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  • वैभव सूर्यवंशी पर भारी पड़ा BCCI का नियम: 14 साल की उम्र में ही खत्म हुआ अंडर-19 वर्ल्ड कप का सफर

    वैभव सूर्यवंशी पर भारी पड़ा BCCI का नियम: 14 साल की उम्र में ही खत्म हुआ अंडर-19 वर्ल्ड कप का सफर


    नई दिल्ली ।अंडर-19 वर्ल्ड कप के फाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ 80 गेंदों में 175 रनों की तूफानी पारी खेलकर भारत को छठा खिताब दिलाने वाले वैभव सूर्यवंशी आज हर भारतीय क्रिकेट प्रेमी की जुबान पर हैं। पूरे टूर्नामेंट में 439 रन और रिकॉर्ड 30 छक्के जड़ने वाले वैभव की उम्र अभी सिर्फ 14 साल है। कायदे से देखा जाए तो 27 मार्च को 15 साल के होने जा रहे वैभव 2028 और उसके बाद के भी अंडर-19 वर्ल्ड कप खेलने की उम्र रखते हैं, लेकिन भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड BCCI का एक नियम उनके इस मौके को छीन चुका है।

    बीसीसीआई का वो सख्त नियम क्या है? दरअसल, बीसीसीआई ने साल 2016 में जूनियर क्रिकेट के ढांचे में एक बड़ा बदलाव किया था। इस नियम के तहत कोई भी भारतीय खिलाड़ी अपने करियर में केवल एक ही बार अंडर-19 वर्ल्ड कप में हिस्सा ले सकता है। बोर्ड का मानना है कि ऐसा करने से नए खिलाड़ियों को मौका मिलता है और टैलेंट पूल का दायरा बढ़ता है। यदि किसी खिलाड़ी को एक से ज्यादा बार मौका दिया जाए, तो वह नए टैलेंट का रास्ता रोकता है। यही कारण है कि वैभव सूर्यवंशी अब भविष्य में दोबारा कभी भी भारत की अंडर-19 विश्व कप टीम की जर्सी नहीं पहन पाएंगे।

    इतिहास के पन्नों में दर्ज हैं ये नाम 2016 से पहले नियम अलग थे। उस समय कई खिलाड़ियों ने अपनी उम्र के आधार पर एक से अधिक बार इस टूर्नामेंट में भाग लिया था। भारतीय टीम के मौजूदा सितारे रवींद्र जडेजा, सरफराज खान, आवेश खान, विजय जोल और रिकी भुई ऐसे नाम हैं जिन्होंने एक से ज्यादा बार अंडर-19 वर्ल्ड कप खेला है। सरफराज खान ने तो दो वर्ल्ड कप में शानदार प्रदर्शन कर काफी सुर्खियां बटोरी थीं, लेकिन वैभव अब इस फेहरिस्त में शामिल नहीं हो सकेंगे।

    आगे क्या है वैभव का रास्ता? भले ही वैभव अब अंडर-19 वर्ल्ड कप न खेल पाएं, लेकिन उनकी इस उम्र में ऐसी परिपक्व बल्लेबाजी ने उनके लिए टीम इंडिया के सीनियर स्क्वॉड के दरवाजे खोल दिए हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि बीसीसीआई अब उन्हें सीधे घरेलू क्रिकेट (रणजी ट्रॉफी) और इंडिया-ए के दौरों पर भेजकर सीनियर टीम के लिए तैयार करेगा। वैभव ने जो तबाही 14 साल की उम्र में मचाई है, उसने साबित कर दिया है कि वह ‘लंबी रेस के घोड़े’ हैं और अब उनका लक्ष्य सीधे नीली जर्सी पहनकर सीनियर वर्ल्ड कप में तिरंगा लहराना होगा।

  • विक्रांत मैसी की अनोखी पेरेंटिंग: बेटे के बर्थ सर्टिफिकेट पर नहीं लिखा कोई धर्म, बोले- 'यह मेरा अधिकार'

    विक्रांत मैसी की अनोखी पेरेंटिंग: बेटे के बर्थ सर्टिफिकेट पर नहीं लिखा कोई धर्म, बोले- 'यह मेरा अधिकार'


    नई दिल्ली । फिल्म ’12वीं फेल’ के जरिए हर घर में अपनी पहचान बनाने वाले विक्रांत मैसी इन दिनों अपनी प्रोफेशनल लाइफ से ज्यादा अपनी पर्सनल लाइफ और पेरेंटिंग स्टाइल को लेकर सुर्खियों में हैं। विक्रांत और उनकी पत्नी शीतल ठाकुर के घर पिछले साल 7 फरवरी 2024 को बेटे ‘वरदान’ का जन्म हुआ था। हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में विक्रांत ने साझा किया कि उन्होंने अपने बेटे के कानूनी दस्तावेजों में धर्म की पहचान को अनिवार्य नहीं बनाया है।

    मल्टीकल्चरल परिवार और कड़वे अनुभव टाइम्स नाउ को दिए इंटरव्यू में विक्रांत ने बताया कि वह एक ऐसे परिवार से आते हैं जहाँ विभिन्न संस्कृतियों और धर्मों का संगम है। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में धार्मिक तनाव और उसके नकारात्मक पहलुओं को बहुत करीब से देखा है। शायद यही वजह है कि वह अपने बेटे को बचपन से ही किसी खास धार्मिक लेबल में बांधना नहीं चाहते थे। विक्रांत ने स्पष्ट किया कि उनके इस फैसले का उद्देश्य अपने बेटे को उन तनावों से बचाना है जो अक्सर धर्म के नाम पर समाज में पैदा होते हैं।

    भारत सरकार के नियमों का हवाला विक्रांत ने अपने फैसले का बचाव करते हुए भारतीय कानून और सिस्टम की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत सरकार हमें यह विकल्प देती है कि हम आधिकारिक दस्तावेजों में धर्म का उल्लेख करना चाहते हैं या नहीं। उन्होंने इसकी तुलना उस नियम से की जिसके तहत अब सिंगल महिलाओं को पासपोर्ट पर पति का नाम देना अनिवार्य नहीं है। विक्रांत के मुताबिक सरकार द्वारा दी गई इस आजादी का इस्तेमाल करना उनका अधिकार है और उन्होंने वही किया जो उन्हें अपने बच्चे के भविष्य के लिए सही लगा।

    बेटे को दी चुनने की आजादी एक्टर ने इस बात पर जोर दिया कि वह चाहते हैं कि वरदान जब बड़ा हो जाए और दुनिया को समझने लगे तो वह खुद तय करे कि उसे किस विचारधारा या धर्म का पालन करना है। विक्रांत और शीतल की यह सोच आधुनिक भारत की एक नई तस्वीर पेश करती है जहाँ माता-पिता बच्चों पर अपनी पहचान थोपने के बजाय उन्हें स्वतंत्र व्यक्तित्व बनाने की ओर अग्रसर हैं। विक्रांत की इस सादगी और प्रगतिशील सोच की सराहना उनके चाहने वाले जमकर कर रहे हैं।

  • जापान में 'पुष्पा' का फायर: टॉप 10 में बनाई जगह, लेकिन नंबर 1 की बादशाहत अब भी बरकरार

    जापान में 'पुष्पा' का फायर: टॉप 10 में बनाई जगह, लेकिन नंबर 1 की बादशाहत अब भी बरकरार


    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा की सीमाओं को लांघते हुए ‘आइकन स्टार’ अल्लू अर्जुन की फिल्म ‘पुष्पा 2’ ने जापान के बॉक्स ऑफिस पर अपनी धमक दर्ज कराई है। 16 जनवरी को जापान में ‘पुष्पा कुनरिन’ शीर्षक के साथ रिलीज हुई इस फिल्म ने शुरुआती धीमी रफ्तार के बाद अब अपनी गति पकड़ ली है। दिलचस्प बात यह है कि इस फिल्म का पहला भाग जापान के सिनेमाघरों में रिलीज नहीं हुआ था, बावजूद इसके दूसरे पार्ट को जापानी दर्शकों का भरपूर प्यार मिल रहा है।

    धूम 3 को पछाड़ा, अब ‘रोबोट’ पर नजर व्यापार विश्लेषक वेबसाइट सैक्निक के आंकड़ों के अनुसार, पुष्पा 2 ने अपनी रिलीज के महज 14 दिनों में ₹6.06 करोड़ का कलेक्शन कर लिया है। इस कमाई के साथ ही इसने आमिर खान की फिल्म ‘धूम 3’ (₹6.03 करोड़) को पीछे छोड़ते हुए टॉप 10 की लिस्ट में 10वां स्थान हासिल किया है। अब पुष्पा 2 का अगला लक्ष्य रजनीकांत की फिल्म ‘एंथिरन’ (रोबोट) का रिकॉर्ड तोड़ना है, जिसने वहां ₹6.33 करोड़ का कारोबार किया था। फिल्म को टोक्यो और ओसाका जैसे प्रमुख शहरों में बेहतरीन ‘वर्ड ऑफ माउथ’ का फायदा मिल रहा है।

    RRR का सिंहासन है सबसे ऊपर जापान में भारतीय फिल्मों की लोकप्रियता की बात करें तो ‘RRR’ अब भी निर्विवाद रूप से पहले नंबर पर बनी हुई है। एसएस राजामौली की इस मास्टरपीस ने जापान में ₹139.79 करोड़ (¥2.42 बिलियन) की ऐतिहासिक कमाई की थी, जो किसी भी अन्य भारतीय फिल्म के लिए एक सपना जैसा है। दूसरे नंबर पर सुपरस्टार रजनीकांत की ‘मुत्थु’ है, जिसने दो दशकों तक अपनी बादशाहत बनाए रखी थी।

    जापान की टॉप 5 भारतीय फिल्में (कलेक्शन के आधार पर): | रैंक | फिल्म | कमाई लगभग | | :— | :— | :— | | 1 | RRR | ₹139.79 करोड़ | | 2 | मुत्थु | ₹23.39 करोड़ | | 3 | बाहुबली 2 | ₹17.61 करोड़ | | 4 | 3 इडियट्स | ₹9.81 करोड़ | | 5 | इंग्लिश विंग्लिश | ₹9.24 करोड़ |

    अल्लू अर्जुन और रश्मिका मंदाना ने जापान जाकर इस फिल्म का जमकर प्रचार किया था, जिसका असर अब आंकड़ों में दिख रहा है। हालांकि ‘RRR’ तक पहुंचना मुश्किल लग रहा है, लेकिन ट्रेड एक्सपर्ट्स का मानना है कि ‘पुष्पा 2’ जापान में अपनी लंबी पारी खेल सकती है और जल्द ही 7वें या 8वें पायदान तक पहुंच सकती है।

  • धुरंधर 2 का 'जीरो बजट' कनेक्शन: क्या वाकई बिना खर्च के रिलीज हो रही है फिल्म? जानें मेकर्स की मास्टर स्ट्रैटेजी

    धुरंधर 2 का 'जीरो बजट' कनेक्शन: क्या वाकई बिना खर्च के रिलीज हो रही है फिल्म? जानें मेकर्स की मास्टर स्ट्रैटेजी


    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा के इतिहास में बहुत कम ऐसी फिल्में होती हैं जो अपनी रिलीज से पहले ही वित्तीय रूप से पूरी तरह सुरक्षित हो जाएं। आदित्य धर की आगामी फिल्म ‘धुरंधर 2’ इसी श्रेणी में खड़ी नजर आ रही है। 19 मार्च को रिलीज होने जा रही इस फिल्म के बजट को लेकर सोशल मीडिया पर दो तरह की बातें हो रही हैं-एक धड़ा इसे 250 करोड़ की फिल्म बता रहा है तो दूसरा इसे ‘शून्य बजट’ वाली फिल्म कह रहा है।

    क्यों कहा जा रहा है इसे 0 बजट की फिल्म? हकीकत यह है कि आदित्य धर ने ‘धुरंधर’ की पूरी कहानी को एक साथ ही शूट किया था जिसकी कुल लंबाई लगभग 7 घंटे थी। फिल्म की शूटिंग पर करीब 225 से 280 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। चूँकि पहले पार्ट ने बॉक्स ऑफिस पर 1347 करोड़ से ज्यादा की कमाई करके अपनी मूल लागत कई गुना वसूल ली है इसलिए दूसरे पार्ट के लिए प्रोडक्शन का कोई नया बड़ा खर्च नहीं बचा है। ट्रेड एक्सपर्ट्स का मानना है कि तकनीकी रूप से दूसरे पार्ट की निर्माण लागत पहले ही कवर हो चुकी है जिससे अब बिकने वाला हर टिकट सीधे मेकर्स के मुनाफे में जुड़ेगा।

    कमाई का गणित और रिस्क फ्री रिलीज फिल्म की वित्तीय मजबूती का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि रिलीज से पहले ही इसके डिजिटल और म्यूजिक राइट्स की भारी बिक्री हो चुकी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक जियो हॉटस्टार ने ‘धुरंधर 2’ के डिजिटल राइट्स रिकॉर्ड 150 करोड़ रुपये में खरीदे हैं। वहीं टी-सीरीज ने इसके म्यूजिक राइट्स के लिए 50-60 करोड़ रुपये चुकाए हैं। प्रमोशन और वीएफएक्स के कुछ नए खर्चों को जोड़ भी लिया जाए तो भी फिल्म अपनी लैंडिंग कॉस्ट से काफी ऊपर जा चुकी है। यही वजह है कि इसे अब एक ‘रिस्क फ्री’ प्रोजेक्ट माना जा रहा है।

    बॉक्स ऑफिस क्लैश और फैंस का उत्साह 19 मार्च को बॉक्स ऑफिस पर ‘धुरंधर 2’ का मुकाबला यश की बहुचर्चित फिल्म ‘टॉक्सिक’ से होने की संभावना है। हालांकि ‘धुरंधर 2’ के पास एक बड़ा फायदा यह है कि इसे अपनी लागत निकालने का कोई दबाव नहीं है। फिल्म के टीजर में हमजा की बैक स्टोरी और कुछ नए किरदारों जैसे यामी गौतम की झलक ने फैंस की उत्सुकता बढ़ा दी है। भले ही दर्शकों को एंड क्रेडिट्स के जरिए कहानी का थोड़ा अंदाजा हो लेकिन स्क्रीन पर इस विजुअल ट्रीट को देखने का क्रेज कम नहीं हुआ है।फिल्म व्यापार विश्लेषकों का कहना है कि आदित्य धर ने दो हिस्सों में फिल्म को रिलीज करने का जो फैसला लिया वह न केवल रचनात्मक रूप से बल्कि आर्थिक रूप से भी बॉलीवुड के लिए एक नया उदाहरण पेश कर रहा है।

  • भ्रामक विज्ञापन मामले में सलमान खान को बड़ी राहत… इस आयोग ने गैर-जमानती वारंट पर लगाई रोक

    भ्रामक विज्ञापन मामले में सलमान खान को बड़ी राहत… इस आयोग ने गैर-जमानती वारंट पर लगाई रोक


    जयपुर।
    राजस्थान उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (Rajasthan Consumer Disputes Redressal Commission) ने अभिनेता सलमान खान (Actor Salman Khan.) को एक बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट (Non-bailable warrant) पर रोक लगा दी है। यह मामला एक पान मसाला कंपनी के भ्रामक विज्ञापन (Misleading Advertisement) से जुड़ा है। राज्य आयोग ने सलमान खान और कंपनी की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। राजस्थान उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने शुक्रवार को एक पान मसाला कंपनी और सलमान खान की ओर से दायर पुनरीक्षण याचिकाओं पर सुनवाई की।


    क्या दलील?

    सलमान खान के वकील ने सुनवाई के दौरान राज्य आयोग को बताया कि जिला उपभोक्ता आयोग ने बिना समन जारी किए ही जमानती वारंट जारी किया था। अब गैर-जमानती वारंट जारी करने की प्रक्रिया में है। यही नहीं जमानती वारंट रद्द करने का अनुरोध की एक अर्जी भी जिला उपभोक्ता आयोग जयपुर-द्वितीय के समक्ष लंबित है।


    आयोग ने दी राहत

    इसे ध्यान में रखते हुए राज्य आयोग ने जमानती वारंट तामील होने तक गैर-जमानती वारंट जारी करने से रोक दिया। यही नहीं जिला आयोग को लंबित अर्जी पर जल्द से जल्द सुनवाई करने का भी निर्देश दिया। बता दें कि जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग जयपुर-द्वितीय ने अभिनेता के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया था और उन्हें छह फरवरी को पेश होने का निर्देश दिया था।


    क्या है मामला?

    यह आदेश शिकायतकर्ता योगेंद्र सिंह द्वारा दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया गया था। शिकायतकर्ता ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि आयोग की ओर से छह जनवरी को अंतरिम रोक के बावजूद एक पान मसाला कंपनी के विज्ञापन अब भी दिखाए जा रहे हैं। दलील दी गई कि यह तो आयोग के आदेश की अवमानना है।


    क्या आरोप?

    मूल शिकायत में आरोप लगाया गया था कि पान मसाला कंपनी और उसके ब्रांड एंबेसडर अभिनेता सलमान खान भ्रामक विज्ञापन कर रहे हैं। इस शिकायत पर आयोग ने 6 जनवरी को उत्पाद के प्रचार और विज्ञापन पर अंतरिम रोक लगा दी थी। शिकायतकर्ता ने बाद में अवमानना याचिका दायर की। फिर दावा किया कि रोक के बावजूद 9 जनवरी को कोटा में नयापुरा स्टेडियम के पास उक्त विज्ञापन वाला एक साइन बोर्ड लगाया गया।

  • Pakistan: दौड़ते हुए आया हमलावर, गोलियां चलीं…. फिर इमामबाड़े में गूंजा धमाका… चश्मदीदों ने सुनाई ब्लास्ट की दास्तान

    Pakistan: दौड़ते हुए आया हमलावर, गोलियां चलीं…. फिर इमामबाड़े में गूंजा धमाका… चश्मदीदों ने सुनाई ब्लास्ट की दास्तान


    इस्लामाबाद।
    पाकिस्तान (Pakistan) की राजधानी इस्लामाबाद (Islamabad ) शुक्रवार को उस वक्त खौफ और दहशत में डूब गई, जब जुमे की नमाज़ के दौरान एक शिया इमामबाड़े (Shia Imambaras) को निशाना बनाकर आत्मघाती हमला (Suicide Blast) कर दिया गया। इस भीषण विस्फोट में अब तक कम से कम 31 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 170 से ज़्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि कई घायलों की हालत गंभीर है, ऐसे में मृतकों का आंकड़ा और बढ़ सकता है। धमाका ठीक उसी समय हुआ, जब नमाज़ शुरू हो रही थी और इमामबाड़ा पूरी तरह भरा हुआ था।


    गेट पर रोका, गोलियाँ चलीं और फिर मौत का मंजर

    पुलिस अधिकारियों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आत्मघाती हमलावर को इमामबाड़े के मुख्य द्वार पर तैनात सुरक्षा गार्डों ने रोक लिया था। इसी दौरान अचानक हालात बिगड़ गए। चश्मदीदों का कहना है कि हमलावर ने सुरक्षा कर्मियों पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी, जिसमें कुछ गार्ड घायल हो गए। इसके बाद वह लगभग 20 मीटर तक दौड़ता हुआ अंदर घुसा और नमाज़ के बीच खुद को विस्फोट से उड़ा लिया। यह आतंकी वारदात इस्लामाबाद के बाहरी इलाके में स्थित खदीजा तुल कुबरा इमामबाड़ा में हुई। वहां मौजूद लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला और पलभर में इबादत की जगह मातम में बदल गई।


    “हर तरफ चीखें थीं, खून था” — आंखों देखा हाल

    एक चश्मदीद ने बताया, “हमलावर को गेट पर रोका गया था। तभी गोलियों की आवाज आई। इसके बाद वह अंदर की ओर भागा और नमाज़ के दौरान जाकर धमाका कर दिया।” वहीं, हुसैन शाह ने बताया कि वह इमामबाड़े के आंगन में नमाज़ अदा कर रहे थे। उन्होंने कहा, “अचानक एक बहुत ज़ोरदार धमाका हुआ। उसी पल समझ आ गया कि कोई बड़ा हमला हुआ है।” हुसैन शाह के मुताबिक, जब वे अंदर पहुंचे तो हर तरफ अफरातफरी थी। “चारों ओर चीख-पुकार मची थी, खून बिखरा हुआ था। मैंने करीब 30 शव खुद देखे, जबकि घायलों की संख्या उससे कहीं ज़्यादा थी।”


    धमाके से कांपी इमारत, आसपास के घर भी क्षतिग्रस्त

    विस्फोट की तीव्रता इतनी ज़्यादा थी कि इमामबाड़े की तीन मंज़िला इमारत की खिड़कियाँ चकनाचूर हो गईं। आसपास की रिहायशी इमारतों को भी नुकसान पहुंचा। मस्जिद के अंदर मौजूद बच्चों और बुज़ुर्गों समेत लगभग 200 लोग घायल हो गए। हालात इतने भयावह थे कि घायलों को स्ट्रेचर के अलावा निजी गाड़ियों और यहां तक कि कारों की डिक्की में डालकर अस्पताल पहुंचाया गया। एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि दृश्य दिल दहला देने वाला था। कई लोग खून से लथपथ पड़े थे और हर कोई अपनों को ढूंढने की कोशिश कर रहा था।


    अस्पतालों में इमरजेंसी, मरीज रावलपिंडी भेजे गए

    हमले के तुरंत बाद इस्लामाबाद के PIMS (पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज), पॉलीक्लिनिक अस्पताल और CDA अस्पताल में आपातकाल घोषित कर दिया गया। इस्लामाबाद के डिप्टी कमिश्नर इरफान नवाज़ मेमन ने बताया कि घायलों की संख्या अधिक होने के कारण कई मरीजों को रावलपिंडी के अस्पतालों में शिफ्ट किया गया है। इमरजेंसी वार्ड के बाहर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था।


    इलाका सील, सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर

    धमाके के बाद पाकिस्तान आर्मी, रेंजर्स और पुलिस ने पूरे इलाके को घेरकर सील कर दिया। फिलहाल रेस्क्यू ऑपरेशन और जांच की प्रक्रिया एक साथ चल रही है। अब तक किसी भी आतंकी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि सुरक्षा घेरा कैसे टूटा और हमलावर इमामबाड़े के अंदर तक कैसे पहुंचा। गौरतलब है कि यह हमला ऐसे समय में हुआ है, जब उज़्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्ज़ियोयेव दो दिन की आधिकारिक यात्रा पर इस्लामाबाद में मौजूद हैं। घटना के बाद राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है और हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं।

  • एआर रहमान को 'एंटी-नेशनल' बताने पर भड़के प्रकाश राज, कंगना की 'इमरजेंसी' को बताया प्रोपेगेंडा

    एआर रहमान को 'एंटी-नेशनल' बताने पर भड़के प्रकाश राज, कंगना की 'इमरजेंसी' को बताया प्रोपेगेंडा


    नई दिल्ली । भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के दो दिग्गज कलाकार कंगना रनौत और प्रकाश राज एक बार फिर आमने-सामने हैं। विवाद की शुरुआत तब हुई जब दिग्गज संगीतकार एआर रहमान ने एक इंटरव्यू में अपनी फिल्म ‘छावा’ और इंडस्ट्री में मिल रहे काम को लेकर कुछ बेबाक टिप्पणियां की थीं। रहमान के इसी बयान पर पलटवार करते हुए कंगना रनौत ने उन्हें ‘एंटी-नेशनल’ करार दिया था जिस पर अब प्रकाश राज ने बेहद तल्ख टिप्पणी की है।

    प्रकाश राज का कड़ा प्रहार प्रकाश राज ने एआर रहमान का बचाव करते हुए कहा कि रहमान जैसे कलाकार जिन्होंने ‘मां तुझे सलाम’ और ‘जय हो’ जैसे गीतों से देश का मान बढ़ाया और दो ऑस्कर जीते वह काम के लिए भीख नहीं मांग रहे हैं। उन्होंने जो कहा वह सच है। कंगना पर निशाना साधते हुए प्रकाश राज ने कहा कि इस मुद्दे पर लोगों का भौंकना शुरू हो गया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि एक महिला निर्देशक और अभिनेत्री महज इसलिए किसी को ‘एंटी-नेशनल’ कह रही हैं क्योंकि उस संगीतकार ने उनके साथ काम करने से मना कर दिया। प्रकाश राज यहीं नहीं रुके उन्होंने कंगना की फिल्म ‘इमरजेंसी’ को एक प्रोपेगेंडा मूवी करार दिया।

    कंगना और रहमान के बीच क्या था विवाद? दरअसल एआर रहमान ने एक इंटरव्यू में कहा था कि उन्हें उनके धर्म की वजह से इंडस्ट्री में भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है और उन्हें पर्याप्त काम नहीं मिल रहा है। इस पर कंगना ने सोशल मीडिया पर भड़ास निकालते हुए लिखा था कि वह रहमान को अपनी फिल्म ‘इमरजेंसी’ की कहानी सुनाना चाहती थीं लेकिन रहमान उनसे मिले तक नहीं। कंगना ने आरोप लगाया कि रहमान ने उनकी फिल्म को ‘प्रोपेगेंडा’ कहकर ठुकरा दिया था। कंगना ने लिखा कि रहमान जी मैंने आपसे ज्यादा नफरत से भरा इंसान आज तक नहीं देखा।

    सियासी रंग लेता विवाद प्रकाश राज ने कंगना के दावों को खारिज करते हुए कहा कि रहमान का अपना एक कद है और किसी फिल्म का हिस्सा न बनने का मतलब यह नहीं है कि कोई देशद्रोही हो गया। प्रकाश राज के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। एक तरफ कंगना के समर्थक उन्हें राष्ट्रवादी बता रहे हैं तो दूसरी तरफ प्रकाश राज के समर्थक इसे अभिव्यक्ति की आजादी और कलाकार के सम्मान से जोड़कर देख रहे हैं। फिलहाल इस मुद्दे पर न तो एआर रहमान की कोई नई प्रतिक्रिया आई है और न ही कंगना ने प्रकाश राज के ‘भौंकने’ वाले बयान पर कोई जवाब दिया है।

  • AI वीडियो शेयर कर ट्रंप फिर विवादों में, ओबामा दंपति को बंदर दिखाने पर मचा राजनीतिक तूफान

    AI वीडियो शेयर कर ट्रंप फिर विवादों में, ओबामा दंपति को बंदर दिखाने पर मचा राजनीतिक तूफान


    वाशिंगटन।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) एक बार फिर अपने सोशल मीडिया पोस्ट (Social Media post) को लेकर जबरदस्त विवाद में घिर गए हैं। इस बार मामला देश के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा (Former President Barack Obama.) और उनकी पत्नी मिशेल ओबामा (Michelle Obama) से जुड़ा है। ट्रंप द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में ओबामा दंपति को बंदर के रूप में दिखाए जाने के बाद सियासी हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। इस कथित नस्लभेदी कंटेंट को लेकर डेमोक्रेटिक पार्टी ने ट्रंप पर जमकर निशाना साधा है।

    दरअसल, गुरुवार रात ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कई पोस्ट साझा किए। इन्हीं में से एक 62 सेकंड का वीडियो क्लिप सबसे ज्यादा चर्चा में है। शुरुआती जांच में यह वीडियो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार किया गया प्रतीत होता है। वीडियो में 2020 के राष्ट्रपति चुनाव को लेकर यह दावा किया गया है कि कुछ अहम राज्यों में वोटिंग मशीनों के साथ जानबूझकर छेड़छाड़ की गई थी।


    वीडियो में क्या दिखाया गया?

    इस क्लिप के एक हिस्से में दो चिम्पैंजी नजर आते हैं, जिन पर बराक ओबामा और मिशेल ओबामा के मुस्कुराते हुए चेहरे एडिट कर दिए गए हैं। बताया जा रहा है कि यह दृश्य एक लंबे वीडियो से लिया गया है, जिसे पहले एक मीम पेज पर शेयर किया गया था। उसी वीडियो में डोनाल्ड ट्रंप को खुद को “जंगल का राजा” बताते हुए दिखाया गया है। इतना ही नहीं, वीडियो में मौजूदा राष्ट्रपति जो बाइडेन समेत कई अन्य डेमोक्रेटिक नेताओं को भी जानवरों के रूप में पेश किया गया है। बाइडेन को केले खाते हुए चिम्पैंजी के रूप में दर्शाया गया, जिससे डेमोक्रेटिक खेमे में नाराजगी और बढ़ गई।


    डेमोक्रेट्स का तीखा पलटवार

    देश के पहले अश्वेत राष्ट्रपति रहे बराक ओबामा और उनकी पत्नी के खिलाफ इस तरह के चित्रण को लेकर डेमोक्रेटिक नेताओं ने इसे नस्लवादी और अपमानजनक करार दिया है। आलोचकों का कहना है कि ट्रंप का यह कदम राजनीतिक मर्यादाओं को तोड़ने वाला है।

    कैलिफ़ोर्निया के गवर्नर गैविन न्यूज़ोम ने इस पोस्ट की कड़ी निंदा करते हुए इसे “घिनौना” बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “राष्ट्रपति का यह व्यवहार बेहद शर्मनाक है। हर एक रिपब्लिकन को इसकी निंदा करनी चाहिए। अभी।” वहीं, बराक ओबामा के पूर्व वरिष्ठ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बेन रोड्स ने भी ट्रंप पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि इतिहास डोनाल्ड ट्रंप को एक नकारात्मक और विभाजनकारी व्यक्ति के रूप में याद रखेगा।


    पहले भी रहे हैं विवाद

    गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब डोनाल्ड ट्रंप ओबामा परिवार को लेकर विवादों में आए हों। इससे पहले भी वह बराक ओबामा और मिशेल ओबामा पर व्यक्तिगत हमले कर चुके हैं और कई मौकों पर उनके बयानों को भड़काऊ और नस्लभेदी बताया गया है। फिलहाल इस वीडियो को लेकर अमेरिका की राजनीति में बवाल मचा हुआ है। एक ओर ट्रंप समर्थक इसे राजनीतिक व्यंग्य बता रहे हैं, तो दूसरी ओर विरोधी इसे खुले तौर पर नस्लभेदी मानसिकता का उदाहरण बता रहे हैं।

  • वॉट्सऐप की प्राइवेसी नीति पर छिड़ा विवाद… SC ने लगाई कड़ी फटकार… कहा- नागरिकों की निजता सर्वोपरि

    वॉट्सऐप की प्राइवेसी नीति पर छिड़ा विवाद… SC ने लगाई कड़ी फटकार… कहा- नागरिकों की निजता सर्वोपरि


    नई दिल्ली।
    क्या वाकई आपकी चैट पूरी तरह सुरक्षित है? इस सवाल के बीच भारत के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court.) ने मेटा (Meta) के स्वामित्व वाले इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म वॉट्सऐप (Instant messaging platform WhatsApp.) को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि डेटा साझा करने के नाम पर देश के नागरिकों की निजता से कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने वॉट्सऐप और उसकी पैरेंट कंपनी मेटा की डेटा-शेयरिंग व्यवस्था और प्राइवेसी पॉलिसी पर गंभीर नाराजगी जाहिर की है।

    कोर्ट ने दो टूक कहा कि भारतीय नागरिकों के प्राइवेसी अधिकारों में किसी भी तरह का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं होगा। वॉट्सऐप डेटा साझा करने की आड़ में निजी जानकारी का गलत इस्तेमाल नहीं कर सकता। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ तीन फरवरी को मेटा की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। गौरतलब है कि भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने वर्ष 2024 में वॉट्सऐप की 2021 की प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर 213.14 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था, जिसे नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) ने भी सही ठहराया।

    सुप्रीम कोर्ट ने वॉट्सऐप की तथाकथित “टेक इट ऑर लीव इट” प्राइवेसी नीति पर भी सवाल उठाए। अदालत का कहना है कि आम यूजर्स इन जटिल शर्तों को ठीक से समझ ही नहीं पाते। कोर्ट ने चेतावनी देते हुए कहा कि कंपनी को भारतीय कानून और संविधान का पालन करना ही होगा, अन्यथा उसे देश छोड़ने तक का विकल्प चुनना पड़ सकता है। मामले की गंभीरता को देखते हुए इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को भी याचिका में पक्षकार बनाने का निर्देश दिया गया है। अगली सुनवाई 9 फरवरी को तय की गई है।


    क्या है वॉट्सऐप की 2021 की प्राइवेसी पॉलिसी?

    वॉट्सऐप ने 8 फरवरी 2021 को अपनी नई प्राइवेसी पॉलिसी लागू की थी। कंपनी का दावा है कि उसका एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन पूरी तरह सुरक्षित है, यानी यूजर की चैट, वॉइस कॉल और तस्वीरें मेटा नहीं देख सकता। अगर रिसीवर का फोन अस्थायी रूप से बंद हो या वह ऑफलाइन हो, तो संदेश अधिकतम 30 दिनों तक वॉट्सऐप के सर्वर पर एन्क्रिप्टेड रूप में सुरक्षित रखे जाते हैं ताकि बाद में डिलीवरी हो सके।

    हालांकि चैट कंटेंट निजी रहता है, लेकिन वॉट्सऐप यूजर के “मेटाडाटा” तक पहुंच रखता है। यूजर्स के सामने केवल दो ही विकल्प होते हैं—इन शर्तों को स्वीकार करना या ऐप का इस्तेमाल बंद कर देना।

    एआई आधारित साइबर सुरक्षा और डेटा एनालिटिक्स कंपनी इनेफ्यू लैब्स के को-फाउंडर और सीईओ तरुण विज के मुताबिक, वॉट्सऐप मेटाडाटा और व्यवहारिक संकेतों का उपयोग करता है। इसमें यह जानकारी शामिल होती है कि यूजर किससे, कितनी बार और किस समय बात करता है, उसका डिवाइस, लोकेशन, प्रोफाइल फोटो, ग्रुप मेंबरशिप और कॉन्टैक्ट लिस्ट। इसी आधार पर यूजर प्रोफाइलिंग की जाती है। मेटा इस डेटा को इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब जैसे अन्य प्लेटफॉर्म्स के साथ साझा कर सकता है, जिससे डेटा लीक और संवेदनशील जानकारी के दुरुपयोग का खतरा बढ़ जाता है।

    हालांकि यूरोप में यूरोपीय डेटा संरक्षण नियम (जीडीपीआर) के चलते ऐसी डेटा शेयरिंग पर सख्त सीमाएं हैं। तरुण विज बताते हैं कि वॉट्सऐप पर की गई गतिविधियां अन्य प्लेटफॉर्म्स पर दिखने वाले विज्ञापनों को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में सुरक्षा इस बात पर निर्भर करती है कि यूजर अपनी कितनी जानकारी साझा करना चाहता है।


    पहले भी घिर चुका है वॉट्सऐप

    वॉट्सऐप ने अपनी सफाई में कहा है कि उसकी मैसेजिंग सेवा मुफ्त है और दो लोगों के बीच की निजी चैट्स को कंपनी नहीं पढ़ती। वॉट्सऐप और मेटा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि डेटा केवल यूजर की सहमति से ही साझा किया जाता है और प्राइवेसी पॉलिसी में बदलाव अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हैं।

    यह पहला मौका नहीं है जब वॉट्सऐप की नीतियों पर सवाल उठे हों। वर्ष 2021 में आयरलैंड के डेटा रेगुलेटर ने डेटा पारदर्शिता के नियमों के उल्लंघन पर वॉट्सऐप पर 225 मिलियन यूरो का जुर्माना लगाया था। जर्मनी की लाइपजिग रीजनल कोर्ट भी मेटा को दंडित कर चुकी है। अदालत ने कहा था कि मेटा के पास ऐसे टूल्स हैं जिनके जरिए वह यूजर्स के ऑनलाइन व्यवहार को ट्रैक कर टार्गेटेड विज्ञापनों से अरबों डॉलर कमाता है।


    सुरक्षा खामियों के आरोप

    पिछले वर्ष वॉट्सऐप के पूर्व सुरक्षा प्रमुख अत्ताउल्लाह बैग ने अमेरिका में मेटा के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि प्लेटफॉर्म पर रोजाना लाखों अकाउंट हैक हो रहे थे और सुरक्षा खामियों के चलते कर्मचारी यूजर्स का निजी डेटा देख सकते थे। बैग के अनुसार, बार-बार चेतावनी देने के बावजूद मेटा ने ठोस कदम नहीं उठाए।

    साल 2025 में शोधकर्ताओं ने “जीरो-क्लिक” हमलों का खुलासा किया, जिनमें बिना किसी क्लिक के वॉट्सऐप के जरिए आईफोन और मैक डिवाइस हैक कर लिए गए। इन हमलों में मैकओएस और आईओएस में इमेज प्रोसेसिंग की खामी और वॉट्सऐप के डिवाइस लिंकिंग फीचर की कमजोरी सामने आई।

    ऑस्ट्रिया के स्वतंत्र शोधकर्ताओं के एक समूह ने भी वॉट्सऐप में ऐसी कमी खोजी, जिसके जरिये 350 करोड़ फोन नंबर, प्रोफाइल फोटो, डिवाइस जानकारी, टाइमस्टैम्प और बिजनेस डिटेल्स तक पहुंच संभव हो गई थी।


    भारत में कानूनी स्थिति

    राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ अमित दुबे बताते हैं कि वर्ष 2019 में वॉट्सऐप के जरिए पेगासस स्पायवेयर ने केवल एक मिस्ड कॉल से कई भारतीयों के फोन हैक कर लिए थे। यह स्पायवेयर इजरायली कंपनी एनएसओ ग्रुप ने विकसित किया था। इस मामले में वॉट्सऐप ने एनएसओ ग्रुप के खिलाफ मुकदमा दायर किया था।

    अमित दुबे के अनुसार, हाल के वर्षों में वॉट्सऐप ने चैट समरी और ऑटो-रिप्लाई जैसे एआई आधारित फीचर्स भी जोड़े हैं, जो यूजर की सहमति से सीमित परिस्थितियों में काम करते हैं। ऐसे में खासकर निजी, चिकित्सकीय या कानूनी बातचीत के दौरान सतर्क रहना जरूरी है।

    भारत में अभी बड़ी टेक कंपनियों को नियंत्रित करने के लिए सख्त और प्रभावी कानूनों की कमी है। डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (डीपीडीपी) अधिनियम मौजूद है, लेकिन यह पूरी तरह 13 मई 2027 से लागू होगा। ऐसे में नागरिकों के पास अदालत का रास्ता ही मुख्य विकल्प बचता है। पुट्टस्वामी फैसले में सुप्रीम कोर्ट पहले ही निजता को मौलिक अधिकार घोषित कर चुका है।


    यूजर क्या करें?

    वरिष्ठ सुप्रीम कोर्ट वकील पवन दुग्गल के अनुसार, आज कई सरकारी और निजी संस्थानों के आधिकारिक ग्रुप्स वॉट्सऐप पर चल रहे हैं, जो चिंता का विषय है। स्पष्ट कानूनी ढांचे के अभाव में डेटा सुरक्षा की जिम्मेदारी काफी हद तक यूजर पर ही है। वे सलाह देते हैं कि ऐप इस्तेमाल करने से पहले उसकी शर्तें और नीतियां ध्यान से पढ़ी जाएं।

    टेकयुगो के सीईओ अभिनव सिंह का कहना है कि प्राइवेसी को लेकर चिंतित यूजर्स सिग्नल, टेलीग्राम या आईफोन पर आईमैसेज जैसे विकल्पों पर विचार कर सकते हैं। सिग्नल विज्ञापनों के लिए डेटा का इस्तेमाल नहीं करता और टेलीग्राम में “सीक्रेट चैट” का विकल्प मिलता है। हालांकि, लोकप्रियता के मामले में ये प्लेटफॉर्म अभी भी वॉट्सऐप से पीछे हैं।

  • पुणे में CBI का बड़ा एक्शन… मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेज के 2 घूसखोर अफसर रंगे हाथ गिरफ्तार

    पुणे में CBI का बड़ा एक्शन… मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेज के 2 घूसखोर अफसर रंगे हाथ गिरफ्तार


    पुणे।
    मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेज (एमईएस) (Military Engineering Services – MES) में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (Central Bureau of Investigation-CBI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पुणे के खड़की क्षेत्र से दो अधिकारियों को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों में एक असिस्टेंट गैरीसन इंजीनियर और एक जूनियर इंजीनियर शामिल हैं। सीबीआई ने यह कार्रवाई 5 फरवरी को सुनियोजित ट्रैप के जरिए की, जिसमें जूनियर इंजीनियर को शिकायतकर्ता से 2 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए मौके पर ही दबोच लिया गया। रिश्वत की पूरी रकम उनके कार्यालय से बरामद कर ली गई है, जबकि असिस्टेंट गैरीसन इंजीनियर को भी इस साजिश में शामिल होने के आरोप में हिरासत में लिया गया है।

    सीबीआई के अनुसार, दोनों अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है और पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच जारी है। एजेंसी ने बताया कि यह केस 3 फरवरी को दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता एक निजी कंपनी का पावर ऑफ अटॉर्नी धारक है, जिसने आरोप लगाया था कि कार्य पूरा होने और जरूरी प्रमाणपत्र जमा करने के बावजूद भुगतान जानबूझकर रोका जा रहा था, ताकि रिश्वत की मांग की जा सके।

    शिकायत में यह भी सामने आया कि शुरुआत में दोनों अधिकारियों ने भुगतान जारी करने के बदले 6 लाख रुपये की मांग की थी। बाद में बातचीत के बाद यह सौदा पहली किस्त के रूप में 2 लाख रुपये पर तय हुआ। रिश्वत की मांग से परेशान होकर शिकायतकर्ता ने सीबीआई से संपर्क किया, जिसके बाद एजेंसी ने जाल बिछाया और आरोपियों को रंगे हाथ पकड़ लिया।


    छापेमारी में मिला अतिरिक्त कैश

    ट्रैप के तुरंत बाद सीबीआई ने दोनों अधिकारियों के आवासीय और कार्यालय परिसरों पर छापेमारी की। इस दौरान महत्वपूर्ण दस्तावेजों के साथ-साथ 1 लाख 88 हजार 500 रुपये की अनएक्सप्लेन्ड नकदी भी बरामद की गई। एजेंसी का कहना है कि यह रकम उनकी ज्ञात वैध आय से अधिक प्रतीत होती है और इसकी जांच की जा रही है।

    प्राथमिक जांच में यह मामला सिर्फ एक रिश्वत लेनदेन तक सीमित नहीं दिख रहा है, बल्कि इसे एक संगठित प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें ठेकेदारों को भुगतान के लिए दबाव बनाकर अवैध वसूली की जाती थी। ऐसे कृत्य न केवल सरकारी कामकाज में पारदर्शिता को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि रक्षा से जुड़े संवेदनशील विभागों में भरोसे को भी कमजोर करते हैं।

    सीबीआई ने कहा है कि यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ उसकी जीरो टॉलरेंस नीति के तहत की गई है। एजेंसी अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संभावित लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है और अतिरिक्त सबूत जुटाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सख्त कार्रवाइयां न केवल भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने में मददगार होती हैं, बल्कि सरकारी तंत्र में जवाबदेही और विश्वास को भी मजबूत करती हैं।