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  • शर्मिला टैगोर को एक्शन-कट बोलना कुणाल खेमू का सपना था, बोले- लेजेंड को डायरेक्ट कर गर्व महसूस हुआ

    शर्मिला टैगोर को एक्शन-कट बोलना कुणाल खेमू का सपना था, बोले- लेजेंड को डायरेक्ट कर गर्व महसूस हुआ


    नई दिल्ली। कुणाल खेमू इन दिनों अपनी आने वाली फिल्म वाइब को लेकर चर्चा में हैं। फिल्म का ट्रेलर रिलीज होने के बाद इसकी कहानी और स्टारकास्ट को लेकर दर्शकों की दिलचस्पी बढ़ गई है। इस फिल्म की खास बात यह भी है कि कुणाल खेमू ने इसमें अभिनय करने के साथ निर्देशन और लेखन की जिम्मेदारी भी संभाली है। फिल्म में प्रीति जिंटा स्पर्श श्रीवास्तव वंशिका धीर दिनेश लाल यादव और दिग्गज अभिनेत्री शर्मिला टैगोर अहम भूमिकाओं में नजर आएंगी। शर्मिला टैगोर का इस फिल्म से जुड़ना कुणाल के लिए इसलिए भी खास है क्योंकि वह उनकी सास हैं।

    फिल्म में शर्मिला टैगोर को कास्ट करने के अनुभव को याद करते हुए कुणाल ने बताया कि उनके लिए यह फैसला आसान नहीं था। कुणाल के मुताबिक शर्मिला जी के साथ फिल्म को लेकर बातचीत कुछ ऐसी थी जैसे अंधेरे में तीर चलाना। उन्होंने शर्मिला से फिल्म का सिनोप्सिस मांगे जाने पर उन्हें पूरी कहानी के बारे में बताया। इसके बाद शर्मिला टैगोर ने फिल्म के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। कुणाल के लिए यह पल बेहद खास था क्योंकि वह लंबे समय से किसी दिग्गज कलाकार को बतौर निर्देशक एक्शन और कट बोलने का सपना देख रहे थे।

    कुणाल ने बताया कि शर्मिला टैगोर को डायरेक्ट करना उनके लिए एक ऐसा चेकबॉक्स था जिसे वह काफी समय से पूरा करना चाहते थे। उनके मुताबिक वह इस बात को लेकर बेहद खुश और गर्व महसूस करते हैं कि उन्हें शर्मिला जैसी दिग्गज अभिनेत्री को निर्देशक के तौर पर निर्देशित करने का मौका मिला। उनके लिए यह अनुभव सिर्फ काम का हिस्सा नहीं बल्कि निजी और पेशेवर दोनों स्तरों पर बेहद यादगार रहा।

    वहीं फिल्म की ट्रेलर लॉन्चिंग के दौरान प्रीति जिंटा ने भी कुणाल खेमू से अपनी नाराजगी जाहिर की। प्रीति ने मजाकिया अंदाज में कहा कि फिल्म में उन्हें ज्यादा फनी सीन नहीं दिए गए जबकि शूटिंग के दौरान वह कॉमेडी से भरपूर अनुभव की उम्मीद कर रही थीं। उन्होंने बताया कि फिल्म की शूटिंग आसान नहीं थी और कलाकारों ने कई बार दिन में 16 से 18 घंटे तक काम किया।

    इस दौरान कुणाल की पत्नी और अभिनेत्री सोहा अली खान भी मौजूद थीं। उन्होंने कुणाल के मजाकिया अंदाज की तारीफ करते हुए कहा कि शादी हो या फ्यूनरल कुणाल लोगों को हंसा ही देते हैं। सोहा के मुताबिक दोनों परिवारों में कुणाल सबसे ज्यादा फनी हैं।

    कुणाल खेमू के निर्देशन करियर की बात करें तो उन्होंने साल 2024 में मडगांव एक्सप्रेस के साथ बतौर निर्देशक शुरुआत की थी। प्रतीक गांधी अविनाश तिवारी और दिव्येंदु स्टारर इस फिल्म को दर्शकों और क्रिटिक्स से अच्छी प्रतिक्रिया मिली थी। इसके बाद अब कुणाल वाइब के जरिए निर्देशन में एक और कदम आगे बढ़ा रहे हैं।

    वाइब में कुणाल के साथ काम करने वाली स्टारकास्ट भी काफी दिलचस्प है। फिल्म में शर्मिला टैगोर जैसी दिग्गज अभिनेत्री के साथ प्रीति जिंटा भी नजर आएंगी। फिल्म 18 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। वहीं कुणाल बतौर अभिनेता गोलमाल 5 में भी नजर आएंगे जिसमें अजय देवगन अक्षय कुमार अरशद वारसी तुषार कपूर और शरमन जोशी जैसे कलाकार शामिल हैं।

  • यूक्रेन में मिसाइलों के साए में पढ़ाई, जमीन के नीचे बने 74 स्कूल, बंकरों में तैयार हो रही नई पीढ़ी

    यूक्रेन में मिसाइलों के साए में पढ़ाई, जमीन के नीचे बने 74 स्कूल, बंकरों में तैयार हो रही नई पीढ़ी


    नई दिल्ली। चार साल से ज्यादा समय से रूस के ड्रोन और मिसाइल हमलों का सामना कर रहे यूक्रेन में बच्चों की पढ़ाई का तरीका भी युद्ध के बीच बदल गया है। देश में अब 74 पूरी तरह भूमिगत स्कूल संचालित हो रहे हैं, जहां जमीन के ऊपर से सिर्फ खेल का मैदान या फुटबॉल टर्फ दिखाई देता है, लेकिन कई मीटर नीचे कंक्रीट की मजबूत दीवारों के बीच बच्चों की कक्षाएं चल रही हैं। सुरंगनुमा गलियारों में बने क्लासरूम, बेंचों पर बैठे बच्चे और ब्लैकबोर्ड पर लिखे नए पाठ इस बात की तस्वीर पेश करते हैं कि युद्ध के बीच भी शिक्षा को जारी रखने की कोशिश कैसे हो रही है।

    दक्षिणी यूक्रेन के औद्योगिक शहर जापोरिजिया में स्कूल खुलने का दृश्य किसी साइंस-फिक्शन फिल्म जैसा नजर आता है। शहर युद्ध के मोर्चे से महज 15 किलोमीटर दूर है और लगातार ड्रोन व मिसाइल हमलों के बावजूद यहां बच्चों की पढ़ाई को जारी रखने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। माता-पिता के लिए ये भूमिगत स्कूल डर के बीच सुरक्षा और बच्चों की शिक्षा दोनों का भरोसा बन गए हैं।

    ‘पाताल में गए बिना बच्चों को पढ़ाना मुश्किल’

    39 वर्षीय किराना दुकानदार ऑलेक्सांद्र लागिन के दो बेटे भी जमीन के नीचे बने स्कूल में पढ़ते हैं। उनका कहना है कि ड्रोन और मिसाइल हमलों के दौर में बच्चों को सुरक्षित रखते हुए सामान्य तरीके से पढ़ाना बेहद मुश्किल हो गया है। जापोरिजिया ने इस चुनौती से निपटने के लिए भूमिगत स्कूलों का विकल्प अपनाया है।

    दिलचस्प यह है कि युद्ध क्षेत्र के इतने करीब होने के बावजूद जापोरिजिया बच्चों को निर्बाध शिक्षा देने के मामले में राजधानी कीव से बेहतर तैयार नजर आता है।

    कीव में सायरन बजते ही पढ़ाई बंद

    कीव के स्कूलों में हवाई हमले का अलर्ट शिक्षा व्यवस्था को सीधे प्रभावित करता है। यहां एक स्कूल के दिन में औसतन 158 मिनट तक हवाई सायरन बजते रहते हैं। सायरन शुरू होते ही बच्चों को सामान्य बेसमेंट में ले जाया जाता है। वहां जगह सीमित होने के कारण पढ़ाई रुक जाती है और बच्चे अलर्ट खत्म होने का इंतजार करते हैं।

    इसके उलट जापोरिजिया में यूरोपीय फंडिंग की मदद से 10 अत्याधुनिक भूमिगत स्कूल बनाए गए हैं। इन स्कूलों की खास डिजाइन के कारण हवाई हमले के सायरन के दौरान भी कक्षाएं जारी रखी जा सकती हैं।

    बंकर में सुरक्षा के साथ पढ़ाई की पूरी व्यवस्था

    भूमिगत स्कूलों को सिर्फ कंक्रीट की मोटी दीवारों से सुरक्षित नहीं बनाया गया है, बल्कि यहां सामान्य स्कूल जैसी सुविधाओं के साथ सुरक्षा की आधुनिक तकनीक भी इस्तेमाल की गई है।

    इन स्कूलों में ऐसे अत्याधुनिक एयर डक्ट लगाए गए हैं, जो रेडिएशन और जहरीले धुएं को फिल्टर करने में सक्षम हैं। रूसी हमलों के दौरान बिजली का ग्रिड ठप होने की स्थिति में हेवी-ड्यूटी डीजल जनरेटर अपने आप चालू हो जाते हैं। बच्चों के लिए वेंटिलेशन पाइपों की व्यवस्था कंक्रीट की दीवारों के सहारे की गई है, जबकि इन्हीं सुरक्षित गलियारों और जगहों के बीच वे खेलते भी हैं।

    छात्र बोले- सायरन से डर नहीं, खेल छूटने का अफसोस

    8वीं कक्षा के छात्र डामिर का कहना है कि उसे भूमिगत स्कूल में पढ़ना अच्छा लगता है और यहां उसे डर नहीं लगता। हालांकि, फुटबॉल खेलते समय अगर सायरन बज जाए तो उसे खेल बीच में छोड़कर नीचे जाना पड़ता है और यही बात उसे खराब लगती है।

    युद्ध के माहौल में पले-बढ़ रहे बच्चों के लिए अब सायरन, बंकर और हमले रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं।

    सैनिक पिता: अब मोर्चे पर कम चिंता होती है

    8वीं कक्षा में पढ़ने वाले 13 वर्षीय डैनिलो के पिता दिमित्रो सिजीख युद्ध के मोर्चे पर तैनात हैं। बेटे के सुरक्षित भूमिगत स्कूल में पढ़ने से उन्हें भी राहत मिली है। उनका कहना है कि बेटे की सुरक्षा को लेकर भरोसा होने के कारण वे मोर्चे पर अपने कर्तव्य का निर्वहन अधिक निश्चिंत होकर कर पा रहे हैं।

    युद्ध का असर बच्चों की पढ़ाई पर भी

    सुरक्षित स्कूलों के बावजूद युद्ध का मानसिक असर बच्चों की शिक्षा पर पड़ रहा है। कीव की रिसर्च संस्था ‘सीडोस’ की शिक्षा विश्लेषक टेटियाना झेरियोबकिना के मुताबिक युद्ध से पैदा हुआ मानसिक तनाव और लगातार बना डर परीक्षाओं में बच्चों के प्रदर्शन को प्रभावित कर रहा है। तनाव और भय के कारण उनके टेस्ट स्कोर में गिरावट देखने को मिल रही है।

    जापोरिजिया के एक स्कूल की प्रिंसिपल हलीना वोल्कोवा गलियारे से गुजरते एक बच्चे को गले लगाते हुए कहती हैं कि वे मौजूदा हालात को भयावह या कयामत का मंजर कहकर नहीं देखते, क्योंकि यही अब उनकी जिंदगी की वास्तविकता बन चुकी है।

    युद्ध ने यूक्रेन के बच्चों से सामान्य बचपन छीन लिया है, लेकिन इन भूमिगत स्कूलों में किताबें, ब्लैकबोर्ड और खेल के बीच उनकी पढ़ाई जारी है। जमीन के ऊपर युद्ध चल रहा है और जमीन के नीचे एक पूरी पीढ़ी अपने भविष्य की तैयारी कर रही है।

  • महंगे स्किन केयर प्रोडक्ट्स छोड़ें! हल्दी से ऐसे रखें त्वचा का ख्याल और पाएं नेचुरल ग्लो

    महंगे स्किन केयर प्रोडक्ट्स छोड़ें! हल्दी से ऐसे रखें त्वचा का ख्याल और पाएं नेचुरल ग्लो


    नई दिल्ली। त्वचा की देखभाल के लिए लोग तरह तरह के महंगे प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं लेकिन घर में मौजूद कुछ चीजें भी स्किन केयर में उपयोगी हो सकती हैं। हल्दी उन्हीं प्राकृतिक चीजों में शामिल है जिसका इस्तेमाल भारतीय घरों में लंबे समय से किया जाता रहा है। हल्दी में करक्यूमिन नामक यौगिक पाया जाता है जिसे एंटीऑक्सीडेंट और एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों के लिए जाना जाता है। यही वजह है कि त्वचा की देखभाल के लिए हल्दी का इस्तेमाल पारंपरिक घरेलू उपाय के तौर पर किया जाता है। हालांकि हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है इसलिए किसी भी घरेलू नुस्खे को अपनाने से पहले सावधानी रखना जरूरी है।

    हल्दी का सबसे सामान्य इस्तेमाल चेहरे पर फेस पैक के रूप में किया जाता है। इसके लिए थोड़ी सी हल्दी में बेसन और दही या एलोवेरा जेल मिलाकर हल्का पेस्ट तैयार किया जा सकता है। इसे चेहरे पर बहुत मोटी परत लगाने के बजाय पतली परत में लगाया जा सकता है। कुछ देर बाद चेहरे को सामान्य पानी से धो लें। इससे त्वचा को साफ महसूस करने में मदद मिल सकती है और चेहरे पर मौजूद अतिरिक्त तेल भी कम महसूस हो सकता है। हालांकि हल्दी का रंग त्वचा पर कुछ समय के लिए पीला निशान छोड़ सकता है इसलिए इसकी मात्रा बहुत ज्यादा नहीं रखनी चाहिए।

    अगर त्वचा रूखी रहती है तो हल्दी को किसी मॉइस्चराइजिंग सामग्री के साथ मिलाकर इस्तेमाल किया जा सकता है। दही या एलोवेरा जेल के साथ इसका प्रयोग त्वचा को मुलायम महसूस कराने में मदद कर सकता है। वहीं तैलीय त्वचा वाले लोग बेसन के साथ हल्दी का हल्का पैक इस्तेमाल कर सकते हैं। यहां यह समझना जरूरी है कि हल्दी किसी त्वचा रोग या गंभीर समस्या का इलाज नहीं है। पिंपल्स दाग धब्बे या त्वचा की दूसरी परेशानियों में इसका असर हर व्यक्ति पर अलग हो सकता है।

    हल्दी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट गुण त्वचा को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद कर सकते हैं। इसके एंटी इंफ्लेमेटरी गुण त्वचा पर होने वाली हल्की सूजन और लालिमा को शांत करने में भी सहायक हो सकते हैं। यही कारण है कि हल्दी को कई पारंपरिक ब्यूटी रूटीन का हिस्सा बनाया जाता है। लेकिन इसे लगाने से तुरंत त्वचा का रंग बदलने या दाग पूरी तरह खत्म होने जैसी उम्मीद नहीं रखनी चाहिए।

    हल्दी का इस्तेमाल करते समय सबसे जरूरी बात इसकी मात्रा है। बहुत अधिक हल्दी लगाने से त्वचा पर जलन खुजली या लालिमा हो सकती है। खासकर संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। पहली बार इस्तेमाल करने से पहले हाथ के छोटे हिस्से या त्वचा के किसी सीमित हिस्से पर पैच टेस्ट करना बेहतर होता है। अगर जलन या एलर्जी जैसी समस्या दिखाई दे तो इसका इस्तेमाल तुरंत बंद कर देना चाहिए।

    इसके साथ ही चेहरे पर नींबू या दूसरे तेज एसिडिक पदार्थों के साथ हल्दी मिलाकर लगाने से बचना चाहिए क्योंकि इससे कुछ लोगों की त्वचा में जलन और संवेदनशीलता बढ़ सकती है। त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए केवल घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। रोजाना पर्याप्त पानी पीना संतुलित भोजन लेना अच्छी नींद लेना और धूप में निकलते समय सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना भी जरूरी है।

    कुल मिलाकर हल्दी को त्वचा की देखभाल के लिए एक सरल घरेलू विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। सही मात्रा और अपनी त्वचा के अनुसार इसका उपयोग करना जरूरी है। अगर त्वचा पर लगातार पिंपल्स सूजन एलर्जी या दाग धब्बों की समस्या बनी हुई है तो घरेलू उपायों के बजाय त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेना ज्यादा सुरक्षित और प्रभावी रहेगा।

  • CJP प्रोटेस्ट गर्ल रिया की Bigg Boss 20 में एंट्री पर सस्पेंस! सलमान के गुस्से को लेकर कही दिलचस्प बात

    CJP प्रोटेस्ट गर्ल रिया की Bigg Boss 20 में एंट्री पर सस्पेंस! सलमान के गुस्से को लेकर कही दिलचस्प बात


    नई दिल्ली। बिग बॉस 20 के आगाज में अब ज्यादा वक्त नहीं बचा है और शो शुरू होने से पहले ही संभावित कंटेस्टेंट्स को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। सलमान खान की मेजबानी वाले इस रियलिटी शो में कौन कौन नजर आएगा इसे लेकर अभी आधिकारिक तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं हुई है। हालांकि सीजेपी प्रोटेस्ट गर्ल के नाम से चर्चा में आईं रिया अहीर का नाम इन दिनों सबसे ज्यादा सुर्खियों में है। रिया अहीर और पंजाबी एक्ट्रेस व मॉडल लवप्रीत कौर के बीच चल रही वोटिंग के बाद जनता के फैसले से किसी एक को बिग बॉस 20 के घर में एंट्री मिल सकती है। इसी बीच रिया ने शो में जाने और सलमान खान का सामना करने को लेकर खुलकर अपनी बात रखी है।

    रिया अहीर उस समय चर्चा में आई थीं जब नीट पेपर लीक के खिलाफ मुंबई में हुए प्रदर्शन के दौरान वह पुलिस वैन के सामने खड़ी हो गई थीं। उनके इस अंदाज ने सोशल मीडिया पर काफी ध्यान खींचा था। अब बिग बॉस 20 में संभावित एंट्री को लेकर उनसे पूछा गया कि अगर सलमान खान शो के दौरान उन्हें डांटते हैं या उन पर नाराज होते हैं तो वह किस तरह स्थिति को संभालेंगी। इस सवाल पर रिया का जवाब काफी दिलचस्प रहा।

    रिया ने कहा कि वह सलमान खान को एक ऐसे व्यक्ति के तौर पर देखती हैं जिनके पास काफी अनुभव है और जिन्होंने अपनी जिंदगी में एक बड़ा मुकाम हासिल किया है। उनके मुताबिक जब सलमान किसी मुद्दे पर बात करते हैं तो लोग उनकी बात सुनते हैं और अगर वह किसी बात को लेकर उन्हें समझाते या डांटते हैं तो उसके पीछे कोई वजह जरूर होगी। रिया का कहना है कि अगर उन्हें लगेगा कि उनसे कोई गलती नहीं हुई है तो वह पूरे सम्मान के साथ अपना पक्ष सामने रखेंगी।

    हालांकि रिया ने यह भी साफ किया कि हर व्यक्ति का नजरिया अलग हो सकता है। अगर सलमान उनकी बात से सहमत नहीं होते हैं तो भी वह इसे अलग विचार के तौर पर लेंगी। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी की खूबसूरती यही है कि लोग अलग अलग सोच और नजरिए को स्वीकार करना सीख रहे हैं। यानी रिया बिग बॉस के घर में अपनी बात रखने से पीछे हटने वाली नहीं हैं लेकिन वह टकराव के बजाय सम्मानजनक तरीके से अपनी बात रखने में विश्वास करती हैं।

    सबसे दिलचस्प बात तब सामने आई जब रिया से पूछा गया कि अगर सलमान खान उन पर चिल्लाने लगें तो उनका रिएक्शन क्या होगा। इस पर उन्होंने बेहद सहज अंदाज में कहा कि अगर सलमान उन पर चिल्लाएंगे तो शायद वह अपना सिर नीचे करके रोने लगेंगी। रिया का यह जवाब अब चर्चा का विषय बन गया है क्योंकि बिग बॉस में सलमान की डांट और वीकेंड का वार अक्सर कंटेस्टेंट्स के लिए काफी दबाव वाला पल होता है।

    वहीं अगर जनता के वोट रिया के पक्ष में नहीं जाते और उन्हें बिग बॉस 20 के घर में एंट्री नहीं मिलती है तो क्या उन्हें दुख होगा इस सवाल पर भी उन्होंने सकारात्मक जवाब दिया। रिया ने कहा कि वह ठीक रहेंगी क्योंकि उनका मानना है कि जिंदगी में जो कुछ भी होता है उसके पीछे कोई न कोई वजह होती है। उनके अनुसार कोई घटना आशीर्वाद बनकर आती है तो कोई सीख देकर जाती है। अब देखना दिलचस्प होगा कि वोटिंग में जनता किसे चुनती है और क्या रिया अहीर सच में बिग बॉस 20 के घर में पहुंचकर सलमान खान के सामने अपनी बेबाकी दिखा पाती हैं।

  • पीरियड्स आए तो छूट जाता था स्कूल और कर दी जाती थी शादी, इस 8 एपिसोड की सीरीज की कहानी और क्लाइमेक्स कर देंगे हैरान

    पीरियड्स आए तो छूट जाता था स्कूल और कर दी जाती थी शादी, इस 8 एपिसोड की सीरीज की कहानी और क्लाइमेक्स कर देंगे हैरान


    नई दिल्ली। ओटीटी की दुनिया में एक से बढ़कर एक फिल्में और वेब सीरीज मौजूद हैं लेकिन कुछ कहानियां केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहतीं बल्कि समाज की उन सच्चाइयों को सामने लाती हैं जिन पर अक्सर खुलकर बात नहीं की जाती। ऐसी ही एक चर्चित सीरीज है अयाली। आठ एपिसोड की यह सीरीज एक युवा लड़की की कहानी के माध्यम से पीरियड्स से जुड़े सामाजिक भेदभाव और पुरानी परंपराओं की कड़वी तस्वीर दिखाती है। दमदार कहानी और भावनात्मक उतार चढ़ाव के कारण इस सीरीज को दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिला है और IMDb पर इसे 8.5 की शानदार रेटिंग भी मिली है।

    अयाली की कहानी सेल्वी नाम की एक लड़की के इर्द गिर्द घूमती है जिसका सपना डॉक्टर बनने का है। वह पढ़ लिखकर अपनी जिंदगी को बेहतर बनाना चाहती है लेकिन जिस गांव में वह रहती है वहां लड़कियों के लिए एक बेहद सख्त और पुरानी परंपरा चली आ रही है। गांव में अयाली देवी की पूजा होती है और वहां यह मान्यता है कि जैसे ही किसी लड़की को पहली बार पीरियड्स आते हैं उसके लिए स्कूल जाना बंद कर दिया जाता है और इसके बाद उसकी शादी कर दी जाती है। ऐसे माहौल में सेल्वी के डॉक्टर बनने का सपना उसकी जिंदगी की सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है।

    सेल्वी यह सोचकर डर जाती है कि अगर उसे पीरियड्स आ गए तो उसकी पढ़ाई छूट जाएगी और डॉक्टर बनने का सपना अधूरा रह जाएगा। वह चाहती है कि किसी तरह यह दिन कभी उसकी जिंदगी में न आए लेकिन प्रकृति के नियम से कोई बच नहीं सकता। जब उसे पहली बार पीरियड्स आते हैं तो उसके सामने सबसे बड़ा सवाल खड़ा हो जाता है कि वह इस बात को अपने परिवार और गांव के लोगों से कैसे छिपाए। वह अपनी पढ़ाई और अपने भविष्य को बचाने के लिए इस सच्चाई को छिपाने की कोशिश करती है।

    कहानी में बड़ा मोड़ तब आता है जब सेल्वी की मां को उसकी इस स्थिति के बारे में पता चल जाता है। इसके बाद सेल्वी अपनी मां से विनती करती है कि वह यह बात उसके पिता और परिवार के अन्य लोगों को न बताए। एक तरफ बेटी का सपना और दूसरी तरफ समाज की वर्षों पुरानी परंपराएं मां को भी कठिन स्थिति में खड़ा कर देती हैं। यहीं से कहानी में भावनात्मक तनाव और सस्पेंस बढ़ता चला जाता है।

    सीरीज केवल एक लड़की की निजी परेशानी नहीं दिखाती बल्कि यह सवाल भी उठाती है कि आखिर पीरियड्स जैसी प्राकृतिक प्रक्रिया को शर्म और बंदिशों से क्यों जोड़ा जाता है। अयाली उस सामाजिक सोच को चुनौती देती है जिसमें लड़कियों की शिक्षा और उनके सपनों पर परंपराओं का बोझ डाल दिया जाता है। सेल्वी का संघर्ष दर्शकों को यह सोचने पर मजबूर करता है कि एक लड़की के जीवन के फैसले उसके सपनों के आधार पर होने चाहिए या फिर सदियों पुरानी रूढ़ियों के आधार पर।

    सीरीज का क्लाइमेक्स भी इसकी सबसे बड़ी खासियत बताया जाता है। कहानी आगे बढ़ने के साथ कई ऐसे मोड़ सामने आते हैं जो दर्शकों की उत्सुकता बनाए रखते हैं। यही कारण है कि कम बजट में बनी इस तमिल सीरीज ने अपनी कहानी के दम पर अलग पहचान बनाई। इसमें सेल्वी का किरदार अभी नक्षत्रा ने निभाया है जबकि अन्य कलाकारों ने भी कहानी को प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसे मुत्थुकुमार ने लिखा और निर्देशित किया है।

    तमिल में बनी अयाली को हिंदी सहित कई भाषाओं में देखा जा सकता है। यह सीरीज उन दर्शकों के लिए खास है जो केवल मनोरंजन नहीं बल्कि सामाजिक मुद्दों पर बनी प्रभावशाली और सोच बदलने वाली कहानियां देखना पसंद करते हैं। आठ एपिसोड की यह कहानी शिक्षा सपनों परंपराओं और महिलाओं की आजादी से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवाल उठाती है और अंत तक दर्शकों को बांधे रखने की कोशिश करती है।

  • ऑपरेशन अयोध्या’: राम मंदिर के मैनेजमेंट की कमान एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र को ही क्यों?

    ऑपरेशन अयोध्या’: राम मंदिर के मैनेजमेंट की कमान एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र को ही क्यों?


    नई दिल्ली। अयोध्या में रामलला के भव्य मंदिर का दायरा और श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या देखते हुए अब इसके प्रबंधन में सामान्य प्रशासनिक व्यवस्था के बजाय सख्त अनुशासन और स्पष्ट जवाबदेही की जरूरत महसूस की जा रही है। इसी सोच के तहत श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र को अपना पहला सीईओ नियुक्त किया है। इसे मंदिर प्रबंधन में नए दौर की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है। हाल के दिनों में चढ़ावा चोरी और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर उठे सवालों के बीच मंदिर की व्यवस्था और श्रद्धालुओं के भरोसे को मजबूत करना उनके सामने बड़ी चुनौती होगी।

    उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में मंदिर परिसर में स्पष्ट कमांड स्ट्रक्चर, पारदर्शी डिजिटल ऑडिट और कड़े अनुशासन वाली व्यवस्था विकसित की जाएगी। सैन्य पृष्ठभूमि वाले अधिकारी की नियुक्ति से यह भी उम्मीद की जा रही है कि मंदिर प्रबंधन रोजमर्रा की राजनीतिक बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप से अलग पेशेवर तरीके से काम कर सकेगा।

    भव्य मंदिर के साथ बढ़ी प्रबंधन की चुनौती
    अयोध्या में रामलला के भव्य मंदिर के निर्माण के साथ ही यहां देश-विदेश से श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ने लगा। लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही, रोजाना आने वाला भारी चढ़ावा और मंदिर पर देश-दुनिया की निगाहों ने इसके प्रबंधन को बेहद महत्वपूर्ण बना दिया। ऐसे में चढ़ावा चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद मंदिर व्यवस्था को लेकर सवाल भी उठे।

    इन घटनाओं ने ट्रस्ट के सामने यह चुनौती रखी कि मंदिर जैसे बड़े धार्मिक केंद्र का संचालन ऐसी व्यवस्था से हो, जिसमें अनियमितता की गुंजाइश न्यूनतम हो, हर स्तर पर जवाबदेही तय हो और वित्तीय लेन-देन में पूरी पारदर्शिता बनी रहे।

    एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र ही पहली पसंद क्यों?
    ट्रस्ट जब अपने पहले सीईओ की तलाश कर रहा था, तब उम्मीदवार के लिए कुछ स्पष्ट मापदंड तय किए गए थे। उम्मीदवार के पास 20 साल से अधिक का प्रशासनिक अनुभव, सनातनी आचरण और रामभक्त होने के साथ उम्र 50 से 70 वर्ष के बीच होना अपेक्षित था। वरिष्ठ नौकरशाहों और प्रशासनिक अधिकारियों के पास इनमें से कई योग्यताएं थीं, लेकिन पेशेवर अनुशासन, ईमानदारी और कठोर निर्णय क्षमता के लिहाज से सैन्य पृष्ठभूमि को प्राथमिकता मिली।

    सेना की कार्यशैली में स्पष्ट जिम्मेदारी, नियमों का पालन और निर्धारित लक्ष्य के लिए जवाबदेही पर विशेष जोर रहता है। यही गुण मंदिर जैसे बड़े संस्थान के संचालन में भी उपयोगी माने जा रहे हैं।

    एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र के पक्ष में उनका अयोध्या क्षेत्र से जुड़ाव भी महत्वपूर्ण माना गया। वे अयोध्या के पास स्थित देवरिया जिले के मूल निवासी हैं। इससे स्थानीय भाषा, संस्कृति और सरयू पार के क्षेत्र से उनका पुराना संबंध रहा है। वे ब्राह्मण परिवार से आते हैं और धार्मिक परंपराओं, कर्मकांडों तथा सनातन मर्यादाओं की समझ को भी उनके चयन के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना गया।

    इसके अलावा पिछले साल पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारतीय सेनाओं के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उन्होंने वायुसेना के वेस्टर्न कमांड का नेतृत्व किया था। इस अभियान में उनके लड़ाकू विमानों ने बहावलपुर और मुरीदके जैसे आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। साथ ही पाकिस्तान के 300 किलोमीटर भीतर S-400 एयर डिफेंस सिस्टम से पाकिस्तानी विमान को मार गिराने का रिकॉर्ड भी उनके कार्यकाल से जोड़ा गया।

    इन सभी पहलुओं को देखते हुए ट्रस्ट के सामने मौजूद विकल्पों में एयर मार्शल मिश्र का नाम सबसे मजबूत दावेदार के रूप में उभरा। उनसे उम्मीद की जा रही है कि वे मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और भरोसेमंद बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

    सैन्य प्रबंधन से कैसे बदल सकती है मंदिर की व्यवस्था?
    सैन्य प्रबंधन की खासियत स्पष्ट जिम्मेदारी, तेज निर्णय और कड़े अनुशासन में मानी जाती है। ऐसे में एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र के नेतृत्व में मंदिर की मौजूदा व्यवस्था में कई महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

    स्पष्ट कमांड स्ट्रक्चर और जवाबदेही
    सैन्य व्यवस्था में हर अधिकारी और कर्मचारी की भूमिका पहले से तय होती है और किसी भी स्तर पर हुई चूक की जिम्मेदारी निर्धारित की जा सकती है। मंदिर प्रबंधन में भी सुरक्षा, साफ-सफाई, पुजारी वर्ग, आईटी सेल और अकाउंट्स जैसे विभागों की जिम्मेदारियां स्पष्ट की जा सकती हैं। इससे किसी चूक की स्थिति में जिम्मेदारी तय करना आसान होगा और विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालने से बचेंगे। प्रत्येक प्रमुख विभाग की सीधे सीईओ को रिपोर्टिंग व्यवस्था भी बनाई जा सकती है।

    चढ़ावे का डिजिटल रिकॉर्ड और ऑडिट
    चढ़ावा चोरी के मामले के बाद वित्तीय पारदर्शिता सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में शामिल है। सैन्य संस्थानों में इस्तेमाल होने वाले स्टॉक और फंड मैनेजमेंट मॉडल की तर्ज पर मंदिर में भी व्यवस्था मजबूत की जा सकती है।

    दानपेटियों को खोलने से लेकर चढ़ावे की गिनती और उसे जमा करने तक की पूरी प्रक्रिया हाई-रिजॉल्यूशन कैमरों और बायोमेट्रिक निगरानी के दायरे में लाने का सुझाव पहले ही दिया जा चुका है। प्रत्येक दान का रिकॉर्ड डिजिटल सिस्टम में दर्ज होने और नियमित रीयल-टाइम वित्तीय ऑडिट की व्यवस्था से गड़बड़ी की आशंका कम की जा सकती है।

    जीरो टॉलरेंस और सख्त आचार संहिता
    सैन्य अनुशासन में सिफारिश और लापरवाही के लिए सीमित गुंजाइश होती है। इसी तर्ज पर मंदिर में काम करने वाले कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों के लिए सख्त आचार संहिता लागू की जा सकती है। किसी भी अनैतिक गतिविधि, वित्तीय गड़बड़ी या श्रद्धालुओं के साथ दुर्व्यवहार की स्थिति में त्वरित कार्रवाई की व्यवस्था मंदिर प्रशासन को अधिक प्रभावी बना सकती है।

    चुनौती सीमा की नहीं, व्यवस्था को दुरुस्त करने की
    एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र के सामने ‘ऑपरेशन अयोध्या’ के तहत सबसे बड़ी चुनौती मंदिर की विशाल व्यवस्था को अनुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ संचालित करने की होगी। उनका सैन्य अनुभव सुरक्षा और प्रबंधन के साथ-साथ संकट की स्थिति में त्वरित निर्णय लेने में भी मददगार हो सकता है।

    देवरिया से जुड़े इस पूर्व एयर मार्शल के लिए अयोध्या में रामलला के मंदिर की प्रशासनिक कमान संभालना महज एक नई जिम्मेदारी नहीं, बल्कि बड़ी संस्थागत चुनौती है। यहां मुकाबला किसी सीमा पर नहीं, बल्कि व्यवस्था के भीतर मौजूद खामियों, लापरवाही और अनियमितताओं को दूर करने का है।

  • ग्राम रोजगार सहायकों के अनुबंध में बड़ा बदलाव: अब खुद ही सचिव बनकर खुद से नहीं कर सकेंगे एग्रीमेंट, APO संभालेगा जिम्मेदारी

    ग्राम रोजगार सहायकों के अनुबंध में बड़ा बदलाव: अब खुद ही सचिव बनकर खुद से नहीं कर सकेंगे एग्रीमेंट, APO संभालेगा जिम्मेदारी


    भोपाल । मध्य प्रदेश की ग्राम पंचायतों में कार्यरत हजारों ग्राम रोजगार सहायकों के संविदा अनुबंध को लेकर व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। प्रदेश की 23 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों में काम कर रहे ग्राम रोजगार सहायकों के एग्रीमेंट की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रशासनिक रूप से व्यवस्थित बनाने के लिए मध्य प्रदेश राज्य ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद ने नए निर्देश जारी किए हैं। नई व्यवस्था के तहत अब ऐसी ग्राम पंचायतों में जहां पंचायत सचिव का पद रिक्त है या सचिव पदस्थ नहीं है अथवा ग्राम रोजगार सहायक को ही सचिव का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है वहां ग्राम रोजगार सहायक अपना संविदा अनुबंध स्वयं के साथ नहीं कर सकेगा। ऐसी स्थिति में एग्रीमेंट की जिम्मेदारी जनपद पंचायत स्तर पर पदस्थ अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी APO मनरेगा को सौंपी जाएगी।

    दरअसल सामान्य परिस्थितियों में ग्राम रोजगार सहायक का संविदा अनुबंध पंचायत सचिव और ग्राम रोजगार सहायक के बीच किया जाता है। लेकिन प्रदेश की कई ग्राम पंचायतों में पंचायत सचिव के पद रिक्त हैं। कुछ स्थानों पर सचिव उपलब्ध नहीं हैं जबकि कई पंचायतों में ग्राम रोजगार सहायक को ही पंचायत सचिव का प्रभार सौंप दिया गया है। ऐसी स्थिति में एक प्रशासनिक और कानूनी विसंगति सामने आ रही थी क्योंकि जिस कर्मचारी को सचिव का प्रभार मिला हुआ था उसी को ग्राम रोजगार सहायक के रूप में अपना संविदा अनुबंध भी करना पड़ रहा था। यानी एक तरह से कर्मचारी खुद ही एक पद की जिम्मेदारी निभाते हुए स्वयं के साथ अनुबंध की प्रक्रिया पूरी कर रहा था।

    इस तरह की शिकायतें और प्रशासनिक विसंगतियां परिषद के संज्ञान में आने के बाद अब व्यवस्था को बदलने का निर्णय लिया गया है। मध्य प्रदेश राज्य ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद ने स्पष्ट किया है कि किसी कर्मचारी द्वारा स्वयं के साथ संविदा अनुबंध करना प्रशासनिक और विधिक दृष्टि से उचित नहीं माना जा सकता। इसी कारण अब ऐसी परिस्थितियों के लिए अलग व्यवस्था तय की गई है ताकि अनुबंध की प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे और भविष्य में किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो।

    परिषद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा 1 सितंबर को इस संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं। सभी जिलों के कलेक्टरों जिला कार्यक्रम समन्वयकों और संबंधित मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को नए प्रावधान का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने के लिए कहा गया है। सचिव उपलब्ध होने की स्थिति में ग्राम रोजगार सहायक का अनुबंध पहले की तरह पंचायत सचिव के साथ ही किया जाएगा। लेकिन जहां सचिव का पद रिक्त है या पंचायत में सचिव पदस्थ नहीं है अथवा ग्राम रोजगार सहायक ही सचिव का प्रभार संभाल रहा है वहां संविदा अनुबंध जनपद पंचायत के अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी APO मनरेगा द्वारा किया जाएगा।

    यदि किसी जनपद पंचायत में APO का पद भी रिक्त है तो वहां प्रभारी अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी को एग्रीमेंट की प्रक्रिया पूरी करने की जिम्मेदारी दी जाएगी। नई व्यवस्था से सचिव विहीन पंचायतों में ग्राम रोजगार सहायकों के नए संविदा अनुबंध और उनके नवीनीकरण की प्रक्रिया अधिक स्पष्ट और सुचारु होने की उम्मीद है। साथ ही सबसे बड़ी बात यह है कि खुद के साथ एग्रीमेंट करने जैसी विवादित स्थिति पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। परिषद के इस फैसले को पंचायत स्तर की प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने और संविदा प्रक्रिया को कानूनी रूप से मजबूत बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

  • मध्य प्रदेश की राजनीति में अजब रंग फायरिंग वाला स्वागत मंत्री का अनोखा इशारा और गड्ढों में विकास देखने वाला बयान हुआ वायरल

    मध्य प्रदेश की राजनीति में अजब रंग फायरिंग वाला स्वागत मंत्री का अनोखा इशारा और गड्ढों में विकास देखने वाला बयान हुआ वायरल


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजनीति इन दिनों सिर्फ बड़े फैसलों और चुनावी रणनीतियों को लेकर ही नहीं बल्कि नेताओं के बयानों और उनके आसपास घटने वाले रोचक घटनाक्रमों को लेकर भी चर्चा में है। कहीं एक वरिष्ठ नेता के स्वागत में हवाई फायरिंग कर दी गई तो कहीं मंत्री के हाथ के इशारे ने लोगों को चुटकी लेने का मौका दे दिया। दूसरी ओर गड्ढों से भरी सड़कों को लेकर मंत्री का ऐसा बयान सामने आया जिसने सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी। इन सब घटनाओं ने यह साबित कर दिया कि राजनीति में कभी कभी एक छोटा सा दृश्य भी बड़ी चर्चा का विषय बन जाता है।

    बुरहानपुर में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह के साथ कुछ ऐसा हुआ जिसने वहां मौजूद लोगों को भी चौंका दिया। अजय सिंह कांग्रेस नेता अजय रघुवंशी के घर पहुंचे थे और उनके स्वागत की तैयारियां चल रही थीं। इसी दौरान अचानक हवाई फायरिंग की गई। माला पहनाने के समय हुई गोली की आवाज से अजय सिंह कुछ देर के लिए सहम गए। बताया गया कि उन्होंने फायरिंग करने वाले व्यक्ति से ऐसा न करने की बात भी कही। इसके बाद जब दोबारा फायरिंग हुई तो वह फिर चौंक गए। अब इस घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तरह तरह की चर्चाएं हो रही हैं। लोग सवाल उठा रहे हैं कि स्वागत के नाम पर इस तरह की गतिविधियां कितनी उचित हैं।

    उधर जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट का एक वीडियो भी चर्चा का विषय बन गया। केन बेतवा लिंक परियोजना के विस्थापितों से बातचीत के दौरान मंत्री ने एक ग्रामीण से मुख्यमंत्री का नाम पूछा। जब ग्रामीण स्पष्ट जवाब नहीं दे सका तो मंत्री ने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का नाम बताया और फिर अपना परिचय भी दिया। उन्होंने खुद को इंदौर से आया बताते हुए अपने विभाग के बारे में जानकारी दी और कहा कि वह जल से जुड़ा विभाग संभालते हैं। लेकिन इस दौरान उनके हाथ के हाव भाव और इशारे को लेकर लोगों ने सोशल मीडिया पर टिप्पणियां शुरू कर दीं। वीडियो के सामने आने के बाद मंत्री का यह अंदाज चर्चा में आ गया।

    दमोह जिले के पथरिया में आनंद विभाग के मंत्री लखन पटेल ने सड़कों के गड्ढों को लेकर ऐसा बयान दिया जिसने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने कहा कि आज के लोगों को सड़कों के गड्ढे दिखाई देते हैं लेकिन पुराने समय में कई जगह सड़कें ही नहीं थीं। मंत्री ने लोगों को अपने बुजुर्गों से पूछने की सलाह देते हुए कहा कि पहले सड़कें देखना भी बड़ी बात थी। उनके इस बयान पर लोग अलग अलग प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कुछ इसे पुराने और नए दौर के विकास की तुलना बता रहे हैं तो कुछ लोग इसे खराब सड़कों की समस्या से ध्यान हटाने वाला बयान मान रहे हैं।

    इसी बीच खंडवा में एक प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान भाजपा सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल का फोन कॉल भी चर्चा में रहा। प्रशासन की टीम एक शराब दुकान के अहाते पर कार्रवाई कर रही थी तभी अधिकारी के पास सांसद का फोन आया। बताया गया कि कार्रवाई रुकवाने को लेकर बातचीत हुई लेकिन अधिकारी ने आदेश का हवाला देते हुए कार्रवाई जारी रखने की बात कही और सांसद को कलेक्टर से संपर्क करने का सुझाव दिया।

    इन घटनाओं ने मध्य प्रदेश की राजनीति को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। नेताओं के बयान हों या सार्वजनिक कार्यक्रमों में होने वाली घटनाएं हर मामला अब तेजी से सोशल मीडिया तक पहुंच रहा है और जनता भी उस पर अपनी प्रतिक्रिया दे रही है।

  • अगले चार दिन MP में भारी बारिश का खतरा! रेड-ऑरेंज अलर्ट के बीच नदियां उफान पर, डैमों में बढ़ा पानी

    अगले चार दिन MP में भारी बारिश का खतरा! रेड-ऑरेंज अलर्ट के बीच नदियां उफान पर, डैमों में बढ़ा पानी


    भोपाल । मध्य प्रदेश में मानसून का असर एक बार फिर तेज हो गया है और लगातार हो रही बारिश ने कई इलाकों में जनजीवन प्रभावित करना शुरू कर दिया है। मौसम विभाग ने प्रदेश के कई हिस्सों के लिए भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। नर्मदापुरम और छिंदवाड़ा में अति भारी बारिश की संभावना को देखते हुए रेड अलर्ट जारी किया गया है जबकि छतरपुर सागर रायसेन नरसिंहपुर सिवनी और बैतूल समेत कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है। इन इलाकों में 24 घंटे के दौरान भारी मात्रा में बारिश होने की आशंका जताई गई है।

    लगातार हो रही बारिश के कारण कई जिलों में नदी नाले उफान पर हैं और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन रही है। छतरपुर जिले में संभावित बाढ़ और लगातार बारिश को देखते हुए प्रशासन ने विद्यार्थियों के लिए स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया है। हालांकि शिक्षकों को विभागीय और शैक्षणिक कार्यों के लिए स्कूल पहुंचना होगा। प्रशासन की ओर से लोगों को नदी नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की अपील भी की जा रही है।

    बारिश के बीच डबरा में एक दर्दनाक हादसा भी सामने आया है। जंगीपुरा इलाके में तेज बारिश के दौरान दो मंजिला कच्चे मकान की छत ढह गई। हादसे के समय परिवार के कई सदस्य घर के अंदर मौजूद थे और मलबे में दब गए। इस दुर्घटना में एक महिला और उसके दो वर्षीय बेटे की मौत हो गई जबकि परिवार के अन्य सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गए। इस घटना ने बारिश के दौरान जर्जर और कच्चे मकानों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

    मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में बारिश का यह सिस्टम प्रदेश के अलग अलग हिस्सों में आगे बढ़ेगा। 4 सितंबर से भोपाल उज्जैन ग्वालियर सागर नर्मदापुरम और चंबल संभाग में इसका असर अधिक दिखाई दे सकता है। कई स्थानों पर भारी बारिश की स्थिति बन सकती है। इसके बाद 5 और 6 सितंबर को प्रदेश के उत्तरी हिस्सों तथा ग्वालियर चंबल संभाग में तेज बारिश की संभावना बनी हुई है।

    लगातार बारिश का असर प्रदेश के बांधों और जलाशयों पर भी दिखाई दे रहा है। अधिकांश बांधों में जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है और कुछ बांधों के गेट खोलने की तैयारी की जा रही है। भोपाल के बड़े तालाब का जलस्तर भी तेजी से बढ़ा है और इसके लगभग भरने की स्थिति बन रही है। ऐसे में प्रशासन निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दे रहा है।

    प्रदेश में अब तक मानसून के दौरान अच्छी बारिश दर्ज की गई है लेकिन कई जिलों में अब भी औसत से कम पानी गिरा है। पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे बना हुआ है जबकि कुछ जिलों में औसत से अधिक वर्षा दर्ज की गई है। मौसम के अगले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं क्योंकि सक्रिय मानसूनी सिस्टम प्रदेश के बड़े हिस्से को प्रभावित कर सकता है।

    लगातार बारिश के कारण प्रशासन की चुनौती भी बढ़ गई है। नदियों के किनारे रहने वाले लोगों जर्जर मकानों में रहने वाले परिवारों और जलभराव वाले इलाकों पर विशेष नजर रखी जा रही है। लोगों को सलाह दी गई है कि तेज बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें और नदी नालों या पुल पुलियों को पार करने का जोखिम न उठाएं। अगले चार दिन मध्य प्रदेश के लिए बारिश और सतर्कता दोनों के लिहाज से बेहद अहम रहने वाले हैं।

  • अब टोल पर नहीं लगेगा जाम: फंदा टोल प्लाजा पर हाईटेक सिस्टम एक्टिव, कैमरे-सेंसर पहचानेंगे गाड़ी और खुद कट जाएगा टैक्स

    अब टोल पर नहीं लगेगा जाम: फंदा टोल प्लाजा पर हाईटेक सिस्टम एक्टिव, कैमरे-सेंसर पहचानेंगे गाड़ी और खुद कट जाएगा टैक्स


    भोपाल । मध्यप्रदेश में सड़क परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। भोपाल-देवास रोड पर स्थित फंदा टोल प्लाजा में पहली बार बैरियर-लेस टोलिंग सिस्टम का ट्रायल शुरू कर दिया गया है। इस नई व्यवस्था के तहत वाहन चालकों को टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं होगी और गाड़ियां तेज रफ्तार से टोल क्षेत्र पार कर सकेंगी। बताया जा रहा है कि वाहन करीब 100 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से भी टोल लेन से गुजर सकते हैं और इस दौरान फास्टैग के माध्यम से टोल शुल्क अपने आप कट जाएगा। फिलहाल इस हाईटेक व्यवस्था को एक लेन में परीक्षण के तौर पर शुरू किया गया है। यदि ट्रायल सफल रहता है तो 1 जनवरी 2027 से भोपाल-देवास मार्ग के तीनों टोल प्लाजा की सभी लेनों में इस तकनीक को लागू करने की योजना बनाई गई है।

    नई टोल व्यवस्था की सबसे खास बात यह है कि यहां पारंपरिक बूम बैरियर नहीं होगा। अभी तक टोल प्लाजा पर पहुंचते ही वाहन को धीमा करना पड़ता है और फास्टैग स्कैन होने के बाद बैरियर खुलने का इंतजार करना पड़ता है। लेकिन बैरियर-लेस सिस्टम में यह पूरी प्रक्रिया डिजिटल तरीके से होगी। टोल लेन पर लगाए गए आधुनिक फास्टैग रीडर वाहन की पहचान करेंगे जबकि कैमरे और सेंसर वाहन का नंबर और उसकी श्रेणी का पता लगाएंगे। इसके बाद वाहन की कैटेगरी के अनुसार टोल शुल्क तय होगा और फास्टैग खाते से राशि स्वतः कट जाएगी।

    इस तकनीक से सबसे बड़ा फायदा वाहन चालकों को समय की बचत के रूप में मिलेगा। टोल प्लाजा पर लंबी कतारों और बार-बार रुकने की समस्या कम होगी। वाहनों को ब्रेक लगाने और फिर दोबारा गति बढ़ाने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी जिससे पेट्रोल और डीजल की खपत में कमी आने की संभावना है। लगातार चलने वाले ट्रैफिक से सड़क पर जाम की स्थिति भी कम होगी और यात्रा पहले की तुलना में अधिक सुगम बन सकेगी।

    यदि किसी वाहन के फास्टैग में पर्याप्त राशि नहीं है या वाहन नंबर की जानकारी में कोई तकनीकी समस्या सामने आती है तो सिस्टम इसके लिए भी डिजिटल विकल्प देगा। ऐसी स्थिति में वाहन मालिक को ई-चालान भेजा जाएगा और उसे तय समय के भीतर टोल राशि जमा करनी होगी। तीन दिन के अंदर भुगतान नहीं करने पर जुर्माने के साथ राशि वसूली जा सकती है।

    बैरियर-लेस टोलिंग व्यवस्था से टोल संचालन में कर्मचारियों पर निर्भरता भी कम होगी और पूरी प्रक्रिया अधिक डिजिटल और स्वचालित बनेगी। यूरोप और जर्मनी समेत कई देशों में ऐसी तकनीक का उपयोग पहले से किया जा रहा है और अब मध्यप्रदेश भी आधुनिक टोल प्रबंधन की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। फंदा टोल पर शुरू हुआ यह प्रयोग सफल रहा तो आने वाले समय में राज्य के अन्य प्रमुख मार्गों पर भी बिना रुके डिजिटल टोल भुगतान की व्यवस्था देखने को मिल सकती है।