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  • वृंदावन में बांकेबिहारी मंदिर के पास शुरू होगी मल्टीलेवल कार पार्किंग, श्रद्धालुओं को मिलेगी बड़ी राहत

    वृंदावन में बांकेबिहारी मंदिर के पास शुरू होगी मल्टीलेवल कार पार्किंग, श्रद्धालुओं को मिलेगी बड़ी राहत


    नई दिल्ली। वृंदावन में बांकेबिहारी मंदिर के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए खुशखबरी है। मंदिर के पास लंबे समय से पार्किंग की समस्या बनी हुई थी, जिससे श्रद्धालुओं को दर्शन में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था। भीड़भाड़ वाले समय में मंदिर के आसपास वाहन खड़े करने की जगह न मिल पाने के कारण स्थानीय प्रशासन और नगर निगम की ओर से मल्टीलेवल कार पार्किंग निर्माण की योजना बनाई गई थी।
    इस पार्किंग को तैयार कर लिया गया है, लेकिन रास्ते को लेकर कुछ विवाद चल रहा था।

    हाल ही में नगर निगम के अधिकारियों और प्रशासन ने इस विवाद को सुलझा लिया है। नगर आयुक्त ने स्थल का निरीक्षण किया और अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि पार्किंग को जल्द से जल्द चालू किया जाए। उन्होंने कहा कि यह पार्किंग श्रद्धालुओं के लिए बड़ी सुविधा साबित होगी और मंदिर आने वाले लोगों को पार्किंग की समस्या से निजात मिलेगी।

    मल्टीलेवल कार पार्किंग से न केवल वाहन सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि मंदिर के आसपास ट्रैफिक जाम और भीड़-भाड़ को भी काफी हद तक कम किया जा सकेगा। नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि पार्किंग का संचालन शुरू होने के बाद, श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए अधिक आरामदायक और सुरक्षित अनुभव मिलेगा। इससे पर्यटन और धार्मिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि वृंदावन देशभर के श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है।

    नगर निगम ने बताया कि पार्किंग की क्षमता पर्याप्त है और इसे आधुनिक सुरक्षा मानकों के अनुसार बनाया गया है। पार्किंग में सीसीटीवी कैमरा, सुरक्षा गार्ड और व्यवस्थित वाहन प्रवेश एवं निकास व्यवस्था भी की गई है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि श्रद्धालुओं के वाहन सुरक्षित रहें और उन्हें पार्किंग की वजह से किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

    स्थानीय निवासियों और व्यापारियों ने भी पार्किंग के निर्माण का स्वागत किया है। उनका कहना है कि इससे मंदिर के आसपास की सड़कें जाम नहीं होंगी और क्षेत्र में यातायात सुचारू रहेगा। साथ ही, यह पार्किंग आसपास के व्यवसाय और दुकानदारी के लिए भी फायदेमंद साबित होगी।

    विशेषज्ञों का कहना है कि धार्मिक स्थलों पर आधुनिक पार्किंग सुविधा उपलब्ध कराना जरूरी है, ताकि श्रद्धालुओं का अनुभव बेहतर हो और भीड़-भाड़ और अव्यवस्था की समस्या से छुटकारा मिल सके। बांकेबिहारी मंदिर जैसी प्रमुख धार्मिक जगहों पर यह कदम काफी सकारात्मक माना जा रहा है।

    इस पार्किंग के चालू होने से न केवल श्रद्धालुओं की सुविधा बढ़ेगी, बल्कि मंदिर आने वाले पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए भी यह राहत का संकेत है। नगर निगम ने आश्वासन दिया है कि पार्किंग के संचालन और प्रबंधन को प्रभावी ढंग से किया जाएगा और समय-समय पर इसमें सुधार भी किया जाएगा।

    इस प्रकार, वृंदावन आने वाले श्रद्धालुओं को अब बड़ी राहत मिलने वाली है। पार्किंग के चालू होने से मंदिर दर्शन में आसानी होगी और श्रद्धालु अपनी यात्रा का आनंद आराम से ले सकेंगे। यह कदम न केवल मंदिर प्रशासन, बल्कि पूरे शहर के लिए लाभकारी साबित होगा।

  • चिकने और चमकदार चेहरे के लिए मलाई में मिलाएं ये 3 चीजें, डेड स्किन भी होगी दूर

    चिकने और चमकदार चेहरे के लिए मलाई में मिलाएं ये 3 चीजें, डेड स्किन भी होगी दूर


    नई दिल्ली। सर्दियों में चेहरा रूखा और बेजान दिखना आम बात है। बाजार में कई तरह की क्रीम, फेस पैक और मॉइस्चराइज़र उपलब्ध हैं, लेकिन अक्सर उनका असर सीमित रहता है। ऐसे में घरेलू उपाय सबसे सुरक्षित और प्रभावी साबित होते हैं।

    मलाई (दूध की गाढ़ी परत) में फैटी एसिड्स, विटामिन्स और मिनरल्स पाए जाते हैं, जो त्वचा को मॉइस्चराइज, नर्म और ग्लोइंग बनाते हैं। अगर इसे सही चीजों के साथ मिलाकर लगाया जाए तो यह डेड स्किन को हटाकर त्वचा में प्राकृतिक निखार लाता है।

    1मलाई और हल्दी
    ड्राई स्किन को सॉफ्ट बनाने और हाइपरपिग्मेंटेशन कम करने के लिए मलाई में हल्दी मिलाकर लगाएं।
    तैयारी:

    2 चम्मच मलाई

    1 छोटा चम्मच हल्दी पाउडर

    1 छोटा चम्मच शहद

    सभी सामग्री को अच्छी तरह मिलाकर पेस्ट बनाएं। इसे चेहरे पर 15 मिनट के लिए लगाएं और फिर गुनगुने पानी से धो लें।

    2मलाई और बेसन
    मलाई और बेसन का पैक रूखी त्वचा को ग्लोइंग और नरम बनाता है।
    तैयारी:

    2 चम्मच बेसन

    आवश्यकता अनुसार मलाई

    साथ में मिलाकर पेस्ट तैयार करें। चेहरे पर 15 मिनट तक लगा रहने दें और फिर धो लें।

    3मलाई और शहद
    यह फेस पैक त्वचा को गहराई से हाइड्रेट और चमकदार बनाता है।
    तैयारी:

    मलाई और शहद बराबर मात्रा में मिलाएं

    15–20 मिनट चेहरे पर लगाएं

    फिर पानी से साफ करें

    चेहरे पर मलाई लगाने के फायदे
    रूखी और बेजान त्वचा से छुटकारा

    त्वचा में प्राकृतिक नमी और चमक

    डेड स्किन हटाकर चेहरे की रंगत निखारना

    सर्दियों में स्किन को सॉफ्ट और ग्लोइंग बनाना

    नोट: इन पैक्स को सप्ताह में 2–3 बार लगाना सबसे अच्छा है।

  • आयुष्मान योजना पर बड़ा फैसला: निजी अस्पतालों के इंपैनलमेंट को चुनौती देने वाली याचिका हाईकोर्ट ने की खारिज

    आयुष्मान योजना पर बड़ा फैसला: निजी अस्पतालों के इंपैनलमेंट को चुनौती देने वाली याचिका हाईकोर्ट ने की खारिज


    जबलपुर । मध्यप्रदेश में आयुष्मान भारत योजना के तहत निजी अस्पतालों के इंपैनलमेंट को लेकर दायर की गई जनहित याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। जबलपुर हाईकोर्ट ने अपने अहम फैसले में साफ कहा कि राज्य सरकार का यह कदम आम जनता को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उठाया गया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन निजी अस्पतालों को इंपैनलमेंट या नवीनीकरण की शर्तों से कोई आपत्ति है, वे स्वयं अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं, लेकिन जनहित याचिका के माध्यम से इस प्रक्रिया को चुनौती नहीं दी जा सकती।

    यह याचिका जबलपुर निवासी देवेंद्र दत्त द्वारा दायर की गई थी, जिसमें आयुष्मान योजना के अंतर्गत निजी अस्पतालों के इंपैनलमेंट के लिए नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स NABH  सर्टिफिकेट को अनिवार्य किए जाने पर सवाल उठाए गए थे। याचिकाकर्ता का तर्क था कि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा 23 सितंबर और 10 अक्टूबर 2025 को जारी आदेश छोटे और मध्यम स्तर के निजी अस्पतालों के हितों के खिलाफ हैं। याचिका में कहा गया था कि NABH सर्टिफिकेट की शर्तें जटिल और खर्चीली हैं, जिससे छोटे अस्पताल योजना से बाहर हो सकते हैं और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच प्रभावित होगी।

    हालांकि, हाईकोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना का मुख्य उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद लोगों को मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध कराना है। ऐसे में यह आवश्यक है कि योजना से जुड़े अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा के मानक सुनिश्चित किए जाएं। NABH सर्टिफिकेशन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे अस्पतालों की सेवाओं की गुणवत्ता का आकलन किया जा सकता है।

    कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि सरकार को यह अधिकार है कि वह अपनी योजनाओं के लिए आवश्यक मानक तय करे। यदि किसी निजी अस्पताल को लगता है कि ये शर्तें उसके लिए अनुचित हैं या उसके अधिकारों का उल्लंघन करती हैं, तो वह व्यक्तिगत रूप से अदालत में याचिका दायर कर सकता है। लेकिन जनहित याचिका के माध्यम से पूरी नीति को चुनौती देना उचित नहीं है।

    इस फैसले को राज्य सरकार के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि आयुष्मान योजना में केवल उन्हीं अस्पतालों को शामिल किया जाना चाहिए, जो मरीजों को सुरक्षित, पारदर्शी और उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं देने में सक्षम हों। NABH सर्टिफिकेशन को इसी दिशा में गुणवत्ता सुनिश्चित करने का एक मानक माना जा रहा है।

    वहीं, निजी अस्पतालों के एक वर्ग का मानना है कि NABH सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया महंगी और समय लेने वाली है, जिससे छोटे अस्पतालों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब ऐसे अस्पतालों को या तो तय मानकों को पूरा करना होगा या फिर व्यक्तिगत स्तर पर कानूनी विकल्प तलाशने होंगे।

    कुल मिलाकर, हाईकोर्ट का यह निर्णय आयुष्मान योजना के तहत स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को प्राथमिकता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे योजना के लाभार्थियों को बेहतर इलाज मिल सकेगा।

  • अजित पवार की पत्नी महाराष्ट्र की डिप्टी CM बन सकती हैं; प्रफुल्ल पटेल NCP अध्यक्ष बनने की दिशा में, शरद गुट के साथ विलय की भी चर्चा

    अजित पवार की पत्नी महाराष्ट्र की डिप्टी CM बन सकती हैं; प्रफुल्ल पटेल NCP अध्यक्ष बनने की दिशा में, शरद गुट के साथ विलय की भी चर्चा


    नई दिल्ली। महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा फेरबदल होने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, अजित पवार की पत्नी को राज्य की डिप्टी मुख्यमंत्री बनाए जाने पर विचार चल रहा है। वहीं, प्रफुल्ल पटेल NCP अध्यक्ष बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

    इसके अलावा, शरद गुट के साथ NCP के विलय की भी चर्चा जोर पकड़ रही है, जिससे पार्टी का राजनीतिक समीकरण और मजबूत हो सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव से महाराष्ट्र में सत्ता संतुलन और पार्टी की रणनीति दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

    इससे साफ है कि NCP और महाराष्ट्र राजनीति में आने वाले दिनों में बड़े राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं।

  • शहडोल में बीज भंडार में भीषण आगजनी: लाखों का धान जलकर खाक, हादसा या लापरवाही? भंडारण व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

    शहडोल में बीज भंडार में भीषण आगजनी: लाखों का धान जलकर खाक, हादसा या लापरवाही? भंडारण व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल


    शहडोल । जिले में किसानों की मेहनत और सरकारी व्यवस्था पर उस वक्त बड़ा सवाल खड़ा हो गया, जब कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत नर्सरहा स्थित बीज भंडार के धान गोदाम में भीषण आग लग गई। आग इतनी भयावह थी कि कुछ ही देर में गोदाम में रखा लाखों रुपये मूल्य का धान जलकर पूरी तरह खाक हो गया। धुएं के घने गुबार और उठती लपटों ने पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बना दिया, वहीं किसानों और स्थानीय लोगों में गहरी चिंता और आक्रोश भी देखने को मिला।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गुरुवार को अचानक गोदाम से धुआं उठता दिखाई दिया और कुछ ही मिनटों में आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। देखते ही देखते धान से भरी बोरियां आग की चपेट में आ गईं। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का प्रयास शुरू किया गया। घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू तो पा लिया गया, लेकिन तब तक गोदाम में रखा अधिकांश धान नष्ट हो चुका था।

    घटना की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर, एसडीएम सहित अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने प्रारंभिक तौर पर नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है। प्रशासन का कहना है कि आग लगने के वास्तविक कारणों की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल आग लगने का कारण अज्ञात बताया जा रहा है, लेकिन जिस तरह से आग तेजी से फैली, उसने कई तरह के संदेह पैदा कर दिए हैं।

    इस घटना ने जिले की धान खरीदी और भंडारण व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। उल्लेखनीय है कि हाल ही में शहडोल जिले में धान खरीदी को लेकर कई गड़बड़ियों के मामले सामने आ चुके हैं। कुछ दिन पहले ही धान की बोरियों से पत्थर और कंकड़ निकलने का मामला उजागर हुआ था, जिसने पूरी व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवालिया निशान लगा दिया था। अब बीज भंडार में आग लगने की इस घटना ने संदेह को और गहरा कर दिया है।

    स्थानीय लोगों और किसानों का कहना है कि यदि यह हादसा है तो सुरक्षा इंतजामों में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई, और यदि यह लापरवाही या किसी साजिश का नतीजा है तो इसके पीछे जिम्मेदार कौन है किसानों की चिंता इस बात को लेकर भी है कि जलकर नष्ट हुआ धान आखिर किसका था और इसका असर उनकी भुगतान प्रक्रिया पर तो नहीं पड़ेगा।

    प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि आगजनी के कारणों की हर पहलू से जांच की जाएगी और यदि किसी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता सामने आती है, तो जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल इस घटना ने न केवल सरकारी भंडारण व्यवस्था की पोल खोल दी है, बल्कि किसानों के भरोसे को भी गहरी ठेस पहुंचाई है।

  • MP हाई कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने में देरी, 4.8 लाख लंबित मामलों का निपटारा करने में लग सकते हैं 40 साल

    MP हाई कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने में देरी, 4.8 लाख लंबित मामलों का निपटारा करने में लग सकते हैं 40 साल

    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की मुख्यपीठ जबलपुर और खंडपीठ इंदौर व ग्वालियर में यदि वर्तमान 42 न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाकर 75–85 न्यायाधीश नहीं की गई, तो वर्तमान में लंबित 4,80,592 मामले निपटाने में सिर्फ पांच या दस साल नहीं, बल्कि चार दशक से अधिक समय लग सकता है।

    लंबित मामलों की गंभीर स्थिति
    हालिया आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2025 तक न्यायाधीशों की संख्या औसतन 42–43 रही। इस अवधि में कुल 84,455 नए मामले दर्ज हुए, जबकि 90,045 मामलों का निपटारा हुआ, जिससे केवल 5,590 मामलों की शुद्ध कमी दर्ज हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि इस गति के बावजूद लंबित मामलों का समाधान 39–40 वर्षों में ही संभव होगा।

    न्यायिक रिक्तियों का कारण
    1989–90 की एरियर कमेटी की रिपोर्ट और हालिया विश्लेषण यह स्पष्ट करते हैं कि उच्च न्यायालयों में मामलों के जमा होने का मुख्य कारण न्यायाधीशों की नियुक्तियों में देरी है। वर्तमान स्थिति दर्शाती है कि न्याय प्रक्रिया अत्यधिक धीमी होने पर संविधान द्वारा प्रदत्त न्याय तक त्वरित पहुँच (अनुच्छेद 39-ए) का अधिकार केवल औपचारिक बनकर रह जाएगा।

    न्यायाधीशों की आवश्यक संख्या और अनुशंसाएं
    मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अपनी स्वीकृत क्षमता 53 से बढ़ाकर 85 न्यायाधीश करने की अनुशंसा की है। केंद्र और राज्य सरकार से अब तक वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति लंबित है।

    लक्ष्य यह है कि अगले पांच वर्षों में लंबित मामलों को खत्म करने के लिए प्रति माह 22,000–23,000 मामलों का निपटारा आवश्यक होगा। इसके लिए कम से कम 75 कार्यरत न्यायाधीश तुरंत नियुक्त किए जाने चाहिए।

    वर्ष 2026 में मुख्य न्यायाधीश सहित सात न्यायाधीश सेवानिवृत्त होने वाले हैं। यदि नई नियुक्तियां समय पर नहीं होतीं, तो लंबित मामलों का बैकलाग फिर बढ़ सकता है।

    सुधार की दिशा
    मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में सुधार तभी स्थायी होगा जब

    न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाई जाए

    विशेष बेंचों का गठन किया जाए

    आधुनिक डिजिटाइजेशन और प्रबंधन प्रणाली लागू की जाए

    साथ ही सरकार को अनुच्छेद 39-ए के तहत अपनी जवाबदेही निभाते हुए नियुक्ति प्रक्रिया में तेजी लानी होगी, ताकि आम जनता का न्यायपालिका पर भरोसा कायम रहे।

  • तेज लाउडस्पीकर से आमजन परेशान, जयपुर के परकोटा इलाके को लेकर विधानसभा में गूंजा मामला

    तेज लाउडस्पीकर से आमजन परेशान, जयपुर के परकोटा इलाके को लेकर विधानसभा में गूंजा मामला

    जयपुर।  राजस्थान की राजधानी जयपुर में मस्जिदों में लगे लाउडस्पीकरों की तेज आवाज को लेकर एक बार फिर विवाद गहराता नजर आ रहा है। बुधवार को राजस्थान विधानसभा के शून्यकाल के दौरान हवामहल विधायक बालमुकुंद आचार्य ने यह मुद्दा जोरदार तरीके से उठाते हुए परकोटा क्षेत्र की कई मस्जिदों में नियमों से अधिक तेज आवाज में चल रहे लाउडस्पीकरों पर आपत्ति जताई।

    विधायक ने सदन में कहा कि परकोटा इलाके में कुछ मस्जिदों पर बड़े और अधिक संख्या में लाउडस्पीकर लगाए गए हैं, जिनकी आवाज निर्धारित ध्वनि मानकों से कहीं अधिक है। इससे आसपास रहने वाले नागरिकों, विद्यार्थियों और बुजुर्गों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    नींद और पढ़ाई हो रही प्रभावित
    बालमुकुंद आचार्य ने बताया कि तेज आवाज के कारण स्थानीय लोगों की नींद प्रभावित हो रही है और विद्यार्थियों की पढ़ाई में भी व्यवधान आ रहा है। उन्होंने इसे आम नागरिकों के स्वास्थ्य और मौलिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय बताया।

    विधायक ने यह भी कहा कि कई बार स्थानीय लोग मस्जिद प्रबंधन से लाउडस्पीकर की आवाज कम करने का अनुरोध करते हैं, लेकिन अक्सर इस पर विवाद की स्थिति बन जाती है। इस संबंध में प्रशासन को पहले भी कई शिकायतें दी जा चुकी हैं, इसके बावजूद अब तक कोई ठोस और स्थायी कार्रवाई नहीं हो सकी है।

    रमजान के दौरान अतिरिक्त लाउडस्पीकरों पर चिंता
    विधायक ने विशेष रूप से रमजान माह के दौरान लगाए जाने वाले अतिरिक्त लाउडस्पीकरों पर चिंता जताई। उन्होंने सरकार और प्रशासन से मांग की कि लाउडस्पीकरों के उपयोग को लेकर स्पष्ट नीति बनाई जाए, जिसमें तय समय और कानूनी ध्वनि सीमा का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।उन्होंने कहा कि यदि नियमों का उल्लंघन होता है तो प्रशासन को कानून के तहत कार्रवाई करते हुए ऐसे लाउडस्पीकरों को हटाना चाहिए।

    ‘यह धर्म नहीं, आमजन की शांति का मुद्दा’
    बालमुकुंद आचार्य ने सदन में स्पष्ट किया कि यह मामला किसी धर्म विशेष के विरोध से जुड़ा नहीं है, बल्कि आम जनता की शांति, स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता से संबंधित है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आमजन में असंतोष बढ़ सकता है, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

    अन्य विधायकों ने भी जताई चिंता
    इस मुद्दे पर सदन में मौजूद अन्य विधायकों ने भी सहमति जताई। उन्होंने कहा कि जयपुर ही नहीं, बल्कि प्रदेश के कई शहरी इलाकों में लाउडस्पीकरों की तेज आवाज एक गंभीर समस्या बन चुकी है। विधायकों ने सरकार से मांग की कि मौजूदा नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए और आम लोगों की शिकायतों को प्राथमिकता दी जाए।

    गौरतलब है कि धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकरों की आवाज को लेकर पहले भी कई बार विवाद और मांगें सामने आती रही हैं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। विधायक बालमुकुंद आचार्य ने एक बार फिर प्रशासन से अपील की है कि कानून के दायरे में रहकर लाउडस्पीकरों की आवाज नियंत्रित की जाए, ताकि आम नागरिक बिना किसी परेशानी के सामान्य जीवन जी सकें।

  • कम बजट में चाहिए बॉलीवुड जैसी लोकेशन, इन 5 जगहों पर बनेगी शानदार रील

    कम बजट में चाहिए बॉलीवुड जैसी लोकेशन, इन 5 जगहों पर बनेगी शानदार रील

    नई दिल्ली । आज के दौर में घूमना सिर्फ मन की शांति के लिए नहीं, बल्कि सोशल मीडिया फीड को शानदार बनाने के लिए भी होता है. खासकर Gen-Z मुसाफिरों के लिए अब वही जगह हॉट डेस्टिनेशन है, जो ‘रील-रेडी’ हो. यानी वहां के नजारे, कैफे और गलियां ऐसी हों जिन्हें देखते ही इंस्टाग्राम पर लाइक्स और कमेंट्स की बौछार हो जाए. अगर आप भी किसी ऐसी ही ट्रिप की तलाश में हैं जहां कम बजट में आपको बॉलीवुड फिल्म जैसा बैकग्राउंड मिल जाए, तो यह लिस्ट आपके लिए है. जहां की तस्वीरें आपके दोस्तों को आपसे जलने पर मजबूर कर देंगी.

    समंदर, रंगीन गलियां और सुकून वाली वाइब्स

    अगर आप समंदर के शौकीन हैं और अपनी रील में वाइब्स चाहते हैं, तो गोवा की फोंटेनहास गलियां आपका इंतजार कर रही हैं. पुर्तगाली वास्तुकला से सजी ये पीली और नीली दीवारें आपको भारत में रहकर यूरोप का अहसास कराती हैं. यहां के बीच-साइड कैफे और सूर्यास्त के नजारे आपके फीड को रंगीन बना देते हैं. थोड़ा और शांति की तलाश है, तो पुदुचेरी (पॉन्डिचेरी) का व्हाइट टाउन किसी स्वप्नलोक से कम नहीं है. फ्रांसीसी विरासत को समेटे यहां के पीले घर और सुंदर बुटीक कैफे रील बनाने के लिए सबसे एस्थेटिक बैकग्राउंड देते हैं. वहीं केरल के एलेप्पी में पानी पर तैरते हाउसबोट्स और नारियल के पेड़ों के बीच से गुजरती नाव की तस्वीरें आपके इंस्टाग्राम को एक अलग ही लेवल पर ले जाती हैं.

    बर्फ, बादल और एडवेंचर का इंस्टाग्राम पैकेज

    पहाड़ों के शौकीनों के लिए मनाली की सोलंग वैली और अटल टनल के पास जमी बर्फ किसी जादुई कंटेंट से कम नहीं है. यहां की स्लो-मोशन रील्स सोशल मीडिया पर जबरदस्त वायरल होती हैं. अगर आप थोड़ा और एडवेंचर चाहते हैं, तो लद्दाख की पैंगोंग झील का नीला पानी और वहां का सन्नाटा आपकी तस्वीरों में जान फूंक देता है. दूसरी ओर, पूर्वोत्तर भारत का मेघालय कुदरत की अनूठी इंजीनियरिंग पेश करता है. यहां के लिविंग रूट ब्रिज और डाउकी नदी का कांच जैसा साफ पानी ऐसा बैकग्राउंड प्रदान करता है जिसे देखकर लोग यकीन नहीं कर पाएंगे कि यह जगह भारत में ही है. इसी कड़ी में ऋषिकेश का नाम भी आता है, जहां लक्ष्मण झूला और गंगा की आरती के साथ-साथ बंजी जंपिंग और राफ्टिंग के रोमांचक वीडियो आपके रील गेम को मजबूत करते हैं.

    शाही किलों की भव्यता और विरासत का प्राचीन जादू

    संस्कृति और विरासत को पसंद करने वाले युवाओं के लिए जयपुर यानी ‘पिंक सिटी’ सबसे बड़ा अड्डा है. यहां का पत्रिका गेट अपनी रंग-बिरंगी मेहराबों के कारण इंस्टाग्राम पर सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली जगहों में से एक बन चुका है. इसके साथ ही आमेर किले और हवा महल की वास्तुकला आपकी रील्स में शाही राजपूताना टच जोड़ती है. वहीं अगर आप कुछ रहस्यमयी और प्राचीन तलाश रहे हैं, तो हम्पी के खंडहर और वहां का पथरीला परिदृश्य एक अद्भुत सिनेमैटिक फील देता है. यूनेस्को की यह विश्व धरोहर स्थल इतिहास और फोटोग्राफी का अनोखा संगम है. अंत में, वाराणसी के घाटों पर सुबह की नाव की सवारी और शाम को होने वाली दिव्य गंगा आरती ऐसे सांस्कृतिक दृश्य पेश करती है जो न सिर्फ रील-रेडी हैं, बल्कि भारत की रूह को भी खूबसूरती से दर्शाते हैं.

  • अजित पवार के निधन के बाद सुनेत्रा पवार बन सकती हैं महाराष्ट्र की डिप्टी CM, नेताओं ने की अहम मुलाकात

    अजित पवार के निधन के बाद सुनेत्रा पवार बन सकती हैं महाराष्ट्र की डिप्टी CM, नेताओं ने की अहम मुलाकात

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के विमान हादसे में निधन के बाद राजनीतिक हलकों में सुनेत्रा पवार को डिप्टी सीएम बनाने की अटकलें तेज हो गई हैं। इस सिलसिले में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल, धनंजय मुंडे और सुनील तटकरे ने सुनेत्रा पवार से अहम मुलाकात की। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम महाराष्ट्र की राजनीति में संतुलन बनाए रखने और पार्टी के समन्वय को कायम रखने के उद्देश्य से उठाया जा सकता है।

    सुनेत्रा पवार के लिए डिप्टी सीएम पद पर विचार

    सूत्रों के मुताबिक, सुनेत्रा पवार को महाराष्ट्र की डिप्टी सीएम पद का प्रस्ताव दिया जा सकता है। संभावना जताई जा रही है कि वह अपने दिवंगत पति अजित पवार की सीट से आगामी चुनाव में हिस्सा लें। इसके साथ ही खबर है कि प्रफुल्ल पटेल को एनसीपी का अध्यक्ष बनाए जाने पर भी विचार किया जा रहा है। इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय और आगे की चर्चा के लिए वरिष्ठ नेता मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात करेंगे। वहीं, इस बैठक में एनसीपी (एसपी) के विलय और संगठनात्मक मुद्दों पर भी बातचीत होने की संभावना है।

    हादसा जिसने पूरे महाराष्ट्र को झकझोर दिया

    गौरतलब है कि महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार का विमान बुधवार को बारामती में क्रैश हो गया, जिसमें उनके साथ कुल पांच लोगों की जान चली गई। हादसे में विमान में मौजूद एक सुरक्षाकर्मी, दो पायलट और एक महिला क्रू मेंबर भी मारे गए। अजित पवार पुणे में होने वाले जिला परिषद चुनावों के लिए रैलियों को संबोधित करने जा रहे थे।

    सुबह मुंबई से बारामती के लिए रवाना हुए विमान का लैंडिंग के दौरान कंट्रोल गड़बड़ हो गया। चश्मदीदों ने बताया कि विमान लड़खड़ाया और पल भर में क्रैश का शिकार हो गया। क्रैश के बाद विमान आग के गोले में बदल गया और पूरी तरह जलकर नष्ट हो गया। इस दर्दनाक हादसे ने न केवल परिवार को शोक में डुबो दिया, बल्कि राज्य की राजनीति में भी भूचाल ला दिया।

    राजनीति में संतुलन और पार्टी नेतृत्व की चुनौती

    राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इस दुखद हादसे के बाद एनसीपी और अन्य सहयोगी दलों के लिए संतुलन बनाए रखना और नेतृत्व संरचना को मजबूत करना चुनौतीपूर्ण हो गया है। ऐसे में सुनेत्रा पवार का डिप्टी सीएम बनना राजनीतिक स्थिरता और पार्टी की भावी रणनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

  • CG News: रिटायर्ड डिप्टी कलेक्टर के घर धर्मांतरण का खुलासा, चंगाई सभा की आड़ में चल रहा था खेल

    CG News: रिटायर्ड डिप्टी कलेक्टर के घर धर्मांतरण का खुलासा, चंगाई सभा की आड़ में चल रहा था खेल



    नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में कथित धर्मांतरण का बड़ा मामला सामने आया है। गांधीनगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत चंगाई सभा की आड़ में ईसाई मतांतरण कराने के आरोप में सरगुजा पुलिस ने सेवानिवृत्त डिप्टी कलेक्टर ओमेगा टोप्पो (66) को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि अंबिकापुर के नमनाकला स्थित उनके निवास पर बीते कई महीनों से प्रत्येक रविवार को नियमित रूप से चंगाई सभा आयोजित की जा रही थी।

    हर रविवार जुटती थी भीड़, बिना अनुमति हो रहा था आयोजन
    पुलिस जांच में सामने आया है कि ओमेगा टोप्पो के घर में हर रविवार बड़ी संख्या में लोग जुटते थे। इन सभाओं के लिए किसी प्रकार की प्रशासनिक अनुमति नहीं ली गई थी। एक रजिस्टर भी बरामद किया गया है, जिसमें सभा में शामिल होने वालों के नाम और हस्ताक्षर दर्ज थे।

    हिंदुवादी संगठनों के विरोध के बाद हुआ खुलासा
    25 जनवरी (रविवार) को चंगाई सभा की सूचना मिलने पर हिंदुवादी संगठनों से जुड़े लोग मौके पर पहुंचे। उस समय घर के बाहर कई वाहन खड़े थे और भीतर करीब 50 से 60 लोग कथित प्रार्थना सभा में शामिल थे।

    संगठनों का आरोप है कि सभा के दौरान

    हिंदू धर्म के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणियां की जा रही थीं

    लोगों को ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रलोभन दिया जा रहा था

    कम से कम 4–5 लोगों का मतांतरण कराने का प्रयास किया जा रहा था

    इसके बाद मामले की सूचना गांधीनगर थाना पुलिस को दी गई।

    पुलिस को रोका गया, रजिस्टर किया गया जब्त
    सूचना पर गांधीनगर पुलिस टीम नायब तहसीलदार के साथ मौके पर पहुंची। आरोप है कि आयोजकों ने पुलिस को सभा स्थल के भीतर प्रवेश करने से रोक दिया।
    ओमेगा टोप्पो ने पुलिस से पहचान पत्र और जांच आदेश की प्रति मांगी, जबकि अन्य लोगों ने कहा कि प्रार्थना समाप्त होने के बाद ही बातचीत की जाएगी।हालांकि पुलिस ने मौके से सभा में शामिल लोगों का रजिस्टर जब्त कर लिया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि चंगाई सभा लंबे समय से नियमित रूप से आयोजित की जा रही थी।

    इन धाराओं में दर्ज हुआ मामला
    हिंदुवादी संगठन से जुड़े रोशन तिवारी की रिपोर्ट पर गांधीनगर पुलिस ने ओमेगा टोप्पो समेत अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया। आरोपितों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 270 और 299
    छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम की धारा 5 (क)के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया।

    थाने से लौटने के बाद हुई गिरफ्तारी
    पुलिस के अनुसार पूछताछ के लिए थाने बुलाए जाने के बाद ओमेगा टोप्पो बिना सूचना दिए लौट गई थीं। इसके बाद गांधीनगर पुलिस ने दबिश देकर उन्हें गिरफ्तार किया।
    थाना प्रभारी प्रवीण कुमार द्विवेदी ने बताया कि आरोपित को न्यायालय में पेश किया गया है। मामले की विस्तृत जांच जारी है और चंगाई सभा से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।