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  • इंदौर स्वास्थ्य विभाग में अटैचमेंट पर चला प्रशासन का डंडा, मूल जगह लौटने के बाद ही मिलेगा अक्टूबर का वेतन

    इंदौर स्वास्थ्य विभाग में अटैचमेंट पर चला प्रशासन का डंडा, मूल जगह लौटने के बाद ही मिलेगा अक्टूबर का वेतन


    इंदौर । इंदौर के स्वास्थ्य विभाग में लंबे समय से मूल पदस्थापना के बजाय दूसरी जगह काम कर रहे डॉक्टरों नर्सों और अन्य कर्मचारियों के अटैचमेंट समाप्त कर दिए गए हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी यानी सीएमएचओ डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने 16 अक्टूबर को आदेश जारी कर 175 कर्मचारियों के अटैचमेंट तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए। अब सभी संबंधित कर्मचारियों को अपनी मूल पदस्थापना पर वापस जाकर जॉइनिंग देनी होगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि मूल पदस्थापना स्थल पर जॉइनिंग देने के बाद ही कर्मचारियों का अक्टूबर महीने का वेतन जारी किया जाएगा।
    जारी आदेश के अनुसार संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि अटैचमेंट पर कार्यरत कर्मचारियों को तत्काल कार्यमुक्त किया जाए और उन्हें उनके मूल कार्यस्थल पर भेजा जाए। इस प्रक्रिया को पूरा करने के बाद इसकी जानकारी सीएमएचओ कार्यालय को भी देनी होगी। विभाग ने इस मामले में किसी तरह की देरी नहीं करने के निर्देश दिए हैं। आदेश का उद्देश्य कर्मचारियों की तैनाती को निर्धारित व्यवस्था के अनुसार लागू करना और मूल पदस्थापना से जुड़े दायित्वों को सुनिश्चित करना बताया गया है।
    वेतन को लेकर भी विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। वेतन आहरण केंद्रों से कहा गया है कि संबंधित कर्मचारी जब अपनी मूल पदस्थापना पर उपस्थित होकर जॉइनिंग दे दें तभी अक्टूबर का वेतन आहरित किया जाए। इसका मतलब है कि केवल अटैचमेंट समाप्त होने का आदेश जारी होना पर्याप्त नहीं होगा बल्कि कर्मचारियों को अपने निर्धारित कार्यस्थल पर उपस्थिति भी दर्ज करानी होगी। इसके बाद ही वेतन संबंधी प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।
    सीएमएचओ डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि यदि निर्देश जारी होने के बाद कोई अधिकारी या कर्मचारी अटैचमेंट पर काम करते हुए पाया जाता है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। इसकी जिम्मेदारी संबंधित संस्था के प्रभारी की होगी। इस निर्देश के जरिए विभाग ने स्पष्ट संकेत दिया है कि आदेश के पालन में लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा।
    यह आदेश जिले के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों और अस्पतालों को भेजा गया है। इसमें सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक के अलावा देपालपुर मानपुर सांवेर और हातोद के खंड चिकित्सा अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए हैं। महू सहित विभिन्न अस्पतालों के प्रभारी चिकित्सा अधिकारियों शहरी स्वास्थ्य संस्थाओं और मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक के प्रभारियों को भी आदेश का पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।
    आदेश में भोपाल में हुई बैठकों और 16 अक्टूबर को मुख्यालय स्तर से मिले निर्देशों का हवाला दिया गया है। इसके आधार पर सभी संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करने के लिए कहा गया है। अब विभागीय स्तर पर यह सुनिश्चित किया जाना है कि 175 कर्मचारियों की मूल पदस्थापना पर वापसी की प्रक्रिया समय पर पूरी हो और इसकी जानकारी सीएमएचओ कार्यालय तक पहुंचे।
    स्वास्थ्य विभाग के इस फैसले से जिले के अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में कर्मचारियों की तैनाती की व्यवस्था में बदलाव होगा। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सभी संबंधित कर्मचारी कितनी जल्दी अपने मूल कार्यस्थल पर जॉइनिंग देते हैं और विभाग आदेश के पालन की निगरानी किस तरह करता है।

  • किसान को चूना लगाने की कोशिश! शिवपुरी में चने की तौल में गड़बड़ी का आरोप, जांच के आदेश और जुर्माने की तैयारी

    किसान को चूना लगाने की कोशिश! शिवपुरी में चने की तौल में गड़बड़ी का आरोप, जांच के आदेश और जुर्माने की तैयारी


    भोपाल। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में किसानों की उपज की तौल में गड़बड़ी का मामला सामने आया है। लुकवासा कृषि उपज मंडी के बाहर चना बेचने पहुंचे किसान कैलाश जाटव ने व्यापारी पर कम तौल करने का आरोप लगाया है। किसान के मुताबिक व्यापारी दीपक अहिरवार ने मंडी के भीतर मिलने वाले भाव से 50 रुपए प्रति क्विंटल अधिक कीमत देने का भरोसा दिलाया था। इसी लालच में किसान अपनी उपज लेकर मंडी के बाहर पहुंचा। आरोप है कि तौल के दौरान करीब 11 क्विंटल चने को केवल 8 क्विंटल बताया गया। किसान ने दोबारा तौल कराने की मांग की तो करीब तीन क्विंटल का अंतर सामने आया।
    किसान कैलाश जाटव के अनुसार अधिक भाव मिलने की उम्मीद में वह व्यापारी के पास चना बेचने पहुंचा था। शुरुआत में तौल के दौरान जितनी उपज बताई गई उस पर उसे संदेह हुआ। इसके बाद उसने दोबारा तौल कराने का फैसला किया। दोबारा तौल में कथित गड़बड़ी सामने आने पर मामला गंभीर हो गया। किसान का आरोप है कि यदि वह समय रहते तौल की जांच नहीं कराता तो उसे अपनी उपज का उचित भुगतान नहीं मिल पाता और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता।
    बताया गया है कि करीब 11 क्विंटल चने को 8 क्विंटल बताए जाने से लगभग तीन क्विंटल का अंतर सामने आया। किसान के अनुसार इस गड़बड़ी के कारण उसे करीब 20 हजार रुपए तक का नुकसान हो सकता था। हालांकि वास्तविक नुकसान का आकलन उपज की सही मात्रा और उस समय लागू बाजार भाव के आधार पर किया जा सकेगा। फिलहाल किसान की शिकायत के बाद मामले ने मंडी में तौल व्यवस्था और किसानों को मिलने वाले भुगतान पर सवाल खड़े किए हैं।
    घटना सामने आने के बाद कृषि उपज मंडी प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। मंडी सचिव नरेश जाटव ने बताया कि शिकायत की जांच की जा रही है। यदि तौल में अनियमितता की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि मामले की जांच के बाद ही जिम्मेदारी तय की जाएगी।
    वहीं कोलारस के एसडीएम शिवदयाल धाकड़ ने व्यापारी का कांटा जब्त करने और जुर्माना लगाने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही भविष्य में किसानों को इस तरह की परेशानी से बचाने के लिए मंडी क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले सभी कांटों की जांच कराने की बात कही गई है। तौल उपकरणों की जांच से यह सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है कि किसानों की उपज का वजन सही दर्ज हो और उन्हें भुगतान में नुकसान न उठाना पड़े।
    कृषि उपज मंडियों में किसान अपनी मेहनत से तैयार की गई फसल बेचने आते हैं। ऐसे में तौल और भुगतान में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। थोड़ी सी गड़बड़ी भी किसान की कमाई पर सीधा असर डाल सकती है। लुकवासा मंडी के बाहर सामने आया यह मामला किसानों के लिए सतर्क रहने और उपज की तौल स्वयं जांचने की जरूरत को रेखांकित करता है। प्रशासन की जांच और आगे की कार्रवाई से स्पष्ट होगा कि इस मामले में कितनी अनियमितता हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

  • सरकारी दस्तावेजों तक पहुंचने के लिए तोड़ा गया ताला? कोलारस के पुराने भवन में आग से मचा हड़कंप, साजिश के एंगल से जांच

    सरकारी दस्तावेजों तक पहुंचने के लिए तोड़ा गया ताला? कोलारस के पुराने भवन में आग से मचा हड़कंप, साजिश के एंगल से जांच


    शिवपुरी । मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के कोलारस नगर परिषद के पुराने भवन में शुक्रवार रात आग लगने से सरकारी रिकॉर्ड को नुकसान पहुंचा है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और नगर परिषद के कर्मचारी मौके पर पहुंचे। आग इतनी गंभीर थी कि उस पर काबू पाने में समय लगा। जानकारी के मुताबिक रात करीब ढाई बजे आग बुझाई जा सकी। घटना के बाद पुराने भवन में रखे महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेजों को हुए नुकसान का मामला सामने आया है। वहीं भवन के दरवाजे का ताला टूटा मिलने से आग लगने की वजह को लेकर संदेह गहरा गया है।
    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार पुराने भवन में आग लगने की घटना सामान्य हादसा भी हो सकती है लेकिन ताला टूटा मिलने के कारण जानबूझकर आग लगाए जाने की आशंका भी जताई जा रही है। फिलहाल इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि आग किसी ने लगाई या इसके पीछे कोई दूसरा कारण था। कोलारस थाना पुलिस दोनों पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। पुलिस घटनास्थल की परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आग लगने की वास्तविक वजह का पता लगाने का प्रयास कर रही है।
    जानकारी के मुताबिक कोलारस नगर परिषद का कार्यालय वर्ष 2014-15 में जगतपुर चौराहे के पास नए भवन में स्थानांतरित कर दिया गया था। इसके बाद से नगर परिषद का नियमित कामकाज नए कार्यालय से संचालित हो रहा है। इससे पहले नगर परिषद का काम पुराने भवन से होता था। नगर पंचायत के समय से लेकर वर्ष 2013 तक के रिकॉर्ड पुराने भवन के परिषद हॉल में रखे हुए थे। आग लगने से इसी स्थान पर रखे सरकारी दस्तावेज प्रभावित हुए हैं। हालांकि कितने रिकॉर्ड पूरी तरह नष्ट हुए हैं और कितने दस्तावेजों को आंशिक नुकसान पहुंचा है इसकी विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।
    पुराने सरकारी रिकॉर्ड प्रशासनिक कामकाज के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इनमें पुराने निर्णयों और कार्यालयीन कार्यवाही से जुड़े दस्तावेज शामिल होने की संभावना रहती है। ऐसे में आग की घटना के बाद रिकॉर्ड के नुकसान का आकलन करना भी जरूरी होगा। संबंधित विभाग को यह पता लगाना होगा कि कौन-कौन से दस्तावेज प्रभावित हुए हैं और क्या उनकी प्रतियां किसी अन्य कार्यालय या डिजिटल रिकॉर्ड में उपलब्ध हैं।
    भवन का ताला टूटा मिलने के बाद इस घटना में किसी की भूमिका होने की आशंका को भी नजरअंदाज नहीं किया जा रहा है। हालांकि केवल ताला टूटा मिलना अपने आप में साजिश का प्रमाण नहीं है। जांच के दौरान पुलिस को यह पता लगाना होगा कि भवन में प्रवेश कैसे हुआ और आग किन परिस्थितियों में लगी। घटनास्थल से मिलने वाले साक्ष्य और अन्य उपलब्ध जानकारी जांच की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगे।
    कोलारस थाना पुलिस फिलहाल आग लगने की घटना को हादसे और संभावित साजिश दोनों एंगल से देख रही है। आग लगने का कारण स्पष्ट होने के बाद ही यह पता चल सकेगा कि घटना दुर्घटनावश हुई या इसके पीछे कोई आपराधिक गतिविधि थी। फिलहाल सरकारी रिकॉर्ड को हुए नुकसान और पुराने भवन की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

  • सीएम के दौरे से प्रशासन की फुर्ती, बदहाल सड़क कुछ घंटों में चकाचक, नरसिंहपुर में हेलिकॉप्टर की लैंडिंग से उड़ा तंबू

    सीएम के दौरे से प्रशासन की फुर्ती, बदहाल सड़क कुछ घंटों में चकाचक, नरसिंहपुर में हेलिकॉप्टर की लैंडिंग से उड़ा तंबू


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के हालिया दौरों से जुड़े कुछ दिलचस्प नजारे चर्चा में हैं। कहीं मुख्यमंत्री के हेलिकॉप्टर की लैंडिंग के दौरान तेज हवा से तंबू उड़ गया तो कहीं उनके दौरे से पहले प्रशासन ने कुछ ही घंटों में सड़क की मरम्मत कर दी। दूसरी ओर अशोकनगर में सिंधिया की बैठक के दौरान खाली कुर्सियां दिखाई दीं। इन घटनाओं ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा को जन्म दिया है।
    पहला मामला नरसिंहपुर का है जहां मुख्यमंत्री मोहन यादव के हेलिकॉप्टर की लैंडिंग के दौरान तेज हवा के झोंकों से वहां लगाया गया तंबू उड़ गया। मुख्यमंत्री के स्वागत के लिए मंत्री विधायक सांसद और अधिकारी हेलिपैड के पास मौजूद थे। हेलिकॉप्टर के पंखों से उठी तेज हवा के कारण धूल उड़ने लगी और तंबू भी हवा में उखड़ गया। अचानक हुए इस घटनाक्रम से मौके पर मौजूद लोगों में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी के घायल होने या नुकसान की खबर सामने नहीं आई। घटना का वीडियो सामने आने के बाद लोग इसे लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
    दूसरा मामला मुरैना का है जहां मुख्यमंत्री को एक स्कूल का निरीक्षण करना था। स्कूल तक पहुंचने वाली सड़क की हालत खराब बताई गई थी। मुख्यमंत्री के दौरे की जानकारी के बाद प्रशासन ने तेजी दिखाते हुए कुछ ही घंटों में सड़क को दुरुस्त कर दिया। आम दिनों में बदहाल सड़कों से परेशान रहने वाले लोगों के लिए यह बदलाव चर्चा का विषय बन गया। इस घटनाक्रम के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि जब किसी वीआईपी दौरे के दौरान प्रशासन इतनी तेजी से काम कर सकता है तो आम दिनों में भी सड़कों की मरम्मत और बुनियादी सुविधाओं पर इसी तरह ध्यान क्यों नहीं दिया जाता। हालांकि सड़क निर्माण और मरम्मत के काम की वास्तविक स्थिति तथा उसकी गुणवत्ता का आकलन संबंधित विभाग की जानकारी के आधार पर ही किया जा सकता है।
    तीसरा मामला केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के अशोकनगर दौरे से जुड़ा है। यहां वे जनप्रतिनिधियों की बैठक में शामिल होने पहुंचे थे। कार्यक्रम में बैठने के लिए पर्याप्त कुर्सियां लगाई गई थीं लेकिन कई कुर्सियां खाली नजर आईं। सिंधिया के मंच पर पहुंचने के दौरान खाली कुर्सियों को हटाने की कवायद भी दिखाई दी। इस दृश्य के बाद कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों की कम मौजूदगी को लेकर चर्चा होने लगी। हालांकि बैठक में उपस्थिति कम रहने की वजह स्पष्ट नहीं है। यह आयोजन की व्यवस्था से जुड़ा मामला था या जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति के पीछे कोई अन्य कारण था इसकी पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।
    इसी दौरे के दौरान सिंधिया अशोकनगर में आयोजित जनजातीय सम्मेलन में भी शामिल हुए। यहां आदिवासी परंपरा के अनुसार उनका स्वागत किया गया और उन्हें विशेष मुकुट पहनाया गया। सिंधिया पूरे कार्यक्रम के दौरान मुकुट पहने नजर आए और उन्होंने इसी रूप में भाषण भी दिया। उनके इस अंदाज ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का ध्यान खींचा। पारंपरिक स्वागत और पहनावे की तस्वीरें भी चर्चा में रहीं।
    इन घटनाओं के बीच प्रशासनिक व्यवस्था और राजनीतिक कार्यक्रमों के आयोजन को लेकर अलग-अलग सवाल उठ रहे हैं। मुख्यमंत्री के दौरे से पहले सड़क का तेजी से दुरुस्त होना सरकारी मशीनरी की तत्परता को दिखाता है लेकिन आम नागरिकों के लिए भी ऐसी ही नियमित व्यवस्था जरूरी है। वहीं राजनीतिक कार्यक्रमों में उपस्थिति और आयोजन की तैयारियां भी चर्चा का हिस्सा बनी हुई हैं। फिलहाल इन घटनाओं की खासियत यही है कि एक ही दौर में प्रशासनिक फुर्ती से लेकर राजनीतिक आयोजनों के अलग-अलग दृश्य सामने आए हैं।

  • भोपाल के कॉलेज में गरबा आयोजन पर विवाद, बाहरी युवकों की एंट्री और गानों को लेकर भिड़े लोग, पुलिस से कार्रवाई की मांग

    भोपाल के कॉलेज में गरबा आयोजन पर विवाद, बाहरी युवकों की एंट्री और गानों को लेकर भिड़े लोग, पुलिस से कार्रवाई की मांग


    भोपाल। भोपाल के सेम कॉलेज में गरबा आयोजन के दौरान विवाद का मामला सामने आया है। घटना से जुड़े वीडियो में बजरंग दल के एक कार्यकर्ता को युवक को थप्पड़ मारते हुए देखा जा सकता है। विवाद की वजह फिल्मी गानों पर गरबा करने और कॉलेज में बाहरी युवकों को प्रवेश देने को लेकर जताई गई आपत्ति बताई जा रही है। मामले में बजरंग दल की ओर से बिलखिरिया थाने में शिकायत आवेदन देकर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। हालांकि घटना के सभी पहलुओं और लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
    विश्व हिंदू परिषद के मध्य भारत प्रांत मंत्री जितेंद्र चौहान ने आरोप लगाया कि नवरात्रि के दौरान होने वाले गरबा आयोजन धार्मिक आस्था और परंपराओं से जुड़े होते हैं। ऐसे कार्यक्रमों में फिल्मी और अश्लील गाने बजाने के बजाय पारंपरिक गरबा और धार्मिक गीतों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कॉलेज प्रबंधन पर आयोजन के दौरान प्रवेश व्यवस्था में लापरवाही बरतने का आरोप भी लगाया। उनका कहना है कि कार्यक्रम में ऐसे युवक भी मौजूद थे जो कॉलेज के विद्यार्थी नहीं थे।
    जितेंद्र चौहान के मुताबिक स्थानीय छात्रों से गरबा आयोजन के दौरान फिल्मी गाने बजाए जाने की जानकारी मिलने के बाद बजरंग दल के कुछ कार्यकर्ता कॉलेज पहुंचे थे। इसके बाद संगठन के अन्य लोग भी मौके पर पहुंचे। चौहान ने स्पष्ट किया कि वीडियो में जिस युवक को थप्पड़ मारे जाते दिखाई दे रहे हैं वह बजरंग दल का कार्यकर्ता नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध के दौरान कार्यकर्ताओं के साथ भी बदसलूकी और मारपीट की गई। ऐसे में वीडियो में दिखाई देने वाली घटना और संगठन के कार्यकर्ताओं के साथ कथित मारपीट के आरोपों की अलग-अलग परिस्थितियों में जांच किए जाने की जरूरत है।
    बिलखिरिया थाना प्रभारी को दिए गए शिकायत आवेदन में पुष्पराज यादव ने खुद को भोपाल जिला बजरंग दल का प्रमुख बताया है। आवेदन के मुताबिक 16 अक्टूबर की रात करीब साढ़े आठ बजे उन्हें सेम कॉलेज में गरबा आयोजन के दौरान फिल्मी गानों पर डांस होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद वह अपने साथियों शिवम कुशवाह और यश द्विवेदी के साथ कॉलेज पहुंचे। शिकायत में शिवम कुशवाह को मां कंकाली प्रखंड मंत्री और यश द्विवेदी को बजरंग दल का जिला संयोजक बताया गया है।
    शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि कॉलेज परिसर में मुस्लिम समुदाय के दो से अधिक युवक मौजूद थे। आवेदन के अनुसार जब कार्यकर्ताओं ने फिल्मी गाने बंद करने और आयोजन के स्वरूप पर आपत्ति जताई तो वहां मौजूद युवकों ने उनके साथ गाली-गलौज और मारपीट की। शिकायत में कॉलेज फैकल्टी के नीरज गुप्ता पर बाउंसर बुलाकर कार्यकर्ताओं को बाहर निकलवाने की धमकी देने और संबंधित युवकों का पक्ष लेने का आरोप भी लगाया गया है। आवेदन में समीर आलम समेत अन्य लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
    जितेंद्र चौहान ने कहा कि स्कूलों और कॉलेजों में होने वाले गरबा आयोजनों में धार्मिक परंपराओं का ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने आयोजकों से पारंपरिक गीतों के इस्तेमाल और प्रवेश व्यवस्था को लेकर सतर्क रहने की अपील की। साथ ही कहा कि संगठन ऐसे मामलों में पुलिस और प्रशासन से कार्रवाई की मांग करेगा और जरूरत पड़ने पर विरोध भी करेगा। फिलहाल इस पूरे मामले में युवक को थप्पड़ मारने की घटना और दोनों पक्षों की ओर से लगाए गए आरोप जांच का विषय हैं।

  • भोपाल के न्यू मार्केट में सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुली, 50 फीट के दायरे में 3 छोले-भटूरे की दुकानें, आग बुझाने के इंतजाम अधूरे

    भोपाल के न्यू मार्केट में सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुली, 50 फीट के दायरे में 3 छोले-भटूरे की दुकानें, आग बुझाने के इंतजाम अधूरे


    भोपाल । भोपाल के न्यू मार्केट में 8 अक्टूबर को लगी भीषण आग के बाद भी दुकानों में अग्नि सुरक्षा को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आ रही है। करीब 900 दुकानों वाले इस व्यस्त बाजार में कपड़े और ज्वेलरी की दुकानों के बीच छोले-भटूरे की दुकानों में भट्टियां सुलग रही हैं। इन दुकानों में ग्राहकों के लिए नाश्ता तैयार किया जा रहा है लेकिन सुरक्षा इंतजामों की स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है। जांच के दौरान कुछ दुकानों में फायर और इलेक्ट्रिक एनओसी नहीं मिली। वहीं अग्निशामक यंत्र होने के बावजूद कर्मचारियों को उनका इस्तेमाल करने की जानकारी नहीं होने की बात भी सामने आई है।
    रिपोर्ट के मुताबिक जिस बालाजी छोले-भटूरे की दुकान में 8 अक्टूबर को भीषण आग लगी थी उसके आसपास भी इसी तरह की दुकानें संचालित हो रही हैं। एक दुकान से करीब 50 फीट की दूरी पर तीन अन्य छोले-भटूरे की दुकानें होने की जानकारी सामने आई है। यहां छोटे किचन में भटूरे तले जा रहे हैं। दुकानों के आसपास कपड़े और अन्य सामान की मौजूदगी के कारण आग लगने की स्थिति में नुकसान बढ़ने की आशंका है। बाजार में बड़ी संख्या में ग्राहकों की आवाजाही के कारण सुरक्षा व्यवस्था और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
    जांच में कलकत्ता छोले-भटूरे की दुकान पर कई कमियां सामने आईं। यहां जिस जगह पर छोले तैयार किए जा रहे थे उसके ऊपर धूप से बचने के लिए रिट्रैक्टेबल अवनिंग लगी हुई थी। दुकान में आग बुझाने का यंत्र मौजूद था लेकिन उसे चलाने का प्रशिक्षण कर्मचारियों को नहीं होने की बात बताई गई। आग लगने की स्थिति में केवल अग्निशामक यंत्र का मौजूद होना पर्याप्त नहीं है बल्कि कर्मचारियों को उसका सही इस्तेमाल करना भी आना चाहिए।
    देहली छोले-भटूरे की दुकान में किचन बेहद छोटा बताया गया है। यहां दो कर्मचारी मुश्किल से बैठकर भटूरे तल पाते हैं। ऐसी जगह पर आग लगने की स्थिति में बाहर निकलने में परेशानी हो सकती है। इसके अलावा बिजली के तार भी खुले मिले। पंजाब छोले-भटूरे की दुकान में फायर और इलेक्ट्रिक एनओसी नहीं होने की जानकारी सामने आई। वहां भी बिजली के खुले तार और कोने में रखे अग्निशामक यंत्र पाए गए।
    फायर ऑफिसर सौरभ पटेल के मुताबिक दुकानों में अग्निशामक यंत्र और व्यावसायिक उपयोग के लिए उपयुक्त गैस सिलेंडर होना चाहिए। उन्होंने जांच में भट्टियां मिलने और बिजली सुरक्षा से जुड़े प्रमाणपत्र नहीं होने की बात कही। रिपोर्ट के अनुसार कुछ दुकानों में कर्मचारियों के बैठने और काम करने की व्यवस्था भी सुरक्षित नहीं पाई गई। इन कमियों को देखते हुए संबंधित दुकानों को दूसरी जगह स्थानांतरित करने की योजना पर जोर दिया जा रहा है।
    न्यू मार्केट में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल इसलिए भी गंभीर हैं क्योंकि 8 अक्टूबर को बालाजी छोले-भटूरे की दुकान में लगी आग आसपास की दुकानों और रेहड़ियों तक फैल गई थी। आग की चपेट में पांच अन्य बड़ी दुकानों और 12 से अधिक रेहड़ियों के आने की खबर थी। इस घटना में करोड़ों रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया गया। दुकानदारों और कर्मचारियों को जान बचाने के लिए पहली मंजिल से नीचे कूदना पड़ा था और कुछ लोगों को चोटें भी आई थीं।
    पुलिस ने इस मामले में दुकान संचालक दीप उर्फ दीपू अग्रवाल के खिलाफ केस दर्ज किया है। शुरुआती जांच के मुताबिक भट्टी के पास रखे कपड़े में आग लगने के बाद लपटें फैल गई थीं। नगर निगम आग से बचाव के इंतजामों की जांच कर रहा है। इस कार्रवाई के बीच सवाल उठ रहा है कि बाजार में नियमित निरीक्षण और सुरक्षा मानकों का पालन पहले क्यों सुनिश्चित नहीं किया गया।
    भोपाल के दूसरे बाजारों में भी अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल सामने आ चुके हैं। चौक बाजार और इब्राहिमपुरा की संकरी गलियों में आग बुझाने के लिए करीब 22 लाख रुपये का अंडरग्राउंड फायर हाइड्रेंट सिस्टम लगाया गया था। लेकिन जुलाई 2026 में आग लगने के दौरान इसके काम नहीं करने की बात सामने आई। सिस्टम की प्रेशर टेस्टिंग और रखरखाव पर भी सवाल उठे। बैरागढ़ के एक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में पहले हुए बड़े अग्निकांड के बाद लगाए गए उपकरणों की देखरेख पर भी चिंता जताई गई है।
    न्यू मार्केट की मौजूदा स्थिति एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि क्या हादसों के बाद ही सुरक्षा जांच तेज होती है। व्यस्त बाजारों में नियमित निरीक्षण खुले बिजली के तारों को दुरुस्त करना कर्मचारियों को आग बुझाने का प्रशिक्षण देना और अग्निशामक उपकरणों को चालू हालत में रखना बेहद जरूरी है। प्रशासन की ओर से दुकानों की शिफ्टिंग और जांच की कार्रवाई कितनी प्रभावी होती है यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

  • MP में पेपर लीक और नकल के मामलों की सुनवाई होगी तेज, चार फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित, दोषियों को सजा दिलाने पर सरकार का जोर

    MP में पेपर लीक और नकल के मामलों की सुनवाई होगी तेज, चार फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित, दोषियों को सजा दिलाने पर सरकार का जोर


    भोपाल। मध्य प्रदेश में प्रतियोगी परीक्षाओं और बोर्ड परीक्षाओं से जुड़े अपराधों पर लगाम लगाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। पेपर लीक नकल और परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी से जुड़े मामलों की जल्द सुनवाई के लिए भोपाल इंदौर ग्वालियर और जबलपुर में चार फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए गए हैं। इन अदालतों में चार्जशीट दाखिल होने के तीन महीने के भीतर ट्रायल पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस पहल के साथ मध्य प्रदेश परीक्षा संबंधी अपराधों के लिए अलग फास्ट ट्रैक अदालतें बनाने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। सरकार का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता मजबूत करना और मेहनत के दम पर परीक्षा देने वाले युवाओं के हितों की रक्षा करना है।
    राज्य सरकार के अनुसार यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशों के बाद उठाया गया है। परीक्षा से जुड़े अपराधों के मामलों में अक्सर जांच और कानूनी प्रक्रिया लंबी होने से अभ्यर्थियों के मन में निष्पक्ष चयन को लेकर सवाल उठते हैं। नई व्यवस्था के जरिए ऐसे मामलों की सुनवाई को प्राथमिकता देने और कानूनी कार्रवाई में तेजी लाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि तीन महीने में ट्रायल पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है लेकिन हर मामले में इस अवधि के भीतर फैसला आने की गारंटी नहीं है। सुनवाई का समय मामले की परिस्थितियों और कानूनी प्रक्रिया पर भी निर्भर करेगा।
    इन चार अदालतों के लिए अलग अलग जिलों का दायित्व तय किया गया है। भोपाल स्थित फास्ट ट्रैक कोर्ट भोपाल के साथ सीहोर रायसेन बैतूल नर्मदापुरम हरदा राजगढ़ और विदिशा जिलों से जुड़े मामलों की सुनवाई करेगी। इंदौर की अदालत इंदौर के अलावा धार रतलाम झाबुआ मंदसौर उज्जैन और देवास सहित मालवा निमाड़ क्षेत्र के मामलों को देखेगी। ग्वालियर स्थित कोर्ट ग्वालियर भिंड मुरैना शिवपुरी गुना दतिया अशोकनगर और टीकमगढ़ जैसे जिलों से जुड़े मामलों की सुनवाई करेगी। वहीं जबलपुर की अदालत को जबलपुर सागर रीवा सतना छिंदवाड़ा शहडोल और महाकौशल तथा बुंदेलखंड क्षेत्र के अन्य जिलों से संबंधित मामलों की जिम्मेदारी दी गई है।
    मामलों की प्रभावी पैरवी के लिए राज्य शासन ने विशेष अभियोजकों की नियुक्ति भी की है। इनकी जिम्मेदारी अदालत में साक्ष्य प्रस्तुत करने गवाहों से संबंधित प्रक्रिया को व्यवस्थित रखने और मामलों की पैरवी पर विशेष ध्यान देने की होगी। इसके साथ ही संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षकों के नेतृत्व में विशेष जांच दल यानी एसआईटी गठित किए गए हैं। इन दलों के जरिए परीक्षा अपराधों से जुड़े मामलों की जांच को व्यवस्थित करने और जरूरी साक्ष्य जुटाने पर जोर दिया जाएगा। जांच और अभियोजन के बीच बेहतर तालमेल से अदालत में सुनवाई की प्रक्रिया को गति देने की उम्मीद है।
    पेपर लीक और नकल जैसी घटनाएं केवल परीक्षा की विश्वसनीयता को प्रभावित नहीं करतीं बल्कि उन लाखों युवाओं के भविष्य पर भी असर डालती हैं जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में समय और संसाधन लगाते हैं। यदि परीक्षा से जुड़े अपराधों की समय पर जांच और सुनवाई होती है तो निष्पक्ष चयन प्रक्रिया में लोगों का भरोसा मजबूत हो सकता है। नई व्यवस्था में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई कानून और अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर होगी। केवल आरोप लगने से किसी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा सकता।
    मध्य प्रदेश सरकार की इस पहल का वास्तविक असर अदालतों में मामलों की सुनवाई की गति और जांच की गुणवत्ता से सामने आएगा। विशेष अदालतों और अभियोजन व्यवस्था के माध्यम से सरकार परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखने तथा अनियमितताओं के खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई को मजबूत करना चाहती है। अब इन अदालतों के कामकाज और निर्धारित समयसीमा के पालन पर नजर रहेगी।

  • आदिवासी परिवारों के साथ अन्याय पर सरकार सख्त, कोसमी मामले की जांच के आदेश, दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन

    आदिवासी परिवारों के साथ अन्याय पर सरकार सख्त, कोसमी मामले की जांच के आदेश, दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन


    सीहोर । मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के बुधनी क्षेत्र के कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने का मामला अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंच गया है। गुरुवार देर शाम केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने भोपाल स्थित मुख्यमंत्री निवास पर मुलाकात की। बैठक में वन विभाग की कार्रवाई से प्रभावित आदिवासी परिवारों की स्थिति और उनकी समस्याओं को लेकर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने मामले की जांच कराने और जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया है। इस घटनाक्रम के बाद प्रभावित परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
    मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी मौजूद रहे। प्रतिनिधिमंडल में प्रभावित आदिवासी परिवारों के प्रतिनिधि भी शामिल थे। शिवराज सिंह चौहान ने कोसमी गांव में हुई कार्रवाई का मुद्दा उठाते हुए परिवारों को न्याय दिलाने की मांग की। वह पहले भी इस मामले पर नाराजगी जता चुके हैं। उनका कहना था कि मौके पर उन्होंने बच्चों को परेशान होते और महिलाओं को कठिन परिस्थितियों से गुजरते देखा था। अब मुख्यमंत्री के सामने मामला रखने के बाद उन्होंने प्रभावित परिवारों की समस्याओं के समाधान की जरूरत पर जोर दिया।
    जानकारी के मुताबिक 11 अक्टूबर को कोसमी गांव में वन विभाग की कार्रवाई के दौरान 12 परिवारों के मकान तोड़े गए थे। इसके बाद प्रभावित परिवारों ने अपने नुकसान को लेकर सवाल उठाए और मुआवजे की मांग की। परिवारों का कहना है कि उन्हें जमीन के पट्टे दिए जाएं और मकानों के साथ फसलों को हुए नुकसान की भरपाई की जाए। उन्होंने कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कदम उठाने की मांग की है। फिलहाल इस पूरे मामले में जांच और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर मुख्यमंत्री के आश्वासन पर परिवारों की नजर बनी हुई है।
    बैठक के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी गतिविधियां तेज होने की जानकारी सामने आई है। बताया गया है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर कलेक्टर के. बालागुरु रात में कोनझीर पहुंचे और प्रभावित आदिवासी परिवारों से मुलाकात की। परिवारों को बस के जरिए वापस उनके घर पहुंचाने की व्यवस्था किए जाने की बात भी सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि किसी भी आदिवासी परिवार को परेशान नहीं किया जाए और जहां लोग स्थापित हैं वहां उनके साथ संवेदनशीलता के साथ व्यवहार किया जाए। हालांकि मामले से जुड़े सभी तथ्यों और कार्रवाई की परिस्थितियों का स्पष्ट होना जांच के बाद ही संभव होगा।
    कोसमी गांव की घटना अब राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है। प्रभावित परिवारों की मांग है कि उन्हें केवल आश्वासन ही नहीं बल्कि वास्तविक राहत भी मिले। उनके अनुसार मकान और फसलें प्रभावित होने से उनके सामने रहने और आजीविका से जुड़ी समस्याएं खड़ी हुई हैं। ऐसे में मुआवजे और जमीन के पट्टों से संबंधित मांगों पर निर्णय महत्वपूर्ण होगा।
    इधर कोसमी मामले को लेकर आदिवासी समुदाय के कुछ लोगों ने भोपाल की ओर पैदल मार्च भी शुरू किया है। जानकारी के अनुसार ये परिवार शुक्रवार शाम तक राजधानी पहुंच सकते हैं। उनकी प्रमुख मांग है कि मकान तोड़े जाने के मामले में न्याय मिले और हुए नुकसान की भरपाई की जाए। मुख्यमंत्री की ओर से जांच और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई का भरोसा दिए जाने के बाद अब आगे की प्रक्रिया महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और प्रभावित परिवारों को किस तरह राहत मिलती है इस पर सभी की नजर रहेगी।

  • सामान्य से 14 इंच कम बारिश ने बढ़ाई इंदौर की मुश्किलें, कई इलाकों में टैंकरों से पानी सप्लाई, 50 करोड़ के पैकेज की मांग

    सामान्य से 14 इंच कम बारिश ने बढ़ाई इंदौर की मुश्किलें, कई इलाकों में टैंकरों से पानी सप्लाई, 50 करोड़ के पैकेज की मांग


    इंदौर । मध्य प्रदेश के इंदौर में इस बार सामान्य से कम बारिश होने के कारण जलसंकट की आशंका अभी से गहराने लगी है। गर्मी का मौसम आने से पहले ही शहर के हजारों परिवारों को पानी की पर्याप्त आपूर्ति नहीं मिल पा रही है। इंदौर नगर निगम की सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक करीब 85 हजार परिवारों की पानी संबंधी जरूरतें पूरी करने में परेशानी सामने आई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि 52 हजार 262 घरों तक अलग-अलग कारणों से नर्मदा जल नहीं पहुंच रहा है। वहीं 33 हजार 37 परिवार ऐसे हैं जिन्हें पानी की जरूरत पूरी करने के लिए टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ता है। निगम का यह सर्वे 14 अक्टूबर को वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपा गया था। रिपोर्ट सामने आने के बाद शहर की जलापूर्ति व्यवस्था और आगामी महीनों में पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है।
    सर्वे में वार्डवार आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है। इसके अनुसार वार्ड नंबर 36 के मायाखेड़ी अरंडिया निपानिया और पिपलियाकुमार जैसे इलाकों में पानी की समस्या अधिक गंभीर बताई गई है। इन क्षेत्रों में करीब 12 हजार परिवारों के पास नर्मदा जल के कनेक्शन नहीं हैं। मायाखेड़ी और निपानिया में पानी की जरूरत पूरी करने के लिए टैंकरों से सप्लाई भी शुरू कर दी गई है। इससे संकेत मिलता है कि शहर के कुछ इलाकों में गर्मी शुरू होने से पहले ही वैकल्पिक जल व्यवस्था की जरूरत पड़ रही है। वार्ड नंबर 16 में भी करीब साढ़े सात हजार परिवार नर्मदा कनेक्शन से वंचित बताए गए हैं।
    नगर निगम की रिपोर्ट का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू उन परिवारों से जुड़ा है जिनके क्षेत्रों में जलापूर्ति की व्यवस्था होने के बावजूद पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता। ऐसे परिवारों को भी टैंकरों के माध्यम से पानी उपलब्ध कराने की जरूरत पड़ती है। सर्वे के अनुसार शहर में 33 हजार 37 परिवार इस श्रेणी में आते हैं। वार्ड नंबर 37 में करीब दो हजार परिवार टैंकरों पर निर्भर हैं। वार्ड 45 में 1800 परिवार वार्ड 51 में 1300 और वार्ड 28 में 1200 परिवारों को टैंकर से पानी देने की जरूरत बताई गई है। वार्ड नंबर 63 में भी ऐसे 250 परिवार चिह्नित किए गए हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि जलापूर्ति की चुनौती केवल उन क्षेत्रों तक सीमित नहीं है जहां नर्मदा पाइपलाइन नहीं पहुंची है। कुछ इलाकों में नेटवर्क होने के बावजूद जरूरत के मुताबिक पानी उपलब्ध नहीं हो रहा है।
    जलसंकट की स्थिति को देखते हुए महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने टैंकरों के जरिए पानी पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया है। गुरुवार को हुई बैठक में उन्होंने पर्याप्त हाइड्रेंट बनाने और टैंकरों में पानी भरने की सुविधा बढ़ाने के निर्देश दिए। महापौर ने यह भी बताया कि नए टैंकर खरीदने के लिए मध्य प्रदेश सरकार को मांग भेजी गई है। इससे उन इलाकों में पानी की सप्लाई बेहतर करने की कोशिश की जा रही है जहां लोगों को नियमित रूप से पानी नहीं मिल पा रहा है।
    इस बार इंदौर में कम बारिश को भी जलसंकट की आशंका की बड़ी वजह माना जा रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक शहर में सामान्य तौर पर करीब 37 इंच बारिश होती है जबकि इस बार लगभग 23 इंच बारिश दर्ज की गई है। यानी सामान्य से करीब 14 इंच कम पानी बरसा है। इस स्थिति को देखते हुए महापौर ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से जल प्रबंधन के लिए 50 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज की मांग की है।
    जलसंकट से निपटने के उपायों पर चर्चा के लिए गुरुवार सुबह नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट और नगर निगम सहित संबंधित विभागों के अधिकारियों की बैठक भी हुई। अब शहर में पानी की उपलब्धता बढ़ाने और टैंकर व्यवस्था मजबूत करने के उपायों पर ध्यान दिया जा रहा है। आने वाले महीनों में बारिश की कमी और मौजूदा जलापूर्ति व्यवस्था के बीच इंदौर के सामने बड़ी चुनौती बनी रह सकती है।

  • गरबा एंट्री फीस को लेकर उज्जैन में विवाद, पांडाल में विरोध के बीच भगदड़ जैसे हालात, प्रशासन ने दी कार्रवाई की चेतावनी

    गरबा एंट्री फीस को लेकर उज्जैन में विवाद, पांडाल में विरोध के बीच भगदड़ जैसे हालात, प्रशासन ने दी कार्रवाई की चेतावनी


    उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन में नवरात्रि के दौरान आयोजित गरबा कार्यक्रमों में प्रवेश शुल्क लेने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। प्रशासन की ओर से निशुल्क आयोजन की शर्त पर अनुमति दिए जाने के बावजूद कुछ पांडालों में प्रवेश के लिए 150 रुपये से लेकर 1500 रुपये तक के पास बेचे जाने की शिकायत सामने आई है। गुरुवार रात इस मुद्दे पर हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं ने कई आयोजनों को लेकर विरोध जताया। मित्तल होटल में कार्यकर्ताओं के पहुंचने के बाद हंगामा हुआ और आयोजकों ने सभी के लिए प्रवेश निशुल्क करने की बात कही। वहीं दूसरी ओर दो आयोजकों ने अपने कार्यक्रम निरस्त कर दिए। मामले के बाद गरबा आयोजनों की प्रवेश व्यवस्था और प्रशासन की अनुमति की शर्तों को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
    मित्तल होटल में आयोजित केसरिया रास कार्यक्रम के दौरान हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं ने प्रवेश पास को लेकर आपत्ति जताई। मौके पर एक युवक ने कार्यकर्ताओं को 1500 रुपये के पास दिखाए। इसके अलावा अलग-अलग दिनों के पास भी सामने आए। जानकारी के मुताबिक यहां प्रवेश के लिए 150 रुपये से लेकर 500 रुपये तक के पास बेचे जाने की शिकायत भी थी। हिंदू जागरण मंच के प्रांतीय कार्यकारिणी सदस्य अर्जुन सिंह भदौरिया ने आरोप लगाया कि आयोजन स्थल पर दो प्रवेश द्वार बनाए गए थे। एक गेट से लोगों को निशुल्क प्रवेश दिया जा रहा था जबकि दूसरे गेट से पास खरीदने वालों को अंदर जाने दिया जा रहा था। कार्यकर्ताओं ने इसे अनुमति की शर्तों के विपरीत बताते हुए विरोध किया। इसके बाद सभी के लिए प्रवेश निशुल्क करने की बात कही गई।
    हालांकि केसरिया रास के आयोजक कपिल कसेरा ने पास बेचने के आरोपों से इनकार किया। उनका कहना है कि सभी पास निशुल्क बांटे गए थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोग जानबूझकर सनातनी कार्यक्रम को बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। इस तरह एक ओर कार्यकर्ताओं ने प्रवेश शुल्क वसूले जाने का आरोप लगाया तो दूसरी ओर आयोजक ने पास निशुल्क बांटने की बात कही। ऐसे में पास वितरण और प्रवेश व्यवस्था को लेकर उठे विवाद की पूरी स्थिति संबंधित तथ्यों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
    उज्जैन के नागदा बायपास स्थित राजाराम रिसोर्ट में भी गरबा आयोजन को लेकर विवाद सामने आया। यहां 13 अक्टूबर से डांडिया बीट नाम से कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा था। इस आयोजन को भी निशुल्क प्रवेश की शर्त पर अनुमति दी गई थी। बुधवार रात बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने के बाद प्रवेश द्वार पर भीड़ बढ़ गई और भगदड़ जैसे हालात बनने की जानकारी सामने आई। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने कार्यक्रम बंद करा दिया। इसके बाद आयोजन की अनुमति भी निरस्त कर दी गई। आयोजकों का दावा है कि उन्होंने पास निशुल्क बांटे थे। हालांकि भीड़ के प्रबंधन और प्रवेश व्यवस्था को लेकर विवाद सामने आया।
    नवरात्रि के दौरान होटल मित्तल एवेन्यू के अलावा राजमहल राजाराम रिसोर्ट आस्था गार्डन परमेश्वरी गार्डन और श्रीराम वन में भी गरबा आयोजन के लिए प्रवेश शुल्क लिए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। हिंदू जागरण मंच ने इन आयोजनों को लेकर विरोध जताया है। प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि निशुल्क आयोजन की अनुमति मिलने के बाद आयोजक प्रवेश के लिए शुल्क नहीं ले सकते।
    एसडीएम एलएन गर्ग ने बताया कि कोठी महल क्षेत्र में गरबा आयोजन की अनुमति के लिए आए आवेदनों में शुल्क या निशुल्क प्रवेश का स्पष्ट उल्लेख नहीं था। सभी आयोजकों को शर्तों के साथ अनुमति दी गई थी। उन्होंने कहा कि कोई भी आयोजक सशुल्क आयोजन नहीं कर सकता और यदि कोई प्रवेश पास बेच रहा है तो पुलिस को उसके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। फिलहाल उज्जैन में गरबा आयोजनों को लेकर उठे विवाद के बाद प्रवेश व्यवस्था और अनुमति की शर्तों के पालन पर प्रशासन की निगरानी महत्वपूर्ण हो गई है।