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  • ग्वालियर में दुष्कर्म का मामला, अश्लील वीडियो की धमकी से पीड़िता दहशत में

    ग्वालियर में दुष्कर्म का मामला, अश्लील वीडियो की धमकी से पीड़िता दहशत में


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर के थाटीपुर थाना क्षेत्र से एक गंभीर आपराधिक मामला सामने आया है, जहां 20 वर्षीय युवती ने पड़ोस में रहने वाले एक युवक पर घर में घुसकर दुष्कर्म करने और अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने का आरोप लगाया है। पीड़िता की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    जानकारी के अनुसार, पीड़िता अपनी मां के साथ किराए के मकान में रहती थी। दिसंबर माह में उसकी मां का निधन हो गया था, जिसके बाद वह घर में अकेली रह गई थी, जबकि उसके पिता ड्राइवर होने के कारण अक्सर बाहर रहते हैं। इसी स्थिति का फायदा उठाकर आरोपी युवक ने कथित रूप से वारदात को अंजाम दिया।

    पीड़िता ने पुलिस को बताया कि पड़ोस में रहने वाला युवक अभिषेक धनौलिया अक्सर उसके घर आता-जाता था और परिवार के संपर्क में था। इसी दौरान उसकी नीयत बिगड़ गई और उसने युवती को अकेला पाकर वारदात की साजिश रची।

    करीब एक महीने पहले रात लगभग 12 बजे आरोपी कथित रूप से युवती के कमरे में घुस आया और जान से मारने की धमकी देकर उसके साथ दुष्कर्म किया। इस दौरान उसने पीड़िता का अश्लील वीडियो भी बना लिया। घटना के बाद युवती डर के कारण चुप रही और किसी को कुछ नहीं बताया।

    इसके बाद आरोपी लगातार वीडियो वायरल करने की धमकी देकर युवती का शोषण करता रहा। शिकायत के अनुसार, आरोपी ने कई बार युवती के साथ दुष्कर्म किया और उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। 9 मई 2026 की रात भी उसने कथित रूप से वारदात को दोहराया।

    लगातार बढ़ते दबाव और धमकियों के बीच पीड़िता ने आखिरकार अपने पिता को पूरी घटना बताई। इसके बाद वह अपने पिता के साथ गोला का मंदिर थाने पहुंची और शिकायत दर्ज कराई।

    पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म, धमकी और ब्लैकमेलिंग की धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारी का कहना है कि पूरे मामले की गहन जांच की जा रही है और जल्द ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • संदिग्ध फूड पॉइजनिंग: एक मौत और तीन लोग बीमार, जांच में जुटा प्रशासन

    संदिग्ध फूड पॉइजनिंग: एक मौत और तीन लोग बीमार, जांच में जुटा प्रशासन


    मध्य प्रदेश । सतना जिले के उचेहरा ब्लॉक में फूड पॉइजनिंग का दर्दनाक मामला सामने आया है, जिसमें 7 साल के बच्चे की मौत हो गई, जबकि परिवार के तीन अन्य सदस्य गंभीर रूप से बीमार हैं। घटना के बाद गांव में दहशत का माहौल है और स्वास्थ्य विभाग जांच में जुट गया है।

    परिजनों के मुताबिक, 20 मई की रात परिवार ने घर में बनी करेले की सब्जी और रोटी खाई थी। इसके बाद सभी ने बेल का शरबत भी पिया। कुछ ही घंटों बाद सभी की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। सात साल के किशुन को तेज उल्टी-दस्त शुरू हुए और हालत इतनी बिगड़ गई कि सुबह अस्पताल ले जाने से पहले ही उसकी मौत हो गई।

    परिवार के अन्य सदस्य दादा बाबूलाल दहिया, दादी शांति बाई और भाई शिवम भी उल्टी-दस्त और चक्कर की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती हैं। इनमें से दो की हालत अभी भी गंभीर बताई जा रही है।

    डॉक्टरों के अनुसार यह स्पष्ट रूप से फूड पॉइजनिंग का मामला है और सभी मरीजों में सीवियर डायरिया के लक्षण पाए गए हैं। वहीं प्रशासन अब यह पता लगाने में जुटा है कि जहर किस वजह से फैला।

    जांच में तीन अलग-अलग संभावनाएं सामने आ रही हैं। पहली आशंका यह है कि घर के पीछे लगी बगिया में जिन करेले के पौधों पर हाल ही में कीटनाशक का छिड़काव किया गया था, उन्हीं सब्जियों का उपयोग खाना बनाने में किया गया। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि यह सबसे मजबूत वजह हो सकती है।

    दूसरी तरफ परिजनों का कहना है कि सब्जी खाने के बाद बेल का शरबत पीने के तुरंत बाद सभी की हालत बिगड़ी, जिससे शरबत की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। वहीं गांव के कुछ लोग कुएं के दूषित पानी को भी संभावित कारण मान रहे हैं, हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने शुरुआती तौर पर इस थ्योरी को कम संभावना वाला बताया है।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए पीएचई और स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव पहुंच चुकी है। कुएं के पानी के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं और बचे हुए स्रोतों की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों ने ग्रामीणों को सतर्क रहने, पानी उबालकर पीने और कीटनाशक लगे खेतों की सब्जियों का उपयोग तुरंत बंद करने की सलाह दी है। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के असली कारण की पुष्टि हो सकेगी।

  • सीहोर में कुपोषण का बड़ा खुलासा: 605 बच्चे गंभीर स्थिति में

    सीहोर में कुपोषण का बड़ा खुलासा: 605 बच्चे गंभीर स्थिति में


    मध्यप्रदेश । सीहोर जिले में बच्चों के पोषण स्तर को लेकर एक गंभीर और चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। जिला अस्पताल में महिला एवं बाल विकास विभाग और स्वास्थ्य विभाग द्वारा ‘एक कदम सुपोषण की ओर’ अभियान के तहत कुपोषित बच्चों को पोषण टोकरियां वितरित की गईं, लेकिन सरकारी आंकड़े ही इस दावे पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

    जिले में फिलहाल 605 बच्चे गंभीर रूप से कुपोषित (Severe Acute Malnutrition – SAM) श्रेणी में चिन्हित किए गए हैं, जिन्हें तत्काल विशेष पोषण और चिकित्सकीय देखभाल की आवश्यकता है। इसके बावजूद प्रशासन द्वारा सुपोषण सुधार के दावे किए जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, जमीनी हकीकत इससे काफी अलग नजर आती है।

    केंद्र सरकार के पोषण ट्रैकर ऐप पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा बच्चों के वजन और ऊंचाई की नियमित एंट्री की जाती है, लेकिन इस प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि कई स्थानों पर लक्ष्य पूरा करने के लिए आंकड़े वास्तविकता से अलग दर्ज किए जा रहे हैं। नतीजतन, कई बच्चे जो ऐप पर सामान्य या कम कुपोषित दिखाए जाते हैं, वे अस्पताल पहुंचने पर गंभीर कुपोषण की स्थिति में पाए जाते हैं।

    स्थिति और अधिक गंभीर इसलिए हो जाती है क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में तैनात कर्मचारियों को कई व्यावहारिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। संसाधनों की कमी, खराब या अनुपलब्ध मोबाइल उपकरण और दूरस्थ इलाकों में नेटवर्क की समस्या के कारण पोषण ट्रैकर ऐप पर सटीक डेटा एंट्री करना मुश्किल हो जाता है। इसके चलते कागजों पर स्थिति भले ही सुधरी हुई दिखती हो, लेकिन वास्तविकता इसके विपरीत रहती है।

    जिला अस्पताल स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) में लगातार कुपोषण और एनीमिया से पीड़ित बच्चों की संख्या बनी हुई है, जो इस बात का संकेत है कि जमीनी स्तर पर सुधार की गति बेहद धीमी है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल आंकड़ों के भरोसे स्थिति को बेहतर नहीं माना जा सकता, बल्कि वास्तविक पोषण और चिकित्सा सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना जरूरी है।

    सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इन 605 गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को तत्काल उपचार और नियमित पोषण सपोर्ट की आवश्यकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय पर हस्तक्षेप नहीं किया गया तो इन बच्चों का स्वास्थ्य और अधिक बिगड़ सकता है।

    वहीं, महिला बाल विकास विभाग की ओर से चलाए जा रहे अभियान के तहत समय-समय पर पोषण टोकरियां वितरित की जा रही हैं। शहरी बाल विकास परियोजना अधिकारी बीएल मालवीय ने बताया कि अभियान का उद्देश्य बच्चों के पोषण स्तर में सुधार लाना है और इस दौरान स्वास्थ्य परीक्षण भी किया गया है।

    हालांकि, जमीनी स्तर पर मौजूद चुनौतियां और आंकड़ों की विसंगति यह संकेत देती हैं कि केवल वितरण कार्यक्रमों से कुपोषण जैसी गंभीर समस्या का समाधान संभव नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक डेटा पारदर्शिता, नियमित मॉनिटरिंग और ग्रामीण स्तर पर मजबूत स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित नहीं की जातीं, तब तक स्थिति में बड़ा बदलाव मुश्किल है।

  • रॉन्ग साइड से आया वाहन बना हादसे की वजह, बड़वानी में चार घायल

    रॉन्ग साइड से आया वाहन बना हादसे की वजह, बड़वानी में चार घायल


    मध्य प्रदेश । बड़वानी जिले में सड़क सुरक्षा की लापरवाही एक बार फिर सामने आई है, जहां बुधवार देर रात दो अलग-अलग सड़क हादसों में कुल चार लोग घायल हो गए। दोनों ही घटनाओं में स्थानीय लोगों की तत्परता से घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

    पहला हादसा शहर के सांवरिया मंदिर के सामने हुआ, जहां दर्शन कर लौट रहे श्रद्धालु एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना का शिकार हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अर्चना पति निलेश, हंसिका और मंथन बाइक पर सवार होकर मंदिर से लौट रहे थे। इसी दौरान रॉन्ग साइड से तेज रफ्तार में आ रहे एक छोटा हाथी वाहन ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी तेज थी कि तीनों लोग सड़क पर गिरकर घायल हो गए।

    स्थानीय लोगों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर घायलों की मदद की और 108 एम्बुलेंस को सूचना दी। घायलों को तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया गया। प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि इस मार्ग पर कई वाहन चालक लगातार लापरवाही से रॉन्ग साइड ड्राइविंग करते हैं, जिससे आए दिन दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है।

    दूसरा हादसा राजघाट रोड स्थित सर्किट हाउस के पास हुआ, जहां ईंट भट्टे से निकलने वाले घने धुएं ने एक युवक की जान पर भारी संकट खड़ा कर दिया। कुकरा बसाहट निवासी संजय वर्मा ने बताया कि ईंट भट्टे का धुआं सड़क पर फैलने के कारण दृश्यता काफी कम हो जाती है।

    इसी दौरान 17 वर्षीय अखिलेश केवट, जो मछली पकड़कर बाइक से घर लौट रहे थे, धुएं के कारण रास्ता ठीक से न देख पाने की वजह से दुर्घटना का शिकार हो गए। हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हो गए और उन्हें साईं अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत नाजुक बनी हुई है।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि इस क्षेत्र में रेत और मिट्टी से भरे डंपरों की लगातार आवाजाही के कारण भी भारी मात्रा में धूल उड़ती रहती है, जिससे सड़क पर दृश्यता और सुरक्षा दोनों प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि ईंट भट्टों और भारी वाहनों पर सख्त नियंत्रण लगाया जाए, ताकि इस तरह की घटनाओं पर रोक लग सके।

    जिला अस्पताल के ड्यूटी डॉक्टर के अनुसार, सभी घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद भर्ती किया गया है और उनकी स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। दोनों हादसों ने एक बार फिर क्षेत्र में सड़क सुरक्षा और प्रदूषण नियंत्रण की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • आवारा कुत्तों का आतंक: जबलपुर में मासूम बहनों पर हमला, इलाके में दहशत

    आवारा कुत्तों का आतंक: जबलपुर में मासूम बहनों पर हमला, इलाके में दहशत


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के पाटन तहसील अंतर्गत आगासौद गांव में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक आवारा कुत्ते ने घर के बाहर खेल रही मासूम बच्ची पर हमला कर दिया और उसे बुरी तरह नोच डाला। यह घटना उस समय हुई जब तीन वर्षीय बच्ची प्राची घर के बाहर खेल रही थी।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बच्ची की चीख सुनकर उसकी मां सुलोचना बाहर दौड़ी और लाठी लेकर कुत्ते को भगाने की कोशिश की। जैसे ही मां ने बड़ी बेटी को किसी तरह बचाया, कुत्ता अचानक घर के अंदर घुस गया और वहां जमीन पर सो रही छह माह की दूसरी बच्ची पर झपट पड़ा। कुत्ते ने मासूम को जबड़े में दबोच लिया, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

    मां की चीख-पुकार सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और किसी तरह कुत्ते को भगाकर दोनों बच्चियों को उसके चंगुल से छुड़ाया। इस हमले में दोनों बच्चियां गंभीर रूप से घायल हो गईं, जिनके चेहरे, हाथ और शरीर के अन्य हिस्सों पर गहरे घाव आए हैं।

    परिजन तुरंत दोनों को पाटन स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे, जहां प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर होने पर उन्हें जबलपुर रेफर कर दिया गया। फिलहाल दोनों मासूमों का इलाज शहर के एक निजी अस्पताल में जारी है और डॉक्टरों की टीम उनकी हालत पर नजर बनाए हुए है।

    घटना के बाद गांव में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों ने आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या पर नाराजगी जताते हुए प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में आवारा श्वानों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है, लेकिन नगर निगम की ओर से प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। कई इलाकों में लोग बच्चों को अकेले बाहर भेजने से डरने लगे हैं।

    इसी बीच स्वास्थ्य विभाग ने भी कुत्ते के काटने की स्थिति में तुरंत उपचार लेने की अपील की है। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे मामलों में समय पर रेबीज का टीका लगवाना बेहद जरूरी है, अन्यथा गंभीर संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।

    यह घटना एक बार फिर शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में आवारा कुत्तों की समस्या और उसके समाधान पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

  • ग्वालियर में घरेलू विवाद के बाद दर्दनाक हादसा: पत्नी ने फांसी लगाई, इलाज के दौरान मौत

    ग्वालियर में घरेलू विवाद के बाद दर्दनाक हादसा: पत्नी ने फांसी लगाई, इलाज के दौरान मौत



    ग्वालियर। ग्वालियर के थाटीपुर थाना क्षेत्र स्थित सुरेश नगर सरकारी मल्टी में पति-पत्नी के बीच देर से घर आने को लेकर हुआ विवाद एक दर्दनाक घटना में बदल गया। बहस के बाद पत्नी ने कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई, जिससे परिवार में मातम छा गया।

    देर से घर आने पर शुरू हुआ विवाद
    जानकारी के मुताबिक, रविवार रात करीब 11 बजे रामचंद्र आदिवासी घर पहुंचे थे। देर से आने पर पत्नी सोनम ने उनसे सवाल किए, जिसके बाद दोनों के बीच बच्चों के सामने बहस हो गई।

    विवाद इतना बढ़ गया कि रामचंद्र गुस्से में घर से बाहर चले गए। इसी दौरान पत्नी सोनम कमरे में गई और अंदर से दरवाजा बंद कर लिया।

    बच्चों ने दी दर्दनाक सूचना
    कुछ देर बाद बड़ा बेटा ओम रोते हुए बाहर आया और पिता को बताया कि मां पंखे से लटकी हुई है। यह सुनकर पिता तुरंत घर की ओर दौड़े।दरवाजा अंदर से बंद होने के कारण परिजनों ने पड़ोसियों की मदद से दीवार तोड़ी और अंदर दाखिल हुए।

    अस्पताल में इलाज के दौरान मौत
    परिजन सोनम को तुरंत नजदीकी निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने करीब 26 मिनट के इलाज के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद बच्चों और परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।

    पुलिस ने शुरू की जांच
    घटना की सूचना मिलने पर थाटीपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मर्ग कायम कर लिया।थाना प्रभारी विपेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि शुरुआती जांच में मामला घरेलू विवाद का प्रतीत हो रहा है। परिजनों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

    घरेलू विवाद बना जानलेवा
    यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि छोटे-छोटे घरेलू विवाद भी कई बार गंभीर और दुखद परिणाम दे सकते हैं। पुलिस पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही है।

  • काफिला विवाद के बाद नेताओं को CM की सीख: ‘कोई भड़काए तो खुद संभलना होगा’, BJP ने दिखाई सख्ती

    काफिला विवाद के बाद नेताओं को CM की सीख: ‘कोई भड़काए तो खुद संभलना होगा’, BJP ने दिखाई सख्ती



    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में निगम, मंडल, बोर्ड और प्राधिकरणों में नियुक्त नेताओं के काफिला और शक्ति प्रदर्शन विवाद के बाद अब सरकार और संगठन पूरी तरह सतर्क नजर आ रहे हैं। भोपाल में आयोजित विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने साफ संदेश दिया कि नेताओं को खुद अनुशासन में रहना होगा और किसी के उकसावे में आने से बचना होगा।

    CM बोले- सोशल मीडिया की ‘तीसरी आंख’ सब देख रही
    प्रशिक्षण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि आज सोशल मीडिया हर गतिविधि पर नजर रखता है। नेताओं को समझदारी और संयम के साथ काम करना होगा।उन्होंने कहा, “अगर कोई आपको उलझाए या भड़काए तो उससे बचना आपको ही है। कोई दूसरा आपका मददगार नहीं होगा। आप खुद जवाबदार हैं।”

    मुख्यमंत्री ने नेताओं को सलाह दी कि शुरुआत के एक-दो महीने काम को समझने और सीखने में लगाएं। नियम-कानून के दायरे में रहकर काम करें और अपने संस्थानों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रयास करें।

    उन्होंने यह भी कहा कि अहंकार से केवल नुकसान होगा। सरकार जब चाहे जिम्मेदारी बदल सकती है, इसलिए पद को सेवा का माध्यम मानकर काम करें।

    हेमंत खंडेलवाल बोले- दुखी मन से करनी पड़ी कार्रवाई
    Hemant Khandelwal ने हालिया विवादों का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ घटनाओं की वजह से संगठन को दुखी मन से कार्रवाई करनी पड़ी।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi की अपेक्षा है कि पार्टी के लोग ताकतवर बनें, लेकिन उस ताकत का इस्तेमाल जनता और कार्यकर्ताओं की सेवा के लिए होना चाहिए।

    खंडेलवाल ने कहा कि निगम-मंडलों में नियुक्त सभी लोगों का चयन मेरिट के आधार पर हुआ है और संगठन उनसे अनुशासन तथा जिम्मेदारी की अपेक्षा करता है।

    प्रदेश प्रभारी की चेतावनी- रोज जाएगी रिपोर्ट
    बीजेपी प्रदेश प्रभारी Mahendra Singh ने नेताओं को साफ तौर पर चेतावनी दी कि अब उनके कामकाज और व्यवहार की नियमित मॉनिटरिंग होगी।

    उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री तक रोज रिपोर्ट पहुंचेगी कि कौन क्या कर रहा है, उसका व्यवहार कैसा है और परिवार की भूमिका कितनी है। सरकार और संगठन दोनों मिलकर परफॉर्मेंस का मूल्यांकन करेंगे।साथ ही नेताओं को सोशल मीडिया सक्रिय रखने, अनुशासन बनाए रखने और सादगीपूर्ण जीवनशैली अपनाने की सलाह भी दी गई।

    18 विभागों के अधिकारियों ने दी ट्रेनिंग
    प्रशिक्षण कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। नेताओं को वित्तीय प्रबंधन, प्रशासनिक प्रक्रिया, अधिकार, जिम्मेदारियां और विभागीय समन्वय को लेकर विस्तार से जानकारी दी गई।

    अधिकारियों ने समझाया कि निगम-मंडलों में काम करते समय सरकारी नियमों और प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन कैसे करना है ताकि शासन व्यवस्था प्रभावित न हो।

    काफिला और शक्ति प्रदर्शन बना था विवाद की वजह
    हाल ही में कई निगम-मंडल अध्यक्षों द्वारा पदभार ग्रहण करने के दौरान बड़े-बड़े काफिले और वाहन रैलियां निकाली गई थीं। इनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बीजेपी संगठन को दिल्ली स्तर तक नाराजगी झेलनी पड़ी थी।

    इसके बाद पार्टी ने सख्त रुख अपनाते हुए भिंड किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष सज्जन सिंह ठाकुर को पद से हटा दिया। वहीं पाठ्यपुस्तक निगम के अध्यक्ष सौभाग्य सिंह ठाकुर को नोटिस जारी कर उनके अधिकार फिलहाल फ्रीज कर दिए गए।

    मंत्रियों और अफसरों से टकराव रोकने की तैयारी
    सरकार नहीं चाहती कि निगम-मंडलों में नियुक्त नेताओं और विभागीय मंत्रियों या अफसरों के बीच अधिकारों को लेकर टकराव की स्थिति बने। इसी वजह से प्रशिक्षण में अधिकारों की सीमा और प्रशासनिक प्रक्रिया को विस्तार से समझाया गया।

  • उमरिया सड़क हादसा: आमने-सामने टक्कर के बाद दो मौतें, लापरवाही पर परिजनों का आक्रोश

    उमरिया सड़क हादसा: आमने-सामने टक्कर के बाद दो मौतें, लापरवाही पर परिजनों का आक्रोश

    मध्यप्रदेश के उमरिया जिले में एक दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। स्टेट हाईवे पर हुई कार और बाइक की आमने-सामने की जोरदार टक्कर में दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। यह घटना इतनी भीषण थी कि टक्कर के बाद दोनों वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए और घटनास्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हादसे के बाद स्थानीय लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो गई और राहत कार्य शुरू किया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

    यह हादसा मानपुर-ताला सड़क मार्ग पर स्थित ज्वालामुखी मोड़ के पास हुआ बताया जा रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कार और बाइक के बीच टक्कर इतनी तेज थी कि बाइक सवार सड़क पर दूर जा गिरे, जबकि कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पेड़ से टकरा गई। टक्कर के प्रभाव से दोनों वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए और स्थिति बेहद गंभीर हो गई। घटना के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और स्थानीय लोग तुरंत मदद के लिए आगे आए, लेकिन घायलों की हालत पहले ही नाजुक हो चुकी थी।

    हादसे के बाद सबसे गंभीर आरोप यह सामने आए हैं कि घायलों को समय पर उचित चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पाई। परिजनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते एंबुलेंस और प्राथमिक इलाज उपलब्ध हो जाता तो जान बचाई जा सकती थी। इस आरोप ने पूरे मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है और वे इसे गंभीर लापरवाही मान रहे हैं।

    घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। साथ ही दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक तौर पर माना जा रहा है कि तेज रफ्तार और लापरवाही इस हादसे का मुख्य कारण हो सकती है, हालांकि पुलिस सभी पहलुओं से जांच कर रही है।

    इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीण और स्थानीय क्षेत्रों में समय पर स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता को लेकर अक्सर शिकायतें सामने आती रही हैं, और यह हादसा भी उसी समस्या की ओर इशारा करता है। लोगों का कहना है कि हाईवे पर दुर्घटनाओं के बाद त्वरित सहायता प्रणाली को और मजबूत करने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं में जानमाल के नुकसान को कम किया जा सके।

    फिलहाल पूरे इलाके में शोक का माहौल है और मृतकों के परिवार गहरे सदमे में हैं। प्रशासन ने मामले की जांच का आश्वासन दिया है, लेकिन स्थानीय लोग जवाबदेही और बेहतर आपातकालीन व्यवस्था की मांग कर रहे हैं। यह हादसा न केवल दो परिवारों के लिए अपूरणीय क्षति छोड़ गया है, बल्कि पूरे क्षेत्र को सड़क सुरक्षा की गंभीरता पर सोचने के लिए मजबूर कर गया है।

  • भोजशाला की पहचान अब स्पष्ट': हाईकोर्ट की बड़ी मुहर, हिंदुओं की आस्था की हुई जीत

    भोजशाला की पहचान अब स्पष्ट': हाईकोर्ट की बड़ी मुहर, हिंदुओं की आस्था की हुई जीत


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के चर्चित धार भोजशाला विवाद मामले में शुक्रवार को बड़ा फैसला सामने आया। Madhya Pradesh High Court की इंदौर बेंच ने अपने फैसले में भोजशाला परिसर को हिंदू मंदिर माना और हिंदुओं को वहां पूजा करने का अधिकार दिए जाने की बात कही। अदालत ने कहा कि यह स्थान परमार वंश के राजा भोज के समय संस्कृत शिक्षा का प्रमुख केंद्र और देवी सरस्वती का मंदिर था।

    कोर्ट ने कहा कि पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) की रिपोर्ट और वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया है। अदालत ने यह भी माना कि पुरातत्व एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है और उसके निष्कर्षों पर भरोसा किया जा सकता है।

    कोर्ट ने क्या-क्या कहा?
    हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कई अहम बातें कहीं भोजशाला परिसर एक संरक्षित स्मारक है, यह मूल रूप से हिंदू मंदिर और संस्कृत शिक्षा केंद्र था, हिंदुओं को पूजा का अधिकार है, ASI परिसर का संरक्षण और प्रबंधन जारी रखेगा, सरकार संस्कृत शिक्षा की व्यवस्था पर भी विचार करे ,श्रद्धालुओं के लिए जरूरी सुविधाएं और सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, अदालत ने कहा कि ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व वाली संरचनाओं का संरक्षण करना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है।

    नमाज की अनुमति वाला आदेश रद्द
    हाईकोर्ट ने वर्ष 2003 में ASI द्वारा दिए गए उस आदेश को भी निरस्त कर दिया, जिसमें मुस्लिम पक्ष को भोजशाला परिसर में नमाज की अनुमति दी गई थी। हालांकि अदालत ने मुस्लिम पक्ष को यह छूट दी है कि वे नमाज के लिए धार जिले में अलग जमीन उपलब्ध कराने को लेकर सरकार से संपर्क कर सकते हैं।

    ASI सर्वे और वैज्ञानिक अध्ययन पर भरोसा
    कोर्ट ने साफ कहा कि ASI सर्वे और वैज्ञानिक अध्ययन में मिले तथ्यों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जज ने सुनवाई के दौरान सभी वकीलों का आभार जताते हुए कहा कि अदालत ने सभी तथ्यों, ASI एक्ट और संविधान के तहत मिले मौलिक अधिकारों को ध्यान में रखकर फैसला दिया है।

    लंबे समय से चल रहा था विवाद
    धार भोजशाला मामला लंबे समय से विवाद और कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा रहा है। हिंदू पक्ष लगातार इसे देवी सरस्वती का मंदिर और संस्कृत शिक्षा केंद्र बताता रहा, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे मस्जिद मानता था। अब हाईकोर्ट के इस फैसले को इस मामले में एक बड़ा और अहम निर्णय माना जा रहा है। प्रशासन ने फैसले के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है।

  • भोजशाला मामले में सामने आईं ऐतिहासिक तस्वीरें, हिंदू पक्ष ने बताए मंदिर से जुड़े प्रमाण

    भोजशाला मामले में सामने आईं ऐतिहासिक तस्वीरें, हिंदू पक्ष ने बताए मंदिर से जुड़े प्रमाण


    नई दिल्ली । मध्यप्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर दशकों से चला आ रहा विवाद एक बार फिर राष्ट्रीय बहस का केंद्र बन गया है। इंदौर हाईकोर्ट की खंडपीठ ने हालिया फैसले में भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को लेकर हिंदू पक्ष के दावों को महत्वपूर्ण आधार दिया है। हिंदू संगठनों का कहना है कि भोजशाला राजा भोज द्वारा स्थापित मां वाग्देवी यानी मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद मानता रहा है।

    यह विवाद 1990 के दशक से लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। पूजा और नमाज के अधिकार को लेकर कई बार तनाव की स्थिति भी बनी। प्रशासन ने हालात को संभालने के लिए अलग-अलग दिनों में पूजा और नमाज की व्यवस्था लागू की थी। मंगलवार को हिंदू पक्ष को पूजा की अनुमति दी जाती थी, जबकि शुक्रवार को मुस्लिम पक्ष नमाज अदा करता था।

    मामले ने नया मोड़ तब लिया जब वर्ष 2024 में हाईकोर्ट के आदेश पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने भोजशाला परिसर का वैज्ञानिक सर्वे कराया। लंबे समय तक चली इस जांच में परिसर से कई ऐसे अवशेष मिले, जिन्हें हिंदू धार्मिक और स्थापत्य परंपरा से जुड़ा बताया गया। रिपोर्ट में देवी-देवताओं की आकृतियां, प्राचीन मूर्तिकला, स्तंभों पर उकेरी गई कलाकृतियां और संस्कृत शिलालेखों का उल्लेख सामने आया।

    हिंदू पक्ष का दावा है कि ये सभी प्रमाण स्पष्ट करते हैं कि भोजशाला मूल रूप से मां वाग्देवी का मंदिर था, जिसे बाद में मस्जिद के रूप में उपयोग किया गया। ASI की रिपोर्ट में परिसर के कई स्तंभों और संरचनाओं को मंदिर वास्तुकला से जुड़ा बताया गया है। यही वजह है कि हाईकोर्ट का फैसला हिंदू पक्ष के लिए बड़ी कानूनी और धार्मिक जीत माना जा रहा है।

    वहीं, मुस्लिम पक्ष ने ASI रिपोर्ट और अदालत में पेश किए गए कई तथ्यों पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि भोजशाला लंबे समय से मस्जिद के रूप में उपयोग होती रही है और धार्मिक स्वरूप को लेकर केवल एक पक्ष के दावों के आधार पर निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

    फैसले के बाद धार जिले में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। प्रशासन सोशल मीडिया गतिविधियों पर भी नजर बनाए हुए है ताकि किसी प्रकार का तनाव न फैले। संवेदनशील इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

    भोजशाला विवाद केवल धार्मिक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पुरातात्विक महत्व का विषय बन चुका है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब देशभर में इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है। आने वाले दिनों में यह मामला और भी बड़े कानूनी और सामाजिक विमर्श का केंद्र बन सकता है।