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  • जुबिन की परफॉर्मेंस से पहले भोपाल में छात्रों का हंगामा, बैरिकेडिंग को लेकर पुलिस से झड़प, छात्रा भीड़ में दबी

    जुबिन की परफॉर्मेंस से पहले भोपाल में छात्रों का हंगामा, बैरिकेडिंग को लेकर पुलिस से झड़प, छात्रा भीड़ में दबी


    भोपाल । भोपाल के लाल परेड मैदान में मंगलवार को आयोजित सीएम यूथ कॉन्क्लेव 2026 में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने युवाओं से सीधा संवाद किया। कार्यक्रम में अलग अलग कॉलेजों से पहुंचे विद्यार्थियों ने रोजगार शिक्षा तकनीक खेल कृषि और नशामुक्ति जैसे मुद्दों पर मुख्यमंत्री से सवाल किए। मुख्यमंत्री ने युवाओं को लेकर कई घोषणाएं भी कीं लेकिन संवाद कार्यक्रम खत्म होने के बाद सिंगर जुबिन नौटियाल की परफॉर्मेंस के दौरान अचानक माहौल गर्म हो गया। बैरिकेडिंग को लेकर छात्रों और पुलिस के बीच विवाद की स्थिति बन गई।

    जुबिन नौटियाल के कार्यक्रम में अंदर जाने की कोशिश कर रहे कुछ स्टूडेंट्स बैरिकेड्स पर चढ़ गए। पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की तो बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते मौके पर हंगामा बढ़ गया। छात्रों की ओर से कुर्सियां और धूल फेंकने की बात सामने आई। इसी दौरान भीड़ में एक छात्रा दब गई और उसके साथ धक्का मुक्की की स्थिति बनी। स्थिति संभालने के दौरान पुलिसकर्मियों ने कुछ छात्रों को थप्पड़ मारे और हल्का बल प्रयोग कर उन्हें पीछे हटाया।

    हंगामा बढ़ने के बाद कुछ बीजेपी नेता मौके पर पहुंचे और पुलिसकर्मियों को पीछे हटने के लिए कहा। इसके बाद पुलिस बल को वहां से वापस बुला लिया गया और स्थिति को नियंत्रित किया गया। इसी बीच कार्यक्रम में जुबिन के साथ रोबोट की परफॉर्मेंस भी आकर्षण का केंद्र रही। लाइव प्रस्तुति के दौरान रोबोट के डांस मूव्स देखकर मुख्यमंत्री के चेहरे पर मुस्कान भी नजर आई।

    यूथ कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री ने वर्ष 2027 को युवा वर्ष के रूप में मनाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए जिलास्तर पर सरकारी कॉलेजों में निशुल्क कोचिंग शुरू की जाएगी। एमपीपीएससी की परीक्षा अगले साल दो बार कराने की घोषणा भी की गई। इनमें से एक विशेष परीक्षा होगी। रिसर्च के लिए मिलने वाली राशि को 16 हजार रुपए से बढ़ाकर 25 हजार रुपए किया गया है।

    युवाओं को तकनीक और स्टार्टअप से जोड़ने के लिए सभी सरकारी कॉलेजों में एआई लैब खोलने की बात कही गई। स्टार्टअप से जुड़े नए विचारों को बढ़ावा देने के लिए पांच करोड़ रुपए का आइडिया फंड बनाने की घोषणा हुई। सरकार एक लाख युवाओं को कौशल विकास से जोड़ने की दिशा में काम करेगी। वर्ष 2027 में रोजगारपरक उद्योगों पर आधारित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट आयोजित करने की भी बात कही गई। इसके अलावा 12 नए मेडिकल कॉलेज और 12 नई यूनिवर्सिटीज खोलने की घोषणा की गई।

    एआई और स्टार्टअप को लेकर सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि भोपाल में एआई सिटी नॉलेज सिटी और साइंस सिटी विकसित की जा रही है। उन्होंने बताया कि स्टार्टअप के लिए युवाओं को पांच लाख रुपए तक का अनुदान देने की व्यवस्था है। सरकार युवाओं को केवल नौकरी पाने वाला नहीं बल्कि रोजगार देने वाला बनाने की दिशा में काम कर रही है। इंदौर रीवा और उज्जैन में आईटी पार्क तथा ग्वालियर में टेलीकॉम हब विकसित करने की योजना का भी उल्लेख किया गया।

    खेलों को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि भोपाल में अंतरराष्ट्रीय स्तर का बड़ा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनाया जा रहा है। प्रदेश की सभी 230 विधानसभा सीटों पर खेल मैदान विकसित करने की योजना है। कृषि के क्षेत्र में खेत से फूड प्रोसेसिंग तक पूरी वैल्यू चेन विकसित करने के साथ ड्रैगन फ्रूट और मशरूम उत्पादन को बढ़ावा देने की बात कही गई। ऑर्गेनिक फार्मिंग कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग और डेयरी क्षेत्र पर भी सरकार के फोकस का उल्लेख किया गया।

    नशे के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार वर्ष 2029 तक प्रदेश और देश को नशामुक्त करने के लक्ष्य के साथ काम कर रही है। उन्होंने कहा कि नशे के कारण परिवार और युवा पीढ़ी प्रभावित होती है और सरकार इस दिशा में कठोर कार्रवाई करेगी।

  • मेट्रो काम को लेकर विधायक का विरोध, शाही कब्रिस्तान के नीचे रूट पर बोले बिना अनुमति नहीं चलेगा काम

    मेट्रो काम को लेकर विधायक का विरोध, शाही कब्रिस्तान के नीचे रूट पर बोले बिना अनुमति नहीं चलेगा काम


    भोपाल । भोपाल में मेट्रो के फेज 2 के रूट को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। सोमवार देर रात भोपाल टॉकीज के पास स्थित शाही कब्रिस्तान में मेट्रो की टीम पहुंची और बैरिकेड्स लगाने का काम शुरू किया तो उत्तर से कांग्रेस विधायक आतिफ अकील मौके पर पहुंच गए। कब्रिस्तान के नीचे से मेट्रो का अंडरग्राउंड रूट निकाले जाने को लेकर विधायक ने कड़ी आपत्ति जताई और मेट्रो तथा पुलिस अधिकारियों से काम रोकने को कहा। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों से सख्त लहजे में कहा कि बाहर निकलो वरना मैं बदतमीजी करने लगूंगा। विधायक के इस तेवर के बाद मौके पर मौजूद लोगों के बीच भी हलचल देखने को मिली।

    बताया गया कि देर रात विधायक को जानकारी मिली कि मेट्रो कॉरपोरेशन की टीम कब्रिस्तान के पास बैरिकेड्स लगाने के लिए मशीनें और अन्य सामान लेकर पहुंची है। इसके बाद वह समाज के लोगों के साथ मौके पर पहुंचे। विधायक ने अधिकारियों से सवाल किया कि जब यह शाही कब्रिस्तान की संपत्ति है तो यहां काम शुरू करने से पहले अनुमति ली गई या नहीं। उन्होंने कहा कि पहले शाही औकाफ से अनुमति ली जानी चाहिए और उसके बाद ही किसी तरह का निर्माण कार्य किया जाना चाहिए।

    विधायक आतिफ अकील ने स्पष्ट कहा कि बिना वैधानिक अनुमति के कब्रिस्तान में किसी भी तरह का काम नहीं होना चाहिए। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों से मशीनें और सामान हटाने की मांग की। विधायक का कहना है कि इस कब्रिस्तान में उनके पूर्वजों की कब्रें हैं और यहां बड़ी संख्या में कब्रें मौजूद हैं। ऐसे में वह कब्रिस्तान के नीचे से मेट्रो लाइन निकाले जाने का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस स्थान से मेट्रो रूट को हटाकर कोई दूसरा विकल्प तलाशा जाना चाहिए।

    दरअसल भोपाल में मेट्रो के ऑरेंज लाइन के प्रायोरिटी कॉरिडोर सुभाषनगर से एम्स के बीच मेट्रो सेवा शुरू हो चुकी है। अब फेज 2 में सुभाषनगर से करोंद तक मेट्रो रूट का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस पूरे कॉरिडोर की लंबाई करीब 16.74 किलोमीटर बताई गई है। इसमें कुछ हिस्सा एलिवेटेड होगा जबकि पुराने शहर के महत्वपूर्ण हिस्से में मेट्रो को अंडरग्राउंड ले जाने की योजना है।

    फेज 2 के तहत करीब 5.38 किलोमीटर हिस्से में छह एलिवेटेड स्टेशन बनाए जाने हैं। इनमें पुल बोगदा ऐशबाग सिंधी कॉलोनी डीआईजी बंगला कृषि उपज मंडी और करोंद चौराहा जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इस हिस्से के निर्माण पर करीब 650 करोड़ रुपये खर्च होने की जानकारी दी गई है। वहीं लगभग 3.39 किलोमीटर का हिस्सा अंडरग्राउंड रखा गया है। इस हिस्से में भोपाल रेलवे स्टेशन और नादरा बस स्टैंड जैसे महत्वपूर्ण स्टेशन शामिल होंगे। अंडरग्राउंड हिस्से के निर्माण पर करीब 890 करोड़ रुपये खर्च होने की योजना है।

    शाही कब्रिस्तान से जुड़े मेट्रो रूट को लेकर मामला पहले से ही विवाद में है। मध्य प्रदेश राज्य वक्फ अधिकरण में भी इस मुद्दे पर सुनवाई चल रही है और दोनों पक्ष अपना पक्ष रख रहे हैं। ऐसे में विधायक की ताजा आपत्ति ने इस विवाद को फिर चर्चा में ला दिया है। विधायक का कहना है कि जब तक संबंधित संस्था से आवश्यक अनुमति नहीं मिलती तब तक कब्रिस्तान में कोई काम नहीं होना चाहिए।

    अब देखना होगा कि मेट्रो परियोजना और कब्रिस्तान से जुड़े पक्ष के बीच यह विवाद किस तरह सुलझता है। एक तरफ भोपाल में मेट्रो के फेज 2 को तेजी से पूरा करने की कोशिश चल रही है तो दूसरी तरफ शाही कब्रिस्तान से जुड़े रूट को लेकर आपत्ति लगातार सामने आ रही है। ऐसे में इस हिस्से में निर्माण कार्य आगे बढ़ाने से पहले अनुमति और रूट को लेकर स्थिति स्पष्ट होना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • SBI शाखा में टिफिन को लेकर हुआ विवाद फायरिंग तक पहुंचा, गार्ड की बंदूक जब्त कर पूछताछ शुरू

    SBI शाखा में टिफिन को लेकर हुआ विवाद फायरिंग तक पहुंचा, गार्ड की बंदूक जब्त कर पूछताछ शुरू


    नरसिंहपुर । नरसिंहपुर में रविवार रात एसबीआई की एसीबी शाखा में टिफिन कम आने को लेकर हुआ विवाद अचानक फायरिंग तक पहुंच गया। घटना के बाद बैंक परिसर में अफरा तफरी मच गई। गोली चलने की आवाज सुनकर वहां मौजूद लोग घबरा गए और अपनी जान बचाने के लिए इधर उधर छिप गए। सूचना मिलने के बाद कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी गार्ड को हिरासत में लेकर उसकी बंदूक जब्त कर ली। पुलिस अब पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है।

    जानकारी के मुताबिक रविवार रात करीब 9 बजे बैंक शाखा में फर्नीचर का काम चल रहा था। इसी दौरान टिफिन सेंटर संचालक विपिन नेमा अपने दो बच्चों के साथ मजदूरों और सुरक्षा गार्ड के लिए टिफिन लेकर बैंक पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि टिफिन की संख्या को लेकर गार्ड राजकुमार नाराज हो गया। उसका कहना था कि टिफिन कम आए हैं। इसी बात को लेकर उसकी विपिन नेमा से बहस शुरू हो गई।

    शुरुआत में विवाद केवल टिफिन को लेकर था लेकिन कुछ ही देर में मामला बढ़ गया। आरोप है कि गुस्से में गार्ड ने अपनी बंदूक उठा ली और फायरिंग कर दी। अचानक बैंक परिसर में गोली चलने से वहां मौजूद लोगों में डर फैल गया। कुछ लोग खुद को बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों पर छिप गए। घटना के बाद बैंक परिसर में कुछ देर तक तनाव की स्थिति बनी रही।

    फायरिंग की जानकारी मिलते ही कोतवाली पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने गार्ड को हिरासत में लिया और उसके पास मौजूद बंदूक को जब्त कर लिया। इसके बाद आरोपी को थाने ले जाकर पूछताछ शुरू की गई। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि फायरिंग किन परिस्थितियों में हुई और विवाद के दौरान वास्तव में क्या घटनाक्रम हुआ था।

    पुलिस ने घटना के समय बैंक में मौजूद लोगों से भी जानकारी जुटाना शुरू कर दिया है। प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं ताकि फायरिंग की पूरी वजह सामने आ सके। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि गोली किस दिशा में चली और इससे किसी व्यक्ति को नुकसान तो नहीं पहुंचा।

    फिलहाल पुलिस मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है। टिफिन कम मिलने जैसी छोटी बात से शुरू हुआ विवाद हथियार चलाने तक कैसे पहुंचा यह जांच का अहम हिस्सा है। पुलिस की जांच और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के बाद ही घटना की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

  • शिवपुरी में राशन विक्रेताओं का प्रदर्शन तेज, 5 सूत्रीय मांगों को लेकर CM के नाम ज्ञापन, मांगें नहीं मानीं तो हड़ताल

    शिवपुरी में राशन विक्रेताओं का प्रदर्शन तेज, 5 सूत्रीय मांगों को लेकर CM के नाम ज्ञापन, मांगें नहीं मानीं तो हड़ताल


    शिवपुरी । शिवपुरी में सोमवार को मध्यप्रदेश राशन विक्रेता संघ के बैनर तले जिलेभर के राशन विक्रेता कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां विक्रेताओं ने अपनी पांच सूत्रीय मांगों को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम ज्ञापन सौंपा। राशन विक्रेताओं ने सरकार से अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए कमीशन बढ़ाने और न्यूनतम मासिक आय की गारंटी देने की मांग की है। संघ ने साफ किया है कि अगर तय समय में मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो प्रदेशभर में आंदोलन किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर राशन दुकानों की हड़ताल भी की जा सकती है।

    राशन विक्रेताओं का कहना है कि मध्यप्रदेश में करीब 28 हजार शासकीय उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत पात्र हितग्राहियों को खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता है। इस व्यवस्था में राशन दुकानदारों की महत्वपूर्ण भूमिका है लेकिन बढ़ती महंगाई और दुकान संचालन से जुड़े खर्च के मुकाबले उन्हें मिलने वाला कमीशन पर्याप्त नहीं है। उनका कहना है कि कम आमदनी में दुकान का संचालन करना लगातार मुश्किल होता जा रहा है।

    संघ की सबसे प्रमुख मांग खाद्यान्न वितरण पर मिलने वाले कमीशन को बढ़ाकर कम से कम 200 रुपये प्रति क्विंटल करना है। इसके साथ ही प्रत्येक राशन विक्रेता के लिए 40 हजार रुपये प्रतिमाह की न्यूनतम गारंटीड आय तय करने की मांग रखी गई है। विक्रेताओं का कहना है कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में इतनी आय के बिना राशन दुकान चलाना कठिन हो रहा है।

    राशन विक्रेताओं ने खाद्यान्न में होने वाली शॉर्टेज को लेकर भी राहत की मांग की है। संघ ने प्रति क्विंटल एक किलो तक की शॉर्टेज की क्षतिपूर्ति देने की मांग की है। इसके अलावा हर महीने मिलने वाले कमीशन का भुगतान अधिकतम महीने की पांच तारीख तक अनिवार्य रूप से किए जाने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है। विक्रेताओं का कहना है कि कमीशन मिलने में देरी होने से रोजमर्रा के खर्च और दुकान संचालन की व्यवस्था प्रभावित होती है।

    संघ ने सेवा सहकारी समितियों और वन समितियों के अधीन काम करने वाले राशन विक्रेताओं के कमीशन भुगतान को लेकर भी स्पष्ट निर्देश जारी करने की मांग की है। विक्रेताओं का कहना है कि अलग-अलग स्तर पर भुगतान की प्रक्रिया होने के कारण कई बार कमीशन समय पर नहीं मिल पाता। ऐसे में शासन को भुगतान व्यवस्था को लेकर स्पष्ट और समयबद्ध व्यवस्था बनानी चाहिए।

    राशन विक्रेताओं ने अपनी मांगों के समर्थन में दूसरे राज्यों का उदाहरण भी दिया। संघ के सुनील कुमार मिश्रा के अनुसार बिहार में 258 रुपये प्रति क्विंटल केरल में 270 रुपये हरियाणा और दिल्ली में 200 रुपये तथा महाराष्ट्र में 170 रुपये तक कमीशन दिए जाने की बात कही गई है। संघ का कहना है कि मध्यप्रदेश में मिलने वाला कमीशन इन राज्यों की तुलना में कम है। ऐसे में यहां भी कमीशन को बढ़ाकर दुकानदारों को आर्थिक राहत दी जानी चाहिए।

    संघ ने शासन को सात दिवसीय आंदोलन की चेतावनी दी है। संगठन की ओर से एक अक्टूबर 2026 से आंदोलन और हड़ताल की सूचना दी गई है। हालांकि राशन विक्रेताओं को उम्मीद है कि मुख्यमंत्री खाद्य विभाग और प्रशासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए समय रहते समाधान निकालेंगे। विक्रेताओं का कहना है कि वे लंबे समय से सार्वजनिक वितरण प्रणाली में अपनी सेवाएं दे रहे हैं इसलिए उनकी आर्थिक मांगों पर सरकार को सकारात्मक फैसला लेना चाहिए। अब सभी की नजर शासन की ओर से होने वाली कार्रवाई पर है।

  • लाड़ली बहना के सवाल पर ठहाकों से गूंजा बुंदेली समागम, CM मोहन यादव बोले मुझे क्या पता था इतनी भारी मार पड़ेगी

    लाड़ली बहना के सवाल पर ठहाकों से गूंजा बुंदेली समागम, CM मोहन यादव बोले मुझे क्या पता था इतनी भारी मार पड़ेगी


    भोपाल । भोपाल के रवींद्र भवन में आयोजित बुंदेली समागम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का अलग अंदाज देखने को मिला। कार्यक्रम के दौरान बुंदेली कंटेंट क्रिएटर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने मुख्यमंत्री से कई सवाल पूछे। इसी दौरान छतरपुर की बुंदेली कंटेंट क्रिएटर बिन्नू रानी ने मुख्यमंत्री से महिलाओं और बेटियों को लेकर सवाल किया। इस पर मुख्यमंत्री ने मजाकिया अंदाज में जवाब दिया और लाड़ली बहना योजना का जिक्र करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्हें पता चला कि इस योजना की कितनी बड़ी जिम्मेदारी है।

    बिन्नू रानी ने मुख्यमंत्री से पूछा कि उन्होंने अपनी जिज्जियों यानी बहनों के लिए तो काफी कुछ किया है लेकिन उनकी बिन्नुओं यानी बेटियों के लिए वह क्या करना चाहते हैं। सवाल सुनकर मुख्यमंत्री ने हल्के फुल्के अंदाज में कहा कि उन्हें क्या पता था कि मुख्यमंत्री बनते ही इतनी भारी मार पड़ती है। मुख्यमंत्री के इस जवाब के बाद कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच ठहाके गूंजने लगे।

    मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि उनकी बहनों के लिए किसी तरह की परेशानी नहीं है। उन्होंने लाड़ली बहना योजना की शुरुआत में मिलने वाली एक हजार रुपए की राशि का जिक्र किया। साथ ही बताया कि अब यह सहायता बढ़कर डेढ़ हजार रुपए तक पहुंच चुकी है। मुख्यमंत्री ने बिन्नू रानी से मजाकिया अंदाज में कहा कि अभी वह लाड़ली बहना योजना के लिए छोटी हैं और जब बड़ी हो जाएंगी तो उन्हें भी इसका लाभ दिया जाएगा।

    बुंदेली समागम में मुख्यमंत्री से बुंदेलखंड के विकास और युवाओं से जुड़े सवाल भी किए गए। एक युवा ने उनसे पूछा कि अगर बुंदेलखंड के युवाओं की कोई एक समस्या 24 घंटे में हल करनी हो तो वह क्या करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि बुंदेलखंड जैसी बड़ी समस्या को 24 घंटे में हल करना आसान नहीं है। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड के लोगों में क्षमता योग्यता और बुद्धिमत्ता की कमी नहीं है। सरकार का काम उन्हें आगे बढ़ने के लिए अवसर उपलब्ध कराना है।

    मुख्यमंत्री ने बुंदेलखंड से होने वाले पलायन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पहले रोजगार और पानी से जुड़ी समस्याओं के कारण क्षेत्र से पलायन की स्थिति बनती थी। अब सरकार सिंचाई का रकबा बढ़ाने पर काम कर रही है। इसी क्रम में केन बेतवा जैसी बड़ी परियोजना का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पानी की उपलब्धता बढ़ने से क्षेत्र के कई सेक्टर में बदलाव आने की उम्मीद है।

    कार्यक्रम में फिल्म अभिनेता मुकेश तिवारी के साथ बड़ी संख्या में बुंदेली सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और कंटेंट क्रिएटर्स मौजूद रहे। इस दौरान मुख्यमंत्री ने उनसे संवाद किया और उनके सवालों के जवाब भी दिए। कार्यक्रम में बुंदेली संस्कृति और क्षेत्र की समस्याओं के साथ सरकार की योजनाओं को लेकर भी चर्चा हुई।

    लाड़ली बहना योजना की बात करें तो इसकी घोषणा 28 जनवरी 2023 को तत्कालीन शिवराज सरकार ने की थी। योजना का औपचारिक शुभारंभ 5 मार्च 2023 को हुआ था। शुरुआत में पात्र महिलाओं को हर महीने एक हजार रुपए की आर्थिक सहायता देने का प्रावधान था। जून 2023 में योजना की पहली किस्त जारी की गई थी।

    शुरुआती चरण में करीब एक करोड़ 25 लाख महिलाएं योजना के लिए पात्र थीं। पहली किस्त के दौरान एक करोड़ से ज्यादा महिलाओं को भुगतान किया गया था। इसके बाद समय के साथ योजना की मासिक सहायता राशि बढ़ाई गई। सितंबर 2026 में जारी 40वीं किस्त के दौरान करीब एक करोड़ 25 लाख महिलाओं के खातों में राशि भेजी गई। मौजूदा समय में पात्र महिलाओं को हर महीने 1500 रुपए की सहायता राशि मिल रही है।

    बुंदेली समागम में मुख्यमंत्री की लाड़ली बहना पर की गई टिप्पणी भले ही मजाकिया अंदाज में रही हो लेकिन इसके जरिए उन्होंने योजना की जिम्मेदारी और महिलाओं के लिए सरकार की आर्थिक सहायता का भी उल्लेख किया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों की प्रतिक्रियाओं और सवाल जवाब के बीच मुख्यमंत्री का यह अंदाज चर्चा का विषय बना रहा।

  • आश्रमों की सुरक्षा को लेकर साध्वी हर्षानंद ने उठाए सवाल, बोलीं घर पर रहकर पूजा करो, क्यों आश्रम की राजनीति में पड़ना

    आश्रमों की सुरक्षा को लेकर साध्वी हर्षानंद ने उठाए सवाल, बोलीं घर पर रहकर पूजा करो, क्यों आश्रम की राजनीति में पड़ना


    नई दिल्ली। महिलाओं से अकेले बागेश्वर धाम नहीं आने की अपील के बाद अब साध्वी हर्षानंद गिरि का बयान सामने आया है। उन्होंने आश्रमों में महिलाओं और परिवारों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए हैं। साध्वी ने अपने बयान में किसी विशेष संत या आश्रम का नाम नहीं लिया है लेकिन उनकी टिप्पणी को हाल ही में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की ओर से श्रद्धालुओं को दी गई सुरक्षा संबंधी सलाह से जोड़कर देखा जा रहा है।

    साध्वी हर्षानंद ने कहा कि यदि किसी आश्रम में रहने वाले सेवादारों पर ही भरोसा नहीं किया जा सकता तो ऐसे स्थान पर अपने बच्चों और परिवार को भेजने को लेकर लोगों को खुद सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हर आश्रम को गलत नहीं कहा जा सकता लेकिन जब किसी जगह की सुरक्षा को लेकर मन में दुविधा हो तो ऐसी स्थिति में वहां जाने से बचना भी एक विकल्प हो सकता है।

    उन्होंने लोगों को सलाह देते हुए कहा कि यदि उन्हें सुरक्षित रहना है तो अपने घर पर रहकर मंत्र जाप और पूजा पाठ कर सकते हैं। उनके मुताबिक धार्मिक आस्था के लिए किसी आश्रम में लंबे समय तक रुकना जरूरी नहीं है। लोग मंदिर में दर्शन करें और इसके बाद अपने घर लौट सकते हैं।

    साध्वी ने आश्रमों की व्यवस्था और वहां होने वाली गतिविधियों को लेकर भी अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि लोगों को आश्रम की राजनीति और विवादों में पड़ने के बजाय अपनी धार्मिक साधना पर ध्यान देना चाहिए। उनका कहना था कि जिन लोगों ने आश्रम बनाए हैं अगर वे ही वहां की पूरी व्यवस्था को संभालने में सक्षम नहीं हैं तो आम श्रद्धालुओं को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।

    यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने 3 अक्टूबर की रात श्रद्धालुओं खासकर महिलाओं को सतर्क रहने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि महिलाएं अकेली धाम पर न आएं। अगर किसी महिला को अकेले आना पड़े तो उसे किसी अनजान व्यक्ति या धाम के सेवादार पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करना चाहिए।

    धीरेंद्र शास्त्री ने श्रद्धालुओं से यह भी कहा था कि मंदिर परिसर और निर्धारित हॉल के अलावा दूसरी जगहों पर जाने से बचें। उन्होंने बताया था कि बागेश्वर धाम के करीब पांच किलोमीटर के पूरे क्षेत्र की सुरक्षा की जिम्मेदारी उनकी नहीं है। उनके मुताबिक वह मंदिर और हॉल की सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी ले सकते हैं लेकिन पूरे क्षेत्र को लेकर ऐसी गारंटी नहीं दी जा सकती।

    उन्होंने श्रद्धालुओं से धाम में लंबे समय तक रुकने से बचने और अपने सामान तथा सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद लेने की अपील भी की थी। शास्त्री ने धार्मिक स्थलों पर सामने आने वाली कुछ घटनाओं का संदर्भ देते हुए कहा था कि वह नहीं चाहते कि किसी अप्रिय घटना के कारण बागेश्वर धाम या श्री बालाजी महाराज की बदनामी हो।

    धीरेंद्र शास्त्री की अपील और साध्वी हर्षानंद की प्रतिक्रिया के बीच मुख्य मुद्दा धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर सामने आया है। दोनों बयानों में श्रद्धालुओं को सावधानी बरतने की बात कही गई है हालांकि साध्वी हर्षानंद ने आश्रमों में जाने को लेकर व्यापक सवाल उठाए हैं।

    ऐसे मामलों में किसी भी घटना या आरोप को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही निकाला जा सकता है। फिलहाल दोनों संतों की ओर से सामने आए बयानों ने धार्मिक स्थलों पर महिलाओं और परिवारों की सुरक्षा को लेकर एक नई चर्चा जरूर शुरू कर दी है। श्रद्धालुओं के लिए भीड़भाड़ वाले धार्मिक स्थलों पर सतर्क रहना और किसी अनजान व्यक्ति पर तुरंत भरोसा नहीं करना महत्वपूर्ण सावधानी मानी जा सकती है।

  • भोपाल के सरकारी स्कूल में छात्रों का हंगामा, टीचर पर पैसे मांगने और मारपीट के आरोप, कार्रवाई के बाद खत्म हुआ प्रदर्शन

    भोपाल के सरकारी स्कूल में छात्रों का हंगामा, टीचर पर पैसे मांगने और मारपीट के आरोप, कार्रवाई के बाद खत्म हुआ प्रदर्शन


    नई दिल्ली। भोपाल के मिसरोद इलाके में सरकारी स्कूल की एक टीचर के खिलाफ छात्र छात्राओं का विरोध प्रदर्शन चर्चा में है। विद्यार्थियों ने टीचर पर गंभीर आरोप लगाते हुए करीब चार घंटे तक सड़क पर बैठकर प्रदर्शन किया। छात्रों का कहना था कि उनसे पढ़ाई कराने के बजाय घर के काम कराए जाते हैं और ऐसा नहीं करने पर फेल करने की धमकी दी जाती है। विद्यार्थियों ने प्रोजेक्ट के नाम पर पैसे मांगने और विरोध करने पर मारपीट करने जैसे आरोप भी लगाए हैं। मामला बढ़ने के बाद शिक्षा विभाग ने संबंधित टीचर का ट्रांसफर कर दिया है और विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।

    यह मामला मिसरोद स्थित नवीन हायर सेकंडरी स्कूल का है। सोमवार को बड़ी संख्या में छात्र छात्राएं स्कूल के बाहर सड़क पर बैठ गए। प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों ने हाथों में पोस्टर लेकर टीचर के खिलाफ नारे लगाए। सूचना मिलने पर मिसरोद थाने के प्रभारी विमलेश कुमार राय मौके पर पहुंचे। उन्होंने स्कूल के प्राचार्य के साथ मिलकर विद्यार्थियों को समझाने की कोशिश की लेकिन छात्र अपनी मांग पर अड़े रहे। उनका कहना था कि आरोपी टीचर को स्कूल से हटाए जाने के बाद ही प्रदर्शन समाप्त किया जाएगा।

    बताया गया कि 11वीं कक्षा के गणित और जीव विज्ञान विषय के विद्यार्थियों ने इससे पहले 3 अक्टूबर को प्राचार्य को लिखित शिकायत दी थी। छात्रों ने आरोप लगाया कि यूपीएससी और अन्य भर्ती परीक्षाओं के दौरान उनसे बेंच लगाने सफाई करने और रोल नंबर लिखने जैसे काम कराए जाते हैं। विद्यार्थियों का यह भी कहना था कि कई बार उन्हें रविवार को भी स्कूल बुलाया जाता है। छात्रों ने कहा कि वे पढ़ाई करने के लिए स्कूल आते हैं और उनसे कर्मचारियों की तरह काम नहीं कराया जाना चाहिए।

    विद्यार्थियों ने प्रोजेक्ट के नाम पर पैसे मांगने का आरोप भी लगाया। शिकायत में दावा किया गया कि हर महीने प्रोजेक्ट के नाम पर 2500 रुपये मांगे जाते हैं। छात्रों के अनुसार पैसे नहीं देने पर पढ़ाई को लेकर दबाव बनाया जाता है। उनका आरोप है कि इसी तरह की स्थिति के कारण कुछ विद्यार्थियों ने विज्ञान विषय तक छोड़ दिया। प्रदर्शनकारी छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि टीचर क्लास में पढ़ाने के बजाय मोबाइल में व्यस्त रहती हैं और सीनियर छात्रों के साथ मारपीट की जाती है।

    इस मामले में छात्रों ने टीचर से एक विद्यार्थी की कथित बातचीत का ऑडियो भी सुनाया। इसमें पास या फेल कराने अभिभावकों से बातचीत और पैसे खर्च होने जैसी बातें सुनाई देने का दावा किया गया। हालांकि ऑडियो में आवाज किसकी है और बातचीत किस वास्तविक संदर्भ में हुई थी इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए इन आरोपों की जांच के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

    दूसरी ओर टीचर बबीता कुशवाह ने छात्रों के आरोपों को गलत बताया है। उनका कहना है कि वह वर्ष 1999 से अध्यापन कर रही हैं और उनके पास लंबे समय का शिक्षण अनुभव है। उन्होंने कहा कि अच्छे परिणाम के लिए वह विद्यार्थियों के साथ सख्ती करती हैं लेकिन पैसे लेकर पास कराने या फेल करने का आरोप पूरी तरह गलत है।

    टीचर ने छात्रों से सफाई कराने के आरोप से भी इनकार किया। उनका कहना है कि विद्यार्थियों को केवल अपना बैग साफ रखने के लिए कपड़ा रखने के लिए कहा जाता है। प्रैक्टिकल के दौरान इंस्ट्रूमेंट को व्यवस्थित करना और उनकी सफाई करना पढ़ाई की प्रक्रिया का हिस्सा है।

    मामले में जिला शिक्षा अधिकारी अभिनव आर्य ने कहा कि विद्यार्थियों की शिकायत के आधार पर बबीता कुशवाह का ट्रांसफर बागरोदा हायर सेकेंडरी स्कूल कर दिया गया है। उनके खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू की जा रही है। जांच के बाद सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

    नवीन हायर सेकेंडरी स्कूल की स्थापना वर्ष 1962 में हुई थी और यहां करीब 37 लोगों का स्टाफ बताया गया है। बबीता कुशवाह वर्ष 2010 से इस स्कूल में पढ़ा रही थीं। फिलहाल ट्रांसफर और जांच की कार्रवाई के बाद छात्रों का प्रदर्शन खत्म हो गया है। अब पूरे मामले में विभागीय जांच की रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी क्योंकि छात्रों और टीचर की ओर से आरोपों को लेकर अलग अलग दावे सामने आए हैं।

  • बेटियों की सुरक्षा पर शिवराज का बड़ा बयान, पुरुषों और माता-पिता से आत्ममंथन की अपील, बोले ये नारा कभी सफल न हो

    बेटियों की सुरक्षा पर शिवराज का बड़ा बयान, पुरुषों और माता-पिता से आत्ममंथन की अपील, बोले ये नारा कभी सफल न हो


    भोपाल। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान बेटियों की सुरक्षा और समाज में महिलाओं के प्रति बदलते नजरिए को लेकर गंभीर सवाल उठाए। सोशल मीडिया पर चर्चित हो रहे एक कचौड़ी दो समोसा इन मर्दों का क्या भरोसा वाले नारे का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आखिर ऐसी स्थिति क्यों बनी कि बेटियों को इस तरह की बात लिखने और कहने की जरूरत महसूस हुई। शिवराज ने कहा कि अगर बेटियां पुरुषों पर भरोसा नहीं कर पाएंगी तो समाज और देश आगे कैसे बढ़ेगा। उन्होंने पुरुषों बेटों और उनके माता पिता से इस विषय पर आत्ममंथन करने की अपील की।
    भोपाल में नवगति एजुकेशन स्कॉलरशिप कार्यक्रम में पहुंचे शिवराज ने कहा कि बेटियों का सम्मान और उनकी सुरक्षा सिर्फ उनके परिवार की जिम्मेदारी नहीं हो सकती। इसके लिए पूरे समाज को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। उन्होंने कहा कि महिलाओं और बेटियों के साथ गलत व्यवहार करने वाले कई बार कोई अनजान व्यक्ति नहीं होते बल्कि परिचित या आसपास के लोग भी हो सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि परिवार अपने बच्चों के संस्कार और व्यवहार को लेकर गंभीरता से सोचें।
    शिवराज ने कहा कि ऐसा माहौल बनना चाहिए जिसमें बेटियां बिना डर के आगे बढ़ सकें और पुरुषों पर भरोसा कर सकें। उन्होंने उम्मीद जताई कि जिस नारे का आज जिक्र हो रहा है वह कभी सार्थक और सफल नहीं होना चाहिए। उन्होंने महिलाओं को मां और बेटियों को देवी के समान बताते हुए उनके सम्मान और सुरक्षा के लिए हरसंभव प्रयास करने की बात कही।
    कार्यक्रम में शिवराज ने ड्राइवरों के बच्चों के लिए शुरू की गई छात्रवृत्ति योजना की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि ड्राइवर केवल वाहन चलाने वाला व्यक्ति नहीं है बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को गति देने में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ड्राइवर कई दिनों तक अपने परिवार से दूर रहकर देश के अलग अलग हिस्सों तक सामान पहुंचाते हैं। किसान की उपज को बाजार तक पहुंचाने से लेकर निर्माण सामग्री और जरूरी वस्तुओं की ढुलाई तक उनका योगदान महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि ड्राइवर देश और लोगों की जिंदगी को चलाने में बड़ी भूमिका निभाते हैं।
    शिवराज ने छात्रवृत्ति योजना के तहत मिलने वाली सहायता की जानकारी देते हुए बताया कि कक्षा आठवीं से दसवीं तक 60 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल करने वाले विद्यार्थियों को सालाना चार हजार रुपए की छात्रवृत्ति दी जाएगी। 11वीं और 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए यह राशि 4500 रुपए होगी। वहीं 90 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल करने वाले विद्यार्थियों को पांच हजार रुपए दिए जाएंगे। उन्होंने विद्यार्थियों को बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया और कहा कि मेहनत से पढ़ाई कर अच्छे अंक हासिल करने वाले बच्चों की आगे भी मदद की जाएगी।
    उन्होंने कहा कि बच्चों को केवल छात्रवृत्ति देना ही उद्देश्य नहीं है बल्कि उन्हें आगे की पढ़ाई कौशल विकास प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार से जोड़ना भी जरूरी है। शिवराज ने अपने संसदीय क्षेत्र में चल रही मामा कोचिंग क्लास का उल्लेख करते हुए कहा कि बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में निशुल्क सहयोग देने का प्रयास किया जा रहा है। ऑनलाइन शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण के जरिए युवाओं को रोजगार तथा स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ने पर भी काम किया जा रहा है।
    कार्यक्रम के दौरान शिवराज ने भारतीय खिलाड़ियों की उपलब्धियों का भी जिक्र किया। उन्होंने क्रिकेट में पाकिस्तान के खिलाफ भारतीय टीम की जीत और एशियन गेम्स में खिलाड़ियों के प्रदर्शन की सराहना की। उन्होंने कहा कि देश के बेटे और बेटियां अलग अलग क्षेत्रों में भारत का गौरव बढ़ा रहे हैं।
    इसके बाद शिवराज सिंह चौहान विदिशा के सांची पहुंचे जहां उन्होंने मधुमेह पर आयोजित वार्षिक सम्मेलन में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि मधुमेह तेजी से बढ़ती चुनौती है और इससे निपटने के लिए उपचार के साथ रोकथाम जागरूकता और लगातार शोध पर जोर देना जरूरी है। उन्होंने चिकित्सा विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता बताई। इस तरह एक ही दिन में शिवराज ने बेटियों की सुरक्षा से लेकर शिक्षा रोजगार खेल और स्वास्थ्य जैसे कई अहम मुद्दों पर अपनी बात रखी।

  • करोड़ों के बकाया भुगतान पर प्राइवेट अस्पतालों का बड़ा ऐलान, 8 अक्टूबर से आयुष्मान इलाज बंद, दिल्ली में होगा प्रदर्शन

    करोड़ों के बकाया भुगतान पर प्राइवेट अस्पतालों का बड़ा ऐलान, 8 अक्टूबर से आयुष्मान इलाज बंद, दिल्ली में होगा प्रदर्शन


    भोपाल। मध्य प्रदेश में आयुष्मान भारत योजना को लेकर प्राइवेट अस्पतालों और सरकार के बीच विवाद अब बड़े आंदोलन की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। प्रदेश के निजी अस्पताल संचालकों और चिकित्सा संगठनों ने 8 अक्टूबर से आयुष्मान योजना का अनिश्चितकालीन बहिष्कार करने का ऐलान किया है। यदि तय समय तक सरकार की ओर से अस्पताल संगठनों की मांगों पर ठोस समाधान नहीं निकला तो निजी अस्पतालों में आयुष्मान योजना के तहत मरीजों का इलाज नहीं किया जाएगा। इस फैसले के पीछे सबसे बड़ी वजह अस्पतालों के लंबे समय से अटके भुगतान और क्लेम में हो रही कटौती बताई जा रही है।

    अस्पताल संगठनों के अनुसार भोपाल के कई निजी अस्पतालों का आयुष्मान योजना के तहत करीब डेढ़ से दो करोड़ रुपये तक का भुगतान लंबित है। अस्पतालों का कहना है कि मरीजों का इलाज करने के बाद जब भुगतान लंबे समय तक अटकता है तो अस्पतालों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाता है। इसके अलावा कई क्लेम तकनीकी और प्रक्रियागत कारणों से रिजेक्ट किए जा रहे हैं या उनमें बड़ी कटौती की जा रही है। अस्पताल संचालकों का सवाल है कि जब मरीज के इलाज से पहले उसकी बीमारी उपचार और पैकेज को मंजूरी दी जाती है तो इलाज पूरा होने के बाद वैध क्लेम को रोकने या काटने का आधार स्पष्ट होना चाहिए।

    आईएमए मध्य प्रदेश और यूनाइटेड प्राइवेट हॉस्पिटल्स डायरेक्टर्स एसोसिएशन समेत कई संगठनों ने इस मुद्दे पर संयुक्त आंदोलन का फैसला लिया है। संगठनों का कहना है कि वे लंबे समय से सरकार के सामने अपनी समस्याएं रखते आ रहे हैं। ज्ञापन बैठकों प्रतिनिधिमंडलों और अलग अलग स्तर पर विरोध के बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। अब अस्पताल संचालक इसे निर्णायक आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं।

    अस्पताल संगठनों की एक बड़ी आपत्ति आयुष्मान योजना में एनएबीएच सर्टिफिकेट की अनिवार्यता को लेकर भी है। उनका कहना है कि अस्पतालों में गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा के मानकों का पालन जरूरी है लेकिन हर अस्पताल के लिए एक जैसी शर्त व्यावहारिक नहीं हो सकती। अस्पताल का आकार बिस्तरों की संख्या उपलब्ध सुविधाओं और संसाधनों के अनुसार मानकों को लागू किया जाना चाहिए। संगठनों ने एनएबीएच की अनिवार्यता समाप्त कर इसे स्वैच्छिक और प्रोत्साहन आधारित व्यवस्था बनाने की मांग की है।

    प्रदेश में आयुष्मान योजना से जुड़े अस्पतालों के लिए 1 अक्टूबर से नई शर्त लागू होने की बात भी सामने आई है। भोपाल इंदौर ग्वालियर और जबलपुर जैसे बड़े शहरों में योजना से जुड़े अस्पतालों के लिए एनएबीएच सर्टिफिकेट जरूरी किया गया है। अस्पताल संगठनों का दावा है कि इस नियम के कारण बड़ी संख्या में निजी अस्पतालों की आयुष्मान संबद्धता प्रभावित हो सकती है। उनका कहना है कि नियम लागू करने से पहले अस्पतालों को पर्याप्त समय और व्यावहारिक विकल्प दिए जाने चाहिए।

    क्लेम प्रक्रिया को लेकर भी निजी अस्पतालों ने कई सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि टीएटी प्रमाणीकरण दस्तावेजीकरण ट्रिगर और अन्य तकनीकी वजहों से क्लेम रिजेक्ट किए जाते हैं तो अस्पताल को स्पष्ट लिखित कारण मिलना चाहिए। इसके साथ ही क्लेम की जांच योग्य चिकित्सकों से कराने प्रभावी अपील व्यवस्था बनाने और पैकेज की दरों को वास्तविक चिकित्सा खर्च के अनुरूप संशोधित करने की मांग की गई है।

    अस्पताल संगठनों ने यह भी स्पष्ट किया है कि वास्तविक धोखाधड़ी के मामलों में कार्रवाई का वे विरोध नहीं करते। उनकी आपत्ति उन मामलों को लेकर है जहां मरीज वास्तविक है बीमारी वास्तविक है भर्ती और उपचार भी वास्तविक है लेकिन केवल तकनीकी गलती के आधार पर पूरा क्लेम अस्वीकार कर दिया जाता है। उनका कहना है कि ऐसी व्यवस्था में मरीज को कैशलेस सुविधा मिल सकती है लेकिन अस्पताल के लिए इलाज कस्टलेस नहीं हो सकता।

    आंदोलन को लेकर अस्पताल संगठनों ने सरकार को 8 अक्टूबर तक का समय दिया है। यदि इससे पहले शासन और अस्पताल प्रतिनिधियों के बीच सार्थक बातचीत कर लंबित भुगतान और क्लेम से जुड़े मुद्दों का लिखित समाधान नहीं निकला तो प्रदेशभर में आयुष्मान योजना का अनिश्चितकालीन बहिष्कार शुरू हो सकता है। संगठन ने जरूरत पड़ने पर करीब 1000 एम्बुलेंस के साथ दिल्ली कूच करने की चेतावनी भी दी है। अब सरकार और निजी अस्पताल संगठनों के बीच होने वाली बातचीत पर मरीजों की नजर है क्योंकि विवाद लंबा खिंचने पर आयुष्मान योजना के लाभार्थियों को इलाज की सुविधा प्रभावित होने की चिंता बढ़ सकती है।

  • भोपाल में अमित शाह के बड़े ऐलान से MP में हलचल, 2029 तक नशामुक्ति का लक्ष्य, उज्जैन को मिला 255 करोड़ का डेयरी प्लांट

    भोपाल में अमित शाह के बड़े ऐलान से MP में हलचल, 2029 तक नशामुक्ति का लक्ष्य, उज्जैन को मिला 255 करोड़ का डेयरी प्लांट


    भोपाल। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शनिवार को भोपाल में आयोजित गोपालक सम्मेलन के दौरान मध्यप्रदेश को नशामुक्त बनाने को लेकर बड़ा लक्ष्य सामने रखा। भेल दशहरा मैदान में आयोजित कार्यक्रम में शाह ने कहा कि मध्यप्रदेश को 31 दिसंबर 2029 तक नशामुक्त बनाने के लिए बारीक स्तर पर योजना तैयार की जाएगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और गृह विभाग के साथ इस विषय पर चर्चा कर रणनीति बनाई जानी थी। हालांकि अधिकारियों के साथ प्रस्तावित बैठक बाद में रद्द हो गई क्योंकि शाह एक जरूरी बैठक में वर्चुअली जुड़ गए। शाह ने अभिभावकों और विशेष रूप से माताओं से भी युवाओं को नशे से दूर रखने में सहयोग की अपील की।

    भोपाल में आयोजित गोपालक सम्मेलन में करीब 35 हजार गोपालकों और डेयरी सहकारी समितियों से जुड़े लोगों की भागीदारी रही। कार्यक्रम में शाह ने गोशालाओं के लिए 101 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता देने की बात कही। साथ ही उज्जैन में 255 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए जा रहे दूध प्रसंस्करण संयंत्र का डिजिटल भूमिपूजन किया गया। केंद्र और राज्य स्तर पर डेयरी क्षेत्र से जुड़ी कई परियोजनाओं को भी कार्यक्रम से जोड़ा गया। सरकारी जानकारी के मुताबिक उज्जैन के प्लांट की क्षमता प्रतिदिन तीन लाख लीटर दूध के प्रसंस्करण की होगी।

    शाह ने अपने संबोधन में देश में दूध उत्पादन से जुड़े आंकड़ों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया में सबसे अधिक दूध उत्पादन करने वाला देश बन चुका है। उन्होंने 2014-15 के मुकाबले प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता में बढ़ोतरी का भी जिक्र किया। शाह ने सहकारिता क्षेत्र को मजबूत करने पर जोर देते हुए कहा कि अलग सहकारिता मंत्रालय की स्थापना से डेयरी और पशुपालन क्षेत्र को फायदा पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि सहकारी व्यवस्था के जरिए दूध उत्पादकों को बेहतर कीमत दिलाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

    कार्यक्रम में मध्यप्रदेश की डेयरी अर्थव्यवस्था और पशुपालकों की आय बढ़ाने से जुड़े विषय भी सामने आए। सरकारी योजना के तहत गोपालक दीदियों के सम्मान और डेयरी सहकारी समितियों से जुड़े सदस्यों को लाभ पहुंचाने की पहल भी कार्यक्रम का हिस्सा रही। भोपाल में 40 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता वाले डेयरी उत्पाद संयंत्र और राज्य स्तरीय केंद्रीय प्रयोगशाला से जुड़ी परियोजनाएं भी कार्यक्रम में शामिल थीं। शिवपुरी के मिनी डेयरी प्लांट के सुदृढ़ीकरण का काम भी शुरू किया गया।

    अमित शाह के भोपाल दौरे में केवल डेयरी और नशामुक्ति का मुद्दा ही शामिल नहीं रहा। उन्होंने नए आपराधिक कानूनों पर आयोजित राज्य स्तरीय प्रदर्शनी का उद्घाटन भी किया। इसके बाद भौंरी स्थित IISER परिसर में अत्रि परिसर का शिलान्यास और स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का अनावरण कार्यक्रम भी उनके दौरे का हिस्सा रहा। दौरे के दौरान मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक भी हुई।

    नशे के खिलाफ लक्ष्य की बात करें तो केंद्र सरकार पहले भी वर्ष 2029 तक देश को नशामुक्त बनाने के लिए तीन वर्षीय रोडमैप की बात कर चुकी है। गृह मंत्रालय के अनुसार इस रणनीति में खुफिया और प्रवर्तन कार्रवाई के साथ सिंथेटिक ड्रग्स और उनके रॉ मटेरियल पर नियंत्रण मांग में कमी और नुकसान कम करने के उपाय तथा विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय जैसे पहलू शामिल हैं।

    इस बीच कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कार्यक्रम और सरकार के कामकाज को लेकर अलग-अलग सवाल उठाए। उन्होंने सांची डेयरी और ग्रामीण समितियों से जुड़े मुद्दे उठाते हुए प्रदेश की आर्थिक स्थिति तथा सरकार के कामकाज पर भी सवाल किए। इस तरह भोपाल का यह दौरा डेयरी विकास नशामुक्ति नए आपराधिक कानून और केंद्र राज्य से जुड़े मुद्दों को लेकर कई महत्वपूर्ण घोषणाओं और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का केंद्र रहा।