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  • NEET पेपर लीक पर मध्य प्रदेश में आक्रोश 20 जिलों में प्रदर्शन इंदौर से उठी सबसे बुलंद आवाज

    NEET पेपर लीक पर मध्य प्रदेश में आक्रोश 20 जिलों में प्रदर्शन इंदौर से उठी सबसे बुलंद आवाज


    भोपाल । NEET पेपर लीक और दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ कथित पुलिस कार्रवाई के विरोध में मध्य प्रदेश के 20 से अधिक जिलों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। सबसे बड़ा आंदोलन इंदौर के टंट्या भील चौराहे पर चल रहा है, जहां 30 जून को सिर्फ 5 छात्रों से शुरू हुआ धरना अब हजारों लोगों का आंदोलन बन चुका है।

    इंदौर में शनिवार को एक छात्रा नीम की पत्तियां लेकर प्रदर्शन में पहुंची। उसने कहा कि जिस तरह नीम बैक्टीरिया खत्म करती है, उसी तरह शिक्षा व्यवस्था में फैली गड़बड़ियों को भी साफ करने की जरूरत है। लगातार बारिश के बावजूद छात्र पिछले 25 दिनों से धरने पर डटे हुए हैं। आंदोलन स्थल पर पुलिस ड्रोन से निगरानी कर रही है।

    भोपाल के बोर्ड ऑफिस चौराहे पर भी छात्रों का धरना जारी है। प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।

    ग्वालियर में आंदोलन को लेकर समर्थक और विरोधी आमने-सामने आ गए, जबकि जबलपुर में “कॉकरोच जनता पार्टी” के विरोध में “लाल हिट जनता पार्टी” ने प्रदर्शन किया। संगठन ने कहा कि छात्रों की मांगें उचित हैं, लेकिन विरोध का तरीका सही नहीं है।

    धार, मऊगंज, नर्मदापुरम, झाबुआ, सिंगरौली, भिंड, टीकमगढ़, शाजापुर, सतना, सीधी, रतलाम, रीवा, बैतूल, उमरिया, बड़वानी और श्योपुर सहित कई जिलों में भी रैलियां, धरने और ज्ञापन सौंपे गए। कुछ स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प भी हुई तथा कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया।

    प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में NEET पेपर लीक की निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, परीक्षा प्रणाली में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग शामिल है। वहीं, विभिन्न छात्र संगठनों और राजनीतिक दलों ने भी आंदोलन को अपना समर्थन दिया है, जिससे यह विरोध अब राज्यव्यापी रूप ले चुका है।

  • एमपी में मानसून का जोर बरकरार, आज भोपाल-इंदौर समेत 35 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

    एमपी में मानसून का जोर बरकरार, आज भोपाल-इंदौर समेत 35 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट


    भोपाल। मध्यप्रदेश में मानसून पूरी तरह सक्रिय बना हुआ है। मौसम विभाग (आईएमडी) ने शनिवार को भोपाल, इंदौर समेत 35 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। वहीं करीब 20 जिलों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना जताई गई है। विभाग के अनुसार अगले चार दिनों तक प्रदेश के कई हिस्सों में भारी से अति भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है। अब तक राज्य में औसतन 13 इंच वर्षा दर्ज की जा चुकी है, जो इस मानसून सीजन के कुल औसत कोटे का लगभग 35 प्रतिशत है।

    अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से मिल रही लगातार नमी
    मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून पूरे प्रदेश में सक्रिय है। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से लगातार नमी मिलने के साथ मानसून ट्रफ भी मध्यप्रदेश से होकर गुजर रही है। इसके चलते हवा में नमी का स्तर 80 से 95 प्रतिशत तक बना हुआ है, जिससे कई इलाकों में तेज बारिश की परिस्थितियां बनी हुई हैं।

    इन जिलों में भारी बारिश की चेतावनी
    मौसम विभाग ने भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, उज्जैन, नीमच, मंदसौर, रतलाम, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर और छिंदवाड़ा में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।

    इसके अलावा पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी जिलों में भी कहीं हल्की तो कहीं तेज बारिश होने की संभावना है।

    लगातार बारिश से सुधरे आंकड़े
    बीते चार दिनों से हो रही लगातार बारिश का असर प्रदेश के वर्षा आंकड़ों पर भी दिखाई दिया है। 20 जुलाई तक जहां राज्य में सामान्य से 17 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई थी, वहीं अब यह कमी घटकर 11 प्रतिशत रह गई है। वर्तमान में प्रदेश में औसतन 330.4 मिमी (करीब 13 इंच) वर्षा हो चुकी है, जबकि इस अवधि तक 370.9 मिमी (करीब 14.6 इंच) बारिश सामान्य मानी जाती है।

    14 जिलों में सामान्य से अधिक वर्षा
    देवास, भोपाल, इंदौर, सीहोर, राजगढ़, हरदा, बुरहानपुर, नीमच, आगर-मालवा, भिंड, मंदसौर सहित 14 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। इनमें देवास सबसे आगे है, जहां अब तक 19.6 इंच वर्षा रिकॉर्ड की जा चुकी है। वहीं प्रदेश के 41 जिलों में अब भी सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है।

  • मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के घर के बाहर प्रदर्शन करने वाले दंपती जेल भेजे गए, सोशल मीडिया पोस्ट से पुलिस तक पहुंची जानकारी

    मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के घर के बाहर प्रदर्शन करने वाले दंपती जेल भेजे गए, सोशल मीडिया पोस्ट से पुलिस तक पहुंची जानकारी


    इंदौर। मध्य प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के आवास के बाहर बिना अनुमति प्रदर्शन करने पहुंचे दंपती के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उन्हें जेल भेज दिया है। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि दोनों ने सोशल मीडिया के जरिए लोगों से प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की थी। साथ ही टंट्या भील चौराहे पर चल रहे छात्र आंदोलन के दौरान भी प्रदर्शनकारियों से मंत्री के घर तक चलने का आग्रह किया था।

    जानकारी के मुताबिक, बुधवार दोपहर प्रहलाद पांडेय और उनकी पत्नी संगीता हाथ में संविधान की प्रति लेकर मंत्री के आवास के बाहर पहुंचे थे। इससे पहले ही पुलिस को सोशल मीडिया के माध्यम से संभावित प्रदर्शन की सूचना मिल गई थी। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मंत्री के आवास के बाहर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी थी।

    पुलिस पूछताछ में सामने आया कि दंपती ने कई लोगों से प्रदर्शन में शामिल होने का आग्रह किया था, लेकिन निर्धारित समय पर कोई भी उनके समर्थन में नहीं पहुंचा। जांच में यह भी पता चला कि उन्होंने टंट्या भील चौराहे पर चल रहे छात्र धरना-प्रदर्शन में मौजूद लोगों से भी मंत्री के आवास तक चलने की अपील की थी, लेकिन वहां से भी किसी ने उनका साथ नहीं दिया।

    जब दंपती मंत्री के आवास के बाहर पहुंचे तो पुलिस अधिकारियों ने उन्हें समझाने का प्रयास किया और बिना अनुमति प्रदर्शन न करने की सलाह दी। इसके बावजूद वे सड़क पर बैठकर प्रदर्शन करने लगे। इसके बाद पुलिस ने प्रहलाद पांडेय को उठाकर वाहन में बैठाया और उनकी पत्नी को भी हिरासत में लेकर थाने पहुंचाया, जहां दोनों से पूछताछ की गई।

    परदेशीपुरा थाना प्रभारी आर.डी. कानवा ने बताया कि पूछताछ के दौरान दोनों ने स्वीकार किया कि उन्होंने लोगों को प्रदर्शन के लिए बुलाया था। उन्होंने यह भी माना कि बिना अनुमति प्रदर्शन करना उनकी गलती थी। इसके बाद पुलिस ने शांति भंग की आशंका और बिना अनुमति प्रदर्शन करने के आरोप में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 151 सहित अन्य प्रासंगिक प्रावधानों के तहत कार्रवाई करते हुए दोनों को न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।

    इससे पहले भी दंपती ने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के हालिया बयानों से आहत होने की बात कहते हुए उनके आवास के बाहर प्रदर्शन करने का प्रयास किया था। उस दौरान भी पुलिस ने उन्हें समझाने की कोशिश की थी, लेकिन वे प्रदर्शन पर अड़े रहे थे।

  • छात्र आंदोलन पर स्तुति मिश्रा की पोस्ट वायरल, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष VD शर्मा की पत्नी के समर्थन से बढ़ी चर्चा

    छात्र आंदोलन पर स्तुति मिश्रा की पोस्ट वायरल, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष VD शर्मा की पत्नी के समर्थन से बढ़ी चर्चा


    भोपाल। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं खजुराहो से सांसद वीडी शर्मा की पत्नी स्तुति मिश्रा का एक सोशल मीडिया पोस्ट इन दिनों राजनीतिक और सोशल मीडिया गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। उन्होंने दिल्ली में NEET परीक्षा से जुड़े छात्र आंदोलन का समर्थन करते हुए सरकार से छात्रों की मांगों को गंभीरता से सुनने और संवेदनशीलता के साथ समाधान निकालने की अपील की है।

    स्तुति मिश्रा ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि छात्र देश का भविष्य हैं और उनके आंदोलन को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि समन्वय और संवाद के माध्यम से समाधान निकलना चाहिए। बड़े पदों पर बैठे लोगों को जिद नहीं करनी चाहिए, बल्कि बच्चों की बात सुननी चाहिए। उन्होंने लिखा कि यदि छात्र सरकार से उम्मीद नहीं करेंगे तो फिर किससे करेंगे। उनके अनुसार, प्रेम और सहानुभूति किसी भी समस्या के समाधान का सबसे प्रभावी माध्यम हैं और हर बच्चे को सम्मान व संवेदनशील व्यवहार मिलना चाहिए।

    पोस्ट के शुरुआती संस्करण में उन्होंने यह भी लिखा था कि गलती होने पर क्षमा मांगने से कोई छोटा नहीं होता और जो लोग इस पूरे घटनाक्रम के लिए जिम्मेदार हैं, उन्हें दंड मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा था कि छात्रों की मांगों को सुनना आवश्यक है और उनके साथ न्याय होना चाहिए। हालांकि, पोस्ट वायरल होने के बाद उन्होंने इस हिस्से को संपादित कर हटा दिया।

    स्तुति मिश्रा का यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद इसे लेकर विभिन्न राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। हालांकि, उन्होंने बाद में अपने संदेश में संशोधन करते हुए केवल छात्रों के प्रति संवेदनशीलता और संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया।

    यह पहला अवसर नहीं है जब स्तुति मिश्रा का कोई सोशल मीडिया पोस्ट सुर्खियों में आया हो। इससे पहले बढ़ती महंगाई और पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर उन्होंने व्यंग्यात्मक टिप्पणी करते हुए लिखा था कि भविष्य में बैंक होम लोन और कार लोन की तरह पेट्रोल-डीजल लोन भी ईएमआई पर उपलब्ध कराएंगे। उस पोस्ट के वायरल होने के बाद विपक्ष ने इसे मुद्दा बनाया था, जिसके बाद उन्होंने अपनी टिप्पणी पर सफाई भी दी थी।

    वर्तमान पोस्ट ने एक बार फिर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। हालांकि, इसे लेकर भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

  • दतिया पहुंचे सिंधिया का बड़ा दावा, बोले- भाजपा की जीत तय; पेपर लीक दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई

    दतिया पहुंचे सिंधिया का बड़ा दावा, बोले- भाजपा की जीत तय; पेपर लीक दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई


    ग्वालियर । दतिया उपचुनाव के प्रचार अभियान ने रफ्तार पकड़ ली है। केंद्रीय मंत्री और भाजपा के स्टार प्रचारक ज्योतिरादित्य सिंधिया शुक्रवार को ग्वालियर पहुंचे, जहां से वे पार्टी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के समर्थन में चुनाव प्रचार के लिए दतिया रवाना हुए। ग्वालियर एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत करते हुए सिंधिया ने भरोसा जताया कि दतिया की जनता एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी पर विश्वास जताएगी और पार्टी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी भारी मतों से जीत दर्ज करेंगे।
    सिंधिया ने कहा कि दतिया उपचुनाव केवल राजनीतिक मुकाबला नहीं, बल्कि विकास और क्षेत्र की प्रगति का चुनाव है। उन्होंने कहा कि डबल इंजन की सरकार ने दतिया के विकास के लिए लगातार काम किया है और आगे भी विकास की यह गति जारी रहेगी। उनके मुताबिक, जनता विकास के मुद्दे पर मतदान करेगी और भाजपा का परचम लहराएगी।
    चुनावी चर्चा के साथ-साथ सिंधिया ने देशभर में चर्चा का विषय बने NEET पेपर लीक मामले पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी देश का भविष्य हैं और उनके हितों की रक्षा करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं और जिन लोगों ने परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ी की है, उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की गई है।
    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार परीक्षा में धांधली और पेपर लीक जैसे अपराधों पर कठोर कार्रवाई के लिए कानून को और मजबूत बना रही है। उन्होंने कहा कि दोषियों को जल्द सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट जैसी व्यवस्था पर भी काम किया जा रहा है, ताकि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा न जाए।
    सिंधिया ने कहा कि लाखों छात्र दिन-रात मेहनत कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। ऐसे में पेपर लीक जैसी घटनाएं केवल छात्रों के साथ अन्याय नहीं, बल्कि देश के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार ऐसे मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है और दोषियों को कानून के तहत कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाएगी।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी स्पष्ट संदेश दिया है कि युवाओं के भविष्य से समझौता नहीं किया जाएगा। सरकार परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए लगातार कदम उठा रही है।

    दतिया उपचुनाव को लेकर भाजपा ने अपने सभी वरिष्ठ नेताओं को प्रचार में उतार दिया है। 30 जुलाई को होने वाले मतदान से पहले पार्टी पूरी ताकत के साथ चुनावी मैदान में है, जबकि कांग्रेस भी जीत के लिए जोरदार प्रचार अभियान चला रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में दतिया का चुनावी मुकाबला और अधिक रोचक होने की संभावना है।

  • गड़े धन का लालच बना मौत का जाल! MP में तंत्र-मंत्र के नाम पर हत्या, नरबलि और करोड़ों की ठगी का काला खेल

    गड़े धन का लालच बना मौत का जाल! MP में तंत्र-मंत्र के नाम पर हत्या, नरबलि और करोड़ों की ठगी का काला खेल


    भोपाल । रातों-रात अमीर बनने का सपना, खेतों में दबे खजाने की कहानियां और तंत्र-मंत्र के जरिए अकूत संपत्ति मिलने का झांसा आज भी लोगों को अंधविश्वास की ऐसी अंधेरी दुनिया में धकेल रहा है, जहां अंत अक्सर हत्या, ठगी और बर्बादी के रूप में होता है। मध्य प्रदेश में हाल के दिनों में सामने आए कई मामलों ने यह साबित कर दिया है कि गड़े धन का मिथक अब केवल अफवाह नहीं, बल्कि संगठित अपराध और अंधविश्वास का खतरनाक हथियार बन चुका है।

    भोपाल के सूखी सेवनिया इलाके में एक पिता ने कथित तांत्रिक के बहकावे में आकर अपनी 17 वर्षीय बेटी की हत्या कर दी। तांत्रिक ने दावा किया था कि खेत में दबे खजाने तक पहुंचने के लिए लड़की की बलि जरूरी है। पिता ने बेटी की हत्या कर शव खेत में दफना दिया। कई महीने बाद जब खेत की जुताई हुई तो कंकाल मिलने से पूरे मामले का खुलासा हुआ।

    रायसेन जिले में भी गड़े धन की तलाश एक व्यापारी की जिंदगी पर भारी पड़ गई। कथित तांत्रिक ने करोड़ों के खजाने का लालच देकर पूजा कराई और फिर नरबलि की बात कहकर व्यापारी की हत्या कर शव रेत में दफना दिया। पुलिस जांच में यह सनसनीखेज वारदात सामने आई।

    बालाघाट में एक तांत्रिक के कहने पर 11 लोग एक महिला के घर में गड़ा धन तलाशने घुस गए। महिला के जागने पर उस पर चाकू से हमला कर दिया गया। हालांकि आरोपियों को कोई खजाना नहीं मिला और वे घर का सामान लूटकर फरार हो गए। पुलिस ने बाद में गिरोह के कई सदस्यों को गिरफ्तार किया।

    मंदसौर में भी कथित तांत्रिकों ने किसान को नोटों की बारिश और गड़ा धन निकालने का सपना दिखाकर करीब 12 लाख रुपये ठग लिए। पूजा-पाठ, भूत-प्रेत और नरबलि का डर दिखाकर लगातार पैसे वसूले जाते रहे। आखिरकार जब नोटों की गड्डियों में असली मुद्रा की जगह छोटे नोट निकले तो पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ।

    राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़े भी इस गंभीर समस्या की पुष्टि करते हैं। वर्ष 2024 में देशभर में टोना-टोटका से जुड़ी 54 हत्याएं दर्ज की गईं, जिनमें अकेले मध्य प्रदेश में 17 मामले सामने आए। इस तरह अंधविश्वास से जुड़ी हत्याओं के मामलों में प्रदेश देश में पहले स्थान पर है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि प्राचीन समय में युद्ध के दौरान लोग अपनी संपत्ति जमीन में छिपा देते थे। समय के साथ यह मान्यता बन गई कि ऐसे खजानों की रक्षा अदृश्य शक्तियां करती हैं और विशेष तांत्रिक क्रियाओं से ही उन्हें प्राप्त किया जा सकता है। लेकिन शास्त्रों में तंत्र-मंत्र से गड़ा धन निकालने, नोटों की बारिश कराने या रातों-रात अमीर बनने का कोई प्रमाण नहीं मिलता। कथित तांत्रिक इसी अज्ञानता और लालच का फायदा उठाकर लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे भ्रामक वीडियो और फर्जी दावों ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है। ऐसे में जरूरत है कि लोग वैज्ञानिक सोच अपनाएं, अंधविश्वास से दूर रहें और किसी भी तरह के चमत्कार या गड़े धन के दावों पर भरोसा करने से पहले सतर्क रहें। क्योंकि खजाने की तलाश में उठाया गया एक गलत कदम कई परिवारों की जिंदगी हमेशा के लिए तबाह कर सकता है।

  • पूर्व IAS नियाज़ खान की राजनीति में एंट्री की इच्छा: बोले- कांग्रेस और भाजपा शायद स्वीकार न करें, नई पार्टी बनी तो करूंगा जॉइन

    पूर्व IAS नियाज़ खान की राजनीति में एंट्री की इच्छा: बोले- कांग्रेस और भाजपा शायद स्वीकार न करें, नई पार्टी बनी तो करूंगा जॉइन


    भोपाल । मध्य प्रदेश के पूर्व आईएएस अधिकारी और चर्चित लेखक नियाज़ खान ने सक्रिय राजनीति में आने की इच्छा जाहिर कर एक नई राजनीतिक चर्चा छेड़ दी है। सोशल मीडिया पर साझा की गई अपनी पोस्ट में उन्होंने कहा कि देश में बढ़ते भ्रष्टाचार और राजनीतिक व्यवस्था में सुधार लाने के लिए अब राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाना जरूरी हो गया है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है।

    नियाज़ खान ने अपनी पोस्ट में लिखा कि वह कांग्रेस पार्टी में शामिल होना चाहते हैं, लेकिन उन्हें लगता है कि उनके हिंदू उदारवादी विचारों के कारण कांग्रेस उन्हें स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने भी उनके साथ हमेशा अलग व्यवहार किया और प्रशासनिक सेवा के दौरान उन्हें कभी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां नहीं दीं। उनके अनुसार, इससे यह स्पष्ट होता है कि भाजपा भी उन्हें अपने साथ जोड़ने की इच्छुक नहीं रही।

    पूर्व आईएएस अधिकारी ने अपनी पोस्ट में आगे लिखा कि यदि भविष्य में कॉकरोच जनता पार्टी राजनीति में सक्रिय रूप से उतरती है तो वह उस पार्टी से जुड़ने पर विचार करेंगे। उनका कहना है कि वर्तमान समय में राजनीति ही समाज और देश की सबसे बड़ी सेवा का माध्यम बन चुकी है। इसलिए यदि व्यवस्था में बदलाव लाना है तो राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा बनना आवश्यक है।

    नियाज़ खान प्रशासनिक सेवा के साथ-साथ साहित्य जगत में भी अपनी अलग पहचान रखते हैं। उन्होंने ‘ब्राह्मण द ग्रेट’, ‘ब्राउन डेजर्ट IV-786’ और ‘बी रेडी टू डाई’ जैसे कई चर्चित उपन्यास लिखे हैं। उनकी किताबें अक्सर सामाजिक और वैचारिक मुद्दों पर केंद्रित रही हैं, जिसके कारण वे समय-समय पर सार्वजनिक बहस का हिस्सा भी बने हैं।

    सोशल मीडिया पर उनकी पोस्ट सामने आने के बाद लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोगों ने उनके राजनीति में आने के फैसले का स्वागत किया, जबकि कुछ ने उनके बयान को लेकर सवाल भी उठाए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी पूर्व वरिष्ठ नौकरशाह का इस तरह खुलकर अपनी राजनीतिक प्राथमिकताएं सार्वजनिक करना चर्चा का विषय बनना स्वाभाविक है।

    हालांकि, नियाज़ खान ने फिलहाल किसी राजनीतिक दल में औपचारिक रूप से शामिल होने की घोषणा नहीं की है। उनका बयान केवल अपनी इच्छा और संभावित विकल्पों को लेकर है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में वह वास्तव में सक्रिय राजनीति का हिस्सा बनते हैं या नहीं और यदि बनते हैं तो किस राजनीतिक मंच से अपनी नई पारी की शुरुआत करते हैं।

  • बात खरी है: बच्चों से चुनावी नारे, कांग्रेस मार्च में मारपीट और नशे में पुलिसकर्मी का ड्रामा

    बात खरी है: बच्चों से चुनावी नारे, कांग्रेस मार्च में मारपीट और नशे में पुलिसकर्मी का ड्रामा


    भोपाल । मध्य प्रदेश में राजनीतिक और प्रशासनिक घटनाओं ने एक बार फिर सुर्खियां बटोरी हैं। दतिया उपचुनाव के प्रचार से लेकर भोपाल में कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन और रीवा के थाने तक, कई घटनाओं ने सवाल खड़े किए हैं। इन घटनाओं ने चुनावी आचार संहिता, राजनीतिक अनुशासन और पुलिस व्यवस्था पर नई बहस छेड़ दी है।

    दतिया उपचुनाव के प्रचार के दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। वीडियो में वे छोटे बच्चों से कांग्रेस के समर्थन में चुनावी नारे लगवाते नजर आ रहे हैं। बच्चों से “जात पे न पात पे, मुहर लगेगी हाथ पे” और “जीतेगा भाई जीतेगा, हाथ का पंजा जीतेगा” जैसे नारे लगवाने के बाद पटवारी ने उनसे पूछा कि उनकी बात सही है या गलत। इस पर बच्चों ने मासूमियत से “गलत” कह दिया। हालांकि उन्होंने इसे नजरअंदाज कर भाषण जारी रखा, लेकिन अब इस वीडियो को लेकर चुनावी आचार संहिता के उल्लंघन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार चुनाव प्रचार में बच्चों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

    उधर राजधानी भोपाल में भाजपा कार्यालय तक निकाले गए कांग्रेस के पैदल मार्च के दौरान उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब कुछ कार्यकर्ताओं ने एक युवक को जेबकतरा बताकर बीच सड़क पर पीटना शुरू कर दिया। युवक को दौड़ा-दौड़ाकर लात-घूंसों से मारा गया। मौके पर मौजूद पुलिस ने हस्तक्षेप कर उसे भीड़ से बचाया और अस्पताल पहुंचाया। घायल युवक माज कुरैशी ने दावा किया कि वह कांग्रेस कार्यकर्ता है और सोशल मीडिया पर एक पोस्ट को लेकर कुछ लोगों ने उसके साथ मारपीट की। वहीं कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उनका इस घटना से कोई संबंध नहीं है। घटना ने कांग्रेस की आंतरिक एकजुटता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

    इधर रीवा के अमहिया थाने से सामने आए एक वीडियो ने पुलिस विभाग की छवि को झटका दिया है। वीडियो में प्रधान आरक्षक अच्छेलाल शराब के नशे में थाने के भीतर हंगामा करते दिखाई दे रहे हैं। वह खुद को “पुलिस लाइन का गुंडा” बताते हुए खुलेआम शराब पीने की बात स्वीकार करता नजर आया। यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब पुलिस विभाग प्रदेशभर में “नशे से दूरी है जरूरी” अभियान चला रहा है। वीडियो वायरल होने के बाद संबंधित पुलिसकर्मी को निलंबित कर दिया गया है, लेकिन घटना ने पुलिस व्यवस्था और अनुशासन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    इसी बीच राज्य के नए मुख्य सचिव की नियुक्ति को लेकर भी प्रशासनिक गलियारों में चर्चाओं का दौर जारी है। बताया जा रहा है कि अंतिम समय तक कई वरिष्ठ अधिकारियों के बीच इस पद के लिए जोर-आजमाइश चलती रही। नए मुख्य सचिव के कार्यभार संभालने के बाद भी नौकरशाही में इसे लेकर चर्चाएं थमती नजर नहीं आ रही हैं।

  • एमपी की सड़कों पर मौत की रफ्तार, रोज 142 हादसे और 40 मौतें, जानलेवा दुर्घटनाओं में देश में तीसरे स्थान पर मध्य प्रदेश

    एमपी की सड़कों पर मौत की रफ्तार, रोज 142 हादसे और 40 मौतें, जानलेवा दुर्घटनाओं में देश में तीसरे स्थान पर मध्य प्रदेश


    भोपाल । मध्य प्रदेश की सड़कों पर तेज रफ्तार लगातार लोगों की जान ले रही है। लोकसभा में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत ताजा आंकड़ों ने राज्य में सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में हर दिन औसतन 142 सड़क दुर्घटनाएं होती हैं और इनमें करीब 40 लोगों की मौत हो जाती है। सड़क हादसों की गंभीरता के मामले में मध्य प्रदेश देश के सबसे प्रभावित राज्यों में शामिल है और जानलेवा दुर्घटनाओं के आंकड़ों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।

    आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 से 2024 के बीच सड़क हादसों और उनसे होने वाली मौतों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि 2025 में कुल सड़क दुर्घटनाओं की संख्या घटकर 52 हजार 125 रह गई, जबकि वर्ष 2024 में यह आंकड़ा 56 हजार 669 था। इसके बावजूद राहत नहीं मिली, क्योंकि सड़क हादसों में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 14 हजार 842 पहुंच गई। यह दर्शाता है कि दुर्घटनाओं की संख्या कम होने के बावजूद उनकी गंभीरता और घातक प्रभाव बढ़ा है।

    देश के अन्य राज्यों से तुलना करें तो तमिलनाडु में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या सबसे अधिक दर्ज की गई है। वहीं उत्तर प्रदेश में सड़क हादसों में सबसे ज्यादा लोगों की मौत हो रही है। उत्तर प्रदेश में प्रतिदिन औसतन 136 सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, लेकिन इनमें करीब 75 लोगों की जान चली जाती है। दूसरी ओर मध्य प्रदेश में हादसों की संख्या अधिक होने के बावजूद प्रतिदिन औसतन 40 लोगों की मौत दर्ज की गई है। यह स्थिति राज्य में सड़क सुरक्षा उपायों को और प्रभावी बनाने की आवश्यकता की ओर संकेत करती है।

    बढ़ती दुर्घटनाओं और मौतों को कम करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार 4E रणनीति पर काम कर रही हैं। इसका पहला हिस्सा एजुकेशन एंड अवेयरनेस है, जिसके तहत ड्राइविंग प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान तथा क्षेत्रीय ड्राइविंग प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह और विभिन्न जनजागरूकता अभियानों के माध्यम से लोगों को सुरक्षित वाहन चलाने और यातायात नियमों के पालन के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

    दूसरा महत्वपूर्ण पहलू इंजीनियरिंग है। राष्ट्रीय राजमार्गों पर दुर्घटना संभावित ब्लैक स्पॉट्स की पहचान कर उन्हें सुधारा जा रहा है। नए और पुराने राजमार्गों का थर्ड पार्टी रोड सेफ्टी ऑडिट अनिवार्य किया गया है। साथ ही वाहनों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए फ्रंट एयरबैग, एंटी लॉक ब्रेकिंग सिस्टम (ABS), ओवरस्पीड वार्निंग सिस्टम, रिवर्स पार्किंग सेंसर और सीट बेल्ट रिमाइंडर जैसी सुविधाएं अनिवार्य कर दी गई हैं। वाहन सुरक्षा के लिए भारत एनकैप (Bharat NCAP) क्रैश टेस्ट रेटिंग भी लागू की गई है।

    तीसरे चरण इन्फोर्समेंट एंड टेक्नोलॉजी के तहत मोटर वाहन संशोधन अधिनियम 2019 के प्रावधानों को सख्ती से लागू किया जा रहा है। यातायात नियमों के उल्लंघन पर भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है। शहरों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर सीसीटीवी कैमरे, स्पीड रडार और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन सिस्टम के जरिए निगरानी बढ़ाई गई है तथा ई-चालान व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाया गया है।

    चौथा महत्वपूर्ण हिस्सा इमरजेंसी केयर है। प्रधानमंत्री राहत योजना के तहत सड़क दुर्घटना के शिकार लोगों को गोल्डन आवर में अस्पताल पहुंचाकर कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं राह-वीर (गुड समैरिटन) योजना के तहत दुर्घटना पीड़ित की मदद करने वाले व्यक्ति को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि 5 हजार रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर दी गई है। इसके अलावा हिट एंड रन मामलों में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति के लिए मुआवजा 50 हजार रुपये और मृत्यु की स्थिति में 2 लाख रुपये तक कर दिया गया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क हादसों को कम करने के लिए केवल सरकारी योजनाएं ही पर्याप्त नहीं हैं। तेज रफ्तार, लापरवाही से वाहन चलाना, शराब पीकर ड्राइविंग, हेलमेट और सीट बेल्ट का उपयोग न करना जैसी आदतों पर भी प्रभावी नियंत्रण जरूरी है। जब तक यातायात नियमों के प्रति लोगों में जागरूकता और जिम्मेदारी नहीं बढ़ेगी, तब तक सड़क दुर्घटनाओं और उनसे होने वाली मौतों में अपेक्षित कमी लाना चुनौती बना रहेगा।

  • सड़क सुरक्षा पर बड़ा अलर्ट, मध्य प्रदेश में हादसे कम हुए लेकिन मौतें बढ़ीं, लोकसभा में चौंकाने वाले आंकड़े

    सड़क सुरक्षा पर बड़ा अलर्ट, मध्य प्रदेश में हादसे कम हुए लेकिन मौतें बढ़ीं, लोकसभा में चौंकाने वाले आंकड़े


    भोपाल । मध्य प्रदेश की सड़कों पर तेज रफ्तार अब लगातार जानलेवा साबित हो रही है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा लोकसभा में पेश ताजा आंकड़ों ने राज्य में सड़क सुरक्षा की चिंताजनक तस्वीर सामने रख दी है। आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में हर दिन औसतन 142 सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं, जिनमें करीब 40 लोगों की जान चली जाती है। यही वजह है कि सड़क हादसों के मामले में मध्य प्रदेश देश के सबसे प्रभावित राज्यों में शामिल हो गया है और जानलेवा दुर्घटनाओं को लेकर तीसरे स्थान पर पहुंच गया है।

    रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2021 से 2024 के बीच सड़क दुर्घटनाओं और मौतों दोनों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि वर्ष 2025 में कुल सड़क हादसों की संख्या घटकर 52 हजार 125 रह गई, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 56 हजार 669 था। इसके बावजूद राहत की बात नहीं है, क्योंकि दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या बढ़कर 14 हजार 842 पहुंच गई। इसका सीधा मतलब है कि हादसों की संख्या भले कम हुई हो, लेकिन वे पहले से कहीं अधिक घातक साबित हो रहे हैं।

    देशव्यापी आंकड़ों पर नजर डालें तो सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में तमिलनाडु पहले स्थान पर है। वहीं उत्तर प्रदेश में सड़क हादसों में सबसे अधिक लोगों की मौत हो रही है। उत्तर प्रदेश में प्रतिदिन औसतन 136 सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, लेकिन इनमें करीब 75 लोगों की जान चली जाती है। दूसरी ओर मध्य प्रदेश में प्रतिदिन होने वाले हादसों की संख्या उत्तर प्रदेश से अधिक है, लेकिन मौतों का औसत 40 प्रतिदिन दर्ज किया गया है। यह स्थिति राज्य में सड़क सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर चुनौती को उजागर करती है।

    बढ़ते हादसों और मौतों को रोकने के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने 4E रणनीति पर काम तेज किया है। इसके तहत पहला कदम एजुकेशन एंड अवेयरनेस है, जिसमें ड्राइविंग प्रशिक्षण संस्थानों की स्थापना, सड़क सुरक्षा अभियान और जनजागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं ताकि लोग यातायात नियमों का पालन करें और सुरक्षित ड्राइविंग की आदत विकसित हो।

    दूसरा महत्वपूर्ण पहलू इंजीनियरिंग है। राष्ट्रीय राजमार्गों पर दुर्घटना संभावित ब्लैक स्पॉट्स को चिन्हित कर सुधार किया जा रहा है। नए और पुराने हाईवे का थर्ड पार्टी रोड सेफ्टी ऑडिट अनिवार्य किया गया है। वहीं वाहनों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए फ्रंट एयरबैग, एंटी लॉक ब्रेकिंग सिस्टम (ABS), ओवरस्पीड वार्निंग, रिवर्स पार्किंग सेंसर और सीट बेल्ट रिमाइंडर जैसी सुविधाएं अनिवार्य कर दी गई हैं। साथ ही भारत एनकैप क्रैश टेस्ट रेटिंग व्यवस्था भी लागू की गई है।

    तीसरे चरण इन्फोर्समेंट एंड टेक्नोलॉजी के तहत मोटर वाहन संशोधन अधिनियम 2019 के प्रावधानों को सख्ती से लागू किया जा रहा है। शहरों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर सीसीटीवी कैमरे, स्पीड रडार और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन सिस्टम के जरिए निगरानी बढ़ाई गई है तथा ई-चालान व्यवस्था को पारदर्शी बनाया गया है।

    चौथा और सबसे अहम हिस्सा इमरजेंसी केयर है। प्रधानमंत्री राहत योजना के तहत सड़क दुर्घटना के शिकार लोगों को गोल्डन आवर में अस्पताल पहुंचाकर कैशलेस इलाज उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। वहीं राह-वीर (गुड समैरिटन) योजना के तहत दुर्घटना पीड़ित की मदद करने वाले व्यक्ति को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि 5 हजार रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर दी गई है। इसके अलावा हिट एंड रन मामलों में गंभीर चोट पर मुआवजा 50 हजार रुपये और मृत्यु की स्थिति में 2 लाख रुपये तक बढ़ाया गया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि केवल नियम बनाना पर्याप्त नहीं होगा। तेज रफ्तार, लापरवाही से वाहन चलाना, शराब पीकर ड्राइविंग और यातायात नियमों की अनदेखी पर प्रभावी नियंत्रण के साथ सड़क सुरक्षा के प्रति जनभागीदारी बढ़ाना भी जरूरी है। तभी मध्य प्रदेश समेत देशभर में सड़क दुर्घटनाओं और उनसे होने वाली मौतों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।