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  • भोपाल ब्रेकिंग: बैरागढ़ रोड पर पटाखा दुकान में भीषण आग, 70 फीट तक उठीं लपटें, लगातार धमाकों से दहला इलाका

    भोपाल ब्रेकिंग: बैरागढ़ रोड पर पटाखा दुकान में भीषण आग, 70 फीट तक उठीं लपटें, लगातार धमाकों से दहला इलाका


    नई दिल्ली। भोपाल में शुक्रवार तड़के एक बड़ा हादसा उस समय टल गया जब बैरागढ़ रोड स्थित हलालपुरा इलाके में एक पटाखा दुकान में अचानक भीषण आग लग गई। यह हादसा सुबह करीब 3 बजे हुआ, जब पूरा इलाका गहरी नींद में था। आग लगते ही दुकान के अंदर रखे पटाखों में लगातार विस्फोट शुरू हो गए, जिससे पूरा क्षेत्र तेज धमाकों से गूंज उठा और आसपास के लोग दहशत में आ गए।

    आग इतनी भीषण थी कि उसकी लपटें आसमान में करीब 70 फीट तक उठती दिखाई दीं। लगातार हो रहे धमाकों के कारण आग ने तेजी से विकराल रूप ले लिया और आसपास की सड़कों तक पटाखों के टुकड़े उड़कर गिरने लगे। यह दुकान हलालपुरा क्षेत्र में स्थित सुंदर वन गार्डन के ठीक सामने है, जो मुख्य सड़क से सटी हुई है। दिन के समय इस मार्ग पर भारी ट्रैफिक रहता है और आसपास वाहन भी खड़े रहते हैं, लेकिन गनीमत रही कि घटना देर रात हुई, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था।

    सूचना मिलते ही फतेहगढ़, बैरागढ़, गांधीनगर सहित कई फायर स्टेशनों से दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। फायर फाइटर्स ने आग बुझाने का प्रयास शुरू किया, लेकिन लगातार हो रहे धमाकों के कारण राहत कार्य में कठिनाई आई। करीब साढ़े तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका, हालांकि सुबह 7 बजे तक भी दुकान से धुआं उठता रहा।

    फायर विभाग के अधिकारियों के अनुसार, दुकान में बड़ी मात्रा में पटाखों का भंडारण किया गया था, जो पूरी तरह जलकर खाक हो गया। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार लाखों रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है। घटना स्थल के पास ही एक पेट्रोल पंप भी स्थित है, जिससे स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई थी।

    स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने तत्काल मौके पर पहुंचकर एक तरफ की सड़क को बंद कर दिया, जिससे यातायात प्रभावित रहा। साथ ही बिजली विभाग ने एहतियातन इलाके की बिजली सप्लाई भी बंद कर दी, ताकि किसी भी प्रकार की अनहोनी से बचा जा सके।

    फिलहाल आग लगने के कारणों का स्पष्ट पता नहीं चल सका है। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि हादसा शॉर्ट सर्किट से हुआ या किसी अन्य वजह से।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि धमाकों की आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनाई दी, जिससे पूरे इलाके में दहशत फैल गई। वहीं, प्रशासन ने भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए सुरक्षा मानकों की समीक्षा करने की बात कही है।

  • रीवा में शराब के लिए पैसे न देने पर बर्बर हमला, जेसीबी संचालक का पैर टूटा, लूटपाट भी

    रीवा में शराब के लिए पैसे न देने पर बर्बर हमला, जेसीबी संचालक का पैर टूटा, लूटपाट भी


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के रीवा जिले में कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाली एक गंभीर घटना सामने आई है। मनगवां थाना क्षेत्र के अंतर्गत मनिकवार नंबर-2 इलाके में शराब के लिए पैसे न देने पर कुछ बदमाशों ने दिनदहाड़े हमला, तोड़फोड़ और लूटपाट की वारदात को अंजाम दिया।

    जानकारी के अनुसार, रविवार रात कुछ युवक इलाके में पहुंचे और वहां मौजूद लोगों से शराब पीने के लिए पैसे मांगने लगे। जब लोगों ने पैसे देने से इनकार किया, तो विवाद अचानक हिंसक हो गया और आरोपियों ने लाठी-डंडों व अन्य हथियारों से हमला कर दिया।

    इस दौरान बदमाशों ने न सिर्फ लोगों को बेरहमी से पीटा, बल्कि वहां खड़ी जेसीबी मशीन और बोलेरो वाहन को भी निशाना बनाया। दोनों वाहनों के शीशे तोड़ दिए गए और मौके पर जमकर उत्पात मचाया गया।

    हमले में पवन पटेल, पुनीत पटेल और अंकित पटेल गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इनमें से जेसीबी संचालक की हालत ज्यादा गंभीर बताई जा रही है, जिसका पैर टूट गया है। घायलों को स्थानीय लोगों की मदद से तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

    पीड़ित पक्ष ने आरोप लगाया है कि हमलावर करीब 70 से 80 हजार रुपये नकद और दो मोबाइल फोन भी लूटकर फरार हो गए। उनका कहना है कि यह हमला पहले पैसों की मांग से शुरू हुआ और बाद में लूटपाट व मारपीट में बदल गया।

    घटना की सूचना मिलते ही मनगवां थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने घायलों के बयान दर्ज कर मामला दर्ज कर लिया है और आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।

    स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर आक्रोश है। उनका कहना है कि इलाके में असामाजिक तत्वों की गतिविधियां बढ़ती जा रही हैं, जिससे आम लोगों में भय का माहौल है। लोगों ने पुलिस प्रशासन से सख्त कार्रवाई और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।

  • देश की सबसे लंबी वाटर टनल 98% पूरी, विंध्य में नर्मदा जल पहुंचाने का सपना अंतिम चरण में

    देश की सबसे लंबी वाटर टनल 98% पूरी, विंध्य में नर्मदा जल पहुंचाने का सपना अंतिम चरण में

    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के लिए एक ऐतिहासिक जल परियोजना अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। विंध्य क्षेत्र तक नर्मदा जल पहुंचाने की 17 साल पुरानी महत्वाकांक्षी योजना अब लगभग पूरी होने वाली है। कटनी जिले के स्लीमनाबाद में बन रही 11.95 किलोमीटर लंबी देश की सबसे बड़ी वाटर टनल अब 98 प्रतिशत तक तैयार हो चुकी है, और केवल 108 मीटर की खुदाई बाकी रह गई है।

    इस परियोजना के पूरा होने के बाद बरगी बांध से पानी पहली बार सीधे रीवा, सतना, मैहर और पन्ना जिलों तक पहुंचेगा, जिससे करीब 1.85 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित होने की उम्मीद है। इसके साथ ही कटनी जिले को पीने के पानी की बड़ी राहत भी मिलेगी।

    यह महत्वाकांक्षी परियोजना पिछले 17 वर्षों से कई तकनीकी और प्राकृतिक चुनौतियों से जूझती रही है। कभी खुदाई के दौरान चट्टानी परतें और बड़े बोल्डर सामने आए, तो कभी मशीनों ने काम करना बंद कर दिया। कई बार मीथेन गैस के रिसाव और भूजल के तेज प्रवाह ने काम को रोक दिया।

    परियोजना के दौरान करोड़ों रुपये के टनल कटर भी बदलने पड़े, और करीब 100 करोड़ रुपये की अमेरिकी मशीन भी इस कठिन भूगर्भीय स्थिति में सफल नहीं हो सकी। कुल मिलाकर यह परियोजना भारत की सबसे जटिल जल सुरंग परियोजनाओं में गिनी जा रही है।

    फिलहाल अंतिम चरण में एक जर्मन टनल बोरिंग मशीन (TBM) लगातार 100 मीटर से ज्यादा हिस्से की खुदाई कर रही है। यह मशीन सुरंग को अंतिम आकार देने का काम भी कर रही है। अत्यधिक तापमान और नमी के कारण यहां काम करने वाले तकनीशियन केवल सीमित समय तक ही कार्य कर पा रहे हैं, और उनकी लगातार मेडिकल मॉनिटरिंग की जा रही है।

    सुरंग के भीतर काम की स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण है। अंदर करीब तीन फीट पानी के बीच लोको ट्रेन केवल 3–4 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल पाती है। हर दिन हजारों लीटर भूजल को निकालने के लिए पांच डीवाटरिंग स्टेशन लगातार काम कर रहे हैं।

    टनल का व्यास 10.14 मीटर है, जो किसी तीन मंजिला इमारत की ऊंचाई के बराबर है। सुरक्षा के लिए M-50 ग्रेड सीमेंट से बने भारी कंक्रीट रिंग्स का उपयोग किया गया है, जिनका वजन लगभग 1420 किलो है।

    जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह परियोजना 30 जून 2026 तक पूरी होने की संभावना है। इसके बाद विंध्य क्षेत्र में कृषि उत्पादन और जल उपलब्धता में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद जताई जा रही है।

  • मजदूर के बेटे की गुहार पर दौड़े TI, आरक्षक ने किया रक्तदान-उज्जैन पुलिस ने बचाई महिला की जान

    मजदूर के बेटे की गुहार पर दौड़े TI, आरक्षक ने किया रक्तदान-उज्जैन पुलिस ने बचाई महिला की जान


    मध्‍य प्रदेश। उज्जैन में पुलिस की संवेदनशीलता और तत्परता ने एक बार फिर इंसानियत की मिसाल पेश की है। चिमनगंज मंडी थाना क्षेत्र में एक गंभीर रूप से बीमार महिला की जान समय रहते रक्त उपलब्ध होने से बच गई। पूरी घटना एक छात्र की भावुक गुहार से शुरू हुई, जिसने पुलिस को तुरंत हरकत में ला दिया।

    इस्कॉन मंदिर के पीछे रहने वाले कक्षा 7वीं के छात्र सूरज भाटी ने अपनी मां सुनीता भाटी के लिए रक्त की मदद मांगते हुए सीधे चिमनगंज मंडी थाना प्रभारी विवेक कनोड़िया को फोन किया। सूरज ने बताया कि उसकी मां बिरला अस्पताल में भर्ती हैं और पिछले दो दिनों से परिवार रक्त की व्यवस्था नहीं कर पा रहा है।

    परिवार की स्थिति बेहद कमजोर थी, क्योंकि सूरज के पिता का दो साल पहले निधन हो चुका है और उसकी मां घरेलू काम कर तीन बच्चों का पालन-पोषण कर रही हैं। बच्चे की भावुक अपील सुनते ही थाना प्रभारी विवेक कनोड़िया तुरंत अस्पताल पहुंचे।

    हालांकि, उन्होंने स्वयं रक्तदान करने का प्रयास किया, लेकिन स्वास्थ्य कारणों और ब्लड ग्रुप मेल न खाने के कारण वे रक्तदान नहीं कर सके। इसके बाद उन्होंने तत्काल अपने थाना स्टाफ के व्हाट्सएप ग्रुप में बी-पॉजिटिव रक्तदाता की आवश्यकता का संदेश साझा किया।

    कुछ ही समय में आरक्षक जगदीश गेहलोत ने आगे बढ़कर रक्तदान के लिए सहमति दी और बिना देर किए पुष्पा मिशन अस्पताल पहुंचकर रक्तदान किया। समय पर रक्त मिलने से सुनीता भाटी की हालत में सुधार हुआ और उनकी जान बच गई।

    यह घटना न केवल पुलिस की त्वरित कार्रवाई को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि संकट के समय मानवता सबसे बड़ी ताकत होती है। उज्जैन पुलिस की इस पहल की हर ओर सराहना हो रही है।

  • MP में कोचिंग सिस्टम पर बड़ा बदलाव, छात्रों और अभिभावकों को मिलेगा राहत का फायदा

    MP में कोचिंग सिस्टम पर बड़ा बदलाव, छात्रों और अभिभावकों को मिलेगा राहत का फायदा


    मध्‍य प्रदेश भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार निजी कोचिंग संस्थानों की बढ़ती मनमानी और अनियंत्रित व्यवस्था पर रोक लगाने के लिए ‘कोचिंग संस्थान विनियमन अधिनियम’ लाने की तैयारी कर रही है। इस नए कानून के लागू होने के बाद कोचिंग सेक्टर पूरी तरह एक नियामक ढांचे के दायरे में आ जाएगा।

    सरकार द्वारा तैयार किए गए ड्राफ्ट के अनुसार, हर कोचिंग संस्थान का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। बिना पंजीकरण कोई भी संस्थान संचालित नहीं किया जा सकेगा। साथ ही, पहले से चल रहे सभी कोचिंग सेंटरों को भी तय समय सीमा के भीतर पंजीकरण कराना जरूरी होगा।

    नए नियमों के तहत फीस और रिफंड व्यवस्था में सबसे बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। यदि कोई छात्र बीच में कोचिंग छोड़ता है, तो संस्थान को शेष अवधि की फीस ‘प्रो-राटा’ आधार पर 10 दिनों के भीतर वापस करनी होगी। इससे छात्रों और अभिभावकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

    इसके अलावा कोचिंग संस्थानों पर भ्रामक विज्ञापनों पर पूरी तरह रोक लगाने की तैयारी है। “100% चयन” या “गारंटीड रैंक” जैसे दावे अब अपराध की श्रेणी में आएंगे। किसी भी सफल छात्र की तस्वीर या नाम का उपयोग उसकी लिखित अनुमति के बिना नहीं किया जा सकेगा।

    कानून में शिक्षकों की योग्यता को भी स्पष्ट किया गया है। केवल स्नातक (ग्रेजुएट) शिक्षक ही पढ़ा सकेंगे और किसी नैतिक अपराध में दोषी व्यक्ति को नियुक्त नहीं किया जाएगा। साथ ही 16 वर्ष से कम उम्र के छात्रों का नामांकन प्रतिबंधित रहेगा और न्यूनतम योग्यता 10वीं पास निर्धारित की गई है।

    छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए कोचिंग संस्थानों को काउंसलिंग और मनोवैज्ञानिक सहायता उपलब्ध करानी होगी। साथ ही उन्हें वैकल्पिक करियर विकल्पों की जानकारी भी देनी होगी। कक्षाओं के समय को लेकर भी नियम तय किए गए हैं, जिसके अनुसार एक दिन में अधिकतम 5 घंटे की कोचिंग की सलाह दी गई है।

    सरकार ने यह भी अनिवार्य किया है कि सभी संस्थान अपनी वेबसाइट पर फीस, कोर्स विवरण, शिक्षक योग्यता और रिफंड नीति जैसी जानकारी सार्वजनिक करें।

    इस कानून की जरूरत को हाल के वर्षों में बढ़ते दबाव और छात्रों की आत्महत्या के मामलों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो वर्षों में मध्यप्रदेश में 900 से अधिक छात्रों ने आत्महत्या की है, जिससे कोचिंग व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे हैं।

    फिलहाल यह ड्राफ्ट अगले विधानसभा सत्र में पेश किया जाएगा, जिसके बाद इसके लागू होने की संभावना है। अगर यह कानून पारित होता है, तो कोचिंग उद्योग में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

  • रायसेन में आमने-सामने भिड़ीं दो बसें, बच्चे समेत 3 की मौत; कई घायल भोपाल रेफर

    रायसेन में आमने-सामने भिड़ीं दो बसें, बच्चे समेत 3 की मौत; कई घायल भोपाल रेफर


    रायसेन  रायसेन जिले के खरबई थाना चौकी क्षेत्र में स्थित सेहतगंज टोल प्लाजा के समीप सुबह करीब 11 बजे यह हादसा हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, भोपाल-सागर रूट पर चलने वाली दो निजी बसें तेज रफ्तार में थीं और मोड़ पर नियंत्रण खो बैठीं। देखते ही देखते दोनों बसों की जोरदार भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि बसों के अगले हिस्से पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। हादसे में कुछ यात्री बस की सीटों और खिड़कियों के बीच फंस गए। घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई और आसपास मौजूद लोग तुरंत राहत कार्य में जुट गए।

    तीन लोगों की मौत, पहचान में भी आई मुश्किल
    हादसे में तीन यात्रियों की मौत की पुष्टि हुई है। मृतकों में दो की पहचान नीतीश व्यास (28) निवासी सुल्तानगंज और माखन लोधी (29) निवासी बेगमगंज के रूप में हुई है। एक अन्य मृतक की पहचान समाचार लिखे जाने तक नहीं हो सकी थी। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि टक्कर इतनी जोरदार थी कि कुछ यात्रियों के सिर और चेहरे पर गंभीर चोटें आईं। शवों की हालत भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई, जिससे पहचान करने में कठिनाई हो रही है।

    15 से अधिक घायल, कई भोपाल रेफर
    हादसे में घायल हुए यात्रियों को तत्काल स्थानीय अस्पतालों में पहुंचाया गया। गंभीर रूप से घायल कई लोगों को बेहतर उपचार के लिए भोपाल रेफर किया गया है। घायलों के हाथ, पैर और सिर में गंभीर चोटें आई हैं। पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। दुर्घटना के कारण मार्ग की एक लेन पर यातायात भी कुछ समय के लिए प्रभावित रहा।

    ओवरस्पीड और मोड़ को बताया जा रहा कारण
    स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि दोनों बसें तेज रफ्तार में थीं। मोड़ पर पहुंचने के बाद चालक बसों पर नियंत्रण नहीं रख सके और सीधी भिड़ंत हो गई। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि टक्कर के बाद एक बस सड़क से नीचे उतर गई, जबकि दूसरी बस पुलिया से टकराकर रुकी। शक्ति ट्रेवल्स की बस को अधिक नुकसान पहुंचा है।

    प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे मौके पर
    घटना की सूचना मिलते ही रायसेन कलेक्टर Arun Kumar Vishwakarma और पुलिस अधीक्षक Ashutosh Gupta मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने राहत कार्यों की निगरानी की और घायलों के इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित की। पुलिस ने दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार और लापरवाही को हादसे की प्रमुख वजह माना जा रहा है।

  • खजराना गणेश मंदिर के गर्भगृह में बदलाव की तैयारी, चौड़ा होगा प्रवेश द्वार; निकली 150 किलो चांदी

    खजराना गणेश मंदिर के गर्भगृह में बदलाव की तैयारी, चौड़ा होगा प्रवेश द्वार; निकली 150 किलो चांदी


    मध्य प्रदेश । इंदौर के विश्वप्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर में श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा बदलाव किया जाने वाला है। आगामी सिंहस्थ और भविष्य में बढ़ने वाली भक्तों की संख्या को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने गर्भगृह के मुख्य द्वार को चौड़ा करने का निर्णय लिया है। इस योजना के तहत वर्तमान प्रवेश द्वार को लगभग 10 फीट चौड़ा बनाया जाएगा, जिससे दर्शन व्यवस्था अधिक सुगम और व्यवस्थित हो सकेगी।

    मंदिर प्रशासन के अनुसार हाल ही में आयोजित मंदिर प्रबंध समिति की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। बैठक में समिति अध्यक्ष एवं इंदौर कलेक्टर Shivam Verma तथा नगर निगम आयुक्त Kshitij Singhal सहित अन्य अधिकारियों ने श्रद्धालुओं की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए यह फैसला लिया।

    निर्णय के बाद विकास कार्यों की तैयारी शुरू कर दी गई है। सबसे पहले गर्भगृह के मुख्य द्वार पर लगी लगभग 150 किलो चांदी को सावधानीपूर्वक हटाया गया है। यह चांदी वर्षों से मंदिर के प्रवेश द्वार की शोभा बढ़ा रही थी। अब निर्माण कार्य पूरा होने के बाद इसके पुनः उपयोग या स्थापना को लेकर आगे निर्णय लिया जाएगा।

    मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित अशोक भट्ट के अनुसार, गर्भगृह का द्वार चौड़ा होने से श्रद्धालुओं को भगवान गणेश के दर्शन करने में अधिक सुविधा मिलेगी। वर्तमान में विशेष अवसरों और त्योहारों पर यहां भारी भीड़ उमड़ती है, जिससे दर्शन व्यवस्था प्रभावित होती है। सिंहस्थ के दौरान लाखों श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना को देखते हुए यह कदम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    निर्माण कार्य शुरू करने से पहले भवन की संरचनात्मक मजबूती का परीक्षण भी कराया जा रहा है। इसके लिए Shri Govindram Seksaria Institute of Technology and Science (एसजीएसआईटीएस) की विशेषज्ञ टीम ने मंदिर परिसर का निरीक्षण किया है। इंजीनियरों ने दीवारों, द्वार और आसपास की संरचना की तकनीकी जांच की है, ताकि विस्तार कार्य के दौरान मंदिर की मूल संरचना सुरक्षित रहे।

    मंदिर प्रशासन का कहना है कि परीक्षण रिपोर्ट मिलने के बाद ही निर्माण कार्य की अंतिम रूपरेखा तय की जाएगी। यदि रिपोर्ट अनुकूल रहती है तो आगामी दिनों में गर्भगृह के द्वार को चौड़ा करने का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

    खजराना गणेश मंदिर न केवल इंदौर बल्कि पूरे देश के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। ऐसे में यह विकास कार्य मंदिर की धार्मिक गरिमा बनाए रखते हुए श्रद्धालुओं को बेहतर और सुविधाजनक दर्शन व्यवस्था उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • देवास में युवक ने फांसी लगाकर दी जान, सुबह पत्नी ने देखा तो मचा हड़कंप

    देवास में युवक ने फांसी लगाकर दी जान, सुबह पत्नी ने देखा तो मचा हड़कंप


    देवास । देवास शहर के जवाहर नगर क्षेत्र में बुधवार सुबह एक दर्दनाक घटना सामने आई, जहां 26 वर्षीय युवक ने कथित रूप से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। युवक का शव घर में फंदे पर लटका मिला। घटना का पता उस समय चला जब सुबह उसकी पत्नी की नींद खुली और उसने पति को फांसी के फंदे पर झूलते देखा। यह दृश्य देखकर वह घबरा गई और तुरंत परिजनों को सूचना दी।

    मृतक की पहचान अजय जाटव (26) के रूप में हुई है। वह जवाहर नगर क्षेत्र में अपने परिवार के साथ रह रहा था और मूल रूप से उत्तर प्रदेश का निवासी था। परिजनों के अनुसार अजय पिछले तीन वर्षों से एक निजी कंपनी में हेल्पर के रूप में कार्यरत था। उसके परिवार में पत्नी और एक छोटा बेटा है।

    घटना की जानकारी मिलते ही परिजन मौके पर पहुंचे और अजय को तत्काल जिला अस्पताल लेकर गए। हालांकि अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। युवक की अचानक मौत से परिवार में मातम का माहौल है और परिजन गहरे सदमे में हैं।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार अजय ने अपनी पत्नी की साड़ी से फंदा बनाकर यह कदम उठाया। हालांकि उसने आत्महत्या जैसा कठोर फैसला क्यों लिया, इसका कारण अभी स्पष्ट नहीं हो सका है। घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट भी बरामद नहीं होने की जानकारी सामने आई है।

    सूचना मिलने पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शव का पोस्टमॉर्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया गया है। पुलिस परिजनों, परिचितों और आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है, ताकि आत्महत्या के पीछे की वजह का पता लगाया जा सके।

    फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि युवक ने यह कदम किन परिस्थितियों में उठाया।

  • लोकायुक्त के भीतर कथित रिश्वतखोरी का खुलासा, सिस्टम की पारदर्शिता पर बहस तेज

    लोकायुक्त के भीतर कथित रिश्वतखोरी का खुलासा, सिस्टम की पारदर्शिता पर बहस तेज


    जबलपुर। मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने वाली लोकायुक्त संस्था खुद गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। एक स्टिंग ऑपरेशन में लोकायुक्त संगठन के कुछ कर्मचारियों पर रिश्वत लेकर ट्रैप मामलों को कमजोर करने और आरोपियों को राहत पहुंचाने की कथित डील करते हुए सामने आने का दावा किया गया है। इस खुलासे ने उस व्यवस्था की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है, जिसका काम भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना है।

    स्टिंग ऑपरेशन के दौरान रिपोर्टर ने रिश्वत लेते पकड़े गए सरकारी कर्मचारियों के रिश्तेदार बनकर लोकायुक्त के कर्मचारियों से संपर्क किया। बातचीत में कुछ कर्मचारियों ने कथित तौर पर ऐसे तरीके बताए, जिनके जरिए ट्रैप मामलों की जांच को प्रभावित किया जा सकता है। इनमें वॉयस सैंपल की प्रक्रिया को प्रभावित करना, जांच को वर्षों तक लंबित रखना और गवाहों को मैनेज करने जैसे दावे शामिल हैं।

    भोपाल लोकायुक्त में पदस्थ टेक्नीशियन अमित विश्वकर्मा के साथ हुई मुलाकात में कथित तौर पर यह दावा किया गया कि जांच को आरोपी की सेवानिवृत्ति तक लंबा खींचा जा सकता है, जिससे पेंशन और अन्य सेवा लाभों पर तत्काल प्रभाव न पड़े। बातचीत के दौरान वॉयस सैंपल को प्रभावित करने और जांच प्रक्रिया को धीमा करने के लिए लाखों रुपये की मांग किए जाने का भी दावा किया गया।

    स्टिंग में यह भी सामने आया कि कुछ मामलों में आरोपी को पहले से यह बताया जा सकता है कि उसे वॉयस सैंपल के दौरान क्या बोलना है और क्या नहीं। कथित तौर पर गवाहों को भी प्रभावित करने की बात कही गई, ताकि जांच की दिशा बदली जा सके। इस पूरी प्रक्रिया के लिए 3 लाख से 5 लाख रुपये तक की डील की चर्चा सामने आई।

    सागर में पदस्थ हेड कॉन्स्टेबल यशवंत सिंह के साथ हुई बातचीत में भी जांच को प्रभावित करने, भाषा और बोलने के तरीके में बदलाव कर वॉयस सैंपल को कमजोर करने तथा फॉरेंसिक रिपोर्ट पर असर डालने जैसे दावे किए गए। उन्होंने कथित तौर पर जांच को कई महीनों तक टालने और दस्तावेजों को मैनेज कराने की बात भी कही।

    वहीं, लोकायुक्त के अन्य कर्मचारियों के नाम भी सामने आए, जिन पर कथित तौर पर आरोपियों और अधिकारियों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने के आरोप लगे हैं। एक अन्य कर्मचारी ने तो कथित रूप से 3 लाख रुपये में पूरा मामला “मैनेज” करने का दावा करते हुए पहले किस्त के रूप में रकम देने की बात कही।

    यह खुलासा इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि लोकायुक्त जैसी संस्था पर आम लोगों का भरोसा भ्रष्टाचार के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई के लिए टिका होता है। यदि जांच एजेंसियों के भीतर ही ऐसे नेटवर्क सक्रिय हैं, तो इससे न्यायिक प्रक्रिया और भ्रष्टाचार विरोधी अभियान दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

    अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इन आरोपों और स्टिंग में सामने आए तथ्यों पर क्या कार्रवाई होती है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला केवल कुछ कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे तंत्र की जवाबदेही और पारदर्शिता पर व्यापक बहस खड़ी कर सकता है।

  • इंदौर में पानी संकट पर बवाल, ‘पानी दो-पानी दो’ के नारे लगाकर चक्काजाम

    इंदौर में पानी संकट पर बवाल, ‘पानी दो-पानी दो’ के नारे लगाकर चक्काजाम


    मध्यप्रदेश। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में भीषण गर्मी के बीच पानी की किल्लत अब जनआंदोलन का रूप ले चुकी है। शहर के कई वार्डों और कॉलोनियों में हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि लोग पिछले चार दिनों से नहाने तक के लिए पानी नहीं जुटा पा रहे हैं। इसी के विरोध में शुक्रवार को कई इलाकों में जोरदार प्रदर्शन और चक्काजाम देखने को मिला।

    पालदा चौराहे पर कांग्रेस पार्षद कुणाल सोलंकी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में रहवासी सड़क पर उतर आए और “पानी दो-पानी दो” के नारे लगाते हुए प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने नगर निगम प्रशासन, टैंकर व्यवस्था और नर्मदा लाइन की धीमी सप्लाई को लेकर नाराजगी जताई। इस दौरान सड़क पर लंबा जाम लग गया और कई घंटों तक सिटी बसों में यात्री फंसे रहे।

    इसी तरह दीनदयाल उपाध्याय चौराहा और सुखलिया जोन-5 क्षेत्र में भी स्थानीय लोगों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कई इलाकों में पहले जो निःशुल्क पानी वितरण व्यवस्था थी, उसे बंद कर दिया गया है, जिससे संकट और बढ़ गया है। लोगों को अब मजबूरी में महंगे दामों पर पानी खरीदना पड़ रहा है।

    वार्ड-27 में पार्षद राजू भदौरिया के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन में भी बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। यहां भी महापौर और नगर निगम प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। लोगों का कहना है कि पानी की आपूर्ति नियमित नहीं है और टैंकर भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं कराए जा रहे।

    इससे पहले भी कांग्रेस ने शहर के सभी 22 जोनल कार्यालयों पर पानी संकट को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था। कई इलाकों में लोग सड़कों पर उतरकर चक्काजाम और धरना दे चुके हैं। हाल ही में बड़ी संख्या में लोग “पानी दो-पानी दो” के नारे लगाते हुए पैदल विधायक रमेश मेंदोला के निवास तक पहुंच गए थे, जिससे प्रशासन पर दबाव बढ़ गया था।

    वर्तमान स्थिति में सबसे बड़ी समस्या यह है कि कई वार्डों में नर्मदा लाइन की सप्लाई अब तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाई है। स्थानीय पार्षद कुणाल सोलंकी ने बताया कि नगर निगम से टैंकरों की कमी के कारण पानी वितरण व्यवस्था चरमराई हुई है और लोगों की रोजमर्रा की जरूरतें प्रभावित हो रही हैं।

    प्रदर्शन के दौरान कुछ देर के लिए हालात तनावपूर्ण भी रहे, लेकिन एंबुलेंस को रास्ता देकर प्रदर्शनकारियों ने मानवता का परिचय दिया और उसे तुरंत निकलने दिया गया। फिलहाल शहर में जल संकट को लेकर असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है और प्रशासन पर तत्काल समाधान का दबाव भी तेज हो गया है।