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  • झुरही जंगल में भीषण आग से हड़कंप, वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

    झुरही जंगल में भीषण आग से हड़कंप, वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल


    नई दिल्ली। सिंगरौली जिले के झुरही क्षेत्र स्थित सजहर जंगल में बुधवार को भीषण आग लगने से वन क्षेत्र में हड़कंप मच गया। आग इतनी भयावह थी कि घंटों तक जंगल धधकता रहा और कई इमारती व हरे-भरे पेड़ जलकर राख हो गए। घटना का वीडियो सामने आने के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
    स्थानीय लोगों के अनुसार, जंगल में सुबह से ही आग लगी हुई थी, लेकिन शुरुआती समय में उस पर प्रभावी नियंत्रण नहीं पाया जा सका। दोपहर बाद तेज हवाओं के चलते आग तेजी से फैल गई और देखते ही देखते बड़े इलाके को अपनी चपेट में ले लिया। दूर-दूर तक उठती आग की लपटें और काले धुएं का गुबार साफ दिखाई दे रहा था।
    घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें जंगल के कई पेड़ों को जलते हुए देखा जा सकता है। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि समय रहते आग बुझाने के पर्याप्त इंतजाम किए जाते तो इतना बड़ा नुकसान टाला जा सकता था।
    यह जंगल बरगवां, जियावन और सरई वन क्षेत्रों के बीच स्थित है, जहां बड़ी संख्या में वन संपदा और वन्य जीव मौजूद हैं। आग के कारण पेड़ों के साथ-साथ वन्य जीवों और पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।
    स्थानीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए वन विभाग की लापरवाही पर सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जंगलों में आग की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन रोकथाम के लिए प्रभावी इंतजाम नजर नहीं आते।
    उधर, उपवन मंडल अधिकारी ने बताया कि आग की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई थी और आग पर नियंत्रण पाने के लिए लगातार प्रयास किए गए। विभाग की ओर से नुकसान का आकलन किया जा रहा है और आग लगने के कारणों की जांच भी शुरू कर दी गई है। अधिकारी ने कहा कि जांच में यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

  • भोपाल ट्रेन हादसा: युवक की मौत के बाद हत्या का आरोप, मां बोलीं- बेटे को धक्का देकर पटरी पर गिराया गया

    भोपाल ट्रेन हादसा: युवक की मौत के बाद हत्या का आरोप, मां बोलीं- बेटे को धक्का देकर पटरी पर गिराया गया


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश की राजधानी Bhopal के गोविंदपुरा थाना क्षेत्र में बुधवार सुबह उस समय सनसनी फैल गई जब रचना नगर अंडरब्रिज के पास रेलवे ट्रैक पर एक युवक का शव मिला। मृतक की पहचान अशोक बामने के रूप में हुई है, जो गौतम नगर जनता क्वार्टर का निवासी था।
    पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच में मामला ट्रेन से कटकर हुई मौत का लग रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया। हालांकि, मामले ने तब नया मोड़ ले लिया जब मृतक की मां ने पड़ोसी पर गंभीर आरोप लगाए।
    मृतक की मां कृष्णा बामने का कहना है कि रात में पड़ोसी से किसी लड़की को लेकर विवाद हुआ था। उनका आरोप है कि उसी विवाद के बाद पड़ोसी उनके घर में घुस आया और उनके चार बेटों के साथ लाठी-डंडों से मारपीट की।
    परिवार का दावा है कि इसके बाद आरोपियों ने अशोक को रेलवे ट्रैक पर ले जाकर ट्रेन के सामने धक्का दे दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। परिजनों के मुताबिक, सुबह पुलिस ने सूचना दी तब उन्हें घटना की जानकारी मिली।
    अशोक अविवाहित था और मजदूरी करके अपने परिवार का भरण-पोषण करता था। अचानक हुई इस घटना ने पूरे इलाके में तनाव और दहशत का माहौल पैदा कर दिया है।
    फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और सभी पहलुओं हादसा, आत्महत्या और हत्या को ध्यान में रखकर छानबीन की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
    यह घटना न सिर्फ एक परिवार के लिए गहरा सदमा बन गई है, बल्कि पूरे इलाके में कई सवाल भी छोड़ गई है कि यह वाकई एक हादसा था या इसके पीछे कोई साजिश।

  • उज्जैन में बड़ा विवाद: यादव समाज से परिवार निष्कासित, सामाजिक गतिविधियों पर लगी रोक

    उज्जैन में बड़ा विवाद: यादव समाज से परिवार निष्कासित, सामाजिक गतिविधियों पर लगी रोक


    नई दिल्ली । उज्जैन जिले की बड़नगर तहसील के ग्राम बंगरेड में यह पूरा विवाद एक शादी समारोह से शुरू हुआ। डॉक्टर विष्णु प्रसाद यादव के यहां आयोजित कार्यक्रम में समाज की ओर से चंदा और धर्मशाला किराए को लेकर असहमति सामने आई। समाज द्वारा ₹5100 की बजाय ₹11,000 की राशि तय किए जाने पर वॉट्सऐप ग्रुप में चर्चा शुरू हुई। इसी दौरान नरेंद्र यादव ने सुझाव दिया कि यदि किसी से गलती हुई है तो उसे स्वीकार कर राशि वापस कर देनी चाहिए।

     टिप्पणी के बाद बढ़ा विवाद, फोन पर गाली-गलौज का आरोप
    पीड़ित नरेंद्र यादव का आरोप है कि उनकी इस टिप्पणी के बाद कुछ लोगों ने नाराजगी जताई। इसके बाद समाज के एक पंच के भाई ईश्वरलाल यादव ने उन्हें फोन कर अपशब्द कहे और समाज छोड़ने तक की बात कही। नरेंद्र यादव का कहना है कि उन्होंने यह पूरी बात समाज के ग्रुप में भी साझा की, लेकिन किसी सदस्य ने उनका समर्थन नहीं किया।

     सामाजिक बहिष्कार और निष्कासन का संदेश
    आरोप है कि बिना किसी निष्पक्ष बैठक और बिना उनका पक्ष सुने ही समाज के वॉट्सऐप ग्रुप में उनके परिवार को निष्कासित करने का संदेश जारी कर दिया गया। इसके बाद उनके परिवार को गांव के सामाजिक कार्यक्रमों और अन्य गतिविधियों में शामिल होने से रोक दिया गया, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई।

     प्रशासन तक पहुंचा मामला, पहले भी की गई शिकायत
    नरेंद्र यादव ने बताया कि उन्होंने पहले भी एसपी कार्यालय में शिकायत दी थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
    बाद में समाज की बैठक जरूर हुई, लेकिन उसमें उन्हें शामिल नहीं किया गया। बैठक में केवल चंदे की राशि वापस कर मामले को समाप्त मान लिया गया।

    न्याय की मांग और गंभीर आरोप
    पीड़ित का आरोप है कि धर्मशाला किराए और चंदे में कथित अनियमितताओं का विरोध करने पर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और सामाजिक रूप से अलग-थलग कर दिया गया। उन्होंने कलेक्टर से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।

     धर्म परिवर्तन की चेतावनी से बढ़ा मामला
    नरेंद्र यादव ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला और समाज में उनका सम्मान वापस नहीं किया गया, तो वे परिवार सहित धर्म परिवर्तन करने और अदालत जाने पर विचार करेंगे।

     प्रशासन की प्रतिक्रिया
    जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए शिकायत को जांच में ले लिया है। अधिकारियों ने कहा है कि पूरे मामले की जांच के बाद वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

    यह मामला सामाजिक संगठनों में आंतरिक विवाद, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ते तनाव और सामाजिक बहिष्कार जैसे गंभीर मुद्दों को उजागर करता है। प्रशासन की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

  • दहेज की मांग या मारपीट? टीकमगढ़ में बारात लौटी, शादी हुई कैंसिल

    दहेज की मांग या मारपीट? टीकमगढ़ में बारात लौटी, शादी हुई कैंसिल


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले के चंदेरा थाना क्षेत्र के बीजरौठा गांव में एक शादी समारोह उस समय विवाद में बदल गया जब दहेज को लेकर दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ गया और बारात वापस लौट गई। इस घटना के बाद शादी टूट गई और दोनों परिवारों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

    लड़की पक्ष का आरोप: 2 लाख और बुलेट की मांग
    लड़की के पिता शहादत खान ने आरोप लगाया है कि लड़के पक्ष ने शादी के दौरान 2 लाख रुपए नकद और बुलेट बाइक की अतिरिक्त मांग की। उनका कहना है कि इससे पहले फलदान की रस्म में उन्होंने पहले ही 2 लाख रुपए नकद, सोने की अंगूठी, चेन और एक बाइक दी थी। शिकायत के अनुसार, 10 मई को शादी की रस्मों के दौरान अचानक अतिरिक्त दहेज की मांग रख दी गई, जिसे पूरा करने से इनकार करने पर बारात वापस लौट गई।

    दूल्हा पक्ष का दावा: मारपीट के बाद टूटी शादी
    वहीं दूल्हे सरताज के भाई निसार ने सभी आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि बारात में शामिल एक युवक का लड़की पक्ष से विवाद हो गया था, जिसके बाद स्थिति बिगड़ गई।, विवाद के बाद लड़की पक्ष ने बारातियों और दूल्हे के साथ मारपीट की, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई और बारात वापस लौट गई। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस घटना के बाद दूल्हा सरताज लापता है और पिछले 24 घंटे से उसका कोई पता नहीं चल रहा है।

    पुलिस जांच में जुटी, अभी FIR दर्ज नहीं
    घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मामले की जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि दोनों पक्षों के बयान लिए जाएंगे और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। जतारा एसडीओपी अभिषेक गौतम ने बताया कि फिलहाल मामले की जांच चल रही है और दोनों पक्षों को बुलाकर बयान दर्ज किए जाएंगे।

    लड़की पक्ष का आरोप: FIR नहीं दर्ज होने पर नाराजगी
    लड़की के पिता का आरोप है कि घटना के 24 घंटे बाद भी पुलिस ने FIR दर्ज नहीं की है, जिससे वे नाराज हैं। उनका कहना है कि मामले में उचित कार्रवाई होनी चाहिए।

    टीकमगढ़ की यह घटना एक बार फिर दहेज प्रथा और विवाह समारोहों में बढ़ते विवादों की गंभीरता को उजागर करती है। पुलिस जांच के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकेगी।

  • छिंदवाड़ा में बड़ा हादसा टला: टायर फटते ही पुलिस वाहन से भिड़ी तेज रफ्तार स्कॉर्पियो, TI समेत 4 घायल

    छिंदवाड़ा में बड़ा हादसा टला: टायर फटते ही पुलिस वाहन से भिड़ी तेज रफ्तार स्कॉर्पियो, TI समेत 4 घायल


    नई दिल्ली। छिंदवाड़ा जिले के सिहोरामाल के पास सोमवार को एक बड़ा सड़क हादसा हो गया। चौरई थाना पुलिस एक आरोपी को लेकर चौरई से छिंदवाड़ा आ रही थी, तभी सामने से तेज रफ्तार में आ रही स्कॉर्पियो का अचानक टायर फट गया। टायर फटते ही वाहन चालक नियंत्रण खो बैठा और स्कॉर्पियो सीधे पुलिस वाहन से जा टकराई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए और मौके पर अफरा-तफरी मच गई।

    TI समेत चार पुलिसकर्मी घायल
    हादसे में चौरई थाना प्रभारी मोहन मस्कोले सहित चार पुलिसकर्मी घायल हो गए। जानकारी के मुताबिक, आरक्षक राजकुमारी बघेल के सिर में चोट आई है, जबकि एक सब इंस्पेक्टर के कंधे और पसली में गंभीर चोट बताई जा रही है। थाना प्रभारी मोहन मस्कोले के पैर और चेहरे पर भी चोटें आई हैं। सभी घायलों को तत्काल जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।

    एयरबैग खुलने से टला बड़ा हादसा
    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे के दौरान पुलिस वाहन के एयरबैग समय रहते खुल गए, जिससे बड़ा नुकसान होने से बच गया। यदि एयरबैग सक्रिय नहीं होते तो हादसा और भी भयावह हो सकता था।

    स्थानीय लोगों ने दिखाई तत्परता
    घटना के बाद आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत डायल-100 और पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची टीम ने घायलों को वाहन से बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया। हादसे के बाद सड़क पर कुछ देर के लिए यातायात भी प्रभावित रहा।

    घायलों से मिलने पहुंचे एसपी और एएसपी
    घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस अधीक्षक अजय पाण्डेय और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आशीष खरे जिला अस्पताल पहुंचे। अधिकारियों ने घायल पुलिसकर्मियों का हालचाल जाना और डॉक्टरों को बेहतर उपचार के निर्देश दिए।

    यह हादसा एक बार फिर तेज रफ्तार और वाहन सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। राहत की बात यह रही कि एयरबैग खुलने से पुलिसकर्मियों की जान बच गई, वरना हादसा और भी गंभीर हो सकता था।

  • देवास में 26 वर्षीय युवक ने लगाई फांसी, छुट्टियों में आया था मामा के घर; पुलिस जांच जारी

    देवास में 26 वर्षीय युवक ने लगाई फांसी, छुट्टियों में आया था मामा के घर; पुलिस जांच जारी

    देवास देवास शहर के कालानी बाग क्षेत्र में एक 26 वर्षीय युवक द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटना सामने आई है। युवक ने अपने मामा के घर में फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई।

    सांवेर से आया था छुट्टियां मनाने
    मृतक की पहचान अमित चौधरी (26 वर्ष), निवासी कूड़ाना, सांवेर के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, वह कुछ दिन पहले गर्मियों की छुट्टियां बिताने अपने मामा के घर देवास आया था। परिजनों ने घटना के बाद उसे तुरंत जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

    परिवार में शोक का माहौल
    पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है। अमित के पिता सेवानिवृत्त शिक्षक हैं। बेटे की अचानक मौत से परिवार में गहरा शोक व्याप्त है और परिजन सदमे में हैं।

    पुलिस जांच में जुटी, कारण अस्पष्ट
    फिलहाल आत्महत्या के कारणों का स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच की जा रही है।

    यह घटना एक बार फिर मानसिक स्वास्थ्य और युवाओं में बढ़ते तनाव को लेकर सवाल खड़े करती है। पुलिस जांच के बाद ही आत्महत्या के पीछे की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी।


  • गर्भवती महिलाओं की जांच में लापरवाही: दो सीबीएमओ को नोटिस, 15 दिन का अल्टीमेटम

    गर्भवती महिलाओं की जांच में लापरवाही: दो सीबीएमओ को नोटिस, 15 दिन का अल्टीमेटम


    नई दिल्ली । राजगढ़ जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की लचर व्यवस्था को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। गर्भवती महिलाओं की समय पर जांच, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही और स्वास्थ्य केंद्रों की खराब स्थिति को गंभीरता से लेते हुए कई अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है। इस कार्रवाई के तहत दो सीबीएमओ को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं, जबकि कई कर्मचारियों का वेतन रोक दिया गया है।

    जानकारी के अनुसार, नरसिंहगढ़ ब्लॉक में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में खराब प्रदर्शन पर सीबीएमओ डॉ. राजेंद्र अहिरवार को नोटिस जारी किया गया है। इसके अलावा खिलचीपुर और राजगढ़ ब्लॉक के सीबीएमओ को बैठक में अनुपस्थित रहने पर कारण बताओ नोटिस दिया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि 15 दिनों के भीतर सुधार नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारियों के वेतन काटने की कार्रवाई की जाएगी।

    स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा में यह भी सामने आया कि कई स्थानों पर गर्भवती महिलाओं का पंजीयन समय पर नहीं हो रहा है और उनकी नियमित जांच में लापरवाही बरती जा रही है। इस पर प्रशासन ने सख्त नाराजगी जताते हुए प्रत्येक ब्लॉक से सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले पांच सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी और एएनएम को भी नोटिस जारी किए हैं।

    इसके अलावा ओपीडी सेवाओं और स्वास्थ्य शिविरों में तय लक्ष्य के अनुसार एक्स-रे जांच नहीं होने पर भी संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाई गई है। प्रशासन ने इसे गंभीर सेवा लापरवाही मानते हुए सुधार के निर्देश दिए हैं।

    पोषण पुनर्वास केंद्रों की स्थिति भी समीक्षा में संतोषजनक नहीं पाई गई। यहां बच्चों की कम संख्या और समय से पहले डिस्चार्ज किए जाने के मामलों पर भी कार्रवाई की गई है। इस पर जिले के सभी छह फीडिंग डेमोंस्ट्रेटर को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

    जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. इच्छित गढ़पाले ने स्पष्ट कहा है कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी स्तर पर लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि अगले 15 दिनों में जमीनी स्तर पर सुधार नहीं दिखता है तो और भी कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

  • सरकारी कार्रवाई: वन भूमि पर कब्जे के आरोप में पंचायत सचिव की नौकरी गई

    सरकारी कार्रवाई: वन भूमि पर कब्जे के आरोप में पंचायत सचिव की नौकरी गई


    नई दिल्ली । विदिशा वन मंडल में वन भूमि पर अवैध अतिक्रमण के मामले में प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। ग्राम पंचायत बीजूखेड़ी, जनपद पंचायत लटेरी के पंचायत सचिव किशन सिंह गुर्जर को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। यह कार्रवाई वन भूमि पर कब्जे के गंभीर आरोपों और जांच में दोष सिद्ध होने के बाद की गई है।
    मामले की शुरुआत उस समय हुई जब वन परिक्षेत्र उत्तर लटेरी की देहरीपामा बीट के कक्ष क्रमांक पी-410 में वन भूमि पर अवैध अतिक्रमण की शिकायत सामने आई। इस पर वन विभाग ने 21 जुलाई 2024 को वन अपराध प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की थी। जांच में सामने आया कि पंचायत सचिव किशन सिंह गुर्जर पर ही इस अतिक्रमण का आरोप था।
    वन विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 80 ‘अ’ के तहत संबंधित सचिव को दो बार कारण बताओ नोटिस जारी किया, लेकिन आरोपी की ओर से कोई संतोषजनक जवाब या साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया। इससे मामला और गंभीर हो गया।
    जांच में आरोप प्रमाणित होने के बाद वनमंडलाधिकारी विदिशा ने अतिक्रमण हटाने का आदेश जारी किया था, लेकिन इसके बावजूद भूमि से कब्जा नहीं हटाया गया। आदेश की अवहेलना के बाद विभाग ने जिला पंचायत को कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए पत्र लिखा।
    इसके बाद जिला पंचायत ने कार्रवाई करते हुए मुख्य कार्यपालन अधिकारी के निर्देश पर 8 मई 2026 को पंचायत सचिव किशन सिंह गुर्जर को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया।
    वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि सरकारी और वन भूमि पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ भविष्य में भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी, चाहे वह किसी भी पद पर क्यों न हों।
    इस कार्रवाई को प्रशासनिक सख्ती के रूप में देखा जा रहा है, जिससे सरकारी भूमि संरक्षण को लेकर एक सख्त संदेश दिया गया है।

  • खुद चला रहा था ट्रैक्टर, लौटते समय हादसा: हरदा में नदी पार करते वक्त अनहोनी

    खुद चला रहा था ट्रैक्टर, लौटते समय हादसा: हरदा में नदी पार करते वक्त अनहोनी


    नई दिल्ली ।  हरदा जिले के झाड़पा गांव में रविवार सुबह एक बेहद दर्दनाक हादसा हो गया। अजनाल नदी पर बने पुल पर ट्रैक्टर अनियंत्रित होकर पलट गया, जिससे 15 वर्षीय किशोर की मौके पर ही मौत हो गई। हादसा उस समय हुआ जब किशोर खेत से मक्का लेकर ट्रॉली में भरकर गांव लौट रहा था और स्वयं ट्रैक्टर चला रहा था।

    जानकारी के अनुसार, झाड़पा गांव निवासी सूरज विश्नोई का बेटा दर्शन विश्नोई (15) रविवार सुबह नीमगांव स्थित अपने खेत से मक्का भरकर ट्रॉली में गांव लौट रहा था। लौटते समय जब वह अजनाल नदी के रपटे पर पहुंचा, तो ट्रैक्टर अचानक अनियंत्रित हो गया और सीधे नदी में पलट गया। हादसे में किशोर ट्रैक्टर के नीचे दब गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।

    घटना के बाद आसपास मौजूद ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे और जेसीबी मशीन की मदद से ट्रैक्टर के नीचे दबे किशोर को बाहर निकाला। गंभीर हालत में उसे तत्काल हरदा के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

    सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जिला अस्पताल भेजा गया, जहां पोस्टमार्टम की कार्रवाई की गई। इसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। हादसे के बाद गांव में शोक की लहर दौड़ गई और परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।

    बताया जा रहा है कि मृतक दर्शन विश्नोई अपने दो भाइयों में सबसे छोटा था। उसका बड़ा भाई लुधियाना में पढ़ाई कर रहा है। दर्शन हरदा के सरस्वती शिशु मंदिर में दसवीं कक्षा का छात्र था और पढ़ाई के साथ-साथ परिवार की मदद के लिए खेत का काम भी करता था।

    ग्रामीणों के अनुसार, नदी का रपटा कई बार हादसों का कारण बन चुका है, लेकिन सुरक्षा इंतजामों की कमी के चलते ऐसी घटनाएं लगातार सामने आती रहती हैं। इस हादसे ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में खतरनाक रास्तों और नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने के जोखिम पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • जिला अस्पताल में बड़ा फर्जीवाड़ा: ब्लड डोनेशन के नाम पर ग्रामीण से ठगी, आरोपी फरार

    जिला अस्पताल में बड़ा फर्जीवाड़ा: ब्लड डोनेशन के नाम पर ग्रामीण से ठगी, आरोपी फरार


    नई दिल्ली । नरसिंहपुर जिला अस्पताल में ब्लड उपलब्ध कराने के नाम पर ठगी का गंभीर मामला सामने आया है। अस्पताल परिसर में सक्रिय कुछ दलालों ने एक ग्रामीण से उसकी पत्नी के इलाज के लिए ब्लड दिलाने के बहाने ढाई हजार रुपये ऐंठ लिए और बाद में मौके से फरार हो गए। इस घटना के बाद अस्पताल की व्यवस्था और सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं।

    जानकारी के अनुसार, शनिवार को एक दूरस्थ गांव से आया ग्रामीण अपनी पत्नी को जिला अस्पताल में भर्ती कराकर इलाज करा रहा था। डॉक्टरों ने महिला के लिए ‘ओ पॉजिटिव’ ब्लड की आवश्यकता बताई थी। इसके बाद ग्रामीण ब्लड बैंक पहुंचा, जहां उसे नियमों के तहत डोनर लाने की बात कही गई।

    इसी दौरान अस्पताल परिसर में मौजूद एक संदिग्ध व्यक्ति, जिसे नशेड़ी और दलाल बताया जा रहा है, ने ग्रामीण से संपर्क किया। उसने ब्लड उपलब्ध कराने का झांसा देकर ढाई हजार रुपये की मांग की। मजबूरी और पत्नी की हालत को देखते हुए ग्रामीण ने पैसे दे दिए और उस व्यक्ति को भोजन भी कराया। लेकिन जब ब्लड देने की बारी आई, तो आरोपी वहां से फरार हो गया।

    ठगी का अहसास होने पर ग्रामीण ने अस्पताल परिसर में मौजूद लोगों को पूरी घटना बताई। मामला तुरंत ब्लड बैंक अधिकारियों और सिविल सर्जन तक पहुंचा। इसके बाद अस्पताल प्रशासन हरकत में आया और पीड़ित महिला को तत्काल नि:शुल्क ब्लड उपलब्ध कराया गया।

    रेडक्रॉस रक्त बैंक प्रभारी डॉ. स्वाति मीणा ने स्पष्ट किया कि इस घटना में ब्लड बैंक के किसी कर्मचारी की संलिप्तता नहीं है। उन्होंने कहा कि ब्लड बैंक के बाहर सक्रिय दलालों और असामाजिक तत्वों पर रोक लगाने के लिए पहले भी सिविल सर्जन को पत्र लिखा गया था और अब कलेक्टर को भी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए पत्र भेजा जाएगा।

    उन्होंने यह भी बताया कि रक्त की खरीद-फरोख्त जैसी गतिविधियों को रोकने के लिए जागरूकता पोस्टर लगाए गए हैं, ताकि लोग ऐसे किसी भी झांसे में न आएं और तुरंत इसकी सूचना प्रशासन को दें।

    वहीं, सिविल सर्जन डॉ. राजकुमार चौधरी ने कहा कि पीड़ित ग्रामीण ने किसी भी कर्मचारी पर आरोप नहीं लगाया है। मामला केवल बाहरी व्यक्ति की ठगी से जुड़ा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि यदि भविष्य में इस तरह की कोई शिकायत मिलती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और अगर किसी कर्मचारी की संलिप्तता पाई जाती है तो उसे भी बख्शा नहीं जाएगा।