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  • MP में ठंड और बारिश का 'डबल अटैक': 20 जिलों में घने कोहरे का पहरा, 2 फरवरी तक बिगड़ा रहेगा मौसम का मिजाज

    MP में ठंड और बारिश का 'डबल अटैक': 20 जिलों में घने कोहरे का पहरा, 2 फरवरी तक बिगड़ा रहेगा मौसम का मिजाज


    भोपाल । मध्य प्रदेश में कुदरत के दोहरे रंग देखने को मिल रहे हैं। एक तरफ जहाँ उत्तर भारत से आ रही बर्फीली हवाओं ने ठिठुरन बढ़ा दी है, वहीं दूसरी ओर एक शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से प्रदेश के बड़े हिस्से में बारिश का खतरा मंडरा रहा है। मौसम विभाग IMD ने चेतावनी जारी की है कि अगले तीन दिनों तक मध्य प्रदेश के आसमान पर बादलों का पहरा रहेगा और कई जिलों में गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं।

    अगले 24 घंटे: 14 जिलों में बारिश का अलर्ट मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार, स्ट्रॉन्ग वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के प्रभाव से अगले 24 घंटों के भीतर प्रदेश के 14 जिलों में हल्की से मध्यम बारिश होने की प्रबल संभावना है। विशेष रूप से ग्वालियर, मुरैना, दतिया, भिंड, श्योपुर, शिवपुरी, अशोकनगर और गुना जैसे उत्तरी बेल्ट के साथ-साथ विदिशा, सागर, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर में मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है। यहाँ बारिश के साथ कहीं-कहीं ओलावृष्टि की स्थिति भी बन सकती है।

    कोहरे की सफेद चादर में लिपटे 20 जिले बारिश की चेतावनी के साथ ही प्रदेश के उत्तरी और पूर्वी हिस्सों में घने कोहरे ने जनजीवन प्रभावित कर दिया है। आज सुबह ग्वालियर-चंबल संभाग समेत रीवा, सागर और शहडोल संभाग के करीब 20 जिलों में दृश्यता (Visibility) बेहद कम रही। ग्वालियर, दतिया और छतरपुर जैसे जिलों में तो विजिबिलिटी शून्य तक पहुँच गई, जिससे सड़क यातायात के साथ-साथ रेल और हवाई सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं। भोपाल और इंदौर जैसे बड़े शहरों में भी सुबह के वक्त धुंध का असर देखा गया।

    2 फरवरी तक राहत के आसार नहीं मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह स्थिति 2 फरवरी तक लगातार बनी रह सकती है। वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के कारण फिलहाल न्यूनतम तापमान में थोड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे रात की ठंड से आंशिक राहत मिली है, लेकिन दिन के तापमान में गिरावट आने से ‘कोल्ड डे’ जैसी स्थिति बनी हुई है। 2 फरवरी के बाद जैसे ही बादल छंटेंगे, एक बार फिर बर्फीली हवाएं चलेंगी और कड़ाके की ठंड का दूसरा दौर शुरू होगा। प्रशासन ने खराब मौसम और कोहरे को देखते हुए वाहन चालकों को सावधानी बरतने की सलाह दी है।

    मध्य प्रदेश में कुदरत के दोहरे रंग देखने को मिल रहे हैं। एक तरफ जहाँ उत्तर भारत से आ रही बर्फीली हवाओं ने ठिठुरन बढ़ा दी है, वहीं दूसरी ओर एक शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से प्रदेश के बड़े हिस्से में बारिश का खतरा मंडरा रहा है। मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी जारी की है कि अगले तीन दिनों तक मध्य प्रदेश के आसमान पर बादलों का पहरा रहेगा और कई जिलों में गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं।

    अगले 24 घंटे: 14 जिलों में बारिश का अलर्ट मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार, स्ट्रॉन्ग वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के प्रभाव से अगले 24 घंटों के भीतर प्रदेश के 14 जिलों में हल्की से मध्यम बारिश होने की प्रबल संभावना है। विशेष रूप से ग्वालियर, मुरैना, दतिया, भिंड, श्योपुर, शिवपुरी, अशोकनगर और गुना जैसे उत्तरी बेल्ट के साथ-साथ विदिशा, सागर, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर में मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है। यहाँ बारिश के साथ कहीं-कहीं ओलावृष्टि की स्थिति भी बन सकती है।

    कोहरे की सफेद चादर में लिपटे 20 जिले बारिश की चेतावनी के साथ ही प्रदेश के उत्तरी और पूर्वी हिस्सों में घने कोहरे ने जनजीवन प्रभावित कर दिया है। आज सुबह ग्वालियर-चंबल संभाग समेत रीवा, सागर और शहडोल संभाग के करीब 20 जिलों में दृश्यता (Visibility) बेहद कम रही। ग्वालियर, दतिया और छतरपुर जैसे जिलों में तो विजिबिलिटी शून्य तक पहुँच गई, जिससे सड़क यातायात के साथ-साथ रेल और हवाई सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं। भोपाल और इंदौर जैसे बड़े शहरों में भी सुबह के वक्त धुंध का असर देखा गया।

    2 फरवरी तक राहत के आसार नहीं मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह स्थिति 2 फरवरी तक लगातार बनी रह सकती है। वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के कारण फिलहाल न्यूनतम तापमान में थोड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे रात की ठंड से आंशिक राहत मिली है, लेकिन दिन के तापमान में गिरावट आने से ‘कोल्ड डे’ जैसी स्थिति बनी हुई है। 2 फरवरी के बाद जैसे ही बादल छंटेंगे, एक बार फिर बर्फीली हवाएं चलेंगी और कड़ाके की ठंड का दूसरा दौर शुरू होगा। प्रशासन ने खराब मौसम और कोहरे को देखते हुए वाहन चालकों को सावधानी बरतने की सलाह दी है।

  • 16 फरवरी के सत्र में गूंजेगा शहडोल: आदिवासी मुद्दों पर सदन में गरजेंगे कमलेश्वर डोडियार, BAP विधायक का बड़ा ऐलान

    16 फरवरी के सत्र में गूंजेगा शहडोल: आदिवासी मुद्दों पर सदन में गरजेंगे कमलेश्वर डोडियार, BAP विधायक का बड़ा ऐलान


    शहडोल । मध्य प्रदेश की आदिवासी राजनीति में उस समय हड़कंप मच गया, जब भारत आदिवासी पार्टी BAP के इकलौते और चर्चित विधायक कमलेश्वर डोडियार शहडोल जिले के दौरे पर पहुँचे। अपनी सादगी और मोटरसाइकिल से विधानसभा पहुँचकर देशभर में सुर्खियां बटोरने वाले सैलाना विधायक डोडियार ने शहडोल की धरती से न केवल राजनीतिक नब्ज टटोली, बल्कि प्रशासन और सत्ताधारी दल पर तीखे प्रहार कर आगामी विधानसभा सत्र के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर दी है।

    शहडोल के बहाने प्रदेशव्यापी मिशन की तैयारी भारत आदिवासी पार्टी ने शहडोल से स्पष्ट संदेश दे दिया है कि उनकी लड़ाई अब किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगी। विधायक डोडियार ने ऐलान किया कि आगामी 16 फरवरी से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र में वे शहडोल जिले के आदिवासियों से जुड़े ज्वलंत मुद्दों को सदन के पटल पर पुरजोर तरीके से रखेंगे। उन्होंने साफ कहा कि आदिवासियों के हक और अधिकार के लिए उनकी पार्टी सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष करने को तैयार है।

    छात्राओं की सुरक्षा और छात्रावासों के हालात पर गहरी चिंता शहडोल दौरे के दौरान डोडियार ने आदिवासी छात्रावासों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने छात्रावासों से छात्राओं के लापता होने के मामलों को अत्यंत संवेदनशील बताते हुए प्रशासन को कठघरे में खड़ा किया। विधायक ने आरोप लगाया कि प्रशासन इन मामलों में पारदर्शी जांच करने के बजाय लीपापोती करने में जुटा है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा, “यदि समाज की बेटियां ही सुरक्षित नहीं हैं, तो सरकार के विकास के तमाम दावे महज कागजी और खोखले हैं।”

    माफिया तंत्र और चरमराती कानून व्यवस्था पर प्रहार जिले की कानून व्यवस्था का जिक्र करते हुए विधायक डोडियार ने एक लंबी फेहरिस्त गिनाई। उन्होंने एएसआई और पटवारी की कुचलकर हुई हत्या, तहसीलदार पर रेत माफियाओं के हमले और पुलिस पर लगातार हो रहे हमलों का हवाला देते हुए कहा कि शहडोल में माफिया तंत्र पूरी तरह हावी हो चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि खनिज, भू और कोल माफिया प्रशासन को खुलेआम चुनौती दे रहे हैं।

    विशेष रूप से अवैध रेत उत्खनन का मुद्दा उठाते हुए डोडियार ने कहा कि रेत ठेका नहीं होने के बावजूद बड़े पैमाने पर चोरी की रेत उत्तर प्रदेश भेजी जा रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है मानो पुलिस ने माफियाओं के सामने पूरी तरह घुटने टेक दिए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन गंभीर हालातों में सुधार नहीं हुआ, तो भारत आदिवासी पार्टी शहडोल से एक बड़ा जनआंदोलन शुरू करेगी।

  • इंदौर की जल त्रासदी: भागीरथपुरा में मौत का तांडव जारी, दूषित पानी ने ली 31वीं जान; वेंटिलेटर पर अब भी थमी हैं साँसें

    इंदौर की जल त्रासदी: भागीरथपुरा में मौत का तांडव जारी, दूषित पानी ने ली 31वीं जान; वेंटिलेटर पर अब भी थमी हैं साँसें


    इंदौर । स्वच्छता में सात बार से देश का सिरमौर रहने वाला इंदौर आज अपनी ही एक बस्ती, भागीरथपुरा, में सिसक रहा है। यहाँ दूषित पेयजल के कारण उपजी त्रासदी रुकने का नाम नहीं ले रही है। शुक्रवार शाम एक और बुजुर्ग की मौत के साथ इस जलजनित बीमारी ने अब तक कुल 31 लोगों को अपना ग्रास बना लिया है। 72 वर्षीय एकनाथ सूर्यवंशी, जो पिछले एक महीने से अस्पताल के बिस्तर पर जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे, अंततः जिंदगी की जंग हार गए। उनकी मृत्यु ने एक बार फिर नगर निगम के दावों और शहर की ‘स्मार्ट’ स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की कलई खोल दी है।

    अस्पताल में अब भी जारी है संघर्ष मृतक एकनाथ सूर्यवंशी के परिजनों के अनुसार, वे लगभग 20 से 25 दिनों तक वेंटिलेटर पर रहे। दूषित पानी के सेवन से शुरू हुए उल्टी-दस्त के मामूली दिखने वाले लक्षणों ने धीरे-धीरे उनके शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर हमला बोल दिया। संक्रमण इतना घातक था कि उनकी किडनी और लिवर ने काम करना बंद कर दिया, जिससे ‘मल्टी ऑर्गन फेलियर’ की स्थिति बन गई। वर्तमान में भी अस्पताल में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है; दो मरीज अभी भी जीवन रक्षक प्रणाली वेंटिलेटर और आईसीयू पर हैं, जबकि 8-10 अन्य मरीजों का उपचार जारी है।

    लापरवाही की गंदी नालियाँ और टूटता भरोसा भागीरथपुरा की यह त्रासदी एक प्रशासनिक चूक का भयावह परिणाम है। यहाँ पेयजल की पाइपलाइनों में सीवर और ड्रेनेज का गंदा पानी रिसकर मिल गया। जिस पानी से लोगों की प्यास बुझनी थी, उसी ने उनके घरों में जहर घोल दिया। देखते ही देखते 450 से अधिक लोग संक्रमण की चपेट में आ गए। शुरुआत में मौतों का आंकड़ा कम था, लेकिन संक्रमण के गहरे जख्मों के कारण अब यह संख्या 31 तक जा पहुँची है। हालांकि निगम अब हाईटेक निगरानी की बातें कर रहा है, लेकिन स्थानीय लोगों का आक्रोश चरम पर है। उनका कहना है कि जब अपनों को खो दिया, तब प्रशासन की नींद टूटी है।

    सियासी तापमान और प्रशासनिक कवायद इस मुद्दे ने अब राजनीतिक रंग भी अख्तियार कर लिया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के दौरे के बाद अब कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार और निगम प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 3 फरवरी को इंदौर में एक बड़े धरना-प्रदर्शन की चेतावनी दी गई है। दूसरी ओर, नगर निगम आयुक्त और महापौर का दावा है कि प्रभावित क्षेत्र में पानी की आपूर्ति रोक दी गई है और टैंकरों के माध्यम से शुद्ध पेयजल पहुँचाया जा रहा है। सैंपलिंग और टेस्टिंग बढ़ा दी गई है, लेकिन सवाल वही है कि “स्वच्छता के नंबर 1” शहर में ऐसी बुनियादी और घातक चूक हुई ही कैसे यह घटना एक सबक है कि केवल सतही सफाई ही स्वच्छता नहीं है, बल्कि जमीन के नीचे दौड़ती पाइपलाइनों में शुद्धता और सुरक्षा सुनिश्चित करना भी प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

  • बांधवगढ़ और शहडोल में वन्यजीव संघर्ष दो अलग घटनाओं से मचा हड़कंप

    बांधवगढ़ और शहडोल में वन्यजीव संघर्ष दो अलग घटनाओं से मचा हड़कंप


    उमरिया /मध्यप्रदेश के उमरिया जिले स्थित बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों से जुड़ी दो अलग अलग घटनाओं ने वन विभाग और प्रशासन को सतर्क कर दिया है। एक ओर मानपुर बफर क्षेत्र में दो भालुओं की मौत से हड़कंप मचा हुआ है वहीं दूसरी ओर शहडोल जिले में दो बाघों के बीच संघर्ष के बाद एक घायल बाघ को रेस्क्यू कर उपचार में रखा गया है।

    बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के मानपुर बफर अंतर्गत खम्हा बीट क्षेत्र में एक अवयस्क नर भालू का शव मिलने की सूचना वन विभाग को मिली थी। सूचना मिलते ही वन अमला मौके पर पहुंचा और जांच शुरू की गई। डॉग स्क्वाड की मदद से आसपास के क्षेत्र में सर्च अभियान चलाया गया जिसके दौरान कुछ ही दूरी पर एक मादा भालू का शव भी बरामद किया गया। एक ही क्षेत्र में दो भालुओं की मौत से पूरे रिजर्व क्षेत्र में हड़कंप की स्थिति बन गई।

    वन अमले ने दोनों शवों का बारीकी से निरीक्षण किया। जांच में पाया गया कि दोनों भालुओं के सभी अवयव सुरक्षित हैं और कहीं भी शिकार या अवैध गतिविधि के संकेत नहीं मिले हैं। घटनास्थल का संरक्षण कर पंचनामा तैयार किया गया। मेटल डिटेक्टर की सहायता से शवों की जांच की गई ताकि किसी प्रकार की धातु या गोली के निशान की पुष्टि हो सके। वाइल्डलाइफ हेल्थ ऑफिसर की मौजूदगी में दोनों भालुओं का पोस्टमॉर्टम किया गया और आवश्यक नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं।

    प्राथमिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि दोनों भालुओं की मौत किसी अन्य वन्यप्राणी से हुए संघर्ष के कारण हुई हो सकती है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और लैब जांच के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सकेगी। उल्लेखनीय है कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पर्यटन के दौरान भालू अक्सर दिखाई देते हैं और उनका मूवमेंट बफर क्षेत्रों में अधिक रहता है।

    इधर शहडोल जिले की जयसिंहनगर रेंज के वनचाचर बीट क्षेत्र में भी वन्यजीव संघर्ष की एक बड़ी घटना सामने आई है। यहां दो बाघों के बीच हुए संघर्ष के बाद एक नर बाघ गंभीर रूप से घायल हो गया था। सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम ने लगातार तीन दिनों तक सर्च और ट्रैकिंग अभियान चलाया। हाथियों की मदद से घायल बाघ को ट्रेस किया गया जिसके बाद रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया।

    रेस्क्यू टीम ने सावधानीपूर्वक डार्ट गन की मदद से बाघ को बेहोश किया और मौके पर प्राथमिक उपचार दिया गया। इसके बाद घायल बाघ को बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के मगधी परिक्षेत्र स्थित बहेरहा बाड़े में सुरक्षित रखा गया है। वन विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम द्वारा बाघ का इलाज किया जा रहा है और उसकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।वन विभाग का कहना है कि दोनों घटनाओं को गंभीरता से लिया जा रहा है और वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

  • सिस्टम की लापरवाही ने ली जान: बैटरी चलित ट्राईसाइकिल बनी 'चलता-फिरता बम', विस्फोट में दिव्यांग की दर्दनाक मौत

    सिस्टम की लापरवाही ने ली जान: बैटरी चलित ट्राईसाइकिल बनी 'चलता-फिरता बम', विस्फोट में दिव्यांग की दर्दनाक मौत


    बैतूल । मध्य प्रदेश के बैतूल जिले से एक ऐसी हृदयविदारक और खौफनाक घटना सामने आई है, जिसने न केवल सुरक्षा मानकों की पोल खोल दी है, बल्कि पूरे प्रशासनिक अमले को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सारनी थाना क्षेत्र में एक दिव्यांग को शासन से मिली मदद ही उसकी मौत का कारण बन गई। अपनी ट्राईसाइकिल पर सवार होकर आत्मनिर्भरता की राह पर चलने वाले एक व्यक्ति की, बैटरी में हुए भीषण धमाके के कारण मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।

    धमाके से थर्रा उठा इलाका प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह रूह कंपा देने वाला हादसा बीती रात सारनी के व्यस्तम ‘जय स्तंभ चौक’ के पास घटित हुआ। मृतक सुनील कुमार लोखंडे अपनी तीन पहिया बैटरी चलित साइकिल से गुजर रहे थे, तभी अचानक साइकिल की बैटरी में किसी शक्तिशाली बम की तरह जोरदार विस्फोट हुआ। धमाका इतना तीव्र था कि आसपास के लोग सहम गए। विस्फोट के साथ ही साइकिल ने आग का गोला रूप ले लिया। सुनील को संभलने या वाहन से उतरने का मौका तक नहीं मिला और वे आग की लपटों के बीच बुरी तरह झुलस गए, जिससे उनकी मौके पर ही तड़प-तड़प कर मौत हो गई।

    मेहनतकश शिक्षक की दुखद विदाई मृतक सुनील कुमार लोखंडे की पहचान एक जुझारू व्यक्तित्व के रूप में होती थी। शारीरिक अक्षमता के बावजूद वे समाज पर बोझ नहीं थे; वे लोगों को शिक्षित करने का कार्य करते थे और कड़ी मेहनत कर अपना जीवनयापन कर रहे थे। जिस साइकिल ने उनकी जान ली, वह संभवतः नगर पालिका द्वारा दिव्यांग सहायता योजना के अंतर्गत प्रदान की गई थी। एक शिक्षित और कर्मठ व्यक्ति का इस तरह तकनीक की खामी की भेंट चढ़ जाना बेहद दुखद है।

    सवालों के घेरे में प्रशासन और गुणवत्ता इस हादसे ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या दिव्यांगों को वितरित किए जाने वाले इन उपकरणों की गुणवत्ता की जांच की जाती है? क्या इन बैटरियों के सुरक्षा मानकों (Safety Standards) का नियमित ऑडिट होता है? यदि यह साइकिल नगर पालिका द्वारा दी गई थी, तो क्या इसके रखरखाव के निर्देश दिए गए थे? स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि घटिया क्वालिटी के उपकरणों की आपूर्ति के कारण एक मासूम जान चली गई।

    पुलिस ने फिलहाल मर्ग कायम कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की तकनीकी जांच शुरू कर दी है। क्षेत्रवासी अब इस मामले में उच्च स्तरीय जांच और पीड़ित परिवार के लिए न्याय व मुआवजे की मांग कर रहे हैं।

  • बड़ी कार्रवाई: रिश्वतखोर सेंट्रल GST अधिकारी सोमेन गोस्वामी को अनिवार्य सेवानिवृत्ति, 35 लाख की रिश्वत मांगने का था आरोप

    बड़ी कार्रवाई: रिश्वतखोर सेंट्रल GST अधिकारी सोमेन गोस्वामी को अनिवार्य सेवानिवृत्ति, 35 लाख की रिश्वत मांगने का था आरोप


    जबलपुर । भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए सेंट्रल जीएसटी विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। रिश्वतखोरी के गंभीर आरोपों में घिरे सेंट्रल जीएसटी के पूर्व अधीक्षक सोमेन गोस्वामी को विभाग ने अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी है। यह फैसला उस बहुचर्चित मामले के बाद लिया गया है, जिसमें सीबीआई ने साल 2023 में उन्हें रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था।

    दरअसल, यह पूरा मामला राजस्थान के एक कारोबारी त्रिलोकचंद से जुड़ा है, जिनकी पान मसाला फैक्ट्री को सीजीएसटी विभाग ने सील कर दिया था। फैक्ट्री को दोबारा खोलने के एवज में कारोबारी से 35 लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई थी। इस डील के तहत 25 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए सीबीआई ने जाल बिछाकर कार्रवाई की और CGST के चार अधिकारियों को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया था।

    सीबीआई की विस्तृत जांच में सामने आया कि तत्कालीन अधीक्षक सोमेन गोस्वामी न सिर्फ रिश्वतखोरी में शामिल थे, बल्कि उनके पास आय से 155 प्रतिशत अधिक संपत्ति भी पाई गई। इसके बाद उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का अलग से मामला दर्ज किया गया। जांच एजेंसी की रिपोर्ट के आधार पर विभागीय स्तर पर कार्रवाई शुरू की गई, जिसका नतीजा अब अनिवार्य सेवानिवृत्ति के रूप में सामने आया है।

    सोमेन गोस्वामी के साथ इस मामले में सहायक अधीक्षक कपिल काम्बले, इंस्पेक्टर प्रदीप हजारी, विकास गुप्ता और वीरेंद्र जैन को भी सीबीआई ने गिरफ्तार किया था। इन सभी पर रिश्वत मांगने और सरकारी पद का दुरुपयोग करने के आरोप लगे थे। फिलहाल विभागीय सूत्रों का कहना है कि इन अन्य अधिकारियों पर भी आने वाले समय में सख्त कार्रवाई की जा सकती है।

    अनिवार्य सेवानिवृत्ति को सरकारी सेवा में एक बड़ी सजा माना जाता है, क्योंकि इसमें अधिकारी को समय से पहले सेवा से हटा दिया जाता है और उसकी छवि पर स्थायी दाग लग जाता है। विभाग का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई से भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा संदेश जाएगा और सरकारी महकमे में पारदर्शिता बढ़ेगी।

    इस पूरे मामले के सामने आने के बाद यह एक बार फिर साबित हुआ है कि भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए जांच एजेंसियां और विभाग अब ज्यादा सख्ती बरत रहे हैं। वहीं, व्यापारियों और आम जनता के बीच यह कार्रवाई एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखी जा रही है।

    फिलहाल सीबीआई की जांच प्रक्रिया जारी है और आय से अधिक संपत्ति के मामले में कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाई जा रही है। माना जा रहा है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, इस मामले से जुड़े और भी खुलासे हो सकते हैं।

  • शेयर मार्केट निवेश के नाम पर 9.91 लाख की ठगी मंदसौर से दो आरोपी गिरफ्तार

    शेयर मार्केट निवेश के नाम पर 9.91 लाख की ठगी मंदसौर से दो आरोपी गिरफ्तार


    भोपाल /राजधानी भोपाल से साइबर ठगी का एक गंभीर मामला सामने आया है जहां शेयर मार्केट में निवेश कर भारी मुनाफे का लालच देकर एक व्यक्ति से 9 लाख 91 हजार 900 रुपये की ठगी की गई। इस मामले में भोपाल क्राइम ब्रांच की साइबर सेल ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मंदसौर जिले से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस अब इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी हुई है।

    पुलिस के अनुसार ठगी की यह वारदात M Stock नामक ऐप के माध्यम से की गई। आरोपियों ने फर्जी लिंक और एप्लिकेशन के जरिए पीड़ित को शेयर मार्केट में निवेश कर कम समय में अधिक रिटर्न मिलने का झांसा दिया। आरोपियों की बातों में आकर मिसरोद क्षेत्र निवासी शिकायतकर्ता ने अलग अलग किस्तों में कुल 9 लाख 91 हजार 900 रुपये आरोपियों द्वारा बताए गए बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए।

    जब लंबे समय तक न तो कोई मुनाफा मिला और न ही रकम वापस हुई तब पीड़ित को ठगी का अहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने 4 अगस्त 2024 को भोपाल क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद साइबर सेल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तकनीकी जांच शुरू की। बैंक ट्रांजेक्शन मोबाइल नंबर और डिजिटल ट्रेल के आधार पर आरोपियों तक पहुंच बनाई गई।

    तकनीकी विश्लेषण के बाद पुलिस को आरोपियों की लोकेशन मंदसौर जिले में मिली। इसके बाद साइबर सेल की टीम ने दबिश देकर दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के कब्जे से दो मोबाइल फोन और दो सिम कार्ड जब्त किए गए हैं जिनका उपयोग ठगी की वारदात में किया जा रहा था। पुलिस इन मोबाइल और सिम कार्ड के जरिए अन्य पीड़ितों और नेटवर्क से जुड़े लोगों की जानकारी जुटा रही है।पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि आरोपी फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और निवेश ऐप के जरिए लोगों को निशाना बनाते थे। सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप के माध्यम से निवेश के ऑफर भेजे जाते थे और भरोसा जीतने के बाद बड़ी रकम ट्रांसफर करवा ली जाती थी।

    भोपाल साइबर क्राइम ब्रांच ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान लिंक एप या निवेश स्कीम पर भरोसा न करें। शेयर मार्केट में निवेश करने से पहले संबंधित प्लेटफॉर्म की पूरी जांच करें। पुलिस का कहना है कि इस तरह की साइबर ठगी के मामलों में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और पुलिस को उम्मीद है कि इस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आएगी।

  • खरगोन में हैवानियत की हदें पार: दो नाबालिगों ने महिला से किया सामूहिक दुष्कर्म, उपचार के दौरान पीड़िता ने तोड़ा दम

    खरगोन में हैवानियत की हदें पार: दो नाबालिगों ने महिला से किया सामूहिक दुष्कर्म, उपचार के दौरान पीड़िता ने तोड़ा दम


    खरगोन । मध्य प्रदेश के खरगोन जिले से एक ऐसी रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। यहाँ “हवस में अंधे” दो नाबालिगों ने एक अधेड़ महिला को अपनी दरिंदगी का शिकार बनाया। इस पाशविक कृत्य की शिकार हुई महिला की हालत इतनी बिगड़ गई कि जिला अस्पताल में उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। इस घटना ने न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि समाज के भीतर पनप रही विकृति को भी उजागर कर दिया है।

    घटना जिला मुख्यालय से महज 20 किलोमीटर दूर बरुड थाना क्षेत्र की है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़िता अपने घर में सो रही थी, तभी दो नाबालिग युवक दीवार फांदकर घर के भीतर दाखिल हुए। सोते समय ही आरोपी महिला को जबरन उठाकर पास के एक सुनसान खेत में ले गए। वहाँ दोनों ने बारी-बारी से महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। आरोपियों की हैवानियत यहीं नहीं रुकी; वारदात को अंजाम देने के बाद वे पीड़िता को मरणासन्न और अचेत अवस्था में कड़ाके की ठंड और अंधेरे के बीच छोड़कर फरार हो गए।

    घटना का खुलासा तब हुआ जब परिजन घर लौटे और महिला को बिस्तर पर न पाकर उनकी तलाश शुरू की। काफी खोजबीन के बाद महिला पास के खेत में अत्यंत गंभीर और बेसुध हालत में मिलीं। आनन-फानन में उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें बचाने का भरसक प्रयास किया, किंतु चोटों की गंभीरता और सदमे के कारण इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। इस खबर के फैलते ही पूरे क्षेत्र में शोक और भारी आक्रोश व्याप्त हो गया है।

    पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई करते हुए एक नाबालिग आरोपी को हिरासत में ले लिया है। हालांकि, मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। पकड़े गए नाबालिग के परिजनों का दावा है कि उसने पूछताछ में अपने साथ एक अन्य साथी का नाम भी कबूल किया है, लेकिन पुलिस अभी तक दूसरे आरोपी को पकड़ने में नाकाम रही है। स्थानीय ग्रामीणों और मृतका के परिजनों ने आरोप लगाया है कि पुलिस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसे दबाने का प्रयास कर रही है।

    वर्तमान में पीड़िता का पोस्टमार्टम डॉक्टरों की एक विशेष टीम द्वारा किया गया है। क्षेत्र के नागरिकों ने आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर प्रदर्शन किया है। लोगों का कहना है कि जब तक दूसरे दोषी को गिरफ्तार नहीं किया जाता और न्याय सुनिश्चित नहीं होता, उनका आक्रोश शांत नहीं होगा।

  • जबलपुर मेडिकल कॉलेज में रैगिंग पर कड़ा प्रहार 8 MBBS छात्र सस्पेंड..

    जबलपुर मेडिकल कॉलेज में रैगिंग पर कड़ा प्रहार 8 MBBS छात्र सस्पेंड..


    जबलपुर/मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में रैगिंग के एक मामले में कॉलेज प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए अनुशासन का स्पष्ट संदेश दिया है। जांच में दोषी पाए गए एमबीबीएस थर्ड ईयर के आठ सीनियर छात्रों को छह महीने के लिए निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही प्रत्येक छात्र पर दस हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया है। यह पूरी कार्रवाई राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग के एंटी रैगिंग नियमों के तहत की गई है।

    यह मामला मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल नंबर एक से जुड़ा हुआ है। करीब एक सप्ताह पहले एक जूनियर एमबीबीएस छात्र ने डीन कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में छात्र ने बताया था कि सीनियर छात्रों ने देर रात उसे हॉस्टल में कमरे के बाहर खड़ा रखा और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। छात्र ने इस व्यवहार को रैगिंग की श्रेणी में बताते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की थी शिकायत मिलते ही कॉलेज प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एंटी रैगिंग कमेटी को जांच के निर्देश दिए। कमेटी ने पीड़ित छात्र का बयान दर्ज किया और आरोपित छात्रों से भी अलग अलग पूछताछ की गई। जांच के दौरान उपलब्ध तथ्यों साक्ष्यों और बयानों के आधार पर एमबीबीएस थर्ड ईयर के आठ छात्रों को दोषी पाया गया।

    जांच रिपोर्ट के आधार पर कॉलेज प्रबंधन ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए सभी दोषी छात्रों को छह महीने के लिए कक्षाओं से निलंबित कर दिया। इसके साथ ही उन्हें हॉस्टल से भी निष्कासित कर दिया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निलंबन की अवधि के दौरान ये छात्र किसी भी शैक्षणिक गतिविधि परीक्षा या प्रशिक्षण में शामिल नहीं हो सकेंगे।

    कॉलेज प्रशासन के अनुसार यह कार्रवाई राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग नई दिल्ली द्वारा 18 नवंबर 2021 को जारी गजट अधिसूचना के प्रावधानों के अनुसार की गई है। एनएमसी के नियमों में रैगिंग को गंभीर अपराध माना गया है और इसमें निलंबन जुर्माना तथा आवश्यकता पड़ने पर पुलिस कार्रवाई तक का प्रावधान है।मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ नवनीत सक्सेना ने कहा कि रैगिंग जैसी घटनाएं मेडिकल शिक्षा की गरिमा अनुशासन और मानवीय मूल्यों के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि जूनियर छात्र की शिकायत पर निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की गई और उसी के आधार पर नियमों के तहत कार्रवाई की गई है। डीन ने साफ शब्दों में कहा कि कॉलेज परिसर या हॉस्टल में रैगिंग को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    इस कार्रवाई के बाद कॉलेज प्रशासन ने सभी छात्रों को एंटी रैगिंग नियमों का सख्ती से पालन करने की चेतावनी दी है। साथ ही जूनियर छात्रों से अपील की गई है कि यदि उन्हें किसी भी प्रकार की रैगिंग या मानसिक दबाव का सामना करना पड़े तो बिना डर के प्रशासन या एंटी रैगिंग हेल्पलाइन से संपर्क करें।

  • जब ममता कुलकर्णी के बेडरूम में कपड़े बदलते थे आमिर खान: एक्ट्रेस ने बयां किया 90 के दशक का वह अनसुना खास बॉन्ड

    जब ममता कुलकर्णी के बेडरूम में कपड़े बदलते थे आमिर खान: एक्ट्रेस ने बयां किया 90 के दशक का वह अनसुना खास बॉन्ड


    मुंबई। बॉलीवुड का 90 का दशक न केवल अपनी सुपरहिट फिल्मों के लिए जाना जाता है बल्कि उस दौर के कलाकारों के बीच की सादगी और अटूट भरोसे के लिए भी याद किया जाता है। उस समय की मशहूर और बेहद ग्लैमरस अभिनेत्री ममता कुलकर्णी भले ही आज फिल्मी दुनिया की चकाचौंध को त्याग कर आध्यात्म की राह पर चल पड़ी हों, लेकिन हाल ही में उनके एक बयान ने पुरानी यादों को ताजा कर दिया है। ममता कुलकर्णी ने मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान के साथ अपने उस दौर के रिश्तों का खुलासा किया है, जो आज के ‘वैनिटी वैन’ कल्चर वाले दौर में थोड़ा हैरान करने वाला लग सकता है।

    ममता कुलकर्णी ने उस दौर की अपनी यादें साझा करते हुए बताया कि पहले का समय आज जैसा नहीं था। आज जहाँ सितारों के पास आलीशान वैनिटी वैन्स होती हैं और वे सेट पर अपनी प्राइवेसी को लेकर बहुत ज्यादा सतर्क रहते हैं, 90 के दशक में कलाकारों के बीच एक पारिवारिक माहौल हुआ करता था। उन्होंने बताया कि फिल्म ‘बाजी’ (1995) की शूटिंग के दौरान आमिर खान और उनके बीच इतनी सहजता थी कि वे अक्सर एक-दूसरे के घरों का उपयोग व्यक्तिगत जरूरतों के लिए करते थे।

    ममता ने एक बेहद निजी वाकया याद करते हुए कहा उन दिनों हमारे पास वैनिटी वैन की लग्जरी नहीं थी। मुझे आज भी याद है कि फिल्म की शूटिंग के वक्त आमिर खान अक्सर मेरे घर आया करते थे। वे बिना किसी झिझक के मेरे बेडरूम का इस्तेमाल अपने कपड़े बदलने और कॉस्ट्यूम चेंज करने के लिए करते थे। आमिर को मेरे बेडरूम में कपड़े बदलते देख न तो मुझे कभी असहजता हुई और न ही उन्हें।” यह खुलासा न केवल आमिर खान की सादगी को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि उस समय सह-कलाकारों के बीच कितना गहरा विश्वास और मर्यादा का रिश्ता हुआ करता था।

    सिर्फ बेडरूम ही नहीं आमिर खान ममता के किचन तक में अपनी पहुंच रखते थे। ममता बताती हैं कि काम खत्म होने के बाद या शूटिंग के ब्रेक के दौरान आमिर खुद किचन में जाकर चाय बनाते थे। उनके बीच किसी भी प्रकार का ‘स्टारडम’ का पर्दा नहीं था। वे एक-दूसरे के साथ एक आम दोस्त की तरह वक्त बिताते थे। ममता के अनुसार, आमिर खान हमेशा से ही बहुत जमीन से जुड़े हुए इंसान रहे हैं और उनका यह व्यवहार उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी खूबी थी।

    हालांकि वर्तमान समय पर बात करते हुए ममता कुलकर्णी थोड़ी भावुक और गंभीर भी नजर आईं। उन्होंने फिल्म जगत में आए बदलावों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि आज तकनीक और चमक-धमक तो बढ़ गई हैॉ लेकिन सादगी और वास्तविक हुनर कहीं पीछे छूट गया है। उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि आज कई प्रतिभाशाली सिंगर्स और कलाकार काम की तलाश में घर बैठे हैं, क्योंकि अब इंडस्ट्री में रिश्तों की गर्माहट की जगह प्रोफेशनल दिखावे ने ले ली है। ममता के इन खुलासों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि 90 के दशक का बॉलीवुड भले ही संसाधनों में कम रहा हो, लेकिन रिश्तों और भरोसे के मामले में वह आज से कहीं अधिक समृद्ध था।