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  • कपिल शर्मा ने रणवीर सिंह पर ली मजेदार फिरकी, अमिताभ बच्चन के जवाब ने सब चौंका दिया

    कपिल शर्मा ने रणवीर सिंह पर ली मजेदार फिरकी, अमिताभ बच्चन के जवाब ने सब चौंका दिया


    नई दिल्ली। कॉमेडी किंग कपिल शर्मा ने एक अवॉर्ड शो में अपने मशहूर अंदाज में सितारों की खिंचाई करते हुए ऐसा माहौल बनाया कि वहां मौजूद हर किसी की हंसी रुकना मुश्किल हो गया। यह किस्सा 2016 के स्क्रीन अवॉर्ड्स का है, जब कपिल ने फ्रंट रो में बैठे रणवीर सिंह और दीपिका पादुकोण से नखरों पर सवाल पूछा।

    रणवीर-दीपिका के बीच नखरों की बहस

    कपिल के साथ करण जौहर भी होस्टिंग की कमान संभाल रहे थे। कपिल ने रणवीर से पूछा, “लड़कों और लड़कियों में से ज्यादा नखरे कौन दिखाता है?” रणवीर मुस्कुराते हुए बोले, “लड़कियां, क्योंकि तैयार होने में काफी समय लगाती हैं और उनके नखरे देखने वाले होते हैं।” दीपिका ने इस बात को पलटते हुए कहा कि “लड़के कहीं ज्यादा नखरेबाज होते हैं।” इस पर कपिल ने अपना फेमस सेंस ऑफ ह्यूमर इस्तेमाल करते हुए ‘ऑड-इवन’ फॉर्मूले पर मजाकिया सवाल किया कि अगर औरतों को सिर्फ ईवन दिनों में और पुरुषों को ऑड दिनों में बोलने का मौका मिले, तो क्या पुरुषों को कभी बोलने का मौका मिलेगा? इस पर हंसी का माहौल और भी गहरा गया।

    अमिताभ बच्चन की धमाकेदार एंट्री

    जब रणवीर और दीपिका के बीच बहस नहीं बनी, तो दीपिका ने कपिल से कहा कि “सिर पर बैठे अमिताभ बच्चन और जया बच्चन से सलाह लो।” कपिल तुरंत बिग बी के पास गए और मजाक में पूछा, “सर, घर पर किसकी चलती है?”कपिल ने बाद में कहा कि अमिताभ की आवाज इतनी दमदार है कि उनका ‘पास आओ’ कहना भी जेल भेजने का आदेश लगता है। अमिताभ ने बड़े ही फिल्मी अंदाज में जवाब दिया, “मेरे घर में तो आपकी (कपिल की) ही चलती है।” इस पर कपिल ने तुरंत कहा कि उनके इस बयान ने अब मार्केट फीस बढ़ा दी है। पूरे हॉल में मौजूद लोग हंसी रोक नहीं पाए।

    हंसी-मजाक का सिलसिला

    कपिल ने इसके बाद एक्ट्रेस श्रिया सरन की ओर रुख किया और उनकी राय पूछी। श्रिया ने मासूमियत से कहा कि लड़कियां बहुत सिंपल होती हैं। कपिल ने तुरंत पलटवार करते हुए पूछा, “तो क्या हमारे ऊपर कोई कढ़ाई की हुई है?” इस पर सभी दर्शक ठहाके मारकर हंसने लगे। इस पूरे एपिसोड ने साबित कर दिया कि कपिल शर्मा का ह्यूमर सिर्फ लोगों को हंसाने तक सीमित नहीं, बल्कि सितारों के बीच की जिंदादिली और पावर डायनामिक्स को भी बेबाक तरीके से उजागर करता है।

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    सबकी हंसी रुकने वाला पल

    अमिताभ बच्चन का जवाब इतना सटीक और मजेदार था कि वहां मौजूद सभी लोग ठहाके मारते हुए रह गए। रणवीर-दीपिका की नखरों की बहस, श्रिया की मासूमियत और कपिल का चुटकुलों भरा अंदाज—सब कुछ मिलकर अवार्ड शो के सबसे यादगार लम्हों में शामिल हो गया। यह किस्सा आज भी सोशल मीडिया पर साझा किया जाता है और बॉलीवुड की हंसी-मजाक की कहानियों में प्रमुख रूप से गि
  • अमेरिका ने खोली पाकिस्तान की पोल, आतंकियों के पनाहगाह के भारत विरोधी झूठों का पर्दाफाश

    अमेरिका ने खोली पाकिस्तान की पोल, आतंकियों के पनाहगाह के भारत विरोधी झूठों का पर्दाफाश

    नई दिल्ली । पाकिस्तान और आतंकवाद का पुराना नाता किसी से छिपा नहीं है। दशकों तक आतंकियों को सुरक्षित पनाह देने वाले पाकिस्तान को अब अमेरिका ने भी चेतावनी दी है। ताजा अमेरिकी रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान आज भी आतंकियों और चरमपंथियों का प्रमुख ठिकाना बना हुआ है। रिपोर्ट ने भारत को लेकर पाकिस्तान द्वारा फैलाए जा रहे झूठों का भी पर्दाफाश किया है।

    यह रिपोर्ट US कांग्रेस रिसर्च सर्विस (CRS) ने जारी की है। रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब पाकिस्तान ईरान और अमेरिका के बीच जारी जंग में खुद को मध्यस्थ के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है।

    पाकिस्तान में सक्रिय 15 बड़े आतंकवादी समूह

    रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में आज भी करीब 15 बड़े आतंकवादी समूह सक्रिय हैं। इनमें वैश्विक स्तर पर सक्रिय, भारत-केंद्रित, अफगानिस्तान-केंद्रित, घरेलू स्तर के और सांप्रदायिक समूह शामिल हैं। इनमें से 12 समूहों को अमेरिकी कानून के तहत ‘विदेशी आतंकवादी संगठन’ (FTOs) घोषित किया गया है और अधिकांश चरमपंथी विचारधारा से प्रेरित हैं। रिपोर्ट में इस बात पर चिंता जताई गई है कि पाकिस्तान इन नेटवर्कों को खत्म करने में विफल रहा है। 2014 के ‘नेशनल एक्शन प्लान’ में सभी सशस्त्र मिलिशिया को समाप्त करने का आदेश दिया गया था, लेकिन पाकिस्तान अब तक इन आतंकियों को पाल रहा है।

    भारत के लिए खतरा: सक्रिय समूहों के दस्ते

    रिपोर्ट में विशेष रूप से भारत-केंद्रित समूहों की ओर ध्यान खींचा गया है। हिजबुल मुजाहिदीन और जैश-ए-मोहम्मद जैसे समूहों के पास 1,500 से अधिक सक्रिय समर्थक मौजूद हैं। लश्कर-ए-तैयबा, जैश और हिजबुल जैसे समूह भी पाकिस्तान में सुरक्षित ठिकाने बना रहे हैं।

    पाकिस्तान के झूठ का पर्दाफाश

    रिपोर्ट ने पाकिस्तान की दलीलों की पोल भी खोली। पाकिस्तान बलूचिस्तान में उग्रवाद को भारत प्रायोजित बताता है, जबकि अमेरिकी रिपोर्ट ने हक्कानी नेटवर्क का सीधा संबंध पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों से जोड़ा है। भारत पहले ही इन आरोपों को खारिज कर चुका है और स्पष्ट कर चुका है कि पाकिस्तान को अपनी नाकामियों से ध्यान भटकाने के लिए दूसरों पर आरोप लगाना बंद करना चाहिए।

  • संकट के बीच राहत की खबर…. 6000 PNG उपभोक्ताओं ने सरेंडर किए LPG कनेक्शन

    संकट के बीच राहत की खबर…. 6000 PNG उपभोक्ताओं ने सरेंडर किए LPG कनेक्शन


    नई दिल्ली।
    सरकार (Government) द्वारा पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) (PNG – Piped Natural Gas) को बढ़ावा देने और एलपीजी (तरलीकृत पेट्रोलियम गैस) (LPG – Liquefied Petroleum Gas) की सप्लाई को सुव्यवस्थित करने के प्रयासों के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, शनिवार तक 6000 पीएनजी उपभोक्ताओं ने अपने एलपीजी कनेक्शन सरेंडर कर दिए हैं।

    इस विषय पर मंत्रालय के सचिव नीरज मित्तल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इन उपभोक्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा, ‘कल तक 6000 पीएनजी उपभोक्ताओं ने अपनी एलपीजी सरेंडर कर दी! उन्हें बहुत-बहुत धन्यवाद!!’ उन्होंने अन्य पीएनजी यूजर्स से भी अपील की कि वे उन लोगों की मदद के लिए अपना एलपीजी कनेक्शन छोड़ दें, जिनके पास अभी तक पीएनजी की सुविधा नहीं है।


    तीन महीने बाद बंद हो सकती है एलपीजी सप्लाई

    सरकार की योजना है कि जिन घरों में पीएनजी का एक्सेस यानी पाइपलाइन की पहुंच है, लेकिन उन्होंने अभी तक कनेक्शन नहीं लिया है तो वहां तीन महीने बाद एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई रोक दी जाएगी। यह नियम उन जगहों पर लागू नहीं होगा जहां पीएनजी की सप्लाई तकनीकी रूप से संभव नहीं है, बशर्ते किसी अधिकृत संस्था द्वारा ‘अनापत्ति प्रमाण पत्र’ (NOC) जारी किया गया हो।

    पश्चिमी एशिया से आयात में आ रही बाधाओं के कारण एलपीजी आपूर्ति पर दबाव है। सरकार का लक्ष्य पाइपलाइन वाले क्षेत्रों के लोगों को पीएनजी पर शिफ्ट करना है, ताकि वहां की एलपीजी को उन ग्रामीण या दूरदराज के इलाकों में भेजा जा सके जहां पाइपलाइन का बुनियादी ढांचा नहीं है।


    गैस आपूर्ति में घरेलू और परिवहन क्षेत्र को प्राथमिकता

    – मौजूदा स्थिति को देखते हुए गैस क्षेत्र में आपूर्ति को प्राथमिकता के आधार पर बांटा गया है।
    – पीएनजी और सीएनजी: घरेलू पीएनजी और परिवहन के लिए सीएनजी को 100% (पूर्ण आवंटन) गैस दी जा रही है।
    – औद्योगिक और वाणिज्यिक: इन उपभोक्ताओं को उनके औसत उपयोग का लगभग 80% गैस मिल रही है।
    – उर्वरक संयंत्र: इन्हें 70-75% क्षमता पर गैस की आपूर्ति की जा रही है। कमी को पूरा करने के लिए अतिरिक्त एलएनजी कार्गो की व्यवस्था की जा रही है।

    एलपीजी की स्थिति और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई
    भू-राजनीतिक स्थितियों के कारण एलपीजी आपूर्ति प्रभावित जरूर हुई है, लेकिन एक रिपोर्ट के अनुसार डिलीवरी सामान्य है और कहीं से भी किसी कमी की सूचना नहीं है। प्रतिदिन 55 लाख से अधिक गैस सिलेंडरों की डिलीवरी की जा रही है। कमर्शियल एलपीजी आपूर्ति को संकट-पूर्व के स्तर के लगभग 70% तक बहाल कर दिया गया है। इसमें हॉस्पिटैलिटी (होटल-रेस्तरां), खाद्य सेवाओं और प्रमुख उद्योगों को प्राथमिकता दी जा रही है।

    छापेमारी और जब्ती: सरकार ने जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं। हाल के दिनों में लगभग 2,900 छापेमारी की गई हैं और करीब 1,000 सिलेंडर जब्त किए गए हैं। इसके अलावा राज्यों का केरोसिन आवंटन भी बढ़ाया गया है।

    पीएनजी को बढ़ावा देने के लिए कंपनियों के इंसेंटिव्स
    पीएनजी नेटवर्क (सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन) के विस्तार को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। अकेले मार्च महीने में 2,90,000 से अधिक नए पीएनजी कनेक्शन जोड़े गए हैं। इंद्रप्रस्थ गैस (IGL), महानगर गैस (MGL), गेल गैस (GAIL Gas) और बीपीसीएल (BPCL) जैसी कंपनियां लोगों को एलपीजी से पीएनजी पर शिफ्ट होने के लिए कई तरह के इंसेंटिव्स (प्रोत्साहन/छूट) भी दे रही हैं।

    सरकार की अपील
    केंद्र सरकार ने राज्यों से निगरानी तेज करने, दैनिक ब्रीफिंग आयोजित करने और गैस बुनियादी ढांचे के लिए अप्रूवल में तेजी लाने को कहा है। सरकार ने जनता से यह भी अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर विश्वास न करें और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।

  • अमित शाह का राहुल गांधी पर कड़ा प्रहार, बोले- नक्सलियों के साथ रहते-रहते खुद बन गए नक्सलवादी

    अमित शाह का राहुल गांधी पर कड़ा प्रहार, बोले- नक्सलियों के साथ रहते-रहते खुद बन गए नक्सलवादी


    नई दिल्ली।
    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Union Home Minister Amit Shah) ने सोमवार को लोकसभा (Lok Sabha) में कांग्रेस और सदन में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) पर करार प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि नक्सलियों के साथ रहते-रहते एक पार्टी के नेता खुद नक्सलवादी बन गए। शाह ने देश को वामपंथी उग्रवाद से मुक्त किए जाने के मुद्दे पर सदन में हुई चर्चा का जवाब देते हुए राहुल गांधी पर नक्सलियों का समर्थन करने का आरोप लगाया। गृह मंत्री ने कहाकि राहुल गांधी जी अपने लंबे राजनीतिक करियर में कई बार नक्सलियों और उनके हमर्ददों के साथ देखे गए हैं। भारत जोड़ो यात्रा में कई नक्सल फ्रंटल संगठन ने हिस्सा लिया, जिसका रिकॉर्ड भी है।


    राहुल गांधी कैसे बच सकते हैं

    अमित शाह ने दावा किया कि 2010 में ओडिशा में लाडो शिकोका के साथ राहुल ने मंच साझा किया। शिकोका ने उसी मंच से भड़काऊ भाषण दिया और उन्हें माला भी पहनाई। उन्होंने यह भी दावा किया कि 2018 में हैदराबाद में, राहुल ने जीवी राव से मुलाकात की, जो (नक्सल) विचाराधारा के करीब थे। मई 2025 में शांति समन्वय समिति (सीसीपी) के सदस्यों से मुलाकात की। विपक्षी सदस्यों के शोरगुल के बीच शाह ने कहाकि 172 जवानों को मारने वाला (माड़वी) हिडमा जब मारा गया, तो इंडिया गेट पर नारे लगे कि कितने हिडमा मारेगो, हर घर से हिडमा निकलेगा। उन्होंने कहा कि इससे संबंधित वीडियो को राहुल गांधी ने स्वयं ट्वीट किया था और ऐसे में वह कैसे बच सकते हैं।


    कांग्रेस की वामपंथी विचारधारा दोषी

    शाह ने कांगेस पर निशाना साधते हुए कहा कि इन्होंने 1970 से लेकर मार्च 2026 तक नक्सलाद और नरसंहार का समर्थन किया है। उन्होंने कहाकि जो 20 हजार लोग मारे गए, उसका कोई दोषी है तो वह कांग्रेस की वामपंथी विचारधारा है…। गृह मंत्री ने राहुल पर निशाना साधते हुए कहाकि नक्सलियों के साथ रहते-रहते एक पार्टी और उसके नेता खुद नक्सलवादी बन गए। इसका जवाब इस देश की जनता को उन्हें चुनाव में देना पड़ेगा। यह बात रुकेगी नहीं। जनता की अदालत में उन्हें जवाब देना पड़ेगा। उन्होंने कांग्रेस की आलोचना करते हुए कहा कि मनमोहन सिंह सरकार के दौरान राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (एनएसी) का गठन किया गया और इस तरह एक संविधानेत्तर मंच बनाया गया, जिसकी अध्यक्ष सोनिया गांधी थीं।


    जयराम रमेश पर भी आरोप

    शाह ने यह दावा भी किया कि कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने महेश राउत नाम के एक नक्सली की रिहाई के लिए अपनी पार्टी शासित एक राज्य के मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था। उन्होंने सवाल किया कि जब केंद्र सरकार का एक संविधानेत्तर प्राधिकरण, जो प्रधानमंत्री से भी ऊपर था, के सदस्य यदि नक्सलवाद के समर्थक हों तो किस तरह से नक्सलियों का हौसला टूटेगा? और यह कांग्रेस पार्टी ने किया था। उन्होंने यह दावा भी किया कि 2011 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने जब प्रधानमंत्री ग्रामीण विकास फेलोशिप शुरू की, तो उसका एक लाभार्थी नक्सलवादी बना।

    शाह ने कांग्रेस नेता पी चिदंबरम पर भी प्रहार करते हुए दावा किया कि छत्तीसगढ़ में सीआरपीएफ के 76 जवानों के मारे जाने के बाद कांग्रेस नेता ने कहा था कि हम आपसे हथियार डालने को नहीं कह सकते। हम जानते हैं कि आप ऐसा नहीं कर सकते क्योंकि आप हथियारबंद आजादी की लड़ाई में विश्वास करते हैं।

  • ईरान युद्ध के बीच IMFकी चेतावनी… मिडिल ईस्ट तनाव से वैश्विक अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित

    ईरान युद्ध के बीच IMFकी चेतावनी… मिडिल ईस्ट तनाव से वैश्विक अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित

    तेल अबीव। मिडिल ईस्ट तनाव (Middle East Tensions) के बीच अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund- IMF) ने सोमवार को चेतावनी दी है। उसने कहा है कि मध्य पूर्व में ईरान युद्ध ने सीमावर्ती देशों की अर्थव्यवस्थाओं को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। साथ ही कई ऐसी अर्थव्यवस्थाओं की संभावनाएं धूमिल कर दी हैं, जो हाल ही में पिछले संकटों से उबरना शुरू कर रही थीं। आईएमएफ के शीर्ष अर्थशास्त्रियों द्वारा जारी एक ब्लॉग पोस्ट में कहा गया है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर शुरू किए गए हमलों से उत्पन्न युद्ध वैश्विक स्तर पर एक असममित झटका पैदा कर रहा है, जिससे वित्तीय स्थितियां और अधिक कठिन हो गई हैं।

    आईएमएफ ने स्पष्ट किया कि युद्ध का प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि संघर्ष कितने समय तक चलता है, कितना फैलता है और बुनियादी ढांचे तथा आपूर्ति श्रृंखलाओं को कितना नुकसान पहुंचाता है। संगठन ने सदस्य देशों से आग्रह किया है कि इस झटके से निपटने के लिए कोई भी नीतिगत उपाय सावधानीपूर्वक तय करें। आईएमएफ ने कहा कि वह जहां जरूरत हो, सदस्य देशों को नीतिगत सलाह और वित्तीय सहायता प्रदान कर रहा है तथा यह अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समन्वय से किया जा रहा है।

    आईएमएफ की ओर से यह बयान ऐसे समय में आया है जब जी-7 के वित्त मंत्रियों ने ऊर्जा बाजार की स्थिरता बनाए रखने और हाल की अस्थिरता से उत्पन्न व्यापक आर्थिक दुष्प्रभावों को सीमित करने के लिए ‘सभी आवश्यक उपाय’ करने का संकल्प लिया है। वहीं, अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुसार, ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने और क्षेत्रीय बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान के कारण वैश्विक तेल बाजार में इतिहास का सबसे बड़ा व्यवधान उत्पन्न हुआ है। सामान्यतः वैश्विक तेल का 25-30 प्रतिशत और द्रवीकृत प्राकृतिक गैस का 20 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे जलमार्ग से गुजरता है।


    खाद्य असुरक्षा के खतरे में सबसे गरीब देश

    आईएमएफ के ब्लॉग में कहा गया है कि खाद्य पदार्थों और उर्वरकों की बढ़ती कीमतों को देखते हुए कम आय वाले देश खाद्य असुरक्षा के विशेष जोखिम में हैं। कई विकसित अर्थव्यवस्थाएं अपनी अंतरराष्ट्रीय सहायता में कटौती कर रही हैं, ऐसे में इन देशों को अधिक बाहरी समर्थन की आवश्यकता हो सकती है। अर्थशास्त्रियों ने लिखा है कि युद्ध वैश्विक अर्थव्यवस्था को अलग-अलग तरीकों से प्रभावित कर सकता है, लेकिन सभी रास्ते उच्च कीमतों और धीमी वृद्धि की ओर ले जाते हैं।

    उन्होंने बताया कि एशिया और यूरोप के बड़े ऊर्जा आयातक देशों को ईंधन और अन्य आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों का सबसे अधिक खामियाजा भुगतना पड़ रहा है, जबकि अफ्रीका और एशिया के कई देश बढ़ी हुई कीमतों पर भी अपनी जरूरत की आपूर्ति प्राप्त करने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं। आईएमएफ के अनुसार, यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो इससे जुड़ी अनिश्चितता और भू-राजनीतिक जोखिम ऊर्जा को महंगा बनाए रखेंगे, आयात पर निर्भर देशों पर दबाव बढ़ाएंगे तथा मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाएगा।

    आईएमएफ ने कहा कि वह 14 अप्रैल को वाशिंगटन में अपनी वसंतकालीन बैठकों के दौरान जारी होने वाले विश्व आर्थिक आउटलुक (डब्ल्यूईओ) में इस युद्ध के प्रभाव का व्यापक मूल्यांकन पेश करेगा। लेखकों ने चेतावनी दी कि यदि ऊर्जा और खाद्य पदार्थों की ऊंची कीमतें बनी रहीं तो वे विश्व स्तर पर मुद्रास्फीति को बढ़ावा देंगी। ऐतिहासिक रूप से तेल की कीमतों में वृद्धि मुद्रास्फीति बढ़ने और विकास दर घटने से जुड़ी रही है। उन्होंने कहा कि युद्ध से यह आशंका भी बढ़ सकती है कि मुद्रास्फीति लंबे समय तक उच्च स्तर पर बनी रहेगी, जिससे मजदूरी-कीमतों का चक्र तेज हो सकता है और बिना तीव्र मंदी के इस झटके को नियंत्रित करना चुनौतीपूर्ण हो जाएगा। आईएमएफ ने सदस्य देशों से सतर्क रहने और समन्वित प्रयासों के साथ इस संकट का सामना करने की अपील की है।

  • ईरान के यूरेनियम भंडार को सुरक्षित करना मुख्य लक्ष्य…. आधे से आगे पहुंचा अभियान : नेतन्याहू

    ईरान के यूरेनियम भंडार को सुरक्षित करना मुख्य लक्ष्य…. आधे से आगे पहुंचा अभियान : नेतन्याहू


    तेल अवीव।
    इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Israeli Prime Minister Benjamin Netanyahu) ने ईरान (Iran) के खिलाफ चल रहे अमेरिका-इस्राइल संयुक्त सैन्य अभियान (US-Israel Joint Military Operation) को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन अब आधे से आगे पहुंच चुका है और इसका अगला मुख्य लक्ष्य ईरान के समृद्ध यूरेनियम भंडार को सुरक्षित करना या हटाना है।

    एक इंटरव्यू में नेतन्याहू ने दावा किया कि इस अभियान में अब तक अहम सफलताएं हासिल हुई हैं। उनके मुताबिक, ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमताओं को काफी हद तक कमजोर कर दिया गया है।


    ईरान की सैन्य ताकत को बड़ा नुकसान

    नेतन्याहू ने बताया कि अमेरिका और इस्राइल की सेनाओं ने मिलकर ईरान के मिसाइल सिस्टम, हथियार फैक्ट्रियों और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े कई प्रमुख वैज्ञानिकों को निशाना बनाया है। इससे ईरान की युद्ध क्षमता को गंभीर झटका लगा है। उन्होंने कहा हमने उनकी मिसाइल क्षमताओं को काफी हद तक कमजोर कर दिया है, फैक्ट्रियां तबाह कर दी हैं और उनके परमाणु कार्यक्रम से जुड़े अहम लोगों को खत्म किया है।


    अब यूरेनियम भंडार पर नजर

    इस्राइली प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि अब ऑपरेशन का फोकस ईरान के समृद्ध यूरेनियम भंडार पर है, जो परमाणु हथियार बनाने में सबसे अहम भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस सामग्री को ईरान से हटाने और अंतरराष्ट्रीय निगरानी में देने की मांग की है।

    नेतन्याहू ने इस सैन्य कार्रवाई को सिर्फ मौजूदा खतरे से निपटने का नहीं, बल्कि भविष्य में संभावित बड़े संकट को रोकने का प्रयास बताया। उनका कहना है ईरान परमाणु हथियार बनाने और उन्हें अमेरिकी शहरों तक पहुंचाने की क्षमता विकसित कर रहा है। इस युद्ध का मकसद इसी खतरे को रोकना है।


    ईरान कमजोर, गठबंधन मजबूत

    नेतन्याहू ने दावा किया कि इस ऑपरेशन के चलते ईरान की स्थिति कमजोर हो रही है, जबकि अमेरिका-इस्राइल गठबंधन और मजबूत होकर उभर रहा है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ईरान के अंदर अस्थिरता बढ़ रही है। हालांकि, उन्होंने ऑपरेशन के खत्म होने की कोई समयसीमा नहीं बताई, लेकिन भरोसा जताया कि मिशन अपने लक्ष्य तक पहुंचने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है।

  • बांग्लादेश में गहराया ऊर्जा संकट, भारत से भेजी मदद से मिली राहत, कर्ज की तलाश में पड़ोसी देश

    बांग्लादेश में गहराया ऊर्जा संकट, भारत से भेजी मदद से मिली राहत, कर्ज की तलाश में पड़ोसी देश

    ढाका । बांग्लादेश इस समय गंभीर ऊर्जा संकट का सामना कर रहा है। मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध के कारण देश में बिजली और ईंधन की कमी और गहरी हो गई है। स्थिति से निपटने के लिए बांग्लादेश भारत से पाइपलाइन के जरिए डीजल आयात कर रहा है और देश में बिजली व ईंधन बचाने के लिए कड़े सरकारी आदेश जारी किए गए हैं।

    भारत से डीजल की नई खेप

    भारत की असम स्थित नुमालीगढ़ रिफाइनरी से ‘भारत-बांग्लादेश मैत्री पाइपलाइन’ के माध्यम से बांग्लादेश को 7,000 टन डीजल की नई खेप प्राप्त हो रही है। इसकी सप्लाई शनिवार शाम से शुरू हो गई है और मंगलवार तक पूरी डिलीवरी की उम्मीद है। इससे पहले 25 मार्च को 5,000 टन की खेप और कुल मिलाकर 15,000 टन डीजल पाइपलाइन के जरिए पहले ही भेजा जा चुका है।

    जमाखोरी बनी बड़ी चिंता

    बांग्लादेश के ऊर्जा मंत्री इकबाल हसन महमूद टुकू ने सोमवार को संसद में स्पष्ट किया कि वर्तमान संकट में ईंधन की आपूर्ति की कमी से बड़ी समस्या ‘जमाखोरी’ है। बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन समुद्री मार्गों के साथ पाइपलाइन के जरिए होने वाले आयात को प्राथमिकता दे रहा है ताकि आपूर्ति स्थिर रहे।

    सरकारी कर्मचारियों के लिए कड़े आदेश

    17 करोड़ की आबादी वाला बांग्लादेश अपनी तेल और गैस की 95 प्रतिशत जरूरतें आयात पर निर्भर करता है। लोक प्रशासन मंत्रालय के अधिकारी सखावत हुसैन ने बताया कि रविवार देर रात कार्यालयों में बिजली और ईंधन बचाने के लिए कई सख्त निर्देश जारी किए गए हैं।

    बांग्लादेश सरकार के निर्देश
    – कार्यालयों में केवल आवश्यक संख्या में लाइट, पंखे, एयर कंडीशनर (AC) और अन्य उपकरण का इस्तेमाल।
    – कर्मचारी दफ्तर से निकलते समय लाइटें अनिवार्य रूप से बंद करें।
    – एयर कंडीशनर का तापमान 25 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक पर सेट करें।

    कर्ज की तलाश

    ऊर्जा संकट से निपटने के लिए बांग्लादेश सरकार बहुपक्षीय दाताओं से लगभग 2 अरब डॉलर का ऋण पाने की कोशिश कर रही है। ईंधन की खपत नियंत्रित करने के लिए पहले ही कई कदम उठाए गए हैं। जिनमें आम लोगों के लिए ईंधन खरीद पर सीमा तय की गई है। अधिकांश उर्वरक कारखानों में उत्पादन रोक दिया गया है। पेट्रोल पंपों पर पुलिस गश्त और नियमों का पालन सुनिश्चित किया गया है।

    भारत के सहयोग से बांग्लादेश को पाइपलाइन के जरिए 7,000 टन डीजल की खेप मिल रही है। ऊर्जा मंत्री के अनुसार पश्चिम एशिया संकट से आपूर्ति में कमी उतनी बड़ी समस्या नहीं है, जितनी बड़ी समस्या देश में ईंधन की जमाखोरी है। 17 करोड़ आबादी वाले बांग्लादेश में तेल और गैस की कुल खपत का 95 प्रतिशत हिस्सा खाड़ी देशों और अन्य देशों से आयात किया जाता है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा क्षेत्र पर दबाव बढ़ा है।

  • PM मोदी ने नीदरलैंड के प्रधानमंत्री से की बात… ग्रीन हाइड्रोजन और सेमीकंडक्टर पर जोर

    PM मोदी ने नीदरलैंड के प्रधानमंत्री से की बात… ग्रीन हाइड्रोजन और सेमीकंडक्टर पर जोर


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने सोमवार को नीदरलैंड (Netherlands) के अपने समकक्ष रॉब जेटेन (PM Rob Jetten) से फोन पर बात की, जिसमें सेमीकंडक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन, व्यापार और रक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया गया। इसके अलावा, दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया, जिसमें पीएम मोदी ने क्षेत्र में शांति और स्थिरता को शीघ्र बहाल किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

    सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में मोदी ने कहा कि उन्होंने और जेटेन ने भारत-नीदरलैंड संबंधों को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि हमने सेमीकंडक्टर, वृहद जल परियोजनाएं, ग्रीन हाइड्रोजन समेत विभिन्न क्षेत्रों में हमारी साझेदारी की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। मोदी ने कहा कि हमने पश्चिम एशिया के हालात पर भी विचार-विमर्श किया और क्षेत्र में शांति और स्थिरता शीघ्र बहाल किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

    वहीं, नीदरलैंड के प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर कहा कि भारत के साथ हमारे संबंध और भी मजबूत हो रहे हैं। इस साल की शुरुआत में यूरोपीय संघ और भारत ने एक महत्वपूर्ण व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए, तथा नीदरलैंड और भारत रक्षा, जल प्रबंधन, नवाचार और व्यापार सहित एक रणनीतिक साझेदारी विकसित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस समय दुनिया में जो कुछ भी हो रहा है, उसे देखते हुए, अब हमारे सहयोग को मजबूत करने का समय है।

    जेटेन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मैंने आज फोन पर बातचीत में इस विषय पर चर्चा की। मैं जल्द ही नीदरलैंड में उनका स्वागत करने के लिए उत्सुक हूं, ताकि हम इन मुद्दों पर आगे और चर्चा कर सकें। जनवरी में प्रधानमंत्री मोदी और यूरोपीय संघ के नेतृत्व के बीच हुई शिखर वार्ता के बाद भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) ने एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को अंतिम रूप दिया।

  • फारस की खड़ी में फंसे हैं भारत के लिए ईंधन ला रहे कुल 28 जहाज… इनमें 18 भारतीय और 10 विदेशी

    फारस की खड़ी में फंसे हैं भारत के लिए ईंधन ला रहे कुल 28 जहाज… इनमें 18 भारतीय और 10 विदेशी


    नई दिल्ली।
    सरकार (Government) ने सोमवार को एक अहम जानकारी देते हुए बताया कि ऊर्जा उत्पादों से लदे और भारत (India) आ रहे 10 विदेशी झंडे वाले जहाज (10 Foreign-Flagged Ships) इस समय फारस की खाड़ी (Persian Gulf ) में फंसे हुए हैं। इसके अलावा, 18 भारतीय जहाज भी वर्तमान में इसी क्षेत्र में मौजूद हैं। कुल मिलाकर 28 जहाजों पर संकट अभी भी मंडरा रहा है। जहाजरानी मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश सिन्हा ने मौजूदा हालात पर सवालों के जवाब देते हुए स्थिति को स्पष्ट किया।


    फंसे हुए विदेशी जहाजों की डिटेल

    विशेष सचिव ने बताया कि भारत आ रहे इन 10 विदेशी जहाजों में महत्वपूर्ण ऊर्जा उत्पाद मौजूद हैं।
    3 जहाज: एलपीजी (LPG) से लदे हैं।
    4 जहाज: कच्चा तेल (Crude Oil) लेकर आ रहे हैं।
    3 जहाज: एलएनजी (LNG) से भरे हुए हैं।

    इनके अलावा, भारतीय ध्वज वाले जहाज भी हैं। इनमें एलपीजी के तीन टैंकर, एक एलएनजी वाहक और कच्चे तेल के चार टैंकर शामिल हैं। एक खाली टैंकर में एलपीजी भरी जा रही है। पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के बीच संकरे जलडमरूमध्य में फंसे लगभग 500 जहाजों में ये जहाज भी शामिल हैं। अब तक, भारतीय ध्वज वाले आठ जहाज सुरक्षित रूप से निकल चुके हैं।


    भारतीय ध्वज वाले 18 जहाज फंसे

    सिन्हा ने बताया कि जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में भारतीय ध्वज वाले 18 जहाज हैं, जिनमें 485 नाविक सवार हैं। दो अन्य जहाज पूर्वी हिस्से में फंसे हुए हैं। पश्चिमी हिस्से में मौजूद जहाजों में एलपीजी जहाज जग विक्रम, ग्रीन आशा और ग्रीन सानवी शामिल हैं। एक खाली जहाज में एलपीजी भरी जा रही है। इस क्षेत्र में मौजूद अन्य भारतीय ध्वज वाले जहाजों में एक तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) टैंकर, चार कच्चे तेल के टैंकर, एक रासायनिक उत्पाद परिवहन करने वाला जहाज, तीन कंटेनर जहाज और दो ‘बल्क’ कैरियर शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, एक जहाज ड्रेजर है और तीन जहाज नियमित रखरखाव के लिए बंदरगाह पर हैं। जब पश्चिम एशिया में युद्ध छिड़ा था, तब होर्मुज जलडमरूमध्य में मूल रूप से 28 भारतीय ध्वज वाले जहाज थे। इनमें से 24 जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में और चार पूर्वी हिस्से में थे। पिछले कुछ दिनों में, पश्चिमी हिस्से से छह और पूर्वी हिस्से से दो जहाज सुरक्षित स्थान पर पहुंचने में सफल रहे हैं।


    सरकार की प्राथमिकता

    राजेश सिन्हा ने जोर देकर कहा कि इस तनावपूर्ण स्थिति के बीच सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि भारतीय झंडे वाले जहाज जो भारत के लिए माल ला रहे हैं, उन्हें होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित और बिना किसी बाधा के गुजरने दिया जाए। अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमले और ईरान की व्यापक जवाबी कार्रवाई ने जलडमरूमध्य से जहाजों के आवागमन को लगभग ठप कर दिया है। यह संकरा समुद्री मार्ग खाड़ी देशों से दुनिया भर में तेल और गैस के निर्यात का प्रमुख मार्ग है। हालांकि, ईरान ने पिछले सप्ताह कहा था कि ईरानी अधिकारियों के साथ समन्वय के बाद ‘गैर-शत्रु’ देशों के पोत जलमार्ग से गुजर सकते हैं।


    राहत की खबर: दो जहाज सुरक्षित निकले

    एक सकारात्मक अपडेट शेयर करते हुए बताया गया कि लगभग 94,000 टन रसोई गैस ले जाने वाले दो एलपीजी जहाजों ने शनिवार को सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर लिया है। उम्मीद है कि ये दोनों जहाज अगले दो दिनों के भीतर मुंबई पोर्ट और न्यू मैंगलोर पोर्ट पर लंगर डालेंगे। इनमें दो एलपीजी वाहक पोत, बीडब्ल्यू टीवाईआर और बीडब्ल्यू ईएलएम शामिल हैं, जिनमें लगभग 94,000 टन एलपीजी का संयुक्त कार्गो है। ये पोत पिछले कुछ दिनों में युद्धग्रस्त क्षेत्र से सुरक्षित रूप से निकल चुके हैं।


    खाली जहाजों की वापसी पर स्थिति

    जब यह सवाल पूछा गया कि नए सिरे से माल लादने के लिए कितने खाली जहाजों को वापस फारस की खाड़ी भेजा जाएगा, तो सिन्हा ने स्पष्ट किया कि वर्तमान हालात को देखते हुए खाली जहाजों को वापस भेजने का समय अभी नहीं आया है। उन्होंने कहा- हम अभी उस चरण तक नहीं पहुंचे हैं जहां हम उन्हें (भारतीय झंडे वाले जहाजों को) वापस भेजना शुरू करें।


    बीमा प्रीमियम में भारी बढ़ोतरी

    जहाजों के फंसे होने के अलावा, इस तनाव का सीधा असर व्यापारिक लागत पर भी पड़ रहा है। सिन्हा ने बताया कि खतरा केवल होर्मुज जलडमरूमध्य तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके आस-पास के बाहरी इलाके भी अब ‘हाई-रिस्क एरिया’ (HRA) की श्रेणी में आ गए हैं। युद्ध और तनाव से पहले कमर्शियल बीमा प्रीमियम बीमित राशि (Insured Value) का मात्र 0.04% हुआ करता था। लेकिन अब इसमें भारी वृद्धि हुई है। सिन्हा ने एक विशिष्ट मामले का उदाहरण देते हुए बताया कि अब यह प्रीमियम बढ़कर बीमित राशि का 0.7% हो गया है, और आने वाले समय में इसके और भी अधिक बढ़ने की आशंका है।

  • 11 अप्रैल से बनेगा नीचभंग राजयोग, बुध के राशि परिवर्तन से इन 3 राशियों के खुलेंगे तरक्की के रास्ते

    11 अप्रैल से बनेगा नीचभंग राजयोग, बुध के राशि परिवर्तन से इन 3 राशियों के खुलेंगे तरक्की के रास्ते

    नई दिल्ली । ज्योतिष शास्त्र में नीचभंग राजयोग को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। जब भी यह योग बनता है, तो इसका प्रभाव सभी 12 राशियों पर देखने को मिलता है। द्रिक पंचांग के अनुसार, वर्तमान में बुध कुंभ राशि में स्थित हैं, लेकिन 11 अप्रैल 2026 को रात 1 बजकर 20 मिनट पर वे मीन राशि में प्रवेश करेंगे। वैदिक ज्योतिष के अनुसार मीन राशि बुध की नीच राशि मानी जाती है, इसलिए सामान्य परिस्थितियों में इसे कमजोर स्थिति कहा जाता है।

    इस बार क्यों खास है बुध का गोचर

    हालांकि इस बार स्थिति सामान्य से अलग है। मीन राशि के स्वामी गुरु (बृहस्पति) कुंडली के केंद्र भाव में विराजमान हैं, जिसके कारण नीचभंग राजयोग का निर्माण हो रहा है। यही वजह है कि जहां कुछ लोगों को चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, वहीं कुछ राशियों के लिए यह समय बेहद लाभकारी साबित होगा। बुध 30 अप्रैल 2026 तक मीन राशि में रहेंगे और इस दौरान सूर्य और शनि के साथ मिलकर अन्य महत्वपूर्ण योग भी बनाएंगे।

    कैसे बनता है नीचभंग राजयोग

    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब कोई ग्रह अपनी नीच राशि में स्थित हो, लेकिन उस राशि का स्वामी केंद्र (1, 4, 7, 10) या त्रिकोण (1, 5, 9) भाव में मजबूत स्थिति में हो, तब नीचभंग राजयोग बनता है। इस स्थिति में ग्रह की कमजोरी कम हो जाती है और वह सकारात्मक परिणाम देने लगता है।

    वृषभ राशि: आर्थिक स्थिति होगी मजबूत

    वृषभ राशि के जातकों के लिए यह योग लाभकारी साबित हो सकता है। इस दौरान आमदनी में वृद्धि के संकेत हैं और आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है। लंबे समय से रुके हुए कार्य पूरे होने के योग बन रहे हैं। व्यापारियों को अच्छा मुनाफा मिल सकता है और नई योजनाएं सफल हो सकती हैं। नौकरीपेशा लोगों के लिए भी नए अवसर सामने आ सकते हैं। निवेश से लाभ मिलने की संभावना है और लव लाइफ में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

    मिथुन राशि: करियर में मिलेगी सराहना

    मिथुन राशि के लोगों के लिए यह समय करियर और व्यक्तिगत जीवन दोनों के लिए अनुकूल रहेगा। सोचने और निर्णय लेने की क्षमता में सुधार होगा, जिससे आप सही फैसले ले पाएंगे। कार्यस्थल पर आपकी मेहनत की सराहना होगी और वरिष्ठ अधिकारी आपसे संतुष्ट रहेंगे। परिवार में खुशियों का माहौल रहेगा और पुराने विवाद समाप्त हो सकते हैं। प्रॉपर्टी या वाहन से जुड़े कार्य भी पूरे होने के योग बन रहे हैं।

    मीन राशि: सोच और फैसलों में आएगा सुधार

    मीन राशि के लिए यह योग विशेष प्रभाव डाल सकता है, क्योंकि बुध इसी राशि में प्रवेश कर रहे हैं। इससे आपकी सोचने और समझने की क्षमता बेहतर हो सकती है। यदि आप धैर्य और समझदारी से काम करेंगे, तो सफलता मिलने के प्रबल योग हैं। व्यापार में नए लोगों से जुड़ने के अवसर मिलेंगे, जो भविष्य में लाभकारी साबित हो सकते हैं। परिवार, विशेषकर माता का सहयोग मिलेगा, जिससे आपके निर्णय और मजबूत होंगे।