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  • रामायण में भगवान राम का किरदार निभाने से पहले रणबीर कपूर ने किया ध्यान योग और शास्त्रों का गहन अध्ययन

    रामायण में भगवान राम का किरदार निभाने से पहले रणबीर कपूर ने किया ध्यान योग और शास्त्रों का गहन अध्ययन


    नई दिल्ली। नितेश तिवारी की बहुप्रतीक्षित फिल्म रामायण को लेकर दर्शकों का उत्साह लगातार बढ़ता जा रहा है। फिल्म का ट्रेलर सैन डिएगो कॉमिक कॉन में प्रदर्शित किया गया जहां अभिनेता रणबीर कपूर ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि भगवान श्रीराम के किरदार को निभाने के लिए उन्होंने करीब दो वर्षों तक विशेष तैयारी की। उन्होंने कहा कि किसी भी पौराणिक चरित्र को निभाना केवल अभिनय का विषय नहीं होता बल्कि उसके विचारों आदर्शों और जीवन दर्शन को आत्मसात करना सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है।

    रणबीर कपूर ने कहा कि किसी एक्शन फिल्म या सामान्य किरदार के लिए शरीर बनाना डांस सीखना या नई तकनीक अपनाना अपेक्षाकृत आसान होता है लेकिन भगवान श्रीराम जैसा चरित्र निभाने के लिए मन और विचारों को भी उसी दिशा में ढालना जरूरी था। उन्होंने महसूस किया कि यदि श्रीराम के आदर्शों को समझे बिना केवल बाहरी रूप अपनाया जाए तो यह किरदार अधूरा रह जाएगा।

    अभिनेता ने बताया कि उन्होंने इस भूमिका के लिए नियमित योग और ध्यान का अभ्यास किया। उनके साथ एक आध्यात्मिक मार्गदर्शक भी रहे जिन्होंने घंटों तक उन्हें ध्यान कराया और श्रीराम के जीवन मूल्यों तथा शिक्षाओं को विस्तार से समझाया। रणबीर ने कहा कि इन सत्रों ने उन्हें केवल अभिनय के स्तर पर नहीं बल्कि व्यक्तिगत जीवन में भी काफी बदल दिया। उन्होंने धैर्य संयम करुणा और कर्तव्य जैसे मूल्यों को गहराई से समझने की कोशिश की।

    रणबीर कपूर ने यह भी बताया कि उन्होंने इस दौरान अनेक धार्मिक ग्रंथों और विभिन्न विद्वानों की व्याख्याओं का अध्ययन किया। उन्होंने कई विशेषज्ञों से मुलाकात कर भगवान श्रीराम के व्यक्तित्व को अलग अलग दृष्टिकोण से समझा ताकि पर्दे पर उनका अभिनय स्वाभाविक और प्रभावशाली दिखाई दे। उनके अनुसार भगवान श्रीराम का चरित्र केवल एक राजा या योद्धा का नहीं बल्कि आदर्श पुत्र आदर्श भाई आदर्श पति और आदर्श शासक का भी प्रतीक है।

    उन्होंने कहा कि उनकी सबसे बड़ी कोशिश यही रही कि आठ साल के बच्चे से लेकर अस्सी वर्ष के बुजुर्ग तक हर दर्शक उनके अभिनय में भगवान श्रीराम की सहजता और मर्यादा महसूस कर सके। यही कारण है कि उन्होंने इस भूमिका के लिए मानसिक और आध्यात्मिक तैयारी को सबसे अधिक महत्व दिया। रणबीर का मानना है कि ऐसे किरदार निभाने वाले कलाकार के भीतर भी विनम्रता और सादगी होना आवश्यक है।

    सैन डिएगो कॉमिक कॉन में फिल्म के ट्रेलर को दर्शकों ने जबरदस्त प्रतिक्रिया दी। सोशल मीडिया पर भी ट्रेलर की खूब चर्चा हो रही है और प्रशंसक फिल्म के रिलीज होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इस मौके पर फिल्म के निर्माता नमित मल्होत्रा निर्देशक नितेश तिवारी और अभिनेता यश भी मौजूद रहे।

    रामायण दो भागों में रिलीज होगी। फिल्म में रणबीर कपूर भगवान श्रीराम की भूमिका निभा रहे हैं जबकि साई पल्लवी माता सीता के किरदार में नजर आएंगी। यश रावण की भूमिका निभा रहे हैं। इसके अलावा सनी देओल हनुमान रवि दुबे लक्ष्मण और अरुण गोविल राजा दशरथ के किरदार में दिखाई देंगे। भव्य विजुअल इफेक्ट्स विशाल सेट और दमदार स्टारकास्ट के कारण यह फिल्म भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी फिल्मों में से एक मानी जा रही है। दर्शकों को उम्मीद है कि यह फिल्म केवल मनोरंजन ही नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का भी महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी।

  • छात्र आंदोलन को मिला फिल्मी दुनिया का साथ, शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल; कई कलाकारों ने निष्पक्ष जांच की मांग की

    छात्र आंदोलन को मिला फिल्मी दुनिया का साथ, शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल; कई कलाकारों ने निष्पक्ष जांच की मांग की

    नई दिल्ली ।  NEET-UG पेपर लीक विवाद को लेकर देशभर में जारी छात्र आंदोलन को अब फिल्म जगत की कई प्रमुख हस्तियों का समर्थन मिलने लगा है। विभिन्न कलाकारों ने सोशल मीडिया के माध्यम से छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से लेने, शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और निष्पक्ष कार्रवाई की आवश्यकता पर अपनी राय व्यक्त की है। इस बीच आंदोलन और उससे जुड़े मुद्दों पर सार्वजनिक चर्चा भी लगातार तेज होती जा रही है।

    अभिनेता शाहिद कपूर ने छात्रों के समर्थन में कहा कि यदि युवा पीढ़ी का शिक्षा व्यवस्था से भरोसा उठने लगे तो यह पूरे समाज के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि जिन छात्रों से वर्षों तक परीक्षाओं में जवाब मांगे जाते हैं, उन्हें भी अपने भविष्य से जुड़े सवाल पूछने का पूरा अधिकार है। उनके अनुसार शिक्षा प्रणाली पर विश्वास बनाए रखना किसी भी देश के विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।

    सलमान खान ने भी इस पूरे विवाद को गंभीर बताते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने छात्रों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की अपील की और विश्वास जताया कि न्याय सुनिश्चित किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इस संवेदनशील मुद्दे को राजनीतिक विवाद का रूप नहीं दिया जाना चाहिए और समाधान पर ध्यान केंद्रित करना अधिक आवश्यक है।

    करीना कपूर ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि जब बड़ी संख्या में छात्र अपने भविष्य को लेकर चिंता व्यक्त कर रहे हों तो उनकी बात सुनना सरकार और संबंधित संस्थाओं की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य युवाओं में विश्वास और उम्मीद पैदा करना है। यदि मेहनत और योग्यता पर सवाल उठने लगें तो इसका असर पूरे समाज पर पड़ता है। उन्होंने पारदर्शी और विश्वसनीय परीक्षा प्रणाली की आवश्यकता दोहराई।

    अभिनेता वरुण धवन ने भी छात्रों के सवालों को उचित बताते हुए कहा कि किसी छात्र का सपना टूटने का असर केवल उस व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे परिवार की उम्मीदों पर पड़ता है। वहीं अनन्या पांडे ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी बदलाव और निष्पक्ष व्यवस्था की मांग कर रही है। उनके अनुसार अपनी बात रखना लोकतांत्रिक अधिकार है और इसे सकारात्मक दृष्टि से देखा जाना चाहिए।

    लेखिका और अभिनेत्री ट्विंकल खन्ना ने भी छात्रों के आंदोलन का समर्थन करते हुए युवाओं के साहस की सराहना की। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों को अपनी बात रखने का अधिकार होना चाहिए। दूसरी ओर सारा अली खान ने युवाओं की आवाज को गंभीरता से सुनने की अपील करते हुए कहा कि छात्रों के सपने देश के भविष्य से जुड़े हैं और उनकी चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

    NEET-UG पेपर लीक विवाद के बाद शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा का विषय बन चुका है। विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और सार्वजनिक हस्तियां इस मुद्दे पर अपनी-अपनी राय रख रही हैं। फिल्मी कलाकारों की प्रतिक्रियाओं ने भी शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता और छात्रों के भविष्य को लेकर चल रही बहस को नया आयाम दिया है। आने वाले समय में इस पूरे मामले पर सरकार और संबंधित संस्थाओं की आगे की कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है।

  • NEET आंदोलन पर टूटी बॉलीवुड की चुप्पी, सलमान से आलिया तक कई सितारों ने छात्रों का किया समर्थन

    NEET आंदोलन पर टूटी बॉलीवुड की चुप्पी, सलमान से आलिया तक कई सितारों ने छात्रों का किया समर्थन



    नई दिल्ली । NEET पेपर लीक को लेकर देशभर में जारी छात्र आंदोलन के बीच अब बॉलीवुड की चुप्पी भी टूटती नजर आ रही है। शुरुआत में जहां फिल्म उद्योग के चुनिंदा कलाकार ही इस मुद्दे पर अपनी राय रख रहे थे वहीं अब कई बड़े सितारे खुलकर छात्रों के समर्थन में सामने आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर इसे लेकर चर्चा तेज है कि क्या सलमान खान की प्रतिक्रिया के बाद बॉलीवुड के अन्य कलाकारों ने भी अपनी चुप्पी तोड़ी या फिर यह छात्रों के बढ़ते आंदोलन का असर है।

    सबसे पहले अभिनेता सलमान खान ने NEET पेपर लीक को गंभीर मुद्दा बताते हुए छात्रों के आंदोलन का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और भरोसा कायम रहना बेहद जरूरी है। बाद में उन्होंने छात्रों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की अपील की और सरकार की कार्रवाई पर भरोसा जताते हुए आंदोलन समाप्त करने का भी आग्रह किया।

    सलमान खान की प्रतिक्रिया के बाद अभिनेत्री आलिया भट्ट ने भी छात्रों के समर्थन में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि हर छात्र के पीछे एक सपना और एक परिवार की उम्मीद जुड़ी होती है। उनके अनुसार नई पीढ़ी की आवाज को गंभीरता से सुना जाना चाहिए और शिक्षा व्यवस्था पर लोगों का विश्वास बनाए रखना जरूरी है।

    इसके अलावा कई अन्य कलाकारों ने भी आंदोलन को लेकर अपनी राय सार्वजनिक की। रिपोर्टों के अनुसार शबाना आजमी हुमा कुरैशी और अन्य फिल्मी हस्तियों ने भी छात्रों के साथ एकजुटता जताते हुए निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग की। कुछ कलाकारों ने यह भी कहा कि शिक्षा जैसे संवेदनशील विषय को राजनीतिक बहस से अलग रखते हुए छात्रों के भविष्य को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

    फिल्म जगत के कई लोगों का मानना है कि छात्रों का शांतिपूर्ण विरोध लोकतांत्रिक अधिकार है और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है। वहीं कुछ कलाकारों ने यह भी अपील की कि आंदोलन का उद्देश्य शिक्षा सुधार बना रहे और किसी भी तरह की हिंसा या भटकाव से बचा जाए।

    सोशल मीडिया पर इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग मान रहे हैं कि सलमान खान की टिप्पणी के बाद बॉलीवुड के अन्य सितारों का भी इस मुद्दे पर खुलकर सामने आना शुरू हुआ है जबकि कुछ का कहना है कि लगातार बढ़ते छात्र आंदोलन और जनसमर्थन ने कलाकारों को अपनी राय रखने के लिए प्रेरित किया। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है कि किसी एक अभिनेता की प्रतिक्रिया ही बाकी सितारों के बोलने का कारण बनी।

    फिलहाल NEET पेपर लीक विवाद और उससे जुड़े विरोध प्रदर्शन राष्ट्रीय बहस का विषय बने हुए हैं। छात्रों की मांग है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। इसी बीच फिल्म जगत से मिल रहे समर्थन ने इस मुद्दे को और अधिक चर्चा में ला दिया है।

  • 250 असली कुत्तों के साथ बनी 'ओह माय डॉग', पंकज त्रिपाठी ने बिना फीस निभाया अहम किरदार, उठेगा डॉग ट्रैफिकिंग का मुद्दा

    250 असली कुत्तों के साथ बनी 'ओह माय डॉग', पंकज त्रिपाठी ने बिना फीस निभाया अहम किरदार, उठेगा डॉग ट्रैफिकिंग का मुद्दा

    नई दिल्ली । 31 जुलाई को रिलीज हो रही ‘ओह माय डॉग’ डॉग ट्रैफिकिंग जैसे गंभीर मुद्दे पर बनी फिल्म है। इसमें 250 असली कुत्तों के साथ शूटिंग की गई है। पंकज त्रिपाठी ने कहानी से प्रभावित होकर बिना फीस फिल्म में काम किया, जबकि ब्रूनो और ऑस्कर नाम के दो डॉगी इस फिल्म के असली हीरो हैं।

    यह फिल्म सिर्फ मनोरंजन ही नहीं, बल्कि उन बेजुबान कुत्तों की आवाज बनती है जिनका दर्द अक्सर दुनिया तक नहीं पहुंच पाता। इसकी कहानी एक बच्चे और उसके पालतू डॉगी के बीच के अनमोल रिश्ते के जरिए जानवरों के खिलाफ होने वाले अपराधों की सच्चाई सामने लाती है।

    फिल्म से जुड़ी मुख्य बातें
    250 असली कुत्तों के साथ शूटिंग: फिल्म की सबसे बड़ी खासियत इसके 250 असली कुत्ते हैं। फिल्म के सबसे अहम किरदार ब्रूनो और ऑस्कर नाम के दो डॉगी निभा रहे हैं, जिन्हें देशभर में हजारों कुत्तों के ऑडिशन लेने के बाद चुना गया।

    पंकज त्रिपाठी ने नहीं ली फीस: पंकज त्रिपाठी का रोल भले ही छोटा है, लेकिन जानवरों के प्रति प्यार और फिल्म का संदेश उन्हें इतना पसंद आया कि उन्होंने इसके लिए कोई फीस नहीं ली। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक बच्चे और डॉगी की कहानी नहीं, बल्कि इंसानियत, प्यार और दया का संदेश है।

    डॉग ट्रैफिकिंग का काला सच: फिल्म उस अंधेरी दुनिया को उजागर करती है जहाँ मासूम पालतू जानवरों की तस्करी कर उन्हें गलत हाथों में बेच दिया जाता है। कहानी में एक बच्चे का अपने डॉगी के लिए प्यार इस पूरे रैकेट का पर्दाफाश करता है।

    निर्देशक और संदेश
    फिल्म का निर्देशन अमित राय ने किया है, जिन्होंने इससे पहले ‘ओह माय गॉड 2’ जैसी चर्चित फिल्म बनाई थी। बड़े एक्शन और वीएफएक्स के दौर में यह फिल्म दिल को छू लेने वाली कहानी और सामाजिक संवेदना के दम पर बनाई गई है।

  • 'ये आवारापन' के साथ लौटी पुरानी यादों की कसक, अरिजीत सिंह की भावुक आवाज और इमरान हाशमी की दमदार मौजूदगी ने बढ़ाया 'आवारापन 2' का इंतजार

    'ये आवारापन' के साथ लौटी पुरानी यादों की कसक, अरिजीत सिंह की भावुक आवाज और इमरान हाशमी की दमदार मौजूदगी ने बढ़ाया 'आवारापन 2' का इंतजार

    नई दिल्ली । अभिनेता इमरान हाशमी की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘आवारापन 2’ का टाइटल ट्रैक ‘ये आवारापन’ रिलीज होने के साथ ही दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। लंबे समय से इस गीत का इंतजार कर रहे प्रशंसकों ने रिलीज के तुरंत बाद इसे सोशल मीडिया पर जमकर सराहा। फिल्म के पहले भाग से जुड़ी भावनात्मक यादों को ताजा करता यह गीत रोमांस, बिछड़ने के दर्द और अधूरे रिश्तों की संवेदनाओं को नए अंदाज में प्रस्तुत करता है। इसके साथ ही मशहूर गायक अरिजीत सिंह ने कई महीनों बाद बॉलीवुड प्लेबैक सिंगिंग में वापसी की है, जिसे संगीत प्रेमियों ने खास तौर पर पसंद किया है।

    इस गीत में अरिजीत सिंह की भावपूर्ण आवाज और संगीतकार अमाल मलिक की धुनों का प्रभाव साफ दिखाई देता है। गीत के बोल रश्मि-विराग ने लिखे हैं, जिनमें प्रेम, इंतजार और यादों की गहराई को सहज भाषा में पिरोया गया है। संगीत और शब्दों का संतुलन ऐसा है कि यह गीत पहली बार सुनने पर ही श्रोताओं से भावनात्मक जुड़ाव स्थापित करने में सफल नजर आता है। यही वजह है कि रिलीज के कुछ ही समय बाद यह गाना विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म पर तेजी से लोकप्रिय होने लगा।

    म्यूजिक वीडियो में इमरान हाशमी एक बार फिर शिवम पंडित के किरदार में दिखाई दे रहे हैं। उनका किरदार अपने अतीत की यादों और अधूरे प्रेम की कसक के साथ जीवन बिताता नजर आता है। वीडियो में भावनात्मक दृश्यों के माध्यम से उस संघर्ष और अकेलेपन को दिखाया गया है, जिसने पहली फिल्म के इस किरदार को दर्शकों के बीच लोकप्रिय बनाया था। इमरान हाशमी की संयमित अदाकारी और उनके चेहरे के भाव इस गीत की संवेदनशीलता को और प्रभावशाली बनाते हैं।

    फिल्म के पहले भाग में इस कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा रही अभिनेत्री श्रिया सरन की याद भी इस गीत के माध्यम से ताजा होती है। हालांकि इस बार फिल्म की मुख्य अभिनेत्री दिशा पाटनी की झलक टाइटल ट्रैक में देखने को नहीं मिली। इसे लेकर कई दर्शकों ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी और फिल्म में उनके किरदार को लेकर उत्सुकता भी जाहिर की। इसके बावजूद गीत की भावनात्मक प्रस्तुति और इमरान हाशमी की स्क्रीन मौजूदगी ने दर्शकों का ध्यान अपनी ओर बनाए रखा।

    ‘आवारापन 2’ का निर्माण विशाल फिल्म्स और मुकेश भट्ट के बैनर तले किया गया है। फिल्म का निर्देशन नितिन कक्कड़ ने किया है, जबकि इसकी कहानी बिलाल सिद्दीकी ने लिखी है। निर्माता विशेष भट्ट हैं। फिल्म की स्टार कास्ट में इमरान हाशमी और दिशा पाटनी के अलावा शबाना आजमी, सुविंदर विक्की, विजयंत कोहली, अतुल कुमार और अनिरुद्ध रावल भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आएंगे। निर्माताओं को उम्मीद है कि यह फिल्म भावनात्मक कहानी और मजबूत संगीत के दम पर दर्शकों के बीच अपनी अलग पहचान बनाएगी।

    फिल्म 14 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। टाइटल ट्रैक को मिली शुरुआती सकारात्मक प्रतिक्रिया ने फिल्म को लेकर दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ा दी है। संगीत प्रेमियों का मानना है कि अरिजीत सिंह की वापसी, अमाल मलिक का संगीत और इमरान हाशमी की भावनात्मक प्रस्तुति इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बन सकती है। अब दर्शकों की नजरें फिल्म की रिलीज पर टिकी हैं, जहां यह देखना दिलचस्प होगा कि ‘आवारापन’ की विरासत को इसका सीक्वल किस तरह आगे बढ़ाता है।

  • भारतीय सिनेमा की प्रतिभावान अभिनेत्री स्मिता पाटिल की अंतिम घड़ियों का दर्दनाक सच: गंभीर संक्रमण और असमय चिकित्सा ने छीना दिग्गज कलाकार

    भारतीय सिनेमा की प्रतिभावान अभिनेत्री स्मिता पाटिल की अंतिम घड़ियों का दर्दनाक सच: गंभीर संक्रमण और असमय चिकित्सा ने छीना दिग्गज कलाकार

    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा की सबसे प्रभावशाली और प्रतिभाशाली अभिनेत्रियों में शुमार स्मिता पाटिल के असमय निधन की कहानी आज भी कला जगत को झकझोर देती है। समानांतर और व्यावसायिक सिनेमा दोनों में अपनी सशक्त अदाकारी की छाप छोड़ने वाली इस महान अभिनेत्री की जीवन यात्रा बेहद दर्दनाक परिस्थितियों में समाप्त हुई थी। वर्ष 1986 में अपने पहले बच्चे के जन्म के ठीक दो सप्ताह बाद गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के कारण उनका निधन हो गया था। प्रसव के बाद शरीर में फैले घातक संक्रमण और सही समय पर चिकित्सीय सलाह न लेने की वजह से उनकी स्थिति बेहद नाजुक हो गई थी।

    पुत्र के जन्म के बाद परिवार में खुशियों का माहौल था, लेकिन प्रसवोत्तर संक्रमण ने अभिनेत्री को अपनी चपेट में ले लिया था। शुरुआती दौर में स्वास्थ्य में आ रही गिरावट को सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज किया गया, जिससे संक्रमण धीरे-धीरे पूरे शरीर में फैलता चला गया। स्थानीय चिकित्सकों द्वारा प्राथमिक उपचार और ड्रिप दिए जाने के बावजूद उनके शरीर का तापमान लगातार बढ़ता रहा। अपने नवजात शिशु के प्रति अत्यधिक लगाव के कारण वे अस्पताल जाने से बचती रहीं, जिससे स्थिति लगातार नियंत्रण से बाहर होती चली गई।

    निधन वाले दिन अभिनेत्री की स्थिति में अचानक भारी गिरावट दर्ज की गई। शाम के समय उनका चेहरा पीला पड़ने लगा और उन्हें लगातार खून की उल्टियां होने लगीं। गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें तत्काल मुंबई के जसलोक अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक वे कोमा की स्थिति में जा चुकी थीं। विशेषज्ञों की टीम ने उन्हें बचाने के भरसक प्रयास किए और स्थिति को संभालने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर के डॉक्टरों से भी संपर्क साधने की कोशिशें की गईं, परंतु संक्रमण मस्तिष्क और शरीर के अन्य अंगों तक फैल चुका था।

    अस्पताल में भर्ती कराए जाने के कुछ ही घंटों भीतर आंतरिक रक्तस्राव और अंगों के काम न करने की वजह से स्थिति पूरी तरह से बिगड़ गई। अंततः देर रात चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। केवल इकत्तीस वर्ष की आयु में स्मिता पाटिल का इस तरह अचानक चले जाना संपूर्ण भारतीय फिल्म उद्योग के लिए एक कभी न पूरा होने वाला घाटा था। उनके निधन के बाद उनके नवजात शिशु का पालन-पोषण उनके माता-पिता द्वारा किया गया, जबकि भारतीय सिनेमा में उनके योगदान को आज भी अत्यंत सम्मान के साथ याद किया जाता है।

  • कार्तिक आर्यन और ममूटी सर्वश्रेष्ठ अभिनेता घोषित, 'चंदू चैंपियन' के लिए कार्तिक ने जीता पहला नेशनल अवॉर्ड

    कार्तिक आर्यन और ममूटी सर्वश्रेष्ठ अभिनेता घोषित, 'चंदू चैंपियन' के लिए कार्तिक ने जीता पहला नेशनल अवॉर्ड

    नई दिल्ली । राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के हालिया एलान ने भारतीय सिनेमा जगत में उत्साह और गौरव की एक नई लहर पैदा कर दी है। देश के सबसे प्रतिष्ठित 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की घोषणा के साथ ही कई कलाकारों के करियर में एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। इस वर्ष के पुरस्कारों में सबसे बड़ा आकर्षण बॉलीवुड अभिनेता कार्तिक आर्यन रहे, जिन्हें उनके करियर के सबसे चुनौतीपूर्ण और बेहतरीन अभिनय के लिए देश का सर्वोच्च अभिनय सम्मान दिया गया है। कार्तिक आर्यन को फिल्म ‘चंदू चैंपियन’ में उनके असाधारण प्रदर्शन के लिए संयुक्त रूप से सर्वश्रेष्ठ अभिनेता घोषित किया गया है। उनके साथ ही दक्षिण भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता ममूटी को भी उनके शानदार अभिनय के लिए इस शीर्ष सम्मान से नवाजा गया है, जो उनके सफर का चौथा राष्ट्रीय पुरस्कार है।

    इस ऐतिहासिक उपलब्धि की घोषणा होते ही विजेता अभिनेता के घर और प्रशंसकों के बीच जश्न का माहौल बन गया। कार्तिक आर्यन ने अपनी इस बड़ी कामयाबी की झलक सोशल मीडिया पर एक बेहद भावुक और गरिमापूर्ण पोस्ट के जरिए साझा की है। उन्होंने एक वीडियो इंटरनेट पर पोस्ट किया है जिसमें वह अपने परिवार के साथ बैठकर लैपटॉप की स्क्रीन पर लाइव पुरस्कारों की घोषणा देख रहे हैं। जैसे ही स्क्रीन पर विजेता के रूप में उनका नाम आता है, पूरा परिवार खुशी से झूम उठता है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कार्तिक गर्व से स्क्रीन की तरफ उंगली दिखाकर अपने माता-पिता और परिजनों को अपना नाम दिखा रहे हैं, जिसके बाद पूरा परिवार गले मिलकर इस ऐतिहासिक क्षण को साझा करता है।

    इस अविस्मरणीय पल को अपने प्रशंसकों के साथ साझा करते हुए अभिनेता ने लिखा कि वह अभी भी इस अद्भुत एहसास को पूरी तरह आत्मसात करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा कि जीवन में कुछ पल ऐसे आते हैं जो शब्दों की सीमा से बहुत परे होते हैं और यह पुरस्कार उनके लिए बिल्कुल वैसा ही है। उन्होंने यह भी साझा किया कि वर्षों से देखा गया उनका एक बड़ा सपना आज आखिरकार सच हो गया है, जिसके लिए वह सिनेमा जगत, जूरी और अपने प्रशंसकों के प्रति हमेशा विनम्र और आभारी रहेंगे। यह पुरस्कार उनके लिए मात्र एक सम्मान नहीं, बल्कि उनके सालों के कड़े परिश्रम और समर्पण का सबसे बड़ा प्रमाण है।

    कार्तिक आर्यन ने अपने फिल्मी सफर की शुरुआत साल 2011 में फिल्म ‘प्यार का पंचनामा’ से की थी, जिसके बाद लंबे समय तक उन्हें मुख्य रूप से रोमांटिक-कॉमेडी और ड्रामा फिल्मों के लिए पहचाना जाता रहा। उन्होंने ‘सोनू के टीटू की स्वीटी’, ‘लुका छुपी’ और ‘सत्यप्रेम की कथा’ जैसी व्यावसायिक रूप से सफल फिल्मों में काम करके बॉक्स ऑफिस पर अपनी एक मजबूत पहचान बनाई थी। हालांकि, निर्देशक कबीर खान के मार्गदर्शन में बनी स्पोर्ट्स ड्रामा फिल्म ‘चंदू चैंपियन’ ने उनके करियर की पूरी दिशा ही बदल दी। यह फिल्म भारत के पहले पैरालिंपिक स्वर्ण पदक विजेता मुरलीकांत पेटकर के संघर्षपूर्ण और प्रेरणादायक जीवन पर आधारित है, जिसके मुख्य किरदार को बड़े पर्दे पर जीवंत करने के लिए कार्तिक आर्यन ने अभूतपूर्व शारीरिक और मानसिक बदलाव किए थे। फिल्म समीक्षकों और दर्शकों ने रिलीज के समय ही उनके इस काम को उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन माना था और अब राष्ट्रीय स्तर पर मिली इस मान्यता ने इस पर अपनी अंतिम मुहर लगा दी है।

    इस वर्ष के राष्ट्रीय पुरस्कारों में ‘चंदू चैंपियन’ के अलावा अन्य फिल्मों का भी दबदबा रहा। फिल्म ‘आर्टिकल 370’ में अपनी सशक्त और गंभीर भूमिका के लिए अभिनेत्री यामी गौतम को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के खिताब से नवाजा गया है, जिन्होंने पुरस्कार जीतने के बाद अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि सपने सच होते हैं। वहीं दूसरी ओर, फिल्म ‘भक्षक’ में अपने बेहतरीन और यथार्थवादी अभिनय के लिए जाने-माने अभिनेता संजय मिश्रा को सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार मिला है। अभिनेता रणदीप हुड्डा को भी उनकी महत्वाकांक्षी फिल्म ‘स्वातंत्र्यवीर सावरकर’ के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया गया है, जिसे उन्होंने अपने करियर की सबसे कठिन फिल्म बताया था। कला जगत और खेल पृष्ठभूमि पर आधारित सिनेमा को इस बार राष्ट्रीय मंच पर जो सराहना मिली है, उसने भारतीय फिल्म उद्योग में गुणवत्तापूर्ण और कंटेंट-आधारित कहानियों के महत्व को और अधिक बढ़ा दिया है।

  • राज कपूर के गैर-पेशेवर व्यवहार के कारण उनसे नाराज थीं साधना; 'दूल्हा दुल्हन' के बाद फिर कभी साथ काम न करने की खाई थी कसम

    राज कपूर के गैर-पेशेवर व्यवहार के कारण उनसे नाराज थीं साधना; 'दूल्हा दुल्हन' के बाद फिर कभी साथ काम न करने की खाई थी कसम


    नई दिल्ली ।
    हिंदी सिनेमा के इतिहास में ‘शोमैन’ के नाम से विख्यात दिग्गज अभिनेता और निर्देशक राज कपूर अपनी बेहतरीन फिल्मों के साथ-साथ सह-कलाकारों के साथ अपने संबंधों को लेकर भी सदैव चर्चा में रहे। जहां एक ओर फिल्म उद्योग की अधिकांश अभिनेत्रियां उनके साथ काम करने के अवसर तलाशती थीं, वहीं दूसरी ओर साठ के दशक की शीर्ष और बेहद खूबसूरत अभिनेत्री साधना शिवदसानी के साथ उनके रिश्तों में एक ऐसी तल्खी आई जो जीवनभर बरकरार रही। फिल्मी गलियारों में यह बात आज भी बेहद चर्चा का विषय रहती है कि अपनी बेमिसाल खूबसूरती और अभिनय से दर्शकों के दिलों पर राज करने वाली साधना, राज कपूर के एक विशेष व्यवहार के कारण उनसे अत्यधिक नाराज थीं और उन्होंने जीवन में दोबारा कभी उनके साथ स्क्रीन साझा नहीं की।
    इस ऐतिहासिक तल्खी और विवाद की मुख्य वजह वर्ष 1964 में प्रदर्शित हुई लोकप्रिय फिल्म ‘दूल्हा दुल्हन’ के निर्माण के दौरान सामने आई थी। तत्कालीन समय की फिल्मी पत्रिकाओं और सूत्रों के अनुसार, इस फिल्म के मुख्य अभिनेता राज कपूर उस दौर में अपने कई अन्य बड़े प्रोजेक्ट्स और निर्देशन कार्यों में अत्यधिक व्यस्त थे। इस व्यस्तता के कारण वह अक्सर फिल्म ‘दूल्हा दुल्हन’ के सेट पर काफी विलंब से पहुंचते थे, जिसके चलते पूरी यूनिट का काम प्रभावित होता था। सेट पर समय की पाबंद और अपने काम के प्रति बेहद गंभीर रहने वाली अभिनेत्री साधना को राज कपूर के इस इंतजार में घंटों बैठना पड़ता था, जिसे उन्होंने पूरी तरह से गैर-पेशेवर आचरण माना।

    साधना ने इस व्यवहार को अपने काम और समय का अनादर समझा और इसी स्वाभिमान के चलते उन्होंने निर्णय लिया कि वह भविष्य में कभी भी राज कपूर के साथ किसी भी फिल्म में काम नहीं करेंगी। यद्यपि इस तल्खी को लेकर दोनों ही कलाकारों ने कभी सार्वजनिक रूप से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया और न ही इसके कोई लिखित पुख्ता प्रमाण मिलते हैं, परंतु इसके बाद का फिल्मी इतिहास गवाह है कि इस सुपरहिट जोड़ी को दोबारा किसी फिल्म निर्माता ने एक साथ साइन नहीं किया। दोनों ने अपने पूरे करियर में मुख्य भूमिकाओं के रूप में केवल इसी एक फिल्म में साथ काम किया।

    दिलचस्प बात यह है कि व्यावसायिक रूप से ‘दूल्हा दुल्हन’ बॉक्स ऑफिस पर एक बेहद सफल फिल्म साबित हुई थी और इसके मधुर गीत आज भी संगीत प्रेमियों द्वारा बेहद पसंद किए जाते हैं। बहुत कम लोग इस ऐतिहासिक तथ्य से परिचित हैं कि इस मुख्य फिल्म से कई वर्ष पूर्व, जब साधना मात्र 15-16 वर्ष की थीं और एक स्थानीय डांस स्कूल में नृत्य की शिक्षा ले रही थीं, तब उन्होंने राज कपूर की कालजयी फिल्म ‘श्री 420’ के प्रसिद्ध गीत ‘मुड़ मुड़ के न देख’ में एक साधारण बैकग्राउंड डांसर के रूप में काम किया था। उस समय किसी ने यह नहीं सोचा था कि पृष्ठभूमि में नाचने वाली यही बच्ची आगे चलकर बॉलीवुड की सबसे बड़ी स्टार बनेगी और शोमैन के सामने अपने सिद्धांतों के लिए खड़ी होगी।

    मध्य प्रदेश सहित देश भर के पुराने सिनेमा प्रेमी आज भी इन दोनों कलाकारों के अभिनय और उनके बीच की इस मूक असहमति को बॉलीवुड के स्वर्णिम युग की एक अनसुनी दास्तान के रूप में याद करते हैं। साधना का यह कड़ा रुख यह स्पष्ट करता है कि उस दौर की अभिनेत्रियां न केवल अपने स्टारडम बल्कि अपने आत्मसम्मान और कार्यस्थल पर व्यावसायिकता को लेकर कितनी सजग थीं, भले ही सामने फिल्म उद्योग का सबसे बड़ा नाम ही क्यों न खड़ा हो। राज कपूर के साथ दोबारा काम न करने के फैसले के बावजूद साधना ने अपने दौर के अन्य सभी सुपरस्टार्स के साथ एक से बढ़कर एक ब्लॉकबस्टर फिल्में दीं और हिंदी सिनेमा में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज कराया।

  • स्टारडम के घमंड में रेखा के पहले हीरो ने ठुकराई थीं 'दीवार' जैसी फिल्में, बाद में अमिताभ बच्चन के सामने फैलाना पड़ा हाथ

    स्टारडम के घमंड में रेखा के पहले हीरो ने ठुकराई थीं 'दीवार' जैसी फिल्में, बाद में अमिताभ बच्चन के सामने फैलाना पड़ा हाथ

    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा जगत की चकाचौंध और अनिश्चितता का इतिहास बेहद पुराना रहा है, जहां समय का चक्र कब किसी शीर्ष कलाकार को जमीन पर ला दे, यह कहना असंभव है। साठ और सत्तर के दशक में बॉक्स ऑफिस पर एकछत्र राज करने वाले अभिनेता नवीन निश्चल के जीवन की कहानी भी कुछ ऐसी ही उतार-चढ़ाव से भरी रही है। एक समय अपने स्टारडम के चरम पर रहने वाले इस अभिनेता को अपनी सफलता पर इस कदर अहंकार हो गया था कि उन्होंने महानायक अमिताभ बच्चन को एक बेहद साधारण और छोटा कलाकार समझकर न केवल उनकी बेइज्जती की, बल्कि उनके साथ सार्वजनिक रूप से खड़े होने से भी इंकार कर दिया था। दिलचस्प तथ्य यह है कि नवीन निश्चल वही अभिनेता हैं, जिनके साथ सदाबहार अभिनेत्री रेखा ने बॉलीवुड में अपने अभिनय सफर की शुरुआत की थी।

    फिल्म उद्योग में अपने कदम जमाने वाले नवीन निश्चल ने वर्ष 1970 में प्रदर्शित हुई सुपरहिट फिल्म ‘सावन भादो’ से अभिनेत्री रेखा के साथ मुख्य अभिनेता के रूप में पदार्पण किया था। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित हुई, जिसने नवीन को रातोंरात निर्माताओं की पहली पसंद बना दिया। इसके ठीक अगले वर्ष 1971 में उनकी पांच बड़ी फिल्में प्रदर्शित हुईं, जिनमें ‘बुड्ढा मिल गया’, ‘नादान’, ‘संसार’, ‘गंगा तेरा पानी अमृत’ और ‘परवाना’ शामिल थीं। इन फिल्मों की निरंतर सफलता ने उनके भीतर एक गहरे अहंकार को जन्म दे दिया, जो आगे चलकर उनके करियर के पतन का मुख्य कारण बना।

    इसी दौर में आई फिल्म ‘परवाना’ के निर्माण और प्रचार के दौरान एक ऐसी घटना घटी, जिसने फिल्म जगत में काफी सुर्खियां बटोरीं। इस फिल्म में नवीन निश्चल मुख्य भूमिका में थे, जबकि संघर्ष कर रहे अमिताभ बच्चन एक बेहद छोटे और नकारात्मक किरदार में नजर आए थे। फिल्म के प्रचार प्रसार के दौरान नवीन निश्चल ने अमिताभ बच्चन को अपने स्तर से बहुत छोटा अभिनेता मानते हुए उनके साथ संयुक्त तस्वीरें खिंचवाने से साफ मना कर दिया था। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने इसी घमंड के चलते ‘मेरे अपने’, ‘रोटी कपड़ा और मकान’ तथा ऐतिहासिक फिल्म ‘दीवार’ जैसी बड़ी फिल्मों के प्रस्तावों को बेहद छोटा और अपने स्तर के विपरीत समझकर ठुकरा दिया था, जिन्हें बाद में अमिताभ बच्चन और शशि कपूर ने स्वीकार कर इतिहास रच दिया।

    सिनेमाई गलियारों में उपलब्ध जानकारियों के अनुसार, शुरुआती दौर में मिली इस अपार सफलता ने नवीन निश्चल के व्यवहार को पूरी तरह बदल दिया था। सह-कलाकारों के प्रति सम्मान की कमी, फिल्म के सेट पर अनुचित नखरे दिखाना, अत्यधिक नशा और निर्देशकों व निर्माताओं के सुझावों को पूरी तरह नजरअंदाज करने जैसी गलत आदतों ने धीरे-धीरे उन्हें फिल्म उद्योग से अलग-थलग कर दिया। निर्माता-निर्देशकों ने उनकी इन हरकतों के कारण उन्हें फिल्मों में लेना बंद कर दिया, जिसके चलते वह देखते ही देखते गुमनामी के अंधेरे में खो गए और गंभीर आर्थिक संकट से घिर गए।

    समय का चक्र ऐसा बदला कि जिस अमिताभ बच्चन को कभी नवीन निश्चल ने अपमानित किया था, वही बिग बी सत्तर और अस्सी के दशक में भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े सुपरस्टार बनकर उभरे। अपनी गुरबत और तंगहाली के दिनों में नवीन निश्चल को विवश होकर उसी अभिनेता के पास जाना पड़ा, जिसकी उन्होंने कभी उपेक्षा की थी। उन्होंने अमिताभ बच्चन से अपने लिए काम की गुहार लगाई और उनके सहयोग से बिग बी की ही एक फिल्म में बेहद छोटा सा सहायक रोल स्वीकार कर अपनी आजीविका चलाई। यह घटनाक्रम आज भी फिल्म उद्योग में उगते सूरज को सलाम करने और मानवीय व्यवहार की अनिश्चितता का एक बड़ा उदाहरण माना जाता है।

  • भूख हड़ताल के बीच एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने परीक्षा धांधली पर उठाए कड़े सवाल, 'सुपर 30' स्टार ऋतिक रोशन ने बयां किया छात्रों का मानसिक तनाव

    भूख हड़ताल के बीच एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने परीक्षा धांधली पर उठाए कड़े सवाल, 'सुपर 30' स्टार ऋतिक रोशन ने बयां किया छात्रों का मानसिक तनाव

    नई दिल्ली । देश की सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी में कथित धांधली, पेपर लीक और प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर देश भर के छात्रों का असंतोष एवं आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। इस संवेदनशील मुद्दे पर जवाबदेही तय करने और परीक्षार्थियों के भविष्य की सुरक्षा की मांग को लेकर लद्दाख के प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। उनकी भूख हड़ताल अब अपने अत्यंत नाजुक दौर में प्रवेश कर चुकी है। इस बीच, छात्रों के इस राष्ट्रव्यापी आंदोलन को उस समय एक बड़ा संबल मिला जब फिल्म उद्योग के दिग्गज अभिनेता ऋतिक रोशन ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से छात्रों के हक में अपनी आवाज बुलंद की।

    सिनेमाई पर्दे पर ‘सुपर 30’ जैसी शिक्षा केंद्रित फिल्म में एक शिक्षक की जीवंत भूमिका निभाने वाले अभिनेता ऋतिक रोशन ने सोनम वांगचुक का एक अत्यंत मर्मस्पर्शी और विचारणीय वीडियो साझा किया है। इस डिजिटल संदेश के साथ अभिनेता ने देश के युवा परीक्षार्थियों द्वारा झेले जा रहे अभूतपूर्व मानसिक तनाव और अवसाद पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए लिखा कि एक शिक्षक के किरदार को जीने के दौरान उन्हें बेहद करीब से यह समझने का अवसर मिला था कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था और परीक्षाओं के अनिश्चित माहौल में छात्र किस प्रकार के मानसिक आघात और दबाव का सामना करने को विवश हैं।

    उल्लेखनीय है कि वर्ष 2019 की सफल फिल्म ‘सुपर 30’ में ऋतिक रोशन ने बिहार के प्रसिद्ध गणितज्ञ आनंद कुमार का किरदार निभाया था, जो आर्थिक रूप से अत्यंत कमजोर पृष्ठभूमि के मेधावी बच्चों को आईआईटी की कठिन प्रवेश परीक्षा के लिए निःशुल्क प्रशिक्षित करते हैं। इस वास्तविक जीवन पर आधारित चरित्र को पर्दे पर जीवंत करने के कारण ही अभिनेता छात्रों की समस्याओं और उनके शैक्षणिक संघर्षों को इतनी संवेदनशीलता और गहराई के साथ महसूस कर पा रहे हैं। यही कारण है कि इस परीक्षा संकट के समय वह मूकदर्शक बने रहने के बजाय सार्वजनिक रूप से छात्रों के पक्ष में खड़े दिखाई दे रहे हैं।

    साझा किए गए वीडियो में गंभीर स्वास्थ्य गिरावट के बावजूद बिस्तर पर लेटे हुए एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने देश की सामूहिक अंतरात्मा और जिम्मेदार अधिकारियों पर तीखे सवाल दागे हैं। उन्होंने अत्यंत क्षोभ व्यक्त करते हुए कहा कि परीक्षा प्रणाली की इन प्रशासनिक विफलताओं के कारण अब तक लगभग 20 युवा परीक्षार्थी अत्यंत आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर हो चुके हैं। मेधावी छात्र अपनी पूरी ऊर्जा और जीवन के अनमोल वर्ष परीक्षाओं की निष्पक्ष तैयारी में लगा देते हैं, लेकिन अंत में उन्हें यह पता चलता है कि संपूर्ण परीक्षा प्रक्रिया ही लीक या फिक्सिंग की भेंट चढ़ चुकी थी।

    सामाजिक कार्यकर्ता ने इस कुप्रथा को पूरे समाज के अस्तित्व के लिए एक गंभीर खतरे के रूप में रेखांकित किया है। उन्होंने सचेत किया कि यदि योग्यता के बजाय नकल और भ्रष्टाचार के माध्यम से अयोग्य लोग चिकित्सा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में प्रवेश पा लेंगे, तो भविष्य में देश के नागरिकों का स्वास्थ्य और जीवन पूरी तरह असुरक्षित हो जाएगा। यही नियम अभियंताओं और अन्य तकनीकी विशेषज्ञों पर भी समान रूप से लागू होता है। इस बीच, मनोरंजन जगत की कई अन्य प्रमुख हस्तियों ने भी इस मुहिम को अपना नैतिक समर्थन दिया है, जिससे इस छात्र आंदोलन को एक व्यापक सामाजिक और राष्ट्रीय आयाम मिल गया है।