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  • खजराना में भीषण आग से मची अफरा तफरी समय रहते बचाए गए तीन बच्चे टला बड़ा हादसा

    खजराना में भीषण आग से मची अफरा तफरी समय रहते बचाए गए तीन बच्चे टला बड़ा हादसा


    इंदौर । इंदौर में गुरुवार रात एक बड़ा हादसा होते होते टल गया जब खजराना थाना क्षेत्र में स्थित एक तीन मंजिला मकान में अचानक भीषण आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही मिनटों में पूरा घर धुएं और लपटों से घिर गया। घर में मौजूद परिवार के सदस्य किसी तरह बाहर निकलने में सफल रहे लेकिन तीसरी मंजिल पर तीन छोटे बच्चे फंस गए जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। आसपास के लोगों ने तत्काल पुलिस और दमकल विभाग को सूचना दी और मौके पर अफरा तफरी का माहौल बन गया।

    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची और हालात को समझते हुए बिना समय गंवाए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया। उस समय तक फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर नहीं पहुंची थी ऐसे में पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से तुरंत टैंकर मंगवाया। टैंकर पर सीढ़ी लगाकर तीसरी मंजिल तक पहुंचने की कोशिश की गई। घना धुआं और अंधेरा इस काम को बेहद मुश्किल बना रहे थे लेकिन पुलिसकर्मियों ने हिम्मत नहीं हारी।

    पुलिस और स्थानीय लोगों ने मिलकर मानव श्रृंखला बनाई और बेहद जोखिम उठाते हुए सीढ़ी के सहारे तीसरी मंजिल तक पहुंचे। वहां फंसे बच्चों को एक एक कर सुरक्षित नीचे उतारा गया। इस पूरे ऑपरेशन के दौरान हर पल खतरा बना हुआ था क्योंकि आग लगातार फैल रही थी लेकिन सूझबूझ और तेजी से काम करते हुए सभी बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। बच्चों के सुरक्षित बाहर आते ही मौके पर मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली।

    इस घटना में किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई जो कि सबसे बड़ी राहत की बात रही। हालांकि मकान का कुछ हिस्सा आग की चपेट में आ गया लेकिन समय रहते बचाव कार्य होने से बड़ा नुकसान टल गया। बाद में फायर ब्रिगेड की टीम भी मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाया।

    यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि पिछले महीने ही इंदौर में एक दर्दनाक हादसा हुआ था जहां एक मकान के बाहर खड़ी इलेक्ट्रिक कार में आग लगने से पूरे घर में आग फैल गई थी। उस हादसे में घर के अंदर फंसे लोग समय पर बाहर नहीं निकल सके और इलेक्ट्रॉनिक लॉक नहीं खुलने के कारण आठ लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई थी। उस घटना ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया था।

    ताजा घटना में जिस तरह पुलिस ने तत्परता दिखाई और बिना किसी संसाधन के तत्काल निर्णय लेकर बच्चों की जान बचाई वह सराहनीय है। यह घटना न केवल आपात स्थिति में सूझबूझ की अहमियत को दर्शाती है बल्कि यह भी बताती है कि समय पर लिया गया निर्णय कितनी बड़ी त्रासदी को टाल सकता है।

  • जिंदगी की जंग लड़ रहा भागीरथ बोरवेल से सुरक्षित निकालने की कोशिशें तेज

    जिंदगी की जंग लड़ रहा भागीरथ बोरवेल से सुरक्षित निकालने की कोशिशें तेज


    उज्जैन । मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के बड़नगर तहसील अंतर्गत ग्राम झालरिया में एक दर्दनाक हादसा सामने आया है जहां 3 साल का मासूम बच्चा बोरवेल में गिर गया। घटना के बाद से ही एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हुई हैं और बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालने के प्रयास तेजी से जारी हैं।

    जानकारी के अनुसार बच्चा भागीरथ अपने परिवार के साथ भेड़ चराने के लिए क्षेत्र में आया था। खेलते-खेलते वह खुले पड़े बोरवेल के पास पहुंच गया जहां पहले ढक्कन लगा हुआ था लेकिन बताया जा रहा है कि जानवरों के चरने के दौरान वह ढक्कन हट गया और इसी कारण यह हादसा हो गया।

    हादसा गुरुवार रात करीब 8 से 9 बजे के बीच हुआ जिसके बाद तुरंत प्रशासन, पुलिस और रेस्क्यू टीमों को सूचना दी गई। घटना के बाद से रातभर लगातार राहत और बचाव कार्य चलता रहा और मशीनों की मदद से ऑपरेशन को तेज किया गया।

    पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि बच्चे को करीब 75 फीट की गहराई पर लोकेट कर लिया गया है। बोरवेल के अंदर कैमरे और विशेष उपकरण डालकर बच्चे की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि हर पल की जानकारी मिल सके और उसे सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।

    रेस्क्यू ऑपरेशन को तेज करने के लिए मौके पर 5 पोकलेन और जेसीबी मशीनें लगाई गई हैं। इसके साथ ही बोरवेल के पास समानांतर गड्ढा खोदकर टनल बनाने का काम भी तेजी से किया जा रहा है ताकि वैकल्पिक रास्ते से बच्चे तक पहुंचा जा सके।

    प्रशासन ने पूरे इलाके को घेराबंदी कर दिया है और किसी भी तरह की भीड़ को रोकने के निर्देश दिए हैं ताकि बचाव कार्य में कोई बाधा न आए। अधिकारियों ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे मौके पर न जुटें और राहत कार्य में सहयोग करें।

    मासूम भागीरथ, जो राजस्थान के पाली जिले के निवासी बताए जा रहे हैं, अपने परिवार के साथ कुछ दिनों से इस क्षेत्र में रुके हुए थे। फिलहाल पूरे प्रशासन का ध्यान केवल एक ही लक्ष्य पर है किसी भी तरह बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालना।

    यह हादसा एक बार फिर खुले बोरवेल की खतरनाक स्थिति और सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। राहत टीमों का ऑपरेशन लगातार जारी है और सभी की नजर अब सिर्फ इस बात पर है कि मासूम को कब तक सुरक्षित बाहर निकाला जा सकेगा।

  • रश्मि शमी ने लिया पेट्रोलियम आपूर्ति का जायजा, पीएनजी कनेक्शन और कालाबाजारी पर निर्देश

    रश्मि शमी ने लिया पेट्रोलियम आपूर्ति का जायजा, पीएनजी कनेक्शन और कालाबाजारी पर निर्देश


    भोपाल । भोपाल में बुधवार को अपर मुख्य सचिव खाद्य श्रीमती रश्मि अरूण शमी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के सभी जिलों के अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी, नगर निगम और नगर पालिका के अधिकारी, ऑयल कंपनी और सीजीडी के अधिकारियों के साथ पेट्रोलियम पदार्थों की उपलब्धता और आपूर्ति की समीक्षा बैठक की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिन हाउसहोल्ड्स में पीएनजी की लाइन कनेक्ट की जा चुकी है, वहाँ आगामी दस दिनों के अंदर पीएनजी सप्लाई शुरू की जाए। इसके साथ ही, उपभोक्ताओं को यह भी समझाईश दी जाए कि यदि वे पीएनजी सप्लाई नहीं लेते हैं, तो भारत सरकार के निर्देशानुसार तीन माह के अंदर उनकी एलपीजी सप्लाई बंद की जा सकती है।

    एसीएस रश्मि शमी ने गृह विभाग के अधीन आने वाले संस्थानों, सुधार गृहों, पुलिस, सीएपीएफ, डिफेंस एस्टेब्लिशमेंट, ऑफिसर्स कॉलोनी, सामान्य प्रशासन पूल के घरों, पुलिस मुख्यालय और पुलिस कॉलोनी जैसी जगहों को प्राथमिकता के आधार पर पीएनजी कनेक्शन देने के निर्देश दिए। उन्होंने जिलों को निर्देशित किया कि जहां पाइपलाइन बिछी हुई है, वहाँ के रहवासियों और व्यवसायियों की सूची तैयार की जाए और कॉलोनियों में जागरूकता कैम्प लगाए जाएँ। इन कैम्पों में नगर निगम, नगर पालिका के अधिकारी, वार्ड पार्षद और अन्य जनप्रतिनिधियों को शामिल किया जाना अनिवार्य होगा।

    औद्योगिक क्षेत्रों में पाइपलाइन बिछी होने वाले क्षेत्रों की पहचान कर उन उद्योगों को पीएनजी पर शिफ्ट करने के निर्देश भी दिए गए। सीजीडी संस्थाओं के मैनपावर बढ़ाने के लिए जिला प्रशासन पॉलीटेक्निक, आईटीआई और अन्य प्रशिक्षण संस्थाओं से प्रशिक्षार्थियों की सूची उपलब्ध करवा रहा है, जिन्हें लघु प्रशिक्षण के बाद कार्य में लगाया जाएगा।

    बैठक में यह भी बताया गया कि जिले के माइग्रेट लेबर और छात्रों के लिए खाना पकाने के उद्देश्य से ऑयल कंपनी द्वारा 5 किलो के सिलेण्डर 1529 रुपये प्रति कनेक्शन के हिसाब से उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इस सिलेण्डर को एड्रेस प्रूफ के बिना भी लिया जा सकता है और रिफिल चार्ज 585 रुपये निर्धारित किया गया है। नगर निगम और नगर पालिका के माध्यम से जिंगल और कचरा गाड़ियों का उपयोग कर पीएनजी के प्रचार-प्रसार की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए गए। शादी गार्डन, कैटरर्स और स्ट्रीट वेंडर्स को 70 प्रतिशत सीमा के अधीन कमर्शियल सिलेण्डर उपलब्ध कराए जाएंगे।

    सीजीडी संस्थाओं को पाइपलाइन बिछाने की अनुमति और ROU स्वीकृतियां 24 घंटे के भीतर जारी की जा रही हैं। अभी तक सभी स्वीकृतियां पूरी तरह जारी की जा चुकी हैं और कोई भी आवेदन शेष नहीं है।

    अपर मुख्य सचिव ने कालाबाजारी रोकने की दिशा में भी सख्त रुख अपनाया। आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत एलपीजी कालाबाजारी रोकने के लिए लगातार कार्यवाही जारी है। अब तक 3226 स्थानों पर जांच की गई, 3961 एलपीजी सिलेण्डर जब्त किए गए और 11 प्रकरणों में एफआईआर दर्ज की गई। प्रदेश के सभी जिला आपूर्ति नियंत्रक, अधिकारी और ऑयल कंपनी के अधिकारी गैस एजेंसी और पेट्रोल पंपों की नियमित जांच के लिए सतत रूप से निर्देशित हैं।

    बैठक के निष्कर्ष में यह स्पष्ट किया गया कि प्रदेश में पीएनजी और एलपीजी आपूर्ति को सुचारू रूप से सुनिश्चित करना प्राथमिकता है। घरों, औद्योगिक इकाइयों और संवेदनशील संस्थानों में समय पर सप्लाई सुनिश्चित की जाएगी और किसी भी प्रकार की कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

  • मुलताई स्टेशन पर चलती ट्रेन में चढ़ते समय यात्री की मौत, पुलिस जांच में जुटी

    मुलताई स्टेशन पर चलती ट्रेन में चढ़ते समय यात्री की मौत, पुलिस जांच में जुटी


    बैतूल । बैतूल जिले के मुलताई रेलवे स्टेशन पर मंगलवार दोपहर ट्रेन में चढ़ते समय एक यात्री की दर्दनाक मौत हो गई। जानकारी के अनुसार, सिकंदराबाद-जयपुर एक्सप्रेस के ठहराव के दौरान महाराष्ट्र के अमरावती जिले के दर्यापुर निवासी सलीम खान (42) पानी लेने के लिए ट्रेन से नीचे उतरे। इसी दौरान उनकी नज़र फिसल गई और वह ट्रैक पर गिर गए।

    पुलिस ने बताया कि हादसा बहुत जल्दी और अचानक हुआ। ट्रेन ठहरी थी लेकिन सलीम खान की गिरने की स्थिति इतनी गंभीर थी कि उन्हें तुरंत उठाया नहीं जा सका। स्टेशन पर मौजूद यात्रियों ने शोर मचाया और रेलवे कर्मचारियों को सूचना दी। रेलवे और पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुँची और सलीम खान को प्राथमिक सहायता दी, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।

    हादसे के बाद स्टेशन पर हड़कंप मच गया। यात्री और रेलवे कर्मचारी घटना स्थल पर जमा हुए। रेलवे पुलिस ने ट्रैक और प्लेटफार्म की जांच की ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि दुर्घटना किसी तकनीकी या सुरक्षा कारण से तो नहीं हुई। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार यह एक व्यक्तिगत हादसा था, जिसमें यात्री की असावधानी और ट्रेन से उतरने के दौरान फिसलने की वजह से मौत हुई।

    रेलवे पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मृतक के परिजन और स्थानीय प्रशासन को घटना की सूचना दे दी गई है। पुलिस ने पूरे मामले में रिपोर्ट दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि स्टेशन पर सुरक्षा उपाय पर्याप्त हैं, लेकिन यात्रियों को सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

    रेलवे यातायात विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रेन से उतरते समय किसी भी प्रकार की जल्दबाज़ी या असावधानी गंभीर हादसे का कारण बन सकती है। रेलवे स्टेशन पर चेतावनी बोर्ड और कर्मचारियों की मौजूदगी होती है, लेकिन यात्रियों की सतर्कता भी बेहद महत्वपूर्ण है।

    स्थानीय लोगों ने कहा कि सलीम खान का यह हादसा काफी दुखद है और रेलवे स्टेशन पर ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए और कड़े उपाय किए जाने चाहिए। यात्रियों को ट्रेन के रुकने और चलने की स्थिति में प्लेटफार्म पर सावधानी से चलने के निर्देश दिए जाने चाहिए।

    मुलताई स्टेशन पर ट्रेन में चढ़ते समय या उतरते समय यात्रियों की सुरक्षा को लेकर रेलवे ने समय-समय पर चेतावनी जारी की है, लेकिन असावधानी से होने वाली घटनाओं को रोकना चुनौतीपूर्ण होता है। इस हादसे ने एक बार फिर रेलवे सुरक्षा और यात्रियों की जिम्मेदारी पर सवाल उठाया है।

    रेलवे प्रशासन ने कहा कि घटना की पूरी जांच की जा रही है और भविष्य में ऐसे हादसों से बचाव के लिए अतिरिक्त सतर्कता और सुरक्षा उपाय किए जाएंगे। यात्रियों से अपील की गई है कि ट्रेन के चलने या रुकने के समय प्लेटफार्म पर सावधानी बरतें और कभी भी ट्रेन से भागते हुए या जल्दी में उतरते हुए जोखिम न लें।

    इस घटना ने मुलताई रेलवे स्टेशन और आसपास के यात्रियों में सुरक्षा के प्रति चेतना बढ़ा दी है। रेलवे और पुलिस मिलकर जांच और सुरक्षा उपायों को और मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, ताकि भविष्य में इस तरह के दुखद हादसे रोके जा सकें।

  • एक ही दिन में 6 केस में गवाही 50 KM का सफर मऊगंज में फिक्स गवाहों का बड़ा खेल उजागर

    एक ही दिन में 6 केस में गवाही 50 KM का सफर मऊगंज में फिक्स गवाहों का बड़ा खेल उजागर


    मऊगंज । मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने कानून व्यवस्था और न्याय प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां पुलिस पर आरोप लगा है कि वह तथाकथित फिक्स गवाहों के सहारे मामलों को मजबूत दिखाने की कोशिश कर रही है जिससे न्याय प्रक्रिया की निष्पक्षता पर खतरा मंडरा रहा है।

    मामला हनुमना थाना क्षेत्र से जुड़ा है जहां एक ड्राइवर को लेकर चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि थाना प्रभारी अनिल काकडे के निजी वाहन चालक राजेश साकेत न केवल गाड़ी चलाते हैं बल्कि कई मामलों में गवाह के रूप में भी पेश किए जाते हैं। आरोप है कि पिछले आठ महीनों में वह 48 से अधिक मामलों में गवाही दे चुके हैं जिससे यह सवाल उठता है कि क्या वह हर घटना के प्रत्यक्षदर्शी हो सकते हैं।

    सबसे हैरान करने वाली बात 28 मार्च 2026 की बताई जा रही है जब राजेश साकेत और एक अन्य व्यक्ति सूर्यमणि मिश्रा ने एक ही दिन में छह अलग अलग मामलों में गवाही दी। ये सभी मामले हनुमना थाना हाटा चौकी और पिपराही चौकी क्षेत्र से जुड़े थे जो लगभग 50 किलोमीटर के दायरे में फैले हुए हैं। इस तरह की घटनाओं ने पूरे मामले को और संदिग्ध बना दिया है।

    आंकड़ों के अनुसार सूर्यमणि मिश्रा राजेश साकेत और पुष्पराज द्विवेदी जैसे कुछ नाम ऐसे हैं जो सैकड़ों मामलों में गवाह के रूप में सामने आए हैं। आरोप है कि ये लोग लूट डकैती मारपीट और नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में भी गवाही देते रहे हैं। हालांकि जब उनसे इस बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने जानकारी होने से ही इनकार कर दिया जिससे संदेह और गहरा गया है।

    इस पूरे मामले में थाना प्रभारी अनिल काकडे की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। उन पर पहले भी एक गंभीर मामले में जांच चलने की बात सामने आई है जिसमें हत्या के केस को आत्महत्या बताने का प्रयास किया गया था। बावजूद इसके उन्हें जिम्मेदारी सौंपी गई जो प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है।

    देश की शीर्ष अदालत भारत का सर्वोच्च न्यायालय भी इस तरह के फिक्स गवाहों पर सख्त टिप्पणी कर चुकी है और इसे न्याय व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बताया गया है। साथ ही Madhya Pradesh High Court के निर्देश पर एक उच्च स्तरीय समिति का गठन भी किया गया है लेकिन इसके बावजूद इस तरह के मामले सामने आना चिंता का विषय है। वहीं इस मामले पर जब प्रभारी मंत्री लखन पटेल से सवाल किया गया तो उन्होंने जांच कराने की बात कही लेकिन इससे लोगों की चिंता कम नहीं हुई है।

    यह पूरा मामला केवल एक जिले तक सीमित नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है। यदि गवाह ही संदिग्ध हों तो न्याय की नींव कमजोर पड़ जाती है और असली अपराधियों के बच निकलने का खतरा बढ़ जाता है। अब जरूरत है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए ताकि कानून पर लोगों का भरोसा बना रहे।

  • कम रेट का झांसा फिर बढ़ी कीमतें बैतूल में किसानों ने बोरिंग माफिया पर लगाए शोषण के आरोप

    कम रेट का झांसा फिर बढ़ी कीमतें बैतूल में किसानों ने बोरिंग माफिया पर लगाए शोषण के आरोप


    बैतूल । मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में किसानों की परेशानियां एक बार फिर सामने आई हैं जहां आमला ब्लॉक सहित आसपास के क्षेत्रों में बोरिंग मशीन संचालकों पर शोषण के गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। रबी फसल और गन्ने की कटाई के बाद सिंचाई की जरूरत बढ़ने के साथ ही बोर खनन की मांग भी तेजी से बढ़ जाती है और इसी स्थिति का फायदा उठाकर कुछ बाहरी एजेंटों द्वारा कथित रूप से मनमानी वसूली की जा रही है।

    स्थानीय किसानों का कहना है कि हर साल फरवरी से अप्रैल के बीच बोरिंग का काम तेजी से बढ़ता है और इस दौरान मशीन संचालकों की मांग अधिक हो जाती है। इसी दबाव का फायदा उठाते हुए बाहर से आए कुछ लोग अनियमित तरीके से काम कर रहे हैं और किसानों से मनमाने दाम वसूल रहे हैं।

    आरोप है कि शुरुआत में कम रेट बताकर किसानों को काम के लिए तैयार किया जाता है लेकिन जैसे ही काम शुरू होता है बीच में ही कीमतें बढ़ा दी जाती हैं। ऐसे में किसान मजबूरी में बढ़ी हुई रकम देने को विवश हो जाते हैं क्योंकि काम अधूरा छोड़ना उनके लिए बड़ा नुकसान साबित हो सकता है।

    किसानों ने यह भी आरोप लगाया है कि यदि कोई बढ़ी हुई कीमत देने से मना करता है तो मशीन संचालक काम बीच में ही रोक देते हैं। इतना ही नहीं कुछ मामलों में किसानों को धमकाने और जान से मारने तक की धमकी देने की बातें भी सामने आई हैं जिससे ग्रामीणों में भय और आक्रोश दोनों बढ़ गए हैं।

    आमला और आसपास के क्षेत्रों में इस तरह की घटनाएं बढ़ने से किसानों की चिंता और गहरा गई है। पहले से ही लागत और मौसम की मार झेल रहे किसान अब इस तरह की अवैध वसूली से और अधिक दबाव में आ गए हैं।

    किसानों का कहना है कि प्रशासन को इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए और बोरिंग मशीन संचालकों के लिए स्पष्ट दरें तय करनी चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की मनमानी पर रोक लग सके। साथ ही ऐसे एजेंटों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी उठाई जा रही है जो किसानों का शोषण कर रहे हैं।

    यह मामला न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित कर रहा है बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में कानून व्यवस्था और पारदर्शिता को लेकर भी सवाल खड़े कर रहा है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर क्या कदम उठाता है और किसानों को इस संकट से कितनी राहत मिल पाती है।

  • भोजशाला में गूंजा हनुमान चालीसा पाठ धार में सत्याग्रह के बीच पहुंचे प्रवीण तोगड़िया

    भोजशाला में गूंजा हनुमान चालीसा पाठ धार में सत्याग्रह के बीच पहुंचे प्रवीण तोगड़िया


    धार । मध्य प्रदेश के धार जिले स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर एक बार फिर धार्मिक गतिविधियों और सत्याग्रह के कारण चर्चा में आ गया है। यहां हिंदू समाज के लोगों ने एकत्र होकर शांतिपूर्ण सत्याग्रह किया और सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ तथा पूजन किया। पूरे परिसर में धार्मिक माहौल बना रहा और श्रद्धालुओं की मौजूदगी से वातावरण भक्तिमय हो गया।

    इस दौरान अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया भी भोजशाला पहुंचे और परिसर का अवलोकन किया। उनके आगमन को लेकर पहले से ही तैयारी की गई थी और स्थानीय स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रखी गई थी।

    अवलोकन के दौरान भोज उत्सव समिति के गोपाल शर्मा ने तोगड़िया को भोजशाला की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और वर्तमान स्थिति के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने परिसर के महत्व और इससे जुड़े विभिन्न पहलुओं को सामने रखा जिससे तोगड़िया ने भी गंभीरता से पूरे स्थल का निरीक्षण किया।

    मीडिया से बातचीत करते हुए प्रवीण तोगड़िया ने कहा कि वह लंबे समय से इस स्थल से जुड़े रहे हैं और वर्षों पहले यहां ताला खुलवाने के आंदोलन में भी सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं। उन्होंने बताया कि वह एक बार फिर यहां दर्शन करने के उद्देश्य से आए हैं और इस स्थान के प्रति उनकी आस्था और जुड़ाव बना हुआ है।

    सत्याग्रह के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे जिन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी धार्मिक आस्था का प्रदर्शन किया। आयोजन के दौरान अनुशासन बनाए रखा गया और किसी प्रकार की अव्यवस्था की स्थिति सामने नहीं आई।

    भोजशाला का यह आयोजन एक बार फिर इस ऐतिहासिक स्थल को चर्चा के केंद्र में ले आया है जहां धार्मिक और सामाजिक गतिविधियां समय समय पर लोगों का ध्यान आकर्षित करती रहती हैं। प्रशासन भी ऐसे आयोजनों को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए सतर्क नजर आ रहा है।

  • आंधी बारिश से बदला मौसम शिवपुरी में तापमान गिरा गर्मी से राहत

    आंधी बारिश से बदला मौसम शिवपुरी में तापमान गिरा गर्मी से राहत


    शिवपुरी । मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में मंगलवार दोपहर अचानक बदले मौसम ने लोगों को गर्मी से बड़ी राहत दिलाई। सुबह से ही शहर और आसपास के इलाकों में बादल छाए हुए थे जिससे मौसम में बदलाव के संकेत मिल रहे थे। दोपहर होते होते तेज आंधी के साथ बारिश शुरू हो गई जिसने तापमान में उल्लेखनीय गिरावट ला दी और वातावरण को सुहावना बना दिया।

    तेज हवाओं का असर इतना ज्यादा था कि कई स्थानों पर पेड़ों पर पक्षियों द्वारा बनाए गए घोंसले उड़ गए जिससे प्राकृतिक जीवन भी प्रभावित हुआ। आंधी की रफ्तार के कारण शहर के कुछ हिस्सों में बिजली आपूर्ति भी बाधित हो गई जिससे लोगों को थोड़ी परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि बारिश के चलते गर्मी से मिली राहत ने लोगों को काफी सुकून दिया।

    बारिश के बाद वातावरण में ठंडक घुल गई और सड़कों पर भी हलचल कम हो गई। कई लोग इस अचानक बदले मौसम का आनंद लेते नजर आए तो वहीं कुछ लोग तेज हवाओं और बिजली कटौती से परेशान भी दिखे।

    मौसम विभाग के अनुसार फिलहाल मौसम का यह मिजाज कुछ समय तक बना रह सकता है और आने वाले घंटों में फिर से बारिश होने की संभावना जताई गई है। ऐसे में प्रशासन और नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है ताकि किसी भी संभावित नुकसान से बचा जा सके। यह बदलाव न केवल तापमान में राहत लेकर आया है बल्कि आने वाले दिनों के मौसम के रुख को लेकर भी संकेत दे रहा है कि गर्मी के बीच बीच में इस तरह के बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

  • जब हर तरफ आग ही आग थी सीधी में कार्यकर्ता की हिम्मत से सुरक्षित निकले मासूम बड़ा खतरा टला

    जब हर तरफ आग ही आग थी सीधी में कार्यकर्ता की हिम्मत से सुरक्षित निकले मासूम बड़ा खतरा टला


    सीधी । मध्य प्रदेश के सीधी जिले में मंगलवार का दिन उस समय दहशत में बदल गया जब रामपुर नैकिन क्षेत्र के शिकारगंज स्थित एक आंगनवाड़ी केंद्र के पास अचानक भीषण आग भड़क उठी और देखते ही देखते हालात बेकाबू हो गए। आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही मिनटों में पूरा परिसर लपटों से घिर गया और हर तरफ धुआं और अफरा तफरी का माहौल बन गया लेकिन इसी बीच एक महिला की सूझबूझ और साहस ने सात मासूम बच्चों की जिंदगी बचा ली।

    घटना सुबह करीब 11 बजे की है जब आंगनवाड़ी केंद्र में सात छोटे बच्चे मौजूद थे और उनकी देखरेख कर रही थीं कार्यकर्ता उर्मिला द्विवेदी। अचानक पास के क्षेत्र से आग उठती नजर आई जो तेजी से फैलते हुए केंद्र के आसपास पहुंचने लगी। हालात की गंभीरता को समझते हुए उर्मिला द्विवेदी ने बिना किसी घबराहट के तुरंत निर्णय लिया और एक एक कर सभी बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालना शुरू किया। उन्होंने न केवल बच्चों को आग से दूर पहुंचाया बल्कि उन्हें उनके घरों तक सुरक्षित पहुंचाकर राहत की सांस ली।

    कुछ ही देर में आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और आंगनवाड़ी भवन के तीनों ओर ऊंची लपटें उठने लगीं। आग की भयावहता इतनी ज्यादा थी कि आसपास के लोग भी सहम गए लेकिन जैसे ही घटना की जानकारी फैली ग्रामीण मौके पर पहुंचने लगे और अपने स्तर पर आग बुझाने की कोशिश करने लगे। हालांकि आग लगातार फैलती जा रही थी और उस पर काबू पाना आसान नहीं था।

    स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब आग पास के जंगल की ओर बढ़ने लगी जिससे बड़े क्षेत्र में नुकसान की आशंका पैदा हो गई। तत्काल फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई लेकिन टीम को मौके तक पहुंचने में कुछ समय लगा। करीब आधे घंटे बाद दमकल दल घटनास्थल पर पहुंचा और आग बुझाने का अभियान शुरू किया। इसके साथ ही डायल 112 और 108 की टीमें भी मौके पर पहुंच गईं और राहत व बचाव कार्य में जुट गईं।

    ग्रामीणों और प्रशासन की टीम ने मिलकर लगातार प्रयास किए लेकिन आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि डेढ़ घंटे से ज्यादा समय तक लपटें शांत नहीं हुईं। कड़ी मशक्कत के बाद आखिरकार आग पर काबू पाया जा सका और स्थिति नियंत्रण में आई।

    रामपुर नैकिन थाना प्रभारी सुधांशु तिवारी ने बताया कि सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड और अन्य आवश्यक सेवाओं को तुरंत मौके पर भेजा गया था और प्राथमिकता के आधार पर बचाव कार्य शुरू किया गया। उन्होंने यह भी पुष्टि की कि इस घटना में किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है जो कि सबसे बड़ी राहत की बात है।

    यह पूरी घटना एक बड़ी चेतावनी भी है कि संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था कितनी जरूरी है लेकिन साथ ही यह भी साबित करती है कि मुश्किल हालात में सही समय पर लिया गया निर्णय कितनी बड़ी त्रासदी को टाल सकता है। उर्मिला द्विवेदी की सतर्कता और साहस ने आज सात परिवारों को एक बड़ी विपत्ति से बचा लिया।

  • झुकते मकान को देख लोगों ने रोका रास्ता उज्जैन में महाकाल जाने वाले मार्ग पर बड़ा हादसा टला

    झुकते मकान को देख लोगों ने रोका रास्ता उज्जैन में महाकाल जाने वाले मार्ग पर बड़ा हादसा टला


    उज्जैन । मध्य प्रदेश के धार्मिक शहर उज्जैन में सोमवार शाम एक बड़ा हादसा होते होते टल गया जब महाकाल मंदिर जाने वाले व्यस्त मार्ग पर स्थित एक तीन मंजिला मकान अचानक भरभराकर गिर गया। इस घटना का लाइव वीडियो भी सामने आया है जिसने पूरे इलाके में दहशत फैला दी लेकिन राहत की बात यह रही कि स्थानीय लोगों की सतर्कता और सूझबूझ के चलते किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।

    यह घटना गेबी हनुमान क्षेत्र की है जो महाकाल मंदिर जाने वाले प्रमुख रास्तों में से एक माना जाता है। इस मार्ग से रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु गोपाल मंदिर, शिप्रा नदी और महाकाल मंदिर की ओर जाते हैं। ऐसे में यहां किसी भी तरह का हादसा बेहद गंभीर हो सकता था।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार शाम करीब 6 बजे से ही मकान में दरारें और झुकाव साफ नजर आने लगा था। स्थानीय लोगों ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए तुरंत सड़क पर आवाजाही रोक दी और लोगों को उस क्षेत्र से दूर कर दिया। करीब 7 बजे मकान पूरी तरह ढह गया। अगर उस समय ट्रैफिक चालू रहता तो यह हादसा कई जिंदगियां लील सकता था।

    मकान मालिक मनोज भावसार और अली अजगर सहित अन्य रहवासियों ने आरोप लगाया है कि पास में पोकलेन मशीन से चल रही तोड़फोड़ के कारण मकान कमजोर हो गया था। उनका कहना है कि पिछले एक महीने से मकान की नींव में पानी भरने की समस्या भी बनी हुई थी जिसकी शिकायत कई बार की गई लेकिन समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

    वहीं नगर निगम का पक्ष इससे अलग है। निगम अधिकारियों का कहना है कि ढाबा रोड क्षेत्र में मार्ग चौड़ीकरण के तहत जर्जर भवन को पूरी सुरक्षा व्यवस्था के साथ हटाया जा रहा था। उन्होंने दावा किया कि पूरी कार्रवाई बैरिकेडिंग और अधिकारियों की निगरानी में की जा रही थी ताकि किसी भी तरह की दुर्घटना से बचा जा सके।

    घटना के बाद पुलिस और नगर निगम की टीम तुरंत मौके पर पहुंच गई और इलाके को पूरी तरह घेर लिया गया। मलबा हटाने का काम शुरू कर दिया गया है ताकि रास्ता जल्द से जल्द बहाल किया जा सके। सीएसपी के अनुसार इस हादसे में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है जो कि सबसे बड़ी राहत की बात है।

    यह घटना एक बार फिर शहरी क्षेत्रों में जर्जर इमारतों और निर्माण कार्यों की निगरानी पर सवाल खड़े करती है। हालांकि इस मामले में स्थानीय लोगों की जागरूकता ने बड़ी त्रासदी को टाल दिया लेकिन प्रशासन के लिए यह एक चेतावनी भी है कि ऐसे मामलों में समय रहते ठोस कदम उठाना कितना जरूरी होता है।