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  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से रात 8 बजे मिलेंगे INDIA ब्लॉक के 10 सांसद, SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त पर रखेंगे अपना पक्ष

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से रात 8 बजे मिलेंगे INDIA ब्लॉक के 10 सांसद, SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त पर रखेंगे अपना पक्ष

    नई दिल्ली । मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर जारी विवाद के बीच राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक के प्रतिनिधिमंडल को शुक्रवार, 9 अक्टूबर की रात 8 बजे मुलाकात का समय दिया है। विपक्षी सांसद इस बैठक में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची में संशोधन और मतदाताओं के नाम हटाए जाने से जुड़े मुद्दों पर अपनी चिंताएं राष्ट्रपति के सामने रखेंगे। दिल्ली में पिछले चार दिनों से विपक्षी दलों का प्रदर्शन जारी है।

    मुलाकात के लिए शुरुआत में 15 सांसदों के प्रतिनिधिमंडल का समय मांगा गया था, लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति से मिलने के लिए 10 सांसदों को समय दिया गया है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बताया कि राष्ट्रपति से मुलाकात का पहला अनुरोध 2 अक्टूबर को भेजा गया था। विपक्षी दल चाहते हैं कि SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े सवालों पर राष्ट्रपति को अपनी बात बताई जाए। शुक्रवार रात होने वाली बैठक में प्रतिनिधिमंडल अपनी मांगों और चिंताओं को सामने रखेगा।

    INDIA ब्लॉक के दल SIR प्रक्रिया पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि मतदाता सूची में संशोधन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के नाम हटाए गए हैं, जिससे उनके मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है। विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि चुनाव आयोग को मतदाता सूची में किए गए बदलावों और नाम हटाने की प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट जवाब देना चाहिए। दूसरी ओर, चुनाव आयोग और सत्तारूढ़ भाजपा ने चुनावी प्रक्रिया में पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है।

    विपक्ष का प्रदर्शन 6 अक्टूबर को उस समय तेज हुआ, जब INDIA ब्लॉक के सांसदों ने चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च करने की कोशिश की। पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें आगे बढ़ने से रोका। इस दौरान राहुल गांधी समेत कई विपक्षी सांसदों को हिरासत में लिया गया। अगले दिन, 7 अक्टूबर को भी सांसदों ने विरोध प्रदर्शन जारी रखा और जंतर-मंतर की ओर बढ़ने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे जाने से रोक दिया। इन घटनाओं के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारी सांसदों के बीच तनाव की स्थिति बनी।

    8 अक्टूबर को विपक्षी नेताओं ने राजघाट पर प्रदर्शन किया और महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान भी SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े मुद्दे उठाए गए। प्रदर्शन के साथ-साथ विपक्षी दलों के नेताओं ने अपनी आगे की रणनीति पर भी चर्चा की। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने लगातार दो दिनों तक विपक्षी सांसदों के लिए दिल्ली में दोपहर के भोजन की बैठक आयोजित की। 7 अक्टूबर को सांसद जनपथ स्थित सागर रत्ना रेस्टोरेंट में जुटे, जबकि 8 अक्टूबर को कनॉट प्लेस के मोएट्स रेस्टोरेंट में बैठक हुई। इन बैठकों के बाद सांसद प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे।

    7 अक्टूबर की बैठक में समाजवादी पार्टी के सांसद शामिल नहीं हुए थे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सपा की ओर से समय पर सूचना नहीं मिलने की बात कही गई थी। कांग्रेस ने कहा था कि सभी विपक्षी दलों को आमंत्रित किया गया था, लेकिन कम समय मिलने के कारण कुछ दल अपने प्रतिनिधि नहीं भेज सके। अगले दिन समाजवादी पार्टी के सांसद भी बैठक और प्रदर्शन में शामिल हुए।

    प्रदर्शन के दौरान पुलिस और विपक्षी सांसदों के बीच हुए टकराव से जुड़े मामलों में प्राथमिकी दर्ज किए जाने की भी जानकारी सामने आई है। इनमें राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कुछ नेताओं पर पुलिसकर्मियों के साथ कथित मारपीट और सरकारी कामकाज में बाधा डालने जैसे आरोप लगाए गए हैं। इन मामलों की जांच जारी है। प्राथमिकी दर्ज होना आरोपों के साबित होने का प्रमाण नहीं है। अब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ होने वाली बैठक पर नजरें टिकी हैं। विपक्षी सांसदों की कोशिश होगी कि वे मतदाता सूची, SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त से जुड़े अपने सवाल राष्ट्रपति के समक्ष रखें।

  • शेयर बाजार में गिरावट के बावजूद आईपीओ से रिकॉर्ड फंड जुटाव, भारतीय कंपनियों ने जनवरी-सितंबर में 12.5 अरब डॉलर जुटाए

    शेयर बाजार में गिरावट के बावजूद आईपीओ से रिकॉर्ड फंड जुटाव, भारतीय कंपनियों ने जनवरी-सितंबर में 12.5 अरब डॉलर जुटाए

    नई दिल्ली ।भारतीय कंपनियों ने वर्ष 2026 के पहले नौ महीनों में आरंभिक सार्वजनिक निर्गम यानी आईपीओ के माध्यम से रिकॉर्ड 12.5 अरब डॉलर जुटाए हैं। जनवरी से सितंबर तक जुटाई गई यह राशि 1980 से उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इस अवधि का अब तक का सबसे बड़ा फंड जुटाव है। खास बात यह है कि आईपीओ बाजार में यह मजबूती ऐसे समय देखने को मिली, जब व्यापक शेयर बाजार दबाव में रहा और निफ्टी में करीब 14 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इससे संकेत मिलता है कि शेयर बाजार की कमजोरी के बावजूद कंपनियों के सार्वजनिक निर्गम के जरिए पूंजी जुटाने की गतिविधियां मजबूत बनी रहीं।

    जनवरी-सितंबर 2026 के दौरान कुल 220 आईपीओ बाजार में आए। पिछले वर्ष की समान अवधि में 268 आईपीओ जारी किए गए थे। इस तरह निर्गमों की संख्या में लगभग 17.9 प्रतिशत की कमी आई। इसके बावजूद कंपनियों ने कुल मिलाकर पिछले वर्ष की तुलना में 11.3 प्रतिशत अधिक राशि जुटाई। इसका प्रमुख कारण बड़े आकार के आईपीओ का बाजार में आना रहा। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, औसत आईपीओ का आकार बढ़कर लगभग 5.7 करोड़ डॉलर हो गया, जबकि एक वर्ष पहले यह करीब 4.2 करोड़ डॉलर था। कुल जुटाई गई राशि का लगभग 35 प्रतिशत हिस्सा कुछ चुनिंदा बड़े निर्गमों से आया।

    सितंबर का महीना आईपीओ बाजार के लिए विशेष रूप से मजबूत रहा। इस महीने 34 मेनबोर्ड आईपीओ के जरिए लगभग 39,380 करोड़ रुपये जुटाए गए। यह 2026 में किसी एक महीने के दौरान जुटाई गई सबसे बड़ी राशि रही। हालांकि, इस रकम का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा ऑफर फॉर सेल यानी ओएफएस के माध्यम से आया। ओएफएस में मौजूदा शेयरधारक अपने शेयर बेचते हैं, इसलिए इससे प्राप्त धन का बड़ा हिस्सा सीधे कंपनियों के खाते में जाने के बजाय शेयर बेचने वाले निवेशकों को मिलता है। इस वजह से कुल आईपीओ राशि और कंपनियों को वास्तव में मिलने वाली नई पूंजी के बीच अंतर बना रहा।

    आईपीओ बाजार की मजबूती के विपरीत, व्यापक इक्विटी पूंजी बाजार में कुल फंड जुटाव कमजोर हुआ। फॉलो-ऑन ऑफरिंग्स और ब्लॉक डील्स सहित कुल इक्विटी कैपिटल मार्केट फंड जुटाव 1.7 प्रतिशत घटकर 40.8 अरब डॉलर रह गया। यह पिछले तीन वर्षों का सबसे निचला स्तर बताया गया है। इस दौरान विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी एफपीआई ने जनवरी से सितंबर के बीच भारतीय शेयर बाजार से अनुमानित 2.7 लाख करोड़ से 3 लाख करोड़ रुपये की निकासी की। इसके बावजूद घरेलू बाजार में उपलब्ध तरलता ने आईपीओ गतिविधियों को समर्थन दिया।

    लिस्टिंग के बाद निवेशकों को मिलने वाले लाभ में हालांकि कमी के संकेत सामने आए। सितंबर में आईपीओ का औसत लिस्टिंग प्रीमियम 15.1 प्रतिशत रहा, जबकि अगस्त में यह 24.4 प्रतिशत था। इसी तरह मीडियन लिस्टिंग लाभ अगस्त के 21.3 प्रतिशत से घटकर सितंबर में 5.9 प्रतिशत रह गया। इन आंकड़ों से पता चलता है कि आईपीओ से पूंजी जुटाने की गतिविधि मजबूत रहने के बावजूद शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने के बाद मिलने वाला शुरुआती लाभ कम हुआ है। इससे नए निर्गमों में निवेश करने वाले लोगों के लिए लिस्टिंग प्रदर्शन पर ध्यान देना महत्वपूर्ण हो गया है।

    निवेश बैंकिंग उद्योग के आंकड़ों में भी मिली-जुली तस्वीर सामने आई। इक्विटी अंडरराइटिंग से मिलने वाली फीस नौ प्रतिशत घटकर 415.6 मिलियन डॉलर रह गई। इसके विपरीत, विलय और अधिग्रहण यानी एमएंडए से जुड़ी मजबूत गतिविधियों के कारण कुल निवेश बैंकिंग फीस दो प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 1.1 अरब डॉलर तक पहुंच गई। आगे आईपीओ बाजार की दिशा इस बात पर भी निर्भर करेगी कि निवेशकों की भागीदारी और लिस्टिंग से मिलने वाला लाभ किस स्तर पर बना रहता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 130 से अधिक कंपनियों के पास भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी सेबी से आईपीओ लाने की मंजूरी है। ऐसे में आने वाले महीनों में नए निर्गमों की गतिविधियों पर बाजार की नजर रहेगी।

  • भारत की अर्थव्यवस्था अगले दशक में दोगुनी होकर 8 ट्रिलियन डॉलर पार कर सकती है, सुधारों और निवेश से बढ़ेगी विकास क्षमता

    भारत की अर्थव्यवस्था अगले दशक में दोगुनी होकर 8 ट्रिलियन डॉलर पार कर सकती है, सुधारों और निवेश से बढ़ेगी विकास क्षमता

    नई दिल्ली । भारत की अर्थव्यवस्था अगले एक दशक में दोगुनी होकर 8 ट्रिलियन डॉलर से अधिक हो सकती है। एक रिपोर्ट के अनुसार, देश में किए गए संरचनात्मक सुधारों, बुनियादी ढांचे में लगातार निवेश और अर्थव्यवस्था के औपचारिककरण ने विकास की क्षमता को मजबूत किया है। इन बदलावों से वैश्विक निवेशकों के लिए भारत में बड़े अवसर पैदा हो रहे हैं।

    रिपोर्ट के मुताबिक, भारत पहले ही 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का आंकड़ा पार कर चुका है। मौजूदा आर्थिक गति को देखते हुए देश अगले 10 वर्षों में अपनी अर्थव्यवस्था का आकार एक बार फिर दोगुना करने की दिशा में आगे बढ़ सकता है। रिपोर्ट में लंबे समय तक लागू किए गए आर्थिक सुधारों के प्रभाव को भारत की विकास क्षमता के लिए महत्वपूर्ण बताया गया है।

    रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है, जहां लगातार लागू किए गए संरचनात्मक सुधारों का असर व्यापक स्तर पर दिखाई दे रहा है। वर्ष 2014 के बाद कई प्रमुख आर्थिक सुधार लागू किए गए, जिनमें वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी, दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता यानी आईबीसी, श्रम बाजार का औपचारिककरण, डिजिटलीकरण और बुनियादी ढांचे के विकास में बड़े निवेश शामिल हैं। इन सुधारों ने अर्थव्यवस्था की विकास क्षमता को बढ़ाने में भूमिका निभाई है।

    रिपोर्ट के अनुसार, इन बदलावों के आधार पर भारत लगभग 11 प्रतिशत नॉमिनल जीडीपी वृद्धि के मार्ग पर बना रह सकता है। साथ ही, पहले से लागू किए गए कई सुधारों का पूरा लाभ अभी अर्थव्यवस्था को मिलना बाकी है। इस वजह से भारत की आर्थिक विकास की संभावनाओं को अंतिम चरण में नहीं माना गया है और आने वाले समय में भी उल्लेखनीय अवसर बने रहने की बात कही गई है।

    औपचारिक अर्थव्यवस्था के विस्तार को भी रिपोर्ट में महत्वपूर्ण बताया गया है। इसके अनुसार, औपचारिक अर्थव्यवस्था के बढ़ने से भारतीय कारोबारों और नकदी प्रवाह से जुड़े जोखिम प्रीमियम में कमी आई है। इससे लंबी अवधि के निवेश और आर्थिक विकास के लिए अधिक अनुकूल माहौल तैयार हुआ है। बुनियादी ढांचे में लगातार निवेश को भी विकास क्षमता मजबूत करने वाले प्रमुख कारकों में शामिल किया गया है।

    प्रौद्योगिकी क्षेत्र को लेकर रिपोर्ट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई को भारतीय आईटी सेवा उद्योग के लिए संभावित अवसर के रूप में देखा गया है। रिपोर्ट के अनुसार, एआई भारतीय आईटी कंपनियों के लिए केवल चुनौती नहीं है, बल्कि वे अपनी सेवाओं में इसका अधिक इस्तेमाल कर सकती हैं। इससे कंपनियों की उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ सकती है।

    रिपोर्ट में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स यानी जीसीसी को भी भारत की आर्थिक वृद्धि के नए इंजन के रूप में उभरता क्षेत्र बताया गया है। पारंपरिक आईटी सेवाओं के साथ जीसीसी क्षेत्र का विस्तार हो रहा है और बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारत में अपने वैश्विक संचालन केंद्र स्थापित कर रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, सेवा क्षेत्र पहले से भारत की रियल जीडीपी वृद्धि में आधे से अधिक योगदान दे रहा है और आने वाले वर्षों में इसकी भूमिका और मजबूत हो सकती है।

  • नोबेल साहित्य पुरस्कार 2026: रविंद्रनाथ टैगोर के बाद अमिताव घोष के नाम की चर्चा, आज होगा विजेता का ऐलान

    नोबेल साहित्य पुरस्कार 2026: रविंद्रनाथ टैगोर के बाद अमिताव घोष के नाम की चर्चा, आज होगा विजेता का ऐलान


    नई दिल्ली ।नोबेल पुरस्कार 2026 के तहत मेडिसिन, केमिस्ट्री और फिजिक्स के पुरस्कारों की घोषणा हो चुकी है। अब गुरुवार को साहित्य के नोबेल पुरस्कार का ऐलान किया जाएगा। पुरस्कार की घोषणा से पहले संभावित विजेताओं को लेकर चर्चा तेज है। इस बीच भारतीय लेखक अमिताव घोष का नाम भी संभावित विजेताओं में शामिल बताया जा रहा है। यदि उन्हें साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिलता है, तो वह यह सम्मान पाने वाले दूसरे भारतीय होंगे।

    साहित्य के क्षेत्र में भारत की ओर से अब तक केवल रविंद्रनाथ टैगोर को नोबेल पुरस्कार मिला है। टैगोर को 1913 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार दिया गया था। वह नोबेल पुरस्कार पाने वाले पहले एशियाई भी थे। ऐसे में अमिताव घोष के नाम की चर्चा ने भारतीय साहित्य के संदर्भ में इस पुरस्कार को लेकर उत्सुकता बढ़ा दी है। हालांकि, अभी साहित्य के नोबेल पुरस्कार के विजेता के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

    अमिताव घोष की साहित्यिक रचनाओं में इतिहास, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन जैसे विषय प्रमुख रूप से दिखाई देते हैं। उनकी चर्चित किताबों में ‘सी ऑफ पॉपीज’ और ‘द ग्रेट डिरेंजमेंट’ शामिल हैं। ‘सी ऑफ पॉपीज’ वर्ष 2008 में इंटरनेशनल बुकर पुरस्कार की शॉर्टलिस्ट में शामिल हुई थी। यह किताब उनकी आइबिस ट्रिलॉजी का पहला भाग है।

    ‘द ग्रेट डिरेंजमेंट’ में जलवायु परिवर्तन और इंसानों पर उसके प्रभाव से जुड़े विषयों को प्रमुखता से उठाया गया है। अमिताव घोष की किताबों में इतिहास और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों के साथ बदलती दुनिया से संबंधित विषय भी दिखाई देते हैं। इसी साहित्यिक काम के कारण इस बार साहित्य के नोबेल पुरस्कार के संभावित नामों में उनका उल्लेख किया जा रहा है।

    2026 के नोबेल पुरस्कारों की घोषणा कई चरणों में की जा रही है। साहित्य के पुरस्कार की घोषणा गुरुवार को होने वाली है। इससे पहले संभावित विजेता के तौर पर कई नामों को लेकर अनुमान लगाए जा रहे हैं। बुकमेकरों की ओर से लगाए गए अनुमानों में अमिताव घोष का नाम भी शामिल है। हालांकि, विजेता का वास्तविक फैसला पुरस्कार की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा।

    यदि अमिताव घोष को साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिलता है, तो 1913 में रविंद्रनाथ टैगोर के बाद साहित्य के क्षेत्र में यह भारत के लिए दूसरा नोबेल सम्मान होगा। टैगोर को यह पुरस्कार मिलने के बाद लंबे समय से किसी अन्य भारतीय लेखक को साहित्य का नोबेल नहीं मिला है। इसी वजह से घोष के नाम की चर्चा को खास महत्व मिल रहा है।

    नोबेल पुरस्कार से जुड़े विजेताओं को दिसंबर में स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में सम्मानित किया जाएगा। पुरस्कार प्राप्त करने वालों को मेडल, डिप्लोमा और इनामी राशि प्रदान की जाएगी। इस पुरस्कार की राशि 1.2 करोड़ स्वीडिश क्रोनर बताई गई है, जो भारतीय मुद्रा में करीब 11.5 करोड़ रुपये के बराबर है। साहित्य के नोबेल पुरस्कार के विजेता की घोषणा होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस बार यह सम्मान किस लेखक को दिया जाता है।

  • वर्ल्ड चैंपियनशिप ऑफ लीजेंड्स 2026 में छह टीमें आमने-सामने, भारत समेत सभी स्क्वॉड और पूरा शेड्यूल यहां जानिए हेडलाइन 2:

    वर्ल्ड चैंपियनशिप ऑफ लीजेंड्स 2026 में छह टीमें आमने-सामने, भारत समेत सभी स्क्वॉड और पूरा शेड्यूल यहां जानिए हेडलाइन 2:

    नई दिल्ली ।वर्ल्ड चैंपियनशिप ऑफ लीजेंड्स 2026 में इस बार छह टीमें हिस्सा ले रही हैं। पाकिस्तान के टूर्नामेंट से हटने के बाद अब भारत, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, दक्षिण अफ्रीका, वेस्टइंडीज और बांग्लादेश की टीमें खेल रही हैं। टूर्नामेंट शारजाह क्रिकेट स्टेडियम में आयोजित हो रहा है। भारत की टीम में युवराज सिंह, हरभजन सिंह, यूसुफ पठान, इरफान पठान, अंबाती रायुडू और रॉबिन उथप्पा जैसे खिलाड़ी शामिल हैं।

    भारत चैंपियंस के स्क्वॉड में अंबाती रायुडू, युवराज सिंह, यूसुफ पठान, स्टुअर्ट बिन्नी, इरफान पठान, पवन नेगी, ऋषि धवन, रॉबिन उथप्पा, मोहित शर्मा, धवल कुलकर्णी, वरुण एरॉन, हरभजन सिंह, पीयूष चावला और अभिमन्यु मिथुन हैं। भारत ने टूर्नामेंट की शुरुआत ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 46 रन की जीत से की, जबकि इंग्लैंड से उसे 21 रन से हार मिली।

    ऑस्ट्रेलिया चैंपियंस में क्रिस लिन, डेविड वॉर्नर, उस्मान ख्वाजा, डी’आर्सी शॉर्ट, रॉब क्विनी, नाथन रियरडन, बेन डंक, केन रिचर्डसन, बेन हिल्फेनहॉस, जेम्स पैटिनसन, फवाद अहमद, बेन लॉफलिन और एंड्रयू टाय शामिल हैं। दक्षिण अफ्रीका के स्क्वॉड में फाफ डुप्लेसिस, रिचर्ड लेवी, सरेल एरवी, कॉलिन इंग्राम, अल्बी मॉर्केल, जेपी डुमिनी, एबी डिविलियर्स, डेन विलास, मोर्ने वान विक, हार्डस विलजोन, वेन पार्नेल, इमरान ताहिर, डुआने ओलिवियर और आरोन फांगिसो हैं।

    इंग्लैंड चैंपियंस की टीम में जेसन रॉय, डेविड मलान, मोईन अली, रवि बोपारा, समित पटेल, जो डेनली, फिल मस्टर्ड, टिम एंब्रोस, लियाम प्लंकेट, अजमल शहजाद, रयान साइडबॉटम, मोंटी पनेसर, स्टुअर्ट मीकर और सर जेम्स एंडरसन हैं। वेस्टइंडीज चैंपियंस में क्रिस गेल, लेंडल सिमंस, शिवनारायण चंद्रपॉल, ड्वेन ब्रावो, डेव मोहम्मद, कार्लोस ब्रेथवेट, आंद्रे रसेल, रेयाड एमरिट, चैडविक वॉल्टन, आंद्रे फ्लेचर, शेल्डन कॉटरेल, फिडेल एडवर्ड्स, सुलेमान बेन और निकिता मिलर शामिल हैं।

    बांग्लादेश चैंपियंस के प्रमुख खिलाड़ियों में इमरुल कायेस, जहुरुल इस्लाम, मोहम्मद अशरफुल, महमूदुल्लाह, शाकिब अल हसन, रोनी तालुकदार, नासिर हुसैन, शुभागता होम, जियाउर रहमान, फजले महमूद, अराफात सनी, कमरुल इस्लाम और एनामुल हक जूनियर हैं। पाकिस्तान ने जरूरी एनओसी नहीं मिलने के बाद टूर्नामेंट से नाम वापस लिया है। उसकी टीम में शाहिद अफरीदी और मोहम्मद हफीज समेत कई खिलाड़ी थे।

    टूर्नामेंट में भारत ने तीन अक्तूबर को ऑस्ट्रेलिया को 46 रन से हराया। चार अक्तूबर को दक्षिण अफ्रीका ने वेस्टइंडीज को 97 रन से मात दी और इंग्लैंड ने भारत को 21 रन से हराया। छह अक्तूबर को भारत का मुकाबला दक्षिण अफ्रीका से है। इसके बाद भारत 11 अक्तूबर को बांग्लादेश और 13 अक्तूबर को वेस्टइंडीज से खेलेगा। पाकिस्तान के हटने से भारत-पाकिस्तान का 10 अक्तूबर का मुकाबला अब नहीं होगा।

    लीग चरण के अन्य मुकाबलों में ऑस्ट्रेलिया-बांग्लादेश और इंग्लैंड-वेस्टइंडीज सात अक्तूबर को, ऑस्ट्रेलिया-दक्षिण अफ्रीका और बांग्लादेश-वेस्टइंडीज नौ अक्तूबर को, इंग्लैंड-दक्षिण अफ्रीका 10 अक्तूबर को, ऑस्ट्रेलिया-वेस्टइंडीज 11 अक्तूबर को, ऑस्ट्रेलिया-इंग्लैंड 13 अक्तूबर को और बांग्लादेश-दक्षिण अफ्रीका 14 अक्तूबर को होंगे। दोनों सेमीफाइनल 16 अक्तूबर और फाइनल 18 अक्तूबर को शारजाह में खेला जाएगा।

  • भारत-स्विट्जरलैंड के बीच कई समझौतों पर बनी सहमति…. नौकरी से लेकर व्यापार तक हुई कई डील

    भारत-स्विट्जरलैंड के बीच कई समझौतों पर बनी सहमति…. नौकरी से लेकर व्यापार तक हुई कई डील


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने सोमवार को भारत यात्रा (India Trip) पर आए स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाई पारमेलिन (Swiss President Guy Parmelin) से द्विपक्षीय वार्ता की। इस मौके पर हरित ऊर्जा, विज्ञान एवं प्रौद्यौगिकी, परिवहन, आवाजाही समेत कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। बैठक के बाद संयुक्त बयान में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन (एफ्टा) देशों के साथ हुए व्यापार समझौते से अगले 15 सालों में देश में सौ अरब डॉलर का निवेश आएगा और 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे।

    एफ्टा यूरोपीय देशों का एक मुक्त व्यापार संगठन है जिसे 1960 में स्थापित किया गया था। इसमें चार देश स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन शामिल हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने बयान में कहा कि राष्ट्रपति पारमेलिन के सहयोग से एफ्टा देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौता लागू हुआ है। यह यूरोप के किसी भी आर्थिक समूह के साथ भारत का पहला समझौता है जो निवेश, नवाचार और साझा समृद्धि का दस्तावेज है।

    मोदी ने कहा कि भारत और स्विट्जरलैंड की मित्रता सदियों पुरानी है। 19वीं सदी में स्वामी विवेकानंद ने स्विस आल्प्स में हिमालय की झलक देखी थी। महात्मा गांधी ने भी स्विट्जरलैंड में समय बिताया और वहां के लोगों से संवाद किया। इन ऐतिहासिक यात्राओं की स्मृतियां हमारी मित्रता में गूंजती हैं। मोदी ने स्विट्जरलैंड के पार्मेलिन को भारत की तीन विशेष चीज़- गुलमर्ग, कोणार्क और येऊर तथा हाथ से नक्काशी किया कश्मीरी अखरोट की लकड़ी का दीवार पैनल भेंट किया।


    स्विस बाजार में पहुंच बढ़ेगी

    मोदी ने कहा कि बैठक में हमने अपनी साझेदारी को एक नई गति और नई ऊंचाई दी है। स्विट्जरलैंड के बाजार में भारत की पहुंच बढ़ाने और निवेश को सुगम बनाने के लिए अहम निर्णय लिए हैं। इससे कृषि, फार्मा, वस्त्र तथा इंजीनियरिंग सामानों का स्विट्जरलैंड को निर्यात बढ़ेगा।


    अनुसंधान पर जोर

    इस दौरान स्वास्थ्य, हरित ऊर्जा और अंतरिक्ष क्षेत्र में नए साझा अनुसंधान परियोजनाएं शुरू करने पर भी सहमति जताई गई। भारत के साइंस स्टार्टअप की क्षमता निर्माण के लिए ज्यूरिख विश्वविद्यालय के साथ समझौता किया गया है।


    वैश्विक शांति के लिए मिलकर काम करेंगे

    संयुक्त बयान में दोनों देशों ने कहा कि वे लोकतांत्रिक मूल्यों, बातचीत और कूटनीति में विश्वास रखते हैं। वे वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए मिलकर कार्य करेंगे। PM मोदी ने अगले वर्ष एआई शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने के लिए स्विट्जरलैंड को शुभकामनाएं भी दीं। इस दौरान कहा कि दोनों देश एआई को जिम्मेदार, समावेशी और मानव-केंद्रित बनाने को बढ़ते रहेंगे।


    भारत स्विट्जरलैंड के बीच 5 प्रमुख समझौते

    प्रवासन और आवागमन साझेदारी पर समझौता हुआ। इसमें पांच साल तक के लिए बहु-प्रवेश वीजा का प्रावधान है, जिसमें प्रत्येक यात्रा पर छह महीने तक का प्रवास शामिल है। साथ ही नवीकरणीय एक वर्षीय छात्र परमिट भी शामिल है।

    युवा पेशेवरों के आदान-प्रदान पर समझौता (वाईपीएस)हुआ। इसका उद्देश्य युवा पेशेवरों के एक से दूसरे देश में अस्थायी रोजगार ग्रहण करने के काम को नियंत्रित करना है। इससे वे अपने क्षेत्र में पेशेवर और भाषायी कौशल को बढ़ा सकते हैं। वाईपीएस में प्रति देश प्रतिवर्ष तीन सौ लोगों का आदान-प्रदान शामिल है, जिसे बढ़ाकर पांच सौ किया जा सकता है।

    विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) और ज्यूरिख यूनिवर्सिटी ऑफ एप्लाइड साइंसेज के बीच नवाचार, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और उद्यमिता में सहयोग के लिए कार्यान्वयन समझौता हुआ। इसका उद्देश्य द्विपक्षीय आदान-प्रदान, क्षमता निर्माण और नेटवर्किंग के माध्यम से प्रारंभिक चरण के स्टार्टअप के लिए अकादमिक-उद्योग प्रशिक्षण कार्यक्रम को लागू करना है।

    विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) और स्विस राष्ट्रीय विज्ञान फाउंडेशन (एसएनएसएफ) के बीच आशय पत्र पर हस्ताक्षर किए गए। इसका उद्देश्य खोजपूर्ण वैज्ञानिक सहयोग का समर्थन करके, भविष्य में संयुक्त अनुसंधान के लिए साझेदारी का निर्माण करना है।

    संघीय आर्थिक कार्य, शिक्षा और अनुसंधान विभाग (ईएईआर) और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के बीच चिह्नित क्षेत्रों में परिवहन प्रौद्योगिकियों, गतिशीलता प्रणालियों और अवसंरचना के संवर्धन एवं सहयोग पर समझौता हुआ। इसका मकसद सतत अवसंरचना विकास में सहयोग को बढ़ावा देना है। इसमें ई-वाहनों, रोपवे, चक्रीय अर्थव्यवस्था, सुरंगों और अन्य परिवहन क्षेत्रों में प्रौद्योगिकियों और अवसंरचना को बढ़ाकर परिवहन और गतिशीलता प्रणालियों पर ध्यान दिया गया है।

  • स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ पार्मेलिन भारत पहुंचे, राष्ट्रपति भवन में द्रौपदी मुर्मू और नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में औपचारिक स्वागत

    स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ पार्मेलिन भारत पहुंचे, राष्ट्रपति भवन में द्रौपदी मुर्मू और नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में औपचारिक स्वागत

    नई दिल्ली ।स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ पार्मेलिन सोमवार को तीन दिवसीय भारत दौरे पर नई दिल्ली पहुंचे। उनके आगमन के बाद राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मौजूद रहे। स्विस राष्ट्रपति को राष्ट्रपति भवन में गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। गाइ पार्मेलिन का यह दौरा भारत और स्विट्जरलैंड के बीच संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग से जुड़े मुद्दों पर जोर रहेगा। भारत और स्विट्जरलैंड के बीच लंबे समय से राजनयिक और आर्थिक संबंध हैं। दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग के साथ शिक्षा, विज्ञान और तकनीक सहित विभिन्न क्षेत्रों में भी संबंधों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जाता रहा है। ऐसे में गाइ पार्मेलिन का तीन दिवसीय दौरा दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संवाद को आगे बढ़ाने का अवसर माना जा रहा है।

    गाइ पार्मेलिन 7 अक्टूबर को दूसरे भारत-ईएफटीए समृद्धि शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। यह सम्मेलन भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ यानी ईएफटीए के बीच व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते यानी टीईपीए के लागू होने की पहली वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है। इस सम्मेलन में भारत और ईएफटीए के बीच आर्थिक साझेदारी तथा कारोबारी संबंधों को आगे बढ़ाने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। समझौते के लागू होने के बाद दोनों पक्षों के बीच व्यापार और निवेश के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है।

    भारत और स्विट्जरलैंड के आर्थिक संबंधों में ईएफटीए की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ईएफटीए देशों में स्विट्जरलैंड भारत का सबसे बड़ा व्यापार और निवेश साझेदार है। दोनों देशों के बीच नियमित उच्चस्तरीय संपर्क और लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को भी महत्वपूर्ण माना गया है। आर्थिक मामलों के अलावा शिक्षा, विज्ञान और तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने की दिशा में भी दोनों देशों के बीच लगातार संपर्क रहा है।

    गाइ पार्मेलिन का भारत दौरा ऐसे समय हो रहा है जब भारत और ईएफटीए के बीच आर्थिक साझेदारी से जुड़े सहयोग का नया चरण आगे बढ़ रहा है। टीईपीए के लागू होने की पहली वर्षगांठ के मौके पर होने वाला समृद्धि शिखर सम्मेलन दोनों पक्षों को समझौते की प्रगति और भविष्य के आर्थिक सहयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा का अवसर देगा। राष्ट्रपति भवन में हुआ औपचारिक स्वागत और इसके बाद होने वाले उच्चस्तरीय कार्यक्रम भारत और स्विट्जरलैंड के बीच राजनीतिक संवाद तथा आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण गतिविधियों के रूप में देखे जा रहे हैं।

  • भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में गतिरोध, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बोलीं- आगे बढ़ना दोनों पक्षों के लिए मुश्किल

    भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में गतिरोध, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बोलीं- आगे बढ़ना दोनों पक्षों के लिए मुश्किल

    नई दिल्ली ।भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है, लेकिन दोनों देश फिलहाल ऐसे पड़ाव पर पहुंच गए हैं, जहां आगे बढ़ना मुश्किल दिखाई दे रहा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि समझौते पर बेहद कठिन और गहन बातचीत हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल दोनों देशों के बीच व्यापार संतुलन भारत के पक्ष में है, जबकि अमेरिका अपने व्यापार घाटे को कम करना चाहता है।

    राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित म्यूनिख लीडर्स मीटिंग 2026 में बोलते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच वार्ता अभी खत्म नहीं हुई है। दोनों पक्ष यह देखने की कोशिश कर सकते हैं कि क्या आगे बातचीत की कोई गुंजाइश बाकी है। हालांकि, उन्होंने संकेत दिया कि मौजूदा स्थिति में दोनों देशों के लिए कुछ और देना या लेना आसान नहीं होगा। प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर बातचीत काफी कठिन और व्यापक स्तर पर हुई है।

    सीतारमण ने कहा कि व्यापार संतुलन इस समय भारत के पक्ष में है और अमेरिका की प्रमुख चिंता अपने व्यापार घाटे को कम करना है। उनके अनुसार, अमेरिका की यह चिंता कई वर्षों से भारत के साथ होने वाले व्यापार में उसके नुकसान से जुड़ी हुई है। दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत फरवरी 2026 में घोषित अंतरिम व्यापार समझौते के लिए तय रूपरेखा के तहत हो रही है। भारत और अमेरिका ने उस समय व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत जारी रखते हुए अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काम करने की बात कही थी।

    वित्त मंत्री ने इस दौरान भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए व्यापार समझौते का भी उल्लेख किया। उन्होंने इसे व्यापार समझौतों को लेकर भारत के दृष्टिकोण के उदाहरण के रूप में पेश किया। सीतारमण के अनुसार, यह समझौता करीब दो अरब लोगों और वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद के लगभग एक-चौथाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करने वाली अर्थव्यवस्थाओं को कवर करेगा। उन्होंने यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के इस्तेमाल किए गए वाक्यांश का उल्लेख करते हुए इसे “सभी समझौतों की मां” कहना उचित बताया।

    सीतारमण ने बताया कि भारत-यूरोपीय संघ समझौते के तहत भारत ने अपनी 92.5 प्रतिशत टैरिफ लाइनों और व्यापार मूल्य के करीब 97 प्रतिशत हिस्से को खोल दिया है। वहीं, यूरोपीय संघ ने व्यापार मूल्य के करीब 99 प्रतिशत और लगभग 97 प्रतिशत टैरिफ लाइनों को खोला है। उन्होंने कहा कि बाजार पहुंच से जुड़ी प्रतिबद्धताओं का चयन दोनों अर्थव्यवस्थाओं की पूरकता को ध्यान में रखकर किया गया। साथ ही यह सुनिश्चित करने की कोशिश की गई कि इन प्रतिबद्धताओं का भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। अमेरिका के साथ बातचीत में भी आगे की संभावनाओं को लेकर दोनों पक्षों के बीच चर्चा जारी है।

  • ट्रंप ने ब्राजील चुनाव पर पोस्ट में भारत का नाम लिखा, 125 मिलियन वोट का दावा कर अमेरिकी चुनाव प्रणाली पर साधा निशाना

    ट्रंप ने ब्राजील चुनाव पर पोस्ट में भारत का नाम लिखा, 125 मिलियन वोट का दावा कर अमेरिकी चुनाव प्रणाली पर साधा निशाना

    नई दिल्ली ।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव को लेकर सोशल मीडिया पर की गई एक पोस्ट में ब्राजील की जगह भारत का नाम लिख दिया। ट्रंप ने दावा किया कि भारत के राष्ट्रपति चुनाव के पहले दौर में 125 मिलियन लोगों ने मतदान किया और मतदान खत्म होने के उसी दिन परिणाम भी सामने आ गए। हालांकि, उनकी पोस्ट में जिस चुनाव का जिक्र किया गया, वह वास्तव में ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव का पहला दौर था। इस गलती के बाद उनकी पोस्ट चर्चा में आ गई और सोशल मीडिया पर लोगों ने इसे लेकर प्रतिक्रिया दी।

    ट्रंप ने अपनी पोस्ट में ब्राजील के चुनाव में मतदान और नतीजों की तेजी की तुलना अमेरिका की चुनाव प्रक्रिया से की। उन्होंने कहा कि डेट्रॉयट, फिलाडेल्फिया, कैलिफोर्निया और अमेरिका के कई अन्य शहरों तथा राज्यों में कम संख्या में वोटों की गिनती में भी अक्सर हफ्तों लग जाते हैं। उन्होंने इसी संदर्भ में अमेरिकी वोटिंग प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे भ्रष्ट बताया। पोस्ट के अंत में उन्होंने अपने नाम के साथ इसे प्रकाशित किया।

    ट्रंप की पोस्ट में 125 मिलियन लोगों के मतदान का आंकड़ा भी ब्राजील के चुनाव से जुड़ा हुआ था। ब्राजील में 4 अक्टूबर को राष्ट्रपति चुनाव के पहले दौर की वोटिंग हुई थी। भारत में उस दिन इस तरह का कोई प्रत्यक्ष राष्ट्रपति चुनाव नहीं हुआ था। भारत में राष्ट्रपति का चुनाव देशभर में सीधे मतदाताओं के मतदान से नहीं होता है। ट्रंप की पोस्ट में भारत का उल्लेख होने के कारण ब्राजील और भारत के चुनावी सिस्टम को लेकर उनका यह बयान विशेष रूप से चर्चा में रहा।

    ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव के पहले दौर में फ्लावियो बोल्सोनारो और मौजूदा राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा सबसे आगे रहे। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 98.81 प्रतिशत वोटों की गिनती पूरी होने तक बोल्सोनारो को 47.24 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि लूला को 44.91 प्रतिशत वोट हासिल हुए। हालांकि, पहले दौर में किसी भी उम्मीदवार को 50 प्रतिशत से अधिक वोट नहीं मिले, इसलिए सीधे तौर पर चुनाव का फैसला नहीं हो सका।

    अब दोनों उम्मीदवारों के बीच 25 अक्टूबर को राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे दौर में मुकाबला होगा। पहले दौर में जीत के लिए 50 प्रतिशत से अधिक वोट हासिल करना जरूरी था, लेकिन दोनों उम्मीदवार इस आंकड़े तक नहीं पहुंच सके। इसी वजह से चुनाव दूसरे दौर में पहुंच गया। ट्रंप की पोस्ट ब्राजील के पहले दौर के चुनाव परिणाम आने के बाद सामने आई, जिसमें उन्होंने तेजी से नतीजे आने का उल्लेख करते हुए अमेरिका की चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाया था। उनकी पोस्ट में ब्राजील की जगह भारत का नाम लिखे जाने को लेकर भी व्यापक चर्चा हुई।

  • पाकिस्तान से बातचीत पर मणिशंकर अय्यर का सवाल, बोले- सर्जिकल स्ट्राइक कर सकते हैं तो आमने-सामने बैठने का साहस क्यों नहीं?

    पाकिस्तान से बातचीत पर मणिशंकर अय्यर का सवाल, बोले- सर्जिकल स्ट्राइक कर सकते हैं तो आमने-सामने बैठने का साहस क्यों नहीं?

    नई दिल्ली। पाकिस्तान के साथ बातचीत को लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने केंद्र की एनडीए सरकार पर सवाल उठाए हैं। रविवार को पांचवें ‘हल्ला बोल कॉन्क्लेव’ में बोलते हुए अय्यर ने कहा कि सरकार के पास पाकिस्तान के खिलाफ ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ करने का साहस है, लेकिन दोनों देशों के बीच विवादों के समाधान के लिए आमने-सामने बैठकर बातचीत करने की इच्छाशक्ति नहीं है।

    अय्यर ने भारत-पाकिस्तान के बीच संवाद दोबारा शुरू करने की वकालत करते हुए अटारी-वाघा सीमा पर बातचीत का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि अतीत के मुद्दों को लेकर लगातार बहस करते रहना विदेश नीति नहीं है। उनके मुताबिक, बातचीत के जरिए यह तय किया जाना चाहिए कि किन मुद्दों का समाधान संभव है और किनका फिलहाल नहीं।

    ‘सर्जिकल स्ट्राइक कर सकते हैं तो बात क्यों नहीं?’

    अय्यर ने कहा कि भारत के पास पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक करने का साहस है, तो फिर उसके साथ आमने-सामने बैठकर बातचीत करने का साहस क्यों नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि भारत पाकिस्तान से बात क्यों नहीं कर सकता और दोनों देशों के बीच दोस्ती की कोशिश क्यों नहीं हो सकती।

    उन्होंने यह भी पूछा कि दुनिया में क्या कोई ऐसा देश है, जिसके साथ भारत पाकिस्तान की तुलना में ज्यादा सहज हो सकता है? साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि क्या पाकिस्तान के लिए भी भारत से ज्यादा आसानी से बातचीत करने वाला कोई दूसरा देश है?

    अटारी-वाघा सीमा पर टेबल लगाने का सुझाव

    भारत-पाकिस्तान के बीच पहले हुई बातचीत की प्रक्रियाओं का उल्लेख करते हुए अय्यर ने कहा कि दोनों देशों को फिर से बातचीत की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने इसके लिए अटारी-वाघा सीमा पर ही बैठक आयोजित करने का सुझाव दिया।

    अय्यर ने कहा कि सीमा पर एक टेबल रखी जा सकती है, ताकि पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल को बातचीत के लिए पाकिस्तान से बाहर आने की जरूरत न पड़े और भारतीय प्रतिनिधियों को भी बातचीत के लिए भारत से बाहर न जाना पड़े। उनके मुताबिक, इसी जगह से संवाद को लगातार आगे बढ़ाया जा सकता है।

    उन्होंने कहा कि बातचीत के दौरान जिन मुद्दों पर समाधान निकलता है, उन पर कार्रवाई की जानी चाहिए। जिन मुद्दों पर सहमति नहीं बनती, उन्हें फिलहाल लंबित रखा जा सकता है और माहौल बदलने के बाद उन पर दोबारा चर्चा की जा सकती है।

    ‘अतीत पर बहस करना विदेश नीति नहीं’

    अय्यर ने कहा कि अतीत की घटनाओं को लेकर बहस करते रहना विदेश नीति नहीं है। उनके अनुसार, किसी भी रचनात्मक निष्कर्ष तक पहुंचने का रास्ता बातचीत से ही निकल सकता है, भले ही इसमें कितना भी समय क्यों न लगे।

    उन्होंने अमेरिका और रूस के उदाहरण का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिका ने रूस के साथ अपने मतभेदों के बावजूद राजनयिक संबंध नहीं तोड़े और बातचीत का रास्ता खुला रखा। अय्यर ने कहा कि समझदार देश एक-दूसरे से बात करते हैं, जबकि बातचीत बंद करने से समस्याओं का समाधान नहीं होता।

    महबूबा मुफ्ती की सलाह का किया जिक्र

    देश के राजनीतिक हालात से जुड़े सवाल पर अय्यर ने पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती की उस सलाह का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कश्मीर के नेताओं से एकजुट होने की बात कही थी।

    अय्यर ने कहा कि जिस तरह कश्मीर के मुद्दे पर अलग-अलग नेताओं के बजाय एकजुट होकर अपनी बात रखने की जरूरत है, उसी तरह राष्ट्रीय राजनीतिक परिदृश्य में भी गैर-हिंदुत्व राजनीतिक समूहों को एकजुट होना होगा।

    उन्होंने दावा किया कि यदि वे दिल्ली में सत्ता में होते तो जम्मू-कश्मीर को दोबारा राज्य का दर्जा मिल गया होता और संभवतः अनुच्छेद 370 तथा 35ए भी किसी बदले हुए स्वरूप में वापस आ सकते थे। उन्होंने कहा कि अगर प्रगति चाहिए तो असहमत लोगों को एकजुट होना होगा और ऐसी एकजुटता से पाकिस्तान के साथ भी नई पहल की जा सकती है।

    भारत-पाक संबंधों पर अय्यर का पुराना रुख

    पाकिस्तान के साथ बातचीत की वकालत मणिशंकर अय्यर पहले भी करते रहे हैं। 2024 में उन्होंने भारत के तत्कालीन विदेश मंत्री एस. जयशंकर की पाकिस्तान यात्रा को लेकर भी लिखा था कि दोनों देशों के बीच मतभेदों के बावजूद संवाद ही संबंध सुधारने का रास्ता है। हालांकि उन्होंने उस समय भी स्पष्ट किया था कि ये उनके व्यक्तिगत विचार हैं और कांग्रेस का आधिकारिक रुख नहीं हैं।

    वहीं, भारत सरकार का हालिया रुख यह रहा है कि पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय बातचीत के लिए आतंकवाद से मुक्त अनुकूल माहौल जरूरी है। इसके बावजूद भारत ने सितंबर 2026 में शंघाई सहयोग संगठन की बैठक में हिस्सा लेने के लिए एक वरिष्ठ अधिकारी को इस्लामाबाद भेजा था।