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शिवपुरी में सफाई व्यवस्था की खुली पोल, नालियां जाम और सीवर चैंबर उफनाए, त्योहार से पहले बढ़ी लोगों की चिंता
शिवपुरी । मध्य प्रदेश के शिवपुरी में नवरात्र से पहले सफाई व्यवस्था को लेकर लोगों की परेशानी बढ़ गई है। शहर के कई इलाकों में नालियां जाम होने और सीवर चैंबर से गंदगी बाहर आने की शिकायतें सामने आई हैं। दुर्गा पंडालों और धार्मिक आयोजनों की तैयारियों के बीच साफ सफाई की स्थिति लोगों के लिए चिंता का विषय बन गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर पालिका में शिकायत करने के बाद भी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। ऐसे में वार्ड 30 के लोगों को खुद ही सफाई की जिम्मेदारी उठानी पड़ी। शनिवार को कॉलोनीवासियों ने झाड़ू उठाकर नालियों से कचरा निकालना शुरू कर दिया। इस घटना ने शहर की सफाई व्यवस्था और त्योहारों से पहले की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।जानकारी के मुताबिक कोलियों के मंदिर के पीछे स्थित नरिया क्षेत्र में लंबे समय से नालियों की सफाई नहीं हुई थी। नालियों में जमा कचरे और कीचड़ के कारण आसपास के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने इस समस्या को लेकर नगर पालिका में शिकायत भी की थी लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लगातार परेशानी झेलने के बाद लोगों ने इंतजार करने के बजाय खुद ही सफाई शुरू कर दी। कॉलोनीवासियों ने नालियों से कचरा निकाला और आसपास के क्षेत्र को साफ करने का प्रयास किया। नवरात्र जैसे धार्मिक पर्व से पहले लोगों को इस तरह सफाई करनी पड़ना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।शहर के माधव चौक के पास स्थित मां वैष्णो दरबार की झांकी के आसपास भी गंदगी की समस्या सामने आई है। यहां सीवर चैंबर से गंदगी बाहर आने के कारण स्थानीय लोगों और आयोजन समिति के सदस्यों की परेशानी बढ़ गई है। धार्मिक आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना रहती है। ऐसे में सीवर की गंदगी और आसपास फैला कचरा लोगों के लिए असुविधा पैदा कर सकता है। समिति के सदस्यों का कहना है कि उन्होंने इस समस्या को लेकर नगर पालिका और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग यानी पीएचई से कई बार शिकायत की है। इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो सका।आयोजन समिति के सदस्यों के मुताबिक उन्होंने प्रशासनिक स्तर पर भी अपनी बात पहुंचाने की कोशिश की। वे अपर कलेक्टर से भी मिले थे ताकि सीवर चैंबर की समस्या का जल्द समाधान हो सके। हालांकि उनके अनुसार अब तक राहत नहीं मिली है। समिति के सदस्यों का कहना है कि सीवर चैंबर की सफाई सामान्य झाड़ू या घरेलू उपकरणों से करना संभव नहीं है। इसके लिए संबंधित विभाग की टीम और जरूरी संसाधनों की आवश्यकता होती है। ऐसे में वे चाहते हैं कि जिम्मेदार विभाग समय रहते मौके पर पहुंचकर सफाई कराए।यह स्थिति तब सामने आई है जब केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने त्योहारों से पहले सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद शहर के कुछ इलाकों में नालियों और सीवर चैंबर की समस्या बने रहने से स्थानीय लोगों में नाराजगी है। लोगों की मांग है कि नगर पालिका और संबंधित विभाग केवल शिकायत मिलने के बाद ही नहीं बल्कि नियमित रूप से भी सफाई व्यवस्था की निगरानी करें।नवरात्र के दौरान दुर्गा पंडालों में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ जाती है। ऐसे में साफ सफाई और सीवर व्यवस्था दुरुस्त रखना जरूरी है। शिवपुरी के लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द कार्रवाई कर जाम नालियों और सीवर चैंबर की समस्या दूर करेगा ताकि धार्मिक आयोजन स्वच्छ वातावरण में हो सकें। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग शिकायतों पर कितनी जल्दी कार्रवाई करते हैं और त्योहार से पहले लोगों को राहत मिल पाती है या नहीं। -

बैंक से कर्ज लिया फिर भी मुफ्त रजिस्ट्री का फायदा, मध्य प्रदेश सरकार की योजना पर क्यों मचा घमासान
भोपाल। मध्य प्रदेश में आबादी भूमि की मुफ्त रजिस्ट्री कराने की सरकार की महत्वाकांक्षी योजना सवालों के घेरे में आ गई है। प्रदेश के करीब 50 लाख लोगों को उनकी आबादी भूमि का मालिकाना हक दिलाने के लिए सरकार ने 3800 करोड़ रुपये खर्च करने की मंजूरी दी है। सरकार का तर्क है कि रजिस्ट्री होने से लोगों को अपनी संपत्ति के दस्तावेज मिलेंगे और बैंक से कर्ज लेने जैसी सुविधाओं का लाभ उठाना आसान होगा। लेकिन राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में सामने आए आंकड़े इस योजना की जरूरत और प्रक्रिया को लेकर नए सवाल खड़े कर रहे हैं। रिकॉर्ड के मुताबिक स्वामित्व योजना के तहत अधिकार अभिलेख प्राप्त करने वाले 2102 हितग्राही पहले ही बैंकों से कुल 175 करोड़ 57 लाख रुपये से अधिक का कर्ज ले चुके हैं। इनमें कुछ भूखंडों पर करीब 17 करोड़ रुपये तक का ऋण दर्ज है।इस जानकारी के सामने आने के बाद सवाल उठ रहा है कि जब आबादी भूमि के अधिकार अभिलेख के आधार पर बैंक पहले ही कर्ज दे रहे हैं और संबंधित भूखंडों को बंधक भी बनाया जा चुका है तो अब मुफ्त रजिस्ट्री की व्यवस्था की जरूरत क्यों पड़ रही है। हालांकि सरकार की योजना का उद्देश्य केवल बैंक ऋण उपलब्ध कराना नहीं बल्कि लोगों को भूमि का विधिवत पंजीकृत मालिकाना हक दिलाना भी है। ऐसे में अधिकार अभिलेख और पंजीकृत स्वामित्व के बीच कानूनी अंतर को समझना जरूरी है। बैंक से कर्ज मिलना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि मुफ्त रजिस्ट्री की प्रक्रिया अनावश्यक है। लेकिन पहले से ऋण प्राप्त कर चुके हितग्राहियों के मामलों में नियमों और प्रक्रिया की स्पष्टता को लेकर सवाल जरूर उठ रहे हैं।राजस्व विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार रतलाम जिले की जावरा तहसील के टोलखेड़ी निवासी संजय के भूखंड पर 16 करोड़ 89 लाख रुपये से अधिक का कर्ज दर्ज है। खरगोन जिले के धनोरा में लक्ष्मीबाई और अन्य संबंधित हितग्राहियों के भूखंड पर भी करीब 16 करोड़ 81 लाख रुपये का ऋण दर्ज बताया गया है। इसके अलावा विदिशा जिले के गूलरखेड़ी में आकाश कटारे के भूखंड पर 96 लाख रुपये और देवास जिले के डबलचौकी में सुरेश अग्रवाल के भूखंड पर 52.20 लाख रुपये का कर्ज दर्ज है। इंदौर उज्जैन नीमच रतलाम मंदसौर सीहोर और कई अन्य जिलों में भी आबादी भूमि पर लाखों रुपये के ऋण दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।दरअसल अप्रैल 2022 में तत्कालीन भू-अभिलेख आयुक्त की ओर से राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति को पत्र भेजा गया था। इसमें आबादी भूमि को बंधक रखने और बंधक हटाने की प्रक्रिया को कृषि भूमि के खसरे की तरह अपनाने की बात कही गई थी। पत्र के अनुसार कर्ज की अदायगी नहीं होने पर बैंक को संबंधित संपत्ति पर कार्रवाई करने का अधिकार मिल सकता है। इसी व्यवस्था के आधार पर पिछले कुछ वर्षों में बैंकों ने आबादी भूमि पर ऋण देने की प्रक्रिया अपनाई। ऐसे में पहले से बंधक संपत्तियों की रजिस्ट्री के दौरान कानूनी प्रक्रिया और बैंक के हितों की सुरक्षा महत्वपूर्ण मुद्दे बन गए हैं।दूसरी ओर मुफ्त रजिस्ट्री की प्रक्रिया पटवारियों के विरोध के कारण भी अटकी हुई है। विवाद की मुख्य वजह रजिस्ट्री प्रक्रिया में पटवारियों को निष्पादक यानी एक्जीक्यूटर की भूमिका देना और उनकी व्यक्तिगत आईडी तथा कानूनी जिम्मेदारी से जुड़े सवाल हैं। सरकार ने पटवारियों को कानूनी संरक्षण देने और 17 सितंबर के बाद की गई कार्रवाई को शून्य करने पर सहमति जताई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात के बाद पटवारी संघ ने सोमवार से स्वामित्व योजना का काम शुरू करने की घोषणा की है।सरकार ने इस योजना के तहत करीब 50 लाख लोगों की आबादी भूमि की मुफ्त रजिस्ट्री कराने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए 3800 करोड़ रुपये के खर्च को मंजूरी दी गई है और कई राजस्व तथा अन्य अधिकारियों को पंजीयन से जुड़े अधिकार दिए गए हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि पहले से अधिकार अभिलेख और बैंक ऋण वाले भूखंडों की रजिस्ट्री किस प्रक्रिया से होगी और योजना को कानूनी विवादों से बचाते हुए समय पर कैसे पूरा किया जाएगा। योजना का वास्तविक लाभ तभी सामने आएगा जब हितग्राहियों को स्पष्ट स्वामित्व मिलेगा और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी होगी। -

झांसी-शिवपुरी हाईवे पर भीषण हादसा, मां-बाप की मौत से अनाथ हुए तीन बच्चे, 4 साल के मासूम पर टूटा दुखों का पहाड़
शिवपुरी । मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में झांसी-शिवपुरी हाईवे पर तेज रफ्तार कार की टक्कर से एक दंपती की मौत हो गई। दोनों सड़क की साफ-सफाई और रखरखाव के काम में लगे मजदूर थे। हादसे में पत्नी ने मौके पर ही दम तोड़ दिया जबकि गंभीर रूप से घायल पति की ग्वालियर में इलाज के दौरान मौत हो गई। इस दर्दनाक घटना ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। दंपती अपने पीछे चार साल के बेटे और 10 तथा 13 साल की दो बेटियों को छोड़ गए हैं। माता-पिता की मौत के बाद तीनों बच्चों के सिर से मां-बाप का साया उठ गया है।यह हादसा गुरुवार दोपहर करीब दो बजे दिनारा थाना क्षेत्र के ग्राम रामनगर में ऋषभ ढाबे के पास हुआ। पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार सिरसौद निवासी बलबीर लोधी हाईवे पर मेंटेनेंस और साफ-सफाई का काम करता है। घटना के समय उसके साथ सुपरवाइजर रमाकांत यादव समेत करीब दस मजदूर सड़क पर काम कर रहे थे। इसी दौरान दिनारा की ओर से एक अर्टिगा कार तेज रफ्तार से आई और सड़क किनारे काम कर रहे मजदूरों को टक्कर मार दी। टक्कर लगने से रामश्री बंशकार उनके पति धर्मेंद्र बंशकार और सीता देवी घायल हो गए।
हादसा इतना गंभीर था कि रामश्री बंशकार की मौके पर ही मौत हो गई। उनके पति धर्मेंद्र के दोनों पैरों में गंभीर चोटें आईं। वहीं सीता देवी के पैरों में भी चोट लगी। घटना के बाद मौके पर मौजूद मजदूरों में अफरा-तफरी मच गई। साथियों ने घायलों की मदद की और एंबुलेंस के जरिए उन्हें उपचार के लिए भेजा गया। धर्मेंद्र की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें पहले झांसी ले जाया गया। बाद में उनकी स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने ग्वालियर रेफर कर दिया। वहां रात में उपचार के दौरान उन्होंने भी दम तोड़ दिया।
दंपती की मौत की खबर से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। रामश्री और धर्मेंद्र के तीन छोटे बच्चे हैं। इनमें सबसे छोटा बेटा महज चार साल का है जबकि दोनों बेटियों की उम्र 10 और 13 साल बताई गई है। हादसे ने इन बच्चों से उनके माता-पिता दोनों छीन लिए। परिवार की रोजी-रोटी के लिए मेहनत करने वाले माता-पिता की असमय मौत के बाद बच्चों के भविष्य को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। गांव और आसपास के क्षेत्र में घटना को लेकर शोक का माहौल है।
टक्कर के कारण घटनास्थल पर खड़ी कंपनी की महिंद्रा कैंपर गाड़ी और एक हीरो सीडी डीलक्स बाइक भी क्षतिग्रस्त हो गईं। हादसे के समय गोमा विश्वकर्मा और रमाकांत यादव सहित अन्य मजदूर मौके पर मौजूद थे। उन्होंने दुर्घटना को होते देखा। सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का जायजा लिया। रामश्री के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए करैरा अस्पताल भेजा गया। मामले में फरियादी बलबीर लोधी की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है।
इस हादसे ने एक बार फिर हाईवे पर काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा का सवाल खड़ा कर दिया है। सड़क पर सफाई और रखरखाव के दौरान मजदूरों को तेज रफ्तार वाहनों से खतरा बना रहता है। ऐसे स्थानों पर वाहन चालकों की सावधानी और सुरक्षा इंतजाम बेहद जरूरी हैं। फिलहाल पुलिस दुर्घटना से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है और आगे की कार्रवाई की जा रही है।
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दोस्त को आखिरी ऑडियो भेजकर फंदे पर झूला नेपाल का युवक, भोपाल में नाबालिग गर्लफ्रेंड के साथ मिला शव, जांच में जुटी पुलिस
भोपाल । भोपाल की अरेरा कॉलोनी में एक युवक और नाबालिग लड़की की मौत का मामला सामने आने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई। दोनों के शव एक बंगले के सर्वेंट क्वार्टर में फंदे पर लटके मिले। मृतक युवक की उम्र 22 वर्ष बताई गई है और वह मूल रूप से नेपाल का रहने वाला था। वहीं उसके साथ मृत मिली लड़की 16 वर्ष की थी और हबीबगंज क्षेत्र की निवासी थी। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। शुरुआती जांच में मौत की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है।पुलिस के मुताबिक युवक की पहचान अमन सारूमगर के रूप में हुई है। वह अरेरा कॉलोनी के ई-7 क्षेत्र में एक बंगले के सर्वेंट क्वार्टर में रहता था। उसकी मां उसी बंगले में खाना बनाने का काम करती थीं। अमन अपने पिता के साथ भोपाल में 11 नंबर क्षेत्र स्थित गणेश मंदिर के पास फास्ट फूड का ठेला भी लगाता था। परिवार में उसका एक बड़ा भाई और छोटी बहन हैं। बताया गया है कि करीब एक सप्ताह पहले उसका परिवार नेपाल गया था। परिवार के बाहर होने के कारण अमन घर में अकेला रह रहा था।
घटना से पहले गुरुवार शाम अमन ने अपने दोस्त आर्यन से शराब लाने के लिए कहा था। दोस्त शराब पहुंचाने के बाद अपने कमरे पर लौट गया। रात करीब आठ बजे अमन ने उसे मोबाइल पर एक ऑडियो संदेश भेजा। इस संदेश में उसने दोस्त के प्रति आभार जताया और अलविदा कहा। संदेश सुनकर आर्यन को किसी अनहोनी की आशंका हुई और वह तुरंत अमन के कमरे पर पहुंचा। हालांकि कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था। जब उसने खिड़की से अंदर झांककर देखा तो अमन और लड़की फंदे पर लटके मिले। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार अमन और लड़की की पहचान करीब एक साल पहले इंस्टाग्राम के जरिए हुई थी। धीरे-धीरे दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और वे एक-दूसरे के करीब आ गए। लड़की दसवीं कक्षा में पढ़ती थी। वह अपने परिवार की इकलौती बेटी बताई गई है। उसके पिता कपड़े की दुकान पर सेल्समैन का काम करते हैं और परिवार में उसका एक बड़ा भाई भी है। दोनों की मौत की खबर मिलने के बाद परिवारों में शोक का माहौल है।पुलिस जांच के दौरान अमन के इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक प्रेगनेंसी टेस्ट किट की तस्वीर पोस्ट किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि इस तस्वीर का घटना से क्या संबंध है यह अभी स्पष्ट नहीं है। पुलिस ने फिलहाल इसे मौत की वजह घोषित नहीं किया है। किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले घटनाक्रम और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की जा रही है।
जांच अधिकारी सी अजय दुबे के मुताबिक दोनों शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए गांधी मेडिकल कॉलेज की मॉर्च्यूरी में रखवाया गया है। घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। पुलिस ऑडियो संदेश सहित घटना से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर किन परिस्थितियों में दोनों की मौत हुई। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही घटना के कारणों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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इंदौर में RE-2 सड़क का रास्ता साफ करने उतरा प्रशासन, 130 मकानों पर कार्रवाई से मचेगी हलचल, अब पूरी होगी अधूरी सड़क
इंदौर । इंदौर में RE-2 रोड के अधूरे हिस्से का निर्माण पूरा करने के लिए प्रशासन और नगर निगम ने एक बार फिर कार्रवाई शुरू कर दी है। बंगाली चौराहा से पीपल्याहाना के बीच बनने वाली इस सड़क के रास्ते में बाधक मकानों को हटाया जा रहा है। गुरुवार सुबह से भारी पुलिस बल की मौजूदगी में नगर निगम की टीम कार्रवाई में जुटी हुई है। जानकारी के मुताबिक सड़क निर्माण में बाधा बन रहे शेष 130 मकानों को हटाने की कार्रवाई की जा रही है। मौके पर नगर निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल अपर आयुक्त अभय राजनगांवकर और एसडीएम घनश्याम धनगर सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद हैं। पिछले दिनों कार्रवाई के दौरान पथराव की घटना सामने आने के बाद इस बार सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं ताकि अभियान के दौरान कानून व्यवस्था बनी रहे।RE-2 रोड इंदौर की महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में शामिल है। इसका उद्देश्य शहर के अलग-अलग क्षेत्रों के बीच आवागमन को बेहतर बनाना और प्रमुख मार्गों पर यातायात का दबाव कम करने के लिए एक वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध कराना है। सड़क निर्माण के लिए प्रशासन पहले भी कई चरणों में बाधक निर्माण हटाने की कार्रवाई कर चुका है। बिचौली कांकड़ शिव नगर और शिव दर्शन नगर क्षेत्र में रहने वाले परिवारों के व्यवस्थापन की प्रक्रिया भी इस परियोजना से जुड़ी हुई है। अब सड़क के शेष हिस्से को निर्माण के लिए खाली कराने के उद्देश्य से कार्रवाई आगे बढ़ाई जा रही है।
परियोजना के आंकड़ों के अनुसार RE-2 रोड की कुल लंबाई 4.25 किलोमीटर और चौड़ाई 45 मीटर है। इसमें से लगभग 3.20 किलोमीटर हिस्से का निर्माण पूरा हो चुका है जबकि करीब एक किलोमीटर हिस्सा बाधक निर्माण के कारण लंबे समय से अधूरा पड़ा है। इस परियोजना पर अब तक लगभग 55 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। शेष हिस्से का निर्माण पूरा होने के बाद सड़क को पूरी तरह उपयोग में लाने का रास्ता साफ हो सकता है। इससे स्थानीय लोगों को आवागमन के लिए अतिरिक्त मार्ग मिलने की उम्मीद है।
प्रशासन से पहले मिली जानकारी के अनुसार शिव नगर के 80 मकानों में 117 परिवार रहते हैं जबकि शिव दर्शन नगर के 55 मकानों में 72 परिवार निवासरत हैं। इन परिवारों का प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत नीलगिरि परिसर में व्यवस्थापन किया जाना है। वहीं पीपल्याहाना और बिचौली कांकड़ क्षेत्र के कई परिवारों को पहले ही आवास उपलब्ध कराए जा चुके हैं। ऐसे में सड़क निर्माण के साथ प्रभावित परिवारों के पुनर्वास का मुद्दा भी महत्वपूर्ण बना हुआ है। कार्रवाई के दौरान प्रभावित लोगों के लिए व्यवस्थापन की स्थिति और शेष परिवारों को मिलने वाली सुविधाएं भी अहम रहेंगी।
RE-2 रोड का अधूरा हिस्सा पूरा होने से भूरी टेकरी पीपल्याहाना बंगाली चौराहा और नायता मुंडला आरटीओ क्षेत्र के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है। फिलहाल सड़क निर्माण में बाधक मकानों को हटाने की कार्रवाई जारी है। परियोजना पूरी होने के बाद शहरवासियों को एक अतिरिक्त मार्ग मिल सकता है जिससे प्रमुख सड़कों पर यातायात का दबाव कम करने में मदद मिलेगी। अब इस परियोजना की प्रगति और प्रभावित परिवारों के व्यवस्थापन पर नजर रहेगी।
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कांग्रेस-BJP कार्यकर्ताओं के साथ हादसा, CM मोहन यादव की एक टिप्पणी से चौंके विधायक, मंत्री को कह दिया सेठ जी
सिलवानी । मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों विरोध प्रदर्शन से लेकर नेताओं के बयानों और नौकरशाही के अंदरूनी घटनाक्रम तक कई दिलचस्प मामले सामने आ रहे हैं। रायसेन के सिलवानी में कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान एक कार्यकर्ता आग की चपेट में आ गया तो ग्वालियर में भाजपा की सेवा ज्योति यात्रा के दौरान भी एक कार्यकर्ता झुलस गया। वहीं रतलाम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के एक संबोधन ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा छेड़ दी। उन्होंने मंत्री चैतन्य काश्यप को सेठ जी कहकर संबोधित किया तो रतलाम ग्रामीण के विधायक मथुरालाल डामर को पूर्व विधायक बता दिया। दूसरी ओर शत्रु संपत्ति को लेकर हुई सरकारी बैठक में एक प्रमुख सचिव के बचाव का मामला भी चर्चा में रहा।रायसेन जिले के सिलवानी में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और एसआईआर के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। इस दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला जलाया जा रहा था तभी अचानक आग भड़क उठी और एक कार्यकर्ता इसकी चपेट में आ गया। युवक के सिर और कपड़ों में आग लग गई। अचानक हुई घटना से घबराया कार्यकर्ता वहां से भागा। मौके पर मौजूद लोगों ने तत्परता दिखाते हुए आग बुझाई जिससे बड़ा हादसा टल गया। घटना का वीडियो भी सामने आया है। इस घटना ने एक बार फिर दिखाया कि राजनीतिक विरोध के दौरान उत्साह के साथ सुरक्षा का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है।
इधर ग्वालियर में भाजपा की सेवा ज्योति यात्रा के दौरान भी कुछ ऐसा ही घटनाक्रम हुआ। सांसद भरत सिंह कुशवाह मशाल लेकर चल रहे थे। इसी दौरान एक उत्साहित कार्यकर्ता सेवा ज्योति को यात्रा रथ पर स्थापित करने के लिए ऊपर चढ़ गया। जब उसे मशाल सौंपी जा रही थी तभी उसकी लौ से आग कार्यकर्ता के कपड़ों पर गिर गई। देखते ही देखते उसकी शर्ट जलने लगी। आसपास मौजूद लोगों ने उसे आग लगने की जानकारी दी जिसके बाद युवक ने किसी तरह आग बुझाई और नीचे उतर आया। इस घटना में सांसद भरत सिंह कुशवाह भी आग की चपेट में आने से बाल बाल बच गए। घटना का वीडियो सामने आने के बाद यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
उधर रतलाम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के वर्चुअल संबोधन ने अलग ही चर्चा पैदा कर दी। बलराम महोत्सव में उन्होंने मंत्री चैतन्य काश्यप को सेठ जी कहकर संबोधित किया और उनके लिए तालियां भी बजवाईं। इसके बाद रतलाम ग्रामीण के विधायक मथुरालाल डामर को पूर्व विधायक कह दिया। मुख्यमंत्री की जुबान फिसलने से विधायक के चेहरे के भाव देखने लायक हो गए। कार्यक्रम में रतलाम के महापौर प्रहलाद पटेल की गैरमौजूदगी पर भी मुख्यमंत्री ने चुटकी ली। उन्होंने कहा कि महापौर किसानों के कार्यक्रम में आने के बजाय अपना मैरिज गार्डन चला रहे हैं और नगर निगम भी संभाल रहे हैं। कुछ देर बाद महापौर पहुंचे तो मुख्यमंत्री ने उन्हें और उनके साथ आए नेता को राम लक्ष्मण कहकर संबोधित किया। उनके इस अंदाज की सियासी गलियारों में खूब चर्चा हो रही है।
इसी बीच शत्रु संपत्ति को लेकर हुई सरकारी बैठक में एक प्रमुख सचिव बिना पूरी तैयारी के पहुंच गए और मांगी गई जानकारी नहीं दे पाए। नाराजगी सामने आने पर उन्होंने जानकारी नहीं मिलने की बात कही लेकिन संबंधित अतिरिक्त मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि सूचना पहले ही भेजी जा चुकी थी। मामला बिगड़ता देख बैठक में मौजूद एक वरिष्ठ अधिकारी ने प्रमुख सचिव का बचाव किया और कहा कि उन्हें जानकारी नहीं मिली थी। इस तरह बैठक का माहौल संभल गया। मध्य प्रदेश में इन घटनाओं ने राजनीति के साथ प्रशासनिक गलियारों में भी चर्चाओं को हवा दे दी है।
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कांग्रेस की चुनावी तैयारी तेज, 30 दिन में खुलेगी संगठन की पोल, निष्क्रिय बूथों और नाराज कार्यकर्ताओं की होगी पहचान
भोपाल । भोपाल में करीब 930 करोड़ रुपये की कथित ठगी के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। इस मामले में आरोपी मोहित गोगिया के कथित बयान की कॉपी सामने आने के बाद प्रदेश की प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। गोगिया ने अपने बयान में मध्यप्रदेश के उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के ओएसडी दीपम रायचूरा पर शराब दुकानों का ठेका दिलाने के बदले एक करोड़ रुपये लेने का आरोप लगाया है। आरोपी का दावा है कि इसमें 50 लाख रुपये नकद दिए गए जबकि बाकी 50 लाख रुपये बैंक खाते के जरिए ट्रांसफर कराए गए। हालांकि ये आरोप फिलहाल आरोप ही हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। दीपम रायचूरा ने इन आरोपों को मनगढ़ंत बताते हुए खारिज किया है।गोगिया के कथित बयान के मुताबिक उसकी मुलाकात तनुजा सेठी ने दीपम रायचूरा से कराई थी। उस समय रायचूरा आबकारी विभाग में सहायक आबकारी आयुक्त के पद पर कार्यरत थे। आरोप है कि रायचूरा ने उसे दीपक दुबे से मिलवाया और बताया कि वही उसके कामकाज को देखेंगे। गोगिया ने दावा किया कि वर्ष 2024-25 में भोपाल के टीटी नगर क्षेत्र की दो शराब दुकानों का ठेका जसवंत कुमार के नाम पर दिलाने में मदद की गई। इसके बदले एक करोड़ रुपये दिए जाने का आरोप लगाया गया है।
कथित बयान में रकम के लेनदेन का भी जिक्र है। गोगिया के अनुसार 50 लाख रुपये नकद होशंगाबाद रोड स्थित शालीमार फोर्ट लेजा के एक फ्लैट में दिए गए थे। वहीं बाकी 50 लाख रुपये आईएसबीटी के पास स्थित एक होटल के बैंक खाते में ट्रांसफर कराने का आरोप है। बयान में यह भी दावा किया गया है कि शराब दुकानों के ठेके के लिए जरूरी बैंक गारंटी से संबंधित फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट रसीद यानी एफडीआर को मंजूरी दिलाने में मदद की गई। इन आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित दस्तावेजों और लेनदेन की जांच अहम हो सकती है।
मोहित गोगिया ने अपने कथित बयान में शराब की आपूर्ति से जुड़े अन्य लोगों के नाम भी लिए हैं। उसका आरोप है कि दीपम रायचूरा ने उसे गौरव शिवहरे से मिलवाया और इसके बाद उसकी मुलाकात कारोबारी अमरीक सिंह से हुई। गोगिया ने दावा किया कि टीटी नगर की शराब दुकानों पर बिना लाइसेंस शराब की आपूर्ति और बिक्री में मदद की गई। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित लोगों का पक्ष और जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी है।
बयान में भोपाल के सोल क्लब के संचालन और जांच एजेंसी की कार्रवाई रुकवाने के नाम पर कथित तौर पर 50 लाख रुपये मांगे जाने का भी उल्लेख है। गोगिया के मुताबिक इस मामले में सिद्धांत ओझा और पुलिस अधिकारी राजेश मिश्रा के संपर्क का जिक्र आया है। हालांकि बयान के अनुसार राजेश मिश्रा पर सीधे रकम मांगने का आरोप नहीं लगाया गया है।
मोहित गोगिया पर करीब 200 लोगों से लगभग 930 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप है। वह फिलहाल पंजाब की जेल में बंद है। आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय उसकी संपत्तियों और कारोबारी गतिविधियों की जांच के तहत कार्रवाई कर चुके हैं और संपत्तियां फ्रीज किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
दीपम रायचूरा ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उन्हें किसी जांच एजेंसी से कोई नोटिस नहीं मिला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गोगिया से उनका परिचय केवल भोपाल में सहायक आबकारी आयुक्त रहते हुए लाइसेंसधारी के रूप में हुआ होगा। उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा की ओर से खबर लिखे जाने तक कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। अब इस मामले में कथित बयान की प्रामाणिकता और लगाए गए आरोपों की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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सड़क निर्माण से ऊर्जा क्षेत्र तक पहुंचा दिलीप बिल्डकॉन, 3 साल में ₹15 हजार करोड़ निवेश की तैयारी, MP में 2 गीगावाट सोलर प्रोजेक्ट
भोपाल । भोपाल स्थित इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी दिलीप बिल्डकॉन लिमिटेड अब सड़क निर्माण के अपने पारंपरिक कारोबार से आगे बढ़ते हुए ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा विस्तार करने की तैयारी में है। कंपनी ने अगले दो से तीन वर्षों के दौरान करीब ₹15 हजार करोड़ के निवेश की योजना बनाई है। इस निवेश के जरिए कंपनी अक्षय ऊर्जा पावर ट्रांसमिशन और तेल एवं गैस पाइपलाइन जैसे क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी मजबूत करेगी। कंपनी की यह रणनीति उसके कारोबार के विस्तार के साथ देश के बढ़ते ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर में भागीदारी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
दिलीप बिल्डकॉन की नई योजना में तीन प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं। इनमें अक्षय ऊर्जा पावर ट्रांसमिशन और तेल एवं गैस पाइपलाइन प्रमुख हैं। कंपनी अब तक सड़क निर्माण और जल सिंचाई जैसी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में सक्रिय रही है। ऊर्जा क्षेत्र में प्रवेश के बाद कंपनी के कारोबार का दायरा और व्यापक होने की उम्मीद है। कंपनी के अनुसार प्रस्तावित ऊर्जा परियोजनाओं से अनुमानित ₹68 हजार करोड़ का लाइफटाइम रेवेन्यू मिलने की संभावना है।
इस विस्तार में मध्य प्रदेश की भूमिका भी काफी अहम रहने वाली है। कंपनी करीब ₹15 हजार करोड़ के कुल प्रस्तावित निवेश में से लगभग ₹6572 करोड़ मध्य प्रदेश में सौर ऊर्जा परियोजनाओं पर खर्च करने की तैयारी में है। राज्य में दो सौर ऊर्जा परियोजनाएं विकसित किए जाने की योजना है। इन दोनों परियोजनाओं की कुल क्षमता करीब 2 गीगावाट बताई गई है। इन परियोजनाओं के जरिए प्रदेश में अक्षय ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलने के साथ ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।कंपनी का कहना है कि इन परियोजनाओं का उद्देश्य केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा। सौर ऊर्जा के विस्तार से गांवों तक बिजली की पहुंच बढ़ाने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा किसानों को दिन के समय भरोसेमंद सौर ऊर्जा उपलब्ध कराने और पेयजल आपूर्ति जैसी व्यवस्थाओं को स्वच्छ ऊर्जा से सहयोग देने की दिशा में भी इन परियोजनाओं की भूमिका हो सकती है।
दिलीप बिल्डकॉन की शुरुआत भोपाल से हुई थी और मध्य प्रदेश लंबे समय से कंपनी के कारोबार का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। सड़क निर्माण के क्षेत्र में कंपनी ने राज्य के अलग अलग हिस्सों में कई परियोजनाओं पर काम किया है। अब कंपनी ऊर्जा क्षेत्र में भी अपनी पहचान मजबूत करने की तैयारी कर रही है। इससे मध्य प्रदेश में बड़े स्तर पर ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े निवेश की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
कंपनी का अगला चरण केवल सौर ऊर्जा परियोजनाओं तक सीमित नहीं है। पावर ट्रांसमिशन नेटवर्क और तेल एवं गैस पाइपलाइन के क्षेत्र में भी निवेश की योजना बनाई गई है। ऊर्जा उत्पादन के साथ बिजली को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने वाले ट्रांसमिशन नेटवर्क और ईंधन से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर में कंपनी की भागीदारी बढ़ सकती है।
इस तरह दिलीप बिल्डकॉन अब सड़क निर्माण से आगे बढ़कर ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर कदम बढ़ा रही है। अगले दो से तीन वर्षों में प्रस्तावित ₹15 हजार करोड़ का निवेश कंपनी के कारोबार के लिए नया विस्तार चरण साबित हो सकता है। मध्य प्रदेश में सौर ऊर्जा परियोजनाओं पर प्रस्तावित बड़ा निवेश राज्य के अक्षय ऊर्जा क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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इंदौर में इंस्टाग्राम की दोस्ती का खौफनाक अंजाम, शादी का वादा कर युवती को बुलाया और फिर नंबर कर दिया ब्लॉक
इंदौर । इंदौर में इंस्टाग्राम के जरिए शुरू हुई दोस्ती के बाद शादी का भरोसा देकर मुंबई की 25 वर्षीय युवती को इंदौर बुलाने और उसके साथ दुष्कर्म करने का मामला सामने आया है। युवती ने आरोप लगाया है कि युवक ने शादी का वादा कर उसे इंदौर बुलाया और होटल में उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। इसके बाद कुछ समय तक शादी को लेकर बातचीत करता रहा लेकिन बाद में अचानक दूरी बना ली। आरोप है कि युवक ने पिछले कुछ दिनों से युवती से बातचीत बंद कर दी और उसका मोबाइल नंबर भी ब्लॉक कर दिया। इसके बाद युवती मुंबई से इंदौर पहुंची और पुलिस से शिकायत की। लसूड़िया पुलिस ने आरोपी नयन सिंह चंदेल के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।पुलिस के अनुसार करीब छह महीने पहले युवती की इंस्टाग्राम के जरिए नयन सिंह चंदेल से दोस्ती हुई थी। सोशल मीडिया पर बातचीत धीरे धीरे बढ़ी और दोनों के बीच मोबाइल नंबर भी साझा हुए। इसके बाद दोनों लगातार संपर्क में रहने लगे। युवती के मुताबिक बातचीत के दौरान नयन ने उससे शादी करने का भरोसा दिलाया था। इसी भरोसे के बाद वह 22 अगस्त को मुंबई से इंदौर आई।
आरोप है कि इंदौर पहुंचने के बाद नयन उसे एम्ब्रोसिया होटल लेकर गया। यहां उसने शादी का भरोसा देकर युवती के साथ शारीरिक संबंध बनाए। युवती का कहना है कि उसे उम्मीद थी कि दोनों जल्द शादी करेंगे। घटना के बाद भी कुछ समय तक उनके बीच बातचीत जारी रही।
पुलिस के मुताबिक सितंबर में नयन युवती से मिलने मुंबई भी गया था। वहां दोनों के बीच शादी को लेकर बातचीत हुई। इसके बाद नयन वापस इंदौर आ गया। युवती के अनुसार कुछ समय बाद उसके व्यवहार में बदलाव आने लगा। पिछले करीब 15 दिनों से उसने बातचीत करना बंद कर दिया और मोबाइल नंबर भी ब्लॉक कर दिया। संपर्क टूटने के बाद युवती खुद इंदौर पहुंची और लसूड़िया थाने में शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने युवती की शिकायत के आधार पर दुष्कर्म से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। अब पुलिस आरोपी और युवती के बीच हुई बातचीत तथा घटनाक्रम से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इसी बीच इंदौर के परदेशीपुरा थाना क्षेत्र में नाबालिग छात्रा से छेड़छाड़ का एक अलग मामला भी सामने आया है। पुलिस ने 17 वर्षीय छात्रा की शिकायत पर किराना दुकान संचालक संजय तिवारी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट और छेड़छाड़ की धाराओं में केस दर्ज किया है।
पुलिस के अनुसार छात्रा अपनी भाभी के साथ किराना दुकान पर सामान लेने गई थी। आरोप है कि इसी दौरान दुकानदार ने उसे आई लव यू लिखा हुआ पेन दिया और फिर उसका हाथ दबाया। घटना से घबराई छात्रा घर पहुंची और भाभी को पूरी बात बताई। बाद में मां के घर लौटने पर छात्रा ने उन्हें भी घटना की जानकारी दी। इसके बाद परिजन छात्रा को लेकर थाने पहुंचे। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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राजबाड़ा में टला बड़ा हादसा, प्लास्टर और लोहे का स्ट्रक्चर गिरने के बाद नगर निगम ने हटाए कमजोर छज्जे
इंदौर । इंदौर के ऐतिहासिक राजबाड़ा क्षेत्र में लोगों की सुरक्षा को देखते हुए नगर निगम ने जर्जर बिल्डिंग के छज्जों को हटाने की कार्रवाई की है। गुरुवार दोपहर नगर निगम की टीम बैंक की पुरानी बिल्डिंग के पास पहुंची और पोकलेन मशीन की मदद से बाहर की ओर निकले छज्जों को हटाया। कार्रवाई के दौरान सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए संबंधित सड़क पर कुछ समय के लिए आवाजाही बंद कर दी गई थी। नगर निगम की टीम ने पहली और दूसरी मंजिल के कमजोर हो चुके छज्जों को हटाकर संभावित हादसे का खतरा कम किया।बताया गया कि पिछले दिनों डोल ग्यारस के अवसर पर इस बिल्डिंग के छज्जे से प्लास्टर गिरने की घटना सामने आई थी। घटना के बाद नगर निगम ने एहतियात के तौर पर मौके पर बैरिकेडिंग करवा दी थी। इसके बाद भी बिल्डिंग के बाहरी हिस्से को लेकर खतरा बना हुआ था। दो दिन पहले भी इसी स्थान पर लोहे का एक स्ट्रक्चर गिरने की घटना सामने आई थी। राहत की बात यह रही कि दोनों घटनाओं में किसी व्यक्ति को चोट नहीं आई और बड़ा हादसा टल गया।
बिल्डिंग के बाहर निकले छज्जे लंबे समय से बारिश और समय के असर के कारण कमजोर हो गए थे। छज्जों से प्लास्टर गिरने की शिकायत और जानकारी समय समय पर नगर निगम के सामने आती रही थी। स्थिति को देखते हुए नगर निगम ने बैंक प्रबंधन को नोटिस जारी कर जर्जर छज्जों को हटाने के निर्देश दिए थे। इसके लिए प्रबंधन को निर्धारित समय सीमा भी दी गई थी लेकिन तय अवधि में छज्जों को हटाने का काम पूरा नहीं हो सका।
समय सीमा में काम पूरा नहीं होने के बाद नगर निगम ने खुद कार्रवाई करने का फैसला लिया। जोन 12 के बिल्डिंग ऑफिसर राहुल रघुवंशी के मुताबिक बैंक की बिल्डिंग की पहली और दूसरी मंजिल पर बाहर की तरफ निकले छज्जे बारिश और लंबे समय के कारण जर्जर हो गए थे। इन छज्जों का प्लास्टर भी कई बार गिर चुका था। लोगों की सुरक्षा को देखते हुए नगर निगम की टीम ने मौके पर पहुंचकर छज्जों को हटाने की कार्रवाई की।
अधिकारी के मुताबिक बिल्डिंग काफी पुरानी है लेकिन इसका मुख्य ढांचा अभी भी मेंटेन है। समस्या मुख्य रूप से बाहर की ओर निकले छज्जों में थी जो समय के साथ खराब हो गए थे। इसी वजह से बैंक प्रबंधन को पहले ही नोटिस देकर छज्जों को हटाने के लिए कहा गया था। जब निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं हुई तो नगर निगम ने अपने स्तर पर जर्जर हिस्सों को हटाया।
राजबाड़ा क्षेत्र इंदौर के सबसे व्यस्त इलाकों में शामिल है और यहां दिनभर बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही रहती है। ऐसे में किसी जर्जर हिस्से के अचानक गिरने से गंभीर हादसा हो सकता था। नगर निगम की इस कार्रवाई का उद्देश्य ऐसे संभावित खतरे को समय रहते खत्म करना है। कार्रवाई के दौरान सड़क पर आवाजाही रोककर क्षेत्र को सुरक्षित किया गया ताकि मशीन से छज्जे हटाने के दौरान किसी राहगीर या वाहन को नुकसान न पहुंचे।