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  • क्रांति गौड़ ने अपनी प्रतिभा के दम पर दुनिया में बढ़ाया भारत का मान: मुख्यमंत्री डॉ यादव

    क्रांति गौड़ ने अपनी प्रतिभा के दम पर दुनिया में बढ़ाया भारत का मान: मुख्यमंत्री डॉ यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि बेटों के साथ-साथ हमारी बेटियां भी किसी से कम नहीं है। लार्ड्स के ‘टेस्ट ऑनर्स बोर्ड’ पर अपना नाम दर्ज कराने वाली देश की पहली महिला क्रिकेटर मध्य प्रदेश की बेटी क्रांति गौड़ ने अपनी प्रतिभा और कौशल के दम पर पूरे देश और प्रदेश का मान बढ़ाया है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार शाम को अपने निवास स्थित संवाद भवन में आयोजित सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे।उन्होंने मध्य प्रदेश की सुप्रसिद्ध अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेटर सुश्री क्रांति गौड़ और उनके पिता नरसिंह एवं भाई महेन्द्र सिंह को भी सम्मानित किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार खेलों को बढ़ावा देने के लिए स्पोर्ट्स इन्फ्रास्ट्रक्चर, खिलाड़ियों की ट्रेनिंग और उन्हें सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दे रही है। राज्य में ‘खेलो बढ़ो अभियान’ के अंतर्गत सांसद कप, विधायक कप के माध्यम से प्रदेश के हर विधानसभा और तहसील स्तर पर खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं। राज्य सरकार के इसी संकल्प का परिणाम है कि आज प्रदेश के खिलाड़ी क्रिकेट टूर्नामेंट्स, ओलिम्पिक गेम्स, खेलो इंडिया गेम्स में पदक जीत कर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मध्य प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं।

    क्रांति लेकर आईं हैं प्रदेश में खेल क्रांति

    उन्होंने क्रिकेटर क्रांति गौड़ को बधाई देते हुए कहा कि मध्य प्रदेश की लाड़ली बिटिया और हमारी छोटी बहन क्रांति प्रदेश में नई खेल क्रांति लेकर आईं हैं। मुख्यमंत्री ने खेल एवं युवा कल्याण विभाग की ओर से क्रिकेटर क्रांति गौड़ को तीन लाख रुपये का चेक और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लार्ड्स के ऐतिहासिक क्रिकेट ग्राउंड पर बुंदेलखण्ड की गौरव क्रांति गौड़ के सात विकेट लेकर बेहतरीन प्रदर्शन की मुक्तकंठ से सराहना की तथा क्रांति को इस बड़ी उपलब्धि के लिए अपनी ओर से दो लाख रूपये की सम्मान राशि का चेक भी सौंपा।

    परिवार के सपोर्ट के बिना संभव नहीं था ब्लू जर्सी पहनना : क्रांति गौड़

    अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खिलाड़ी क्रांति गौड़ ने क्रिकेटरों एवं मप्र खेल अकादमी के युवा खिलाड़ियों से संवाद भी किया। क्रांति गौड़ ने कहा कि उन्होंने बचपन में अनेक संघर्षों के बीच यह तय कर लिया था कि उन्हें टीम इंडिया की ब्लू जर्सी पहननी है। बुंदेलखंड के एक छोटे से गांव से क्रिकेट के अंतरराष्ट्रीय मंच तक की यात्रा माता-पिता और परिवार के सहयोग एवं समर्थन के बिना पूरी नहीं हो सकती थी।

    क्रांति ने कहा कि उनके सपने को पूरा करने के लिए परिवार ने बारिश के मौसम में भी टपकते मकान के नीचे और रसोई में राशन नहीं होने जैसे मुश्किल दिन भी गुजारे हैं। अपना लक्ष्य हासिल करने के लिए उन्होंने ठान लिया था कि अब कुछ भी हो देश और अपनों के लिए कुछ कर गुजरना है।

    कार्यक्रम में खेल एवं युवक कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग, खेल सचिव संजीव सिंह, खेल संचालक अंशुमान सिंह यादव सहित खेल विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं बड़ी संख्या में खिलाड़ी भी उपस्थित थे।

    गौरतलब है कि मध्य प्रदेश की बेटी भारतीय टीम की तेज गेंदबाज क्रांति गौड़ ने इंग्लैंड के खिलाफ ऐतिहासिक लॉर्ड्स टेस्ट में दोनों पारियों में कुल 7 विकेट चटकाए थे। उन्होंने मैच की पहली पारी में शानदार गेंदबाजी करते हुए 37 रन देकर 5 विकेट लिए, जबकि दूसरी पारी में दो विकेट चटकाए। इस मैच में 7 विकेट लेने पर उन्हें ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया। इसके साथ ही क्रांति गौड़ प्रतिष्ठित लॉर्ड्स के ‘ऑनर बोर्ड’ (सम्मान पट्टिका) पर अपना नाम दर्ज कराने वाली दुनिया की पहली महिला क्रिकेटर बनीं।

  • ई20 पेट्रोल पर सरकार का बड़ा स्पष्टीकरण, पुराने वाहनों में मामूली माइलेज गिरने की बात स्वीकार, इंजन नुकसान के दावों को बताया निराधार

    ई20 पेट्रोल पर सरकार का बड़ा स्पष्टीकरण, पुराने वाहनों में मामूली माइलेज गिरने की बात स्वीकार, इंजन नुकसान के दावों को बताया निराधार

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने ई20 पेट्रोल को लेकर चल रही चर्चाओं और आशंकाओं के बीच स्पष्ट किया है कि 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के उपयोग से ई10 मानक के अनुसार तैयार किए गए कुछ पुराने वाहनों में माइलेज में मामूली कमी आ सकती है, लेकिन इससे इंजन को नुकसान पहुंचने या वाहन के बड़े पैमाने पर खराब होने का कोई सत्यापित प्रमाण उपलब्ध नहीं है। सरकार का कहना है कि इस विषय पर फैलाए जा रहे कई दावे तथ्यों से मेल नहीं खाते और उपलब्ध तकनीकी जानकारी इसके विपरीत संकेत देती है।

    सरकार के अनुसार ई10 मानक के अनुरूप तैयार किए गए पुराने वाहनों में ई20 पेट्रोल के इस्तेमाल से ईंधन दक्षता में सामान्यतः लगभग 3 से 5 प्रतिशत तक की कमी देखी जा सकती है। हालांकि यह गिरावट सीमित मानी गई है और इसे वाहन की समग्र कार्यक्षमता पर गंभीर प्रभाव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। सरकार का कहना है कि इस बदलाव को केवल एथेनॉल मिश्रण से जोड़कर नहीं देखा जा सकता, क्योंकि माइलेज कई अन्य तकनीकी और परिचालन संबंधी कारणों से भी प्रभावित होता है।

    सरकार ने स्पष्ट किया कि किसी भी वाहन का वास्तविक माइलेज चालक की ड्राइविंग शैली, वाहन के नियमित रखरखाव, टायरों में सही हवा, व्हील अलाइनमेंट, इंजन की स्थिति और एयर कंडीशनर के उपयोग जैसी अनेक परिस्थितियों पर निर्भर करता है। ऐसे में यदि किसी वाहन की ईंधन दक्षता में बदलाव दिखाई देता है तो उसके पीछे केवल ई20 पेट्रोल को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता।

    सरकार ने यह भी बताया कि ई20 पेट्रोल के कई तकनीकी लाभ हैं। इसमें पारंपरिक पेट्रोल की तुलना में अधिक ऑक्टेन रेटिंग मिलती है, जिससे इंजन में बेहतर एंटी-नॉक प्रदर्शन प्राप्त होता है। इसके साथ ही ईंधन का दहन अधिक प्रभावी होता है, जिससे इंजन का संचालन अधिक स्मूथ रहता है और एक्सीलरेशन भी बेहतर महसूस हो सकता है। सरकार का मानना है कि इन विशेषताओं के कारण आधुनिक वाहनों के लिए ई20 मिश्रित ईंधन एक उपयोगी विकल्प बनकर उभर रहा है।

    हाल के दिनों में ई20 पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर इंजन खराब होने तथा वाहनों को नुकसान पहुंचने जैसे कई दावे सामने आए थे। इन आशंकाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए सरकार ने दोहराया कि अब तक ऐसा कोई प्रमाणित मामला सामने नहीं आया है, जिससे यह साबित हो सके कि ई20 पेट्रोल के कारण किसी वाहन का इंजन व्यापक रूप से क्षतिग्रस्त हुआ हो। सरकार का कहना है कि उपलब्ध तकनीकी परीक्षण और अनुभव ऐसे दावों की पुष्टि नहीं करते।

    इसी क्रम में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भी हाल ही में ई20 पेट्रोल को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए कहा था कि यदि किसी वाहन को इस ईंधन से वास्तविक नुकसान हुआ हो तो उसका प्रमाण प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि ई20 को लेकर कई भ्रामक दावे फैलाए जा रहे हैं, जबकि इसका उद्देश्य स्वच्छ ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देना और पेट्रोलियम पर निर्भरता कम करना है।

    सरकार का मानना है कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन का विस्तार ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, आयातित ईंधन पर निर्भरता घटाने और पर्यावरण के अनुकूल ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसी कारण ई20 पेट्रोल को लेकर वैज्ञानिक तथ्यों और तकनीकी परीक्षणों के आधार पर लोगों में जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि भ्रम की स्थिति समाप्त हो और उपभोक्ताओं को सही जानकारी मिल सके।

  • डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ी सख्ती, अश्लील सामग्री और कानून उल्लंघन के आरोप में 50 ओटीटी प्लेटफॉर्म ब्लॉक

    डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ी सख्ती, अश्लील सामग्री और कानून उल्लंघन के आरोप में 50 ओटीटी प्लेटफॉर्म ब्लॉक

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने अश्लील सामग्री के प्रसारण और डिजिटल कानूनों के उल्लंघन के मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए पिछले दो वर्षों में 50 ओटीटी प्लेटफॉर्म की भारत में सार्वजनिक पहुंच बंद कर दी है। सरकार का कहना है कि यह कार्रवाई डिजिटल माध्यमों पर गैरकानूनी सामग्री के प्रसार को रोकने और इंटरनेट को अधिक सुरक्षित एवं जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से की गई है।

    लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार यह कार्रवाई उन ओटीटी प्लेटफॉर्म और इंटरमीडियरी के खिलाफ की गई, जिन पर अश्लील सामग्री प्रसारित करने और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम सहित अन्य संबंधित कानूनी प्रावधानों के उल्लंघन के आरोप थे। सरकार ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में उपलब्ध कानूनी अधिकारों का उपयोग करते हुए संबंधित प्लेटफॉर्म की भारत में सार्वजनिक पहुंच को प्रतिबंधित किया गया।

    सरकार के अनुसार डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध सामग्री को लेकर यदि किसी प्रकार की शिकायत प्राप्त होती है तो उसका परीक्षण किया जाता है। जांच में कानून का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित इंटरमीडियरी या प्लेटफॉर्म को गैरकानूनी सामग्री हटाने अथवा उस तक पहुंच रोकने के निर्देश जारी किए जाते हैं। आवश्यकता पड़ने पर सार्वजनिक पहुंच को भी प्रतिबंधित किया जा सकता है।

    केंद्र सरकार ने कहा कि उसकी डिजिटल नीति का मुख्य उद्देश्य ऐसा इंटरनेट वातावरण तैयार करना है, जो सभी उपयोगकर्ताओं के लिए सुरक्षित, विश्वसनीय और जिम्मेदार हो। विशेष रूप से बच्चों और किशोरों को हानिकारक ऑनलाइन सामग्री से बचाने को सरकार प्राथमिकता दे रही है। इसी दिशा में डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए निर्धारित नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जा रहा है।

    सरकार ने यह भी बताया कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और सूचना प्रौद्योगिकी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस एवं डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) नियम, 2021 डिजिटल प्लेटफॉर्म के संचालन के लिए व्यापक कानूनी ढांचा उपलब्ध कराते हैं। इन नियमों के तहत सभी इंटरमीडियरी के लिए ड्यू डिलिजेंस का पालन करना अनिवार्य है, ताकि ऑनलाइन माध्यमों का उपयोग कानून और सामाजिक जिम्मेदारी के अनुरूप हो सके।

    नियमों के अनुसार डिजिटल प्लेटफॉर्म को अपने उपयोगकर्ताओं को स्पष्ट रूप से यह बताना होता है कि वे ऐसी किसी भी सामग्री को अपलोड, प्रकाशित, साझा या प्रसारित न करें, जो बच्चों के लिए हानिकारक हो, अश्लील हो या देश के किसी भी लागू कानून का उल्लंघन करती हो। यदि प्लेटफॉर्म इन दायित्वों का पालन नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल मनोरंजन और ऑनलाइन स्ट्रीमिंग सेवाओं के तेजी से विस्तार के साथ कंटेंट मॉडरेशन की चुनौती भी बढ़ी है। ऐसे में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानूनी जवाबदेही के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। सरकार का कहना है कि उसका उद्देश्य वैध डिजिटल सेवाओं को बाधित करना नहीं, बल्कि कानून का उल्लंघन करने वाले प्लेटफॉर्म पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

    सरकार ने दोहराया कि भविष्य में भी यदि किसी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर गैरकानूनी या अश्लील सामग्री प्रसारित किए जाने की शिकायत सामने आती है और जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित कानूनों के तहत आवश्यक कार्रवाई जारी रहेगी। इसके माध्यम से सुरक्षित, पारदर्शी और जिम्मेदार डिजिटल इकोसिस्टम विकसित करने की दिशा में प्रयास लगातार जारी रहेंगे।

  • Chip पैकेजिंग का नया ग्लोबल हब बनेगा भारत…. सरकार ने बनाया चीन को मात देने का मेगा प्लान

    Chip पैकेजिंग का नया ग्लोबल हब बनेगा भारत…. सरकार ने बनाया चीन को मात देने का मेगा प्लान


    नई दिल्ली।
    वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन (Global Electronics Supply Chain) में चीन (China) का विकल्प बनने के लिए भारत (India) ने एक और बड़ा कदम उठाया है। देश जल्द ही चिप पैकेजिंग (Chip Packaging) के वैश्विक केंद्र के तौर पर उभरेगा। निर्माताओं को भारत में चिप निर्माण संयंत्र स्थापित करने के लिए आकर्षित करने के प्रयास किए जाएंगे।

    सरकार कंपनियों को यूनिट लगाने पर पूंजीगत व्यय का 35 फीसदी तक वित्तीय सहायता देगी। पारंपरिक पैकेजिंग इकाइयों को यह सहायता 25 फीसदी तक होगी। इससे वैश्विक आपूर्ति शृंखला में भारत की स्थिति मजबूत होगी। सरकार का मानना है कि केवल चिप निर्माण ही नहीं, बल्कि उनकी टेस्टिंग और पैकेजिंग भी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा है।


    नई रणनीति से यूं आएगा बदलाव

    नई रणनीति के तहत विश्व-स्तरीय अग्रणी कंपनियां जैसे इंटेल, लॉकहीड मार्टिन और एप्लाइड मैटेरियल्स ने भारत में निवेश में रुचि दिखाई है। नई पैकेजिंग और टेस्टिंग इकाइयां शुरू होने से इलेक्ट्रॉनिक्स, हार्डवेयर और इंजीनियरिंग क्षेत्र में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के हजारों अवसर पैदा होंगे। ऑटोमोबाइल, स्मार्टफोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और रक्षा उपकरणों में इस्तेमाल होने वाली चिप्स के लिए भारत की आयात पर निर्भरता कम होगी।

    सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में एटीएमपी यानी असेंबली, टेस्टिंग, पैकेजिंग यूनिट व ओएसएटी यानी आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर, असेंबली टेस्ट इकाइयों को स्वीकृति मिल गई है। सेमिकॉन 2.0 के तहत कम्प्यूटिंग, मेमोरी, पावर, नेटवर्किंग व सेंसर जैसे निर्माण खंडों की पहचान की गई है। देश की पहली फैब यूनिट 2028 में शुरू होने की उम्मीद है। पहली कंपाउंड सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन यूनिट और पहली थ्री डी ग्लास सब्सट्रेट पैकेजिंग सुविधा स्थापित की जा रही है। अगली पीढ़ी की पैकेजिंग तकनीक आकर्षित करने के लिए सब्सिडी की व्यवस्था की गई है, ताकि दिग्गज सेमीकंडक्टर कंपनियां भारत में निवेश के लिए आकर्षित हों।

  • E20 लक्ष्य के बाद इथेनॉल मिशन का नया चरण, किचन फ्यूल, एथेनॉल एटीएम, एविएशन और निर्यात के जरिए बढ़ेगा उपयोग का दायरा

    E20 लक्ष्य के बाद इथेनॉल मिशन का नया चरण, किचन फ्यूल, एथेनॉल एटीएम, एविएशन और निर्यात के जरिए बढ़ेगा उपयोग का दायरा

    नई दिल्ली । पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण यानी E20 लक्ष्य हासिल करने के बाद भारत सरकार अब इथेनॉल के उपयोग को नई दिशा देने की तैयारी में है। सरकार का फोकस अब केवल वाहन ईंधन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इथेनॉल को घरेलू रसोई ईंधन, एथेनॉल एटीएम, विमानन क्षेत्र के टिकाऊ ईंधन और निर्यात जैसे नए क्षेत्रों में भी बढ़ावा देने की योजना बनाई जा रही है। इसका उद्देश्य देश में तेजी से बढ़ रही इथेनॉल उत्पादन क्षमता का अधिकतम उपयोग करना, ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना और किसानों के लिए नए बाजार तैयार करना है।

    पिछले कुछ वर्षों में भारत के इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण का स्तर लगभग 1.5 प्रतिशत से बढ़कर 20 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। इससे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम हुई है, विदेशी मुद्रा की बचत हुई है और गन्ना तथा अनाज उत्पादक किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिला है। इस नीति के चलते देशभर में चीनी मिलों और अनाज आधारित डिस्टिलरी परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर निवेश भी हुआ है।

    हालांकि इस सफलता के साथ एक नई चुनौती भी सामने आई है। देश की इथेनॉल उत्पादन क्षमता लगातार बढ़ रही है और आने वाले समय में इसके लगभग 24 अरब लीटर वार्षिक स्तर तक पहुंचने का अनुमान है। इसके मुकाबले E20 कार्यक्रम के लिए सालाना लगभग 11 अरब लीटर इथेनॉल की आवश्यकता है। वहीं पेय पदार्थ, दवा और रासायनिक उद्योगों की संयुक्त मांग भी कुल उत्पादन क्षमता से काफी कम है। ऐसे में बड़ी मात्रा में उपलब्ध अतिरिक्त क्षमता के बेहतर उपयोग के लिए सरकार नए विकल्पों पर तेजी से काम कर रही है।

    इसी दिशा में इथेनॉल को घरेलू कुकिंग फ्यूल के रूप में विकसित करने की संभावनाओं का आकलन किया जा रहा है। प्रस्तावित एथेनॉल एटीएम मॉडल के तहत उपभोक्ता विशेष कंटेनर में इथेनॉल भरवा सकेंगे और उसे विशेष रूप से तैयार किए गए स्टोव में इस्तेमाल कर सकेंगे। यदि यह मॉडल सफल होता है तो रसोई गैस पर निर्भरता कम करने के साथ-साथ ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों को भी बढ़ावा मिलेगा। सरकार का मानना है कि घरेलू स्तर पर उत्पादित इथेनॉल ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि क्षेत्र को भी अतिरिक्त मजबूती प्रदान कर सकता है।

    सरकार की योजना केवल घरेलू उपयोग तक सीमित नहीं है। भारत इथेनॉल के निर्यात की संभावनाओं पर भी सक्रियता से काम कर रहा है। ऐसे देशों की पहचान की जा रही है जहां इथेनॉल मिश्रण के लक्ष्य तो निर्धारित हैं, लेकिन उत्पादन क्षमता सीमित है। इससे भारतीय उत्पादकों को नए अंतरराष्ट्रीय बाजार मिल सकते हैं और अतिरिक्त उत्पादन का बेहतर उपयोग संभव होगा।

    विमानन क्षेत्र भी सरकार की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सतत विमानन ईंधन यानी सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल के उपयोग को बढ़ाने के लिए चरणबद्ध लक्ष्य तय किए गए हैं। इस दिशा में इथेनॉल आधारित तकनीक से जेट ईंधन तैयार करने की परियोजनाओं पर काम चल रहा है। यदि ये परियोजनाएं सफल रहती हैं तो देश में स्वच्छ विमानन ईंधन के उत्पादन को नई गति मिलेगी और कार्बन उत्सर्जन कम करने के राष्ट्रीय लक्ष्य को भी समर्थन मिलेगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इथेनॉल के उपयोग का दायरा बढ़ने से केवल ऊर्जा क्षेत्र ही नहीं, बल्कि कृषि, उद्योग और निर्यात को भी दीर्घकालिक लाभ मिलेगा। सरकार की नई रणनीति का उद्देश्य अतिरिक्त उत्पादन क्षमता को आर्थिक अवसर में बदलना और भारत को वैश्विक बायोफ्यूल क्षेत्र में मजबूत स्थिति दिलाना है।

  • टाटा स्टील समेत चुनिंदा शेयरों पर विशेषज्ञों की नजर, निवेशकों को खरीद स्तर और लक्ष्य पर मिली अहम सलाह

    टाटा स्टील समेत चुनिंदा शेयरों पर विशेषज्ञों की नजर, निवेशकों को खरीद स्तर और लक्ष्य पर मिली अहम सलाह

    नई दिल्ली । पहली तिमाही के कारोबारी माहौल और बदलते वैश्विक संकेतों के बीच शेयर बाजार में निवेशकों की नजर प्रमुख कंपनियों के प्रदर्शन और भविष्य की संभावनाओं पर बनी हुई है। इसी क्रम में बाजार विशेषज्ञों ने कई चर्चित शेयरों पर अपनी रणनीति साझा की है। उनके अनुसार, मेटल, बैंकिंग, ज्वेलरी और उपभोक्ता क्षेत्र के कुछ शेयर आने वाले समय में निवेशकों के लिए अवसर प्रदान कर सकते हैं, हालांकि निवेश से पहले जोखिम प्रबंधन और उचित स्तरों का ध्यान रखना आवश्यक होगा।

    विशेषज्ञों के अनुसार मेटल सेक्टर फिलहाल सकारात्मक संकेत दे रहा है। वैश्विक बाजार में धातुओं की कीमतों में सुधार और मांग में संभावित मजबूती का लाभ भारतीय कंपनियों को मिल सकता है। इसी वजह से टाटा स्टील को इस समय प्रमुख पसंद के रूप में देखा जा रहा है। उनका मानना है कि लगभग 183 रुपये के आसपास यह शेयर निवेश के लिए उपयुक्त स्तर पर माना जा सकता है। यदि किसी कारणवश इसमें और गिरावट आती है तथा यह 170 से 172 रुपये के दायरे में पहुंचता है, तो इसे चरणबद्ध तरीके से पोर्टफोलियो में जोड़ने का अवसर माना जा सकता है।

    विश्लेषकों का कहना है कि अल्पावधि में टाटा स्टील के लिए 215 से 220 रुपये का लक्ष्य संभावित माना जा रहा है। वहीं, यदि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं और मेटल सेक्टर में मजबूती जारी रहती है, तो दीर्घावधि में यह शेयर 270 रुपये तक पहुंचने की क्षमता रख सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि शेयर 170 रुपये के नीचे साप्ताहिक आधार पर बंद होता है, तो निवेशकों को अपनी रणनीति की समीक्षा करनी चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर जोखिम सीमित करने के लिए स्टॉप लॉस का पालन करना चाहिए।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेश केवल संभावित रिटर्न को देखकर नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि जोखिम और पूंजी संरक्षण को भी समान महत्व देना चाहिए। किसी भी शेयर में एकमुश्त निवेश करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से निवेश करना अधिक संतुलित रणनीति मानी जाती है। इससे बाजार में उतार-चढ़ाव का प्रभाव अपेक्षाकृत कम हो सकता है और औसत खरीद मूल्य भी बेहतर बन सकता है।

    विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि पहली तिमाही के वित्तीय नतीजे आने के साथ विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग प्रदर्शन देखने को मिल सकता है। ऐसे में निवेशकों को केवल शेयर की कीमत पर नहीं बल्कि कंपनी की आय, लाभप्रदता, कर्ज की स्थिति, भविष्य की विकास योजनाओं और उद्योग की संभावनाओं का भी मूल्यांकन करना चाहिए। मजबूत बुनियादी स्थिति वाली कंपनियां लंबी अवधि में बेहतर प्रदर्शन करने की संभावना रखती हैं।

    बाजार में फिलहाल वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम, कमोडिटी कीमतों, ब्याज दरों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों का भी असर दिखाई दे रहा है। ऐसे माहौल में निवेशकों को भावनात्मक निर्णय लेने से बचना चाहिए और दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत कंपनियों में अनुशासित निवेश और तय जोखिम सीमा के साथ बनाई गई रणनीति ही अस्थिर बाजार में बेहतर परिणाम देने की संभावना रखती है। उन्होंने सलाह दी कि किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय लक्ष्यों और जोखिम क्षमता का आकलन अवश्य करें तथा आवश्यकता होने पर वित्तीय सलाहकार की राय भी लें।

  • सोना फिर हुआ महंगा, 24 कैरेट 1.46 लाख रुपये के पार; खरीदारी से पहले जानें 22K, 18K और चांदी के ताजा भाव

    सोना फिर हुआ महंगा, 24 कैरेट 1.46 लाख रुपये के पार; खरीदारी से पहले जानें 22K, 18K और चांदी के ताजा भाव

    नई दिल्ली । घरेलू सर्राफा बाजार में मंगलवार को सोने की कीमतों में मजबूती देखने को मिली, जबकि चांदी के दाम स्थिर बने रहे। ताजा कारोबार में 24 कैरेट सोना प्रति 10 ग्राम 480 रुपये की बढ़त के साथ 1,46,135 रुपये पर पहुंच गया। वहीं 22 कैरेट सोने का भाव लगभग 440 रुपये बढ़कर 1,33,960 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। दूसरी ओर चांदी की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ और यह 2,36,900 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती रही। लगातार बदलते भावों के बीच ज्वेलरी खरीदने और निवेश की योजना बना रहे लोगों के लिए बाजार की चाल पर नजर रखना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    देश के प्रमुख शहरों में सोने के दाम लगभग समान स्तर पर बने रहे। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, लखनऊ, जयपुर, गुरुग्राम, चंडीगढ़, पुणे और नागपुर सहित अधिकांश शहरों में 24 कैरेट सोना 1,46,135 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता रहा। कुछ शहरों जैसे इंदौर, अहमदाबाद, सूरत और वडोदरा में यह मामूली अंतर के साथ 1,46,035 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। 22 कैरेट सोने की कीमत अधिकांश शहरों में 1,33,960 रुपये प्रति 10 ग्राम रही। वहीं 18 कैरेट सोने के दाम भी अंतरराष्ट्रीय रुझानों के अनुरूप बढ़त के साथ कारोबार करते रहे, हालांकि इनमें स्थानीय बाजार और ज्वेलर्स के अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

    चांदी के बाजार में आज स्थिरता देखने को मिली। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, जयपुर, लखनऊ, अहमदाबाद, पुणे, बेंगलुरु और अन्य प्रमुख शहरों में चांदी का भाव 2,36,900 रुपये प्रति किलोग्राम पर बना रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि औद्योगिक मांग और वैश्विक कमोडिटी बाजार की स्थिति के आधार पर आने वाले दिनों में चांदी की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

    बाजार विश्लेषकों के अनुसार सोने और चांदी की कीमतों पर कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारकों का प्रभाव पड़ता है। वैश्विक बाजार में कीमती धातुओं की मांग, अमेरिकी डॉलर की मजबूती या कमजोरी, प्रमुख केंद्रीय बैंकों की ब्याज दरों से जुड़ी नीतियां, अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक परिस्थितियां और रुपये की विनिमय दर जैसे कारक कीमतों को प्रभावित करते हैं। इसके अलावा त्योहारी सीजन, शादी-ब्याह की मांग और निवेशकों की खरीदारी भी घरेलू बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि केवल प्रति ग्राम या प्रति 10 ग्राम कीमत देखकर आभूषण खरीदने का निर्णय नहीं लेना चाहिए। खरीदारी के समय मेकिंग चार्ज, वस्तु एवं सेवा कर (GST), हॉलमार्क प्रमाणन और शुद्धता की जांच करना भी उतना ही आवश्यक है। निवेश के उद्देश्य से सोना खरीदने वाले लोगों को अलग-अलग विक्रेताओं के दामों की तुलना करने और बाजार की मौजूदा स्थिति का आकलन करने के बाद ही निर्णय लेना चाहिए।

    बाजार जानकारों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और निवेशकों की धारणा में बदलाव के कारण आने वाले समय में सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। ऐसे में निवेशकों और उपभोक्ताओं के लिए यह जरूरी होगा कि वे नियमित रूप से बाजार के रुझानों पर नजर रखें और अपनी आवश्यकता तथा वित्तीय योजना के अनुसार ही खरीदारी का निर्णय लें।

  • डिजिटल भुगतान में आने वाली बड़ी क्रांति, बिना इंटरनेट के UPI पेमेंट की तैयारी, खराब नेटवर्क वाले क्षेत्रों में भी मिलेगा निर्बाध भुगतान

    डिजिटल भुगतान में आने वाली बड़ी क्रांति, बिना इंटरनेट के UPI पेमेंट की तैयारी, खराब नेटवर्क वाले क्षेत्रों में भी मिलेगा निर्बाध भुगतान

    नई दिल्ली । भारत की डिजिटल भुगतान व्यवस्था को और अधिक सुलभ एवं विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ऐसी नई तकनीक विकसित कर रहा है, जिसकी मदद से इंटरनेट उपलब्ध न होने पर भी UPI के माध्यम से भुगतान किया जा सकेगा। यह सुविधा विशेष रूप से उन परिस्थितियों में उपयोगी होगी, जहां नेटवर्क की समस्या के कारण डिजिटल लेनदेन प्रभावित होता है। प्रस्तावित तकनीक के लागू होने के बाद फ्लाइट, अंडरग्राउंड मेट्रो, दूरदराज के क्षेत्रों और कमजोर नेटवर्क वाले स्थानों पर भी UPI भुगतान करना पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान हो जाएगा।

    नई व्यवस्था नियर फील्ड कम्युनिकेशन (NFC) तकनीक पर आधारित होगी। इस प्रणाली में उपयोगकर्ता को QR कोड स्कैन करने की आवश्यकता नहीं होगी। यदि स्मार्टफोन में NFC की सुविधा उपलब्ध है, तो केवल उसे भुगतान मशीन के पास टैप करने से लेनदेन पूरा किया जा सकेगा। इस प्रक्रिया के दौरान न तो ग्राहक के मोबाइल में सक्रिय इंटरनेट कनेक्शन आवश्यक होगा और न ही व्यापारी के भुगतान टर्मिनल को इंटरनेट से जुड़े रहने की जरूरत होगी। इससे भुगतान प्रक्रिया अधिक तेज, सरल और सुविधाजनक बनने की उम्मीद है।

    इस सुविधा के शुरुआती चरण में एक बार में अधिकतम 2,000 रुपये तक का भुगतान किया जा सकेगा। इसके लिए उपयोगकर्ताओं को इंटरनेट उपलब्ध होने के दौरान पहले अपने UPI Lite वॉलेट में राशि जोड़नी होगी। बाद में उसी बैलेंस का उपयोग ऑफलाइन भुगतान के लिए किया जा सकेगा। सीमित राशि वाले इन लेनदेन में बार-बार UPI पिन दर्ज करने की आवश्यकता भी कम हो सकती है, जिससे छोटी खरीदारी पहले से अधिक तेज गति से पूरी की जा सकेगी।

    इस नई तकनीक का सबसे बड़ा लाभ उन स्थानों पर मिलेगा, जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी अस्थायी रूप से उपलब्ध नहीं होती। हवाई यात्रा के दौरान विमान में इंटरनेट की सीमित उपलब्धता या अंडरग्राउंड मेट्रो में नेटवर्क बाधित होने जैसी परिस्थितियों में भी यात्री आसानी से डिजिटल भुगतान कर सकेंगे। इसी तरह ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में, जहां मोबाइल नेटवर्क अक्सर कमजोर रहता है, वहां भी यह सुविधा डिजिटल भुगतान को अधिक भरोसेमंद बना सकती है।

    हालांकि इस तकनीक का लाभ उठाने के लिए केवल ग्राहकों के स्मार्टफोन में NFC सुविधा होना पर्याप्त नहीं होगा। व्यापारियों के पॉइंट ऑफ सेल (POS) टर्मिनलों को भी नए मानकों के अनुसार प्रमाणित किया जाएगा। इसके बाद बैंक और विभिन्न UPI एप्लीकेशन अपने प्लेटफॉर्म पर इस सुविधा को चरणबद्ध तरीके से उपलब्ध कराएंगे। इससे पूरे डिजिटल भुगतान नेटवर्क को नए तकनीकी मानकों के अनुरूप तैयार किया जाएगा।

    फिलहाल यह सुविधा विकास और परीक्षण के चरण में है तथा आम उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध नहीं कराई गई है। इसकी आधिकारिक लॉन्च तिथि की भी अभी घोषणा नहीं हुई है। हालांकि तकनीक पर तेजी से काम जारी है और इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने की तैयारी की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सुविधा शुरू होने के बाद भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली और अधिक मजबूत होगी तथा नेटवर्क संबंधी समस्याओं के कारण होने वाले भुगतान विफल होने की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आ सकती है। इससे डिजिटल लेनदेन का दायरा और बढ़ेगा तथा उपयोगकर्ताओं को हर परिस्थिति में सुरक्षित और सहज भुगतान का नया विकल्प मिलेगा।

  • वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव का भारतीय बाजार पर असर, सेंसेक्स 443 अंक टूटा, निफ्टी भी गिरावट के साथ बंद, बैंकिंग शेयर रहे सबसे कमजोर

    वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव का भारतीय बाजार पर असर, सेंसेक्स 443 अंक टूटा, निफ्टी भी गिरावट के साथ बंद, बैंकिंग शेयर रहे सबसे कमजोर


    नई दिल्ली ।
    वैश्विक स्तर पर मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला। कारोबारी सत्र के दौरान निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया, जिसके चलते प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। दिन के अंत में बीएसई सेंसेक्स 442.93 अंक यानी 0.57 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 77,708.52 अंक पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 95.80 अंक यानी 0.39 प्रतिशत फिसलकर 24,238.50 अंक पर आ गया। इसके साथ ही सेंसेक्स एक बार फिर 78 हजार के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे बंद हुआ।

    बाजार में सबसे अधिक दबाव वित्तीय और निजी बैंकिंग शेयरों पर रहा। निफ्टी प्राइवेट बैंक सूचकांक में 2.27 प्रतिशत और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में 1.22 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा ऑटो, सूचना प्रौद्योगिकी, रियल्टी और सर्विसेज क्षेत्र के अधिकांश शेयर भी कमजोर रहे। निवेशकों ने वैश्विक अनिश्चितता के बीच इन क्षेत्रों में मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी, जिससे बाजार की चाल प्रभावित हुई।

    हालांकि व्यापक बाजार में तस्वीर पूरी तरह नकारात्मक नहीं रही। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, फार्मा, हेल्थकेयर, ऊर्जा, धातु, मीडिया, कमोडिटी, इंफ्रास्ट्रक्चर और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स से जुड़े शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। इन क्षेत्रों में निवेशकों की रुचि बनी रहने से गिरावट का दायरा कुछ हद तक सीमित रहा और बाजार को आंशिक सहारा मिला।

    सेंसेक्स की प्रमुख कंपनियों में ट्रेंट, पावर ग्रिड, एनटीपीसी, भारती एयरटेल, भारतीय स्टेट बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट, आईसीआईसीआई बैंक, एचसीएल टेक, सन फार्मा, आईटीसी, एलएंडटी, बजाज फाइनेंस, टेक महिंद्रा, अदाणी पोर्ट्स, टाइटन, टाटा स्टील, एशियन पेंट्स और बजाज फिनसर्व के शेयरों में बढ़त दर्ज की गई। दूसरी ओर एक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक, मारुति सुजुकी, कोटक महिंद्रा बैंक, इन्फोसिस, टीसीएस, महिंद्रा एंड महिंद्रा, इंडिगो, बीईएल और हिंदुस्तान यूनिलीवर जैसे शेयर गिरावट के साथ बंद हुए।

    लार्जकैप शेयरों की तुलना में मिडकैप और स्मॉलकैप वर्ग ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी मिडकैप 100 सूचकांक 373.70 अंकों की बढ़त के साथ 62,801.75 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 सूचकांक भी 30.15 अंकों की मजबूती के साथ 19,326.45 के स्तर पर पहुंच गया। इससे संकेत मिलता है कि चुनिंदा क्षेत्रों और मध्यम आकार की कंपनियों में निवेशकों की खरीदारी जारी रही।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव निवेशकों की चिंता का प्रमुख कारण बना हुआ है। इस तनाव का असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें लगातार 85 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं। ऊंचे कच्चे तेल के दाम आयात लागत, महंगाई और कॉर्पोरेट मुनाफे पर दबाव बढ़ा सकते हैं, जिससे निवेशकों का रुझान फिलहाल सतर्क बना हुआ है।

    विश्लेषकों का कहना है कि निकट अवधि में निफ्टी के लिए 24,370 से 24,400 अंक का स्तर महत्वपूर्ण प्रतिरोध माना जा रहा है। यदि सूचकांक इस दायरे के ऊपर टिकता है तो आगे तेजी की संभावना बन सकती है। वहीं नीचे की ओर 24,130 से 24,100 अंक का क्षेत्र प्रमुख समर्थन के रूप में देखा जा रहा है। फिलहाल वैश्विक घटनाक्रम और कच्चे तेल की चाल आने वाले कारोबारी सत्रों में भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

  • डेंगू से बचाव की दिशा में भारत की बड़ी उपलब्धि, DCGI ने QDENGA वैक्सीन को दी स्वीकृति, दो डोज से मिलेगी सुरक्षा

    डेंगू से बचाव की दिशा में भारत की बड़ी उपलब्धि, DCGI ने QDENGA वैक्सीन को दी स्वीकृति, दो डोज से मिलेगी सुरक्षा


    नई दिल्ली । 
    भारत में डेंगू की रोकथाम की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। भारतीय औषधि महानियंत्रक (DCGI) ने जापानी दवा कंपनी टाकेडा द्वारा विकसित डेंगू वैक्सीन QDENGA को देश में उपयोग की मंजूरी दे दी है। यह भारत की पहली स्वीकृत डेंगू वैक्सीन है, जिसे 4 से 60 वर्ष की आयु के लोगों के लिए अनुमोदित किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम देश में डेंगू संक्रमण की रोकथाम और गंभीर मामलों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    हर वर्ष मानसून के दौरान देश के विभिन्न राज्यों में डेंगू के मामलों में तेज वृद्धि देखने को मिलती है। हजारों लोग इस मच्छरजनित बीमारी से प्रभावित होते हैं, जबकि गंभीर संक्रमण के कारण कई मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ता है। ऐसे में प्रभावी वैक्सीन की उपलब्धता को सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

    QDENGA की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे लगवाने से पहले यह जांच कराने की आवश्यकता नहीं होगी कि संबंधित व्यक्ति को पहले कभी डेंगू हुआ है या नहीं। यह वैक्सीन उन लोगों को भी दी जा सकती है जिन्हें पहले डेंगू हो चुका है और उन्हें भी जो कभी इस संक्रमण से प्रभावित नहीं हुए। यही विशेषता इसे डेंगू नियंत्रण के लिए अधिक उपयोगी बनाती है।

    स्वीकृत दिशा-निर्देशों के अनुसार यह वैक्सीन 4 से 60 वर्ष तक की आयु के लोगों को दी जाएगी। टीकाकरण के लिए कुल दो डोज निर्धारित की गई हैं, जिनके बीच लगभग तीन महीने का अंतर रखा जाएगा। यह टीका त्वचा के नीचे लगाया जाएगा और दोनों डोज समय पर लेने पर बेहतर प्रतिरक्षा विकसित होने की संभावना बताई गई है।

    भारत उन देशों में शामिल है जहां डेंगू का संक्रमण लंबे समय से सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। पिछले दो दशकों में डेंगू के मामलों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2025 में देशभर में एक लाख से अधिक मामलों की पुष्टि हुई थी, हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है क्योंकि सभी मामलों का आधिकारिक पंजीकरण नहीं हो पाता।

    डेंगू वायरस के चार अलग-अलग सीरोटाइप होते हैं और एक प्रकार से संक्रमित होने के बाद भी व्यक्ति दूसरे प्रकार के वायरस की चपेट में आ सकता है। QDENGA को इस तरह विकसित किया गया है कि यह डेंगू वायरस के सभी प्रमुख प्रकारों के विरुद्ध प्रतिरक्षा विकसित करने में सहायता करे। इसी कारण इसे व्यापक सुरक्षा प्रदान करने वाली वैक्सीन माना जा रहा है।

    कंपनी के अनुसार इस वैक्सीन पर बड़े स्तर पर वैज्ञानिक अध्ययन और क्लीनिकल परीक्षण किए गए हैं। हजारों स्वयंसेवकों पर किए गए परीक्षणों में दूसरी डोज के लगभग एक वर्ष बाद डेंगू संक्रमण से बचाव में इसकी प्रभावशीलता 80 प्रतिशत से अधिक दर्ज की गई। वहीं गंभीर संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती होने के जोखिम को भी उल्लेखनीय रूप से कम करने के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। लंबे समय तक किए गए अध्ययन में भी इसकी प्रभावशीलता बरकरार रहने के संकेत मिले हैं।

    विश्व स्वास्थ्य संगठन पहले ही डेंगू प्रभावित देशों के लिए इस वैक्सीन की उपयोगिता को स्वीकार कर चुका है। इसके अलावा दुनिया के कई देशों में इसका उपयोग शुरू हो चुका है और कुछ देशों ने इसे अपने सार्वजनिक टीकाकरण कार्यक्रम का हिस्सा भी बनाया है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि वैक्सीन डेंगू से बचाव का प्रभावी माध्यम है, लेकिन इसके साथ मच्छरों की रोकथाम और व्यक्तिगत सावधानी भी जरूरी है। घरों और आसपास पानी जमा न होने देना, मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाना तथा डेंगू के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना संक्रमण के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।