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  • एमपी के 18 जिलों में आज भारी बारिश का अलर्ट, धार-बड़वानी में रहेगा ज्यादा असर

    एमपी के 18 जिलों में आज भारी बारिश का अलर्ट, धार-बड़वानी में रहेगा ज्यादा असर


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय है। पश्चिमी हिस्से, खासकर इंदौर और उज्जैन संभाग में मानसूनी सिस्टम का असर ज्यादा रहने वाला है। शनिवार को इंदौर, धार, बड़वानी, रतलाम और भोपाल समेत कई जिलों में तेज बारिश हुई। सतना के चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर भी बढ़ गया। मौसम केंद्र (IMD) ने रविवार को 18 जिलों में अति भारी और भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।

    अगले 24 घंटे में धार और बड़वानी में अति भारी बारिश होने की संभावना है। वहीं इंदौर, उज्जैन, खरगोन, बुरहानपुर, खंडवा, देवास, हरदा, सीहोर, नर्मदापुरम, बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, मंदसौर, रतलाम, झाबुआ और आलीराजपुर में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है।

    इसके अलावा भोपाल, रायसेन, राजगढ़, विदिशा, नीमच, आगर-मालवा, शाजापुर, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है।

    बंगाल की खाड़ी का लो प्रेशर सिस्टम सक्रिय

    मौसम विभाग के अनुसार, इस समय बंगाल की खाड़ी की ओर निम्न दाब क्षेत्र (लो प्रेशर एरिया) सक्रिय है। इसके साथ मानसून ट्रफ प्रदेश के दक्षिणी हिस्से से होकर गुजर रही है। दोनों सिस्टम के असर से प्रदेश में अगले दो दिन बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में सिस्टम का प्रभाव ज्यादा रहने के आसार हैं।

    पूर्वी हिस्से में बारिश का आंकड़ा सुधरा

    प्रदेश के पूर्वी हिस्से में जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग की औसत बारिश अब करीब 1% कम है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी में औसत से 2% से 26% तक कम बारिश दर्ज हुई है।

    हालांकि, पिछले एक सप्ताह में पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश के आंकड़े में काफी सुधार हुआ है। इस दौरान कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बने, जिससे सीजन की बारिश का अंतर कम हुआ। आंकड़ों के लिहाज से पहली बार पूर्वी हिस्सा बेहतर स्थिति में पहुंचा था, हालांकि बुधवार तक यहां बारिश का आंकड़ा फिर करीब 1% कम रहा।

    पश्चिमी हिस्से के 22 जिलों में बारिश कम

    पश्चिमी मध्य प्रदेश के आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 1% से 55% तक कम बारिश दर्ज की गई है।

    इन 22 जिलों में औसत से ज्यादा बारिश

    IMD के अनुसार अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में औसत से ज्यादा बारिश दर्ज हुई है।

  • MP के 15 जिलों में आज भारी बारिश की चेतावनी, इंदौर-जबलपुर समेत 4 संभागों में रहेगा असर

    MP के 15 जिलों में आज भारी बारिश की चेतावनी, इंदौर-जबलपुर समेत 4 संभागों में रहेगा असर


    भोपाल। ब्रेक के बाद फिर सक्रिय हुए मानसूनी सिस्टम ने मध्यप्रदेश में बारिश का दौर शुरू कर दिया है। शुक्रवार को भोपाल, दमोह, टीकमगढ़, विदिशा समेत कई जिलों में बारिश हुई। भोपाल में तेज आंधी के साथ हुई बारिश के दौरान विजिबिलिटी 100 मीटर से भी कम रह गई, जिससे यातायात प्रभावित हुआ। वहीं, दमोह के निचले इलाकों में पानी भर गया।

    शनिवार को मौसम विभाग ने प्रदेश के 15 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इनमें उज्जैन, धार, बड़वानी, खरगोन, खंडवा, देवास, हरदा, सागर, रायसेन, नर्मदापुरम, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट और छतरपुर शामिल हैं। मौसम का असर अगले तीन दिन तक बने रहने की संभावना है।

    41 जिलों में हल्की से तेज बारिश के आसार

    मौसम केंद्र के मुताबिक भोपाल, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, आलीराजपुर, बुरहानपुर, झाबुआ, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, रतलाम, बैतूल, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, पन्ना, दमोह, टीकमगढ़ और निवाड़ी में भी कहीं हल्की तो कहीं तेज बारिश हो सकती है।

    3-4 दिन के ब्रेक से बढ़ी गर्मी-उमस

    प्रदेश के कई जिलों में पिछले तीन से चार दिन से बारिश नहीं हुई थी। इसके चलते गर्मी और उमस का असर बढ़ गया था। अब बारिश का दौर शुरू होने से लोगों को गर्मी और उमस से राहत मिलने की उम्मीद है।

    सीजन में अब तक 31.5 इंच बारिश

    मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में इस मानसून सीजन में अब तक 801.3 मिमी यानी 31.5 इंच बारिश दर्ज की जा चुकी है। सामान्य तौर पर इस अवधि में 868.6 मिमी यानी 34.2 इंच बारिश होती है। इस लिहाज से प्रदेश में अब तक सामान्य से 2.7 इंच कम यानी 8% कम बारिश हुई है। पूर्वी मध्यप्रदेश में सामान्य से करीब 1%, जबकि पश्चिमी हिस्से में 14% कम बारिश दर्ज की गई है।

    33 जिलों में 1 से 56% तक बारिश कम

    पूर्वी हिस्से के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश का आंकड़ा सामान्य से करीब 1% कम है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य के मुकाबले 3% से 26% तक कम बारिश हुई है।

    हालांकि, पिछले एक सप्ताह में बारिश के कारण स्थिति में काफी सुधार आया है। इस दौरान पूर्वी हिस्से के कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बने, जिससे बारिश का आंकड़ा सुधरा। सीजन में पहली बार पूर्वी हिस्से का आंकड़ा सामान्य के करीब पहुंचा है।

    वहीं पश्चिमी हिस्से के आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 1% से 56% तक कम बारिश दर्ज हुई है।

    इन 22 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश

    मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में अब तक सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

  • MP में फिर बदला मौसम, 12 जिलों में आज भारी बारिश का अलर्ट, 12 सितंबर से इंदौर संभाग भी भीगेगा

    MP में फिर बदला मौसम, 12 जिलों में आज भारी बारिश का अलर्ट, 12 सितंबर से इंदौर संभाग भी भीगेगा


    भोपाल। तीन दिन के ब्रेक के बाद मध्य प्रदेश में मानसून फिर सक्रिय हो गया है। शुक्रवार को प्रदेश के 12 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इनमें सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, मैहर, शहडोल, डिंडौरी, अनूपपुर, मंडला, बालाघाट, सिवनी और छिंदवाड़ा शामिल हैं। मौसम विभाग के अनुसार, 12 सितंबर से इंदौर, नर्मदापुरम और उज्जैन संभाग में भी बारिश का दौर शुरू हो सकता है।

    शुक्रवार को बाकी जिलों में मौसम मिला-जुला रहेगा। कहीं धूप रहेगी तो कहीं हल्की बारिश हो सकती है। इनमें भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, सिंगरौली, उमरिया, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी शामिल हैं।

    तीन दिन थमी रही बारिश, बढ़ी गर्मी-उमस

    प्रदेश में पिछले तीन दिनों से भारी बारिश नहीं हुई है। बारिश का दौर थमने से गर्मी और उमस का असर बढ़ गया। गुरुवार को भोपाल में तेज धूप रही। इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और जबलपुर में भी दिनभर धूप खिली रही।

    मौसम विभाग के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव का क्षेत्र बना हुआ है और मानसून ट्रफ भी सक्रिय है। इसके अलावा पश्चिमी हिस्से में चक्रवाती परिसंचरण की सक्रियता है। इन मौसमी सिस्टम के असर से प्रदेश में दोबारा बारिश का दौर शुरू होने का अनुमान है।

    सामान्य से 8% कम बारिश

    मध्य प्रदेश में इस मानसून सीजन में अब तक 795.3 मिमी यानी 31.3 इंच बारिश दर्ज की गई है। सामान्य तौर पर इस अवधि तक 862.5 मिमी यानी 33.9 इंच बारिश होनी चाहिए थी। इस हिसाब से प्रदेश में अब तक 2.6 इंच कम बारिश हुई है और कुल बारिश सामान्य से 8% कम है।

    क्षेत्रवार स्थिति देखें तो पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से 2%, जबकि पश्चिमी हिस्से में 13% कम बारिश दर्ज हुई है।

    33 जिलों में बारिश का आंकड़ा पीछे

    पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश सामान्य से करीब 1% तक कम है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 2% से 25% तक कम बारिश हुई है।

    हालांकि, पिछले एक सप्ताह में पूर्वी हिस्से की स्थिति में काफी सुधार हुआ है। इस दौरान कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बने और अच्छी बारिश हुई, जिससे सीजन का आंकड़ा सुधरा। बुधवार तक पूर्वी हिस्से में बारिश सामान्य से सिर्फ 1% कम रह गई थी।

    पश्चिमी हिस्से में आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 1% से 56% तक कम बारिश दर्ज हुई है।

    इन 22 जिलों में सामान्य से ज्यादा पानी

    प्रदेश के कुछ जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से ऊपर है। इनमें अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी शामिल हैं।

  • एमपी में मानसूनी सिस्टम कमजोर, आज पूरे प्रदेश में कोई अलर्ट नहीं, कल हो सकती है तेज बारिश

    एमपी में मानसूनी सिस्टम कमजोर, आज पूरे प्रदेश में कोई अलर्ट नहीं, कल हो सकती है तेज बारिश


    भोपाल। मध्य प्रदेश में फिलहाल मानसून की रफ्तार सुस्त पड़ गई है। बुधवार को सैटेलाइट तस्वीरों में प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों से बादल छंटे नजर आए और कहीं भी तेज बारिश नहीं हुई। मौसम विभाग के अनुसार अगले तीन दिन भी भारी बारिश से राहत रहेगी। IMD भोपाल ने गुरुवार को प्रदेश के किसी भी जिले में तेज बारिश का अलर्ट जारी नहीं किया है। शुक्रवार को उमरिया, मंडला, बालाघाट और डिंडौरी में भारी बारिश की संभावना जताई गई है।

    मौसम विभाग के मुताबिक प्रदेश में इस समय बारिश कराने वाला कोई सक्रिय सिस्टम नहीं है। पश्चिमी क्षेत्र में एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन जरूर बना हुआ है, लेकिन इसका प्रदेश पर खास असर नहीं पड़ रहा है।

    धूप तेज, कुछ जगह हल्की बारिश के आसार

    सिस्टम कमजोर होने के कारण बुधवार को प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में तेज धूप निकली। भोपाल में भी अचानक बदले मौसम के कारण लोगों को गर्मी और उमस का सामना करना पड़ा। गुरुवार को भी मौसम का मिजाज लगभग ऐसा ही रहने का अनुमान है। ज्यादातर स्थानों पर धूप रहेगी, हालांकि कुछ इलाकों में हल्की बारिश हो सकती है।

    13 सितंबर से पश्चिमी एमपी में बढ़ेगा असर

    मौसम विभाग के अनुसार फिलहाल प्रदेश में कोई सक्रिय सिस्टम नहीं है, इसलिए तेज बारिश की संभावना कम है। हालांकि 13 सितंबर से मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है। इस दिन पश्चिमी मध्य प्रदेश के जिलों में तेज बारिश का दौर शुरू होने का अनुमान है।

    पूर्वी हिस्से में बारिश की कमी अब कम हुई

    प्रदेश के पूर्वी हिस्से में बारिश का आंकड़ा पिछले एक सप्ताह में काफी सुधरा है। जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश सामान्य से 1% तक कम है। वहीं बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5% से 25% तक कम बारिश दर्ज की गई है।

    पिछले एक सप्ताह के दौरान पूर्वी हिस्से के कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बने रहे। इससे बारिश के आंकड़ों में सुधार आया और सीजन में पहली बार पूर्वी क्षेत्र की स्थिति बेहतर हुई। हालांकि बुधवार तक यहां बारिश सामान्य से करीब 1% कम रही।

    पश्चिमी एमपी के 21 जिलों में बारिश कम

    पश्चिमी मध्य प्रदेश के आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 7% से 55% तक कम बारिश दर्ज की गई है। कॉपी में खंडवा का नाम दो बार दर्ज है।

    इन जिलों में औसत से ज्यादा बारिश

    IMD के अनुसार अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में औसत से अधिक बारिश दर्ज की गई है।

  • MP में मानसून का ब्रेक, 3 दिन तेज बारिश नहीं, 12 से फिर सक्रिय होगा नया सिस्‍टम

    MP में मानसून का ब्रेक, 3 दिन तेज बारिश नहीं, 12 से फिर सक्रिय होगा नया सिस्‍टम


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की गतिविधियां फिलहाल कमजोर पड़ गई हैं। मौसम केंद्र भोपाल के मुताबिक 9 से 11 सितंबर तक प्रदेश में कहीं भी अति भारी या भारी बारिश का अनुमान नहीं है। इन तीन दिनों में कुछ इलाकों में हल्की बारिश हो सकती है। स्थानीय सिस्टम सक्रिय होने और पर्याप्त नमी मिलने पर कुछ जिलों में तेज बारिश की स्थिति बन सकती है।

    मौसम विभाग के मुताबिक 11 सितंबर को पश्चिम-मध्य और उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में लो प्रेशर एरिया यानी कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है। इसका असर 12 सितंबर से मध्य प्रदेश में दिखाई देने लगेगा। मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा के अनुसार फिलहाल प्रदेश में कोई सक्रिय सिस्टम नहीं है, इसलिए तेज बारिश का दौर थमा हुआ है।

    सैटेलाइट तस्वीरों में ज्यादातर हिस्से साफ
    मंगलवार को मौसम विभाग की नई सैटेलाइट तस्वीरों में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों से बादल छंटे नजर आए। भोपाल समेत कई जिलों में तेज धूप रही। हालांकि श्योपुर, उज्जैन, इंदौर, धार, खरगोन और बड़वानी में हल्की बारिश के साथ बादल छाए रहे।

    12 सितंबर को इन जिलों में भारी बारिश का अनुमान
    नए सिस्टम के सक्रिय होने के बाद 12 सितंबर को छतरपुर, पन्ना, दमोह और कटनी में भारी बारिश का अनुमान जताया गया है। इसके बाद प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।

    पूर्वी MP में बारिश का आंकड़ा सुधरा
    बारिश के आंकड़ों में पिछले एक सप्ताह में पूर्वी मध्य प्रदेश की स्थिति में सुधार आया है। जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में अब बारिश करीब 1 प्रतिशत तक कम है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 4% से 24% तक कम बारिश हुई है।

    पिछले सप्ताह कई जिलों में लगातार बारिश और बाढ़ जैसे हालात बनने से पूर्वी हिस्से का बारिश का आंकड़ा तेजी से सुधरा। सोमवार तक यह हिस्सा पहली बार सीजन में सामान्य से 1 प्रतिशत अधिक दर्ज किया गया था।

    पश्चिमी हिस्से में अब भी बारिश की कमी
    इसके उलट पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में बारिश का आंकड़ा अभी भी सामान्य से काफी नीचे है। आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 7% से 55% तक कम बारिश दर्ज की गई है।

    इन 23 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश
    IMD के आंकड़ों के मुताबिक अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में सामान्य से ज्यादा बारिश हुई है।

    प्रदेश में अब तक कुल 31.2 इंच बारिश दर्ज हो चुकी है। आने वाले दिनों में बंगाल की खाड़ी में बनने वाला कम दबाव का क्षेत्र बारिश के आंकड़ों में और सुधार ला सकता है।

  • इंटर्न डॉक्टर बोले- लिखित आदेश तक नहीं हटेंगे: भोपाल में सड़क पर डटे डॉक्टर, हमीदिया OPD बंद; इंदौर में भी प्रदर्शन

    इंटर्न डॉक्टर बोले- लिखित आदेश तक नहीं हटेंगे: भोपाल में सड़क पर डटे डॉक्टर, हमीदिया OPD बंद; इंदौर में भी प्रदर्शन


    भोपाल। मध्यप्रदेश में इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन दूसरे दिन भी जारी है। भोपाल में इंटर्न डॉक्टर रातभर कमला पार्क की सड़क पर धरने पर बैठे रहे और मंगलवार को दोबारा सड़क जाम कर दिया। आंदोलन का असर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी दिखाई देने लगा है। भोपाल के हमीदिया अस्पताल में ओपीडी पूरी तरह बंद रही, जबकि इंदौर के एमवाय अस्पताल में भी इंटर्न और रेजिडेंट डॉक्टरों ने विरोध प्रदर्शन किया। इमरजेंसी सेवाएं हालांकि जारी रखी गई हैं।

    इंटर्न डॉक्टर वर्तमान में मिलने वाले 14 हजार 337 रुपए के स्टाइपेंड को बढ़ाकर 30 हजार रुपए करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि मौजूदा स्टाइपेंड दूसरे राज्यों की तुलना में काफी कम है और वे लंबे समय से इसमें बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि वे अस्पतालों में लगातार ड्यूटी करते हैं और मरीजों की सेवा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उनके स्टाइपेंड में उचित बढ़ोतरी की जानी चाहिए।

    भोपाल में आंदोलन के कारण हमीदिया अस्पताल की ओपीडी पर सबसे ज्यादा असर पड़ा। अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों की लंबी कतारें लग गईं। रिपोर्ट के मुताबिक ओपीडी में 1500 से ज्यादा मरीज मौजूद थे। कई मरीज घंटों इंतजार करते रहे, लेकिन जूनियर डॉक्टरों के काम से हटने के बाद पर्चे बनाने और मरीजों को देखने की व्यवस्था प्रभावित हो गई। फिलहाल वरिष्ठ चिकित्सक और जीएमसी के प्रोफेसर मरीजों को देख रहे हैं। इमरजेंसी सेवाओं को चालू रखा गया है, ताकि गंभीर मरीजों को इलाज मिल सके।

    वहीं कमला पार्क क्षेत्र में प्रदर्शन के कारण यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हुई। सीएम हाउस की ओर जाने वाले रास्तों को पुलिस ने बैरिकेड लगाकर बंद कर दिया। पुराने शहर की ओर जाने वाले कई रास्तों पर आवाजाही प्रभावित हुई और रोशनपुरा से रॉयल मार्केट तक जाम की स्थिति बनी। पुलिस ने ट्रैफिक को डायवर्ट कर व्यवस्था संभालने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों का सड़क पर बैठना जारी रहने से आसपास के इलाकों में भी यातायात दबाव बढ़ गया।

    इससे पहले सोमवार को सीएम हाउस की ओर मार्च कर रहे इंटर्न डॉक्टरों को पुलिस ने रोक दिया था। इस दौरान पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। डॉक्टरों ने लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल के भी आरोप लगाए। पुलिस का कहना है कि इमरजेंसी गेट की ओर बढ़ने के दौरान धक्कामुक्की की स्थिति बनी जिसके बाद वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया। मामले को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गंभीरता से लेते हुए जांच के निर्देश दिए हैं।

    मंगलवार को डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने डॉक्टरों के प्रतिनिधियों और अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने कहा कि स्टाइपेंड बढ़ाने और प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई दोनों मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा हुई है। मुख्यमंत्री के लौटने के बाद स्टाइपेंड के मामले पर फिर बातचीत किए जाने की बात कही गई है।

    हालांकि इंटर्न डॉक्टर लिखित आदेश मिलने तक आंदोलन खत्म करने को तैयार नहीं हैं। उनकी दूसरी मांग प्रदर्शन के दौरान कार्रवाई करने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की है। डॉक्टरों का कहना है कि जब तक दोनों मांगों पर ठोस फैसला नहीं होता तब तक आंदोलन जारी रहेगा। इंदौर में भी भोपाल की घटना के विरोध में डॉक्टरों ने रैली निकालकर अपना समर्थन जताया है। ऐसे में सरकार और इंटर्न डॉक्टरों के बीच बातचीत के बावजूद स्वास्थ्य सेवाओं पर आंदोलन का असर फिलहाल जारी है।

  • MP में 31.1 इंच तक गिर चुका पानी, 12 जिले सामान्य से आगे, 4 दिन रीवा-शहडोल में होगी तेज बारिश

    MP में 31.1 इंच तक गिर चुका पानी, 12 जिले सामान्य से आगे, 4 दिन रीवा-शहडोल में होगी तेज बारिश


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून अब तक सीजन के सामान्य बारिश के कोटे का 83.5% पूरा कर चुका है। प्रदेश में औसतन 31.1 इंच यानी 790.8 मिमी बारिश दर्ज की गई है। भोपाल समेत 12 जिलों में बारिश सामान्य से अधिक है, जबकि 31 जिले अभी भी औसत से पीछे चल रहे हैं। अगले कुछ दिनों में बारिश का फोकस प्रदेश के पूर्वी हिस्से में रहने की संभावना है।

    12 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश

    अब तक सामान्य से अधिक बारिश वाले जिलों में भोपाल, राजगढ़, शिवपुरी, निवाड़ी, मैहर, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज और उमरिया शामिल हैं।

    वहीं उमरिया, अनूपपुर, आगर-मालवा, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, ग्वालियर, गुना, दतिया, खरगोन और बुरहानपुर में सामान्य बारिश का 90% से ज्यादा कोटा पूरा हो चुका है।

    पूर्वी MP में सबसे ज्यादा, पश्चिमी हिस्से में सबसे कम पानी

    पूरे मानसून सीजन में बारिश के लिहाज से प्रदेश के पूर्वी हिस्से की स्थिति बेहतर रही है। इसके उलट इंदौर-उज्जैन संभाग वाले पश्चिमी हिस्से में सबसे कम बारिश हुई है।

    जिलेवार आंकड़ों में मऊगंज सबसे आगे है, जहां अब तक करीब 53 इंच बारिश दर्ज की गई। वहीं आलीराजपुर में सबसे कम 13.6 इंच पानी गिरा है।

    11 सितंबर तक रीवा-शहडोल में बारिश

    मौसम केंद्र (IMD) भोपाल के मुताबिक, 11 सितंबर तक रीवा और शहडोल संभाग में तेज बारिश का दौर जारी रह सकता है। प्रदेश के बाकी हिस्सों में इस दौरान हल्की बारिश होने का अनुमान है।

    मौसम विभाग के अनुसार 12 सितंबर के बाद नया सिस्टम सक्रिय होने पर प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भी एक बार फिर बारिश का दौर शुरू हो सकता है।

    सामान्य से 2 इंच कम, कुल कमी 6%

    मध्य प्रदेश में इस मानसून सीजन में अब तक 790.8 मिमी यानी 31.1 इंच बारिश हो चुकी है। सामान्य तौर पर इस अवधि में 840.6 मिमी यानी 33.1 इंच बारिश होनी चाहिए थी। इस लिहाज से प्रदेश में अब तक करीब 2 इंच कम बारिश हुई है और ओवरऑल कमी 6% है।

    क्षेत्रवार देखें तो पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश सामान्य से 1% ज्यादा, जबकि पश्चिमी हिस्से में औसत से 12% कम पानी गिरा है।

    31 जिलों में 3% से 54% तक कमी

    प्रदेश के पूर्वी हिस्से में जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश करीब 1% तक कम है। वहीं बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 3% से 23% तक कम बारिश हुई है।

    हालांकि, पिछले एक सप्ताह में पूर्वी हिस्से के आंकड़ों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। इस दौरान कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बने, जिससे बारिश का आंकड़ा तेजी से बढ़ा। सीजन में पहली बार पूर्वी हिस्सा बारिश के मामले में सामान्य से आगे पहुंचा है और सोमवार तक यहां 1% ज्यादा बारिश दर्ज की गई।

    पश्चिमी हिस्से के कई जिले अब भी पीछे

    पश्चिमी मध्य प्रदेश में स्थिति अभी भी कमजोर है। आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य के मुकाबले 7% से 54% तक कम बारिश दर्ज की गई है।

  • निवेश के लिए मध्यप्रदेश बना देश का नया ग्रोथ हब : मुख्यमंत्री यादव

    निवेश के लिए मध्यप्रदेश बना देश का नया ग्रोथ हब : मुख्यमंत्री यादव


    भोपाल।
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश निवेश, उद्योग और रोजगार के नए केंद्र के रूप में तेजी से उभर रहा है। प्रदेश में फूड प्रोसेसिंग, वस्त्र, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा, ड्रोन, रक्षा और साइंस सिटी जैसे उभरते क्षेत्रों में निवेश की व्यापक संभावनाएं हैं। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र की स्थानीय क्षमता को चिन्हित कर उसे उद्योग, निवेश और रोजगार के अवसरों में बदला जाए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह बात दुबई प्रवास के पहले दिन मीडिया प्रतिनिधियों से संवाद के दौरान कही। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में व्यापार सुगमता के लिए किए गए सुधारों को मध्यप्रदेश में प्रभावी ढंग से लागू किया गया है। राज्य सरकार ने कई अप्रासंगिक कानून समाप्त किए हैं और 25 से अधिक नई नीतियां लागू की हैं। इन सुधारों से प्रदेश में उद्योग स्थापना की प्रक्रिया को गति मिली है और निवेशकों के लिए कारोबारी वातावरण बेहतर हुआ है।

    एमएसएमई क्षेत्र में 1.10 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। एमएसएमई क्षेत्र में 1 करोड़ 10 लाख से अधिक लोग कार्यरत हैं। राज्य में बड़े पैमाने पर उत्पादन हो रहा है और निर्यात के क्षेत्र में भी प्रदेश अपनी स्थिति लगातार मजबूत कर रहा है। वर्ष 2026-27 में मध्यप्रदेश से 76 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निर्यात हुआ है।

    उन्होंने कहा कि सरकार की व्यापार हितैषी नीतियों का उद्देश्य बड़े निवेश को आकर्षित करने के साथ स्थानीय उद्यमों को विस्तार के अवसर देना भी है। इसके लिए उद्योगों की स्थापना और संचालन के लिए आवश्यक सुविधाएं विकसित की गई हैं।

    कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा, ड्रोन और रक्षा क्षेत्र पर जोर

    डॉ. यादव ने कहा कि भविष्य की अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा, ड्रोन और रक्षा जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा रही है। रीवा, इंदौर और उज्जैन में तीन नए आईटी पार्क विकसित किए जा रहे हैं। इनके माध्यम से तकनीकी उद्योगों, स्टार्टअप और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार होंगे।

    प्रदेश में साइंस सिटी भी विकसित की जा रही है। इससे विज्ञान, तकनीक, नवाचार और नई पीढ़ी के कौशल विकास को बढ़ावा मिलेगा।

    भूमि, बिजली और पानी की पर्याप्त उपलब्धता

    मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्योगों के लिए आवश्यक बुनियादी संसाधनों के मामले में मध्यप्रदेश की स्थिति मजबूत है। प्रदेश के पास पर्याप्त भूमि और लैंड बैंक, अतिरिक्त बिजली तथा जल संसाधन उपलब्ध हैं। ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में भी राज्य तेजी से आगे बढ़ रहा है।

    उन्होंने कहा कि सस्ती बिजली, ग्रीन एनर्जी, पर्याप्त भूमि और पानी के साथ बेहतर आधारभूत ढांचा एवं परिवहन सुविधाएं प्रदेश को निवेश के लिए प्रतिस्पर्धी बनाती हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार मध्यप्रदेश में दुनिया की सबसे सस्ती बिजली बन रही है। इन सुविधाओं के कारण प्रदेश देशभर के निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना है।

    नीतिगत सुधारों का लाभ निवेशकों तक पहुंचा

    डॉ. यादव ने कहा कि सरकार ने केवल नीतियां बनाने पर जोर नहीं दिया, बल्कि उनके माध्यम से निवेशकों को मिलने वाले लाभ को जमीन पर उपलब्ध कराया है। व्यापार हितैषी नीतियों और आवश्यक सुविधाओं के कारण प्रदेश में बड़े उद्योगों की स्थापना को गति मिली है और निवेशकों का विश्वास बढ़ा है।

    रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के बाद जिला स्तर पर विस्तार

    मुख्यमंत्री ने कहा कि रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के माध्यम से प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में स्थानीय उद्योग और निवेश को बढ़ावा देने के अवसर मिले हैं। अब सरकार का ध्यान जिला स्तर पर औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार करने पर है।

    उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले और क्षेत्र के स्थानीय संसाधनों तथा क्षमताओं को चिन्हित कर उन्हें उद्योग, निवेश और रोजगार के अवसरों से जोड़ा जा रहा है। इससे औद्योगिक विकास बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जिलों और स्थानीय क्षेत्रों तक पहुंचेगा।

    शिक्षा और स्वास्थ्य को रोजगार से जोड़ने की तैयारी

    मुख्यमंत्री ने कहा कि निवेश के साथ कुशल मानव संसाधन तैयार करना भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से प्रदेश में शिक्षा को रोजगारोन्मुख बनाया जा रहा है। स्वास्थ्य क्षेत्र को भी मजबूत किया जा रहा है, जिससे बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के साथ इस क्षेत्र में निवेश और रोजगार की संभावनाएं बढ़ सकें।

    भोपाल-इंदौर से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें, चार नए हवाईअड्डों की तैयारी

    डॉ. यादव ने कहा कि निवेश और पर्यटन के विकास के लिए बेहतर हवाई संपर्क आवश्यक है। भोपाल और इंदौर से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन हो रहा है। प्रदेश में चार नए हवाईअड्डे विकसित करने की तैयारी है। ग्वालियर और जबलपुर भी हवाई संपर्क के लिहाज से तैयार हैं तथा भविष्य में यहां से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू करने की संभावनाएं हैं।

    उन्होंने कहा कि सड़क, रेल और हवाई संपर्क बेहतर होने से मध्यप्रदेश देश और दुनिया से तेजी से जुड़ रहा है। इसका लाभ उद्योग, व्यापार, निवेश और पर्यटन को मिल रहा है।

    महाकाल लोक के बाद पर्यटन में बढ़ी गतिविधियां

    मुख्यमंत्री ने कहा कि औद्योगिक निवेश के साथ मध्यप्रदेश पर्यटन के क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। महाकाल लोक के निर्माण के बाद उज्जैन में श्रद्धालुओं की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष मध्यप्रदेश में करीब 14 करोड़ बाहरी पर्यटकों का आगमन हुआ है।

    पर्यटन के विस्तार से होटल, परिवहन, खान-पान, हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पाद, फूड प्रोसेसिंग और सेवा क्षेत्र में रोजगार एवं निवेश के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।

    स्थानीय क्षमता को निवेश और रोजगार में बदलने का लक्ष्य

    मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में फूड प्रोसेसिंग, वस्त्र, सूचना प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा, ड्रोन, रक्षा और पर्यटन सहित विभिन्न क्षेत्रों में निवेश की व्यापक संभावनाएं हैं। पर्याप्त भूमि, बिजली, पानी, ग्रीन एनर्जी, लैंड बैंक, बेहतर आधारभूत ढांचा और विकसित हो रही हवाई कनेक्टिविटी प्रदेश की प्रमुख ताकत हैं।

    उन्होंने कहा कि सरकार ने नीतिगत सुधारों के साथ ऐसा निवेश वातावरण तैयार किया है, जिसमें स्थानीय संसाधनों और संभावनाओं को उद्योगों से जोड़ा जा रहा है। प्रदेश का लक्ष्य स्पष्ट है कि स्थानीय क्षमता को निवेश, निवेश को उत्पादन और उत्पादन को रोजगार में परिवर्तित किया जाए।

  • MP: सागर-रीवा संभाग के 6 जिलों में आज भारी बारिश का अलर्ट, 4 दिन सक्रिय रहेंगे मानसूनी सिस्टम

    MP: सागर-रीवा संभाग के 6 जिलों में आज भारी बारिश का अलर्ट, 4 दिन सक्रिय रहेंगे मानसूनी सिस्टम


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय है। प्रदेश के ऊपरी हिस्से में दो मौसम प्रणालियां बनी हुई हैं, जिनके प्रभाव से अगले चार दिन तक बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है। सोमवार को सागर और रीवा संभाग के 6 जिलों में भारी बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। वहीं मालवा-निमाड़ क्षेत्र यानी इंदौर और उज्जैन संभाग में हल्की बारिश होने की संभावना है।

    मौसम केंद्र (IMD) भोपाल के मुताबिक, अगले 24 घंटे के दौरान निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना और रीवा में भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर और दमोह में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश होने का अनुमान है।

    कलियासोत बांध के फिर खोले गए गेट

    प्रदेश के कई हिस्सों में रविवार को भी तेज बारिश हुई। भोपाल में कलियासोत बांध के दो गेट दोबारा खोलने पड़े। इससे एक दिन पहले शनिवार रात करीब 11 बजे बांध के चार गेट खोले गए थे। पानी छोड़े जाने के बाद रात 12 बजे इन्हें एक-एक करके बंद कर दिया गया था।

    उज्जैन में बारिश के चलते शनिवार देर रात महाकाल मंदिर से रामघाट जाने वाले मार्ग पर स्थित ऐतिहासिक महाकाल द्वार गिर गया।

    शिवपुरी जिले के सिकराऊदा गांव के 21 वर्षीय राम रावत का शव गहलोनी के पास नदी किनारे मिला। वह शुक्रवार को रपटा पार करते समय तेज बहाव में बह गया था। शनिवार को SDERF की टीम ने पूरे दिन सर्च ऑपरेशन चलाया था, लेकिन युवक का पता नहीं चल पाया था। रविवार को नदी का जलस्तर घटने पर ग्रामीणों को उसका शव दिखाई दिया।

    खेतों में पानी भरा, सड़क पर पुल डूबा

    शाजापुर के अकोदिया में बारिश का सिलसिला कभी धीमा तो कभी तेज रहा। खेतों में पानी भरने से सोयाबीन की फसल को नुकसान की आशंका जताई जा रही है।

    मुरैना के कैलारस में भी बारिश के बाद खेरली-पचोखरा रोड पर स्थित गुराह नाले का पुल पानी में डूब गया। जरूरी काम से आने-जाने वाले लोगों ने नाला पार करने के लिए बड़ी कढ़ाही जैसे बर्तन का सहारा लिया। वे इसमें बैठकर रस्सी के सहारे नाले के एक किनारे से दूसरे किनारे तक पहुंच रहे हैं।

    23 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश

    IMD के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश के 23 जिलों में अब तक औसत से अधिक बारिश दर्ज की गई है। इनमें अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मंडला, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी शामिल हैं।

    32 जिलों में सामान्य से 2% से 23% तक कम बारिश

    प्रदेश के पूर्वी हिस्से में जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश 1% तक कम दर्ज की गई है। वहीं बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 2% से 23% तक कम बारिश हुई है।

    हालांकि पिछले एक सप्ताह में बारिश के आंकड़ों में काफी सुधार हुआ है। इस दौरान पूर्वी मध्य प्रदेश के कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बने, जिससे बारिश का आंकड़ा ऊपर आया। सीजन में पहली बार पूर्वी हिस्सा आंकड़ों के लिहाज से बेहतर स्थिति में पहुंचा है और यहां बारिश का आंकड़ा 2% ज्यादा हो गया है।

    इसके उलट पश्चिमी मध्य प्रदेश के आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 1% से 54% तक कम बारिश दर्ज की गई है।

  • निशान और भव्य झांकियों के साथ निकला गोगादेव महाराज का चल समारोह, दर्शन को उमड़े श्रद्धालु

    निशान और भव्य झांकियों के साथ निकला गोगादेव महाराज का चल समारोह, दर्शन को उमड़े श्रद्धालु


    देवास । देवास में गोगा नवमी के अवसर पर शनिवार रात लोक आराध्य जाहरवीर गोगादेव महाराज के सम्मान में भव्य चल समारोह निकाला गया। धार्मिक आस्था और उत्साह से भरे इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और समाजजन शामिल हुए। पूरे मार्ग पर गोगादेव महाराज के जयकारों से माहौल भक्तिमय नजर आया। समारोह में पारंपरिक निशानों के साथ कई आकर्षक झांकियां शामिल की गईं जिन्हें देखने के लिए शहर के अलग अलग हिस्सों से लोग पहुंचे।

    चल समारोह का आयोजन वाल्मीकि समाज छोटी पाती देवास की ओर से किया गया। आयोजन की शुरुआत उज्जैन रोड स्थित गुरु गोरखनाथ मंदिर से हुई। यहां से श्रद्धालुओं और समाजजनों के साथ चल समारोह शहर के प्रमुख मार्गों की ओर रवाना हुआ। जुलूस के आगे और पीछे बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। जैसे जैसे समारोह शहर के बीच पहुंचा वैसे वैसे झांकियों के दर्शन करने के लिए लोगों की भीड़ बढ़ती गई।

    इस दौरान माता बाछल की गोद में बाल स्वरूप में विराजित वीर गोगादेव महाराज की झांकी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। झांकी में गोगादेव महाराज के बाल स्वरूप को बेहद मनमोहक तरीके से प्रस्तुत किया गया था। माता बाछल की गोद में विराजित बाल गोगादेव की छवि देखकर श्रद्धालु भावविभोर नजर आए। बड़ी संख्या में लोगों ने झांकी के दर्शन किए और गोगादेव महाराज से सुख समृद्धि की कामना की।

    चल समारोह में भगवान सांवलिया सेठ की झांकी भी शामिल की गई थी। इस झांकी ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया। शहर के जिन जिन मार्गों से समारोह गुजरा वहां श्रद्धालु पहले से ही झांकियों के स्वागत और दर्शन के लिए मौजूद रहे। कई स्थानों पर लोगों ने धार्मिक भाव के साथ चल समारोह का स्वागत किया। गोगादेव महाराज के जयकारों और भक्ति गीतों के बीच पूरा वातावरण उत्सवमय बना रहा।

    गोगादेव महाराज को लोक आस्था में जाहरवीर के नाम से भी जाना जाता है। गोगा नवमी के अवसर पर देश के कई हिस्सों में उनकी पूजा और धार्मिक आयोजन किए जाते हैं। देवास में भी इस परंपरा के तहत हर वर्ष श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिलता है। इस बार भी चल समारोह में समाज के लोगों के साथ अन्य धर्मप्रेमी नागरिकों ने भाग लेकर आयोजन को भव्यता प्रदान की।

    गुरु गोरखनाथ मंदिर से शुरू हुआ यह चल समारोह एमजी रोड सहित शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए देर रात मीठा तालाब पहुंचा। यहां धार्मिक उत्साह के बीच समारोह का समापन किया गया। पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं की मौजूदगी और झांकियों की भव्यता ने गोगा नवमी के पर्व को खास बना दिया। माता बाछल की गोद में बाल गोगादेव की झांकी विशेष रूप से लोगों के बीच चर्चा का विषय रही और श्रद्धालु बड़ी संख्या में इसके दर्शन के लिए जुटे।