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  • मिशन 2047 के नाम पर देशविरोधी साजिश ATS जांच में चौंकाने वाले खुलासे ब्रेनवॉश से टारगेट नेटवर्क तक का दावा

    मिशन 2047 के नाम पर देशविरोधी साजिश ATS जांच में चौंकाने वाले खुलासे ब्रेनवॉश से टारगेट नेटवर्क तक का दावा


    मध्यप्रदेश । भोपाल में आतंकवाद विरोधी दस्ते यानी ATS द्वारा की जा रही जांच में कथित आतंकी मॉड्यूल से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलू सामने आए हैं। एजेंसी की हिरासत में मौजूद आरोपियों से पूछताछ के दौरान ऐसे इनपुट मिले हैं जिनके आधार पर जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि अभी जांच जारी है और सामने आई जानकारियों का सत्यापन किया जा रहा है।

    जांच एजेंसियों के अनुसार बिहार के मधुबनी से गिरफ्तार आरोपी इजहार उल हक से पूछताछ में एक कथित नेटवर्क और उसके उद्देश्यों को लेकर कई दावे सामने आए हैं। पूछताछ में आरोपी ने कथित रूप से बताया कि कुछ लोग एक विशेष एजेंडे के तहत काम कर रहे थे और सोशल मीडिया तथा मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं को जोड़ने की कोशिश की जा रही थी। एजेंसियां इन दावों की गहन जांच कर रही हैं।

    ATS के अनुसार जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ संदिग्ध व्यक्ति विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से संपर्क में थे। टेलीग्राम और वॉट्सएप जैसे मैसेजिंग एप्लिकेशन का उपयोग कथित तौर पर संवाद और विचारों के आदान प्रदान के लिए किया जा रहा था। एजेंसी अब इन डिजिटल संपर्कों और चैट रिकॉर्ड की तकनीकी जांच कर रही है ताकि नेटवर्क की वास्तविक संरचना और उसके विस्तार का पता लगाया जा सके।

    पूछताछ में आरोपी फराज से भी कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिलने का दावा किया गया है। जांच एजेंसियों के मुताबिक फराज पिछले कई वर्षों से कुछ संदिग्ध व्यक्तियों के संपर्क में था। पूछताछ के दौरान उसने स्वीकार किया कि उसकी पहचान कुछ ऐसे लोगों से कराई गई थी जो विदेश में बैठे कथित हैंडलर्स से जुड़े बताए जा रहे हैं। एजेंसी अब इन संपर्कों की प्रामाणिकता और उनके संभावित प्रभाव की जांच कर रही है।

    जांच में यह भी सामने आया है कि सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का उपयोग युवाओं तक पहुंच बनाने के लिए किया जा रहा था। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में अक्सर वैचारिक प्रभाव डालकर लोगों को प्रभावित करने का प्रयास किया जाता है। इसी कारण डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है।

    सूत्रों के अनुसार कुछ आरोपियों ने विभिन्न राज्यों के लोगों के संपर्क में होने की बात भी स्वीकार की है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह नेटवर्क किन क्षेत्रों तक सक्रिय था और इसमें कितने लोग शामिल हो सकते हैं। इसके लिए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है।

    ATS अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल जांच प्रारंभिक चरण में है और सभी तथ्यों की पुष्टि की जा रही है। एजेंसी यह भी स्पष्ट कर चुकी है कि किसी भी आरोपी की भूमिका का अंतिम निर्धारण जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही किया जाएगा। इसी कारण जांच से जुड़ी जानकारियों को सावधानीपूर्वक परखा जा रहा है।

    इस मामले ने एक बार फिर डिजिटल माध्यमों के जरिए फैलाए जाने वाले कट्टरपंथी विचारों और संदिग्ध नेटवर्क की चुनौती को सामने ला दिया है। जांच एजेंसियां लगातार ऐसे तत्वों पर नजर बनाए हुए हैं और यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही हैं कि किसी भी प्रकार की अवैध या राष्ट्रविरोधी गतिविधि को समय रहते रोका जा सके।

  • सीनियर अफसरों की अनदेखी से बढ़ा विवाद एमएसएमई विभाग में जूनियर लिखेंगे वरिष्ठों की सीआर

    सीनियर अफसरों की अनदेखी से बढ़ा विवाद एमएसएमई विभाग में जूनियर लिखेंगे वरिष्ठों की सीआर


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश के सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग में हाल ही में जारी प्रभार आदेशों ने विभागीय व्यवस्था को लेकर नए विवाद को जन्म दे दिया है। वाणिज्यिक कर विभाग में तबादलों को लेकर उठे सवालों के बाद अब एमएसएमई विभाग के भीतर भी असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। अधिकारियों का आरोप है कि वरिष्ठता और योग्यता की अनदेखी करते हुए जूनियर अधिकारियों को उच्च पदों का प्रभार सौंप दिया गया है जिससे विभागीय पदक्रम और प्रशासनिक संतुलन प्रभावित हो रहा है।

    विवाद की शुरुआत 15 और 16 जून को जारी किए गए प्रभार आदेशों से हुई। इन आदेशों के तहत कुछ ऐसे अधिकारियों को जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्रों के महाप्रबंधक का प्रभार दिया गया है जो मूल रूप से सहायक प्रबंधक पद पर नियुक्त हैं और वर्तमान में प्रभारी प्रबंधक के रूप में कार्यरत थे। विभाग के भीतर इसे चार्ज के ऊपर चार्ज की व्यवस्था बताया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यह स्थिति प्रशासनिक दृष्टि से असामान्य है और इससे विभाग में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है।

    जिन अधिकारियों को महाप्रबंधक का प्रभार सौंपा गया है उनमें सुबोध कुमार श्रीवास्तव को मंडीदीप जेपी तिवारी को रीवा शिवशंकर सिंह को निवाड़ी सुरेश कुमार गोस्वामी को भिंड राममूर्ति खरे को अनूपपुर अजय तिवारी को शिवपुरी तथा बीएल अहिरवार को दमोह की जिम्मेदारी दी गई है। इन नियुक्तियों को लेकर विभाग के भीतर लगातार सवाल उठ रहे हैं।

    अधिकारियों का कहना है कि विभाग में मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से चयनित वर्ष 2016 2017 और 2019 बैच के 60 से अधिक वर्ग दो राजपत्रित अधिकारी कार्यरत हैं। इनमें प्रबंधक और सहायक संचालक स्तर के अधिकारी शामिल हैं। इसके बावजूद उन्हें जिम्मेदारी न देकर प्रभारी प्रबंधकों को महाप्रबंधक का प्रभार देना कई अधिकारियों को समझ से परे लग रहा है। उनका मानना है कि जब योग्य और नियमित रूप से चयनित अधिकारी उपलब्ध हैं तो उन्हें नजरअंदाज करने का कोई ठोस कारण सामने नहीं आया है।

    नाराजगी का एक बड़ा कारण लंबे समय से लंबित पदोन्नति प्रक्रिया भी है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि वर्षों से पदोन्नति के मामले लंबित हैं और अधिकारियों को उनके अधिकारिक पद नहीं मिल पा रहे हैं। दूसरी ओर जूनियर अधिकारियों को उच्च पदों का प्रभार देकर वरिष्ठ अधिकारियों की उपेक्षा की जा रही है। इससे कर्मचारियों का मनोबल प्रभावित हो रहा है और विभाग में असंतोष का माहौल बन रहा है।

    विवाद का सबसे संवेदनशील पहलू गोपनीय चरित्रावली यानी सीआर से जुड़ा है। विभागीय सूत्रों के अनुसार कई जिलों में अब ऐसे हालात बन सकते हैं जहां वर्ग दो राजपत्रित अधिकारी उन अधिकारियों के अधीन कार्य करेंगे जो मूल रूप से वर्ग तीन सेवा श्रेणी से आते हैं। ऐसी स्थिति में जूनियर अधिकारी वरिष्ठ अधिकारियों की सीआर लिखेंगे। अधिकारियों का मानना है कि यह न केवल सेवा संरचना के सिद्धांतों के विपरीत है बल्कि प्रशासनिक दृष्टि से भी उचित नहीं माना जा सकता।

    विभाग के भीतर यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि यदि नियमित और वरिष्ठ अधिकारी उपलब्ध हैं तो फिर प्रभारी व्यवस्था के माध्यम से उच्च पदों की जिम्मेदारी देने के पीछे क्या प्रशासनिक तर्क अपनाया गया है। फिलहाल विभाग की ओर से इस पूरे विवाद पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है लेकिन आदेशों को लेकर विरोध और चर्चा लगातार तेज होती जा रही है।

    एमएसएमई विभाग में बढ़ते असंतोष ने एक बार फिर सरकारी विभागों में तबादला और प्रभार व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में यदि विभाग इस मामले पर स्पष्टता नहीं देता है तो विवाद और गहराने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

  • करंट का कहर और सिस्टम की लापरवाही सड़कों पर फैले तारों के जाल में उलझ रही जिंदगियां

    करंट का कहर और सिस्टम की लापरवाही सड़कों पर फैले तारों के जाल में उलझ रही जिंदगियां


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून की दस्तक भले ही धीमी हो लेकिन लोगों की जान पर मंडरा रहा खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। सड़कों पर जलभराव और गड्ढों की समस्या के बीच अब बिजली के लटकते तार भी मौत का कारण बन रहे हैं। राजधानी भोपाल सहित प्रदेश के कई शहरों में बिजली व्यवस्था की बदहाली साफ दिखाई दे रही है जहां बाजारों कॉलोनियों और मुख्य मार्गों पर तारों का जाल लोगों की सुरक्षा को चुनौती दे रहा है।

    मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग की हालिया रिपोर्ट ने हालात की गंभीरता को और स्पष्ट कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024-25 में प्रदेशभर में 1963 विद्युत दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। इन हादसों में 1102 लोगों की मौत हुई जबकि 329 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। इतना ही नहीं 1492 पशुओं की भी करंट लगने से जान चली गई। आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में औसतन हर दिन तीन लोगों की मौत बिजली हादसों में हो रही है और लगभग हर आठ घंटे में एक व्यक्ति करंट का शिकार बन रहा है।

    भोपाल की स्थिति भी किसी बड़े खतरे से कम नहीं है। शहर के प्रमुख बाजारों और व्यस्त इलाकों में बिजली के तार खुलेआम लटकते दिखाई देते हैं। न्यू मार्केट जैसे भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में जहां प्रतिदिन हजारों लोग खरीदारी के लिए पहुंचते हैं वहां खंभों और दुकानों के बीच फैले तार दुर्घटना को आमंत्रण देते नजर आते हैं। पुराने भोपाल की संकरी गलियों में कई स्थानों पर बिजली के तार मकानों की बालकनियों से सटे हुए हैं जिससे किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।

    शहर के अन्य हिस्सों में भी हालात चिंताजनक हैं। रोशनपुरा चौराहे पर बिजली के तार खंभों से नीचे जमीन तक झूलते दिखाई देते हैं। कमलापति रेलवे स्टेशन के सामने कई जगह तार लोगों के सिर तक पहुंच रहे हैं। एमपी नगर के कोचिंग हब क्षेत्र में छात्रों की भीड़ के बीच सड़कों के ऊपर उलझे तार सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल रहे हैं। वहीं 10 नंबर मार्केट क्षेत्र में एक तार जमीन से महज चार फीट की ऊंचाई पर लटका हुआ देखा गया जो किसी भी राहगीर के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के दौरान ऐसे खुले और झूलते तारों से खतरा कई गुना बढ़ जाता है। बारिश के पानी और नमी के कारण करंट फैलने की आशंका बढ़ जाती है जिससे आम नागरिकों के साथ पशुओं की जान भी जोखिम में पड़ जाती है। इसके बावजूद कई इलाकों में लंबे समय से शिकायतों के बाद भी सुधार कार्य नहीं हो पाए हैं।

    मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने बिजली कंपनियों को सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सुरक्षा नियमों की अनदेखी जारी रही तो बिजली अधिनियम 2003 की धारा 142 के तहत संबंधित कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि जमीनी स्तर पर इसका असर अभी तक दिखाई नहीं दे रहा है।

    प्रदेश में बढ़ते बिजली हादसे इस बात का संकेत हैं कि केवल निर्देश और चेतावनियां पर्याप्त नहीं हैं। जरूरत है कि प्रशासन और बिजली कंपनियां तत्काल प्रभाव से जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान कर सुधार कार्य शुरू करें। क्योंकि जब तक सड़कों पर लटकते ये मौत के तार हटाए नहीं जाते तब तक हर बारिश के साथ किसी नई दुर्घटना का खतरा बना रहेगा।

  • एलएनसीटी यूनिवर्सिटी के सामने जल उठा नगर निगम का ट्रक आधे घंटे तक नहीं पहुंची दमकल सामने आई बड़ी लापरवाही

    एलएनसीटी यूनिवर्सिटी के सामने जल उठा नगर निगम का ट्रक आधे घंटे तक नहीं पहुंची दमकल सामने आई बड़ी लापरवाही


    भोपाल । भोपाल के रायसेन रोड पर रविवार रात उस समय अफरा तफरी मच गई जब नगर निगम का एक कंटेनरनुमा ट्रक अचानक आग की चपेट में आ गया। घटना एलएनसीटी यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट के सामने की है जहां से गुजर रहे ट्रक के केबिन से अचानक धुआं निकलने लगा। देखते ही देखते धुआं आग की लपटों में बदल गया और ट्रक का अगला हिस्सा जलने लगा। घटना के दौरान सड़क पर मौजूद लोगों और ट्रक कर्मचारियों ने साहस दिखाते हुए आग पर काबू पाने की कोशिश की लेकिन आग तेजी से फैलती चली गई।

    जानकारी के अनुसार नगर निगम का यह ट्रक आदमपुर स्थित कचरा खंती से वापस लौट रहा था। रात के समय जब वाहन रायसेन रोड पर एलएनसीटी यूनिवर्सिटी के सामने पहुंचा तब चालक को केबिन से धुआं निकलता दिखाई दिया। उसने तुरंत वाहन रोका और नीचे उतरकर देखा तो केबिन के निचले हिस्से में आग लग चुकी थी। शुरुआती जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट बताई जा रही है।

    आग लगने की सूचना मिलते ही आसपास मौजूद लोग मदद के लिए आगे आए। कुछ लोगों ने अपनी गाड़ियों में रखी पानी की बड़ी बोतलें निकालकर आग बुझाने का प्रयास शुरू किया। कर्मचारियों और राहगीरों ने मिलकर आग पर पानी डाला लेकिन आग इतनी तेजी से फैल रही थी कि उसे नियंत्रित करना आसान नहीं था। कुछ ही मिनटों में आग ने ट्रक के अगले हिस्से और टायरों को अपनी चपेट में ले लिया।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार घटना के बाद काफी समय तक दमकल वाहन मौके पर नहीं पहुंचा। स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब आधे घंटे तक आग धधकती रही और लोग अपने स्तर पर उसे बुझाने की कोशिश करते रहे। इस दौरान सड़क पर यातायात भी प्रभावित हुआ और आसपास लोगों की भीड़ जमा हो गई।

    घटना के बाद जब ट्रक के दस्तावेजों की जांच की गई तो एक और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। ऑनलाइन रिकॉर्ड के अनुसार वाहन का फिटनेस प्रमाणपत्र वर्ष 2021 में ही समाप्त हो चुका था। इसके अलावा ट्रक का इंश्योरेंस वर्ष 2019 से नवीनीकृत नहीं कराया गया था। इतना ही नहीं वाहन का परमिट भी वैध नहीं पाया गया। इस खुलासे ने नगर निगम के वाहन प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित फिटनेस जांच और समय पर रखरखाव से ऐसे हादसों की संभावना काफी हद तक कम की जा सकती है। यदि वाहन की तकनीकी जांच समय पर होती रहे तो शॉर्ट सर्किट जैसी समस्याओं का पहले ही पता लगाया जा सकता है।

    फिलहाल घटना में किसी जनहानि की सूचना नहीं है जो राहत की बात है। हालांकि इस हादसे ने नगर निगम की व्यवस्थाओं और पुराने वाहनों के संचालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासनिक स्तर पर मामले की जांच की संभावना जताई जा रही है ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।

  • मां की दवा बनी मौत की वजह पेट दर्द में खाई शुगर की गोली युवती की चली गई जान

    मां की दवा बनी मौत की वजह पेट दर्द में खाई शुगर की गोली युवती की चली गई जान


    भोपाल । भोपाल के बैरागढ़ इलाके से एक दर्दनाक घटना सामने आई है जहां दवा लेने में हुई कथित गलती एक युवती की जान पर भारी पड़ गई। पेट दर्द और ब्लड प्रेशर की समस्या से परेशान 28 वर्षीय युवती ने अपनी नियमित दवा के साथ गलती से मां की शुगर की दवा भी खा ली। इसके कुछ समय बाद उसकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी और अस्पताल में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है जबकि पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस के अनुसार मृतका की पहचान वंदना मीणा के रूप में हुई है जो बैरागढ़ क्षेत्र के गांव बेटा की रहने वाली थी। वंदना अपने परिवार के साथ रहती थी और लंबे समय से ब्लड प्रेशर तथा पेट दर्द की समस्या से जूझ रही थी। परिजनों ने बताया कि रविवार देर रात उसे अचानक पेट दर्द की शिकायत हुई थी। इसके बाद उसने अपनी नियमित दवा ली लेकिन इसी दौरान गलती से अपनी मां की शुगर नियंत्रित करने वाली दवा भी खा ली।

    दवा लेने के कुछ समय बाद वंदना की हालत बिगड़ने लगी। उसे बेचैनी महसूस हुई और स्वास्थ्य तेजी से खराब होने लगा। परिवार के सदस्य घबरा गए और तत्काल उसे एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। अस्पताल में डॉक्टरों ने उसका उपचार शुरू किया और हालत को संभालने का प्रयास किया लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उसकी स्थिति में सुधार नहीं हो सका।

    इलाज के दौरान सोमवार तड़के वंदना ने दम तोड़ दिया। अस्पताल प्रबंधन ने मामले की सूचना बैरागढ़ पुलिस को दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई शुरू की। शव को पोस्टमार्टम के लिए हमीदिया अस्पताल भेजा गया जहां सोमवार दोपहर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।

    पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल परिजनों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मौत का वास्तविक कारण क्या था और दवा के सेवन का इसमें कितना योगदान रहा।

    जानकारी के अनुसार वंदना के पिता का पहले ही निधन हो चुका है। वह परिवार के छह भाई बहनों में शामिल थी। परिवार की जिम्मेदारियों के बीच उसका जीवन सामान्य रूप से चल रहा था लेकिन एक छोटी सी चूक ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। घटना के बाद घर में शोक का माहौल है और परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अलग अलग बीमारियों की दवाओं को बिना जांचे परखे लेना खतरनाक साबित हो सकता है। विशेष रूप से मधुमेह और ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों की दवाओं का असर शरीर पर अलग तरीके से पड़ता है। इसलिए दवा लेते समय पूरी सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।

    फिलहाल पुलिस हर पहलू को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यह घटना एक बार फिर दवा सेवन में सतर्कता की आवश्यकता की गंभीर याद दिलाती है।

  • दतिया दौरे पर योगी आदित्यनाथ ने पीतांबरा पीठ में की पूजा, सुरक्षा के चलते मंदिर खाली कराया गया

    दतिया दौरे पर योगी आदित्यनाथ ने पीतांबरा पीठ में की पूजा, सुरक्षा के चलते मंदिर खाली कराया गया


    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज मध्य प्रदेश के दतिया जिले पहुंचे जहां उनका दौरा धार्मिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा। उनके आगमन को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे और पूरे क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया था। दतिया हवाई पट्टी पर पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया और उन्हें बुके भेंट कर अभिनंदन किया।

    इसके बाद सीएम योगी सीधे मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध शक्तिपीठ पीतांबरा पीठ पहुंचे जहां उन्होंने मां बगलामुखी देवी के दर्शन कर विधि विधान से पूजा अर्चना की। मंदिर परिसर में ही स्थित प्राचीन वनखंडेश्वर महादेव का जलाभिषेक भी उन्होंने किया और देश तथा प्रदेश की समृद्धि और कल्याण की कामना की।

    इस दौरान मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी रही और वीआईपी मूवमेंट के चलते पूरे मंदिर क्षेत्र को आम श्रद्धालुओं के लिए अस्थायी रूप से खाली करा दिया गया। सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए श्रद्धालुओं के प्रवेश पर रोक लगा दी गई जिससे दूर दराज से आए भक्तों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा।
    कई श्रद्धालु एक घंटे से अधिक समय तक बाहर इंतजार करते रहे और तेज धूप में खड़े रहने के कारण उन्हें परेशानी झेलनी पड़ी। इस व्यवस्था को लेकर कुछ श्रद्धालुओं में नाराजगी भी देखने को मिली। वहीं दौरे के दौरान मीडिया कर्मियों को भी मुख्यमंत्री के करीब जाने की अनुमति नहीं दी गई और कवरेज को सीमित रखा गया।
    पूजा संपन्न होने के बाद सीएम योगी बिना मीडिया से बातचीत किए सीधे हवाई पट्टी की ओर रवाना हो गए। पूरा दौरा सुरक्षा और प्रोटोकॉल के सख्त घेरे में संपन्न हुआ जिससे एक ओर प्रशासनिक सतर्कता दिखी तो दूसरी ओर आम श्रद्धालुओं की असुविधा भी सामने आई।

  • सीएम मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर आज उज्जैन में: स्वच्छ भारत मिशन और आरडीएसएस योजना की करेंगे समीक्षा

    सीएम मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर आज उज्जैन में: स्वच्छ भारत मिशन और आरडीएसएस योजना की करेंगे समीक्षा


    मध्यप्रदेश । उज्जैन शुक्रवार को एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों का केंद्र बनने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय ऊर्जा एवं आवास-शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर शहर के दौरे पर पहुंचेंगे। दोनों नेता विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेने के साथ-साथ राज्य की महत्वपूर्ण विकास और जनकल्याण योजनाओं की समीक्षा भी करेंगे।

    जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के ओंकारेश्वर दौरे के कार्यक्रम में शामिल होने के बाद इंदौर एयरपोर्ट पर उन्हें विदाई देंगे। इसके बाद वे केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर के साथ इंदौर में निर्धारित कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे और वहां से उज्जैन के लिए रवाना होंगे। दोनों नेताओं के शाम करीब 4:30 बजे उज्जैन पहुंचने की संभावना है।

    उज्जैन पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री विभिन्न स्थानीय कार्यक्रमों में शामिल होंगे। कार्यक्रमों में कपिला गौशाला का दौरा भी प्रस्तावित माना जा रहा है। प्रशासन ने दोनों नेताओं के दौरे को देखते हुए सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के विशेष इंतजाम किए हैं।

    दौरे का मुख्य केंद्र प्रशासनिक संकुल भवन में आयोजित होने वाली दो महत्वपूर्ण राज्य स्तरीय समीक्षा बैठकें रहेंगी। पहली बैठक शाम 6 बजे आयोजित होगी, जिसमें स्वच्छ भारत मिशन के तहत प्रदेश में चल रहे कार्यों और उपलब्धियों की समीक्षा की जाएगी। बैठक में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता से जुड़े विभिन्न प्रोजेक्ट्स, कचरा प्रबंधन, साफ-सफाई अभियान और जनभागीदारी के प्रयासों पर चर्चा की जाएगी।

    इसके बाद दूसरी बैठक पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) को लेकर होगी। इस बैठक में प्रदेश में बिजली वितरण व्यवस्था को मजबूत बनाने, बिजली नुकसान कम करने, अधोसंरचना विकास और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने से जुड़े कार्यों की प्रगति का मूल्यांकन किया जाएगा। ऊर्जा क्षेत्र की इस महत्वपूर्ण योजना की समीक्षा में संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे।

    केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर की मौजूदगी को देखते हुए इन बैठकों को विशेष महत्व दिया जा रहा है। माना जा रहा है कि दोनों नेता प्रदेश में चल रही प्रमुख योजनाओं की प्रगति का आकलन करने के साथ आगामी कार्ययोजनाओं पर भी चर्चा करेंगे।

    उज्जैन में होने वाली ये बैठकें न केवल प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि प्रदेश में स्वच्छता, शहरी विकास और ऊर्जा क्षेत्र की योजनाओं को गति देने की दिशा में भी अहम मानी जा रही हैं। अधिकारियों को उम्मीद है कि इन बैठकों से कई परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी और आम जनता को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए नई दिशा तय होगी।

  • गोद भराई समारोह में जा रहे दो भाइयों की सड़क हादसे में मौत: ट्रैक्टर की टक्कर से परिवार की खुशियां मातम में बदलीं

    गोद भराई समारोह में जा रहे दो भाइयों की सड़क हादसे में मौत: ट्रैक्टर की टक्कर से परिवार की खुशियां मातम में बदलीं


    मध्यप्रदेश । उज्जैन जिले में गुरुवार को एक दर्दनाक सड़क हादसे ने एक परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया। भांजे के घर आयोजित गोद भराई समारोह में शामिल होने जा रहे दो सगे भाइयों की ट्रैक्टर की टक्कर से मौत हो गई, जबकि उनके साथ बाइक चला रहा पोता गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे की खबर मिलते ही पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई और जिस घर में उत्सव की तैयारियां चल रही थीं, वहां मातम का माहौल छा गया।

    जानकारी के अनुसार मरंडवा गांव निवासी 80 वर्षीय पीरूलाल मोथलिया और उनके छोटे भाई 75 वर्षीय भागीरथ मोथलिया अपने पोते अभिषेक के साथ बाइक से उज्जैन जा रहे थे। अभिषेक बाइक चला रहा था। तीनों नागझिरी क्षेत्र में रहने वाले अपने भांजे के यहां आयोजित गोद भराई कार्यक्रम में शामिल होने के लिए निकले थे। परिवार में इस कार्यक्रम को लेकर उत्साह का माहौल था, लेकिन रास्ते में हुए हादसे ने सब कुछ बदल दिया।

    बताया जा रहा है कि गांव से लगभग 25 से 30 किलोमीटर दूर मुख्य मार्ग पर पीछे से तेज रफ्तार में आए एक ट्रैक्टर ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक सवार तीनों लोग सड़क पर गिर पड़े और गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। राहगीरों और स्थानीय लोगों ने तत्काल घायलों को अस्पताल पहुंचाने में मदद की।

    अस्पताल ले जाते समय पीरूलाल मोथलिया ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। वहीं गंभीर रूप से घायल भागीरथ मोथलिया को उज्जैन के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान देर शाम उनकी भी मौत हो गई। हादसे में घायल अभिषेक का इलाज जारी है और उसकी हालत चिंताजनक बताई जा रही है। डॉक्टर उसकी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

    परिजनों ने बताया कि पीरूलाल मोथलिया खेती-किसानी का कार्य करते थे, जबकि भागीरथ मोथलिया मध्य प्रदेश विद्युत मंडल (एमपीईबी) से सेवानिवृत्त कर्मचारी थे। परिवार सामाजिक और शासकीय क्षेत्र में भी सक्रिय रहा है। परिवार का एक सदस्य वर्तमान में उज्जैन में पटवारी के पद पर कार्यरत है।

    हादसे की सूचना मिलते ही परिजन और ग्रामीण बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंच गए। शुक्रवार सुबह दोनों मृतकों का पोस्टमार्टम कराया गया, जिसके बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए। अंतिम संस्कार के लिए दोनों शवों को उनके पैतृक गांव ले जाया गया, जहां पूरे गांव ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी।

    पुलिस ने मामले में दुर्घटना का प्रकरण दर्ज कर लिया है और फरार ट्रैक्टर चालक की तलाश शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि हादसे के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार और लापरवाही को दुर्घटना का प्रमुख कारण माना जा रहा है।

    यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के पालन की आवश्यकता को रेखांकित करता है। एक परिवार जो खुशियों के समारोह में शामिल होने निकला था, वह कुछ ही पलों में अपनों को खोने के गहरे दुख में डूब गया।

  • MP के खिलाड़ियों को बड़ी सौगात: पुलिस में होगी सीधी भर्ती, 10 SI और 50 आरक्षक पदों पर मिलेगा मौका

    MP के खिलाड़ियों को बड़ी सौगात: पुलिस में होगी सीधी भर्ती, 10 SI और 50 आरक्षक पदों पर मिलेगा मौका


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश के खिलाड़ियों के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ी सौगात दी है। अब खेल मैदान में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी हासिल करने का सुनहरा अवसर मिलेगा। प्रदेश सरकार ने पुलिस विभाग में उत्कृष्ट खिलाड़ियों की सीधी भर्ती से संबंधित नियमों में संशोधन करते हुए नई व्यवस्था लागू कर दी है। इसके तहत उप निरीक्षक (SI) के 10 और आरक्षक के 50 पदों पर खिलाड़ियों की सीधी भर्ती की जाएगी।

    खास बात यह है कि वर्ष 2021 के बाद पहली बार खिलाड़ियों के लिए यह भर्ती प्रक्रिया दोबारा शुरू की जा रही है। सरकार का उद्देश्य खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना और उन्हें खेल उपलब्धियों के आधार पर सरकारी सेवा में अवसर प्रदान करना है। नए नियमों के अनुसार अब यह भर्ती प्रक्रिया नियमित रूप से हर वर्ष आयोजित की जाएगी।

    संशोधित नियम 2026 के तहत उप निरीक्षक (SI) पद के लिए केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी पात्र होंगे। ओलंपिक, एशियाई खेल, राष्ट्रमंडल खेल, विश्व कप और विश्व चैंपियनशिप जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले या पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को सीधी भर्ती का अवसर मिलेगा। इन प्रतियोगिताओं में स्वर्ण, रजत या कांस्य पदक हासिल करने वाले खिलाड़ियों को प्राथमिकता दी जाएगी।

    वहीं आरक्षक पद के लिए पात्रता का दायरा अपेक्षाकृत व्यापक रखा गया है। राष्ट्रीय खेलों और अधिकृत राष्ट्रीय चैंपियनशिप में पदक जीतने वाले खिलाड़ी आरक्षक भर्ती के लिए आवेदन कर सकेंगे। राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को इस योजना का लाभ मिलेगा। इसके अलावा जो खिलाड़ी SI पद की पात्रता पूरी करते हैं, उन्हें आरक्षक पद के लिए स्वतः पात्र माना जाएगा।

    सरकार का कहना है कि नियमों में किए गए संशोधन से चयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और प्रभावी बनाया गया है। इससे खिलाड़ियों को खेल उपलब्धियों का उचित सम्मान मिलेगा और युवाओं में खेलों के प्रति रुचि भी बढ़ेगी।

    प्रदेश सरकार ने इस संशोधित नियम को राजपत्र में प्रकाशित कर दिया है, जिससे यह आधिकारिक रूप से लागू हो गया है। इसके साथ ही पात्रता और चयन से जुड़े विस्तृत मापदंड भी निर्धारित कर दिए गए हैं।

    उल्लेखनीय है कि हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पुलिस भर्ती व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए प्रदेश में पुलिस भर्ती बोर्ड गठित करने की घोषणा भी की है। सरकार के अनुसार आगामी तीन वर्षों में पुलिस विभाग के 21 हजार से अधिक रिक्त पदों को भरा जाएगा। इनमें से लगभग 7,500 पदों पर भर्ती प्रक्रिया इसी वर्ष शुरू होने की संभावना है।

    खेल जगत से जुड़े लोगों का मानना है कि यह फैसला प्रदेश के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायक साबित होगा और उन्हें राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

  • मानसून की देरी से बढ़ी किसानों की मुश्किलें: खरगोन में हाईवे जाम, बड़वानी में 36 लाख की केले की फसल बर्बाद

    मानसून की देरी से बढ़ी किसानों की मुश्किलें: खरगोन में हाईवे जाम, बड़वानी में 36 लाख की केले की फसल बर्बाद


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून की दस्तक में हो रही देरी अब किसानों के लिए गंभीर चिंता का कारण बन गई है। प्रदेश के कई जिलों में खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो रही है, जबकि कहीं मौसम की मार किसानों की तैयार फसलों को तबाह कर रही है। शुक्रवार को खरगोन और बड़वानी से सामने आई तस्वीरों ने किसानों की परेशानी को और उजागर कर दिया।

    खरगोन जिले में जल संकट से परेशान किसानों ने नहर का पानी छोड़ने की मांग को लेकर खंडवा-बड़ौदा हाईवे पर चक्काजाम कर दिया। सुबह करीब 11:30 बजे 200 से अधिक किसान बैलगाड़ियां लेकर सड़क पर उतर आए और प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया। किसानों का कहना है कि क्षेत्र की वेदा, कुंदा और खारक नदियां लगभग सूख चुकी हैं, जिससे खेतों में सिंचाई का संकट गहरा गया है।

    प्रदर्शन कर रहे किसानों का कहना है कि मृग नक्षत्र शुरू हुए करीब दो सप्ताह होने को हैं, लेकिन पर्याप्त बारिश नहीं होने से खेतों में नमी नहीं बन पा रही है। अधिकांश किसानों ने खेतों की जुताई और अन्य तैयारियां पूरी कर ली हैं, लेकिन बारिश नहीं होने के कारण बुवाई शुरू नहीं हो पा रही है। किसानों को डर है कि यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा।

    दूसरी ओर बड़वानी जिले के खड़की क्षेत्र में मौसम की बेरुखी ने दो किसान भाइयों को भारी नुकसान पहुंचाया है। तेज आंधी और बारिश के कारण अंबाराम और गंगाराम की करीब 9 एकड़ में लगी केले की तैयार फसल पूरी तरह नष्ट हो गई। बाजार में बिक्री के लिए तैयार लगभग 1500 केले के पौधे जमीन पर गिर गए।

    किसानों के अनुसार इस फसल पर करीब 14 लाख रुपए की लागत आई थी, जबकि कुल नुकसान 36 लाख रुपए तक पहुंच गया है। अचानक हुए इस भारी नुकसान का सदमा किसान अंबाराम सहन नहीं कर पाए और उनकी तबीयत बिगड़ गई। उन्हें तत्काल राजपुर स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। पीड़ित किसानों ने प्रशासन से फसल सर्वे कराकर उचित मुआवजा देने की मांग की है।

    प्रदेश में कम बारिश के कारण खरीफ सीजन की प्रमुख फसलें जैसे सोयाबीन, उड़द, मूंग और तुअर की बुवाई भी प्रभावित हो रही है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि सफल बुवाई के लिए जमीन में पर्याप्त नमी जरूरी है। इसके लिए कम से कम 100 मिलीमीटर बारिश की आवश्यकता होती है। ऐसे में किसानों को जल्दबाजी में बोवनी करने से बचना चाहिए, क्योंकि पर्याप्त नमी नहीं होने पर बीज खराब होने का खतरा बढ़ जाता है।

    मौसम विभाग के अनुसार 1 जून से अब तक मध्य प्रदेश में सामान्य से लगभग 39 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में स्थिति और अधिक चिंताजनक बनी हुई है। हालांकि मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में सक्रिय मौसम प्रणालियों के कारण आने वाले दिनों में कई जिलों में आंधी और बारिश का दौर जारी रह सकता है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक यदि अगले कुछ दिनों में मानसून सक्रिय नहीं हुआ तो खरीफ सीजन पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है। फिलहाल प्रदेशभर के किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए बारिश का इंतजार कर रहे हैं।