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  • MP में 23 सितंबर से फि‍र बरसेंगे बादल, 24-25 को सिस्टम रहेगा स्ट्रॉन्ग, भारी बारिश की संभावना

    MP में 23 सितंबर से फि‍र बरसेंगे बादल, 24-25 को सिस्टम रहेगा स्ट्रॉन्ग, भारी बारिश की संभावना


    भोपाल । मध्य प्रदेश में 23 सितंबर से एक बार फिर तेज बारिश का दौर शुरू होने के आसार हैं। मौसम विभाग के मुताबिक 24 और 25 सितंबर को सिस्टम की सक्रियता सबसे ज्यादा रहेगी। इन दो दिनों में 17 जिलों में अति भारी या भारी बारिश हो सकती है, जबकि भोपाल-नर्मदापुरम संभाग में भी इसका असर देखने को मिलेगा।

    मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में बारिश की वजह लो प्रेशर एरिया यानी निम्न दाब क्षेत्र है। इसके प्रभाव से 23 सितंबर से कुछ जिलों में बारिश शुरू होगी। 24 और 25 सितंबर को सिस्टम के स्ट्रॉन्ग रहने की संभावना है। पूर्वी मध्यप्रदेश के जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के जिलों में इसका असर ज्यादा रहने का अनुमान है। भोपाल और नर्मदापुरम संभाग के लिए भी बारिश को लेकर अलर्ट है।

    प्रदेश में अब तक औसतन 33.7 इंच बारिश रिकॉर्ड की जा चुकी है। अगले कुछ दिनों में तेज बारिश होने से कुल बारिश के आंकड़े में और सुधार होने की उम्मीद है। दक्षिण-पश्चिम मानसून सितंबर के आखिरी सप्ताह से प्रदेश से विदा होना शुरू हो जाएगा। ऐसे में विदाई से पहले बारिश का यह दौर कई इलाकों के लिए अहम माना जा रहा है।

    भोपाल-नर्मदापुरम में भी दिखा बारिश का असर

    इससे पहले रविवार रात भोपाल के कई इलाकों में तेज बारिश हुई। नर्मदापुरम में तेज हवा चलने के बाद करीब पौन घंटे तक बारिश हुई। फेफरताल में 33 केवी लाइन पर पेड़ गिरने से बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई। बिजली गुल रहने के कारण शहर का करीब 40 फीसदी हिस्सा अंधेरे में डूबा रहा।

    बारिश और तेज हवा का असर शहर के गणेश पंडालों पर भी पड़ा। रसूलिया, आशुतोष नगर और हरदा रोड स्थित महाराणा प्रताप मार्केट में बने गणेश पंडालों को नुकसान पहुंचा।

    सोमवार को भी भोपाल समेत प्रदेश के कई इलाकों में हल्की बारिश हुई। दिनभर बादल छाए रहे। रात में कोलार इलाके में भी हल्की बारिश रिकॉर्ड की गई।

    प्रदेश में सामान्य से 6% कम बारिश

    IMD के आंकड़ों के मुताबिक मध्यप्रदेश में अब तक 856.8 मिमी यानी 33.7 इंच बारिश हो चुकी है। प्रदेश में इस अवधि तक सामान्य बारिश 922.6 मिमी यानी 36.3 इंच होनी चाहिए थी। इस लिहाज से अब तक 2.6 इंच बारिश कम हुई है। ओवरऑल प्रदेश में सामान्य से 6% कम पानी गिरा है।

    पूर्वी मध्यप्रदेश में सामान्य से 2% और पश्चिमी हिस्से में 10% कम बारिश हुई है। पूर्वी हिस्से में जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग शामिल हैं। यहां औसत की तुलना में करीब 2% तक बारिश कम हुई है।

    बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5% से 23% तक कम बारिश दर्ज की गई है। हालांकि, पिछले एक सप्ताह में बारिश के आंकड़ों में काफी सुधार हुआ है। सोमवार को प्रदेश का कुल बारिश का अंतर माइनस 2% तक आ गया था।

    पश्चिमी हिस्से के कई जिलों में ज्यादा कमी

    पश्चिमी मध्यप्रदेश के कई जिलों में बारिश का आंकड़ा अभी भी सामान्य से काफी नीचे है। आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 7% से 49% तक कम बारिश हुई है। स्रोत सूची में खंडवा का नाम दो बार दर्ज है।

    इन 23 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश

    प्रदेश के 23 जिलों में अब तक सामान्य से ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की गई है। इनमें अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी शामिल हैं।

    मानसून की विदाई से पहले 23 सितंबर से शुरू होने वाला बारिश का नया दौर प्रदेश के बारिश के आंकड़ों में और सुधार कर सकता है। खासकर 24 और 25 सितंबर को सिस्टम की सक्रियता बढ़ने से पूर्वी मध्यप्रदेश के साथ भोपाल और नर्मदापुरम संभाग में भी बारिश की गतिविधियां तेज होने की संभावना है।

  • MP में 24 सितंबर से फिर तेज बारिश के आसार, मानसून का आखिरी दौर, अब तक 33.9 इंच बरसात

    MP में 24 सितंबर से फिर तेज बारिश के आसार, मानसून का आखिरी दौर, अब तक 33.9 इंच बरसात


    भोपाल। दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई से पहले मध्यप्रदेश में एक बार फिर बारिश का दौर सक्रिय होने जा रहा है। मौसम केंद्र (IMD) के अनुसार 24 सितंबर से प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश हो सकती है, जबकि इससे पहले हल्की बारिश और रिमझिम का दौर जारी रहेगा। प्रदेश में अब तक औसतन 33.9 इंच बारिश हो चुकी है, जो सामान्य कोटे का करीब 91% है।

    बारिश के नए दौर की वजह बंगाल की खाड़ी में बन रहा मौसम तंत्र है। मौसम विभाग के मुताबिक शनिवार तक लो प्रेशर एरिया उत्तर अंडमान सागर और आसपास के क्षेत्र में सक्रिय था। रविवार को यह आगे बढ़ गया। इसके पश्चिम-उत्तर दिशा में बढ़ने के साथ धीरे-धीरे मजबूत होने की संभावना है। इसके 21 सितंबर को मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर डिप्रेशन और 22 सितंबर को डीप डिप्रेशन में बदलने का अनुमान है।

    23 सितंबर से बढ़ेगी सक्रियता, 24 से भारी बारिश

    मौसम विभाग के अनुसार इस सिस्टम का असर 23 सितंबर की सुबह से बढ़ना शुरू हो सकता है। इसके बाद मध्यप्रदेश में भी बारिश की गतिविधियां तेज होने का अनुमान है। 24 सितंबर से कई जिलों में तेज बारिश का दौर शुरू हो सकता है।

    इस दिन छतरपुर, सतना, दमोह, डिंडौरी, सिवनी, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, नर्मदापुरम, बैतूल और हरदा में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। मानसून की विदाई से पहले बनने वाला यह सिस्टम प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश की कमी को कुछ हद तक पूरा कर सकता है।

    32 जिलों में 5 से 49% तक कम बारिश

    प्रदेश में अब तक हुई बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो 32 जिले ऐसे हैं, जहां सामान्य से 5% से 49% तक कम बारिश हुई है। पूर्वी मध्यप्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश सामान्य से 1% तक कम है।

    बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5% से 24% तक कम बारिश दर्ज की गई है। हालांकि पिछले एक सप्ताह में इन जिलों की स्थिति में सुधार हुआ है। रविवार तक बारिश का आंकड़ा माइनस 2% तक पहुंच गया था।

    पश्चिमी हिस्से के इन जिलों में बारिश की कमी

    पश्चिमी मध्यप्रदेश में भी कई जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है। आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, खंडवा, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 5% से 49% तक कम पानी गिरा है। ऐसे में 24 सितंबर से शुरू होने वाला बारिश का दौर इन क्षेत्रों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    इन 23 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश

    IMD के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश के 23 जिलों में अब तक औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। इनमें अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी शामिल हैं।

    इस तरह मानसून की विदाई से पहले आने वाला नया मौसम सिस्टम प्रदेश के बारिश के आंकड़ों में और सुधार कर सकता है। फिलहाल 23 सितंबर से गतिविधि बढ़ने और 24 सितंबर से कई जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है।

  • MP में सितंबर के आखिरी सप्ताह होगी तेज बारिश, अगले 4 दिन भोपाल-इंदौर-उज्जैन समेत कई जिलों में गिरेगा पानी

    MP में सितंबर के आखिरी सप्ताह होगी तेज बारिश, अगले 4 दिन भोपाल-इंदौर-उज्जैन समेत कई जिलों में गिरेगा पानी


    भोपाल। दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई से पहले मध्य प्रदेश में एक बार फिर बारिश का दौर तेज हो सकता है। उत्तर अंडमान सागर में बन रहा निम्न दाब क्षेत्र प्रदेश के मौसम को प्रभावित कर सकता है। अगले चार दिनों में भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर और ग्वालियर समेत कई जिलों में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश होने की संभावना है। ताजा मौसम पूर्वानुमान में सितंबर के आखिरी सप्ताह में बारिश की गतिविधियां बढ़ने और 24-25 सितंबर को भारी बारिश के आसार भी जताए गए हैं।

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक नए सिस्टम की दिशा और उसकी तीव्रता ही तय करेगी कि इसका प्रदेश पर कितना असर पड़ेगा। 23 सितंबर तक प्रदेश में भारी बारिश का कोई अलर्ट नहीं था, हालांकि सिस्टम की गतिविधियों के आधार पर मौसम के पूर्वानुमान में बदलाव संभव है। IMD के ताजा बुलेटिन में भी 19 से 23 सितंबर के दौरान गरज-चमक और आकाशीय बिजली की गतिविधियों तथा इसके बाद 24 और 25 सितंबर को भारी बारिश की संभावना बताई गई है।

    भोपाल में दो बांधों के गेट खोले

    इससे पहले शनिवार को भोपाल और आसपास के इलाकों में रातभर बारिश के बाद भदभदा डैम का एक और कलियासोत डैम के दो गेट खोलने पड़े। उधर ब्यावरा में लगातार बारिश के कारण नदी-नालों में उफान आ गया। अजनार नदी का पानी पुल के ऊपर से बहने लगा, जिससे आसपास के इलाके में बाढ़ जैसे हालात बन गए।

    आगर जिले में भी कई स्थानों पर तेज बारिश दर्ज की गई। नलखेड़ा में मां बगलामुखी मंदिर के सामने से गुजर रहे नाले में पानी का बहाव इतना बढ़ गया कि एक कार बह गई। इस हादसे में 8 लोगों की मौत हो गई। शहडोल में आकाशीय बिजली गिरने से 2 लोगों की जान चली गई।

    45 जिलों में कहीं तेज, कहीं हल्की बारिश

    शनिवार को मध्य प्रदेश के 45 जिलों में बारिश दर्ज की गई। इनमें शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, दतिया, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, सतना, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, डिंडौरी, पांढुर्णा, भोपाल, राजगढ़, सीहोर, विदिशा, रायसेन, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, उज्जैन, देवास, रतलाम, शाजापुर, मंदसौर, नीमच, आगर-मालवा, इंदौर, धार, झाबुआ, आलीराजपुर, बड़वानी, खंडवा, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, श्योपुर, सागर और दमोह शामिल हैं।

    विदिशा के लटेरी में सबसे ज्यादा 4.2 इंच बारिश रिकॉर्ड हुई। गुना के कुंभराज में 4 इंच और आगर-मालवा के नलखेड़ा में 92 मिमी यानी 3.7 इंच बारिश हुई। आगर के ही बड़ौद में 2.9 इंच, गुना के राघौगढ़ में 2.8 इंच और राजगढ़ के खिलचीपुर में ढाई इंच बारिश दर्ज की गई।

    32 जिलों में अब भी 5 से 48% कम बारिश

    पूरे मानसूनी सीजन की स्थिति देखें तो मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से में जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश 1% तक कम रही है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5% से 24% तक कम बारिश दर्ज हुई है।

    हालांकि पिछले एक सप्ताह में बारिश के आंकड़ों में काफी सुधार हुआ है। इस दौरान कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात भी बने। सीजन में पहली बार पूर्वी हिस्से की बारिश की स्थिति बेहतर हुई थी, लेकिन शनिवार तक यह आंकड़ा फिर माइनस 2% हो गया।

    पश्चिमी मध्य प्रदेश के 23 जिलों में भी बारिश सामान्य से कम है। आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा समेत इन जिलों में औसत से 5% से 48% तक कम पानी गिरा है।

    इन 23 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश

    इसके उलट प्रदेश के 23 जिलों में मानसून सीजन के दौरान औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। इनमें अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी शामिल हैं।

    मानसून अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है और देश के कुछ हिस्सों से इसकी वापसी भी शुरू हो गई है। इसके बावजूद मध्य प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक गरज-चमक के साथ बारिश का दौर बना रहने और सितंबर के आखिरी सप्ताह में एक बार फिर बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।

  • एमपी में 33.2 इंच बारिश, मानसून को 11 दिन बाकी, 22 सितंबर तक हल्की बारिश की संभावना

    एमपी में 33.2 इंच बारिश, मानसून को 11 दिन बाकी, 22 सितंबर तक हल्की बारिश की संभावना


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून सीजन के अब 11 दिन ही बाकी हैं और प्रदेश में अब तक औसतन 33.2 इंच बारिश रिकॉर्ड हो चुकी है। यह सामान्य बारिश के कोटे का 89.3 प्रतिशत है। मौसम विभाग के अनुसार अगले चार दिन प्रदेश में हल्की बारिश का दौर जारी रह सकता है, जबकि मानसून के अंतिम सप्ताह में कुछ जिलों में तेज बारिश होने की संभावना है। ऐसे में सीजन खत्म होने तक प्रदेश का कुल बारिश का कोटा पूरा होने की उम्मीद बनी हुई है।

    हालांकि, प्रदेश के सभी हिस्सों में बारिश का वितरण एक जैसा नहीं रहा है। इंदौर, उज्जैन, जबलपुर और नर्मदापुरम संभाग के ज्यादातर जिलों में सामान्य बारिश का आंकड़ा अब भी पीछे है। इंदौर, धार, आलीराजपुर, रायसेन, विदिशा, जबलपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, पांढुर्णा, सागर, उज्जैन, रतलाम और शाजापुर में अब तक सामान्य बारिश का 80 प्रतिशत पानी भी नहीं गिरा है। इन जिलों को सामान्य बारिश के आंकड़े तक पहुंचने के लिए अगले दिनों में लगातार तीन से चार दिन अच्छी बारिश की जरूरत होगी।

    इसके उलट मऊगंज और निवाड़ी में सामान्य कोटे से दोगुना पानी गिर चुका है। वहीं भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, छतरपुर, निवाड़ी, मैहर, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल और उमरिया में सामान्य या उससे अधिक बारिश रिकॉर्ड हुई है। प्रदेश के बाकी 37 जिलों में बारिश सामान्य से कम है।

    22 सितंबर तक हल्की बारिश का अनुमान

    मौसम विभाग ने अगले चार दिन यानी 22 सितंबर तक प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में हल्की बारिश होने का अनुमान जताया है। मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक इस समय पश्चिमी हिस्से में साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम सक्रिय है। इसके असर से पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में बारिश का दौर बना हुआ है।

    मौसम की अगली गतिविधि भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। 19 सितंबर की शाम के आसपास उत्तर अंडमान सागर में नया निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना है। इसके बाद इसके दक्षिण ओडिशा और उत्तर आंध्र प्रदेश तट की ओर पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने के संकेत हैं। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक इस सिस्टम के बनने और आगे बढ़ने से मध्य प्रदेश के मौसम में एक बार फिर बदलाव की स्थिति बन सकती है।

    मानसून की विदाई का समय नजदीक होने के बावजूद प्रदेश में अभी बारिश की संभावनाएं बनी हुई हैं। ऐसे में अंतिम सप्ताह में यदि कुछ जिलों में अच्छी बारिश होती है तो जिन इलाकों में फिलहाल बारिश का आंकड़ा कम है, वहां सामान्य के करीब पहुंचने की उम्मीद बढ़ सकती है।

  • MP में मानसून विदाई की ओर, फिर भी सक्रियता बरकरार, 21 सितंबर तक बारिश का रहेगा दौर

    MP में मानसून विदाई की ओर, फिर भी सक्रियता बरकरार, 21 सितंबर तक बारिश का रहेगा दौर


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है, लेकिन इसकी सक्रियता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। मौसम विभाग के मुताबिक 18 से 21 सितंबर के बीच प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश, गरज-चमक और आंधी का दौर बना रह सकता है। इसके बाद 22 सितंबर से गतिविधियां सीमित होने के संकेत हैं। इस दौरान कम बारिश वाले जिलों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

    मानसून की विदाई की शुरुआत पश्चिमी राजस्थान से होने का अनुमान है। मध्य प्रदेश में इसकी सक्रियता सितंबर के अंतिम सप्ताह तक बनी रह सकती है। मौसम विभाग के मौजूदा पूर्वानुमान में भी 21 सितंबर तक पश्चिमी मध्य प्रदेश में गरज-चमक और आंधी की गतिविधियों का संकेत है, जबकि फिलहाल भारी बारिश की कोई बड़ी चेतावनी जारी नहीं है।

    18 से 21 सितंबर तक बन सकता है बारिश का दौर

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार अगले कुछ दिनों में प्रदेश के मौसम में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। सात दिन के पूर्वानुमान के मुताबिक 18 से 21 सितंबर के बीच वर्षा गतिविधियां बनी रह सकती हैं। 22 सितंबर से इसमें कमी आने लगेगी।

    मानसून की विदाई के पहले होने वाली यह गतिविधि उन जिलों के लिए महत्वपूर्ण है, जहां इस सीजन में बारिश सामान्य से कम हुई है। प्रदेश के 18 जिलों में सामान्य या उससे ज्यादा बारिश दर्ज की जा चुकी है। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, छतरपुर, निवाड़ी, मैहर, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल और उमरिया शामिल हैं।

    इसके उलट इंदौर, उज्जैन और जबलपुर समेत 37 जिलों में बारिश सामान्य से कम है। आलीराजपुर में सामान्य बारिश की आधी ही बारिश हुई है, जबकि निवाड़ी में सामान्य से 54% ज्यादा पानी गिर चुका है।

    भोपाल, सीहोर और देवास में तेज बारिश

    गुरुवार दोपहर भोपाल, सीहोर और देवास जिलों में तेज बारिश हुई। भोपाल-इंदौर रोड पर सोनकच्छ में बारिश के दौरान कुछ देर के लिए दिन में ही अंधेरा छा गया। वाहन चालकों को हेडलाइट जलाकर सफर करना पड़ा।

    ग्वालियर में दिनभर उमस और गर्मी के बाद शाम को झमाझम बारिश हुई। इससे लोगों को गर्मी से राहत मिली और मौसम सुहाना हो गया।

    अरब सागर में कम दबाव का क्षेत्र

    शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक इस समय सौराष्ट्र और उससे लगे उत्तर-पूर्वी अरब सागर के ऊपर लो प्रेशर एरिया बना हुआ है। इससे जुड़ा चक्रवाती परिसंचरण समुद्र तल से करीब 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई तक फैला है। मानसून ट्रफ भी इस निम्न दबाव क्षेत्र से होते हुए राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल से बंगाल की खाड़ी तक फैली हुई है।

    इन मौसमी प्रणालियों से मध्य भारत में नमी और बारिश की गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। इसी वजह से 18 और 19 सितंबर के दौरान मध्य प्रदेश में अलग-अलग चरणों में बारिश हो सकती है।

    19 सितंबर के बाद बन सकता है नया सिस्टम

    मौसम विशेषज्ञ के अनुसार उत्तर थाईलैंड के ऊपर बना ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण 18 सितंबर की शाम तक उत्तर अंडमान सागर के आसपास पहुंच सकता है। इसके प्रभाव से 19 सितंबर की शाम के आसपास उत्तर अंडमान सागर में नया निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना है।

    इसके बाद इसके दक्षिण ओडिशा और उत्तर आंध्र प्रदेश के तट की ओर पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ने के संकेत हैं। यह सिस्टम मध्य प्रदेश के मौसम में एक और बदलाव का आधार बन सकता है। IMD ने भी 19 सितंबर के आसपास अंडमान सागर और आसपास के क्षेत्र में निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना जताई है।

    अब तक 33.1 इंच बारिश, सामान्य से 2.5 इंच कम

    मध्य प्रदेश में इस मानसूनी सीजन में अब तक 842.1 मिमी यानी 33.1 इंच बारिश रिकॉर्ड हुई है। यह सामान्य बारिश 35.6 इंच (905.3 मिमी) से करीब 2.5 इंच कम है। कुल मिलाकर प्रदेश में सामान्य से 7% कम बारिश दर्ज हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में कमी 2% और पश्चिमी हिस्से में 11% है।

    32 जिलों में 4 से 50% तक कम बारिश

    पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में औसतन 1% तक बारिश कम हुई है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 4% से 25% तक कम बारिश हुई है। पिछले एक सप्ताह में इन जिलों की स्थिति में सुधार आया है।

    पश्चिमी हिस्से में आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 4% से 50% तक कम पानी गिरा है।

    ऐसे में सितंबर के अंतिम दौर में होने वाली बारिश इन जिलों के लिए महत्वपूर्ण रहेगी। हालांकि, अभी उपलब्ध मौसम पूर्वानुमान में 21 सितंबर तक भारी बारिश का व्यापक अलर्ट नहीं है; बारिश के साथ गरज-चमक और आंधी की गतिविधियां अधिक प्रमुख रहने की संभावना है।

  • मानसून की विदाई से पहले MP में फिर होगी बारिश, अब तक 33.1 इंच गिरा पानी, कोटे का 88.7% पूरा

    मानसून की विदाई से पहले MP में फिर होगी बारिश, अब तक 33.1 इंच गिरा पानी, कोटे का 88.7% पूरा


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून अब अंतिम दौर में है, लेकिन विदाई से पहले एक और बारिश का दौर प्रदेश को मिल सकता है। इस मानसूनी सीजन में अब तक औसतन 33.1 इंच बारिश हो चुकी है, जो सामान्य कोटे 37.3 इंच का 88.7% है। प्रदेश के 23 जिलों में सामान्य या उससे ज्यादा बारिश दर्ज की गई है, जबकि 32 जिलों में बारिश अब भी औसत से कम है।

    मौसम केंद्र (IMD) के मुताबिक फिलहाल 20 सितंबर तक प्रदेश में कहीं भी अति भारी या भारी बारिश का अलर्ट नहीं है। हालांकि, 21 सितंबर के बाद चक्रवात या लो प्रेशर एरिया की गतिविधि बनने पर कुछ हिस्सों में बारिश का दौर तेज हो सकता है। सितंबर के आखिरी सप्ताह में अच्छी बारिश की संभावना जताई गई है।

    अभी दो सिस्टम, लेकिन असर सीमित

    प्रदेश के ऊपरी हिस्से से मानसून ट्रफ गुजर रही है। इसके साथ अरब सागर में लो प्रेशर एरिया भी सक्रिय है। फिलहाल दोनों सिस्टम का प्रदेश में व्यापक असर दिखाई नहीं दे रहा है। स्थानीय मौसम तंत्र सक्रिय होने से कुछ जिलों में तेज बारिश जरूर हो सकती है।

    पिछले 24 घंटे में झाबुआ के शाहपुरा में करीब 3 इंच और दतिया के सेंवढ़ा में 4 इंच पानी गिरा। बुधवार को भोपाल, सीहोर समेत कुछ अन्य जिलों में भी बारिश हुई।

    21 सितंबर के बाद बन सकता है नया दौर

    मौसम विभाग के अनुसार 20 सितंबर तक प्रदेश में भारी बारिश की स्थिति नहीं है, लेकिन इसके बाद मौसम में बदलाव के संकेत हैं। 21 सितंबर के बाद चक्रवात और लो प्रेशर एरिया की गतिविधियां सक्रिय हो सकती हैं। इसके असर से प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश होने की संभावना है।

    मानसून का आधिकारिक सीजन 1 जून से 30 सितंबर तक माना जाता है। इस लिहाज से अब मानसून की विदाई में 13 दिन बाकी हैं। हालांकि, प्रदेश के कुछ जिलों से मानसून अक्टूबर के पहले सप्ताह तक भी विदा हो सकता है।

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक इस बार मानसून समय पर विदा हो सकता है। इससे पहले प्रदेश में बारिश का एक और दौर देखने को मिल सकता है।

    अक्टूबर की बारिश मानसूनी आंकड़े में नहीं जुड़ेगी

    मध्य प्रदेश में मानसूनी बारिश की गणना 1 जून से 30 सितंबर के बीच होती है। इसलिए अक्टूबर में मानसून की विदाई के बाद होने वाली बारिश को मानसूनी सीजन के आंकड़ों में शामिल नहीं किया जाएगा। कई बार मानसून अक्टूबर के पहले या दूसरे सप्ताह तक प्रदेश से पूरी तरह विदा होता है।

    फिलहाल प्रदेश में औसत बारिश का आंकड़ा 33.1 इंच है, जबकि सामान्य बारिश 37.3 इंच है। यानी सामान्य कोटे तक पहुंचने के लिए करीब 4.2 इंच बारिश और जरूरी है।

    पूर्वी MP में कमी घटकर 1% तक पहुंची

    प्रदेश के पूर्वी हिस्से में जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग आते हैं। यहां कुल मिलाकर बारिश सामान्य से 1% तक कम है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी में 3% से 25% तक कम बारिश हुई है।

    पिछले एक सप्ताह में पूर्वी हिस्से के बारिश के आंकड़ों में काफी सुधार आया है। कई जिलों में भारी बारिश के कारण बाढ़ जैसे हालात भी बने, जिससे सीजन की बारिश का औसत ऊपर आया। एक समय पूर्वी हिस्सा सामान्य से बेहतर स्थिति में पहुंच गया था, लेकिन बुधवार तक यह आंकड़ा फिर माइनस 1% हो गया।

    पश्चिमी हिस्से में ज्यादा जिले पिछड़े

    पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी कई जिले बारिश की कमी से जूझ रहे हैं। आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 3% से 49% तक कम बारिश दर्ज की गई है।

    इनमें आलीराजपुर की स्थिति सबसे कमजोर जिलों में बनी हुई है, जबकि प्रदेश के कई पूर्वी और उत्तरी जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की गई है।

    इन 23 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश


    IMD के आंकड़ों के मुताबिक अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

    अब नजर 21 सितंबर के बाद बनने वाली मौसम प्रणालियों पर है। यदि इनका असर प्रदेश पर व्यापक रहा तो मानसून के अंतिम दिनों में बारिश का आंकड़ा सामान्य कोटे के और करीब पहुंच सकता है।

  • MP में मानसून की विदाई से पहले फिर होगी बारिश, 19 सितंबर के बाद नया सिस्टम

    MP में मानसून की विदाई से पहले फिर होगी बारिश, 19 सितंबर के बाद नया सिस्टम


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई से पहले एक बार फिर बारिश का दौर तेज हो सकता है। मौसम विशेषज्ञ के मुताबिक 19 सितंबर के बाद नया सिस्टम सक्रिय होने की संभावना है, जो मजबूत रहा तो प्रदेश में बारिश का कोटा पूरा हो सकता है; अभी सामान्य औसत 37.3 इंच के मुकाबले 33 इंच बारिश हुई है।

    88.5% बारिश, लक्ष्य तक पहुंचने 4.3 इंच बाकी

    प्रदेश में मानसून सीजन खत्म होने में अब करीब 14 दिन बाकी हैं। मंगलवार तक 33 इंच यानी सामान्य बारिश की 88.5% बारिश हो चुकी है। सामान्य औसत 37.3 इंच है, ऐसे में सामान्य आंकड़े तक पहुंचने के लिए अभी 4.3 इंच बारिश और चाहिए।

    मौसम विभाग के अनुसार मानसूनी सीजन 1 जून से 30 सितंबर तक माना जाता है। इस अवधि में होने वाली बारिश ही मानसून के आंकड़ों में शामिल की जाती है। हालांकि कई बार मानसून अक्टूबर के पहले या दूसरे सप्ताह तक विदा होता है। इस बार सितंबर के आखिरी हिस्से में इसकी विदाई शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में उससे पहले होने वाली बारिश प्रदेश के कुल आंकड़े को सामान्य के करीब ले जा सकती है।

    17 से 21 सितंबर के बीच बारिश का जोर

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार 17 से 19 सितंबर के दौरान पश्चिमी मध्य प्रदेश में बारिश की गतिविधियां अधिक व्यापक हो सकती हैं। वहीं, 18 से 21 सितंबर तक पूर्वी मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश होने की संभावना है।

    इसके बाद 19 सितंबर के बाद बनने वाला नया सिस्टम प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि इसकी ताकत अच्छी रही और इसका प्रभाव व्यापक रहा तो मानसून के बचे दिनों में होने वाली बारिश से प्रदेश सामान्य बारिश के आंकड़े को छू सकता है।

    मंगलवार को लो प्रेशर एक्टिव, लेकिन तेज बारिश नहीं

    मंगलवार को पश्चिमी मध्य प्रदेश में लो प्रेशर एरिया (निम्न दाब क्षेत्र) सक्रिय रहा। मानसून ट्रफ की गतिविधि भी देखने को मिली, लेकिन इसका असर तेज बारिश के रूप में सामने नहीं आया। प्रदेश के किसी भी जिले में भारी बारिश दर्ज नहीं हुई।

    भोपाल में दिनभर धूप खिली रही। इंदौर और उज्जैन में भी मौसम लगभग ऐसा ही रहा। यानी सिस्टम सक्रिय होने के बावजूद मंगलवार को प्रदेश में बारिश का जोर देखने को नहीं मिला।

    18 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश

    अब तक प्रदेश के 18 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश हो चुकी है। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, छतरपुर, निवाड़ी, मैहर, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल और उमरिया शामिल हैं।

    इन जिलों में सामान्य से अधिक पानी गिर चुका है। ऐसे में मानसून के बचे दिनों में यहां होने वाली बारिश को अतिरिक्त बारिश के तौर पर देखा जाएगा।

    37 जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे

    दूसरी ओर इंदौर, उज्जैन और जबलपुर समेत 37 जिले अभी सामान्य बारिश के आंकड़े से पीछे हैं। इनमें आलीराजपुर की स्थिति सबसे कमजोर है, जहां सामान्य की आधी बारिश भी अब तक नहीं हुई है।

    इसके विपरीत निवाड़ी में सामान्य से 49% ज्यादा बारिश दर्ज हो चुकी है। इस तरह प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश का वितरण काफी असमान रहा है। अब निगाह 19 सितंबर के बाद सक्रिय होने वाले संभावित सिस्टम पर है कि वह कितनी व्यापक बारिश कराता है और प्रदेश को मानसून के सामान्य आंकड़े के कितने करीब पहुंचाता है।

  • MP में मानसून के 15 दिन बाकी, 37 जिलों में अब भी कोटा अधूरा, आलीराजपुर सबसे पीछे

    MP में मानसून के 15 दिन बाकी, 37 जिलों में अब भी कोटा अधूरा, आलीराजपुर सबसे पीछे


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई का समय करीब आ रहा है, लेकिन बारिश का आंकड़ा अब भी सामान्य से नीचे है। सीजन में अब तक 834.4 मिमी यानी 32.8 इंच बारिश हुई है, जो सामान्य 886.6 मिमी यानी 34.9 इंच से 2.1 इंच कम है। प्रदेश में ओवरऑल बारिश 6% कम है और 37 जिलों में अभी औसत बारिश का कोटा पूरा नहीं हुआ है।

    दूसरी ओर, भोपाल, ग्वालियर समेत 18 जिले औसत से आगे निकल चुके हैं। सबसे ज्यादा अंतर आलीराजपुर में है, जहां औसत की आधी बारिश भी नहीं हुई, जबकि निवाड़ी में सामान्य से 49% ज्यादा पानी गिर चुका है।

    पूर्वी MP ने संभाला आंकड़ा, पश्चिमी हिस्सा अब भी पीछे
    इस मानसून में प्रदेश के पूर्वी हिस्से में बारिश का प्रदर्शन पश्चिम की तुलना में बेहतर रहा है। जबलपुर, सागर, रीवा और शहडोल संभाग में कई जिलों में सामान्य से ज्यादा पानी गिरा है। सागर संभाग के निवाड़ी में औसत से 49%, मऊगंज में 44%, सतना में 34% और मैहर में 29% ज्यादा बारिश रिकॉर्ड हुई है।

    इंच में देखें तो मऊगंज में 54.9 इंच बारिश दर्ज की गई है। सतना में भी 50 इंच से ज्यादा पानी गिर चुका है। इसके उलट इंदौर संभाग के आलीराजपुर में अब तक सिर्फ 16 इंच बारिश रिकॉर्ड हुई है। हालांकि, पूर्वी हिस्से का ओवरऑल आंकड़ा भी सोमवार तक सामान्य से 1% कम हो गया। यहां बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी में 2% से 25% तक कम बारिश हुई है।

    पश्चिम के कई जिलों में 2 से 49% तक कमी
    पश्चिमी मध्य प्रदेश में बारिश की कमी ज्यादा बनी हुई है। आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 2% से 49% तक कम बारिश हुई है। यही वजह है कि पिछले कुछ दिनों में प्रदेश के कई हिस्सों में तेज बारिश और कुछ स्थानों पर बाढ़ जैसे हालात बनने के बावजूद पूरे प्रदेश का बारिश का आंकड़ा सामान्य से ऊपर नहीं पहुंच पाया।

    23 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश
    मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। इस सूची में पूर्वी और पश्चिमी दोनों हिस्सों के जिले शामिल हैं, लेकिन अधिक बारिश वाले जिलों में पूर्वी मध्य प्रदेश का दबदबा साफ दिखाई देता है।

    चार दिन भारी बारिश के आसार नहीं
    मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार, अगले चार दिनों में प्रदेश में कहीं भी अति भारी या भारी बारिश का अनुमान नहीं है। पिछले चार दिनों से भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल और नर्मदापुरम संभाग के कई जिलों में भारी बारिश का दौर चला था। सोमवार को भी कुछ जिलों में तेज बारिश रिकॉर्ड हुई, लेकिन मंगलवार से सिस्टम कमजोर होने की संभावना है। इसके चलते 15 से 17 सितंबर तक प्रदेश में हल्की बारिश का दौर जारी रह सकता है।

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार, 15 सितंबर से प्रदेश में बारिश की तीव्रता और प्रसार में धीरे-धीरे कमी आने का पूर्वानुमान है। सात दिन के पूर्वानुमान में पश्चिमी मध्य प्रदेश में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश होने की संभावना बनी रहेगी।

    पिछले सप्ताह की बारिश से बदला तस्वीर का अंतर
    पिछले एक सप्ताह में कई जिलों में हुई तेज बारिश ने प्रदेश के बारिश के आंकड़े को काफी सुधारा है। कुछ स्थानों पर बाढ़ जैसे हालात भी बने। इसका असर यह हुआ कि सीजन में पहली बार पूर्वी मध्य प्रदेश का आंकड़ा बेहतर स्थिति में पहुंचा था, हालांकि सोमवार तक यह फिर सामान्य से 1% नीचे आ गया।

    अब मानसून सीजन के करीब 15 दिन ही बाकी हैं। ऐसे में अगले कुछ दिनों में होने वाली बारिश यह तय करेगी कि प्रदेश का कुल आंकड़ा सामान्य के कितने करीब पहुंचता है। फिलहाल पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों की कमी और आलीराजपुर जैसे जिलों में बेहद कम बारिश पूरे प्रदेश के औसत पर असर डाल रही है।

  • भोपाल में कमर्शियल गतिविधियों पर बड़ा अपडेट मास्टर प्लान आया तो भी चुकानी होगी डायवर्सन की कीमत

    भोपाल में कमर्शियल गतिविधियों पर बड़ा अपडेट मास्टर प्लान आया तो भी चुकानी होगी डायवर्सन की कीमत


    भोपाल । भोपाल में आवासीय इलाकों में चल रही कमर्शियल गतिविधियों को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। नगर निगम की नोटिस और सीलिंग कार्रवाई के बीच अब लोगों की नजर नए मास्टर प्लान पर टिक गई है। सरकार नए मास्टर प्लान को लागू करने की तैयारी में है लेकिन इसके लागू होने के बाद भी आवासीय इलाकों में चल रहे कमर्शियल कारोबार को तुरंत राहत मिलने की संभावना नहीं है। अर्बन प्लानिंग एक्सपर्ट सुयश कुलश्रेष्ठ के मुताबिक यदि सरकार अभी मास्टर प्लान की घोषणा करती है तो इसे लागू होने में कम से कम छह महीने का समय लग सकता है। वहीं मिक्स्ड लैंड यूज के तहत आने वाले भवनों के डायवर्सन के लिए भी संबंधित लोगों को निर्धारित राशि चुकानी पड़ सकती है।

    भोपाल में फिलहाल वर्ष 2005 के मास्टर प्लान के आधार पर ही शहर का विकास हो रहा है। यानी करीब 21 साल पुराने प्लान के हिसाब से शहर की व्यवस्थाएं संचालित हो रही हैं जबकि इस दौरान आबादी और शहर का विस्तार काफी तेजी से हुआ है। विशेषज्ञों के मुताबिक नया मास्टर प्लान समय पर लागू नहीं होने के कारण कई आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ती चली गईं। अगर शहर के विस्तार के साथ नया मास्टर प्लान लागू होता तो कमर्शियल क्षेत्रों के लिए पहले से जगह तय होती और उसी हिसाब से सड़कें पार्किंग सीवेज बिजली और पानी जैसी सुविधाओं का विस्तार किया जाता।

    अब मिक्स्ड लैंड यूज को संभावित समाधान के तौर पर देखा जा रहा है। यदि सरकार अरेरा कॉलोनी बावड़ियाकलां रोहित नगर समेत कुछ बड़े इलाकों को मिक्स्ड लैंड यूज में शामिल करती है तो इसका मतलब यह नहीं होगा कि वहां चल रहे सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठान अपने आप वैध हो जाएंगे। इसके लिए निर्धारित नियमों का पालन करना होगा। संबंधित इलाकों में पार्किंग सीवेज बिजली पानी और अन्य जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर की व्यवस्था भी करनी होगी।

    इसके अलावा जिन भवनों को कमर्शियल उपयोग के दायरे में लाया जाएगा उनके डायवर्सन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके लिए सरकार की ओर से निर्धारित शुल्क चुकाना पड़ सकता है। यह राशि कितनी होगी इसका फैसला सरकार करेगी। विशेषज्ञ के अनुसार डायवर्सन की प्रक्रिया में भी करीब चार से छह महीने का समय लग सकता है। यानी मास्टर प्लान की घोषणा होने के बाद भी व्यावसायिक गतिविधियों को तत्काल राहत मिलना आसान नहीं होगा।

    पूरे मामले में अब सुप्रीम कोर्ट की 15 सितंबर को होने वाली सुनवाई भी बेहद अहम मानी जा रही है। आवासीय भवनों के व्यावसायिक उपयोग और अवैध निर्माण को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहले ही सख्त रुख अपना चुका है। कोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से बनाई गई 10 सदस्यीय जांच समिति की कार्रवाई पर रोक लगाई थी। साथ ही हाईकोर्ट से दुकान संचालकों को मिले राहत वाले आदेश भी निरस्त कर दिए गए थे। नगर निगम को अपनी कार्रवाई की रिपोर्ट भी अदालत में पेश करनी है।

    इसी के चलते भोपाल में नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई तेज हुई। एक सप्ताह में आठ हजार से ज्यादा नोटिस जारी किए गए जबकि करीब 190 प्रतिष्ठान स्वेच्छा से या सीलिंग के जरिए बंद किए गए। निगम को कुल 62 हजार नोटिस जारी करने थे लेकिन शुरुआती कार्रवाई में ही व्यापारियों और रहवासियों का विरोध सामने आ गया।

    निगम की कार्रवाई के खिलाफ व्यापारी कई बार सड़कों पर उतर चुके हैं। रोशनपुरा और न्यू मार्केट में प्रदर्शन हुआ तो कोलार रोड समेत कई इलाकों में बाजार बंद रखे गए। अवधपुरी और रायसेन रोड पर भी विरोध देखने को मिला। अब सभी की निगाहें सरकार के नए मास्टर प्लान और सुप्रीम कोर्ट के अगले आदेश पर हैं। फिलहाल इतना साफ है कि मास्टर प्लान की घोषणा होने के बाद भी राहत की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ेगी और मिक्स्ड लैंड यूज के तहत आने वाले भवनों को नियमों के साथ डायवर्सन की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ सकती है।

  • MP में फिर सक्रिय मानसून: उज्जैन समेत 7 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, 15 से कमजोर होगा सिस्टम

    MP में फिर सक्रिय मानसून: उज्जैन समेत 7 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, 15 से कमजोर होगा सिस्टम


    भोपाल । मध्य प्रदेश में मानसून की गतिविधियां एक बार फिर तेज हो गई हैं। पश्चिमी हिस्से में सक्रिय तीन मौसमी सिस्टम के असर से रविवार को कई जिलों में तेज बारिश हुई। इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर संभाग में बारिश का असर ज्यादा रहा। बड़वानी में नदी-नाले और तालाब उफान पर आ गए, जबकि मुरैना में चंबल नदी में नहाते समय पिता-पुत्र डूब गए। सोमवार को उज्जैन समेत 7 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट है। हालांकि 15 सितंबर के बाद बारिश की तीव्रता और दायरा घटने का अनुमान है।

    मौसम केंद्र (IMD) भोपाल के अनुसार, प्रदेश में लो प्रेशर एरिया (निम्न दाब क्षेत्र) के साथ ट्रफ समेत तीन मौसम प्रणालियां सक्रिय हैं। इनके प्रभाव से अब तक अपेक्षाकृत कम बारिश वाले इंदौर और उज्जैन संभाग में भी अच्छी बारिश हुई है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में 14 सितंबर को भी कई स्थानों पर भारी बारिश की संभावना बनी हुई है।

    बड़वानी में तालाब ओवरफ्लो, बांध के गेट खोले

    रविवार को भोपाल सहित प्रदेश के कई हिस्सों में तेज बारिश हुई। बड़वानी के सेंधवा क्षेत्र में नदी-नाले और तालाब उफान पर रहे। रलावती में जिले का सबसे बड़ा तालाब ओवरफ्लो हो गया।

    टीकमगढ़ में तेज बारिश के बाद बान सुजारा बांध के चार गेट खोलने पड़े। हरदा के वन क्षेत्र में लाखादेह की पहाड़ी नदी भी उफान पर रही। इंदौर के महू, ओंकारेश्वर, रतलाम समेत कई क्षेत्रों में तेज बारिश दर्ज की गई। शाजापुर के मक्सी, झाबुआ के पेटलावद, खरगोन के कसरावद और खंडवा में भी मूसलधार बारिश हुई।

    चंबल में पिता-पुत्र डूबे

    मुरैना में रविवार को चंबल नदी में नहाने के दौरान पिता और पुत्र डूब गए। दोनों बाबू महाराज मंदिर में दर्शन के लिए आए थे। हादसे के बाद उनकी तलाश की गई।

    सोमवार को इन 7 जिलों में भारी बारिश

    मौसम विभाग ने सोमवार को उज्जैन, नीमच, मंदसौर, रतलाम, राजगढ़, गुना और श्योपुर में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।

    इसके अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, विदिशा, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में कहीं हल्की तो कहीं तेज बारिश होने का अनुमान है।

    14 सितंबर को भी पश्चिमी MP में असर

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक, 14 सितंबर को पश्चिमी मध्य प्रदेश के अलग-अलग स्थानों पर भारी वर्षा की संभावना बनी हुई है। निम्न दबाव क्षेत्र के राजस्थान-गुजरात की ओर बढ़ने के दौरान पश्चिमी जिलों में इसका असर बना रह सकता है।

    हालांकि 15 सितंबर के बाद प्रदेश में बारिश की तीव्रता और इसका प्रसार धीरे-धीरे कम होने की संभावना है। अगले सात दिनों के पूर्वानुमान में पश्चिमी मध्य प्रदेश में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश का दौर जारी रहने की संभावना जताई गई है।

    32 जिलों में 2% से 52% तक बारिश कम

    प्रदेश के पूर्वी हिस्से में जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश का आंकड़ा 1% तक कम है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 2% से 25% तक कम बारिश दर्ज हुई है।

    पिछले एक सप्ताह में पूर्वी मध्य प्रदेश की स्थिति में काफी सुधार हुआ है। कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बनने से बारिश का आंकड़ा तेजी से सुधरा था। इसके चलते सीजन में पहली बार पूर्वी हिस्से की स्थिति बेहतर हुई थी, लेकिन रविवार तक यह आंकड़ा फिर 1% कम पर पहुंच गया।

    पश्चिमी हिस्से में आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, खंडवा, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 7% से 52% तक कम बारिश हुई है।

    इन 23 जिलों में सामान्य से ज्यादा पानी

    IMD के आंकड़ों के अनुसार अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।