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  • रावण दहन किस शास्त्र में लिखा है, उज्जैन में युवा ब्राह्मण समाज का सवाल, चार समितियों को कानूनी नोटिस

    रावण दहन किस शास्त्र में लिखा है, उज्जैन में युवा ब्राह्मण समाज का सवाल, चार समितियों को कानूनी नोटिस

     
    उज्जैन  मध्य प्रदेश के उज्जैन में दशहरे पर होने वाले रावण दहन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज ने रावण दहन आयोजित करने वाली चार समितियों को वकील के माध्यम से कानूनी नोटिस भेजकर सात दिन के भीतर जवाब मांगा है। समाज ने आयोजकों से सवाल किया है कि आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को रावण वध होने का उल्लेख किस धर्मशास्त्र या पुराण में मिलता है। नोटिस में कहा गया है कि यदि निर्धारित समय में संतोषजनक प्रमाण नहीं दिया गया तो वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है। इस मामले के सामने आने के बाद शहर में दशहरा उत्सव से पहले धार्मिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है।उज्जैन  ।

    जानकारी के मुताबिक 20 अक्टूबर को दशहरा पर्व के अवसर पर उज्जैन में विभिन्न स्थानों पर रावण दहन के कार्यक्रम आयोजित किए जाने हैं। इससे पहले अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज ने इस पर आपत्ति जताते हुए संबंधित आयोजक समितियों को नोटिस जारी कराया है। महाकाल मंदिर के पुजारी और संगठन के संस्थापक अध्यक्ष महेश पुजारी ने अधिवक्ता अश्विन चौधरी के माध्यम से यह नोटिस भिजवाया है। जिन चार समितियों को नोटिस भेजा गया है उनमें लाला ओम अमरनाथ खत्री दशहरा उत्सव समिति कार्तिक मेला दशहरा उत्सव समिति सिद्धवट दशहरा समिति और शास्त्री नगर दशहरा उत्सव समिति शामिल हैं।

    नोटिस में आयोजकों से कहा गया है कि वे स्पष्ट करें कि आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को रावण वध किए जाने का उल्लेख किस धार्मिक ग्रंथ में मौजूद है। समाज ने संबंधित समितियों से इस तिथि पर रावण दहन नहीं करने का अनुरोध भी किया है। नोटिस के अनुसार सात दिन के भीतर शास्त्रीय आधार स्पष्ट नहीं किया गया तो आगे कानूनी कदम उठाने की चेतावनी दी गई है। इसमें संभावित कार्रवाई से जुड़े हर्जे और खर्च की जिम्मेदारी भी आयोजक समितियों पर डालने की बात कही गई है। हालांकि इस मामले में आयोजक समितियों का पक्ष सामने आने के बाद ही उनकी प्रतिक्रिया और आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

    अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज के संस्थापक अध्यक्ष महेश पुजारी का कहना है कि रावण दहन के नाम पर ब्राह्मण समाज का अपमान नहीं होना चाहिए। उनका आरोप है कि देश के कई हिस्सों में रावण दहन की परंपरा के दौरान ब्राह्मण समुदाय की भावनाएं आहत होती हैं। उन्होंने आयोजक समितियों से सवाल किया कि यदि रावण दहन धार्मिक परंपरा का हिस्सा है तो उसके समर्थन में शास्त्रीय प्रमाण सार्वजनिक किए जाने चाहिए। महेश पुजारी का कहना है कि रावण के चरित्र और उससे जुड़ी धार्मिक मान्यताओं पर चर्चा करते समय किसी समुदाय का अपमान नहीं किया जाना चाहिए।

    महेश पुजारी ने यह भी कहा कि अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज देश की विभिन्न संस्थाओं से रावण दहन बंद करने का अनुरोध कर रहा है। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए ब्राह्मणों की शिखा और यज्ञोपवीत के अपमान की घटनाओं पर भी अपनी बात रखी। संगठन की मांग है कि धार्मिक आयोजनों में किसी समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली गतिविधियों से बचा जाए।

    फिलहाल उज्जैन में दशहरे से पहले रावण दहन का मुद्दा चर्चा का विषय बन गया है। एक ओर आयोजन समितियों की तैयारियां जारी हैं तो दूसरी ओर युवा ब्राह्मण समाज ने शास्त्रीय प्रमाण और जवाबदेही की मांग उठाई है। अब सात दिन की समयसीमा में समितियां क्या जवाब देती हैं और इस विवाद पर प्रशासन या आयोजकों की ओर से क्या रुख सामने आता है इस पर सबकी नजर रहेगी।

  • कांग्रेस का झंडा नहीं, सनातन स्वाभिमान का संदेश लेकर निकलेंगे दिग्विजय सिंह, उज्जैन से अयोध्या तक पत्नी के साथ 950 किमी की पदयात्रा

    कांग्रेस का झंडा नहीं, सनातन स्वाभिमान का संदेश लेकर निकलेंगे दिग्विजय सिंह, उज्जैन से अयोध्या तक पत्नी के साथ 950 किमी की पदयात्रा


    उज्जैन । महाकाल से रामलला तक दिग्विजय सिंह की पदयात्रा, पांच पवित्र नदियों का जल लेकर जाएंगे अयोध्या
    मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह 20 अक्टूबर को विजयादशमी के अवसर पर उज्जैन के महाकाल मंदिर से सत्य-सनातन स्वाभिमान यात्रा की शुरुआत करेंगे। इस यात्रा का मुख्य आकर्षण पांच पवित्र नदियों के जल से भरे कलश होंगे जिन्हें विशेष रूप से तैयार किए जा रहे रथ में रखकर अयोध्या ले जाया जाएगा। करीब 950 किलोमीटर लंबी इस पदयात्रा का समापन अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में करने की योजना है। यात्रा में दिग्विजय सिंह की पत्नी अमृता राय भी उनके साथ पैदल चलेंगी। आयोजकों के मुताबिक यह यात्रा लगभग 70 दिनों में पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।
    यात्रा को लेकर उज्जैन में तैयारियां तेज हो गई हैं। मंगलवार को शिप्रा गार्डन में आयोजित बैठक में आयोजन की रूपरेखा और व्यवस्थाओं पर चर्चा की गई। यात्रा के शुभारंभ के दिन 20 अक्टूबर को सुबह 8 बजे नृसिंह घाट के पास बालाजी गार्डन में पार्थिव शिवलिंग निर्माण और पूजन-अर्चन का कार्यक्रम प्रस्तावित है। इसमें दिग्विजय सिंह के साथ हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना जताई गई है। धार्मिक अनुष्ठान के बाद कन्या भोज और विशाल भंडारे का आयोजन होगा। इसके बाद पदयात्रा अपने गंतव्य अयोध्या की ओर रवाना होगी।
    आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि यात्रा में कांग्रेस या किसी अन्य राजनीतिक दल के झंडे और बैनर का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। इसका उद्देश्य सत्य धर्म न्याय सामाजिक सद्भाव और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति लोगों को जागरूक करना बताया गया है। इसके साथ ही चंदा चोरी और वोट चोरी के आरोपों को लेकर जवाबदेही तय करने की मांग भी यात्रा के दौरान उठाई जाएगी। आयोजक इसे किसी राजनीतिक दल के कार्यक्रम के बजाय सामाजिक और धार्मिक जनजागरण की पहल के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं।
    यात्रा के दौरान दिग्विजय सिंह और अमृता राय प्रतिदिन करीब 15 किलोमीटर पैदल चलेंगे। आयोजकों की योजना के अनुसार यात्रा में लगभग 2000 से 3000 लोगों के शामिल होने की व्यवस्था की जा रही है। अलग-अलग पड़ावों पर यात्रा से जुड़ने के लिए लोगों ने पंजीकरण भी कराया है। दिग्विजय सिंह यात्रा की तैयारी के लिए नियमित रूप से पैदल चलने का अभ्यास कर रहे हैं ताकि लंबे सफर के दौरान निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ा जा सके।
    उज्जैन जिले में यात्रा का प्रवास पांच दिनों का प्रस्तावित है। पहला पड़ाव कनिपुरा में होगा। इसके बाद यात्रा सिंदूरिया तराना और कनासिया से होते हुए शाजापुर जिले में प्रवेश करेगी। रास्ते में विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के शामिल होने की व्यवस्था की जा रही है। इस दौरान धार्मिक आयोजनों और जनसंपर्क के जरिए यात्रा के संदेश को लोगों तक पहुंचाने की तैयारी है।
    यात्रा के लिए विशेष रथ तैयार किया जा रहा है जिसमें पांच पवित्र नदियों के जल से भरे कलश स्थापित किए जाएंगे। भरत पोरवाल के निर्देशन में महावीर जैन और सतीश शर्मा रथ निर्माण का काम कर रहे हैं। इसी क्रम में शिप्रा नदी का जल कल्याणपुरा घाट से एकत्र किया गया। सुरेंद्र सुहाने अभिषेक गौर योगेंद्र सिंह परिहार भरत पोरवाल और नासिर पटेल ने इस प्रक्रिया में भाग लिया। शिप्रा नदी से लाया गया जल फिलहाल राजेंद्र वशिष्ठ के निवास स्थित मंदिर में सुरक्षित रखा गया है। यात्रा के शुभारंभ पर इसे विशेष रथ में स्थापित किया जाएगा। अब सभी की निगाहें 20 अक्टूबर को होने वाले शुभारंभ और उज्जैन से अयोध्या तक निकलने वाली इस लंबी पदयात्रा पर टिकी हैं।
  • सिंधिया परिवार के महासमझौते पर संकट, धोखाधड़ी के आरोपों के बीच आज तय होगी संपत्ति विवाद की अगली राह

    सिंधिया परिवार के महासमझौते पर संकट, धोखाधड़ी के आरोपों के बीच आज तय होगी संपत्ति विवाद की अगली राह


    ग्वालियर । ग्वालियर के सिंधिया राजपरिवार की करीब 41 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति के बंटवारे से जुड़े बहुचर्चित विवाद में बुधवार 14 अक्टूबर को अहम कानूनी मोड़ आ सकता है। लंबे समय से चल रहे इस मामले में परिवार के सदस्यों के बीच आपसी सहमति से तैयार किया गया समझौता प्रस्ताव एक बार फिर कानूनी अड़चनों में उलझ गया है। अतिरिक्त सत्र न्यायालय में बुधवार को अंतरिम आवेदन और आपत्ति आवेदन पर बहस होनी है। इस सुनवाई के बाद अदालत तय कर सकती है कि मामले को आगे किस प्रक्रिया के तहत बढ़ाया जाएगा। सबसे बड़ा सवाल यह है कि सुनवाई अंतरिम आवेदनों तक सीमित रहेगी या फिर प्रतिमा देवी की आपत्ति स्वीकार कर साक्ष्यों के आधार पर मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी।

    इस संपत्ति विवाद में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बुआ वसुंधरा राजे यशोधरा राजे तथा उषा राजे के बीच पैतृक संपत्ति में हिस्सेदारी को लेकर कानूनी प्रक्रिया चल रही है। लंबे विवाद के बाद दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से एक राजीनामा तैयार कर अदालत में पेश किया था। माना जा रहा था कि इस समझौते से वर्षों पुराने विवाद को खत्म करने का रास्ता साफ हो जाएगा। हालांकि दिवंगत पद्मावती राजे की बेटी प्रतिमा देवी राना की आपत्ति ने पूरे मामले को फिर से जटिल बना दिया है।

    प्रतिमा देवी ने अदालत में आरोप लगाया है कि उनसे धोखाधड़ी करके समझौता प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कराए गए। उनकी आपत्ति में ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित वसुंधरा राजे यशोधरा राजे और उषा राजे पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। प्रतिमा देवी का कहना है कि समझौते की प्रक्रिया में उनके साथ उचित व्यवहार नहीं हुआ। उन्होंने अदालत से मामले में दोबारा पक्षकार के रूप में शामिल होने और संपत्ति में अपने अधिकारों पर विचार करने की मांग की है।
    दूसरी ओर वसुंधरा राजे यशोधरा राजे और उषा राजे की ओर से अदालत में इन आरोपों का जवाब दिया गया है।

    उनके पक्ष का कहना है कि समझौते पर हस्ताक्षर आपसी सहमति से किए गए थे। हस्ताक्षर के बाद परिवार के सदस्य वहां रुके थे और साथ में पारिवारिक भोजन भी हुआ था। इसके बाद तस्वीरें भी ली गई थीं। ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर से भी कहा गया है कि समझौते पर हस्ताक्षर सहमति से हुए थे और प्रक्रिया में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं की गई।

    मामले की जटिलता की एक बड़ी वजह यह भी है कि मूल मुकदमे में पद्मावती राजे की बेटियों कनिका देवी सिंह और प्रतिमा देवी राना को पक्षकार बनाया गया था। हालांकि पूर्व में अदालत की कार्यवाही के दौरान उपस्थित नहीं होने के कारण उन्हें एकपक्षीय घोषित कर दिया गया था। अब प्रतिमा देवी ने दोबारा प्रक्रिया में शामिल होने की मांग करते हुए मौजूदा समझौते पर सवाल उठाए हैं। चूंकि पद्मावती राजे भी संपत्ति में हिस्सेदार थीं इसलिए उनकी बेटियों के अधिकारों का सवाल समझौते की कानूनी वैधता के लिहाज से महत्वपूर्ण हो गया है।

    सिंधिया राजघराने की देशभर में फैली अचल संपत्तियों के बंटवारे से जुड़ा यह विवाद अब निर्णायक प्रक्रिया की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। इस मामले में 78 साल पुराना विलय पत्र भी महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जा रहा है। बुधवार की सुनवाई में अदालत का रुख तय करेगा कि समझौते को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया जारी रहेगी या आपत्तियों और साक्ष्यों पर विस्तृत सुनवाई की जरूरत होगी। हालांकि अंतिम फैसला अदालत की कार्यवाही और उपलब्ध दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही सामने आएगा।

  • शिवपुरी में दर्दनाक हादसा, खेत के तालाब में डूबा 14 वर्षीय देव, लापता होने की सूचना पर तलाश में जुटी पुलिस को मिला शव

    शिवपुरी में दर्दनाक हादसा, खेत के तालाब में डूबा 14 वर्षीय देव, लापता होने की सूचना पर तलाश में जुटी पुलिस को मिला शव


    शिवपुरी । मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में एक दर्दनाक हादसे में 14 वर्षीय बालक की तालाब में डूबने से मौत हो गई। घटना सिरसौद थाना क्षेत्र के सिरसौद गांव की है जहां बालक गांव के एक खेत में बने तालाब में नहाने के लिए गया था। नहाते समय वह तालाब के गहरे हिस्से में चला गया और पानी में डूब गया। काफी देर तक बालक के घर नहीं लौटने पर परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। जब उसका कोई पता नहीं चला तो परिवार के लोग सिरसौद थाने पहुंचे और पुलिस को उसके लापता होने की सूचना दी। इसके बाद पुलिस ने तलाश शुरू की और तालाब के पास से बालक का शव बरामद हुआ।
    जानकारी के अनुसार मृतक की पहचान देव नामदेव के रूप में हुई है। वह सिरसौद गांव निवासी प्रकाश नामदेव का बेटा था। मंगलवार को देव गांव के ही एक खेत में बने तालाब में नहाने पहुंचा था। बताया गया है कि नहाते समय वह धीरे-धीरे तालाब के गहरे हिस्से में चला गया। पानी की गहराई का अंदाजा नहीं लग पाने के कारण वह डूब गया। इस दौरान आसपास मौजूद लोगों को घटना की जानकारी नहीं मिल सकी और बालक की जान चली गई।
    दूसरी ओर जब देव काफी देर तक घर नहीं पहुंचा तो परिजन चिंतित हो गए। उन्होंने पहले आसपास के इलाकों और परिचितों के यहां उसकी तलाश की। लेकिन बालक का कहीं पता नहीं चलने पर परिवार के लोग सिरसौद पुलिस थाने पहुंचे। वहां उन्होंने देव के लापता होने की जानकारी पुलिस को दी। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए बालक की तलाश शुरू कर दी। पुलिसकर्मियों ने गांव में पूछताछ की और संभावित स्थानों पर खोजबीन की।
    तलाश के दौरान पुलिस खेत में बने तालाब के पास पहुंची। वहां किनारे पर देव के कपड़े मिले। कपड़े मिलने के बाद पुलिस को तालाब में उसके डूबने की आशंका हुई। इसके बाद पानी में तलाश की गई तो बालक का शव तालाब में उतराता हुआ मिला। पुलिस ने शव को बाहर निकलवाया और आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू की। घटना की जानकारी मिलने के बाद परिजन भी मौके पर पहुंचे। बालक का शव देखकर परिवार में चीख-पुकार मच गई और गांव में शोक का माहौल बन गया।
    पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। घटना के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। कम उम्र में देव की मौत से परिजन सदमे में हैं। गांव के लोग भी इस हादसे से दुखी हैं।
    तालाब और अन्य जलस्रोतों में नहाने के दौरान सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। खासकर खेतों में बने तालाबों में पानी की वास्तविक गहराई का अनुमान लगाना मुश्किल हो सकता है। ऐसे स्थानों पर नहाने से डूबने का खतरा बढ़ जाता है। शिवपुरी की यह घटना एक परिवार के लिए अपूरणीय क्षति बन गई है और ग्रामीण इलाकों में जलस्रोतों के आसपास सुरक्षा को लेकर सतर्कता की जरूरत भी सामने लाती है।
  • वित्तीय संकट का हवाला देकर डिप्टी सीएम की नई कारों पर रोक, दूसरी ओर सीएम और मंत्रियों के लिए खरीदी गईं गाड़ियां

    वित्तीय संकट का हवाला देकर डिप्टी सीएम की नई कारों पर रोक, दूसरी ओर सीएम और मंत्रियों के लिए खरीदी गईं गाड़ियां

    भोपाल । मध्य प्रदेश की मोहन सरकार में सरकारी वाहनों की खरीद को लेकर नया मामला सामने आया है। सरकार ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के लिए नई गाड़ियां खरीदी हैं, लेकिन दोनों उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ल को नई कार देने के प्रस्ताव वित्त विभाग ने लौटा दिए हैं। विभाग ने वित्तीय संकट का हवाला देते हुए दोनों डिप्टी सीएम को मौजूदा सरकारी वाहनों की मरम्मत कराकर इस्तेमाल करने की सलाह दी है। इस फैसले के बाद सरकारी खर्चों पर नियंत्रण के निर्देशों और नई गाड़ियों की खरीद को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
    जानकारी के अनुसार दोनों उपमुख्यमंत्रियों के सरकारी वाहन निर्धारित किलोमीटर की सीमा पार कर चुके हैं। नियमानुसार सरकारी वाहन के एक लाख दस हजार किलोमीटर चलने के बाद उसे बदलने का प्रावधान है। दोनों डिप्टी सीएम की गाड़ियां इस सीमा से अधिक चल चुकी हैं। इसके बाद गृह विभाग के माध्यम से नई कार खरीदने के प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजे गए थे। हालांकि वित्त विभाग ने इन प्रस्तावों को मंजूरी देने के बजाय वापस कर दिया और पुरानी गाड़ियों की मरम्मत कराकर चलाने के निर्देश दिए।
    दूसरी ओर चालू वित्तीय वर्ष में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के लिए नई इलेक्ट्रिक कार खरीदी गई है। इसके अलावा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल और लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह के लिए इनोवा क्रिस्टा खरीदी गई। गृह सचिव कृष्णा वेणी के लिए भी नई इनोवा क्रिस्टा की व्यवस्था की गई है। इस तरह मुख्यमंत्री मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारी के लिए नई गाड़ियों की खरीद हुई है, जबकि दोनों डिप्टी सीएम के प्रस्तावों को वित्तीय कारणों से मंजूरी नहीं मिल सकी। इसी अंतर को लेकर सरकारी वाहन खरीद की नीति और प्राथमिकताओं पर चर्चा हो रही है।
    गौरतलब है कि प्रदेश सरकार ने करीब तीन महीने पहले वित्तीय स्थिति को देखते हुए सरकारी खर्चों में कटौती करने के निर्देश जारी किए थे। अधिकारियों के विदेश दौरे महंगे होटलों में बैठकें और अन्य गैरजरूरी खर्चों पर नियंत्रण रखने को कहा गया था। सामान्य प्रशासन विभाग ने विभागों को यथासंभव वर्चुअल बैठकें आयोजित करने और जिलों के अधिकारियों को अनावश्यक रूप से भोपाल नहीं बुलाने के निर्देश भी दिए थे। मंत्रियों के काफिले में वाहनों की संख्या कम करने की बात कही गई थी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी अपने काफिले में गाड़ियों की संख्या घटाकर सात रखने का निर्णय लिया था। इसके बावजूद नई गाड़ियों की खरीद जारी रहने से खर्चों पर नियंत्रण के निर्देशों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
    वाहनों की खरीद का पिछला रिकॉर्ड भी इस मामले को महत्वपूर्ण बनाता है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्रदेश में सबसे ज्यादा 27 कारें खरीदी गई थीं। चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक चार नई कारों की खरीद हुई है। इनमें मुख्यमंत्री की इलेक्ट्रिक कार और तीन इनोवा क्रिस्टा शामिल हैं। वहीं दोनों उपमुख्यमंत्रियों के लिए नई कार खरीदने के प्रस्ताव मंजूर नहीं किए गए हैं।
    वित्त विभाग ने आगामी शीतकालीन सत्र में पेश किए जाने वाले दूसरे अनुपूरक बजट को लेकर भी विभागों को निर्देश दिए हैं। प्रस्ताव 22 अक्टूबर तक ऑनलाइन भेजने को कहा गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि ऐसे नए मदों के प्रस्ताव शामिल नहीं किए जा सकेंगे जिनसे राज्य के वित्तीय संसाधनों पर अतिरिक्त बोझ पड़े। वाहन खरीद के प्रस्तावों को भी अनुपूरक बजट में शामिल नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे नई गाड़ियों की खरीद के लिए अतिरिक्त बजट उपलब्ध कराने की संभावना सीमित होती दिखाई दे रही है।
    इस बीच महाराष्ट्र सरकार ने वीवीआईपी और राज्य अतिथियों की सुरक्षा तथा परिवहन व्यवस्था के लिए 12.68 करोड़ रुपये की 44 नई गाड़ियां खरीदने को मंजूरी दी है। इनमें 4.08 करोड़ रुपये की बुलेटप्रूफ टोयोटा लैंड क्रूजर 300 भी शामिल है। मध्य प्रदेश में डिप्टी सीएम की कारों के प्रस्ताव खारिज होने और महाराष्ट्र में महंगी गाड़ियों की खरीद की मंजूरी के बीच सरकारी वाहन खर्च का मुद्दा चर्चा में है। फिलहाल मध्य प्रदेश में दोनों उपमुख्यमंत्रियों को पुरानी गाड़ियों से ही काम चलाना होगा और नई कारों को लेकर आगे का फैसला वित्तीय मंजूरी पर निर्भर करेगा।
  • मध्य प्रदेश में पटवारियों की दोटूक, पहले बहाली के आदेश जारी करें कलेक्टर फिर करेंगे स्वामित्व योजना का काम, सरकार के सामने नई चुनौती

    मध्य प्रदेश में पटवारियों की दोटूक, पहले बहाली के आदेश जारी करें कलेक्टर फिर करेंगे स्वामित्व योजना का काम, सरकार के सामने नई चुनौती


    भोपाल । मध्य प्रदेश में स्वामित्व योजना के तहत होने वाली मुफ्त रजिस्ट्रियों पर एक बार फिर संकट खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात के बाद काम पर लौटने की सहमति देने वाले पटवारियों ने अब स्पष्ट कर दिया है कि जब तक निलंबन और बर्खास्तगी के आदेश वापस नहीं लिए जाते तब तक वे योजना का काम नहीं करेंगे। पटवारी संघ का कहना है कि सरकार के स्तर पर सहमति बनने और राजस्व विभाग की ओर से कानूनी संरक्षण से जुड़ा आदेश जारी होने के बावजूद जिलों में कलेक्टरों ने बहाली की प्रक्रिया पूरी नहीं की है। ऐसे में पटवारी स्वामित्व योजना के तहत रजिस्ट्री की कार्रवाई शुरू करने के लिए तैयार नहीं हैं।
    रविवार शाम मध्य प्रदेश पटवारी संघ के प्रांतीय अध्यक्ष उपेंद्र सिंह और प्रांतीय पटवारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष अश्विन सैनी ने वीडियो जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट की। संघ के पदाधिकारियों के मुताबिक मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद राजस्व विभाग ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 218 के तहत आदेश जारी किया है। इस आदेश के अनुसार स्वामित्व योजना की रजिस्ट्री से जुड़े विवाद या न्यायालयीन प्रकरण की स्थिति में पटवारियों के खिलाफ केस चलाने से संरक्षण दिया गया है। हालांकि संघ का कहना है कि 17 सितंबर के बाद पटवारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई को शून्य करने पर सहमति बनी थी लेकिन अब तक संबंधित कलेक्टरों ने बहाली के आदेश जारी नहीं किए हैं। इसी वजह से प्रदेश के पटवारी फिलहाल योजना के काम से अलग रहेंगे।

    इससे पहले 9 अक्टूबर की शाम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और पटवारी संघ के बीच बातचीत के बाद सहमति बनने की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद संघ ने 12 अक्टूबर से काम शुरू करने का ऐलान किया था। उस समय न्यायिक संरक्षण के आदेश जारी करने और 17 सितंबर के बाद की गई कार्रवाई को समाप्त करने पर सहमति बनने की बात कही गई थी। वेतन विसंगति के मुद्दे पर आयोग के गठन के बाद विचार करने और 27 अक्टूबर को प्रस्तावित महासम्मेलन में आर्थिक मांगों पर घोषणा करने का आश्वासन भी दिया गया था। लेकिन बहाली के आदेश जारी नहीं होने से सहमति के बावजूद विवाद फिर गहरा गया है।
    स्वामित्व योजना केंद्र सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके तहत गांवों की आबादी वाली भूमि का ड्रोन सर्वे कराकर संपत्तियों का रिकॉर्ड तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को उनके घर और जमीन से जुड़े अधिकारों का दस्तावेज उपलब्ध कराना है। मध्य प्रदेश में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक करीब 50 लाख संपत्तियों की रजिस्ट्री किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। इन रजिस्ट्रियों के लिए हितग्राहियों से स्टाम्प ड्यूटी और पंजीयन शुल्क नहीं लिया जा रहा है। इसका खर्च सरकार उठा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में अब तक 68.11 लाख अधिकार अभिलेख तैयार किए जा चुके हैं जिनमें 48.32 लाख निजी संपत्तियां शामिल हैं।
    पटवारियों की मुख्य आपत्ति रजिस्ट्री की प्रक्रिया में उनकी भूमिका और संभावित कानूनी जिम्मेदारी को लेकर है। संघ के मुताबिक दस्तावेजों में ग्रामीण को क्रेता और पटवारी को विक्रेता या निष्पादक की भूमिका दी गई है। पटवारियों का कहना है कि वे जमीन के मालिक नहीं हैं और न ही उन्हें हर मामले में मालिकाना हक तय करने का अधिकार है। ऐसे में भविष्य में जमीन की सीमा हिस्सेदारी या कब्जे को लेकर विवाद होने पर उनके हस्ताक्षर के आधार पर उन्हें जिम्मेदार ठहराए जाने का डर है।
    संघ ने रिकॉर्ड में गड़बड़ियों का मुद्दा भी उठाया है। गुना में पटवारी संघ के अनुसार कुछ मामलों में मौके पर कब्जा एक भाई का है जबकि दस्तावेजों में तीन भाइयों के नाम दर्ज हैं। ऐसे मामलों में भविष्य में विवाद की आशंका बनी रहती है। पटवारी संघ का कहना है कि उसे योजना से आपत्ति नहीं है लेकिन निष्पादक की भूमिका और उससे जुड़ी कानूनी जिम्मेदारी स्पष्ट होनी चाहिए। अब निगाहें सरकार और जिला प्रशासन के अगले कदम पर हैं क्योंकि बहाली के आदेश जारी नहीं हुए तो मुफ्त रजिस्ट्रियों का काम प्रभावित हो सकता है।
  • नवरात्र में ट्रेन से दर्शन करने जा रहे हैं तो ध्यान दें, विंध्याचल में 12 ट्रेनों का दो मिनट का स्टॉपेज, मैहर में 30 की स्पीड लिमिट

    नवरात्र में ट्रेन से दर्शन करने जा रहे हैं तो ध्यान दें, विंध्याचल में 12 ट्रेनों का दो मिनट का स्टॉपेज, मैहर में 30 की स्पीड लिमिट


    भोपाल । शारदीय नवरात्र मेले के दौरान मां विंध्यवासिनी के दर्शन करने जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए रेलवे ने विशेष व्यवस्था की है। यात्रियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए विंध्याचल स्टेशन पर 12 एक्सप्रेस ट्रेनों को अस्थायी ठहराव देने का निर्णय लिया गया है। यह सुविधा 26 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध रहेगी। निर्धारित ट्रेनों को स्टेशन पर दो-दो मिनट का ठहराव दिया जाएगा। इससे मेले के दौरान विंध्याचल पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को यात्रा में सुविधा मिल सकती है। रेलवे ने मैहर स्टेशन से गुजरने वाली सभी ट्रेनों की अधिकतम गति भी 30 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की है।
    पश्चिम मध्य रेलवे के भोपाल मंडल के अनुसार नवरात्र मेले में यात्रियों की अतिरिक्त आवाजाही को देखते हुए यह व्यवस्था की गई है। विंध्याचल स्टेशन पर ठहराव पाने वाली ट्रेनों में मुंबई से पाटलिपुत्र डिब्रूगढ़ गुवाहाटी भागलपुर दानापुर और बनारस सहित विभिन्न शहरों के बीच चलने वाली एक्सप्रेस ट्रेनें शामिल हैं। इन ट्रेनों में यात्रा करने वाले श्रद्धालु निर्धारित समय पर विंध्याचल स्टेशन पर उतरकर आगे की यात्रा की योजना बना सकेंगे। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे स्टेशन पहुंचने से पहले अपनी ट्रेन का समय जरूर जांच लें।
    रेलवे की सूची के अनुसार लोकमान्य तिलक टर्मिनस से पाटलिपुत्र जाने वाली ट्रेन संख्या 12141 रात 10:30 बजे से 10:32 बजे तक विंध्याचल स्टेशन पर रुकेगी। पाटलिपुत्र से लोकमान्य तिलक टर्मिनस जाने वाली ट्रेन संख्या 12142 शाम 4:05 बजे से 4:07 बजे तक ठहरेगी। लोकमान्य तिलक टर्मिनस से डिब्रूगढ़ जाने वाली ट्रेन संख्या 15945 और गुवाहाटी जाने वाली ट्रेन संख्या 15647 सुबह 5:50 बजे से 5:52 बजे तक स्टेशन पर रुकेंगी। वहीं डिब्रूगढ़ से लोकमान्य तिलक टर्मिनस जाने वाली ट्रेन संख्या 15946 और गुवाहाटी से लोकमान्य तिलक टर्मिनस जाने वाली ट्रेन संख्या 15648 शाम 7:05 बजे से 7:07 बजे तक ठहरेंगी।
    भागलपुर से लोकमान्य तिलक टर्मिनस जाने वाली ट्रेन संख्या 12335 भी शाम 7:05 बजे से 7:07 बजे तक रुकेगी। इसके विपरीत दिशा में चलने वाली ट्रेन संख्या 12336 सुबह 5:50 बजे से 5:52 बजे तक विंध्याचल स्टेशन पर ठहराव लेगी। सर एम विश्वेश्वरैया टर्मिनल बेंगलुरु से दानापुर जाने वाली ट्रेन संख्या 12295 रात 1:40 बजे से 1:42 बजे तक और दानापुर से बेंगलुरु जाने वाली ट्रेन संख्या 12296 रात 12:35 बजे से 12:37 बजे तक स्टेशन पर रुकेगी। लोकमान्य तिलक टर्मिनस से बनारस जाने वाली ट्रेन संख्या 12167 रात 10:15 बजे से 10:17 बजे तक जबकि बनारस से लोकमान्य तिलक टर्मिनस जाने वाली ट्रेन संख्या 12168 दोपहर 12:10 बजे से 12:12 बजे तक ठहराव लेगी।
    दूसरी ओर मैहर स्टेशन से गुजरने वाली सभी ट्रेनों की अधिकतम गति 30 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है। रेलवे ने नवरात्र मेले के दौरान सुरक्षा और परिचालन व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया है। गति सीमा लागू होने से ट्रेनों के संचालन पर असर पड़ सकता है इसलिए यात्रियों को अपनी यात्रा की योजना बनाते समय अतिरिक्त समय का ध्यान रखना चाहिए।
    नवरात्र के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु धार्मिक स्थलों तक पहुंचने के लिए रेल यात्रा करते हैं। ऐसे में अस्थायी ठहराव और गति सीमा जैसी व्यवस्थाएं यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण हैं। यात्रा पर निकलने से पहले रेलवे के आधिकारिक माध्यमों से ट्रेन का समय ठहराव और संभावित बदलाव की पुष्टि करना बेहतर रहेगा। इससे अंतिम समय में होने वाली परेशानी से बचा जा सकेगा।

  • जूनियर डॉक्टरों के लिए बड़ी खबर, तीनों पीजी वर्ष के स्टाइपेंड में इजाफा, जानिए अब किसे हर महीने कितनी रकम मिलेगी

    जूनियर डॉक्टरों के लिए बड़ी खबर, तीनों पीजी वर्ष के स्टाइपेंड में इजाफा, जानिए अब किसे हर महीने कितनी रकम मिलेगी


    भोपाल । मध्य प्रदेश के शासकीय मेडिकल कॉलेजों में पढ़ने वाले जूनियर डॉक्टरों के लिए राहत की खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने पीजी और सुपर स्पेशियलिटी पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों के मासिक स्टाइपेंड में 4.46 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है। वित्त विभाग की सहमति मिलने के बाद बढ़ी हुई राशि 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी मानी जाएगी। इस फैसले से पीजी प्रथम वर्ष से लेकर तृतीय वर्ष तक के डॉक्टरों के साथ सुपर स्पेशियलिटी के विद्यार्थियों को भी लाभ मिलेगा।
    सरकार के आदेश के अनुसार पीजी प्रथम वर्ष के डॉक्टरों का मासिक स्टाइपेंड 77 हजार 662 रुपये से बढ़ाकर 81 हजार 126 रुपये कर दिया गया है। यानी अब उन्हें हर महीने पहले की तुलना में 3 हजार 464 रुपये अधिक मिलेंगे। इसी तरह पीजी द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों को अब 80 हजार 50 रुपये के बजाय 83 हजार 620 रुपये प्रतिमाह दिए जाएंगे। इस श्रेणी में मासिक स्टाइपेंड में 3 हजार 570 रुपये की बढ़ोतरी हुई है।
    पीजी तृतीय वर्ष के डॉक्टरों के स्टाइपेंड में भी इजाफा किया गया है। पहले उन्हें हर महीने 82 हजार 441 रुपये मिलते थे जबकि अब यह राशि बढ़ाकर 86 हजार 118 रुपये कर दी गई है। इस तरह तृतीय वर्ष के विद्यार्थियों को हर महीने 3 हजार 677 रुपये अतिरिक्त मिलेंगे। वहीं सुपर स्पेशियलिटी पाठ्यक्रम के प्रथम द्वितीय और तृतीय वर्ष के विद्यार्थियों का मासिक स्टाइपेंड भी बढ़ाकर 86 हजार 118 रुपये कर दिया गया है।
    विभाग के मुताबिक यह बढ़ोतरी महंगाई भत्ते के आधार पर की गई है। सरकार के इस निर्णय से मेडिकल कॉलेजों में प्रशिक्षण ले रहे डॉक्टरों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है। पीजी और सुपर स्पेशियलिटी की पढ़ाई के दौरान विद्यार्थियों को अस्पतालों में मरीजों की देखभाल और चिकित्सा सेवाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य करने होते हैं। ऐसे में स्टाइपेंड में बढ़ोतरी उनके मासिक खर्चों को संभालने में मदद कर सकती है।
    इस बीच प्रदेश में इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड का मुद्दा भी चर्चा में है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड में 50 प्रतिशत बढ़ोतरी कर इसे 21 हजार 500 रुपये प्रतिमाह किए जाने की खबर सामने आई है। दूसरी ओर स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर इंटर्न डॉक्टरों का आंदोलन भी जारी रहने की जानकारी दी गई है। भोपाल में कमला पार्क के पास प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों ने अपनी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही है।
    जूनियर डॉक्टरों के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी का आदेश ऐसे समय आया है जब चिकित्सा शिक्षा से जुड़े विद्यार्थियों की आर्थिक मांगें चर्चा में हैं। अब बढ़ी हुई राशि के भुगतान और आदेश के क्रियान्वयन पर नजर रहेगी। सरकार के इस फैसले से प्रदेश के शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में प्रशिक्षण ले रहे डॉक्टरों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा।

  • मुफ्त बस से स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए बदल सकते हैं नियम, कलेक्टर तय कर सकेंगे किराया, आज कैबिनेट में हो सकता है फैसला

    मुफ्त बस से स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए बदल सकते हैं नियम, कलेक्टर तय कर सकेंगे किराया, आज कैबिनेट में हो सकता है फैसला


    भोपाल। मध्य प्रदेश में सांदीपनि विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए परिवहन सुविधा से जुड़ा बड़ा बदलाव हो सकता है। स्कूल शिक्षा विभाग ने इन विद्यालयों में संचालित बस सेवा के लिए किराया निर्धारित करने का प्रस्ताव तैयार किया है। इस प्रस्ताव पर 12 अक्टूबर को होने वाली कैबिनेट बैठक में चर्चा के बाद मंजूरी मिलने की संभावना जताई जा रही है। यदि सरकार प्रस्ताव को मंजूरी देती है तो अब तक मुफ्त बस सेवा का लाभ ले रहे बच्चों के अभिभावकों को आने वाले समय में किराया देना पड़ सकता है। इससे परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ने की आशंका है।
    विभाग के प्रस्ताव के मुताबिक जिले में संचालित सांदीपनि विद्यालयों की बसों का किराया निर्धारित करने की जिम्मेदारी कलेक्टरों को दी जा सकती है। कलेक्टर अपने जिले की परिस्थितियों और स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए किराया तय कर सकेंगे। इसके बाद अभिभावकों से निर्धारित शुल्क वसूलने की व्यवस्था लागू की जा सकती है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि किराया कितना होगा और इसे सभी विद्यार्थियों पर लागू किया जाएगा या कुछ विशेष श्रेणियों के बच्चों को इससे छूट मिलेगी। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए राहत का कोई प्रावधान होगा या नहीं इस पर भी स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
    प्रदेश में वर्तमान में 370 सांदीपनि विद्यालयों में बच्चों को बसों के जरिए घर से स्कूल लाने और स्कूल से घर पहुंचाने की व्यवस्था संचालित है। इस सुविधा का उद्देश्य विद्यार्थियों को स्कूल आने-जाने में मदद देना और उनकी पढ़ाई को सुगम बनाना है। अब सरकार इस व्यवस्था पर होने वाले खर्च की भरपाई के लिए मौजूदा नियमों में बदलाव करने पर विचार कर रही है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि नई व्यवस्था किस तरह लागू होगी और अभिभावकों को कितना भुगतान करना पड़ेगा।
    इस प्रस्ताव के बीच बसों की उपलब्धता का मुद्दा भी महत्वपूर्ण है। जानकारी के अनुसार प्रदेश के 19 जिलों में सांदीपनि विद्यालयों के करीब डेढ़ लाख बच्चों को बस सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। कई विद्यालयों में बसें उपलब्ध नहीं होने के कारण विद्यार्थी इस सुविधा से वंचित हैं। ऐसे में सरकार के सामने केवल किराया तय करने का ही नहीं बल्कि सभी पात्र बच्चों तक परिवहन सुविधा पहुंचाने का सवाल भी है। अभिभावकों के लिए यह जानना जरूरी होगा कि जिन स्कूलों में अभी बसें उपलब्ध नहीं हैं वहां पहले परिवहन व्यवस्था शुरू की जाएगी या नई शुल्क व्यवस्था लागू करने पर प्राथमिकता दी जाएगी।
    यदि प्रस्ताव मंजूर होता है तो इसके क्रियान्वयन से जुड़े नियम और शर्तें भी अहम होंगी। अभिभावकों को राहत देने के लिए जरूरतमंद परिवारों को छूट मिलेगी या नहीं और बस सेवा की गुणवत्ता तथा उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे इस पर फैसले के बाद स्थिति साफ हो सकती है। फिलहाल सभी की नजर कैबिनेट के निर्णय पर है।
    इसके अलावा बैठक में मैहर पांढुर्णा निवाड़ी और मऊगंज जिलों में महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यालय खोलने तथा जिला स्तर पर पद सृजित करने के प्रस्ताव पर भी विचार किया जा सकता है। साथ ही 17 सितंबर से शुरू हुए सेवा संकल्प अभियान की प्रगति और अब तक किए गए कार्यों की समीक्षा भी मुख्यमंत्री मंत्रियों के साथ कर सकते हैं। कैबिनेट के फैसलों से प्रदेश में शिक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर आगे की दिशा तय होने की उम्मीद है।

  • रतलाम ने नम आंखों से दी तेजकुंवरबाई काश्यप को अंतिम विदाई, अहिंसा ग्राम में बसाए 100 परिवार, महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर

    रतलाम ने नम आंखों से दी तेजकुंवरबाई काश्यप को अंतिम विदाई, अहिंसा ग्राम में बसाए 100 परिवार, महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर


    रतलाम । मध्य प्रदेश के रतलाम में सोमवार को तेजकुंवरबाई काश्यप का अंतिम संस्कार किया गया। मध्य प्रदेश सरकार के सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री और रतलाम शहर के विधायक चेतन्य काश्यप ने अपनी मां को मुखाग्नि देकर अंतिम विदाई दी। स्टेशन रोड स्थित वीसाजी मेंशन से सुबह करीब 10:30 बजे उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई। शहर के विभिन्न मार्गों से होती हुई यात्रा त्रिवेणी मुक्तिधाम पहुंची जहां धार्मिक रीति रिवाज के साथ उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। उनके निधन से काश्यप परिवार के साथ ही उनसे जुड़े लोगों में शोक का माहौल है।
    अंतिम यात्रा से पहले तेजकुंवरबाई काश्यप का पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया था। इस दौरान बड़ी संख्या में शहरवासी और शुभचिंतक उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे। मध्य प्रदेश सरकार की मंत्री निर्मला भूरिया और पूर्व मंत्री हिम्मत कोठारी सहित भाजपा के कई नेता और पदाधिकारी भी अंतिम दर्शन के लिए उपस्थित रहे। व्यापारियों के साथ पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने भी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। त्रिवेणी मुक्तिधाम में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में उनके जीवन और सामाजिक योगदान को याद किया गया।
    तेजकुंवरबाई काश्यप का रविवार को 83 वर्ष की उम्र में मुंबई में निधन हो गया था। वह पिछले कई दिनों से बीमार थीं। उनके निधन पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी शोक व्यक्त किया। परिवार और परिचितों के लिए उनका जाना एक बड़ी क्षति है। उनके जीवन की कहानी संघर्ष और जिम्मेदारी निभाने के साथ धर्म और समाजसेवा के प्रति समर्पण से जुड़ी रही।
    तेजकुंवरबाई का जन्म 17 मार्च 1943 को मध्य प्रदेश के कुक्षी में हुआ था। उनके पिता स्वर्गीय चंपालाल खूंटवाला ने पालिताना तीर्थ में त्रिस्तुतिक जैन समाज की पहली धर्मशाला चंपा निवास का निर्माण करवाया था। वर्ष 1958 में उनका विवाह रतलाम के अशोक कुमार काश्यप से हुआ। लेकिन वर्ष 1964 में पति के आकस्मिक निधन के बाद उनके जीवन की जिम्मेदारियां अचानक बढ़ गईं। उस समय उनकी उम्र महज 21 वर्ष थी। कम उम्र में पति को खोने के बाद उन्होंने परिवार की जिम्मेदारी संभाली और पारिवारिक दायित्वों के साथ धार्मिक गतिविधियों तथा तपस्या और साधना के प्रति अपना समर्पण बनाए रखा।
    उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण पक्ष जरूरतमंद परिवारों और महिलाओं के लिए किए गए प्रयास भी रहे। वर्ष 2005 में चेतन्य काश्यप फाउंडेशन ने रतलाम में अहिंसा ग्राम की स्थापना की थी। यहां करीब 100 जरूरतमंद परिवारों को बसाने और उनके संस्कार निर्माण से जुड़े प्रयासों में तेजकुंवरबाई ने सक्रिय भूमिका निभाई। उनका योगदान केवल परिवारों को बसाने तक सीमित नहीं रहा बल्कि उन्होंने महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने की दिशा में भी काम किया।
    महिलाओं को सिलाई बुनाई कढ़ाई और दूसरे उपयोगी कौशलों का प्रशिक्षण दिलाने के प्रयासों के जरिए उन्हें स्वरोजगार से जोड़ने में उन्होंने सहयोग किया। स्वसहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की पहल भी उनके सामाजिक योगदान का हिस्सा रही। उनके कार्यों का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों को सहारा देना और महिलाओं को अपनी आजीविका के लिए सक्षम बनाना था।
    सोमवार को अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़ और लोगों की श्रद्धांजलि उनके प्रति सम्मान को दर्शाती रही। तेजकुंवरबाई काश्यप अब इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन परिवार की जिम्मेदारियां संभालने से लेकर जरूरतमंदों के लिए काम करने तक का उनका जीवन परिचितों और समाज से जुड़े लोगों की स्मृतियों में बना रहेगा।