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  • सिस्टम की लापरवाही ने ली जान: बैटरी चलित ट्राईसाइकिल बनी 'चलता-फिरता बम', विस्फोट में दिव्यांग की दर्दनाक मौत

    सिस्टम की लापरवाही ने ली जान: बैटरी चलित ट्राईसाइकिल बनी 'चलता-फिरता बम', विस्फोट में दिव्यांग की दर्दनाक मौत


    बैतूल । मध्य प्रदेश के बैतूल जिले से एक ऐसी हृदयविदारक और खौफनाक घटना सामने आई है, जिसने न केवल सुरक्षा मानकों की पोल खोल दी है, बल्कि पूरे प्रशासनिक अमले को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सारनी थाना क्षेत्र में एक दिव्यांग को शासन से मिली मदद ही उसकी मौत का कारण बन गई। अपनी ट्राईसाइकिल पर सवार होकर आत्मनिर्भरता की राह पर चलने वाले एक व्यक्ति की, बैटरी में हुए भीषण धमाके के कारण मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।

    धमाके से थर्रा उठा इलाका प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह रूह कंपा देने वाला हादसा बीती रात सारनी के व्यस्तम ‘जय स्तंभ चौक’ के पास घटित हुआ। मृतक सुनील कुमार लोखंडे अपनी तीन पहिया बैटरी चलित साइकिल से गुजर रहे थे, तभी अचानक साइकिल की बैटरी में किसी शक्तिशाली बम की तरह जोरदार विस्फोट हुआ। धमाका इतना तीव्र था कि आसपास के लोग सहम गए। विस्फोट के साथ ही साइकिल ने आग का गोला रूप ले लिया। सुनील को संभलने या वाहन से उतरने का मौका तक नहीं मिला और वे आग की लपटों के बीच बुरी तरह झुलस गए, जिससे उनकी मौके पर ही तड़प-तड़प कर मौत हो गई।

    मेहनतकश शिक्षक की दुखद विदाई मृतक सुनील कुमार लोखंडे की पहचान एक जुझारू व्यक्तित्व के रूप में होती थी। शारीरिक अक्षमता के बावजूद वे समाज पर बोझ नहीं थे; वे लोगों को शिक्षित करने का कार्य करते थे और कड़ी मेहनत कर अपना जीवनयापन कर रहे थे। जिस साइकिल ने उनकी जान ली, वह संभवतः नगर पालिका द्वारा दिव्यांग सहायता योजना के अंतर्गत प्रदान की गई थी। एक शिक्षित और कर्मठ व्यक्ति का इस तरह तकनीक की खामी की भेंट चढ़ जाना बेहद दुखद है।

    सवालों के घेरे में प्रशासन और गुणवत्ता इस हादसे ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या दिव्यांगों को वितरित किए जाने वाले इन उपकरणों की गुणवत्ता की जांच की जाती है? क्या इन बैटरियों के सुरक्षा मानकों (Safety Standards) का नियमित ऑडिट होता है? यदि यह साइकिल नगर पालिका द्वारा दी गई थी, तो क्या इसके रखरखाव के निर्देश दिए गए थे? स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि घटिया क्वालिटी के उपकरणों की आपूर्ति के कारण एक मासूम जान चली गई।

    पुलिस ने फिलहाल मर्ग कायम कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की तकनीकी जांच शुरू कर दी है। क्षेत्रवासी अब इस मामले में उच्च स्तरीय जांच और पीड़ित परिवार के लिए न्याय व मुआवजे की मांग कर रहे हैं।

  • बड़ी कार्रवाई: रिश्वतखोर सेंट्रल GST अधिकारी सोमेन गोस्वामी को अनिवार्य सेवानिवृत्ति, 35 लाख की रिश्वत मांगने का था आरोप

    बड़ी कार्रवाई: रिश्वतखोर सेंट्रल GST अधिकारी सोमेन गोस्वामी को अनिवार्य सेवानिवृत्ति, 35 लाख की रिश्वत मांगने का था आरोप


    जबलपुर । भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए सेंट्रल जीएसटी विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। रिश्वतखोरी के गंभीर आरोपों में घिरे सेंट्रल जीएसटी के पूर्व अधीक्षक सोमेन गोस्वामी को विभाग ने अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी है। यह फैसला उस बहुचर्चित मामले के बाद लिया गया है, जिसमें सीबीआई ने साल 2023 में उन्हें रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था।

    दरअसल, यह पूरा मामला राजस्थान के एक कारोबारी त्रिलोकचंद से जुड़ा है, जिनकी पान मसाला फैक्ट्री को सीजीएसटी विभाग ने सील कर दिया था। फैक्ट्री को दोबारा खोलने के एवज में कारोबारी से 35 लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई थी। इस डील के तहत 25 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए सीबीआई ने जाल बिछाकर कार्रवाई की और CGST के चार अधिकारियों को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया था।

    सीबीआई की विस्तृत जांच में सामने आया कि तत्कालीन अधीक्षक सोमेन गोस्वामी न सिर्फ रिश्वतखोरी में शामिल थे, बल्कि उनके पास आय से 155 प्रतिशत अधिक संपत्ति भी पाई गई। इसके बाद उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का अलग से मामला दर्ज किया गया। जांच एजेंसी की रिपोर्ट के आधार पर विभागीय स्तर पर कार्रवाई शुरू की गई, जिसका नतीजा अब अनिवार्य सेवानिवृत्ति के रूप में सामने आया है।

    सोमेन गोस्वामी के साथ इस मामले में सहायक अधीक्षक कपिल काम्बले, इंस्पेक्टर प्रदीप हजारी, विकास गुप्ता और वीरेंद्र जैन को भी सीबीआई ने गिरफ्तार किया था। इन सभी पर रिश्वत मांगने और सरकारी पद का दुरुपयोग करने के आरोप लगे थे। फिलहाल विभागीय सूत्रों का कहना है कि इन अन्य अधिकारियों पर भी आने वाले समय में सख्त कार्रवाई की जा सकती है।

    अनिवार्य सेवानिवृत्ति को सरकारी सेवा में एक बड़ी सजा माना जाता है, क्योंकि इसमें अधिकारी को समय से पहले सेवा से हटा दिया जाता है और उसकी छवि पर स्थायी दाग लग जाता है। विभाग का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई से भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा संदेश जाएगा और सरकारी महकमे में पारदर्शिता बढ़ेगी।

    इस पूरे मामले के सामने आने के बाद यह एक बार फिर साबित हुआ है कि भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए जांच एजेंसियां और विभाग अब ज्यादा सख्ती बरत रहे हैं। वहीं, व्यापारियों और आम जनता के बीच यह कार्रवाई एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखी जा रही है।

    फिलहाल सीबीआई की जांच प्रक्रिया जारी है और आय से अधिक संपत्ति के मामले में कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाई जा रही है। माना जा रहा है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, इस मामले से जुड़े और भी खुलासे हो सकते हैं।

  • शेयर मार्केट निवेश के नाम पर 9.91 लाख की ठगी मंदसौर से दो आरोपी गिरफ्तार

    शेयर मार्केट निवेश के नाम पर 9.91 लाख की ठगी मंदसौर से दो आरोपी गिरफ्तार


    भोपाल /राजधानी भोपाल से साइबर ठगी का एक गंभीर मामला सामने आया है जहां शेयर मार्केट में निवेश कर भारी मुनाफे का लालच देकर एक व्यक्ति से 9 लाख 91 हजार 900 रुपये की ठगी की गई। इस मामले में भोपाल क्राइम ब्रांच की साइबर सेल ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मंदसौर जिले से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस अब इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी हुई है।

    पुलिस के अनुसार ठगी की यह वारदात M Stock नामक ऐप के माध्यम से की गई। आरोपियों ने फर्जी लिंक और एप्लिकेशन के जरिए पीड़ित को शेयर मार्केट में निवेश कर कम समय में अधिक रिटर्न मिलने का झांसा दिया। आरोपियों की बातों में आकर मिसरोद क्षेत्र निवासी शिकायतकर्ता ने अलग अलग किस्तों में कुल 9 लाख 91 हजार 900 रुपये आरोपियों द्वारा बताए गए बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए।

    जब लंबे समय तक न तो कोई मुनाफा मिला और न ही रकम वापस हुई तब पीड़ित को ठगी का अहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने 4 अगस्त 2024 को भोपाल क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद साइबर सेल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तकनीकी जांच शुरू की। बैंक ट्रांजेक्शन मोबाइल नंबर और डिजिटल ट्रेल के आधार पर आरोपियों तक पहुंच बनाई गई।

    तकनीकी विश्लेषण के बाद पुलिस को आरोपियों की लोकेशन मंदसौर जिले में मिली। इसके बाद साइबर सेल की टीम ने दबिश देकर दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के कब्जे से दो मोबाइल फोन और दो सिम कार्ड जब्त किए गए हैं जिनका उपयोग ठगी की वारदात में किया जा रहा था। पुलिस इन मोबाइल और सिम कार्ड के जरिए अन्य पीड़ितों और नेटवर्क से जुड़े लोगों की जानकारी जुटा रही है।पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि आरोपी फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और निवेश ऐप के जरिए लोगों को निशाना बनाते थे। सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप के माध्यम से निवेश के ऑफर भेजे जाते थे और भरोसा जीतने के बाद बड़ी रकम ट्रांसफर करवा ली जाती थी।

    भोपाल साइबर क्राइम ब्रांच ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान लिंक एप या निवेश स्कीम पर भरोसा न करें। शेयर मार्केट में निवेश करने से पहले संबंधित प्लेटफॉर्म की पूरी जांच करें। पुलिस का कहना है कि इस तरह की साइबर ठगी के मामलों में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और पुलिस को उम्मीद है कि इस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आएगी।

  • खरगोन में हैवानियत की हदें पार: दो नाबालिगों ने महिला से किया सामूहिक दुष्कर्म, उपचार के दौरान पीड़िता ने तोड़ा दम

    खरगोन में हैवानियत की हदें पार: दो नाबालिगों ने महिला से किया सामूहिक दुष्कर्म, उपचार के दौरान पीड़िता ने तोड़ा दम


    खरगोन । मध्य प्रदेश के खरगोन जिले से एक ऐसी रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। यहाँ “हवस में अंधे” दो नाबालिगों ने एक अधेड़ महिला को अपनी दरिंदगी का शिकार बनाया। इस पाशविक कृत्य की शिकार हुई महिला की हालत इतनी बिगड़ गई कि जिला अस्पताल में उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। इस घटना ने न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि समाज के भीतर पनप रही विकृति को भी उजागर कर दिया है।

    घटना जिला मुख्यालय से महज 20 किलोमीटर दूर बरुड थाना क्षेत्र की है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़िता अपने घर में सो रही थी, तभी दो नाबालिग युवक दीवार फांदकर घर के भीतर दाखिल हुए। सोते समय ही आरोपी महिला को जबरन उठाकर पास के एक सुनसान खेत में ले गए। वहाँ दोनों ने बारी-बारी से महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। आरोपियों की हैवानियत यहीं नहीं रुकी; वारदात को अंजाम देने के बाद वे पीड़िता को मरणासन्न और अचेत अवस्था में कड़ाके की ठंड और अंधेरे के बीच छोड़कर फरार हो गए।

    घटना का खुलासा तब हुआ जब परिजन घर लौटे और महिला को बिस्तर पर न पाकर उनकी तलाश शुरू की। काफी खोजबीन के बाद महिला पास के खेत में अत्यंत गंभीर और बेसुध हालत में मिलीं। आनन-फानन में उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें बचाने का भरसक प्रयास किया, किंतु चोटों की गंभीरता और सदमे के कारण इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। इस खबर के फैलते ही पूरे क्षेत्र में शोक और भारी आक्रोश व्याप्त हो गया है।

    पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई करते हुए एक नाबालिग आरोपी को हिरासत में ले लिया है। हालांकि, मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। पकड़े गए नाबालिग के परिजनों का दावा है कि उसने पूछताछ में अपने साथ एक अन्य साथी का नाम भी कबूल किया है, लेकिन पुलिस अभी तक दूसरे आरोपी को पकड़ने में नाकाम रही है। स्थानीय ग्रामीणों और मृतका के परिजनों ने आरोप लगाया है कि पुलिस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसे दबाने का प्रयास कर रही है।

    वर्तमान में पीड़िता का पोस्टमार्टम डॉक्टरों की एक विशेष टीम द्वारा किया गया है। क्षेत्र के नागरिकों ने आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर प्रदर्शन किया है। लोगों का कहना है कि जब तक दूसरे दोषी को गिरफ्तार नहीं किया जाता और न्याय सुनिश्चित नहीं होता, उनका आक्रोश शांत नहीं होगा।

  • जबलपुर मेडिकल कॉलेज में रैगिंग पर कड़ा प्रहार 8 MBBS छात्र सस्पेंड..

    जबलपुर मेडिकल कॉलेज में रैगिंग पर कड़ा प्रहार 8 MBBS छात्र सस्पेंड..


    जबलपुर/मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में रैगिंग के एक मामले में कॉलेज प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए अनुशासन का स्पष्ट संदेश दिया है। जांच में दोषी पाए गए एमबीबीएस थर्ड ईयर के आठ सीनियर छात्रों को छह महीने के लिए निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही प्रत्येक छात्र पर दस हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया है। यह पूरी कार्रवाई राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग के एंटी रैगिंग नियमों के तहत की गई है।

    यह मामला मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल नंबर एक से जुड़ा हुआ है। करीब एक सप्ताह पहले एक जूनियर एमबीबीएस छात्र ने डीन कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में छात्र ने बताया था कि सीनियर छात्रों ने देर रात उसे हॉस्टल में कमरे के बाहर खड़ा रखा और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। छात्र ने इस व्यवहार को रैगिंग की श्रेणी में बताते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की थी शिकायत मिलते ही कॉलेज प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एंटी रैगिंग कमेटी को जांच के निर्देश दिए। कमेटी ने पीड़ित छात्र का बयान दर्ज किया और आरोपित छात्रों से भी अलग अलग पूछताछ की गई। जांच के दौरान उपलब्ध तथ्यों साक्ष्यों और बयानों के आधार पर एमबीबीएस थर्ड ईयर के आठ छात्रों को दोषी पाया गया।

    जांच रिपोर्ट के आधार पर कॉलेज प्रबंधन ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए सभी दोषी छात्रों को छह महीने के लिए कक्षाओं से निलंबित कर दिया। इसके साथ ही उन्हें हॉस्टल से भी निष्कासित कर दिया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निलंबन की अवधि के दौरान ये छात्र किसी भी शैक्षणिक गतिविधि परीक्षा या प्रशिक्षण में शामिल नहीं हो सकेंगे।

    कॉलेज प्रशासन के अनुसार यह कार्रवाई राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग नई दिल्ली द्वारा 18 नवंबर 2021 को जारी गजट अधिसूचना के प्रावधानों के अनुसार की गई है। एनएमसी के नियमों में रैगिंग को गंभीर अपराध माना गया है और इसमें निलंबन जुर्माना तथा आवश्यकता पड़ने पर पुलिस कार्रवाई तक का प्रावधान है।मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ नवनीत सक्सेना ने कहा कि रैगिंग जैसी घटनाएं मेडिकल शिक्षा की गरिमा अनुशासन और मानवीय मूल्यों के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि जूनियर छात्र की शिकायत पर निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की गई और उसी के आधार पर नियमों के तहत कार्रवाई की गई है। डीन ने साफ शब्दों में कहा कि कॉलेज परिसर या हॉस्टल में रैगिंग को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    इस कार्रवाई के बाद कॉलेज प्रशासन ने सभी छात्रों को एंटी रैगिंग नियमों का सख्ती से पालन करने की चेतावनी दी है। साथ ही जूनियर छात्रों से अपील की गई है कि यदि उन्हें किसी भी प्रकार की रैगिंग या मानसिक दबाव का सामना करना पड़े तो बिना डर के प्रशासन या एंटी रैगिंग हेल्पलाइन से संपर्क करें।

  • जब ममता कुलकर्णी के बेडरूम में कपड़े बदलते थे आमिर खान: एक्ट्रेस ने बयां किया 90 के दशक का वह अनसुना खास बॉन्ड

    जब ममता कुलकर्णी के बेडरूम में कपड़े बदलते थे आमिर खान: एक्ट्रेस ने बयां किया 90 के दशक का वह अनसुना खास बॉन्ड


    मुंबई। बॉलीवुड का 90 का दशक न केवल अपनी सुपरहिट फिल्मों के लिए जाना जाता है बल्कि उस दौर के कलाकारों के बीच की सादगी और अटूट भरोसे के लिए भी याद किया जाता है। उस समय की मशहूर और बेहद ग्लैमरस अभिनेत्री ममता कुलकर्णी भले ही आज फिल्मी दुनिया की चकाचौंध को त्याग कर आध्यात्म की राह पर चल पड़ी हों, लेकिन हाल ही में उनके एक बयान ने पुरानी यादों को ताजा कर दिया है। ममता कुलकर्णी ने मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान के साथ अपने उस दौर के रिश्तों का खुलासा किया है, जो आज के ‘वैनिटी वैन’ कल्चर वाले दौर में थोड़ा हैरान करने वाला लग सकता है।

    ममता कुलकर्णी ने उस दौर की अपनी यादें साझा करते हुए बताया कि पहले का समय आज जैसा नहीं था। आज जहाँ सितारों के पास आलीशान वैनिटी वैन्स होती हैं और वे सेट पर अपनी प्राइवेसी को लेकर बहुत ज्यादा सतर्क रहते हैं, 90 के दशक में कलाकारों के बीच एक पारिवारिक माहौल हुआ करता था। उन्होंने बताया कि फिल्म ‘बाजी’ (1995) की शूटिंग के दौरान आमिर खान और उनके बीच इतनी सहजता थी कि वे अक्सर एक-दूसरे के घरों का उपयोग व्यक्तिगत जरूरतों के लिए करते थे।

    ममता ने एक बेहद निजी वाकया याद करते हुए कहा उन दिनों हमारे पास वैनिटी वैन की लग्जरी नहीं थी। मुझे आज भी याद है कि फिल्म की शूटिंग के वक्त आमिर खान अक्सर मेरे घर आया करते थे। वे बिना किसी झिझक के मेरे बेडरूम का इस्तेमाल अपने कपड़े बदलने और कॉस्ट्यूम चेंज करने के लिए करते थे। आमिर को मेरे बेडरूम में कपड़े बदलते देख न तो मुझे कभी असहजता हुई और न ही उन्हें।” यह खुलासा न केवल आमिर खान की सादगी को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि उस समय सह-कलाकारों के बीच कितना गहरा विश्वास और मर्यादा का रिश्ता हुआ करता था।

    सिर्फ बेडरूम ही नहीं आमिर खान ममता के किचन तक में अपनी पहुंच रखते थे। ममता बताती हैं कि काम खत्म होने के बाद या शूटिंग के ब्रेक के दौरान आमिर खुद किचन में जाकर चाय बनाते थे। उनके बीच किसी भी प्रकार का ‘स्टारडम’ का पर्दा नहीं था। वे एक-दूसरे के साथ एक आम दोस्त की तरह वक्त बिताते थे। ममता के अनुसार, आमिर खान हमेशा से ही बहुत जमीन से जुड़े हुए इंसान रहे हैं और उनका यह व्यवहार उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी खूबी थी।

    हालांकि वर्तमान समय पर बात करते हुए ममता कुलकर्णी थोड़ी भावुक और गंभीर भी नजर आईं। उन्होंने फिल्म जगत में आए बदलावों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि आज तकनीक और चमक-धमक तो बढ़ गई हैॉ लेकिन सादगी और वास्तविक हुनर कहीं पीछे छूट गया है। उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि आज कई प्रतिभाशाली सिंगर्स और कलाकार काम की तलाश में घर बैठे हैं, क्योंकि अब इंडस्ट्री में रिश्तों की गर्माहट की जगह प्रोफेशनल दिखावे ने ले ली है। ममता के इन खुलासों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि 90 के दशक का बॉलीवुड भले ही संसाधनों में कम रहा हो, लेकिन रिश्तों और भरोसे के मामले में वह आज से कहीं अधिक समृद्ध था।

  • सेहत से खिलवाड़ का खुलासा कोल्ड स्टोरेज से 46 बोरी नकली जीरा जब्त…

    सेहत से खिलवाड़ का खुलासा कोल्ड स्टोरेज से 46 बोरी नकली जीरा जब्त…


    ग्वालियर में खाद्य सुरक्षा और आम जनता की सेहत से जुड़ा एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। शहर के बहोड़ापुर थाना क्षेत्र अंतर्गत ट्रांसपोर्ट नगर स्थित एक कोल्ड स्टोरेज से पुलिस ने 46 बोरियां नकली जीरा जब्त किया है। जांच में सामने आया है कि सौंफ के बीजों पर सीमेंट और खतरनाक रासायनिक पदार्थों की परत चढ़ाकर उन्हें जीरे का रूप दिया जा रहा था और फिर ब्रांडेड पैकिंग में भरकर बाजारों में सप्लाई किया जा रहा था।

    इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब गुजरात के मेहसाना जिले के ऊंझा निवासी और शिव पुजारी ब्रांड के कारोबारी विमल कुमार पटेल को अपने ब्रांड नाम से घटिया जीरा बिकने की शिकायतें मिलने लगीं। बाजार से लगातार मिल रही सूचनाओं के बाद उन्होंने निजी स्तर पर जांच करवाई। जांच की कड़ियां ग्वालियर से जुड़ती चली गईं जिसके बाद वे स्वयं ग्वालियर पहुंचे और बहोड़ापुर थाने में शिकायत दर्ज कराई।पुलिस जांच में सामने आया है कि ग्वालियर निवासी हितेश सिंघल उर्फ चपक इस नकली जीरे के कारोबार का मुख्य संचालक था। इस नेटवर्क में झांसी का व्यापारी टीटू अग्रवाल भी शामिल बताया जा रहा है। नकली जीरे की बड़ी खेप मां शीतला कोल्ड स्टोरेज में स्टोर की गई थी जहां से इसे अलग अलग शहरों और मंडियों में भेजने की तैयारी थी।

    शिकायत मिलते ही पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कोल्ड स्टोरेज पर छापा मारा। जब बोरियों को खोलकर जांच की गई तो सभी 46 बोरियों में नकली जीरा पाया गया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार सौंफ के दानों पर सीमेंट और केमिकल का ऐसा लेप चढ़ाया गया था कि वह देखने में बिल्कुल असली जीरे जैसा लगे। यह तरीका न केवल उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी है बल्कि सीधे तौर पर जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा भी है।

    पुलिस ने इस मामले में कोल्ड स्टोरेज के मैनेजर सहित तीन आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। आरोपियों पर धोखाधड़ी मिलावट और कॉपीराइट उल्लंघन से संबंधित धाराएं लगाई गई हैं। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि नकली जीरे की कितनी खेप पहले ही बाजार में पहुंच चुकी है और किन किन इलाकों में इसकी सप्लाई की गई।पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की मिलावट से लंबे समय में लोगों को गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। नकली मसालों में उपयोग किए गए रसायन और सीमेंट शरीर के लिए बेहद घातक हैं। इसलिए पूरे सप्लाई नेटवर्क की गहराई से जांच की जा रही है और अन्य संलिप्त लोगों को भी चिन्हित किया जाएगा।

    शिकायतकर्ता विमल कुमार पटेल ने यह भी आरोप लगाया है कि जब उन्होंने कोल्ड स्टोरेज मैनेजर से सवाल किए तो उन्हें धमकाया गया। इसके बाद उन्होंने पुलिस की शरण ली। पुलिस का कहना है कि पूछताछ जारी है और आवश्यकता पड़ने पर खाद्य सुरक्षा विभाग को भी जांच में शामिल किया जाएगा।

  • प्रियंका चोपड़ा–महेश बाबू की पहली फिल्म ‘वाराणसी’ की रिलीज डेट अनाउंस, एसएस राजामौली ने जारी किया भव्य पोस्टर

    प्रियंका चोपड़ा–महेश बाबू की पहली फिल्म ‘वाराणसी’ की रिलीज डेट अनाउंस, एसएस राजामौली ने जारी किया भव्य पोस्टर


    नई दिल्ली । बाहुबली और आरआरआर जैसी ऐतिहासिक ब्लॉकबस्टर फिल्में देने वाले मशहूर निर्देशक एसएस राजामौली एक बार फिर दर्शकों को भव्य सिनेमाई अनुभव देने के लिए तैयार हैं। उनकी अपकमिंग फिल्म वाराणसी की रिलीज डेट का आधिकारिक ऐलान हो चुका है। राजामौली ने सोशल मीडिया पर फिल्म का दमदार पोस्टर शेयर करते हुए लिखा Varanasi 7 अप्रैल, 2027। इसके साथ ही फिल्म को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर विराम लग गया है।

    फिल्म वाराणसी को लेकर सबसे बड़ी चर्चा इसकी स्टारकास्ट को लेकर है। इस फिल्म के जरिए पहली बार ग्लोबल स्टार प्रियंका चोपड़ा और साउथ सिनेमा के सुपरस्टार महेश बाबू एक साथ बड़े पर्दे पर नजर आएंगे। दोनों की यह फ्रेश और पैन इंडिया जोड़ी दर्शकों के बीच पहले ही जबरदस्त उत्सुकता पैदा कर चुकी है। वहीं, जब किसी प्रोजेक्ट से एसएस राजामौली का नाम जुड़ता है, तो उससे उम्मीदें अपने आप ही कई गुना बढ़ जाती हैं।

    7 अप्रैल 2027 की रिलीज डेट को भी खास रणनीति के तहत चुना गया है। फिल्म ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श के मुताबिक, इस तारीख को उगादी और गुड़ी पड़वा का पर्व है। इसके बाद 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती और 15 अप्रैल को राम नवमी की छुट्टी पड़ेगी। लगातार त्योहारों और छुट्टियों के चलते फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर लंबा और मजबूत ओपनिंग वीक मिलने की पूरी संभावना है, जो इसकी कमाई के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

    वाराणसी को लेकर दर्शकों की उत्सुकता का एक बड़ा कारण इसका टीजर भी है, जो पहले ही रिलीज किया जा चुका है। 3 मिनट 40 सेकंड के इस टीजर ने अपनी भव्य विजुअल्स और रहस्यमयी कहानी से लोगों का ध्यान खींचा है। टीजर की शुरुआत 512 ईस्वी की वाराणसी से होती है, जहां प्राचीन सभ्यता और आध्यात्मिक माहौल की झलक देखने को मिलती है। इसके बाद एक एस्टेरॉइड के धरती से टकराने का दृश्य कहानी को अलग ही दिशा देता है।

    टीजर में अंटार्कटिका और अफ्रीका के जंगलों के दृश्य यह संकेत देते हैं कि फिल्म की कहानी ग्लोबल स्तर पर फैली हुई है। इसके बाद कहानी लंका नगरम पहुंचती है, जहां हनुमान जी, प्रभु श्रीराम और वानर सेना का रावण से युद्ध दिखाया गया है। पौराणिक और आधुनिक तत्वों का यह संगम फिल्म को और भी खास बनाता है।

    टीजर का सबसे प्रभावशाली दृश्य वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर देखने को मिलता है, जहां महेश बाबू बैल पर सवार होकर त्रिशूल लिए नजर आते हैं। यह सीन न सिर्फ विजुअली भव्य है, बल्कि उनके किरदार की शक्ति और गंभीरता को भी दर्शाता है। प्रियंका चोपड़ा की झलक भले ही सीमित है, लेकिन उनकी मौजूदगी फिल्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने वाली है।

    कुल मिलाकर, वाराणसी एक फिल्म नहीं बल्कि एक मेगा सिनेमाई इवेंट के रूप में सामने आ रही है। अब दर्शकों को 7 अप्रैल 2027 का बेसब्री से इंतजार है, जब एसएस राजामौली एक बार फिर बड़े पर्दे पर इतिहास रचने उतरेंगे।
    बाहुबली और आरआरआर जैसी ऐतिहासिक ब्लॉकबस्टर फिल्में देने वाले मशहूर निर्देशक एसएस राजामौली एक बार फिर दर्शकों को भव्य सिनेमाई अनुभव देने के लिए तैयार हैं। उनकी अपकमिंग फिल्म वाराणसी की रिलीज डेट का आधिकारिक ऐलान हो चुका है। राजामौली ने सोशल मीडिया पर फिल्म का दमदार पोस्टर शेयर करते हुए लिखा Varanasi 7 अप्रैल, 2027। इसके साथ ही फिल्म को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर विराम लग गया है।

    फिल्म वाराणसी को लेकर सबसे बड़ी चर्चा इसकी स्टारकास्ट को लेकर है। इस फिल्म के जरिए पहली बार ग्लोबल स्टार प्रियंका चोपड़ा और साउथ सिनेमा के सुपरस्टार महेश बाबू एक साथ बड़े पर्दे पर नजर आएंगे। दोनों की यह फ्रेश और पैन इंडिया जोड़ी दर्शकों के बीच पहले ही जबरदस्त उत्सुकता पैदा कर चुकी है। वहीं, जब किसी प्रोजेक्ट से एसएस राजामौली का नाम जुड़ता है, तो उससे उम्मीदें अपने आप ही कई गुना बढ़ जाती हैं।

    7 अप्रैल 2027 की रिलीज डेट को भी खास रणनीति के तहत चुना गया है। फिल्म ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श के मुताबिक, इस तारीख को उगादी और गुड़ी पड़वा का पर्व है। इसके बाद 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती और 15 अप्रैल को राम नवमी की छुट्टी पड़ेगी। लगातार त्योहारों और छुट्टियों के चलते फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर लंबा और मजबूत ओपनिंग वीक मिलने की पूरी संभावना है, जो इसकी कमाई के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

    वाराणसी को लेकर दर्शकों की उत्सुकता का एक बड़ा कारण इसका टीजर भी है, जो पहले ही रिलीज किया जा चुका है। 3 मिनट 40 सेकंड के इस टीजर ने अपनी भव्य विजुअल्स और रहस्यमयी कहानी से लोगों का ध्यान खींचा है। टीजर की शुरुआत 512 ईस्वी की वाराणसी से होती है, जहां प्राचीन सभ्यता और आध्यात्मिक माहौल की झलक देखने को मिलती है। इसके बाद एक एस्टेरॉइड के धरती से टकराने का दृश्य कहानी को अलग ही दिशा देता है।

    टीजर में अंटार्कटिका और अफ्रीका के जंगलों के दृश्य यह संकेत देते हैं कि फिल्म की कहानी ग्लोबल स्तर पर फैली हुई है। इसके बाद कहानी लंका नगरम पहुंचती है, जहां हनुमान जी, प्रभु श्रीराम और वानर सेना का रावण से युद्ध दिखाया गया है। पौराणिक और आधुनिक तत्वों का यह संगम फिल्म को और भी खास बनाता है।

    टीजर का सबसे प्रभावशाली दृश्य वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर देखने को मिलता है, जहां महेश बाबू बैल पर सवार होकर त्रिशूल लिए नजर आते हैं। यह सीन न सिर्फ विजुअली भव्य है, बल्कि उनके किरदार की शक्ति और गंभीरता को भी दर्शाता है। प्रियंका चोपड़ा की झलक भले ही सीमित है, लेकिन उनकी मौजूदगी फिल्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने वाली है।

    कुल मिलाकर, वाराणसी एक फिल्म नहीं बल्कि एक मेगा सिनेमाई इवेंट के रूप में सामने आ रही है। अब दर्शकों को 7 अप्रैल 2027 का बेसब्री से इंतजार है, जब एसएस राजामौली एक बार फिर बड़े पर्दे पर इतिहास रचने उतरेंगे।

  • दुआओं के भरोसे हरमनप्रीत कौर की MI, WPL 2026 में अब भी जिंदा है प्लेऑफ की उम्मीद

    दुआओं के भरोसे हरमनप्रीत कौर की MI, WPL 2026 में अब भी जिंदा है प्लेऑफ की उम्मीद


    नई दिल्ली । डिफेंडिंग चैंपियन मुंबई इंडियंस का WPL 2026 का सफर उम्मीद और निराशा के बीच झूलता नजर आ रहा है। हरमनप्रीत कौर की कप्तानी वाली MI को इस सीजन 8 मैचों में से 5 में हार का सामना करना पड़ा है। हाल ही में WPL 2026 के 19वें मुकाबले में गुजरात जाएंट्स के खिलाफ मिली हार ने टीम की मुश्किलें और बढ़ा दीं, लेकिन इसके बावजूद मुंबई इंडियंस अभी पूरी तरह से प्लेऑफ की दौड़ से बाहर नहीं हुई है।

    लीग स्टेज के सभी मुकाबले खेल चुकी मुंबई इंडियंस के खाते में फिलहाल 6 अंक हैं और वह पॉइंट्स टेबल में तीसरे स्थान पर बनी हुई है। हालांकि अब MI के हाथ में कुछ भी नहीं बचा है। उनका प्लेऑफ में पहुंचना पूरी तरह से दिल्ली कैपिटल्स और यूपी वॉरियर्स के बीच खेले जाने वाले आखिरी लीग मुकाबले के नतीजे पर निर्भर करता है। यही वजह है कि आज मुंबई इंडियंस के खिलाड़ी और फैंस, दोनों की निगाहें DC vs UPW मैच पर टिकी रहेंगी।

    मुंबई इंडियंस ने इस सीजन 8 में से सिर्फ 3 मैच जीते हैं जबकि 5 मुकाबलों में उन्हें हार झेलनी पड़ी। लगातार हार के चलते टीम का आत्मविश्वास जरूर डगमगाया है, लेकिन गणित अभी भी उनके पक्ष में है। MI के खिलाड़ी यही दुआ करेंगे कि लीग के आखिरी मैच में यूपी वॉरियर्स, दिल्ली कैपिटल्स को मात देने में कामयाब रहे।

    असल में पूरा समीकरण पॉइंट्स टेबल और नेट रन रेट पर टिका हुआ है। इस वक्त दिल्ली कैपिटल्स और मुंबई इंडियंस दोनों के खाते में 6-6 अंक हैं, जबकि यूपी वॉरियर्स 4 अंकों के साथ सबसे निचले पायदान पर है। अगर यूपी वॉरियर्स आखिरी मैच में दिल्ली कैपिटल्स को हरा देती है, तो दिल्ली, मुंबई और यूपी तीनों टीमों के 6-6 अंक हो जाएंगे।

    ऐसी स्थिति में नेट रन रेट निर्णायक साबित होगा और यहीं मुंबई इंडियंस को सबसे बड़ा फायदा मिलता नजर आ रहा है। MI का नेट रन रेट +0.059 है, जो दिल्ली कैपिटल्स 0.164 और यूपी वॉरियर्स 1.146 से काफी बेहतर है। इस आधार पर मुंबई इंडियंस प्लेऑफ का टिकट हासिल कर सकती है। यानी MI की उम्मीदें अब अपने प्रदर्शन से ज्यादा किस्मत और दुआओं पर टिकी हुई हैं।

    वहीं WPL 2026 के प्लेऑफ की तस्वीर काफी हद तक साफ हो चुकी है। स्मृति मंधाना की कप्तानी वाली रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु शानदार प्रदर्शन करते हुए 8 में से 6 मैच जीतकर सीधे फाइनल में पहुंच चुकी है। इसके अलावा गुजरात जाएंट्स ने भी प्लेऑफ के लिए क्वालीफाई कर लिया है और वह एलिमिनेटर मुकाबला खेलेगी। अब सबकी नजर इस बात पर है कि एलिमिनेटर में गुजरात का सामना किस टीम से होगा और क्या मुंबई इंडियंस आखिरी मौके का फायदा उठाकर प्लेऑफ में जगह बना पाएगी।

  • स्वच्छता के दावे पर संसद की चोट इंदौर का दूषित पानी बना राष्ट्रीय मुद्दा

    स्वच्छता के दावे पर संसद की चोट इंदौर का दूषित पानी बना राष्ट्रीय मुद्दा


    नई दिल्ली। देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में पहचाने जाने वाले इंदौर की छवि पर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल पीने से हुई मौतों का मामला अब केवल स्थानीय प्रशासन तक सीमित नहीं रहा बल्कि राष्ट्रीय राजनीति का विषय बन चुका है। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद डॉ सैयद नासिर हुसैन ने इस मुद्दे को राज्यसभा में उठाकर केंद्र सरकार से सीधे जवाब मांगे हैं। इससे इंदौर की जल आपूर्ति व्यवस्था और स्वच्छता मॉडल पर नई बहस शुरू हो गई है।

    राज्यसभा में पूछे गए प्रश्नों में यह स्पष्ट रूप से जानना चाहा गया है कि किन परिस्थितियों में शहर की सीवरेज और जल वितरण प्रणाली विफल हुई और कैसे दूषित सीवरेज का पानी पीने योग्य जल लाइनों में मिल गया। साथ ही यह भी पूछा गया है कि क्या केंद्र सरकार को जनवरी 2026 में भागीरथपुरा में हुई मौतों और सैकड़ों लोगों के बीमार होने की जानकारी है। इन सवालों के जवाब जल शक्ति मंत्री द्वारा 2 फरवरी 2026 को राज्यसभा में दिए जाएंगे।

    इससे पहले लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इंदौर दौरे के दौरान इस पूरे प्रकरण को संसद में उठाने की घोषणा की थी। वहीं मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी साफ कर दिया है कि 16 फरवरी से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र में इस मुद्दे को पूरी ताकत के साथ उठाया जाएगा। कांग्रेस की रणनीति स्पष्ट है कि सरकार को संसद और विधानसभा दोनों मंचों पर घेरकर जवाबदेह बनाया जाए।राज्यसभा में सवाल सूचीबद्ध होते ही इंदौर नगर निगम और प्रशासनिक अमले में हलचल तेज हो गई है। जल शक्ति मंत्रालय ने बिंदुवार जानकारी मांगी है जिसके चलते नगर निगम को सभी रिपोर्ट और तथ्य सरकार को भेजने पड़े हैं। यह प्रश्न राज्यसभा प्रश्न संख्या एस 1137 के तहत दर्ज किए गए हैं। अधिकारियों का मानना है कि जवाबों में किसी भी तरह की चूक इंदौर की स्वच्छ शहर की छवि को गहरा नुकसान पहुंचा सकती है।

    यह मामला पहले से ही मध्यप्रदेश हाई कोर्ट में विचाराधीन है जहां नगर निगम और प्रशासन को कड़ी टिप्पणियों का सामना करना पड़ा है। अब संसद में मामला पहुंचने के बाद प्रशासन अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह प्रकरण केवल एक वार्ड तक सीमित नहीं है बल्कि पूरे प्रदेश की जल आपूर्ति व्यवस्था की पोल खोलता है।

    कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद लोगों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध नहीं कराया जा सका। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा है कि विधानसभा में यह पूछा जाएगा कि दूषित पानी से हुई मौतों की जिम्मेदारी किसकी है और अब तक दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई। कांग्रेस का दावा है कि यह मुद्दा सरकार की कार्यशैली और जवाबदेही की असल तस्वीर जनता के सामने लाएगा।