सीजेआई सूर्यकांत ने ब्रिक्स देशों में कारोबारी विवाद निपटाने के लिए मध्यस्थता और सुलह का साझा मंच बनाने का प्रस्ताव दिया

नई दिल्ली ।ब्रिक्स देशों के बीच न्यायिक सहयोग को मजबूत करने और व्यापार तथा निवेश के लिए बेहतर वातावरण तैयार करने की दिशा में भारत ने महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने ब्रिक्स चीफ जस्टिस फोरम में वाणिज्यिक विवादों के समाधान के लिए मध्यस्थता और सुलह का साझा मंच बनाने की जरूरत बताई।

शुक्रवार को आयोजित फोरम में ब्रिक्स सदस्य देशों के साथ सहयोगी देशों के मुख्य न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट के अध्यक्ष और वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी शामिल हुए। सम्मेलन के दौरान न्यायपालिका की भूमिका को केवल अदालती मामलों के निपटारे तक सीमित रखने के बजाय देशों के बीच सहयोग और आपसी संबंधों को मजबूत करने के व्यापक माध्यम के रूप में देखने पर जोर दिया गया।

जस्टिस सूर्यकांत ने फोरम के दौरान विभिन्न देशों के न्यायिक प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी कीं। इन बैठकों में न्यायिक सहयोग से जुड़े समझौतों, व्यापारिक और कॉरपोरेट विवादों के समाधान तथा मध्यस्थता और सुलह-समझौते जैसे वैकल्पिक विवाद निपटारा तरीकों पर चर्चा हुई।

वाणिज्यिक गतिविधियों के बढ़ते अंतरराष्ट्रीय स्वरूप को देखते हुए अलग-अलग देशों की न्यायिक व्यवस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सीमा पार कारोबार में विवाद उत्पन्न होने पर उनके शीघ्र और प्रभावी समाधान से कंपनियों तथा निवेशकों का भरोसा बढ़ सकता है। इसी संदर्भ में साझा मध्यस्थता और सुलह मंच का प्रस्ताव महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

फोरम में विदेशी निवेशकों के विश्वास को मजबूत करने के लिए कुशल वाणिज्यिक अदालतों की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। कारोबार से जुड़े विवादों का समयबद्ध निपटारा निवेश के लिए अनुकूल वातावरण बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसके साथ ही विभिन्न देशों में दिए गए न्यायिक फैसलों और आदेशों को आपसी स्तर पर मान्यता देने की संभावनाओं पर भी विचार किया गया।

बैठकों में न्यायिक सहयोग को संस्थागत रूप देने के लिए समझौता ज्ञापनों की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। इसका उद्देश्य न्यायिक संस्थानों के बीच संवाद और अनुभव साझा करने की प्रक्रिया को मजबूत करना है। न्यायिक अधिकारियों के बीच नियमित संपर्क से अलग-अलग देशों की कानूनी व्यवस्थाओं और विवाद समाधान प्रक्रियाओं को समझने में मदद मिल सकती है।

फोरम के दौरान प्रोफेशनल एक्सचेंज कार्यक्रमों को बढ़ावा देने का मुद्दा भी सामने आया। इसके लिए भोपाल स्थित नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी जैसे संस्थानों के इस्तेमाल की संभावनाओं पर चर्चा हुई। ऐसे कार्यक्रमों के जरिए विभिन्न देशों के न्यायिक अधिकारियों को प्रशिक्षण, अनुभव और कार्यप्रणाली साझा करने का अवसर मिल सकता है।

ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार और निवेश लगातार सहयोग का प्रमुख क्षेत्र रहा है। ऐसे में कारोबारी विवादों के निपटारे के लिए प्रभावी न्यायिक तंत्र आर्थिक संबंधों को सुगम बनाने में मदद कर सकता है। मध्यस्थता और सुलह जैसे तरीकों से लंबे समय तक चलने वाली अदालती प्रक्रिया के विकल्प उपलब्ध हो सकते हैं।

तीन दिवसीय सम्मेलन के पहले दिन जस्टिस सूर्यकांत ने रूस, चीन, मिस्र, इंडोनेशिया, संयुक्त अरब अमीरात, दक्षिण अफ्रीका, बेलारूस, कजाकिस्तान, ईरान और उज्बेकिस्तान के न्यायिक अधिकारियों से मुलाकात की। इन बैठकों में न्यायिक सहयोग के साथ व्यापार, कॉरपोरेट विवाद और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए अनुकूल वातावरण जैसे विषय प्रमुख रहे।

फोरम के प्रस्तावों का व्यापक उद्देश्य ब्रिक्स देशों की न्यायिक व्यवस्थाओं के बीच सहयोग बढ़ाना और कारोबारी संबंधों को अधिक भरोसेमंद कानूनी आधार देना है। साझा विवाद समाधान व्यवस्था पर आगे की चर्चा से विभिन्न देशों के बीच व्यापारिक विवादों के निपटारे की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने की दिशा में रास्ता खुल सकता है।