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  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव वाराणसी में 31 मार्च को एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन में होंगे शामिल

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव वाराणसी में 31 मार्च को एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन में होंगे शामिल


    भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव वाराणसी में आयोजित “एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन 2026” में मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश की औद्योगिक क्षमताओं, पारंपरिक शिल्प, ओडीओपी और जीआई टैग उत्पादों, कृषि एवं खाद्य उत्पादों, निवेश अवसरों और पर्यटन संभावनाओं को एक साझा मंच पर प्रस्तुत करेंगे। इस सम्मेलन में दोनों राज्यों की प्रमुख ताकतें एक साथ सामने आएंगी और उत्पादन, बाजार तथा पहचान से जुड़े विभिन्न आयामों पर केंद्रित संवाद स्थापित होगा। सम्मेलन में उद्योग, शिल्प, निवेश और पर्यटन से जुड़े हितधारक एकत्रित होंगे, जहां व्यावहारिक सहयोग, बाजार विस्तार और साझा पहल पर चर्चा का स्पष्ट स्वरूप दिखाई देगा।

    काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का भ्रमण

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव की वाराणसी यात्रा काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के अध्ययन भ्रमण से होगी, जहां तीर्थ क्षेत्र में विकसित क्राउड फ्लो मैनेजमेंट, अधोसंरचना लेआउट और तीर्थयात्री प्रबंधन की व्यवस्थाओं का अवलोकन किया जाएगा। यह अनुभव धार्मिक पर्यटन स्थलों के सुव्यवस्थित विकास और आधुनिक प्रबंधन प्रणाली को समझने का आधार बनेगा।

    इसके बाद एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन स्थल पर प्रदर्शनी का अवलोकन किया जाएगा, जिसमें मध्यप्रदेश के ओडीओपी उत्पाद, जीआई टैग हस्तशिल्प, पारंपरिक वस्त्र, औद्योगिक क्षमताएं और पर्यटन संभावनाएं प्रदर्शित होंगी। यह प्रदर्शनी राज्य की आर्थिक और सांस्कृतिक विविधता को एक ही मंच पर प्रस्तुत करते हुए निवेशकों और प्रतिभागियों को प्रत्यक्ष रूप से जोड़ने का कार्य करेगी।

    सम्मेलन के मुख्य सत्र में निवेश, औद्योगिक सहयोग और ओडीओपी आधारित अर्थव्यवस्था पर केंद्रित चर्चा होगी, जहां मध्यप्रदेश की निवेश-अनुकूल नीतियों, अधोसंरचना और प्रोत्साहन तंत्र को प्रस्तुत किया जाएगा। इसी सत्र में मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के बीच एमओयू हस्ताक्षर किए जाएंगे, जिससे औद्योगिक निवेश, कौशल विकास, हस्तशिल्प संवर्धन और पर्यटन क्षेत्रों में सहयोग को औपचारिक रूप दिया जाएगा। ओडीओपी उत्पादों का आदान-प्रदान स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आएगा। दोपहर पश्चात नेटवर्किंग सत्र में उद्योग जगत, निवेशकों और नीति-निर्माताओं के बीच संवाद स्थापित होगा, जिससे संभावित निवेश और साझेदारियों को गति मिलेगी और यह सम्मेलन वास्तविक व्यावसायिक अवसरों से जुड़ता हुआ दिखाई देगा।

    समानांतर सत्रों में सहयोग के व्यावहारिक आयामों को विस्तार दिया जाएगा। संयुक्त शिल्प कार्यशाला में मध्यप्रदेश के चंदेरी और महेश्वरी शिल्पकार उत्तरप्रदेश के बनारसी सिल्क कारीगरों के साथ साझा ब्रांडिंग, बाजार विस्तार और ‘गंगा-नर्मदा क्राफ्ट कॉरिडोर’ की अवधारणा पर कार्य करेंगे, जिससे पारंपरिक शिल्प को नए बाजारों तक पहुंचाने की दिशा में ठोस पहल होगी।

    टूरिज्म राउंड टेबल मीटिंग

    टूरिज्म राउंड टेबल में वाराणसी, उज्जैन और चित्रकूट को जोड़ते हुए एक संयुक्त धार्मिक पर्यटन सर्किट विकसित करने पर विचार-विमर्श किया जाएगा। इस प्रक्रिया में इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन सहित प्रमुख हितधारकों की सहभागिता से पर्यटन को संगठित और विस्तारित स्वरूप देने की दिशा में सहमति बनेगी।

    विक्रमोत्सव महानाट्य मंचन के स्थल का अवलोकन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव वाराणसी के बी.एल.डब्ल्यू मैदान में 3 से 5 अप्रैल तक होने वाले महानाट्य विक्रमोत्सव के कार्यक्रम स्थल का मुआयना भी करेंगे।

  • OBC आरक्षण मामला: सुप्रीम कोर्ट ने बदला अपना आदेश, दो केस खुद सुनेगा, अप्रैल में होगी अहम सुनवाई

    OBC आरक्षण मामला: सुप्रीम कोर्ट ने बदला अपना आदेश, दो केस खुद सुनेगा, अप्रैल में होगी अहम सुनवाई


    भोपाल। मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण को लेकर चल रही कानूनी प्रक्रिया में नया मोड़ आया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने पहले दिए गए आदेश में संशोधन करते हुए आरक्षण से जुड़े दो मामलों को फिर से अपने पास ले लिया है। अब 13 प्रतिशत आरक्षण को होल्ड रखने के मुद्दे पर शीर्ष अदालत स्वयं सुनवाई करेगी।

    बताया जा रहा है कि 87-13 फार्मूले को चुनौती देने वाले मामले को भी रिकॉल किया गया है, जिसकी सुनवाई अप्रैल के दूसरे सप्ताह में तय की गई है।

    कई याचिकाएं हाईकोर्ट को ट्रांसफर

    इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 54 अन्य याचिकाओं को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट भेज दिया है। ओबीसी आरक्षण से जुड़ी कुल 103 याचिकाओं पर हाईकोर्ट में 2 से 15 अप्रैल के बीच नियमित सुनवाई होगी।

    52 मामलों की वापसी, दो पर SC करेगा सुनवाई

    ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने जानकारी दी कि सुप्रीम कोर्ट ने 19 फरवरी 2026 के अपने आदेश में बदलाव करते हुए 52 मामलों को वापस हाईकोर्ट भेज दिया है। हालांकि, इनमें से दो विशेष मामलों की सुनवाई अब सुप्रीम कोर्ट में ही होगी।

    पहले ट्रांसफर हुए थे सभी केस

    जानकारी के अनुसार, ओबीसी आरक्षण से जुड़े सभी लंबित मामलों को पहले मध्यप्रदेश सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर कराया गया था। ये मामले अलग-अलग बेंचों में लंबित थे। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने 19 फरवरी को आदेश जारी कर सभी मामलों को वापस हाईकोर्ट भेजते हुए निर्देश दिया था कि तीन महीने के भीतर विशेष बेंच बनाकर इनका निपटारा किया जाए।

    रिव्यू याचिका पर बदला फैसला

    ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन ने दीपक कुमार पटेल के नाम से रिव्यू याचिका दाखिल की थी। इस पर 20 मार्च को खुली अदालत में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अपने पुराने आदेश में संशोधन कर दिया। संशोधित आदेश के तहत 52 मामलों को दोबारा हाईकोर्ट भेजा गया, जबकि दो विशेष अनुमति याचिकाएं दीपक कुमार पटेल बनाम मध्यप्रदेश शासन और हरिशंकर बरोदिया बनाम मध्यप्रदेश शासन को सुप्रीम कोर्ट ने अपने पास सुनवाई के लिए रख लिया है।

    अप्रैल में फिर होगी अहम सुनवाई

    अब इन सभी मामलों में अगली सुनवाई 2 अप्रैल 2026 से मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में शुरू होगी, जबकि सुप्रीम कोर्ट में रिकॉल किए गए मामलों पर अप्रैल के दूसरे सप्ताह में सुनवाई प्रस्तावित है।

  • RR vs CSK: चेन्नई सुपर किंग्स से टकराएंगे राजस्थान रॉयल्स, जानिए मैच के दौरान कैसी रहेगी पिच

    RR vs CSK: चेन्नई सुपर किंग्स से टकराएंगे राजस्थान रॉयल्स, जानिए मैच के दौरान कैसी रहेगी पिच


    नई दिल्ली। IPL 2026 का तीसरा मुकाबला आज क्रिकेट फैंस के लिए खास होने वाला है, जब राजस्थान रॉयल्स और चेन्नई सुपर किंग्स आमने-सामने होंगे। यह रोमांचक मुकाबला गुवाहाटी के बरसापारा क्रिकेट स्टेडियम में खेली जाएगी। दोनों टीमों के बीच अब तक का रिकॉर्ड खास रहा है, जिससे इस मुकाबले के रोमांच का अंदाजा लगाया जा सकता है।

    अगर पिच की बात करें तो गुवाहाटी की यह सतह लाल मिट्टी से बनी है, जो आमतौर पर बल्लेबाजों के लिए काफी अनुकूल मानी जाती है। शुरुआत में पिच सपाट रहती है, जिससे बल्लेबाज खुलकर शॉट खेल सकते हैं और बड़े स्कोर बनने की पूरी संभावना रहती है। ऐसे में टॉप ऑर्डर बल्लेबाजों के लिए यह मैच खास साबित हो सकता है।

    हालांकि, मैच जैसे-जैसे आगे बढ़ता है, ओस का असर देखने को मिल सकता है। शाम के समय पिच परिमेय आने लगता है, जिससे गेंदबाजों को थोड़ी मदद मिलने लगती है। खासकर तेज गेंदबाजों और स्पिनरों दोनों के लिए बदल सकते हैं। यही वजह है कि टॉस जीतने वाली टीम पहले गेंदबाजी करने का फैसला ले सकती है, ताकि दूसरी पारी में ओस का फायदा उठाया जा सके।

    हेड-टू-हेड आंकड़ों पर नजर डालें तो दोनों टीमों के बीच अब तक 31 मुकाबले खेले गए हैं, जिनमें राजस्थान रॉयल्स ने 15 और चेन्नई सुपर किंग्स ने 16 मैच जीते हैं। यह आंकड़ा बताता है कि दोनों टीमों के बीच मुकाबला हमेशा कांटे का रहता है और इस बार भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल सकता है।

    टीम कॉम्बिनेशन की बात करें तो राजस्थान की कप्तानी रियान पराग के हाथों में है, जबकि चेन्नई की दावेदार रुतुराज गायकवाड़ कर रहे हैं। दोनों टीमों में कई मैच विनर खिलाड़ी मौजूद हैं, जो किसी भी समय मैच का रुख बदल सकते हैं।

    कुल मिलाकर, गुवाहाटी की यह पिच बल्लेबाजों को शुरुआत में खुलकर खेलने का मौका देगी, लेकिन जैसे-जैसे मैच आगे बढ़ेगा, गेंदबाज भी अपनी भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे में यह मुकाबला संतुलित रहने की पूरी उम्मीद है और फैंस को एक रोमांचक मैच देखने को मिल सकता है।

  • कैश नहीं कूपन! M. K. Stalin का बड़ा ऐलान, महिलाओं को ₹8000 तक की खरीदारी की सुविधा

    कैश नहीं कूपन! M. K. Stalin का बड़ा ऐलान, महिलाओं को ₹8000 तक की खरीदारी की सुविधा


    नई दिल्ली। तमिलनाडु में चुनावी सरगर्मी के बीच सत्ताधारी दल द्रविड़ मुनेत्र कड़गम ने महिलाओं को साधने के लिए बड़ा ऐलान किया है। मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने अपने घोषणापत्र में महिलाओं को ₹8,000 के कूपन देने की योजना पेश की है। इस घोषणा के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और इसे महिला वोटरों को आकर्षित करने वाला बड़ा कदम माना जा रहा है।

    सरकार ने साफ किया है कि इस योजना के तहत महिलाओं को कैश राशि नहीं दी जाएगी, बल्कि कूपन दिए जाएंगे। इन कूपन का इस्तेमाल महिलाएं अपनी ज़रूरत के घरेलू सामान खरीदने में कर सकेंगी। इसमें वाशिंग मशीन, फ्रिज, टीवी, मिक्सी जैसे रोजमर्रा के उपयोगी उपकरण शामिल हो सकते हैं। सरकार का तर्क है कि इससे महिलाओं को अपनी ज़रूरत और पसंद के अनुसार निर्णय लेने की स्वतंत्रता मिलेगी, साथ ही पैसे का सही इस्तेमाल सुनिश्चित होगा।

    मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने इस फैसले के पीछे की सोच स्पष्ट करते हुए कहा कि अगर सीधे कैश दिया जाता है, तो वह रोजमर्रा के खर्चों में खत्म हो सकता है। लेकिन कूपन सिस्टम से महिलाएं घर के लिए टिकाऊ और उपयोगी चीजें खरीद सकेंगी। इस तरह यह योजना केवल आर्थिक मदद नहीं, बल्कि घरेलू जीवन स्तर सुधारने की दिशा में भी एक प्रयास है।

    राज्य में 23 अप्रैल को होने वाले चुनाव से पहले इस घोषणा को एक चुनावी कदम माना जा रहा है। सभी राजनीतिक दल जहां अपने-अपने वादों के माध्यम से लोकसभा को लुभाने में लगे हैं, वहीं द्रविड़ मुनेत्र कड़गम का यह फैसला जरूरी पर महिला लोकसभा पर केंद्रित है। राजनीतिक विश्लेषकों का रुझान है कि यह योजना चुनावी समीकरण बदल सकती है और इसका असर वोटिंग नतीजों पर भी देखने को मिल सकता है।

    पार्टी की वरिष्ठ नेता कनिमोझी करुणानिधि ने बताया कि इस घोषणापत्र को तैयार करने से पहले राज्यभर में लोगों से सुझाव लिए गए थे। उनका कहना है कि यह योजना जनता की संस्थाओं और अनुभवों पर आधारित है, न कि केवल राजनीतिक वादों पर। इस पहल से महिलाओं को घरेलू निकायों में अधिक भागीदारी और आत्मनिर्भरता मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। इससे महिलाओं की खरीदारी क्षमता जितनी और वे अपने परिवार की संपत्तियों को बेहतर तरीके से पूरा कर पाएंगी। अब देखना दिलचस्प होगा कि यह योजना चुनावी मैदान में कितना असर पड़ेगा।

  • बिहार में सियासी भूचाल: Nitish Kumar ने MLC पद से दिया इस्तीफा, नए CM पर सस्पेंस

    बिहार में सियासी भूचाल: Nitish Kumar ने MLC पद से दिया इस्तीफा, नए CM पर सस्पेंस


    नई दिल्ली। बिहार की राजनीति में अचानक हलचल तेज हो गई, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधान परिषद यानी एमएलसी पद से इस्तीफा दे दिया। सोमवार की सुबह उन्होंने निर्वाची विधान परिषद के उपाध्यक्ष अवधेश नारायण सिंह को निर्वासित कर दिया, जिसके बाद विपक्ष की गैलरियों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। असल में, हाल ही में, उन्हें 14 दिनों के भीतर संवैधानिक संविधान के तहत चुने जाने के लिए कहा गया था। ऐसे में उनके इस कदम को प्रभावी तो माना ही जा रहा है, लेकिन इसके पीछे बड़े राजनीतिक बदलावों के संकेत भी नजर आ रहे हैं।

    इस बंदी के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि नीतीश कुमार अब मुख्यमंत्री भी क्या छोड़ेंगे। बहुमत के अनुसार, मुख्यमंत्री को विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य होना जरूरी है। ऐसे में समाजवादी समाजवादी बनने के बाद उनका सीएम पद बनना मुश्किल हो जाता है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, वह 30 अप्रैल तक मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो बिहार में एक बार फिर से सत्ता परिवर्तन देखने को मिल सकता है।

    इधर, इस घटना के बीच राजनीतिक सरगर्मी और बढ़ गई है, क्योंकि नए मुख्यमंत्री के नाम को लेकर कोई स्पष्टता सामने नहीं आई है। कई नाम चर्चा में हैं, लेकिन अभी तक कोई भी आधिकारिक मुहर नहीं लगी है। पार्टी और सहयोगी शास्त्र के बीच मठ जारी है। ऐसे में आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में बड़ा रिवर्सफर देखने को मिल सकता है।

    इस बीच एक और बड़ी घटना सामने आई है। बांकीपुर सीट से विधायक रहे नितिन नबीन ने भी अपना पद छोड़ दिया है, क्योंकि वे भी राज्यसभा के लिए चुने गए हैं। उनकी बर्खास्तगी के बाद यह सीट खाली हो गई और यहां नए अभ्यर्थियों की चर्चा तेजी से हुई। इस सीट के लिए संजय मयूख का नाम सबसे पहले बताया जा रहा है, हालांकि पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

    राजनीतिक सिद्धांतों का मानना ​​है कि नीतीश कुमार का यह कदम सिर्फ संवैधानिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि एक बड़े राजनीतिक बदलाव की भी भूमिका हो सकती है। बिहार में गठबंधन की राजनीति और आगामी गठबंधन को देखते हुए इस फैसले से कई नए समीकरण पैदा हो सकते हैं। देखें, पूरे राज्य की नजर इस पर टिकी है कि अगले मुख्यमंत्री की बात कौन होगी और सत्ता की कमान उनके हाथों में होगी।

  • उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल: मायावती का बयान, बंटवारे की बात से बढ़ी गर्मी

    उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल: मायावती का बयान, बंटवारे की बात से बढ़ी गर्मी


    नई दिल्ली उत्तर प्रदेश की नागरिकता में इन दिनों हलचल तेज है। अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे के पहले चरण के उद्घाटन के बाद शुरू हुई राजनीतिक बयानबाजी अब राज्य के गरीबों तक पहुंच गई है। इसी के बीच मुस्लिम समाज के प्रमुखों में से एक ने बड़ा प्रतिबंध लगा दिया।

    सत्ता में आने पर पश्चिमी यूपी अलग राज्य बनाने की बात

    बसपा ने साफ कहा कि अगर उनकी सरकार सत्ता में आ गई तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अलग राज्य बनाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स प्लेटफॉर्म पर पोस्ट कर दावा किया कि एयरपोर्ट की योजना और शुरुआती काम उनके कार्यकाल में ही शुरू हुए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय केंद्र में रही कांग्रेस और राज्य की समाजवादी पार्टी सरकार ने इस परियोजना में देरी की।

    हाई कोर्ट बेंच की मांग भी दोगुनी

    पश्चिमी यूपी में अलग हाई कोर्ट बेंच की मांग को लेकर भी बैस्ट ने अपना बयान जारी किया। उनका कहना है कि इस क्षेत्र के लोगों को न्याय मिलना आसान होगा और व्यवस्था व्यवस्था बेहतर होगी।

    सबसे पहले भी उठी थी कारोबार की मांग

    यह पहला मौका नहीं है जब यूपी के रिश्तों की बात सामने आई हो। वर्ष 2011 में मायावती सरकार ने राज्य को चार विचारधाराओं में ग्लासगो का प्रस्ताव पास कर केंद्र को भेजा था, लेकिन उस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी।

    बीजेपी और एसपी के बीच बयानबाजी तेज

    इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच भी जंग तेज हो गई है। दोनों दल एक-दूसरे पर विकास और को-सेल को लेकर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं।

    क्या असर होगा

    यदि उत्तर प्रदेश का बंटवारा होता है, तो इसमें आधारभूत संरचना, विकास की परिभाषा और राजनीतिक पहलू शामिल हैं। हालाँकि, किसी भी नए राज्य के गठन के लिए केंद्र सरकार की मंजूरी जरूरी है, इसलिए यह प्रक्रिया आसान नहीं है।

  • राजधानी में युवा विधायकों का मंथन: 2047 के विकसित भारत का रोडमैप, अनुशासन-लोकतंत्र और जनसेवा पर जोर

    राजधानी में युवा विधायकों का मंथन: 2047 के विकसित भारत का रोडमैप, अनुशासन-लोकतंत्र और जनसेवा पर जोर


    भोपाल । राजधानी भोपाल में आयोजित युवा विधायक सम्मेलन में सोमवार को मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के कुल 45 युवा जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया। यह दो दिवसीय सम्मेलन न केवल अनुभव साझा करने का मंच बना, बल्कि लोकतंत्र, विकास और राजनीतिक मूल्यों पर गंभीर मंथन का अवसर भी साबित हुआ। सम्मेलन के दौरान विभिन्न वक्ताओं ने अपने विचार रखते हुए राजनीति में अनुशासन, संवाद, पारदर्शिता और जनसेवा की अहमियत पर जोर दिया।

    युवा विधायकों को जिम्मेदार नेतृत्व का संदेश
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में युवा विधायकों को जिम्मेदार नेतृत्व का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि राजनीति में सफलता केवल पद पाने से नहीं, बल्कि जनता के बीच निरंतर सक्रिय रहने और उनके विश्वास को बनाए रखने से मिलती है। उन्होंने विनम्रता को जनप्रतिनिधि का सबसे बड़ा गुण बताते हुए कहा कि अपने क्षेत्र की अच्छाइयों के साथ उसकी कमियों को समझना भी जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि आज पूरी दुनिया भारत की ओर देख रही है, क्योंकि देश 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। ऐसे समय में जनप्रतिनिधियों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

    लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने पर जोर
    नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने पर जोर देते हुए छात्र संघ चुनावों की बहाली की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि नेतृत्व की असली शुरुआत कॉलेज जीवन से होती है, जहां युवाओं में सिस्टम को समझने और उससे सवाल करने की ऊर्जा होती है। उनके अनुसार, यदि छात्र राजनीति को प्रोत्साहन मिलेगा तो देश में लोकतंत्र और अधिक मजबूत होगा। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव जीतना ही सब कुछ नहीं है, बल्कि जनता के साथ दिल से जुड़ाव बनाना ज्यादा जरूरी है।

    आधुनिक राजनीति में सोशल मीडिया की भूमिका
    मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने आधुनिक राजनीति में सोशल मीडिया की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया एक शक्तिशाली माध्यम है, जो सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह से प्रभाव डाल सकता है। इसलिए जनप्रतिनिधियों को अपनी सोशल मीडिया टीम को जिम्मेदार और सकारात्मक बनाना चाहिए। उन्होंने सलाह दी कि आलोचनाओं से घबराने के बजाय सकारात्मक कार्यों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, क्योंकि अंततः जनता सच्चाई को पहचानती है।

    अन्‍य विधायकों का संबोधन
    सम्मेलन में राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने संसदीय परंपराओं और संवाद की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध होना स्वाभाविक है, लेकिन वह तार्किक और रचनात्मक होना चाहिए। उन्होंने युवा विधायकों को सलाह दी कि वे सदन में अधिक समय बिताएं, अनुभवी नेताओं के विचार सुनें और अध्ययन के आधार पर अपनी पहचान बनाएं।

    विभिन्न विधायकों ने अपने-अपने अनुभव और सुझाव साझा किए। राजस्थान के विधायक गुरवीर सिंह ने खेलों के विकास पर जोर देते हुए कहा कि हर राज्य को कम से कम एक खेल को प्राथमिकता देनी चाहिए, जैसे ओडिशा ने हॉकी को अपनाया है। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में अपने प्रयासों का जिक्र करते हुए बताया कि उन्होंने अपने क्षेत्र में कई पुस्तकालय स्थापित किए हैं, जिससे युवाओं को पढ़ाई के बेहतर अवसर मिल रहे हैं।

    सतना के विधायक सिद्धार्थ कुशवाह ने लोकतंत्र की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या जनता का विश्वास आज भी राजनीतिक व्यवस्था में बना हुआ है। उन्होंने कहा कि चुनावों में बढ़ते खर्च और अनैतिक तरीकों से लोकतंत्र की गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है। उनके अनुसार, 2047 तक देश को मजबूत बनाने के लिए राजनीतिक व्यवस्था में सुधार जरूरी है।

    नेपानगर की विधायक मंजू दादू ने समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को अपने क्षेत्र में ऐसे लोगों की पहचान करनी चाहिए, जिन्हें सबसे ज्यादा मदद की जरूरत है, और उनके साथ संवाद बढ़ाना चाहिए। इसी तरह, चाचौड़ा की विधायक प्रियंका मीणा ने कहा कि विधायक जनता और सरकार के बीच एक सेतु का काम करता है, इसलिए उसे दोनों के बीच प्रभावी संवाद सुनिश्चित करना चाहिए।

    भोपाल उत्तर के विधायक आतिफ अकील ने प्रशासनिक स्तर पर आने वाली चुनौतियों की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि कई बार अधिकारी जनप्रतिनिधियों को अपेक्षित सहयोग नहीं देते, जिससे विकास कार्य प्रभावित होते हैं। वहीं, छत्तीसगढ़ की विधायक हर्षिता स्वामी बघेल ने नक्सल समस्या को लेकर कहा कि अभी इसे पूरी तरह समाप्त घोषित करना जल्दबाजी होगी।

    सम्मेलन का समापन पारंपरिक लोक नृत्य और समूह फोटो के साथ हुआ। दो दिन तक चलने वाले इस कार्यक्रम में कुल पांच सत्र आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें लोकतंत्र में नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने और ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने में युवा विधायकों की भूमिका पर चर्चा हो रही है। 31 मार्च को दूसरे दिन ‘विकसित भारत 2047: युवा विधायकों के दायित्व एवं चुनौतियां’ विषय पर मंथन होगा।

  • गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज पलक मुच्छल, जानें सिंगर से जुड़ा दिलचस्प टूरिज्म किस्सा

    गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज पलक मुच्छल, जानें सिंगर से जुड़ा दिलचस्प टूरिज्म किस्सा


    नई दिल्ली  बॉलीवुड की मशहूर सिंगर पलक मुच्छल (पलक मुच्छल) हमेशा घर में रहती हैं, कभी अपने शो की वजह से तो कभी अपने शो की चैरिटी के कारण। आज सिंगर पाल मुछल अपना जन्मदिन मना रही हैं तो आज इस खास दिन पर उनके करियर और उनके अनुयायियों से जुड़ी कुछ ऐसी बातें हैं जो उनके परदा कलाकार हैं, रैना आज भी कई लोग आनंदित हैं।

    पलक मुच्छल (पलक मुच्छल) का प्रसिद्ध गायक
    अपने करियर की शुरुआत पला मुचल ने बचपन से ही कर ली थी। उन्होंने 4 साल की उम्र में भजन और देशभक्त गीत गाना शुरू कर दिया था। 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान उन्होंने स्टेज शो करके मृतकों के परिजनों को धन मुहैया कराया, जिससे उन्हें पहचान मिली। इसके बाद उन्होंने जर्नलिस्ट में कई चैरिटी कॉन्सर्ट किए। उनकी प्रतिभा को देखते हुए उन्हें बॉलीवुड में गानों का मौका मिला और उन्होंने फिल्मों में अपनी सुरीली आवाज से खास पहचान बनाई। उनकी मेहनत और लगन ने उन्हें एक सफल गायक बना दिया।

    पला मुच्छल के गाने
    सिंगर ने कई बेहतरीन गाने बनाए हैं। जैसे चाहूं मैं या ना, कौन हूं, मेरी आशिकी, ‘सनम तेरी कलम’, ‘इक मुलाकात’, ‘देखा हजारों दफा’ और ‘प्रेम रत्न धन पायो’ जैसे सुपरहिट गाने गाए हैं। इन प्यारे ने उन्हें बॉलीवुड के टॉप सिंगर्स में शामिल किया। उनकी आवाज में एक खास संरचना और समानता गहराई है, जो सीधे दिल को छू जाती है।

    इस एक पल ने बदल दी लाइफ
    पाल बहुत कम उम्र से ही सुपरमार्केट में ही मंदों की मदद करती है। उन्होंने कहा, बचपन में ट्रेन से यात्रा के दौरान उनकी बातचीत बच्चों से हुई। ये वो पल था, जब उनकी जिंदगी बदल गई। उसी दिन उन्होंने खुद से वादा किया कि वो एक दिन उनकी मदद जरूर करेंगे। अब वो अपनी कमाई का काफी हिस्सा जिंदगी को बचाने में लगाती हैं।

    चैरिटी के लिए शो करते हैं
    पला मुच्छल ने भारत और फिल्म जगत में कई लाइव शोज किए हैं। उनके कॉन्सर्ट में बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं और उनके प्रशंसकों का आनंद लेते हैं। खास बात यह है कि उनके कई शो चैरिटी के लिए होते हैं, जिससे वे समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी भी निभाते हैं।

    पलक मुच्छल ने भारत और अपने बाहरी उद्यम बच्चों की मदद के लिए ‘पलक पलाश चैरिटेबल फाउंडेशन’ की स्थापना की। करीब 3800 हार्ट सर्जरी के लिए उन्हें पैसे से संबंधित विशेषज्ञ हैं। उनकी प्रतिभा और समाज सेवा के लिए कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। उन्हें गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी जगह मिली है, क्योंकि उन्होंने सबसे ज्यादा चैरिटी कॉन्सर्ट करने का रिकॉर्ड बनाया है।

  • IPL 2026 में रोहित शर्मा का बड़ा धमाका, विराट कोहली का रिकॉर्ड तोड़कर बने नंबर 1

    IPL 2026 में रोहित शर्मा का बड़ा धमाका, विराट कोहली का रिकॉर्ड तोड़कर बने नंबर 1


    नई दिल्ली इंडियन प्रीमियर लीग 2026 में रोहित शर्मा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए एक बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। मुंबई इंडियंस के इस स्टार सुपरस्टार ने विराट कोहली को पीछे छोड़ नया कीर्तिमान बनाया है।

    एक टीम के सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज बने

    रोहित शर्मा अब आईपीएल इतिहास में एक टीम के खिलाफ सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज बन गए हैं। उन्होंने कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ 1161 रन बनाए हैं। इससे पहले यह रिकॉर्ड विराट कोहली के नाम था, पंजाब किंग्स के खिलाफ 1159 रन बनाए थे। इतना ही नहीं, रोहित ने इस मामले में डेविड वॉर्नर के खिलाफ भी पीछे छोड़ दिया, जहां नाम केकेआर के 1093 रन दर्ज हैं।

    78 रेस्तरां की पारी से असावधान जीत

    इस गुट में रोहित शर्मा का शानदार फॉर्म देखने को मिला। उन्होंने 38 ऑटोमोबाइल्स में 78 रेलवे की अंतिम फिल्में बनाईं, जिनमें 6 कंपनियां और 6 कंपनियां शामिल थीं। उनके साथ रयान रिकेल्टन ने भी बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 43 गेंदों में 81 रन बनाए। दोनों ने पहले विकेट के लिए 148 रन बनाकर टीम को मजबूत शुरुआत दी।

    मुंबई इंडियंस ने ऐतिहासिक रन चेज़ बनाया

    221 रन के बड़े लक्ष्य का पीछा करते हुए मुंबई इंडियंस ने 19.1 ओवर में 4 विकेट खोकर मैच अपने नाम किया। यह आईपीएल इतिहास में मुंबई का सबसे बड़ा सफल रन चेज भी बन गया है।

    केकेआर की भी रही दमदार बैटल

    इससे पहले कोलकाता नाइट राइडर्स ने 20 ओवर में 220 रन बनाए थे। टीम की ओर से अजिंक्य लेफ्ट ने 67 रनों की शानदार पारी खेली। वहीं फिन एलन ने 37 रन बनाये और अंग्रक्ष रघुवंशी ने 51 विकेट का योगदान दिया। अंत में रिंकू सिंह ने 33 रन बनाए।

  • पीएम मोदी की पहल से उत्साहित किसान, ‘मन की बात’ में मिला मछली पालन को बढ़ावा

    पीएम मोदी की पहल से उत्साहित किसान, ‘मन की बात’ में मिला मछली पालन को बढ़ावा


    नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय कार्यक्रम मन की में मछली पालन का जिक्र होने की बात के बाद कर्नाटक के बेलगावी जिले के किसानों में खुशी की लहर दौड़ गई। कार्यक्रम में एक स्थानीय किसान के उद्यम के संचालक ने ग्रामीण उद्यमों को नई पहचान दी है।

    छोटे किसानों को मिली राष्ट्रीय पहचान

    बेलगावी तालुक के बोडाक्यतनट्टी गांव के युवा किसान राजेश लिंग हुद्दार ने इस उल्लेख को अपने लिए गौरव का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि उनके काम को राष्ट्रीय मंच पर पहचान मिलना न सिर्फ उनके लिए है, बल्कि स्टार्स के छोटे किसानों के लिए भी प्रेरणा है।

    मछली पालन को बढ़ावा

    हुद्दार पिछले तीन वर्षों से मछली पालन का काम कर रहे हैं। उनका मानना ​​है कि प्रधानमंत्री इस क्षेत्र का जिक्र करने से मछली पालन को एक मुर्गी और मछली के रूप में पहचानते हैं। इस क्षेत्र में इस क्षेत्र में उत्साह का स्तर ऊंचा है।

    आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता कदम

    प्रधानमंत्री मोदी ने अपने माध्यम से मत्स्य पालन में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का अहम संदेश दिया। उन्होंने किसानों को आत्मनिर्भर बनने और आय के नए स्रोत तलाशने के लिए प्रेरित किया।

    युवाओं के लिए नये अवसर

    हुद्दार का कहना है कि इस तरह के निर्देशक गांव के युवाओं को भी मछली पालन की ओर आकर्षित कर सकते हैं। सरकारी मान्यता और बचपन जागरूकता के साथ यह क्षेत्र रोजगार का बड़ा साधन बन सकता है।

    स्थानीय समुदाय में गौरव का राक्षस

    ‘मन की बात’ में हुद्दार का जिक्र होने के बाद पूरे इलाके में घमंड का माहौल है। स्थानीय लोग इसे अपने क्षेत्र की उपलब्धि मान रहे हैं और इसे खेती के पारंपरिक विकास के साथ नए विचारों के रूप में शामिल करते हुए देख रहे हैं।