान्वयन के 50 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर अधिनियम की उपलब्धियों एवं वर्तमान चुनौतियों पर विचार किया जाएगा।

    तीसरा: नई चार श्रम संहिताओं के माध्यम से श्रमिकों, विशेषकर महिलाओं के अधिकारों, सुरक्षा एवं सामाजिक संरक्षण से जुड़े प्रावधानों की जानकारी दी जाएगी।

    चौथा: राज्य एक्शन प्लान के माध्यम से विभागीय समन्वय, प्रवर्तन व्यवस्था एवं जनजागरूकता को सुदृढ़ करने की रणनीति प्रस्तुत की जाएगी।

    श्रम विभाग के अनुसार, कार्यशाला का उद्देश्य कानून, नीति और जमीनी क्रियान्वयन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है, ताकि राज्य में बाल एवं बंधुआ श्रम के उन्मूलन की दिशा में प्रभावी और ठोस परिणाम सुनिश्चित किए जा सकें।

  • MP के 11 शहरों में तापमान 10 डिग्री से नीचे, कटनी सबसे ठंडा, नए वेस्टर्न डिस्टरबेंस से मावठे की संभावना

    MP के 11 शहरों में तापमान 10 डिग्री से नीचे, कटनी सबसे ठंडा, नए वेस्टर्न डिस्टरबेंस से मावठे की संभावना


    भोपाल। फरवरी में ठंड ने मध्य प्रदेश के उत्तरी हिस्सों में फिर से दस्तक दी है। बीती रात ग्वालियर खजुराहो सहित 11 शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे रिकॉर्ड किया गया। कटनी शहडोल और छतरपुर इस ठंड की सूची में सबसे आगे हैं। शुक्रवार को तेज सर्द हवाओं ने ठंड का असर बढ़ाया, और शनिवार को भी सर्दी का असर जारी रहेगा।

    मौसम विभाग के अनुसार, वेस्टर्न डिस्टरबेंस और साइक्लोनिक सर्कुलेशन की वजह से प्रदेश में हाल के दिनों में ओले और बारिश का दौर चला। घना कोहरा भी प्रभावित रहा। सिस्टम कमजोर होने के बाद पिछले दो दिनों से ठंड और बढ़ गई है। सबसे ठंडा शहर कटनी रहा जहां करौंदी में तापमान 5.6 डिग्री तक गिरा। शहडोल छतरपुर और खजुराहो भी बेहद ठंडे रहे जबकि रीवा में 7 डिग्री, राजगढ़ और उमरिया में 8 डिग्री न्यूनतम तापमान रिकॉर्ड किया गया। शाजापुर में 8.1 डिग्री, नौगांव और पचमढ़ी में 8.6 डिग्री सतना में 9.2 डिग्री, दमोह में 9.5 डिग्री और मंडला तथा सीधी में 9.8 डिग्री तापमान रहा।

    पांच बड़े शहरों में ग्वालियर सबसे ठंडा रहा, यहां न्यूनतम 8.7 डिग्री दर्ज किया गया। भोपाल में 10.2 डिग्री, इंदौर में 10.9 डिग्री, जबलपुर में 11.6 डिग्री और उज्जैन में 12.2 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया। शुक्रवार को तेज सर्द हवाओं ने ठंड और बढ़ा दी और शनिवार को भी सर्दी का असर जारी रहने का अनुमान है।

    मौसम विभाग के अनुसार वेस्टर्न डिस्टरबेंस और साइक्लोनिक सर्कुलेशन के चलते हाल के दिनों में प्रदेश में ओले और बारिश हुई थी साथ ही घना कोहरा भी रहा। सिस्टम कमजोर होने के बाद पिछले दो दिनों से ठंड बढ़ी है। 8 फरवरी को हल्का कोहरा रहेगा, बारिश का कोई अलर्ट नहीं है, लेकिन ठंड का असर बढ़ेगा। 9 फरवरी को कई जिलों में हल्का से मध्यम कोहरा रहेगा बारिश की संभावना नहीं है।

    पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में 8 फरवरी से नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय हो रहा है, जिससे जल्द ही प्रदेश में मौसम प्रभावित होगा। 10 फरवरी से मावठा गिरने का अनुमान है, यानी अगले चार दिन प्रदेश में बारिश या ओले नहीं पड़ने की संभावना है। उज्जैन में सुबह का तापमान 13 डिग्री था और हल्की ठंड महसूस हुई। धूप निकलने के साथ ही दिन का अधिकतम तापमान 29 डिग्री तक पहुंचने का अनुमान है। ग्वालियर में रातें अभी भी ठंडी हैं, जबकि दिन में धूप के कारण गर्मी का एहसास होता है। इंदौर में शनिवार सुबह ठंड का असर साफ नजर आया, हल्का कोहरा और ठंडी हवाओं ने ठंड बढ़ा दी। ग्वालियर-चंबल, सागर, रीवा और उज्जैन संभाग के जिलों में सुबह हल्का से मध्यम कोहरा देखने को मिला। मौसम विभाग के अनुसार धूप निकलने के बाद ठंड से कुछ राहत मिलेगी।

  • बांग्लादेश चुनाव में भारत और अल्पसंख्यक सबसे बड़े मुद्दे, मैनिफेस्टो में क्या कह रहीं प्रमुख पार्टियां?

    बांग्लादेश चुनाव में भारत और अल्पसंख्यक सबसे बड़े मुद्दे, मैनिफेस्टो में क्या कह रहीं प्रमुख पार्टियां?

    NP) और जमात-ए-इस्लामी के मैनिफेस्टो में भारत और हिंदू समुदाय को लेकर अपनाए गए रुख पर सबकी निगाहें टिकी हैं।

    भारत को लेकर पार्टियों की सोच

    17 साल बाद देश लौटे तारिक रहमान ने BNP की कमान संभालते ही “बांग्लादेश फर्स्ट” को अपना मूल मंत्र बताया है। पार्टी का घोषणापत्र भी इसी नीति के इर्द-गिर्द घूमता है। तारिक रहमान का कहना है कि बांग्लादेश न तो किसी देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करेगा और न ही अपने मामलों में दखल स्वीकार करेगा। उनका चर्चित नारा— “न दिल्ली, न पिंडी, पहले बांग्लादेश”—भारत के लिए खास मायने रखता है।

    यह रुख ऐसे समय सामने आया है जब यूनुस सरकार के दौरान बांग्लादेश की पाकिस्तान से बढ़ती नजदीकियों को लेकर सवाल उठे थे। माना जा रहा है कि तारिक रहमान इस दिशा में अलग संतुलन साधने की कोशिश कर रहे हैं।

    दूसरी ओर, जमात-ए-इस्लामी ने अपने घोषणापत्र में भारत के साथ शांतिपूर्ण, मित्रवत और सहयोगी संबंधों की वकालत की है। चौंकाने वाली बात यह है कि पार्टी के दस्तावेज़ में पाकिस्तान का कोई उल्लेख नहीं है। हालांकि जमात ने मुस्लिम देशों को प्राथमिकता देने की बात कही है और अमेरिका, यूरोपीय संघ, जापान व कनाडा जैसे पश्चिमी देशों से भी रिश्ते मजबूत करने का संकेत दिया है।

    हिंदुओं और अल्पसंख्यकों पर क्या वादे?

    हिंदुओं की सुरक्षा इस चुनाव का एक अहम मुद्दा बन चुकी है। BNP ने अपने घोषणापत्र में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों की जान, संपत्ति और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के लिए सख्त कानूनी प्रावधान लागू करने का वादा किया है। इसके अलावा सभी धर्मों के धार्मिक नेताओं के लिए भत्ते और कल्याणकारी योजनाओं की भी बात कही गई है।

    वहीं जमात-ए-इस्लामी ने हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर कोई स्पष्ट और ठोस वादा नहीं किया है। पार्टी ने केवल धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यकों को प्रतिनिधित्व देने की बात अपने मैनिफेस्टो में शामिल की है।

    कुल मिलाकर, इस चुनाव में भारत से रिश्ते और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा ऐसे मुद्दे हैं, जो बांग्लादेश की आने वाली राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं।
    …………

  • शाही मंडप नहीं, अपना आशियाना बना यादगार; शादी के खर्च से खरीदा घर, कपल की हर तरफ तारीफ

    शाही मंडप नहीं, अपना आशियाना बना यादगार; शादी के खर्च से खरीदा घर, कपल की हर तरफ तारीफ

    नई दिल्ली। आज के दौर में शादियों को भव्य बनाने की होड़ किसी से छिपी नहीं है। डेस्टिनेशन वेडिंग, लाखों का सजावटी मंडप, डिजाइनर कपड़े और सैकड़ों मेहमानों की दावत—इन सब पर लोग अपनी जमा-पूंजी तक खर्च कर देते हैं। लेकिन सोशल मीडिया पर इन दिनों एक ऐसा कपल चर्चा में है, जिसने इस चलन से हटकर मिसाल पेश की है।

    इस जोड़े ने एक दिन के शोर-शराबे और दिखावे पर लाखों रुपये खर्च करने की बजाय उसी रकम से अपना घर खरीदने का फैसला किया। यही नहीं, दोनों ने अपने नए घर में ही बेहद सादगी से शादी रचाई, जो अब लोगों के लिए प्रेरणा बन गई है।

    नए घर में लिए सात फेरे

    वायरल हो रहे वीडियो में दिखाया गया है कि कपल ने अपने नए घर के लिविंग रूम को ही मंडप बना लिया। परिवार के चुनिंदा सदस्य और करीबी दोस्तों की मौजूदगी में रस्में निभाई गईं। वीडियो में दूल्हे के भाई ने बताया कि महंगी शादी की बजाय घर में निवेश करने का फैसला सोच-समझकर लिया गया था।

    यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इस फैसले की खुलकर तारीफ कर रहे हैं।

    सोशल मीडिया पर मिल रही जमकर सराहना

    यूजर्स इस शादी को “समझदारी भरा कदम” बता रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि दिखावे के लिए कर्ज में डूबने से बेहतर है भविष्य की मजबूती पर ध्यान देना। कुछ यूजर्स ने लिखा कि समाज की परवाह किए बिना ऐसा फैसला लेना वाकई काबिले-तारीफ है। वहीं, कई लोग इसे आने वाली पीढ़ी के लिए एक बेहतरीन उदाहरण बता रहे हैं।

    इस कपल ने साबित कर दिया कि शादी की यादें खर्च से नहीं, फैसलों की समझदारी से खास बनती हैं।