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  • अटारी-वाघा बॉर्डर पर मिठास पर ब्रेक, भारत-पाक जवानों के बीच नहीं होगा मिठाई का आदान-प्रदान

    अटारी-वाघा बॉर्डर पर मिठास पर ब्रेक, भारत-पाक जवानों के बीच नहीं होगा मिठाई का आदान-प्रदान

    नई दिल्ली।  अटारी-वाघा बॉर्डर पर नहीं मिलेगी मिठास! भारत-पाक जवानों के बीच नहीं होगा मिठाई का आदान-प्रदान2019 में जम्मू और कश्मीर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर युद्धविराम उल्लंघन की बढ़ती घटनाओं के कारण भारत ने बीटिंग रिट्रीट परंपरा को छोड़ने का फैसला किया था. सितंबर 2016 में भारतीय सेना द्वारा सीमा पार सर्जिकल स्ट्राइक के बाद बीएसएफ ने पाकिस्तान रेंजर्स को मिठाइयां नहीं दी थीं.
    इस बार गणतंत्र दिवस के मौके पर वाघा बॉर्डर पर भारत और पाकिस्तान के बीच मिठाई एक्सचेंज करने की परंपरा नहीं निभाई जाएगी. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद से बने नियमों के तहत बीएसएफ (BSF) और पाक रेंजर्स के जवान न तो हाथ मिलाएंगे और न ही सरहद का गेट खोला जाएगा. बॉर्डर पर दोपहर 2.50 बजे से सांस्कृतिक कार्यक्रम शुरू होंगे और शाम 4.30 बजे दोनों देशों के जवान अपने-अपने क्षेत्र में परेड करेंगे.

    कई बार तोड़ी गई मिठाई आदान-प्रदान की परंपरा
    जनवरी 2025 (गणतंत्र दिवस) यानी पिछले साल भी सीमा पर जारी घुसपैठ की कोशिशों और सुरक्षा कारणों से बीएसएफ (BSF) ने पाकिस्तान को मिठाई देने से मना कर दिया था. भारत द्वारा अनुच्छेद 370 (Article 370) को निष्प्रभावी किए जाने के बाद पाकिस्तान ने कड़ा विरोध जताया था. तनाव इतना अधिक था कि दोनों ओर से कोई मिठाई नहीं बांटी गई थी.

    जनवरी 2017 और 2018 में नियंत्रण रेखा (LoC) पर पाकिस्तान द्वारा लगातार किए जा रहे संघर्ष विराम उल्लंघन (Ceasefire Violations) और भारतीय सैनिकों की शहादत के विरोध में बीएसएफ ने परंपरा को तोड़ा था. वहीं अक्टूबर 2016 में उरी हमले के बाद भारत द्वारा की गई सर्जिकल स्ट्राइक (Surgical Strike) के कारण दिवाली के मौके पर मिठाई का आदान-प्रदान नहीं हुआ था. इसके अलावा अक्टूबर 2014 में दिवाली के दौरान सीमा पर भारी गोलाबारी के चलते बीएसएफ ने पाकिस्तान को मिठाई देने से इनकार कर दिया था.

    कहां है वाघा बॉर्डर
    बता दें कि अटारी-वाघा जॉइंट चेक पोस्ट अमृतसर से लगभग 30 किमी और पाकिस्तान के लाहौर से 22 किमी दूर है, जहां करीब 25,000 दर्शक बीटिंग रिट्रीट समारोह को देखने आते हैं.

  • छत्तीसगढ़ के जांबाजों का सम्मान: 77वें गणतंत्र दिवस पर 10 पुलिसकर्मियों को मिलेगा 'सराहनीय सेवा पदक'

    छत्तीसगढ़ के जांबाजों का सम्मान: 77वें गणतंत्र दिवस पर 10 पुलिसकर्मियों को मिलेगा 'सराहनीय सेवा पदक'


    रायपुर । 77वें गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 2026 के गौरवशाली अवसर पर छत्तीसगढ़ पुलिस के खाते में एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ी है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य के 10 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए प्रतिष्ठित मेडल फॉर मेरिटोरियस सर्विस यानी सराहनीय सेवा पदक के लिए चुना है। यह सम्मान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के हाथों प्रदान किया जाएगा। यह पदक उन जांबाजों को दिया जा रहा है जिन्होंने अपनी कर्तव्यनिष्ठा, साहस और कार्यकुशलता से राज्य की कानून-व्यवस्था और आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने में मिसाल पेश की है।

    इन 10 जांबाजों के नाम सराहनीय सेवा पदक

    सराहनीय सेवाओं के लिए चयनित अधिकारियों की सूची में वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर जमीनी स्तर पर तैनात जांबाज शामिल हैं ध्रुव गुप्ता: आईजी पुलिस मुख्यालय रायपुर। प्रशांत ठाकुर: डीआईजी एवं एसएसपी, सूरजपुर। श्वेता राजमणी: कमांडेंट, 19वीं वाहिनी छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल जगदलपुर। रवि कुमार कुर्रे पुलिस अधीक्षक जिला कोरिया। कौशिल्या भट्ट: निरीक्षक पुलिस मुख्यालय, रायपुर। रोहित कुमार झा: सहायक महानिरीक्षक पुलिस मुख्यालय, रायपुर। कमलेश कुमार मिश्रा: निरीक्षक विशेष शाखा, पुलिस मुख्यालय। दल सिंह नामदेव: प्लाटून कमांडर। महेन्द्र कुमार पाठक: उप निरीक्षक जिला नारायणपुर।मनोज कुमार साहू: सहायक उप निरीक्षक जिला बस्तर। क्यों दिया जा रहा है यह सम्मान

    चयनित पुलिसकर्मियों ने अपने करियर के दौरान कई चुनौतीपूर्ण मोर्चों पर खुद को साबित किया है नक्सल मोर्चे पर सफलता: कई अधिकारियों ने बस्तर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में नक्सल विरोधी अभियानों और शांति बहाली में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रशासनिक सुधार पुलिस मुख्यालय में तैनात अधिकारियों को उनकी अनुकरणीय कार्यशैली और संगठनात्मक सुधारों के लिए सम्मानित किया जा रहा है। अनुशासन और समर्पण: यह पदक उन कर्मियों को मिलता है जिनकी सेवा का रिकॉर्ड दागमुक्त और संसाधनपूर्ण रहा हो।

    राष्ट्रपति विशिष्ट सेवा पदक

    सराहनीय सेवा पदकों के अलावा, छत्तीसगढ़ के डीजी जेल हिमांशु गुप्ता को ‘विशिष्ट सेवाओं’ के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया जाएगा, जो पुलिस सेवा का सर्वोच्च सम्मान है।

  • गणतंत्र दिवस 2026: छत्तीसगढ़ के खाकी वीरों का सम्मान, डीजी हिमांशु गुप्ता समेत 25 अधिकारियों को राष्ट्रपति पदक

    गणतंत्र दिवस 2026: छत्तीसगढ़ के खाकी वीरों का सम्मान, डीजी हिमांशु गुप्ता समेत 25 अधिकारियों को राष्ट्रपति पदक


    रायपुर। गणतंत्र दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर छत्तीसगढ़ पुलिस और जेल विभाग के लिए दोहरी खुशी की खबर सामने आई है। राज्य के 25 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए राष्ट्रपति पदक से नवाजा जाएगा। इनमें जेल महानिदेशक हिमांशु गुप्ता का नाम प्रमुखता से शामिल है, जिन्हें ‘विशिष्ट सेवाओं’ के लिए सम्मानित किया जाएगा। इसके साथ ही, राज्य के 14 जांबाज पुलिसकर्मियों को वीरता पुरस्कार देने की भी घोषणा की गई है, जो नक्सल प्रभावित क्षेत्रों और चुनौतीपूर्ण अभियानों में उनके अदम्य साहस का प्रमाण है।

    राज्यपाल प्रदान करेंगे सम्मान

    इन सभी सम्मानित अधिकारियों और कर्मियों को सोमवार, 26 जनवरी 2026 को रायपुर के पुलिस परेड मैदान में आयोजित मुख्य समारोह में छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका द्वारा राष्ट्रपति पदक प्रदान किए जाएंगे।

    प्रमुख सम्मान और नामचीन चेहरे

    केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी सूची के अनुसार, छत्तीसगढ़ के पुलिस बेड़े में इन नामों की धूम है विशिष्ट सेवाओं के लिए राष्ट्रपति पदक: * हिमांशु गुप्ता जेल सुधारों और लंबी विशिष्ट सेवा के लिए।सराहनीय सेवाओं के लिए पदक प्रमुख नाम ध्रुव गुप्ता आईजी अअवि पुलिस मुख्यालय। प्रशांत ठाकुर डीआईजी एवं एसएसपी सूरजपुर।श्वेता राजमणी सेनानी, 19वीं वाहिनी छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल छसबल जगदलपुर। रवि कुमार कुर्रे: एसपी कोरिया। कौशिल्या भट्ट निरीक्षक पुलिस मुख्यालय। रोहित कुमार झा: सहायक उपनिरीक्षक पुलिस मुख्यालय। कमलेश कुमार मिश्रा: निरीक्षक, विशेष शाखा पुलिस मुख्यालय।

    14 जांबाजों को वीरता पुरस्कार

    इस वर्ष छत्तीसगढ़ के 14 पुलिसकर्मियों को वीरता पदक से सम्मानित किया जाना राज्य की सुरक्षा रणनीति के लिए बड़ी उपलब्धि है। ये पुरस्कार विशेष रूप से उन जवानों को दिए जा रहे हैं जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना आंतरिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में अद्वितीय शौर्य का प्रदर्शन किया है।

    गौरवशाली क्षण

    गणतंत्र दिवस पर मिलने वाले ये पदक न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि हैं, बल्कि छत्तीसगढ़ पुलिस की कर्तव्यनिष्ठा और समर्पण पर राष्ट्रीय मुहर हैं। विभाग में इस घोषणा के बाद उत्साह का माहौल है और इसे युवा पुलिसकर्मियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा के रूप में देखा जा रहा है।

  • पन्ना के 'जंगल रत्न' बने नेशनल हीरो: पीएम मोदी ने 'मन की बात' में की बीट गार्ड जगदीश अहिरवार की सराहना

    पन्ना के 'जंगल रत्न' बने नेशनल हीरो: पीएम मोदी ने 'मन की बात' में की बीट गार्ड जगदीश अहिरवार की सराहना


    पन्ना/नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व के एक साधारण से बीट गार्ड ने अपनी असाधारण लगन से पूरे देश का ध्यान खींचा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम मन की बात में पन्ना के वनकर्मी जगदीश प्रसाद अहिरवार के कार्यों की विशेष रूप से चर्चा की। पीएम ने जगदीश के ‘औषधीय ज्ञान’ और प्रकृति के प्रति उनके समर्पण को देश के लिए एक बड़ी प्रेरणा बताया है।जमीनी स्तर पर काम करने वाले एक वनकर्मी को राष्ट्रीय स्तर पर मिली यह पहचान न केवल पन्ना जिले, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश के वन विभाग के लिए गौरव का विषय है।

    जगदीश का औषधीय खजाना सवा सौ पौधों की पहचान

    प्रधानमंत्री ने देश को बताया कि जगदीश प्रसाद अहिरवार ने अपने वन सेवा कार्यकाल के दौरान केवल ड्यूटी ही नहीं की बल्कि जंगलों को एक चलती-फिरती ‘किताब’ की तरह पढ़ा। अद्भुत संकलन जगदीश ने पन्ना के जंगलों में पाए जाने वाले 125 सवा सौ से अधिक औषधीय पौधों की पहचान की। विस्तृत शोध उन्होंने इन पौधों के केवल नाम ही नहीं जुटाए, बल्कि उनके वैज्ञानिक नाम, स्थानीय उपयोग, औषधीय गुण और पारंपरिक उपचार पद्धतियों को व्यवस्थित रूप से दर्ज किया। जमीनी मेहनत: यह कार्य किसी लैब में नहीं, बल्कि वर्षों तक जंगल की पगडंडियों पर चलने, स्थानीय जानकारों से संवाद करने और निरंतर अवलोकन करने का परिणाम है।

    पीएम मोदी ने क्यों की तारीफ

    प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि जगदीश जैसे कर्मठ लोग हमारी पारंपरिक चिकित्सा पद्धति और जैव-विविधता के संरक्षण के असली प्रहरी हैं। प्रधानमंत्री ने कहा जगदीश प्रसाद जी ने जंगलों की जिस संपदा को दस्तावेजों में सहेजा है, वह हमारी आने वाली पीढ़ियों और आयुर्वेद के क्षेत्र में काम करने वाले शोधकर्ताओं के लिए बहुत कीमती है।

    वनकर्मियों के योगदान को मिली नई पहचान

    अक्सर बीट गार्ड जैसे निचले स्तर के कर्मचारी गुमनामी में रहकर जंगलों और वन्यजीवों की रक्षा करते हैं। जगदीश अहिरवार का उल्लेख होने से पूरे देश के वनकर्मियों का मनोबल बढ़ा है। पन्ना के अधिकारियों के अनुसार, जगदीश का यह ज्ञान अब स्थानीय स्तर पर लोगों को जड़ी-बूटियों के प्रति जागरूक करने में काम आ रहा है।

  • भोजशाला में 'मिशन शांति' सफल: 8 हजार जवानों की मुस्तैदी के बाद थिरके खाकी के कदम, वायरल हुआ जश्न का वीडियो

    भोजशाला में 'मिशन शांति' सफल: 8 हजार जवानों की मुस्तैदी के बाद थिरके खाकी के कदम, वायरल हुआ जश्न का वीडियो


    धार । मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक और संवेदनशील भोजशाला परिसर में ‘वसंत पंचमी’ का महापर्व इस बार आपसी सौहार्द और कड़े सुरक्षा घेरे के बीच सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। पिछले कई दिनों से बिना सोए दिन-रात तनावपूर्ण ड्यूटी कर रहे करीब 8 हजार पुलिसकर्मियों ने जब शनिवार को राहत की सांस ली, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। अपनी कर्तव्यनिष्ठा की अग्निपरीक्षा में पास होने के बाद पुलिस लाइन में आयोजित एक भोज के दौरान जवानों का मानवीय और खुशनुमा चेहरा सामने आया, जहां वे फिल्मी गानों पर जमकर थिरकते नजर आए।

    खाकी का तनावमुक्त अवतार: ड्यूटी के बाद ‘डांस’ का तड़का

    शुक्रवार को भोजशाला में पूजा और नमाज का संयोग एक ही दिन था, जिसे लेकर प्रशासन और पुलिस पर भारी दबाव था। स्थानीय पुलिस से लेकर केंद्रीय सुरक्षा बलों के करीब 7,000 से 8,000 जवानों ने शहर के चप्पे-चप्पे पर पहरा दिया। लगातार फ्लैग मार्च और बिना ब्रेक के की गई ड्यूटी के बाद शनिवार को धार पुलिस लाइन में इन जवानों के लिए ‘विशेष भोज’ का आयोजन किया गया था।अनायास बना जश्न का माहौल: रक्षित निरीक्षक पुरुषोत्तम विश्नोई के अनुसार, विभाग की ओर से केवल भोजन की व्यवस्था थी, लेकिन ड्यूटी आवंटन के लिए लगे स्पीकर्स पर जैसे ही संगीत बजा, जवानों ने अपनी थकान मिटाने के लिए डांस करना शुरू कर दिया।सोशल मीडिया पर वायरल: वर्दी में जवानों के इस डांस का वीडियो अब इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है। लोग पुलिसकर्मियों के इस तनावमुक्ति के तरीके और उनकी कड़ी मेहनत की जमकर सराहना कर रहे हैं।

    शांतिपूर्ण आयोजन: एक बड़ी उपलब्धि

    भोजशाला विवाद की संवेदनशीलता को देखते हुए इस बार की चुनौती बड़ी थी। पुलिस बल ने जिस धैर्य और अनुशासन के साथ हजारों की भीड़ को नियंत्रित किया, उसने प्रदेश में कानून-व्यवस्था की एक मिसाल पेश की है। दिन-रात की कठिन ड्यूटी और फ्लैग मार्च के बाद जब जिम्मेदारी सफलतापूर्वक पूरी हुई, तो जवानों का यह उत्साह स्वाभाविक था। यह उनके मानसिक तनाव को कम करने की एक सकारात्मक पहल है। स्थानीय अधिकारी

    मानवीय पक्ष की प्रशंसा

    अक्सर पुलिस का सख्त चेहरा ही सामने आता है, लेकिन धार का यह वीडियो दिखाता है कि वर्दी के पीछे भी एक इंसान है, जिसे लंबी थकान के बाद मुस्कुराने और थिरकने का पूरा हक है। शहरवासियों ने भी पुलिस की इस भूमिका की प्रशंसा की है, क्योंकि उनकी सजगता के कारण ही शहर में शांति और भाईचारा बना रहा।

  • बर्फीली हवाओं के घेरे में उत्तर भारत: पहाड़ों पर भारी हिमपात और मैदानों में शीतलहर का 'डबल अटैक', अलर्ट जारी

    बर्फीली हवाओं के घेरे में उत्तर भारत: पहाड़ों पर भारी हिमपात और मैदानों में शीतलहर का 'डबल अटैक', अलर्ट जारी


    नई दिल्ली/शिमला। उत्तर भारत में कुदरत के दो अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे हैं। एक तरफ जहां ऊंचे हिमालयी क्षेत्र भारी बर्फबारी के बाद सफेद चादर में लिपटे हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ पहाड़ों से आ रही बर्फीली हवाओं ने दिल्ली NCR सहित पूरे मैदानी बेल्ट को डीप फ्रीजर बना दिया है। मकर संक्रांति के 10 दिन बीत जाने के बाद भी सर्दी का सितम कम होने के बजाय और गहरा गया है। मौसम विभाग ने अगले 72 घंटों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए चेतावनी दी है कि फिलहाल राहत के आसार नहीं हैं।

    पहाड़ों पर बर्फ का प्रहार जनजीवन अस्त-व्यस्त
    हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के ऊंचाई वाले इलाकों में पिछले 48 घंटों से रुक-रुक कर हो रही बर्फबारी ने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। हिमाचल शिमला और मनाली जैसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों पर भारी हिमपात के कारण कई सड़कें बंद हो गई हैं। बिजली और पानी की आपूर्ति पर भी बुरा असर पड़ा है। उत्तराखंड और जम्मू उत्तरकाशी, चमोली और डोडा में बर्फ की मोटी परत जमने से यातायात पूरी तरह ठप है। कई गांवों का संपर्क जिला मुख्यालयों से टूट गया है।

    दिल्ली-NCR बारिश के बाद कोहरे का पहरा

    राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों में शुक्रवार को हुई बारिश ने फिजा में नमी भर दी है, जिसके कारण शनिवार को विजिबिलिटी दृश्यता काफी कम रही। तापमान: दिल्ली में न्यूनतम तापमान 8-9 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है, लेकिन 15-20 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही ठंडी हवाओं ने कनकनी बढ़ा दी है। यातायात: घने कोहरे के कारण दिल्ली आने वाली कई ट्रेनें और उड़ानें देरी से चल रही हैं।

    पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में ‘रेड अलर्ट’ जैसी स्थिति

    मैदानी राज्यों में ठंड का सबसे ज्यादा असर पंजाब और हरियाणा में देखा जा रहा है।पंजाब-हरियाणा: यहां कई शहरों में पारा 4 डिग्री से नीचे चला गया है। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों में ‘घना से बहुत घना’ कोहरा छाए रहने की संभावना जताई है, जिससे विजिबिलिटी शून्य रह सकती है।राजस्थान: मरुधरा में मौसम का मिजाज सबसे ज्यादा बिगड़ा हुआ है। ने कई जिलों में ओलावृष्टि और गरज-चमक के साथ बारिश का अलर्ट जारी किया है। फतेहपुर और चूरू जैसे इलाकों में तापमान 0 से 5 डिग्री के बीच रहने की संभावना है।

    विशेषज्ञों की राय: कब मिलेगी राहत

    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, वर्तमान में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण यह स्थिति बनी है।अगले 2 से 3 दिनों तक मौसम का यही कड़ा रुख बना रहेगा। 27-28 जनवरी के बाद ही तापमान में मामूली बढ़ोतरी की उम्मीद की जा सकती है। तब तक शीतलहर और पाला पड़ने की संभावना बनी रहेगी।प्रवक्ता सावधानी की अपील: प्रशासन ने लोगों को सलाह दी है कि वे लंबी दूरी की यात्रा से बचें और विशेषकर रात व सुबह के समय वाहन चलाते समय फॉग लाइट का प्रयोग करें।
  • निमोनिया का खतरा बढ़ा, खासकर बच्चों और बुजुर्गों में जानिए बचाव के उपाय

    निमोनिया का खतरा बढ़ा, खासकर बच्चों और बुजुर्गों में जानिए बचाव के उपाय



    नई दिल्ली। सर्दियों के शुरू होते ही निमोनिया का खतरा बढ़ जाता है, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में। हर साल लाखों लोग निमोनिया से प्रभावित होते हैं और समय पर इलाज न मिलने पर यह जानलेवा भी साबित हो सकता है। इसी गंभीर बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल 12 नवंबर को विश्व निमोनिया दिवस मनाया जाता है। डॉ. सूर्यकान्त (विभागाध्यक्ष, रेस्पिरेटरी मेडिसिन, केजीएमयू, लखनऊ) के अनुसार, निमोनिया की पहचान, बचाव और समय पर उपचार बहुत जरूरी है क्योंकि पांच साल से कम उम्र के बच्चों में यह मृत्यु का प्रमुख कारण बन सकता है 
    निमोनिया में एक या दोनों फेफड़ों के हिस्सों में सूजन आ जाती है और उनमें पानी भरने लगता है। यह अधिकतर संक्रमण के कारण होता है, लेकिन केमिकल, एस्पिरेशन (गले/खाने की नली से फेफड़ों में सामग्री चला जाना) और अन्य कारणों से भी हो सकता है। इसके मुख्य कारण बैक्टीरिया, वायरस, फंगस और परजीवी रोगाणु हैं, जबकि टीबी भी निमोनिया का एक बड़ा कारण बन सकता है। समय पर सही इलाज न मिलने पर निमोनिया जानलेवा साबित हो सकता है और भारत में संक्रामक रोगों से होने वाली मौतों में लगभग 20% मौतें निमोनिया की वजह से होती हैं।

    निमोनिया किसी को भी हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों में जोखिम अधिक रहता है, जैसे धूम्रपान, शराब, नशे की आदत वाले, डायलिसिस कराने वाले मरीज, हृदय/फेफड़े/लिवर की बीमारी वाले, मधुमेह, गंभीर गुर्दा रोग, बुजुर्ग, नवजात, कैंसर या एड्स के मरीज। इसके प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, खांसी, बलगम, सीने में दर्द, सांस फूलना और कुछ मरीजों में दस्त, उल्टी, चक्कर, मतिभ्रम, भूख न लगना और जोड़ों व मांसपेशियों में दर्द शामिल हैं।

    डॉक्टर अक्सर खून की जांच, बलगम की जांच और छाती का एक्स-रे कराकर निमोनिया की पुष्टि करते हैं।

    निमोनिया तीन मुख्य रास्तों से फैलता है: खांसने या छींकने से श्वास मार्ग, अस्पताल में लंबे समय तक भर्ती मरीजों में IV लाइन या पेसमेकर के माध्यम से खून के रास्ते, और एस्पिरेशन के जरिए जब मुंह या गले की सामग्री फेफड़ों में चली जाती है। इसलिए संक्रमण से बचाव के लिए स्वच्छता, मास्क, और सही उपचार जरूरी है।

    निमोनिया से बचाव संभव है।

    ठंड से बचें, खासकर बच्चों और बुजुर्गों को गर्म कपड़े पहनाएं और बाहर कम समय बिताएं। शुगर और अन्य बीमारियों का नियंत्रण रखें और नियमित जांच करवाते रहें। 65 वर्ष से ऊपर या बीमार लोगों को न्यूमोकोकल और फ्लू वैक्सीन जरूर लगवानी चाहिए, क्योंकि ये टीके फेफड़ों के संक्रमण से बचाने में मदद करते हैं। अस्पताल में संक्रमण से बचने के लिए हाथों को सही तरीके से धोना, नेबुलाइजर और ऑक्सीजन उपकरणों का उचित स्टरलाइजेशन, एंडोट्रैकेल ट्यूब की सफाई और IV लाइन को नियमित बदलवाना आवश्यक है।
    नवजात और छोटे बच्चों को सर्दियों में नहलाने से बचाएं, बिना कपड़ों के खुले में न जाने दें, टीकाकरण और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें और उन्हें ठंड, धूल-धुएं और खांसी-जुकाम से दूर रखें। इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए स्वस्थ जीवन शैली अपनाएं, हरी सब्जियां और फल खाएं, फास्ट फूड से बचें और योग व प्राणायाम करें। इन सावधानियों से आप निमोनिया के खतरे को काफी हद तक कम कर सकते हैं और अपने परिवार को सुरक्षित रख सकते हैं।
  • बीना रेलवे फाटक ओवरब्रिज पर गड्ढों से खतरा, विधायक निर्मला सप्रे ने दी आंदोलन की चेतावनी

    बीना रेलवे फाटक ओवरब्रिज पर गड्ढों से खतरा, विधायक निर्मला सप्रे ने दी आंदोलन की चेतावनी


    बीना /सागर। मध्यप्रदेश के सागर जिले में बीना शहर के झांसी फाटक ओवरब्रिज पर सड़क की बिगड़ती हालत ने स्थानीय लोगों और अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है। ओवरब्रिज के निर्माण के कुछ महीनों बाद ही सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे पड़ गए हैं, जिससे वाहनों की आवाजाही खतरे में है और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। इस मामले में विधायक निर्मला सप्रे ने रेलवे और सेतु विभाग के अधिकारियों की लापरवाही पर नाराजगी जताई और चेतावनी दी कि यदि जल्द मरम्मत कार्य नहीं हुआ तो वह और उनके पार्टी कार्यकर्ता आंदोलन करेंगे।

    मरम्मत कार्य नाममात्र ही हुआ

    स्थानीय लोगों और पार्षद बीडी रजक के अनुसार, ओवरब्रिज कई वर्षों के संघर्ष और दोनों विभागों की सहयोगी प्रक्रिया के बाद बना था। निर्माण पूरा होने के कुछ महीनों में ही सड़क पर गहरे गड्ढे पड़ने लगे। स्थानीय वाहन चालक कई बार दुर्घटनाओं का शिकार हुए। गड्ढों के कारण रोजमर्रा की आवाजाही प्रभावित हो रही है। पार्षद और नागरिकों ने कई बार धरना प्रदर्शन और शिकायत के माध्यम से मरम्मत की मांग की, लेकिन विभागीय कार्रवाई नाममात्र ही हुई। इससे लोगों में भारी आक्रोश है।

    विभागीय समन्वय की कमी का उदाहरण

    विधायक निर्मला सप्रे का कहना है कि उन्होंने कई अवसरों पर रेलवे और सेतु विभाग के अधिकारियों से गड्ढों की समस्या के बारे में बात की, लेकिन दोनों विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते रहे। उनका कहना है कि “किसी ने जिम्मेदारी नहीं ली, जिसका खामियाजा आम लोग भुगत रहे हैं।” उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जल्द मरम्मत नहीं हुई तो वह मौके पर पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ आंदोलन करेंगे और जनता की सुरक्षा के लिए आवाज उठाएंगे। विधायक ने बताया कि झांसी फाटक ओवरब्रिज का महत्व इसलिए भी है क्योंकि पहले रेलवे क्रॉसिंग की वजह से दुर्घटनाओं का खतरा था। ओवरब्रिज बनने के बाद भी गड्ढों के कारण यही जोखिम कायम है। उन्होंने विभागों से अपील की कि तुरंत मरम्मत कार्य शुरू किया जाए और सड़क को सुरक्षित बनाया जाए।

    स्थानीय लोगों की परेशानियां

    स्थानीय नागरिकों का कहना है कि गड्ढों के कारण वाहन चालकों को रोजाना मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। दोपहिया और चारपहिया वाहन चालक दुर्घटना का शिकार हो सकते हैं। छात्रों और ऑफिस जाने वाले लोगों के लिए यह सड़क रोजमर्रा की जिंदगी में सबसे अधिक इस्तेमाल होती है। सड़क की खस्ता हालत ने लोगों में निराशा और गुस्सा दोनों पैदा कर दिया है। पार्षद बीडी रजक ने भी कहा कि लंबे समय से विभागीय लापरवाही और अनदेखी के कारण यह स्थिति बनी है। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि बिना विलंब किए मरम्मत कार्य पूरा किया जाए और जनता को राहत मिले। वर्तमान में यह मामला विभागीय समन्वय की कमी और जनप्रतिनिधियों की चेतावनी को गंभीरता से न लेने का उदाहरण बन गया है। विधायक निर्मला सप्रे का आंदोलन की चेतावनी देने का निर्णय इस बात का संकेत है कि स्थानीय लोग अब इंतजार करने को तैयार नहीं हैं।

  • MP Board Exam 2025-26: नकल पर नकेल कसने की पूरी तैयारी, प्रश्न-पत्रों की डबल पैकिंग; मोबाइल एप से होगी हर कदम की निगरानी

    MP Board Exam 2025-26: नकल पर नकेल कसने की पूरी तैयारी, प्रश्न-पत्रों की डबल पैकिंग; मोबाइल एप से होगी हर कदम की निगरानी

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    भोपाल । मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल MPBSE ने बोर्ड परीक्षाओं 2025-26 को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं। इस बार परीक्षा में नकल और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर पूरी तरह अंकुश लगाने के लिए कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि किसी भी स्तर पर लापरवाही या गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    प्रश्न-पत्रों की होगी डबल पैकिंग

    एमपी बोर्ड ने नकल और पेपर लीक रोकने के लिए इस बार प्रश्न-पत्रों की डबल पैकिंग व्यवस्था लागू की है। प्रश्न-पत्रों को पहले सीलबंद पैकेट में रखा जाएगा और फिर इन्हें लोहे की पेटियों में सुरक्षित किया जाएगा। ये पेटियां पूरी तरह सील रहेंगी और परीक्षा वाले दिन ही सीधे परीक्षा केंद्र के एग्जाम हॉल में खोली जाएंगी। इससे पहले किसी भी स्तर पर प्रश्न-पत्र खोलने की अनुमति नहीं होगी।बोर्ड अधिकारियों के मुताबिक, इस व्यवस्था से प्रश्न-पत्रों की सुरक्षा कई गुना बढ़ जाएगी और पेपर लीक की आशंका लगभग खत्म हो जाएगी।

    मोबाइल एप से होगी रियल-टाइम मॉनिटरिंग

    इस बार बोर्ड परीक्षा की निगरानी पूरी तरह डिजिटल सिस्टम से की जाएगी। मंडल द्वारा विकसित विशेष मोबाइल एप के माध्यम से प्रश्न-पत्रों के हर बंडल की निगरानी की जाएगी। परीक्षा ड्यूटी में तैनात सभी अधिकारियों और केंद्राध्यक्षों को यह एप अपने मोबाइल फोन में डाउनलोड करना अनिवार्य होगा। इस एप के जरिए प्रश्न-पत्र खोलने का समय प्रश्न-पत्र वितरण की जानकारी परीक्षा समाप्ति के बाद उत्तरपुस्तिकाओं के बंडल तैयार होने की एंट्री मूल्यांकन केंद्र पर बंडल जमा करने की पुष्टि जैसी सभी जानकारियां रियल-टाइम में बोर्ड मुख्यालय तक पहुंचेंगी। साथ ही हर बंडल की लोकेशन ट्रैक की जाएगी, जिससे किसी भी तरह की गड़बड़ी पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।

    नकल पर सख्त कार्रवाई

    एमपी बोर्ड पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि सामूहिक नकल की स्थिति में पूरे परीक्षा केंद्र की परीक्षा निरस्त की जा सकती है। इसके अलावा दोषी पाए जाने पर संबंधित छात्रों और कर्मचारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी होगी। नियमों के अनुसार, गंभीर मामलों में तीन साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।

    10 फरवरी से शुरू होंगी परीक्षाएं

    एमपी बोर्ड की 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं 10 फरवरी 2026 से शुरू होंगी। इस वर्ष प्रदेशभर से करीब 16 लाख विद्यार्थी बोर्ड परीक्षा में शामिल होंगे। परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा, निगरानी और अनुशासन को लेकर जिला स्तर पर भी विशेष टीमें गठित की गई हैं।

    छात्रों से अपील

    बोर्ड ने छात्रों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और पूरी तैयारी के साथ परीक्षा में शामिल हों। परीक्षा को पूरी तरह पारदर्शी और नकल-मुक्त बनाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए गए हैं।

  • तलाक केस में बड़ा विवाद: महिला के वकील ने बदला पक्ष, कोर्ट में दी धमकी; मामला थाने तक पहुंचा

    तलाक केस में बड़ा विवाद: महिला के वकील ने बदला पक्ष, कोर्ट में दी धमकी; मामला थाने तक पहुंचा

    बैतूल । जिला न्यायालय परिसर में उस समय तनाव की स्थिति बन गई जब तलाक के एक मामले को लेकर सीनियर अधिवक्ता अंशुल गर्ग और महिला पक्षकार रिया तिवारी के बीच तीखी बहस हो गई। यह विवाद आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़ते हुए खुले तौर पर धमकी तक पहुंच गया। महिला द्वारा जज के सामने ही अधिवक्ता को कोर्ट के बाहर देख लेने की धमकी दिए जाने के बाद मामला गंभीर हो गया और पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।जानकारी के अनुसार, रिया तिवारी ने अपने पति पर प्रताड़ना और धोखे से शादी करने के आरोप लगाए थे। महिला की शिकायत पर उसके पति के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज हुआ था और वह बैतूल जेल में बंद था। इस मामले में शुरुआत में रिया की ओर से अधिवक्ता अंशुल गर्ग पैरवी कर रहे थे।

    केस बीच में छोड़ने पर भड़की महिला

    विवाद की जड़ उस समय बनी जब अधिवक्ता अंशुल गर्ग ने महिला का केस बीच में छोड़ दिया और बाद में उसी महिला के पति की ओर से पैरवी करते हुए उसकी जमानत करवा दी। इस बात से आहत और नाराज रिया तिवारी ने अदालत में ही अधिवक्ता पर गंभीर आरोप लगाए और कथित तौर पर धमकी दे दी कोर्ट परिसर में हुए इस घटनाक्रम के बाद माहौल गरमा गया। अधिवक्ता अंशुल गर्ग और बार काउंसिल से जुड़े अन्य सदस्य कोतवाली थाना पहुंचे और पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस एफआईआर दर्ज कर ही रही थी कि इसी दौरान महिला रिया तिवारी भी थाने पहुंच गई, जहां एक बार फिर दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हो गई।

    पुलिस ने कराई सुलह की कोशिश

    कोतवाली थाना पुलिस को दोनों पक्षों को शांत कराने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। हालात को देखते हुए पुलिस ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए समझाइश दी। हालांकि मामला पूरी तरह शांत होने में समय लगा।

    महिला पर मामला दर्ज

    रिया तिवारी का आरोप है कि अधिवक्ता अंशुल गर्ग ने उसे धोखा दिया और अधिक पैसे लेकर पाला बदल लिया। उसका कहना है कि तलाक का केस छोड़कर पति को जमानत दिलाना नैतिक और पेशेवर रूप से गलत है। वहीं अधिवक्ता अंशुल गर्ग का कहना है कि वे किस पक्ष की पैरवी करेंगे, यह उनका कानूनी अधिकार है और इसके लिए उन्हें धमकाया या डराया नहीं जा सकता। कोतवाली थाना पुलिस ने महिला रिया तिवारी के खिलाफ धमकी देने और सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने के आरोप में मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और आगे की कार्रवाई साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।