Tag: Madhya Pradesh News

  • बरगी डैम क्रूज हादसा: को-पायलट का दावा- इंजन खराब था, आखिरी पल तक फंसा रहा; 13 की मौत से हड़कंप

    बरगी डैम क्रूज हादसा: को-पायलट का दावा- इंजन खराब था, आखिरी पल तक फंसा रहा; 13 की मौत से हड़कंप

    नई दिल्ली। बरगी डैम में हुए दर्दनाक क्रूज हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। 30 अप्रैल को हुए इस हादसे में 13 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 22 लोग किसी तरह बचा लिए गए थे।

    हादसे में को-पायलट रहे महेश पटेल ने घटना के बाद बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि क्रूज का एक इंजन पहले से स्लो था और अचानक आई तेज हवाओं ने स्थिति को और बिगाड़ दिया।

    कैसे हुआ हादसा?
    महेश पटेल के अनुसार, क्रूज शाम करीब 5:16 बजे यात्रा पर निकला था। लौटते समय तेज हवाएं चलने लगीं, जिनकी रफ्तार लगभग 100 किलोमीटर प्रति घंटे तक बताई गई। उन्होंने बताया कि स्थिति बिगड़ने पर स्टाफ को लाइफ जैकेट बांटने के निर्देश दिए गए थे। उनका दावा है कि इसी दौरान क्रूज का एक इंजन काम करना बंद कर गया, जिससे संतुलन बिगड़ गया और क्रूज पानी में डूबने लगा।

     “आखिरी दम तक अंदर फंसा रहा”
    महेश पटेल ने कहा कि वे क्रूज के पायलट केबिन में थे और आखिरी समय तक अंदर ही फंसे रहे। बाद में पानी के दबाव से बाहर निकल पाए। उन्होंने यह भी कहा कि वे किसी को छोड़कर नहीं भागे और हालात बेहद भयावह थे।
    अनुभव और जिम्मेदारी
    पटेल ने बताया कि वे पिछले 10 साल से क्रूज संचालन कर रहे हैं और 2012 में उन्होंने ट्रेनिंग ली थी। उनका कहना है कि यदि उन्हें मौसम संबंधी चेतावनी या संचालन रोकने के निर्देश मिले होते, तो क्रूज कभी नहीं चलाया जाता।
     मेंटेनेंस और टिकट विवाद
    उन्होंने यह भी कहा कि क्रूज का आखिरी बड़ा मेंटेनेंस करीब 3 साल पहले हुआ था। साथ ही टिकट व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे हैं, जहां कुछ यात्रियों के बिना टिकट होने की बात सामने आई है।
     कार्रवाई और जांच
    हादसे के बाद प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया चल रही है। इस बीच महेश पटेल को नौकरी से बर्खास्त भी किया गया है।
    बरगी डैम हादसा एक गंभीर प्रशासनिक और तकनीकी चूक की ओर इशारा करता है, जिसकी जांच अभी जारी है।
  • MP में मौसम का बड़ा बदलाव: 21 जिलों में आंधी-बारिश और ओले का अलर्ट, 5 मई तक रहेगा असर

    MP में मौसम का बड़ा बदलाव: 21 जिलों में आंधी-बारिश और ओले का अलर्ट, 5 मई तक रहेगा असर


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में भीषण गर्मी के बीच मौसम ने अचानक करवट ले ली है। राजधानी भोपाल सहित प्रदेश के कई हिस्सों में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का दौर जारी है। मौसम विभाग ने शनिवार को 21 जिलों में तेज हवाओं और बारिश का अलर्ट जारी किया है।

    भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार इन जिलों में 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। साथ ही कुछ स्थानों पर ओले गिरने की भी संभावना जताई गई है। यह मौसम परिवर्तन 5 मई तक जारी रहने का अनुमान है।

    जिन जिलों में अलर्ट जारी किया गया है उनमें ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, मैहर, जबलपुर, सिवनी, मंडला, बालाघाट, डिंडौरी, अनूपपुर, गुना, अशोकनगर, नीमच और मंदसौर शामिल हैं।

    वहीं दूसरी ओर इंदौर, उज्जैन, सीहोर, विदिशा, रायसेन, धार, खंडवा, खरगोन, रतलाम, सागर, छिंदवाड़ा और अन्य जिलों में गर्मी का असर बना रहेगा, हालांकि कुछ स्थानों पर दोपहर बाद मौसम बदल सकता है।

    बीते दिनों भी प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम खराब रहा। जबलपुर और दमोह में बारिश दर्ज की गई, जबकि खंडवा में तापमान 43.1 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। कई जिलों में तापमान 40 डिग्री के आसपास बना रहा।

    मौसम विशेषज्ञों के अनुसार यह बदलाव साइक्लोनिक सर्कुलेशन और पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के कारण हो रहा है। इसके चलते नमी बढ़ रही है और आंधी-बारिश का दौर बना हुआ है।

    इस अचानक बदले मौसम का असर जनजीवन पर भी दिख रहा है। कई जगहों पर तापमान में गिरावट आई है, जिससे लोगों को गर्मी से राहत तो मिली है, लेकिन तेज हवाओं और ओलावृष्टि से सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

  • भोपाल की सफाई पर बड़ा सवाल: क्या सच में देश का दूसरा सबसे स्वच्छ शहर है ग्राउंड रियलिटी?

    भोपाल की सफाई पर बड़ा सवाल: क्या सच में देश का दूसरा सबसे स्वच्छ शहर है ग्राउंड रियलिटी?

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    नई दिल्ली। देश के सबसे साफ शहरों की सूची में लगातार ऊंचा स्थान पाने वाला भोपाल एक बार फिर चर्चा में है। इस बार वजह है स्वच्छता सर्वे का बदला हुआ तरीका और शहर की वास्तविक सफाई व्यवस्था को लेकर उठते सवाल। अब केवल ऑनलाइन वोटिंग के आधार पर रैंकिंग तय नहीं होगी, बल्कि अधिकारी खुद लोगों के बीच जाकर उनकी राय लेंगे। ऐसे में असली तस्वीर सामने आने की उम्मीद बढ़ गई है।

    अब तक माना जाता रहा है कि भोपाल की साफ-सफाई व्यवस्था काफी बेहतर है, लेकिन जब जमीनी स्तर पर लोगों से बात की गई तो कई अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ लोग शहर की सफाई व्यवस्था से संतुष्ट नजर आए। उनका कहना है कि नियमित कचरा उठान, सड़कों की सफाई और सार्वजनिक जगहों पर स्वच्छता का स्तर पहले से बेहतर हुआ है। खासतौर पर मुख्य सड़कों और वीआईपी इलाकों में सफाई स्पष्ट दिखाई देती है।

    हालांकि, दूसरी तरफ कई नागरिकों ने सफाई व्यवस्था में खामियां भी गिनाईं। लोगों का कहना है कि अंदरूनी कॉलोनियों और पुराने इलाकों में अभी भी कचरा जमा रहता है और सफाई नियमित नहीं होती। कुछ जगहों पर डस्टबिन की कमी और कचरा प्रबंधन में लापरवाही भी देखने को मिलती है। इससे साफ जाहिर होता है कि शहर के अलग-अलग हिस्सों में सफाई का स्तर एक जैसा नहीं है।

    स्वच्छता सर्वे के नए फॉर्मेट में अब नागरिकों की सीधी भागीदारी बढ़ा दी गई है। अधिकारी घर-घर जाकर फीडबैक ले रहे हैं, जिससे केवल डिजिटल वोटिंग के बजाय वास्तविक अनुभव को महत्व मिलेगा। इससे यह तय होगा कि रैंकिंग सिर्फ आंकड़ों पर आधारित है या वास्तव में जमीनी हकीकत भी उतनी ही मजबूत है।

    भोपाल के लिए यह एक अहम मौका है, जहां उसे अपनी छवि को बनाए रखने के साथ-साथ उन कमियों को भी दूर करना होगा, जो अब तक नजरअंदाज होती रही हैं। अगर शहर प्रशासन इन फीडबैक को गंभीरता से लेता है, तो आने वाले समय में भोपाल न केवल रैंकिंग में, बल्कि वास्तविक सफाई व्यवस्था में भी एक मिसाल बन सकता है।

  • MP में बीजेपी का ‘मेगा एडजस्टमेंट प्लान’: 31 विभागों की समितियों में 10,500 कार्यकर्ताओं को मिलेगा मौका

    MP में बीजेपी का ‘मेगा एडजस्टमेंट प्लान’: 31 विभागों की समितियों में 10,500 कार्यकर्ताओं को मिलेगा मौका


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में सत्ता और संगठन के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने के उद्देश्य से भारतीय जनता पार्टी ने एक व्यापक ‘कार्यकर्ता एडजस्टमेंट अभियान’ शुरू किया है। इस रणनीति के तहत प्रदेश के सभी 55 जिलों में विभिन्न सरकारी समितियों और बोर्डों के जरिए करीब 10,500 से अधिक कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी। यह पहल न केवल संगठन को मजबूत करने की दिशा में अहम मानी जा रही है, बल्कि जमीनी स्तर पर पार्टी की पकड़ को भी और सुदृढ़ करेगी।
    पिछले एक सप्ताह से निगम-मंडलों में नियुक्तियों का सिलसिला जारी है और अब इसे जिला स्तर तक विस्तार दिया जा रहा है। पार्टी का फोकस पंचायत से लेकर जिला स्तर तक सक्रिय कार्यकर्ताओं को प्रशासनिक ढांचे में शामिल करना है, ताकि वे सीधे शासन-प्रक्रिया का हिस्सा बन सकें। इसके लिए 31 विभागों के अंतर्गत 70 से अधिक प्रकार की समितियों का गठन किया जा रहा है।
    हर जिले में प्रभारी मंत्रियों को नियुक्तियों की जिम्मेदारी दी गई है। वे जिला स्तर के कोर ग्रुप के साथ मिलकर योग्य कार्यकर्ताओं के नामों का चयन कर रहे हैं। यह प्रक्रिया लगभग अंतिम चरण में है और मुख्यमंत्री कार्यालय से इसकी लगातार निगरानी की जा रही है। दरअसल, 27 जनवरी को ही इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए थे, जिसके बाद अब तेजी से अमल शुरू हुआ है।
    यदि औसतन आंकलन किया जाए तो हर जिले में लगभग 190 से 200 सदस्यों को विभिन्न समितियों में जगह मिलेगी। इस तरह पूरे प्रदेश में हजारों कार्यकर्ता प्रशासनिक जिम्मेदारियों से जुड़ेंगे। यह संख्या पंचायत और ब्लॉक स्तर को जोड़ने पर और भी बढ़ सकती है।
    विभागवार देखें तो पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की 8 समितियों में ‘दिशा’, जल स्वच्छता और युवा ग्राम शक्ति जैसी इकाइयां प्रमुख हैं। वहीं, स्कूल शिक्षा विभाग में जिला स्तरीय समितियों में हर जिले से करीब 9 सदस्यों की नियुक्ति होगी। उच्च शिक्षा की जनभागीदारी समितियों में प्रति कॉलेज एक अध्यक्ष और 13 सदस्यों को शामिल किया जाएगा, जो कार्यकर्ताओं के लिए बड़ा अवसर होगा।
    सामाजिक न्याय, योजना एवं सांख्यिकी विभाग की समितियों में भी बड़ी संख्या में पद उपलब्ध हैं। जिला अंत्योदय समिति में 10 से 30 तक सदस्य नियुक्त किए जा सकते हैं। नगरीय निकायों की समितियों में भी 5 से 21 सदस्यों का प्रावधान रखा गया है। इसके अलावा जेल, पुलिस, तकनीकी शिक्षा, खेल और पीएचई विभागों में भी विभिन्न समितियों के माध्यम से नियुक्तियां की जाएंगी।
    आर्थिक और विकास से जुड़े विभागों में भी कार्यकर्ताओं को शामिल किया जाएगा। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, उद्योग, कृषि और उद्यानिकी विभागों की समितियां इस अभियान का अहम हिस्सा हैं। इन सभी नियुक्तियों में प्रभारी मंत्रियों की सिफारिश और कोर ग्रुप की सहमति को प्राथमिकता दी जा रही है।
    बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल का कहना है कि हर नियुक्ति में सर्वसम्मति सुनिश्चित की जा रही है, ताकि योग्य कार्यकर्ताओं को सही स्थान मिल सके। आने वाले कुछ हफ्तों में सभी जिलों की सूची अंतिम रूप ले लेगी और इसके साथ ही प्रदेश में बीजेपी का संगठनात्मक ढांचा और अधिक सक्रिय नजर आएगा।
  • गंदे पानी से बड़वानी में बवाल: सीवरेज लीकेज पर सड़क पर उतरे पार्षद और रहवासी

    गंदे पानी से बड़वानी में बवाल: सीवरेज लीकेज पर सड़क पर उतरे पार्षद और रहवासी


    बड़वानी । मध्यप्रदेश के बड़वानी शहर में उस समय हालात बिगड़ गए जब कालका माता मंदिर क्षेत्र में सीवरेज और पेयजल लाइनों में लीकेज के चलते घरों तक गंदे और बदबूदार पानी की सप्लाई होने लगी। जैसे ही लोगों ने नलों से दूषित पानी निकलते देखा, पूरे इलाके में आक्रोश फैल गया और वार्डवासियों का गुस्सा सड़कों पर उतर आया। समस्या से नाराज कांग्रेस पार्षदों ने भी मोर्चा संभालते हुए सड़क पर धरना शुरू कर दिया और नगर पालिका प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से क्षेत्र में सीवरेज लाइन का काम चल रहा था, लेकिन निर्माण कार्य के दौरान भारी लापरवाही बरती गई। धरना स्थल पर पहुंचे नगर पालिका के नेता प्रतिपक्ष राकेश सिंह जाधव ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सीवरेज कार्य के दौरान मुख्य पेयजल लाइन को नुकसान पहुंचा दिया गया, जिसके चलते यह स्थिति बनी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि नियमों के अनुसार पेयजल और सीवरेज पाइपलाइन को साथ में नहीं डाला जा सकता, लेकिन यहां नियमों की अनदेखी करते हुए काम किया गया है।

    वार्ड नंबर 14 के पार्षद प्रतिनिधि हेमंत कुमावत ने भी प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि दूषित पानी की समस्या की जानकारी एक दिन पहले ही अधिकारियों को दे दी गई थी, लेकिन समय पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके चलते अब हालात ऐसे बन गए हैं कि क्षेत्र में महामारी और जलजनित बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ गया है। लोगों में इस बात को लेकर भी नाराजगी है कि जिम्मेदार अधिकारी शिकायतों को गंभीरता से नहीं ले रहे और केवल आश्वासन देकर मामले को टालने की कोशिश कर रहे हैं।

    जैसे ही प्रदर्शन की सूचना प्रशासन तक पहुंची, नगर पालिका के इंजीनियर और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर उन्हें भरोसा दिलाया कि समस्या का जल्द समाधान किया जाएगा। साथ ही संबंधित ठेकेदार को तत्काल लीकेज ठीक करने के निर्देश भी दिए गए। इसके बाद कुछ हद तक स्थिति शांत हुई, लेकिन लोगों का गुस्सा पूरी तरह ठंडा नहीं पड़ा है।

    पार्षदों और स्थानीय निवासियों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ और दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और उग्र किया जाएगा। फिलहाल प्रशासन की टीम सुधार कार्य में जुटी हुई है, लेकिन यह घटना एक बार फिर शहरी विकास कार्यों में लापरवाही और निगरानी की कमी को उजागर करती है, जिससे आम नागरिकों को सीधे तौर पर परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

  • ट्रैक्टर रैली के बाद रुका आंदोलन पर खत्म नहीं हुआ गुस्सा किसान बोले कागज पर भरोसा चाहिए

    ट्रैक्टर रैली के बाद रुका आंदोलन पर खत्म नहीं हुआ गुस्सा किसान बोले कागज पर भरोसा चाहिए


    हरदा ।मध्यप्रदेश के हरदा जिले में किसानों का उबाल फिलहाल दो दिनों के लिए थम जरूर गया है लेकिन हालात अब भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। किसान जन क्रांति आंदोलन के तहत हजारों किसानों ने अपनी मांगों को लेकर जिस तरह से एकजुटता दिखाई उसने प्रशासन को भी सक्रिय होने पर मजबूर कर दिया। हालांकि बातचीत के बाद आंदोलन को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया गया है लेकिन किसानों का साफ कहना है कि जब तक उन्हें लिखित आश्वासन नहीं मिलेगा तब तक उनका भरोसा नहीं बनेगा।

    बुधवार को जिले में बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टर रैली निकालते हुए कृषि उपज मंडी पहुंचे जहां उन्होंने MSP और गेहूं की स्लॉट बुकिंग में हो रही देरी समेत कई मुद्दों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। किसानों का आरोप है कि लंबे समय से वे इन समस्याओं से जूझ रहे हैं लेकिन प्रशासनिक स्तर पर ठोस समाधान नहीं निकल पा रहा है। इसी नाराजगी के चलते उन्होंने आंदोलन का रास्ता चुना और अपनी आवाज बुलंद की।

    प्रदर्शन के दौरान मौके पर पहुंचे दिवाकर नारायण पटेल ने किसानों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं। अधिकारियों और किसानों के बीच हुई चर्चा में यह सहमति बनी कि गेहूं स्लॉट बुकिंग की समस्या को अगले दो दिनों के भीतर सुधार लिया जाएगा। साथ ही अन्य मांगों पर भी सकारात्मक रुख अपनाने का भरोसा दिया गया।

    हालांकि किसानों ने स्पष्ट कर दिया कि अब वे केवल मौखिक आश्वासनों पर भरोसा करने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि पहले भी कई बार वादे किए गए लेकिन जमीनी स्तर पर बदलाव नहीं दिखा इसलिए इस बार सभी मांगों पर लिखित आश्वासन जरूरी है। इसी मांग के चलते आंदोलन को फिलहाल दो दिन के लिए स्थगित करने पर सहमति बनी है ताकि प्रशासन को समाधान लागू करने का समय मिल सके।

    जन क्रांति आंदोलन के संयोजक राजेंद्र पटेल ने साफ चेतावनी दी है कि यदि तय समय सीमा में लिखित आश्वासन नहीं दिया गया तो किसान फिर से सड़कों पर उतरेंगे और बिना किसी पूर्व सूचना के कलेक्टर कार्यालय का घेराव करेंगे। उनका कहना है कि यह लड़ाई केवल एक जिले की नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के किसानों के अधिकारों से जुड़ी है।

    इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि किसानों के मुद्दे अब केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहे बल्कि वे एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकते हैं। MSP और कृषि व्यवस्था से जुड़ी समस्याएं लगातार किसानों की चिंता का कारण बनी हुई हैं और यदि समय रहते इनका समाधान नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज हो सकता है।

    फिलहाल प्रशासन के पास दो दिन का समय है जिसमें उसे अपनी प्रतिबद्धता साबित करनी होगी। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या किसानों को लिखित आश्वासन मिलेगा या फिर हरदा एक बार फिर बड़े आंदोलन का केंद्र बनेगा।

  • मैहर में दर्दनाक हादसा: तालाब में नहाने गई चार लड़कियां डूबीं, दो की मौत, दो की जान बची

    मैहर में दर्दनाक हादसा: तालाब में नहाने गई चार लड़कियां डूबीं, दो की मौत, दो की जान बची

    मैहर । मध्य प्रदेश के मैहर जिले में शनिवार सुबह एक दर्दनाक हादसा सामने आया, जहां तालाब में नहाने गई चार लड़कियां डूब गईं। इस घटना में दो लड़कियों की मौत हो गई, जबकि दो को ग्रामीणों ने समय रहते बचा लिया।

    नहाने के दौरान हुआ हादसा

    कोतवाली थाना क्षेत्र के पटेहरा तालाब में यह घटना हुई। जानकारी के अनुसार, पटेहरा बीड़ी कॉलोनी की एक युवती और तीन नाबालिग किशोरियां सुबह नहाने के लिए तालाब पहुंची थीं। इसी दौरान एक किशोरी का पैर फिसल गया और वह गहरे पानी में चली गई।

    बचाने की कोशिश बनी जानलेवा

    पहली किशोरी को बचाने के प्रयास में बाकी तीनों भी आगे बढ़ीं, लेकिन संतुलन बिगड़ने से चारों पानी में डूबने लगीं। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत बचाव कार्य शुरू किया और दो लड़कियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। हालांकि, दो की जान नहीं बचाई जा सकी।

    मृतकों की पहचान

    हादसे में जान गंवाने वाली लड़कियों की पहचान पूनम चौधरी (10) और आंचल चौधरी (20) के रूप में हुई है, जो पटेहरा बीड़ी कॉलोनी की निवासी थीं। दोनों के शवों को सिविल अस्पताल मैहर भेजा गया है। घटना की सूचना मिलते ही एसडीएम दिव्या पटेल, तहसीलदार जितेंद्र पटेल और थाना प्रभारी महेंद्र सिंह चौहान मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    इलाके में पसरा मातम

    इस दर्दनाक घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है। एक छोटी सी चूक ने दो जिंदगियां छीन लीं, जिससे स्थानीय लोग स्तब्ध हैं।

  • श्योपुर हादसे पर CM मोहन यादव का बड़ा ऐलान मृतकों को 4 लाख घायलों को आर्थिक मदद

    श्योपुर हादसे पर CM मोहन यादव का बड़ा ऐलान मृतकों को 4 लाख घायलों को आर्थिक मदद

    श्योपुर । मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले में हुए दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है इस घटना पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों और घायलों के लिए आर्थिक सहायता का बड़ा ऐलान किया है मुख्यमंत्री ने इस हादसे को बेहद पीड़ादायक बताते हुए पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और हर संभव मदद का भरोसा दिलाया

    मुख्यमंत्री द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार इस दुर्घटना में जान गंवाने वाले प्रत्येक मृतक के परिजनों को 4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी वहीं गंभीर रूप से घायल लोगों को 1 लाख रुपए और अन्य घायलों को 50 हजार रुपए की सहायता राशि प्रदान करने के निर्देश दिए गए हैं यह घोषणा मुख्यमंत्री ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से की और संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से राहत कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए

    यह दर्दनाक हादसा श्योपुर जिले के विजयपुर थाना क्षेत्र के खितरपाल गांव के पास हुआ जहां एक ट्रैक्टर ट्रॉली अनियंत्रित होकर पलट गई बताया जा रहा है कि ट्रॉली में सवार सभी लोग वीरपुर क्षेत्र के घूघस गांव से विजयपुर के झारबड़ौदा में भात देने जा रहे थे इसी दौरान गैस गोदाम के पास अचानक संतुलन बिगड़ने से ट्रैक्टर ट्रॉली पलट गई और उसमें सवार कई लोग उसके नीचे दब गए

    हादसा इतना भयावह था कि मौके पर ही चार महिलाओं की दर्दनाक मौत हो गई जबकि 20 से अधिक लोग घायल हो गए घटना के तुरंत बाद मौके पर चीख पुकार मच गई और आसपास के लोग सहायता के लिए दौड़ पड़े स्थानीय लोगों ने राहत और बचाव कार्य शुरू करते हुए घायलों को बाहर निकाला और उन्हें नजदीकी अस्पताल पहुंचाया जहां उनका इलाज जारी है

    मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि इस दुखद घटना में घायल हुए सभी लोगों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है उन्होंने ईश्वर से दिवंगत आत्माओं की शांति और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना भी की साथ ही प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाए

    इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में यात्रियों को ले जाने के लिए उपयोग किए जाने वाले ट्रैक्टर ट्रॉली जैसे असुरक्षित साधनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं अक्सर देखा जाता है कि ऐसे वाहनों में क्षमता से अधिक लोगों को बैठाया जाता है जिससे हादसों का खतरा बढ़ जाता है

    फिलहाल प्रशासन द्वारा पूरे मामले की जांच की जा रही है और दुर्घटना के कारणों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है वहीं घायलों के इलाज और पीड़ित परिवारों को राहत पहुंचाने का काम प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है इस हादसे ने पूरे क्षेत्र में शोक की लहर फैला दी है और लोग मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं

  • छुट्टियों की खुशियां बदलीं मातम, में उज्जैन में जहरीली गैस से दो बच्चियों की मौत

    छुट्टियों की खुशियां बदलीं मातम, में उज्जैन में जहरीली गैस से दो बच्चियों की मौत


    उज्जैन । मध्यप्रदेश के उज्जैन शहर के नानाखेड़ा थाना क्षेत्र स्थित त्रिवेणी हिल्स से एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है जहां गर्मियों की छुट्टियां मनाने आए दो परिवारों की खुशियां अचानक मातम में बदल गईं। यहां नाना के घर आए परिवार के दो मासूम बच्चों की बंद कमरे में जहरीली गैस की चपेट में आने से मौत हो गई जिससे पूरे इलाके में शोक का माहौल है।

    जानकारी के अनुसार, परिवार के सदस्य जिस छोटे से कमरे में सो रहे थे वहां बड़ी मात्रा में गेहूं का भंडारण किया गया था। यह कमरा लगभग 10 बाय 15 फीट का था और रात के समय पूरी तरह बंद होने के कारण अंदर ऑक्सीजन की कमी और संभवतः रासायनिक प्रतिक्रिया से जहरीली गैस का निर्माण हो गया। इसी स्थिति में कमरे में सो रहे बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी।

    सुबह करीब 9 बजे जब परिजनों की नींद खुली तो उन्होंने देखा कि बच्चों की हालत बेहद गंभीर है। मासूमों के मुंह से झाग निकल रहा था और वे बेहोश अवस्था में थे। घबराए परिजन तुरंत उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे लेकिन तब तक स्थिति काफी बिगड़ चुकी थी।

    इस हादसे में शाजापुर की रहने वाली मात्र डेढ़ महीने की मासूम तृषा ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया जबकि कायथा निवासी चार वर्षीय अनिका की भी मौत हो गई। दोनों मासूमों की मौत ने परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है।

    बताया जा रहा है कि छुट्टियों के चलते कई रिश्तेदार एक साथ त्रिवेणी हिल्स स्थित नाना के घर इकट्ठा हुए थे और वहीं यह दुखद घटना घटित हो गई। प्रारंभिक आशंका के अनुसार गेहूं के भंडारण के साथ रखी गई कीटनाशक दवाओं या बंद कमरे में हुई रासायनिक प्रक्रिया के कारण जहरीली गैस बनने की संभावना जताई जा रही है।

    घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि वास्तव में गैस बनने का कारण क्या था और क्या इसमें किसी प्रकार की लापरवाही शामिल थी।

    इस दर्दनाक हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है और पीड़ित परिवारों का रो रोकर बुरा हाल है। मासूमों की असामयिक मौत ने एक बार फिर घरों में अनाज भंडारण और सुरक्षा उपायों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव महिला सशक्तिकरण और योजनाओं पर करेंगे संबोधन…

    मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव महिला सशक्तिकरण और योजनाओं पर करेंगे संबोधन…


    भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में 15 अप्रैल को नारी शक्ति वंदन अभियान के अंतर्गत एक भव्य और वृहद कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन शहर के प्रतिष्ठित रवींद्र भवन में संपन्न होगा, जहां राज्य के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव मुख्य रूप से उपस्थित रहकर संबोधित करेंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं के सशक्तिकरण, सामाजिक भागीदारी और उनके समग्र विकास की दिशा में सरकार की योजनाओं और प्रयासों को जन-जन तक पहुंचाना है।

    यह कार्यक्रम नारी शक्ति वंदन पखवाड़े का हिस्सा है, जो 25 अप्रैल तक पूरे प्रदेश में विभिन्न गतिविधियों के साथ मनाया जा रहा है। इस अभियान के माध्यम से महिलाओं के उत्थान, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सम्मान को केंद्र में रखते हुए कई स्तरों पर जागरूकता और लाभकारी योजनाओं का विस्तार किया जा रहा है। राजधानी में होने वाला यह मुख्य कार्यक्रम इस पूरे अभियान का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव नारी सशक्तिकरण पर विस्तार से अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। सरकार का मानना है कि बेटियों और बहनों का विकास ही समाज और प्रदेश के समग्र विकास की आधारशिला है। इस अवसर पर विभिन्न योजनाओं और उपलब्धियों की जानकारी भी साझा की जाएगी, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि राज्य सरकार महिलाओं के हित में किस प्रकार निरंतर कार्य कर रही है।

    राज्य सरकार द्वारा लाडली बहना योजना को महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया गया है। इस योजना के तहत प्रदेश की बड़ी संख्या में महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार हो रहा है और वे आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हो रही हैं। अब तक इस योजना के माध्यम से करोड़ों की राशि सीधे महिलाओं के खातों में हस्तांतरित की जा चुकी है, जिससे इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिल रहा है।

    नारी शक्ति वंदन पखवाड़े के दौरान राज्यभर में जागरूकता कार्यक्रम, संवाद सत्र और विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य महिलाओं को केवल योजनाओं का लाभ देना ही नहीं बल्कि उन्हें समाज के हर क्षेत्र में समान भागीदारी के लिए प्रेरित करना भी है। इसी क्रम में लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने की दिशा में भी चर्चा और पहल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा है कि सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और निरंतर ऐसी नीतियां लागू की जा रही हैं जिससे उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आए। इस आयोजन को प्रदेश में महिला सशक्तिकरण के प्रति सरकार की गंभीरता और संकल्प का प्रतीक माना जा रहा है।