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  • लोकतंत्र को सशक्त बनाने में युवा विधायकों की भूमिका महत्वपूर्ण : नरेन्द्र सिंह तोमर

    लोकतंत्र को सशक्त बनाने में युवा विधायकों की भूमिका महत्वपूर्ण : नरेन्द्र सिंह तोमर


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि लोकतंत्र को सशक्त बनाने में युवाओं की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। लोकतंत्र किसी एक व्यक्ति, समुदाय या क्षेत्र की व्यवस्था नहीं, बल्कि नागरिकों की स्वतंत्रता, न्याय, समानता और बंधुता पर आधारित एक व्यापक व्यवस्था है। भारत का लोकतंत्र नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से ही मजबूत होता है।

    विधानसभा अध्यक्ष तोमर सोमवार को मध्य प्रदेश विधानसभा में आयोजित युवा विधायकों के दो दिवसीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के 25 नवंबर 1949 के संविधान सभा के वक्तव्य का उल्लेख करते हुए कहा कि संविधान की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उसे लागू करने वाले लोग कितने प्रतिबद्ध और नैतिक हैं।

    तोमर ने कहा कि युवा विधायक लोकतंत्र में नागरिकों और शासन के बीच सेतु की भूमिका निभाते हैं। उनकी नई ऊर्जा, आधुनिक सोच और नवाचार की क्षमता शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, जलवायु परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सकारात्मक बदलाव ला सकती है।

    उन्होंने कहा कि युवा जनप्रतिनिधि सामाजिक कुरीतियों जैसे जातिवाद, नशाखोरी और लैंगिक भेदभाव के विरुद्ध समाज को जागरूक करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उस सोच का उल्लेख किया जिसमें राजनीति में नई ऊर्जा और पारदर्शिता लाने के लिए बड़ी संख्या में युवाओं को राजनीति में आने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़ने के लिए चुनाव कानून (संशोधन) अधिनियम 2021 के माध्यम से मतदाता पंजीयन की प्रक्रिया को और अधिक सरल बनाया गया है।

    तोमर ने कहा कि मध्य प्रदेश विधानसभा ने भी लोकतांत्रिक भागीदारी को बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। पहली बार निर्वाचित विधायकों की शून्यकाल सूचनाओं को प्राथमिकता देने तथा प्रश्नकाल से जुड़े उत्तरों की व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने जैसे कदम लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाए गए हैं। उन्होंने युवा विधायकों से आह्वान किया कि वे संसदीय परंपराओं, नियमों और प्रक्रियाओं का गंभीर अध्ययन करें, सदन की कार्यवाही में सक्रिय भागीदारी निभाएं तथा वरिष्ठ सदस्यों से मार्गदर्शन लेकर अपने ज्ञान और अनुभव को समृद्ध बनाएं। उन्होंने कहा कि अतीत के अनुभव और भविष्य की योजनाओं के बीच वर्तमान का सशक्त पुल युवा नेतृत्व ही बन सकता है।

    विधानसभा अध्यक्ष ने विश्वास व्यक्त किया कि युवा विधायक सम्मेलन में होने वाले विचार-विमर्श और संवाद लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करेंगे तथा विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में नई ऊर्जा प्रदान करेंगे।


    जनता और शासन के बीच सेतु बनें विधायक : वासुदेव देवनानी

    समारोह में राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि जनप्रतिनिधियों का मुख्य दायित्व जनता और शासन के बीच प्रभावी संवाद स्थापित करना है। लोकतंत्र की मजबूती तभी संभव है जब जनता, विधायिका और शासन की प्रक्रियाओं के बीच पारदर्शिता और सहभागिता बढ़े। विधायक केवल चुनाव जीतने तक सीमित न रहें, बल्कि अपने अध्ययन, चिंतन और जनसमस्याओं के प्रति संवेदनशीलता के माध्यम से समाज के विकास में सक्रिय योगदान दें। एक प्रभावी विधायक वही है जो सदन की कार्यवाही में सक्रिय रूप से भाग ले, प्रश्न पूछे, मुद्दों पर तैयारी के साथ चर्चा करे और जनता से जुड़े विषयों को गंभीरता से उठाए।

    देवनानी ने कहा कि विधानसभा केवल कानून बनाने का मंच नहीं है, बल्कि यह जनता की आकांक्षाओं और समस्याओं को सामने लाने का सबसे महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक मंच है इसलिए आवश्यक है कि विधायकों में अध्ययन की प्रवृत्ति विकसित हो और वे संसद एवं विधानसभा की परंपराओं और प्रक्रियाओं की गहन समझ रखें। उन्होंने भ्रष्टाचार और सार्वजनिक संसाधनों के न्यायपूर्ण उपयोग की आवश्यकता पर भी बल देते हुए कहा कि शासन व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता तभी बढ़ेगी जब जनप्रतिनिधि ईमानदारी और नैतिकता के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे।

    उन्होंने युवाओं की भूमिका पर भी विशेष बल दिया और कहा कि देश के विकास में युवा शक्ति की भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। भारत का वास्तविक विकास तभी संभव है जब समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक विकास के लाभ पहुंचे। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब समावेशी विकास सुनिश्चित किया जाए और समाज के प्रत्येक वर्ग को समान अवसर प्राप्त हों। उन्होंने युवा जनप्रतिनिधियों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे निरंतर अध्ययन, अनुभव और संवाद के माध्यम से स्वयं को सशक्त बनाएं तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा और परंपराओं को और मजबूत करें।


    अपने क्षेत्र के लोगों से दिल से जुड़ना जरूरी : सिंघार

    मप्र विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि विधायक बनने के साथ ही हमारी स्वयं की कई अपेक्षाएं होती हैं। विधानसभा क्षेत्रवासी भी विधायक को विकास, जनसुविधा और जनकल्याण के कार्यों के लिए बहुत आशा से देखते हैं। विधायक का पद अपने क्षेत्र के लोगों की समस्याओं को मुखर करने का प्रभावी माध्यम है। अपने क्षेत्र के लोगों से दिल से जुड़ना और उनके साथ भावनात्मक संबंध बनाना जरूरी है। उन्होंने युवा विधायकों को विधानसभा की बैठकों में अधिक से अधिक भाग लेने तथा विकास के नाम पर दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सोचने के लिए प्रेरित किया। श्री सिंघार ने कहा कि युवा वर्ग में यह धारणा बनती जा रही है कि राजनीति बहुत खराब है और वे इस विचार के कारण राजनीति में आने से बच रहे हैं। देश हित और लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए इस विचार को बदलने की आवश्यकता है।

    भोपाल स्थित विधानसभा के विधान परिषद हाल में हुआ कार्यक्रम वंदे मातरम के गान के साथ आरंभ हुआ। सम्मेलन में राष्ट्रकुल संसदीय संघ (भारत क्षेत्र 6) के तीन राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ तथा राजस्थान के 45 वर्ष आयु तक के विधायक सम्मिलित हुए। सम्मेलन के प्रथम दिन राजस्थान और छत्तीसगढ़ से आये युवा विधायकों ने अपने विचार साझा किये।

  • राजनीति में विनम्रता, मर्यादा और अनुशासन आवश्यक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    राजनीति में विनम्रता, मर्यादा और अनुशासन आवश्यक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राजनीति में विनम्रता, मर्यादा और अनुशासन आवश्यक है। वे ही इस क्षेत्र में सक्रिय और सफल हो सकते हैं, जिनमें जनसेवा और जनकल्याण की भावना हो। व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से राजनीति में आने वाले लोगों के कारण लोकतांत्रिक मूल्यों और व्यवस्था पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को मध्य प्रदेश विधानसभा में आयोजित युवा विधायकों के दो दिवसीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों के लिए जनसमस्याओं के प्रति संवेदनशील होना, अध्ययनशील होना, तनाव प्रबंधन में दक्ष होना और जनहित के लिए पूर्ण समर्पण से कार्य करना आवश्यक है। कोई समस्या आने पर जनप्रतिनिधि का व्यवहार और समस्या निराकरण के लिए उनका प्रबंधन कौशल, उनके व्यक्तित्व को दर्शाता है। सकारात्मक और समाज हित की गतिविधियों और विकास कार्यों के लिए हमें दलगत मतभेदों से ऊपर उठकर सोचना और कार्य करना चाहिए।

    भोपाल स्थित विधानसभा के विधान परिषद हाल में हुआ कार्यक्रम वंदे मातरम के गान के साथ आरंभ हुआ। कार्यक्रम में मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, प्रदेश के संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार विशेष रूप से उपस्थित थे। सम्मेलन में राष्ट्रकुल संसदीय संघ (भारत क्षेत्र 6) के तीन राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ तथा राजस्थान के 45 वर्ष आयु तक के विधायक सम्मिलित हुए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह मानना कि लोकतंत्र के विचार की उत्पत्ति पश्चिम से हुई थी, पूर्णत: सत्य नहीं है। लोकतंत्र, भारतीय राजनैतिक व्यवस्था का नैसर्गिक गुण है। भारतीय व्यवस्थाओं में सदैव से ही मत भिन्नता को सम्मान दिया गया है, राजनैतिक और धार्मिक व्यवस्थाओं में शास्त्रार्थ की परम्परा प्राचीन समय से रही है। भारत में विचारों की अभिव्यक्ति को सभी क्षेत्रों में सम्मान और महत्व प्रदान किया गया। भारत में ऐतिहासिक रूप से जुड़े लोकतंत्र के संस्कारों और मूल्यों का ही परिणाम है कि अंग्रेजों के जाने के बाद भी देश में लोकतंत्र पर आधारित व्यवस्थाएं सुगमता से संचालित होती रहीं। जबकि अन्य पड़ोसी देशों का हाल सबके सामने है।

    उन्होंने युवा विधायकों को प्रेरित करते हुए कहा कि हमें हर स्थिति में सम भाव से रहने की प्रेरणा मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम से लेना चाहिए। जब उन्हें राजपाट सौंपा जाना था, तब उन्हें वनवास दे दिया गया। परंतु उन्होंने दोनों स्थितियों को समभाव से लिया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य सहित कई भारतीय शासकों के इतिहास से ज्ञात होता है कि उन्होंने कभी अपनी अगली पीढ़ी को राज सत्ता सौंपने का उपक्रम नहीं किया। राज्य के प्रबंधन में लगे लोगों ने ही उनके बाद व्यवस्थाएं संभाली। ऐसे महान शासकों का मानना था कि यदि अगली पीढ़ी में नेतृत्व क्षमता और राज सत्ता के प्रबंधन की दक्षता होगी, तो वे स्वयं इस दिशा में सक्रिय होंगे। इन भारतीय मूल्यों और परम्पराओं का वर्तमान में भी पालन होना आवश्यक है।

    उन्होंने कहा कि इसके साथ ही जनप्रतिनिधियों और सत्ता से जुड़े लोगों का अपने परिवार को समय देना और उन्हें अच्छे संस्कार देना भी आवश्यक है। अच्छे संस्कारों के अभाव में अगली पीढ़ी द्वारा यश प्रभावित करने की संभावना बनी रहती है। जनप्रतिनिधियों को इस ओर से विशेष रूप से संवेदनशील और सतर्क रहना चाहिए।

    मप्र के संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि प्रजातंत्र जनता का, जनता द्वारा, जनता के लिए शासन है। अत: लोकतंत्र के सशक्त होने के लिए जनप्रतिनिधि का सशक्त होना आवश्यक है। विधायक होना बहुत महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व है, विधायक बड़ी जनसंख्या की आशाओं, आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं और उनकी दुख, तकलीफों, अपेक्षाओं को वाणी प्रदान करते हैं। विधायकगण अपने विधानसभा क्षेत्र का प्रबंधन कैसे करते हैं, यह बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने युवा विधायकों को संयत व्यवहार रखने, जनसमस्याओं के प्रति संवेदनशील रहते हुए उनके निराकरण की ठोस कोशिश करने, कार्यालय प्रबंधन के लिए संवेदनशील और सक्रिय स्टाफ रखने, अद्यतन डिजिटल तकनीकों के उपयोग में समय के साथ चलने की सलाह दी। सस्ती लोकप्रियता के लिए की गई गतिविधियां दीर्घकालिक दृष्टि से लाभकारी नहीं होती हैं।

  • Travel Tips: पार्टनर के साथ घूमने की बेस्ट जगहें, आज ही बनाएं रोमांटिक प्लान

    Travel Tips: पार्टनर के साथ घूमने की बेस्ट जगहें, आज ही बनाएं रोमांटिक प्लान


    नई दिल्ली। अगर आप अपने राजभवन के साथ सार्वभौम के साथ कुछ पल का मौका ढूंढ रहे हैं तो आपके लिए ये खास समय है। अपने तेलंगाना के साथ कहीं भी घूमने जाना न सिर्फ मूड को तरोताजा करता है, बल्कि दूसरे में फिर से प्यार की नई शिंगरी भी जगा देता है। इसके लिए आपको इन जगहों पर एक बार जरूर जाना चाहिए।

    मनाली
    रोमांटिक ट्रिप की बात हो और मनाली का नाम ना आए, ऐसा हो ही नहीं सकता। घने चीड़ों के जंगल, नदियाँ, हरे-भरे मैदान और घने जंगल यहाँ के घने जंगलों को बेहद खास बनाते हैं। इस समय भी यहां पर काफी लेयर्ड हो रही है। इसके लिए इस बार भी यहां जाने के लिए फ़ार्फैक्ट है। यहां कपल्स को ऐसा लगता है जैसे वे किसी खूबसूरत कहानी का हिस्सा हों। तिब्बती मठों की सैर, नदी किनारे कैंपिंग और भृगु झील तक ट्रेक करना ये सब काफी अच्छा अनुभव कराती है।

    लैंडौर 

    हिमालय के विकाश में बसा लैंडौर एक छोटा लेकिन बेहद खूबसूरत हिल स्टेशन है। कोहरे से बूढ़ी पहाड़ियाँ जैसे, देवदार के जंगल और बुरेंश के लाल फूल यहाँ के स्मारक को किसी पुराने ब्रिटिश गाँव में बनाए जाते हैं। मसूरी के ऊपर स्थित इस शांत जगह पर लाल टिब्बा, सेंट पॉल चर्च, फोर शॉप और केलॉग मेमोरियल चर्च जैसे कई आकर्षण हैं। यहां का भी मौसम इस समय काफी अच्छा है। तो आप यहां बिना देरी किए जाने का बी प्लान बनवा सकते हैं।

    शिमला
    इस समय पद पर नियुक्ति हो सकती है। अद्वितीय-ठंडी हवाएं, हरे-भरे जंगल, खूबसूरत और पहाड़ियां आपको सर्वोच्च और साहसिक दोनों का अनुभव। मॉल रोड पर स्वादिष्ट और स्वादिष्ट व्यंजन का मजा भी अलग है। रिज, कुफरी और चैल जैसी जगहों पर आप एडवेंचर और कॉमेडी का आनंद ले सकते हैं। इस सीजन में स्वाद का मौसम सुहाना और नज़ारे अद्भुत होते हैं।

  • इस दिन से खुलेगा केदारनाथ का कपाट, जानिए 6 महीने क्यों बंद रहता है मंदिर

    इस दिन से खुलेगा केदारनाथ का कपाट, जानिए 6 महीने क्यों बंद रहता है मंदिर


    नई दिल्ली। केदारनाथ मंदिर (Kedarnath Dham) जो भगवान शिव का एक प्राचीन और प्रमुख तीर्थस्थल है, हर साल लगभग यहां लाखों लोग आते हैं और पूजा अर्चना करते हैं। अब मंदिर की यात्रा शुरू होने वाली है यानि इसका कपाट खुलने जा रहा है। आपको बता दें कि, ये मंदिर हर 6 महीने बंद रहता है। इस दौरान भक्तगण बाबा केदारनाथ के दर्शन ऊखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर में कर सकते हैं।

    इस कारण बंद रहता हैं मंदिर
    केदारनाथ मंदिर के बंद होने का मुख्य कारण है भारी बर्फबारी और मौसम की कठिनाइयाँ, जो नवंबर से मई तक रहती हैं। इस दौरान मंदिर और आसपास के क्षेत्र में भारी बर्फबारी हो जाती है और रास्ते अवरुद्ध हो जाते हैं, जिससे तीर्थयात्रियों का पहुंचना असंभव हो जाता है।

    मौसम की यह चुनौती न केवल यात्रियों के लिए जोखिमपूर्ण होती है, बल्कि मंदिर प्रशासन के लिए भी सुरक्षा और व्यवस्थाओं को बनाए रखना मुश्किल कर देती है। उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, शीतकालीन महीनों में रास्तों पर हिमस्खलन और भूस्खलन का खतरा सबसे अधिक होता है। इसलिए मंदिर को बंद करना अनिवार्य हो जाता है।

    भाई दूज के दिन ही बंद होते हैं केदारनाथ मंदिर के कपाट
    केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलने और बंद होने की एक तिथि भी तय होती है। इसी तिथि में मंदिर के कपाट खोले और बंद किए जाते हैं। बाबा केदारनाथ धाम के कपाट भी हर भाई दूज यानी दिवाली के दो दिन बाद बंद कर दिए जाते हैं। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, महाभारत युद्ध के बाद पांडव अपनी पत्नी द्रौपदी के साथ हिमालय पहुंचे जहां उन्होंने भगवान शिव के मंदिर का निर्माण किया। इसके बाद उन्होंने यहीं पर अपने पितरों का तर्पण किया है। इसके बाद ही उन्हें स्वर्ग की प्राप्ति हुई। कहते हैं कि जिस दिन पांडवों ने अपने पूर्वजों का तर्पण किया था वो भाई दूज का ही दिन था, इसलिए तब से इसी दिन केदारनाथ के कपाट बंद होने लगे।

    एक और वजह
    दूसरी वजह यह है कि भैया दूज के दिन से ही शीतकाल का आरंभ होता है। इस दौरान हिमालय क्षेत्र में रहना बहुत मुश्किल होता है। दरअसल, शीतकाल के समय हिमालय में जबरदस्त बर्फबारी होती है। इन कारणों से भी भैया दूज के बाद बाबा केदारनाथ के दर्शन रोक दिए जाते हैं और मंदिर के कपाट अगले 6 महीनों के लिए बंद कर दिए जाते हैं।

    इस दिन खुलेगा कपाट
    केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलने ही वाले हैं। उत्तराखंड में इस समय सरकार चार धाम यात्रा की तैयारियों में जुटी हुई है। इस वर्ष केदारनाथ मंदिर के कपाट 22 अप्रैल को खुलेंगे। हालांकि, गंगोत्री एवं यमुनोत्री धाम के कपाट 19 अप्रैल को खुलने के साथ ही प्रदेश की पवित्र चार धाम यात्रा की शुरुआत हो जाएगी। बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को खुलने हैं।

    केदारनाथ धाम पहुंचने के लिए
    Kedarnath Temple तक पहुंचना अपने आप में एक आध्यात्मिक और रोमांचक यात्रा है। इस पवित्र धाम के दर्शन के लिए सबसे पहले श्रद्धालुओं कोहरिद्वार/ऋषिकेश पहुंचना होता है। यहां से सड़क मार्ग द्वारा बस या टैक्सी के जरिए सोनप्रयाग तक सफर किया जाता है।

    सोनप्रयाग से आगे का रास्ता और भी दिलचस्प हो जाता है। यहां से छोटी गाड़ियों के माध्यम से यात्रियों को गौरीकुंड पहुंचाया जाता है, जो केदारनाथ यात्रा का मुख्य बेस कैंप है। गौरीकुंड से केदारनाथ मंदिर तक लगभग 16-18 किलोमीटर का ट्रेक शुरू होता है। यह रास्ता पहाड़ों, झरनों और हरियाली से भरपूर होता है, जो यात्रा को और भी यादगार बना देता है।

    गौरीकुंड से केदारनाथ धाम तक
    इस ट्रेक को पैदल तय कर सकते हैं या फिर घोड़ा, खच्चर और पालकी का सहारा ले सकते हैं। वहीं, जो लोग कम समय में यात्रा करना चाहते हैं, उनके लिए हेलीकॉप्टर सेवा भी उपलब्ध है, जिससे वे सीधे मंदिर के पास पहुंच सकते हैं।

    केदारनाथ धाम जाने की प्रमुख तिथिया
    अक्षय तृतीया: इसी दिन केदारनाथ के कपाट खोले जाते हैं।
    श्रावण मास: भगवान शिव की पूजा का सबसे शुभ समय होता है ।
    भैया दूज: इस दिन मंदिर के कपाट बंद किए जाते हैं।

  • डॉलर के मुकाबले रुपया पहली बार 95 पार, करेंसी मार्केट में बड़ा बदलाव

    डॉलर के मुकाबले रुपया पहली बार 95 पार, करेंसी मार्केट में बड़ा बदलाव


    नई दिल्ली।भारतीय रुपए ने सोमवार को डॉलर के मुकाबले पहली बार 95 के स्तर को पार किया और 95.2 का नया निचला स्तर देखा। हालांकि दिन के अंत में रुपया 94.83 पर बंद हुआ, जो कि शुक्रवार के 94.81 के बंद से 0.3 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है।

    मध्य पूर्व तनाव और तेल की कीमतों का असर

    विशेषज्ञों के अनुसार, मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों के चलते रुपए में कमजोरी लगातार बढ़ रही है। अकेले मार्च महीने में भारतीय मुद्रा ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 4.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में भी सोमवार को गिरावट देखी गई। सेंसेक्स 1,635.67 अंक या 2.22 प्रतिशत की गिरावट के साथ 71,947.55 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 488.20 अंक या 2.14 प्रतिशत कमजोर होकर 22,331.40 पर बंद हुआ। मार्च 2026 में निफ्टी में 10 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज हुई, जो कि मार्च 2020 के बाद मासिक आधार पर सबसे बड़ी गिरावट है।

    आरबीआई की नई दिशा, ओवरनाइट नेट ओपन लिमिट

    भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने हाल ही में बैंकों के लिए ओवरनाइट नेट ओपन पोजिशन लिमिट को 100 मिलियन डॉलर करने का निर्णय लिया। इसके बाद रुपया शुरुआती कारोबार में मजबूती के साथ खुला, लेकिन सत्र के दौरान 160 पैसे गिरावट के साथ शुरुआती स्तर खो दिया। केंद्रीय बैंक ने शुक्रवार को कहा था कि बैंकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि 10 अप्रैल तक हर कारोबारी दिन के अंत में उनकी नेट ओपन रुपया पोजिशन 100 मिलियन डॉलर से अधिक न हो। अनुमान है कि इन निवेशों का आकार 25 अरब डॉलर से लेकर 50 अरब डॉलर तक हो सकता है।

    तेल की बढ़ती कीमतों का दबाव

    पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के चलते वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी गई। खबर लिखे जाने तक ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 115 डॉलर प्रति बैरल पर और डब्ल्यूटीआई क्रूड 101.4 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। विशेषज्ञों का कहना है कि तेल की बढ़ती कीमतों और मुद्रा कमजोर होने के कारण भारतीय शेयर बाजार पर भी दबाव बढ़ा है। निवेशकों ने सुरक्षित संपत्तियों की ओर रुख किया, जिससे बाजार में गिरावट और तेज हुई।

    मार्च 2026 का आखिरी कारोबारी सप्ताह भारतीय निवेशकों के लिए चुनौतीपूर्ण रहा। रुपए ने पहली बार 95 का स्तर पार कर नई चुनौतियों का संकेत दिया, वहीं शेयर बाजार में गिरावट ने निवेशकों की सतर्कता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि मध्य पूर्व तनाव, तेल की ऊंची कीमतें और आरबीआई की नई दिशा रुपए और शेयर बाजार दोनों पर असर डाल रही हैं। आने वाले दिनों में बाजार की दिशा और निवेशकों की प्रतिक्रिया इस समय की आर्थिक नीतियों और वैश्विक घटनाओं पर निर्भर करेगी।

  • ब्लैक बॉक्स ने प्रेफरेंशियल इश्यू पूरा किया, वारंट कन्वर्जन से मिले 386 करोड़ रुपए

    ब्लैक बॉक्स ने प्रेफरेंशियल इश्यू पूरा किया, वारंट कन्वर्जन से मिले 386 करोड़ रुपए


    नई दिल्ली। ग्लोबल डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनी ब्लैक बॉक्स लिमिटेड ने सोमवार को बताया कि 27 सितंबर, 2024 को जारी किए गए वारंटों के कन्वर्जन के माध्यम से 386.36 करोड़ रुपए सफलतापूर्वक प्राप्त किए गए हैं। इस कदम से कंपनी की वित्तीय मजबूती और निवेशकों के प्रति विश्वास को और बढ़ावा मिला है।

    वारंट कन्वर्जन का पूरा लाभ

    कंपनी ने 92,65,215 वारंट को 417 रुपए प्रति शेयर के निर्गम मूल्य पर इक्विटी शेयरों में बदल दिया। सभी वारंट धारकों ने अपने अधिकारों का पूर्ण रूप से उपयोग किया, और किसी ने भी अपने अधिकार नहीं गंवाए। इस पूरी प्रक्रिया के समय पर और सफलतापूर्वक होने से ब्लैक बॉक्स के व्यापारिक सिद्धांत, विकास रणनीति और क्रियान्वयन क्षमता में निवेशकों और प्रमोटरों का मजबूत विश्वास दिखाई देता है।

    प्रमोटरों ने किया बड़ा योगदान

    इस प्रेफरेंशियल इश्यू में प्रमोटरों का योगदान भी अहम रहा, जिन्होंने कुल निवेश का 51.76 प्रतिशत यानी लगभग 200 करोड़ रुपए जुटाए। हस्तांतरण के बाद प्रमोटरों की कुल शेयरधारिता 69.99 प्रतिशत हो गई है। यह कंपनी के प्रति उनकी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता और शेयरधारकों के साथ एकजुटता को दर्शाता है।

    विकास और रणनीतिक उपयोग

    ब्लैक बॉक्स के सीईओ संजीव वर्मा ने कहा”हमें यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि प्रमोटरों और निवेशकों दोनों की पूर्ण भागीदारी के साथ यह पूंजी जुटाना सफल रहा। 386 करोड़ रुपए के इस निवेश से हमारी बैलेंस शीट मजबूत हुई है और विकास लक्ष्यों को गति देने के लिए हमें अतिरिक्त लचीलापन मिला है।उन्होंने आगे कहा कि यह राशि कंपनी को डिजिटल अवसंरचना क्षमताओं को बढ़ाने, बाजार में उपस्थिति का विस्तार करने और ग्राहकों एवं शेयरधारकों को लगातार मूल्य प्रदान करने में मदद करेगी।

    वित्तीय दृष्टिकोण और निवेशकों का विश्वास

    ब्लैक बॉक्स के मुख्य वित्तीय अधिकारी दीपक बंसल ने कहा,”हम अपने निवेशकों के निरंतर विश्वास और समर्थन के लिए आभारी हैं। यह पूंजी हमें प्राथमिकता वाले विकास क्षेत्रों में निवेश करने की क्षमता देती है और पूंजी आवंटन, परिचालन दक्षता और प्रतिफल के प्रति अनुशासित दृष्टिकोण बनाए रखने में भी सहायक है।उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी अब सभी बाजारों में उभरते अवसरों का लाभ उठाने के लिए अच्छी स्थिति में है।

    ब्लैक बॉक्स का यह प्रेफरेंशियल इश्यू न केवल 386 करोड़ रुपए की पूंजी जुटाने में सफल रहा, बल्कि प्रमोटरों और निवेशकों के बीच विश्वास और सहयोग को भी स्पष्ट रूप से दर्शाता है। कंपनी अब डिजिटल अवसंरचना क्षेत्र में विस्तार और मजबूत वित्तीय स्थिति के साथ अपने अगले विकास चरण की ओर बढ़ रही है।

  • कोटक महिंद्रा प्राइम में बड़ा बदलाव: सूरज राजप्पन बने नए CEO, शाहरुख टोडीवाला को हटाया

    कोटक महिंद्रा प्राइम में बड़ा बदलाव: सूरज राजप्पन बने नए CEO, शाहरुख टोडीवाला को हटाया


    नई दिल्ली।वाहन फाइनेंस कंपनी कोटक महिंद्रा प्राइम लिमिटेड (केएमपीएल) ने सोमवार को अपने नेतृत्व में बड़ा बदलाव किया। कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने सूरज राजप्पन को मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (सीईओ) नियुक्त किया है। उनका कार्यकाल 1 जून 2026 से शुरू होगा और तीन साल के लिए होगा, हालांकि इसके लिए शेयरधारकों की मंजूरी आवश्यक है।

    शाहरुख टोडीवाला का संन्यास, तीन दशक का योगदान

    कंपनी ने यह भी बताया कि मौजूदा एमडी और सीईओ शाहरुख टोडीवाला 31 मई 2026 को रिटायर होंगे। शाहरुख टोडीवाला ने कोटक ग्रुप के साथ तीन दशक से अधिक समय तक काम किया और कंपनी को मजबूत और संतुलित विकास की दिशा में आगे बढ़ाया।

    सूरज राजप्पन का अनुभव और कंपनी में योगदान

    सूरज राजप्पन ने अपने करियर की शुरुआत ही केएमपीएल से की थी और उनके पास कंपनी में 24 साल का अनुभव है। केएमपीएल, कोटक महिंद्रा बैंक की एक सहायक कंपनी है। कोटक महिंद्रा बैंक के एमडी और सीईओ अशोक वासवानी ने कहा,सूरज राजप्पन का अनुभव और कार्यकुशलता कंपनी को आगे बढ़ाने में मदद करेगी। सूरज राजप्पन ने भी कहा कि केएमपीएल आगे संतुलित विकास, नवाचार और बेहतर ग्राहक अनुभव पर ध्यान देगा। साथ ही कंपनी अपने ओईएम और डीलर पार्टनर्स के साथ रिश्तों को और मजबूत करेगी।

    केएमपीएल का तीन दशक का सफर

    केएमपीएल की स्थापना 1996 में कोटक महिंद्रा फाइनेंस और फोर्ड क्रेडिट इंटरनेशनल के बीच 60:40 के जॉइंट वेंचर के रूप में हुई थी।
    बाद में 2005 में कोटक महिंद्रा बैंक ने फोर्ड क्रेडिट की हिस्सेदारी खरीद ली और कंपनी को पूरी तरह अपनी सहायक कंपनी बना लिया। इसके बाद इसका नाम बदलकर कोटक महिंद्रा प्राइम लिमिटेड कर दिया गया। कंपनी ने पिछले तीन दशकों में भारत के ऑटोमोबाइल और कंज्यूमर क्रेडिट मार्केट में खुद को मजबूत किया। साथ ही, जोखिम प्रबंधन, बेहतर गवर्नेंस और मजबूत सिस्टम पर विशेष ध्यान दिया।

    स्टार्टअप इकोसिस्टम में योगदान

    केएमपीएल ने 2025 में डीपीआईआईटी के साथ समझौता (एमओयू) भी किया था। इसका उद्देश्य देश के स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करना है। इस साझेदारी के तहत स्टार्टअप्स को बैंकिंग सेवाएं, लोन, फंडिंग, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और ट्रेनिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। यह कदम भारत में स्टार्टअप्स के विकास और वित्तीय सशक्तिकरण को बढ़ावा देता है।

    सूरज राजप्पन के सीईओ बनने से केएमपीएल की संतुलित विकास नीति, नवाचार और ग्राहक-केंद्रित रणनीति और मजबूत होगी। वहीं, शाहरुख टोडीवाला के योगदान ने कंपनी को तीन दशकों से स्थिर और विकसित संगठन बनाने में अहम भूमिका निभाई है। अब केएमपीएल की नजर ऑटो फाइनेंस और स्टार्टअप्स के लिए नए अवसर खोलने पर होगी।

  • मध्य पूर्व तनाव का असर: वित्त वर्ष के आखिरी सत्र में सेंसेक्स 1,635 अंक लुढ़का

    मध्य पूर्व तनाव का असर: वित्त वर्ष के आखिरी सत्र में सेंसेक्स 1,635 अंक लुढ़का


    नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष (2025-26) के आखिरी कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को बड़ी गिरावट देखने को मिली। दिन के अंत में सेंसेक्स 1,635.67 अंक या 2.22 प्रतिशत की गिरावट के साथ 71,947.55 और निफ्टी 488.20 अंक या 2.14 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 22,331.40 पर था।

    बाजार में चौतरफा गिरावट देखी गई। करीब सभी सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। निफ्टी पीएसयू बैंक (4.56 प्रतिशत), निफ्टी फाइनेंशियल सर्विस (3.49 प्रतिशत), निफ्टी प्राइवेट बैंक (3.37 प्रतिशत), निफ्टी रियल्टी (2.84 प्रतिशत), निफ्टी इंडिया डिफेंस (2.80 प्रतिशत), निफ्टी सर्विसेज (2.72 प्रतिशत), निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स ( 2.58 प्रतिशत), निफ्टी मीडिया (2.50 प्रतिशत) और निफ्टी ऑटो (2.39 प्रतिशत) की कमजोरी के साथ बंद हुआ।

    लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी गिरावट देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1,447.80 अंक या 2.68 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 52,650 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 416.20 अंक या 2.66 प्रतिशत की गिरावट के साथ 15,203.80 पर था।सेंसेक्स पैक में 30 में केवल दो शेयर हरे निशान में बंद हुए।

    बजाज फाइनेंस, एसबीआई, इंडिगो, एक्सिस बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, एचडीएफसी बैंक, ट्रेंट, भारती एयरटेल, अल्ट्राटेक सीमेंट, एमएंडएम, आईटीसी, आईसीआईसीआई बैंक, सन फार्मा और एशियन पेंट्स लूजर्स थे। केवल टेक महिंद्रा और पावर ग्रिड ही हरे निशान में बंद हुए।

    शेयर बाजार में बड़ी गिरावट के कारण बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) पर सूचीबद्ध सभी कंपनियों का मार्केटकैप करीब 10 लाख करोड़ रुपए कम होकर 412 लाख करोड़ रुपए हो गया है, जो कि शुक्रवार को 422 लाख करोड़ रुपए था।

    बाजार में गिरावट की वजह मध्य पूर्व में तनाव का बढ़ना है, जिसके समाप्त होने के कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं। इससे बाजार में निवेशकों की धारणा कमजोरी हुई है।

    एसबीआई सिक्योरिटीज के टेक्निकल और डेरिवेटिव्स प्रमुख सुदीप शाह ने कहा कि वित्त वर्ष 26 के आखिरी दिन बाजार की शुरुआत गैप डाउन के साथ हुई है और हालांकि, बाद में हल्की रिकवरी हुई, लेकिन ऊपरी स्तर से लगातार बिकवाली ने बाजार में गिरावट को बढ़ावा दिया। इससे दिन के अंत में निफ्टी 2.14 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ।

    उन्होंने आगे कहा कि निफ्टी के लिए सपोर्ट 22,200 से लेकर 22,150 के आसपास है और अगर यहां से गिरावट बढ़ती है तो निफ्टी 22,000 और फिर 21,800 तक जा सकता है। हालांकि, 22,450-22,500 रुकावट का स्तर है।

  • अश्विनी वैष्णव का ऐलान: भारत में प्रोडक्ट डिज़ाइन न करने वाली इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों को नहीं मिलेगा सरकारी लाभ

    अश्विनी वैष्णव का ऐलान: भारत में प्रोडक्ट डिज़ाइन न करने वाली इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों को नहीं मिलेगा सरकारी लाभ


    नई दिल्ली केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी सचिव अश्विनी वैष्णव ने साफ कर दिया है कि इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग कंपनी स्कॉबी (ईएमएस) के तहत सरकारी प्रोत्साहन केवल तभी आवश्यक है, जब वे भारत में निवेश पोर्टफोलियो से उत्पाद डिजाइन करेंगे।

    सरकार का फोकस: डिजाइन, गुणवत्ता और इंजीनियरिंग

    वैष्णव ने राष्ट्रीय राजधानी में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि अब सरकारी सहायता और प्रोत्साहन इस बात पर निर्भर है कि देश में डिजाइन, गुणवत्ता और इंजीनियरिंग इंजीनियरिंग को कितना विकसित किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर एंटरप्राइज़ सरकार की चार प्रमुख पार्टियों पर काम नहीं किया गया, तो अगली असेंबली असेंबली में उन्हें भी शामिल नहीं किया जाएगा। मंत्री ने कहा,
    अगर एंटरप्राइज़ कंपनियों के कहे अनुसार कदम नहीं उठाया जाता है, तो हम आगे की मंजूरी और फंडिंग रोक सकते हैं।”

    असेंबली नहीं, संपूर्ण डिज़ाइन क्षमता आवश्यक

    मंत्री ने स्पष्ट किया कि कंपनी को केवल असेंबली या फैक्ट्री मैन्युफैक्चरिंग तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्हें कॉन्सेप्चुअल डिज़ाइन, इंजीनियरिंग डिज़ाइन और विनिर्माण डिज़ाइन तक अपनी क्षमता में सुधार करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि पहले से स्वीकृत प्राप्त प्रोजेक्ट्स में भी अगर रिज़र्वेशन पूरी तरह से नहीं था, तो फंड जारी नहीं किया जाएगा।
    “जिन एप्लायंस को मंजूरी दे दी गई है, उन्हें भी हमने पैसा नहीं दिया अगर हमारी मांग पूरी नहीं हुई।”

    ईसीएमएस में निवेश और मंजूरी का अपडेट

    मंत्रालय ने ईसीएमएस के चौथे चरण में 29 आवेदनों को मंजूरी दी है, जिसमें कुल 7,104 करोड़ रुपये का निवेश शामिल है।
    ईसीएमएस के तहत कुल निवेश का लक्ष्य 59,350 करोड़ रुपये था, जबकि अब तक 61,671 करोड़ रुपये के प्रस्ताव रखे जा चुके हैं।
    वैष्णव ने कहा कि असली उत्पाद समान दिखते हैं, जब उत्पाद डिजाइन भारत में किया जाता है। मैन्युफैक्चरिंग करना जरूरी है, लेकिन अधिक कॉम्प्लेक्स और डिजाइन प्रक्रिया के कारण डिजाइन करना भी महत्वपूर्ण है।

    ग्लोबल क्वालिटी और मॉडल मैनपावर पर जोर

    मंत्री ने वैश्वीकरण मानक पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर की गुणवत्ता के लिए सिक्स सिग्मा जैसी सोया का पालन जरूरी है।
    उन्होंने कहा, ”इसके बिना उत्पाद पूरे नहीं माने जाएंगे।’ इसके अलावा, उन्होंने सरकार के फोकस को भी स्थापित, स्थिर और तटस्थ रखा। वैष्णव ने इंडस्ट्री से यह भी अपील की कि वे स्टोल्ड मैनपावर तैयार करने पर ध्यान दें। सरकार पूरे इकोसिस्टम को सहयोग प्रदान करती है, लेकिन सरकार खुद आगे डिजाइन और इंजीनियरिंग में कुशल प्रतिभा तैयार करना चाहती है।

  • रुपये में गिरावट जारी, डॉलर के मुकाबले ₹95 के पार, वैश्विक तनाव से बढ़ा दबाव

    रुपये में गिरावट जारी, डॉलर के मुकाबले ₹95 के पार, वैश्विक तनाव से बढ़ा दबाव


    नई दिल्ली। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय मुद्रा में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। भारतीय रुपया ने शुरुआत तो मजबूती के साथ की, लेकिन दिन बढ़ने के साथ यह गिरकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.22 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया। इंटरबैंक फॉरेक्स मार्केट में रुपया 93.62 प्रति डॉलर पर खुला और कुछ समय के लिए 93.57 तक मजबूत भी हुआ, लेकिन यह बढ़त टिक नहीं सकी।

    कच्चे तेल और वैश्विक हालात का असर
    रुपये पर दबाव की मुख्य वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ता तनाव है। खासतौर पर ईरान-अमेरिका तनाव ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है। इसका असर भारतीय बाजारों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। इससे पहले शुक्रवार को भी रुपया 94.85 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था, जो उस समय तक का रिकॉर्ड निचला स्तर था।

    आम लोगों की जेब पर सीधा असर
    रुपये की कमजोरी का असर सीधे आम आदमी पर पड़ेगा। जब रुपया गिरता है, तो आयात महंगा हो जाता है। भारत को कच्चा तेल खरीदने के लिए ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ेंगे, जिससे पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका है।

    रोजमर्रा के खर्च में भी बढ़ोतरी
    विदेश से आने वाले इलेक्ट्रॉनिक सामान जैसे मोबाइल, लैपटॉप और अन्य गैजेट्स भी महंगे हो सकते हैं। इसके अलावा विदेश में पढ़ाई या यात्रा करने वालों को अब ज्यादा रुपये खर्च करने पड़ेंगे। माल ढुलाई की लागत बढ़ने से खाने-पीने की चीजों समेत रोजमर्रा के सामानों की कीमतों में भी उछाल देखने को मिल सकता है।