Tag: Madhya Pradesh News

  • शिवपुरी में पति-पत्नी के विवाद ने लिया खतरनाक मोड़, पत्नी कुएं में कूदी, आधे घंटे तक ग्रामीणों की अटकी रहीं सांसें

    शिवपुरी में पति-पत्नी के विवाद ने लिया खतरनाक मोड़, पत्नी कुएं में कूदी, आधे घंटे तक ग्रामीणों की अटकी रहीं सांसें


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले के सहरिया गांव में पति-पत्नी के बीच विवाद का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। बुधवार दोपहर हुई कहासुनी के बाद एक महिला स्कूल के पास बने गहरे कुएं में कूद गई। महिला को कुएं में उतरता देख पति ने उसे बाहर निकालने की कोशिश की और रस्सी डाली लेकिन वह बाहर आने के लिए तैयार नहीं हुई। बताया गया कि महिला इस बात से नाराज थी कि उसका पति घर के दरवाजे पर बाहर से ताला लगा देता था। करीब आधे घंटे तक चले इस घटनाक्रम के दौरान ग्रामीण भी मौके पर जुट गए। आखिरकार पति ने सबके सामने हाथ जोड़कर और कान पकड़कर माफी मांगी जिसके बाद महिला कुएं से बाहर आने को तैयार हुई।

    जानकारी के मुताबिक सहरिया गांव में रहने वाले जितेंद्र वंशकार खेती-किसानी करते हैं। परिवार में उनके वृद्ध माता-पिता के अलावा तीन बेटियां और एक बेटा है। ग्रामीणों के अनुसार पति-पत्नी के बीच अक्सर विवाद होता रहता था। आरोप है कि जितेंद्र अपनी पत्नी के चरित्र पर शक करता था और इसी वजह से कई बार घर के दरवाजे पर बाहर से ताला लगा देता था। इस व्यवहार से महिला नाराज थी। बुधवार दोपहर भी इसी बात को लेकर दोनों के बीच कहासुनी हुई। विवाद बढ़ने के बाद महिला घर से निकलकर स्कूल के पास स्थित गहरे कुएं में कूद गई।

    महिला के कुएं में उतरने की जानकारी मिलते ही पति ने उसे बचाने का प्रयास किया। उसने कुएं में रस्सी डाली और पत्नी से बाहर आने को कहा लेकिन महिला ने इनकार कर दिया। रिपोर्ट के मुताबिक उसने शर्त रखी कि जब तक पति ग्रामीणों के सामने हाथ जोड़कर माफी नहीं मांगेगा तब तक वह कुएं से बाहर नहीं आएगी। इस बीच मौके पर ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। महिला को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए रस्सी और चारपाई भी अंदर डाले जाने की जानकारी सामने आई है। कुएं में महिला के करीब आधे घंटे तक रहने से मौके पर मौजूद लोगों की चिंता बढ़ गई।

    आखिरकार पति ने ग्रामीणों के सामने हाथ जोड़कर माफी मांगी और कान पकड़कर अपनी गलती स्वीकार करने का प्रयास किया। इसके बाद महिला शांत हुई और कुएं से बाहर निकल आई। घटना के दौरान किसी बड़ी अनहोनी की आशंका बनी रही। हालांकि महिला के बाहर आने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली। यह स्पष्ट नहीं है कि दंपती के बीच पहले हुए विवादों को लेकर कभी पुलिस या किसी अन्य स्तर पर शिकायत की गई थी या नहीं।

    दिनारा थाना प्रभारी रवींद्र कुशवाहा के मुताबिक फिलहाल महिला या उसके परिवार की ओर से पुलिस थाने में कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। उन्होंने बताया कि यदि महिला या उसका परिवार शिकायत लेकर आता है तो मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस के पास औपचारिक शिकायत नहीं पहुंची है इसलिए घटना से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

    यह घटना घरेलू विवाद के दौरान पैदा हुई गंभीर स्थिति को सामने लाती है। कुएं जैसे खतरनाक स्थान पर पहुंचना महिला की जान के लिए जोखिम भरा हो सकता था। ऐसे मामलों में विवाद बढ़ने पर सुरक्षित तरीके से मदद लेना और जरूरत पड़ने पर पुलिस या स्थानीय प्रशासन से संपर्क करना जरूरी है। फिलहाल महिला के कुएं से सुरक्षित बाहर आने के बाद आगे की स्थिति पर नजर है और पुलिस का कहना है कि शिकायत मिलने पर जांच की जाएगी।

  • आदिवासियों के मकान तोड़ने पर घमासान, वन विभाग ने अतिक्रमण बताया, पीड़ित आज मुख्यमंत्री मोहन यादव के सामने रखेंगे पक्ष

    आदिवासियों के मकान तोड़ने पर घमासान, वन विभाग ने अतिक्रमण बताया, पीड़ित आज मुख्यमंत्री मोहन यादव के सामने रखेंगे पक्ष


    सीहोर 
    । मध्यप्रदेश के सीहोर जिले के कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने का मामला लगातार तूल पकड़ रहा है। वन विभाग की कार्रवाई के विरोध में खिवनी अभयारण्य क्षेत्र के 35 से अधिक गांवों के आदिवासी गुरुवार को भोपाल पहुंचकर मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात करने की तैयारी में हैं। वे मुख्यमंत्री के सामने अपनी समस्याएं रखेंगे और जमीन से जुड़े दस्तावेज भी दिखाएंगे। कोसमी गांव में 12 आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने के बाद पिछले तीन दिनों से विरोध प्रदर्शन जारी है। इस मामले में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी पीड़ित परिवारों से मिल चुके हैं। उन्होंने कार्रवाई को अत्याचार की पराकाष्ठा बताते हुए नाराजगी जताई थी।

    वन विभाग ने 11 अक्टूबर को कोसमी गांव में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की थी। इस दौरान आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े गए और एक कुएं को मिट्टी से भर दिया गया। प्रभावित परिवारों का कहना है कि वे कई पीढ़ियों से इस क्षेत्र में रह रहे हैं और खेती के जरिए अपना जीवनयापन करते हैं। मकान टूटने से 12 परिवारों के सामने रहने और आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। आंदोलन में शामिल रमेश बारेला के मुताबिक आदिवासी समाज की मांग है कि कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कदम उठाए जाएं। प्रभावित परिवारों को जमीन के पट्टे दिए जाएं और उनके रहने भोजन तथा स्वास्थ्य की व्यवस्था की जाए। साथ ही फसलों को हुए नुकसान का मुआवजा भी दिया जाए।

    आदिवासी समाज ने आरोप लगाया है कि खिवनी अभयारण्य क्षेत्र के 35 से अधिक गांवों में जनजातीय किसानों को खेती करने से रोका जा रहा है। इससे उन परिवारों की आजीविका प्रभावित हो रही है जो लंबे समय से कृषि और जंगल पर निर्भर हैं। समाज ने सीहोर जिले के कई गांवों के साथ विदिशा जिले के ग्यारसपुर मेहंदीपुर डगरवाड़ा बदनपुर शमशाबाद लटेरी और सिरोंज क्षेत्रों में भी जमीन से जुड़े विवादों और बेदखली की शिकायतें उठाई हैं। आदिवासी प्रतिनिधियों ने पुराने पट्टों और जमीन के दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की है।

    आंदोलनकारियों का दावा है कि जून 2025 में खिवनी क्षेत्र में 50 से अधिक परिवारों के मकान तोड़े गए थे। यारनगर में 18 परिवारों के पट्टे अमान्य किए जाने और ग्यारसपुर में करीब 115 लोगों की फसलें नष्ट किए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं। इन शिकायतों की जांच और प्रभावित परिवारों के अधिकारों की सुरक्षा को लेकर आदिवासी समाज मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग करेगा। रमेश बारेला ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रस्तावित पदयात्रा में शिवराज सिंह चौहान के शामिल होने की जानकारी उनके पास नहीं है और इसमें आदिवासी समाज के लोग ही हिस्सा लेंगे।

    दूसरी ओर वन विकास निगम के अधिकारियों का कहना है कि संबंधित परिवारों ने वन भूमि पर अवैध कब्जा किया था। सीहोर कलेक्टर की जांच रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2020 में 186.960 हेक्टेयर वन भूमि सामान्य वन मंडल से वन विकास निगम के सीहोर परियोजना मंडल को हस्तांतरित की गई थी। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वर्ष 2021 में इसके 135 हेक्टेयर क्षेत्र में 3 लाख 37 हजार 500 सागौन के पौधे लगाए गए थे। इनमें से 78 हजार 700 पौधे काटे जाने और 31.48 हेक्टेयर जमीन पर कब्जे की बात भी रिपोर्ट में कही गई है।

    जांच रिपोर्ट में गूगल अर्थ की टाइमलाइन तस्वीरों को भी आधार बनाया गया है। इसके मुताबिक वर्ष 2021 तक संबंधित क्षेत्र खाली दिखाई देता था जबकि 2022 से वहां झोपड़ियों और खेती के संकेत मिले। रिपोर्ट के अनुसार 11 अक्टूबर की कार्रवाई में नौ झोपड़ियां हटाई गईं और पूरी प्रक्रिया की ड्रोन वीडियोग्राफी कराई गई। वन विभाग का दावा है कि रिजर्व फॉरेस्ट की 31.48 हेक्टेयर भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है।

    इस मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने भी मध्यप्रदेश सरकार और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब मांगा है। अब मुख्यमंत्री से प्रस्तावित मुलाकात और सरकारी पक्ष की जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि प्रभावित परिवारों की मांगों पर क्या निर्णय लिया जाता है। फिलहाल जमीन के अधिकारों और वन भूमि से जुड़े नियमों को लेकर विवाद जारी है।


  • भोपाल के न्यू मार्केट में आग से करोड़ों का नुकसान, अब दुकान संचालक पर केस, फायर सेफ्टी की भी होगी जांच

    भोपाल के न्यू मार्केट में आग से करोड़ों का नुकसान, अब दुकान संचालक पर केस, फायर सेफ्टी की भी होगी जांच


    भोपाल । भोपाल के न्यू मार्केट में 8 अक्टूबर को लगी भीषण आग के मामले में पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है। बालाजी छोले-भटूरे दुकान के संचालक दीप उर्फ दीपू अग्रवाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस की जांच में सामने आया है कि दुकान में जल रही भट्टी के पास रखे कपड़े में आग लगी थी। इसके बाद आग की लपटें तेजी से फैल गईं और आसपास की दुकानें भी इसकी चपेट में आ गईं। इस हादसे में कई दुकानों और एक दर्जन से ज्यादा रेहड़ियों को नुकसान पहुंचा था। घटना के बाद करोड़ों रुपये के नुकसान की बात सामने आई थी। अब पुलिस के साथ नगर निगम भी बाजार में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सख्ती कर रहा है।

    जांच के मुताबिक बालाजी छोले-भटूरे की दुकान में भट्टी जल रही थी। उसके पास रखे कपड़े में आग लगने के बाद लपटें फैलती चली गईं। देखते ही देखते आग ने आसपास की चार अन्य दुकानों को भी प्रभावित किया। इनमें आम्रपाली रेस्टोरेंट विजय स्टोर एक कैफे और मोबाइल की दुकान शामिल थीं। हादसे के बाद आम्रपाली रेस्टोरेंट के संचालक पवन अग्रवाल ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। इसी शिकायत के आधार पर टीटी नगर पुलिस ने लापरवाही और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। थाना प्रभारी गौरव सिंह दोहर के मुताबिक आग की शुरुआत भट्टी के पास रखे कपड़े से हुई थी।

    दूसरी ओर नगर निगम यह भी जांच कर रहा है कि संबंधित दुकान में आग से बचाव के जरूरी इंतजाम मौजूद थे या नहीं। फायर सेफ्टी व्यवस्था की जांच के बाद इस संबंध में स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। यह घटना एक बार फिर बाजारों में अग्नि सुरक्षा और दुकानों के आसपास रखे सामान से पैदा होने वाले खतरे को लेकर सवाल खड़े करती है।

    आग लगने के दौरान दमकल वाहनों को बाजार में आगे बढ़ने में परेशानी हुई थी। दुकानों के सामने रखे सामान और रेहड़ियों के कारण रास्ता बाधित होने की बात सामने आई थी। इसी के बाद नगर निगम ने न्यू मार्केट को नो-हॉकर्स जोन बनाने की दिशा में कार्रवाई तेज कर दी है। बुधवार को करीब तीन घंटे तक मॉकड्रिल की गई और दो दमकल वाहनों को बाजार में चलाकर रास्तों की स्थिति देखी गई। जहां दमकलों के आगे बढ़ने में बाधा आई वहां निगम के अमले ने सामान जब्त किया।

    नगर निगम अब रेहड़ी संचालकों को टीटी नगर स्टेडियम के पास हाट बाजार में शिफ्ट करने की तैयारी कर रहा है। अधिकारियों ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि तय स्थान पर नहीं जाने वाले हॉकर्स के खिलाफ जब्ती की कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही दुकानों के सामने पीली लाइन की दोबारा मार्किंग की जा रही है। दुकानदारों को चेतावनी दी गई है कि निर्धारित सीमा से आगे सामान रखने पर कार्रवाई होगी।

    इस घटना के बाद बाजार में आग से बचाव के इंतजामों को लेकर व्यापक सवाल भी उठ रहे हैं। हादसे वाली जगह से करीब 100 फीट की दूरी पर दो अन्य छोले-भटूरे की दुकानें संचालित हो रही हैं। आसपास नमकीन की दुकानें भी हैं जहां भट्टियां जलती हैं। ऐसे में सुरक्षा इंतजामों की नियमित जांच जरूरी मानी जा रही है।

    भोपाल के दूसरे बाजारों में भी अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति चिंता का विषय रही है। चौक बाजार और इब्राहिमपुरा की संकरी गलियों में आग बुझाने के लिए करीब 22 लाख रुपये का अंडरग्राउंड फायर हाइड्रेंट सिस्टम लगाया गया था। लेकिन जुलाई 2026 में नेमा डिजाइनर स्टूडियो में आग लगने के दौरान सिस्टम के काम नहीं करने की बात सामने आई थी। इसकी प्रेशर टेस्टिंग और रखरखाव पर भी सवाल उठे थे। जुमेराती इब्राहिमपुरा नदीम रोड और घोड़ा नक्कास समेत अन्य बाजारों में भी सुरक्षा इंतजामों की नियमित जांच की जरूरत है।

    बैरागढ़ के संत हिरदाराम शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में 17 दिसंबर 2017 को लगी आग में 100 से ज्यादा कपड़ा दुकानें जलकर खाक हो गई थीं। इसके बाद फायर सुरक्षा उपकरण लगाने के निर्देश दिए गए थे लेकिन उनके रखरखाव को लेकर सवाल उठते रहे हैं। न्यू मार्केट की घटना ने साफ कर दिया है कि केवल उपकरण लगाना पर्याप्त नहीं है। समय पर जांच नियमित रखरखाव और दमकल वाहनों के लिए रास्ते खुले रखना भी उतना ही जरूरी है।


  • मैहर में मां शारदा के दरबार में उमड़ा आस्था का सैलाब, सुबह 11 बजे तक 71 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

    मैहर में मां शारदा के दरबार में उमड़ा आस्था का सैलाब, सुबह 11 बजे तक 71 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने किए दर्शन


    मैहर । शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर मध्य प्रदेश के मैहर स्थित त्रिकूट पर्वत पर विराजमान मां शारदा के दरबार में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। देश के अलग-अलग हिस्सों से भक्त माता के दर्शन करने पहुंच रहे हैं। बुधवार 14 अक्टूबर 2026 को भी सुबह से ही मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला जारी रहा। सुबह 11 बजे तक कुल 71 हजार 570 श्रद्धालु मां शारदा के दर्शन कर चुके थे। नवरात्र के दौरान बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा के साथ ही दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए हैं।

    मैहर में मां शारदा के दर्शन के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालुओं में सबसे बड़ी संख्या पैदल मार्ग का इस्तेमाल करने वालों की रही। सुबह 11 बजे तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 68 हजार 500 श्रद्धालु पैदल मार्ग से मंदिर पहुंचे। वहीं 870 भक्त वैन मार्ग के जरिए दर्शन करने पहुंचे। इसके अलावा रोपवे की सुविधा का उपयोग करते हुए 2 हजार 200 श्रद्धालुओं ने मंदिर तक पहुंचकर मां के दर्शन किए। इन तीनों माध्यमों से पहुंचे भक्तों की कुल संख्या 71 हजार 570 दर्ज की गई। नवरात्र के दौरान मंदिर परिसर और दर्शन मार्गों पर लगातार चहल पहल बनी हुई है।

    मां शारदा के दरबार में उमड़ रही भीड़ के बीच श्रद्धालुओं को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से दर्शन कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मेले में तैनात पुलिसकर्मी लगातार व्यवस्था संभाल रहे हैं। महिलाओं और बुजुर्गों के साथ दिव्यांग श्रद्धालुओं को दर्शन के दौरान जरूरी सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। भीड़ को नियंत्रित करने और किसी भी तरह की अव्यवस्था से बचने के लिए पुलिस बल को अलग-अलग स्थानों पर तैनात किया गया है। प्रशासन का जोर इस बात पर है कि भक्तों को दर्शन के लिए अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

    नवरात्र मेले में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत की गई है। इससे पहले रीवा जोन के आईजी गौरव राजपूत और डीआईजी हेमंत चौहान ने मैहर पहुंचकर मां शारदा के दर्शन किए थे। इस दौरान उन्होंने मेले की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा भी लिया। अधिकारियों के निरीक्षण के बाद पुलिस इंतजामों को और प्रभावी बनाने की दिशा में कदम उठाए गए।

    मेले में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए भोपाल स्थित पुलिस मुख्यालय से अतिरिक्त पुलिस बल उपलब्ध कराया गया है। पुलिस ट्रेनिंग सेंटर रीवा से एक उप पुलिस अधीक्षक सहित 100 आरक्षकों को मेला ड्यूटी में तैनात किया गया है। अतिरिक्त बल की तैनाती का उद्देश्य श्रद्धालुओं की आवाजाही पर नजर रखना और भीड़ के दबाव के बीच व्यवस्था को बनाए रखना है।

    शारदीय नवरात्र के दौरान मैहर में मां शारदा के दर्शन के लिए भक्तों का पहुंचना जारी है। सुबह 11 बजे तक 71 हजार से अधिक श्रद्धालुओं का मंदिर पहुंचना मेले में उमड़ रही आस्था और उत्साह को दर्शाता है। प्रशासन और पुलिस की कोशिश है कि नवरात्र के शेष दिनों में भी श्रद्धालुओं को सुरक्षित माहौल और बेहतर व्यवस्था के बीच मां शारदा के दर्शन कराए जा सकें।

  • रावण दहन किस शास्त्र में लिखा है, उज्जैन में युवा ब्राह्मण समाज का सवाल, चार समितियों को कानूनी नोटिस

    रावण दहन किस शास्त्र में लिखा है, उज्जैन में युवा ब्राह्मण समाज का सवाल, चार समितियों को कानूनी नोटिस

     
    उज्जैन  मध्य प्रदेश के उज्जैन में दशहरे पर होने वाले रावण दहन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज ने रावण दहन आयोजित करने वाली चार समितियों को वकील के माध्यम से कानूनी नोटिस भेजकर सात दिन के भीतर जवाब मांगा है। समाज ने आयोजकों से सवाल किया है कि आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को रावण वध होने का उल्लेख किस धर्मशास्त्र या पुराण में मिलता है। नोटिस में कहा गया है कि यदि निर्धारित समय में संतोषजनक प्रमाण नहीं दिया गया तो वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है। इस मामले के सामने आने के बाद शहर में दशहरा उत्सव से पहले धार्मिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है।उज्जैन  ।

    जानकारी के मुताबिक 20 अक्टूबर को दशहरा पर्व के अवसर पर उज्जैन में विभिन्न स्थानों पर रावण दहन के कार्यक्रम आयोजित किए जाने हैं। इससे पहले अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज ने इस पर आपत्ति जताते हुए संबंधित आयोजक समितियों को नोटिस जारी कराया है। महाकाल मंदिर के पुजारी और संगठन के संस्थापक अध्यक्ष महेश पुजारी ने अधिवक्ता अश्विन चौधरी के माध्यम से यह नोटिस भिजवाया है। जिन चार समितियों को नोटिस भेजा गया है उनमें लाला ओम अमरनाथ खत्री दशहरा उत्सव समिति कार्तिक मेला दशहरा उत्सव समिति सिद्धवट दशहरा समिति और शास्त्री नगर दशहरा उत्सव समिति शामिल हैं।

    नोटिस में आयोजकों से कहा गया है कि वे स्पष्ट करें कि आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को रावण वध किए जाने का उल्लेख किस धार्मिक ग्रंथ में मौजूद है। समाज ने संबंधित समितियों से इस तिथि पर रावण दहन नहीं करने का अनुरोध भी किया है। नोटिस के अनुसार सात दिन के भीतर शास्त्रीय आधार स्पष्ट नहीं किया गया तो आगे कानूनी कदम उठाने की चेतावनी दी गई है। इसमें संभावित कार्रवाई से जुड़े हर्जे और खर्च की जिम्मेदारी भी आयोजक समितियों पर डालने की बात कही गई है। हालांकि इस मामले में आयोजक समितियों का पक्ष सामने आने के बाद ही उनकी प्रतिक्रिया और आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

    अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज के संस्थापक अध्यक्ष महेश पुजारी का कहना है कि रावण दहन के नाम पर ब्राह्मण समाज का अपमान नहीं होना चाहिए। उनका आरोप है कि देश के कई हिस्सों में रावण दहन की परंपरा के दौरान ब्राह्मण समुदाय की भावनाएं आहत होती हैं। उन्होंने आयोजक समितियों से सवाल किया कि यदि रावण दहन धार्मिक परंपरा का हिस्सा है तो उसके समर्थन में शास्त्रीय प्रमाण सार्वजनिक किए जाने चाहिए। महेश पुजारी का कहना है कि रावण के चरित्र और उससे जुड़ी धार्मिक मान्यताओं पर चर्चा करते समय किसी समुदाय का अपमान नहीं किया जाना चाहिए।

    महेश पुजारी ने यह भी कहा कि अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज देश की विभिन्न संस्थाओं से रावण दहन बंद करने का अनुरोध कर रहा है। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए ब्राह्मणों की शिखा और यज्ञोपवीत के अपमान की घटनाओं पर भी अपनी बात रखी। संगठन की मांग है कि धार्मिक आयोजनों में किसी समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली गतिविधियों से बचा जाए।

    फिलहाल उज्जैन में दशहरे से पहले रावण दहन का मुद्दा चर्चा का विषय बन गया है। एक ओर आयोजन समितियों की तैयारियां जारी हैं तो दूसरी ओर युवा ब्राह्मण समाज ने शास्त्रीय प्रमाण और जवाबदेही की मांग उठाई है। अब सात दिन की समयसीमा में समितियां क्या जवाब देती हैं और इस विवाद पर प्रशासन या आयोजकों की ओर से क्या रुख सामने आता है इस पर सबकी नजर रहेगी।

  • कांग्रेस का झंडा नहीं, सनातन स्वाभिमान का संदेश लेकर निकलेंगे दिग्विजय सिंह, उज्जैन से अयोध्या तक पत्नी के साथ 950 किमी की पदयात्रा

    कांग्रेस का झंडा नहीं, सनातन स्वाभिमान का संदेश लेकर निकलेंगे दिग्विजय सिंह, उज्जैन से अयोध्या तक पत्नी के साथ 950 किमी की पदयात्रा


    उज्जैन । महाकाल से रामलला तक दिग्विजय सिंह की पदयात्रा, पांच पवित्र नदियों का जल लेकर जाएंगे अयोध्या
    मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह 20 अक्टूबर को विजयादशमी के अवसर पर उज्जैन के महाकाल मंदिर से सत्य-सनातन स्वाभिमान यात्रा की शुरुआत करेंगे। इस यात्रा का मुख्य आकर्षण पांच पवित्र नदियों के जल से भरे कलश होंगे जिन्हें विशेष रूप से तैयार किए जा रहे रथ में रखकर अयोध्या ले जाया जाएगा। करीब 950 किलोमीटर लंबी इस पदयात्रा का समापन अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में करने की योजना है। यात्रा में दिग्विजय सिंह की पत्नी अमृता राय भी उनके साथ पैदल चलेंगी। आयोजकों के मुताबिक यह यात्रा लगभग 70 दिनों में पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।
    यात्रा को लेकर उज्जैन में तैयारियां तेज हो गई हैं। मंगलवार को शिप्रा गार्डन में आयोजित बैठक में आयोजन की रूपरेखा और व्यवस्थाओं पर चर्चा की गई। यात्रा के शुभारंभ के दिन 20 अक्टूबर को सुबह 8 बजे नृसिंह घाट के पास बालाजी गार्डन में पार्थिव शिवलिंग निर्माण और पूजन-अर्चन का कार्यक्रम प्रस्तावित है। इसमें दिग्विजय सिंह के साथ हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना जताई गई है। धार्मिक अनुष्ठान के बाद कन्या भोज और विशाल भंडारे का आयोजन होगा। इसके बाद पदयात्रा अपने गंतव्य अयोध्या की ओर रवाना होगी।
    आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि यात्रा में कांग्रेस या किसी अन्य राजनीतिक दल के झंडे और बैनर का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। इसका उद्देश्य सत्य धर्म न्याय सामाजिक सद्भाव और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति लोगों को जागरूक करना बताया गया है। इसके साथ ही चंदा चोरी और वोट चोरी के आरोपों को लेकर जवाबदेही तय करने की मांग भी यात्रा के दौरान उठाई जाएगी। आयोजक इसे किसी राजनीतिक दल के कार्यक्रम के बजाय सामाजिक और धार्मिक जनजागरण की पहल के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं।
    यात्रा के दौरान दिग्विजय सिंह और अमृता राय प्रतिदिन करीब 15 किलोमीटर पैदल चलेंगे। आयोजकों की योजना के अनुसार यात्रा में लगभग 2000 से 3000 लोगों के शामिल होने की व्यवस्था की जा रही है। अलग-अलग पड़ावों पर यात्रा से जुड़ने के लिए लोगों ने पंजीकरण भी कराया है। दिग्विजय सिंह यात्रा की तैयारी के लिए नियमित रूप से पैदल चलने का अभ्यास कर रहे हैं ताकि लंबे सफर के दौरान निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ा जा सके।
    उज्जैन जिले में यात्रा का प्रवास पांच दिनों का प्रस्तावित है। पहला पड़ाव कनिपुरा में होगा। इसके बाद यात्रा सिंदूरिया तराना और कनासिया से होते हुए शाजापुर जिले में प्रवेश करेगी। रास्ते में विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के शामिल होने की व्यवस्था की जा रही है। इस दौरान धार्मिक आयोजनों और जनसंपर्क के जरिए यात्रा के संदेश को लोगों तक पहुंचाने की तैयारी है।
    यात्रा के लिए विशेष रथ तैयार किया जा रहा है जिसमें पांच पवित्र नदियों के जल से भरे कलश स्थापित किए जाएंगे। भरत पोरवाल के निर्देशन में महावीर जैन और सतीश शर्मा रथ निर्माण का काम कर रहे हैं। इसी क्रम में शिप्रा नदी का जल कल्याणपुरा घाट से एकत्र किया गया। सुरेंद्र सुहाने अभिषेक गौर योगेंद्र सिंह परिहार भरत पोरवाल और नासिर पटेल ने इस प्रक्रिया में भाग लिया। शिप्रा नदी से लाया गया जल फिलहाल राजेंद्र वशिष्ठ के निवास स्थित मंदिर में सुरक्षित रखा गया है। यात्रा के शुभारंभ पर इसे विशेष रथ में स्थापित किया जाएगा। अब सभी की निगाहें 20 अक्टूबर को होने वाले शुभारंभ और उज्जैन से अयोध्या तक निकलने वाली इस लंबी पदयात्रा पर टिकी हैं।
  • सिंधिया परिवार के महासमझौते पर संकट, धोखाधड़ी के आरोपों के बीच आज तय होगी संपत्ति विवाद की अगली राह

    सिंधिया परिवार के महासमझौते पर संकट, धोखाधड़ी के आरोपों के बीच आज तय होगी संपत्ति विवाद की अगली राह


    ग्वालियर । ग्वालियर के सिंधिया राजपरिवार की करीब 41 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति के बंटवारे से जुड़े बहुचर्चित विवाद में बुधवार 14 अक्टूबर को अहम कानूनी मोड़ आ सकता है। लंबे समय से चल रहे इस मामले में परिवार के सदस्यों के बीच आपसी सहमति से तैयार किया गया समझौता प्रस्ताव एक बार फिर कानूनी अड़चनों में उलझ गया है। अतिरिक्त सत्र न्यायालय में बुधवार को अंतरिम आवेदन और आपत्ति आवेदन पर बहस होनी है। इस सुनवाई के बाद अदालत तय कर सकती है कि मामले को आगे किस प्रक्रिया के तहत बढ़ाया जाएगा। सबसे बड़ा सवाल यह है कि सुनवाई अंतरिम आवेदनों तक सीमित रहेगी या फिर प्रतिमा देवी की आपत्ति स्वीकार कर साक्ष्यों के आधार पर मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी।

    इस संपत्ति विवाद में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआ वसुंधरा राजे यशोधरा राजे तथा उषा राजे के बीच पैतृक संपत्ति में हिस्सेदारी को लेकर कानूनी प्रक्रिया चल रही है। लंबे विवाद के बाद दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से एक राजीनामा तैयार कर अदालत में पेश किया था। माना जा रहा था कि इस समझौते से वर्षों पुराने विवाद को खत्म करने का रास्ता साफ हो जाएगा। हालांकि दिवंगत पद्मावती राजे की बेटी प्रतिमा देवी राना की आपत्ति ने पूरे मामले को फिर से जटिल बना दिया है।

    प्रतिमा देवी ने अदालत में आरोप लगाया है कि उनसे धोखाधड़ी करके समझौता प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कराए गए। उनकी आपत्ति में ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित वसुंधरा राजे यशोधरा राजे और उषा राजे पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। प्रतिमा देवी का कहना है कि समझौते की प्रक्रिया में उनके साथ उचित व्यवहार नहीं हुआ। उन्होंने अदालत से मामले में दोबारा पक्षकार के रूप में शामिल होने और संपत्ति में अपने अधिकारों पर विचार करने की मांग की है।
    दूसरी ओर वसुंधरा राजे यशोधरा राजे और उषा राजे की ओर से अदालत में इन आरोपों का जवाब दिया गया है।

    उनके पक्ष का कहना है कि समझौते पर हस्ताक्षर आपसी सहमति से किए गए थे। हस्ताक्षर के बाद परिवार के सदस्य वहां रुके थे और साथ में पारिवारिक भोजन भी हुआ था। इसके बाद तस्वीरें भी ली गई थीं। ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर से भी कहा गया है कि समझौते पर हस्ताक्षर सहमति से हुए थे और प्रक्रिया में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं की गई।

    मामले की जटिलता की एक बड़ी वजह यह भी है कि मूल मुकदमे में पद्मावती राजे की बेटियों कनिका देवी सिंह और प्रतिमा देवी राना को पक्षकार बनाया गया था। हालांकि पूर्व में अदालत की कार्यवाही के दौरान उपस्थित नहीं होने के कारण उन्हें एकपक्षीय घोषित कर दिया गया था। अब प्रतिमा देवी ने दोबारा प्रक्रिया में शामिल होने की मांग करते हुए मौजूदा समझौते पर सवाल उठाए हैं। चूंकि पद्मावती राजे भी संपत्ति में हिस्सेदार थीं इसलिए उनकी बेटियों के अधिकारों का सवाल समझौते की कानूनी वैधता के लिहाज से महत्वपूर्ण हो गया है।

    सिंधिया राजघराने की देशभर में फैली अचल संपत्तियों के बंटवारे से जुड़ा यह विवाद अब निर्णायक प्रक्रिया की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। इस मामले में 78 साल पुराना विलय पत्र भी महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जा रहा है। बुधवार की सुनवाई में अदालत का रुख तय करेगा कि समझौते को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया जारी रहेगी या आपत्तियों और साक्ष्यों पर विस्तृत सुनवाई की जरूरत होगी। हालांकि अंतिम फैसला अदालत की कार्यवाही और उपलब्ध दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही सामने आएगा।

  • शिवपुरी में दर्दनाक हादसा, खेत के तालाब में डूबा 14 वर्षीय देव, लापता होने की सूचना पर तलाश में जुटी पुलिस को मिला शव

    शिवपुरी में दर्दनाक हादसा, खेत के तालाब में डूबा 14 वर्षीय देव, लापता होने की सूचना पर तलाश में जुटी पुलिस को मिला शव


    शिवपुरी । मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में एक दर्दनाक हादसे में 14 वर्षीय बालक की तालाब में डूबने से मौत हो गई। घटना सिरसौद थाना क्षेत्र के सिरसौद गांव की है जहां बालक गांव के एक खेत में बने तालाब में नहाने के लिए गया था। नहाते समय वह तालाब के गहरे हिस्से में चला गया और पानी में डूब गया। काफी देर तक बालक के घर नहीं लौटने पर परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। जब उसका कोई पता नहीं चला तो परिवार के लोग सिरसौद थाने पहुंचे और पुलिस को उसके लापता होने की सूचना दी। इसके बाद पुलिस ने तलाश शुरू की और तालाब के पास से बालक का शव बरामद हुआ।
    जानकारी के अनुसार मृतक की पहचान देव नामदेव के रूप में हुई है। वह सिरसौद गांव निवासी प्रकाश नामदेव का बेटा था। मंगलवार को देव गांव के ही एक खेत में बने तालाब में नहाने पहुंचा था। बताया गया है कि नहाते समय वह धीरे-धीरे तालाब के गहरे हिस्से में चला गया। पानी की गहराई का अंदाजा नहीं लग पाने के कारण वह डूब गया। इस दौरान आसपास मौजूद लोगों को घटना की जानकारी नहीं मिल सकी और बालक की जान चली गई।
    दूसरी ओर जब देव काफी देर तक घर नहीं पहुंचा तो परिजन चिंतित हो गए। उन्होंने पहले आसपास के इलाकों और परिचितों के यहां उसकी तलाश की। लेकिन बालक का कहीं पता नहीं चलने पर परिवार के लोग सिरसौद पुलिस थाने पहुंचे। वहां उन्होंने देव के लापता होने की जानकारी पुलिस को दी। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए बालक की तलाश शुरू कर दी। पुलिसकर्मियों ने गांव में पूछताछ की और संभावित स्थानों पर खोजबीन की।
    तलाश के दौरान पुलिस खेत में बने तालाब के पास पहुंची। वहां किनारे पर देव के कपड़े मिले। कपड़े मिलने के बाद पुलिस को तालाब में उसके डूबने की आशंका हुई। इसके बाद पानी में तलाश की गई तो बालक का शव तालाब में उतराता हुआ मिला। पुलिस ने शव को बाहर निकलवाया और आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू की। घटना की जानकारी मिलने के बाद परिजन भी मौके पर पहुंचे। बालक का शव देखकर परिवार में चीख-पुकार मच गई और गांव में शोक का माहौल बन गया।
    पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। घटना के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। कम उम्र में देव की मौत से परिजन सदमे में हैं। गांव के लोग भी इस हादसे से दुखी हैं।
    तालाब और अन्य जलस्रोतों में नहाने के दौरान सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। खासकर खेतों में बने तालाबों में पानी की वास्तविक गहराई का अनुमान लगाना मुश्किल हो सकता है। ऐसे स्थानों पर नहाने से डूबने का खतरा बढ़ जाता है। शिवपुरी की यह घटना एक परिवार के लिए अपूरणीय क्षति बन गई है और ग्रामीण इलाकों में जलस्रोतों के आसपास सुरक्षा को लेकर सतर्कता की जरूरत भी सामने लाती है।
  • वित्तीय संकट का हवाला देकर डिप्टी सीएम की नई कारों पर रोक, दूसरी ओर सीएम और मंत्रियों के लिए खरीदी गईं गाड़ियां

    वित्तीय संकट का हवाला देकर डिप्टी सीएम की नई कारों पर रोक, दूसरी ओर सीएम और मंत्रियों के लिए खरीदी गईं गाड़ियां

    भोपाल । मध्य प्रदेश की मोहन सरकार में सरकारी वाहनों की खरीद को लेकर नया मामला सामने आया है। सरकार ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के लिए नई गाड़ियां खरीदी हैं, लेकिन दोनों उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ल को नई कार देने के प्रस्ताव वित्त विभाग ने लौटा दिए हैं। विभाग ने वित्तीय संकट का हवाला देते हुए दोनों डिप्टी सीएम को मौजूदा सरकारी वाहनों की मरम्मत कराकर इस्तेमाल करने की सलाह दी है। इस फैसले के बाद सरकारी खर्चों पर नियंत्रण के निर्देशों और नई गाड़ियों की खरीद को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
    जानकारी के अनुसार दोनों उपमुख्यमंत्रियों के सरकारी वाहन निर्धारित किलोमीटर की सीमा पार कर चुके हैं। नियमानुसार सरकारी वाहन के एक लाख दस हजार किलोमीटर चलने के बाद उसे बदलने का प्रावधान है। दोनों डिप्टी सीएम की गाड़ियां इस सीमा से अधिक चल चुकी हैं। इसके बाद गृह विभाग के माध्यम से नई कार खरीदने के प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजे गए थे। हालांकि वित्त विभाग ने इन प्रस्तावों को मंजूरी देने के बजाय वापस कर दिया और पुरानी गाड़ियों की मरम्मत कराकर चलाने के निर्देश दिए।
    दूसरी ओर चालू वित्तीय वर्ष में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के लिए नई इलेक्ट्रिक कार खरीदी गई है। इसके अलावा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल और लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह के लिए इनोवा क्रिस्टा खरीदी गई। गृह सचिव कृष्णा वेणी के लिए भी नई इनोवा क्रिस्टा की व्यवस्था की गई है। इस तरह मुख्यमंत्री मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारी के लिए नई गाड़ियों की खरीद हुई है, जबकि दोनों डिप्टी सीएम के प्रस्तावों को वित्तीय कारणों से मंजूरी नहीं मिल सकी। इसी अंतर को लेकर सरकारी वाहन खरीद की नीति और प्राथमिकताओं पर चर्चा हो रही है।
    गौरतलब है कि प्रदेश सरकार ने करीब तीन महीने पहले वित्तीय स्थिति को देखते हुए सरकारी खर्चों में कटौती करने के निर्देश जारी किए थे। अधिकारियों के विदेश दौरे महंगे होटलों में बैठकें और अन्य गैरजरूरी खर्चों पर नियंत्रण रखने को कहा गया था। सामान्य प्रशासन विभाग ने विभागों को यथासंभव वर्चुअल बैठकें आयोजित करने और जिलों के अधिकारियों को अनावश्यक रूप से भोपाल नहीं बुलाने के निर्देश भी दिए थे। मंत्रियों के काफिले में वाहनों की संख्या कम करने की बात कही गई थी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी अपने काफिले में गाड़ियों की संख्या घटाकर सात रखने का निर्णय लिया था। इसके बावजूद नई गाड़ियों की खरीद जारी रहने से खर्चों पर नियंत्रण के निर्देशों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
    वाहनों की खरीद का पिछला रिकॉर्ड भी इस मामले को महत्वपूर्ण बनाता है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्रदेश में सबसे ज्यादा 27 कारें खरीदी गई थीं। चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक चार नई कारों की खरीद हुई है। इनमें मुख्यमंत्री की इलेक्ट्रिक कार और तीन इनोवा क्रिस्टा शामिल हैं। वहीं दोनों उपमुख्यमंत्रियों के लिए नई कार खरीदने के प्रस्ताव मंजूर नहीं किए गए हैं।
    वित्त विभाग ने आगामी शीतकालीन सत्र में पेश किए जाने वाले दूसरे अनुपूरक बजट को लेकर भी विभागों को निर्देश दिए हैं। प्रस्ताव 22 अक्टूबर तक ऑनलाइन भेजने को कहा गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि ऐसे नए मदों के प्रस्ताव शामिल नहीं किए जा सकेंगे जिनसे राज्य के वित्तीय संसाधनों पर अतिरिक्त बोझ पड़े। वाहन खरीद के प्रस्तावों को भी अनुपूरक बजट में शामिल नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे नई गाड़ियों की खरीद के लिए अतिरिक्त बजट उपलब्ध कराने की संभावना सीमित होती दिखाई दे रही है।
    इस बीच महाराष्ट्र सरकार ने वीवीआईपी और राज्य अतिथियों की सुरक्षा तथा परिवहन व्यवस्था के लिए 12.68 करोड़ रुपये की 44 नई गाड़ियां खरीदने को मंजूरी दी है। इनमें 4.08 करोड़ रुपये की बुलेटप्रूफ टोयोटा लैंड क्रूजर 300 भी शामिल है। मध्य प्रदेश में डिप्टी सीएम की कारों के प्रस्ताव खारिज होने और महाराष्ट्र में महंगी गाड़ियों की खरीद की मंजूरी के बीच सरकारी वाहन खर्च का मुद्दा चर्चा में है। फिलहाल मध्य प्रदेश में दोनों उपमुख्यमंत्रियों को पुरानी गाड़ियों से ही काम चलाना होगा और नई कारों को लेकर आगे का फैसला वित्तीय मंजूरी पर निर्भर करेगा।
  • मध्य प्रदेश में पटवारियों की दोटूक, पहले बहाली के आदेश जारी करें कलेक्टर फिर करेंगे स्वामित्व योजना का काम, सरकार के सामने नई चुनौती

    मध्य प्रदेश में पटवारियों की दोटूक, पहले बहाली के आदेश जारी करें कलेक्टर फिर करेंगे स्वामित्व योजना का काम, सरकार के सामने नई चुनौती


    भोपाल । मध्य प्रदेश में स्वामित्व योजना के तहत होने वाली मुफ्त रजिस्ट्रियों पर एक बार फिर संकट खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात के बाद काम पर लौटने की सहमति देने वाले पटवारियों ने अब स्पष्ट कर दिया है कि जब तक निलंबन और बर्खास्तगी के आदेश वापस नहीं लिए जाते तब तक वे योजना का काम नहीं करेंगे। पटवारी संघ का कहना है कि सरकार के स्तर पर सहमति बनने और राजस्व विभाग की ओर से कानूनी संरक्षण से जुड़ा आदेश जारी होने के बावजूद जिलों में कलेक्टरों ने बहाली की प्रक्रिया पूरी नहीं की है। ऐसे में पटवारी स्वामित्व योजना के तहत रजिस्ट्री की कार्रवाई शुरू करने के लिए तैयार नहीं हैं।
    रविवार शाम मध्य प्रदेश पटवारी संघ के प्रांतीय अध्यक्ष उपेंद्र सिंह और प्रांतीय पटवारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष अश्विन सैनी ने वीडियो जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट की। संघ के पदाधिकारियों के मुताबिक मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद राजस्व विभाग ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 218 के तहत आदेश जारी किया है। इस आदेश के अनुसार स्वामित्व योजना की रजिस्ट्री से जुड़े विवाद या न्यायालयीन प्रकरण की स्थिति में पटवारियों के खिलाफ केस चलाने से संरक्षण दिया गया है। हालांकि संघ का कहना है कि 17 सितंबर के बाद पटवारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई को शून्य करने पर सहमति बनी थी लेकिन अब तक संबंधित कलेक्टरों ने बहाली के आदेश जारी नहीं किए हैं। इसी वजह से प्रदेश के पटवारी फिलहाल योजना के काम से अलग रहेंगे।

    इससे पहले 9 अक्टूबर की शाम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और पटवारी संघ के बीच बातचीत के बाद सहमति बनने की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद संघ ने 12 अक्टूबर से काम शुरू करने का ऐलान किया था। उस समय न्यायिक संरक्षण के आदेश जारी करने और 17 सितंबर के बाद की गई कार्रवाई को समाप्त करने पर सहमति बनने की बात कही गई थी। वेतन विसंगति के मुद्दे पर आयोग के गठन के बाद विचार करने और 27 अक्टूबर को प्रस्तावित महासम्मेलन में आर्थिक मांगों पर घोषणा करने का आश्वासन भी दिया गया था। लेकिन बहाली के आदेश जारी नहीं होने से सहमति के बावजूद विवाद फिर गहरा गया है।
    स्वामित्व योजना केंद्र सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके तहत गांवों की आबादी वाली भूमि का ड्रोन सर्वे कराकर संपत्तियों का रिकॉर्ड तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को उनके घर और जमीन से जुड़े अधिकारों का दस्तावेज उपलब्ध कराना है। मध्य प्रदेश में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक करीब 50 लाख संपत्तियों की रजिस्ट्री किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। इन रजिस्ट्रियों के लिए हितग्राहियों से स्टाम्प ड्यूटी और पंजीयन शुल्क नहीं लिया जा रहा है। इसका खर्च सरकार उठा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में अब तक 68.11 लाख अधिकार अभिलेख तैयार किए जा चुके हैं जिनमें 48.32 लाख निजी संपत्तियां शामिल हैं।
    पटवारियों की मुख्य आपत्ति रजिस्ट्री की प्रक्रिया में उनकी भूमिका और संभावित कानूनी जिम्मेदारी को लेकर है। संघ के मुताबिक दस्तावेजों में ग्रामीण को क्रेता और पटवारी को विक्रेता या निष्पादक की भूमिका दी गई है। पटवारियों का कहना है कि वे जमीन के मालिक नहीं हैं और न ही उन्हें हर मामले में मालिकाना हक तय करने का अधिकार है। ऐसे में भविष्य में जमीन की सीमा हिस्सेदारी या कब्जे को लेकर विवाद होने पर उनके हस्ताक्षर के आधार पर उन्हें जिम्मेदार ठहराए जाने का डर है।
    संघ ने रिकॉर्ड में गड़बड़ियों का मुद्दा भी उठाया है। गुना में पटवारी संघ के अनुसार कुछ मामलों में मौके पर कब्जा एक भाई का है जबकि दस्तावेजों में तीन भाइयों के नाम दर्ज हैं। ऐसे मामलों में भविष्य में विवाद की आशंका बनी रहती है। पटवारी संघ का कहना है कि उसे योजना से आपत्ति नहीं है लेकिन निष्पादक की भूमिका और उससे जुड़ी कानूनी जिम्मेदारी स्पष्ट होनी चाहिए। अब निगाहें सरकार और जिला प्रशासन के अगले कदम पर हैं क्योंकि बहाली के आदेश जारी नहीं हुए तो मुफ्त रजिस्ट्रियों का काम प्रभावित हो सकता है।