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  • बेटी की मौत से टूटे पिता का छलका दर्द, भोपाल में बच्ची की हत्या के बाद थाने का घेराव, परिजनों ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

    बेटी की मौत से टूटे पिता का छलका दर्द, भोपाल में बच्ची की हत्या के बाद थाने का घेराव, परिजनों ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप


    भोपाल । भोपाल के बैरागढ़ इलाके में 12 साल की बच्ची की हत्या के मामले ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। रोजाना की तरह कबाड़ा बीनने के लिए घर से निकली बच्ची का शव अगले दिन एक खंडहर में मिला। घटना के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और इलाके के लोगों में भारी आक्रोश है। बच्ची के पिता आरोपी को कठोरतम सजा देने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि वे अपनी बेटी को बचा नहीं सके और अब चाहते हैं कि दोषी को ऐसी सजा मिले जिससे भविष्य में कोई इस तरह का अपराध करने की हिम्मत न करे। परिजनों ने पुलिस की शुरुआती कार्रवाई पर भी सवाल उठाए हैं।
    परिवार के मुताबिक बच्ची 15 अक्टूबर की शाम करीब सात बजे घर से कबाड़ा बीनने के लिए निकली थी। इसी दौरान रास्ते में उसकी मुलाकात मोबिन नाम के युवक से हुई। परिजनों का आरोप है कि वह बच्ची को अपने साथ ले गया और इसके बाद वह घर वापस नहीं लौटी। काफी देर तक बच्ची के नहीं लौटने पर परिवार ने उसकी तलाश शुरू की। पिता का कहना है कि उसी रात करीब 11 से 12 बजे के बीच वे बैरागढ़ थाने पहुंचे और बच्ची के लापता होने की सूचना दी। परिवार का आरोप है कि शिकायत दर्ज कराने के बाद भी बच्ची की तलाश के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए।
    परिजन रातभर बच्ची को खोजते रहे और अगले दिन भी तलाश जारी रखी। 16 अक्टूबर की दोपहर एक अन्य बच्ची कचरा बीनने के लिए एक खंडहर में पहुंची तो वहां उसे लापता बच्ची का शव दिखाई दिया। इसके बाद परिवार और पुलिस को सूचना दी गई। शव मिलने की खबर फैलते ही इलाके में तनाव और आक्रोश बढ़ गया। परिवार के लिए यह खबर असहनीय थी क्योंकि वे पूरी रात अपनी बेटी को सुरक्षित वापस लाने की उम्मीद में तलाश कर रहे थे।
    बच्ची के पिता ने आरोप लगाया कि उनकी बेटी के साथ गलत काम करने के बाद उसकी हत्या की गई। उनका यह भी दावा है कि सबूत छिपाने के लिए बच्ची के मुंह में कपड़ा ठूंसा गया और शव के ऊपर पुरानी अलमारी डालकर उसे कपड़े से ढक दिया गया। ये आरोप परिवार की ओर से लगाए गए हैं और मामले की वास्तविक परिस्थितियों का खुलासा जांच के बाद ही हो सकेगा। पिता आरोपी मोबिन को फांसी देने की मांग कर रहे हैं। गहरे दुख और गुस्से के बीच उन्होंने यह भी कहा कि यदि कानून दोषी को सजा नहीं दिला सकता तो आरोपी को उनके हवाले कर दिया जाए।
    परिवार के सदस्यों ने पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। बच्ची की बुआ का आरोप है कि मोहल्ले की एक बच्ची ने उनकी भतीजी को आखिरी बार मोबिन के साथ जाते हुए देखा था। इस जानकारी के आधार पर परिजनों को उस पर संदेह हुआ और उन्होंने उसे पकड़कर पुलिस के हवाले किया। बुआ के मुताबिक पुलिस ने पूछताछ की लेकिन बच्ची के बारे में जानकारी होने से इनकार करने पर उसे छोड़ दिया गया। उनका दावा है कि शव मिलने के बाद आरोपी को दोबारा पकड़ा गया। परिजन चाहते हैं कि शुरुआती शिकायत पर हुई कार्रवाई की भी जांच हो और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
    घटना के बाद बैरागढ़ में लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया और थाने का घेराव किया। प्रदर्शन के दौरान मुख्य मार्ग पर जाम की स्थिति बनी और किसी अप्रिय घटना से बचने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया। लोगों की मांग है कि बच्ची को न्याय मिले और मामले की निष्पक्ष जांच हो। परिवार का कहना है कि उनकी बेटी अब लौटकर नहीं आएगी लेकिन दोषियों को सजा मिलना जरूरी है। फिलहाल इस मामले में आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और पुलिस की कथित लापरवाही से जुड़े आरोप जांच के महत्वपूर्ण पहलू बने हुए हैं।

  • शिवपुरी में सड़क हादसे ने छीन ली एक जिंदगी, सत्संग से लौट रहे युवक को अज्ञात वाहन ने कुचला, पुलिस ने दर्ज किया केस

    शिवपुरी में सड़क हादसे ने छीन ली एक जिंदगी, सत्संग से लौट रहे युवक को अज्ञात वाहन ने कुचला, पुलिस ने दर्ज किया केस


    शिवपुरी । मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में सड़क हादसे में एक बाइक सवार की मौत हो गई। मृतक की पहचान 38 वर्षीय देशराज अहिरवार निवासी बांसगढ़ थाना करैरा के रूप में हुई है। जानकारी के मुताबिक देशराज बदरवास में आयोजित सत्संग में शामिल होने के बाद बाइक से अपने गांव लौट रहे थे। इसी दौरान शनिवार रात राष्ट्रीय राजमार्ग 46 पर रायश्री कट के पास एक अज्ञात वाहन ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी गंभीर थी कि वाहन का पहिया उनके शरीर के ऊपर से निकल गया। हादसे में देशराज की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में शोक का माहौल है।
    हादसे की सूचना मिलते ही देहात थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल का जायजा लिया और आवश्यक कार्रवाई शुरू की। मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। रविवार को शव का पोस्टमार्टम कराया गया। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच आगे बढ़ाई। शुरुआती जानकारी के अनुसार दुर्घटना में शामिल वाहन की पहचान अभी नहीं हो सकी है। पुलिस अज्ञात वाहन चालक का पता लगाने का प्रयास कर रही है।
    पुलिस ने इस मामले में अज्ञात वाहन चालक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है। अब जांच के दौरान यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि हादसा किस वाहन से हुआ और दुर्घटना के समय चालक किस दिशा में जा रहा था। पुलिस घटनास्थल से जुड़े तथ्यों और उपलब्ध जानकारी के आधार पर वाहन की पहचान करने में जुटी है। चालक का पता चलने के बाद दुर्घटना के संबंध में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
    राष्ट्रीय राजमार्गों पर तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाने के कारण गंभीर दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। खासकर कट और मोड़ वाले स्थानों पर वाहन चालकों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत होती है। हालांकि देशराज के साथ हुए हादसे की वास्तविक वजह पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल यह सामने आया है कि सत्संग से लौटते समय उनकी बाइक को अज्ञात वाहन ने टक्कर मारी और इस दुर्घटना में उनकी जान चली गई।
    देशराज की मौत से उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। वह सत्संग में शामिल होकर घर लौट रहे थे लेकिन रास्ते में हुई दुर्घटना ने उनकी जिंदगी खत्म कर दी। पुलिस अब हादसे में शामिल वाहन और उसके चालक की पहचान करने पर ध्यान दे रही है। जांच पूरी होने के बाद दुर्घटना से जुड़े अन्य तथ्य सामने आने की उम्मीद है।

  • ग्वालियर में सड़क सुधार पर 108 करोड़ खर्च करने की तैयारी, पुरानी योजनाओं पर सवाल, अब गुणवत्ता की होगी असली परीक्षा

    ग्वालियर में सड़क सुधार पर 108 करोड़ खर्च करने की तैयारी, पुरानी योजनाओं पर सवाल, अब गुणवत्ता की होगी असली परीक्षा


    ग्वालियर। ग्वालियर में बदहाल सड़कों से परेशान लोगों को राहत देने के लिए नगर निगम ने बड़ी कार्ययोजना तैयार की है। शहर के प्रमुख मार्गों का निर्माण और चौड़ीकरण करने के लिए 108 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस योजना के तहत कुल 28 सड़कों को विकसित करने की तैयारी है। हालांकि शहर में सड़क सुधार की नई योजना के बीच निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। कई इलाकों में सड़कें गहरे गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं तो कुछ स्थानों पर निर्माण के बाद सड़कें दोबारा धंसने की शिकायतें सामने आई हैं। सड़क सुधार का मामला हाईकोर्ट तक पहुंचने के बाद अब नगर निगम की कार्ययोजना और उसके क्रियान्वयन पर लोगों की नजरें टिकी हुई हैं।
    नगर निगम की प्रस्तावित योजना में शहर के कई महत्वपूर्ण मार्गों को शामिल किया गया है। इनमें एजी ऑफिस से सिल्वर एस्टेट तक का मार्ग होटल सनबीम से मानसिंह चौराहे तक की सड़क टाइगर चौक से दाने बाबा चौराहा भिंड रोड से सेंट्रल एकेडमी हजीरा चौराहे से बिरला नगर पुल और चार शहर का नाका लधेड़ी से जलालपुर तथा कम्पू थाना से गुड़ी-गुड़ी का नाका तक के मार्ग शामिल हैं। इसके अलावा माधोगंज थाना से हेमसिंह की परेड और महाराज बाड़ा से गश्त का ताजिया तक की सड़क का भी विकास किया जाना है। सहायक नगर निवेशक अमित गुप्ता के अनुसार नगर निगम आयुक्त अभिषेक चौधरी के प्रयासों से प्रदेश सरकार की द्वारका योजना के तहत इन मार्गों के विकास की कार्ययोजना तैयार की गई है। योजना का उद्देश्य शहर में आवागमन को बेहतर बनाना और लोगों को खराब सड़कों से राहत दिलाना है।
    शहर में सड़क निर्माण की जरूरत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि गोले का मंदिर चेतकपुरी शताब्दीपुरम और दीनदयाल नगर जैसे इलाकों में लोग लंबे समय से सड़क संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। कई स्थानों पर गड्ढों के कारण वाहन चालकों को परेशानी होती है वहीं वाहनों के गुजरने से उड़ने वाली धूल राहगीरों और आसपास रहने वाले लोगों के लिए मुश्किलें बढ़ाती है। सिटी सेंटर जैसे प्रमुख क्षेत्र की सड़कें भी इन समस्याओं से पूरी तरह मुक्त नहीं हैं। सड़क बनने के कुछ समय बाद ही उसके धंसने की शिकायतें निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करती हैं। इसके अलावा लोक निर्माण विभाग और नगर निगम के बीच सड़कों की जिम्मेदारी को लेकर भी खींचतान की स्थिति सामने आती रही है।
    ग्वालियर में इससे पहले भी धूल से राहत दिलाने के लिए डस्ट फ्री रोड योजना घोषित की गई थी। इस योजना के तहत करीब 40 किलोमीटर लंबाई की 18 सड़कों को धूल मुक्त बनाने के साथ पानी का छिड़काव करने और एक लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया था। हालांकि इस योजना के परिणामों को लेकर अब भी सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में नई सड़क विकास योजना को लेकर लोगों की अपेक्षाएं बढ़ गई हैं। वहीं फूलबाग से गिरवाई तक प्रस्तावित 926 करोड़ रुपये की एलिवेटेड रोड परियोजना के निर्माण से भी शहर में धूल बढ़ने की शिकायतें सामने आई हैं।
    अब नगर निगम के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल नई सड़कें बनाना नहीं बल्कि उनकी गुणवत्ता सुनिश्चित करना भी है। सड़क निर्माण में मानकों का पालन समय पर मरम्मत और काम की नियमित निगरानी जरूरी होगी। यदि नई सड़कें कुछ ही समय में खराब होने लगती हैं तो करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद लोगों को स्थायी राहत नहीं मिल पाएगी। शहरवासियों को उम्मीद है कि 108 करोड़ रुपये की इस कार्ययोजना से आवागमन सुगम होगा और गड्ढों तथा धूल की समस्या कम होगी। अब देखना होगा कि योजना जमीन पर कितनी प्रभावी साबित होती है और ग्वालियर की सड़कों की स्थिति में वास्तव में कितना सुधार आता है।

  • गर्मी से पहले इंदौर में पानी का संकट, 85 हजार परिवारों के बाद अब 22 जोन में चिंता, टैंकरों के लिए 71 नए हाइड्रेंट चिह्नित

    गर्मी से पहले इंदौर में पानी का संकट, 85 हजार परिवारों के बाद अब 22 जोन में चिंता, टैंकरों के लिए 71 नए हाइड्रेंट चिह्नित


    इंदौर । इंदौर में गर्मी शुरू होने से पहले ही पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। इस बार सामान्य से कम बारिश होने और कई ट्यूबवेल बंद होने के कारण आने वाले महीनों में जलापूर्ति बनाए रखना नगर निगम के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। नगर निगम की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार शहर में कुल 6040 ट्यूबवेल हैं जिनमें से 361 फिलहाल बंद पड़े हैं। शहर के 22 जोन में पानी की समस्या सामने आई है। कई इलाकों में लोग अभी से टैंकरों के जरिए पानी की व्यवस्था करने को मजबूर हो रहे हैं। स्थिति को देखते हुए नगर निगम ने नए जलस्रोत विकसित करने की तैयारी शुरू कर दी है।
    शहर की जरूरतों को पूरा करने के लिए करीब 200 नए ट्यूबवेल खोदने की आवश्यकता बताई गई है। इनमें से 100 ट्यूबवेल के लिए टेंडर आमंत्रित किए गए हैं। इसके साथ ही बंद पड़े ट्यूबवेल को दोबारा चालू करने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं। निगम की योजना के तहत पंपों की मरम्मत और तकनीकी खराबियों को दूर करने के लिए 10 विशेष टीमें लगाने की तैयारी है। इससे उन क्षेत्रों में राहत मिल सकती है जहां नर्मदा जल का कनेक्शन नहीं है और स्थानीय जलस्रोतों पर निर्भरता अधिक है।
    जलसंकट की चिंता बढ़ने की एक बड़ी वजह इस साल कम बारिश होना है। इंदौर में सामान्य तौर पर करीब 37 इंच बारिश दर्ज की जाती है लेकिन इस बार लगभग 23 इंच बारिश ही हुई है। इस तरह सामान्य के मुकाबले करीब 14 इंच कम पानी बरसा है। कम बारिश का असर भूजल स्तर पर पड़ सकता है। ऐसे में नए ट्यूबवेल खोदने से पहले संबंधित क्षेत्रों में भूजल की उपलब्धता का तकनीकी सर्वे करना जरूरी होगा। यदि किसी इलाके में भूजल स्तर काफी नीचे चला गया है तो वहां बोरिंग कराने के बाद भी पर्याप्त पानी मिलने की गारंटी नहीं होगी। इसलिए नए जलस्रोत विकसित करने के साथ वर्षाजल संचयन और भूजल पुनर्भरण पर भी ध्यान देना होगा।
    नगर निगम की रिपोर्ट के मुताबिक शहर में कुल 105 जलप्रदाय टंकियां हैं। इनमें से 95 टंकियों के जरिए रोजाना जलापूर्ति की जा रही है। बाकी 10 टंकियों से नियमित पानी की सप्लाई नहीं होने के कारणों को स्पष्ट करने और प्रभावित क्षेत्रों की जरूरतों का आकलन करने की आवश्यकता है। यदि इन क्षेत्रों में वैकल्पिक व्यवस्था मजबूत नहीं की गई तो गर्मी के दौरान लोगों की परेशानी बढ़ सकती है। पानी की आपूर्ति सुचारु रखने के लिए निगम ने टैंकर व्यवस्था को भी मजबूत करने की योजना बनाई है। इसके तहत 71 नए हाइड्रेंट स्थान चिह्नित किए गए हैं। इसके अलावा 12 मौजूदा समप और हाइड्रेंट स्थानों को आपातकालीन जल भराव केंद्र के रूप में इस्तेमाल करने की तैयारी है। जरूरत के अनुसार नए समप विकसित करने और उन्हें ट्यूबवेल या पाइपलाइन से जोड़ने की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं।
    एमआईसी सदस्य बबलू शर्मा के मुताबिक नगर निगम गर्मी के दौरान संभावित जलसंकट से बचने के लिए योजना बना रहा है। नए ट्यूबवेल खोदने और मौजूदा जलस्रोतों को दुरुस्त करने पर काम किया जाएगा ताकि लोगों को पानी की परेशानी का सामना न करना पड़े। हालांकि कम बारिश और गिरते भूजल स्तर के बीच केवल नए ट्यूबवेल खोदना ही पर्याप्त नहीं होगा। समय पर मरम्मत और जलापूर्ति की निगरानी के साथ पानी का संरक्षण भी जरूरी रहेगा। आने वाले महीनों में नगर निगम की तैयारियों और जलस्रोतों की स्थिति से तय होगा कि शहर के प्रभावित इलाकों में पानी की उपलब्धता कितनी बेहतर हो पाती है।

  • इंदौर स्वास्थ्य विभाग में अटैचमेंट पर चला प्रशासन का डंडा, मूल जगह लौटने के बाद ही मिलेगा अक्टूबर का वेतन

    इंदौर स्वास्थ्य विभाग में अटैचमेंट पर चला प्रशासन का डंडा, मूल जगह लौटने के बाद ही मिलेगा अक्टूबर का वेतन


    इंदौर । इंदौर के स्वास्थ्य विभाग में लंबे समय से मूल पदस्थापना के बजाय दूसरी जगह काम कर रहे डॉक्टरों नर्सों और अन्य कर्मचारियों के अटैचमेंट समाप्त कर दिए गए हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी यानी सीएमएचओ डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने 16 अक्टूबर को आदेश जारी कर 175 कर्मचारियों के अटैचमेंट तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए। अब सभी संबंधित कर्मचारियों को अपनी मूल पदस्थापना पर वापस जाकर जॉइनिंग देनी होगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि मूल पदस्थापना स्थल पर जॉइनिंग देने के बाद ही कर्मचारियों का अक्टूबर महीने का वेतन जारी किया जाएगा।
    जारी आदेश के अनुसार संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि अटैचमेंट पर कार्यरत कर्मचारियों को तत्काल कार्यमुक्त किया जाए और उन्हें उनके मूल कार्यस्थल पर भेजा जाए। इस प्रक्रिया को पूरा करने के बाद इसकी जानकारी सीएमएचओ कार्यालय को भी देनी होगी। विभाग ने इस मामले में किसी तरह की देरी नहीं करने के निर्देश दिए हैं। आदेश का उद्देश्य कर्मचारियों की तैनाती को निर्धारित व्यवस्था के अनुसार लागू करना और मूल पदस्थापना से जुड़े दायित्वों को सुनिश्चित करना बताया गया है।
    वेतन को लेकर भी विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। वेतन आहरण केंद्रों से कहा गया है कि संबंधित कर्मचारी जब अपनी मूल पदस्थापना पर उपस्थित होकर जॉइनिंग दे दें तभी अक्टूबर का वेतन आहरित किया जाए। इसका मतलब है कि केवल अटैचमेंट समाप्त होने का आदेश जारी होना पर्याप्त नहीं होगा बल्कि कर्मचारियों को अपने निर्धारित कार्यस्थल पर उपस्थिति भी दर्ज करानी होगी। इसके बाद ही वेतन संबंधी प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।
    सीएमएचओ डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि यदि निर्देश जारी होने के बाद कोई अधिकारी या कर्मचारी अटैचमेंट पर काम करते हुए पाया जाता है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। इसकी जिम्मेदारी संबंधित संस्था के प्रभारी की होगी। इस निर्देश के जरिए विभाग ने स्पष्ट संकेत दिया है कि आदेश के पालन में लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा।
    यह आदेश जिले के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों और अस्पतालों को भेजा गया है। इसमें सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक के अलावा देपालपुर मानपुर सांवेर और हातोद के खंड चिकित्सा अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए हैं। महू सहित विभिन्न अस्पतालों के प्रभारी चिकित्सा अधिकारियों शहरी स्वास्थ्य संस्थाओं और मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक के प्रभारियों को भी आदेश का पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।
    आदेश में भोपाल में हुई बैठकों और 16 अक्टूबर को मुख्यालय स्तर से मिले निर्देशों का हवाला दिया गया है। इसके आधार पर सभी संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करने के लिए कहा गया है। अब विभागीय स्तर पर यह सुनिश्चित किया जाना है कि 175 कर्मचारियों की मूल पदस्थापना पर वापसी की प्रक्रिया समय पर पूरी हो और इसकी जानकारी सीएमएचओ कार्यालय तक पहुंचे।
    स्वास्थ्य विभाग के इस फैसले से जिले के अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में कर्मचारियों की तैनाती की व्यवस्था में बदलाव होगा। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सभी संबंधित कर्मचारी कितनी जल्दी अपने मूल कार्यस्थल पर जॉइनिंग देते हैं और विभाग आदेश के पालन की निगरानी किस तरह करता है।

  • किसान को चूना लगाने की कोशिश! शिवपुरी में चने की तौल में गड़बड़ी का आरोप, जांच के आदेश और जुर्माने की तैयारी

    किसान को चूना लगाने की कोशिश! शिवपुरी में चने की तौल में गड़बड़ी का आरोप, जांच के आदेश और जुर्माने की तैयारी


    भोपाल। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में किसानों की उपज की तौल में गड़बड़ी का मामला सामने आया है। लुकवासा कृषि उपज मंडी के बाहर चना बेचने पहुंचे किसान कैलाश जाटव ने व्यापारी पर कम तौल करने का आरोप लगाया है। किसान के मुताबिक व्यापारी दीपक अहिरवार ने मंडी के भीतर मिलने वाले भाव से 50 रुपए प्रति क्विंटल अधिक कीमत देने का भरोसा दिलाया था। इसी लालच में किसान अपनी उपज लेकर मंडी के बाहर पहुंचा। आरोप है कि तौल के दौरान करीब 11 क्विंटल चने को केवल 8 क्विंटल बताया गया। किसान ने दोबारा तौल कराने की मांग की तो करीब तीन क्विंटल का अंतर सामने आया।
    किसान कैलाश जाटव के अनुसार अधिक भाव मिलने की उम्मीद में वह व्यापारी के पास चना बेचने पहुंचा था। शुरुआत में तौल के दौरान जितनी उपज बताई गई उस पर उसे संदेह हुआ। इसके बाद उसने दोबारा तौल कराने का फैसला किया। दोबारा तौल में कथित गड़बड़ी सामने आने पर मामला गंभीर हो गया। किसान का आरोप है कि यदि वह समय रहते तौल की जांच नहीं कराता तो उसे अपनी उपज का उचित भुगतान नहीं मिल पाता और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता।
    बताया गया है कि करीब 11 क्विंटल चने को 8 क्विंटल बताए जाने से लगभग तीन क्विंटल का अंतर सामने आया। किसान के अनुसार इस गड़बड़ी के कारण उसे करीब 20 हजार रुपए तक का नुकसान हो सकता था। हालांकि वास्तविक नुकसान का आकलन उपज की सही मात्रा और उस समय लागू बाजार भाव के आधार पर किया जा सकेगा। फिलहाल किसान की शिकायत के बाद मामले ने मंडी में तौल व्यवस्था और किसानों को मिलने वाले भुगतान पर सवाल खड़े किए हैं।
    घटना सामने आने के बाद कृषि उपज मंडी प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। मंडी सचिव नरेश जाटव ने बताया कि शिकायत की जांच की जा रही है। यदि तौल में अनियमितता की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि मामले की जांच के बाद ही जिम्मेदारी तय की जाएगी।
    वहीं कोलारस के एसडीएम शिवदयाल धाकड़ ने व्यापारी का कांटा जब्त करने और जुर्माना लगाने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही भविष्य में किसानों को इस तरह की परेशानी से बचाने के लिए मंडी क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले सभी कांटों की जांच कराने की बात कही गई है। तौल उपकरणों की जांच से यह सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है कि किसानों की उपज का वजन सही दर्ज हो और उन्हें भुगतान में नुकसान न उठाना पड़े।
    कृषि उपज मंडियों में किसान अपनी मेहनत से तैयार की गई फसल बेचने आते हैं। ऐसे में तौल और भुगतान में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। थोड़ी सी गड़बड़ी भी किसान की कमाई पर सीधा असर डाल सकती है। लुकवासा मंडी के बाहर सामने आया यह मामला किसानों के लिए सतर्क रहने और उपज की तौल स्वयं जांचने की जरूरत को रेखांकित करता है। प्रशासन की जांच और आगे की कार्रवाई से स्पष्ट होगा कि इस मामले में कितनी अनियमितता हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

  • सरकारी दस्तावेजों तक पहुंचने के लिए तोड़ा गया ताला? कोलारस के पुराने भवन में आग से मचा हड़कंप, साजिश के एंगल से जांच

    सरकारी दस्तावेजों तक पहुंचने के लिए तोड़ा गया ताला? कोलारस के पुराने भवन में आग से मचा हड़कंप, साजिश के एंगल से जांच


    शिवपुरी । मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के कोलारस नगर परिषद के पुराने भवन में शुक्रवार रात आग लगने से सरकारी रिकॉर्ड को नुकसान पहुंचा है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और नगर परिषद के कर्मचारी मौके पर पहुंचे। आग इतनी गंभीर थी कि उस पर काबू पाने में समय लगा। जानकारी के मुताबिक रात करीब ढाई बजे आग बुझाई जा सकी। घटना के बाद पुराने भवन में रखे महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेजों को हुए नुकसान का मामला सामने आया है। वहीं भवन के दरवाजे का ताला टूटा मिलने से आग लगने की वजह को लेकर संदेह गहरा गया है।
    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार पुराने भवन में आग लगने की घटना सामान्य हादसा भी हो सकती है लेकिन ताला टूटा मिलने के कारण जानबूझकर आग लगाए जाने की आशंका भी जताई जा रही है। फिलहाल इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि आग किसी ने लगाई या इसके पीछे कोई दूसरा कारण था। कोलारस थाना पुलिस दोनों पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। पुलिस घटनास्थल की परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आग लगने की वास्तविक वजह का पता लगाने का प्रयास कर रही है।
    जानकारी के मुताबिक कोलारस नगर परिषद का कार्यालय वर्ष 2014-15 में जगतपुर चौराहे के पास नए भवन में स्थानांतरित कर दिया गया था। इसके बाद से नगर परिषद का नियमित कामकाज नए कार्यालय से संचालित हो रहा है। इससे पहले नगर परिषद का काम पुराने भवन से होता था। नगर पंचायत के समय से लेकर वर्ष 2013 तक के रिकॉर्ड पुराने भवन के परिषद हॉल में रखे हुए थे। आग लगने से इसी स्थान पर रखे सरकारी दस्तावेज प्रभावित हुए हैं। हालांकि कितने रिकॉर्ड पूरी तरह नष्ट हुए हैं और कितने दस्तावेजों को आंशिक नुकसान पहुंचा है इसकी विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।
    पुराने सरकारी रिकॉर्ड प्रशासनिक कामकाज के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इनमें पुराने निर्णयों और कार्यालयीन कार्यवाही से जुड़े दस्तावेज शामिल होने की संभावना रहती है। ऐसे में आग की घटना के बाद रिकॉर्ड के नुकसान का आकलन करना भी जरूरी होगा। संबंधित विभाग को यह पता लगाना होगा कि कौन-कौन से दस्तावेज प्रभावित हुए हैं और क्या उनकी प्रतियां किसी अन्य कार्यालय या डिजिटल रिकॉर्ड में उपलब्ध हैं।
    भवन का ताला टूटा मिलने के बाद इस घटना में किसी की भूमिका होने की आशंका को भी नजरअंदाज नहीं किया जा रहा है। हालांकि केवल ताला टूटा मिलना अपने आप में साजिश का प्रमाण नहीं है। जांच के दौरान पुलिस को यह पता लगाना होगा कि भवन में प्रवेश कैसे हुआ और आग किन परिस्थितियों में लगी। घटनास्थल से मिलने वाले साक्ष्य और अन्य उपलब्ध जानकारी जांच की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगे।
    कोलारस थाना पुलिस फिलहाल आग लगने की घटना को हादसे और संभावित साजिश दोनों एंगल से देख रही है। आग लगने का कारण स्पष्ट होने के बाद ही यह पता चल सकेगा कि घटना दुर्घटनावश हुई या इसके पीछे कोई आपराधिक गतिविधि थी। फिलहाल सरकारी रिकॉर्ड को हुए नुकसान और पुराने भवन की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

  • सीएम के दौरे से प्रशासन की फुर्ती, बदहाल सड़क कुछ घंटों में चकाचक, नरसिंहपुर में हेलिकॉप्टर की लैंडिंग से उड़ा तंबू

    सीएम के दौरे से प्रशासन की फुर्ती, बदहाल सड़क कुछ घंटों में चकाचक, नरसिंहपुर में हेलिकॉप्टर की लैंडिंग से उड़ा तंबू


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के हालिया दौरों से जुड़े कुछ दिलचस्प नजारे चर्चा में हैं। कहीं मुख्यमंत्री के हेलिकॉप्टर की लैंडिंग के दौरान तेज हवा से तंबू उड़ गया तो कहीं उनके दौरे से पहले प्रशासन ने कुछ ही घंटों में सड़क की मरम्मत कर दी। दूसरी ओर अशोकनगर में सिंधिया की बैठक के दौरान खाली कुर्सियां दिखाई दीं। इन घटनाओं ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा को जन्म दिया है।
    पहला मामला नरसिंहपुर का है जहां मुख्यमंत्री मोहन यादव के हेलिकॉप्टर की लैंडिंग के दौरान तेज हवा के झोंकों से वहां लगाया गया तंबू उड़ गया। मुख्यमंत्री के स्वागत के लिए मंत्री विधायक सांसद और अधिकारी हेलिपैड के पास मौजूद थे। हेलिकॉप्टर के पंखों से उठी तेज हवा के कारण धूल उड़ने लगी और तंबू भी हवा में उखड़ गया। अचानक हुए इस घटनाक्रम से मौके पर मौजूद लोगों में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी के घायल होने या नुकसान की खबर सामने नहीं आई। घटना का वीडियो सामने आने के बाद लोग इसे लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
    दूसरा मामला मुरैना का है जहां मुख्यमंत्री को एक स्कूल का निरीक्षण करना था। स्कूल तक पहुंचने वाली सड़क की हालत खराब बताई गई थी। मुख्यमंत्री के दौरे की जानकारी के बाद प्रशासन ने तेजी दिखाते हुए कुछ ही घंटों में सड़क को दुरुस्त कर दिया। आम दिनों में बदहाल सड़कों से परेशान रहने वाले लोगों के लिए यह बदलाव चर्चा का विषय बन गया। इस घटनाक्रम के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि जब किसी वीआईपी दौरे के दौरान प्रशासन इतनी तेजी से काम कर सकता है तो आम दिनों में भी सड़कों की मरम्मत और बुनियादी सुविधाओं पर इसी तरह ध्यान क्यों नहीं दिया जाता। हालांकि सड़क निर्माण और मरम्मत के काम की वास्तविक स्थिति तथा उसकी गुणवत्ता का आकलन संबंधित विभाग की जानकारी के आधार पर ही किया जा सकता है।
    तीसरा मामला केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के अशोकनगर दौरे से जुड़ा है। यहां वे जनप्रतिनिधियों की बैठक में शामिल होने पहुंचे थे। कार्यक्रम में बैठने के लिए पर्याप्त कुर्सियां लगाई गई थीं लेकिन कई कुर्सियां खाली नजर आईं। सिंधिया के मंच पर पहुंचने के दौरान खाली कुर्सियों को हटाने की कवायद भी दिखाई दी। इस दृश्य के बाद कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों की कम मौजूदगी को लेकर चर्चा होने लगी। हालांकि बैठक में उपस्थिति कम रहने की वजह स्पष्ट नहीं है। यह आयोजन की व्यवस्था से जुड़ा मामला था या जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति के पीछे कोई अन्य कारण था इसकी पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।
    इसी दौरे के दौरान सिंधिया अशोकनगर में आयोजित जनजातीय सम्मेलन में भी शामिल हुए। यहां आदिवासी परंपरा के अनुसार उनका स्वागत किया गया और उन्हें विशेष मुकुट पहनाया गया। सिंधिया पूरे कार्यक्रम के दौरान मुकुट पहने नजर आए और उन्होंने इसी रूप में भाषण भी दिया। उनके इस अंदाज ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का ध्यान खींचा। पारंपरिक स्वागत और पहनावे की तस्वीरें भी चर्चा में रहीं।
    इन घटनाओं के बीच प्रशासनिक व्यवस्था और राजनीतिक कार्यक्रमों के आयोजन को लेकर अलग-अलग सवाल उठ रहे हैं। मुख्यमंत्री के दौरे से पहले सड़क का तेजी से दुरुस्त होना सरकारी मशीनरी की तत्परता को दिखाता है लेकिन आम नागरिकों के लिए भी ऐसी ही नियमित व्यवस्था जरूरी है। वहीं राजनीतिक कार्यक्रमों में उपस्थिति और आयोजन की तैयारियां भी चर्चा का हिस्सा बनी हुई हैं। फिलहाल इन घटनाओं की खासियत यही है कि एक ही दौर में प्रशासनिक फुर्ती से लेकर राजनीतिक आयोजनों के अलग-अलग दृश्य सामने आए हैं।

  • भोपाल के कॉलेज में गरबा आयोजन पर विवाद, बाहरी युवकों की एंट्री और गानों को लेकर भिड़े लोग, पुलिस से कार्रवाई की मांग

    भोपाल के कॉलेज में गरबा आयोजन पर विवाद, बाहरी युवकों की एंट्री और गानों को लेकर भिड़े लोग, पुलिस से कार्रवाई की मांग


    भोपाल। भोपाल के सेम कॉलेज में गरबा आयोजन के दौरान विवाद का मामला सामने आया है। घटना से जुड़े वीडियो में बजरंग दल के एक कार्यकर्ता को युवक को थप्पड़ मारते हुए देखा जा सकता है। विवाद की वजह फिल्मी गानों पर गरबा करने और कॉलेज में बाहरी युवकों को प्रवेश देने को लेकर जताई गई आपत्ति बताई जा रही है। मामले में बजरंग दल की ओर से बिलखिरिया थाने में शिकायत आवेदन देकर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। हालांकि घटना के सभी पहलुओं और लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
    विश्व हिंदू परिषद के मध्य भारत प्रांत मंत्री जितेंद्र चौहान ने आरोप लगाया कि नवरात्रि के दौरान होने वाले गरबा आयोजन धार्मिक आस्था और परंपराओं से जुड़े होते हैं। ऐसे कार्यक्रमों में फिल्मी और अश्लील गाने बजाने के बजाय पारंपरिक गरबा और धार्मिक गीतों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कॉलेज प्रबंधन पर आयोजन के दौरान प्रवेश व्यवस्था में लापरवाही बरतने का आरोप भी लगाया। उनका कहना है कि कार्यक्रम में ऐसे युवक भी मौजूद थे जो कॉलेज के विद्यार्थी नहीं थे।
    जितेंद्र चौहान के मुताबिक स्थानीय छात्रों से गरबा आयोजन के दौरान फिल्मी गाने बजाए जाने की जानकारी मिलने के बाद बजरंग दल के कुछ कार्यकर्ता कॉलेज पहुंचे थे। इसके बाद संगठन के अन्य लोग भी मौके पर पहुंचे। चौहान ने स्पष्ट किया कि वीडियो में जिस युवक को थप्पड़ मारे जाते दिखाई दे रहे हैं वह बजरंग दल का कार्यकर्ता नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध के दौरान कार्यकर्ताओं के साथ भी बदसलूकी और मारपीट की गई। ऐसे में वीडियो में दिखाई देने वाली घटना और संगठन के कार्यकर्ताओं के साथ कथित मारपीट के आरोपों की अलग-अलग परिस्थितियों में जांच किए जाने की जरूरत है।
    बिलखिरिया थाना प्रभारी को दिए गए शिकायत आवेदन में पुष्पराज यादव ने खुद को भोपाल जिला बजरंग दल का प्रमुख बताया है। आवेदन के मुताबिक 16 अक्टूबर की रात करीब साढ़े आठ बजे उन्हें सेम कॉलेज में गरबा आयोजन के दौरान फिल्मी गानों पर डांस होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद वह अपने साथियों शिवम कुशवाह और यश द्विवेदी के साथ कॉलेज पहुंचे। शिकायत में शिवम कुशवाह को मां कंकाली प्रखंड मंत्री और यश द्विवेदी को बजरंग दल का जिला संयोजक बताया गया है।
    शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि कॉलेज परिसर में मुस्लिम समुदाय के दो से अधिक युवक मौजूद थे। आवेदन के अनुसार जब कार्यकर्ताओं ने फिल्मी गाने बंद करने और आयोजन के स्वरूप पर आपत्ति जताई तो वहां मौजूद युवकों ने उनके साथ गाली-गलौज और मारपीट की। शिकायत में कॉलेज फैकल्टी के नीरज गुप्ता पर बाउंसर बुलाकर कार्यकर्ताओं को बाहर निकलवाने की धमकी देने और संबंधित युवकों का पक्ष लेने का आरोप भी लगाया गया है। आवेदन में समीर आलम समेत अन्य लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
    जितेंद्र चौहान ने कहा कि स्कूलों और कॉलेजों में होने वाले गरबा आयोजनों में धार्मिक परंपराओं का ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने आयोजकों से पारंपरिक गीतों के इस्तेमाल और प्रवेश व्यवस्था को लेकर सतर्क रहने की अपील की। साथ ही कहा कि संगठन ऐसे मामलों में पुलिस और प्रशासन से कार्रवाई की मांग करेगा और जरूरत पड़ने पर विरोध भी करेगा। फिलहाल इस पूरे मामले में युवक को थप्पड़ मारने की घटना और दोनों पक्षों की ओर से लगाए गए आरोप जांच का विषय हैं।

  • भोपाल के न्यू मार्केट में सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुली, 50 फीट के दायरे में 3 छोले-भटूरे की दुकानें, आग बुझाने के इंतजाम अधूरे

    भोपाल के न्यू मार्केट में सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुली, 50 फीट के दायरे में 3 छोले-भटूरे की दुकानें, आग बुझाने के इंतजाम अधूरे


    भोपाल । भोपाल के न्यू मार्केट में 8 अक्टूबर को लगी भीषण आग के बाद भी दुकानों में अग्नि सुरक्षा को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आ रही है। करीब 900 दुकानों वाले इस व्यस्त बाजार में कपड़े और ज्वेलरी की दुकानों के बीच छोले-भटूरे की दुकानों में भट्टियां सुलग रही हैं। इन दुकानों में ग्राहकों के लिए नाश्ता तैयार किया जा रहा है लेकिन सुरक्षा इंतजामों की स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है। जांच के दौरान कुछ दुकानों में फायर और इलेक्ट्रिक एनओसी नहीं मिली। वहीं अग्निशामक यंत्र होने के बावजूद कर्मचारियों को उनका इस्तेमाल करने की जानकारी नहीं होने की बात भी सामने आई है।
    रिपोर्ट के मुताबिक जिस बालाजी छोले-भटूरे की दुकान में 8 अक्टूबर को भीषण आग लगी थी उसके आसपास भी इसी तरह की दुकानें संचालित हो रही हैं। एक दुकान से करीब 50 फीट की दूरी पर तीन अन्य छोले-भटूरे की दुकानें होने की जानकारी सामने आई है। यहां छोटे किचन में भटूरे तले जा रहे हैं। दुकानों के आसपास कपड़े और अन्य सामान की मौजूदगी के कारण आग लगने की स्थिति में नुकसान बढ़ने की आशंका है। बाजार में बड़ी संख्या में ग्राहकों की आवाजाही के कारण सुरक्षा व्यवस्था और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
    जांच में कलकत्ता छोले-भटूरे की दुकान पर कई कमियां सामने आईं। यहां जिस जगह पर छोले तैयार किए जा रहे थे उसके ऊपर धूप से बचने के लिए रिट्रैक्टेबल अवनिंग लगी हुई थी। दुकान में आग बुझाने का यंत्र मौजूद था लेकिन उसे चलाने का प्रशिक्षण कर्मचारियों को नहीं होने की बात बताई गई। आग लगने की स्थिति में केवल अग्निशामक यंत्र का मौजूद होना पर्याप्त नहीं है बल्कि कर्मचारियों को उसका सही इस्तेमाल करना भी आना चाहिए।
    देहली छोले-भटूरे की दुकान में किचन बेहद छोटा बताया गया है। यहां दो कर्मचारी मुश्किल से बैठकर भटूरे तल पाते हैं। ऐसी जगह पर आग लगने की स्थिति में बाहर निकलने में परेशानी हो सकती है। इसके अलावा बिजली के तार भी खुले मिले। पंजाब छोले-भटूरे की दुकान में फायर और इलेक्ट्रिक एनओसी नहीं होने की जानकारी सामने आई। वहां भी बिजली के खुले तार और कोने में रखे अग्निशामक यंत्र पाए गए।
    फायर ऑफिसर सौरभ पटेल के मुताबिक दुकानों में अग्निशामक यंत्र और व्यावसायिक उपयोग के लिए उपयुक्त गैस सिलेंडर होना चाहिए। उन्होंने जांच में भट्टियां मिलने और बिजली सुरक्षा से जुड़े प्रमाणपत्र नहीं होने की बात कही। रिपोर्ट के अनुसार कुछ दुकानों में कर्मचारियों के बैठने और काम करने की व्यवस्था भी सुरक्षित नहीं पाई गई। इन कमियों को देखते हुए संबंधित दुकानों को दूसरी जगह स्थानांतरित करने की योजना पर जोर दिया जा रहा है।
    न्यू मार्केट में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल इसलिए भी गंभीर हैं क्योंकि 8 अक्टूबर को बालाजी छोले-भटूरे की दुकान में लगी आग आसपास की दुकानों और रेहड़ियों तक फैल गई थी। आग की चपेट में पांच अन्य बड़ी दुकानों और 12 से अधिक रेहड़ियों के आने की खबर थी। इस घटना में करोड़ों रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया गया। दुकानदारों और कर्मचारियों को जान बचाने के लिए पहली मंजिल से नीचे कूदना पड़ा था और कुछ लोगों को चोटें भी आई थीं।
    पुलिस ने इस मामले में दुकान संचालक दीप उर्फ दीपू अग्रवाल के खिलाफ केस दर्ज किया है। शुरुआती जांच के मुताबिक भट्टी के पास रखे कपड़े में आग लगने के बाद लपटें फैल गई थीं। नगर निगम आग से बचाव के इंतजामों की जांच कर रहा है। इस कार्रवाई के बीच सवाल उठ रहा है कि बाजार में नियमित निरीक्षण और सुरक्षा मानकों का पालन पहले क्यों सुनिश्चित नहीं किया गया।
    भोपाल के दूसरे बाजारों में भी अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल सामने आ चुके हैं। चौक बाजार और इब्राहिमपुरा की संकरी गलियों में आग बुझाने के लिए करीब 22 लाख रुपये का अंडरग्राउंड फायर हाइड्रेंट सिस्टम लगाया गया था। लेकिन जुलाई 2026 में आग लगने के दौरान इसके काम नहीं करने की बात सामने आई। सिस्टम की प्रेशर टेस्टिंग और रखरखाव पर भी सवाल उठे। बैरागढ़ के एक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में पहले हुए बड़े अग्निकांड के बाद लगाए गए उपकरणों की देखरेख पर भी चिंता जताई गई है।
    न्यू मार्केट की मौजूदा स्थिति एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि क्या हादसों के बाद ही सुरक्षा जांच तेज होती है। व्यस्त बाजारों में नियमित निरीक्षण खुले बिजली के तारों को दुरुस्त करना कर्मचारियों को आग बुझाने का प्रशिक्षण देना और अग्निशामक उपकरणों को चालू हालत में रखना बेहद जरूरी है। प्रशासन की ओर से दुकानों की शिफ्टिंग और जांच की कार्रवाई कितनी प्रभावी होती है यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।