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  • पांच हत्याओं के सनसनीखेज मामले में जांच तेज फरार आरोपी ऋतुराज हिरासत में बुधगांव कनेक्शन और डॉक्टर की डिग्री भी जांच के घेरे में

    पांच हत्याओं के सनसनीखेज मामले में जांच तेज फरार आरोपी ऋतुराज हिरासत में बुधगांव कनेक्शन और डॉक्टर की डिग्री भी जांच के घेरे में


    नरसिंहपुर । नरसिंहपुर जिले के बहुचर्चित पांच हत्याकांड की जांच में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। 19 जुलाई को इंदिरानगर में हुए इस सनसनीखेज हत्याकांड में फरार चल रहे आरोपी ऋतुराज को पुलिस ने रविवार शाम हिरासत में ले लिया। आरोपी को जबलपुर के मढ़ाताल थाना क्षेत्र से नरसिंहपुर लाया गया है जहां उससे पूरे घटनाक्रम और फरार आरोपियों के संबंध में गहन पूछताछ की जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि उसकी पूछताछ से मामले के कई अहम राज सामने आ सकते हैं।

    पुलिस सूत्रों के मुताबिक आरोपी के जबलपुर में होने की सूचना मिलने के बाद नरसिंहपुर पुलिस की विशेष टीम वहां पहुंची और उसे अभिरक्षा में लेकर जिले आई। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि आरोपी ने स्वयं थाने में पहुंचकर आत्मसमर्पण किया था या पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया। फिलहाल जांच एजेंसियां उससे हत्या की साजिश वारदात की योजना और अन्य आरोपियों की भूमिका को लेकर लगातार पूछताछ कर रही हैं।

    इस हत्याकांड में अब तक कुल आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें आनंद लोधी अनुज लोधी और राजा पटेल को दो दिन की पुलिस रिमांड पर लेकर कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर पूछताछ की गई। रिमांड अवधि पूरी होने के बाद तीनों आरोपियों को सोमवार को न्यायालय में पेश किया जाएगा। पूछताछ के दौरान पुलिस ने हत्या की साजिश पैसों के लेनदेन और फरार आरोपियों की लोकेशन से जुड़े सवाल किए लेकिन पुलिस के अनुसार तीनों आरोपी पहले दिए गए बयानों पर ही कायम रहे और फरार आरोपियों प्रीतम तथा शुभम के बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं दे सके।

    जांच के दौरान पुलिस का फोकस अब घटना के बाद सामने आए बुधगांव कनेक्शन पर भी है। पुलिस आनंद लोधी के उस दावे की पड़ताल कर रही है जिसमें उसने वारदात के बाद बुधगांव पहुंचकर सतीश पटेल के यहां वाहन छोड़ने की बात कही थी। जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि इस घटनाक्रम में किसी अन्य व्यक्ति की भी भूमिका थी या नहीं और आरोपी के बयान कितने तथ्यात्मक हैं।

    मामले में गिरफ्तार जबलपुर निवासी डॉ. अमित खरे भी जांच एजेंसियों के निशाने पर हैं। पुलिस अब उनकी शैक्षणिक योग्यता और मेडिकल डिग्री का सत्यापन कराने की प्रक्रिया में जुटी है। इसके लिए जबलपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से पत्राचार किया गया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनकी डिग्री वैध है या नहीं। पुलिस का मानना है कि जांच के इस पहलू से भी कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।

    पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश मीणा ने बताया कि फरार आरोपी ऋतुराज से पूछताछ जारी है और उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं फरार अन्य आरोपियों की तलाश लगातार जारी है। पुलिस का कहना है कि मामले के हर पहलू की गहन जांच की जा रही है और जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • खेत के लिए पानी भरना पड़ा भारी नदी में डूबा ट्रैक्टर सूझबूझ से किसान की बची जान ग्रामीणों ने जेसीबी से किया रेस्क्यू

    खेत के लिए पानी भरना पड़ा भारी नदी में डूबा ट्रैक्टर सूझबूझ से किसान की बची जान ग्रामीणों ने जेसीबी से किया रेस्क्यू


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले के इंदार थाना क्षेत्र के बिजरौनी गांव में रविवार को एक बड़ा हादसा उस समय टल गया जब खेत में दवा छिड़काव के लिए नदी से पानी भरने पहुंचे किसान का ट्रैक्टर अचानक गहरे गड्ढे में समा गया। ट्रैक्टर देखते ही देखते पानी में डूबने लगा लेकिन किसान ने सूझबूझ दिखाते हुए समय रहते छलांग लगा दी और अपनी जान बचा ली। हालांकि इस घटना में ट्रैक्टर पूरी तरह पानी में डूब गया जिससे वाहन को भारी नुकसान पहुंचा है।

    जानकारी के अनुसार बिजरौनी गांव निवासी किसान सुल्ला राठौर अपने खेत में घास नष्ट करने वाली दवा का छिड़काव कर रहे थे। इसी दौरान बिजली आपूर्ति बाधित होने से उनका बोरवेल बंद हो गया और खेत के लिए पानी उपलब्ध नहीं हो सका। मजबूरी में उन्होंने ट्रैक्टर पर ड्रम बांधकर नदी से पानी भरने का निर्णय लिया। जब वे ट्रैक्टर लेकर नदी में उतरे तो पानी के भीतर बने गहरे गड्ढे का अंदाजा नहीं लगा। जैसे ही ट्रैक्टर आगे बढ़ा वह अचानक गहरे हिस्से में फंस गया और कुछ ही क्षणों में पानी में डूबने लगा।

    स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए किसान सुल्ला राठौर ने बिना देर किए ट्रैक्टर से छलांग लगा दी। उनकी सतर्कता के कारण बड़ा हादसा टल गया और वे सुरक्षित बाहर निकल आए। वहीं ट्रैक्टर पूरी तरह पानी में समा गया जिससे आसपास मौजूद लोगों में अफरा तफरी मच गई।

    घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। सबसे पहले ग्रामीणों ने दूसरे ट्रैक्टर की सहायता से डूबे वाहन को बाहर निकालने का प्रयास किया लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद जेसीबी मशीन को बुलाया गया। कई घंटों की कड़ी मशक्कत और जेसीबी तथा दूसरे ट्रैक्टर की संयुक्त मदद से आखिरकार डूबे हुए ट्रैक्टर को नदी से बाहर निकाला जा सका।

    हालांकि इस हादसे में किसान पूरी तरह सुरक्षित हैं लेकिन ट्रैक्टर को भारी नुकसान पहुंचा है। ग्रामीणों का कहना है कि नदी में कई स्थानों पर गहरे गड्ढे बने हुए हैं जिनकी जानकारी नहीं होने के कारण इस तरह की घटनाओं का खतरा बना रहता है। उन्होंने प्रशासन से ऐसे स्थानों को चिन्हित कर चेतावनी बोर्ड लगाने और सुरक्षा के इंतजाम करने की मांग की है ताकि भविष्य में इस तरह के हादसों से बचा जा सके।

  • सराफा दुकान में चोरी की बड़ी साजिश नाकाम गैस कटर लेकर पहुंचे बदमाश गिरफ्तार गिरोह का सरगना अब भी फरार

    सराफा दुकान में चोरी की बड़ी साजिश नाकाम गैस कटर लेकर पहुंचे बदमाश गिरफ्तार गिरोह का सरगना अब भी फरार


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले की बैराड़ पुलिस ने सराफा दुकान में चोरी की कोशिश करने वाले अंतरजिला गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से वारदात में इस्तेमाल की गई टाटा नेक्सॉन कार 315 बोर का एक देशी कट्टा और तीन जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। मामले में गिरोह का सरगना समेत अन्य फरार आरोपियों की तलाश लगातार जारी है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही पूरे गिरोह को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

    थाना प्रभारी सुरेश शर्मा ने बताया कि बैराड़ स्थित प्रिंस ज्वेलर्स के संचालक जगदीश प्रसाद गुप्ता ने 22 जुलाई को चोरी के प्रयास की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार 21 जुलाई की रात दुकान बंद कर घर जाने के बाद करीब 1 बजकर 20 मिनट पर पुलिस ने दुकान के बाहर आग जैसी स्थिति होने की सूचना दी। जब मौके पर पहुंचकर देखा गया तो पता चला कि बदमाश गैस कटर की मदद से दुकान का ताला काटकर अंदर घुसने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस की आहट मिलते ही आरोपी मौके से फरार हो गए।

    घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने पर तीन संदिग्ध बदमाश गैस कटर से ताला काटते दिखाई दिए। इसके बाद पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों मुखबिरों की सूचना और फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान शुरू की। जांच में रिंकू उर्फ योगेश कुशवाह निवासी जौरा राकेश कुशवाह और उनके साथियों की संलिप्तता सामने आई।

    पुलिस को 26 जुलाई को सूचना मिली कि गिरोह के सदस्य टाटा नेक्सॉन कार से पहाड़गढ़ की ओर आने वाले हैं। सूचना के आधार पर सहसराम पहाड़गढ़ मार्ग पर घेराबंदी की गई और संदिग्ध कार को रोक लिया गया। कार में सवार सौरभ कुशवाह निवासी भूराडाढ़ा जिला मुरैना और आकाश रावत निवासी भूपतपुरा जौरा को गिरफ्तार कर लिया गया। तलाशी के दौरान सौरभ के पास से 315 बोर का देशी कट्टा और तीन जिंदा कारतूस बरामद हुए।

    पूछताछ में सौरभ ने खुलासा किया कि उसका जीजा रिंकू उर्फ योगेश कुशवाह पूरे गिरोह का सरगना है। उसने राकेश कुशवाह देवेंद्र उर्फ देवू उर्फ चुटिया सविता और अन्य साथियों के साथ मिलकर बैराड़ की सराफा दुकानों को निशाना बनाने की योजना बनाई थी। योजना के तहत रिंकू गैस कटर लेकर आया था जबकि सौरभ और देवू हथियारों के साथ पहुंचे थे। वहीं आकाश नशे की हालत में कार में ही सो गया था। इसी दौरान पुलिस की भनक लगने पर सभी आरोपी बिना चोरी किए मौके से फरार हो गए।

    पूछताछ में यह भी सामने आया कि सौरभ और रिंकू पहले भी धौलपुर भिंड और आगरा में चोरी के मामलों में जेल जा चुके हैं। पुलिस के अनुसार रिंकू पर विभिन्न जिलों में चोरी के कई मामले दर्ज हैं और वही पूरे गिरोह का संचालन करता है। फिलहाल पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल नेक्सॉन कार हथियार और कारतूस जब्त कर लिए हैं। फरार आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है और पुलिस को उम्मीद है कि जल्द ही पूरे गिरोह का खुलासा कर दिया जाएगा।

  • बिजली संकट से उबल पड़ा शिवपुरी सरपंच सड़क पर लेटे ग्रामीणों ने तीन घंटे किया चक्काजाम अधिकारियों के आश्वासन के बाद खुला रास्ता

    बिजली संकट से उबल पड़ा शिवपुरी सरपंच सड़क पर लेटे ग्रामीणों ने तीन घंटे किया चक्काजाम अधिकारियों के आश्वासन के बाद खुला रास्ता


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले के अमोला थाना क्षेत्र के सिरसौद गांव में लगातार हो रही बिजली कटौती के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा आखिरकार सड़क पर फूट पड़ा। रविवार सुबह सरपंच अतर सिंह लोधी के नेतृत्व में सैकड़ों ग्रामीणों ने सिरसौद पिछोर मार्ग पर चक्काजाम कर जोरदार प्रदर्शन किया। आंदोलन के दौरान सरपंच खुद सड़क पर लेट गए और बिजली विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। करीब तीन घंटे तक चले इस प्रदर्शन के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। हालांकि प्रदर्शनकारियों ने मानवता का परिचय देते हुए एम्बुलेंस को बिना किसी बाधा के गुजरने दिया। सुबह करीब नौ बजे बिजली विभाग के अधिकारियों के मौके पर पहुंचकर समाधान का भरोसा देने के बाद चक्काजाम समाप्त हुआ।

    ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले कई दिनों से लोड सेटिंग के नाम पर रोजाना 10 से 12 घंटे तक बिजली की आपूर्ति बाधित की जा रही है। सबसे अधिक परेशानी रात के समय होने वाली कटौती से हो रही है। लगातार बिजली गुल रहने के कारण लोग भीषण गर्मी और उमस में रातभर जागने को मजबूर हैं। घरेलू कामकाज प्रभावित हो रहे हैं और बच्चों की पढ़ाई भी बाधित हो रही है। ग्रामीणों ने बताया कि अंधेरे के कारण हाल ही में एक महिला छत से गिरकर घायल भी हो गई थी जिससे लोगों में आक्रोश और बढ़ गया।

    चक्काजाम की सूचना मिलते ही अमोला थाना प्रभारी योगेंद्र सिंह सेंगर पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया। लेकिन प्रदर्शनकारी बिजली विभाग के अधिकारियों को मौके पर बुलाने की मांग पर अड़े रहे। इसके बाद विभाग के अधिकारी घटनास्थल पहुंचे और ग्रामीणों से चर्चा कर समस्या के समाधान का आश्वासन दिया।

    सरपंच अतर सिंह लोधी ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में एक घंटे बिजली देने के बाद अगले घंटे फिर कटौती कर दी जाती है जिससे सिरसौद सहित आसपास के करीब 15 गांवों के लोग परेशान हैं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में कई बार विभागीय अधिकारियों को शिकायत दी गई लेकिन आज तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। उनका कहना है कि करैरा कस्बे में लोड सेटिंग के नाम पर बिजली कटौती नहीं की जाती जबकि ग्रामीण इलाकों में घंटों बिजली बंद रखी जाती है जिससे लोगों में भेदभाव की भावना पैदा हो रही है।

    ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ और लोड सेटिंग के नाम पर घंटों कटौती जारी रही तो वे दोबारा सड़क पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेंगे। ग्रामीणों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है बल्कि कुछ महीने पहले भी इसी समस्या को लेकर प्रदर्शन किया जा चुका है लेकिन हालात अब तक नहीं बदले। ऐसे में अब वे स्थायी समाधान मिलने तक अपनी आवाज बुलंद करते रहेंगे।

  • एमपी में फिर सक्रिय हुआ मानसून, 6 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, अगले 4 दिन गिरेगा तेज पानी

    एमपी में फिर सक्रिय हुआ मानसून, 6 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, अगले 4 दिन गिरेगा तेज पानी


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। सक्रिय मौसम प्रणालियों के प्रभाव से प्रदेश में तेज बारिश का सिलसिला शुरू हो गया है। रविवार को पूर्वी जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई, जबकि मौसम विभाग ने सोमवार के लिए छह जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। अगले चार दिनों तक कई इलाकों में तेज से अति भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है।

    आईएमडी भोपाल के अनुसार, अगले 24 घंटों के दौरान उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला और बालाघाट में भारी वर्षा हो सकती है। इसके अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में कहीं हल्की तो कहीं तेज बारिश का दौर जारी रहने के आसार हैं।

    कई मौसम प्रणालियां एक साथ सक्रिय
    मौसम विभाग के मुताबिक, प्रदेश से मानसून ट्रफ गुजर रही है। इसके साथ ही एक लो प्रेशर एरिया (निम्न दाब क्षेत्र) और डिप्रेशन भी सक्रिय है। आने वाले दिनों में वेस्टर्न डिस्टरबेंस के प्रभाव से मौसम और अधिक सक्रिय होगा। इसी वजह से 27 से 30 जुलाई के बीच कई जिलों में भारी से अति भारी बारिश की संभावना जताई गई है।

    अब तक सामान्य से 15% कम बारिश
    मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में अब तक औसतन 13.2 इंच (334.9 मिमी) वर्षा दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि तक 15.5 इंच (395.2 मिमी) बारिश होनी चाहिए थी। यानी प्रदेश में अब भी करीब 15 प्रतिशत वर्षा की कमी बनी हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में 18 प्रतिशत और पश्चिमी हिस्से में 13 प्रतिशत कम बारिश रिकॉर्ड की गई है। फिलहाल 14 जिलों में सामान्य से अधिक जबकि 41 जिलों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज हुई है। पूर्वी क्षेत्र में निवाड़ी ऐसा एकमात्र जिला है, जहां औसत से अधिक बारिश हुई है।

  • बिजली कंपनियों में प्रमोशन पर घमासान 140 से ज्यादा पद खाली फिर भी इंजीनियरों को नहीं मिल रही पदोन्नति

    बिजली कंपनियों में प्रमोशन पर घमासान 140 से ज्यादा पद खाली फिर भी इंजीनियरों को नहीं मिल रही पदोन्नति


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में पदोन्नति नियम 2025 लागू होने के बाद विभागों में प्रमोशन को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। सामान्य प्रशासन और वाणिज्यिक कर विभाग के बाद अब ऊर्जा विभाग की बिजली कंपनियों में भी पदोन्नति को लेकर असंतोष सामने आया है। मध्यप्रदेश विद्युत मंडल अभियंता संघ ने आरोप लगाया है कि पात्र और वरिष्ठ इंजीनियरों को पदोन्नति से वंचित रखा जा रहा है जबकि बड़ी संख्या में पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं। संघ ने इस मामले में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और ऊर्जा मंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है।

    अभियंता संघ का कहना है कि सरकार की मंशा सभी रिक्त पदों को शीघ्र भरकर प्रशासनिक कार्यों में तेजी लाने और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने की है लेकिन बिजली कंपनियों में इसके विपरीत स्थिति बनी हुई है। संघ का आरोप है कि जुलाई 2026 में मंडल कैडर के अधिकारियों को पदोन्नति दे दी गई लेकिन कंपनी कैडर के योग्य और वरिष्ठ इंजीनियरों को अब तक पदोन्नति नहीं दी गई। इससे कर्मचारियों में असंतोष लगातार बढ़ रहा है।

    संघ के अनुसार मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी में सहायक अभियंता से कार्यपालन अभियंता के लगभग 69 पद रिक्त हैं। वहीं मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में ऐसे 72 पद खाली पड़े हैं। इसके अलावा मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी में भी कार्यपालन अभियंता से अधीक्षण अभियंता तक के कई पद रिक्त हैं लेकिन इन पदों पर भी पदोन्नति की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जा रही है।

    अभियंता संघ ने यह भी दावा किया है कि 10 जुलाई से 17 जुलाई 2026 के बीच ऐसी स्थिति थी जब मंडल कैडर में पदोन्नति के लिए कोई पात्र अधिकारी उपलब्ध नहीं था। इसके बावजूद कंपनी कैडर के योग्य इंजीनियरों को अवसर नहीं दिया गया। संघ का कहना है कि अब हाल ही में जिन अधिकारियों को पदोन्नति मिली है वे कई वर्षों तक अगली पदोन्नति के लिए पात्र नहीं होंगे जिससे रिक्त पद लंबे समय तक खाली रह सकते हैं और प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित होगी।

    संघ ने ऊर्जा विभाग पर वर्ष 2011 के आदेश की गलत व्याख्या करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि वर्ष 2014 में इसी प्रकार की परिस्थितियों में कंपनी कैडर के अधिकारियों को पदोन्नति दी गई थी लेकिन इस बार अलग रवैया अपनाया जा रहा है। अभियंताओं के अनुसार यह निर्णय न तो नियमों की भावना के अनुरूप है और न ही कर्मचारियों के साथ न्याय करता है।

    अभियंता संघ का कहना है कि वरिष्ठ इंजीनियरों को समय पर पदोन्नति नहीं मिलने से केवल अधिकारियों का करियर प्रभावित नहीं होगा बल्कि नीचे के पद भी रिक्त नहीं हो पाएंगे। इसका सीधा असर नई भर्तियों पर पड़ेगा और इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर चुके युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी कम हो जाएंगे। इसलिए रिक्त पदों को समय पर भरना प्रशासनिक और रोजगार दोनों दृष्टि से आवश्यक है।

    संघ ने मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री से मांग की है कि पदोन्नति नियम 2025 के तहत पात्रता और वरिष्ठता के आधार पर सभी रिक्त पदों पर जल्द पदोन्नति दी जाए। साथ ही सभी बिजली कंपनियों के लिए एक समान और स्पष्ट दिशा निर्देश जारी किए जाएं ताकि भविष्य में इस तरह के विवाद की स्थिति पैदा न हो।

    अभियंता संघ ने चेतावनी भी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो इंजीनियरों का बढ़ता असंतोष बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है। उनका कहना है कि ऐसी स्थिति की पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग और अधिकारियों की होगी।

  • खाद की हकीकत आई सामने केंद्र ने भेजा रिकॉर्ड यूरिया फिर भी मचा हाहाकार डीएपी की कमी ने बिगाड़ी किसानों की बुवाई

    खाद की हकीकत आई सामने केंद्र ने भेजा रिकॉर्ड यूरिया फिर भी मचा हाहाकार डीएपी की कमी ने बिगाड़ी किसानों की बुवाई


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में खरीफ सीजन 2026 के दौरान खाद संकट को लेकर एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। केंद्र सरकार की ओर से राज्य को जरूरत से कहीं अधिक यूरिया उपलब्ध कराने के बावजूद किसान खाद के लिए भटकते रहे। संसद में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं रसायन उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार 19 जुलाई 2026 तक खरीफ सीजन के लिए मध्य प्रदेश को लगभग 9.61 लाख मीट्रिक टन यूरिया की आवश्यकता थी जबकि केंद्र सरकार ने 14.17 लाख मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध कराया। यानी राज्य को मांग से लगभग 147 प्रतिशत अधिक यूरिया मिला। इसके बावजूद प्रदेश के कई जिलों में खाद वितरण केंद्रों पर किसानों की लंबी कतारें और अव्यवस्था देखने को मिली।

    विशेषज्ञों का मानना है कि समस्या यूरिया की उपलब्धता नहीं बल्कि उसके वितरण और प्रबंधन में रही। केंद्र सरकार का दायित्व राज्य तक खाद पहुंचाने का होता है जबकि जिलों ब्लॉकों और सहकारी समितियों तक समय पर और पारदर्शी वितरण की जिम्मेदारी राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन की होती है। ऐसे में पर्याप्त स्टॉक होने के बावजूद किसानों को समय पर खाद नहीं मिल पाना वितरण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

    दूसरी ओर खरीफ सीजन में किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती डीएपी खाद की कमी बनकर सामने आई। राज्य को इस अवधि में लगभग 3.57 लाख मीट्रिक टन डीएपी की जरूरत थी लेकिन केवल 3.05 लाख मीट्रिक टन की ही आपूर्ति हो सकी। यानी करीब 52 हजार मीट्रिक टन डीएपी की कमी रही। यही वजह रही कि बुवाई के सबसे महत्वपूर्ण समय में सहकारी समितियों और खाद वितरण केंद्रों पर किसानों की भारी भीड़ उमड़ी और कई स्थानों पर धक्का मुक्की तथा हंगामे की स्थिति भी बनी।

    संसद में पेश आंकड़ों से यह भी स्पष्ट हुआ कि एनपीकेएस उर्वरक की स्थिति बेहतर रही। लगभग 4.21 लाख मीट्रिक टन की मांग के मुकाबले राज्य को 6.67 लाख मीट्रिक टन एनपीकेएस उपलब्ध कराया गया। यानी इस उर्वरक की भी पर्याप्त उपलब्धता रही। इसके बावजूद डीएपी की कमी ने खेती की तैयारियों को प्रभावित किया और किसानों की चिंता बढ़ा दी।

    केंद्र सरकार ने खाद आपूर्ति की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और निगरानी आधारित बताया है। फसल सीजन शुरू होने से पहले कृषि एवं किसान कल्याण विभाग राज्य सरकार के साथ मिलकर महीनेवार जरूरत तय करता है। इसके बाद उर्वरक विभाग राज्यों को आवंटन जारी करता है और रेलवे रैक के माध्यम से खाद की आपूर्ति की जाती है। सभी रैक की निगरानी एकीकृत उर्वरक प्रबंधन प्रणाली के जरिए की जाती है तथा हर सप्ताह केंद्र और राज्यों के अधिकारियों के बीच समीक्षा बैठक भी होती है।

    मध्य प्रदेश स्वयं भी देश के प्रमुख यूरिया उत्पादक राज्यों में शामिल है। वर्ष 2025-26 में राज्य में लगभग 19.73 लाख मीट्रिक टन यूरिया का उत्पादन हुआ जबकि चालू वित्त वर्ष 2026-27 में जून तक ही 5.40 लाख मीट्रिक टन उत्पादन दर्ज किया जा चुका है। इससे पहले वर्ष 2022-23 में राज्य ने 22.37 लाख मीट्रिक टन यूरिया उत्पादन का रिकॉर्ड बनाया था। देश में आयात पर निर्भरता कम करने के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 2014 के बाद कई नई यूरिया उत्पादन इकाइयों की भी शुरुआत की है।

    खाद उपलब्धता के ताजा आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में वास्तविक चुनौती उत्पादन या केंद्रीय आवंटन की नहीं बल्कि जरूरत के अनुरूप डीएपी उपलब्ध कराने और अंतिम छोर तक समय पर वितरण सुनिश्चित करने की है। यदि वितरण व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो पर्याप्त स्टॉक होने के बावजूद किसानों को हर खरीफ सीजन में इसी तरह परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

  • एमपी में शहडोल-अनूपपुर समेत 5 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी, भोपाल-इंदौर में हल्की बूंदाबांदी की संभावना

    एमपी में शहडोल-अनूपपुर समेत 5 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी, भोपाल-इंदौर में हल्की बूंदाबांदी की संभावना


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। मौसम विभाग (आईएमडी) ने अगले 24 घंटे के लिए शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला और बालाघाट में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में 4 इंच या उससे अधिक वर्षा होने की संभावना जताई गई है। वहीं, भोपाल, इंदौर, जबलपुर, उज्जैन और ग्वालियर समेत करीब 50 जिलों में हल्की बारिश और बादल छाए रहने का अनुमान है।

    मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में अगले चार दिनों तक कई इलाकों में बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। फिलहाल प्रदेश के ऊपर मानसून ट्रफ, शियर जोन और पूर्वी व पश्चिमी हिस्सों में सक्रिय दो निम्न दबाव क्षेत्र (लो-प्रेशर एरिया) बारिश के लिए अनुकूल परिस्थितियां बना रहे हैं। हालांकि शनिवार को अधिकांश क्षेत्रों में केवल हल्की बूंदाबांदी ही दर्ज की गई।

    पांच दिनों में सुधरे बारिश के आंकड़े
    बीते पांच दिनों की बारिश से प्रदेश में वर्षा की कमी में सुधार आया है। 20 जुलाई तक मध्य प्रदेश में सामान्य से 17 प्रतिशत कम बारिश रिकॉर्ड की गई थी। इसके बाद यह अंतर घटकर 21 जुलाई को 14 प्रतिशत, 22 जुलाई को 11 प्रतिशत, 23 जुलाई को 10 प्रतिशत और 24-25 जुलाई को 11 प्रतिशत रह गया। अब तक प्रदेश में औसतन 330.4 मिमी (करीब 13 इंच) बारिश दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि तक 370.9 मिमी (14.6 इंच) वर्षा होनी चाहिए थी। वर्तमान में पूर्वी मध्य प्रदेश में 15 प्रतिशत और पश्चिमी हिस्से में 8 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है।

    इन जिलों में बारिश की संभावना
    अगले 24 घंटे के दौरान भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, उज्जैन, नीमच, मंदसौर, रतलाम, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर और छिंदवाड़ा में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इसके अलावा पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में कहीं हल्की तो कहीं तेज बारिश होने के आसार हैं।

    जुलाई में भी सामान्य से कम बारिश
    मौसम विभाग के मुताबिक, जून में मानसून कमजोर रहने से बारिश का आंकड़ा कम रहा। जुलाई की शुरुआत में अच्छी बारिश से स्थिति सुधरी, लेकिन इसके बाद लगातार कई दिनों तक भारी बारिश नहीं होने के कारण वर्षा का ग्राफ फिर सामान्य से नीचे आ गया।

    आमतौर पर जुलाई महीने में प्रदेश की कुल मानसूनी बारिश का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा दर्ज होता है। मध्य प्रदेश की सामान्य वार्षिक वर्षा 37.3 इंच है, जबकि भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जैसे बड़े शहरों में सामान्य बारिश 38 से 39 इंच के बीच रहती है। इनमें जबलपुर ऐसा प्रमुख शहर है, जहां जुलाई में औसतन 17 इंच से अधिक बारिश दर्ज की जाती है।

  • देवास में कॉलोनी की सुरक्षा पर सवाल घर के बाहर खड़ी कार पर हमला महिलाओं ने बताई शराबियों की दहशत

    देवास में कॉलोनी की सुरक्षा पर सवाल घर के बाहर खड़ी कार पर हमला महिलाओं ने बताई शराबियों की दहशत


    देवास । देवास की स्वास्थ्य कर्मचारी कॉलोनी में शुक्रवार देर रात हुई तोड़फोड़ की एक घटना ने इलाके के रहवासियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अज्ञात बदमाशों ने घर के बाहर खड़ी एक कार पर शराब की बोतल फेंककर उसका कांच तोड़ दिया। घटना के बाद कॉलोनी में दहशत और आक्रोश का माहौल है। सूचना मिलने पर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण कर जांच शुरू कर दी। पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की तलाश में जुट गई है।

    पीड़ित समता श्रीवास्तव ने बताया कि उनकी कार रोज की तरह घर के सामने खड़ी थी। देर रात किसी अज्ञात व्यक्ति ने शराब की बोतल फेंककर कार का शीशा तोड़ दिया। सुबह या घटना की जानकारी मिलने पर परिवार बाहर आया तो वाहन क्षतिग्रस्त मिला। उन्होंने बताया कि घर के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे में पूरी वारदात रिकॉर्ड हो गई है और इसकी फुटेज पुलिस को सौंप दी जाएगी ताकि आरोपियों की पहचान कर जल्द कार्रवाई की जा सके।

    पुलिस ने आसपास लगे अन्य सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग भी खंगालना शुरू कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का मानना है कि सीसीटीवी फुटेज से घटना में शामिल लोगों तक पहुंचने में मदद मिलेगी।

    इस घटना के बाद कॉलोनी की महिलाओं ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता जताई है। समता श्रीवास्तव का आरोप है कि शाम होते ही कुछ असामाजिक तत्व कॉलोनी के आसपास खुलेआम शराब पीते हैं और वहां से गुजरने वाली महिलाओं पर अभद्र टिप्पणियां करते हैं। इससे महिलाओं और परिवारों में लगातार असुरक्षा की भावना बनी रहती है। उनका कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।

    कॉलोनी की अन्य महिलाओं ने भी इसी तरह की शिकायतें दोहराते हुए कहा कि इलाके में शराबियों और असामाजिक तत्वों का जमावड़ा आम बात हो गई है। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में और गंभीर घटनाएं हो सकती हैं। रहवासियों ने पुलिस प्रशासन से नियमित गश्त बढ़ाने और संदिग्ध गतिविधियों पर सख्त निगरानी रखने की मांग की है।

    स्थानीय लोगों के अनुसार यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कॉलोनी में खड़े वाहनों के साथ तोड़फोड़ और उपद्रव की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। लगातार हो रही इन घटनाओं से रहवासियों में नाराजगी बढ़ रही है। उनका आरोप है कि असामाजिक तत्वों के खिलाफ समय पर सख्त कार्रवाई नहीं होने से उनके हौसले बुलंद हो रहे हैं और वे बेखौफ होकर ऐसी घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं।

    पीड़ित परिवार ने मामले की लिखित शिकायत कोतवाली थाने में देने की बात कही है। वहीं कॉलोनी के लोगों ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र में नियमित पेट्रोलिंग बढ़ाई जाए शराब पीकर उपद्रव करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो और दोषियों को जल्द गिरफ्तार कर कानून के तहत कड़ी सजा दिलाई जाए ताकि कॉलोनी में रहने वाले परिवार सुरक्षित माहौल में रह सकें।

    कोतवाली पुलिस का कहना है कि शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है और सीसीटीवी फुटेज सहित उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान कर जल्द कार्रवाई की जाएगी।

  • फास्ट ट्रैक कोर्ट में 3 माह में होगा परीक्षा जैसे अन्य मामलों का निराकरण : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    फास्ट ट्रैक कोर्ट में 3 माह में होगा परीक्षा जैसे अन्य मामलों का निराकरण : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश सरकार शिक्षक और विद्यार्थी वर्ग के कल्याण से जुड़े सभी विषयों पर अत्यंत गंभीर और संवेदनशील है। शिक्षा के क्षेत्र में सुधार और विद्यार्थियों के हित में लगातार महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा देश की जनता के हित में जब भी कोई निर्णय लिया जाता है, मध्यप्रदेश उसे लागू करने और निर्णय के अनुरूप नीतिगत व्यवस्था बनाने वाला पहला राज्य होता है। समय की जरूरत है कि युवाओं से संबंधित न्यायिक फैसले द्रुत गति से हों। इसके लिए मध्यप्रदेश में 4 फास्ट ट्रैक कोर्ट्स (भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में) बनाये जायेंगे। पेपर लीक और परीक्षा सहित अन्य मामलों का फास्ट ट्रैक कोर्ट में मात्र 3 माह में निराकरण किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शनिवार को मध्यप्रदेश विधानसभा स्थित सेंट्रल हॉल में मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा में यह जानकारी दी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के मन में विद्यार्थियों के कल्याण और उनसे जुड़े सभी विषयों को लेकर बेहद सकारात्मक भाव हैं। उन्होंने कहा कि जैसे ही नीट पेपर लीक की खबर सामने आई, उसकी जांच के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने तत्काल कार्रवाई करते हुए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) गठित की। प्रकरण दर्ज हुआ और देशभर में तेज गति से आरोपियों की गिरफ्तारियां भी की गई, फिर दोबारा नीट परीक्षा कराई गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार पूरी सहानुभूति और संवेदना विद्यार्थियों के साथ है। हम हर परिस्थिति में विद्यार्थियों के साथ खड़े हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भरोसा दिलाया कि भविष्य में नीट परीक्षाएं बेहतर और पारदर्शी तरीके से सम्पन्न हों, इसके लिए स्टैंडर्ड ऑफ प्रोटोकॉल्स (एसओपी) तैयार कर सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा मध्यप्रदेश वह राज्य है, जहां राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 देश में सबसे पहले लागू की गई। पिछले ढाई साल के कार्यकाल में राज्य सरकार ने 3 नए शासकीय विश्वविद्यालय प्रारंभ किए हैं। प्रदेश में विकास की गतिविधियों को गति देकर तेज़ी लाने के साथ-साथ युवाओं और विद्यार्थियों के लिए कल्याण की चिंता कर इनके हित में निर्णय लेना भी हमारा कर्तव्य है। विद्यार्थियों के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय हमारी सरकार ले चुकी है और यह आगे भी लगातार जारी रहेंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में मेडिकल कॉलेज की संख्या दोगुनी से अधिक हो चुकी है। पूरे देश में पहले मात्र 641 विश्वविद्यालय थे, आज इनकी संख्या बढ़कर 1400 से अधिक हो गई है। मेडिकल एजुकेशन की सीटें भी 50 हजार से बढ़कर 1 लाख से अधिक हो चुकी हैं।