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  • जबलपुर में स्क्रिप्टेड पुलिस कार्रवाई का आरोप: वायरल वीडियो ने खड़े किए बड़े सवाल

    जबलपुर में स्क्रिप्टेड पुलिस कार्रवाई का आरोप: वायरल वीडियो ने खड़े किए बड़े सवाल


    जबलपुर। जबलपुर में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। अधारताल थाना क्षेत्र में अवैध शराब के खिलाफ की गई कार्रवाई से पहले का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पूरे पुलिस महकमे में हलचल मच गई है। वीडियो में एक पुलिसकर्मी कथित तौर पर आरोपी महिला को कार्रवाई के दौरान क्या कहना है और कैसे व्यवहार करना है इसकी जानकारी देता दिखाई दे रहा है। वीडियो सामने आने के बाद निष्पक्ष पुलिस कार्रवाई को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।

    जानकारी के अनुसार अधारताल थाना क्षेत्र में अवैध शराब के कारोबार की सूचना मिलने पर पुलिस टीम ने एक स्थान पर दबिश दी थी। कार्रवाई में हवलदार सुग्रीव तिवारी, एफआरवी दल, महिला आरक्षक और अन्य पुलिसकर्मी शामिल थे। पुलिस ने मौके से एक महिला को अवैध शराब के साथ पकड़ा था। हालांकि विवाद का केंद्र कार्रवाई नहीं बल्कि उससे पहले का कथित घटनाक्रम बन गया है।

    वायरल वीडियो में दावा किया जा रहा है कि एक आरक्षक कार्रवाई से पहले आरोपी महिला को पूरी स्थिति समझा रहा है। वीडियो में महिला को यह बताया जाता दिखाई दे रहा है कि कार्रवाई के दौरान उसे क्या कहना है और किस तरह प्रतिक्रिया देनी है। आरोप है कि महिला को सहानुभूति प्राप्त करने और खुद को मजबूर दिखाने के लिए भी निर्देश दिए गए। हालांकि वीडियो की सत्यता और उसमें दिख रही बातचीत की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

    वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई लोगों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह पुलिस की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न होगा। वहीं कुछ लोग यह भी मांग कर रहे हैं कि पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि वास्तविकता सामने आ सके।

    मामले के तूल पकड़ने के बाद पुलिस अधिकारियों ने भी संज्ञान लिया है। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि वायरल वीडियो की जांच की जा रही है। वीडियो की प्रामाणिकता, उसमें शामिल पुलिसकर्मियों की भूमिका और पूरे घटनाक्रम की परिस्थितियों की विस्तार से पड़ताल की जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

    पुलिस प्रशासन के लिए यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि कानून व्यवस्था बनाए रखने वाली संस्था की विश्वसनीयता सीधे तौर पर जनता के भरोसे से जुड़ी होती है। यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

    फिलहाल पूरे मामले पर सभी की नजरें जांच के परिणाम पर टिकी हुई हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वायरल वीडियो में किए जा रहे दावों में कितनी सच्चाई है और पुलिस विभाग इस मामले में क्या कदम उठाता है। तब तक यह मामला शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है और पुलिस की कार्यशैली को लेकर नई बहस छेड़ चुका है।

  • पानी भरने की बात पर भड़की पुरानी रंजिश: मैहर में खूनी संघर्ष, 7 महिलाओं समेत 14 लोग गंभीर घायल

    पानी भरने की बात पर भड़की पुरानी रंजिश: मैहर में खूनी संघर्ष, 7 महिलाओं समेत 14 लोग गंभीर घायल

    मैहर। मध्य प्रदेश के मैहर जिले में जमीनी विवाद ने बुधवार रात हिंसक और खूनी रूप ले लिया। अमरपाटन थाना क्षेत्र के कहरी गांव में दो पड़ोसी परिवारों के बीच लंबे समय से चल रही रंजिश एक बार फिर भड़क उठी और देखते ही देखते दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। मामूली कहासुनी से शुरू हुआ विवाद कुछ ही मिनटों में इतना बढ़ गया कि लाठी-डंडे और धारदार हथियार निकल आए। दोनों ओर से हुए हमले में 7 महिलाओं सहित कुल 14 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है और पुलिस लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है।

    पुलिस के अनुसार कहरी गांव में रहने वाले बंसल समाज के दो परिवारों के बीच जमीन को लेकर काफी समय से विवाद चल रहा था। बुधवार रात विवादित जमीन पर पानी भरने को लेकर दोनों पक्षों के बीच बहस शुरू हुई। पहले तीखी नोकझोंक हुई और फिर देखते ही देखते मामला हिंसक संघर्ष में बदल गया। दोनों पक्षों के लोग लाठी-डंडे और धारदार हथियार लेकर एक-दूसरे पर टूट पड़े। गांव में अचानक मची चीख-पुकार और हंगामे से अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय ग्रामीणों ने बीच-बचाव का प्रयास किया लेकिन तब तक कई लोग गंभीर रूप से घायल होकर लहूलुहान हो चुके थे।

    घटना के बाद घायल किसी तरह अमरपाटन थाने पहुंचे। थाना प्रभारी विजय सिंह परस्ते ने घायलों की हालत गंभीर देखते हुए तत्काल एंबुलेंस और शासकीय वाहन की व्यवस्था कर सभी को अमरपाटन सिविल अस्पताल भिजवाया। हालांकि अस्पताल पहुंचने पर स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर खामियां भी उजागर हो गईं। एक साथ 14 गंभीर घायलों के पहुंचने पर अस्पताल में पर्याप्त बेड उपलब्ध नहीं थे। मजबूरन डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को कई घायलों का उपचार अस्पताल के बरामदे और फर्श पर करना पड़ा। घायल महिलाओं और पुरुषों को जमीन पर लिटाकर प्राथमिक उपचार दिया गया। उन्हें वहीं पट्टियां बांधी गईं और ड्रिप तथा इंजेक्शन लगाए गए।

    मारपीट में दोनों पक्षों के लोगों को गंभीर चोटें आई हैं। प्रथम पक्ष से सरिता बंसल, जितेंद्र, फूलचंद, साक्षी, आरती और प्रिया बंसल घायल हुए हैं। वहीं दूसरे पक्ष से समीर, बड्डी, सोमबाई, सुरेश, पार्वती, रमेश, मुकेश और तिजियाबाई बंसल को चोटें आई हैं। डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद सभी घायलों की हालत को देखते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल सतना रेफर कर दिया है।

    थाना प्रभारी विजय सिंह परस्ते ने बताया कि दोनों पक्षों के बीच पुराना जमीनी विवाद ही इस हिंसक घटना की मुख्य वजह है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अस्पताल में घायलों के बयान लिए जा रहे हैं और घटनास्थल से भी जरूरी साक्ष्य जुटाए गए हैं। पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर सभी आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल गांव में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति को रोका जा सके।

  • हाईकोर्ट पहुंचे आरक्षक सौरभ शर्मा बोले, सुनवाई का मौका दिए बिना हुई कार्रवाई

    हाईकोर्ट पहुंचे आरक्षक सौरभ शर्मा बोले, सुनवाई का मौका दिए बिना हुई कार्रवाई


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के चर्चित सौरभ शर्मा मामले में एक नया कानूनी मोड़ सामने आया है। आय से अधिक संपत्ति और कथित मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े आरोपों के बीच आरटीओ आरक्षक सौरभ शर्मा ने अब प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में चुनौती दी है। इस कदम के बाद प्रदेश के सबसे चर्चित मामलों में शामिल इस प्रकरण की कानूनी लड़ाई और दिलचस्प हो गई है।

    हाईकोर्ट में दायर याचिका में सौरभ शर्मा ने प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई की वैधानिकता पर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि जांच और कानूनी प्रक्रिया के दौरान उन्हें अपना पक्ष रखने का समुचित अवसर नहीं दिया गया। याचिका में कहा गया है कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 233(1) के तहत किसी भी शिकायत पर संज्ञान लेने से पहले संबंधित व्यक्ति को सुनवाई का अवसर दिया जाना आवश्यक है।

    याचिकाकर्ता की ओर से यह भी तर्क दिया गया है कि जांच एजेंसी ने इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया और बिना पक्ष सुने ही आगे की कार्रवाई शुरू कर दी। उनका कहना है कि यह निष्पक्ष सुनवाई के सिद्धांत और संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों के विपरीत है। इसी आधार पर उन्होंने अदालत से राहत की मांग की है।

    सौरभ शर्मा ने अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया फैसले का भी उल्लेख किया है। मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों में शीर्ष अदालत द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा गया है कि किसी भी आरोपी को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए। याचिका के अनुसार इस मामले में उन्हें ऐसा अवसर नहीं दिया गया, जिससे उनके अधिकार प्रभावित हुए हैं।

    गौरतलब है कि सौरभ शर्मा का नाम उस समय सुर्खियों में आया था जब उनके और उनसे जुड़े ठिकानों पर हुई कार्रवाई के दौरान कथित तौर पर करोड़ों रुपये की संपत्ति और नकदी से जुड़े दस्तावेज सामने आए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रवर्तन निदेशालय ने भी जांच शुरू की थी और कथित मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।

    यह मामला लंबे समय से प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। जांच एजेंसियों की कार्रवाई और उससे जुड़े खुलासों ने इसे हाई प्रोफाइल बना दिया है। अब सौरभ शर्मा द्वारा हाईकोर्ट का रुख किए जाने के बाद इस मामले की कानूनी दिशा पर सबकी नजरें टिक गई हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत में होने वाली सुनवाई से यह स्पष्ट हो सकेगा कि जांच एजेंसियों द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया कानूनी मानकों के अनुरूप थी या नहीं। फिलहाल हाईकोर्ट में दायर याचिका के बाद इस बहुचर्चित मामले में नए कानूनी तर्क और बहसें सामने आने की संभावना बढ़ गई है।

    आने वाले दिनों में अदालत का रुख और सुनवाई के दौरान पेश किए जाने वाले पक्ष इस पूरे मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। तब तक यह प्रकरण प्रदेश के सबसे चर्चित कानूनी और प्रशासनिक मामलों में बना रहेगा।

  • हर जिले में बनेगी हैचरी CM मोहन यादव ने मत्स्य क्षेत्र के लिए बनाया बड़ा रोडमैप

    हर जिले में बनेगी हैचरी CM मोहन यादव ने मत्स्य क्षेत्र के लिए बनाया बड़ा रोडमैप


    नई दिल्ली ।मध्य प्रदेश में मत्स्य क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाने का संकेत दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रालय में आयोजित मछुआ कल्याण और मत्स्य विकास विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रदेश के प्रत्येक जिले में एक हैचरी विकसित की जाए। सरकार का उद्देश्य मछली उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ-साथ प्रदेश को मछली बीज उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना है।

    बैठक में मुख्यमंत्री ने विभागीय योजनाओं और कार्यक्रमों की विस्तार से समीक्षा करते हुए कहा कि एकीकृत मत्स्योद्योग नीति 2026 के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। इस नीति के चलते प्रदेश में 9 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में प्राप्त 2 लाख 91 हजार 938 केज प्रस्तावों के लिए कार्यादेश भी जारी किए जा चुके हैं, जिससे मत्स्य क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार और उत्पादन बढ़ने की संभावना है।

    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि अगले ढाई वर्षों में मध्य प्रदेश को ऐसी स्थिति में पहुंचाना है जहां मछली बीज के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भरता समाप्त हो जाए। इसके लिए हर जिले में आधुनिक हैचरी विकसित करने और उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता ही इस क्षेत्र के सतत विकास की कुंजी होगी।

    बैठक में मोती उत्पादन को लेकर भी विशेष चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में मोती उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं और इसे बढ़ावा देने के लिए अन्य राज्यों की सफल योजनाओं तथा बेहतर कार्यप्रणालियों का अध्ययन किया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बेस्ट प्रैक्टिसेस को अपनाकर प्रदेश में मोती उत्पादन को प्रोत्साहित किया जाए।

    मछली उत्पादन में लगातार वृद्धि को देखते हुए मुख्यमंत्री ने कोल्ड चेन और अन्य आवश्यक बुनियादी सुविधाओं के विकास पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि उत्पादन बढ़ने के साथ भंडारण और परिवहन की मजबूत व्यवस्था जरूरी है ताकि उत्पादकों को बेहतर बाजार और उचित मूल्य मिल सके। इसके साथ ही मछली उत्पादों की ब्रांडिंग और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक नेटवर्किंग विकसित करने के निर्देश भी दिए गए।

    मुख्यमंत्री ने नदियों के पुनर्जीवन और जलीय जीवों के संरक्षण को भी प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने कहा कि जल संसाधनों के संरक्षण और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र के विकास के लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। साथ ही जल संपदा आधारित पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए भी ठोस कार्ययोजना तैयार की जानी चाहिए।

    बैठक में यह जानकारी भी सामने आई कि मछुआ क्रेडिट कार्ड योजना के क्रियान्वयन में मध्य प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर है। मुख्यमंत्री ने इसे संतोषजनक उपलब्धि बताते हुए कहा कि मछुआरों के आर्थिक सशक्तिकरण और कल्याण के लिए योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन जारी रखा जाए। राज्य सरकार की नई पहलें संकेत देती हैं कि आने वाले वर्षों में मध्य प्रदेश मत्स्य उत्पादन, मछली बीज निर्माण और जलीय संसाधनों के प्रबंधन के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकता है।

  • राज्यपाल के निर्देशों पर विभाग की चुप्पी आदिवासी विकास रिपोर्ट 2 महीने से लंबित

    राज्यपाल के निर्देशों पर विभाग की चुप्पी आदिवासी विकास रिपोर्ट 2 महीने से लंबित


    नई दिल्ली ।मध्य प्रदेश में आदिवासी क्षेत्रों के विकास कार्यों को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक मामला चर्चा में आ गया है। राज्यपाल मंगू भाई पटेल द्वारा मांगी गई रिपोर्ट दो महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी राजभवन तक नहीं पहुंची है। मामला आदिवासी और अनुसूचित क्षेत्रों में जल संसाधन विभाग द्वारा कराए गए विकास कार्यों और उन पर खर्च किए गए बजट से जुड़ा हुआ है। रिपोर्ट में देरी को लेकर अब विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

    जानकारी के अनुसार राज्यपाल मंगू भाई पटेल ने आदिवासी क्षेत्रों में चल रही विकास योजनाओं की समीक्षा के उद्देश्य से अप्रैल महीने में जल संसाधन विभाग की प्रमुख अभियंता को पत्र भेजा था। इस पत्र में विशेष रूप से आदिवासी अंचलों में जल आपूर्ति और जल जीवन मिशन से संबंधित परियोजनाओं की विस्तृत जानकारी मांगी गई थी। साथ ही यह भी पूछा गया था कि इन योजनाओं का लाभ कितने लोगों तक पहुंचा और उनका वास्तविक प्रभाव क्या रहा।

    राजभवन की ओर से भेजे गए इस पत्र को दो महीने से अधिक समय बीत चुका है लेकिन विभाग की ओर से अब तक कोई विस्तृत रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई है। बताया जा रहा है कि विभाग के 116 मुख्य अभियंताओं को इस संबंध में जानकारी एकत्र कर रिपोर्ट भेजने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी लेकिन अपेक्षित कार्रवाई समय पर नहीं हो सकी।

    स्थिति तब और गंभीर हो गई जब जून महीने में जनजाति क्षेत्रीय विकास योजना के संचनालय और मध्य प्रदेश शासन ने भी विभाग को अलग से पत्र लिखकर जल्द रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। इसके बावजूद विभागीय स्तर पर अपेक्षित तत्परता नहीं दिखाई गई और मामला लंबित बना हुआ है।

    इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल बजट खर्च को लेकर उठ रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार जल संसाधन विभाग ने पिछले एक वर्ष के दौरान आदिवासी क्षेत्रों में 38 विभिन्न परियोजनाओं पर लगभग 1085 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। विभाग आवंटित बजट का करीब 95 प्रतिशत हिस्सा उपयोग भी कर चुका है। इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद योजनाओं से लाभान्वित हुए लोगों का स्पष्ट ब्यौरा अब तक राजभवन को उपलब्ध नहीं कराया गया है।

    राज्यपाल ने अपने पत्र में विशेष रूप से यह जानकारी मांगी थी कि इन परियोजनाओं से कितने आदिवासी परिवारों को वास्तविक लाभ मिला और योजनाओं का जमीनी प्रभाव क्या रहा। लेकिन करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी लाभार्थियों की संख्या और परियोजनाओं के परिणामों को लेकर रिपोर्ट लंबित रहना कई सवाल खड़े कर रहा है।

    प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि यदि किसी योजना पर बड़ी राशि खर्च की जाती है तो उसकी पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक होता है। ऐसे में राजभवन द्वारा मांगी गई जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं कराना विभागीय समन्वय और जवाबदेही दोनों पर प्रश्नचिह्न लगाता है।

    अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विभाग कब तक रिपोर्ट प्रस्तुत करता है और आदिवासी क्षेत्रों में खर्च किए गए करोड़ों रुपये के वास्तविक परिणामों का विवरण राजभवन के सामने कब आता है। यह मामला आने वाले दिनों में प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना रह सकता है।

  • कहीं ट्रक भिड़े कहीं पलटी गाड़ी ,MP में सड़क दुर्घटनाओं ने छीन ली कई जिंदगियां

    कहीं ट्रक भिड़े कहीं पलटी गाड़ी ,MP में सड़क दुर्घटनाओं ने छीन ली कई जिंदगियां


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश में मंगलवार का दिन सड़क हादसों के लिहाज से बेहद दर्दनाक साबित हुआ। प्रदेश के अलग-अलग जिलों में हुए पांच बड़े सड़क हादसों ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। कहीं तेज रफ्तार ट्रकों की टक्कर ने जान ले ली तो कहीं अनियंत्रित वाहन पलटने से लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इन हादसों में तीन लोगों की मौत हो गई जबकि दर्जनों लोग घायल हुए हैं। हादसों के बाद कई स्थानों पर अफरा-तफरी और चीख पुकार का माहौल देखने को मिला।

    अनूपपुर जिले में नेशनल हाईवे 43 पर टोल प्लाजा के पास एक दर्दनाक हादसा हुआ। सड़क पार कर रहे एक व्यक्ति को तेज रफ्तार बाइक ने टक्कर मार दी। गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया लेकिन उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

    वहीं शाजापुर जिले में नेशनल हाईवे 52 पर उकावता चौकी के पास दो ट्रकों की जोरदार भिड़ंत हो गई। बताया जा रहा है कि पीछे से आ रहे ट्रक चालक को नींद की झपकी आ गई जिसके कारण ट्रक आगे चल रहे वाहन से टकरा गया। हादसा इतना भीषण था कि ट्रक चालक की मौके पर ही मौत हो गई जबकि क्लीनर गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद दोनों को वाहन से बाहर निकाला और घायल को अस्पताल पहुंचाया।

    नरसिंहपुर जिले में तेंदूखेड़ा के पास एक स्कॉर्पियो वाहन गाय को बचाने के प्रयास में अनियंत्रित होकर पलट गया। वाहन में सवार छह लोग घायल हो गए जिनमें चार की हालत गंभीर बताई जा रही है। सभी घायल रीवा जिले के निवासी हैं जो इंदौर से अपनी बहन का इलाज कराकर लौट रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार वाहन तीन बार पलटा जिसके कारण उसका अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।

    पन्ना जिले के शाहनगर थाना क्षेत्र में कचौरी मोड़ के पास एक और भीषण हादसा सामने आया। कटनी से पन्ना जा रहा तेज रफ्तार ट्रक नियंत्रण खो बैठा और सड़क से उतरकर खेतों में घुस गया। लगभग सौ मीटर तक घिसटने के बाद ट्रक एक जामुन के पेड़ से जा टकराया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि ट्रक का केबिन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे में ट्रक के परिचालक की मौके पर ही मौत हो गई जबकि चालक गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस ने क्रेन की मदद से दोनों को वाहन से बाहर निकाला।

    इधर सीहोर जिले में जताखेड़ा के पास चावल से भरा एक ट्रक पलट गया। ट्रक पलटने के बाद उसमें आग लग गई और देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। सूचना मिलने पर पुलिस और अन्य राहत दल मौके पर पहुंचे तथा स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास शुरू किए गए। हादसे के कारणों की जांच की जा रही है।

    लगातार हो रहे सड़क हादसे एक बार फिर सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। तेज रफ्तार, चालक की लापरवाही और थकान जैसी वजहें अक्सर ऐसे हादसों का कारण बनती हैं। पुलिस ने सभी मामलों में जांच शुरू कर दी है और दुर्घटनाओं के कारणों का पता लगाया जा रहा है।

  • अयोध्या के बाद MP की अयोध्या में भी मचा था ,हड़कंप रामराजा मंदिर से गायब हुए थे कैश और आभूषण

    अयोध्या के बाद MP की अयोध्या में भी मचा था ,हड़कंप रामराजा मंदिर से गायब हुए थे कैश और आभूषण


    नई दिल्ली । अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी को लेकर देशभर में चल रही चर्चाओं के बीच मध्य प्रदेश का एक पुराना मामला फिर सुर्खियों में आ गया है। यह मामला बुंदेलखंड की अयोध्या कहे जाने वाले ओरछा स्थित रामराजा सरकार मंदिर से जुड़ा है जहां वर्ष 2017 में चंदे की राशि और आभूषणों में कथित गड़बड़ी का मामला सामने आया था। उस समय इस घटना ने प्रदेशभर में हलचल मचा दी थी और मंदिर प्रबंधन पर कई गंभीर सवाल खड़े हुए थे।

    ओरछा का रामराजा सरकार मंदिर मध्य प्रदेश के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। यहां भगवान श्रीराम को राजा के रूप में पूजा जाता है और देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में मंदिर के चढ़ावे और संपत्तियों में कथित अनियमितता की खबर सामने आने के बाद लोगों की धार्मिक भावनाएं भी आहत हुई थीं।

    मामला उस समय का है जब निवाड़ी जिला अस्तित्व में नहीं आया था और ओरछा अविभाजित टीकमगढ़ जिले का हिस्सा था। आरोप लगाए गए कि मंदिर के खातों दान राशि आभूषणों नगद बही खातों स्टॉक रजिस्टर तथा मंदिर की चल और अचल संपत्तियों के प्रबंधन में वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। जांच के दौरान यह भी कहा गया कि मंदिर से नकदी और कुछ आभूषण गायब पाए गए थे।

    इस मामले में मंदिर के तत्कालीन लिपिक मुन्नालाल तिवारी को आरोपी बनाया गया और उनके खिलाफ धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया। हालांकि जांच लंबे समय तक चलती रही लेकिन कथित चंदा चोरी कांड का कोई स्पष्ट निष्कर्ष सामने नहीं आ सका। यही कारण रहा कि यह मामला वर्षों तक कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में उलझा रहा।

    बाद में मामला मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ पहुंचा। सुनवाई के दौरान अदालत ने जांच प्रक्रिया में हुई देरी पर गंभीर टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि किसी भी नागरिक के सिर पर आपराधिक मुकदमे की तलवार अनिश्चितकाल तक नहीं लटकाई जा सकती। केवल प्रशासनिक कठिनाइयों अधिकारियों के तबादलों सेवानिवृत्ति या दस्तावेज जुटाने में लगने वाला समय जांच को वर्षों तक लंबित रखने का आधार नहीं बन सकता।

    हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अत्यधिक देरी संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों को प्राप्त त्वरित और निष्पक्ष न्याय के अधिकार का उल्लंघन है। इसी आधार पर अदालत ने दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया। यह फैसला उस समय काफी चर्चित रहा था क्योंकि अदालत ने जांच एजेंसियों और प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए थे।

    हालांकि राज्य सरकार ने इस फैसले से असहमति जताई थी और बाद में एकलपीठ के निर्णय के खिलाफ अपील करने की तैयारी भी शुरू की थी। ऐसे में यह मामला पूरी तरह समाप्त नहीं माना गया और कानूनी स्तर पर इसकी चर्चा जारी रही।

    अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर उठे ताजा विवाद के बीच ओरछा का यह पुराना मामला एक बार फिर चर्चा में है। दोनों घटनाएं यह सवाल जरूर खड़ा करती हैं कि देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर मिलने वाले चढ़ावे और संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित करना कितना आवश्यक है।

  • उज्जैन में दर्दनाक सड़क हादसा: तेज रफ्तार डंपर ने तीन मजदूरों को रौंदा, एक की मौत, दो जिंदगी की जंग लड़ रहे

    उज्जैन में दर्दनाक सड़क हादसा: तेज रफ्तार डंपर ने तीन मजदूरों को रौंदा, एक की मौत, दो जिंदगी की जंग लड़ रहे


    मध्यप्रदेश । उज्जैन जिले के नरवर क्षेत्र में सोमवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे ने एक परिवार का सहारा छीन लिया और दो लोगों को जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करने पर मजबूर कर दिया। मजदूरी करने के लिए घर से निकले तीन मजदूरों की यात्रा उस समय हादसे में बदल गई जब उनकी बाइक को एक तेज रफ्तार डंपर ने जोरदार टक्कर मार दी। दुर्घटना इतनी भयावह थी कि एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई जबकि उसके दो साथी गंभीर रूप से घायल हो गए।

    जानकारी के अनुसार नरवर निवासी धर्मेंद्र शेरवाल, कालू नागवंशी और रोशन रोज की तरह मजदूरी के लिए उज्जैन जा रहे थे। तीनों एक ही बाइक पर सवार होकर सुबह घर से निकले थे। जब वे सेमलिया फंटे के पास फोरलेन सड़क पार कर रहे थे तभी देवास की ओर से तेज गति से आ रहे डंपर ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि तीनों युवक सड़क पर दूर जा गिरे और डंपर की चपेट में आ गए।

    हादसे में 39 वर्षीय धर्मेंद्र शेरवाल की मौके पर ही मौत हो गई। अचानक हुई इस घटना से आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तत्काल पुलिस और एम्बुलेंस को सूचना दी। गंभीर रूप से घायल कालू नागवंशी और रोशन को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। कालू की हालत नाजुक होने के कारण उसे देवास के अमलतास अस्पताल रेफर किया गया है जबकि रोशन का इलाज उज्जैन के चरक अस्पताल में जारी है।

    घटना की खबर मिलते ही गांव में शोक और आक्रोश का माहौल बन गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और हादसे के लिए जिम्मेदार डंपर चालक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करने लगे। गुस्साए ग्रामीणों ने कुछ समय के लिए देवास रोड पर प्रदर्शन किया और नारेबाजी करते हुए प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई। लोगों का कहना था कि इस मार्ग पर भारी वाहनों की तेज रफ्तार लंबे समय से दुर्घटनाओं का कारण बन रही है लेकिन इसके बावजूद प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

    सूचना मिलने पर नरवर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को समझाइश देकर स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस अधिकारियों ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और दोषी चालक के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होगी। इसके बाद प्रदर्शन समाप्त कराया गया।

    पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त डंपर को जब्त कर लिया है और चालक की तलाश शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार को हादसे का प्रमुख कारण माना जा रहा है। वहीं मृतक के शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया गया है।

    इस हादसे ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और भारी वाहनों की लापरवाह ड्राइविंग पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन समय रहते प्रभावी कदम उठाए तो ऐसी दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है और कई परिवारों को उजड़ने से बचाया जा सकता है।

  • सरकारी भवनों पर कब्जे का शिकंजा 38 लाख की लैब में बस गया परिवार आंगनबाड़ी पर 6 साल से दबंग का ताला

    सरकारी भवनों पर कब्जे का शिकंजा 38 लाख की लैब में बस गया परिवार आंगनबाड़ी पर 6 साल से दबंग का ताला


    मध्यप्रदेश । सरकारी जमीनों और भवनों को अतिक्रमण मुक्त कराने के दावे करने वाला प्रशासन शिवपुरी जिले में अपनी ही संपत्तियों को कब्जे से मुक्त नहीं करा पा रहा है। हालात यह हैं कि बदरवास में लाखों रुपए की लागत से बनी मृदा परीक्षण प्रयोगशाला पिछले सात वर्षों से एक परिवार के कब्जे में है जबकि कोलारस क्षेत्र के एक गांव में आंगनबाड़ी केंद्र पर छह साल से ताला लटका हुआ है। इन दोनों मामलों ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली और सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    बदरवास तहसील कार्यालय के पीछे वर्ष 2018 में मंडी बोर्ड द्वारा कृषि विभाग के लिए आधुनिक मृदा परीक्षण प्रयोगशाला का निर्माण कराया गया था। करीब 38 लाख रुपए की लागत से तैयार इस भवन का उद्देश्य किसानों को मिट्टी की जांच की सुविधा उपलब्ध कराना था ताकि वे अपनी फसलों के लिए वैज्ञानिक सलाह प्राप्त कर सकें। लेकिन प्रयोगशाला शुरू होने से पहले ही भवन पर एक परिवार ने कब्जा जमा लिया और धीरे-धीरे उसे अपने आवास में तब्दील कर दिया। आज स्थिति यह है कि जिस भवन में किसानों के हित से जुड़ी अत्याधुनिक सुविधाएं शुरू होनी थीं वहां घरेलू गतिविधियां संचालित हो रही हैं।

    कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि भवन खाली कराने के कई प्रयास किए गए लेकिन सफलता नहीं मिली। विभाग का आरोप है कि कब्जाधारी के खिलाफ कार्रवाई करने में कई तरह की बाधाएं सामने आती रही हैं। इस संबंध में राजस्व विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों को कई बार अवगत कराया गया लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। परिणामस्वरूप लाखों रुपए की सरकारी संपत्ति वर्षों से बेकार पड़ी हुई है और किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा।

    दूसरी ओर कोलारस विकासखंड के ग्राम सेसईखुर्द में स्थित शासकीय आंगनबाड़ी केंद्र भी वर्षों से अपने मूल उद्देश्य से भटका हुआ है। जानकारी के अनुसार वर्ष 2020 में आए एक तेज तूफान के बाद एक स्थानीय व्यक्ति ने आंगनबाड़ी भवन का ताला तोड़कर उसमें अपना सामान रख लिया और धीरे-धीरे पूरे भवन पर कब्जा कर लिया। बताया जाता है कि बाद में भवन की संरचना में भी बदलाव कर दिया गया। इसके चलते आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन प्रभावित हो गया और बच्चों तथा गर्भवती महिलाओं को मिलने वाली कई महत्वपूर्ण योजनाओं का लाभ बाधित हो गया।

    स्थानीय स्तर पर आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन वैकल्पिक व्यवस्था के तहत किया जा रहा है लेकिन सरकारी भवन पर कब्जा होने से व्यवस्थाएं पूरी तरह सुचारू नहीं हो पा रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायतें करने के बावजूद अब तक स्थायी समाधान नहीं निकला है।

    इन दोनों मामलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी भवनों की सुरक्षा और संरक्षण को लेकर जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर पुनर्विचार की आवश्यकता है। यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो करोड़ों रुपए की सार्वजनिक संपत्तियां इसी तरह अतिक्रमण और लापरवाही की भेंट चढ़ती रहेंगी। प्रशासनिक अधिकारियों ने कार्रवाई का भरोसा जरूर दिया है लेकिन अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि जमीन पर परिणाम कब दिखाई देते हैं।

  • शिवपुरी में दर्दनाक सड़क हादसा तेज रफ्तार बाइक की टक्कर से बुजुर्ग की मौत दो युवक गंभीर

    शिवपुरी में दर्दनाक सड़क हादसा तेज रफ्तार बाइक की टक्कर से बुजुर्ग की मौत दो युवक गंभीर


    मध्यप्रदेश । शिवपुरी जिले के बदरवास थाना क्षेत्र में रविवार रात एक दर्दनाक सड़क हादसे ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। राष्ट्रीय राजमार्ग 46 पर अटलपुर गांव के समीप तेज रफ्तार बाइक की टक्कर से एक 60 वर्षीय बुजुर्ग की मौत हो गई जबकि बाइक पर सवार दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और राहगीरों की मदद से घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया।

    जानकारी के अनुसार यह दुर्घटना रविवार रात करीब साढ़े नौ बजे हुई। मोहनपुर निवासी 60 वर्षीय ओंकार सिंह पटेलिया सड़क किनारे खड़े थे। इसी दौरान तेज गति से आ रही एक बाइक अनियंत्रित होकर उनसे जा टकराई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बुजुर्ग दूर जा गिरे और गंभीर रूप से घायल हो गए। वहीं बाइक पर सवार दोनों युवक भी सड़क पर गिरकर बुरी तरह घायल हो गए।

    हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और घायलों को तत्काल उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया। गंभीर रूप से घायल ओंकार सिंह पटेलिया को शिवपुरी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की लेकिन उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। उनकी मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।

    दुर्घटना में घायल बाइक सवार दोनों युवकों की हालत भी गंभीर बताई जा रही है। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए गुना रेफर किया गया है। समाचार लिखे जाने तक दोनों की पहचान नहीं हो सकी थी। पुलिस उनकी शिनाख्त करने और परिजनों तक सूचना पहुंचाने का प्रयास कर रही है।

    घटना के बाद मेडिकल कॉलेज चौकी पुलिस ने मामले की जानकारी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सोमवार को मृतक का पोस्टमार्टम कराए जाने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस दुर्घटना के वास्तविक कारणों की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि बाइक की गति कितनी थी तथा हादसे के पीछे लापरवाही या अन्य कोई कारण तो नहीं था।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर अक्सर तेज रफ्तार वाहनों की वजह से हादसे होते रहते हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि संवेदनशील क्षेत्रों में यातायात नियंत्रण के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

    यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के पालन की जरूरत को रेखांकित करता है। तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाना न केवल चालक बल्कि सड़क पर मौजूद अन्य लोगों की जान के लिए भी बड़ा खतरा बन सकता है।