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  • पुतिन के बाद ट्रंप का भी मोदी पर विश्वास, बोले- अच्छे दोस्त हैं पीएम, जल्द होगी भारत-अमेरिका ट्रेड डील

    पुतिन के बाद ट्रंप का भी मोदी पर विश्वास, बोले- अच्छे दोस्त हैं पीएम, जल्द होगी भारत-अमेरिका ट्रेड डील

    नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार वार्ताओं को लेकर सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर सराहना करते हुए कहा है कि दोनों देशों के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता जल्द ही अंतिम रूप ले सकता है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के अधिकारियों के बीच कई दौर की बातचीत पूरी हो चुकी है और समझौते को लेकर उम्मीदें मजबूत हुई हैं।

    व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना अच्छा मित्र बताया और कहा कि उनके साथ उनके व्यक्तिगत तथा कूटनीतिक संबंध बेहद अच्छे हैं। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर प्रगति हो रही है और दोनों देश जल्द ही इस दिशा में महत्वपूर्ण परिणाम हासिल कर सकते हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि अतीत में भारत द्वारा अमेरिकी उत्पादों पर लगाए गए ऊंचे शुल्क को लेकर अमेरिका की चिंताएं रही हैं, लेकिन वर्तमान दौर में दोनों देश व्यापारिक संबंधों को नए स्तर पर ले जाने के लिए प्रयासरत हैं।

    भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के उद्देश्य से इस सप्ताह एक अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भारत पहुंचा था। दोनों देशों के अधिकारियों के बीच कई दिनों तक विस्तृत चर्चा हुई, जिसमें बाजार पहुंच, शुल्क व्यवस्था, निवेश और विभिन्न व्यापारिक बाधाओं से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। वार्ता के समापन के बाद दोनों पक्षों की ओर से सकारात्मक संकेत दिए गए हैं।

    इससे पहले केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था कि व्यापार समझौते को लेकर लगभग 99 प्रतिशत बातचीत पूरी हो चुकी है। इसी क्रम में भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने भी संकेत दिया कि अब केवल कुछ सीमित मुद्दों पर सहमति बनना बाकी है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के अधिकारी शेष बाधाओं को दूर करने के लिए लगातार संपर्क में हैं और अगले कुछ सप्ताह के भीतर समझौते को अंतिम रूप दिया जा सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई दिशा दे सकता है। इससे वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार में वृद्धि होने के साथ-साथ निवेश और तकनीकी सहयोग को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत और अमेरिका के बीच मजबूत व्यापारिक साझेदारी दोनों देशों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    उल्लेखनीय है कि ट्रंप का यह बयान रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin की टिप्पणी के तुरंत बाद सामने आया है। पुतिन ने भी प्रधानमंत्री Narendra Modi और भारत की प्रशंसा करते हुए कहा था कि भारत एक महान लोकतांत्रिक राष्ट्र है, जो अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर निर्णय लेने में सक्षम है। उन्होंने यह भी कहा था कि भारत जैसे बड़े और प्रभावशाली देश पर बाहरी दबाव बनाना आसान नहीं है तथा अंतरराष्ट्रीय संबंधों में भारत की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है।

    लगातार आ रहे इन बयानों को वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती कूटनीतिक और आर्थिक अहमियत के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। भारत जहां एक ओर प्रमुख वैश्विक शक्तियों के साथ संतुलित संबंध बनाए हुए है, वहीं दूसरी ओर अपने आर्थिक हितों को आगे बढ़ाने के लिए सक्रिय रूप से नई साझेदारियां विकसित कर रहा है। ऐसे में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का संभावित निष्कर्ष दोनों देशों के संबंधों में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हो सकता है।

  • नेपाल में बालेन शाह के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी… भारत ने सीमा पर बढ़ाई चौकसी

    नेपाल में बालेन शाह के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी… भारत ने सीमा पर बढ़ाई चौकसी


    नई दिल्ली।
    भारत (India) की जमीन कब्जा करने के नेपाली पीएम बालेन शाह (Nepali PM Balen Shah) के दावे पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने सधी हुई प्रक्रिया दी है। कहा कि सीमा विवादों को सुलझाने के लिए दोनों देशों के बीच एक स्थापित तंत्र है, जिसके जरिये समाधान निकाला जाएगा। साथ ही इसमें किसी भी तीसरे पक्ष की भूमिका को खारिज कर दिया। इस बीच उत्तराखंड (Uttarakhand) से सटे नेपाल के विभिन्न क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शन जारी हैं। बालेन शाह के बयान के खिलाफ डडेलधुरा समेत कई स्थानों पर विभिन्न छात्र और युवा संगठनों के कार्यकर्ता विरोध दर्ज करा रहे हैं। इस बीच भारत-नेपाल सीमा (India-Nepal border) पर सुरक्षा एजेंसियों ने सतर्कता बढ़ा दी है।

    सीमावर्ती क्षेत्रों में सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) और स्थानीय पुलिस ने संयुक्त रूप से गश्त तेज कर दी है। सुरक्षा एजेंसियां घुसपैठ, तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए पगडंडी मार्गों, चेकपोस्टों और सीमावर्ती गांवों में लगातार निगरानी कर रही हैं। विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर फोकस किया जा रहा है जहां सीमा अपेक्षाकृत खुली है और लोगों का आवागमन अधिक रहता है।


    एसएसबी और स्थानीय पुलिस की संयुक्त गश्त

    मंगलवार को बलुवाकोट क्षेत्र में थानाध्यक्ष नीमा बोहरा के नेतृत्व में पुलिस और एसएसबी की टीम ने संयुक्त गश्त की। इस दौरान जवानों ने संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के साथ ही स्थानीय लोगों से सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध व्यक्ति अथवा घटना की जानकारी तुरंत पुलिस को देने की अपील की। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए नियमित गश्त और निगरानी जारी रहेगी।


    बालेन शाह के बयान पर विदेश मंत्रालय

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि हमने भारत-नेपाल सीमा के संबंध में नेपाल के प्रधानमंत्री की टिप्पणियों के साथ-साथ इस मामले पर नेपाली विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान को भी देखा है।

    रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत-नेपाल सीमा का लगभग 98 फीसदी हिस्सा निर्धारित हो चुका है, फिर भी कुछ हिस्से को सुलझाना बाकी है। उन्होंने कहा कि गंडक नदी के बहाव में परिवर्तन के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। इसके अतिरिक्त सीमा के निर्धारित हिस्सों में सीमा पार कब्जे और नो-मैन्स लैंड पर अतिक्रमण के मामले भी हैं, जिनका संयुक्त रूप से मानचित्रण किया जा रहा है। रणधीर जायसवाल ने कहा कि हमने सीमा संबंधी सभी मामलों से निपटने के लिए द्विपक्षीय तंत्र स्थापित किए हैं। सभी संबंधित पक्षों को यह स्पष्ट होना चाहिए कि भारत और नेपाल के बीच द्विपक्षीय मामलों में किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं है।

    हाल में पाकिस्तान और यूरोपीय संघ के संयुक्त बयान में जम्मू-कश्मीर के उल्लेख पर भी भारत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। जायसवाल ने कहा कि हम संयुक्त प्रेस बयान में भारत के अंदरूनी मामलों पर ऐसे बेवजह जिक्र को पूरी तरह से खारिज करते हैं।

  • मई में जीएसटी कलेक्शन में 3.2% की बढ़ोतरी, आयात और सेवा क्षेत्र की मजबूती से राजस्व को मिला सहारा

    मई में जीएसटी कलेक्शन में 3.2% की बढ़ोतरी, आयात और सेवा क्षेत्र की मजबूती से राजस्व को मिला सहारा

    नई दिल्ली । मई माह में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह में स्थिर वृद्धि दर्ज की गई है, जो अर्थव्यवस्था में मांग और कर अनुपालन की मजबूती को दर्शाती है। सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और पश्चिम एशिया में अस्थिरता के बावजूद भारत का सकल जीएसटी संग्रह लगभग 2 लाख करोड़ रुपये के स्तर के करीब पहुंच गया है। यह वृद्धि ऐसे समय में सामने आई है जब कई वैश्विक अर्थव्यवस्थाएं धीमी विकास दर और अनिश्चितता का सामना कर रही हैं।
    आंकड़ों के अनुसार मई 2026 में सकल जीएसटी संग्रह 1,94,184 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 1,88,172 करोड़ रुपये की तुलना में 3.2 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। वहीं शुद्ध जीएसटी राजस्व 1,66,904 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जिसमें 3.3 प्रतिशत की सालाना वृद्धि हुई है। रिफंड को समायोजित करने के बाद राजस्व वृद्धि लगभग 9 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो कर संग्रह प्रणाली की मजबूती का संकेत है।

    महीने के दौरान रिफंड की राशि भी बढ़कर 27,281 करोड़ रुपये रही, हालांकि इसके बावजूद कुल राजस्व में सकारात्मक रुझान देखने को मिला। घरेलू कर संग्रह में हल्की गिरावट दर्ज की गई, लेकिन आयात से प्राप्त कर राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि ने कुल आंकड़ों को संतुलित बनाए रखा। आयात आधारित जीएसटी संग्रह 19.1 प्रतिशत बढ़कर 59,654 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो वैश्विक व्यापार गतिविधियों में मजबूती और आयात मांग में सुधार का संकेत देता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रवृत्ति घरेलू खपत और औद्योगिक गतिविधियों में निरंतरता को दर्शाती है।

    वहीं दूसरी ओर घरेलू जीएसटी संग्रह 1,34,530 करोड़ रुपये रहा, जिसमें 2.6 प्रतिशत की कमी देखी गई, लेकिन सेवा क्षेत्र और वस्तु श्रेणियों में व्यापक वृद्धि दर्ज की गई है। सेवा क्षेत्र में 22.2 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि और वस्तु श्रेणियों में सकारात्मक रुझान यह दर्शाते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था में खपत आधारित विकास मॉडल मजबूत स्थिति में है। सभी प्रमुख सेवा क्षेत्रों में वृद्धि दर्ज की गई, जो आर्थिक गतिविधियों की व्यापकता को दर्शाता है।

    राज्यों के स्तर पर भी जीएसटी संग्रह में विविध प्रदर्शन देखने को मिला। कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, केरल, गुजरात, तेलंगाना और हरियाणा जैसे राज्यों में कर संग्रह में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। विशेष रूप से केरल और हरियाणा जैसे राज्यों ने दोहरे अंकों में वृद्धि के साथ बेहतर प्रदर्शन किया है। यह संकेत देता है कि राज्यों की अर्थव्यवस्थाओं में भी गतिविधियां तेज हो रही हैं और कर आधार का विस्तार हो रहा है।

    वित्तीय वर्ष 2026-27 के पहले दो महीनों में कुल सकल जीएसटी संग्रह 4.37 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 6.2 प्रतिशत अधिक है। इसी अवधि में शुद्ध राजस्व में भी 5.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। अप्रैल माह में भी रिकॉर्ड संग्रह देखने को मिला था, जो यह दर्शाता है कि लगातार दो महीनों से राजस्व वृद्धि का रुझान मजबूत बना हुआ है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रदर्शन वित्त वर्ष के निर्धारित कर लक्ष्यों को हासिल करने में मददगार साबित होगा और देश की आर्थिक स्थिरता को और मजबूत करेगा।

  • भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक संकेत, विकास और महंगाई को लेकर RBI आश्वस्त

    भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक संकेत, विकास और महंगाई को लेकर RBI आश्वस्त

    नई दिल्ली । वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनावों के बीच भारतीय रिजर्व बैंक ने देश की अर्थव्यवस्था को लेकर एक सकारात्मक और भरोसेमंद तस्वीर पेश की है। केंद्रीय बैंक की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह आंकड़ा ऐसे समय में सामने आया है जब दुनिया के कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं धीमी वृद्धि, बढ़ती महंगाई और वैश्विक तनावों के दबाव में हैं। इसके बावजूद भारत की विकास दर को स्थिर और मजबूत माना गया है, जिसका प्रमुख कारण घरेलू मांग की मजबूती और आर्थिक नीतियों में निरंतरता बताया गया है।

    रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत कम निर्यात निर्भरता और मजबूत घरेलू खपत के कारण वैश्विक झटकों से बेहतर तरीके से निपटने में सक्षम है। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितताओं का प्रभाव भारत पर सीमित रहने की संभावना जताई गई है। केंद्रीय बैंक ने यह भी संकेत दिया है कि आने वाले समय में आर्थिक गतिविधियां संतुलित गति से आगे बढ़ती रह सकती हैं, हालांकि बाहरी जोखिमों पर सतत निगरानी आवश्यक होगी।

    वैश्विक परिदृश्य को लेकर रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि भू-राजनीतिक तनाव, विशेषकर पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष, दुनिया की आर्थिक स्थिरता के लिए सबसे बड़ा खतरा बने हुए हैं। इसके कारण ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव, आपूर्ति श्रृंखला में बाधा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में मंदी जैसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुमानों के आधार पर वैश्विक विकास दर में भी हल्की गिरावट का संकेत दिया गया है, जिससे दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ सकता है।

    इसके विपरीत भारत की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर बताई गई है। रिपोर्ट में मजबूत बैंकिंग प्रणाली, कॉर्पोरेट सेक्टर की स्थिर वित्तीय स्थिति, सरकार के बढ़ते पूंजीगत व्यय और पर्याप्त खाद्यान्न भंडार को प्रमुख ताकतों के रूप में रेखांकित किया गया है। कृषि उत्पादन की स्थिरता भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को समर्थन देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इन सभी कारकों के आधार पर आरबीआई ने माना है कि यदि वैश्विक परिस्थितियां और अधिक खराब नहीं होतीं तो भारत 6.9 प्रतिशत की विकास दर हासिल कर सकता है।

    महंगाई को लेकर भी रिपोर्ट में संतुलित दृष्टिकोण रखा गया है। वित्त वर्ष 2026-27 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई लगभग 4.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो केंद्रीय बैंक के निर्धारित लक्ष्य दायरे में मानी जा रही है। खाद्यान्न की पर्याप्त उपलब्धता और कृषि उत्पादन की मजबूती को महंगाई नियंत्रण का प्रमुख आधार बताया गया है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और मुद्रा विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव भविष्य में जोखिम पैदा कर सकते हैं।

    कृषि क्षेत्र पर मौसम की स्थिति का प्रभाव भी रिपोर्ट में उल्लेखित किया गया है। मानसून की अनिश्चितता और संभावित अल नीनो प्रभाव से कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है, हालांकि इंडियन ओशन डिपोल के सकारात्मक रहने की संभावना से कुछ राहत की उम्मीद जताई गई है। इसके साथ ही श्रम सुधारों और नए लेबर कोड के लागू होने से रोजगार सृजन और उत्पादकता में सुधार की संभावना भी व्यक्त की गई है।

    विदेशी व्यापार और बैंकिंग क्षेत्र को लेकर भी रिपोर्ट में भरोसा जताया गया है। सेवा निर्यात, विदेशी रेमिटेंस और अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों से भारत के बाहरी क्षेत्र को मजबूती मिलने की उम्मीद है। साथ ही भारतीय बैंकिंग प्रणाली को पर्याप्त पूंजी और मजबूत स्थिति में बताते हुए किसी भी वैश्विक वित्तीय झटके से निपटने में सक्षम माना गया है।

  • भारत-कनाडा व्यापारिक रिश्तों में मजबूती की दिशा में कदम, पीयूष गोयल ने बताया यात्रा को सफल

    भारत-कनाडा व्यापारिक रिश्तों में मजबूती की दिशा में कदम, पीयूष गोयल ने बताया यात्रा को सफल

    नई दिल्ली । केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री Piyush Goyal ने अपने हालिया कनाडा दौरे को भारत और कनाडा के द्विपक्षीय संबंधों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और सकारात्मक बताया है। उन्होंने कहा कि इस यात्रा ने दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को नई गति प्रदान की है, जिससे भविष्य में साझेदारी के और मजबूत होने की उम्मीद है।

    केंद्रीय मंत्री ने अपनी यात्रा के अनुभव साझा करते हुए कहा कि कनाडा में हुई उच्च स्तरीय बैठकों ने दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास और सहयोग को और मजबूत किया है। इस दौरान उनकी मुलाकात कनाडा के शीर्ष नेतृत्व, व्यापार जगत के प्रतिनिधियों और निवेश से जुड़े प्रमुख हितधारकों से हुई, जहां भविष्य की आर्थिक संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

    दौरे के दौरान Piyush Goyal ने कनाडा के प्रधानमंत्री और अन्य वरिष्ठ मंत्रियों के साथ बैठकें कीं, जिनमें द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने और निवेश के नए अवसरों को विकसित करने पर सहमति बनी। उन्होंने कहा कि भारत और कनाडा के बीच मौजूदा आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने के लिए दोनों देशों की सरकारें साझा रूप से काम कर रही हैं।

    सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों के बीच वर्तमान व्यापार लगभग 8.5 अरब डॉलर का है, जिसे वर्ष 2030 तक 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया गया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते पर बातचीत को गति देने पर भी जोर दिया गया है, ताकि व्यापारिक बाधाओं को कम किया जा सके और निवेश के नए रास्ते खोले जा सकें।

    कनाडा यात्रा के दौरान केंद्रीय मंत्री ने निवेश गोलमेज बैठकों में भाग लिया और विभिन्न उद्योग जगत के नेताओं के साथ संवाद किया। उन्होंने भारत के तेजी से बढ़ते स्टार्टअप इकोसिस्टम, तकनीकी नवाचार और डिजिटल अर्थव्यवस्था की मजबूती को रेखांकित किया। साथ ही उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लीनटेक, एग्रीटेक और डीप-टेक जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।

    इसके अलावा उन्होंने ओंटारियो के प्रीमियर के साथ भी बैठक की, जिसमें विनिर्माण, बुनियादी ढांचा, स्वच्छ ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिज जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में साझेदारी को और आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि आर्थिक सहयोग को केवल व्यापार तक सीमित न रखते हुए उसे दीर्घकालिक निवेश और तकनीकी साझेदारी के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।

    केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि भारत और कनाडा की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे की पूरक हैं और यदि दोनों देश मिलकर काम करें तो वैश्विक स्तर पर एक मजबूत आर्थिक साझेदारी का मॉडल तैयार किया जा सकता है। उन्होंने अपनी यात्रा को सफल बताते हुए कहा कि यह दौरा दोनों देशों के संबंधों में एक नई ऊर्जा और दिशा लेकर आया है।

    कुल मिलाकर यह दौरा भारत और कनाडा के बीच आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे आने वाले वर्षों में व्यापार और निवेश के क्षेत्र में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

  • चार दशकों की सैन्य सेवा के बाद जनरल अनिल चौहान का रिटायरमेंट, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर गार्ड ऑफ ऑनर के साथ भावुक विदाई

    चार दशकों की सैन्य सेवा के बाद जनरल अनिल चौहान का रिटायरमेंट, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर गार्ड ऑफ ऑनर के साथ भावुक विदाई

    नई दिल्ली । देश के सर्वोच्च सैन्य अधिकारी पद चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) से जनरल अनिल चौहान का कार्यकाल शनिवार को औपचारिक रूप से समाप्त हो गया। राष्ट्रीय राजधानी में राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर आयोजित एक गरिमामय समारोह में उन्होंने त्रि-सेवाओं द्वारा दिए गए गार्ड ऑफ ऑनर को स्वीकार किया और शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित कर अपने सैन्य जीवन को भावनात्मक विदाई दी। चार दशक से अधिक समय तक भारतीय सेना में सेवा देने वाले जनरल चौहान ने 1981 में सेना में कमीशन प्राप्त किया था और अपने लंबे करियर के दौरान कई महत्वपूर्ण कमान और स्टाफ पदों पर कार्य किया। उनके रिटायरमेंट समारोह में सैन्य परंपराओं और सम्मान की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई दी, जहां उन्होंने वर्दीधारी जीवन को अलविदा कहते हुए इसे अपने जीवन का एक अत्यंत गौरवपूर्ण अध्याय बताया।

    जनरल चौहान ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर अंतिम बार पुष्पांजलि अर्पित करना उनके लिए अत्यंत भावुक और सम्मानजनक क्षण था, क्योंकि यह उन वीर जवानों को श्रद्धांजलि देने का अवसर था जिन्होंने देश की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि तीनों सेनाओं द्वारा दिए गए गार्ड ऑफ ऑनर के साथ विदाई लेना उनके लिए गर्व का विषय है और यह उनके सैन्य जीवन की सबसे यादगार क्षणों में से एक रहेगा। इस अवसर पर उन्होंने अपने सहकर्मियों, वरिष्ठ अधिकारियों और सभी साथियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय सेना में बिताया गया प्रत्येक क्षण उनके लिए सीख और प्रेरणा से भरा रहा है।

    अपने कार्यकाल को याद करते हुए जनरल चौहान ने कहा कि सीडीएस के रूप में उनका समय अत्यंत संतोषजनक रहा और इस दौरान तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय और एकीकरण को मजबूत करने की दिशा में लगातार प्रयास किए गए। उन्होंने संयुक्त रक्षा प्रणाली और आधुनिक रणनीतिक ढांचे को आगे बढ़ाने में सहयोग को महत्वपूर्ण बताया। उनके नेतृत्व में कई महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव और संयुक्त अभ्यासों को बढ़ावा मिला, जिससे देश की रक्षा क्षमता को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में कदम उठाए गए।

    जनरल चौहान की सेवानिवृत्ति को भारतीय सैन्य ढांचे में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान त्रि-सेवाओं के बीच तालमेल और एकीकृत रणनीति को बढ़ावा देने में केंद्रीय भूमिका निभाई। चार दशकों से अधिक की सेवा में उन्होंने देश के विभिन्न संवेदनशील और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया और अनेक प्रतिष्ठित सैन्य सम्मान भी प्राप्त किए। उनके योगदान को भारतीय रक्षा इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में याद किया जाएगा, जहां उन्होंने न केवल नेतृत्व किया बल्कि आधुनिक सैन्य संरचना को मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभाई।

  • फिजी में QUAD का बड़ा दांव: बंदरगाह प्रोजेक्ट से इंडो-पैसिफिक में चीन को चुनौती, भारत की भूमिका अहम

    फिजी में QUAD का बड़ा दांव: बंदरगाह प्रोजेक्ट से इंडो-पैसिफिक में चीन को चुनौती, भारत की भूमिका अहम




    नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान और अमेरिका (QUAD) ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी रणनीतिक मौजूदगी बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। चारों देशों ने फिजी में मिलकर एक आधुनिक बंदरगाह विकसित करने पर सहमति जताई है। इसे क्वाड के इतिहास में पहली बार ऐसा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट माना जा रहा है, जो सीधे तौर पर क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक संतुलन से जुड़ा है।

    फिजी, जो प्रशांत महासागर के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में स्थित द्वीप राष्ट्र है, लंबे समय से इस क्षेत्र में चीन की बढ़ती गतिविधियों का केंद्र बनता जा रहा था। अब क्वाड देशों की यह पहल चीन के प्रभाव को संतुलित करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।

    फिजी में बंदरगाह क्यों अहम?
    फिजी भौगोलिक रूप से ऑस्ट्रेलिया के पूर्व और हवाई के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। यह प्रशांत महासागर के प्रमुख समुद्री मार्गों के बीच आता है। इस कारण यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

    पिछले कुछ वर्षों में चीन ने छोटे द्वीपीय देशों में निवेश और कर्ज के जरिए अपनी पकड़ मजबूत की है। कई जगहों पर बंदरगाह और बुनियादी ढांचे के विकास के पीछे चीन की रणनीतिक उपस्थिति को लेकर भी चिंता जताई जाती रही है। इसी पृष्ठभूमि में क्वाड का यह कदम देखा जा रहा है।

    भारत के लिए क्या है महत्व?
    फिजी में लगभग 37% आबादी भारतीय मूल की है, जिन्हें “गिरमिटिया” समुदाय के वंशज माना जाता है। भारत और फिजी के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध बहुत मजबूत हैं।

    इस प्रोजेक्ट में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारत अपने समुद्री अनुभव, बंदरगाह विकास विशेषज्ञता और तकनीकी सहयोग के जरिए इस परियोजना में योगदान देगा। इसके अलावा भारत के Information Fusion Centre-IOR (गुरुग्राम) के माध्यम से समुद्री गतिविधियों की निगरानी में भी सहयोग संभव है।

    QUAD की नई रणनीति
    इस प्रोजेक्ट के साथ QUAD ने “Indo-Pacific Maritime Surveillance Cooperation” की भी शुरुआत की है, जिसके तहत समुद्री क्षेत्र में रीयल टाइम डेटा साझा किया जाएगा। इसका उद्देश्य अवैध मछली पकड़ने, संदिग्ध जहाजों और समुद्री सुरक्षा चुनौतियों पर नजर रखना है।

    साथ ही “Quad-at-Sea” नाम से एक संयुक्त अभ्यास योजना भी प्रस्तावित है, जिसमें चारों देशों की कोस्ट गार्ड एक साथ समुद्री अभ्यास करेंगे।

    चीन की चिंता क्यों बढ़ी?
    विशेषज्ञों के मुताबिक, यह पहली बार है जब QUAD ने केवल बयानबाजी से आगे बढ़कर किसी तीसरे देश में संयुक्त इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट शुरू करने का फैसला किया है। इससे चीन की “स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स” रणनीति को सीधी चुनौती मिल सकती है।

    चीन पहले से ही सोलोमन आइलैंड्स जैसे देशों में सुरक्षा समझौतों के जरिए अपनी उपस्थिति बढ़ा चुका है। ऐसे में फिजी में क्वाड की सक्रियता को बीजिंग एक रणनीतिक दबाव के रूप में देख सकता हैफिजी में प्रस्तावित यह बंदरगाह परियोजना केवल एक विकासात्मक कदम नहीं, बल्कि इंडो-पैसिफिक में शक्ति संतुलन बदलने की दिशा में बड़ा भू-राजनीतिक संकेत है। भारत समेत QUAD देशों की यह साझेदारी आने वाले समय में समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय कूटनीति में नई दिशा तय कर सकती है।

  • आसमान से बरस रही आग, जमीन पर बढ़ी मुश्किलें: गर्मी के साथ पानी और बिजली संकट ने बढ़ाई लोगों की परेशानी

    आसमान से बरस रही आग, जमीन पर बढ़ी मुश्किलें: गर्मी के साथ पानी और बिजली संकट ने बढ़ाई लोगों की परेशानी


    नई दिल्ली।देश के कई हिस्सों में पड़ रही भीषण गर्मी अब केवल मौसम की परेशानी नहीं रह गई है, बल्कि यह लोगों के दैनिक जीवन पर गहरा असर डालने लगी है। राजधानी सहित कई राज्यों में तापमान लगातार नए रिकॉर्ड छू रहा है और इसके साथ ही पानी तथा बिजली की बढ़ती समस्या ने आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। आसमान से बरसती आग और तपती सड़कों के बीच लोगों की दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित होती दिखाई दे रही है। हालात ऐसे बन गए हैं कि कई क्षेत्रों में लोग राहत पाने के लिए संघर्ष करते नजर आ रहे हैं। गर्म हवाओं और तेज धूप ने शहरों से लेकर कस्बों तक लोगों की परेशानी को कई गुना बढ़ा दिया है।
    भीषण गर्मी के कारण पानी की खपत अचानक बढ़ी है, जिससे कई इलाकों में जल आपूर्ति पर दबाव साफ दिखाई देने लगा है। कुछ स्थानों पर लोगों को जरूरत के अनुसार पानी नहीं मिल पा रहा है, जिसके कारण लंबी कतारें और इंतजार की स्थिति बन रही है। सुबह से ही लोग पानी की व्यवस्था में जुट जाते हैं ताकि दिनभर की जरूरतें पूरी की जा सकें। लगातार बढ़ती गर्मी के बीच पानी की कमी ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। कई परिवारों के लिए यह स्थिति रोजमर्रा की बड़ी चुनौती बन चुकी है।

    दूसरी तरफ बिजली की मांग में भी तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। एयर कंडीशनर, कूलर और अन्य उपकरणों के लगातार उपयोग से बिजली व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है। कई इलाकों में बिजली की अनियमित आपूर्ति लोगों की परेशानी का बड़ा कारण बन रही है। दिन के समय तेज गर्मी और रात में बिजली बाधित होने से लोगों की दिनचर्या और नींद दोनों प्रभावित हो रही हैं। बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों के लिए यह स्थिति और अधिक कठिन बनती जा रही है। लगातार गर्मी और बिजली की समस्या लोगों की सहनशक्ति की परीक्षा ले रही है।

    गर्मी का असर केवल शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी हालात चुनौतीपूर्ण होते जा रहे हैं। खेतों में काम करने वाले लोग तेज धूप के कारण लंबे समय तक बाहर नहीं रह पा रहे हैं। मजदूर वर्ग और रोजाना मेहनत करने वाले लोगों के लिए यह मौसम सबसे कठिन दौर साबित हो रहा है। सड़कों पर दोपहर के समय सामान्य दिनों की तुलना में काफी कम आवाजाही दिखाई दे रही है। लोग जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकलना पसंद कर रहे हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ता तापमान और बदलता मौसम भविष्य में और बड़ी चुनौतियां खड़ी कर सकता है। ऐसे हालात में स्वास्थ्य संबंधी सावधानी, पर्याप्त पानी का सेवन और धूप से बचाव बेहद जरूरी हो गया है। फिलहाल देश के कई हिस्सों में लोग गर्मी, पानी और बिजली की तिहरी चुनौती से जूझ रहे हैं और सभी की नजरें मौसम में राहत देने वाले बदलाव पर टिकी हुई हैं।

  • दुनिया में ईंधन महंगा, लेकिन भारत ने संभाली रफ्तार, पेट्रोल-डीजल कीमतों में राहत भरी तस्वीर

    दुनिया में ईंधन महंगा, लेकिन भारत ने संभाली रफ्तार, पेट्रोल-डीजल कीमतों में राहत भरी तस्वीर

    नई दिल्ली । मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की आपूर्ति पर बढ़ते दबाव का असर अब दुनिया भर के देशों की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है। इसी कड़ी में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है। हालांकि वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतों में तेज उछाल के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि अन्य तेल आयातक देशों की तुलना में काफी कम रही है। यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब कई देश ईंधन संकट और महंगाई की दोहरी चुनौती का सामना कर रहे हैं।

    मध्य पूर्व में जारी संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल आपूर्ति मार्गों पर असर पड़ा है। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग प्रभावित होने से वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ी है। इसका सीधा असर ईंधन की कीमतों पर पड़ा और देश में तेल कंपनियों ने मई महीने के दौरान कई बार कीमतों में बदलाव किया। इन संशोधनों के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कुल मिलाकर लगभग साढ़े सात प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है। हालांकि यह वृद्धि अन्य देशों की तुलना में काफी सीमित मानी जा रही है।

    राजधानी में पेट्रोल और डीजल दोनों के दामों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ईंधन कीमतों में बदलाव के कारण आम उपभोक्ताओं पर असर महसूस किया जा रहा है, लेकिन वैश्विक तुलना में भारत की स्थिति अपेक्षाकृत संतुलित बनी हुई है। दुनिया के कई देशों में पेट्रोल की कीमतें पहले ही बेहद ऊंचे स्तर पर पहुंच चुकी हैं और कई अर्थव्यवस्थाओं में उपभोक्ताओं को भारी आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है।

    विकसित देशों और यूरोप के कई हिस्सों में ईंधन की कीमतें काफी ऊंची बनी हुई हैं। कई देशों में पेट्रोल और डीजल के दाम भारतीय बाजार की तुलना में काफी अधिक हैं। वहीं भारत के पड़ोसी देशों में भी ईंधन कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। कम आय वाले कई देशों में पेट्रोल की कीमतें तेजी से ऊपर पहुंची हैं, जिससे वहां महंगाई का दबाव और बढ़ गया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने ईंधन कीमतों को लेकर अपेक्षाकृत संतुलित रणनीति अपनाई है। अन्य बड़े आयातक देशों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ी लागत का सीधा बोझ उपभोक्ताओं पर डाल दिया, जबकि भारत में वृद्धि नियंत्रित स्तर पर देखने को मिली। इसी कारण देश में कीमतों में वृद्धि की रफ्तार सीमित रही है।

    वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और ऊर्जा संकट के इस दौर में ईंधन की कीमतें आने वाले समय में भी महत्वपूर्ण मुद्दा बनी रह सकती हैं। फिलहाल भारत में हालात अन्य देशों की तुलना में कुछ हद तक नियंत्रित दिखाई दे रहे हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति में बदलाव भविष्य में नई चुनौतियां भी खड़ी कर सकता है। ऐसे में देश की नजरें अब वैश्विक तेल बाजार की अगली दिशा पर टिकी हुई हैं।

  • रक्षा, ऊर्जा और सुरक्षा पर बड़ा मंथन, भारत-अमेरिका बैठक से वैश्विक समीकरणों में बढ़ी हलचल

    रक्षा, ऊर्जा और सुरक्षा पर बड़ा मंथन, भारत-अमेरिका बैठक से वैश्विक समीकरणों में बढ़ी हलचल


    नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक संबंधों को नई मजबूती देने की दिशा में नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें दोनों देशों के शीर्ष प्रतिनिधियों ने कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। इस उच्चस्तरीय बातचीत में रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, सुरक्षा और वैश्विक सहयोग जैसे विषय केंद्र में रहे। बैठक को दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास और दीर्घकालिक साझेदारी के एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। बदलते वैश्विक परिदृश्य के बीच यह संवाद केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका असर क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने रक्षा सहयोग को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। पिछले कुछ वर्षों में भारत और अमेरिका के बीच रक्षा क्षेत्र में सहयोग लगातार बढ़ा है और दोनों देशों ने कई महत्वपूर्ण समझौतों के जरिए रणनीतिक तालमेल को मजबूत किया है। इस बातचीत में भविष्य की सुरक्षा जरूरतों, तकनीकी सहयोग और साझा रणनीतिक हितों को लेकर सकारात्मक विचार-विमर्श किया गया। विशेषज्ञ मानते हैं कि दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों में बढ़ती नजदीकी आने वाले समय में नई दिशा तय कर सकती है।

    ऊर्जा क्षेत्र भी इस बैठक का एक अहम केंद्र रहा। तेजी से बदलती वैश्विक ऊर्जा जरूरतों और वैकल्पिक संसाधनों की बढ़ती मांग को देखते हुए दोनों देशों ने सहयोग के नए अवसरों पर विचार किया। ऊर्जा सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों और भविष्य की साझेदारी को लेकर साझा सोच विकसित करने पर जोर दिया गया। यह माना जा रहा है कि आने वाले वर्षों में ऊर्जा क्षेत्र दोनों देशों के संबंधों का महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।

    व्यापार और आर्थिक सहयोग को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच सकारात्मक बातचीत हुई। दोनों देशों ने आर्थिक गतिविधियों को और बढ़ावा देने तथा नए निवेश अवसरों को मजबूत करने की दिशा में विचार साझा किए। बदलते वैश्विक आर्थिक हालात के बीच व्यापारिक संबंधों को और अधिक मजबूत बनाना दोनों देशों की प्राथमिकताओं में शामिल दिखाई दिया। आर्थिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए भविष्य में कई नए कदम उठाए जाने की संभावना भी जताई जा रही है।

    बैठक में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की स्थिति और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई। दोनों देशों ने क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर सहमति जताई। वैश्विक चुनौतियों और बदलते अंतरराष्ट्रीय समीकरणों के बीच साझा दृष्टिकोण विकसित करने पर भी विशेष जोर दिया गया। इस महत्वपूर्ण संवाद से स्पष्ट संकेत मिला है कि भारत और अमेरिका अपने संबंधों को केवल वर्तमान जरूरतों तक सीमित नहीं रखना चाहते, बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी को और व्यापक रूप देने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।