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  • खरगोन, बुरहानपुर, खंडवा में रिकॉर्ड बारिश, गांवों में जलभराव, SDRF ने 10 घंटे चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन

    खरगोन, बुरहानपुर, खंडवा में रिकॉर्ड बारिश, गांवों में जलभराव, SDRF ने 10 घंटे चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर पूरी ताकत के साथ सक्रिय हो गया है। पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कई जिलों में भारी से अति भारी बारिश दर्ज की गई, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। सबसे ज्यादा बारिश खरगोन जिले के गोगावां में 7.6 इंच रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा बुरहानपुर शहर में 7 इंच और बैतूल के भीमपुर में 6.6 इंच बारिश हुई। लगातार हो रही बारिश से कई नदियां और नाले उफान पर हैं, जबकि घरों, खेतों और सड़कों पर पानी भरने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

    मौसम विभाग के अनुसार बड़वानी के वरला, आलीराजपुर के उदयगढ़ और बुरहानपुर के खकनार में 5.3 इंच, खंडवा शहर में 5.1 इंच तथा खरगोन के बड़वाह में 4.4 इंच बारिश दर्ज की गई। वहीं झाबुआ के रानापुर में 4 इंच, खरगोन के सेगांव में 4.3 इंच और खरगोन शहर में 4.2 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई। प्रदेश के 33 शहरों और कस्बों में भारी से अति भारी वर्षा दर्ज होने से कई इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई।

    बड़वानी जिले के सेंधवा ब्लॉक में 24 घंटे के दौरान साढ़े चार इंच से अधिक बारिश हुई। तेज बारिश के कारण नदी-नाले उफान पर आ गए और धनोरा गांव में नाले का पानी 10 से 15 घरों में घुस गया। कई मकानों में करीब दो फीट तक पानी भर गया, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। लगातार बारिश के कारण खेतों में खड़ी मक्का की फसल भी गिर गई। सेंधवा ब्लॉक का सबसे बड़ा तालाब ओवरफ्लो हो गया, जबकि वरला और बलवाड़ी क्षेत्र में भी जलभराव की स्थिति बनी रही।

    खंडवा जिले में भी लगातार बारिश से हालात गंभीर बने रहे। यहां 24 घंटे के दौरान 128 मिलीमीटर यानी पांच इंच से अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में जलभराव के साथ कपास और मक्का की फसलों को नुकसान पहुंचा है। आबना और सुक्ता नदी में तेज बहाव के कारण हांड़ी-कुंडी गांव के पास बने टापू पर चार लोग फंस गए। सूचना मिलने पर खंडवा और इंदौर की एसडीआरएफ टीम ने करीब साढ़े दस घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर चारों लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। रेस्क्यू के दौरान ड्रोन के माध्यम से फंसे लोगों तक लाइफ जैकेट भी पहुंचाई गई।

    लगातार बारिश के चलते कई जिलों में निचले इलाकों में जलभराव, ग्रामीण सड़कों पर पानी भरने और खेतों में फसल नुकसान की खबरें सामने आई हैं। प्रशासन संवेदनशील क्षेत्रों पर लगातार नजर बनाए हुए है और लोगों से नदी-नालों के आसपास नहीं जाने तथा मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करने की अपील की गई है।

    मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है। ऐसे में प्रशासन ने जिलों को सतर्क रहने और आपदा प्रबंधन दलों को तैयार रखने के निर्देश दिए हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

  • एमपी सरकार का बड़ा फैसला, बिल्डिंग परमिशन के लिए विभागों के चक्कर खत्म, डिजिटल सिस्टम लागू

    एमपी सरकार का बड़ा फैसला, बिल्डिंग परमिशन के लिए विभागों के चक्कर खत्म, डिजिटल सिस्टम लागू


    भोपाल । मध्य प्रदेश सरकार ने शहरी क्षेत्रों में भवन निर्माण की अनुमति प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब घर, व्यावसायिक भवन या अन्य निर्माण कार्यों के लिए बिल्डिंग परमिशन लेते समय लोगों को कई विभागों से अलग-अलग अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लाने की बाध्यता नहीं रहेगी। सरकार ने पूरी प्रक्रिया को डिजिटल माध्यम से संचालित करने का निर्णय लिया है, जिससे आवेदन से लेकर अनुमति जारी होने तक सभी चरण ऑनलाइन पूरे होंगे और केवल डिजिटल दस्तावेज ही स्वीकार किए जाएंगे।

    नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने इस संबंध में प्रदेश के सभी नगरीय निकायों को विस्तृत निर्देश जारी कर दिए हैं। विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे द्वारा जारी आदेश के अनुसार नई व्यवस्था का उद्देश्य आम नागरिकों, निवेशकों, बिल्डर्स और निर्माण एजेंसियों को अनावश्यक औपचारिकताओं और विभागीय चक्करों से राहत देना है।

    नई व्यवस्था के तहत सहकारिता विभाग, गृह निर्माण सहकारी समितियों, नजूल विभाग और बिजली विभाग से विभिन्न प्रकार की एनओसी लेने की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। इसके अलावा रक्षा प्रतिष्ठानों, मध्य प्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल तथा विकास प्राधिकरणों से जुड़े मामलों में भी अब आवेदक को स्वयं एनओसी लाने की जरूरत नहीं होगी।

    यदि किसी मामले में संबंधित विभाग की राय आवश्यक होगी तो भवन अनुमति देने वाला सक्षम प्राधिकारी आवेदन प्राप्त होने के सात दिन के भीतर संबंधित विभाग को प्रकरण भेजेगा। संबंधित विभाग को 21 दिनों के भीतर अपनी आपत्ति या अनापत्ति दर्ज करनी होगी। यदि निर्धारित समय सीमा में कोई जवाब नहीं मिलता है तो भवन अनुमति की प्रक्रिया बिना विलंब आगे बढ़ाई जा सकेगी। इससे फाइलों के लंबित रहने और अनावश्यक देरी पर रोक लगेगी।

    हालांकि सरकार ने कुछ मामलों में एनओसी की अनिवार्यता बरकरार रखी है। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया, राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण और हेरिटेज क्षेत्रों से जुड़े मामलों में एनओसी केवल तभी आवश्यक होगी जब ऑनलाइन जीआईएस आधारित जांच में संबंधित भूखंड प्रतिबंधित या संवेदनशील क्षेत्र में पाया जाएगा। सामान्य मामलों में इन विभागों से अलग से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी।

    सरकार ने पर्यावरण और अग्निशमन संबंधी नियमों को भी स्पष्ट किया है। केवल निर्धारित सीमा से बड़े भवनों और परियोजनाओं के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति आवश्यक होगी। इसी तरह वृक्ष कटाई की अनुमति भी केवल उन्हीं मामलों में ली जाएगी जहां वास्तव में पेड़ों को हटाने की आवश्यकता होगी। अग्निशमन विभाग की अनापत्ति राष्ट्रीय भवन संहिता के निर्धारित प्रावधानों के अनुसार लागू रहेगी।

    राज्य सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था से भवन निर्माण अनुमति प्रक्रिया तेज होगी, पारदर्शिता बढ़ेगी और नागरिकों को सरकारी कार्यालयों के बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। डिजिटल प्रक्रिया लागू होने से दस्तावेजों की जांच, स्वीकृति और रिकॉर्ड प्रबंधन भी अधिक प्रभावी होगा। इससे निवेश को बढ़ावा मिलने के साथ शहरी विकास परियोजनाओं में भी तेजी आने की उम्मीद है।

  • कोबरा से सामना, वोट का खुलासा और भ्रष्टाचार पर हमला, मध्य प्रदेश की राजनीति में दिनभर रही हलचल

    कोबरा से सामना, वोट का खुलासा और भ्रष्टाचार पर हमला, मध्य प्रदेश की राजनीति में दिनभर रही हलचल


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजनीति में शुक्रवार को कई ऐसे घटनाक्रम सामने आए, जिन्होंने राजनीतिक गलियारों से लेकर प्रशासनिक महकमे तक चर्चा का माहौल बना दिया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने छात्र जीवन का एक रोमांचक अनुभव साझा किया, जिसमें उनके हाथ पर जहरीला कोबरा लिपट गया था। दूसरी ओर दतिया उपचुनाव में मतदान करने के बाद पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने खुले तौर पर बताया कि उन्होंने भाजपा और पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में मतदान किया। वहीं गुना से भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य ने सार्वजनिक मंच से खनिज विभाग पर भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के आरोप लगाकर अपनी ही सरकार के अधिकारियों पर सवाल खड़े कर दिए।

    उज्जैन में बन रहे स्नेक पार्क के निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने कॉलेज जीवन का एक दिलचस्प किस्सा सुनाया। उन्होंने बताया कि विज्ञान महाविद्यालय में पढ़ाई के दौरान उन्होंने जादू की कुछ ट्रिक्स सीखी थीं। गणेश उत्सव के एक कार्यक्रम में प्रदर्शन के लिए वे एक सांप लेकर पहुंचे और उससे जादू का खेल दिखाया। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद दोस्तों के कहने पर जब उन्होंने सांप को बाहर निकाला तो वह अचानक सक्रिय हो गया। मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने सांप को मजबूती से पकड़ लिया, लेकिन वह उनके हाथ पर लिपट गया और दूसरे हाथ पर काटने की कोशिश करने लगा। बाद में जब वे सांप को वापस छोड़ने पहुंचे तो पता चला कि वह साधारण सांप नहीं बल्कि जहरीला कोबरा था और उसके विषैले दांत भी सुरक्षित थे। यह सुनकर वे भी हैरान रह गए। मुख्यमंत्री का यह अनुभव सुनकर कार्यक्रम में मौजूद लोग भी आश्चर्यचकित रह गए।

    उधर दतिया विधानसभा उपचुनाव में मतदान के बाद भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने कमल के फूल के निशान पर वोट दिया है और भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के पक्ष में मतदान किया है। उनके इस बयान की राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा रही। नरोत्तम मिश्रा ने भाजपा की जीत का दावा भी किया। दूसरी ओर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी अपनी पार्टी की जीत का भरोसा जताते हुए कहा कि कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह बड़ी बढ़त से चुनाव जीतेंगे। अब सभी की निगाहें मतगणना पर टिकी हैं।

    गुना में उद्योग विभाग के एक कार्यक्रम के दौरान भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य ने खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि वैध रसीद होने के बावजूद रेत लेकर जा रहे व्यक्ति पर जुर्माना लगाने का प्रयास किया गया। विधायक ने कहा कि कार्रवाई असली दोषियों पर होने के बजाय आम लोगों को परेशान किया जा रहा है। उन्होंने मंच से ही विभागीय अधिकारियों पर अवैध वसूली के आरोप लगाए और कहा कि इस संबंध में अधिकारियों से बात करने की कोशिश भी की, लेकिन उनकी बात तक नहीं सुनी गई। भाजपा विधायक के इन आरोपों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

    इसी बीच दतिया उपचुनाव से जुड़ा एक दिलचस्प घटनाक्रम भी सामने आया। चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं की एक टीम वोट मांगने के लिए ऐसे गांव पहुंच गई, जो दतिया विधानसभा क्षेत्र में आता ही नहीं था। जब कार्यकर्ताओं ने ग्रामीणों से भाजपा के पक्ष में मतदान की अपील की तो लोगों ने बताया कि वे इस उपचुनाव के मतदाता ही नहीं हैं क्योंकि उनका गांव भांडेर विधानसभा क्षेत्र में आता है। यह सुनकर कार्यकर्ता असहज हो गए और उन्हें वहां से लौटना पड़ा।

    एक ही दिन में सामने आए इन घटनाक्रमों ने मध्य प्रदेश की राजनीति में अलग-अलग कारणों से हलचल पैदा कर दी। मुख्यमंत्री का रोचक अनुभव, चुनावी बयानबाजी, सरकारी विभागों पर भ्रष्टाचार के आरोप और चुनाव प्रचार की चूक—इन सभी ने राजनीतिक चर्चा को नया विषय दे दिया।

  • एमपी में 3 मानसूनी सिस्टम का असर, इंदौर-उज्जैन संभाग में 48 घंटे भारी बारिश की चेतावनी, आज 12 जिलों में अलर्ट

    एमपी में 3 मानसूनी सिस्टम का असर, इंदौर-उज्जैन संभाग में 48 घंटे भारी बारिश की चेतावनी, आज 12 जिलों में अलर्ट


    भोपाल। मध्य प्रदेश में तीन मजबूत मानसूनी सिस्टम सक्रिय होने से मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली है। मौसम विभाग ने प्रदेश के पश्चिमी हिस्से, खासकर मालवा-निमाड़ क्षेत्र में अगले 48 घंटे तक भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। शुक्रवार को 12 जिलों में भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट है, जबकि भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर समेत कई शहरों में भी बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है।

    इन जिलों में भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट
    मौसम केंद्र के अनुसार, रतलाम, झाबुआ, अलीराजपुर और धार में अति भारी बारिश होने की संभावना है। वहीं नीमच, आगर-मालवा, उज्जैन, देवास, बड़वानी, खरगोन, बुरहानपुर और छिंदवाड़ा में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

    इसके अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, खंडवा, मंदसौर, शाजापुर, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में भी गरज-चमक के साथ बारिश होने का अनुमान है।

    कई जिलों में गुरुवार को भी झमाझम बारिश
    गुरुवार को भोपाल, उज्जैन, रतलाम, हरदा और खरगोन सहित कई जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। लगातार हो रही वर्षा के चलते सारणी स्थित सतपुड़ा बांध के सात गेट इस मानसून सीजन में पहली बार खोले गए।

    अब भी सामान्य से 15% कम बारिश
    मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में अब तक औसतन 14.7 इंच (373.3 मिमी) वर्षा दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि तक 17.2 इंच (438.3 मिमी) बारिश होनी चाहिए थी। यानी प्रदेश में अब भी करीब 15 प्रतिशत वर्षा की कमी बनी हुई है।

    राज्य के 47 जिलों में सामान्य से कम बारिश रिकॉर्ड की गई है, जबकि भोपाल, भिंड, बुरहानपुर, देवास, इंदौर, मंदसौर, राजगढ़ और सीहोर ऐसे जिले हैं, जहां औसत से अधिक वर्षा हो चुकी है। इनमें देवास सबसे आगे है, जहां अब तक 29 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई है।

  • सरकारी शिक्षक चला रहे निजी कोचिंग? छात्रों पर दबाव के आरोप, जांच के आदेश के साथ विभाग ने दी कार्रवाई की चेतावनी

    सरकारी शिक्षक चला रहे निजी कोचिंग? छात्रों पर दबाव के आरोप, जांच के आदेश के साथ विभाग ने दी कार्रवाई की चेतावनी


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले में सरकारी स्कूलों के शिक्षकों पर निजी कोचिंग संचालित करने और छात्रों को कोचिंग लेने के लिए कथित रूप से दबाव बनाने के आरोपों ने शिक्षा विभाग में हलचल मचा दी है। क्षत्रिय फ्रीडम फाइटर ह्यूमन राइट्स एसोसिएशन के नीरज वर्मा ने कलेक्टर को शिकायत सौंपते हुए 11 सरकारी शिक्षकों पर मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियमों का उल्लंघन करने और विद्यार्थियों के आर्थिक एवं मानसिक शोषण के गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत सामने आने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) ने पूरे जिले में सख्त निर्देश जारी कर दिए हैं।

    शिकायत में कहा गया है कि शहर के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों और सीएम राइज स्कूलों में पदस्थ कुछ शिक्षक नियमित शिक्षण कार्य के साथ निजी कोचिंग सेंटर भी संचालित कर रहे हैं। शिकायत में एल.डी. शर्मा, प्रदीप झा, कल्पना धाकड़, केशव शर्मा, देवेंद्र धाकड़, मनीष शर्मा, कृष्णकांत राठौर, विपिन पचौरी, गोविंद धाकड़, दीप ओझा और ददीवाल सर के नाम शामिल किए गए हैं।

    शिकायतकर्ता नीरज वर्मा का आरोप है कि संबंधित शिक्षक विद्यालय में पूरा पाठ्यक्रम नहीं पढ़ाते, जिससे छात्र निजी कोचिंग लेने के लिए मजबूर हो जाते हैं। शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि जो छात्र कोचिंग में प्रवेश नहीं लेते या फीस जमा नहीं करते, उन्हें प्रैक्टिकल परीक्षा में कम अंक देने और वार्षिक परीक्षा में असफल करने की धमकी दी जाती है। वर्मा का कहना है कि उनके पास इन आरोपों से जुड़े वीडियो और अन्य साक्ष्य भी मौजूद हैं, जिन्हें जांच के दौरान प्रस्तुत किया जाएगा।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी आकाश सिंह यादव ने जिले के सभी विकासखंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ), बीआरसीसी और संकुल प्राचार्यों को निर्देश जारी किए हैं। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के तहत कोई भी शासकीय शिक्षक नियमों के विरुद्ध निजी ट्यूशन या अन्य व्यावसायिक गतिविधि में शामिल नहीं हो सकता।

    डीईओ ने निर्देश दिए हैं कि यदि कोई शिक्षक निजी कोचिंग संचालित करते हुए या किसी प्रतिबंधित व्यावसायिक गतिविधि में संलिप्त पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सेवा नियमों के अनुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही सभी अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और शिकायत मिलने पर तत्काल जांच कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है।

    हालांकि फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। शिक्षा विभाग का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित शिक्षकों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

  • मूंग खरीदी पर सियासत और सिस्टम दोनों सवालों के घेरे में सरकार को हजारों करोड़ की चपत किसानों की मांग अब भी अधूरी

    मूंग खरीदी पर सियासत और सिस्टम दोनों सवालों के घेरे में सरकार को हजारों करोड़ की चपत किसानों की मांग अब भी अधूरी


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में मूंग खरीदी को लेकर किसानों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रदेश के कई जिलों से किसान समर्थन मूल्य पर पूरी मूंग खरीदे जाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। नर्मदापुरम के सेठानी घाट से बड़ी संख्या में किसान पैदल मार्च करते हुए भोपाल पहुंचे और मुख्यमंत्री निवास तक अपनी आवाज पहुंचाई। किसानों का कहना है कि उनकी पूरी उपज की सरकारी खरीदी सुनिश्चित की जाए ताकि उन्हें बाजार में कम कीमत पर फसल बेचने के लिए मजबूर न होना पड़े।

    किसानों के बढ़ते दबाव के बीच राज्य सरकार ने मूंग खरीदी का दायरा बढ़ाने की बात कही लेकिन इसके साथ ही एक बड़ा आर्थिक तथ्य भी सामने आया है। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार पिछले तीन वर्षों में लक्ष्य से अधिक मूंग खरीदी के कारण सरकार को लगभग 3346 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। यानी हर वर्ष औसतन 1115 करोड़ रुपए का अतिरिक्त वित्तीय बोझ राज्य सरकार पर पड़ा है। इस नुकसान में खरीदी परिवहन भंडारण और बाद में बाजार में बिक्री के दौरान होने वाला घाटा शामिल है।

    मध्य प्रदेश सरकार का कहना है कि वह केंद्र सरकार द्वारा तय किए गए खरीदी कोटे से अधिक मात्रा में मूंग खरीदती रही है जिससे आर्थिक दबाव लगातार बढ़ा है। इसी कारण राज्य सरकार ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को कई बार पत्र लिखकर प्रदेश के लिए खरीदी का कोटा 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत करने की मांग की है। सरकार का तर्क है कि जिन राज्यों में मूंग की सरकारी खरीदी बहुत कम होती है वहां का अप्रयुक्त कोटा मध्य प्रदेश को दिया जाना चाहिए ताकि किसानों को राहत मिल सके और कुल राष्ट्रीय सीमा भी प्रभावित न हो।

    हालांकि केंद्र सरकार ने अपने जवाब में स्पष्ट किया कि मध्य प्रदेश को पहले से मिले कोटे का भी पूरा उपयोग नहीं हो पाया है। केंद्र के अनुसार 16 जुलाई तक निर्धारित कोटे का केवल दो प्रतिशत ही खरीदा गया था। ऐसे में पहले उपलब्ध लक्ष्य के अनुरूप खरीदी पूरी करने के बाद ही अतिरिक्त कोटे पर विचार किया जा सकता है। इसी मुद्दे को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच लगातार पत्राचार जारी है।

    आंकड़ों पर नजर डालें तो मध्य प्रदेश देश का सबसे बड़ा मूंग खरीदी करने वाला राज्य है। वर्ष 2023-24 में प्रदेश के लिए 2.76 लाख मीट्रिक टन खरीदी की स्वीकृति मिली और पूरी मात्रा खरीदी गई। वर्ष 2024-25 में 3.31 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य के मुकाबले 2.90 लाख मीट्रिक टन खरीदी हुई जबकि वर्ष 2025-26 में 3.51 लाख मीट्रिक टन की स्वीकृति के बावजूद 4.20 लाख मीट्रिक टन मूंग खरीदी गई जो निर्धारित लक्ष्य से काफी अधिक रही।

    दूसरी ओर राजस्थान महाराष्ट्र कर्नाटक हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में स्वीकृति मिलने के बावजूद वास्तविक खरीदी काफी कम रही। कई राज्यों में उत्पादन की तुलना में सरकारी खरीदी तीन प्रतिशत से भी कम रही जबकि मध्य प्रदेश में हर वर्ष कुल उत्पादन का लगभग 20 से 22 प्रतिशत हिस्सा समर्थन मूल्य पर खरीदा जाता है। यही वजह है कि प्रदेश पर अतिरिक्त आर्थिक भार भी अधिक पड़ रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर खरीदी नीति में संतुलित बदलाव करें तथा वास्तविक उत्पादन के आधार पर कोटा तय किया जाए तो किसानों को भी राहत मिलेगी और सरकार पर अनावश्यक वित्तीय बोझ भी कम होगा। फिलहाल मूंग खरीदी का मुद्दा किसानों सरकार और केंद्र के बीच सबसे बड़ी कृषि चुनौती बनकर सामने आया है।

  • एमपी में मानसून ने पकड़ी रफ्तार, 3 मजबूत सिस्टम एक्टिव, 17 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

    एमपी में मानसून ने पकड़ी रफ्तार, 3 मजबूत सिस्टम एक्टिव, 17 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून फिर से पूरी तरह सक्रिय हो गया है। प्रदेश के ऊपर मानसून ट्रफ, साइक्लोनिक सर्कुलेशन और शियर जोन जैसे तीन मजबूत मौसम सिस्टम सक्रिय हैं। इनके प्रभाव से अगले चार दिनों तक विशेष रूप से मालवा-निमाड़ क्षेत्र सहित कई जिलों में भारी से अति भारी बारिश होने की संभावना है।

    मौसम विभाग ने गुरुवार के लिए उज्जैन और सागर संभाग समेत 17 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। कुछ इलाकों में अगले 24 घंटे के दौरान 4 इंच या उससे अधिक वर्षा होने की संभावना जताई गई है।

    5 जिलों में अति भारी बारिश की चेतावनी
    आईएमडी भोपाल के अनुसार धार, देवास, बुरहानपुर, हरदा और नर्मदापुरम जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जहां अति भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा उज्जैन, शाजापुर, सीहोर, बड़वानी, खरगोन, खंडवा, रायसेन, सागर, बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा और सिवनी में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा, सतना सहित प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश होने का अनुमान है।

    2 अगस्त तक बना रहेगा असर
    मौसम विभाग का कहना है कि वर्तमान मानसूनी सिस्टम 2 अगस्त तक सक्रिय रहेंगे। इस दौरान कई जिलों में लगातार तेज बारिश और कुछ स्थानों पर अति भारी वर्षा हो सकती है। बुधवार को रतलाम, बालाघाट, पचमढ़ी और भोपाल समेत कई क्षेत्रों में अच्छी बारिश दर्ज की गई।

    अब भी सामान्य से 16% कम बारिश
    बारिश का दौर तेज होने के बावजूद प्रदेश में अब तक सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है। मौसम विभाग के मुताबिक, मध्य प्रदेश में अब तक औसतन 14.1 इंच (359.3 मिमी) बारिश हुई है, जबकि इस समय तक 16.9 इंच (428.9 मिमी) वर्षा होनी चाहिए थी। यानी प्रदेश में फिलहाल करीब 16 प्रतिशत वर्षा की कमी बनी हुई है। क्षेत्रवार आंकड़ों के अनुसार, पूर्वी मध्य प्रदेश में 15 प्रतिशत और पश्चिमी मध्य प्रदेश में 17 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। हालांकि, अगले कुछ दिनों तक जारी रहने वाले तेज बारिश के दौर से इस कमी में सुधार होने की उम्मीद जताई जा रही है।

  • गुरूकुल परम्परा और नवीन तकनीक से गढ़ेंगे भविष्य का मध्य प्रदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    गुरूकुल परम्परा और नवीन तकनीक से गढ़ेंगे भविष्य का मध्य प्रदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी शक्ति इसकी गुरू परम्परा है। जब गुरूकुल के संस्कार आधुनिक विज्ञान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की अतिरिक्त क्षमता से जुड़ेंगे, तब हमारी ऐसी पीढ़ी तैयार होगी, जो ज्ञान में श्रेष्ठ, चरित्र में उत्कृष्ट और राष्ट्र निर्माण के प्रति एकनिष्ठ होगी। यही विकसित मध्य प्रदेश और विकसित भारत की सबसे बड़ी नींव है। विकसित भारत का सपना आधुनिक शिक्षा और अत्याधुनिक कक्षाओं से ही पूरा होगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार देर शाम ‘गुरु पूर्णिमा महोत्सव’ के अवसर पर उज्जैन के माधव विज्ञान महाविद्यालय में आयोजित ‘महर्षि सांदीपनि गुरू पर्व’ समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सांदीपनि विद्यालय हमारी पुरातन गुरूकुल शिक्षा पद्धति का नूतन एवं आधुनिक स्वरूप है। इन विद्यालयों के माध्यम से एक बेहतर कल की ओर बढ़ रहे हैं। इन विद्यालयों से हम अपने लाखों विद्यार्थियों का एक सुनहरा भविष्य गढ़ रहे हैं। उन्होंने शिक्षा, संस्कार, तकनीक और सांस्कृति चेतना के अद्भुत समन्वय का संदेश देकर कहा कि मध्यप्रदेश में विकसित हो रहे सांदीपनि विद्यालय भविष्य के भारत के निर्माण की आधारशिला सिद्ध होंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस मौके पर उज्जैन जिले के लिए कुल 587.23 करोड़ रुपये की लागत के विभिन्न श्रेणी के 9 बड़े विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन किया। उन्होंने बीते तीन वर्ष तक बोर्ड परीक्षाओं में लगातार शत-प्रतिशत परीक्षा परिणाम देने वाले 6 प्राचार्यों को सांदीपनि अलंकरण से सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने स्कूल शिक्षा विभाग में नव नियुक्त 7500 प्राथमिक शाला शिक्षकों में से 10 शिक्षकों को प्रतीकात्मक रूप से नियुक्ति पत्र प्रदान किए।

    मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर केंद्रित ‘मिशन बुनियाद’ का शुभारंभ किया। यह मिशन प्रदेश के 8 जिलों के 500 शासकीय स्कूलों में चलाया जाएगा। इसमें कक्षा में 9 से 12 तक के विद्यार्थियों को एआई से पर्सनली पढ़ाया जाएगा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ‘सर्वांग’ एवं ‘श्रीकृष्ण विद्यांजलि’ नामक दो पुस्तिकाओं का विमोचन किया। उन्होंने नेशनल मीन्स कम मेरिट में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों का भी सम्मान किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में मध्य प्रदेश सरकार ने प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में भव्य गीता भवन बनाने का संकल्प लिया है। आज उज्जैन में गीता भवन का लोकार्पण नागरिकों के लिए कई प्रकार से सुविधाएं उपलब्ध कराएगा। यह शिक्षा विभाग का गीता भवन है। नगर निगम और उज्जैन विकास प्राधिकरण के भी अलग-अलग गीता भवन बनाए जाएंगे। सिंहस्थ: 2028 की तैयारियों के साथ ही इंदौर-उज्जैन मेट्रोपोलिटन सिटी के विकास कार्य भी निरंतर जारी हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने सभी विभागों में नई भर्तियों की शुरुआत की है। विगत दो साल में पुलिस विभाग में 18 हजार से अधिक पदों पर भर्ती करने का निर्णय लिया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि स्कूल शिक्षा विभाग में 10 हजार शिक्षकों की भर्ती का काम पूरा हुआ है। आज 3 संभागों के लगभग 1000 शिक्षकों को नियुक्ति पत्र मिले हैं। उन्होंने कहा कि ये शिक्षक महर्षि सांदीपनि के वंशज के रूप में जाने जाएंगे। शिक्षक भगवान श्रीकृष्ण-सुदामा की मित्रता के भाव से बच्चों को शिक्षित करेंगे।

    उन्होंने कहा कि आज शासकीय विद्यालयों के ऐसे प्राचार्यों को, जिन्होंने 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा में तीन साल तक शत-प्रतिशत परीक्षा परिणाम दिया है, उन्हें सम्मानित किया गया है। प्रदेश के ऐसे सभी स्कूलों के प्राचार्यों को एक लाख रुपये की सम्मान राशि और प्राध्यापकों के साथ स्कूल में विकास कार्यों के लिए 5 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इससे स्कूल शिक्षा में और बेहतरी का एक सकारात्मक संदेश जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में जबलपुर में एकमात्र मेडिकल यूनिवर्सिटी है। दूसरी की महती आवश्यकता महसूस हो रही है। इसलिए अब उज्जैन में ही नवीन धनवन्तरी चिकित्सा विश्वविद्यालय की स्थापना की जा रही है। प्रदेश सरकार स्कूल से लेकर विदेशों में पढ़ाई तक हर स्तर पर सहायता करने के लिए तैयार है। मध्य प्रदेश, पूरे देश का इकलौता राज्य है, जो 75 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को डॉक्टर बनाने के लिए उनकी फीस के रूप में 70 से 80 लाख रुपये तक खर्च कर रहा है। स्कूल शिक्षा विभाग ने बच्चों की पढ़ाई के लिए एआई आधारित मिशन बुनियाद अंतर्गत नई शिक्षा योजना की शुरुआत कर दी है। यह प्रदेश की शिक्षा पद्धति में एक नये युग के आरंभ जैसा है।

    उन्होंने कहा कि ‘गुरु पूर्णिमा महोत्सव’ के अवसर पर प्रदेशभर में 60 नए सांदीपनि विद्यालयों की सौगात मिली है। इनमें 39 स्कूल शिक्षा विभाग और 21 जनजातीय कार्य विभाग के हैं। हमारे सर्वसुविधायुक्त सांदीपनि विद्यालय भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का स्मरण कराते हैं। पहले और दूसरे चरण में सांदीपनि विद्यालयों के निर्माण पर हमारी सरकार करीब 25 हजार 500 करोड़ रुपये खर्च करने जा रही है। उन्होंने कहा कि अच्छे कार्यों के लिए हमारे पास धन की कोई कमी नहीं है। अब निजी स्कूलों के विद्यार्थी भी बड़े पैमाने पर हमारे सांदीपनि विद्यालयों में प्रवेश ले रहे हैं, लेकिन पहले सरकारी स्कूलों में कक्षा पहली से आठवीं तक पढ़ चुके विद्यार्थियों को मौका दिया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि अवन्तिका नगरी (उज्जैन) दुनिया की 7 पवित्र नगरियों में से एक है, जहां बाबा महाकाल विराजे हैं। जन्म-मृत्यु सब बाबा महाकाल के हाथों में है। उज्जैन ज्ञान-विज्ञान और इतिहास की धरती है।

    उन्होंने गुरू की महत्ता बताते हुए कहा कि माता-पिता प्रथम गुरू होते है। जीवन में माता-पिता से हम कभी भी ऊऋण नहीं हो सकते हैं। गुरु की महिमा ऐसी है कि उसे भगवान से भी श्रेष्ठ माना गया है। लेकिन सांदीपनि गुरु ने अपने परम शिष्य (भगवान श्रीकृष्ण) को जगतगुरू के रूप में देखा। उज्जैन के सांदीपनि आश्रम में ही भगवान श्रीकृष्ण को पुस्तकीय ज्ञान से कहीं अधिक यथार्थ कर्मवाद की शिक्षा मिली।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा ज्ञान कदम-कदम पर अपनी परीक्षा मांगता है। भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से सदैव मनुष्यों को आगे बढ़ने और हिम्मत से काम करने की प्रेरणा देता है। पवित्र ग्रंथ श्रीमद्भगवत्गीता के 18वें अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण ने मानव जीवन के रहस्य, प्रकृति प्रेम और योग के महत्व का विस्तार से वर्णन किया है।

  • भोपाल में तीसरे दिन गरमाया किसान आंदोलन: पुलिस से टकराव, बैरिकेडिंग पर चढ़े प्रदर्शनकारी, सरकार और विपक्ष आमने-सामने

    भोपाल में तीसरे दिन गरमाया किसान आंदोलन: पुलिस से टकराव, बैरिकेडिंग पर चढ़े प्रदर्शनकारी, सरकार और विपक्ष आमने-सामने


    भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में किसानों का आंदोलन लगातार तीसरे दिन भी तेज बना रहा। मूंग की सरकारी खरीदी, ई-टोकन व्यवस्था में सुधार, न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी और अन्य मांगों को लेकर बड़ी संख्या में किसान मुख्यमंत्री निवास की ओर बढ़ने के लिए जुटे। हालांकि पुलिस ने एम्प्री के पास वीर सावरकर सेतु पर भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच उन्हें रोक दिया। प्रशासन ने बसों की चार परतों वाली बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों का रास्ता बंद कर दिया, लेकिन कुछ किसान बैरिकेड पर चढ़ गए और बाद में बसों पर भी चढ़कर विरोध जताया। पुलिस ने समझाइश देकर उन्हें नीचे उतारा जिसके बाद किसान वहीं धरने पर बैठ गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते रहे।

    प्रदर्शन के दौरान कई किसानों ने अर्धनग्न होकर विरोध दर्ज कराया और अपनी मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाया। कुछ प्रदर्शनकारी सड़क पर लेट गए तो कई किसानों ने सरकार की सद्बुद्धि के लिए हवन और यज्ञ किया। आंदोलन स्थल पर किसानों ने सड़क किनारे ही दाल-बाटी बनाकर भोजन किया। रातभर आंदोलन में डटे रहने के बाद कई किसान वहीं खुले आसमान के नीचे आराम करते भी नजर आए। आंदोलन में युवाओं की भागीदारी भी देखने को मिली और बड़ी संख्या में Gen Z युवाओं ने किसानों के समर्थन में प्रदर्शन में हिस्सा लिया।

    किसानों का कहना है कि लगातार बढ़ती लागत और महंगाई के बावजूद उन्हें उनकी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। उनका आरोप है कि मूंग खरीदी की मौजूदा व्यवस्था और ई-टोकन प्रणाली के कारण बड़ी संख्या में किसान अपनी उपज बेचने से वंचित रह जाते हैं। प्रदर्शनकारी सरकार से इन समस्याओं का स्थायी समाधान और एमएसपी की कानूनी गारंटी की मांग कर रहे हैं।

    आंदोलन को देखते हुए प्रशासन ने राजधानी के कई प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग कर यातायात रोक दिया। इसका असर होशंगाबाद रोड, नर्मदापुरम रोड और आसपास के इलाकों में देखने को मिला जहां लंबा ट्रैफिक जाम लग गया और आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थिति को देखते हुए भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने नर्मदापुरम रोड स्थित सभी सरकारी और निजी स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया ताकि विद्यार्थियों और अभिभावकों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

    इस बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए पूरी तरह गंभीर है। उन्होंने बताया कि किसानों से संवाद के लिए मंत्रियों की एक समिति बनाई गई है जो आंदोलनकारियों से बातचीत कर उनकी मांगों पर चर्चा करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार सकारात्मक सुझावों का स्वागत करती है लेकिन यह भी जरूरी है कि आंदोलन के कारण आम जनता को अनावश्यक परेशानी न हो।

    वहीं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि हजारों किसान अपनी जायज मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी बात सुनने के बजाय उन्हें रोकने में लगी हुई है। उन्होंने किसानों की मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की।

    राजधानी में जारी यह आंदोलन अब केवल किसानों की मांगों तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि प्रदेश की राजनीति का भी प्रमुख मुद्दा बन गया है। अब सभी की नजर सरकार और किसान नेताओं के बीच होने वाली संभावित बातचीत पर टिकी है, जिससे इस गतिरोध का समाधान निकलने की उम्मीद की जा रही है।

  • शादी से मना करना पड़ा भारी: दतिया से इंदौर पहुंचा प्रेमी, बैंककर्मी युवती की हत्या कर आग लगाकर हादसा दिखाने की साजिश

    शादी से मना करना पड़ा भारी: दतिया से इंदौर पहुंचा प्रेमी, बैंककर्मी युवती की हत्या कर आग लगाकर हादसा दिखाने की साजिश


    इंदौर । इंदौर में बैंककर्मी युवती की हत्या के मामले में पुलिस ने ऐसा खुलासा किया है जिसने पूरे शहर को झकझोर दिया है। पांच साल पुराने प्रेम संबंध का अंत बेहद दर्दनाक तरीके से हुआ जब शादी से इनकार करने पर प्रेमी ने अपनी ही प्रेमिका की गला घोंटकर हत्या कर दी और बाद में सबूत मिटाने के लिए शव पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। पुलिस ने आरोपी को दतिया से गिरफ्तार कर लिया है और पूछताछ में उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया है।

    मामला इंदौर के खजराना थाना क्षेत्र के तपेश्वरी बाग का है जहां 26 वर्षीय पलक केशव किराए के कमरे में रहती थीं और एक निजी बैंक में कार्यरत थीं। शनिवार रात उनके कमरे से जला हुआ शव बरामद होने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई थी। शुरुआती जांच में घटना को हादसा मानने की आशंका जताई जा रही थी लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने पूरे मामले की दिशा बदल दी। रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि युवती की मौत आग से नहीं बल्कि दम घुटने के कारण हुई थी जिसके बाद पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच तेज कर दी।

    जांच के दौरान पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली और मोबाइल कॉल डिटेल्स का विश्लेषण किया। इससे पता चला कि घटना से एक दिन पहले दतिया निवासी मयंक शाक्य पलक से मिलने उसके कमरे पर आया था। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी को दतिया से हिरासत में लिया और पूछताछ में उसने हत्या की बात स्वीकार कर ली।

    पुलिस के अनुसार मयंक और पलक पिछले करीब पांच वर्षों से एक-दूसरे के संपर्क में थे। दोनों के बीच प्रेम संबंध था और मयंक शादी करना चाहता था लेकिन पलक इसके लिए तैयार नहीं थीं। इसी बात को लेकर दोनों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। घटना वाले दिन भी दोनों के बीच इसी मुद्दे पर कहासुनी हुई जो देखते ही देखते हिंसक रूप ले गई। गुस्से में आरोपी ने पलक का गला घोंट दिया जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

    हत्या के बाद आरोपी ने अपराध को छिपाने की पूरी कोशिश की। उसने कमरे में पेट्रोल छिड़ककर शव को आग लगा दी ताकि मामला दुर्घटना या आग लगने की घटना जैसा दिखाई दे। इतना ही नहीं उसने किचन का गैस बर्नर भी खुला छोड़ दिया जिससे पुलिस को भ्रमित किया जा सके। हालांकि वैज्ञानिक जांच और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने उसकी पूरी साजिश का पर्दाफाश कर दिया।

    जब दो दिन तक कमरे का दरवाजा नहीं खुला और आसपास के लोगों को संदेह हुआ तो उन्होंने दरवाजा तोड़कर अंदर देखा। कमरे के भीतर जला हुआ शव मिलने के बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने सबूत जुटाए और जांच के बाद हत्या की पुष्टि हुई।

    फिलहाल आरोपी को इंदौर लाकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ते हुए यह भी पता लगाने में जुटी है कि हत्या की योजना पहले से बनाई गई थी या विवाद के दौरान अचानक वारदात को अंजाम दिया गया। इस घटना ने एक बार फिर रिश्तों में बढ़ती हिंसा और अस्वीकार किए जाने की मानसिकता से उपजने वाले गंभीर अपराधों को लेकर चिंता बढ़ा दी है।