शेयर बाजार पर दोहरा संकट: कच्चा तेल 100 डॉलर के पार, सेंसेक्स-निफ्टी में भारी गिरावट के बाद 10 सितंबर को भी बढ़ सकती है हलचल


नई दिल्ली । 10 सितंबर को भारतीय शेयर बाजार की नजर एक बार फिर वैश्विक संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों पर रहेगी। बीते कारोबारी सत्र में घरेलू बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली और सेंसेक्स तथा निफ्टी लगातार तीसरे सत्र में गिरावट के साथ तीन महीने के निचले स्तर पर पहुंच गए। 9 सितंबर को सेंसेक्स 813.35 अंक यानी 1.08 प्रतिशत गिरकर 74764.23 पर बंद हुआ जबकि निफ्टी 203.60 अंक यानी 0.86 प्रतिशत फिसलकर 23431.50 पर आ गया।

बाजार में इस समय सबसे बड़ा दबाव पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों से बन रहा है। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंचने से निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है इसलिए तेल की कीमतों में तेजी का असर महंगाई से लेकर कंपनियों की लागत और रुपये की मजबूती तक दिखाई दे सकता है। यही वजह है कि निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बचते नजर आ रहे हैं।

9 सितंबर के कारोबार में आईटी शेयरों पर खास दबाव देखने को मिला। टेक्नोलॉजी इंडेक्स में करीब 3.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई और कई बड़ी आईटी कंपनियों के शेयर कमजोर रहे। टीसीएस में भी गिरावट दर्ज की गई जबकि एचसीएल टेक और अन्य प्रमुख आईटी शेयरों में बिकवाली ने बाजार की कमजोरी को और बढ़ाया। दूसरी तरफ मेटल और कुछ ऊर्जा शेयरों में मजबूती देखने को मिली। इससे साफ है कि बाजार में इस समय एकतरफा तेजी के बजाय सेक्टर के हिसाब से अलग अलग रुझान दिखाई दे रहे हैं।

10 सितंबर के कारोबार में निवेशकों की नजर रुपये की चाल पर भी रहेगी। 9 सितंबर को भारतीय मुद्रा डॉलर के मुकाबले 95 के स्तर के पार चली गई थी। रुपये में कमजोरी और महंगे कच्चे तेल का दबाव बाजार के लिए दोहरी चुनौती बन सकता है। अगर तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और रुपये पर दबाव जारी रहता है तो विदेशी निवेशकों की धारणा पर भी असर पड़ सकता है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी ने गिरावट को कुछ हद तक संभालने की कोशिश की है। 9 सितंबर को विदेशी निवेशकों ने करीब 123 करोड़ रुपये की इक्विटी बेची जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने लगभग 1350 करोड़ रुपये की खरीदारी की। इससे संकेत मिलता है कि घरेलू निवेशक बाजार में कमजोरी को कुछ अवसर के रूप में देख रहे हैं लेकिन वैश्विक अनिश्चितता के कारण सतर्कता अभी भी जरूरी है।

निवेशकों के लिए 10 सितंबर का कारोबारी सत्र इसलिए भी अहम रहेगा क्योंकि निफ्टी तीन महीने के निचले स्तर के करीब पहुंच चुका है। ऐसे माहौल में बाजार में अचानक तेज उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है। कारोबारियों की नजर निफ्टी के 23400 के आसपास के स्तर पर रहेगी और इसके नीचे कमजोरी बढ़ने पर और दबाव बन सकता है। वहीं अगर बाजार इस स्तर से संभलता है तो निचले स्तरों पर खरीदारी लौटने की उम्मीद बन सकती है।

फिलहाल बाजार की दिशा किसी एक घरेलू खबर से ज्यादा वैश्विक घटनाक्रम तय कर सकता है। कच्चे तेल की कीमत पश्चिम एशिया का तनाव अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर संकेत रुपये की चाल और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां 10 सितंबर के कारोबार के प्रमुख ट्रिगर रहेंगे। ऐसे समय में छोटे निवेशकों के लिए जल्दबाजी में ट्रेडिंग करने के बजाय अपने जोखिम और निवेश अवधि को ध्यान में रखना जरूरी होगा। शेयर बाजार में तेजी या गिरावट का अनुमान हमेशा निश्चित नहीं होता इसलिए किसी भी निवेश निर्णय से पहले कंपनी के फंडामेंटल और अपनी जोखिम क्षमता को देखना महत्वपूर्ण है।