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350 करोड़ की जमीन का विवाद फिर चर्चा में, अयोध्यापुरी मामले में कंपनी की रजिस्ट्री वैध, रहवासी संघ ने दी हाईकोर्ट जाने की चेतावनी
इंदौर। शहर की अयोध्यापुरी कॉलोनी की करीब चार एकड़ बेशकीमती जमीन को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद में जिला कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जिला न्यायाधीश डॉ. शुभ्रा सिंह की अदालत ने सिम्पलेक्स इन्वेस्टमेंट एंड मेगा फाइनेंस कंपनी के पक्ष में फैसला देते हुए अयोध्यापुरी रहवासी कल्याण संघ के दावों को खारिज कर दिया।विवादित जमीन की मौजूदा कीमत करीब 350 करोड़ रुपये बताई जा रही है। अदालत ने 65 पेज के फैसले में देवी अहिल्या श्रमिक कामगार सहकारी संस्था की ओर से कंपनी के पक्ष में की गई रजिस्ट्री को वैध माना है। इस निर्णय के बाद फिलहाल जमीन के स्वामित्व को लेकर कंपनी की कानूनी स्थिति मजबूत हुई है। हालांकि रहवासी संघ ने फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देने की बात कही है जिससे इस मामले में आगे भी कानूनी लड़ाई जारी रहने की संभावना है।अयोध्यापुरी की इस जमीन को लेकर विवाद का प्रमुख मुद्दा उसके स्वामित्व और सहकारी संस्था की ओर से किए गए हस्तांतरण की वैधता रहा है। अदालत में रहवासी कल्याण संघ की ओर से जमीन पर अपने दावे प्रस्तुत किए गए थे। वहीं कंपनी की ओर से जमीन की खरीद और रजिस्ट्री की प्रक्रिया को वैध बताया गया। सुनवाई के बाद अदालत ने 24 फरवरी 2007 को कंपनी के पक्ष में हुई रजिस्ट्री को कानूनी रूप से वैध माना। फैसले के अनुसार संस्था की वार्षिक आमसभा में प्रस्ताव पारित किए जाने के बाद जमीन बेचने की प्रक्रिया पूरी की गई थी।अदालत ने विवादित अतिरिक्त जमीन पर संस्था के सदस्यों के व्यक्तिगत भूखंड होने के दावे को भी पर्याप्त दस्तावेजों के अभाव में स्वीकार नहीं किया। मामले में संस्था के पास कुल 6.75 लाख वर्गफीट जमीन होने का पक्ष रखा गया था। इसमें सदस्यों को प्लॉट आवंटित किए जाने के बाद बची हुई जमीन कंपनी को बेचे जाने की बात कही गई। रहवासी संघ की ओर से ऐसा ठोस दस्तावेज लेआउट या नक्शा प्रस्तुत नहीं किया जा सका जिससे विवादित अतिरिक्त जमीन पर किसी सदस्य का व्यक्तिगत भूखंड होना साबित हो सके।फैसले में संस्था और कंपनी के बीच हुए अनुबंध तथा रजिस्ट्री में धोखाधड़ी के पर्याप्त प्रमाण भी नहीं पाए गए। इसी आधार पर जमीन के हस्तांतरण को अवैध घोषित करने की मांग स्वीकार नहीं की गई। इस निर्णय के साथ जिला कोर्ट ने रहवासी संघ के दावों को खारिज कर दिया। हालांकि यह निचली अदालत का फैसला है और इसके खिलाफ उच्च अदालत में अपील की जा सकती है।इस मामले में प्रशासन और सहकारिता विभाग की भूमिका भी चर्चा में रही है। पूर्व कलेक्टर मनीष सिंह के कार्यकाल में विवादित जमीन की रजिस्ट्री निरस्त कराने के लिए प्रशासनिक स्तर पर पहल की गई थी। सहकारिता विभाग के माध्यम से कोर्ट में आवेदन भी दिया गया था। हालांकि सुनवाई के दौरान प्रशासन और विभाग की ओर से प्रभावी पक्ष नहीं रखे जाने का मामला सामने आया। अब फैसले के बाद प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर भी नजर रहेगी।अयोध्यापुरी रहवासी कल्याण संघ के सचिव एमके सिंह ने फैसले पर असंतोष जताते हुए हाईकोर्ट जाने की बात कही है। उनका दावा है कि जमीन की पहली रजिस्ट्री संस्था के नाम हुई थी और कंपनी ने गलत तरीके से जमीन हासिल कर दोहरी रजिस्ट्री कराई। संघ का कहना है कि विवादित जमीन पर सदस्यों को प्लॉट आवंटित किए जाने हैं। इन दावों पर अब उच्च अदालत में सुनवाई होने की स्थिति बन सकती है।कलेक्टर शिवम वर्मा ने कहा है कि अभी अदालत के आदेश की प्रति प्राप्त नहीं हुई है। आदेश मिलने के बाद उसका अध्ययन किया जाएगा और फिर आगे की कार्रवाई तय होगी। यदि कानूनी आधार बनता है तो ऊपरी अदालत में अपील के विकल्प पर विचार किया जा सकता है। फिलहाल जिला कोर्ट के फैसले ने कंपनी के पक्ष को मजबूती दी है लेकिन रहवासी संघ की प्रस्तावित अपील और प्रशासन के अगले कदम से 350 करोड़ रुपये की इस जमीन का विवाद आगे भी कानूनी चर्चा में बना रह सकता है। -

शिवपुरी में नवरात्रि पर ट्रैफिक प्लान लागू, रात 10 बजे तक फिजिकल रोड पर कार और भारी वाहनों की एंट्री बंद
शिवपुरी। शारदीय नवरात्रि के पहले दिन माता की प्रतिमाएं लेने पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए शिवपुरी में यातायात व्यवस्था में बदलाव किया गया है। शहर के फिजिकल क्षेत्र में रविवार को सुबह 8 बजे से रात 10 बजे तक कुछ प्रमुख मार्गों पर कार टैक्सी और भारी वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित रहेगी। यातायात पुलिस ने श्रद्धालुओं की सुविधा और सड़क पर जाम की स्थिति से बचने के लिए यह व्यवस्था लागू की है। इस दौरान फिजिकल रोड पर केवल दोपहिया वाहन ही चल सकेंगे। वहीं नवरात्रि के दौरान इस मार्ग पर डीजे वाहनों की एंट्री पूरी तरह बंद रहेगी। ऐसे में माता की प्रतिमाएं लेने जाने वाले लोगों और इस क्षेत्र से गुजरने वाले वाहन चालकों को बदले हुए ट्रैफिक रूट का ध्यान रखना होगा।जानकारी के अनुसार शिवपुरी के फिजिकल रोड पर कई मूर्तिकार माता की प्रतिमाएं तैयार करते हैं। नवरात्रि शुरू होने से पहले और पहले दिन जिले के अलग-अलग इलाकों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां प्रतिमाएं लेने पहुंचते हैं। इसके कारण सड़क पर वाहनों की संख्या बढ़ जाती है और भीड़ के चलते यातायात प्रभावित होने की आशंका रहती है। इसी स्थिति को देखते हुए यातायात पुलिस ने फिजिकल क्षेत्र में वाहनों की आवाजाही नियंत्रित करने का निर्णय लिया है ताकि लोगों को आवागमन में परेशानी न हो और प्रतिमाएं लेने आने वाले श्रद्धालु सुरक्षित तरीके से अपना काम पूरा कर सकें।
नई व्यवस्था के तहत पुराने बस स्टैंड से फिजिकल होते हुए आकाशवाणी और पीजी कॉलेज की ओर जाने वाले मार्ग पर कार टैक्सी और भारी वाहनों का प्रवेश बंद रहेगा। इस सड़क पर केवल दोपहिया वाहन चालकों को जाने की अनुमति होगी। सुबह 8 बजे से रात 10 बजे तक लागू इस व्यवस्था के दौरान चार पहिया वाहन चालकों को निर्धारित वैकल्पिक मार्ग का उपयोग करना होगा। इससे फिजिकल रोड पर भीड़ को नियंत्रित करने और वाहनों की आवाजाही को सुचारु बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।
यातायात पुलिस के मुताबिक धर्मवीर घाटी से फिजिकल रोड की ओर भी केवल दोपहिया वाहन ही जा सकेंगे। कार और अन्य चार पहिया वाहनों के साथ भारी वाहन चालकों को दो बत्ती होते हुए परशुराम तिराहे के रास्ते आगे जाना होगा। वाहन चालकों से अपील की गई है कि वे प्रतिबंधित मार्ग पर जाने की कोशिश न करें और अपनी यात्रा के दौरान वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करें। इससे अनावश्यक जाम से बचा जा सकेगा और दूसरे वाहन चालकों को भी परेशानी नहीं होगी।
नवरात्रि के दौरान फिजिकल रोड पर डीजे वाहनों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक लगाई गई है। यातायात प्रभारी रणवीर यादव ने बताया कि निर्धारित नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का उद्देश्य धार्मिक आयोजन के दौरान भीड़ को व्यवस्थित रखना और सड़क पर यातायात को सुरक्षित बनाए रखना है।
नवरात्रि के पहले दिन माता की प्रतिमाएं लेने के लिए बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने के कारण शिवपुरी के फिजिकल क्षेत्र में यातायात व्यवस्था महत्वपूर्ण हो गई है। ऐसे में श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों को घर से निकलने से पहले अपने मार्ग की जानकारी रखने और पुलिस के निर्देशों का पालन करने की जरूरत है। खासतौर पर कार टैक्सी और भारी वाहन चालकों को सुबह 8 बजे से रात 10 बजे तक लागू प्रतिबंधों का ध्यान रखना चाहिए। बदले हुए ट्रैफिक रूट का पालन करने से न केवल जाम की समस्या कम होगी बल्कि श्रद्धालुओं को भी माता की प्रतिमाएं लेने में सुविधा मिल सकेगी।
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शिवपुरी में माता के पंडाल में डीजे बंद कराने पर बवाल, पुलिसकर्मियों पर लाठी चलाने का आरोप, देर रात थाने का घेराव
शिवपुरी। मध्य प्रदेश के शिवपुरी में शारदीय नवरात्रि के दौरान माता के पंडाल में डीजे बंद कराने और सड़क से जाम हटवाने को लेकर विवाद हो गया। फिजिकल थाना क्षेत्र में रविवार देर रात हुए इस घटनाक्रम के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया। स्थानीय लोगों ने दो पुलिसकर्मियों पर शराब के नशे में लाठियां चलाने और मारपीट करने का आरोप लगाया। घटना से नाराज लोग फिजिकल थाने पहुंच गए और घेराव कर दोनों पुलिसकर्मियों को हटाने की मांग करने लगे। दूसरी ओर थाना प्रभारी ने पुलिसकर्मियों के शराब पीने और मारपीट करने के आरोपों को निराधार बताया है। देर रात करीब डेढ़ बजे तक थाने पर हंगामा चलता रहा जिसके बाद स्थिति शांत हुई।जानकारी के मुताबिक फिजिकल थाने से कुछ ही दूरी पर माता की प्रतिमा स्थापित करने के लिए पंडाल तैयार किया जा रहा था। रविवार रात करीब 11 बजे सड़क पर डीजे लगाया गया था। पंडाल में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे और डीजे बजने के कारण सड़क पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित होने लगी। देखते ही देखते वहां जाम जैसी स्थिति बन गई। इसी बीच रात करीब 12:30 बजे दो पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे। वे डीजे बंद कराने और सड़क से जाम हटवाने के लिए पहुंचे थे। इसी दौरान पुलिसकर्मियों और वहां मौजूद लोगों के बीच विवाद होने की बात सामने आई।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि दोनों पुलिसकर्मियों ने मौके पर पहुंचते ही लाठियां चलानी शुरू कर दीं और लोगों के साथ मारपीट की। लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिसकर्मी शराब के नशे में थे। घटना के बाद दोनों पुलिसकर्मी अपना वाहन लेकर वहां से चले गए। इसके बाद मौके पर मौजूद लोगों में नाराजगी बढ़ गई। लोगों ने पुलिस के व्यवहार पर सवाल उठाते हुए मामले में कार्रवाई की मांग की।
घटना से नाराज लोग फिजिकल थाने पहुंच गए और वहां घेराव कर दिया। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने आरोप लगाया कि माता के पंडाल में आए श्रद्धालुओं के साथ अनुचित व्यवहार किया गया। उन्होंने दोनों पुलिसकर्मियों को थाने से हटाने की मांग उठाई। थाने के बाहर लोगों की भीड़ जुटने और हंगामे की सूचना मिलने के बाद अन्य थानों से भी पुलिस बल बुलाया गया। देर रात तक पुलिस अधिकारियों और प्रदर्शन कर रहे लोगों के बीच घटनाक्रम को लेकर तनाव बना रहा। करीब डेढ़ बजे तक चले हंगामे के बाद मामला शांत हुआ।
इस पूरे मामले में फिजिकल थाना प्रभारी अवनीश सिंह राठौड़ ने अलग पक्ष रखा। उनके अनुसार पुलिसकर्मी रात करीब 12 बजे गश्त पर निकले थे। इस दौरान सड़क पर डीजे बजने और जाम लगने की स्थिति सामने आई। रात काफी हो जाने के कारण पुलिस ने डीजे बंद करने और रास्ता खाली कराने के लिए कहा था। थाना प्रभारी के मुताबिक इस कार्रवाई का कुछ लोगों ने विरोध किया जिसके बाद विवाद की स्थिति बनी।
थाना प्रभारी ने यह भी स्पष्ट किया कि माता का पंडाल एक स्थान पर था जबकि डीजे दूसरी जगह लगाया गया था। उन्होंने पुलिसकर्मियों के शराब के नशे में होने और लोगों के साथ मारपीट करने के आरोपों को निराधार बताया। इस तरह मामले में स्थानीय लोगों के आरोप और पुलिस की ओर से दिया गया पक्ष अलग-अलग हैं।
नवरात्रि के दौरान धार्मिक आयोजन और श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए सार्वजनिक स्थानों पर यातायात व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण होता है। वहीं ऐसे आयोजनों के दौरान पुलिस और आम लोगों के बीच संवाद तथा संयम भी जरूरी है। शिवपुरी की इस घटना में विवाद की वास्तविक परिस्थितियों को स्पष्ट करने के लिए दोनों पक्षों के आरोपों की निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल सामने आई जानकारी के अनुसार देर रात थाने पर हुआ हंगामा शांत हो गया लेकिन पुलिसकर्मियों पर लगाए गए आरोपों को लेकर मामला चर्चा में है।
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मां की भक्ति तभी सार्थक जब महिलाओं का हो सम्मान, शिवराज ने रील शेयर कर देशवासियों से कही बड़ी बात
भोपाल। शारदीय नवरात्रि के पहले दिन केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने देशवासियों को नवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए महिलाओं के सम्मान का संदेश दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक रील साझा कर लोगों से अपील की कि मां दुर्गा की पूजा अर्चना और व्रत उपवास के साथ घर परिवार और समाज में बेटियों बहनों तथा माताओं का सम्मान करना भी अपनी जिम्मेदारी समझें। शिवराज ने कहा कि यदि हम अपनी बेटी बहन और मां का सम्मान नहीं करते हैं तो मां की उपासना का कोई लाभ नहीं है। उनका यह संदेश नवरात्रि के धार्मिक महत्व के साथ महिलाओं के प्रति सम्मान और सामाजिक जिम्मेदारी को भी रेखांकित करता है।शिवराज सिंह चौहान ने अपने संदेश में कहा कि नवरात्रि का पहला दिन मां शैलपुत्री की आराधना को समर्पित है। इस पावन अवसर पर श्रद्धालु मां की भक्ति में लीन रहते हैं और व्रत उपवास रखकर परिवार की सुख समृद्धि तथा खुशहाली की कामना करते हैं। उन्होंने कहा कि धार्मिक अनुष्ठानों के साथ हमें अपनी अंतरात्मा और हृदय से यह भी विचार करना चाहिए कि हम अपने आसपास की महिलाओं के साथ कैसा व्यवहार करते हैं। पूजा पाठ के वास्तविक अर्थ को जीवन में उतारना और दूसरों के प्रति सम्मान का भाव रखना भी जरूरी है।केंद्रीय मंत्री ने अपने संदेश में बहनों भाइयों और बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि सभी लोग नवरात्रि के दौरान व्रत रखें उपवास करें और मां की उपासना करें लेकिन इसके साथ ही अपनी बेटियों बहनों और माताओं को पूरा सम्मान भी दें। उन्होंने कहा कि बेटियां देवियों के समान हैं और बहनों तथा माताओं में भी देवी का स्वरूप देखा जाता है। ऐसे में हर व्यक्ति को अपने जीवन में महिलाओं के सम्मान को सर्वोपरि रखने का संकल्प लेना चाहिए।शिवराज सिंह चौहान की अपील का मुख्य संदेश यही रहा कि देवी आराधना केवल मंदिरों में पूजा करने या धार्मिक परंपराओं का पालन करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। इसका प्रभाव हमारे व्यवहार और विचारों में भी दिखाई देना चाहिए। परिवार में बेटियों को सम्मान देना उनकी बात सुनना और उन्हें आगे बढ़ने के अवसर देना सामाजिक जिम्मेदारी का हिस्सा है। इसी तरह बहनों और माताओं के प्रति आदर का भाव रखना भी आवश्यक है। महिलाओं की गरिमा और उनके अधिकारों का सम्मान करने से ही समाज में सकारात्मक वातावरण बन सकता है।नवरात्रि के दौरान देशभर में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। मंदिरों में विशेष अनुष्ठान होते हैं और श्रद्धालु भक्ति भाव से माता के दर्शन करते हैं। ऐसे अवसर पर शिवराज सिंह चौहान ने धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक मूल्यों को जोड़ते हुए लोगों से महिलाओं के सम्मान का संकल्प लेने की अपील की। उन्होंने अपने संदेश के अंत में मां शैलपुत्री से सभी पर कृपा और आशीर्वाद बनाए रखने की कामना की तथा देशवासियों को नवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए जय माता दी कहा।उनका संदेश इस बात पर जोर देता है कि त्योहारों की सार्थकता तभी बढ़ती है जब उनसे मिलने वाली सीख को रोजमर्रा के जीवन में अपनाया जाए। नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना के साथ बेटियों बहनों और माताओं को सम्मान देना तथा उनके प्रति संवेदनशील व्यवहार करना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है। -

मां दुर्गा की भक्ति में डूबा मध्य प्रदेश, कहीं चांदी से सजा माता का गर्भगृह तो कहीं तड़के 3 बजे से दर्शन के लिए लगी कतारें
सतना। शारदीय नवरात्र का शुभारंभ होते ही मध्य प्रदेश में माता रानी की भक्ति और आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है। रविवार 11 अक्टूबर को नवरात्र के पहले दिन सुबह से ही प्रदेश के प्रमुख देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। मंदिरों में माता के जयकारे गूंजते रहे और भक्तों ने दर्शन पूजन कर परिवार की सुख समृद्धि और खुशहाली की कामना की। आगर मालवा के मां बगलामुखी मंदिर से लेकर उज्जैन के हरसिद्धि और गढ़ कालिका मंदिर तथा मैहर के मां शारदा धाम तक भक्तों में जबरदस्त उत्साह नजर आया। कई मंदिरों में तड़के ही पूजा अर्चना शुरू हो गई थी जबकि श्रद्धालु लंबी कतारों में लगकर अपनी बारी का इंतजार करते दिखाई दिए।
आगर मालवा जिले के नलखेड़ा स्थित प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर में मंगला आरती के साथ दर्शन की शुरुआत हुई। सुबह चार बजे से 11 बजे तक यहां 75 हजार से अधिक श्रद्धालुओं के दर्शन करने की जानकारी सामने आई है।नवरात्र के दौरान भक्तों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की तैयारी भी की जा रही है। जिले के पुलिस अधीक्षक दिलीप सोनी के अनुसार मंदिर परिसर में पुलिस चौकी शुरू की जा रही है। यहां तैनात पुलिसकर्मी मंदिर और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था संभालेंगे ताकि श्रद्धालुओं को दर्शन के दौरान परेशानी का सामना न करना पड़े।धार्मिक नगरी उज्जैन में भी नवरात्र के पहले दिन विशेष उत्साह देखने को मिला। यहां प्रसिद्ध हरसिद्धि मंदिर और गढ़ कालिका मंदिर में विशेष पूजा अर्चना की गई। सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचे। वहीं नीमच जिले के भादवा माता मंदिर में घट स्थापना से पहले महाआरती की गई। मालवा की वैष्णो देवी के नाम से प्रसिद्ध इस मंदिर में नवरात्र के अवसर पर भक्तों की आवाजाही बनी रही।सतना जिले के मैहर स्थित मां शारदा धाम में भी शारदीय नवरात्र मेले का आगाज हो गया। रविवार तड़के तीन बजे मंदिर के पट खुलते ही परिसर माता के जयकारों से गूंज उठा। सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ दर्शन के लिए पहुंचने लगी। मैहर में नवरात्र के दौरान बड़ी संख्या में भक्त मां शारदा के दर्शन करने आते हैं। ऐसे में मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की आवाजाही लगातार बनी हुई है।बड़वानी जिले के सेंधवा स्थित मां बड़ी बिजासन माता मंदिर में नवरात्र को खास बनाने के लिए गर्भगृह की दीवारों को करीब 90 किलो चांदी से सजाया गया है। मंदिर की इस सजावट को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष आकर्षण देखा जा रहा है। भोपाल के कर्फ्यू वाली मंदिर में भी सुबह से भक्त पूजा अर्चना में जुटे रहे। उमरिया जिले के बिरसिंहपुर पाली स्थित मां बिरासनी शक्तिपीठ में नवरात्र के पहले दिन घट पूजन और स्थापना की गई।मंदसौर के नालछा माता मंदिर में भी सुबह से श्रद्धालुओं की भीड़ रही। यह मंदिर जिले के प्रमुख आस्था केंद्रों में शामिल है। मंदिर की विशेष मान्यता है कि यहां भेरू और भवानी एक ही गादी पर विराजमान हैं। मंदिर के पुजारी गोविंद नागदा के अनुसार मान्यता है कि माता सुबह बाल्यावस्था दोपहर में युवावस्था और शाम को वृद्धावस्था के स्वरूप में दर्शन देती हैं।राजगढ़ के प्रसिद्ध जालपा माता मंदिर में भी सुबह की आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। घने जंगल के बीच ऊंची टेकरी पर स्थित इस मंदिर में कई भक्त करीब एक किलोमीटर की पहाड़ी चढ़कर दर्शन करने पहुंचे। मंदिर विवाह की तारीख तय करने की पारंपरिक पाती प्रथा के लिए भी जाना जाता है। मान्यता के अनुसार शुभ मुहूर्त नहीं मिलने पर परिवार ज्वार या गेहूं के दाने लेकर यहां पहुंचते हैं और पुजारी पारंपरिक तरीके से विवाह की तारीख बताते हैं।रीवा के करीब 450 वर्ष पुराने रानी तालाब कालिका मंदिर में सुबह साढ़े तीन बजे पट खोल दिए गए। चार बजे से ही दर्शन के लिए लंबी कतारें लग गईं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पुलिस के 25 जवान तैनात किए गए हैं। नवरात्र के पहले दिन प्रदेशभर के मंदिरों में उमड़ी भीड़ ने धार्मिक उत्साह और मां दुर्गा के प्रति श्रद्धालुओं की गहरी आस्था को एक बार फिर प्रदर्शित किया। -

माफी मांगने के बाद भी नहीं रुकी पिटाई, भोपाल के स्कूल में चौथी के छात्र के साथ मारपीट का आरोप, पिता ने मांगी सख्त कार्रवाई
भोपाल । भोपाल के फादर एग्नेल स्कूल में चौथी कक्षा के एक छात्र के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया है। घटना 8 अक्टूबर की बताई जा रही है। छात्र के पिता उजेर अहमद ने गांधी नगर थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए स्कूल के प्रिंसिपल मनोहर काटा पर बेटे के साथ मारपीट करने का आरोप लगाया है। पिता के मुताबिक घटना के बाद बच्चे के चेहरे और कंधे पर चोट के निशान दिखाई दिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि बच्चे को सुनने में परेशानी होने लगी और घर पहुंचने के बाद चक्कर आने से वह गिर गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए बच्चे का हमीदिया अस्पताल में मेडिकल परीक्षण कराया गया है।बच्चे के पिता उजेर अहमद के अनुसार 8 अक्टूबर को उनका बेटा स्कूल से घर लौटा तो उसने अपने साथ हुई घटना के बारे में बताया। बच्चे ने कथित तौर पर कहा कि स्कूल के प्रिंसिपल मनोहर काटा ने उसके साथ मारपीट की। पिता का कहना है कि मारपीट के दौरान बच्चा माफी मांगता रहा लेकिन इसके बावजूद पिटाई नहीं रुकी। घर पहुंचने पर जब परिजनों ने बच्चे की स्थिति देखी तो उन्हें उसके चेहरे और कंधे पर चोट के निशान नजर आए। पिता ने यह भी आरोप लगाया कि घटना के बाद बच्चे को कान से ठीक से सुनाई नहीं दे रहा था। इसके अलावा उसे चक्कर आने की शिकायत भी हुई जिसके बाद परिवार ने मामले को गंभीरता से लिया।पिता ने बताया कि घटना के दिन ही उन्होंने पुलिस से संपर्क करने का फैसला किया। उनके मुताबिक 8 अक्टूबर की रात करीब 11 से 11:30 बजे के बीच वह गांधी नगर थाने पहुंचे और शिकायत दी। उजेर अहमद का कहना है कि शिकायत के बाद से उन्हें जांच जारी होने और मेडिकल रिपोर्ट मंगाए जाने की जानकारी दी जा रही है। हालांकि उनके अनुसार अभी तक मामले में कार्रवाई को लेकर स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आई है। पिता ने पुलिस से मांग की है कि शिकायत पर गंभीरता से जांच की जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।उजेर अहमद ने यह आरोप भी लगाया है कि स्कूल से जुड़े एक व्यक्ति ने फोन करके उनसे समझौता करने के लिए कहा। पिता का कहना है कि वह मामले में समझौता करने के बजाय निष्पक्ष जांच चाहते हैं। उन्होंने संबंधित प्रिंसिपल के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और उसकी प्रति उपलब्ध कराने की मांग भी की है। उनका कहना है कि बच्चे की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है और स्कूल में ऐसी घटना के आरोपों की गंभीरता से जांच होनी चाहिए।इस मामले में फिलहाल स्कूल प्रबंधन और संबंधित प्रिंसिपल का पक्ष सामने नहीं आया है। ऐसे में घटना को लेकर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। पुलिस की जांच और मेडिकल रिपोर्ट से ही चोटों की प्रकृति तथा घटना से जुड़े अन्य तथ्यों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। मामले में स्कूल प्रबंधन का पक्ष सामने आने के बाद घटनाक्रम की तस्वीर और साफ हो सकती है।स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और अनुशासन के तरीकों को लेकर यह मामला महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है। अभिभावक अपने बच्चों को सुरक्षित माहौल में शिक्षा दिलाने की उम्मीद से स्कूल भेजते हैं। ऐसे में किसी छात्र के साथ मारपीट का आरोप सामने आने पर निष्पक्ष जांच जरूरी हो जाती है। फिलहाल बच्चे के पिता ने कार्रवाई की मांग की है और अब इस मामले में पुलिस जांच तथा मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर आगे की स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार है। -

उज्जैन में मां दुर्गा के स्वागत की तैयारी तेज, मिट्टी की प्रतिमाओं से सजेंगे पंडाल, 1000 स्थानों पर स्थापना को लेकर प्रशासन अलर्ट
उज्जैन । उज्जैन में नवरात्रि पर्व को लेकर उत्साह बढ़ने लगा है और शहर से लेकर जिले के विभिन्न क्षेत्रों में दुर्गा उत्सव की तैयारियां अंतिम दौर में पहुंच गई हैं। दुर्गा पंडालों को सजाने के साथ ही आयोजक माता की प्रतिमाओं की स्थापना के लिए व्यवस्थाएं जुटा रहे हैं। मूर्ति निर्माण करने वाले कलाकार भी प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में व्यस्त हैं। इस बार उज्जैन में 4 फीट से लेकर 16 फीट तक की दुर्गा प्रतिमाएं तैयार की गई हैं। अलग-अलग आकार और स्वरूपों में बनाई गई इन प्रतिमाओं के जरिए श्रद्धालुओं को मां दुर्गा के पारंपरिक और आकर्षक रूपों के दर्शन होंगे।मूर्ति कलाकार विजय पाल के अनुसार बंगाल और कोलकाता से आए कारीगर प्रतिमा निर्माण में जुटे हैं। यहां पारंपरिक स्वरूपों के साथ पर्यावरण को ध्यान में रखकर बनाई गई प्रतिमाएं भी तैयार की जा रही हैं। महिषासुर मर्दिनी के रूप में मां दुर्गा की प्रतिमाएं भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहेंगी। कलाकारों को एक प्रतिमा तैयार करने में करीब चार से पांच दिन का समय लगता है। प्रतिमा की ऊंचाई डिजाइन और बारीक कारीगरी के अनुसार निर्माण में लगने वाला समय अलग-अलग हो सकता है।इस बार प्रतिमा निर्माण की लागत बढ़ने का असर कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है। कलाकारों के मुताबिक कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण दुर्गा प्रतिमाओं के दाम लगभग 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। इससे आयोजक समितियों को अपने बजट के अनुसार प्रतिमाओं का चयन करना पड़ रहा है। इसके बावजूद नवरात्रि को लेकर श्रद्धालुओं और आयोजन समितियों में उत्साह बना हुआ है। कई स्थानों पर पंडालों की सजावट और अन्य तैयारियां भी साथ-साथ की जा रही हैं।इस बार प्रतिमाओं के निर्माण में पर्यावरण का ध्यान रखने पर भी जोर दिया जा रहा है। कलाकारों के अनुसार प्रतिमाओं के लिए कोलकाता से मिट्टी मंगाई जाती है। इन प्रतिमाओं को पूरी तरह मिट्टी से तैयार किया जा रहा है और इनमें प्लास्टर ऑफ पेरिस यानी पीओपी का इस्तेमाल नहीं किया जाता। प्रतिमाओं को रंगने के लिए प्राकृतिक रंगों का उपयोग किया जाता है। इससे पर्यावरण पर पड़ने वाले संभावित दुष्प्रभावों को कम करने में मदद मिल सकती है। मिट्टी से बनी प्रतिमाएं पारंपरिक शिल्पकला और धार्मिक आस्था से भी जुड़ी हुई हैं।उज्जैन जिले में इस बार नवरात्रि के दौरान एक हजार से अधिक स्थानों पर मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित किए जाने की तैयारी है। शहर के विभिन्न इलाकों और आसपास के क्षेत्रों में आयोजन समितियां पंडालों की व्यवस्था करने में जुटी हैं। प्रतिमाओं की स्थापना के साथ ही श्रद्धालुओं की आवाजाही और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए व्यवस्थाएं बनाना भी आयोजकों के लिए जरूरी होगा। नवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के पंडालों तक पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने भी समितियों से सावधानी बरतने की अपील की है।पुलिस और प्रशासन ने दुर्गा उत्सव समितियों को पंडालों में सीसीटीवी कैमरे लगाने और निगरानी की व्यवस्था मजबूत रखने के लिए कहा है। इसके साथ ही देर रात तेज आवाज में डीजे नहीं बजाने की अपील भी की गई है। इसका उद्देश्य धार्मिक आयोजन के दौरान व्यवस्था बनाए रखना और आसपास रहने वाले लोगों को परेशानी से बचाना है। आयोजकों को सुरक्षा और अनुशासन से जुड़े निर्देशों का पालन करने की जरूरत होगी।कुल मिलाकर उज्जैन में नवरात्रि के स्वागत की तैयारियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं। एक हजार से अधिक स्थानों पर प्रतिमा स्थापना की तैयारी और 16 फीट तक की भव्य प्रतिमाएं इस बार के उत्सव को खास बना सकती हैं। पारंपरिक शिल्पकला के साथ पर्यावरण अनुकूल प्रतिमाओं पर जोर और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन की अपील से नवरात्रि आयोजन को व्यवस्थित बनाने की कोशिश की जा रही है। -

भीषण आग पर लगेगी लगाम, मध्य प्रदेश के 21 शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों को मिलेंगे आधुनिक फायर ब्रिगेड वाहन, जानिए खास खूबियां
ग्वालियर । मध्य प्रदेश में आगजनी की बड़ी घटनाओं से निपटने और राहत एवं बचाव कार्यों को तेज करने के लिए अग्निशमन व्यवस्था को आधुनिक बनाया जा रहा है। प्रदेश के 16 नगर निगमों और पांच प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में 12 हजार लीटर पानी की क्षमता वाले 21 आधुनिक वाटर बाउजर तैनात किए जाएंगे। मध्य प्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी ने इन वाहनों की खरीद के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। इन वाहनों के मिलने से शहरी इलाकों के साथ औद्योगिक क्षेत्रों में भी आग लगने की स्थिति में तेजी से कार्रवाई करने में मदद मिलने की उम्मीद है।इन आधुनिक वाहनों को विशेष रूप से बड़ी आग की घटनाओं और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार किया जाएगा। इनमें हाई प्रेशर पंप वाटर मॉनिटर और फोम सिस्टम जैसी सुविधाएं होंगी। इनकी सहायता से आग पर पानी और फोम की तेज बौछार डालकर उसे नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। बहुमंजिला इमारतों औद्योगिक इकाइयों और अन्य संवेदनशील स्थानों पर आग लगने की स्थिति में ये वाहन उपयोगी साबित हो सकते हैं।योजना के तहत ग्वालियर भोपाल इंदौर जबलपुर उज्जैन देवास मुरैना सतना सागर रतलाम रीवा कटनी सिंगरौली छिंदवाड़ा बुरहानपुर और खंडवा नगर निगमों को आधुनिक वाटर बाउजर उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके अलावा पीथमपुर मंडीदीप बानमोर मालनपुर और मेघनगर जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों को भी इस योजना में शामिल किया गया है। इन क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों के चलते आग से निपटने के लिए पर्याप्त संसाधनों की जरूरत रहती है।इन वाटर बाउजर की क्षमता 12 हजार लीटर होगी और इनका कुल भार करीब 28 टन रहने का उल्लेख किया गया है। वाहनों में 304 ग्रेड स्टेनलेस स्टील से बने टैंक लगाए जाएंगे। टैंक के भीतर 10 कंपार्टमेंट और बाफल प्लेट्स होंगी जो वाहन चलते समय पानी के बहाव को नियंत्रित करने में मदद करेंगी। इससे वाहन का संतुलन बनाए रखने और संचालन को बेहतर बनाने में सहायता मिल सकती है।वाहनों में हाई प्रेशर सेंट्रीफ्यूगल पंप लगाए जाएंगे। सामान्य दबाव पर ये पंप प्रति मिनट 3000 लीटर पानी उपलब्ध कराने में सक्षम होंगे जबकि हाई प्रेशर मोड में इनकी क्षमता 250 लीटर प्रति मिनट होगी। सामान्य मोड में दबाव 10 किलोग्राम प्रति वर्ग सेंटीमीटर और हाई प्रेशर मोड में 40 किलोग्राम प्रति वर्ग सेंटीमीटर निर्धारित किया गया है। अलग-अलग परिस्थितियों के अनुसार इन सुविधाओं का इस्तेमाल कर आग बुझाने की कार्रवाई की जा सकेगी।आधुनिक वाटर बाउजर में जीपीएस मोबाइल डेटा टर्मिनल लाइट मास्ट और ऑटोमैटिक प्राइमिंग सिस्टम जैसी तकनीकी सुविधाएं भी दी जाएंगी। जीपीएस से वाहन की लोकेशन जानने में मदद मिलेगी जबकि लाइट मास्ट रात के समय या कम रोशनी वाले स्थानों पर बचाव कार्यों को आसान बना सकता है। वाटर मॉनिटर के जरिए आग की ओर पानी की तेज बौछार छोड़ी जा सकेगी।योजना में केवल वाहन खरीदने पर ही जोर नहीं दिया गया है बल्कि कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने की व्यवस्था भी रखी गई है। अनुबंध होने के 10 महीने के भीतर वाहनों की आपूर्ति पूरी करने का लक्ष्य है। इसके बाद 12वें महीने तक संबंधित नगरीय निकायों के अग्निशमन कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रत्येक संबंधित फायर स्टेशन पर कम से कम दो प्रायोगिक प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें वाहन चलाने उपकरणों के इस्तेमाल रखरखाव और आपातकालीन परिस्थितियों में कार्रवाई करने की जानकारी दी जाएगी।बड़े वाटर बाउजर के साथ प्रदेश के 90 नगरीय निकायों के लिए 111 मिनी वाटर टेंडर खरीदने की प्रक्रिया भी चल रही है। इनकी क्षमता 550 लीटर होगी जिसमें 500 लीटर पानी और 50 लीटर फोम शामिल रहेगा। छोटे आकार के ये वाहन संकरी गलियों घनी बस्तियों और ऐसे स्थानों पर पहुंचने में मदद करेंगे जहां बड़े फायर ब्रिगेड वाहनों को ले जाना मुश्किल होता है।ग्वालियर इंदौर भोपाल जबलपुर और उज्जैन नगर निगमों को तीन-तीन मिनी वाटर टेंडर देने की योजना है। अन्य नगर निगमों को दो-दो वाहन मिलेंगे जबकि शेष नगरीय निकायों के लिए भी वाहन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। बड़े वाटर बाउजर और छोटे मिनी टेंडर की खरीद से प्रदेश में अग्निशमन संसाधनों का विस्तार करने की तैयारी है। हालांकि इन व्यवस्थाओं का वास्तविक लाभ वाहनों की समय पर आपूर्ति कर्मचारियों के प्रशिक्षण और जरूरत के समय त्वरित तैनाती पर निर्भर करेगा। -

MBBS छात्रों जितना स्टाइपेंड मांग रहे आयुष डॉक्टर, जबलपुर में 200 विद्यार्थियों ने निकाला कैंडल मार्च, आंदोलन तेज करने की चेतावनी
जबलपुर । मध्य प्रदेश के जबलपुर में आयुष चिकित्सा पद्धति की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों ने स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर कैंडल मार्च निकालकर विरोध प्रदर्शन किया। विद्यार्थियों का कहना है कि उन्हें प्रशिक्षण के दौरान फिलहाल 9,383 रुपए मासिक स्टाइपेंड दिया जा रहा है जो मौजूदा समय में उनके खर्चों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। वे इसे बढ़ाकर एमबीबीएस छात्रों के बराबर 21,500 रुपए करने की मांग कर रहे हैं। अपनी मांग को लेकर विद्यार्थियों ने शासकीय आयुर्वेदिक कॉलेज से झंडा चौक तक कैंडल मार्च निकाला। इस प्रदर्शन में करीब 150 से 200 छात्र शामिल हुए। झंडा चौक पहुंचकर विद्यार्थियों ने मानव श्रृंखला बनाई और स्टाइपेंड में वृद्धि की मांग को लेकर अपनी आवाज उठाई।प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों का कहना है कि आयुष और एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति की पढ़ाई करने वाले छात्रों के स्टाइपेंड में अंतर नहीं होना चाहिए। उनके मुताबिक दोनों ही क्षेत्रों के विद्यार्थी प्रशिक्षण के दौरान मेहनत करते हैं और चिकित्सा सेवाओं से जुड़ी जिम्मेदारियों को समझते हुए अपना अनुभव बढ़ाते हैं। ऐसे में प्रशिक्षण के दौरान मिलने वाली आर्थिक सहायता में समानता होनी चाहिए। विद्यार्थियों ने समान काम के लिए समान आर्थिक लाभ की मांग उठाते हुए कहा कि मौजूदा स्टाइपेंड से पढ़ाई और रोजमर्रा के खर्चों का प्रबंधन करना मुश्किल हो रहा है।छात्रों के मुताबिक महंगाई के कारण भोजन आवास और अन्य जरूरी जरूरतों पर होने वाला खर्च लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में 9,383 रुपए की मासिक राशि में सभी आवश्यक खर्चों को पूरा करना चुनौतीपूर्ण बन गया है। उनका मानना है कि स्टाइपेंड बढ़ने से उन्हें आर्थिक राहत मिलेगी और वे अपनी पढ़ाई तथा व्यावहारिक प्रशिक्षण पर अधिक ध्यान दे सकेंगे। विद्यार्थियों का कहना है कि चिकित्सा शिक्षा के दौरान आर्थिक दबाव कम होना जरूरी है ताकि वे अपनी शैक्षणिक जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से निभा सकें।कैंडल मार्च के दौरान विद्यार्थियों ने अपनी मांगों के समर्थन में एकजुटता दिखाई। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी एबीवीपी का सहयोग भी मिला है। विद्यार्थियों के अनुसार आयुष मंत्रालय के स्तर पर भी स्टाइपेंड बढ़ाने को लेकर बातचीत की गई है। इसके बावजूद अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है। छात्रों का कहना है कि वे लंबे समय से इस मांग को उठा रहे हैं लेकिन निर्णय नहीं होने के कारण उन्हें विरोध प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ा है।विद्यार्थियों ने संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि स्टाइपेंड बढ़ाने के मुद्दे पर जल्द निर्णय लिया जाए। उनका कहना है कि प्रशिक्षण के दौरान मिलने वाली आर्थिक सहायता उनकी जरूरतों के अनुरूप होनी चाहिए। विद्यार्थियों को उम्मीद है कि उनकी मांग पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और जल्द कोई सकारात्मक निर्णय सामने आएगा।
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने यह भी चेतावनी दी कि यदि उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जा सकता है। फिलहाल उनकी प्रमुख मांग वर्तमान 9,383 रुपए के स्टाइपेंड को बढ़ाकर 21,500 रुपए करना है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग विद्यार्थियों की मांग पर क्या निर्णय लेता है और स्टाइपेंड में बढ़ोतरी को लेकर कोई आधिकारिक आदेश कब तक जारी होता है। -

शिवपुरी के सुनाज गांव में दर्दनाक हादसा, मिट्टी से लदी ट्रॉली पर पलटा ट्रैक्टर, ड्राइवर की हालत गंभीर
शिवपुरी । मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में मिट्टी से भरी ट्रॉली पर ट्रैक्टर पलटने से एक गंभीर हादसा हो गया। दुर्घटना में ट्रैक्टर चालक ट्रॉली के नीचे दब गया और उसे गंभीर चोटें आईं। मौके पर मौजूद लोगों ने तत्काल मदद करते हुए चालक को बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसे शिवपुरी जिला अस्पताल से ग्वालियर रेफर कर दिया गया। वहां उसका इलाज जारी है। घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।जानकारी के मुताबिक हादसा शुक्रवार शाम शिवपुरी जिले के सुनाज गांव में हुआ। ढेंकुआ गांव का रहने वाला रामवीर यादव ट्रैक्टर के साथ मिट्टी से भरी ट्रॉली लेकर जा रहा था। इसी दौरान करमई सड़क पर मिट्टी भराव का काम चल रहा था। बताया गया है कि रामवीर ट्रैक्टर को ऊंचाई वाली सड़क पर चढ़ाने का प्रयास कर रहा था। इसी दौरान ट्रैक्टर का अगला हिस्सा अचानक ऊपर उठ गया और वाहन का संतुलन बिगड़ गया। देखते ही देखते ट्रैक्टर मिट्टी से भरी ट्रॉली पर पलट गया। इस हादसे में चालक रामवीर उसके नीचे दब गया।दुर्घटना होते ही आसपास मौजूद लोगों में अफरा तफरी मच गई। लोगों ने बिना देर किए चालक को बाहर निकालने की कोशिश शुरू की। काफी प्रयास के बाद रामवीर को ट्रैक्टर और ट्रॉली के नीचे से निकाला गया। हादसे में उसे गंभीर चोटें आई थीं। इसके बाद स्थानीय लोगों की मदद से उसे तत्काल उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। समय पर मदद मिलने से उसे अस्पताल तक ले जाया जा सका।अस्पताल में डॉक्टरों ने घायल चालक का प्राथमिक उपचार किया। लेकिन उसकी हालत गंभीर होने के कारण उसे बेहतर इलाज के लिए शिवपुरी जिला अस्पताल भेजा गया। वहां भी स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे ग्वालियर रेफर कर दिया। फिलहाल रामवीर का ग्वालियर में इलाज जारी है। उसकी हालत को लेकर आगे की जानकारी उपचार के दौरान सामने आ सकती है।प्रारंभिक जानकारी के अनुसार ट्रैक्टर का अगला हिस्सा ऊंचाई पर चढ़ाते समय उठने के कारण यह हादसा हुआ। हालांकि दुर्घटना की परिस्थितियों और वाहन के पलटने के वास्तविक कारणों की पुष्टि पुलिस की जांच के बाद ही हो सकेगी। पुलिस ने घटना की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। जांच के दौरान यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि सड़क पर मिट्टी भराव के काम के दौरान वाहन किस स्थिति में था और ट्रैक्टर का संतुलन बिगड़ने की वजह क्या रही।इस घटना ने एक बार फिर मिट्टी और निर्माण सामग्री से भरे ट्रैक्टर ट्रॉलियों को ऊंचाई वाली सड़कों पर ले जाने के दौरान सावधानी बरतने की जरूरत को सामने रखा है। ऐसे वाहनों को चढ़ाई पर ले जाते समय संतुलन बिगड़ने का खतरा रहता है। खासकर जब ट्रॉली में भारी मिट्टी भरी हो तो चालक के लिए वाहन पर नियंत्रण बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और घायल चालक का ग्वालियर में उपचार जारी है।