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  • एमएसएमई इकाइयां औद्योगिक गतिविधियों का प्रभावी केन्द्र और लाखों परिवारों के स्वावलंबन का आधार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    एमएसएमई इकाइयां औद्योगिक गतिविधियों का प्रभावी केन्द्र और लाखों परिवारों के स्वावलंबन का आधार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश, देश के सर्वाधिक सशक्त, आर्थिक रूप से सुदृढ़ और बेहतर वित्तीय प्रबंधन वाले प्रथम तीन राज्यों में से एक है। राज्य सरकार प्रदेश के उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के लिए हरसंभव सहयोग और मार्गदर्शन उपलब्ध करा रही है। देश-दुनिया के सभी निवेशकों के लिए प्रदेश के दरवाजे खुले हैं। हम उद्योग मित्र नीतियों और सहयोग की भावना के साथ उनके स्वागत के लिए तत्पर हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश भारतीय अर्थव्यवस्था में उद्योग हो या कृषि हर क्षेत्र में योगदान के लिए निरंतर सक्रिय है। एमएसएमई इकाइयां औद्योगिक गतिविधियों का प्रभावी केन्द्र होने के साथ लाखों परिवारों के स्वावलंबन का आधार भी है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को समर्थ एमएसएमई विकसित मध्यप्रदेश की थीम पर मुख्यमंत्री निवास में 257 से अधिक एमएसएमई इकाइयों को उनके खाते में 169.57 करोड़ से अधिक की प्रोत्साहन राशि सिंगल क्लिक से जारी कर संबोधित कर रहे थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्टार्टअप को लगभग 28 लाख से अधिक की अनुदान राशि की प्रथम किश्त भी जारी की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को इस अवसर पर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप ने लघु उद्योग निगम की ओर से 8 करोड़ रूपए के अंतरिम लाभांश का चैक भेंट किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैतूल और आगर-मालवा के तीन उद्यमियों को औद्योगिक भूमि के लिए आवंटन-पत्र प्रदान किए और मुख्यमत्री उद्यम क्रांति योजना अंतर्गत हितलाभ वितरण भी किए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज का आयोजन महावीर जयंती के शुभ अवसर पर हो रहा है। यह भगवान महावीर के जनकल्याण और शुचिता के सिद्धांतों को साकार करने का भी प्रतीक है। प्रदेश में उद्योग-व्यापार गतिविधि और उद्यमिता प्रोत्साहित करने के लिए व्यवस्थाओं में पारदर्शिता और गति सुनिश्चित करते हुए निरंतर नवाचार जारी हैं। राज्य सरकार उद्यमियों को लिए पूंजी, भूमि और व्यवस्थाओं में सरलता कर, उनकी प्रगति की राह को आसान बना रही है। विभाग द्वारा बड़ी राशि का सिंगल क्लिक से सीधे अंतरण व्यवस्था में सुगमता और स्पष्टता का परिचायक है। पूरे देश में मार्च क्लोजिंग का वातावरण है, ऐसे में राज्य सरकार द्वारा एमएसएमई इकाइयों और उद्यमियों को राशि और सुविधा उपलब्ध कराई जा रही हैं। यह प्रदेश में नए संकल्पों के साथ नया वित्तीय वर्ष आरंभ करने का भी प्रतीक है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में भी प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में ही भारत स्वयं को सुरक्षित महसूस करते हुए प्रगति पथ पर अग्रसर है। युद्ध के दोनों पक्ष भारत का सहयोग कर रहे हैं, यह प्रधानमंत्री मोदी की कुशल नीतियों से ही संभव है। जहां एक ओर विश्व के कई देशों में पेट्रोल-डीजल, गैस की उपलब्धता प्रभावित हो रही है, वहीं हमारे देश में प्रधानमंत्री मोदी ने इनके मूल्यों पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ने दिया। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत समर्थ भी है और सक्षम भी।

    सभी क्षेत्रों में हो रही है प्रगति : मंत्री काश्यप

    सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव जनता के बीच सक्रिय होने के साथ प्रशासनिक दृष्टि से भी निरंतर गतिशील हैं। उनके व्यापक और स्पष्ट दृष्टिकोण के परिणाम स्वरूप प्रदेश उद्योग-व्यापार, कृषि, युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने सहित सभी क्षेत्रों में प्रगति कर रहा है। प्रमुख सचिव राघवेन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में विभाग में डिजिटल और पारदर्शी व्यवस्थाएं स्थापित की गई हैं। जिसके परिणामस्वरूप भूमि आवंटन प्रक्रिया को गति मिली है। प्रदेश के 25 औद्योगिक क्षेत्रों में विकास कार्य जारी हैं, साथ ही 6 नए औद्योगिक क्षेत्र भी विकसित किए जा रहे हैं। वर्तमान में प्रदेश में 7100 से अधिक स्टार्टअप पंजीकृत हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश, देश के प्रमुख स्टार्टअप राज्य के रूप में स्थापित हो रहा है। कार्यक्रम में एमएसएमई इकाई के संचालक, उद्यमी और बड़ी संख्या में स्टार्ट-अप्स मौजूद रहे।

  • लोकसभा ने दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) विधेयक को दी मंजूरी, दिवालियापन प्रक्रिया में तेज़ी

    लोकसभा ने दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) विधेयक को दी मंजूरी, दिवालियापन प्रक्रिया में तेज़ी


    नई दिल्ली। लोकसभा ने सोमवार को दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी है। यह कदम दिवालियापन प्रक्रिया में तेजी से लाने और कंपनियों के दिवालियापन मामलों के शीघ्र निपटान के उद्देश्य से उठाया गया है।

    विधि के अनुसार, किसी कंपनी के डिफॉल्ट साबित होने के बाद दिवालियापन के आवेदन को 14 दिनों के भीतर स्वीकार करने की अनिवार्य समय सीमा तय की गई है। इससे जुड़े मामलों में देरी कम होगी और समाधान प्रक्रिया तेज होगी।

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि विधेयक में 12 संशोधन प्रस्तावित किए गए हैं ताकि दिवालियापन समाधान तंत्र और मजबूत हो सके। उन्होंने कहा कि आईबीसी (IBC) प्रक्रिया में देरी का मुख्य कारण व्यापक दिवालियापन है, और इस संशोधन में दंड का प्रावधान भी शामिल है ताकि प्रक्रिया के दुरुपयोग को रोका जा सके।

    विधि ने सदन में स्पष्ट किया कि दिवालियापन संहिता का उद्देश्य कभी भी केवल ऋण वसूली तंत्र के रूप में काम करना नहीं था। उनका कहना था कि IBC ने बैंकिंग क्षेत्र के स्वास्थ्य में सुधार किया है और कंपनियों की क्रेडिट प्रोफाइल और कॉर्पोरेट गवर्नेंस को बेहतर बनाया है।

    मंत्री ने यह भी कहा कि दिवालियापन प्रक्रिया से बाहर आने वाली कंपनियों का प्रदर्शन अच्छा रहा है, और यह ढांचा संकटग्रस्त हितधारकों का समाधान करने और समझौतों फर्मों को बचाने के लिए है, न कि सिर्फ बकाया राशि वसूलने के लिए। निर्मला वादे ने जोर देते हुए कहा, “IBC का उद्देश्य कंपनियों के उद्यम मूल्य को संरक्षित करना और वित्तीय संकट का समाधान करना है, न कि ऋण वसूली का साधन।”
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  • बड़ा टेक संकट! DeepSeek का सबसे लंबा डाउनटाइम, यूजर्स परेशान

    बड़ा टेक संकट! DeepSeek का सबसे लंबा डाउनटाइम, यूजर्स परेशान

     
    नई दिल्ली आउटेज ट्रैक करने वाले प्लेटफॉर्म डाउनडिटेक्टर के अनुसार, रविवार शाम से ही उपभोक्ता ने समस्या की रिपोर्ट करना शुरू कर दिया था। इसके बाद डीपसीक एआई चैटबॉट के पेज स्टेटस ने रात 9:35 बजे पहली बार इस तकनीकी गड़बड़ी को स्वीकार किया। शुरुआत में कंपनी ने दावा किया था कि करीब दो घंटे में समस्या को ठीक कर लिया गया, लेकिन कुछ ही देर बाद फिर से सर्विस में गड़बड़ी आ गई। आख़िरकार अगली सुबह करीब 10:33 बजे एवेन्यू प्लेटफ़ॉर्म पूरी तरह से बहाल हो गया।

    इस पूरी घटना की सबसे बड़ी बात यह रही कि इतने लंबे आउटटेज़ के बावजूद अब तक कंपनी की ओर से इसके निष्कर्षों पर कोई स्पष्ट बयान नहीं आया है। इस तरह के उपभोक्ता और टेक गैजेट्स के बीच कई तरह के आर्किटेक्चर मिल रहे हैं। खास बात यह है कि जनवरी 2025 में अपना आर1 मॉडल लॉन्च करने के बाद डीपसीक एआई चैटबॉट का एपटाइम रिकॉर्ड करीब 99 प्रतिशत बताया जा रहा है, ऐसे में यह इवेंट कंपनी की वेबसाइट पर भी भरोसेमंद सवाल कर रही है।

    जनवरी 2025 में लॉन्च होने के बाद डीपसीक एआई चैटबॉट ग्लोबल लेवल पर चर्चा में आया था। इसके एडवांस्ड आर्किटेक्चरल मॉडल्स ने टेक इंडस्ट्री में हलचल मचा दी थी और सिलिकॉन वैली के कई बड़े उद्यमों के स्टॉक में गिरावट का आकलन किया गया था। उस समय यह भी कहा गया था कि होटल की वैश्विक दौड़ में अमेरिका की बढ़त को चुनौती मिल सकती है।

    हालाँकि, अभी भी डीपसीक एआई चैटबॉट का मुकाबला चैटजीपीटी, जेमिनी और क्लाउड जैसे बड़े प्लेटफॉर्म से पूरी तरह से नहीं मिला है। इसी बीच अमेरिकी कंपनी एंथ्रोपिक ने हाल ही में डीपासिक में कुछ चीनी कंपनियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

    एंथ्रोपिक का दावा है कि उनके क्लाउड मॉडल के निर्माण के माध्यम से ‘डिस्टिलेशन’ तकनीक का अवैध उपयोग किया गया। इसके लिए हजारों की संख्या में निवेशकों का रिकॉर्ड बनाया गया और लाखों स्टॉक के जरिए डेटा इकट्ठा किया गया। कंपनी ने चेतावनी दी है कि इस तरह के विकसित मॉडल मॉडलों में सुरक्षा संबंधी खामियां हो सकती हैं और इनका इस्तेमाल खतरनाक वस्तुओं जैसे साइबर हमले, निगरानी और गलत जानकारी के जरिए किया जा सकता है। इस पूरी घटना में एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया गया है कि रैपिड से हल्दी मसाला तकनीक के बीच सुरक्षा, मरम्मत और रखरखाव का महत्व है।

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव महावीर जयंती पर शोभायात्रा में हुए शामिल, मुनि श्री 108 संभव सागर महाराज का लिया आशीर्वाद

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव महावीर जयंती पर शोभायात्रा में हुए शामिल, मुनि श्री 108 संभव सागर महाराज का लिया आशीर्वाद


    भोपाल । मध्‍य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को महावीर जयंती पर श्रमण मुनि श्री 108 संभव सागर महाराज का आशीर्वाद प्राप्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भोपाल के दिगंबर एवं श्वेतांबर जैन समाज द्वारा संयुक्त तत्वावधान में निकाली जा रही भगवान महावीर स्वामी की शोभायात्रा का इतवारा पहुंचकर स्वागत कर यात्रा में शामिल हुए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुनि श्री 108 संभव सागर जी महाराज सहित अन्य मुनिगण को श्रीफल भेंट कर उनका अभिवादन किया। इस अवसर पर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप, प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी, दिगम्बर पंचायत कमेटी के अध्यक्ष पंकज जैन, सुपारी और श्वेताम्बर समाज के अध्यक्ष राजेश तांतेड़ उपस्थित थे।

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव वाराणसी में 31 मार्च को एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन में होंगे शामिल

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव वाराणसी में 31 मार्च को एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन में होंगे शामिल


    भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव वाराणसी में आयोजित “एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन 2026” में मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश की औद्योगिक क्षमताओं, पारंपरिक शिल्प, ओडीओपी और जीआई टैग उत्पादों, कृषि एवं खाद्य उत्पादों, निवेश अवसरों और पर्यटन संभावनाओं को एक साझा मंच पर प्रस्तुत करेंगे। इस सम्मेलन में दोनों राज्यों की प्रमुख ताकतें एक साथ सामने आएंगी और उत्पादन, बाजार तथा पहचान से जुड़े विभिन्न आयामों पर केंद्रित संवाद स्थापित होगा। सम्मेलन में उद्योग, शिल्प, निवेश और पर्यटन से जुड़े हितधारक एकत्रित होंगे, जहां व्यावहारिक सहयोग, बाजार विस्तार और साझा पहल पर चर्चा का स्पष्ट स्वरूप दिखाई देगा।

    काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का भ्रमण

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव की वाराणसी यात्रा काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के अध्ययन भ्रमण से होगी, जहां तीर्थ क्षेत्र में विकसित क्राउड फ्लो मैनेजमेंट, अधोसंरचना लेआउट और तीर्थयात्री प्रबंधन की व्यवस्थाओं का अवलोकन किया जाएगा। यह अनुभव धार्मिक पर्यटन स्थलों के सुव्यवस्थित विकास और आधुनिक प्रबंधन प्रणाली को समझने का आधार बनेगा।

    इसके बाद एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन स्थल पर प्रदर्शनी का अवलोकन किया जाएगा, जिसमें मध्यप्रदेश के ओडीओपी उत्पाद, जीआई टैग हस्तशिल्प, पारंपरिक वस्त्र, औद्योगिक क्षमताएं और पर्यटन संभावनाएं प्रदर्शित होंगी। यह प्रदर्शनी राज्य की आर्थिक और सांस्कृतिक विविधता को एक ही मंच पर प्रस्तुत करते हुए निवेशकों और प्रतिभागियों को प्रत्यक्ष रूप से जोड़ने का कार्य करेगी।

    सम्मेलन के मुख्य सत्र में निवेश, औद्योगिक सहयोग और ओडीओपी आधारित अर्थव्यवस्था पर केंद्रित चर्चा होगी, जहां मध्यप्रदेश की निवेश-अनुकूल नीतियों, अधोसंरचना और प्रोत्साहन तंत्र को प्रस्तुत किया जाएगा। इसी सत्र में मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के बीच एमओयू हस्ताक्षर किए जाएंगे, जिससे औद्योगिक निवेश, कौशल विकास, हस्तशिल्प संवर्धन और पर्यटन क्षेत्रों में सहयोग को औपचारिक रूप दिया जाएगा। ओडीओपी उत्पादों का आदान-प्रदान स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आएगा। दोपहर पश्चात नेटवर्किंग सत्र में उद्योग जगत, निवेशकों और नीति-निर्माताओं के बीच संवाद स्थापित होगा, जिससे संभावित निवेश और साझेदारियों को गति मिलेगी और यह सम्मेलन वास्तविक व्यावसायिक अवसरों से जुड़ता हुआ दिखाई देगा।

    समानांतर सत्रों में सहयोग के व्यावहारिक आयामों को विस्तार दिया जाएगा। संयुक्त शिल्प कार्यशाला में मध्यप्रदेश के चंदेरी और महेश्वरी शिल्पकार उत्तरप्रदेश के बनारसी सिल्क कारीगरों के साथ साझा ब्रांडिंग, बाजार विस्तार और ‘गंगा-नर्मदा क्राफ्ट कॉरिडोर’ की अवधारणा पर कार्य करेंगे, जिससे पारंपरिक शिल्प को नए बाजारों तक पहुंचाने की दिशा में ठोस पहल होगी।

    टूरिज्म राउंड टेबल मीटिंग

    टूरिज्म राउंड टेबल में वाराणसी, उज्जैन और चित्रकूट को जोड़ते हुए एक संयुक्त धार्मिक पर्यटन सर्किट विकसित करने पर विचार-विमर्श किया जाएगा। इस प्रक्रिया में इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन सहित प्रमुख हितधारकों की सहभागिता से पर्यटन को संगठित और विस्तारित स्वरूप देने की दिशा में सहमति बनेगी।

    विक्रमोत्सव महानाट्य मंचन के स्थल का अवलोकन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव वाराणसी के बी.एल.डब्ल्यू मैदान में 3 से 5 अप्रैल तक होने वाले महानाट्य विक्रमोत्सव के कार्यक्रम स्थल का मुआयना भी करेंगे।

  • OBC आरक्षण मामला: सुप्रीम कोर्ट ने बदला अपना आदेश, दो केस खुद सुनेगा, अप्रैल में होगी अहम सुनवाई

    OBC आरक्षण मामला: सुप्रीम कोर्ट ने बदला अपना आदेश, दो केस खुद सुनेगा, अप्रैल में होगी अहम सुनवाई


    भोपाल। मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण को लेकर चल रही कानूनी प्रक्रिया में नया मोड़ आया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने पहले दिए गए आदेश में संशोधन करते हुए आरक्षण से जुड़े दो मामलों को फिर से अपने पास ले लिया है। अब 13 प्रतिशत आरक्षण को होल्ड रखने के मुद्दे पर शीर्ष अदालत स्वयं सुनवाई करेगी।

    बताया जा रहा है कि 87-13 फार्मूले को चुनौती देने वाले मामले को भी रिकॉल किया गया है, जिसकी सुनवाई अप्रैल के दूसरे सप्ताह में तय की गई है।

    कई याचिकाएं हाईकोर्ट को ट्रांसफर

    इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 54 अन्य याचिकाओं को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट भेज दिया है। ओबीसी आरक्षण से जुड़ी कुल 103 याचिकाओं पर हाईकोर्ट में 2 से 15 अप्रैल के बीच नियमित सुनवाई होगी।

    52 मामलों की वापसी, दो पर SC करेगा सुनवाई

    ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने जानकारी दी कि सुप्रीम कोर्ट ने 19 फरवरी 2026 के अपने आदेश में बदलाव करते हुए 52 मामलों को वापस हाईकोर्ट भेज दिया है। हालांकि, इनमें से दो विशेष मामलों की सुनवाई अब सुप्रीम कोर्ट में ही होगी।

    पहले ट्रांसफर हुए थे सभी केस

    जानकारी के अनुसार, ओबीसी आरक्षण से जुड़े सभी लंबित मामलों को पहले मध्यप्रदेश सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर कराया गया था। ये मामले अलग-अलग बेंचों में लंबित थे। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने 19 फरवरी को आदेश जारी कर सभी मामलों को वापस हाईकोर्ट भेजते हुए निर्देश दिया था कि तीन महीने के भीतर विशेष बेंच बनाकर इनका निपटारा किया जाए।

    रिव्यू याचिका पर बदला फैसला

    ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन ने दीपक कुमार पटेल के नाम से रिव्यू याचिका दाखिल की थी। इस पर 20 मार्च को खुली अदालत में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अपने पुराने आदेश में संशोधन कर दिया। संशोधित आदेश के तहत 52 मामलों को दोबारा हाईकोर्ट भेजा गया, जबकि दो विशेष अनुमति याचिकाएं दीपक कुमार पटेल बनाम मध्यप्रदेश शासन और हरिशंकर बरोदिया बनाम मध्यप्रदेश शासन को सुप्रीम कोर्ट ने अपने पास सुनवाई के लिए रख लिया है।

    अप्रैल में फिर होगी अहम सुनवाई

    अब इन सभी मामलों में अगली सुनवाई 2 अप्रैल 2026 से मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में शुरू होगी, जबकि सुप्रीम कोर्ट में रिकॉल किए गए मामलों पर अप्रैल के दूसरे सप्ताह में सुनवाई प्रस्तावित है।

  • RR vs CSK: चेन्नई सुपर किंग्स से टकराएंगे राजस्थान रॉयल्स, जानिए मैच के दौरान कैसी रहेगी पिच

    RR vs CSK: चेन्नई सुपर किंग्स से टकराएंगे राजस्थान रॉयल्स, जानिए मैच के दौरान कैसी रहेगी पिच


    नई दिल्ली। IPL 2026 का तीसरा मुकाबला आज क्रिकेट फैंस के लिए खास होने वाला है, जब राजस्थान रॉयल्स और चेन्नई सुपर किंग्स आमने-सामने होंगे। यह रोमांचक मुकाबला गुवाहाटी के बरसापारा क्रिकेट स्टेडियम में खेली जाएगी। दोनों टीमों के बीच अब तक का रिकॉर्ड खास रहा है, जिससे इस मुकाबले के रोमांच का अंदाजा लगाया जा सकता है।

    अगर पिच की बात करें तो गुवाहाटी की यह सतह लाल मिट्टी से बनी है, जो आमतौर पर बल्लेबाजों के लिए काफी अनुकूल मानी जाती है। शुरुआत में पिच सपाट रहती है, जिससे बल्लेबाज खुलकर शॉट खेल सकते हैं और बड़े स्कोर बनने की पूरी संभावना रहती है। ऐसे में टॉप ऑर्डर बल्लेबाजों के लिए यह मैच खास साबित हो सकता है।

    हालांकि, मैच जैसे-जैसे आगे बढ़ता है, ओस का असर देखने को मिल सकता है। शाम के समय पिच परिमेय आने लगता है, जिससे गेंदबाजों को थोड़ी मदद मिलने लगती है। खासकर तेज गेंदबाजों और स्पिनरों दोनों के लिए बदल सकते हैं। यही वजह है कि टॉस जीतने वाली टीम पहले गेंदबाजी करने का फैसला ले सकती है, ताकि दूसरी पारी में ओस का फायदा उठाया जा सके।

    हेड-टू-हेड आंकड़ों पर नजर डालें तो दोनों टीमों के बीच अब तक 31 मुकाबले खेले गए हैं, जिनमें राजस्थान रॉयल्स ने 15 और चेन्नई सुपर किंग्स ने 16 मैच जीते हैं। यह आंकड़ा बताता है कि दोनों टीमों के बीच मुकाबला हमेशा कांटे का रहता है और इस बार भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल सकता है।

    टीम कॉम्बिनेशन की बात करें तो राजस्थान की कप्तानी रियान पराग के हाथों में है, जबकि चेन्नई की दावेदार रुतुराज गायकवाड़ कर रहे हैं। दोनों टीमों में कई मैच विनर खिलाड़ी मौजूद हैं, जो किसी भी समय मैच का रुख बदल सकते हैं।

    कुल मिलाकर, गुवाहाटी की यह पिच बल्लेबाजों को शुरुआत में खुलकर खेलने का मौका देगी, लेकिन जैसे-जैसे मैच आगे बढ़ेगा, गेंदबाज भी अपनी भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे में यह मुकाबला संतुलित रहने की पूरी उम्मीद है और फैंस को एक रोमांचक मैच देखने को मिल सकता है।

  • कैश नहीं कूपन! M. K. Stalin का बड़ा ऐलान, महिलाओं को ₹8000 तक की खरीदारी की सुविधा

    कैश नहीं कूपन! M. K. Stalin का बड़ा ऐलान, महिलाओं को ₹8000 तक की खरीदारी की सुविधा


    नई दिल्ली। तमिलनाडु में चुनावी सरगर्मी के बीच सत्ताधारी दल द्रविड़ मुनेत्र कड़गम ने महिलाओं को साधने के लिए बड़ा ऐलान किया है। मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने अपने घोषणापत्र में महिलाओं को ₹8,000 के कूपन देने की योजना पेश की है। इस घोषणा के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और इसे महिला वोटरों को आकर्षित करने वाला बड़ा कदम माना जा रहा है।

    सरकार ने साफ किया है कि इस योजना के तहत महिलाओं को कैश राशि नहीं दी जाएगी, बल्कि कूपन दिए जाएंगे। इन कूपन का इस्तेमाल महिलाएं अपनी ज़रूरत के घरेलू सामान खरीदने में कर सकेंगी। इसमें वाशिंग मशीन, फ्रिज, टीवी, मिक्सी जैसे रोजमर्रा के उपयोगी उपकरण शामिल हो सकते हैं। सरकार का तर्क है कि इससे महिलाओं को अपनी ज़रूरत और पसंद के अनुसार निर्णय लेने की स्वतंत्रता मिलेगी, साथ ही पैसे का सही इस्तेमाल सुनिश्चित होगा।

    मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने इस फैसले के पीछे की सोच स्पष्ट करते हुए कहा कि अगर सीधे कैश दिया जाता है, तो वह रोजमर्रा के खर्चों में खत्म हो सकता है। लेकिन कूपन सिस्टम से महिलाएं घर के लिए टिकाऊ और उपयोगी चीजें खरीद सकेंगी। इस तरह यह योजना केवल आर्थिक मदद नहीं, बल्कि घरेलू जीवन स्तर सुधारने की दिशा में भी एक प्रयास है।

    राज्य में 23 अप्रैल को होने वाले चुनाव से पहले इस घोषणा को एक चुनावी कदम माना जा रहा है। सभी राजनीतिक दल जहां अपने-अपने वादों के माध्यम से लोकसभा को लुभाने में लगे हैं, वहीं द्रविड़ मुनेत्र कड़गम का यह फैसला जरूरी पर महिला लोकसभा पर केंद्रित है। राजनीतिक विश्लेषकों का रुझान है कि यह योजना चुनावी समीकरण बदल सकती है और इसका असर वोटिंग नतीजों पर भी देखने को मिल सकता है।

    पार्टी की वरिष्ठ नेता कनिमोझी करुणानिधि ने बताया कि इस घोषणापत्र को तैयार करने से पहले राज्यभर में लोगों से सुझाव लिए गए थे। उनका कहना है कि यह योजना जनता की संस्थाओं और अनुभवों पर आधारित है, न कि केवल राजनीतिक वादों पर। इस पहल से महिलाओं को घरेलू निकायों में अधिक भागीदारी और आत्मनिर्भरता मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। इससे महिलाओं की खरीदारी क्षमता जितनी और वे अपने परिवार की संपत्तियों को बेहतर तरीके से पूरा कर पाएंगी। अब देखना दिलचस्प होगा कि यह योजना चुनावी मैदान में कितना असर पड़ेगा।

  • बिहार में सियासी भूचाल: Nitish Kumar ने MLC पद से दिया इस्तीफा, नए CM पर सस्पेंस

    बिहार में सियासी भूचाल: Nitish Kumar ने MLC पद से दिया इस्तीफा, नए CM पर सस्पेंस


    नई दिल्ली। बिहार की राजनीति में अचानक हलचल तेज हो गई, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधान परिषद यानी एमएलसी पद से इस्तीफा दे दिया। सोमवार की सुबह उन्होंने निर्वाची विधान परिषद के उपाध्यक्ष अवधेश नारायण सिंह को निर्वासित कर दिया, जिसके बाद विपक्ष की गैलरियों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। असल में, हाल ही में, उन्हें 14 दिनों के भीतर संवैधानिक संविधान के तहत चुने जाने के लिए कहा गया था। ऐसे में उनके इस कदम को प्रभावी तो माना ही जा रहा है, लेकिन इसके पीछे बड़े राजनीतिक बदलावों के संकेत भी नजर आ रहे हैं।

    इस बंदी के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि नीतीश कुमार अब मुख्यमंत्री भी क्या छोड़ेंगे। बहुमत के अनुसार, मुख्यमंत्री को विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य होना जरूरी है। ऐसे में समाजवादी समाजवादी बनने के बाद उनका सीएम पद बनना मुश्किल हो जाता है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, वह 30 अप्रैल तक मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो बिहार में एक बार फिर से सत्ता परिवर्तन देखने को मिल सकता है।

    इधर, इस घटना के बीच राजनीतिक सरगर्मी और बढ़ गई है, क्योंकि नए मुख्यमंत्री के नाम को लेकर कोई स्पष्टता सामने नहीं आई है। कई नाम चर्चा में हैं, लेकिन अभी तक कोई भी आधिकारिक मुहर नहीं लगी है। पार्टी और सहयोगी शास्त्र के बीच मठ जारी है। ऐसे में आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में बड़ा रिवर्सफर देखने को मिल सकता है।

    इस बीच एक और बड़ी घटना सामने आई है। बांकीपुर सीट से विधायक रहे नितिन नबीन ने भी अपना पद छोड़ दिया है, क्योंकि वे भी राज्यसभा के लिए चुने गए हैं। उनकी बर्खास्तगी के बाद यह सीट खाली हो गई और यहां नए अभ्यर्थियों की चर्चा तेजी से हुई। इस सीट के लिए संजय मयूख का नाम सबसे पहले बताया जा रहा है, हालांकि पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

    राजनीतिक सिद्धांतों का मानना ​​है कि नीतीश कुमार का यह कदम सिर्फ संवैधानिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि एक बड़े राजनीतिक बदलाव की भी भूमिका हो सकती है। बिहार में गठबंधन की राजनीति और आगामी गठबंधन को देखते हुए इस फैसले से कई नए समीकरण पैदा हो सकते हैं। देखें, पूरे राज्य की नजर इस पर टिकी है कि अगले मुख्यमंत्री की बात कौन होगी और सत्ता की कमान उनके हाथों में होगी।

  • उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल: मायावती का बयान, बंटवारे की बात से बढ़ी गर्मी

    उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल: मायावती का बयान, बंटवारे की बात से बढ़ी गर्मी


    नई दिल्ली उत्तर प्रदेश की नागरिकता में इन दिनों हलचल तेज है। अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे के पहले चरण के उद्घाटन के बाद शुरू हुई राजनीतिक बयानबाजी अब राज्य के गरीबों तक पहुंच गई है। इसी के बीच मुस्लिम समाज के प्रमुखों में से एक ने बड़ा प्रतिबंध लगा दिया।

    सत्ता में आने पर पश्चिमी यूपी अलग राज्य बनाने की बात

    बसपा ने साफ कहा कि अगर उनकी सरकार सत्ता में आ गई तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अलग राज्य बनाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स प्लेटफॉर्म पर पोस्ट कर दावा किया कि एयरपोर्ट की योजना और शुरुआती काम उनके कार्यकाल में ही शुरू हुए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय केंद्र में रही कांग्रेस और राज्य की समाजवादी पार्टी सरकार ने इस परियोजना में देरी की।

    हाई कोर्ट बेंच की मांग भी दोगुनी

    पश्चिमी यूपी में अलग हाई कोर्ट बेंच की मांग को लेकर भी बैस्ट ने अपना बयान जारी किया। उनका कहना है कि इस क्षेत्र के लोगों को न्याय मिलना आसान होगा और व्यवस्था व्यवस्था बेहतर होगी।

    सबसे पहले भी उठी थी कारोबार की मांग

    यह पहला मौका नहीं है जब यूपी के रिश्तों की बात सामने आई हो। वर्ष 2011 में मायावती सरकार ने राज्य को चार विचारधाराओं में ग्लासगो का प्रस्ताव पास कर केंद्र को भेजा था, लेकिन उस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी।

    बीजेपी और एसपी के बीच बयानबाजी तेज

    इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच भी जंग तेज हो गई है। दोनों दल एक-दूसरे पर विकास और को-सेल को लेकर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं।

    क्या असर होगा

    यदि उत्तर प्रदेश का बंटवारा होता है, तो इसमें आधारभूत संरचना, विकास की परिभाषा और राजनीतिक पहलू शामिल हैं। हालाँकि, किसी भी नए राज्य के गठन के लिए केंद्र सरकार की मंजूरी जरूरी है, इसलिए यह प्रक्रिया आसान नहीं है।