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  • इंदौर में विशालकाय कोबरा से दहशत, घर में छिपे 12 से 14 साल पुराने जहरीले सांप का सुरक्षित रेस्क्यू

    इंदौर में विशालकाय कोबरा से दहशत, घर में छिपे 12 से 14 साल पुराने जहरीले सांप का सुरक्षित रेस्क्यू


    इंदौर । इंदौर के श्रीयंत्र नगर में एक घर के भीतर पांच फीट लंबा विशाल कोबरा निकल आने से इलाके में दहशत फैल गई। परिवार के सदस्यों ने जैसे ही जहरीले सांप को देखा उनके होश उड़ गए। हालांकि घबराने के बजाय उन्होंने सूझबूझ दिखाई और तुरंत सर्पमित्र को सूचना दी। मौके पर पहुंचे सर्पमित्र ने महज पांच मिनट में कोबरा का सुरक्षित रेस्क्यू कर उसे पकड़ लिया। बाद में सांप को प्राकृतिक आवास में सुरक्षित छोड़ दिया गया।

    जानकारी के अनुसार घटना सोमवार देर रात श्रीयंत्र नगर की है। परिवार के लोगों ने घर के भीतर एक बड़े आकार के कोबरा को देखा जो लोहे की चादर के नीचे छिपकर बैठा हुआ था। सांप का आकार और उसकी फुंफकार देखकर परिवार के सदस्य घबरा गए लेकिन किसी ने उसे छेड़ने की कोशिश नहीं की। सभी लोग सुरक्षित दूरी बनाकर लगातार सांप पर नजर रखते रहे ताकि उसके स्थान की जानकारी बनी रहे।

    सूचना मिलने पर सर्पमित्र महेंद्र श्रीवास्तव तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले घर के लोगों को शांत रहने और सांप से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दी। इसके बाद सावधानीपूर्वक लोहे की चादर हटाई गई जहां कोबरा छिपा बैठा था। कुछ ही मिनटों की मशक्कत के बाद सांप को सुरक्षित तरीके से पकड़ लिया गया। पूरी रेस्क्यू प्रक्रिया करीब पांच मिनट में पूरी हो गई।

    महेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि कोबरा का आकार सामान्य से काफी बड़ा था। उसकी लंबाई करीब पांच फीट थी और शरीर की मोटाई भी अन्य कोबरा सांपों की तुलना में अधिक दिखाई दे रही थी। उनके अनुभव के अनुसार यह कोबरा लगभग 12 से 14 वर्ष की उम्र का हो सकता है। इतना बड़ा और परिपक्व कोबरा रिहायशी इलाके में दिखाई देना असामान्य माना जाता है।

    उन्होंने बताया कि मकान के आसपास खुला क्षेत्र होने के कारण संभावना है कि सांप वहीं से घर के भीतर पहुंच गया होगा। बरसात के मौसम में बिलों में पानी भरने या भोजन की तलाश में सांप अक्सर रिहायशी इलाकों की ओर आ जाते हैं। ऐसे समय लोगों को विशेष सतर्क रहने की जरूरत होती है।

    महेंद्र ने यह भी बताया कि इसी परिवार के लोगों ने लगभग एक महीने पहले भी घर के आसपास एक कोबरा देखा था। संभव है कि वही सांप आसपास के क्षेत्र में रह रहा हो और दोबारा भोजन या सुरक्षित स्थान की तलाश में घर के अंदर पहुंच गया हो।

    रेस्क्यू के बाद सांप को सुरक्षित कंटेनर में रखा गया और मंगलवार को उसे जंगल में प्राकृतिक वातावरण के बीच छोड़ दिया गया। सर्पमित्र ने लोगों से अपील की कि यदि घर या आसपास कहीं भी सांप दिखाई दे तो उसे मारने या पकड़ने का प्रयास न करें। तुरंत वन विभाग या प्रशिक्षित सर्पमित्र को सूचना दें क्योंकि अधिकांश मामलों में सांप बिना किसी नुकसान के सुरक्षित रेस्क्यू किए जा सकते हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि बरसात के मौसम में सांप निकलने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में घर के आसपास झाड़ियां साफ रखें खुले स्थानों पर कबाड़ जमा न होने दें और बच्चों को ऐसे स्थानों से दूर रखें। किसी भी जहरीले सांप के दिखाई देने पर घबराने के बजाय सतर्कता और समय पर सूचना देना ही सबसे सुरक्षित उपाय है।

  • उल्टियों से शुरू हुई परेशानी बनी मौत की वजह, इंदौर में 6 वर्षीय बच्चे की संदिग्ध मौत, पुलिस जांच में जुटी

    उल्टियों से शुरू हुई परेशानी बनी मौत की वजह, इंदौर में 6 वर्षीय बच्चे की संदिग्ध मौत, पुलिस जांच में जुटी


    इंदौर । इंदौर के कनाड़िया क्षेत्र में रहने वाले एक मजदूर परिवार पर उस समय दुखों का पहाड़ टूट पड़ा जब उनके छह वर्षीय बेटे की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मंगलवार शाम अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद बच्चे को पहले स्थानीय क्लीनिक फिर निजी अस्पताल और आखिर में एमवाय अस्पताल ले जाया गया लेकिन डॉक्टर उसे बचा नहीं सके। फिलहाल पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है जिससे मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सके।

    पुलिस के अनुसार कनाड़िया क्षेत्र निवासी छह वर्षीय मनीष की तबीयत मंगलवार शाम अचानक खराब हो गई। बच्चे को लगातार उल्टियां होने लगीं जिससे परिजन घबरा गए। सबसे पहले उसे पास के एक क्लीनिक में दिखाया गया जहां डॉक्टर ने प्राथमिक उपचार के साथ कुछ खिलाकर दवा देने की सलाह दी। परिवार को उम्मीद थी कि दवा लेने के बाद बच्चे की तबीयत में सुधार हो जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

    घर लौटते समय मनीष की हालत तेजी से बिगड़ने लगी। उसे घबराहट और बेचैनी महसूस होने लगी जिससे परिवार के लोग और अधिक चिंतित हो गए। समय गंवाए बिना परिजन उसे तुरंत पास के एक अन्य अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां मौजूद डॉक्टरों ने बच्चे की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे तत्काल एमवाय अस्पताल रेफर कर दिया ताकि बेहतर इलाज मिल सके।

    देर रात परिजन मनीष को एमवाय अस्पताल लेकर पहुंचे लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। अचानक हुई इस घटना से परिवार सदमे में है और अस्पताल परिसर में परिजनों का रो रोकर बुरा हाल हो गया। पुलिस को घटना की सूचना मिलने के बाद आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई।

    कनाड़िया थाना पुलिस ने बताया कि मामले में मर्ग कायम कर लिया गया है। प्रारंभिक तौर पर मौत के कारण स्पष्ट नहीं हो सके हैं इसलिए शव का पोस्टमार्टम कराया जाएगा। मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि बच्चे की मौत किसी बीमारी विषाक्तता या अन्य कारण से हुई है। पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है।

    मृतक बच्चे के पिता कनसिंह ने बताया कि वह मजदूरी कर परिवार का पालन पोषण करते हैं। उनका परिवार मूल रूप से खरगोन जिले के नागलवाड़ी क्षेत्र का रहने वाला है लेकिन रोजगार की तलाश में इंदौर के कनाड़िया इलाके में रह रहा है। मनीष परिवार का सबसे बड़ा बेटा था। उसके बाद एक छोटा भाई और एक बहन हैं। बेटे की अचानक मौत से पूरे परिवार पर गहरा दुख छा गया है।

    स्थानीय लोगों ने भी इस घटना पर दुख जताया और परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। पड़ोसियों का कहना है कि मनीष सामान्य रूप से खेलकूद करने वाला स्वस्थ बच्चा था और उसकी अचानक मौत ने सभी को स्तब्ध कर दिया है।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और चिकित्सकीय जांच के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि की जाएगी। यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही या अन्य संदिग्ध तथ्य सामने आते हैं तो उसके अनुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पूरा मामला जांच के दायरे में है और पुलिस हर पहलू की बारीकी से पड़ताल कर रही है।

  • इंदौर मेट्रो के अंडरग्राउंड सफर की शुरुआत, थाईलैंड की हाईटेक TBM बनाएगी मजबूत सुरंग, 24 घंटे चलेगा काम

    इंदौर मेट्रो के अंडरग्राउंड सफर की शुरुआत, थाईलैंड की हाईटेक TBM बनाएगी मजबूत सुरंग, 24 घंटे चलेगा काम


    इंदौर । इंदौर मेट्रो परियोजना के अंडरग्राउंड चरण ने अब नई रफ्तार पकड़ ली है। शहर में पहली बार अत्याधुनिक टनल बोरिंग मशीन यानी टीबीएम की मदद से भूमिगत सुरंग निर्माण का काम शुरू होने जा रहा है। थाईलैंड से लाई गई करीब 1000 टन वजनी इस हाईटेक मशीन की असेंबलिंग का काम शुरू हो चुका है और अगले एक महीने में इसे जमीन के करीब 20 मीटर नीचे उतार दिया जाएगा। इसके बाद यह मशीन चौबीसों घंटे लगातार काम करते हुए प्रतिदिन लगभग 20 मीटर लंबी सुरंग तैयार करेगी।

    इंदौर मेट्रो परियोजना का यह चरण तकनीकी दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि टीबीएम केवल सुरंग की खुदाई नहीं करेगी बल्कि उसी समय सुरंग की मजबूत कंक्रीट दीवारें भी तैयार करती चलेगी। इससे निर्माण कार्य की गति बढ़ेगी और सुरंग की मजबूती तथा सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी। आधुनिक तकनीक से लैस यह मशीन भूमिगत निर्माण को पहले की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित और तेज बनाएगी।

    अधिकारियों के अनुसार मशीन का पहला ऑपरेशन एयरपोर्ट क्षेत्र से शुरू होगा। यहां से कालानी नगर तक पहले चरण की अंडरग्राउंड सुरंग तैयार की जाएगी। इसके बाद अगले चरण में आगे का निर्माण कार्य शुरू होगा। इंदौर मेट्रो परियोजना के तहत कुल 12 किलोमीटर लंबा अंडरग्राउंड कॉरिडोर बनाया जाना है जिसे पूरा होने में लगभग चार से पांच वर्ष का समय लग सकता है।

    टनल बोरिंग मशीन को भूमिगत इंजीनियरिंग का चलता फिरता कारखाना कहा जाता है। इसके सबसे आगे लगा विशाल गोलाकार कटर हेड लगातार घूमते हुए मिट्टी और चट्टानों को काटता है। करीब साढ़े छह मीटर व्यास वाले इस कटर हेड में लगे मजबूत स्टील ब्लेड कठिन से कठिन चट्टानों को भी आसानी से काट सकते हैं। मशीन जैसे जैसे आगे बढ़ती है वैसे वैसे उसके पीछे सुरंग का निर्माण पूरा होता जाता है।

    खुदाई के दौरान निकलने वाली मिट्टी और पत्थरों को मशीन के अंदर लगे विशेष कन्वेयर सिस्टम के माध्यम से पीछे की ओर भेजा जाता है। वहां से इस मलबे को बाहर निकाला जाता है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान सुरंग के भीतर मलबा जमा नहीं होता और मशीन बिना किसी रुकावट के लगातार आगे बढ़ती रहती है।

    टीबीएम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि खुदाई के साथ ही सुरंग की स्थायी कंक्रीट लाइनिंग भी तैयार हो जाती है। मशीन के भीतर लगे हाइड्रोलिक सिस्टम पहले से तैयार कंक्रीट रिंग को एक के बाद एक जोड़ते चलते हैं। ये सभी रिंग मिलकर सुरंग की मजबूत गोलाकार दीवार का निर्माण करती हैं। इससे मिट्टी धंसने या सुरंग कमजोर होने की संभावना काफी कम हो जाती है और निर्माण कार्य भी तेजी से पूरा होता है।

    इस हाईटेक मशीन में मैकेनिकल हाइड्रोलिक इलेक्ट्रिकल और ऑटोमेटिक कंट्रोल सिस्टम का समन्वय किया गया है। शक्तिशाली मोटर गियर और सेंसर लगातार मशीन की गति दिशा और दबाव पर नजर रखते हैं ताकि सुरंग निर्माण पूरी सटीकता और सुरक्षा के साथ किया जा सके। यही वजह है कि दुनिया के अधिकांश बड़े मेट्रो और रेलवे प्रोजेक्ट में इसी तकनीक का उपयोग किया जाता है।

    इंदौर मेट्रो के अंडरग्राउंड सेक्शन में दो समानांतर सुरंगों का निर्माण किया जाएगा। एक सुरंग से मेट्रो ट्रेन शहर की ओर जाएगी जबकि दूसरी सुरंग से वापसी करेगी। इस दोहरी सुरंग व्यवस्था से दोनों दिशाओं में ट्रेन संचालन सुचारू रूप से किया जा सकेगा और यात्रियों को तेज सुरक्षित तथा आधुनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी।

    टीबीएम के मैदान में उतरने के साथ ही इंदौर मेट्रो परियोजना का सबसे चुनौतीपूर्ण चरण शुरू होने जा रहा है। आधुनिक तकनीक और तेज निर्माण गति के कारण यह परियोजना शहर के सार्वजनिक परिवहन को नई पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

  • इंदौर में EOW की बड़ी कार्रवाई, MY अस्पताल के फार्मासिस्ट के ठिकानों से करोड़ों की संपत्ति के दस्तावेज मिले

    इंदौर में EOW की बड़ी कार्रवाई, MY अस्पताल के फार्मासिस्ट के ठिकानों से करोड़ों की संपत्ति के दस्तावेज मिले


    नई दिल्ली। इंदौर के महात्मा गांधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय से जुड़े एमवाय अस्पताल में पदस्थ फार्मासिस्ट राकेश गोरखे के खिलाफ आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने बड़ी कार्रवाई करते हुए उनके ठिकानों पर छापेमारी की है। आय से अधिक संपत्ति के मामले में हुई इस कार्रवाई के दौरान प्रारंभिक जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच एजेंसी के अनुसार आरोपी ने सरकारी सेवा के दौरान कथित रूप से सरकारी दवाओं के स्टॉक में गड़बड़ी कर अपनी वैध आय से लगभग 108 प्रतिशत अधिक संपत्ति अर्जित की है। इसके अलावा बिना विभागीय अनुमति विदेश यात्रा करने का मामला भी जांच के दायरे में आ गया है।

    आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ की टीम ने मंगलवार सुबह करीब आठ बजे इंदौर स्थित विभिन्न ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई शुरू की। कई घंटे तक चली तलाशी के दौरान संपत्ति से जुड़े दस्तावेज बैंक रिकॉर्ड पासपोर्ट और नकदी जब्त की गई। अधिकारियों के मुताबिक जांच अभी जारी है और दस्तावेजों का विस्तृत परीक्षण किया जा रहा है।

    जांच में सामने आया कि राकेश गोरखे की नियुक्ति वर्ष 2007 में फार्मासिस्ट के पद पर हुई थी। वर्ष 2015 में उनका मासिक वेतन लगभग 18711 रुपए था जो वर्ष 2025 तक बढ़कर 54664 रुपए हो गया। उनकी पत्नी कीर्ति गोरखे वर्ष 2010 से शासकीय दंत चिकित्सालय में लाइब्रेरियन के पद पर कार्यरत हैं और वर्तमान में उनका मासिक वेतन 42402 रुपए है। दोनों की संयुक्त वैध आय का आकलन करने पर जांच अवधि में कुल आय लगभग 1 करोड़ 11 लाख 31 हजार रुपए पाई गई।

    इसके विपरीत जांच एजेंसी को दंपती के पास 2 करोड़ 13 लाख 85 हजार रुपए से अधिक मूल्य की चल और अचल संपत्तियों की जानकारी मिली है। यह उनकी घोषित वैध आय से करीब 108 प्रतिशत अधिक बताई जा रही है। इसी आधार पर EOW ने आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू की है।

    तलाशी के दौरान इंदौर के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित छह संपत्तियों का पता चला। इनमें स्कीम नंबर 140 स्थित वृंदावन गार्डन का दो मंजिला मकान साकार एनआरआई सिटी में बड़ा प्लॉट साहिल इंद्रांचल होम्स संघवी रेजीडेंसी और सद्गुरु नंदी विहार में प्लॉट शामिल हैं। इसके अलावा ओमेक्स डेवलपर्स की परियोजना में प्लॉट बुकिंग के लिए लगभग 6 लाख 70 हजार रुपए का भुगतान किए जाने के दस्तावेज भी मिले हैं।

    जांच के दौरान एक और महत्वपूर्ण खुलासा हुआ है। जब्त किए गए पासपोर्ट से पता चला कि राकेश गोरखे अक्टूबर 2023 में बिना विभागीय अनुमति थाईलैंड की यात्रा पर गए थे। अब EOW इस विदेश यात्रा पर हुए पूरे खर्च का आकलन कर रही है और इसे भी आरोपी के कुल व्यय और संपत्ति के मूल्यांकन में शामिल किया जाएगा। यदि यात्रा का खर्च वैध आय से मेल नहीं खाता है तो यह जांच को और मजबूत आधार दे सकता है।

    कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने करीब 1 लाख 51 हजार रुपए नकद भी बरामद किए हैं। साथ ही कई बैंक पासबुक संपत्ति से जुड़े दस्तावेज और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड अपने कब्जे में लिए हैं। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने कई संपत्तियों की जानकारी अपने विभाग को नहीं दी थी जबकि शासकीय कर्मचारियों के लिए ऐसी संपत्तियों की जानकारी विभाग को देना अनिवार्य होता है।

    आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ अब जब्त किए गए सभी दस्तावेजों का सत्यापन कर रहा है। जांच पूरी होने के बाद यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह मामला सरकारी विभागों में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

  • रेसीडेंशियल भवनों में कमर्शियल गतिविधियों पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आज, भोपाल में बढ़ी हलचल

    रेसीडेंशियल भवनों में कमर्शियल गतिविधियों पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आज, भोपाल में बढ़ी हलचल


    भोपाल । भोपाल में आवासीय भवनों के व्यावसायिक उपयोग और अवैध निर्माण का मामला एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। बुधवार को इस महत्वपूर्ण प्रकरण पर सुनवाई होनी है जिसमें याचिकाकर्ता रेसीडेंशियल भूखंडों पर किए गए अवैध निर्माण और उनके व्यावसायिक उपयोग को लेकर अपना पक्ष रखेंगे। मंगलवार को इस मामले में सुनवाई प्रस्तावित थी लेकिन भोपाल से जुड़ी याचिका पर कोई फैसला नहीं हो सका। अब आज होने वाली सुनवाई पर व्यापारियों रहवासियों और प्रशासन की नजरें टिकी हुई हैं।

    याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी के अनुसार मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने देश की विभिन्न राजधानियों के नगर निगम अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर नाराजगी जताई। अदालत ने अवैध निर्माण के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं करने वाले राज्यों को कड़ी फटकार लगाई और कई राज्यों को स्पष्ट चेतावनी भी दी। हालांकि भोपाल से संबंधित याचिका पर विस्तृत सुनवाई नहीं हो सकी थी इसलिए अब बुधवार को इस मामले पर सुनवाई होने की संभावना है।

    भोपाल में यह पूरा विवाद तब तेज हुआ जब सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद नगर निगम ने आवासीय भवनों में संचालित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। कई दुकानों और प्रतिष्ठानों को सील किया गया जबकि अनेक व्यापारियों ने कार्रवाई के डर से स्वयं अपने प्रतिष्ठान बंद कर दिए थे। शहर के कई प्रमुख इलाकों में इस कार्रवाई का व्यापक असर देखने को मिला।

    हालांकि बाद में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद सरकार ने व्यापारियों को अंतरिम राहत देने का निर्णय लिया। बैठक में मंत्रियों जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने पूरे मामले की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का विस्तृत अध्ययन करने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की एक समिति गठित की जाए। यह समिति पूरे प्रकरण की जांच कर अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी। तब तक व्यापारियों को अनावश्यक रूप से परेशान नहीं किया जाएगा। सरकार के इस निर्णय के बाद शहर के कई इलाकों में बंद दुकानें दोबारा खुल गईं।

    दूसरी ओर इस फैसले का शहर के कई रहवासी संगठनों ने विरोध किया है। अरेरा कॉलोनी रोहित नगर बावड़ियाकलां और अन्य क्षेत्रों के लोगों का कहना है कि आवासीय इलाकों में लगातार बढ़ रही व्यावसायिक गतिविधियों से ट्रैफिक पार्किंग शोर और सुरक्षा जैसी समस्याएं गंभीर होती जा रही हैं। संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति के नेतृत्व में लोगों ने पैदल मार्च निकालकर नगर निगम की कार्रवाई को अधूरा बताते हुए अवैध निर्माणों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग की थी।

    याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी का कहना है कि नगर निगम ने जिन प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किए थे उनके खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई पूरी नहीं की गई और बाद में कई प्रतिष्ठान फिर से खुल गए जो सुप्रीम कोर्ट की भावना के अनुरूप नहीं है। उनका मानना है कि नियमों का समान रूप से पालन होना चाहिए और अवैध निर्माण पर किसी भी तरह की ढील नहीं दी जानी चाहिए।

    वहीं भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज व्यापारियों के पक्ष में खड़ा है। संगठन का कहना है कि वर्ष 2005 के बाद नया मास्टर प्लान लागू नहीं होने के कारण व्यापारियों के सामने व्यावसायिक भूखंडों की भारी कमी है। ऐसे में कई लोग मजबूरी में आवासीय परिसरों से व्यवसाय संचालित कर रहे हैं। चैंबर ने सरकार से मिक्स लैंड यूज नीति लागू करने और व्यापारियों के लिए स्थायी समाधान निकालने की मांग की है।

    अब सुप्रीम कोर्ट की आज होने वाली सुनवाई से यह तय होगा कि भोपाल में आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों और अवैध निर्माण के मामले में आगे की दिशा क्या होगी। अदालत के फैसले का असर हजारों व्यापारियों रहवासियों और प्रशासनिक व्यवस्था पर पड़ना तय माना जा रहा है।

  • MP में मानसून पड़ा सुस्‍त, औसत से 18% कम बरसा पानी, 43 जिले पिछड़े, आज 5 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

    MP में मानसून पड़ा सुस्‍त, औसत से 18% कम बरसा पानी, 43 जिले पिछड़े, आज 5 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की रफ्तार धीमी पड़ने से बारिश का आंकड़ा लगातार गिर रहा है। प्रदेश में अब तक सामान्य से 18 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है और 55 में से 43 जिले औसत से पीछे चल रहे हैं। पिछले पांच दिनों से कहीं भी भारी बारिश रिकॉर्ड नहीं हुई है। हालांकि मौसम विभाग ने नए पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के बाद मौसम में बदलाव की संभावना जताई है। बुधवार को पांच जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

    मौसम विभाग के अनुसार, पिछले तीन-चार दिनों से प्रदेश के ऊपर मौसम संबंधी सिस्टम सक्रिय तो रहे, लेकिन पर्याप्त मजबूत नहीं होने के कारण व्यापक और तेज बारिश नहीं हो सकी। इसके चलते बारिश का कुल आंकड़ा लगातार घटता गया। फिलहाल प्रदेश के उत्तरी हिस्से में दो चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय हैं, जिनके प्रभाव से ग्वालियर-चंबल, सागर और रीवा संभाग के कुछ क्षेत्रों में बारिश हुई है।

    मौसम वैज्ञानिक शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार, एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हुआ है, जिसका असर अगले कुछ दिनों में प्रदेशभर में दिखाई देगा। इसके प्रभाव से कई इलाकों में तेज बारिश का दौर शुरू होने की संभावना है।

    इन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
    बुधवार को दतिया, भिंड, छतरपुर, पन्ना और सतना में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। इसके अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, अलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, अशोकनगर, मुरैना, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, रीवा, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, दमोह, टीकमगढ़ और निवाड़ी में कहीं हल्की तो कहीं तेज बारिश होने की संभावना है।

    कोटे से 3.5 इंच कम बारिश
    मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में अब तक औसतन 407.2 मिमी (16 इंच) बारिश हुई है, जबकि इस समय तक 495.2 मिमी (19.5 इंच) बारिश हो जानी चाहिए थी। यानी प्रदेश में अब तक करीब 3.5 इंच (18 प्रतिशत) बारिश की कमी दर्ज की गई है।

    पूर्वी हिस्से की स्थिति सबसे खराब
    पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, शहडोल, रीवा और सागर संभाग में औसतन 22 प्रतिशत कम बारिश हुई है। इन संभागों का कोई भी जिला सामान्य बारिश के आंकड़े तक नहीं पहुंच पाया है। अनूपपुर, बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़ और उमरिया में सामान्य से 1 से 42 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई है।

    वहीं पश्चिमी मध्य प्रदेश के भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम और ग्वालियर-चंबल संभाग में औसतन 15 प्रतिशत कम बारिश हुई है। भोपाल, दतिया, धार, गुना, ग्वालियर, हरदा, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, राजगढ़, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा समेत कई जिले अभी भी औसत से पीछे हैं। अब तक बड़वानी, भिंड, बुरहानपुर, देवास, इंदौर, खंडवा और खरगोन ऐसे जिले हैं, जहां सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई है।

  • प्रतियोगी परीक्षा का दबाव या मानसिक तनाव इंदौर में 18 वर्षीय छात्र ने उठाया खौफनाक कदम

    प्रतियोगी परीक्षा का दबाव या मानसिक तनाव इंदौर में 18 वर्षीय छात्र ने उठाया खौफनाक कदम


    इंदौर । प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए इंदौर आए एक 18 वर्षीय छात्र की आत्महत्या की घटना ने एक बार फिर छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव और अकेलेपन की समस्या को उजागर कर दिया है। भंवरकुआ थाना क्षेत्र में किराए के कमरे में रह रहे छात्र ने सोमवार रात फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। घटना की जानकारी तब मिली जब उसके दोस्त कोचिंग से लौटे और कमरे का दरवाजा खोलने पर उसे फंदे से लटका पाया। आनन फानन में उसे अस्पताल ले जाया गया लेकिन चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

    पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान प्रियांश पुत्र अजीत कौरव निवासी इंद्रपुरी कॉलोनी जिला नरसिंहगढ़ गाडरवाड़ा के रूप में हुई है। प्रियांश एसएससी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने के उद्देश्य से करीब पंद्रह दिन पहले ही इंदौर आया था। वह भंवरकुआ क्षेत्र में अपने तीन दोस्तों के साथ किराए के कमरे में रहकर कोचिंग कर रहा था और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में जुटा हुआ था।

    मृतक के दोस्त शिवम ने बताया कि सोमवार शाम वह और एक अन्य साथी नियमित कोचिंग के लिए गए थे। इससे कुछ समय पहले उनका तीसरा दोस्त भी किसी परिचित से मिलने बाहर चला गया था। उस समय प्रियांश कमरे में अकेला था। जब दोनों दोस्त कोचिंग से वापस लौटे तो उन्होंने देखा कि प्रियांश फंदे पर लटका हुआ है। दोस्तों ने तुरंत उसे नीचे उतारकर नजदीकी अस्पताल पहुंचाया जहां प्राथमिक जांच के बाद उसे एमवाय अस्पताल रेफर किया गया। हालांकि वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

    दोस्तों ने पुलिस को बताया कि इंदौर आने के बाद से ही प्रियांश का पढ़ाई में मन नहीं लग रहा था। वह एसएससी परीक्षा की तैयारी के लिए कोचिंग में डेमो क्लास कर रहा था लेकिन नए माहौल और पढ़ाई के दबाव के कारण वह सहज महसूस नहीं कर पा रहा था। उसने कुछ दिन पहले अपने माता पिता से फोन पर बातचीत करते हुए घर लौटने की इच्छा भी जताई थी। परिजनों ने उसे वापस आने के लिए कह दिया था लेकिन उससे पहले ही उसने यह आत्मघाती कदम उठा लिया।

    प्रियांश एक किसान परिवार से था। परिवार में माता पिता के अलावा उसका एक बड़ा भाई है जो भोपाल में बीटेक की पढ़ाई कर रहा है। बेटे की मौत की खबर मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। परिजन देर रात इंदौर पहुंचे जहां पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के बाद शव उन्हें सौंपा जाएगा।

    भंवरकुआ थाना पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने कमरे की तलाशी ली लेकिन वहां से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ। फिलहाल पुलिस दोस्तों और परिजनों के बयान दर्ज कर आत्महत्या के कारणों की जांच कर रही है। प्रारंभिक जांच में किसी तरह की आपराधिक आशंका सामने नहीं आई है लेकिन सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है।

    यह घटना प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के सामने मौजूद मानसिक तनाव और भावनात्मक चुनौतियों की ओर भी गंभीर संकेत देती है। विशेषज्ञों का मानना है कि नए शहर में अकेलापन पढ़ाई का दबाव और भविष्य की चिंता कई बार छात्रों पर गहरा मानसिक प्रभाव डालती है। ऐसे में परिवार मित्रों और संस्थानों को छात्रों की भावनात्मक स्थिति पर भी बराबर ध्यान देने की जरूरत है ताकि समय रहते उन्हें आवश्यक सहयोग और मार्गदर्शन मिल सके।

  • वृद्धाश्रम टूटा तो टूट गया मां-बेटे का साथ, इंदौर में ममता से दूर मासूम की दर्दभरी कहानी आई सामने

    वृद्धाश्रम टूटा तो टूट गया मां-बेटे का साथ, इंदौर में ममता से दूर मासूम की दर्दभरी कहानी आई सामने


    इंदौर । इंदौर के प्रेमाश्रय वृद्धाश्रम में बुजुर्गों के साथ मारपीट का मामला सामने आने के बाद प्रशासन की कार्रवाई ने जहां पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर खींचा वहीं इस कार्रवाई के बीच एक ऐसी मानवीय कहानी सामने आई जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। वृद्धाश्रम को खाली कराए जाने और बाद में उसे ध्वस्त किए जाने की प्रक्रिया में एक साल का मासूम अपनी मां से बिछड़ गया। पिछले तीन दिनों से वह मां की गोद के लिए तड़प रहा है जबकि उसकी मां भी दूसरे आश्रय गृह में भेज दी गई है। यह घटना प्रशासनिक कार्रवाई के बीच मानवीय संवेदनाओं और छोटे बच्चे की जरूरतों को लेकर कई सवाल खड़े कर रही है।

    जानकारी के अनुसार करीब 30 वर्षीय मानसिक रूप से अस्वस्थ महिला को 21 जून 2025 को लसूडिया पुलिस ने रेलवे ट्रैक के पास लावारिस हालत में रेस्क्यू किया था। उस समय वह गर्भवती थी और उसकी पहचान या परिजनों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी थी। ऐसे में प्रशासन ने उसे संरक्षण देते हुए प्रेमाश्रय वृद्धाश्रम में रहने की व्यवस्था की थी ताकि उसकी देखभाल सुरक्षित माहौल में हो सके।

    कुछ ही समय बाद जुलाई 2025 में महिला ने एक बेटे को जन्म दिया। बच्चे के जन्म के बाद मां और बेटा दोनों प्रेमाश्रय में ही साथ रह रहे थे। आश्रय गृह में मौजूद लोग बताते हैं कि मां अपने बेटे की देखभाल करती थी और बच्चा भी पूरी तरह उसी पर निर्भर था। दोनों का जीवन सीमित संसाधनों के बावजूद एक-दूसरे के सहारे चल रहा था।

    लेकिन प्रेमाश्रय वृद्धाश्रम में बुजुर्गों के साथ मारपीट का वीडियो सामने आने के बाद प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पूरे आश्रय गृह को खाली कराने का फैसला लिया। इस दौरान वहां रह रहे सभी बुजुर्गों और आश्रितों को अलग-अलग आश्रय गृहों तथा अस्पतालों में स्थानांतरित कर दिया गया। इसी प्रक्रिया में मानसिक रूप से अस्वस्थ महिला को दूसरे आश्रय गृह भेज दिया गया जबकि उसका एक साल का बेटा प्रेमाश्रय में ही रह गया। इस तरह प्रशासनिक कार्रवाई के बीच मां और बेटा एक-दूसरे से अलग हो गए।

    वृद्धाश्रम में मौजूद लोगों का कहना है कि बच्चे को समय पर दूध और अन्य आवश्यक भोजन दिया जा रहा है तथा उसकी देखभाल में कोई कमी नहीं रखी जा रही। इसके बावजूद जब भी उसे मां की गोद नहीं मिलती वह रोने लगता है और काफी देर तक बेचैन रहता है। उसे चुप कराने और बहलाने की कोशिश की जाती है लेकिन मां का स्नेह और स्पर्श किसी भी व्यवस्था से पूरा नहीं हो पा रहा। उसकी मासूम आंखें हर पल अपनी मां को तलाशती दिखाई देती हैं।

    इस घटना ने सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों को भी भावुक कर दिया है। उनका कहना है कि एक वर्ष की उम्र में बच्चा पूरी तरह मां के स्नेह और देखभाल पर निर्भर होता है। ऐसे में लंबे समय तक दोनों का अलग रहना बच्चे के मानसिक और शारीरिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। इसलिए प्रशासन को जल्द से जल्द ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए जिससे मां और बेटे को फिर से एक साथ रखा जा सके।

    यह मामला केवल प्रशासनिक कार्रवाई का नहीं बल्कि संवेदनशील मानवीय पहलू का भी है। जहां एक ओर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है वहीं दूसरी ओर ऐसे मासूम बच्चों और असहाय महिलाओं की भावनात्मक जरूरतों का ध्यान रखना भी उतना ही आवश्यक है। अब सभी की नजर प्रशासन पर है कि वह इस मां और बेटे को दोबारा मिलाने के लिए कितनी जल्दी और क्या कदम उठाता है।

  • दतिया हार पर भाजपा का बड़ा मंथन, सीएम आवास में समीक्षा बैठक, संगठन में सख्ती की तैयारी

    दतिया हार पर भाजपा का बड़ा मंथन, सीएम आवास में समीक्षा बैठक, संगठन में सख्ती की तैयारी


    दतिया । दतिया विधानसभा उपचुनाव में 6016 वोटों से मिली हार के बाद भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक स्तर पर व्यापक समीक्षा शुरू कर दी है। मंगलवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के आवास पर महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है जिसमें प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित चुनाव से जुड़े मंत्री, पदाधिकारी और संगठन के प्रमुख नेता शामिल होंगे। इस बैठक में हार के कारणों का विश्लेषण करने के साथ-साथ संगठन की कार्यप्रणाली, चुनावी रणनीति और भीतरघात की शिकायतों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

    पार्टी सूत्रों के अनुसार समीक्षा बैठक में उपचुनाव के प्रभारी भारत सिंह कुशवाह, प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी, उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, मंत्री राव उदय प्रताप सिंह, राकेश शुक्ला सहित करीब दो दर्जन वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे। बैठक में चुनावी प्रबंधन की हर स्तर पर समीक्षा होगी और यह भी देखा जाएगा कि किन कारणों से पार्टी अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सकी।

    सूत्रों का कहना है कि दतिया शहर में भाजपा को बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी लेकिन वहां कांग्रेस ने बढ़त बना ली जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में भाजपा को अपेक्षाकृत बेहतर समर्थन मिला। संगठन की प्रारंभिक रिपोर्ट में कुछ पार्षदों पर पार्टी विरोधी गतिविधियों और भीतरघात के आरोप सामने आए हैं। इन्हीं शिकायतों के आधार पर दर्जनभर पार्षदों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई पर भी विचार किया जा सकता है। समीक्षा बैठक के बाद इस संबंध में अंतिम निर्णय लिया जा सकता है।

    हार के बाद पार्टी के भीतर भी आत्ममंथन की आवाजें तेज हो गई हैं। पूर्व मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर आत्ममंथन का समय बताते हुए दतिया उपचुनाव का उल्लेख किया। वहीं टीकमगढ़ जिला पंचायत अध्यक्ष उमिता राहुल सिंह ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि जब कार्यकर्ताओं की जगह अधिकारी खुद को शीर्ष नेतृत्व तक सीधी पहुंच वाला बताने लगते हैं तब चुनाव परिणाम प्रभावित होना स्वाभाविक है। उनके इस बयान को भी संगठन के भीतर चल रही चर्चा से जोड़कर देखा जा रहा है।

    भाजपा संगठन जिलाध्यक्ष रघुवीर कुशवाह सहित कुछ स्थानीय पदाधिकारियों के खिलाफ मिली शिकायतों की रिपोर्ट भी तैयार कर रहा है। बताया जा रहा है कि यह रिपोर्ट प्रदेश नेतृत्व के माध्यम से केंद्रीय संगठन तक भेजी जा सकती है ताकि आगे की रणनीति तय की जा सके।

    पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने टिकट नहीं मिलने के बावजूद भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के समर्थन में पूरे चुनाव अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई थी। हालांकि पार्टी के भीतर यह आकलन किया जा रहा है कि प्रत्याशी बदलने के बाद संगठन के सभी कार्यकर्ता पूरी मजबूती से एकजुट नहीं हो पाए और इसका असर चुनाव परिणाम पर दिखाई दिया।

    समीक्षा बैठक में सोशल मीडिया की भूमिका भी जांच के दायरे में रहेगी। चुनाव के दौरान वायरल हुए कथित फर्जी पत्रों और भ्रामक पोस्ट की जांच कराई जाएगी। संगठन ऐसे लोगों की सूची भी तैयार कर रहा है जिन्होंने इन पोस्ट को प्रसारित किया था ताकि उनकी भूमिका स्पष्ट की जा सके।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि लोकतंत्र में जनता का निर्णय सर्वोपरि होता है और भाजपा जनादेश को पूरी विनम्रता के साथ स्वीकार करती है। वहीं प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि पार्टी हार की तथ्यपरक समीक्षा करेगी और भविष्य की चुनावी रणनीति को और अधिक मजबूत बनाया जाएगा ताकि आगामी चुनावों में बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित किया जा सके।

  • दहेज प्रताड़ना केस में 8 साल बाद गिरफ्तारी, कार्यक्रम के कार्ड ने खोल दिया फरार पिता-पुत्र का राज

    दहेज प्रताड़ना केस में 8 साल बाद गिरफ्तारी, कार्यक्रम के कार्ड ने खोल दिया फरार पिता-पुत्र का राज


    ग्वालियर । ग्वालियर पुलिस ने दहेज प्रताड़ना के एक बहुचर्चित मामले में आठ वर्षों से फरार चल रहे पिता-पुत्र को आखिरकार गिरफ्तार कर लिया। दोनों आरोपी लंबे समय से पुलिस की पकड़ से बचने के लिए गुजरात के अलग-अलग शहरों में अपनी पहचान और ठिकाने बदल-बदलकर रह रहे थे। लगातार की जा रही तलाश के बावजूद पुलिस उनके करीब नहीं पहुंच पा रही थी लेकिन एक पारिवारिक कार्यक्रम का निमंत्रण कार्ड ऐसा सुराग बना जिसने उनकी फरारी का अंत कर दिया।

    महिला सुरक्षा डीएसपी शिखा सोनी के अनुसार नवविवाहिता की शिकायत पर महिला थाने में उसके पति मंगल सिंह उर्फ पुतुआ राजावत और ससुर सुरेश सिंह राजावत के खिलाफ दहेज प्रताड़ना सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। आरोप था कि विवाह के बाद दोनों ने कार और नकदी की मांग करते हुए महिला पर लगातार दबाव बनाया और प्रताड़ित कर उसे घर से निकाल दिया।

    मामला दर्ज होने के बाद दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था लेकिन जमानत मिलने के बाद वे फरार हो गए। इसके बाद से पुलिस लगातार उनकी तलाश में जुटी रही। संभावित ठिकानों पर कई बार दबिश दी गई लेकिन दोनों हर बार पुलिस को चकमा देकर स्थान बदल लेते थे।

    आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए महिला थाना प्रभारी रश्मि भदौरिया के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाई गई थी। टीम पिछले चार दिनों से गुजरात में संभावित ठिकानों पर लगातार कार्रवाई कर रही थी। दो दिन पहले पुलिस एक ऐसे ठिकाने पर पहुंची जहां आरोपी कुछ समय पहले तक रह रहे थे लेकिन वहां से वे निकल चुके थे। तलाशी के दौरान पुलिस को एक पारिवारिक कार्यक्रम का निमंत्रण कार्ड मिला जिसमें भिंड का पता दर्ज था। यही कार्ड जांच का सबसे अहम सुराग साबित हुआ।

    पुलिस ने तुरंत रणनीति बदलते हुए भिंड में निगरानी शुरू की और सोमवार रात कार्यक्रम स्थल पर दबिश दी। वहां दोनों आरोपी मौजूद मिले जिन्हें मौके से गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे गिरफ्तारी से बचने के लिए हर कुछ महीनों में अपना ठिकाना बदल लेते थे और वर्षों बाद पहली बार किसी पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होने अपने गांव पहुंचे थे। इसी चूक की वजह से वे पुलिस के हत्थे चढ़ गए।

    अब पुलिस यह भी जांच कर रही है कि फरारी के दौरान किन लोगों ने दोनों आरोपियों को शरण दी और उन्हें पुलिस से बचाने में मदद की। यदि किसी व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    पूरी कार्रवाई में एएसआई संतपाल सिंह, वीर सिंह राजावत, प्रधान आरक्षक असीम कृष्ण यादव, मुकेश यादव, आरक्षक अंकुर शर्मा, राजदीप जाट और महिला आरक्षक काजल जादौन की अहम भूमिका रही। पुलिस मंगलवार को दोनों आरोपियों को अदालत में पेश कर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी करेगी। यह कार्रवाई लंबे समय से लंबित मामले में बड़ी सफलता मानी जा रही है और फरार आरोपियों के खिलाफ पुलिस की लगातार कार्रवाई का अहम उदाहरण भी है।