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  • गोल्ड खरीदारी को लेकर बदल रही सोच: सर्वे में सामने आया पीएम मोदी की अपील का प्रभाव

    गोल्ड खरीदारी को लेकर बदल रही सोच: सर्वे में सामने आया पीएम मोदी की अपील का प्रभाव

    नई दिल्ली । देश में बढ़ती आर्थिक चुनौतियों और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सोने की खरीदारी को लेकर लोगों की सोच में बदलाव देखने को मिल रहा है। हाल ही में हुए एक सर्वे में यह सामने आया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील का असर अब आम लोगों के व्यवहार पर भी दिखाई देने लगा है। बड़ी संख्या में भारतीयों ने अगले एक साल तक गैर-जरूरी सोना खरीदने से बचने की बात कही है।

    कुछ समय पहले प्रधानमंत्री ने देशवासियों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने और अनावश्यक सोने की खरीद पर नियंत्रण रखने की अपील की थी। इसके पीछे सरकार का उद्देश्य विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव को कम करना बताया गया था। अब एक सर्वे रिपोर्ट में सामने आया है कि लोगों ने इस अपील को गंभीरता से लिया है और अपनी खरीदारी की आदतों पर पुनर्विचार शुरू कर दिया है।

    सर्वे में शामिल लोगों में से लगभग 61 प्रतिशत ने कहा कि वे अगले एक वर्ष तक गैर-जरूरी सोने की खरीदारी से बचने का प्रयास करेंगे। इनमें कई ऐसे लोग भी शामिल हैं जो नियमित रूप से सोना खरीदते रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, आर्थिक परिस्थितियों और वैश्विक बाजार में अस्थिरता के चलते लोग अब खर्च को लेकर अधिक सतर्क हो गए हैं।

    भारत में सोने की खरीदारी केवल निवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सांस्कृतिक और पारिवारिक महत्व भी काफी गहरा है। शादियों, त्योहारों और पारंपरिक आयोजनों में सोना खरीदना लंबे समय से भारतीय समाज का हिस्सा रहा है। इसके बावजूद सर्वे में बड़ी संख्या में लोगों का सोना खरीदने को लेकर संयम दिखाना एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

    रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि बीते वित्तीय वर्ष में भारत का सोना आयात बिल काफी बढ़ गया। वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों में तेज उछाल के कारण आयात की कुल लागत रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई। हालांकि आयात की मात्रा में बहुत ज्यादा वृद्धि नहीं हुई, लेकिन ऊंची कीमतों ने विदेशी मुद्रा भंडार पर अतिरिक्त दबाव पैदा किया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लोग गैर-जरूरी सोना खरीदने में कमी करते हैं तो इससे देश की आर्थिक स्थिति को कुछ हद तक राहत मिल सकती है। विदेशी मुद्रा की बचत होने से आयात संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी और आर्थिक दबाव कम किया जा सकेगा।

    हालांकि सर्वे में यह भी सामने आया कि सभी लोग अपनी पारंपरिक आदतें बदलने के लिए तैयार नहीं हैं। करीब 19 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे शादियों और पारिवारिक जरूरतों के लिए सोना खरीदना जारी रखेंगे। कई लोगों का यह भी मानना है कि आर्थिक अस्थिरता के दौर में सोना अब भी सबसे सुरक्षित निवेश विकल्पों में से एक है।

    इस सर्वे ने यह साफ कर दिया है कि देश में आर्थिक मुद्दों को लेकर लोगों की जागरूकता बढ़ रही है और सरकारी अपीलों का असर अब आम नागरिकों की सोच और फैसलों में भी दिखाई देने लगा है।

  • वैश्विक सहयोग की दिशा में बड़ा कदम: भारत–नीदरलैंड ने बढ़ाई रणनीतिक साझेदारी और किए कई MoU

    वैश्विक सहयोग की दिशा में बड़ा कदम: भारत–नीदरलैंड ने बढ़ाई रणनीतिक साझेदारी और किए कई MoU

    नई दिल्ली । भारत और यूरोप के बीच कूटनीतिक संबंधों में एक नया और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है, जब भारत और नीदरलैंड ने अपने द्विपक्षीय रिश्तों को और अधिक मजबूत और संरचनात्मक बनाने की दिशा में ऐतिहासिक निर्णय लिया। इस उच्च स्तरीय बैठक के दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी का दर्जा देने पर सहमति व्यक्त की, जिससे भविष्य में सहयोग के नए आयाम खुलने की उम्मीद जताई जा रही है। इस अवसर पर दोनों पक्षों ने संयुक्त बयान जारी करते हुए व्यापार, रक्षा, तकनीक, शिक्षा, जल प्रबंधन, ऊर्जा और स्वास्थ्य जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। यह दौरा दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास और आपसी समझ का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है, जिसमें वैश्विक चुनौतियों से मिलकर निपटने की रणनीति भी शामिल है।

    इस बैठक के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटन के बीच व्यापक स्तर पर वार्ता हुई, जिसमें दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही नीदरलैंड के शाही परिवार के साथ हुई मुलाकातों ने इस दौरे को और भी विशेष बना दिया, जहां आपसी संबंधों को सांस्कृतिक और कूटनीतिक स्तर पर भी मजबूती देने पर जोर दिया गया। इस बातचीत में दोनों देशों ने स्वीकार किया कि वैश्विक परिस्थितियों में तेजी से बदलाव हो रहा है और ऐसे समय में मजबूत साझेदारी अत्यंत आवश्यक है।

    इस अवसर पर कई महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों और आशय पत्रों पर हस्ताक्षर किए गए, जिनका दायरा काफी व्यापक रहा। इनमें सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम तकनीक, साइबर सुरक्षा और अंतरिक्ष जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग शामिल है। इसके अलावा रक्षा और सुरक्षा सहयोग को लेकर भी दोनों देशों ने अपनी साझेदारी को मजबूत करने का निर्णय लिया है, जिससे समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी प्रयासों को मजबूती मिलेगी। जल प्रबंधन और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी दोनों देशों ने संयुक्त रूप से काम करने की योजना बनाई है, जिसमें ग्रीन हाइड्रोजन और ऊर्जा परिवर्तन जैसे विषय प्रमुख हैं।

    कृषि और पशुपालन के क्षेत्र में भी सहयोग को एक नई दिशा दी गई है, जिसमें प्रशिक्षण और तकनीकी आदान-प्रदान के माध्यम से उत्पादकता बढ़ाने पर जोर दिया गया है। शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में भी कई विश्वविद्यालयों और संस्थानों के बीच समझौते हुए हैं, जिससे छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए नए अवसर पैदा होंगे। इसके साथ ही स्वास्थ्य क्षेत्र में भी दोनों देशों ने मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई है, विशेष रूप से सार्वजनिक स्वास्थ्य अनुसंधान और चिकित्सा नवाचार के क्षेत्र में।

    कुल मिलाकर यह दौरा और उसके दौरान हुए समझौते भारत और नीदरलैंड के बीच संबंधों को एक नई दिशा और गति देने वाले साबित हो सकते हैं। यह साझेदारी न केवल दोनों देशों के लिए बल्कि वैश्विक स्थिरता और विकास के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिसमें सहयोग, नवाचार और साझा जिम्मेदारी की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

  • पाकिस्तान ने घटाए पेट्रोल-डीजल के दाम, फिर भी भारत और पड़ोसी देशों में ईंधन की कीमतें अलग-अलग क्यों?

    पाकिस्तान ने घटाए पेट्रोल-डीजल के दाम, फिर भी भारत और पड़ोसी देशों में ईंधन की कीमतें अलग-अलग क्यों?



    नई दिल्ली। पाकिस्तान सरकार ने आम जनता को राहत देते हुए पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल की कीमतों में 5 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है। नई दरें 16 मई 2026 से लागू हो गई हैं। कटौती के बाद पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत 409.78 पाकिस्तानी रुपये और डीजल 409.58 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर हो गया है, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 140–141 रुपये प्रति लीटर के आसपास बैठता है।

    हालांकि यह कटौती राहत देने वाली है, फिर भी पाकिस्तान में ईंधन की कीमतें भारत के मुकाबले अधिक बनी हुई हैं। इससे पहले वहां पेट्रोल और डीजल में करीब 15 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी भी की गई थी, जिससे आम लोगों पर बोझ और बढ़ गया था।

    पड़ोसी देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें (भारत की तुलना में)
    भारत में हाल ही में पेट्रोल-डीजल में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में पेट्रोल करीब 97.77 रुपये और डीजल 90.67 रुपये प्रति लीटर है, जबकि मुंबई में पेट्रोल 106 रुपये के पार पहुंच चुका है।

    नेपाल में ईंधन भारत से महंगा है, जहां पेट्रोल करीब 134 रुपये और डीजल लगभग 139 रुपये प्रति लीटर पड़ता है। बांग्लादेश में पेट्रोल लगभग 109 रुपये और डीजल करीब 90 रुपये प्रति लीटर है। श्रीलंका में डीजल की कीमत 137 रुपये प्रति लीटर के आसपास है, जबकि भूटान में पेट्रोल-डीजल भारत के लगभग बराबर, यानी 98 से 102 रुपये के बीच मिलता है।

    कीमतें क्यों बदल रही हैं लगातार?
    दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, मध्य-पूर्व में तनाव और समुद्री व्यापार मार्गों (जैसे होर्मुज स्ट्रेट) में अस्थिरता के कारण ईंधन सप्लाई प्रभावित हो रही है। इसी वजह से भारत, पाकिस्तान और अन्य पड़ोसी देश अपनी घरेलू नीतियों और टैक्स ढांचे के अनुसार समय-समय पर कीमतों में बदलाव कर रहे हैं।

  • ब्रिक्स बैठक में पश्चिम एशिया पर फूटा मतभेद, संयुक्त बयान अटका; 63 बिंदुओं का अलग दस्तावेज जारी

    ब्रिक्स बैठक में पश्चिम एशिया पर फूटा मतभेद, संयुक्त बयान अटका; 63 बिंदुओं का अलग दस्तावेज जारी



    नई दिल्ली। भारत की अध्यक्षता में हुई ब्रिक्स (BRICS) विदेश मंत्रियों की बैठक में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर गंभीर मतभेद सामने आए, जिसके चलते इस बार कोई संयुक्त बयान जारी नहीं किया जा सका। बैठक में ईरान, इजरायल और अमेरिका से जुड़े मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच अलग-अलग राय देखने को मिली, जिससे साझा सहमति बनाना मुश्किल हो गया। इसके बाद अध्यक्ष की ओर से एक विस्तृत बयान जारी किया गया, जिसमें 63 बिंदुओं के जरिए सभी देशों के विचारों को शामिल किया गया।

    सूत्रों के अनुसार, बैठक में ईरान ने मांग रखी थी कि इजरायल और अमेरिका द्वारा किए गए हमलों की निंदा ब्रिक्स मंच से की जाए, लेकिन इस पर सभी सदस्य देश सहमत नहीं हो सके। कुछ देशों ने कहा कि किसी एक पक्ष को सीधे तौर पर निशाना बनाना कूटनीतिक संतुलन के खिलाफ होगा, जबकि अन्य देशों ने क्षेत्रीय तनाव को देखते हुए सख्त रुख अपनाने की वकालत की।

    इसी असहमति के कारण संयुक्त बयान पर सहमति नहीं बन सकी। बाद में जारी अध्यक्षीय बयान में कहा गया कि पश्चिम एशिया की स्थिति पर सदस्य देशों के विचार अलग-अलग हैं, लेकिन सभी देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि संकट का समाधान संवाद और कूटनीति के जरिए ही संभव है। बयान में अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान पर भी जोर दिया गया।

    बयान में यह भी कहा गया कि ब्रिक्स देशों ने एकतरफा प्रतिबंधों और अंतरराष्ट्रीय कानून के विपरीत दंडात्मक उपायों की आलोचना की है। साथ ही मानवीय संकटों से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया गया। बैठक में फलस्तीन के मुद्दे पर भी चर्चा हुई, जिसमें 1967 की सीमाओं के आधार पर स्वतंत्र फलस्तीन राज्य के समर्थन की बात दोहराई गई।

    इस तरह पश्चिम एशिया के संवेदनशील मुद्दों पर अलग-अलग दृष्टिकोण के कारण ब्रिक्स बैठक में एकजुटता की कमी दिखी, हालांकि संवाद और शांति की आवश्यकता पर सभी देशों ने सहमति व्यक्त की।

  • Middle East Crisis में भारत के प्लान-बी का कमाल….. ग्लोबल संकट के बीच Import-Export में वृद्धि

    Middle East Crisis में भारत के प्लान-बी का कमाल….. ग्लोबल संकट के बीच Import-Export में वृद्धि


    नई दिल्ली।
    अमेरिका-ईरान तनाव (US-Iran Tensions), होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) बंद और इससे क्रूड की कीमतों (Crude Prices) में लगी आग के चलते ग्लोबल टेंशन चरम पर है. दुनिया के तमाम देशों में इससे उपजे तेल-गैस संकट (Oil and Gas Crisis) से हाहाकार मचा है और महंगाई की मार आम आदमी पर पड़ रही है. भारत भी इससे अछूता नहीं है, शुक्रवार को ही देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की गई. हालांकि, ये अन्य देशों के मुकाबले काफी कम है और करीब चार साल बाद इसमें इजाफा हुआ है।

    लेकिन बड़े ग्लोबल संकटों के बावजूद भारत सही ट्रैक पर आगे बढ़ रहा है. इसका एक ताजा उदाहरण देश के निर्यात के आंकड़े हैं. तमाम चुनौतियों के बाद भी भारतीय सामानों का एक्सपोर्ट अप्रैल महीने में बढ़कर 43.56 अरब डॉलर रहा है, जबकि आयात में भी तेज उछाल देखने को मिला है. कुल निर्यात की बात करें, तो ये 80.80 अरब डॉलर रहा है।

    इन चीजों का खूब हुआ निर्यात
    कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल ने शुक्रवार ये आंकड़े जारी करते हुए कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद देश का निर्यात बढ़ रहा है. अप्रैल में ये 13.78 फीसदी की उछाल के साथ बढ़कर 43.56 अरब डॉलर हो गया. इसके अलावा अप्रैल में भारतीय आयात भी सालाना आधार पर 10 फीसदी बढ़कर 71.94 अरब डॉलर हो गया।

    इस दौरान कई क्षेत्रों में निर्यात में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई. अनाजों के निर्यात में सबसे अधिक 210.19% का उछाल आया, इसके बाद मीट, डेयरी और पोल्ट्री उत्पादों में 48.03% और इलेक्ट्रॉनिक सामानों में 40.31% की तेजी आई. पेट्रोलियम प्रोडक्ट, हस्तशिल्प, मरीन प्रोडक्ट, इंजीनियरिंग सामान, दवाएं और कॉफी में भी ग्रोथ देखने को मिली है.


    होर्मुज संकट का यहां पड़ा असर

    अप्रैल महीने में भारत का व्यापार घाटा 28.38 अरब डॉलर रहा. होर्मुज संकट के असर की बात करें, तो राजेश अग्रवाल ने बताया कि पिछले महीने पश्चिम एशिया को भारत का निर्यात 28% घटकर 4.16 अरब डॉलर रह गया, जबकि अप्रैल 2025 में यह 5.78 अरब डॉलर था. इस क्षेत्र से आयात अप्रैल में 31.64% घटा और 10.47 अरब डॉलर रह गया।


    दुनिया में हाय-तौबा, भारत ने ऐसा संभाला

    आयात-निर्यात के इन ताजा आंकड़ों को देखकर साफ हो जाता है कि ट्रंप का टैरिफ अटैक हो या फिर अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध से पैदा हुआ तेल-गैस संकट. मोदी सरकार का प्लान-बी (Modi Govt Plan-B) काम कर रहा है और इसका असर भी देखने को मिल रहा है।

    अमेरिका-ईरान युद्ध से मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच पाकिस्तान से लेकर साउथ कोरिया तक में हायतौबा मची नजर आई. लेकिन देश के आयात-निर्यात को सुचारू रखने के लिए सरकार कई बड़े कदम उठाए, इनमें आयात डेस्टिनेशंस की संख्या बढ़ाने के साथ ही ग्लोबल टेंशन के बीच भारतीय निर्यात के लिए नए बाजारों तक पहुंच शामिल है. बीते कुछ समय में भारत ने न्यूजीलैंड, यूरोपीय यूनियन समेत कई देशों से बड़े FTA साइन किए हैं।

  • ईरान-अमेरिका तनाव में भारत बन सकता है शांति का बड़ा चेहरा, रूस ने नई दिल्ली को बताया सबसे भरोसेमंद मध्यस्थ

    ईरान-अमेरिका तनाव में भारत बन सकता है शांति का बड़ा चेहरा, रूस ने नई दिल्ली को बताया सबसे भरोसेमंद मध्यस्थ



    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच रूस ने भारत की भूमिका को लेकर एक बड़ा कूटनीतिक बयान दिया है। रूसी विदेश मंत्री Sergey Lavrov ने कहा है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में India ईरान, अमेरिका और पश्चिम एशियाई देशों के बीच संवाद स्थापित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान लावरोव ने भारत की विदेश नीति की तारीफ करते हुए कहा कि भारत लंबे समय से संतुलित कूटनीति अपनाता रहा है और विभिन्न वैश्विक शक्तियों के साथ उसके मजबूत संबंध हैं। इसी वजह से भारत को एक “भरोसेमंद मध्यस्थ” के रूप में देखा जा सकता है, जो तनाव कम करने और बातचीत को आगे बढ़ाने में मदद कर सकता है।

    रूस का कहना है कि पश्चिम एशिया में हाल के वर्षों में तनाव काफी बढ़ा है, जिसमें ईरान-अमेरिका टकराव, ऊर्जा आपूर्ति की अनिश्चितता और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दे प्रमुख हैं। ऐसे में किसी ऐसे देश की जरूरत है जो दोनों पक्षों के बीच विश्वास पैदा कर सके और बातचीत का रास्ता खोल सके। लावरोव के अनुसार, भारत इस भूमिका के लिए उपयुक्त है क्योंकि वह किसी एक खेमे का हिस्सा न होकर सभी प्रमुख देशों के साथ समान रूप से संबंध बनाए रखता है।

    लावरोव ने यह भी कहा कि भारत का कूटनीतिक अनुभव केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह बहुपक्षीय मंचों जैसे ब्रिक्स, जी20 और शंघाई सहयोग संगठन में भी सक्रिय भूमिका निभाता रहा है। उन्होंने यह संकेत दिया कि भारत की यह वैश्विक स्वीकार्यता उसे मध्यस्थता की भूमिका के लिए और मजबूत बनाती है।

    रूस के अनुसार, ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत केवल सुरक्षा या राजनीतिक मुद्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार, तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ता है। ऐसे में किसी स्थिर और भरोसेमंद मध्यस्थ की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

    लावरोव ने यह भी कहा कि कुछ पश्चिमी देशों की नीतियां इस क्षेत्र में तनाव को कम करने के बजाय बढ़ाने का काम कर रही हैं, जबकि समाधान केवल संवाद और कूटनीति के जरिए ही संभव है। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान और अरब देशों के बीच दूरी बढ़ाने की कोशिशें की जा रही हैं, जो वैश्विक स्थिरता के लिए सही नहीं है।

    भारत को लेकर रूस की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब प्रधानमंत्री की हालिया कूटनीतिक गतिविधियों और खाड़ी देशों के साथ बढ़ते संबंधों ने भारत की भूमिका को और मजबूत किया है। ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और निवेश जैसे क्षेत्रों में भारत की बढ़ती भागीदारी ने उसे एक महत्वपूर्ण वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित किया है।

    हालांकि भारत सरकार की ओर से इस प्रस्ताव पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाता है तो वह पश्चिम एशिया में शांति स्थापना के प्रयासों का एक प्रमुख केंद्र बन सकता है।

    कुल मिलाकर रूस का यह बयान भारत की बढ़ती वैश्विक कूटनीतिक ताकत को दर्शाता है, जहां वह अब केवल एक उभरती अर्थव्यवस्था नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय शांति और स्थिरता में योगदान देने वाला अहम देश बनता जा रहा है।

  • इंदौर में रिश्तों को लेकर बढ़े विवाद, पंचायत में सामने आए अहम सामाजिक मुद्दे

    इंदौर में रिश्तों को लेकर बढ़े विवाद, पंचायत में सामने आए अहम सामाजिक मुद्दे


    नई दिल्ली । इंदौर में सिंधी समाज द्वारा शुरू की गई मध्यस्थता पहल लगातार चर्चा में है। समाज की पंचायत ने अब तक 800 से अधिक पारिवारिक और वैवाहिक विवादों को सुलझाया है, जिनमें कई मामले तलाक तक पहुंचने की कगार पर थे। लेकिन बातचीत, काउंसलिंग और आपसी समझ के जरिए कई परिवारों को टूटने से बचा लिया गया।

    एक मामले में एक महिला अपने वैवाहिक जीवन से बेहद असंतुष्ट थी और तलाक चाहती थी। विवाद बढ़ने पर मामला समाज की पंचायत तक पहुंचा, जहां दोनों पक्षों को सुना गया और मेडिकल व काउंसलिंग सहायता भी ली गई। इसके बाद दोनों को साथ रहने के लिए तैयार किया गया।

    पंचायत से जुड़े सदस्यों के अनुसार, अब तक सामने आए कुल मामलों में लगभग 48% विवाद वैवाहिक जीवन से जुड़े हैं। इनमें एक बड़ा हिस्सा निजी और दाम्पत्य जीवन में असंतुष्टि से जुड़ा पाया गया है। इसके अलावा संपत्ति, आर्थिक और पारिवारिक विवाद भी बड़ी संख्या में सामने आए हैं।

    विशेषज्ञों और समाज के डॉक्टरों की मदद से कई मामलों में काउंसलिंग भी कराई जाती है, ताकि समस्याओं को चिकित्सकीय और मानसिक दृष्टिकोण से भी समझा जा सके। पंचायत का दावा है कि हर मामला अलग होता है और उसका समाधान भी व्यक्तिगत परिस्थितियों के अनुसार किया जाता है।

    इसके अलावा समाज ने विवाह योग्य युवाओं का एक सर्वे भी किया है, जिसमें 22 से 29 और 30 से 40 वर्ष के आयु वर्ग में अविवाहित युवक-युवतियों का आंकड़ा भी सामने आया है। यह डेटा सामाजिक बदलाव और विवाह संबंधी प्रवृत्तियों को भी दर्शाता है।

    इस पहल को समाज में परिवारों को जोड़कर रखने की एक कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, जो आधुनिक समय में बदलते रिश्तों की जटिलताओं को समझने की दिशा में एक उदाहरण बन रही है।

  • थोक महंगाई 8.3% पर पहुंची, कच्चे तेल ने बिगाड़ा आर्थिक संतुलन..

    थोक महंगाई 8.3% पर पहुंची, कच्चे तेल ने बिगाड़ा आर्थिक संतुलन..

    नई दिल्ली । अप्रैल महीने में देश की अर्थव्यवस्था पर महंगाई का दबाव एक बार फिर साफ तौर पर दिखाई दिया है। थोक मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर बढ़कर 8.3 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो पिछले महीने मार्च में 3.88 प्रतिशत थी। यह तेज बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि उत्पादन और आपूर्ति से जुड़ी लागतों में अचानक इजाफा हुआ है, जिसका सीधा असर बाजार की कीमतों पर पड़ा है।

    इस बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल और ऊर्जा से जुड़े उत्पादों की कीमतों में आई तेज उछाल को माना जा रहा है। खनिज तेल, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस और अन्य ऊर्जा स्रोतों की लागत में बढ़ोतरी ने पूरी आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया है। इसके साथ ही धातु और अन्य औद्योगिक उत्पादों की कीमतों में भी तेजी देखी गई है, जिससे थोक स्तर पर महंगाई और बढ़ गई है।

    आंकड़ों के अनुसार प्राथमिक वस्तुओं की श्रेणी में महंगाई दर लगभग 9.17 प्रतिशत दर्ज की गई है, जबकि ईंधन और ऊर्जा से जुड़े सेक्टर में यह बढ़कर 24 प्रतिशत से अधिक हो गई है। यह स्थिति स्पष्ट रूप से दिखाती है कि ऊर्जा क्षेत्र में लागत का दबाव सबसे ज्यादा रहा है। हालांकि, राहत की बात यह है कि खाद्य उत्पादों की महंगाई अपेक्षाकृत नियंत्रण में रही है, जो इस महीने लगभग 2.31 प्रतिशत के स्तर पर दर्ज की गई है।

    कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी वृद्धि ने थोक महंगाई को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। ऊर्जा आधारित उद्योगों में लागत बढ़ने से परिवहन, उत्पादन और वितरण सभी पर असर पड़ा है, जिसका असर अंततः उपभोक्ता बाजार तक पहुंचता है। इसी कारण आने वाले महीनों में खुदरा कीमतों पर भी दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

    सरकारी आंकड़ों के अनुसार खुदरा महंगाई दर में भी हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है और यह अप्रैल में 3.48 प्रतिशत पर पहुंच गई है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में भी कीमतों का दबाव अलग-अलग स्तर पर देखा गया है, जहां ग्रामीण इलाकों में महंगाई थोड़ी अधिक रही है। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में भी मामूली बढ़ोतरी देखी गई है, जिससे आम उपभोक्ता पर असर पड़ना तय माना जा रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की अस्थिरता और आपूर्ति श्रृंखला में अनिश्चितता आने वाले समय में भी महंगाई को प्रभावित कर सकती है। ऊर्जा की लागत में लगातार बढ़ोतरी उत्पादन लागत को ऊपर ले जाती है, जिसका असर हर सेक्टर पर पड़ता है।

    इस बीच केंद्रीय बैंक ने आने वाले वित्तीय वर्षों के लिए महंगाई के अनुमान को लेकर संतुलित दृष्टिकोण रखा है और उम्मीद जताई है कि कृषि उत्पादन और आपूर्ति स्थिति में सुधार से खाद्य महंगाई को कुछ हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

    फिलहाल स्थिति यह है कि कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने पूरी अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा दिया है और आने वाले समय में इसके प्रभावों पर नजर रखना बेहद जरूरी होगा, क्योंकि यह सीधे आम जनता की जेब पर असर डालता है।

  • LPG संकट के बीच भारत को मिली बड़ी कामयाबी…. होर्मुज से न‍िकली 34 लाख स‍िलेंडर की खेप

    LPG संकट के बीच भारत को मिली बड़ी कामयाबी…. होर्मुज से न‍िकली 34 लाख स‍िलेंडर की खेप


    नई दिल्ली।
    दुन‍ियाभर में चल रहे एलपीजी संकट (LPG Crisis) के बीच गैस को लेकर एक नहीं दो खुशखबरी आ रही हैं. मिडल ईस्ट (Middle East.) में जारी तनाव और जंग के बीच भारत ने अपनी एनर्जी जरूरतों को लेकर बड़ी कामयाबी हासिल की है. पहली खुशखबरी एलपीजी टैंकर (LPG tanker) के होर्मुज स्‍ट्रेट (Strait of Hormuz) पार करने को लेकर है. एजेंसी के अनुसार भारत आ रहे एलपीजी टैंकर ‘एमवी सनशाइन’ (MV Sunshine) ने इस समय सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ते, होर्मुज स्‍ट्रेट (Strait of Hormuz) को सफलतापूर्वक पार कर ल‍िया है. मीड‍िया र‍िपोर्ट के अनुसार इस जहाज के जर‍िये 48,456 टन एलपीजी भारत आ रही है, ज‍िसके 18 मई तक पहुंचने की उम्‍मीद है. दूसरी खुशखबरी गैस स‍िलेंडर की कीमत को लेकर है।

    सूत्रों का कहना है ‘एमवी सनशाइन’ को ऐसे जहाजों की ल‍िस्‍ट में शाम‍िल क‍िया गया था, ज‍िसे मौजूदा तनाव के चलते विशेष सुरक्षा घेरे में रखा गया था. इसके अलावा तेल कंपन‍ियों ने स‍िलेंडर के रेट में क‍िसी तरह का इजाफा नहीं क‍िया है. कुछ मीड‍िया र‍िपोर्ट में कहा जा रहा था क‍ि 14 क‍िलो वाले घरेलू गैस स‍िलेंडर का रेट बढ़ सकता है. फारस की खाड़ी में बढ़ती संवेदनशीलता को देखते हुए भारत ने अपने एनर्जी जहाजों को निकालने के लिए खास स्‍ट्रेटजी तैयार की है. यह सफलता इसलिए खास हो जाती है क्योंकि ‘एमवी सनशाइन’ गैस का 15वां ऐसा जहाज है, जिसे इस खतरनाक इलाके से सुरक्षित रूप से बाहर निकाला गया है।


    जहाज के 18 मई को भारतीय सीमा में पहुंचने की उम्‍मीद

    अध‍िकार‍ियों की तरफ से पुष्टि की गई क‍ि टैंकर अपने तय रूट पर बढ़ रहा है और उसे भारत तक पहुंचाने के लि‍ए हर संभव तकनीकी और सुरक्षा सहायता दी जा रही है. इस जहाज के 18 मई को भारतीय सीमा में पहुंचने की उम्‍मीद है. ईरान और इजरायल के बीच बढ़ रहे तनाव के बीच यह आशंका जताई जा रही थी क‍ि होर्मुज स्‍ट्रेट से होने वाली एलपीजी सप्लाई रुक सकती है. क्‍योंक‍ि जंग के बीच भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा इसी रास्‍ते से इम्‍पोर्ट कर रहा है. सरकार और तेल कंपनियों ने वैकल्पिक इंतजाम और कूटनीतिक लेवल पर बातचीत के जरिये यह तय क‍िया है क‍ि सप्‍लाई चेन बाध‍ित नहीं होगी.


    भारतीय बाजार में सस्‍ती है कीमत

    फिलहाल सप्लाई को लेकर बड़ा खतरा नहीं है, ज‍िससे देश में गैस की किल्लत नहीं होगी. तेल कंपनियों की तरफ से 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर का रेट प‍िछले दाम पर ही चल रहा है. यह स‍िलेंडर द‍िल्‍ली में 3071 रुपये में म‍िल रहा है. घरेलू सिलेंडर (14.2 किलो) की कीमत को लेकर भी यही उम्‍मीद है क‍ि इंटरनेशल मार्केट में क्रूड ऑयल और गैस की कीमत में स्थिरता रहने पर आने वाले समय में आम जनता को राहत मिल सकती है. दुनियाभर में एलपीजी का एवरेज प्राइस 86.19 रुपये प्रति लीटर है. वहीं, भारतीय बाजार में औसत रेट 66.73 रुपये प्रत‍ि लीटर का है. ये आंकड़े ग्लोबल पेट्रोल प्राइसेज की तरफ से जारी क‍िये गए हैं।

  • भारत में LPG की किल्लत होगी दूर…. PM मोदी जा रहे UAE, दो अहम मुद्दों पर हो सकती है बड़ी डील

    भारत में LPG की किल्लत होगी दूर…. PM मोदी जा रहे UAE, दो अहम मुद्दों पर हो सकती है बड़ी डील


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) 15-20 मई 2026 तक पांच देशों के दौरे पर जा रहे हैं जिसकी शुरुआत संयुक्त अरब अमीरात (United Arab Emirates.-UAE) की यात्रा से हो रही है. पीएम मोदी यूएई में राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल-नाहयान (President Sheikh Mohammed bin Zayed Al Nahyan) से मुलाकात करेंगे. ईरान जंग के बीच जहां दुनिया तेल-गैस की किल्लत से जूझ रही है, माना जा रहा है कि मुलाकात के दौरान दोनों नेता ऊर्जा सुरक्षा पर प्रमुखता से बात करेंगे. सूत्रों के मुताबिक, इस दौरान लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार से जुड़े दो अहम समझौतों पर हस्ताक्षर हो सकते हैं।

    यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि हाल ही में UAE ने तेल उत्पादक देशों के समूह OPEC+ ढांचे से बाहर निकलने का फैसला किया है. ऐसे में दोनों देशों के लिए प्रत्यक्ष द्विपक्षीय ऊर्जा साझेदारी और भी अहम हो गई है, खासकर लंबे समय के लिए एनर्जी सप्लाई और उसके भंडारण में सहयोग के क्षेत्र में।

    भारत के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक, दोनों नेता द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा करेंगे, जिसमें खास तौर पर ऊर्जा सहयोग के साथ-साथ क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर विचार-विमर्श शामिल होगा।


    फ्यूल क्राइसिस के बीच भारत की उम्मीद बन सकते हैं ये पाइपलाइन प्रोजेक्ट्स

    मंत्रालय ने कहा कि दोनों पक्ष भारत-UAE कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप को आगे बढ़ाने के तरीकों पर भी चर्चा करेंगे. यह साझेदारी मजबूत राजनीतिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और लोगों के बीच गहरे संबंधों पर आधारित है. बयान में कहा गया कि यह यात्रा दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को और मजबूत करने में मदद करेगी।

    भारत और UAE ने पिछले कुछ सालों में ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग लगातार बढ़ाया है. इसमें कच्चे तेल की आपूर्ति व्यवस्था, रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार में निवेश और पेट्रोलियम इंफ्रास्ट्रक्चर के डाउनस्ट्रीम सेक्टर में सहयोग शामिल है। UAE फिलहाल भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और पिछले 25 सालों में भारत में सबसे ज्यादा निवेश करने वाले देशों में सातवें स्थान पर है।

    इस यात्रा के दौरान UAE में रहने वाले 45 लाख से अधिक भारतीय समुदाय के कल्याण पर भी खास ध्यान दिए जाने की उम्मीद है. खाड़ी क्षेत्र में भारतीय प्रवासी समुदाय सबसे बड़े विदेशी समुदायों में से एक माना जाता है।


    यूएई के अलावा और किन देशों के दौरे पर जा रहे हैं पीएम

    पीएम मोदी के पांच देशों के दौरे का मुख्य फोकस ऊर्जा सहयोग है जिसमें वो नवीकरणीय ऊर्जा और ग्रीन टेक्नोलॉजी पर भी बात होगी. प्रधानमंत्री मोदी के इस दौरे में शामिल पांच देश हैं- यूएई और यूरोप के चार देश नीदरलैंड्स, स्वीडन, नॉर्वे और इटली. यूरोपीय देशों के दौरे का मकसद ग्रीन टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर बात करना और भारत-यूरोपीय संघ के रिश्तों को मजबूती देना है।