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  • धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म अभी बाकी, अग्नियुग में लाला लाजपत राय के किरदार में आएंगे नजर

    धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म अभी बाकी, अग्नियुग में लाला लाजपत राय के किरदार में आएंगे नजर

    नई दिल्ली । धर्मेंद्र की फिल्मों को पसंद करने वाले दर्शकों के लिए उनकी आखिरी फिल्म को लेकर एक नई जानकारी सामने आई है। उनके निधन के बाद रिलीज हुई फिल्म इक्कीस को उनकी अंतिम फिल्म माना जा रहा था, लेकिन अब पता चला है कि उनकी एक और फिल्म रिलीज होना बाकी है। इस फिल्म का नाम अग्नियुग: द फायर बताया गया है। फिल्म का निर्देशन बिस्वजीत चटर्जी कर रहे हैं और इसमें धर्मेंद्र स्वतंत्रता सेनानी लाला लाजपत राय की भूमिका निभाते नजर आएंगे।

    फिल्म के निर्देशक बिस्वजीत चटर्जी करीब चार दशक बाद निर्देशन की दुनिया में वापसी करने जा रहे हैं। उन्होंने फिल्म से जुड़ी जानकारी साझा करते हुए बताया कि अग्नियुग: द फायर में धर्मेंद्र महत्वपूर्ण भूमिका में दिखाई देंगे। फिल्म में उन्हें पंजाब केसरी के नाम से प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी लाला लाजपत राय के किरदार में प्रस्तुत किया जाएगा।

    बिस्वजीत के अनुसार फिल्म में धर्मेंद्र को इस भूमिका के लिए तैयार करने की कहानी भी काफी खास रही। उन्होंने बताया कि शुरुआत में धर्मेंद्र फिल्म में काम करने के लिए तैयार नहीं थे। उनका कहना था कि वह फिलहाल फिल्म नहीं करना चाहते। उस समय उन्हें यह भी जानकारी नहीं थी कि उनके लिए कौन सा किरदार सोचा गया है।

    निर्देशक ने जब उन्हें बताया कि वह लाला लाजपत राय की भूमिका के लिए उनके पास आए हैं और इस किरदार के लिए उनके अलावा किसी और को लेकर उन्होंने विचार नहीं किया, तो धर्मेंद्र ने इस बारे में विस्तार से जानना चाहा। बिस्वजीत ने उन्हें बताया कि यह किरदार एक बड़े देशभक्त का है और लाला लाजपत राय के जीवन से जुड़ा है।

    भूमिका के बारे में सुनने के बाद धर्मेंद्र की दिलचस्पी बढ़ गई। उन्होंने फिल्म करने को लेकर विचार किया और आखिरकार इसके लिए हामी भर दी। निर्देशक के मुताबिक, किरदार के बारे में जानने के बाद धर्मेंद्र फिल्म को लेकर काफी उत्साहित हो गए थे। उन्होंने यहां तक कहा था कि फिल्म में अपने स्टंट खुद करने की कोशिश करेंगे और इसके लिए बॉडी डबल का सहारा नहीं लेना चाहते।

    बिस्वजीत चटर्जी ने धर्मेंद्र के परिवार के साथ हुई मुलाकात का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, धर्मेंद्र के निधन के बाद उन्होंने परिवार के सदस्यों को फिल्म में उनके किरदार से जुड़ी तस्वीर दिखाई थी। तस्वीर में धर्मेंद्र लाला लाजपत राय के रूप में नजर आ रहे थे। इसी दौरान उन्होंने बताया कि यह धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म होगी।

    धर्मेंद्र के बेटे बॉबी देओल को भी फिल्म के बारे में जानकारी थी। बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि फिल्म की कहानी सुनाए जाने के समय उन्हें भी इस प्रोजेक्ट के बारे में पता चला था। इस तरह फिल्म में धर्मेंद्र की मौजूदगी उनकी फिल्मी यात्रा का एक और महत्वपूर्ण अध्याय बन गई है।

    अग्नियुग: द फायर की रिलीज डेट अभी घोषित नहीं की गई है। फिल्म में जैकी श्रॉफ के भी शामिल होने की संभावना बताई जा रही है। धर्मेंद्र ने अपने लंबे फिल्मी करियर में 300 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदारों के जरिए हिंदी सिनेमा में अपनी खास पहचान बनाई। अब अग्नियुग: द फायर में उनका लाला लाजपत राय के रूप में नजर आना दर्शकों के लिए उनकी फिल्मी यात्रा से जुड़ा एक अहम अध्याय होगा।

  • पत्नी प्रीति के जन्मदिन पर रवि किशन ने साझा की तस्वीरें, खास संदेश में बताया जीवन में उनका महत्व

    पत्नी प्रीति के जन्मदिन पर रवि किशन ने साझा की तस्वीरें, खास संदेश में बताया जीवन में उनका महत्व

    नई दिल्ली ।अभिनेता रवि किशन ने पत्नी प्रीति किशन के जन्मदिन के मौके पर उनके साथ अपनी कुछ तस्वीरें साझा करते हुए खास अंदाज में शुभकामनाएं दी हैं। निजी जिंदगी को आमतौर पर ज्यादा सार्वजनिक नहीं करने वाले रवि किशन ने इस अवसर पर पत्नी के प्रति अपने भाव व्यक्त किए और उनके साथ को अपनी जिंदगी की अहम ताकत बताया।

    रवि किशन ने प्रीति के साथ तस्वीरें साझा करते हुए उन्हें जन्मदिन की बधाई दी। संदेश में उन्होंने पत्नी को अपनी ताकत और अपने बच्चों के लिए प्रेरणा बताया। उन्होंने सुख-दुख में साथ निभाने के लिए प्रीति के प्रति आभार भी जताया और उनके लिए अपने प्यार का इजहार किया।

    अपने संदेश में रवि किशन ने प्रीति के लिए महादेव से आशीर्वाद बनाए रखने की कामना भी की। तस्वीरों में दोनों साथ नजर आ रहे हैं। इस मौके पर साझा की गई तस्वीरों और संदेश में लंबे वैवाहिक रिश्ते के प्रति अभिनेता का जुड़ाव और सम्मान दिखाई दिया।

    रवि किशन और प्रीति की मुलाकात स्कूल के दिनों में हुई थी। अभिनेता ने पहले बताया था कि जब वह 11वीं कक्षा में पढ़ रहे थे, तभी उन्हें प्रीति पसंद आ गई थीं। स्कूल के समय से शुरू हुआ यह रिश्ता आगे चलकर शादी में बदल गया।

    रवि किशन अपने संघर्ष के दिनों का जिक्र करते हुए कई बार प्रीति की भूमिका को महत्वपूर्ण बता चुके हैं। मुंबई आने के बाद फिल्मी दुनिया में अपनी जगह बनाने के लिए उन्हें लंबे समय तक संघर्ष करना पड़ा। इस दौरान प्रीति उनके साथ खड़ी रहीं और मुश्किल परिस्थितियों में उनका हौसला बनाए रखा।

    अभिनेता के अनुसार, उनके शुरुआती संघर्ष के दौर में परिवार को संभालने में भी प्रीति ने अहम भूमिका निभाई। रवि किशन ने अपनी सफलता के पीछे पत्नी के योगदान को कई मौकों पर स्वीकार किया है। उनके लिए प्रीति केवल जीवनसाथी ही नहीं, बल्कि मुश्किल समय में भरोसे का आधार भी रही हैं।

    रवि किशन ने एक अवसर पर पत्नी के प्रति अपने सम्मान का जिक्र करते हुए बताया था कि जब प्रीति सो रही होती हैं, तब वह उनके पैर छूते हैं। उन्होंने कहा था कि प्रीति उन्हें अपने पैर छूने नहीं देतीं। इस बात के जरिए उन्होंने पत्नी के प्रति अपने सम्मान और भावनात्मक जुड़ाव को व्यक्त किया था।

    रवि किशन और प्रीति के परिवार में तीन बेटियां और एक बेटा है। अभिनेता अक्सर अपने परिवार से जुड़े खास पलों की तस्वीरें भी साझा करते रहे हैं। हालांकि, निजी जीवन को लेकर वह सामान्य तौर पर सीमित जानकारी ही सार्वजनिक करते हैं।

    फिल्मी करियर की बात करें तो रवि किशन ने भोजपुरी सिनेमा से अपनी पहचान बनाई और बाद में हिंदी फिल्मों में भी काम किया। अभिनय के साथ उन्होंने राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभाई है। उनकी सार्वजनिक जिंदगी में व्यस्तताओं के बावजूद परिवार उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।

    पत्नी के जन्मदिन पर साझा किया गया संदेश इसी पारिवारिक जुड़ाव को सामने लाता है। रवि किशन ने अपने शब्दों के जरिए प्रीति को परिवार की प्रेरणा बताते हुए उनके योगदान के लिए आभार जताया। जन्मदिन के अवसर पर साझा की गई तस्वीरों और संदेश के जरिए उन्होंने अपने लंबे रिश्ते के प्रति सम्मान और स्नेह भी व्यक्त किया।

  • कार्तिक आर्यन की उपलब्धि पर भावुक हुए मुरलीकांत पेटकर, मेहनत और अभिनय की जमकर सराहना

    कार्तिक आर्यन की उपलब्धि पर भावुक हुए मुरलीकांत पेटकर, मेहनत और अभिनय की जमकर सराहना

    नई दिल्ली ।कार्तिक आर्यन के लिए 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में बेस्ट एक्टर का सम्मान हासिल करना बेहद खास उपलब्धि रही। फिल्म ‘चंदू चैंपियन’ में मुरलीकांत पेटकर का किरदार निभाने के लिए उन्हें यह पुरस्कार मिला। सम्मान मिलने के बाद कार्तिक को फिल्म जगत से लगातार बधाइयां मिल रही हैं। इनमें सबसे खास बधाई उस वास्तविक शख्स की रही, जिसकी जिंदगी को उन्होंने पर्दे पर जीवंत किया।

    पैरालिंपिक गोल्ड मेडलिस्ट मुरलीकांत पेटकर ने कार्तिक आर्यन को इस उपलब्धि के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कार्तिक की मेहनत और फिल्म में उनके अभिनय की सराहना करते हुए इसे गर्व का क्षण बताया। मुरलीकांत ने कहा कि कार्तिक ने जिस समर्पण के साथ उनके किरदार को निभाया, वह प्रशंसा के योग्य है।

    मुरलीकांत पेटकर ने कार्तिक की उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि ‘चंदू चैंपियन’ के लिए बेस्ट एक्टर का पुरस्कार मिलना गर्व की बात है। उन्होंने फिल्म में किरदार को निभाने के लिए कार्तिक द्वारा की गई मेहनत को भी विशेष रूप से सराहा।

    उन्होंने फिल्म के निर्देशक कबीर खान और निर्माता साजिद नाडियाडवाला के प्रयासों की भी प्रशंसा की। उनके अनुसार, मुरलीकांत पेटकर की कहानी को बड़े पर्दे पर संवेदनशीलता और ईमानदारी के साथ प्रस्तुत किया गया। फिल्म की पूरी टीम ने मिलकर उनकी जीवन यात्रा और संघर्ष को दर्शकों तक पहुंचाने का काम किया।

    ‘चंदू चैंपियन’ 14 जून 2024 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। फिल्म का निर्देशन कबीर खान ने किया था और कार्तिक आर्यन ने इसमें मुरलीकांत पेटकर की भूमिका निभाई थी। कहानी एक ऐसे व्यक्ति के जीवन पर आधारित है, जिसने कई कठिन परिस्थितियों का सामना करने के बाद भी अपने लक्ष्य को नहीं छोड़ा।

    मुरलीकांत पेटकर भारतीय सेना में रह चुके हैं। एक हादसे के बाद उन्हें शारीरिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने परिस्थितियों के सामने हार नहीं मानी। इसके बाद उन्होंने खेल को अपनी नई दिशा बनाया और पैरालिंपिक में भारत के लिए गोल्ड मेडल हासिल किया।

    फिल्म में कार्तिक आर्यन के साथ विजय राज, राजपाल यादव और भाग्यश्री भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आए। मुरलीकांत पेटकर के जीवन के अलग-अलग चरणों को पर्दे पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने के लिए कार्तिक ने अपनी फिटनेस और शारीरिक क्षमता पर काफी काम किया था।

    कार्तिक ने फिल्म के लिए बॉक्सिंग और तैराकी की ट्रेनिंग ली। उन्होंने अपने शरीर में भी बड़ा बदलाव किया, ताकि किरदार के अलग-अलग दौर को वास्तविक रूप में प्रस्तुत किया जा सके। उनके अभिनय और तैयारी को मिली राष्ट्रीय स्तर की मान्यता के बाद खुद मुरलीकांत पेटकर की ओर से मिली बधाई ने इस उपलब्धि को और खास बना दिया है।

    फिल्म की कहानी संघर्ष, मेहनत, आत्मविश्वास और लक्ष्य के प्रति दृढ़ता पर केंद्रित है। मुरलीकांत पेटकर की वास्तविक जीवन यात्रा को पर्दे पर निभाने वाले कार्तिक आर्यन को राष्ट्रीय पुरस्कार मिलना उनके अभिनय सफर में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में सामने आया है।

  • टॉप एक्ट्रेस की लोकप्रियता सूची में बड़ा बदलाव, सामंथा रूथ प्रभु ने दीपिका और आलिया को पीछे छोड़ा

    टॉप एक्ट्रेस की लोकप्रियता सूची में बड़ा बदलाव, सामंथा रूथ प्रभु ने दीपिका और आलिया को पीछे छोड़ा

    नई दिल्ली:  पिछले महीने की लोकप्रियता के आधार पर जारी टॉप 10 एक्ट्रेस की सूची में दक्षिण भारतीय अभिनेत्री सामंथा रूथ प्रभु ने पहला स्थान हासिल किया है। इस सूची में बॉलीवुड और दक्षिण भारतीय सिनेमा की कई चर्चित अभिनेत्रियों को शामिल किया गया है। खास बात यह रही कि सामंथा ने दीपिका पादुकोण और आलिया भट्ट जैसी लोकप्रिय अभिनेत्रियों को पीछे छोड़ते हुए शीर्ष स्थान बनाया।

    लोकप्रियता की इस रैंकिंग में सामंथा रूथ प्रभु के बाद आलिया भट्ट दूसरे और दीपिका पादुकोण तीसरे स्थान पर रहीं। यानी टॉप तीन में दक्षिण भारतीय सिनेमा की एक और बॉलीवुड की दो प्रमुख अभिनेत्रियों ने जगह बनाई।

    सामंथा के लिए पिछला दौर चर्चा में रहा है। उनकी पिछली फिल्म ‘मां इंटी बंगारम’ में उनका अलग और काफी दमदार अंदाज देखने को मिला था। फिल्म में उनका किरदार पहले की भूमिकाओं से अलग नजर आया। आने वाले समय में भी सामंथा की कई परियोजनाएं दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं।

    दूसरे स्थान पर रहने वाली आलिया भट्ट लगातार हिंदी सिनेमा की प्रमुख अभिनेत्रियों में बनी हुई हैं। उनकी लोकप्रियता के चलते उन्हें इस रैंकिंग में दूसरा स्थान मिला। वहीं दीपिका पादुकोण तीसरे पायदान पर रहीं। पिछले कुछ समय से दीपिका बड़े पर्दे पर कम नजर आई हैं, लेकिन इसके बावजूद उनकी लोकप्रियता सूची में मजबूत बनी हुई है।

    टॉप तीन से ठीक बाहर सई पल्लवी रहीं। उन्हें चौथा स्थान मिला। वह अपनी आगामी फिल्म ‘रामायण’ में सीता की भूमिका को लेकर भी चर्चा में हैं। इसके बाद नयनतारा ने पांचवां स्थान हासिल किया। नयनतारा दक्षिण भारतीय सिनेमा की चर्चित अभिनेत्रियों में शामिल हैं और हिंदी दर्शकों के बीच भी उनकी पहचान मजबूत हुई है।

    छठे स्थान पर काजल अग्रवाल रहीं, जबकि रश्मिका मंदाना को सातवां स्थान मिला। दोनों अभिनेत्रियां दक्षिण भारतीय फिल्मों के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी लोकप्रिय हैं। रश्मिका की कई फिल्मों और उनके अभिनय को लेकर दर्शकों के बीच लगातार चर्चा बनी रहती है।

    आठवें स्थान पर कृति सैनन का नाम रहा। कृति हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की प्रमुख अभिनेत्रियों में शामिल हैं और अलग-अलग तरह की भूमिकाओं के जरिए अपनी पहचान बना चुकी हैं। सूची में उनसे ऊपर दक्षिण भारतीय सिनेमा की कई अभिनेत्रियां रहीं।

    नौवें स्थान पर त्रिशा रहीं। दक्षिण भारतीय फिल्मों में लंबे समय से सक्रिय त्रिशा अब भी दर्शकों के बीच लोकप्रिय हैं। वहीं श्रद्धा कपूर को सूची में दसवां स्थान मिला। आगामी फिल्म ‘ईठा’ को लेकर भी श्रद्धा चर्चा में हैं।

    इस पूरी सूची में दक्षिण भारतीय अभिनेत्रियों की मौजूदगी उल्लेखनीय रही। टॉप 10 में सामंथा, सई पल्लवी, नयनतारा, काजल अग्रवाल, रश्मिका मंदाना और त्रिशा जैसे नाम शामिल रहे। दूसरी ओर बॉलीवुड से आलिया भट्ट, दीपिका पादुकोण, कृति सैनन और श्रद्धा कपूर ने जगह बनाई।

    रैंकिंग पिछले महीने की लोकप्रियता को आधार बनाकर तैयार की गई है। इसलिए इसमें अलग-अलग समय पर फिल्मों, भूमिकाओं और सार्वजनिक चर्चा के कारण अभिनेत्रियों की स्थिति बदल सकती है। इस सूची में सामंथा का शीर्ष स्थान हासिल करना और दीपिका तथा आलिया का टॉप तीन में बने रहना सबसे प्रमुख बातें रहीं।

  • कुमार सानू के 69वें जन्मदिन पर याद आए उनके सदाबहार रोमांटिक गाने, आज भी कायम है आवाज का जादू

    कुमार सानू के 69वें जन्मदिन पर याद आए उनके सदाबहार रोमांटिक गाने, आज भी कायम है आवाज का जादू

    नई दिल्ली ।कुमार सानू हिंदी फिल्म संगीत के उन लोकप्रिय गायकों में शामिल हैं, जिनकी आवाज ने 1990 के दशक के रोमांटिक गीतों को एक अलग पहचान दी। 20 अक्टूबर 1957 को कोलकाता में जन्मे कुमार सानू का वास्तविक नाम केदारनाथ भट्टाचार्य है। उनके पिता पशुपतिनाथ भट्टाचार्य भी संगीत से जुड़े हुए थे और शुरुआती संगीत शिक्षा कुमार सानू ने उन्हीं से प्राप्त की।

    प्लेबैक सिंगिंग की दुनिया में उन्होंने 1984 में फिल्म ‘ये देश’ से शुरुआत की। उनके करियर को आगे बढ़ाने में गजल गायक जगजीत सिंह की भूमिका भी बताई जाती है। 1989 में जगजीत सिंह ने उनकी मुलाकात संगीतकार जोड़ी कल्याणजी-आनंदजी से कराई। इसी दौरान केदारनाथ भट्टाचार्य को कुमार सानू नाम अपनाने की सलाह दी गई।

    इसके बाद वर्ष 1990 में आई फिल्म ‘आशिकी’ ने उनके करियर को नई ऊंचाई दी। फिल्म के संगीत ने दर्शकों के बीच खास जगह बनाई और कुमार सानू की आवाज घर-घर तक पहुंच गई। ‘धीरे-धीरे से मेरी जिंदगी में आना’, ‘अब तेरे बिन’, ‘नजर के सामने’ और ‘बस एक सनम चाहिए’ जैसे गीतों ने उनकी रोमांटिक गायकी को लोकप्रिय बनाया।

    ‘आशिकी’ के बाद 1990 के दशक में कुमार सानू ने कई चर्चित फिल्मों के लिए गीत गाए। ‘साजन’, ‘दीवाना’, ‘बाजीगर’, ‘परदेस’ और ‘1942: ए लव स्टोरी’ जैसी फिल्मों के गीतों ने उनकी लोकप्रियता को लगातार मजबूत किया।

    उनके चर्चित गीतों में ‘धीरे-धीरे से मेरी जिंदगी में आना’ आज भी विशेष रूप से याद किया जाता है। यह गीत ‘आशिकी’ में राहुल रॉय और अनु अग्रवाल पर फिल्माया गया था और फिल्म के लोकप्रिय संगीत का अहम हिस्सा रहा।

    ‘बाजीगर’ का ‘ये काली काली आंखें’ भी कुमार सानू के लोकप्रिय गीतों में शामिल है। शाहरुख खान और काजोल पर फिल्माए गए इस गाने में उनकी आवाज के साथ अनु मलिक की आवाज भी सुनाई दी थी।

    फिल्म ‘दीवाना’ का ‘सोचेंगे तुम्हें प्यार करें के नहीं’ भी 1990 के दशक में खूब लोकप्रिय हुआ। ऋषि कपूर और दिव्या भारती पर फिल्माए गए इस गीत को नदीम-श्रवण ने संगीत दिया था।

    ‘मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी’ का ‘चुरा के दिल मेरा’ कुमार सानू और अलका याग्निक की आवाज में रिकॉर्ड किया गया था। अक्षय कुमार और शिल्पा शेट्टी पर फिल्माया गया यह गीत भी लंबे समय तक लोकप्रिय रहा।

    ‘साजन’ का ‘मेरा दिल भी कितना पागल है’, ‘1942: ए लव स्टोरी’ का ‘एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा’, ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ का ‘तुझे देखा तो ये जाना सनम’ और ‘कुछ कुछ होता है’ का ‘लड़की बड़ी अंजानी है’ भी उनकी यादगार प्रस्तुतियों में गिने जाते हैं।

    ‘हम दिल दे चुके सनम’ का ‘आंखों की गुस्ताखियां’ भी कुमार सानू की लोकप्रिय गायकी का हिस्सा रहा। कविता कृष्णमूर्ति के साथ उनकी आवाज ने इस गीत को खास पहचान दी।

    कुमार सानू को संगीत के क्षेत्र में योगदान के लिए पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया। 1993 में एक ही दिन में 28 गाने रिकॉर्ड करने का रिकॉर्ड भी उनके करियर की चर्चित उपलब्धियों में शामिल है। 2015 की फिल्म ‘दम लगा के हईशा’ के ‘दर्द करारा’ से उन्होंने नई पीढ़ी के श्रोताओं के बीच भी अपनी आवाज की पहचान बनाए रखी।

  • रानी मुखर्जी की मां कृष्णा मुखर्जी का 75 साल की उम्र में निधन, परिवार ने की निजता का सम्मान करने की अपील

    रानी मुखर्जी की मां कृष्णा मुखर्जी का 75 साल की उम्र में निधन, परिवार ने की निजता का सम्मान करने की अपील

    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेत्री रानी मुखर्जी की मां कृष्णा मुखर्जी का 75 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने मंगलवार दोपहर आखिरी सांस ली। उनके निधन की जानकारी परिवार की ओर से दी गई है। परिवार ने इस मुश्किल समय में लोगों से निजता का सम्मान करने की अपील की है।

    कृष्णा मुखर्जी के निधन की खबर सामने आने के बाद रानी मुखर्जी के प्रशंसकों और फिल्म जगत से जुड़े लोगों के बीच शोक की लहर है। रानी अपनी मां के बेहद करीब थीं और दोनों के बीच गहरा भावनात्मक रिश्ता था। कृष्णा अक्सर बेटी के साथ सार्वजनिक मौकों पर नजर आती थीं और उनके करियर में भी उनका लगातार साथ रहा।

    कृष्णा मुखर्जी के निधन की पुष्टि रानी मुखर्जी के पति आदित्य चोपड़ा की कंपनी की ओर से की गई। जानकारी के अनुसार, कृष्णा ने मंगलवार दोपहर दुनिया को अलविदा कहा। परिवार ने लोगों से अपील की है कि इस कठिन समय में उन्हें निजी समय दिया जाए। परिवार की ओर से मिले प्यार और प्रार्थनाओं के लिए भी आभार जताया गया है।

    हालांकि, कृष्णा मुखर्जी के निधन की वजह अभी सामने नहीं आई है। परिवार की ओर से भी उनकी मौत के कारण को लेकर कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। ऐसे में फिलहाल उनके निधन की परिस्थितियों के बारे में किसी तरह की पुष्टि नहीं हुई है।

    कृष्णा मुखर्जी का फिल्मों से पुराना जुड़ाव रहा था। उन्होंने फिल्म निर्माता राम मुखर्जी से शादी की थी। कृष्णा ने अभिनय के क्षेत्र में काम नहीं किया, लेकिन बंगाली सिनेमा से उनका नाता रहा। उन्होंने कई बंगाली फिल्मों के लिए प्लेबैक सिंगर के तौर पर अपनी आवाज दी थी।

    रानी मुखर्जी अपने माता-पिता दोनों से बेहद जुड़ी हुई थीं। उनके पिता राम मुखर्जी का निधन वर्ष 2017 में हुआ था। राम मुखर्जी फिल्म निर्माण से जुड़े हुए थे और बंगाली तथा हिंदी सिनेमा में उनका योगदान रहा। पिता के निधन के बाद कृष्णा मुखर्जी परिवार के लिए महत्वपूर्ण सहारा बनी रहीं।

    रानी मुखर्जी के फिल्मी सफर में भी उनकी मां का खास योगदान रहा। रानी ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत बंगाली सिनेमा से की थी। इसके बाद उन्होंने हिंदी फिल्मों में कदम रखा और धीरे-धीरे अपनी अलग पहचान बनाई।

    रानी मुखर्जी ने अपने लंबे करियर में कई चर्चित फिल्मों में काम किया है। इनमें कुछ कुछ होता है, गुलाम, साथिया, हम तुम, ब्लैक और मर्दानी जैसी फिल्में शामिल हैं। अलग-अलग तरह के किरदारों के जरिए उन्होंने हिंदी सिनेमा में अपनी खास जगह बनाई।

    रानी मुखर्जी के निजी जीवन में उनकी मां कृष्णा मुखर्जी का हमेशा अहम स्थान रहा। मां-बेटी के इस रिश्ते की झलक कई सार्वजनिक मौकों पर भी देखने को मिलती रही है। कृष्णा अपनी बेटी के काम और उपलब्धियों को लेकर हमेशा साथ खड़ी नजर आती थीं।

    रानी मुखर्जी को आखिरी बार मर्दानी 3 में देखा गया था। अब मां कृष्णा मुखर्जी के निधन के बाद अभिनेत्री और उनका परिवार निजी तौर पर शोक के दौर से गुजर रहा है। परिवार की ओर से लोगों से इस कठिन समय में उनकी निजता का सम्मान करने की अपील की गई है।

  • कटरीना कैफ पर टिप्पणी के बाद बदला एजाज वारिस का रुख, सलमान खान की बात सुनकर मांगी सार्वजनिक माफी

    कटरीना कैफ पर टिप्पणी के बाद बदला एजाज वारिस का रुख, सलमान खान की बात सुनकर मांगी सार्वजनिक माफी

    नई दिल्ली ।पाकिस्तानी रेडियो जॉकी एजाज वारिस ने अभिनेत्री कटरीना कैफ के बढ़े हुए वजन को लेकर की गई अपनी टिप्पणी पर माफी मांगी है। उन्होंने कहा कि बाद में उन्हें महसूस हुआ कि उनकी बातों से अभिनेत्री और उनके प्रशंसकों को ठेस पहुंची होगी। वारिस ने अपनी टिप्पणी पर खेद जताते हुए कहा कि उनका उद्देश्य किसी की बॉडी शेमिंग करना नहीं था।

    यह विवाद कटरीना कैफ के हालिया सार्वजनिक कार्यक्रम में नजर आने के बाद शुरू हुआ। नवंबर 2025 में बेटे विहान को जन्म देने के बाद अभिनेत्री अपने पति विक्की कौशल के साथ मुंबई में आयोजित गणेश चतुर्थी समारोह में शामिल हुई थीं। इस दौरान उनके कुछ वीडियो सामने आए, जिनमें उनका वजन पहले की तुलना में बढ़ा हुआ दिखाई दे रहा था।

    इन वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने कटरीना के लुक और वजन को लेकर टिप्पणियां शुरू कर दी थीं। इसी क्रम में एजाज वारिस ने भी अभिनेत्री के वजन को लेकर टिप्पणी की थी। उनकी बातों को लेकर सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देखने को मिली।

    इसके बाद सलमान खान ने गर्भावस्था के बाद किसी महिला के वजन को लेकर ट्रोल किए जाने पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि गर्भवती होने के बाद वजन बढ़ना स्वाभाविक है और जब अभिनेत्री फिल्मों में वापसी करेंगी तो वह दोबारा फिट हो सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कटरीना इस समय अपने परिवार के साथ समय बिताना चाहती हैं।

    सलमान खान की टिप्पणी के बाद एजाज वारिस ने अपनी कही बातों पर दोबारा विचार करने की बात कही। उन्होंने सोशल मीडिया पर कटरीना कैफ से सीधे माफी मांगी और कहा कि उन्हें अपनी हालिया टिप्पणियों का अफसोस है।

    वारिस ने कहा कि सलमान खान की बात सुनने के बाद उन्हें महसूस हुआ कि उनकी टिप्पणी से कटरीना और उनके कई प्रशंसकों को दुख पहुंचा होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका इरादा बॉडी शेमिंग करने का नहीं था। उन्होंने अभिनेत्री के साथ-साथ सलमान खान और उन सभी लोगों से भी माफी मांगी, जिन्हें उनकी बातों से बुरा लगा।

    आरजे ने यह भी बताया कि उन्होंने सलमान खान का वह वीडियो देखा था, जिसमें अभिनेत्री को ट्रोल करने वालों पर सवाल उठाया गया था। इसके बाद उन्हें लगा कि उन्हें कटरीना के बारे में इस तरह की टिप्पणी नहीं करनी चाहिए थी।

    एजाज वारिस ने कहा कि वह सलमान खान और कटरीना कैफ दोनों के प्रशंसक हैं। उनका कहना है कि रिकॉर्डिंग के दौरान बातचीत किस दिशा में चली गई, इसका उन्हें अंदाजा नहीं रहा और उन्होंने वीडियो को आकर्षक बनाने के लिए मजाक में कुछ बातें कह दी थीं।

    हालांकि, बाद में उन्हें एहसास हुआ कि उन टिप्पणियों का असर अलग तरीके से हुआ और कई लोगों को उनकी बात पसंद नहीं आई। इसी वजह से उन्होंने सार्वजनिक तौर पर अपनी गलती स्वीकार करते हुए माफी मांगी।

    इस पूरे मामले में कटरीना कैफ की प्रेग्नेंसी के बाद शरीर में आए बदलाव को लेकर सोशल मीडिया पर होने वाली टिप्पणियों का मुद्दा भी सामने आया। अभिनेत्री के कार्यक्रम में नजर आने के बाद उनके लुक को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आई थीं। सलमान खान ने ऐसी टिप्पणियों पर सवाल उठाते हुए गर्भावस्था के बाद होने वाले वजन बढ़ने को सामान्य प्रक्रिया बताया।

    एजाज वारिस की माफी के बाद अब विवाद को लेकर उनका रुख स्पष्ट हो गया है। उन्होंने अपनी टिप्पणी को लेकर अफसोस जताया है और कहा है कि आगे ऐसी बातों को लेकर अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है।

  • गणपति उत्सव में छाएगा भक्ति और जोश का रंग, बॉलीवुड के ये 10 गाने प्लेलिस्ट में जोड़कर बनाएं माहौल खास

    गणपति उत्सव में छाएगा भक्ति और जोश का रंग, बॉलीवुड के ये 10 गाने प्लेलिस्ट में जोड़कर बनाएं माहौल खास


    नई दिल्ली । गणपति उत्सव का माहौल भक्ति, उमंग और उत्साह से भरा होता है। बप्पा के स्वागत से लेकर आरती और विसर्जन तक हर पल में संगीत उत्सव की खुशी को और बढ़ा देता है। अगर पूजा-पाठ के साथ बॉलीवुड का रंग भी शामिल करना चाहते हैं, तो गणपति से जुड़े कई ऐसे गाने हैं जो लंबे समय से लोगों की पसंद बने हुए हैं। इन गीतों में भक्ति के साथ जोश, श्रद्धा और उत्सव की ऊर्जा भी महसूस होती है।

    गणपति उत्सव की शुरुआत के लिए ‘देवा श्री गणेशा’ को प्लेलिस्ट में शामिल किया जा सकता है। फिल्म ‘अग्निपथ’ का यह गीत अपनी दमदार धुन और भक्तिमय अंदाज के कारण गणपति समारोह में जोश भरने वाला गाना माना जाता है। आरती या उत्सव के दौरान इसकी ऊर्जा माहौल को खास बना सकती है।

    ‘मोरया रे’ भी गणपति उत्सव के रंग में पूरी तरह फिट बैठता है। फिल्म ‘डॉन’ से जुड़ा यह गीत बप्पा के जयकारों और उत्सव की ऊर्जा को सामने लाता है। गणपति पंडाल में इसे बजाने से माहौल में उत्साह और उमंग का रंग बढ़ सकता है।

    ‘गणपति बप्पा मोरया’ जैसे भक्तिमय गीत गणपति आराधना की भावना को मजबूत करते हैं। बप्पा के जयकारों के बीच ऐसे गीत उत्सव में श्रद्धा और भक्ति का माहौल बनाए रखते हैं। वहीं ‘श्री गणेशा देवा’ भी गणपति आराधना के लिए एक लोकप्रिय विकल्प है।

    पूजा के दौरान ‘सिंदूर लाल चढ़ायो’ को भी प्लेलिस्ट में जगह दी जा सकती है। गणपति आराधना से जुड़े इस पारंपरिक भक्ति गीत का भाव पूजा के माहौल को भक्तिमय बनाने में मदद करता है।

    फिल्म ‘बाजीराव मस्तानी’ का ‘गजानना’ गणपति उत्सव के लिए खास जोश लेकर आता है। इसकी तेज धुन और भव्य अंदाज समारोह के माहौल में उत्साह बढ़ा सकते हैं। घर में होने वाले छोटे आयोजन से लेकर बड़े गणपति समारोह तक यह गीत प्लेलिस्ट का हिस्सा बन सकता है।

    वहीं विसर्जन के समय ‘गणपती अपने गांव चले’ जैसे गीतों का भाव बिल्कुल अलग नजर आता है। बप्पा की विदाई के समय ऐसे गीत उत्सव की खुशी के साथ भावुक माहौल भी पैदा करते हैं।

    ‘हे गणराया’ भी गणपति भक्ति से जुड़ा गीत है। फिल्म ‘एबीसीडी 2’ का यह गाना आस्था और श्रद्धा की भावना को खूबसूरती से सामने लाता है। इसके अलावा ‘बप्पा मोरया रे’ जैसे जोशीले गीत भी गणपति समारोह में उत्साह बढ़ाने के लिए बजाए जा सकते हैं।

    गणपति विसर्जन के दौरान ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ’ की भावना उत्सव को भावुक अंदाज में पूरा करती है। बप्पा को विदाई देते समय अगले वर्ष फिर आने की कामना इस भाव को और खास बना देती है।

    गणपति उत्सव में संगीत सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि माहौल को यादगार बनाने का एक जरिया भी है। आरती के समय भक्तिमय गीत और सेलिब्रेशन के दौरान जोशीले गाने बजाकर भक्ति, उमंग और मस्ती का संतुलित रंग उत्सव में शामिल किया जा सकता है।

  • अनुपम खेर को ओहायो में मिला स्पेशल प्रोक्लेमेशन, बोले- देश से दूर सम्मान मिलना मेरे लिए बेहद भावुक पल

    अनुपम खेर को ओहायो में मिला स्पेशल प्रोक्लेमेशन, बोले- देश से दूर सम्मान मिलना मेरे लिए बेहद भावुक पल

    नई दिल्ली । दिग्गज अभिनेता अनुपम खेर को अमेरिका के ओहायो राज्य में उनके चार दशक से अधिक लंबे फिल्मी सफर के लिए विशेष सम्मान से नवाजा गया है। उन्हें ओहायो की ओर से स्पेशल प्रोक्लेमेशन प्रदान किया गया। यह सम्मान उनके फिल्मों में लंबे योगदान के साथ उनके लाइव स्टेज परफॉर्मेंस ‘जाने पहचाने अनजाने’ के लिए भी दिया गया।

    कोलंबस में आयोजित लाइव शो के दौरान अनुपम खेर को यह सम्मान मिला। अभिनेता ने सम्मान से जुड़ी तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा की और इसे अपने लिए गर्व और भावुकता से भरा अवसर बताया। उन्होंने ओहायो के इस सम्मान के लिए आभार जताते हुए इसे लंबे समय तक याद रखने वाला अनुभव बताया।

    अनुपम खेर ने सम्मान की तस्वीर साझा करते हुए ओहायो के गवर्नर माइक डिवाइन और लेफ्टिनेंट गवर्नर जिम ट्रेसल का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि चार दशक से अधिक लंबे फिल्मी सफर और ‘जाने पहचाने अनजाने’ के लाइव स्टेज प्रदर्शन के लिए इस तरह का सम्मान मिलना उनके लिए बेहद खास है।

    अभिनेता ने इस सम्मान को गर्व और विनम्रता के साथ स्वीकार करने की बात कही। उन्होंने इसके लिए ओहायो प्रशासन का आभार व्यक्त किया और अपने सम्मान का श्रेय भारतीय फिल्म इंडस्ट्री को भी दिया। अनुपम खेर के अनुसार, भारतीय सिनेमा ने उन्हें पहचान और अपनी प्रतिभा को बड़े स्तर पर प्रस्तुत करने का अवसर दिया।

    उन्होंने अपने लाइव स्टेज शो की पूरी टीम और कलाकारों का भी विशेष रूप से धन्यवाद किया। अभिनेता ने कहा कि टीम के सदस्यों की मेहनत और जुनून के कारण हर लाइव प्रदर्शन खास बनता है। उनके लिए यह सम्मान अकेले उनके सफर का नहीं, बल्कि उन लोगों के योगदान का भी प्रतीक है जो उनके साथ लगातार काम करते रहे हैं।

    अनुपम खेर ने कहा कि अपने देश से इतनी दूर इस तरह स्वागत और सम्मान मिलना उनके लिए बेहद भावुक क्षण है। उन्होंने ओहायो का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि वह इस सम्मान को लंबे समय तक याद रखेंगे।

    अनुपम खेर ने हिंदी सिनेमा में अपने अभिनय करियर की शुरुआत वर्ष 1984 में महेश भट्ट की फिल्म ‘सारांश’ से की थी। इसके बाद उन्होंने अलग-अलग भूमिकाओं के जरिए फिल्म जगत में अपनी पहचान मजबूत की।

    अपने लंबे करियर में अनुपम खेर ‘कर्मा’, ‘तेजाब’, ‘चालबाज’, ‘विजय’, ‘राम लखन’, ‘डैडी’, ‘सौदागर’ और ‘दिल’ जैसी फिल्मों में नजर आए। उन्होंने ‘हम आपके हैं कौन’, ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’, ‘कुछ कुछ होता है’, ‘दुल्हन हम ले जाएंगे’ और ‘स्पेशल 26’ जैसी चर्चित फिल्मों में भी अभिनय किया।

    फिल्मों के साथ रंगमंच पर भी उनकी सक्रियता लंबे समय से बनी हुई है। ‘जाने पहचाने अनजाने’ के लाइव प्रदर्शन के लिए मिला यह सम्मान उनके अभिनय और मंचीय सफर से जुड़े योगदान को भी रेखांकित करता है। ओहायो में मिला स्पेशल प्रोक्लेमेशन उनके लिए भारतीय सिनेमा से जुड़े लंबे सफर के दौरान एक खास उपलब्धि के रूप में सामने आया है।

  • महेश भट्ट का संघर्ष: मां को सहारा देने के लिए कलम उठाई, फिर सिनेमा को बनाया अपनी पहचान

    महेश भट्ट का संघर्ष: मां को सहारा देने के लिए कलम उठाई, फिर सिनेमा को बनाया अपनी पहचान

    नई दिल्ली । 20 वर्ष का एक लड़का मां को आर्थिक सहारा देने के लिए रोजगार की तलाश में निकला। कलम चलाने की प्रतिभा थी और उसी की राह पकड़ी। विज्ञापन लिखने शुरू किए। मगर, उस लड़के की जिंदगी में तमाम अनुभव थे। इमोशंस थे। उन भावनाओं को व्यक्त कर पाने का हुनर था। इसके लिए उसने सिनेमा को माध्यम बनाया। कुछ अपने निजी अनुभवों पर तो कुछ समाज के अनुभवों पर ऐसा सिनेमा रचा, जो दर्शकों के दिलों को छूने लगा। आज दुनिया उस लड़के को नामी निर्देशक महेश भट्ट के रूप में जानती है, जिनका आज जन्मदिन है।

    मां की मदद के लिए साधी थी कलम

    महेश भट्ट इंडस्ट्री के चर्चित निर्देशक, निर्माता और स्क्रीनराइटर हैं। उनका जन्म 20 सितंबर 1948 को मुंबई में हुआ था। उनके पिता का नाम नानाभाई भट्ट और मां का नाम शिरीन मोहम्मद अली है। महेश भट्ट ने अपनी स्कूली पढ़ाई डॉन बॉस्को हाई स्कूल, माटुंगा से की है। महेश शुरू से ही प्रतिभा के धनी हैं, वे ना सिर्फ एक होनहार छात्र थे, बल्कि अपनी मां के कामों में भी इन्होंने शुरू से मदद की। बहुत ही कम उम्र में वे पैसे भी कमाने लगे थे। उन्होंने स्कूल के दिनों में ही नौकरी शुरू की। वहीं, महेश भट्ट ने 20 साल की उम्र में विज्ञापनों के लिए लिखना शुरू कर दिया था। उनके मुताबिक, परिवार को आर्थिक रूप से सहारा देने के लिए उन्होंने यह शुरुआत की।

    26 की उम्र में बतौर निर्देशक शुरुआत

    अपने संघर्ष के रास्ते पर आगे बढ़ते हुए महेश भट्ट ने फिल्मी उद्योग में कदम रखा। महेश ने स्मिता पाटिल और विनोद खन्ना के सेक्रेटरी के रूप में काम किया। निर्देशन की बात करें तो महेश भट्ट ने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1970 में आई डॉक्यूमेंट्री ‘संकट’ के निर्देशन से की थी। मगर, सिनेमा की दुनिया में बतौर निर्देशक महेश भट्ट ने फिल्म ‘मंजिलें और भी हैं’ से बॉलीवुड में डेब्यू किया। तब उनकी उम्र महज 26 साल थी।

    ‘कब्जा’ से निर्माता की कुर्सी पर बैठे

    पांच दशक से अधिक के करियर में महेश भट्ट ने कई चर्चित और हिट फिल्मों का निर्देशन किया है। कई प्रोड्यूस की हैं। वहीं, 100 से ज्यादा फिल्मों की कहानी को बतौर स्क्रिप्ट राइटर उन्होंने आकार दिया है। निर्देशक के रूप में अपनी पहचान बनाने के बाद उन्होंने 1987 में अपने भाई मुकेश भट्ट के साथ विशेष फिल्म्स के बैनर तले फिल्म ‘कब्जा’ के साथ निर्माता की भूमिका निभाई। अपने अब तक के फिल्मी करियर में महेश भट्ट ने ‘अर्थ’, ‘आशिकी’, ‘सारांश’ जैसी एक से बढ़कर एक फिल्में बनाई हैं।

    महेश की फिल्म ‘सारांश’ को 14वें मॉस्को अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह में दिखाया गया था। यह उस साल के सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा फिल्म के लिए अकादमी पुरस्कार के लिए भारत की ओर से थी। 1986 की फिल्म ‘नाम’ उनकी पहली व्यावसायिक सिनेमाई फिल्म थी। वे ‘लहू के दो रंग’, ‘अभिमन्यु’, ‘अर्थ’, ‘सारांश’, ‘आशिकी’, ‘डैडी’, ‘दिल है के मानता नहीं’ और ‘हम हैं राही प्यार के’ जैसी 80 से ज्यादा फिल्मों का निर्देशन और प्रोडक्शन कर चुके हैं।

    छोटे पर्दे पर भी दिखाया दमखम

    फिल्मों के अलावा महेश भट्ट ने छोटे पर्दे पर भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। उन्होंने ‘स्वाभिमान’, ‘कभी कभी’ और ‘नामकरण’ जैसे कई चर्चित टीवी सीरियल्स का भी निर्देशन किया है।

    महेश भट्ट को उनकी फिल्मों के लिए काफी पुरस्कार दिए गए। सबसे पहले उन्हें 1984 में फिल्म ‘अर्थ’ के लिए फिल्मफेयर बेस्ट स्क्रीन प्ले अवार्ड दिया गया। इसके बाद 1985 में फिल्म ‘सारांश’ को बेस्ट स्टोरी अवार्ड दिया गया। 1994 में ‘हम हैं राही प्यार के’ के लिए महेश को नेशनल फिल्म अवार्ड दिया गया। 1999 में उनकी फिल्म ‘जख्म’ को फिल्मफेयर बेस्ट स्टोरी अवार्ड दिया गया।

    फिल्मों में दिखा निजी जिंदगी का प्रतिबिंब

    महेश भट्ट ऐसे निर्देशक हैं, जिनके विचार कई बार लोगों को चौंकाते हैं। उनकी निजी विचारधारा की तरह उनकी फिल्मों के विषय और फिल्में दर्शकों को चौंकाती रही हैं। कभी विवाद हुए तो कभी आलोचना। उतार-चढ़ावों के बीच तारीफें भी खूब मिलीं। उन्होंने 70-80 के दशक में समाज के ऐसे विषयों पर फिल्में बनाने का साहस किया, जिन पर लोग बातें भी दबी जुबान से करते हों। आलोचनाओं से बेफिक्र रहते हुए उन्होंने बोल्ड विषयों को चुना। वे अपनी फिल्मों में नए प्रयोग करने के लिए जाने जाते हैं।

    बेहद खुले विचारों वाले महेश भट्ट ने समाज की बंदिशों को तोड़ समाज की सोच बदलने वाली फिल्में बनाईं। उन्होंने ‘जहर’, ‘मर्डर 2’, ‘जिस्म 2’ जैसी फिल्में बनाकर अपना नाम बॉलीवुड के बोल्ड विषयों पर फिल्में बनाने वाले डायरेक्टर में शामिल कर लिया। महेश भट्ट ने कई फिल्मों में अपनी निजी जिंदगी को परदे पर भी उतारा है।

    पूजा भट्ट को लेकर विवादित बयान पर हुआ था हंगामा

    विवादों से भी महेश भट्ट का नाता रहा है। महेश अपनी बेटी पूजा भट्ट को लेकर भी विवादों में रहे। पूजा भट्ट के साथ एक फोटोशूट को लेकर काफी आलोचना हुई थी। एक इंटरव्यू में महेश भट्ट ने अपनी बेटी को लेकर विवादित बयान भी दिया था। बहरहाल महेश भट्ट कितने भी विवादों में रहे हों लेकिन वो उसे गंभीरता से नहीं लेते। आज भी वो हर मुद्दे पर बेबाक तरीके से राय रखते हैं।

    महेश भट्ट की निजी जिंदगी और शादी

    महेश भट्ट की निजी जिंदगी की बात करें तो उनकी पहली शादी किरण भट्ट (लोरिएन ब्राइट) से हुई। किरण से महेश कॉलेज के दिनों में मिले और प्यार हो गया। महेश भट्ट और किरण भट्ट के दो बच्चे पूजा भट्ट और राहुल भट्ट हैं। हालांकि, किरण भट्ट के साथ महेश भट्ट का रिश्ता टूट गया। इसके बाद उन्होंने सोनी राजदान से शादी रचाई। सोनी राजदान के साथ महेश भट्ट की दो बेटियां आलिया भट्ट और शाहीन भट्ट हैं।

    महेश भट्ट का वर्क फ्रंट

    महेश भट्ट के वर्क फ्रंट की बात करें तो वे फिल्म ‘नाम-टू लिव इज वॉर’ को लेकर चर्चा में हैं। इसमें वीर पहाड़िया अहम भूमिका में नजर आएंगे। महेश भट्ट इस फिल्म को पेश कर रहे हैं। वहीं, निर्देशन की कमान सिद्धांत सचदेव के कंधों पर है।