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  • सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट के संकेत, ईरान-अमेरिका तनाव का पड़ सकता है असर

    सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट के संकेत, ईरान-अमेरिका तनाव का पड़ सकता है असर


    नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और महंगाई के आंकड़ों के बीच इस सप्ताह सोने और चांदी की कीमतों में हलचल जारी रहने की संभावना है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल कीमती धातुओं पर दबाव बना रह सकता है और इनमें गिरावट का रुख देखने को मिल सकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में महंगाई से जुड़े आंकड़े वैश्विक ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की उम्मीदों को प्रभावित करेंगे, जिसका सीधा असर सोने-चांदी की कीमतों पर पड़ सकता है।

    ईरान-अमेरिका तनाव से वैश्विक बाजारों में चिंता
    पश्चिम एशिया में एक बार फिर बढ़े तनाव ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चिंता बढ़ा दी है। ईरान ने हाल में दावा किया था कि उसने एक ऐसे जहाज को निशाना बनाया जो उसकी अनुमति के बिना निर्धारित मार्ग से गुजर रहा था। इसके बाद ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने की घोषणा की।

    इसके जवाब में अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान पर हमले किए, जिसके बाद ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और बहरीन में अमेरिका से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया। इस घटनाक्रम के बाद वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है।

    जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (कमोडिटी एंड करेंसी रिसर्च) प्रणव मेर के अनुसार, सोने और चांदी में फिलहाल गिरावट और करेक्शन का दौर जारी है। उन्होंने कहा कि अब बाजार की नजरें अमेरिका-ईरान तनाव की दिशा पर रहेंगी।

    उनके मुताबिक, यदि भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है। इसके साथ ही अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों को मजबूती मिल सकती है।

    पिछले सप्ताह सोने-चांदी के दाम में गिरावट
    घरेलू बाजार में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर अगस्त डिलीवरी वाले सोने का वायदा भाव सप्ताह के दौरान 3,900 रुपये यानी 2.65 प्रतिशत गिरकर 1.43 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। वहीं, सितंबर अनुबंध वाली चांदी में 14,746 रुपये यानी 6.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और इसका भाव 2.22 लाख रुपये प्रति किलोग्राम रह गया।

    तेजी पर निवेशकों ने की मुनाफावसूली
    एलकेपी सिक्योरिटीज के जतिन त्रिवेदी ने कहा कि सोने के लिए पिछला सप्ताह भी कमजोर रहा। मजबूत अमेरिकी डॉलर, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया, जिससे सोने में दो प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई। उन्होंने कहा कि कीमतों में सुधार की कोशिशों के बावजूद तेजी टिक नहीं पाई और हर उछाल पर निवेशकों ने मुनाफावसूली की। त्रिवेदी के मुताबिक, भारतीय रुपये में मामूली कमजोरी से एमसीएक्स सोने को कुछ समर्थन जरूर मिला, लेकिन वैश्विक बाजार में कमजोर रुख ने इसके असर को सीमित कर दिया।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी नरमी
    अंतरराष्ट्रीय बाजार में न्यूयॉर्क कॉमेक्स सोना वायदा 12 डॉलर यानी 0.3 प्रतिशत की गिरावट के साथ 4,113.7 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ। वहीं, चांदी में 1.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 60.16 डॉलर प्रति औंस पर रही।

    अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर रहेगी बाजार की नजर
    विशेषज्ञों के अनुसार, निवेशक अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगे की मौद्रिक नीति को समझने के लिए कई अहम आर्थिक आंकड़ों पर नजर रखेंगे। इनमें खुदरा बिक्री, आवास क्षेत्र के आंकड़े और साप्ताहिक बेरोजगारी दावे प्रमुख हैं। इन आंकड़ों से ब्याज दरों की दिशा को लेकर संकेत मिल सकते हैं, जिसका असर आने वाले समय में सोने और चांदी की कीमतों पर दिखाई देगा।

  • 13 जुलाई को शेयर बाजार में क्या होगा बड़ा उलटफेर या नई तेजी निवेशकों के लिए जानना क्यों है जरूरी

    13 जुलाई को शेयर बाजार में क्या होगा बड़ा उलटफेर या नई तेजी निवेशकों के लिए जानना क्यों है जरूरी


    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में 13 जुलाई का कारोबारी दिन निवेशकों के लिए काफी अहम माना जा रहा है। पिछले कुछ सत्रों में बाजार में उतार चढ़ाव देखने को मिला है और अब सभी की नजर सोमवार के कारोबार पर टिकी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार की दिशा तय करने में वैश्विक बाजारों का रुख विदेशी निवेशकों की खरीद बिक्री कंपनियों के तिमाही नतीजे और कच्चे तेल की कीमतें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

    यदि एशियाई और अमेरिकी बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते हैं तो भारतीय बाजार की शुरुआत मजबूती के साथ हो सकती है। हालांकि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी तरह की आर्थिक या भू राजनीतिक चिंता सामने आती है तो बाजार में दबाव भी देखने को मिल सकता है। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े फैसले लेने से बचना चाहिए।

    इस सप्ताह कई बड़ी कंपनियों के पहली तिमाही के वित्तीय नतीजे आने वाले हैं। इन नतीजों का असर बैंकिंग आईटी ऑटो फार्मा और एफएमसीजी सेक्टर के शेयरों पर साफ दिखाई दे सकता है। यदि कंपनियों के परिणाम उम्मीद से बेहतर रहते हैं तो बाजार में नई खरीदारी देखने को मिल सकती है। वहीं कमजोर नतीजों की स्थिति में मुनाफावसूली का दबाव भी बढ़ सकता है।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों और घरेलू निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की चाल तय करेंगी। पिछले कुछ दिनों में विदेशी निवेशकों की खरीदारी ने बाजार को सहारा दिया है। यदि यह रुझान सोमवार को भी जारी रहता है तो सेंसेक्स और निफ्टी में तेजी की संभावना मजबूत हो सकती है। दूसरी ओर बिकवाली बढ़ने पर बाजार में कमजोरी भी आ सकती है।

    तकनीकी विश्लेषकों का कहना है कि निफ्टी के लिए कुछ प्रमुख स्तरों पर नजर रखना जरूरी होगा। यदि बाजार इन स्तरों के ऊपर टिकता है तो आगे तेजी का रास्ता खुल सकता है। वहीं महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तर टूटने पर बाजार में गिरावट तेज हो सकती है। इसलिए ट्रेडर्स को स्टॉप लॉस के साथ ही कारोबार करने की सलाह दी जा रही है।

    लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह समय धैर्य बनाए रखने का है। बाजार में आने वाले छोटे उतार चढ़ाव से घबराने के बजाय मजबूत कंपनियों पर भरोसा बनाए रखना बेहतर रणनीति हो सकती है। जिन निवेशकों का लक्ष्य लंबी अवधि का है उन्हें अच्छी गुणवत्ता वाले शेयरों में चरणबद्ध निवेश करने पर विचार करना चाहिए।

    कुल मिलाकर 13 जुलाई का कारोबारी दिन कई महत्वपूर्ण संकेत लेकर आएगा। वैश्विक बाजारों की चाल तिमाही नतीजे विदेशी निवेशकों का रुख और आर्थिक घटनाक्रम भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करेंगे। निवेशकों के लिए सबसे जरूरी बात यह होगी कि वे अफवाहों से दूर रहें सही जानकारी के आधार पर निर्णय लें और जोखिम प्रबंधन को प्राथमिकता दें। यही रणनीति उन्हें बाजार के उतार चढ़ाव के बीच बेहतर अवसर दिला सकती है।

  • आंध्र प्रदेश के नागप्पा परिवार में हैं 83 सदस्य और 6 पीढ़ियां, लेकिन रसोई एक, बना संयुक्त परिवार की मिसाल

    आंध्र प्रदेश के नागप्पा परिवार में हैं 83 सदस्य और 6 पीढ़ियां, लेकिन रसोई एक, बना संयुक्त परिवार की मिसाल


    नई दिल्‍ली । आजकल संयुक्त परिवार धीरे-धीरे कम होते जा रहे हैं. लोग अब न्यूक्लियर फैमिली की तरफ बढ़ रहे हैं. नौकरी, पढ़ाई और बेहतर सुविधाओं की तलाश में लोग अलग-अलग शहरों में बस जाते हैं. ऐसे समय में आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले के कुरलपल्ली गांव का नागप्पा परिवार लोगों के लिए एक मिसाल बनकर सामने आया है.

    इस परिवार में कुल 83 सदस्य रहते हैं. खास बात यह है कि परिवार छह पीढ़ियों तक फैला हुआ है और आज भी सभी लोग मिल-जुलकर एक परिवार की तरह रहते हैं. भले ही वे चार अलग-अलग मकानों में रहते हों, लेकिन उनकी जिंदगी पूरी तरह एक ही परिवार की तरह चलती है.

    परिवार में कौन-कौन हैं?
    इस बड़े परिवार की अगुवाई हनुमंतरायुडु और मुथ्यालप्पा करते हैं. परिवार में छह सास, 14 बहुएं, 20 बच्चे, दादा-दादी, नाना-नानी और कई बुजुर्ग सदस्य शामिल हैं. इतने बड़े परिवार को संभालना आसान नहीं होता, लेकिन यहां हर सदस्य की अपनी जिम्मेदारी तय है. घर के छोटे-बड़े सभी लोग एक-दूसरे का सहयोग करते हैं. यही वजह है कि इतने सारे लोगों के साथ रहने के बावजूद परिवार में अनुशासन और तालमेल बना रहता है.

    हर सुबह होती है परिवार की मीटिंग
    इस परिवार की सबसे खास बात इसकी हर रोज की दिनचर्या है. हर सुबह घर के बड़े सदस्य एक साथ बैठकर चाय या कॉफी पीते हैं और पूरे दिन की योजना बनाते हैं. इसी बैठक में तय होता है कि कौन खेत में जाएगा, कौन घर के काम संभालेगा और उस दिन खाने में क्या बनेगा. सभी जिम्मेदारियां पहले ही बांट दी जाती हैं, जिससे किसी पर जरूरत से ज्यादा बोझ नहीं पड़ता. परिवार के लोग मानते हैं कि दिन की शुरुआत अगर मिलकर की जाए तो बाकी काम भी आसानी से पूरे हो जाते हैं.

    चार घर, लेकिन रसोई सिर्फ एक
    आज के समय में हर घर की अपनी अलग रसोई होती है, लेकिन नागप्पा परिवार में ऐसा नहीं है. यहां चार मकानों में रहने के बावजूद पूरे परिवार का खाना एक ही रसोई में तैयार होता है. राशन खरीदने से लेकर सब्जियां लाने तक की जिम्मेदारी बड़े सदस्य निभाते हैं. वहीं परिवार की बहुएं मिलकर पूरे परिवार के लिए खाना बनाती हैं. एक साथ बैठकर खाना खाना इस परिवार की पुरानी परंपरा है. उनका मानना है कि साथ बैठकर खाना खाने से रिश्तों में अपनापन बना रहता है.

    खेती के साथ बसों का भी कारोबार
    इस परिवार की कमाई का जरिया सिर्फ खेती नहीं है. खेती के अलावा परिवार मिलकर ट्रांसपोर्ट का कारोबार भी करता है. परिवार के पास चार बसें हैं, जो कल्याणदुर्गम से कर्नाटक के कई इलाकों के बीच चलती हैं. खेती और बसों से होने वाली पूरी कमाई एक ही जगह जमा होती है. इसके बाद जरूरत के हिसाब से खर्च किया जाता है. इसका मतलब यहां कोई अपनी अलग कमाई नहीं रखता. परिवार की आर्थिक व्यवस्था पूरी तरह सामूहिक है.

    इतने बड़े परिवार में कैसे नहीं होते झगड़े?
    83 लोगों के साथ रहने पर मतभेद होना स्वाभाविक है. परिवार के सदस्य भी मानते हैं कि कभी-कभी अलग-अलग राय सामने आती हैं. हालांकि, उनका नियम साफ है कि कोई भी विवाद अगले दिन तक नहीं जाना चाहिए. अगर किसी बात पर बहस होती है तो उसी दिन बैठकर उसका समाधान निकाल लिया जाता है. बुजुर्गों का कहना है कि आपसी सम्मान, धैर्य और बातचीत ही इतने बड़े परिवार को एक साथ जोड़े रखने का सबसे बड़ा कारण है.

    बच्चों को भी मिलती है परिवार की सीख
    इस संयुक्त परिवार में बड़े-बुजुर्ग सिर्फ फैसले नहीं लेते, बल्कि बच्चों को परिवार की परंपराएं और संस्कार भी सिखाते हैं. बच्चे अपने दादा-दादी और अन्य बुजुर्गों के साथ समय बिताते हैं. उन्हें बचपन से ही मिलकर रहने, जिम्मेदारियां निभाने और बड़ों का सम्मान करने की सीख दी जाती है. परिवार के लोगों का मानना है कि यही वजह है कि नई पीढ़ी भी संयुक्त परिवार की अहमियत समझ रही है.

    सोशल मीडिया पर लोग कर रहे तारीफ
    इस परिवार की कहानी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग इसकी जमकर तारीफ कर रहे हैं. कई यूजर्स ने लिखा कि आज के समय में जहां छोटी-छोटी बातों पर परिवार टूट जाते हैं, वहां 83 लोगों का एक साथ रहना किसी मिसाल से कम नहीं है. कुछ लोगों ने कहा कि यह परिवार बताता है कि अगर आपसी भरोसा और सहयोग हो तो बड़ा परिवार भी खुशी-खुशी रह सकता है.

    बदलते दौर में भी कायम है परंपरा
    संयुक्त परिवारों की संख्या लगातार घट रही है. ऐसे समय में नागप्पा परिवार यह साबित करता है कि अगर रिश्तों को महत्व दिया जाए तो पीढ़ियां भी एक साथ रह सकती हैं. यह परिवार सिर्फ एक घर नहीं, बल्कि सहयोग, अनुशासन और भरोसे की ऐसी मिसाल है, जो आज के दौर में बहुत कम देखने को मिलती है. 83 लोगों का यह परिवार दिखाता है कि खुशहाल जिंदगी सिर्फ बड़े घर से नहीं, बल्कि बड़े दिल और मजबूत रिश्तों से बनती है.

  • हार्ट फेलियर के हर मरीज पर एक जैसी दवा नहीं करती असर नई स्टडी ने इलाज को लेकर बदली सोच

    हार्ट फेलियर के हर मरीज पर एक जैसी दवा नहीं करती असर नई स्टडी ने इलाज को लेकर बदली सोच

    नई दिल्ली । हार्ट फेलियर दुनिया की सबसे गंभीर हृदय संबंधी बीमारियों में से एक मानी जाती है और हर साल लाखों लोग इसकी चपेट में आते हैं। अब इस बीमारी के इलाज को लेकर सामने आई नई रिसर्च ने डॉक्टरों और मरीजों दोनों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। अध्ययन में संकेत मिले हैं कि हार्ट फेलियर के सभी मरीजों पर एक जैसी दवा समान रूप से प्रभावी नहीं होती। यही वजह है कि भविष्य में मरीजों की स्थिति के अनुसार अलग अलग उपचार पद्धति अपनाने की जरूरत और भी अधिक महसूस की जा रही है।

    हार्ट फेलियर ऐसी स्थिति होती है जब हृदय शरीर की जरूरत के अनुसार पर्याप्त मात्रा में रक्त पंप नहीं कर पाता। इसके कारण मरीज को सांस लेने में कठिनाई जल्दी थकान पैरों और टखनों में सूजन तथा सामान्य दैनिक कार्य करने में परेशानी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। समय रहते सही उपचार नहीं मिलने पर यह बीमारी गंभीर रूप ले सकती है।

    विशेषज्ञ बताते हैं कि हार्ट फेलियर के भी अलग अलग प्रकार होते हैं। एक स्थिति में हृदय की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं और पर्याप्त ताकत से रक्त नहीं पंप कर पातीं। दूसरी स्थिति में हृदय की पंपिंग क्षमता सामान्य दिखाई देती है लेकिन उसकी मांसपेशियां कठोर हो जाती हैं जिससे हर धड़कन के बीच पर्याप्त मात्रा में रक्त नहीं भर पाता। इसी प्रकार के मरीजों पर नई रिसर्च केंद्रित रही।

    अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ वर्मोंट के शोधकर्ताओं ने इस विषय पर विस्तृत अध्ययन किया। रिसर्च के दौरान हजारों मरीजों के मेडिकल रिकॉर्ड और उपचार के परिणामों का विश्लेषण किया गया। अध्ययन में पाया गया कि जिन मरीजों का हृदय कठोर हो चुका था और जो बीटा ब्लॉकर दवाएं ले रहे थे उनमें हार्ट फेलियर बिगड़ने के कारण अस्पताल में भर्ती होने का खतरा अपेक्षाकृत अधिक पाया गया। यह निष्कर्ष इस बात की ओर इशारा करता है कि कमजोर हृदय वाले मरीजों के लिए लाभकारी मानी जाने वाली दवाएं हर प्रकार के हार्ट फेलियर मरीज के लिए समान रूप से प्रभावी नहीं हो सकतीं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि बीटा ब्लॉकर दवाएं हृदय की धड़कन को धीमा कर दिल पर दबाव कम करती हैं लेकिन जिन मरीजों का हृदय पहले से कठोर हो चुका हो उनमें इससे हृदय के भीतर दबाव बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में शरीर में पानी जमा होना सांस फूलना और सूजन जैसी समस्याएं अधिक बढ़ सकती हैं।

    हालांकि डॉक्टरों ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस अध्ययन का मतलब यह नहीं है कि मरीज अपनी दवा खुद बंद कर दें। बीटा ब्लॉकर दवाओं का उपयोग केवल हार्ट फेलियर ही नहीं बल्कि हाई ब्लड प्रेशर अनियमित धड़कन और हार्ट अटैक के बाद भी किया जाता है। इसलिए किसी भी प्रकार का बदलाव केवल विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह पर ही किया जाना चाहिए।

    नई रिसर्च ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य में हार्ट फेलियर के इलाज में व्यक्तिगत चिकित्सा पद्धति यानी हर मरीज की स्थिति के अनुसार दवा और उपचार तय करना अधिक महत्वपूर्ण होगा। इससे बेहतर परिणाम मिलने की संभावना बढ़ेगी और मरीजों की जीवन गुणवत्ता में भी सुधार आ सकेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर जांच नियमित दवा स्वस्थ जीवनशैली और डॉक्टर की सलाह का पालन ही इस गंभीर बीमारी से बचाव और बेहतर उपचार की सबसे मजबूत कुंजी है।

  • PM मोदी ने विदेशी नेताओं को दिए भारतीय विरासत से जुड़े उपहार, झलकी अनोखी ‘कल्चरल डिप्लोमेसी’

    PM मोदी ने विदेशी नेताओं को दिए भारतीय विरासत से जुड़े उपहार, झलकी अनोखी ‘कल्चरल डिप्लोमेसी’


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीति में भारतीय संस्कृति और पारंपरिक शिल्प को विशेष स्थान मिलता रहा है। विदेश दौरों के दौरान विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों और नेताओं को दिए गए उनके उपहार न केवल भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का परिचय कराते हैं, बल्कि देश के हस्तशिल्प, लोक कलाओं और पारंपरिक कारीगरी को वैश्विक मंच पर भी पहचान दिलाते हैं।

    इंडोनेशियाई संसद की स्पीकर पुआन महारानी को प्रधानमंत्री मोदी ने ओडिशा की प्रसिद्ध इकट (बंधा) कला से तैयार रेशमी वस्त्र भेंट किया। संबलपुर, नुआपटना और बरगढ़ के बुनकरों द्वारा तैयार यह हैंडलूम कला अपनी जटिल टाई-एंड-डाई तकनीक, आकर्षक डिजाइनों और जीवंत रंगों के लिए प्रसिद्ध है और ओडिशा की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक मानी जाती है।

    ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान प्रधानमंत्री ने वहां के गवर्नर-जनरल को बिहार के मिथिला क्षेत्र की प्रसिद्ध मधुबनी पेंटिंग भेंट की। प्राकृतिक रंगों से तैयार इस लोक कला में मोर, वृक्ष और प्रकृति के विविध रूपों का चित्रण है, जो समृद्धि, पर्यावरण संरक्षण और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का संदेश देता है।

    ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज की पत्नी को कश्मीर की पारंपरिक कढ़ाई से सजी शुद्ध ऊन की स्टोल भेंट की गई। घाटी की प्राकृतिक सुंदरता से प्रेरित महीन फूलों की कढ़ाई वाली यह स्टोल कश्मीर की सदियों पुरानी वस्त्र एवं हस्तशिल्प परंपरा का उत्कृष्ट उदाहरण है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने एंथनी अल्बनीज को दो विशेष उपहार भी दिए। पहला, जनजातीय ढोकरा कला से निर्मित धातु की नाव, जिसे प्राचीन ‘लॉस्ट वैक्स कास्टिंग’ तकनीक से तैयार किया गया है। आदिवासी जीवन को दर्शाने वाली यह कलाकृति एकता, सहयोग और सामूहिक प्रगति का संदेश देती है।

    दूसरे उपहार के रूप में उन्हें इंडियन प्रीमियम कॉफी बॉक्स भेंट किया गया, जिसमें भारत के प्रमुख कॉफी उत्पादक क्षेत्रों की चुनिंदा प्रीमियम कॉफी शामिल है। यह भारतीय कॉफी उद्योग की गुणवत्ता और वैश्विक स्तर पर उसकी बढ़ती पहचान को दर्शाता है।

    ऑस्ट्रेलिया के विपक्ष के नेता को प्रधानमंत्री ने राजस्थान की पारंपरिक लकड़ी नक्काशी कला से तैयार हस्तनिर्मित जालीदार हाथी भेंट किया। एक ही लकड़ी के टुकड़े से बनाई गई यह कलाकृति भारतीय शिल्पकारों की बारीक कारीगरी का बेहतरीन उदाहरण है। भारतीय संस्कृति में हाथी बुद्धिमत्ता, समृद्धि और शक्ति का प्रतीक माना जाता है।

    ऑस्ट्रेलिया के गवर्नर-जनरल को प्रधानमंत्री मोदी ने संगमरमर पर अर्ध-कीमती पत्थरों की जड़ाई से तैयार मार्बल इनले वर्क बॉक्स भेंट किया। यह भारत की प्रसिद्ध पीएत्रा ड्यूरा (Pietra Dura) कला का उत्कृष्ट नमूना है, जो भारतीय कारीगरों की सूक्ष्म शिल्पकला को प्रदर्शित करता है।

    न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन को प्रधानमंत्री मोदी ने दो खास उपहार दिए। पहला, हिमालयी संस्कृति और सम्मान का प्रतीक पारंपरिक उत्तराखंडी (पहाड़ी) टोपी, जबकि दूसरा भारतीय महिला हॉकी टीम के सभी खिलाड़ियों के हस्ताक्षर वाली हॉकी स्टिक, जिसे न्यूजीलैंड में आयोजित एफआईएच हॉकी महिला नेशंस कप में भारत की ऐतिहासिक जीत की स्मृति में भेंट किया गया।

    इसके अलावा, प्रधानमंत्री ने उन्हें छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र की प्रसिद्ध ढोकरा ‘ट्री ऑफ लाइफ’ (जीवन वृक्ष) मूर्ति भी भेंट की। ‘लॉस्ट-वैक्स कास्टिंग’ तकनीक से तैयार यह कलाकृति भारत की प्राचीन धातु शिल्प परंपरा का उत्कृष्ट उदाहरण मानी जाती है।

    न्यूजीलैंड के विपक्ष के नेता क्रिस हिपकिंस को उत्तर प्रदेश के लखनऊ की प्रसिद्ध जरी-जरदोजी वॉल हैंगिंग भेंट की गई। धातु के तारों, मोतियों, सीक्विन और अन्य सजावटी तत्वों से सजी यह कलाकृति भारतीय कढ़ाई कला की समृद्ध विरासत, रचनात्मकता और उत्कृष्ट शिल्प कौशल को दर्शाती है।

    प्रधानमंत्री मोदी द्वारा विदेशी नेताओं को दिए गए ये उपहार केवल औपचारिक स्मृति चिह्न नहीं हैं, बल्कि भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक शिल्प, लोक कलाओं और देश के कारीगरों की प्रतिभा को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का प्रभावी माध्यम भी हैं।

  • भोलेनाथ को खुश करने का सबसे सरल मार्ग, इन नियमों और उपायों से बरसेगी शिव कृपा

    भोलेनाथ को खुश करने का सबसे सरल मार्ग, इन नियमों और उपायों से बरसेगी शिव कृपा

    नई दिल्ली । भोलेनाथ को देवों के देव महादेव कहा जाता है। शास्त्रों में भगवान शिव को सबसे जल्दी प्रसन्न होने वाला देवता माना गया है। इसी कारण उन्हें भोलेनाथ भी कहा जाता है। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई पूजा और निष्कपट भक्ति से भगवान शिव अपने भक्तों की हर मनोकामना पूरी करते हैं। उन्हें प्रसन्न करने के लिए बड़े यज्ञ या महंगे अनुष्ठानों की आवश्यकता नहीं होती बल्कि सादगी और समर्पण ही सबसे बड़ा पूजन माना गया है।

    भगवान शिव की पूजा का सबसे उत्तम समय प्रातःकाल माना जाता है। स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर शिवलिंग पर जल अर्पित करना शुभ माना जाता है। यदि संभव हो तो गंगाजल मिश्रित जल से अभिषेक करें। इसके बाद कच्चा दूध दही शहद घी और शक्कर से पंचामृत अभिषेक किया जा सकता है। अंत में पुनः स्वच्छ जल से शिवलिंग का स्नान कराना चाहिए।

    शिव पूजा में बेलपत्र का विशेष महत्व है। तीन पत्तियों वाला बेलपत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना गया है। ध्यान रखें कि बेलपत्र टूटा हुआ या कीड़ों से खराब नहीं होना चाहिए। इसके साथ धतूरा भांग आक के फूल सफेद चंदन और सफेद पुष्प अर्पित करना भी शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान भगवान शिव को अक्षत फल और मौसमी प्रसाद भी अर्पित किया जा सकता है।

    महामृत्युंजय मंत्र और ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप शिव कृपा प्राप्त करने का सबसे सरल और प्रभावी उपाय माना गया है। प्रतिदिन कम से कम 108 बार इन मंत्रों का जाप करने से मानसिक शांति मिलती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। सावन सोमवार प्रदोष व्रत और मासिक शिवरात्रि के दिन इन मंत्रों का जाप विशेष फलदायी माना जाता है।

    भगवान शिव केवल पूजा से ही नहीं बल्कि अच्छे आचरण से भी प्रसन्न होते हैं। सत्य बोलना जरूरतमंदों की सहायता करना माता पिता और गुरु का सम्मान करना तथा किसी के साथ छल कपट न करना शिव भक्ति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है। जो व्यक्ति दूसरों के प्रति दया करुणा और सेवा का भाव रखता है उस पर महादेव की विशेष कृपा बनी रहती है।

    सोमवार का व्रत भगवान शिव को समर्पित माना गया है। इस दिन सात्विक भोजन करना क्रोध से बचना और शिव मंदिर में दीप जलाकर आरती करना शुभ माना जाता है। यदि संभव हो तो गरीबों को भोजन कराना या जरूरतमंदों को वस्त्र दान करना भी पुण्यदायी माना जाता है। दान और सेवा के कार्य भगवान शिव को अत्यंत प्रिय बताए गए हैं।

    शिव पुराण के अनुसार अहंकार त्यागकर सच्चे मन से भगवान शिव का स्मरण करने वाला व्यक्ति जीवन की कठिन परिस्थितियों से बाहर निकलने की शक्ति प्राप्त करता है। महादेव अपने भक्तों को केवल भौतिक सुख ही नहीं बल्कि आत्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा भी प्रदान करते हैं। इसलिए यदि जीवन में सुख समृद्धि सफलता और मानसिक शांति की कामना है तो प्रतिदिन कुछ समय भगवान शिव की आराधना के लिए अवश्य निकालें। सच्ची श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई शिव भक्ति कभी व्यर्थ नहीं जाती और भोलेनाथ अपने भक्तों पर सदैव कृपा बनाए रखते हैं।

  • पूर्व CEC कुरैशी ने किताब में साझा किया मनमोहन सिंह से जुड़ा प्रसंग, कहा था- 'तो मैं आत्महत्या कर लूंगा…'

    पूर्व CEC कुरैशी ने किताब में साझा किया मनमोहन सिंह से जुड़ा प्रसंग, कहा था- 'तो मैं आत्महत्या कर लूंगा…'


    नई दिल्‍ली । पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) एस.वाई. कुरैशी ने अपनी आगामी किताब ‘इंडिया एंड आई: ए हंड्रेड मेमोरीज, नॉट ए मेमॉयर’ में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह से जुड़ा एक भावुक प्रसंग साझा किया है. यह किताब जल्द ही प्रकाशित होने वाली है, जिसमें उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा के अपने लंबे करियर से जुड़े 100 महत्वपूर्ण अनुभवों और घटनाओं का जिक्र किया है.

    एस.वाई कुरैशी ने अपनी किताब में लिखा है कि साल 2012 में चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर कुछ केंद्रीय मंत्रियों की टिप्पणियों से नाराज होकर वह तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पास पहुंचे थे और उनसे शिकायत की थी. उनकी बात सुनने के बाद मनमोहन सिंह ने कहा था, ‘अगर आपको ऐसा लगता है, तो मैं आत्महत्या कर लूंगा.’ एस.वाई. कुरैशी के मुताबिक, यह घटना 2012 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव दौरान हुई थी.

    उस समय तत्कालीन कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने चुनावी रैली में वादा किया था कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आई तो मुसलमानों के लिए सरकारी नौकरियों में 4.5 प्रतिशत आरक्षण बढ़ाकर 9 प्रतिशत कर दिया जाएगा. इस बयान पर भाजपा ने चुनाव आयोग से शिकायत करते हुए इसे आदर्श आचार संहिता (MCC) का उल्लंघन बताया था. कुरैशी अपनी किताब में लिखते हैं कि चुनाव आयोग ने इस मामले में चार दिनों तक सुनवाई की.

    सलमान खुर्शीद के खिलाफ EC पहुंची थी बीजेपी
    कांग्रेस की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी और भाजपा की ओर से अरुण जेटली ने पक्ष रखा. सुनवाई के बाद चुनाव आयोग ने सलमान खुर्शीद की निंदा (Censure) की, जो आचार संहिता के तहत उपलब्ध सबसे कड़ी कार्रवाई थी. इसके बाद कांग्रेस के कुछ नेताओं ने चुनाव आयोग पर ‘अहंकारी’ और ‘मनमाना’ होने के आरोप लगाए. एस.वाई. कुरैशी के अनुसार, आलोचना से उन्हें कोई दिक्कत नहीं थी, लेकिन ऐसी टिप्पणियां चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की साख को नुकसान पहुंचा रही थीं.

    भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई. कुरैशी ने अपनी किताब में लिखा है कि उसी दौरान ईद के अवसर पर आयोजित समारोह में उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के प्रेस सचिव हरीश खरे से अपनी नाराजगी जाहिर की. हरीश खरे ने पूछा कि क्या वह यह बात प्रधानमंत्री तक पहुंचा दें, जिस पर कुरैशी ने हामी भर दी. किताब के मुताबिक, अगले ही दिन प्रधानमंत्री कार्यालय से उन्हें फोन आया और शाम को प्रधानमंत्री आवास पर मनमोहन सिंह के साथ उनकी मुलाकात तय हुई.

    मनमोहन सिंह खुद दरवाजे पर कर रहे थे इंतजार
    एस.वाई. कुरैशी लिखते हैं कि जब वह पहुंचे तो मनमोहन सिंह स्वयं दरवाजे पर उनका इंतजार कर रहे थे. बैठते ही उन्होंने भावुक होकर कहा, ‘हरीश ने मुझे बताया कि आपने क्या कहा. अगर आपको ऐसा लगता है, तो मैं आत्महत्या कर लूंगा.’ कुरैशी के अनुसार, वह यह सुनकर स्तब्ध रह गए. उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी शिकायत प्रधानमंत्री से नहीं, बल्कि कुछ मंत्रियों के बयानों को लेकर थी. इस पर मनमोहन सिंह ने कहा कि अगर उन्हें इस बारे में पहले जानकारी होती तो वह संबंधित मंत्रियों को कड़ी फटकार लगाते. उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसी कोई बात हो तो वह सीधे उन्हें फोन करें.

    अपनी किताब में एस.वाई. कुरैशी ने लिखा है कि मनमोहन सिंह ने उनसे कहा, ‘चुनाव आयोग सिर्फ भारत का गौरव नहीं है, बल्कि हमारे लोकतंत्र की आत्मा है. अगर हमने इसे खो दिया, तो हम सब कुछ खो देंगे.’ पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ने लिखा कि इस मुलाकात ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया. उनके मुताबिक, यह किसी राजनेता से मुलाकात नहीं, बल्कि ऐसे नेता से सामना था, जिसके लिए संवैधानिक मर्यादा केवल भाषण का विषय नहीं, बल्कि जीवन का सिद्धांत थी. उन्होंने बताया कि इस मुलाकात के बाद चुनाव आयोग को लेकर की जा रही बयानबाजी भी थम गई.

  • सोमवार को ऐसे करें भगवान शिव की पूजा हर मनोकामना होगी पूरी मिलेगा सुख समृद्धि और सफलता का आशीर्वाद

    सोमवार को ऐसे करें भगवान शिव की पूजा हर मनोकामना होगी पूरी मिलेगा सुख समृद्धि और सफलता का आशीर्वाद


    नई दिल्ली । सनातन धर्म में सोमवार का दिन भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि विधान से महादेव की पूजा करने वाले भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। भगवान शिव को भोलेनाथ कहा जाता है क्योंकि वे सच्चे मन से की गई भक्ति से शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं। विशेष रूप से सावन के सोमवार का महत्व और भी बढ़ जाता है लेकिन वर्ष के प्रत्येक सोमवार को शिव पूजा का विशेष फल प्राप्त होता है। यह दिन सुख समृद्धि उत्तम स्वास्थ्य वैवाहिक जीवन में खुशहाली और करियर में सफलता का आशीर्वाद देने वाला माना गया है।

    सोमवार की शुरुआत ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करने से करनी चाहिए। स्नान के बाद साफ और हल्के रंग के वस्त्र धारण करें तथा घर के मंदिर या शिवालय में भगवान शिव की पूजा का संकल्प लें। पूजा स्थल को स्वच्छ करें और शिवलिंग के सामने दीपक जलाकर भगवान गणेश का स्मरण करें। इसके बाद भगवान शिव का जल से अभिषेक करें और फिर दूध दही शहद घी तथा शक्कर से पंचामृत अर्पित करें। अंत में पुनः स्वच्छ जल या गंगाजल से अभिषेक करना शुभ माना जाता है।

    अभिषेक के बाद भगवान शिव को बेलपत्र धतूरा आक के फूल भांग सफेद चंदन सफेद पुष्प और मौसमी फल अर्पित करें। बेलपत्र चढ़ाते समय इस बात का ध्यान रखें कि पत्ती टूटी हुई न हो और उसका चिकना भाग शिवलिंग की ओर रहे। इसके बाद धूप दीप नैवेद्य और फल अर्पित कर भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें। विशेष रूप से ॐ नमः शिवाय महामृत्युंजय मंत्र और शिव चालीसा का पाठ करने से मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है।

    जो लोग सोमवार का व्रत रखते हैं उन्हें दिनभर सात्विक आहार का पालन करना चाहिए। कई श्रद्धालु केवल फलाहार करते हैं जबकि कुछ लोग एक समय बिना लहसुन प्याज वाला भोजन ग्रहण करते हैं। व्रत के दौरान क्रोध झूठ और नकारात्मक विचारों से दूर रहना भी पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है। दिनभर भगवान शिव का स्मरण करते हुए जरूरतमंद लोगों की सहायता करना और दान पुण्य करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है।

    धार्मिक मान्यता है कि अविवाहित युवक युवतियां यदि श्रद्धा से सोमवार का व्रत करें तो उन्हें मनचाहा जीवनसाथी प्राप्त होता है। वहीं विवाहित दंपति इस दिन पूजा करने से दांपत्य जीवन में सुख शांति और प्रेम बनाए रख सकते हैं। नौकरी और व्यवसाय से जुड़े लोगों को भी भगवान शिव की कृपा से नए अवसर प्राप्त होते हैं और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। जिन लोगों के कार्य लंबे समय से अटके हुए हों वे भी सोमवार को शिव आराधना करके सकारात्मक परिणाम प्राप्त कर सकते हैं।

    पूजा के अंत में भगवान शिव की आरती करें और परिवार के सभी सदस्यों में प्रसाद वितरित करें। श्रद्धा विश्वास और सच्चे मन से की गई पूजा का महत्व सबसे अधिक माना गया है। केवल विधि नहीं बल्कि मन की पवित्रता और भक्ति ही भगवान शिव को प्रिय है। इसलिए यदि सोमवार के दिन पूरी निष्ठा और आस्था के साथ भोलेनाथ का पूजन किया जाए तो जीवन की अनेक बाधाएं दूर होती हैं तथा सुख समृद्धि शांति और सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है।

  • 27 जुलाई से वक्री होंगे शनि देव, 11 दिसंबर तक इन 4 राशियों को रहना होगा बेहद सावधान

    27 जुलाई से वक्री होंगे शनि देव, 11 दिसंबर तक इन 4 राशियों को रहना होगा बेहद सावधान


    नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष में शनि ग्रह की चाल को बेहद प्रभावशाली माना जाता है। न्याय के देवता और कर्मफलदाता शनि देव 27 जुलाई 2026 से वक्री होने जा रहे हैं। शनि की यह उल्टी चाल 11 दिसंबर 2026 तक यानी करीब 137 दिनों तक रहेगी। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान सभी 12 राशियों पर प्रभाव पड़ेगा, लेकिन चार राशियों के जातकों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

    ज्योतिषीय गणनाओं के मुताबिक, जब शनि जैसे धीमी गति वाले ग्रह वक्री होते हैं तो उनका प्रभाव अधिक तीव्र माना जाता है। ऐसे में कुछ राशियों के लोगों को आर्थिक, पारिवारिक, मानसिक और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

    मेष राशि
    मेष राशि के जातकों के लिए यह अवधि करियर और आर्थिक मामलों में चुनौतीपूर्ण रह सकती है। नौकरीपेशा लोगों पर काम का दबाव बढ़ सकता है और वरिष्ठ अधिकारियों से मतभेद होने की आशंका है। नए निवेश या नया कारोबार शुरू करने से बचने की सलाह दी गई है, क्योंकि धन फंसने की संभावना बन सकती है। अनावश्यक विवादों से दूरी बनाए रखें।

    कर्क राशि
    कर्क राशि के जातकों पर पहले से शनि की ढैय्या का प्रभाव है। ऐसे में शनि के वक्री होने से परेशानियां बढ़ सकती हैं। अचानक बड़े खर्च सामने आ सकते हैं, जिससे आर्थिक संतुलन बिगड़ सकता है। पारिवारिक मतभेद की स्थिति भी बन सकती है। स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहें और वाहन चलाते समय विशेष सावधानी बरतें।

    मकर राशि
    मकर राशि पर शनि की साढ़ेसाती का अंतिम चरण चल रहा है। इस दौरान व्यापार में बनने वाले सौदे अटक सकते हैं और साझेदारी के कार्यों में धोखा मिलने की आशंका जताई गई है। बचत पर असर पड़ सकता है। इस अवधि में किसी को उधार देने से बचें और अपनी वाणी पर नियंत्रण रखें।

    मीन राशि
    मीन राशि के जातक इस समय शनि की साढ़ेसाती के दूसरे चरण से गुजर रहे हैं, जिसे सबसे चुनौतीपूर्ण माना जाता है। शनि की वक्री चाल के दौरान कार्यों में देरी, रुकावट और मानसिक तनाव बढ़ सकता है। अनिद्रा और अनजाने भय जैसी स्थितियां भी बन सकती हैं। कोर्ट-कचहरी के मामलों से दूरी बनाए रखें और फिलहाल किसी भी प्रकार का निवेश करने से बचें।

    वक्री शनि के दौरान बताए गए उपाय
    शनिवार को दीपदान करें: प्रत्येक शनिवार शाम पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाकर ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करें।
    हनुमान चालीसा का पाठ करें: नियमित रूप से या कम से कम मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा अथवा बजरंग बाण का पाठ करें।
    दान-पुण्य करें: शनिवार के दिन काले तिल, काली उड़द, छाता, जूते या काले वस्त्र किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दान करें।
    अच्छे कर्म अपनाएं: असहाय लोगों, सफाई कर्मचारियों और मजदूरों का सम्मान करें। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, न्यायप्रिय शनि देव कर्मों के आधार पर ही फल प्रदान करते हैं।

  • MP Weather: मप्र में 16 जुलाई से फिर बदलेगा मौसम, फिलहाल 22 जिलों में आज हल्की बारिश के आसार

    MP Weather: मप्र में 16 जुलाई से फिर बदलेगा मौसम, फिलहाल 22 जिलों में आज हल्की बारिश के आसार


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की रफ्तार फिलहाल धीमी पड़ गई है। प्रदेश के करीब 60 प्रतिशत हिस्से से मानसूनी बादल छंट चुके हैं, जिसके चलते अगले पांच दिनों तक कहीं भी भारी या अति भारी बारिश की संभावना नहीं है। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, 16 जुलाई से एक नया मौसम तंत्र सक्रिय हो सकता है, जिससे प्रदेश में फिर तेज बारिश का दौर शुरू होने के संकेत हैं।

    फिलहाल प्रदेश में हल्की बारिश और बूंदाबांदी का सिलसिला जारी रहेगा। सोमवार को सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला, बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, बैतूल, खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन, बड़वानी, धार और अलीराजपुर जिलों में बादल छाने के साथ हल्की बारिश होने की संभावना है।

    वहीं, नीमच, मंदसौर, रतलाम, झाबुआ, आगर-मालवा, इंदौर, उज्जैन, राजगढ़, शाजापुर, देवास, विदिशा, भोपाल, सीहोर, हरदा, नर्मदापुरम, रायसेन, नरसिंहपुर, जबलपुर, कटनी, दमोह, पन्ना, सागर, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया और ग्वालियर में मौसम सामान्य रहने के साथ धूप निकलने के आसार हैं।

    फिलहाल रिमझिम बारिश, भारी बरसात के संकेत नहीं
    मौसम विभाग के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम मानसून की सक्रियता फिलहाल कमजोर बनी हुई है। इसी वजह से पिछले चार-पांच दिनों से प्रदेश में कहीं भी भारी या अति भारी बारिश दर्ज नहीं की गई है। आने वाले कुछ दिनों तक केवल हल्की बारिश या रिमझिम फुहारें पड़ने की संभावना है, जबकि 16 जुलाई के बाद मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है।

    मानसून की रफ्तार क्यों हुई धीमी?
    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मानसून को सक्रिय बनाए रखने वाली प्रमुख मौसम प्रणालियां कमजोर पड़ गई हैं या उनका प्रभाव मध्य प्रदेश से दूर हो गया है। इसी कारण अधिकांश इलाकों में केवल बादल छाए रहने और हल्की बारिश जैसी स्थिति बनी हुई है।

    बंगाल की खाड़ी से नए सिस्टम का इंतजार
    मौसम विभाग का अनुमान है कि 13 से 19 जुलाई के बीच उत्तर बंगाल की खाड़ी में एक नया ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण (साइक्लोनिक सर्कुलेशन) बनने की संभावना है। यदि यह आगे चलकर निम्न दाब क्षेत्र में परिवर्तित होता है तो मध्य प्रदेश में एक बार फिर तेज बारिश का दौर शुरू हो सकता है। इसके अलावा प्रशांत महासागर में तीन नए मौसम तंत्र विकसित होने की संभावना जताई गई है। इनमें से यदि कोई एक बंगाल की खाड़ी तक पहुंचता है, तो मानसून दोबारा सक्रिय होकर प्रदेश में अच्छी बारिश करा सकता है।

    सामान्य से सिर्फ 1 प्रतिशत अधिक बारिश
    पिछले पांच दिनों से भारी बारिश नहीं होने के कारण प्रदेश में वर्षा का अतिरिक्त आंकड़ा लगातार घटा है। पहले यह सामान्य से करीब 30 प्रतिशत अधिक था, जो अब घटकर सिर्फ 1 प्रतिशत रह गया है। मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में अब तक 241.8 मिमी (9.5 इंच) बारिश दर्ज की गई है, जबकि सामान्य औसत 239.8 मिमी (9.4 इंच) है। यानी अब तक सामान्य से केवल 1 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई है, जो पूरे मानसून कोटे का लगभग 25 प्रतिशत है।