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  • भारत-न्यूजीलैंड एफटीए को संसद की मंजूरी, पीएम क्रिस्टोफर लक्सन ने जताई खुशी, व्यापार और रोजगार बढ़ने की उम्मीद

    भारत-न्यूजीलैंड एफटीए को संसद की मंजूरी, पीएम क्रिस्टोफर लक्सन ने जताई खुशी, व्यापार और रोजगार बढ़ने की उम्मीद

    नई दिल्ली ।भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौते यानी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को न्यूजीलैंड की संसद से मंजूरी मिल गई है। बुधवार को हुए मतदान में समझौते के पक्ष में 93 वोट पड़े, जबकि 29 सांसदों ने इसके खिलाफ मतदान किया। संसद से मंजूरी मिलने के बाद न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने खुशी जताई और कहा कि इस समझौते से देश में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे तथा दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।

    प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने कहा कि कई लोगों ने उनसे कहा था कि भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौता संभव नहीं होगा, लेकिन अब संसद ने इसे मंजूरी दे दी है। उन्होंने कहा कि उनकी नेशनल पार्टी ने पहले कार्यकाल में भारत के साथ एफटीए करने का वादा किया था और सरकार ने उस लक्ष्य को पूरा किया है।

    लक्सन के मुताबिक समझौते से न्यूजीलैंड के लोगों के लिए अधिक नौकरियां और आय के अवसर पैदा होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के करीब 1.4 अरब उपभोक्ताओं तक पहुंच बनने से न्यूजीलैंड के उत्पादों के लिए भारतीय बाजार में अवसर बढ़ेंगे। उनके अनुसार यह समझौता न्यूजीलैंड की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में मदद करेगा।

    न्यूजीलैंड के व्यापार और निवेश मंत्री टॉड मैक्ले ने समझौते से जुड़े शुल्क प्रावधानों की जानकारी देते हुए कहा कि एफटीए लागू होने के बाद भारत को न्यूजीलैंड के 57 प्रतिशत निर्यात पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। समझौते के पूरी तरह लागू होने पर 95 प्रतिशत निर्यात पर शुल्क या तो समाप्त कर दिया जाएगा या उसे काफी कम कर दिया जाएगा।

    मैक्ले ने कहा कि समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों में भी सुविधा बढ़ेगी। इसके तहत सीमा पर क्लीयरेंस प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। उन्होंने भारत के बढ़ते मध्यम वर्ग तक न्यूजीलैंड के कारोबारियों की बेहतर पहुंच को भी समझौते का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।

    उन्होंने कहा कि भारत में भोजन, टेक्नोलॉजी, शिक्षा, पर्यटन, प्रोफेशनल सेवाओं और अन्य उत्पादों की मांग बढ़ रही है। ऐसे में मुक्त व्यापार समझौते से न्यूजीलैंड के निर्यातकों को भारतीय बाजार में अपने कारोबारी संबंधों का विस्तार करने में मदद मिलेगी।

    भारत और न्यूजीलैंड के बीच इस व्यापार समझौते की बातचीत की घोषणा मार्च 2025 में की गई थी। न्यूजीलैंड सरकार को उम्मीद है कि संसद की मंजूरी के बाद एफटीए इस साल के अंत तक लागू हो जाएगा। हालांकि इसके लिए समझौते में निर्धारित प्रक्रियाओं का पूरा होना जरूरी होगा।

    मैक्ले ने कहा कि एफटीए दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ाने के लक्ष्य को भी समर्थन देगा। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने वर्ष 2030 तक दोनों देशों के बीच व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। नए समझौते को इसी लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के तौर पर देखा जा रहा है।

    संसद की मंजूरी के साथ भारत और न्यूजीलैंड के बीच व्यापारिक संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए एक नया ढांचा तैयार हुआ है। समझौते के लागू होने के बाद शुल्क में बदलाव और बाजार तक पहुंच से जुड़े प्रावधानों का असर दोनों देशों के निर्यातकों और कारोबारियों पर पड़ने की उम्मीद है।

  • भारत में भी दिखने लगा अल नीनो का असर…. जेब पर पड़ रहा भारी, चीनी के कई चीजें हुई महंगी

    भारत में भी दिखने लगा अल नीनो का असर…. जेब पर पड़ रहा भारी, चीनी के कई चीजें हुई महंगी


    नई दिल्ली।
    अल नीनो (El Niño) ने दस्तक दे दी है। अब भारत (India) में भी इसका असर दिखने लगा है। यहां अल नीनो ने मौसम को बुरी तरह प्रभावित किया है। मौसम ने फसलों पर असर डाला और फसलें अब आपकी जेब पर असर डाल रही हैं। चीनी (Sugar) के बाद अंडे और चिकन के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक जिस तरह गन्ने का उत्पादन गिरा है, अगर उसी तरह मक्के का उत्पादन भी घटा तो इन चीजों के दाम और बढ़ सकते हैं। चावल और सोयाबीन जैसी फसलें भी संकट के केंद्र में हैं।

    गौरतलब है कि अल नीनो की स्थिति में मानसून कमजोर और अनियमित रहता है। साथ ही ज्यादा गर्मी रहने से मिट्टी में नमी कम हो जाती है, जिससे खरीफ फसलों की पैदावार घट सकती है। इस बार मौसम विज्ञानियों ने सदी के सबसे ताकतवर अल नीनो की दस्तक की चेतावनी दी है। भारत में इसका असर दिखना शुरू हो गया है और साल के अंत तक इसके पीक पर पहुंचने की संभावना है।


    चीनी हुई कड़वी

    हाल ही में चीनी की कीमतें सालाना आधार पर 40 प्रतिशत बढ़ गई हैं। इसकी वजह पिछले साल ज्यादा बारिश और फफूंद के कारण गन्ने की पैदावार घटना है। पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण और निर्यात के कारण भी चीनी के दाम बढ़े हैं। त्योहार सीजन से पहले चीनी 49 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर अगस्त में 65 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। हालांकि अब दाम स्थिर हैं।


    मक्का बिगाड़ेगा बजट

    इस साल मक्का उत्पादन भी कम होने के आसार नजर आ रहे हैं। इसके दाम में पहले ही करीब तीस फीसदी की बढ़ोतरी हो चुकी है, जिसका असर बाजार पर दिख रहा है। अगर पैदावार कम हुई तो पशु आहार और महंगा होगा। इसके महंगा होने से मुर्गी पालन की लागत बढ़ेगी, जिसका असर अंडे और चिकन के दाम पर पड़ेगा। बारिश की कमी से 2026-27 में गन्ना उत्पादन कम रह सकता है। चीनी की मांग को देखते हुए अगले सीजन में गन्ने से एथेनॉल उत्पादन कम किया जाएगा। ऐसे में एथेनॉल मक्के से बनेगा। मगर इस साल मक्का उत्पादन भी कम रहने की आशंका है। ऐसे में इसके दाम बढ़ेंगे।


    पशु आहार भी महंगा

    भारत में 2025 में पोल्ट्री उद्योग 2.6 लाख करोड़ रुपये का था। मक्का, सोयाबीन खली महंगे होने से पोल्ट्री की लागत बढ़ेगी, क्योंकि ये प्रमुख पशु-मुर्गी आहार हैं। दरअसल देश में 25 फीसदी एथेनॉल गन्ने से बनता है, बाकी अनाज खासकर मक्का से बनाया जाता है। बीती एक अप्रैल से ई-20 पेट्रोल की बिक्री अनिवार्य हुई। इससे चीनी उत्पादन घटने के बावजूद 2025-26 में 30 लाख टन से ज्यादा गन्ने से एथेनॉल बनाया गया।

  • रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% टैरिफ लगाएगा अमेरिका…, भारत की दो टूक

    रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% टैरिफ लगाएगा अमेरिका…, भारत की दो टूक


    नई दिल्ली।
    अमेरिका (America) ने रूस (Russia) से ज्यादा तेल खरीद (Buy Oil) रहे देशों पर 100 फीसदी टैरिफ (Tariff) लगाने के लिए कानून बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सीनेट से बिल को मंजूरी मिलने के बाद अब इसे हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव (House of Representatives) में भी लाया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक अमेरिकी कांग्रेस के निचले सदन में इस बिल पर गुरुवार को वोटिंग होगी। अगर यह बिल पास हो जाता है तो भारत पर 100 फीसदी टैरिफ लग सकता है। हालांकि इसके बावजूद भारत (India) ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका चाहे जो कर ले, भारत रूस से तेल खरीदता रहेगा और दबाव के आगे नहीं झुकेगा।

    भारत ने मंगलवार को एक बयान में कहा है कि अमेरिका भले ही टैरिफ लगा ले, भारत दबाव में नहीं आएगा और रूस से तेल की खरीद जारी रखेगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों से जुड़े फैसले अपने 140 करोड़ नागरिकों के हितों को ध्यान में रखकर करता है। वह आगे भी इस पर कायम रहेगा।


    लिंडसे ग्राहम बिल सीनेट से हुआ था पास

    अमेरिका में इस बिल को लिंडसे ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान बिल का नाम दिया गया है। अमेरिकी सीनेट में 86-11 के भारी बहुमत से इसे पास करा लिया गया था। इसका सीधा सीधा मकसद भारत और चीन जैसे देशों पर टैरिफ थोपना है। इसमें रूस से सबसे ज्यादा तेल खरीदने वाले पांच देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने का प्रावधान किया गया है। भारत सरकार से जुड़े सूत्रों ने कहा कि वे स्थिति पर नजर रखे हुए हैं, लेकिन यह साफ है कि भारत सरकार इस बारे में अपनी नीति में कोई बदलाव नहीं करेगी और रूस से तेल की खरीद जारी रखेगी।


    भारत का नाम लिखने की मांग

    इससे पहले यह खबर सामने आई थी कि हाल ही में कुछ अमेरिकी सांसदों ने इस बिल में कुछ बदलावों की सिफारिश की है। सांसदों ने मांग की है कि इस बिल में प्रतिबंध लगाने वाले देशों में सीधे भारत का नाम लिख दिया जाए। इससे पहले बिल में पहले सिर्फ ‘रूस से तेल खरीदने वाले देशों’ का जिक्र था। इसमें किसी देश का नाम नहीं था। हालांकि अब इसमें भारत का नाम अलग से जोड़ने की मांग की गई है।

    इसके अलावा सांसदों का कहना है कि बिल में रूस से सबसे ज्यादा तेल खरीदने वाले 10 देशों का नाम साफ-साफ लिखा जाए और उन पर 100 फीसदी टैरिफ ठोका जाए। इन देशों में भारत, चीन, तुर्की, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाक गणराज्य, यूएई, सिंगापुर, कजाखिस्तान और किर्गिस्तान शामिल हैं।


    अमेरिका ने पहले लगाया है जुर्माना

    अमेरिका इस मुद्दे को लेकर भारत को कई बार निशाना बना चुका है। अमेरिका ने आरोप लगाए है कि भारत रूस से तेल खरीद कर यूक्रेन युद्ध में उसकी आर्थिक मदद कर रहा है। अमेरिका ने इसका हवाला देते हुए पिछले साल भारत पर 50 फीसदी टैरिफ भी लगा दिया था। हालांकि भारत ने तब भी स्पष्ट किया था कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों और राष्ट्रीय हितों को सुनिश्चित करने के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा।

  • पहले टी20 में शानदार प्रदर्शन के बाद वरुण चक्रवर्ती फिर चोटिल, अफगानिस्तान के खिलाफ सीरीज के बाकी मैच नहीं खेलेंगे

    पहले टी20 में शानदार प्रदर्शन के बाद वरुण चक्रवर्ती फिर चोटिल, अफगानिस्तान के खिलाफ सीरीज के बाकी मैच नहीं खेलेंगे

    नई दिल्ली ।अफगानिस्तान के खिलाफ तीन मैचों की टी20 सीरीज में टीम इंडिया को बड़ा झटका लगा है। पहले मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करने वाले वरुण चक्रवर्ती चोटिल होने के कारण सीरीज के बाकी दोनों मुकाबलों से बाहर हो गए हैं। दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में खेले गए पहले टी20 मैच में वरुण ने भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई थी।

    पहले मुकाबले में वरुण चक्रवर्ती ने अपने चार ओवर के स्पेल में केवल 16 रन दिए और एक विकेट हासिल किया। भारत ने यह मुकाबला सात विकेट से जीता था। मैच में उनके प्रदर्शन के बाद वह टीम के अहम गेंदबाजों में नजर आए, लेकिन मुकाबला समाप्त होने के बाद उनकी चोट की जानकारी सामने आई। इसके बाद उन्हें पूरी सीरीज से बाहर होना पड़ा।

    वरुण के बाहर होने से कप्तान श्रेयस अय्यर की मुश्किलें बढ़ गई हैं। टीम को अब अफगानिस्तान के खिलाफ बाकी मुकाबलों में उनके विकल्प पर फैसला करना होगा। वरुण का बाहर होना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह लंबे समय के बाद मैदान पर वापसी करने के बाद इस सीरीज में उतरे थे।

    वरुण चक्रवर्ती के लिए 2026 का साल चोटों के लिहाज से चुनौतीपूर्ण रहा है। आईपीएल के दौरान उनके पैर के अंगूठे में फ्रैक्चर हुआ था। इस चोट के कारण वह आयरलैंड दौरे पर टीम का हिस्सा नहीं बन सके थे। इसके बाद उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में वापसी की थी।

    इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज में भी वरुण की फिटनेस ज्यादा समय तक उनका साथ नहीं दे सकी। तीसरे मुकाबले के बाद उन्हें हैमस्ट्रिंग यानी मांसपेशियों में खिंचाव की समस्या हुई और उन्हें दोबारा टीम से बाहर होना पड़ा। इसके बाद फिटनेस हासिल करने के लिए उन्हें लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ा।

    अफगानिस्तान सीरीज के लिए चयन से पहले वरुण ने भारतीय क्रिकेट बोर्ड के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में रिहैब प्रक्रिया पूरी की थी। इसके अलावा घरेलू क्रिकेट में अपनी फिटनेस साबित करने के बाद उन्हें टीम में शामिल किया गया था। ऐसे में वापसी के तुरंत बाद फिर चोटिल होना उनके लिए निराशाजनक स्थिति है।

    दिल्ली में पहले टी20 मैच के बाद वरुण ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी हिस्सा लिया था। उस समय उनकी नई चोट की जानकारी सामने नहीं आई थी। चोटों को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा था कि खिलाड़ियों के लिए चोट लगना आम बात है। उनके मुताबिक, यह बताता है कि खिलाड़ी कितनी मेहनत कर रहे हैं और अपनी सीमाओं से आगे जाकर खेल रहे हैं।

    वरुण ने यह भी कहा था कि जब शरीर जवाब देने लगता है तो खिलाड़ियों को थोड़ा पीछे हटना पड़ता है, ताकि वे और मजबूत होकर वापसी कर सकें। अब एक बार फिर चोट के कारण उन्हें मैदान से बाहर होना पड़ा है।

    19 सितंबर से एशियन गेम्स शुरू होने हैं। ऐसे में टीम मैनेजमेंट की कोशिश होगी कि वरुण चक्रवर्ती जल्द फिट हों और उपलब्ध होने पर टीम का हिस्सा बनें। अफगानिस्तान सीरीज से उनके बाहर होने के बाद उनकी फिटनेस पर आगे भी नजर बनी रहेगी।

  • भारत से रिश्ते नए सिरे से मजबूत करना चाहता है बांग्लादेश, विदेश राज्य मंत्री ने द्विपक्षीय बातचीत को बताया जरूरी

    भारत से रिश्ते नए सिरे से मजबूत करना चाहता है बांग्लादेश, विदेश राज्य मंत्री ने द्विपक्षीय बातचीत को बताया जरूरी

    नई दिल्ली । बांग्लादेश ने भारत के साथ अपने संबंधों को नए सिरे से आगे बढ़ाने की इच्छा जताई है। बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा कि ढाका नई दिल्ली के साथ ऐसा रिश्ता बनाना चाहता है, जो आपसी हितों पर आधारित हो। उन्होंने दोनों देशों के बीच सीधे संवाद को संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी बताया।

    हुमायूं कबीर के मुताबिक भारत और बांग्लादेश के बीच बातचीत किसी बहुपक्षीय मंच के जरिए नहीं, बल्कि सीधे द्विपक्षीय स्तर पर होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को नए रिश्ते की दिशा में आगे बढ़ने के लिए आपसी हितों को प्राथमिकता देनी होगी।

    कबीर ने शेख हसीना के प्रधानमंत्री रहने के दौरान भारत और बांग्लादेश के संबंधों को असहज बताया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश को भारत के साथ संबंधों को लेकर जरूरत से ज्यादा ध्यान देने वाली सोच से बाहर निकलना होगा। उनका कहना था कि नई दिल्ली के साथ रिश्तों को संतुलित तरीके से देखा जाना चाहिए और इसे बांग्लादेश के दूसरे देशों के साथ संबंधों के व्यापक हिस्से के रूप में समझना चाहिए।

    बांग्लादेश का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत में BRICS समिट अपने अंतिम दौर में है। बांग्लादेश ने कहा था कि उसके प्रधानमंत्री तारिक रहमान BRICS समिट में शामिल नहीं होंगे, क्योंकि उन्हें बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के तौर पर निमंत्रण नहीं दिया गया था। ढाका के अनुसार, उन्हें BIMSTEC के अध्यक्ष के रूप में आमंत्रित किया गया था। BIMSTEC बंगाल की खाड़ी से जुड़े दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के सात देशों का क्षेत्रीय संगठन है।

    इससे पहले अगस्त में भी प्रधानमंत्री तारिक रहमान का भारत दौरा टल गया था। BRICS समिट से पहले भारत ने दोनों देशों के बीच अलग द्विपक्षीय बैठक के लिए उन्हें 22 अगस्त को भारत आने का निमंत्रण दिया था। हालांकि यात्रा से पहले ही यह कार्यक्रम स्थगित हो गया।

    उस समय बांग्लादेश ने भारत के सामने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा उठाया था। दोनों देशों के बीच इस विषय को लेकर पहले से तनाव बना हुआ है। उस दौरान हुमायूं कबीर ने कहा था कि माहौल अनुकूल होने पर द्विपक्षीय दौरे होंगे और जल्दबाजी की आवश्यकता नहीं है।

    भारत और बांग्लादेश के बीच तनाव बढ़ने की एक वजह शेख हसीना की भारत में मौजूदगी और उनके सार्वजनिक राजनीतिक बयानों को भी माना गया। 5 अगस्त को शेख हसीना ने दिल्ली से वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। यह कार्यक्रम अवामी लीग सरकार के सत्ता से हटने की दूसरी बरसी के मौके पर आयोजित किया गया था।

    इस प्रेस कॉन्फ्रेंस पर बांग्लादेश सरकार ने आपत्ति जताई थी। ढाका का कहना था कि भारत में रहते हुए हसीना का सार्वजनिक राजनीतिक बयान देना दोनों देशों के संबंध सामान्य करने की कोशिशों को प्रभावित कर सकता है। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने दावा किया था कि भारत को पहले इस संबंध में आगाह किया गया था।

    भारत ने हालांकि शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस रोकने से इनकार किया था। भारत का कहना था कि कार्यक्रम एक निजी मीडिया संस्था की ओर से आयोजित किया गया था और सरकार का उससे कोई संबंध नहीं था। अब बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री की ओर से सीधे संवाद और आपसी हितों पर आधारित नए रिश्ते की बात दोनों देशों के संबंधों को लेकर ढाका के रुख को सामने रखती है।

  • ‘ट्रॉफी चोर’ के नारों से घिरे मोहसिन नकवी, भारत की महिला टीम ने भी ट्रॉफी लेने से किया इनकार

    ‘ट्रॉफी चोर’ के नारों से घिरे मोहसिन नकवी, भारत की महिला टीम ने भी ट्रॉफी लेने से किया इनकार

    नई दिल्ली । महिला एशिया कप 2026 का फाइनल फैंस के लिए लाइव सिनेमा साबित हुआ। पिछले साल मेंस एशिया कप में भारतीय टीम ने पाकिस्तान के गृह मंत्री और एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) के चेयरमैन मोहसिन नकवी से ट्रॉफी नहीं ली थी। अब भारत की बेटियों ने भी यही कदम उठाया, तो फैंस ने मैदान में ट्रॉफी चोर के नारे लगाए। जिसके बाद मोहसिन नकवी मैदान छोड़कर भागे और वीडियो वायरल हो गया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो से नकवी की इंटरनेशनल बेइज्जती हुई।

    महिला एशिया कप 2026 में पाकिस्तान की टीम सेमीफाइनल में हारकर बाहर हो गई थी। फाइनल भारत और श्रीलंका के बीच हुआ, जिसमें हरमनप्रीत कौर की कप्तानी वाली टीम इंडिया ने खिताबी जीत दर्ज की। एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) के चेयरमैन पिछले साल की तरह इस बार भी चैंपियन टीम को ट्रॉफी सौंपने पहुंचे थे, लेकिन कौर एंड कंपनी ने उनसे ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया। फैंस मैदान पर नकवी से ‘ट्रॉफी चोर-ट्रॉफी चोर’ के नारे लगाते दिखे, जिसके बाद नकवी मैदान से मुंह छिपाकर भागे।

    क्यों कहा ट्रॉफी चोर?

    पिछले साल सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में भारतीय मेंस टीम ने एशिया कप फाइनल में पाकिस्तान को हराकर खिताबी जीत दर्ज की थी। भारतीय टीम ने नकवी से ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया था, लेकिन नकवी खुद ही ट्रॉफी देने की जिद पर अड़े रहे। चैंपियन टीम इंडिया ट्रॉफी के इंतजार में रही, लेकिन नकवी ट्रॉफी लेकर लौट गए। जिसके चलते फैंस ने मोहसिन नकवी पर ट्रॉफी चोर का ठप्पा लगा दिया। ये दूसरी बार है, जब चैंपियन बनने के बाद भी भारत के पास ट्रॉफी नहीं है।

    भारत का शानदार प्रदर्शन

    भारतीय महिला टीम ने एशिया कप में धमाकेदार प्रदर्शन किया। टीम इंडिया फाइनल तक अजेय रही। टीम ने सभी 5 मुकाबलों में जीत दर्ज की। 2024 में भारतीय टीम को इसी श्रीलंका टीम ने फाइनल में करारी शिकस्त दी थी, लेकिन इस बार उस हार का हिसाब बराबर हो गया है। मेंस टीम ने फाइनल में बिना ट्रॉफी के जश्न मना लिया था, लेकिन महिला टीम जीत के बाद मैदान पर वापस नहीं आईं।

  • BRICS शिखर सम्मेलन में साझा घोषणापत्र पर बनी सहमति, भारत ने ईरान-UAE तनाव के बीच कूटनीतिक प्रयास तेज किए

    BRICS शिखर सम्मेलन में साझा घोषणापत्र पर बनी सहमति, भारत ने ईरान-UAE तनाव के बीच कूटनीतिक प्रयास तेज किए


    नई दिल्ली ।
    भारत की मेजबानी में नई दिल्ली में BRICS Summit 2026 की शुरुआत हो गई है। दो दिवसीय शिखर सम्मेलन में भारत के साथ रूस, चीन, ब्राजील और BRICS के अन्य सदस्य देशों के शीर्ष नेता हिस्सा ले रहे हैं। सम्मेलन के बीच साझा घोषणापत्र को लेकर सदस्य देशों के बीच सहमति बनने की खबर सामने आई है।

    साझा घोषणापत्र में किसी एक देश का सीधे तौर पर नाम लिए जाने की संभावना नहीं है। इसके बजाय किसी भी देश की ओर से किए जाने वाले एकतरफा युद्ध की निंदा किए जाने पर जोर दिया जा रहा है। सदस्य देशों के बीच इस विषय पर सहमति बनने के संकेत मिले हैं। घोषणापत्र को शनिवार को अंतिम मंजूरी दिए जाने की संभावना है और इसके शाम करीब चार बजे जारी होने की बात कही गई है।

    पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच BRICS सम्मेलन का कूटनीतिक महत्व भी बढ़ गया है। सदस्य देशों की ओर से ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच मतभेद कम करने तथा साझा सहमति बनाने की कोशिश की जा रही है। दोनों देशों के बीच क्षेत्रीय संघर्ष के कारण तनाव की स्थिति बनी हुई है।

    BRICS में भारत, रूस, चीन, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, ईरान, इंडोनेशिया, इथियोपिया और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया में तनाव बना हुआ है, समूह के मंच पर सदस्य देशों के बीच सहमति बनाने की कोशिश महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    इसी बीच भारत दौरे पर पहुंचे ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अमेरिका और इजराइल को लेकर कड़ा रुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ईरान दबाव और धमकी के आगे आत्मसमर्पण नहीं करेगा। उनका कहना था कि तेहरान अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए मजबूती से खड़ा रहेगा।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मसूद पेजेश्कियान के बीच भी मुलाकात हुई। बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने सुरक्षित नौवहन और नाविकों की सुरक्षा पर जोर दिया। दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से निकालने की आवश्यकता पर बल दिया।

    मुलाकात के दौरान भारत और ईरान के द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर भी चर्चा हुई। पश्चिम एशिया में मौजूदा तनाव के बीच दोनों देशों के बीच बातचीत में सुरक्षित नौवहन और नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा भी प्रमुख रहा।

    BRICS Summit 2026 भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत ने वर्ष 2026 में चौथी बार इस समूह की अध्यक्षता संभाली है। इसी वर्ष BRICS अपनी स्थापना के 20 वर्ष भी पूरे कर रहा है।

    शिखर सम्मेलन के दौरान साझा घोषणापत्र पर सहमति बनने की प्रक्रिया को सदस्य देशों के बीच सामूहिक रुख तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है। प्रस्तावित घोषणापत्र में किसी देश को सीधे निशाना बनाने के बजाय एकतरफा युद्ध की निंदा करने की बात सामने आई है।

    ईरान और UAE के बीच तनाव के बीच सदस्य देशों के बीच सहमति बनाने की कोशिश तथा प्रधानमंत्री मोदी और ईरानी राष्ट्रपति की बातचीत ने सम्मेलन के कूटनीतिक पक्ष को भी प्रमुखता दी है। अब साझा घोषणापत्र को अंतिम मंजूरी मिलने और उसके जारी होने का इंतजार है।

  • भारत मंडपम में शुरू हुआ 18वां BRICS शिखर सम्मेलन, पीएम मोदी ने सदस्य देशों के योगदान और समर्थन के लिए जताया आभार

    भारत मंडपम में शुरू हुआ 18वां BRICS शिखर सम्मेलन, पीएम मोदी ने सदस्य देशों के योगदान और समर्थन के लिए जताया आभार

    नई दिल्ली ।भारत की मेजबानी में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन का शनिवार को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आधिकारिक आगाज हो गया। दो दिन तक चलने वाला यह सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को आयोजित किया जा रहा है। इसमें BRICS देशों के साथ पार्टनर देशों के नेता भी हिस्सा ले रहे हैं। इसके अलावा आउटरीच कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किए गए देशों के प्रतिनिधि भी सम्मेलन में पहुंचे हैं।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के साथ शिखर सम्मेलन की औपचारिक शुरुआत हुई। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने भारत की BRICS अध्यक्षता को सफल बनाने में सभी देशों की ओर से मिले सक्रिय योगदान और समर्थन के लिए आभार जताया।

    पीएम मोदी ने कहा कि इस वर्ष का BRICS शिखर सम्मेलन एक ऐतिहासिक पड़ाव है। इसकी वजह यह है कि इस वर्ष BRICS अपनी स्थापना के 20 साल पूरे कर रहा है। उन्होंने संगठन की दो दशक लंबी यात्रा का उल्लेख करते हुए इसके अगले चरण को लेकर भी अपनी बात रखी।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि इंसानी जिंदगी में 20 साल की उम्र परिपक्वता और जिम्मेदारी के एक नए दौर की शुरुआत होती है। इसी संदर्भ में उन्होंने BRICS की 20 साल की यात्रा को भी महत्वपूर्ण बताया और आगे की दिशा तय करने की जरूरत पर जोर दिया।

    अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान सहयोग और समर्थन देने वाले सभी प्रतिभागी देशों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि भारत की अध्यक्षता को सफल बनाने में सभी के सक्रिय योगदान की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

    18वां BRICS शिखर सम्मेलन ऐसे समय आयोजित हो रहा है जब संगठन अपनी स्थापना के दो दशक पूरे होने के पड़ाव पर है। सम्मेलन के दौरान सदस्य देशों और साझेदार देशों के नेता एक साथ मौजूद हैं। इसके अलावा आउटरीच के लिए आमंत्रित देशों के प्रतिनिधियों की भागीदारी भी हो रही है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने BRICS की आगे की यात्रा के संदर्भ में अगले 20 वर्षों के लिए नए एजेंडे पर काम करने की जरूरत बताई। उनके संबोधन का प्रमुख संदेश संगठन की अब तक की यात्रा के बाद भविष्य की प्राथमिकताओं और दिशा को लेकर रहा।

    भारत मंडपम में आयोजित इस दो दिवसीय सम्मेलन में BRICS देशों के साथ पार्टनर देशों की भागीदारी हो रही है। सम्मेलन के लिए आमंत्रित प्रतिनिधियों की मौजूदगी से भी इसका दायरा व्यापक हुआ है।

    BRICS के 20 वर्ष पूरे होने के मौके पर आयोजित यह शिखर सम्मेलन भारत की मेजबानी में हो रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में इस अवसर को संगठन की यात्रा के महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में रेखांकित किया।

    उन्होंने भारत की अध्यक्षता के दौरान मिले सहयोग के लिए सभी का आभार व्यक्त करते हुए संगठन के आगामी वर्षों की दिशा पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता बताई। उनके मुताबिक 20 साल की यात्रा के बाद BRICS के लिए आगे के दो दशकों को ध्यान में रखते हुए नए एजेंडे पर काम करना होगा।

    शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में जारी रहेगा। इसमें BRICS सदस्य देशों, पार्टनर देशों और आउटरीच के लिए आमंत्रित देशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। सम्मेलन के पहले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के साथ इसकी औपचारिक शुरुआत हुई।

  • आरबीआई की एफसीएनआर जमा योजना से आया बड़ा फंड, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड बढ़त के साथ चौथे स्थान पर

    आरबीआई की एफसीएनआर जमा योजना से आया बड़ा फंड, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड बढ़त के साथ चौथे स्थान पर


    नई दिल्ली ।
    भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 4 सितंबर को समाप्त सप्ताह में 44.9 अरब डॉलर बढ़कर 785.7 अरब डॉलर हो गया है। इस तेज बढ़ोतरी के साथ भारत ने विदेशी मुद्रा भंडार के मामले में रूस को पीछे छोड़ दिया है और अब चीन, जापान तथा स्विट्जरलैंड के बाद दुनिया में चौथे स्थान पर पहुंच गया है। विदेशी मुद्रा भंडार में हुई इस बढ़ोतरी को मुख्य रूप से भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से डॉलर आकर्षित करने के लिए शुरू की गई एफसीएनआर (बी) जमा योजना के तहत आए बड़े फंड से जोड़ा गया है।

    785.7 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार भारत के लिए महत्वपूर्ण बढ़त है। इस दौरान देश के विदेशी मुद्रा भंडार में कुल 44.9 अरब डॉलर की वृद्धि हुई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस बढ़ोतरी ने भारत को वैश्विक स्तर पर विदेशी मुद्रा भंडार रखने वाले प्रमुख देशों की सूची में रूस से आगे कर दिया है।

    विदेशी मुद्रा भंडार के अलग-अलग घटकों में हालांकि एक समान वृद्धि नहीं हुई। सप्ताह के दौरान सोने के भंडार में 2.59 अरब डॉलर की कमी दर्ज की गई और यह घटकर 113.81 अरब डॉलर रह गया। सोने की कीमतों में गिरावट को इसके पीछे प्रमुख कारण बताया गया है। इसके बावजूद विदेशी मुद्रा भंडार के अन्य हिस्से में मजबूती के कारण कुल भंडार में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई।

    विदेशी मुद्रा भंडार का मजबूत होना देश की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इससे भारतीय रिजर्व बैंक को विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये में होने वाले तेज उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए अधिक गुंजाइश मिलती है। पर्याप्त विदेशी मुद्रा उपलब्ध होने से केंद्रीय बैंक जरूरत पड़ने पर बाजार में हस्तक्षेप कर सकता है।

    मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार के कारण आरबीआई को स्पॉट और फॉरवर्ड करेंसी मार्केट में भी हस्तक्षेप करने की अधिक क्षमता मिलती है। जरूरत पड़ने पर केंद्रीय बैंक अतिरिक्त डॉलर जारी करके रुपये की कीमत में तेज गिरावट को रोकने की कोशिश कर सकता है। इस तरह विदेशी मुद्रा भंडार बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण आधार के रूप में काम करता है।

    इस बीच, विदेशी मुद्रा के बड़े पैमाने पर देश में आने से बैंकिंग प्रणाली में अतिरिक्त लिक्विडिटी जमा हुई है। आरबीआई ने इसी अतिरिक्त तरलता को कम करने के लिए 1 लाख करोड़ रुपये की सरकारी सिक्योरिटीज की ओपन मार्केट ऑपरेशन यानी ओएमओ बिक्री की घोषणा की है।

    केंद्रीय बैंक यह बिक्री तीन अलग-अलग किश्तों में करेगा। पहली नीलामी 17 सितंबर को होगी, जिसमें 50,000 करोड़ रुपये की सरकारी सिक्योरिटीज बेची जाएंगी। इसके बाद 21 सितंबर को 25,000 करोड़ रुपये और 28 सितंबर को शेष 25,000 करोड़ रुपये की सरकारी सिक्योरिटीज की बिक्री की जाएगी।

    आरबीआई के अनुसार, इन नीलामियों को मल्टी-सिक्योरिटी नीलामी के माध्यम से मल्टीपल-प्राइस मेथड के तहत किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य विदेशी मुद्रा के भारी इनफ्लो से बैंकिंग सिस्टम में बनी अतिरिक्त लिक्विडिटी को कम करना है।

    विदेशी मुद्रा भंडार में हुई 44.9 अरब डॉलर की साप्ताहिक बढ़ोतरी के बाद भारत की वैश्विक स्थिति मजबूत हुई है। रूस को पीछे छोड़कर चौथे स्थान पर पहुंचना देश के विदेशी मुद्रा भंडार में हुई इस बड़ी वृद्धि को दर्शाता है।

  • भारत-बांग्लादेश संबंधों पर बढ़ी समीक्षा, बंदरगाह नीतियों और ब्रिक्स सम्मेलन में निमंत्रण नहीं मिलने पर BNP नाराज

    भारत-बांग्लादेश संबंधों पर बढ़ी समीक्षा, बंदरगाह नीतियों और ब्रिक्स सम्मेलन में निमंत्रण नहीं मिलने पर BNP नाराज

    नई दिल्ली ।बांग्लादेश ने भारत के साथ हुए 101 समझौतों की समीक्षा शुरू कर दी है। सत्ताधारी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी BNP के मुख्य व्हिप नूरुल इस्लाम मोनी ने बताया कि सरकार इन सभी समझौतों की जांच कर रही है। उन्होंने संकेत दिया कि समीक्षा के बाद कुछ फैसलों का असर जल्द सामने आ सकता है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि किन समझौतों में बदलाव किया जाएगा और किन्हें समाप्त करने पर विचार होगा।

    नूरुल इस्लाम मोनी ने संसद सत्र समाप्त होने के बाद पत्रकारों से बातचीत में भारत के साथ हुए समझौतों को लेकर सरकार की स्थिति बताई। उन्होंने कहा कि भारत के साथ किए गए सभी 101 समझौतों की समीक्षा की जा रही है। जब उनसे पूछा गया कि क्या इनमें से कुछ समझौते खत्म किए जा सकते हैं, तो उन्होंने कहा कि इसका जवाब जल्द सामने आएगा। हालांकि, उन्होंने किसी विशेष समझौते का नाम नहीं बताया।

    BNP नेता के मुताबिक, सरकार पिछली सरकार के कार्यकाल में लिए गए उन फैसलों की भी दोबारा समीक्षा कर रही है, जिन्हें देश के हित में सही नहीं माना गया था। उनका कहना है कि सरकार देश के हित को सबसे ऊपर रखकर पुराने फैसलों पर विचार कर रही है। ऐसे समझौतों में बदलाव की संभावना जताई गई है, जिनसे बांग्लादेश को नुकसान होने का आकलन किया जा रहा है।

    भारत के साथ हुए समझौतों की समीक्षा के बीच बंदरगाहों से जुड़े पुराने फैसले भी चर्चा में हैं। नूरुल इस्लाम मोनी ने चट्टोग्राम और मोंगला बंदरगाहों के इस्तेमाल से संबंधित नीतियों पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि पहले कुछ ऐसे नियम बनाए गए थे, जिनसे विदेशी जहाजों को अधिक फायदा मिला। उन्होंने कहा कि आगे होने वाले फैसलों में बांग्लादेश की जरूरतों और देश की संप्रभुता को सबसे अधिक महत्व दिया जाएगा।

    हालांकि, अभी तक सरकार की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि 101 समझौतों में से किन पर सबसे पहले कार्रवाई की जाएगी। इसी तरह यह भी सामने नहीं आया है कि किन समझौतों को बदला या समाप्त किया जा सकता है। BNP नेता ने केवल इतना संकेत दिया है कि समीक्षा के बाद कुछ फैसले जल्द सामने आ सकते हैं।

    इस बीच ब्रिक्स सम्मेलन को लेकर भी BNP ने नाराजगी जताई है। नूरुल इस्लाम मोनी ने दिल्ली में हो रही बैठक में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान को आमंत्रित नहीं किए जाने पर असंतोष जाहिर किया। उन्होंने इसे बांग्लादेश जैसे स्वतंत्र देश के लिए निराशाजनक बताया।

    ब्रिक्स सम्मेलन में निमंत्रण नहीं मिलने के मुद्दे पर भी मोनी ने भारत की ओर इशारा करते हुए अपनी नाराजगी व्यक्त की। इस तरह भारत के साथ 101 समझौतों की समीक्षा और ब्रिक्स सम्मेलन में निमंत्रण नहीं मिलने का मुद्दा बांग्लादेश की मौजूदा राजनीतिक चर्चा में प्रमुखता से सामने आया है।

    फिलहाल समीक्षा की प्रक्रिया जारी है और किसी विशेष समझौते को बदलने या खत्म करने का आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है। BNP नेता के अनुसार, आने वाले समय में सरकार के फैसलों से यह स्पष्ट हो सकता है कि भारत के साथ हुए समझौतों को लेकर बांग्लादेश की आगे की नीति किस दिशा में जाती है।